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NIA करेगी प्रवीण नेट्टारू हत्याकांड की जाँच: कर्नाटक के CM बोम्मई ने कहा- यह संगठित अपराध का मामला, अंतर्राज्यीय गिरोह हैं शामिल

कर्नाटक सरकार (Karnataka Government) ने भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के कार्यकर्ता प्रवीण नेट्टारू की हत्या की जाँच राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) को सौंपने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने शुक्रवार (29 जुलाई 2022) को इसकी घोषणा की।

बता दें कि 26 जुलाई 2022 को प्रवीण नेट्टारू की मंगलुरु इलाके में कुल्हाड़ी से काटकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में पुलिस ने शफीक और ज़ाकिर नाम के 2 आरोपितों को गिरफ्तार किया है। हत्या के प्रदेश में तनाव का माहौल है।

मुख्यमंत्री बोम्मई ने कहा, “हम सब ने आपस में चर्चा करके यह तय किया है कि प्रवीण हत्याकांड की जाँच NIA को सौंपी जाएगी। यह हत्या संगठित अपराध है, जो अंतर्राज्यीय अपराधियों द्वारा की गई है। इस मामले में NIA द्वारा और अधिक तेज गति से जाँच करवाने के लिए हम गृह मंत्रालय को पत्र भेज रहे हैं।”

गौरतलब है कि प्रवीण की हत्या के बाद से उनके परिजन और भाजपा के स्थानीय नेता मामले की उच्चस्तरीय जाँच की माँग कर रहे थे। खुद मुख्यमंत्री ने मामला अन्य राज्यों के सीमा क्षेत्र में होना बताकर अपने अधिकार सीमित बताए थे। कर्नाटक पुलिस के अधिकारी लगातार केरल पुलिस के सम्पर्क में भी बने हुए थे। इधर भाजपा नेताओं ने विरोध स्वरूप इस्तीफे भी देने शुरू कर दिए थे।

एक दिन पहले मुख्यमंत्री बोम्मई ने मृतक के परिजनों से मुलाक़ात की थी और उन्हें 25 लाख रुपए का चेक सौंपा था। मुख्यमंत्री ने खुद टारगेट किलिंग के खिलाफ टास्क फ़ोर्स बनाने की घोषणा करते हुए अलग से एक मजबूत खुफिया तंत्र बनाने का एलान किया था।

इसी के साथ उन्होंने जरूरत पड़ने पर कर्नाटक में भी उत्तर प्रदेश सरकार का ‘योगी मॉडल’ लाने की बात भी कही थी। प्रवीण की हत्या के आरोपित PFI के सदस्य बताए जा रहे हैं। उधर, आरोपित शफीक के अब्बा मुस्लिम होने के नाते खुद को फँसाने का पुराना और घिसा-पिटा राग अलाप रहे हैं।

फुलवारी शरीफ में पकड़े गए PFI के आतंकियों पर NIA ने दर्ज की 2 FIR, PM मोदी के बिहार दौरे में हमले की थी साजिश

केंद्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने बिहार के फुलवारी शरीफ से पकड़े गए आतंकियों पर दो अलग-अलग FIR दर्ज करवाई है। पहली FIR में 26 संदिग्धों का नाम है जबकि दूसरी FIR में एक आरोपित नामजद है। पहली FIR के मुताबिक कुछ संदिग्ध बिहार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावित दौरे में गड़बड़ी करना चाह रहे थे। वहीं दूसरी FIR गिरफ्तार हुए आरोपित मरगूब अहमद के विरुद्ध दर्ज है। ये सभी आरोपित पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया (PFI) के सदस्य बताए जा रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रधानमंत्री के बिहार के प्रस्तावित दौरे से पहले 11 जुलाई को कुछ संदिग्ध लोगों को फुलवारी शरीफ में शिफ्ट किया गया था। इन सभी को मोदी के दौरे में गड़बड़ी फैलाने के निर्देश थे। NIA उन आरोपितों की तलाश में बिहार के कई हिस्सों में छापेमारी कर रही है। वहीं मरगूब अहमद दानिश उर्फ़ ताहिर के कारनामों की नए सिरे से जाँच के लिए NIA ने अपनी तरफ से केस दर्ज करवाया है। मरगूब अहमद दानिश फ़िलहाल जेल में है।

28 जुलाई को जारी NIA की प्रेसनोट के मुताबिक फुलवारी शरीफ केस से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में लगातार जाँच और छापेमारी की जा रही है। इस दौरान NIA ने पटना, दरभंगा, पूर्वी चम्पारण, नालंदा और मधुबनी जिलों में कुल 10 ठिकानों पर छापेमारी की है। इस मामले में बिहार पुलिस द्वारा 12 जुलाई 2022 को FIR दर्ज की गई थी लेकिन NIA ने 22 जुलाई 2022 को एक बार फिर से FIR दर्ज करवाई है जिसमें IPC की धारा 120, 120- बी, 121, 121-A, 153-A, 153-बी और 34 लगाई गईं है।

NIA के मुताबिक छापेमारी के दौरान कई डिजिटल उपकरण और अन्य सामान बरामद किए गए हैं जिनकी जाँच करवाई जा रही है। गौरतलब है कि पटना पुलिस द्वारा पकड़े गए आरोपित भारत में गज़वा-ए-हिन्द की तैयारी कर रहे थे। इसके लिए इन सभी ने 2023 से काम शुरू करने और 2047 तक भारत में इस्लामी शासन लाने का टारगेट तय किया था।

