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देश से बाहर होंगे रोहिंग्या, फ्लैट नहीं मिलेगा: अमित शाह के मंत्रालय ने किया क्लियर, बताया- दिल्ली सरकार ने शिफ्ट करने का दिया था प्रस्ताव

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मीडिया रिपोर्ट्स के बाद साफ़ किया है कि उसने रोहिंग्या मुस्लिमों को EWS फ्लैट्स में बसाने का कोई आदेश नहीं दिया है। होम मिनिस्ट्री ने कहा, “गृह मंत्रालय ने रोहिंग्या मुस्लिमों को EWS फ्लैट्स में बसाने का कोई आदेश नहीं दिया है। दिल्ली सरकार ने रोहिंग्या मुस्लिमों को नई जगह शिफ्ट करने का प्रस्ताव दिया था। रोहिंग्या मुस्लिमों का प्रत्यर्पण किए जाने को लेकर गृह मंत्रालय पहले ही सम्बंधित देशों से संपर्क कर चुका है।

अमित शाह के मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि अवैध घुसपैठियों को या तो डिटेंशन सेंटर में रखा जाता है या फिर उन्हें उनके देश भेजा जाता है। साथ ही कहा कि दिल्ली सरकार ने उक्त लोकेशन को अभी तक डिटेंशन सेंटर नहीं घोषित किया है, लेकिन उन्हें तुरंत ऐसा करने का आदेश दिया गया है। बता दें कि ये सब केंद्रीय हरदीप सिंह पुरी के एक ट्वीट से शुरू हुआ था। इसके बाद VHP ने भी बयान जारी किया। लोगों ने विरोध किया सो अलग।

रोहिंग्या शरणार्थियों को फ्लैट्स देने का फैसला, केंद्रीय मंत्री के ट्वीट के बाद हुआ विरोध: VHP का बयान

केंद्रीय आवास एवं शहरी विकास मंत्री हरदीप सिंह पुरी के एक ट्वीट के बाद भाजपा अपने ही समर्थकों का निशाना बनी। उन्होंने जानकारी दी थी कि टेंटों में रह रहे 11 रोहिंग्या मुस्लिमों को केंद्र सरकार फ्लैट्स देगी। साथ ही उन्हें मुलभुत सुविधाओं के साथ-साथ 24 घंटे दिल्ली पुलिस की सुरक्षा देने का ऐलान भी किया गया है। लोग इसके बाद पूछने लगे कि जहाँ पाकिस्तान से आए हिन्दू शरणार्थी इन सुविधाओं से दूर बेबस रह रहे हैं, ऐसे में रोहिंग्यों पर इतनी दया क्यों?

‘विश्व हिन्दू परिषद (VHP)’ ने इस कदम की कड़ी निंदा की। संगठन ने कहा कि रोहिंग्या मुस्लिमों को बसाने की जगह उन्हें देश से बाहर निकाला जाना चाहिए। वीएचपी के केंद्रीय कार्यकारी अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता आलोक कुमार ने कहा कि संगठन केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के बयान से हतप्रभ है, जिसमें उन्होंने रोहिंग्या को ‘प्रवासी’ कह कर सम्बोधित किया है और दिल्ली के बक्करवाला में उन्हें फ्लैट्स देने की घोषणा की है।

उन्होंने इस दौरान 10 दिसंबर, 2020 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा संसद में दिए गए बयान की भी याद दिलाई, जिसमें उन्होंने कहा था कि रोहिंग्या को कभी भी स्वीकार नहीं किया जाएगा। VHP ने स्पष्ट किया कि रोहिंग्या प्रवासी नहीं, बल्कि घुसपैठिए हैं। आलोक कुमार ने याद दिलाया कि केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में डाली गई एफिडेविट में भी यही बताया है। उन्होंने ये भी ध्यान दिलाया कि पाकिस्तान से आए हिन्दू शरणार्थी अभी भी मजनू का टीला में अमानवीय तरीके से अपना जीवन जी रहे हैं।

उन्होंने कहा कि रोहिंग्या के लिए जिस तामझाम का ऐलान किया है, उससे इन पीड़ित हिन्दू शरणार्थियों को और दुःख पहुँचेगा। साथ ही मोदी सरकार से विहिप ने आग्रह किया है कि अपने कदम पर पुनर्विचार कर के रोहिंग्या को बसाने की जगह उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू करें। असल में भारत ने 1951 के उस UN के उस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर नहीं किया था, जिसे शरणार्थियों के सम्बन्ध में लाया गया था। इसीलिए, भारत इन्हें सारी सुविधाएँ देने की अनिवार्यता से बँधा नहीं हुआ है।

केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का कहना है कि शरणार्थियों को लेकर भारत के खिलाफ नकारात्मक बातें फैलाने वालों के लिए ये कदम एक झटका है। हाल ही में दिल्ली के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक बैठक हुई थी, जिसमें दिल्ली सरकार ने बताया था कि उन टेंट्स के लिए हर महीने 7 लाख रुपए खर्च हो रहे थे, जिनमें रोहिंग्या रह रहे थे। कैम्पों में आग लगने के बाद उन्हें मदनपुर खादर शिफ्ट किया गया। अब इन्हें NDMC के बक्करवाला स्थित EWS फ्लैट्स में स्थानांतरित किया जाएगा।

इसी बैठक के बाद दिल्ली पुलिस को रोहिंग्यों को 24 घंटे सुरक्षा देने का निर्देश दिया गया। दिल्ली सरकार के सामाजिक कल्याण विभाग ने उन्हें भोजन, फोन और पंखा सहित अन्य सुविधाएँ देने का फैसला लिया। केंद्र सरकार कई बार रोहिंग्या मुस्लिमों को देश की सुरक्षा के लिए खतरा बताया है। हालाँकि, अब सरकारी सूत्रों का कहना है कि रोहिंग्या मुस्लिमों को उन फ्लैट्स का मालिक नहीं बनाया जा रहा है, बल्कि उन्हें सिर्फ उनमें शिफ्ट किया जा रहा है।

जिस बैठक में ये फैसला हुआ, उसमें दिल्ली के मुख्य सचिव के अलावा केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधिकारी भी शामिल थे। इन रोहिंग्या मुस्लिमों के पास संयुक्त राष्ट्र हाई कमिश्नर फॉर रिफ्यूजीज (UNHCR) की आईडी होनी चाहिए। साथ ही उनके डिटेल्स ऑन रिकॉर्ड भी होने चाहिए। हाल के दिनों में ऐसी कई घटनाएँ हुई हैं, जिनमें रोहिंग्या मुस्लिमों का हाथ सामने आया। बेंगलुरु से एक कुमकुम अहमद चौधरी के गिरोह का भी खुलासा हुआ। हालाँकि, अब HMO के बयान के बाद तस्वीर साफ़ हो गई है।

₹215 करोड़ की जबरन वसूली में फँसी जैकलीन फर्नांडिस, ED ने बनाया आरोपित: लिए थे करोड़ों के गिफ्ट, महँगी गाड़ियाँ

बॉलीवुड अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडिस (Jacqueline Fernandez) पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) का शिकंजा कसता नजर आ रहा है। उन्हें 215 करोड़ रुपए की जबरन वसूली के मामले में ED ने आरोपित बनाया है। यह मामला सुकेश चंद्रशेखर (Sukesh Chandrashekhar) से जुड़ा हुआ है। ED ने इस केस में सप्लीमेंट्री चार्जशीट बुधवार (17 अगस्त 2022) को दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट में दाखिल की।

फिलहाल जैकलीन को गिरफ्तार नहीं किया गया है। हालाँकि, उन्हें देश से बाहर यात्रा करने की अनुमति नहीं गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईडी का मानना है कि जैकलीन को पहले से जानकारी थी कि सुकेश एक ठग है और वो जबरन वसूली करता है।

सुकेश ने जैकलीन को दिए महंगे गिफ्ट

सुकेश चंद्रशेखर एक ठग है, जिस पर जबरन वसूली और मनी मनी लॉन्ड्रिंग आरोप हैं। इस केस की जाँच कर रही ईडी ने खुलासा किया था कि उसने जैकलीन को महँगे गिफ्ट दिए थे। ईडी ने कहा था कि जाँच में पाया गया कि सुकेश ने जैकलीन को 10 करोड़ रुपये के गिफ्ट दिए हैं। इसके बाद ईडी ने उनकी 7 करोड़ की संपत्ति कुर्क कर ली थी।

ईडी की चार्जशीट में खुलासा किया गया था कि सुकेश की एक सहयोगी पिंकी ईरानी ने उसकी मुलाकात जैकलीन से करवाई थी। सुकेश ने पिंकी ईरानी की मदद से ही जैकलीन तक महंगे गिफ्ट और कैश पहुँचाए थे।

जैकलीन ने सुकेश के बारे में क्या कहा

ईडी की चार्जशीट के अनुसार, जैकलीन फर्नांडिस से सुकेश ने दिसंबर 2020 से जनवरी 2021 के दौरान संपर्क करने की कोशिश की थी, लेकिन उन्होंने कॉल का जवाब नहीं दिया।अभिनेत्री ने आरोप लगाया था कि सरकारी कार्यालय के किसी व्यक्ति ने उन्हें सुकेश चंद्रशेखर से संपर्क करने के लिए कहा था। जैकलीन सुकेश चंद्रशेखर को शेखर रत्न वेला के नाम से जानती थी।

सोशल मीडिया पर सुकेश और जैकलीन की डेटिंग के कई किस्से सामने आए। हालाँकि, जैकलीन ने हमेशा इस बारे में चुप्पी साधे रखी। उन्होंने जनवरी में लोगों से रिक्वेस्ट की थी कि उनके पर्सनल फोटो को शेयर ना करें। जैकलीन ने कहा था कि इस देश के लोगों ने उन्हें बहुत प्यार दिया है। वो बहुत बुरे दौर से गुजर रही हैं। उनकी प्राइवेसी बनाए रखें।

