Home Blog Page 2467

‘वो लोग हमारी चुप्पी का फायदा उठा रहे, बहुत बर्दाश्त किया’: बॉलीवुड के बॉयकॉट पर भड़के अर्जुन कपूर, पब्लिक को ही धमकाया

सोशल मीडिया पर बॉलीवुड फिल्मों के बहिष्कार का चलन काफी जोर पकड़ रहा था। रिलीज से पहले ही दर्शकों का एक वर्ग उन अभिनेताओं की फिल्मों को टारगेट कर रहा है जिन्हें देश में डर लगता था या जो बहुसंख्यक हिन्दुओं के खिलाफ बयानबाजी करते थे। लोग फिल्म या उसमें मौजूद कलाकारों के पूर्ण बहिष्कार की माँग कर रहे हैं। हाल ही में लाल सिंह चड्ढा और रक्षा बंधन जैसी फिल्मों का दर्शकों ने वो हाल किया कि आमिर खान अभी सदमें में बताए जा रहे हैं। वहीं अब अर्जुन कपूर इस बायकॉट के इस ट्रेंड से भड़के हुए हैं। उन्होंने कहा इस ट्रेंड को खत्म करने के लिए इंडस्ट्री के लोगों को एक साथ आने की जरूरत है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अर्जुन कपूर ने एक हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में कहा, “मुझे लगता है कि हमने बायकॉट के बारे में चुप रहकर गलती की और यह हमारी शालीनता थी लेकिन लोगों ने इसका फायदा उठाना शुरू कर दिया है। मुझे लगता है कि हमने यह सोचकर गलती की है कि ‘हमारा काम खुद बोलेगा’। आप जानते हैं कि आपको हमेशा अपना हाथ गंदा करने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन मुझे लगता है कि हमने इसे बहुत सहन किया और अब लोगों ने इसे एक आदत बना लिया है।”

अर्जुन ने आगे कहा, “अब इंडस्ट्री के लोगों को एक साथ आने और इसके बारे में खुलकर बात करने की जरूरत है। क्योंकि लोग उनके बारे में क्या लिखते हैं, वो सच्चाई से बहुत दूर होता है। जब हम ऐसी फिल्में करते हैं, जो बॉक्स ऑफिस पर अच्छा परफॉर्म करती हैं, तो उस समय लोग उन्हें हमारे नाम की वजह से नहीं बल्कि फिल्म की वजह से पसंद करते हैं। हालाँकि, यह अब बहुत ज्यादा हो रहा है और यह गलत है।”

अर्जुन कपूर ने कहा, “सीधे फिल्म का बहिष्कार करना या कुछ भी बोल देना बिल्कुल भी सही नहीं है, ये सिर्फ बात का बतंगड़ बनाने वाली बात है। कम से कम फिल्म के बारे में सुनकर ये तो देख लीजिए कि सारी चीजें सही तरीके से प्रस्तुत हुई हैं या नहीं बेवजह बात को तूल देना और नकारात्मकता डालना सही नहीं है। क्योंकि सैकड़ों लोगों ने यह फिल्म बनाई है, इसलिए फिल्म देखिए और कॉन्टेक्स्ट पर जाइए।”

अर्जुन कपूर ने कहा, “लोगों को शायद ये पता भी नहीं होता है कि आखिर बायकॉट हो क्यों रहा है, लेकिन बातें चालू हो जाती हैं तो लोग उसमें बह जाते हैं। अंधों की तरीके से बहने से बेहतर है कि फिल्म देखें, अपने विचार रखें और तब आगे की चीजें तय करें। उन्होंने ये भी कहा कि आजकल बायकॉट करना एक ट्रेंड सा बन गया है।

गौरतलब है कि अर्जुन कपूर हाल ही में मोहित सूरी की फिल्म ‘एक विलेन 2’ में नजर आए थे। इस फिल्म में अर्जुन के साथ जॉन अब्राहम, दिशा पाटनी और तारा सुतारिया भी थे। ये फिल्म साल 2014 में आई फिल्म ‘एक विलेन’ का दूसरा पार्ट है। हालाँकि, यह फिल्म भी बॉक्स ऑफिस पर पिट गई थी।

योगी सरकार ने बदला अंग्रेजों का जेल कानून: अब करवाचौथ और छठ मनेगी, हिंदू त्योहारों पर कैदियों के लिए खीर

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) की अध्यक्षता में मंगलवार (16 अगस्त, 2022) को कैबिनेट की बैठक सम्पन्न हुई। योगी सरकार ने बैठक में ब्रिटिश काल (British Period Jail Manual) के जेल मैनुअल से आजादी लेने का फैसला लिया है। इस क्रम में उत्तर प्रदेश में नए जेल मैनुअल (Jail Manual) को मंजूरी दे दी गई है। अब नई जेल में हिंदुओं के लिए खीर बनेगी और मियां को खजूर मिलेंगे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, योगी आदित्यनाथ कैबिनेट ने 16 प्रस्तावों को हरी झंडी दे दी है। इससे अंग्रेजों के जमाने से जेल मैनुअल को लेकर चले आ रहे कानूनों में बदलाव किया जाएगा। यह जेल मैनुअल 1941 में बना था। नए जेल मैनुअल के तहत जेल कर्मियों को 303 रायफल की जगह 9 एमएम की पिस्टल मिलेगी। इसके अलावा, लॉकअप जेल की व्यवस्था भी होगी।

वहीं, कैबिनेट बैठक के बाद कारागार मंत्री धर्मवीर प्रजापति ने कहा कि आज हुई बैठक में अंग्रेजों के समय के जेल मैनुअल में बदलाव किया गया है। कारागार मंत्री के मुताबिक, आज जो प्रस्ताव पास किए गए हैं, उसके अनुसार नए जेल मैनुअल के तहत प्रदेश की जेलों को 4 श्रेणियों में बाँटा गया है। इसके तहत अब महिला बंदियों को जेल में मंगलसूत्र और सलवार-सूट पहनने की अनुमति होगी। जेल में बंदियों को खीर, गुड़ और खजूर भी मिलेगा। कुख्यात बंदियों के लिए उच्च सुरक्षा कारागार बनाया गया है। इसके अलावा कारागार में जन्मे बच्चों का जेल में ही नामकरण संस्कार होगा। यही नहीं माँ या पिता के साथ-साथ जेल में रहने वाले बच्चों के लिए चिल्ड्रन पार्क भी बनेगा।