प्राणघातक ‘पड़ोसी’, जानलेवा ‘पहचान’: प्रवीण हो या कन्हैया लाल या फिर उमेश कोल्हे… हर हिंदू की हत्या में कश्मीर वाला पैटर्न

हाल के दिनों में हिंदुओं की हत्याओं में मृतक के दोस्तों, पड़ोसियों और सहकर्मियों के ही साजिश में शामिल होने के मामले सामने आए हैं। विश्वासघात की ये खबरें भारत की उस ‘गंगा-जमुनी तहजीब’ की पोल खोल कर रख दी हैं, जिसे कई दशकों से भारत की आत्मा के तौर पर प्रचारित किया जाता रहा। इसे स्कूलों-कॉलेजों में खूब पढ़ाया और सिखाया गया।

इस तहजीब को देश के बहुसंख्यक वर्ग ने भाईचारा के रूप में लिया और अपनाया भी, लेकिन दूसरे वर्ग के कट्टरपंथियों ने इसे हमेशा एक अवसर के रूप में इस्तेमाल किया। आज इस भाईचारे और विश्वास का एक-एक तिनका बिखरता दिख रहा है, जो कभी था ही नहीं। साल 2017 में CSDS के सर्वे में खुलासा हुआ था कि देश में केवल 5 फीसदी मुस्लिम ही हिंदुओं को अपना करीबी दोस्त मानते हैं।

कर्नाटक के प्रवीण नेट्टारू की हत्या से लेकर कन्हैया लाल, उमेश कोल्हे, कश्मीर के राजस्व अधिकारी राहुल भट, बैंक मैनेजर विजय कुमार, स्कूल की प्रिंसिपल प्रिंसिपल सुपिन्दर कौर और शिक्षक दीपक चंद से लेकर 1990 के दशक के बालकृष्ण गंजू तक की हत्या में दोस्त, पड़ोसी और सहकर्मियों की संलिप्तता सामने आई है या फिर उन पर शक जाहिर किया गया है।

कर्नाटक में भाजपा युवा मोर्चा (BJYM) के नेता प्रवीण नेट्टारू की 28 जुलाई 2022 को हुई हत्या के सिलसिले में शफीक बेल्लारे और जाकिर सावानुरु को गिरफ्तार किया गया है। शफीक के अब्बू इब्राहिम मृतक प्रवीण की दुकान में काम कर चुके हैं और इनका एक-दूसरे के घर भी आना-जाना भी था।

कहा जा रहा है कि प्रवीण की इसलिए हत्या कर दी गई, क्योंकि उन्होंने राजस्थान के उदयपुर में कन्हैया लाल साहू की इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा दिन-दहाड़े गला रेतकर की गई हत्या की आलोचना की थी। प्रवीण ने अपने फेसबुक पोस्ट में कथित सेक्युलर लोगों को लताड़ लगाई थी।

प्रवीण ने लिखा था, “आज एक गरीब दर्जी को सरेआम काटकर वीडियो बना दिया गया है। ये कट्टरपंथी कह रहे हैं कि हमारा अगला टारगेट प्रधानमंत्री मोदी हैं। आप सब (सेक्युलर) कहाँ हैं… अब आपका वॉइस बॉक्स क्यों जल गया? उस राज्य में कॉन्ग्रेस की सरकार है। अब मुँह क्यों नहीं खोल रहे हैं? क्या तुम्हें गरीब की जिंदगी पर रहम नहीं आया?”

कन्हैया लाल की हत्या भाजपा की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा (Nupur Sharma) के समर्थन में पोस्ट डालने पर की गई थी। कन्हैया लाल की हत्या में भी उसके जानने वालों का हाथ था। कन्हैया लाल जिन पड़ोसियों को अपना दोस्त और मददगार मानते थे, उसी में से एक नाजिम ने उनकी रेकी की थी।

इसी तरह नूपुर शर्मा का समर्थन करने वाले महाराष्ट्र के अमरावती के फर्मासिस्ट उमेश कोल्हे की हत्या में भी उनके दशकों पुराने दोस्त डॉक्टर यूसुफ शामिल था। यूसुफ ने हत्यारों को उकसाया था और खुद रेकी की थी। उमेश के परिवार ने कई बार यूसुफ के परिवार की मदद की थी, लेकिन इसका कोई लाभ नहीं हुआ।

इतना ही नहीं, जम्मू-कश्मीर में हाल ही हुए हिंदू टीचरों और एक राजस्व अधिकारी की हत्या में भी उनके ऑफिस के कुछ मुस्लिम सहकर्मियों पर शक जाहिर किया गया था। कहा गया था कि ऑफिस के कुछ सहकर्मियों ने ही आतंकियों को इनके बारे में सूचना दी थी। इसके बाद आतंकियों ने सबके बीच उनकी हत्या कर दी थी।

अगर खबरों का विश्लेषण करें तो पाएँगे कि लव जिहाद, डकैती, हत्या के देश में ऐसे कई मामले आए हैं, जिनमें पड़ोसी या पहचान वाला व्यक्ति शामिल है। अगर घटनाओं की वर्तमान श्रृंखला सामने नहीं आती तो उन्हें भी एक आम आपराधिक घटना मानकर छोड़ दिया जाता और पहले ऐसा ही माना भी गया। हालाँकि, गुजरात के किशन भराड़, कन्हैया लाल, उमेश कोल्हे, प्रवीण जैसों की हत्या के बाद यह सोचने पर मजबूर होना पड़ रहा है कि ये घटनाएँ भी बहुसंख्यकों के प्रति सुनियोजित ‘हेट क्राइम’ का ही हिस्सा हैं।

