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‘लाल सिंह चड्ढा’ को बचाने का हर जतन कर रहे आमिर खान: अब सैन्य ट्रेनिंग वाला क्लिप दिखाया, करण जौहर को ‘सेक्सी’ सवालों पर धोया, साउथ के हीरो को ले आए

आमिर खान की फिल्म ‘लाल सिंह चड्ढा’ की बहिष्कार की अपील हो रही है, जिसके बाद वो इसे हिट कराने के लिए हर जतन कर रहे हैं। अब फिल्म की एक झाँकी जारी की गई है। इस वीडियो में उन्हें करीना कपूर के साथ गोलगप्पे खाते हुए, फिर सेना का प्रशिक्षण लेते हुए दिखाया गया है। इस दौरान उन्हें बंदूक के साथ भी दिखाया गया है। आमिर खान कह रहे होते हैं कि उनकी माँ उन्हें सेना में भेजना चाहती हैं, लेकिन उन्हें लोगों को मारना अच्छा नहीं लगता।

इस क्लिप को ‘Viacom 18 Studios’ ने जारी किया है, जिसकी शुरुआत में आमिर खान अपनी माँ से आशीर्वाद ले रहे होते हैं। दक्षिण के अभिनेता नाग चैतन्य भी इस फिल्म में हैं, जिन्हें आर्मी ट्रेनिंग स्कूल में उनके दोस्त के रूप में दिखाया गया है। तेलुगु अभिनेता नाग चैतन्य सुपरस्टार नागार्जुन के बेटे हैं और सामंथा के पूर्व पति हैं। ‘फारेस्ट गम्प’ की नकल करते हुए इसमें भी आमिर खान का सीनियर सैन्य अधिकारी उन्हें ‘जीनियस’ बताते हुए उनकी तारीफ करता है।

इसके अलावा करण जौहर के शो ‘कॉफी विद करण’ में भी आमिर खान और करीना कपूर दिखाई देंगे, जिसका प्रोमो हॉटस्टार ने जारी किया है। शो के 7वें सीजन के 5वें एपिसोड में इन दोनों की मेजबानी करण जौहर ने की। फिल्म निर्देशक ने इस दौरान करीना कपूर से पूछा कि बच्चे होने के बाद ‘क्वालिटी सेक्स’ एक मिथक है या फिर वास्तविकता? इस पर करीना कपूर कहती हैं कि आप ये नहीं जान पाओगे। इस पर करण जौहर कहते हैं कि उनकी माँ ये शो देख रही हैं और आप मेरे सेक्स लाइफ के बारे में बात कर रही हैं?

इस पर आमिर खान उन्हें जवाब देते हैं, “जब आप दूसरे लोगों की सेक्स के बारे में बात करते हो, तब क्या आपकी माँ को फर्क नहीं पड़ेगा?” इस पर निरुत्तर होकर करण जौहर कहते हैं कि क्या वो शो के साथ आगे बढ़ सकते हैं? आमिर खान को एक सवाल दिया गया – मुझमें ऐसा क्या है जो आप दूसरों में बर्दाश्त नहीं करेंगे? इस पर करीना कपूर ने जवाब दिया कि अक्षय कुमार जिस चीज को पूरा करने में 30 दिन लगाते हैं, आप उसमें 100-200 दिन लगाते हो।

हाल ही करीना कपूर ने ‘लाल सिंह चड्ढा’ के बॉयकॉट की अपील को लेकर अकड़ दिखाई थी। उन्होंने बॉयकॉट की अपील को ‘कैंसल कल्चर’ बताते हुए कहा कि आज लोगों की विभिन्न प्लेटफॉर्म्स तक पहुँच है, इसीलिए वो हर चीज पर राय दे रहे हैं। पहले करीना कपूर ने कहा था कि लोग फिल्म न देखें, उनसे किसी ने जबरदस्ती थोड़े की है। अब उन्होंने कहा, “हर कोई आजकल अपने विचार रखना चाहता है। आजकल अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स हैं और हर कोई के पास कोई न कोई राय है। इसीलिए, अगर आज आपको रहना है तो कुछ चीजों को नजरअंदाज करना सीखना होगा।”