बता दें कि नए मैनुअल में महिला बंदियों को करवा चौथ, छठ और तीज का व्रत रखने की अनुमति भी होगी। महिला बंदियों को नारियल का तेल और शैम्पू भी दिया जाएगा। बंदी कैंटीन का प्रावधान और कैंटीन के 10 प्रतिशत लाभांश से बंदी कल्याणकारी कोष की स्थापना की जाएगी। कारागार मुख्यालय में सूचना एवं प्रौद्दोगिकी प्रकोष्ठ बनाया जाएगा। इन सबके अलावा बंदियों को स्वस्थ और फिट रखने के लिए कारागार के अंदर योग और व्यायाम की व्यवस्था भी की जाएगी।

पाकिस्तान में शामिल हो रहा था केरल का यह हिस्सा, कुल्हाड़ी से हमले ने बदली राज्य की तकदीर: कहानी गाँधी को ‘सेक्स का बावला’ बताने वाले दीवान की

स्वतंत्रता से पहले जब भारत के बँटवारे और पाकिस्तान के रूप में एक नए मुल्क के निर्माण की बात की जा रही थी, तब कुछ ऐसी रियासतें थीं, जिनकी सीमा पाकिस्तान के साथ न जुड़ने के बाद भी वहाँ के हुक्मरान पाकिस्तान के साथ ही जाना चाहते थे। साथ ही, कुछ ऐसी रियासतें थीं, जो न तो भारत और न ही पाकिस्तान में शामिल होना चाहती थीं। सीधे शब्दों में कहें तो ये रियासतें स्वतंत्र रहना चाहती थीं। इन्हीं रियासतों में से एक थी त्रावणकोर रियासत।

त्रावणकोर केरल की राजधानी तिरुअनंतपुरम से करीब 180 किमी की दूरी पर स्थित है। भारत की स्वतंत्रता और उसमें देश की तमाम रियासतों के विलय के बारे में जब बात होती है तो कश्मीर, हैदराबाद और यहाँ तक कि जूनागढ़ जैसी छोटी रियासत के जिक्र के बीच त्रावणकोर कहीं न कहीं पीछे रह जाता है। इसका सबसे बड़ा कारण एक 25 वर्षीय युवक द्वारा त्रावणकोर के दीवान, सी पी रामास्वामी अय्यर की हत्या का प्रयास है।

अलग देश बनाना चाहते थे त्रावणकोर के दीवान

दरअसल, त्रावणकोर के दीवान सी पी रामास्वामी अय्यर जिन्हें सामान्यतः सीपी के नाम से जाना जाता था, वह भारतीय गणतंत्र में शामिल नहीं होना चाहते थे। अर्थात, उनकी महत्वाकांक्षा एक अलग देश बनाने की थी। इसके लिए उन्होंने मोहम्मद अली जिन्ना के साथ एक संधि भी कर रखी थी।

इतिहासकार ऐसा मानते हैं कि सीपी को डर था कि भारत जवाबी कार्रवाई करते हुए त्रावणकोर पर आर्थिक प्रतिबंध लगा सकता है। इसलिए, उन्होंने कवर के तौर पर जिन्ना से व्यापारिक समझौता की बात की थी।

भारतीय नेताओं की इज्जत नहीं करते थे दीवान सीपी रामास्वामी

22 जुलाई, 1947 को भारत के अंतिम वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन ने सीपी के साथ हुई की मीटिंग के बाद कहा था, “सीपी के मन में भारतीय नेताओं के लिए एक भी इज्जत नहीं है। सीपी ने माउंटबेटन को कहा था कि गाँधी ‘सेक्स का बावला (Sex Maniac)’ हैं जो युवा लड़कियों से हाथ नहीं हटा सकते और जवाहरलाल नेहरू ‘अस्थिर’ हैं।”

अलग देश बनाने की थी मंशा

गौरतलब है कि, 18 फरवरी 1947 को ब्रिटिश प्रधानमंत्री क्लेमेंट एटली भारत को सत्ता हस्तांतरित करने की घोषणा कर चुके थे। इसके बाद, 3 जून को भारत और पाकिस्तान को सत्ता हस्तांतरण के प्रस्तावों को सार्वजनिक किया गया था। इस प्रस्ताव में करीब 500 रियासतों को मुक्त छोड़ दिया गया था।

इसका सीधा अर्थ यह था कि ये रियासतें न तो भारत का हिस्सा हैं और न ही पाकिस्तान का। हालाँकि, इस प्रस्ताव में यह जोड़ा गया था कि इन रियासतों से अब ‘मुकुट की सर्वोच्चता’ समाप्त हो जाएगी यानी इन रियासतों में भी अब राजतंत्र नहीं रह जाएगा।

इस घोषणा के ठीक बाद 11 जून को ही, सीपी ने घोषणा करते हुए कहा इस प्रस्ताव के साथ, जिस दिन ब्रिटेन भारत की सत्ता छोड़ेगा त्रावणकोर एक स्वतंत्र देश बन जाएगा। सीपी की घोषणा के एक हफ्ते बाद यानी 18 जून को त्रावणकोर राजा चिथिरा थिरुनल बलराम वर्मा ने रात 8:45 पर त्रिवेंद्रम रेडियो स्टेशन अपनी ‘स्वतंत्रता’ की घोषणा की। इस घोषणा में उन्होंने कहा, “15 अगस्त, 1947 को त्रावणकोर पूरी तरह से अपनी स्वतंत्रता और संप्रभुता को फिर से हासिल कर लेगा।”

तैयार की थी पूरी प्लानिंग

ऐसा बिल्कुल नहीं था कि ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एटली की घोषणा के तुरंत बाद ही त्रावणकोर के दीवान या राजा ने स्वतंत्र राष्ट्र का स्वप्न देखा था। बल्कि, इसकी पूरी तरह से प्लानिंग की गई थी।