पाकिस्तान के जन्मदाता मुहम्मद अली जिन्ना की उस शादी को कौन नहीं जानता, जिसे उन्होंने अपने ही दोस्त सर दीन शॉ की नाबालिग बेटी के साथ अंजाम दिया था। यह भी तो विश्वासघात था। जिस घर में जिन्ना दोस्त और अंकल की हैसियत से आते-जाते थे, उसी घर की 16 साल की नाबालिग पारसी लड़की रति को बहला लिया और अपने से 24 साल छोटी लड़की से शादी कर ली और धर्मांतरण भी कराया।

मुख्य सवाल है कि आखिर हिंदुओं या कह लें गैर-मुस्लिमों से इस्लाम के मानने वाले लोगों में इतनी नफरत क्यों है, कि वे दोस्त और पड़ोसी तक को नहीं बख्श रहे हैं। इसका जवाब उनके मजहबी किताबों में मिलेगा। मुस्लिमों की धार्मिक किताब कुरान में लिखा है, “हे ‘ईमान’ लाने वालों! (मुसलमानों) उन ‘काफिरों’ से लड़ो जो तुम्हारे आसपास हैं, और चाहिए कि वे तुममें सख्ती पाएँ।” (११.९.१२३ पृ. ३९१)

किताब में आगे लिखा है, “हे ‘ईमान’ लाने वालों! ‘मुशरिक’ (मूर्तिपूजक) नापाक हैं।” (१०.९.२८ पृ. ३७१)। एक आयत में लिखा है, ”निःसंदेह ‘काफिर’ तुम्हारे खुले दुश्मन हैं।” (५.४.१०१. पृ. २३९)। ये वो छब्बीस आयतें हैं, जिनको लेकर कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी और कहा गया था कि ये दूसरे धर्म के प्रति नफरत फैलाते हैं।

उन्हीं छब्बीस आयतों में एक आयत यह भी है, “हे नबी! ‘ईमान वालों’ (मुसलमानों) को लड़ाई पर उभारो। यदि तुम में बीस जमे रहने वाले होंगे तो वे दो सौ पर प्रभुत्व प्राप्त करेंगे और यदि तुम में सौ हो तो एक हजार काफिरों पर भारी रहेंगे, क्योंकि वे ऐसे लोग हैं जो समझ-बूझ नहीं रखते।” (१०.८.६५ पृ. ३५८)

AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी के भाई अकबरूद्दीन 24 घंटे के लिए पुलिस हटाकर हिंदुओं को सबक सिखाने की बात भी इसी से प्रेरित है। यही नहीं, पटना के फुलवारी शरीफ में छापेमारी में मिला PFI का ‘मिशन 2047’ दस्तावेज भी इसी से प्रेरित है। दस्तावेज में कहा गया है कि अगर 5 फीसदी मुस्लिम साथ आ जाएँ तो भारत के काफिर घुटने पर आ जाएँगे।

मुगल काल के दौरान देश में जबरन धर्मांतरण के बावजूद भारत के लोग अपनी संस्कृति से जुड़े हुए थे। वे जानते थे कि उन्होंने मजबूरी में धर्मांतरण तो कर लिया है, लेकिन उनका हृदय और स्वभाव हिंदू ही रहा। कश्मीर और राजस्थान एवं यूपी के कई ऐसे गाँव हैं, जो मुस्लिम होने के बावजूद खुद को हिंदू मानते रहे। इनमें से एक हरियाणा और राजस्थान का क्षेत्र मेवात भी है।

मेवात के मुस्लिम कुछ दशक पहले तक खुद को हिंदू मूल के बताते रहे, लेकिन बरेली, सलफी जैसे कट्टरपंथी मुस्लिम विचारधारा के फैलाव और कुछ हद तक राजनीतिक तुष्टिकरण ने उन्हें कट्टर और हिंदुओं को ‘काफिर’ बना दिया। आज मेवात का क्षेत्र आतंकी एवं आपराधिक गतिविधियों के लिए कुख्यात हो चुका है। वहाँ पर आज वही मुस्लिम अपने पड़ोसी हिंदुओं को प्रताड़ित और जबरन धर्मांतरित कराने में लगे हैं, जिन्हें कुछ दशक पहले तक अपना मानते थे।

कट्टरपंथी मुल्ले-मौलवियों की तकरीरों में लोगों को और देश विरोधी गतिविधियों में शामिल कुछ मदरसों में बच्चों को यह बार-बार याद दिलाया जाता है कि उन्हें क्या करना है। परिणाम यह होता है कि दशकों की दोस्ती के बावजूद सिर्फ उस एक पोस्ट के लिए निर्मम हत्या कर दी जाती है, जिसमें वह उस महिला के पक्ष में खड़ा होता है, जो डिबेट में वही बात कहती है, जो हत्यारों के मजहबी किताब कहते हैं।