7 नए अस्पताल, 6800 टोटल बेड: CM केजरीवाल के झूठे वादों का फिर पर्दाफाश, RTI ने बताया- एक साल में एक भी अस्पताल नहीं खुला

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा दिल्ली को दिखाए गए सपनों की पोल अब खुलने लगी है। एक आरटीआई से मालूम चला है कि पिछले साल सीएम केजरीवाल ने जो दिल्ली में अस्पताल बनाने के वादे किए थे वो बिलकुल खोखले थे और इन्हें अब तक पूरा नहीं किया गया है।

ट्विटर यूजर अमित कुमार ने इस बाबत आरटीआई फाइल करके पूछा था कि दिल्ली में 1 जुलाई 2021 से जुलाई 2022 के बीच कितने अस्पताल बने। आरटीआई का मकसद यही था कि पता चल सके दिल्ली सरकार जनता से किए कितने वादे पूरे कर रही है। लेकिन, जवाब आने पर उनका संदेह सही निकला।

स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय के जनसूचना अधिकारी ने आरटीआई का जवाब देते हुए बताया कि एक भी अस्पताल दिल्ली सरकार ने 1 जुलाई 2021 से जुलाई 202 के बीच में नहीं बनाए हैं।

इस आरटीआई में अमित ने तीन सवाल और किए थे। इनमें एक था कि पिछले 1 साल में दिल्ली सरकार के अस्पतालों में कितने बेड और जुड़े? दूसरा ये पूछा गया था कि दिल्ली अस्पातल जिनका संचानल केजरीवाल सरकार करती है, उनमें कितनी एंबुलेंस जोड़ी गईं? तीसरा ये था कि मोहल्ला क्लिनीक में कितने मरीजों का इलाज हुआ? इन तीनों प्रश्नों को लेकर आरटीआई में कहा गया कि ये जानकारी डीजीएचएस के अस्पातल सेल के पास नहीं हैं।

आरटीआई डालने वाले अमित से ऑपइंडिया की बात

अमित शर्मा ने ऑपइंडिया से बात करते हुए कहा, “मैंने कभी ऐसा राजनेता नहीं देखा जो इतना खुला झूठ बोले और कहीं उसका फैक्ट चेक भी न हो। एक पत्रकार तक ने उनके झूठ की पोल नहीं खोली। हर वादा जो उन्होंने किया वो अधूरा हैं। मगर आप कभी किसी को उनकी असफलताओं को हाईलाइट करते नहीं देखेंगे।”

अमित ने कहा, “इसीलिए मैंने निर्णय लिया है कि मैं उनके हर झूठ का पर्दाफाश करूँगा। उन्होंने हर फैक्टचेकर और अधिकांश पत्रकारों को अपने विज्ञापन देकर खरीद लिया है।”

7 अस्पतालों का वादा

बता दें कि अरविंद केजरीवाल ने साल 2021 में एक कार्यक्रम में वादा किया था कि दिल्ली सरकार 7 अस्पताल बनाने जा रही है, जिनमें टोटल बेडो की कैपेसिटी 6800 होगी। उन्होंने ये भी कहा था कि ये अस्पताल 6 महीनों में बन जाएँगे।

हालाँकि इसके बाद फरवरी 2022 में टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट आई और कहा गया कि अस्पताल बनने के काम में देरी हो रही है। लेकिन इनमें एक अस्पातल 2022 के मध्य तक बन जाएगा और बाकी के 6 सितंबर तक पूरे होंगे में बनेंगे। हमने इस खबर को पढ़ने के बाद दिल्ली में हाल फिलहाल में शुरू हुए अस्पताल पर खबर ढूँढी मगर हमें कहीं ऐसी कोई खबर नहीं मिली।