मोहम्मद अली जिन्ना से लेकर अन्य बड़े देशों के साथ त्रावणकोर द्वारा गुप्त समझौते करना यह दर्शाता है कि सब कुछ सोच समझकर किया जा रहा था। यदि इसे यह कहा जाए कि त्रावणकोर ने खुद को एक बड़े शक्तिशाली देश के रूप में प्रस्तुत करने की योजना बनाई थी तो गलत नहीं होगा।

मोनाजाइट के दम पर उछल रहा था त्रावणकोर

यह सवाल हर किसी के मन में उठ रहा होगा कि त्रावणकोर खुद को बड़े शक्तिशाली देश के रूप में कैसे प्रस्तुत कर सकता था। जबकि, त्रावणकोर न तो आर्थिक रूप से सम्पन्न था और न ही उसका क्षेत्रफल इतना अधिक था। इसका सीधा सा जवाब है जवाब है त्रावणकोर के पास मोनाजाइट था।

मोनाजाइट एक ऐसा पदार्थ है जिसमें थोरियम पाया जाता है, जिसक उपयोग परमाणु बम बनाने में किया जाता है। 40 के दशक में ही मोनाजाइट को अमेरिका, सोवियत संघ (रूस) जैसे देशों द्वारा बहुत उपयोगी बता दिया गया था।

तत्कालीन स्थितियों में त्रावणकोर दुनिया में मोनाजाइट के सबसे बड़े आपूर्तिकर्ताओं में से एक था। सबसे बड़ी बात यह थी कि मोनाजाइट के दूसरे बड़े उत्पादक ब्राजील की तुलना में त्रावणकोर का मोनाजाइट कहीं अधिक बेहतर था।

वह ऐसा दौर था जब पूरी दुनिया परमाणु क्रांति की अंधी दौड़ में भागने को तैयार थी। त्रावणकोर के दीवान सीपी को यह आभास हो गया था कि वह दुनिया के सबसे ‘कीमती’ खजाने पर बैठे हुए हैं। वह जानता था कि दुनिया परमाणु क्रांति के दौर में प्रवेश कर रही है। अमेरिका द्वारा नागासाकी और हिरोशिमा में परमाणु हमला करने के बाद सीपी ने त्रावणकोर के राजा को पत्र लिखते हुए कहा था “अगर थोरियम का उपयोग परमाणु बम के निर्माण के लिए किया जाता है तो त्रावणकोर का स्थान पूरी दुनिया में ऊँचाई पर होगा।”

त्रावणकोर के दीवान ने नहीं की किसी की परवाह

हालाँकि, त्रावणकोर और वहाँ के दीवान सीपी की यह चाल सबके सामने आ गई। इसके बाद, अप्रैल 1947 में भारत की अंतरिम सरकार की एक कैबिनेट बैठक में कथित तौर पर जब नेहरू ने यह कहा कि वह त्रावणकोर पर हवाई हमले कर सकते हैं। तब सीपी ने भारतीय नेताओं की परवाह नहीं की। क्योंकि, उन्होंने यह मान लिया था कि जब तक उनके पास मोनाजाइट है, अंग्रेज उसकी बोली लगाते रहेंगे।

‘ओ मनोरमा’ में प्रकाशित लेख के अनुसार, एक ओर जहाँ दीवान की महत्वाकांक्षा बढ़ती जा रही थी, वहीं दूसरी ओर उसके प्रति जनता का आक्रोश भी बढ़ता जा रहा था। जनता के इस आक्रोश का सबसे बड़ा कारण अक्टूबर 1946 में, पुन्नपरा-वायलार विद्रोह में सीपी द्वारा लगभग लोगों की निर्मम हत्या करवाया जाना था।

विद्रोहियों ने बनाई दीवान से बदला लेने की योजना

चूँकि त्रावणकोर के दीवान सी पी रामास्वामी अय्यर ने विद्रोह को क्रूरतापूर्ण तरीके से कुचल दिया था, इसलिए विद्रोहियों के एक गुट ने दीवान से बदला लेने का निश्चय किया और इसका काम सौंपा गया 25 वर्ष के एक युवक सी एस मणि को।

हुआ कुछ यूँ कि स्थानीय संगीत महाविद्यालय में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। वहाँ बिना पास के प्रवेश की अनुमति नहीं थी। लेकिन, सी एस मणि ने बेहद चालाकी से पास हासिल कर लिया था। इसके बाद, योजनाबद्ध तरीके से उसने कपड़ों के नीचे माचे (स्थानीय हथियार जिसका उपयोग छोटे पेड़ों को काटने में किया जाता है) व एक कुल्हाड़ी छिपा ली थी।

इस कार्यक्रम में दीवान सीपी भी पहुँचे और जैसे ही कार्यक्रम समाप्त हुआ, दीवान पुलिस को साथ में लेकर हॉल की तरफ निकल गए। मणि अब भी हॉल के बाईं छोर पर बैठा था, जहाँ से दीवान को बाहर निकलना था। दीवान के पास आते ही मणि अपनी जगह पर खड़ा हो गया।

इससे पहले कि मणि माचे निकालता उसे यह समझ में आ गया कि यह कपड़ों में कहीं फँस गया है। इसलिए, उसने कुल्हाड़ी निकाल ली और गुस्साए भेड़िए की तरह दीवान पर टूट पड़ा। इसके बाद, उसने अंधाधुंध तरीके से दीवान पर वार किए। हालाँकि, आसपास खड़े लोगों और वहाँ मौजूद पुलिस ने मणि को पकड़ने का प्रयास किया, लेकिन तभी लाइट चली गई और मणि भाग खड़ा हुआ।

दीवान के चेहरे और और गर्दन पर गहरे घाव हो गए थे। हालाँकि, उनकी जान बच गई थी। इसलिए, 28 जुलाई को जब वह थोड़ा ठीक हो गए तो उन्होंने राजा को अपने अस्पताल के बिस्तर से एक पत्र लिखा।

इस पत्र में दीवान ने कहा था कि केवल दो विकल्प हैं: भारत में शामिल हों या स्वतंत्रता की घोषणा करें। यदि त्रावणकोर के स्वतंत्र रहने का विकल्प चुनते हैं तो एक खूनी लड़ाई के लिए तैयार रहें क्योंकि छह महीने में गृहयुद्ध छिड़ जाएगा और साल के अंत से पहले कॉन्ग्रेस नेताओं की हत्या कर दी जाएगी।