अगर इस हेट क्राइम को समाज ने इसे गंभीरता से नहीं लिया और इसके प्रति जागरूक नहीं हुए तो वह दिन दूर नहीं जब इसके गंभीर परिणाम देखने के मिल सकते हैं। इसमें सरकार की भूमिका तो महत्वपूर्ण है ही, इसके साथ ही उन उदारवादी मुस्लिमों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है जो आज भी भारत और भारतीयता से तन-मन-धन से जुड़े हैं और हृदय से प्यार करते हैं।

कॉन्ग्रेस नेता अधीर रंजन के खिलाफ मध्य प्रदेश में FIR, महामहिम द्रौपदी मुर्मू को ‘राष्ट्रपत्नी’ कहने का मामला

भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पर अभद्र टिप्पणी करने के मामले में कॉन्ग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी पर मध्य प्रदेश के डिंडोरी में FIR दर्ज कर ली गई है। डिंडोरी के एडिशनल SP मरकाम ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया है कि केस को दिल्ली ट्रांसफर किया जा रहा है। यह FIR भाजपा के एक नेता की शिकायत पर 28 जुलाई 2022 (गुरुवार) को दर्ज हुई है।

पुलिस के मुताबिक, “आवेदक का नाम ओम प्रकाश ध्रुवे है। आवेदक ने भारत के राष्ट्रपति पर अधीर रंजन के बयान पर कार्रवाई की माँग की है। यह घटना दिल्ली में घटी है इसलिए थाना कोतवाली, जिला डिंडोरी में जीरो FIR दर्ज कर के केस को दिल्ली भेजा जा रहा है।”

शिकायतकर्ता ओम प्रकाश भाजपा के राष्ट्रीय मंत्री भी हैं। शिकायतकर्ता ने कहा, “देश की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति के खिलाफ जिस प्रकार से अधीर रंजन ने टिप्पणी की है उस से पूरा देश और ख़ास कर महिला व आदिवासी समाज आहत है। हम अधीर रंजन पर कड़ी कार्रवाई की माँग करते हैं।”

देश भर में हो रहा विरोध प्रदर्शन

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अधीर रंजन चौधरी के खिलाफ देश भर में भाजपा कार्यकर्ता विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इस विरोध प्रदर्शन में केंद्रीय मंत्री भी शामिल हैं। दिल्ली में अधीर रंजन के घर के आगे पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी है। अब वहाँ बैरिकेड लगा दिए गए हैं।

गौरतलब है कि गुरुवार (28 जुलाई, 2022) को कॉन्ग्रेस राज्यसभा सांसद अधीर रंजन चौधरी द्वारा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (Draupadi Murmu) को ‘राष्ट्रपत्नी’ शब्द से सम्बोधित किया था। इस मामले में राष्ट्रीय महिला आयोग ने अधीर रंजन को नोटिस भेज कर जवाब माँगा है जिसकी सुनवाई आगामी 3 अगस्त को है।

दिल्ली की कोर्ट ने माना जहाँगीरपुरी हिंसा ‘साजिश’, 37 आरोपितों को पेश होने का आदेश: हिंदुओं पर हमले की 6 दिन पहले हो गई थी तैयारी

दिल्ली की एक अदालत ने गुरुवार (28 जुलाई 2022) को जहाँगीरपुरी हिंसा पर दाखिल आरोप-पत्र पर संज्ञान लिया। सभी 37 आरोपितों को अदालत ने 6 अगस्त को पेश होने का आदेश दिया है। रोहिणी कोर्ट ने यह भी माना कि हिंसा साजिश के तहत अंजाम देने की बात को साबित करने के लिए चार्जशीट में पर्याप्त सबूत हैं।

मुख्य मेट्रोपोलिटिन मजिस्ट्रेट दीपिका सिंह की कोर्ट ने आरोपितों को नोटिस जारी करते हुए यह भी माना कि हिंसा 2020 में दिल्ली में हुए सीएए विरोधी दंगों की कड़ी है। जहाँगीरपुरी में इस साल अप्रैल में हुनमान जयंती पर निकाली गई शोभा यात्रा पर हमला किया गया था।

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 15 जुलाई 2022 को कोर्ट में चार्जशीट दाखिल करते हुए 16 अप्रैल 2022 को हुई हिंसा को सुनियोजित बताया था। पुलिस ने अपनी चार्जशीट में मोहम्मद अंसार, तबरेज और शेख इशर्फिल को मुख्य आरोपित बनाया है। इन तीनों पर दंगों की प्लानिंग और उसे अंजाम देने का आरोप है।

चार्जशीट के मुताबिक हमले से 6 दिन पहले ही इसकी साजिश रची जा चुकी थी। छतों पर शीशे और पत्थर जमा कर लिए गए थे। काँच की बोतलें और पत्थर फेंकने के लिए शेख इशर्फिल की ही छत का प्रयोग किया गया था। पुलिस ने इन तमाम जानकारियों को जुटाने के लिए 2300 मोबाइल फोन के डाटा और 58 सीसीटीवी फुटेज की जाँच की।

शेख इशर्फिल को इलाके का पार्किंग माफिया भी कहा जाता है। उस पर CAA हिंसा में भी सक्रिय भागीदारी का आरोप है। उसके 2 बेटे भी आपराधिक सोच वाले बताए जा रहे हैं, जिनके नाम अशनूर और मोहम्मद अली हैं। पुलिस ने इस केस में 2 नाबालिगों को भी पकड़ा है जिनका मामला किशोर न्याय बोर्ड में अलग से चल रहा है।