जब खरीद से ज्यादा कबाड़ में बिकी एंबुलेंस

उल्लेखनीय है कि दिल्ली सरकार के हेल्थ मॉडल की पोल पहली बार नहीं खुली। पिछले ही महीने ट्विटर और फेसबुक पर एक्टिव रहे सुजीत पटेल की आरटीआई से चौंकाने वाली बात सामने आई थी। सुजीत ने पूछा था कि 2014 के बाद दिल्ली स्वास्थ्य विभाग ने कितनी पैसेंजर और लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस खरीदी। इसके अलावा उन्होंने ये जानना चाहा था कि तब से अब तक में कितनी एंबुलेंस कबाड़ में बेची गई।

आरटीआई के जवाब में दिल्ली स्वास्थ्य विभाग ने कहा था कि 2014 से लेकर अप्रैल 2022 के बीच में केजरीवाल सरकार ने एक भी मरीज को लाने-ले जाने वाली एंबुलेंस नहीं खरीदी। वहीं 9 एंबुलेंस ऐसी थी जिन्हें केजरीवाल सरकार ने 23, 659 रुपए में यानी कबाड़ के दाम में बेचा।

इसी तरह 2014 से 2020 के बीच में केजरीवाल सरकार ने 10 एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस खरीदी जिसमें ऑक्सीजन, आईसीयू और ईसीजी की सुविधा थीं। लेकिन इसी काल में उन्होंने इन्हीं सुविधाओं से लैस 20 एंबुलेंस को 75, 246 रुपए के रेट में बेचा भी।

‘इसे AC कार में क्यों घुमा रहे हो? क्या ये चल नहीं सकता?’: पार्था चटर्जी पर महिला ने फेंकी चप्पल, अर्पिता ने कहा – मैं नहीं थी तो घर पर रख दिया पैसा

पश्चिम बंगाल के शिक्षक भर्ती घोटाले में फँसे पूर्व मंत्री पार्था चटर्जी पर मंगलवार (2 अगस्त, 2022) को एक महिला ने गुस्से में चप्पल फेंक दी। इस दौरान महिला ने कहा, “ये नेता जनता का धन लूट रहे हैं। गरीब लोगों ने बहुत मेहनत से पैसा कमाया है, लेकिन पार्था जैसे लोगों के बेनकाब होने के बाद भी उन्हें महँगी गाड़ियों में घुमाया जा रहा है।”

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना तब हुई जब पार्था चटर्जी और उनकी करीबी अर्पिता मुखर्जी को ईएसआई अस्पताल से उनकी नियमित जाँच के बाद ईडी कार्यालय ले जाया जा रहा था। निशाना चूकने के बाद महिला ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “मैं उस पर अपनी चप्पल फेंकने आई थी। उसने गरीब लोगों के पैसे लिए हैं। मुझे खुशी होती अगर चप्पल उसके सिर पर लगी होती।”

महिला ने फिर दोहराया कि पार्था ने मासूम लोगों को ठगा है और करोड़ों रुपए का घोटाला किया है। उन्होंने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा, “भर्ती घोटाले का पर्दाफाश होने के बाद भी उन्हें (पार्था चटर्जी) लग्जरी सेवाएँ क्यों मुहैया कराई जा रही हैं? उन्हें AC कारों का उपयोग करने की अनुमति क्यों दी गई है? क्यों उन्हें व्हीलचेयर की सुविधा दी गई है? क्या वह चल नहीं सकता?।”