सुकेश ने खुद को बताया था Sun TV का मालिक

हाल ही में ये भी कहा गया कि सुकेश ने 2021 में पहली बार तिहाड़ जेल के अंदर से ही जैकलीन से बात करना शुरू कर दिया था। अभिनेत्री का कहना था कि सुकेश ने उन्हें कहा कि वो चेन्नई से है। उसने अपनी पहचान सन टीवी के मालिक के रूप में बताई। साथ ही ये भी कहा कि वो जयललिता के राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखता है।

जैकलीन का कहना था कि सुकेश ने उनसे कहा कि वो उनका बहुत बड़ा फैन है और उन्हें साउथ की फिल्में करनी चाहिए। उसके पास सन टीवी में जैकलीन के लिए कई प्रोजेक्ट्स हैं। इसी दौरान दोनो संपर्क में आए थे।

सुकेश चंद्रशेखर से जुड़े मामलों की जाँच की कई राज्यों की पुलिस कर रही हैं। इसके साथ ही तीन केंद्रीय एजेंसियाँ- सीबीआई (CBI), प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आयकर (Income Tax) भी उससे जुड़े मामलों की जाँच कर रही हैं।

कानपुर में पकड़े गए जैश आतंकवादी के मोबाइल में मिले 100+ वीडियो, सारे अलकायदा जैसे आतंकी संगठनों के: भारत में लाना चाहता था इस्लामी शासन

उत्तर प्रदेश के कानपुर (Kanpur, Uttar Pradesh) से 14 अगस्त 2022 को गिरफ्तार जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादी हबीबुल इस्लाम उर्फ सैफुल्लाह के मोबाइल से आतंकी गतिविधियों से संबंधित 100 से अधिक वीडियो मिले हैं। हबीबुल इन वीडियो को अपने करीबियों को भेजता था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अधिकतर वीडियो आतंकी संगठन अलकायदा और आईएसआईएस (ISIS) के हैं और उसमें इनके सरगना और प्रमुख के भड़काऊ भाषण हैं। भारत में हुए आतंकी हमलों से संबंधित वीडियो भी उसके पास मिले हैं। इसमें मुंबई हमले के वीडियो भी शामिल हैं। NIA/ATS की स्पेशल कोर्ट ने नदीम, हबीबुल को 12 दिन और सबाउद्दीन को 10 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। इनकी रिमांड बुधवार (17 अगस्त 2022) सुबह से शुरू हो रही है।

बताया जा रहा है कि एटीएस को हबीबुल के पास से एक मोबाइल और उसी की आईडी पर लिया गया सिम (SIM) मिला था। वह वर्चुअल आईडी इस्तेमाल करता था। एटीएस ने जब मोबाइल खंगाला तो उसमें सौ से अधिक वीडियो मिले, जिसमें ओसामा बिन लादेन समेत अन्य मोस्ट वांटेड आतंकियों के वीडियो भी शामिल हैं। एटीएस ने सभी वीडियो को साक्ष्य के तौर पर केस की जाँच में शामिल किया है।

एटीएस के मुताबिक, हबीबुल पाकिस्तानी और अफगानिस्तानी आतंकियों को वर्चुअल आईडी बनाकर देता था। यूपी एटीएस के अनुसार, “सैफुल्लाह ने सीमा पार लोगों के संपर्क में रहने के लिए टेलीग्राम, फेसबुक मैसेंजर और व्हाट्सएप जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया करता था।”

बीते दिनों 19 साल के सैफुल्लाह ने ATS को पूछताछ बताया था कि वह भारत में इस्लाम का राज लाना चाहता है। इसके लिए उसने जिहाद की राह चुनी। पूर्व में गिरफ्तार आतंकी नदीम की तरह वह भी टेलीग्राम पर पाकिस्तान सहित कई अन्य देशों में कट्टरपंथियों से जुड़ा हुआ था। वहाँ से उसे जिहाद के लिए उकसाने वाले वीडियो भेजे जाते थे। पाकिस्तानी हैंडलरों को वह ऑडियो और वीडियो कॉल भी किया करता था।

सैफुल्लाह को तालिबान जिस क्रूरता से अपने दुश्मनों का कत्ल करता है, वह अंदाज बेहद पसंद है। उसके मुताबिक एक न एक दिन सभी को मुस्लिम बनना होगा, क्योंकि इस्लाम ही अकेला मजहब है। उसका मानना है कि जो मुस्लिम बनने से इनकार करेगा, उसे तालिबानी तरीके से सजा दी जाएगी। हबीबुल और नदीम आपस में दोस्त भी हैं। दोनों एक ही टेलीग्राम ग्रुप में जुड़े हुए थे, जहाँ इनकी आपस में अक्सर बातें भी हुआ करती थीं। दोनों नूपुर शर्मा की हत्या के मिशन पर एक साथ काम कर रहे थे।