यह चार्जशीट 2000 पन्नों की है। पुलिस ने अपनी चार्जशीट में कुल 45 लोगों को आरोपित किया है। इसमें 37 को अब तक गिरफ्तार किया जा चुका है, जिसमें तीनों मुख्य आरोपित भी शामिल हैं। आरोप पत्र में यह भी बताया गया है कि जिस शोभायात्रा पर हमला किया गया था उसके लिए प्रशासन से अनुमति नहीं ली गई थी, जिसकी जाँच अलग से की जा रही है।

गिरफ्तार आरोपितों में से कुछ को जमानत भी मिल चुकी है। पुलिस ने कोर्ट में सबूत के तौर पर वो वीडियो भी पेश किए हैं जो आरोपितों की पहचान में काम आए थे। चार्जशीट में आरोपितों पर IPC की धारा 147, 148, 149, 186, 353, 332, 323, 427, 436, 307 और आर्म्स एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है।

तमिलनाडु BJP अध्यक्ष को मद्रास HC ने बताया ‘लोकतंत्र का सजग प्रहरी’, फर्जी दस्तावेजों पर पासपोर्ट बनाने का मामला किया था उजागर

जाली दस्तावेजों के सहारे पासपोर्ट जारी करने के मामले में मदुरै शहर के पूर्व पुलिस आयुक्त (सीओपी) एस डेविडसन देवाशिरवथम (अब एडीजीपी इंटेलिजेंस) को मद्रास हाई कोर्ट ने क्लीन चिट दे दिया है। वहीं इस मामले में मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ ने बुधवार को तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष के अन्नामलाई की इस घोटाले को उजागर करने के लिए सराहना की। जस्टिस जीआर स्वामीनाथन ने बीजेपी नेता को लोकतंत्र का सजग प्रहरी करार दिया।

कोर्ट के आदेश में जस्टिस जीआर स्वामीनाथन ने कहा, “मैं भारतीय जनता पार्टी के राज्य अध्यक्ष के अन्नामलाई को इस मुद्दे को उठाने के लिए बधाई देता हूँ। उन्होंने लोकतंत्र में एक चौकीदार की भूमिका निभाई है।”

कोर्ट ने कहा कि जज शून्य में नहीं रहते हैं और वे जमीनी हकीकत से अलग-थलग भी नहीं हैं। जस्टिस स्वामीनाथन कहते हैं, “मैंने अखबारों में पढ़ा कि राज्य भाजपा अध्यक्ष के अन्नामलाई ने इस मुद्दे को बड़े पैमाने पर उठाया था।”

यह मामला भारतीय पासपोर्ट से संबंधित है जो कथित तौर पर श्रीलंकाई नागरिकों को जारी किया गया था, जिन्होंने पते और पहचान प्रमाण के रूप में फर्जी दस्तावेज जमा किए थे। इस घोटाले में क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय और राज्य पुलिस के अधिकारी शामिल हैं।

याचिकाकर्ता के आवेदन को संशोधित करने से इनकार करने वाले पासपोर्ट प्राधिकरण के निर्णय को चुनौती देने वाले एक मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट का ध्यान धोखाधड़ी से भारतीय पासपोर्ट हासिल करने के मामले में गया। उन्हें एक जनहित याचिका (पीआईएल) के बारे में सूचित किया गया था, जिसमें क्यू शाखा को तीन महीने के भीतर इस मुद्दे की जाँच को खत्म करने को कहा गया था, जिसे बाद में तीन महीने के लिए बढ़ा दिया गया था।

जस्टिस स्वामीनाथन ने मामले में टिप्पणी करते हुए कहा, “मुझे आश्चर्य है कि माननीय खंडपीठ के इस निर्देश का पालन नहीं किया गया। हालाँकि, इस आधार पर अंतिम रिपोर्ट दायर की जानी बाकी थी कि दोषी सरकारी कर्मचारियों पर मुकदमा चलाने के लिए मंजूरी नहीं मिली थी।”

कोर्ट ने कहा, “यह निंदनीय है कि मदुरै शहर का एक पुलिस स्टेशन धोखाधड़ी से 54 पासपोर्ट जारी करने में शामिल है। भ्रष्ट तत्वों को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाना चाहिए।” इस मामले में अपीलकर्ता की ओर से अधिवक्ता डी रमेशकुमार पेश हुए, जबकि प्रतिवादियों की तरफ से वकील वी मलयेंद्रन और सरकारी अधिवक्ता जी शिवराजा पेश हुए।

इस मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने टिप्पणी की कि सत्यापन प्रक्रिया में क्षेत्रीय जाँच पुलिस अधिकारी सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। घूस का पैसा नोडल अधिकारी के पास पैसा रुक जाता था और मामले में उक्त रैंक से ऊपर के अधिकारियों की भागीदारी नहीं हो सकती है।

ट्रस्ट की आड़ में 12 नाबालिग लड़कियों की तस्करी, केरल के पादरी समेत तीन को रेलवे पुलिस ने कोझिकोड में किया गिरफ्तार