दो दिन बाद, 30 जुलाई को त्रावणकोर के महाराजा ने वायसराय को विलय पत्र में अपनी स्वीकृति देते हुए टेलीग्राफ किया। वास्तव में, त्रावणकोर के राजा चिथुरा थिरुनल बलराम वर्मा और दीवान सीपी रामास्वामी अय्यर को यह समझ में आ गया था कि जब रियासत के सबसे सुरक्षित व्यक्ति पर इस तरह से जानलेवा हमला हो सकता है तो फिर रियासत में कोई भी सुरक्षित नहीं होगा। इस तरह से एक युवा सीएस मणि द्वारा दीवान की हत्या के प्रयास ने न केवल त्रावणकोर का भारत में विलय करवा दिया बल्कि केरल के इतिहास को भी बदल दिया।

‘बेटी’ का कुत्तों से करवाया गैंगरेप… पोर्न साइट पर वीडियो किया अपलोड: वसीम की साजिश में नादिया भी शामिल, FIR में कुल 7 पाकिस्तानी

पाकिस्तान स्थित पंजाब के लैय्या जिले में अश्लीलता की सारी हदें पार करने वाले एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश हुआ है जिसने सभी के होश उड़ा दिए हैं। इस गैंग के सरगना ने अपनी बीवी को जेल से रिहा कराने के लिए एक ऐसी साजिश रची कि पाकिस्तानी पुलिस भी गच्चा खा गई।

दरअसल, पाकिस्तान की लैयाह पुलिस एक ऐसे गिरोह की तलाश कर रही है जो कथित तौर पर एक लड़की के साथ सामूहिक बलात्कार में शामिल है और जानवरों के साथ उसका अश्लील वीडियो बना रहा है और उसे पोर्न वेबसाइटों पर अपलोड कर रहा है।

पीड़िता के ‘अब्बू’ की शिकायत पर 16 संदिग्धों के खिलाफ लैयाह सिटी पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी दर्ज की गई थी, जिनमें से नौ को ‘अनाम’ के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। वहीं मामले में जिन लोगों का नाम लिया गया है उनमें वसीम, अबरार, सलीम, राणा नवीद, शौकत, जाफर और नादिया शामिल हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गैंग के एक सदस्य ताजमुल ने लड़की का ‘अब्बू’ बन चौबारा थाने में गैंग-रेप की शिकायत दर्ज करवाई। वहीं पीड़िता ने एक वीडियो में दिए गए बयान में कहा कि उसे एक कॉल आया, जिसमें उसे बताया गया कि एक मामला जो वह अदालत में लड़ रही थी, सुनवाई के लिए तय कर दिया गया है। लेकिन जब वो कोर्ट पहुँची तो उसे पता चला कि जो कॉल आई थी वह फर्जी थी।

इसके बाद जब वो घर लौट रही थी तो वसीम अल्वी, इबरार बाबर और एक अन्य व्यक्ति जिसे वो नहीं पहचानती, ने उसका अपहरण कर लिया। वो उसे आजम चौक ले गए। जहाँ उन्होंने उसे पाँच दिनों तक बंद रखा और इस दौरान बारी-बारी से उसके साथ दुष्कर्म किया। पीड़िता ने कहा कि अपहरणकर्ताओं ने उसे कुत्तों के साथ अप्राकृतिक कृत्य करने के लिए मजबूर किया।

पीड़िता ‘बेटी’ ने अपने बताया कि वो उसे पीटते थे, तस्वीरें लेते थे और इस घिनौनी हरकत की वीडियो रिकॉर्ड करते थे। वो इन वीडियो को विभिन्न पोर्न वेबसाइटों पर अपलोड करते थे और उनसे पैसे कमाते थे। बाद में, उन्होंने उसे 50,000 रुपए के लिए ब्लैकमेल भी किया और उसे देने के लिए मजबूर किया और धमकी दी कि अगर उसने किसी को बताया तो उसका अश्लील वीडियो वायरल कर दिया जाएगा। पुलिस को दी गई शिकायत में ये बयान दर्ज किया गया।

लड़की के ‘अब्बू’ बने ताजमुल हुसैन (असल में गैंग का सदस्य) की शिकायत पर पुलिस ने चौबारा थाने में केस 446/22 दर्ज कर तत्काल कार्रवाई की। लेकिन जैसे-जैसे पुलिस जाँच करती गई तो पुलिस के सामने जो राज खुले उससे वो भी दंग रह गए। पुलिस के सामने जब खुद को पीड़ित बताने वाली ‘बेटी’ और उसके ‘अब्बू’ की सच्चाई आई तो पुलिस ने गिरोह के दोनों सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया।

दरअसल, मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान पुलिस ने शिकायत में नामजद सात में से तीन संदिग्धों को भी गिरफ्तार किया है। जबकि अन्य की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है। मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद लड़की का लैय्या जिला अस्पताल में मेडिकल परीक्षण कराया गया था, जिसके बाद पुलिस ने अबरार उर्फ ​​बाबर, जफर हुसैन, शौकत पटवारी, सलीम अल्वी, राणा नवीद, नादिया और तजामुल की शिकायत पर दो अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। पुलिस ने कथित तौर पर अश्लील वीडियो के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले तीन जानवरों में से एक को अपनी कस्टडी में ले लिया।

एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि गिरोह ने प्रशिक्षित जानवरों (कुत्तों) के साथ पोर्न वीडियो बनाया और उन्हें वेबसाइटों को बेच दिया। गैंग के सरगना और उसकी बीवी के खिलाफ कम से कम 24 मामले दर्ज किए गए हैं। इस गिरोह का सरगना राणा वसीम नाम का शातिर अपराधी है। ये भगोड़ा है और इसकी बीवी जेल में बंद है। ये चौक आजम का रहने वाला है। ये पुरुष और महिला साथियों की मदद से लड़कियों को ब्लैकमेल करता है।

अधिकारी ने कहा कि वसीम ने अपनी बीवी को जेल से छुड़ाने की योजना बनाई। जिसके लिए उसने पीड़िता के रूप में लड़की को अदालत में भेजा था और खुद को और गिरोह के कुछ सदस्यों को आरोपित के रूप में नामित किया था। साजिश के तहत इसने पुलिस और मीडिया को कुछ वीडियो क्लिप भी मुहैया कराए।