बता दें कि नूपुर शर्मा के कत्ल की प्लानिंग कर रहे उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से गिरफ्तार जैश आतंकी नदीम की रिश्तेदारी पाकिस्तान में है। आतंकी रात में जागकर नूपुर शर्मा की हत्या की रूपरेखा बना रहा था। आतंकी नदीम की पढ़ाई मदरसे में हुई है। मदरसा नदीम के घर के पास में ही है, जिसका नाम ‘मोहम्मदिया अरबिया मदरसा’ है।

अब गाँधी परिवार नहीं, AK-203 राइफल है अमेठी की नई पहचान: सेना को मिली पहली खेप, कभी विपक्ष ने बताया था जुमला

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत लगातार आत्मनिर्भर राष्ट्र के तौर पर उभर रहा है। इसका जीवंत उदाहरण है उत्तर प्रदेश के अमेठी में बनी AK-203 असॉल्ट राइफल्स। अमेठी, जिसकी सियासी पहचान कभी गाँधी परिवार से और अब बीजेपी सांसद स्मृति ईरानी से है, उसको एक नई पहचान मिली है।

अमेठी में रूस की तकनीकी सहायता से AK-203 राइफल्स निर्मित की जा रही है। मंगलवार, 16 अगस्त को सेना को इसकी पहली खेप मिल चुकी है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसकी पहली खेप को सेना के सौंपा है। इन राइफल्स को मोदी सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत रूसी सरकार के साथ मिलकर बनाया जा रहा है।

साल 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ये ऐलान किया था कि उत्तर प्रदेश का अमेठी जिला AK-203 राफल्स से पहचाना जाएगा। तब विपक्षी पार्टियों ने इसे महज जुमला करार दिया था। हालाँकि आज तीन साल बाद पीएम मोदी का कथन सही साबित हुआ। देश के जांबाज सिपाहियों के हाथ में अब AK-203 असॉल्ट राइफल होगी। जब भी देश का कोई सैनिक AK-203 असॉल्ट राइफल को थामेगा, उसे अमेठी की याद जरूर आएगी।

AK-203 असॉल्ट राइफल्स दुनिया की बेहतरीन राइफल्स में शुमार है। अमेठी के हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) कोरवा परिसर में बनी ऑर्डिनेंस फैक्ट्री में इसका निर्माण किया जा रहा है। फिलहाल 5 लाख राइफल्स के उत्पादन को मंजूरी मिली है। तेजी से इन्हें निर्मित करने का काम किया जा रहा है।

AK-203 असॉल्ट राइफल की खूबियां

AK-203 असॉल्ट राइफल कलाश्निकोव सीरीज की सबसे आधुनिक राइफल है। दुश्मनों के लिए ये बहुत ही घातक साबित होती है। सरकारी अधिकारियों के अनुसार, 7.62 X 39mm कैलिबर की AK-203 राइफल्स सेना में इंसास राइफल्स की जगह लेंगी।

AK-203 राइफल्स इंसास से ज्यादा आधुनिक और घातक है। इंसास की तुलना में ये छोटी और हल्की है। AK- 203 का वजन 3.8 किलोग्राम है, जबकि इंसास का वजन बिना मैगजीन और बेयोनेट के 4.15 किलोग्राम होता है। इंसास की लंबाई 960mm है, जबकि AK-203 महज 705mm लंबी है।

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, AK-203 असॉल्ट राइफल्स की प्रभावी रेंज 300 मीटर है और ये हल्की होती हैं। उनका कहना है कि ये राइफल्स कश्मीर घाटी में आतंकवाद रोधी अभियानों में भारतीय सेना की ताकत को बढ़ाएगी। ये अधिक घातक है और इसका उपयोग सरल है। ऐसे में इससे सैनिकों की युद्ध क्षमता बढ़ेगी। इसके जरिए आर्मी ऑपरेशन्स का संचालन और भी सुविधाजनक हो जाएगा।

‘महिला की ड्रेस हो भड़काऊ तो यौन शोषण का केस नहीं’: केरल कोर्ट ने दी बेल, कहा- 74 साल का बुजुर्ग जबर्दस्ती गोद में बिठा ही नहीं सकता

केरल की कोझिकोड अदालत ने यौन उत्पीड़न के मामले में लेखक और सामाजिक कार्यकर्ता सिविक चंद्रन को अग्रिम जमानत देते हुए अटपटी टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि अगर पीड़िता ने घटना के समय कोई भड़काऊ ड्रेस पहनी थी तो फिर ये यौन शोषण का मामला नहीं माना जाएगा। कोर्ट ने एक युवा लेखिका की शिकायत पर यह मानने से भी इनकार किया कि कोई बुजुर्ग व्यक्ति जबरदस्ती शिकायतकर्ता को अपनी गोदी में बैठा सकता है।