इस बीच, चटर्जी की करीबी अर्पिता मुखर्जी ने कहा कि ईडी ने उनके अपार्टमेंट से जो कैश बरामद किया है, वह उनका नहीं है। यह उनकी अनुपस्थिति में उनके घर पर रखा गया था। प्रवर्तन निदेशालय ने बीते दिनों अर्पिता मुखर्जी के घरों पर छापेमारी कर 50 करोड़ रुपए से ज्यादा कैश और 5 किलो सोना बरामद किया था। हालाँकि, 2 अगस्त को अर्पिता के ताजा बयान के बाद ईडी फिर से कोलकाता में उनके अन्य परिसरों में छापेमारी कर रही है।



बता दें कि साल 2014 के इस घोटाले को कई तरह से अंजाम दिया गया था। इसमें बिना मेरिट वालों को नौकरी दी गई। जो छठी कक्षा पास थे, उन्हें भी टीचर बना दिया गया। इतना ही नहीं, जिन्होंने एग्जाम ही नहीं दिया, उनका भी सिलेक्शन हो गया था। इन भर्तियों के लिए अभ्यर्थियों से लाखों रुपए लिए गए थे।

गौरतलब है कि हाई कोर्ट के निर्देश पर इस भर्ती घोटाले की सीबीआई जाँच कर रही है। वहीं, मनी लॉन्ड्रिंग की जाँच प्रवर्तन निदेशालय (ED) कर रहा है। बंगाल के पूर्व मंत्री पार्था चटर्जी और उनकी करीबी दोस्त अर्पिता मुखर्जी ईडी की हिरासत में हैं।

‘हम क्यों अपनी ब्रा छिपा कर रखें?’: आलिया भट्ट ने बताया क्या होती है ‘सेक्सिस्ट टिप्पणियाँ’, कहा – तुम अपने अंडरवियर…

बॉलीवुड अभिनेत्री आलिया भट्ट ने पूछा है कि हमें क्यों कहते हो कि हम अपनी ब्रा न दिखाएँ? उन्होंने कहा, “तुम अपने अंडरवियर दिखाते चलते हो।”आलिया भट्ट का दावा है कि महिलाओं को इस तरह से सेक्सिस्ट और महिला विरोधी टिप्पणियाँ सुननी पड़ती हैं। आलिया भट्ट ने दावा किया कि उन्हें लेकर लोगों ने टिप्पणियाँ की कि वो गर्भवती हैं तो उनका फिल्म शूटिंग शेड्यूल बिगड़ गया है और ‘Heart Of Stones’ के सेट से उनके पति रणबीर कपूर उन्हें लेने आते हैं।

आलिया भट्ट ने कहा कि उन्हें समय-समय पर सामान्य सेक्सिज्म का सामना करना पड़ा है। उन्होंने बताया कि कई बार तो उन्होंने इस पर ध्यान ही नहीं दिया, लेकिन आज वो इसे लेकर ज्यादा जागरूक हैं और इन सबको लेकर अभी सोचती हैं तो उन्हें पता चलता है कि अरे ये तो सेक्सिस्ट टिप्पणी थी। उन्होंने कहा कि ये कट्टर महिला विरोध है, जो उस क्षण में सामने आया। उन्होंने दावा किया कि इन्हीं कारणों से अब वो ज्यादा संवेदनशील हो गई हैं।

उन्होंने कहा कि कभी-कभी उनके दोस्त पूछते हैं कि उनके साथ क्या गलत हो गया है, वो इतनी आक्रामक क्यों हो गई हैं? उन्होंने कहा कि उनसे कहा जाता है कि इतनी संवेदनशील मत बनो। अभिनेत्री ने कहा, “मैं संवेदनशील नहीं हो रही हूँ। अगर मुझे पीरियड्स भी आ रहे हैं तो तुझे क्या? तुम्हारा जन्म ही इसीलिए हुआ, क्योंकि महिलाओं को पीरियड्स आते हैं। मुझे इससे खासी परेशानी होती है जब लोग इस तरह की चीजें कहते हैं।”