दरअसल, गैंग लीडर वसीम की पत्नी के खिलाफ यूनिवर्सिटी के एक छात्र ने मुकदमा दर्ज कराया था। शौकत पटवारी, जो फेक सामूहिक बालात्कार के मामले में नामित है, शिकायतकर्ता छात्र का रिश्तेदार है और कथित तौर पर उस पर दबाव बनाने के लिए ये योजना बनाई गई थी।

इस केस के खुलासे के बाद दक्षिण पंजाब के अतिरिक्त आईजी ने इस केस को सॉल्व करने वाली टीम की सराहना की है। पंजाब के मुख्यमंत्री के विशेष सहायक सैयद रफाकत अली गिलानी ने मीडिया को बताया कि घटना में शामिल सभी लोगों की गिरफ्तारी और सजा सुनिश्चित की जाएगी। इसके साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पुलिस भी कार्रवाई करेगी।

जम्मू कश्मीर में 7 न्यूज़ पोर्टलों पर लगा प्रतिबंध, फैला रहे थे फर्जी खबर: कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए फैसला

जम्मू-कश्मीर (Jammu & Kashmir) के रामबन जिला प्रशासन (District Administration Ramban) ने मंगलवार (16 अगस्त 2022) को फर्जी खबरें फैलाने वाले न्यूज पोर्टल के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की। प्रशासन ने फर्जी खबरें फैलाकर सरकार की छवि खराब करने के लिए 7 न्यूज पोर्टल के संचालन पर प्रतिबंध लगा दिया है। जिला प्रशासन ने अपने आदेश में कहा है कि फर्जी खबरों को फैलाने और सरकार की छवि खराब करने वाले अवैध न्यूज पोर्टलों के संचालन को रोककर रामबन में शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखना सर्वोपरि है।

उन्होंने एक पत्र जारी किया है, जिसमें कहा गया, “आगे भी इस बात की पूरी आशंका है कि यदि इन फर्जी न्यूज पोर्टलों पर शिकंजा नहीं कसा गया, तो जिले में शांतिपूर्ण माहौल भंग होता रहेगा।”

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रामबन जिला प्रशासन द्वारा प्रतिबंधित की गई पोर्टल की लिस्ट में लतीफ रेजा, संगलदान (यूनाइटेड उर्दू न्यूज), चरणजीत बाली उखेरल (वीडी न्यूज), मुबाशीर नजीर उखेरल (न्यूज वर्स इंडिया), जुल्फिकार भट, संगलधन (करंट न्यूज ऑफ इंडिया, ‘सीएनआई’), सज्जाद रुनियाल, मालिगम शामिल हैं। पोगल (न्यूज ब्यूरो ऑफ इंडिया एनबीआई), राजगढ़ के परवेज भट (टुडे न्यूज लाइन) और जीएचआरटी न्यूज चलाने वाले एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की गई है। इन सभी पर सरकार के खिलाफ फर्जी खबरें फैलाने और उनकी छवि खराब करने का आरोप है।

रामबन के उपायुक्त मस्सारतुल इस्लाम ने बताया कि यह पहले चरण की कार्रवाई है। अगले चरण में जो न्यूज पोर्टल वास्तविक सर्टिफिकेट दिखाने में नाकाम रहेंगे उन्हें भी प्रतिबंधित कर दिया जाएगा। रामबन के उपायुक्त ने एसएसपी को जारी किए गए आदेशों को लागू करने का निर्देश दिया है।

उपायुक्त ने आगे बताया कि विभिन्न न्यूज पोर्टलों से जुड़े रामबन के पत्रकारों को जिला सूचना अधिकारी के सामने अपना आईडी कार्ड पेश करने के लिए कहा गया था। लेकिन 7 न्यूज पोर्टल रजिस्ट्रेशन सहित अपने अन्य डॉक्यूमेंट्स जमा करने में विफल रहे। इसलिए इन ‘फर्जी’ समाचार पोर्टलों के संचालन पर प्रतिबंधित लगा दिया गया है।

जिस पर चावल घोटाले का केस वे कृषि मंत्री, जो कारतूस के साथ एयरपोर्ट पर धराए वे शिक्षा मंत्रीः नीतीश के नए मंत्रियों का प्रोफाइल यह भी

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंगलवार (16 अगस्त, 2022) को अपने नए मंत्रिमंडल का विस्तार किया, जिसके तहत 31 नए मंत्रियों ने शपथ ली। इनमें से 16 राजद के हैं, जिनमें दागी छवि के सुधाकर सिंह, चंद्रशेखर और सुरेंद्र यादव भी शामिल हैं। गृह और वित्त जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय जदयू के पास ही रहेंगे। नीतीश कुमार ने गृह मंत्रालय अपने पास ही रखा है। तेजस्वी यादव ने बतौर उप-मुख्यमंत्री उनके साथ पहले ही शपथ ले ली थी।

चावल घोटाले में सुधाकर सिंह का आया था नाम, अब बने कृषि मंत्री

नीतीश कुमार ने सुधाकर सिंह को नई राज्य सरकार में कृषि मंत्री बनाया है। बताया जा रहा है कि सुधाकर सिंह का नाम संभावितों में शामिल नहीं थे, लेकिन अंत समय तक उनके पिता जगदानंद सिंह ने सौदेबाजी की और इसमें कामयाब रहे। जगदानंद, राजद के प्रदेश अध्यक्ष हैं। वो नवंबर 2019 से ही इस पद पर हैं। लालू यादव और तेजस्वी यादव को खुद उन्हें मनाने के लिए उनसे बात करनी पड़ी। उनके बेटे सुधाकर सिंह बक्सर के रामगढ से विधायक हैं।

रामगढ़ विधानसभा क्षेत्र का उनके पिता जगदानंद ने भी 4 बार प्रतिनिधित्व किया था। वो 1995 से 2009 तक इस सीट से लगातार 14 साल विधायक रहे। 2014 में बक्सर से सांसद निर्वाचित होने के बाद उन्होंने इस सीट को छोड़ दिया था। अब सुधाकर सिंह ने राजद के टिकट पर यहाँ से जीत दर्ज की। सुधाकर सिंह को मंत्री बनाना इसीलिए भी अजीब है, क्योंकि उन पर चावल घोटाले में केस करने वाली नीतीश कुमार की सरकार ही थी।