केरल पुलिस ने राजस्थान और मध्य प्रदेश से 12 लड़कियों की तस्करी के मामले में केरल के ही एक पादरी समेत तीन को गिरफ्तार किया है। पादरी का नाम रेव जैकब वर्गीज (55) है। वो पेरुंबवूर (एर्नाकुलम) स्थित करुणा भवन चैरिटेबल ट्रस्ट का निदेशक और पेंटेकोस्टल चर्च का पादरी है। उसके साथ दो एजेंटों के खिलाफ इंडियन पीनल कोड (आईपीसी) की धारा 370 (1) (2) (3) (4) (मानव तस्करी) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, मानव तस्करी के मामले में गिरफ्तार जैकब वर्गीज पर आरोप है कि उसने दो एजेंटों के साथ मिलकर राजस्थान से नाबालिग लड़कियों को अवैध रूप से एर्नाकुलम ले जाने की कोशिश की। आरोपित 12 नाबालिग लड़कियों को लेकर बुधवार (27 जुलाई 2022) को ओखा-एर्नाकुलम एक्सप्रेस से केरल ला रहा था। सीक्रेट इनपुट के आधार पर कार्रवाई करते हुए रेलवे सुरक्षा बल और रेलवे पुलिस ने कोझिकोड रेलवे स्टेशन पर उसे रोक लिया।

ट्रेन में जाँच के दौरान नाबालिग लड़कियों के साथ छह वयस्क भी थे। इनमें से चार दो लड़कियों के माता-पिता बताए जा रहे हैं। इनके साथ राजस्थान के दो युवक लोकेश कुमार (29) और श्याम लाल (25) भी शामिल थे। युवकों के रेलवे स्टेशन पर पहुँचने पर शक होने पर सह यात्रियों ने इसकी जानकारी पुलिस को दी।

कोझिकोड रेलवे पुलिस ने आईपीसी की धारा 370 के तहत मानव तस्करी का मामला दर्ज कर लोकेश और श्याम को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस को युवकों से ही पादरी के बारे में जानकारी मिली। पूछताछ के दौरान लड़कियों के साथ मौजूद माता-पिता और युवकों ने कहा कि वे पेरुंबवूर में करुणाभवन चैरिटेबल ट्रस्ट जा रहे थे। बाद में पादरी जैकब को एर्नाकुलम में कुरुप्पमपडी पुलिस ने हिरासत में ले लिया और गुरुवार को कोझिकोड रेलवे पुलिस को सौंप दिया। उसे कोझिकोड न्यायिक प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट कोर्ट -I के समक्ष पेश किया गया, जहाँ से उसे 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

इस मामले को लेकर कोझिकोड रेलवे पुलिस के एसआई जमशीद पी ने कहा, “शुरुआती जाँच से पता चला है कि लड़कियों को बेहतर शिक्षा और सुनहरे भविष्य का लालच देकर राजस्थान से लाया गया था। दोनों युवक संस्थान के ही पुराने कर्मी हैं। किसी भी संस्थान के माध्यम से बच्चों के ट्रैफिकिंग के लिए राज्य बाल कल्याण समिति की परमीशन लेने की जरूरत होती है। जबकि, ट्रस्ट के पास यह नहीं था।”

फिलहाल सभी 12 लड़कियों को कोझिकोड सीडब्ल्यूसी द्वारा लड़कियों के लिए संचालित सरकारी बाल गृह वेल्लीमदुकुन्नू में रखा गया है। खास बात ये है कि लड़कियों की तस्करी के मामले में चर्चा में आया पेरुम्बवूर में करुणाभवन चैरिटेबल ट्रस्ट बीते चार साल से एक्टिव ही नहीं है।

अक्षय कुमार की फिल्म पर सुब्रमण्यम स्वामी फायर: कहा- रामसेतु मुद्दे को गलत तरीके से दिखाने के लिए करेंगे केस, अभिनेता की गिरफ्तारी हो

बॉलीवुड एक्टर अक्षय कुमार (Akshay Kumar) की फिल्म रामसेतु (Ram Setu) रिलीज से पहले ही विवादों में घिर गई है। बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने इस फिल्म को लेकर अक्षय कुमार के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाने की बात कही है। स्वामी का दावा है कि फिल्म में रामसेतु मुद्दे को गलत ढंग से फिल्माया गया है। इसके मुआवजे के लिए वे मामला दर्ज कराएँगे।

स्वामी ने शुक्रवार (29 जुलाई 2022) को ट्वीट कर कहा, “मेरे सहयोगी वकील सत्या सभरवाल ने मुआवजे के मुकदमे को अंतिम रूप दे दिया है। मैं अभिनेता अक्षय कुमार और कर्मा मीडिया पर उनकी फिल्म में राम सेतु मुद्दे के गलत चित्रण के कारण हुए नुकसान के चलते मुकदमा दर्ज कर रहा हूँ।”

स्वामी ने एक अन्य ट्वीट में कहा, “अगर अभिनेता अक्षय कुमार एक विदेशी नागरिक हैं, तो हम उन्हें गिरफ्तार करने और उन्हें देश से बेदखल करने के लिए कह सकते हैं।”

वहीं अधिवक्ता सत्य सभरवाल ने ट्वीट कर कहा है, “रामसेतु पर आधारित एक फिल्म का निर्माण कर्मा मीडिया द्वारा किया गया है, जिसमें डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश को पोस्टर के रूप में इस्तेमाल किया गया है। इसको लेकर मुकदमा दायर किया जाएगा। डॉ. स्वामी की याचिका में पोस्टर और माननीय सर्वोच्च न्यायालय का आदेश संलग्न है।”