कोझिकोड कोर्ट ने 12 अगस्त को चंद्रन की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा, “अगर शिकायतकर्ता ने तब भड़काऊ कपड़े पहने हुए थे तो प्रथम दृष्टया में ये मामला यौन उत्पीड़न का नहीं होगा।” कोर्ट ने कहा, “ये मानने के बाद कि फिजिकल कॉन्टैक्ट हुए, ये मानना असंभव है कि एक 74 साल के बुजुर्ग आदमी ने शिकायकर्ता ने जबरदस्ती अपनी गोदी में बैठाया।”

जानकारी के मुताबिक, अपनी बेल माँगते हुए चंद्रन ने कोर्ट में पीड़िता की कुछ तस्वीरों को साझा किया था। इन्हीं तस्वीरों को देख अदालत ने अपनी टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता ने खुद ऐसे कपड़े पहने थे जो यौन उत्तेजक हैं, इसलिए प्रथम दृष्टया में धारा 354 आरोपित के खिलाफ प्रभावी नहीं होगी।

बता दें कि सिविक चंद्रन के खिलाफ एक युवा लेखिका ने कोइलांडी पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करवाई थी। पीड़िता का कहना था कि फरवरी, 2020 में शहर में एक पुस्तक प्रदर्शनी आयोजित हुई थी, उसी में लेखक सिविक चंद्रन ने उसका यौन शोषण किया था।

गौरतलब है कि सिविक चंद्रन के खिलाफ ये पहला मामला यौन शोषण का नहीं दर्ज है। इससे पहले भी उन पर एक अन्य महिला लेखिका ने इसी प्रकार का केस दर्ज कराया था, जिसके बाद पुलिस ने उनपर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम सहित अन्य धाराओं में केस दायर किया था। महिला की शिकायत थी कि एक किताब रिलीज समारोह के दौरान चंद्रन ने उनका यौन शोषण किया।

रील बनाने की सनक, मोबाइल के लिए महिला का गला काट दिया: 100 CCTV और 1 जूते से 15 साल के हमलावर तक पहुँची पुलिस

दिल्ली में एक महिला का गला काट मोबाइल छीनने के मामले में पुलिस ने एक नाबालिग को पकड़ा है। साकेत इलाके में 1 जून 2022 को महिला पर हमला हुआ था। पुलिस के मुताबिक 15 साल का हमलावर पत्थर घिसाई का काम करता है। उसने रील बनाने की सनक है। मोबाइल पाने के लिए उसने महिला पर जानलेवा हमला किया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नाबालिग आरोपित ने अपना मोबाइल चोरी होने के बाद मोबाइल छीनने का प्‍लान बनाया। चेहरे पर मास्‍क लगाकर साकेत पहुँचा। 1 जून को रजनी सैदुलाजाब स्थित चर्च से रात करीब 8:30 बजे पैदल ही अपने घर लौट रही थी। साकेत एसडीएम कार्यालय के पास अचानक ही पीछे से उनके गले पर धारदार हथियार से वार किया गया और हमलावर मोबाइल लेकर फरार हो गया। रास्ते से गुजर रहे एक शख्स ने महिला को अपनी स्कूटी से अस्पताल पहुँचाया था। मामले की जाँच में पुलिस ने करीब 100 CCTV कैमरों की फुटेज खँगाली। इससे उसे एक जूते का सुराग मिला और आखिर में वह हमलावर तक पहुँचने में कामयाब रही। नाबालिग को गिरफ्तार कर पुलिस ने वह जूता जब्त कर लिया है जो उसने वारदात के समय पहने थे।

दक्षिण दिल्ली जिला की डीसीपी बेनिटा मैरी ने बताया कि इस घटना की जाँच कर रही टीम को पहले समझ में ही नहीं आ रहा था कि महिला का गला क्‍यों काटा गया। इसके बाद जाँच स्पेशल स्टाफ को सौंपी गई। इसके बाद महिला के घर से चर्च तक के रूट पर लगे करीब 100 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरे की फुटेज खँगाली गई। इस दौरान एक कैमरे में महिला के ठीक पीछे एक संदिग्ध दिखाई दिया। उसका चेहरा मास्क से ढका था, इसलिए पहचान नहीं हो पाई। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, इसके बाद साकेत इलाके के कुछ अन्य फुटेज देखे गए तो वह एक ऑटो से साकेत मेट्रो स्टेशन के पास उतरता दिखा। इस फुटेज में उसका चेहरा तो नहीं दिखा, लेकिन जूते पर बना एक लोगो साफ दिख गया। इसके बाद एक महीने से ज्यादा समय तक साकेत के आसपास आरोपित की तलाश चलती रही। एक दिन पुलिस को वैसे ही जूता पहने हुए एक लड़का दिखा जो कैमरे में नजर आया था। इसके बाद पुलिस ने पकड़कर उससे पूछताछ तो उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया।