2013-14 में ये घोटाला हुआ था। उन पर आरोप था कि उन्होंने चावल जमा नहीं कराया और उसे गबन कर गए। न्यायिक दंडाधिकारी की प्रथम अदालत में ये मामला अब भी लंबित है। रामगढ थाने में ही उन पर केस हुआ था। लेकिन, लालू यादव के परिवार से उनके पिता की नजदीकी काम कर गई और उन्हें मंत्री पद मिल गया। नीतीश कुमार के खास मंत्री विजय कुमार चौधरी अब ये कह कर डैमेज कंट्रोल में लगे हैं कि जिस गाड़ी के ड्राइवर नीतीश कुमार हों, वो नियंत्रण में चलती रहेगी और सुशासन जारी रहेगा।

कारतूस के साथ हवाई अड्डे से गिरफ्तार किए गए थे राजद विधायक चंद्रशेखर

इसी तरह नीतीश कुमार की सरकार में एक और मंत्री बने हैं चंद्रशेखर यादव, जो मधेपुरा विधानसभा क्षेत्र से हैट्रिक लगा कर विधानसभा पहुँचे हैं। उन्हें 20 फरवरी, 2022 को दिल्ली स्थित इंदिरा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (IGIA) से गिरफ्तार किया गया था। वो अपने सामान के साथ 10 कारतूस लेकर भी जा रहे थे। हालाँकि, बाद में उन्हें छोड़ दिया गया था। पेशे से वो प्रोफेसर हैं। उन्हें शिक्षा मंत्रालय का दायित्व सौंपा गया है।

वो दूसरी बार मंत्री बने हैं। इससे पहले 2015 में भी जब जदयू-राजद की संयुक्त सरकार बनी थी, तब भी उन्हें मंत्री बनाया गया था। तब उन्हें आपदा प्रबंधन विभाग सौंपा गया था। 2020 में उनकी जीत इसीलिए भी बड़ी थी, क्योंकि उन्होंने ‘जन अधिकार परिषद’ के अध्यक्ष और दिग्गज नेता पप्पू यादव को हराया था। जदयू के प्रवक्ता निखिल मंडल भी उनसे परास्त हुए थे। 61 वर्षीय चंद्रशेखर ने विज्ञान भाषा से पोस्ट ग्रेजुएट किया है और उन पर 3 मामले दर्ज हैं।

‘तीन तलाक’ जैसा नहीं ‘तलाक-ए-हसन’, औरतों के पास भी खुला का विकल्प: बेनजीर की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के कमेंट से नई बहस, अब 29 अगस्त को सुनवाई

मुस्लिमों में मान्य तलाक-ए-हसन (Talaq-e-Hasan) पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर इसे बैन करने की माँग की गई है। याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आज मंगलवार (16 अगस्त, 2022) को कहा कि मुस्लिमों में ‘तलाक-ए-हसन’ के जरिए तलाक देने की प्रथा तीन तलाक की तरह नहीं है और महिलाओं के पास भी ‘खुला’ का विकल्प है। वहीं इस मामले में कोर्ट ने सुनवाई की अगली तारीख 29 अगस्त तय की है। याचिकाकर्ता ने इस्लामिक तलाक़ की इस व्यवस्था को एकतरफा मामला बताते हुए कोर्ट में चुनौती दी है।

क्या है तलाक-ए-हसन

तलाक-ए-हसन इस्लाम में तलाक का एक रूप है जिसके द्वारा एक मुस्लिम शौहर तीन महीने की अवधि में हर महीने एक बार तलाक का बोलकर अपनी बीबी को तलाक दे सकता है।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, तलाक-ए-हसन को चुनौती देने वाली याचिकाकर्ता से सुप्रीम कोर्ट ने पूछा है कि क्या उन्हें व्यक्तिगत राहत चाहिए? वहीं कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि तीन तलाक की तरह ‘तलाक-ए-हसन’ भी तलाक देने का एक तरीका है, लेकिन इसमें तीन महीने में तीन बार एक निश्चित अंतराल के बाद तलाक बोलकर रिश्ता खत्म किया जाता है। इस्लाम में पुरुष ‘तलाक’ ले सकता है, जबकि कोई महिला ‘खुला’ के जरिए अपने शौहर से अलग हो सकती है।

रिपोर्ट के अनुसार, शौहर से तलाक-ए-हसन के 3 नोटिस पा चुकीं गाजियाबाद की बेनजीर हिना ने पुरुषों को तलाक का एकतरफा अधिकार देने वाले प्रावधानों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है लेकिन आज कोर्ट ने कहा कि मामले में आगे बढ़ने से पहले वह कुछ बातों को स्पष्ट कर लेना चाहते हैं। कोर्ट ने याचिकाकर्ता से पूछा कि क्या बढ़ी हुई मेहर की रकम के साथ याचिकाकर्ता अपने शौहर से आपसी सहमति से तलाक लेना चाहेंगीं। बेंच ने इस मामले में यह भी कहा, “हम याचिकाकर्ता की समस्या को हल करना चाहेंगे। हम यह नहीं चाहते कि इसमें किसी और तरीके का एजेंडा बने।”

वहीं इस मामले में रिपोर्ट के अनुसार, याचिकाकर्ता ने कहा, “जो अधिकार संविधान उनकी हिंदू, सिख या ईसाई महिलाओं को देता है, उससे वह वंचित हैं। अगर उन्हें भी कानून का समान संरक्षण हासिल होता तो उनके शौहर इस तरह एकतरफा तलाक नहीं दे सकते थे। वह सिर्फ अपनी नहीं, देश की करोड़ों मुस्लिम लड़कियों की लड़ाई लड़ रही हैं।”

बता दें कि जस्टिस संजय किशन कौल और एमएम सुंदरेश की बेंच ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने एक साथ तीन तलाक बोलने की व्यवस्था को असंवैधानिक करार दिया था लेकिन तलाक-ए-हसन यानी एक 1 महीने में अलग-अलग तीन बार तलाक बोलने की व्यवस्था उससे अलग है। जजों ने यह भी कहा कि मुस्लिम कानूनों में महिला को भी ‘खुला’ और ‘मुबारत’ जैसे अधिकार दिए गए हैं। ऐसे में पहली नजर में यह नहीं लगता कि महिलाओं के साथ भेदभाव किया जा रहा है।