बता दें कि फिल्म में अक्षय कुमार के अलावा जैकलीन फर्नांडीज और नुसरत भरुचा भी मुख्य भूमिका में हैं। फिल्म का निर्देशन अभिषेक शर्मा ने किया है। वहीं क्रिएटिव प्रोड्यूसर डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी हैं। अक्षय कुमार की यह फिल्म इस साल दिवाली (24 अक्टूबर 2022) पर सिनेमाघरों में रिलीज होगी।

स्मृति ईरानी की बेटी से जुड़े ट्वीट-पोस्ट-Video डिलीट करेंः दिल्ली हाई कोर्ट का गोवा बार मामले में आदेश, काॅन्ग्रेस नेताओं को समन

केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी की तरफ से दायर मानहानि मामले में दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) ने शुक्रवार (29 जुलाई 2022) को कॉन्ग्रेस नेताओं जयराम रमेश, पवन खेड़ा और नेट्टा डिसूजा को समन जारी किया है। स्मृति ईरानी ने उनकी और उनकी बेटी जोइश ईरानी के खिलाफ निराधार आरोप लगाने के लिए कॉन्ग्रेस नेताओं के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज कराते हुए 2 करोड़ रुपए से अधिक हर्जाने की माँग की है।

जस्टिस मिनी पुष्कर्ण ने कॉन्ग्रेस के तीन नेताओं को ईरानी एवं उनकी बेटी के खिलाफ लगे आरोपों के संबंध में सोशल मीडिया पर किए गए ट्वीट, रीट्वीट, पोस्ट, वीडियो और फोटो हटाने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि अगर यह नेता 24 घंटे के भीतर उसके निर्देशों का पालन करने में विफल रहते हैं, तो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर, फेसबुक और यूट्यूब को सामग्री को हटाना होगा।

समन जारी होने के बाद जयराम रमेश ने ट्वीट किया, “दिल्ली उच्च न्यायालय ने हमें स्मृति ईरानी द्वारा दायर मामले का औपचारिक जवाब देने के लिए नोटिस जारी किया है। हम अदालत के सामने तथ्यों को पेश करने के लिए उत्सुक हैं। हम ईरानी द्वारा दी जा रही स्पिन को चुनौती देंगे और खारिज करेंगे।”

बता दें कि इससे पहले केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कॉन्ग्रेस नेताओं- जयराम रमेश, पवन खेड़ा और नेट्टा डिसूजा को कानूनी नोटिस भेजकर उनकी बेटी पर लगाए आरोपों के लिए माँफी माँगने के लिए कहा था। कॉन्ग्रेस नेताओं के आरोप लगाने के एक दिन बाद ही स्मृति ईरानी ने ये कदम उठाया था। अब दिल्ली होई कोर्ट ने मामले पर संज्ञान लेते हुए समन भेज दिया है।

क्या है मामला?

कॉन्ग्रेस पार्टी ने आरोप लगाया है कि जोइश ईरानी गोवा में अवैध बार चला रही है। गौरतलब है कि कॉन्ग्रेस के मुख्य प्रवक्ता और महासचिव जयराम रमेश ने मीडिया अध्यक्ष पवन खेड़ा और गुजरात की अखिल भारतीय महिला कॉन्ग्रेस अध्यक्ष नेट्टा डिसूजा के साथ मिलकर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि लाइसेंस सिर्फ रेस्टोरेंट रेस्तरां चलाने के लिए मिला था, लेकिन ईरानी की बेटी ने अपने राजनीतिक दबदबे का इस्तेमाल किया। 

कॉन्ग्रेस द्वारा जोइश पर लगाए जाने वाले इल्जाम एक RTI पर आधारित थे। ये आरटीआई गोवा के ‘आयर्स रॉड्रिक्स’ नाम के कार्यकर्ता ने डाली थी। रॉड्रिक्स वही हैं जिन पर 2017 में एक महिला ने यौन शोषण तक के आरोप लगाए थे। आयर्स ने ही अपनी आरटीआई के नाम पर गोवा के सिली सोल्स कैफे एंड बार पर झूठ फैलाना शुरू किया। उसने दावा किया कि रेस्टोरेंट को फर्जी ढंग से लाइसेंस मिला जो कि ईरानी परिवार द्वारा किए गए भ्रष्टाचार का सबूत है। उसने ये भी बताया कि एक्साइज विभाग रेस्टोरेंट को नोटिस भेज चुका है। उसके दावे के मुताबिक रेस्टोरेंट में फर्जी कागज देकर शराब का लाइसेंस लिया गया।

24 जुलाई को लिखे नोट में उसने कहा कि रेस्टोरेंट को शराब का लाइसेंस एक ऐसे व्यक्ति के नाम पर मिला जो अब इस दुनिया में भी नहीं है। इसके बाद उसने कहा कि गोवा में स्मृति ईरानी और अन्य केंद्र के नेताओं द्वारा खरीदी गई ‘बेनामी’ संपत्ति की जाँच होनी चाहिए ताकि सच सामने आए।

स्मृति ईरानी ने किया आरोपों का खंडन

स्मृति ईरानी ने यह कहते हुए कि इन आरोपों का खंडन किया कि कॉन्ग्रेस ने उनकी बेटी के चरित्र पर आक्षेप लगाया और इसे धूमिल किया है। इसके साथ ही उन्होंने कॉन्ग्रेस नेताओं को इस आरोप का सबूत देने की चुनौती दी। भाजपा नेता ने यह भी कहा कि वह अदालत में इसका जवाब माँगेंगी। स्मृति की बेटी जोइश ने भी कॉन्ग्रेस के आरोपों का खंडन किया और कहा कि वह न तो मालकिन थीं और न ही रेस्टॉरेंट चला रही थीं। 