दिल्ली के 250 EWS फ्लैट में शिफ्ट किए जाएँगे टेंट वाले 1100 रोहिंग्याः खाने-पीने से लेकर TV-फोन तक सारे इंतजाम करेगी सरकार, पुलिस सुरक्षा भी

दिल्ली में रह रहे करीब 1100 रोहिंग्याओं को टेंट से निकालकर पक्की छत देने के प्रयास तेज हो गए हैं। जल्द ही उन्हें सभी मूलभूत सेवाएँ मुहैया कराते हुए EWS फ्लैट मिलेंगे और साथ में दिल्ली पुलिस का संरक्षण भी। इस बात की पुष्टि केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी की है।

केंद्र सरकार में आवास और शहरी मामलों के मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने अपने ट्वीट में लिखा, “भारत ने हमेशा उन लोगों का स्वागत किया है जिन्होंने देश में शरण माँगी है। एक ऐतिहासिक फैसले में सभी रोहिंग्या शरणार्थियों को दिल्ली के बक्करवाला इलाके में ईडब्ल्यूएस फ्लैटों में ट्रांस्फर किया जाए जाएगा। वहाँ उन्हें मूलभूत सुविधाएँ, यूएनएचसीआर आईडी और 24 घंटे दिल्ली पुलिस का संरक्षण प्रदान किया जाएगा।”

दिल्ली सरकार के अधिकारियों के साथ हुई थी बैठक

बता दें कि सरकार का यह निर्णय दिल्ली के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में दिल्ली सरकार के अधिकारियों, दिल्ली पुलिस और गृह मंत्रालय के साथ हुई उच्च स्तरीय बैठक के बाद लिया गया है। ये बैठक जुलाई के आखिरी हफ्ते में हुई थी। दिल्ली सरकार ने कहा था कि मदरपुर खादर में जहाँ रोहिंग्या रहते थे वहाँ आग लगने के बाद वह रोहिंग्याओं के टेंट के लिए हर महीने 7 लाख रुपए खर्च करते हैं।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “इन शर्णार्थियों (रोहिंग्याओं) को जल्द ही दिल्ली के बाहरी इलाके बक्करवाला गाँव में एनडीएमसी फ्लैट में शिफ्ट किया जाएगा। वहाँ EWS कैटेगरी से जुड़े कुल 250 फ्लैट हैं जो मदनपुर खादर कैंप में रह रहे 1100 रोहिंग्याओं को दिए जाएँगे।”

दिल्ली पुलिस करेंगी रोहिंग्याओं का संरक्षण

बैठक में दिल्ली पुलिस को निर्देश दिए गए कि वो उस परिसर की सुरक्षा में तैनात होंगे। वहीं सोशल वेल्फेयर डिपार्टमेंट इन लोगों को उन फ्लैट्स में फैन, तीन समय खाना, लैंडलाइन फोन, टीवी, आदि चीजें उपलब्ध करवाएगा। इसी तरह दिल्ली सरकार को कहा गया है कि वो बुनियादी जरूरतों से इन फ्लैट को पूरा करें और इसे फॉरेशन रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस को हैंडओवर किया जाए, ताकि वो रोहिग्याओं को यहाँ शिफ्ट करवा सकें।

कोविड के समय आइसोलेशन सेंटर थे ये फ्लैट

जानकारी के मुताबिक कोविड के दौरान एनडीएमसी ने ये फ्लैट दिल्ली सरकार को इसलिए दिए गए थे कि वे वहाँ कोविड संक्रमण के संदिग्धों को आइसोलेट करें। हालाँकि अब यहाँ रोहिंग्याओं को रखने का निर्णय लिया गया है। बताया जा रहा है कि जिन रोहिंग्याओं को यहाँ शिफ्ट किया जाएगा, उनके पास UNHCR की यूनिक आईडी है और उनकी हर डिटेल भी रिकॉर्ड में है।

आमिर खान लीजेंड, हम उनका बायकॉट नहीं कर सकते जो बॉलीवुड को सबसे ज्यादा बिजनेस देते हैंः ‘लाल सिंह चड्ढा’ पर बोलीं एकता कपूर

बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान (Aamir Khan) और करीना कपूर खान (Kareena Kapoor Khan) की फिल्म ‘लाल सिंह चड्ढा’ बॉक्स ऑफिस पर धराशायी हो गई है। फिल्म के कलाकारों और मेकर्स को भी इस बात का अंदाजा भी नहीं था कि ‘लाल सिंह चड्ढा’ 5 दिन में 50 करोड़ रुपए भी नहीं कमा पाएगी। आमिर खान के पुराने बयानों की वजह से इस फिल्म का बहिष्कार किया जा रहा है।