आलिया भट्ट ने कहा, “ये सामान्य चीजें हैं। कहा जाता है कि बिस्तर पर आपका ब्रा पड़ा हुआ नहीं होना चाहिए। इसे छिपा कर रखो। हम क्यों अपनी ब्रा छिपा कर रखें? आखिरकार ये एक कपड़ा है। तुम अपने अंडरवियर दिखा रहे हो, तब तो मैंने कुछ नहीं कहा? ऐसा नहीं है कि ये मेरे साथ बार-बार हुआ है, बल्कि लोगों में एक ये सोच है कि महिलाओं को कुछ चीजें छिपा कर रखनी चाहिए।” आलिया भट्ट की फिल्म ‘डार्लिंग्स’ 5 अगस्त को नेटफ्लिक्स पर रिलीज हो रही है।

जिस DM का विरोध कर रहे थे मुस्लिम, उन्हें केरल सरकार ने हटाया: श्रीराम वेंकटरमन को हटवाने के लिए उतर गए थे सड़कों पर

पिछले सप्ताह अलाप्पुझा जिला कलेक्टर के रूप में नियुक्त हुए आईएएस अधिकारी श्रीराम वेंकटरमन को मुस्लिमों के विरोध के बाद इस पद से हटा दिया गया है। केरल सरकार ने मुस्लिम संगठनों के विरोध के आगे घुटने टेकते हुए अब उन्हें नागरिक आपूर्ति निगम का महाप्रबंधक नियुक्त किया है। वहीं सरकार द्वारा अलाप्पुझा में उनके स्थानांतरण का से पहले वेंकटरमन केरल चिकित्सा सेवा निगम के प्रबंध निदेशक के रूप में कार्यरत थे।

वहीं केरल बीजेपी के स्टेट प्रेसिडेंट ने कहा, “इस देश के इतिहास में पहली बार किसी जिला कलेक्टर को उनके पद से सिर्फ इसलिए हटाया गया है क्योंकि आबादी के एक वर्ग ने उनका विरोध किया था। यह बहुप्रशंसित धर्मनिरपेक्ष केरल में हुआ है। CM पिनराई विजयन ने इस्लामी ताकतों के सामने पूरी तरह से आत्मसमर्पण कर दिया है।”

उन्होंने आगे कहा, “इससे पहले मुस्लिम संगठनों ने श्रीराम वेंकटरमन को अलाप्पुझा के जिला कलेक्टर के रूप में नियुक्त करने के खिलाफ राज्य भर में विरोध मार्च निकाला था। आज उन्हें हटा दिया गया है – वोट बैंक की राजनीति का एक उत्कृष्ट उदाहरण। वामपंथ ने अपना असली रंग दिखाया है।”

बता दें कि केरल में उनकी नियुक्ति के विरोध में हजारों मुस्लिमों ने मार्च निकालते हुए नियुक्ति रद्द करने की माँग की थी। यह प्रदर्शन सुन्नी समूह से जुड़े कई मुस्लिम संगठनों ने आयोजित किया था। यह प्रदर्शन केएम बशीर नाम के पत्रकार की मौत के आरोपित श्रीराम वेंकटरमण की अलाप्पुझा जिला कलेक्टर के रूप में नियुक्ति के खिलाफ शनिवार, 30 जुलाई, 2022 को तिरुवनंतपुरम में राज्य सचिवालय और सभी जिला कलेक्ट्रेट के सामने शुरू हुआ था। केरल में भारी विरोध के बाद अब पिनराई विजयन सरकार ने घुटने तक दिए हैं। वहीं केरल यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स (KUWJ) ने भी सोमवार को राज्य सरकार से इस फैसले को वापस लेने की माँग करते हुए विरोध प्रदर्शन किया था।