गिरफ्तारी के बाद अर्पिता मुखर्जी की 4 लक्जरी कारें गायब, सुराग लगाने में जुटी ED: गाड़ी में नकदी या दस्तावेज होने की आशंका

पश्चिम बंगाल (West Bengal) में शिक्षक भर्ती घोटाले मामले में पार्थ चटर्जी (Partha Chatterjee) की करीबी अर्पिता मुखर्जी (Arpita Mukherjee) के फ्लैटों से करोड़ों की नकदी बरामद होने के बाद एक नया मामला सामने आया है। अब अर्पिता मुखर्जी की चार लक्जरी कारें गायब बताई जा रही हैं। ये कारें उसके डायमंड सिटी कॉम्प्लेक्स से गायब हुई हैं।

कहा जा रहा है कि अर्पिता की गिरफ्तारी के बाद ये कारें गायब हुई हैं। सीसीटीवी फुटेज के आधार पर इन कारों का पता लगाया जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स में जाँच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) के सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि इन कारों में कैश भरा हुआ था। यह भी संभावना जताई जा रही है कि इन कारों में केस से संबंधित अहम दस्तावेज हो सकते है।

डायमंड सिटी फ्लैट से अर्पिता मुखर्जी की जो चार गाड़ियाँ गायब हैं, उनमें दो कार अर्पिता के नाम पर है। गायब गाड़ियों में ऑडी A4 WB02AB9561, होंडा सिटी WB06T6000, होंडा सीआरवी WB06T6001 और मर्सिडीज बेंज WB02AE2232 शामिल हैं। ईडी के सूत्रों का कहना है कि जिस रात को अर्पिता मुखर्जी को गिरफ्तार किया गया था, उसी दिन से कारें गायब हैं। उस परिसर से केवल एक सफेद मर्सिडीज जब्त की गई है।

गुरुवार (28 जुलाई 2022) देर शाम को ही ईडी ने कोलकाता के चिनार पार्क इलाके में अर्पिता मुखर्जी से जुड़े एक अन्य अपार्टमेंट पर छापा मारा। ईडी के अधिकारी ने बताया, “यह (चिनार पार्क) अपार्टमेंट अर्पिता मुखर्जी का है और हमें संदेह है कि उसके अन्य फ्लैटों की तरह यहाँ भी नकदी हो सकती है। हम पड़ोसियों से बात कर रहे हैं और यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि यहाँ किस तरह की गतिविधियाँ की जाती हैं।”

उल्लेखनीय है कि अर्पिता मुखर्जी के घरों पर छापे से अब तक तकरीबन 50 करोड़ नकदी और 5 किलो सोना बरामद हो चुकी है। इसके साथ ही अर्पिता के बेलघरिया फ्लैट की तलाशी के दौरान अधिकारियों को दो सेक्स टॉय भी मिले थे।

बुधवार (27 जुलाई 2022) को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अर्पिता मुखर्जी के दूसरे फ्लैट पर छापा मारा। यहाँ से ईडी को करीब 28.90 करोड़ रुपए कैश और 5 किलो सोना मिला था। यह छापेमारी गुरुवार (28 जुलाई 2022) सुबह 4 बजे तक चली थी। अर्पिता मुखर्जी के फ्लैट में यह रकम टॉयलेट में छुपाकर रखी गई थी। इस रकम को गिनने के लिए ईडी के अधिकारियों को नोट गिनने की 3 मशीनें मँगवानी पड़ी।

समाचार एजेंसी ANI ने बताया था कि अर्पिता मुखर्जी के बेलघरिया स्थित आवास से लगभग 29 करोड़ रुपए की नकदी मिली थी। इसे 10 ट्रक में भरकर एजेंसी साथ ले गई। इससे पहले 23 जुलाई को अर्पिता के एक अन्य घर से ED ने 21 करोड़ रुपए कैश बरामद किए थे। इसके बाद ईडी ने अर्पिता मुखर्जी को गिरफ्तार किया था। 

वहीं अर्पिता मुखर्जी ने दावा किया है कि उसके फ्लैट से प्रवर्तन निदेशालय (ED) को जो पैसा मिला है, वह पार्थ चटर्जी का ही है। फ्लैट के जिस कमरे से ये पैसे मिले हैं, उधर कथित तौर पर अर्पिता को जाने की भी इजाजत नहीं थी।

पूछताछ में अर्पिता मुखर्जी ने बताया कि पार्थ चटर्जी के आदमी उनके यहाँ पैसे लाकर रखते थे। कभी-कभी चटर्जी खुद भी आते थे और कमरों में रखे पैसों की जाँच करते थे। अर्पिता का दावा है कि उन्हें उस कमरे में जाने की अनुमति नहीं थी, जहाँ पैसे रखे जाते थे।

हालाँकि अर्पिता को यह पता था कि उसके घर में पैसे रखे गए हैं, लेकिन यह रकम कितनी है, इसके बारे में उसे कोई जानकारी नहीं थी। अर्पिता ने बताया था कि पार्थ चटर्जी उसके घर को ‘मिनी बैंक’ की तरह इस्तेमाल करते थे।