‘लाल सिंह चड्ढा’ के विरोध के बीच बालाजी टेलीफिल्म की हेड और प्रोड्यूसर एकता कपूर ने आमिर खान का समर्थन किया है। एकता कपूर का कहना है कि आमिर खान लीजेंड हैं। उनका बायकॉट करना सही नहीं है। ‘नवभारत टाइम्स’ से बात करते हुए एकता कपूर (Ekta Kapoor) ने कहा, “कितनी अजीब बात है कि हम उन लोगों को बायकॉट कर रहे हैं, जिन्होंने पूरी फिल्म इंडस्ट्री को सबसे ज्यादा बिजनेस दिया है। इंडस्ट्री के सभी खान स्पेशली आमिर खान (Aamir Khan) द लीजेंड। हम उन्हें बायकॉट नहीं कर सकते।”

एकता कपूर मंगलवार (16 अगस्त 2022) को अपने प्रोडक्शन हाउस में बनी निर्देशक अनुराग कश्यप की तापसी पन्नू स्टारर फिल्म ‘दोबारा’ की स्क्रीनिंग में पहुँची थीं। इस दौरान उनसे फिल्म ‘लाल सिंह चड्ढा’ और आमिर खान के बायकॉट पर सवाल किया गया तो उन्होंने फिल्म और अभिनेता का समर्थन किया। एकता ने कहा, “सॉफ्ट एम्बेस्डर ऑफ इंडिया आमिर खान का बायकॉट नहीं किया जा सकता।”

कमाई के मामले में ‘लाल सिंह चड्ढा’ मेकर्स और फैंस की उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पाई है। 11 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज हुई आमिर खान की फिल्म बॉक्स ऑफिस पर 5 दिन में 50 करोड़ रुपए भी नहीं कमा पाई। वीकेंड में फिल्म की कमाई में उछाल देखकर लगा था कि फिल्म 5वें अच्छा बिजनेस करेगी, लेकिन ये भी नहीं हुआ।

गौरतलब है कि ‘लाल सिंह चड्ढा’ का बॉक्स ऑफिस पर बुरा हाल होने के बाद फिल्म आलोचक तरण आदर्श ने कहा था कि कभी भी बहिष्कार के आह्वान को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा था, “यह कहना बंद करिए कि बॉयकॉट के आह्वान का फिल्मों पर कोई असर नहीं पड़ता। कबूल करिए कि बहिष्कार के आह्वान से बॉक्स ऑफिस पर फर्क़ पड़ता है। खासकर ‘लाल सिंह चड्ढा’ के मामले में ये हुआ है। अब इसका सामना करें।”

कर्नाटक के तुमकुरु में भी वीर सावरकर का पोस्टर फाड़ा, शिवमोगा में बवाल पर बोले कॉन्ग्रेस नेता- मुस्लिमों के इलाके से टीपू सुल्तान को क्यों हटाया

कर्नाटक के शिवमोगा के बाद अब तुमकुरु में भी मंगलवार (16 अगस्त 2022) को वीर सावरकर के पोस्टर फाड़े जाने की घटना प्रकाश में आई है। अराजक तत्वों ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर सड़कों पर लगाए गए पोस्टर्स को फाड़ा

तुमकुरु के एसपी राहुल कुमार ने बताया, “वीर दामोदर सावरकर का एक पोस्टर तुमकुरु में अशोका रोड पर लगा था जिसे 15 कुछ अज्ञात लोगों ने माहौल बिगाड़ने की नीयत से फाड़ दिया। हमने केस को दर्ज किया है। आगे की जाँच की जा रही है।”

इस बीच पूर्व सीएम व विपक्ष के नेता सिद्धारमैया का बड़ा अटपटा बयान मीडिया में आया। उन्होंने अराजक तत्वों को दोषी ठहराने की बजाय पूछा, “आखिर उन्होंने मुस्लिम इलाकों में सावरकर के पोस्टर क्यों लगाए और टीपू सुल्तान के क्यों हटाए? ये बीजेपी की डबल स्टैंडर्ड पॉलिटिस्क्स है।”

शिवमोगा में बवाल

बता दें कि इससे पहले शिवमोगा में इसी मामले पर बवाल हुआ था। दो गुटों की झड़प और एक व्यक्ति को चाकू घोंपे जाने के बाद वहाँ प्रशासन ने धारा 144 लागू कर दी थी। शिवमोगा की घटना में हिंदूवादी संगठनों ने अहमद सर्किल पर वीर सावरकर की फोटो को लगाया था, जिसके कुछ देर बाद वहाँ टीपू सुल्तान का झंडा लेकर दूसरे समुदाय के युवक पहुँच गए और तस्वीर को हटाने की कोशिश की गई। देखते ही देखते दोनों समुदायों के बीच बहस शुरु हो गई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज भी किया। मगर उपद्रवी नहीं रुके। अंत में शिवमोगा पुलिस को धारा 144 लागू करनी पड़ी।

चश्मदीदों ने पूरे बवाल को लेकर कहा था, 15 अगस्त को जब पूरा देश स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगाँठ की खुशी में डूबा था, तब वीर सावरकर का पोस्टर फाड़ने 50-60 गुंडे इकट्ठा होकर आए और उन्होंने तिरंगे के अगल-बगल में लगाए गए पोस्टर्स को फाड़ दिया। चश्मदीदों के मुताबिक ऐसा करते समय न केवल स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान किया गया बल्कि तिरंगे को भी अपमानित किया गया।