वहीं इस मामले में वकील अश्विनी उपाध्याय ने बेनजीर की तरफ से दाखिल याचिका में बताया है कि बेनजीर की 2020 में दिल्ली के रहने वाले यूसुफ नकी से निकाह हुआ। उनका 8 महीने का बच्चा भी है। पिछले साल दिसंबर में पति ने एक घरेलू विवाद के बाद उन्हें घर से बाहर कर दिया। 5 महीने से उनसे कोई संपर्क नहीं रखा। अप्रैल में अचानक अपने वकील के जरिए डाक से एक चिट्ठी भेज दी। इसमें कहा गया कि वह तलाक-ए-हसन के तहत पहला तलाक दे रहे हैं।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट में तलाक-ए-हसन को लेकर याचिका दाखिल होने से मामला सुनवाई के लिए लगने तक बेनजीर के शौहर ने बाकी चिट्ठी के जरिए दो और बार तलाक़ बोल दिया था। इस तरह से मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत तलाक पूरा हो चुका है लेकिन जजों ने यह प्रस्ताव दिया है कि अगर याचिकाकर्ता चाहे तो बढ़े हुए मुआवजे के साथ आपसी तलाक ले सकती है। कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि निकाह के समय तय मेहर की रकम कम थी। इसलिए उसे बढ़ा कर कोर्ट के माध्यम से या कोर्ट के बाहर ‘मुबारत’ जैसी व्यवस्था से तलाक हो सकता है।

बिहार में चूड़ा चट कर गए MY: जिसने नीतीश कुमार के लिए कहा था ‘%ड़े की सरकार’, उस बाहुबली के करीबी भी बने मंत्री

जब भी बिहार की राजनीति की बात होती है, उसे जातीय समीकरणों के लिहाज से तौला जाता है। जंगलराज के पूर्व के अनुभवों की वजह से हर राजनीतिक फैसले की क्राइम फाइल खँगाली जाती है। नीतीश कुमार ने मंगलवार (16 अगस्त 2022) को अपने मंत्रिमंडल का विस्तार किया है। इन दोनों मापदंडों पर उनकी उनकी नई कैबिनेट का भी विश्लेषण किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सहित बिहार में कैबिनेट सदस्यों की कुल संख्या 33 है। इनमें लालू प्रसाद यादव के दोनों बेटों (तेजस्वी और तेज प्रताप) के अलावा चार यादव मंत्री राजद कोटे से हैं। जदयू ने इसी बिरादरी से बिजेंद्र यादव को मौका दिया है। जेडीयू, राजद और कॉन्ग्रेस के कोटे से चार मुस्लिम भी मंत्री बने हैं। राजद कोटे से बने दो मुस्लिम मंत्री विधान परिषद के सदस्य हैं। यानी, मंत्रिमंडल गठन में राजद ने ‘माई (मुस्लिम+यादव)’ के उस समीकरण का पूरा ध्यान रखा है जो लालू यादव का बनाया हुआ है।

राजद ने किसी ब्राह्मण को मंत्री नहीं बनाया है। न भूमिहारों को वैसा भाव दिया है, जैसा विपक्ष में रहते हुए हाल-फिलहाल में तेजस्वी यादव संदेश दे रहे थे। राजद कोटे से एक केवल एक भूमिहार एमएलसी कार्तिक सिंह को मंत्री बनाया गया है। यह चौंकाने वाला है, क्योंकि ‘भूरा बाल साफ करो’ वाली पार्टी पिछले कुछ समय से ‘भूमिहार का चूड़ा, यादव जी का दही’ का नारा दे रही थी। खुद तेजस्वी यादव राजद के ए टू जेड पार्टी होने का दावा कर रहे थे।

भूमिहार जाति से आने वाले जिस कार्तिक सिंह को मंत्री बनाया गया है, उनकी सबसे बड़ी ताकत बाहुबली अनंत सिंह का करीबी होना है। बताया जाता है कि नीतीश कुमार के पाला बदलने के बाद से ही अनंत सिंह अपने इस विश्वस्त के लिए जेल से लॉबिंग कर रहे थे। कार्तिक सिंह का मंत्री बनना इस सरकार में अनंत सिंह की अहमियत बताता है। हाल ही में अपनी विधायकी गँवाने वाले अनंत सिंह पिछले कुछ सालों से नीतीश सरकार के खिलाफ लगातार हमलावर थे। कई मौकों पर उन्हें इस सरकार के लिए अमर्यादित शब्द का प्रयोग करते हुए भी सुना गया। ऐसे ही एक मौके पर उन्होंने नीतीश कुमार की पुरानी सरकार को ‘%ड़े की सरकार’ बता दिया था।

‘शौच के लिए गए चिरंजीलाल, मुस्लिम भीड़ ने बेरहमी से मारा’: अलवर की घटना, लोग बोले- जहाँ कॉन्ग्रेस, वहाँ हिंदुओं की मॉब लिंचिंग

राजस्थान से मॉब लिंचिंग (Mob Lynching) का मामला सामने आया है। यह घटना अलवर के गोविंदगढ़ कस्बे की है। यहाँ रामबास गाँव में सब्जी का ठेला लगाने वाले चिरंजीलाल पर ट्रैक्टर चोरी का आरोप लगाकर समुदाय विशेष के 20-25 लोगों ने 14 अगस्त को बेरहमी से पीटा। इस घटना में 45 वर्षीय चिरंजीलाल गंभीर रूप से घायल हो गए। मामले की सूचना मिलते ही ग्रामीण व परिजन मौके पर पहुँचे और इलाज के लिए उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया। सोमवार (15 अगस्त 2022) को इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

इस घटना से गुस्साए पीड़ित परिवार ने 50 लाख का मुआवजा, एक सदस्य को नौकरी और आरोपितों की गिरफ्तारी की माँग की है। वहीं, घटना के विरोध में गोविंदगढ़ बाजार पूरी तरह से बंद रहा। सब्जी मंडी व्यापारियों ने भी कामकाज बंद कर रखा है।