वहीं जिस व्यक्ति को पूरे बवाल के बीच कट्टरपंथियों ने चाकू घोंपा। उसे लेकर भी चश्मदीदों ने बताया कि उस व्यक्ति ने शायद माथे पर तिलक लगा रखा था। ऐसे में जब पूरा बवाल हुआ और वो अपने घर लौटने लगा तो कुछ लोगों ने उसे पकड़ा और उसे चाकू घोंप दिया। उसका इलाज अस्पताल में चल रहा है। घटना के संबंध में 4 आरोपित गिरफ्तार हुए हैं। इनमें से तीन का नाम अब्दुल, नदीम और जबीउल्लाह है। जबीउल्लाह को मुख्य आरोपित बताया गया है।

‘तिरंगा रैली में शामिल हुए, इसीलिए मारा’: आतंकी संगठन ने ली कश्मीरी पंडित की हत्या की जिम्मेदारी, नाम पूछ कर भून डाला था

जम्मू-कश्मीर के शोपियाँ में आतंकियों ने मंगलवार (16 अगस्त, 2022) को सेब के एक बागान से आम नागरिकों पर गोलियाँ चलाई। इस गोलीबारी में एक कश्मीरी हिन्दू सुनील कुमार भट्ट की मौत हो गई है। वहीं उनके भाई पिंटू कुमार भट्ट का अस्पताल में इलाज चल रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आतंकी संगठन केएफएफ (कश्मीर फ्रीडम फाइटर्स) ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है। आतंकी संगठन का कहना है कि कश्मीरी पंडित भाई तिरंगा रैली में शामिल हुए। वे लोगों को भी इसमें शामिल होने के लिए प्रोत्साहित कर रहे थे, इसलिए उन पर हमला किया।

बताया जा रहा है कि आतंकियों ने सुनील पर हमला करने से पहले उनका नाम पूछा था और फिर उन्हें गोलियों से भून दिया। वहीं, सुनील के पड़ोसी ने बताया कि वह अपने भाई पिंटू के साथ बाग में काम कर रहे थे। उसी दौरान आतंकी उनके पास पहुँचे और उनका नाम पूछा। फिर आतंकियों ने दोनों पर गोलियाँ चला दी। एक गोली पिंटू को भी लगी। लोगों का कहना है कि जिस तरह से हमला किया गया है, ऐसा लगता है कि कई दिनों से उनकी रेकी की जा रही थी। घटना के बाद से लोगों में काफी आक्रोश है। सुनील भट्ट् की चार बेटियाँ हैं, जिनका अपने पिता के लिए रो- रोकर बुरा हाल हो रहा है।

भाजपा नेता निर्मल सिंह ने इस घटना पर दुख जताते हुए कहा, “आतंकियों ने एक बार फिर कायराना हरकत की है। सुनील कुमार अपना काम कर रहे थे फिर भी आतंकियों ने उनकी हत्या कर दी, लेकिन वे अपने मंसूबों में कामयाब नहीं हो पाएँगे।”

कश्मीर जोन पुलिस ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से आज इस घटना की जानकारी दी। पुलिस के अनुसार, शोपियाँ के चोटीपोरा में आतंकियों ने आज आम नागरिकों पर गोलियाँ चलाई। इस दौरान एक अल्पसंख्यक कश्मीरी हिन्दू सुनील कुमार भट्ट की मौत हो गई, जबकि उनके भाई गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। घटना के बाद से पुलिस और सुरक्षाबल अलर्ट मोड पर हैं। पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी गई है। बताया जा रहा है कि जम्मू-कश्मीर में स्वतंत्रता दिवस के दिन भी आतंकियों ने दो जगहों पर ग्रेनेड अटैक किए थे। कुछ दिन पहले ही बडगाम में मुठभेड़ के दौरान आतंकी लतीफ राथर मारा गया था। इसके बाद दूसरी बार आम नागरिक पर आतंकियों ने हमला किया है।

बता दें कि घाटी में आतंकवादी लगातार टारगेट किलिंग की घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। पिछले हफ्ते बांदीपोरा जिले में आतंकियों ने बिहार के एक मजदूर अमरेज की हत्या कर दी थी। इससे पहले भी आतंकी कई कश्मीरी हिन्दुओं को मौत के घाट उतार चुके हैं। इसके कारण घाटी में बसे हिंदुओं में डर का माहौल है। वे यहाँ से पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं। अल्पसंख्यक हिन्दू सरकारी कर्मचारियों ने कश्मीर के कुलगाम जिले में 2 जून 2022 को इस्लामिक आतंकवादियों द्वारा एक बैंक मैनेजर विजय कुमार की गोली मारकर हत्या करने के तुरंत बाद 3 जून को कश्मीर छोड़ने का फैसला लिया था। 

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