इसको लेकर अभिषेक आचार्य कुलश्रेष्ठ ने ट्वीट किया है। उन्होंने लिखा, “राजस्थान पाकिस्तान बनता जा रहा है। आज अलवर जिले के गोविंदगढ़ में मुस्लिमों की भीड़ ने एक हिंदू को पीट-पीटकर मार डाला। जहाँ कॉन्ग्रेस की सरकार होती है, वहाँ हिंदुओं की मॉब लिंचिंग होती है। पूरे राजस्थान में हिंदू असुरक्षित है पर गहलोत जी कुर्सी बचाने में मस्त है।”

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अलवर के गोविंदगढ़ कस्बे के पास रामबास में चिरंजीलाल शौच के लिए खेत में गए थे। उसी दौरान अलवर के सदर थाना क्षेत्र से चोर एक ट्रैक्टर को चोरी करके आ रहे थे। पुलिस और ट्रैक्टर मालिक चोरों का पीछा कर रहे थे। चोर पुलिस और ट्रैक्टर मालिकों से अपने आपको घिरा देखकर ट्रैक्टर एक खेत में छोड़कर भाग गए।

इसी दौरान पुलिस से पहले ट्रैक्टर के मालिक वहाँ आ गए और खेत में शौच कर रहे चिरंजीलाल को चोर समझकर बेरहमी से पीटने लगे, जिससें वो गंभीर रूप से घायल हो गया। जब पुलिस मौके पर पहुँची उन्हें पता चला कि जिसे मालिकों ने मारा है वह चोर नहीं बल्कि रामबास का रहने वाला चिरंजीलाल था, जो शौच के लिए खेत में गया हुआ था।

बताया जा रहा है कि चिरंजी बेहद गरीब परिवार से था। उनके परिवार में कुल 11 सदस्य हैं। वह सब्जी का ठेला लगाकर अपने परिवार का पेट पालते थे। बिना किसी जानकारी के चिरंजी को उन लोगों ने बेरहमी से पीटा, जिससे उसकी मौत हो गई।

चिरंजीलाल की मौत के बाद आक्रोशित लोगों ने थाने का घेराव किया और आरोपितों को गिरफ्तार करने की माँग कर रहे हैं। मंगलवार (16 अगस्त 2022) सुबह आक्रोशित परिजन और ग्रामीणों ने रामगढ़-गोविंदगढ़ रोड जाम कर दिया। चिरंजीलाल के बेटे योगेश का कहना कि पुलिस प्रशासन ने आरोपितों पर कार्रवाई करने की बजाय उन्हें छोड़ दिया है। परिवार ने शव का अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया है और अपनी माँग पर अड़े हैं।

₹45 करोड़ का ‘रेप हाउस’, लगे थे स्पेशल ताले; 1 पैनिक रूम भी: उस पूर्व फुटबॉलर को लेकर दावा जिस पर 13 महिलाओं ने लगाया है इल्जाम

बलात्कार के आरोपों में फँसे मैनचेस्टर सिटी के पूर्व फुटबॉलर बेंजामिन मेंडी (Benjamin Mendy) के केस में नया खुलासा हुआ है। 28 वर्षीय बेंजामिन पर चेस्टर क्राउन कोर्ट में कई महिलाओं का यौन शोषण व रेप करने के आरोप में सुनवाई चल रही है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, बेंजामिन पर 13 महिलाओं के साथ दुष्कर्म व यौन शोषण (4 रेप, 7 यौन उत्पीड़न और 2 के साथ दोनों) करने के आरोप लगे हैं। अभी जो केस चल रह रहा है वो साल 2018 से 2021 के बीच हुई घटनाओं को लेकर आरोप लगाए गए हैं, जिसमें फुटबॉलर पर 7 महिलाओं ने केस दर्ज कराया है। हालाँकि, फुटबॉलर ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों से इनकार कर दिया है।

वहीं, जूरी को सोमवार (15 अगस्त 2022) को पता चला कि बेंजामिन मेंडी (Benjamin Mendy) के 4.8 मिलियन पाउंड (458791317 रुपए) के घर के अंदर मैनचेस्टर सिटी के पूर्व फुटबॉलर ने कथित तौर पर कई महिलाओं का यौन शोषण किया था।

बताया जा रहा है कि मेंडी फिक्सर के जरिए अपने घर पर महिलाओं को सेक्स के लिए लाता था और उन्हें पैनिक रूम में बंद कर देता था। यहाँ वह उनके साथ बलात्कार की घटना को अंजाम देता था। इसके लिए वह दरवाजों पर अलग तरह के लॉक का इस्तेमाल किया करता था।

कोर्ट में प्रोसिक्यूशन पक्ष के वकील टिमोथी क्रे ने बताया कि बेंजामिन के स्टडी और मास्टर बेडरूम में दरवाजों पर खास तरह के लॉक्स का इस्तेमाल किया गया है, जो कि अंदर से ही खोले जा सकते हैं। इन दोनों ही कमरों को महिलाओं ने बलात्कार करने वाली जगह बताया है। दो अन्य गवाहों ने भी इस बात की पुष्टि की है कि इन कमरों में महिलाओं के साथ रेप किया जाता था।

सर्च ऑपरेशन के दौरान एक पुलिस ऑफिसर ने खुलासा किया कि उसने अपने बॉडी कैमरे से तलाशी का वीडियो शूट किया है। जिसमें कुछ ऐसे दरवाजे सामने आए हैं, जिन्हें या तो अंदर से खोला जा सकता है या सिर्फ इसके बारे में खास जानकारी रखने वाला इंसान ही इसे अनलॉक कर सकता है।

ग्रैंड तरीके से डिज़ाइन किए घर की वीडियो फुटेज में एक इनडोर स्विमिंग पूल और होम जिम दिखाया गया है। इसमें वैनिटी मिरर, स्पा एक्सेसरीज और वार्डरोब और फुटबॉलर के बाथरूम और रसोई के साथ एक बड़ा चेंजिंग रूम भी है।

बता दें कि मैनचेस्टर में चाइना व्हाइट की एक महिला आरोप लगाया था कि मेंडी ने उसके साथ बलात्कार किया है। इस घटना के बाद वह महिला पिछले साल 23 जुलाई को अपने घर वापस गई चली गई थी।