इस मामले में कॉन्ग्रेस के महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल सहित पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने भी श्रीराम वेंकटरमन को अलाप्पुझा जिला कलेक्टर नियुक्त करने के केरल सरकार के फैसले की निंदा की थी। वहीं उन्हें हटाए जाने के लिए अलाप्पुझा की जिला कॉन्ग्रेस कमिटी ने भी सोमवार 25 जुलाई को जिला कलेक्ट्रेट में विरोध प्रदर्शन किया था। वहीं मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने शुरू में आईएएस ऑफिसर श्रीराम वेंकटरमन की अलाप्पुझा जिला कलेक्टर के रूप में नियुक्ति को सही ठहराते हुए बचाव किया था। लेकिन भारी दबाव और विरोध प्रदर्शन को देखते हुए अब उन्होंने अपना फैसला बदल दिया है।

बता दें कि श्रीराम पर नशे में गाड़ी चलाने का आरोप है। जिसके कारण 2019 में एक पत्रकार केएम बशीर की मौत हो गई थी। तब रिपोर्ट के अनुसार, कहा जा रहा है कि कथित तौर पर नशे की हालत में श्रीराम द्वारा तेज गति से चलाई जा रही एक कार ने तिरुवनंतपुरम में संग्रहालय जंक्शन के पास बशीर को कुचल दिया था। घटना के समय बशीर तिरुवनंतपुरम में सिराज दैनिक के कर्मचारी थे।

इस हादसे के बाद बड़ा विवाद हुआ था। हालाँकि, तब उन्हें तब राज्य सरकार ने निलंबित कर दिया था। वहीं इस मामले में उन्हें प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट कोर्ट ने अक्टूबर 2020 में जमानत दे दी थी। बाद में श्रीराम को मार्च 2020 में सरकार द्वारा सेवा में वापस बहाल कर दिया गया और स्वास्थ्य और सामाजिक न्याय विभाग में संयुक्त सचिव बना दिया गया।

जिन्होंने डिजाइन किया भारत का राष्ट्रध्वज, गरीबी में हुई उनकी मौत: नेहरू के भारत में झोपड़ी में रहने को थे मजबूर, बेटे ने इलाज बिना तोड़ा दम

भारत के राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे को डिजाइन करने का श्रेय 2 अगस्त, 1876 को आंध्र प्रदेश के भात्लापेनुमार्रू में जन्मे स्वतंत्रता सेनानी पिंगली वेंकैया को जाता है। महात्मा गाँधी के अनुयायी रहे पिंगली वेंकैया का जीवन काफी गरीबी में बीता। असल में उन्होंने उस झंडे का डिजाइन किया था, जिस पर हमारा राष्ट्रध्वज आधारित है। एक तेलुगु ब्राह्मण परिवार में जन्मे पिंगली वेंकैया मद्रास से अपनी शुरुआती शिक्षा पूरी करने के बाद स्नातक के लिए कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी गए।

1947 में देश के स्वतंत्रता होने से पहले भारत का कोई एक राष्ट्रीय ध्वज नहीं था, बल्कि अलग-अलग संगठनों और स्वतंत्रता सेनानियों ने अलग-अलग समय में कई झंडों का प्रयोग किया। 1 अप्रैल, 1921 को जब महात्मा गाँधी विजयवाड़ा पहुँचे थे, जब कृष्णा जिले के पिंगली वेंकैया ने उन्हें अपना डिजाइन किया हुआ ध्वज दिखाया। पेशे से किसान और शिक्षाविद पिंगली वेंकैया ने मछलीपट्टनम में कई शैक्षिक संस्थानों की स्थापना की।

हालाँकि, उनका निधन 1963 में काफी गरीबी में हुआ और जिस देश का राष्ट्रध्वज उन्होंने डिजाइन किया था, वहीं के समाज ने उन्हें जीते-जी उन्हें भुला दिया था। 2009 और 2011 में उनके सम्मान में पोस्टेज स्टाम्प भी जारी किया गया। उन्हें ‘भारत रत्न’ देने की माँग भी उठती रही है। उनकी 146वीं जयंती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें याद किया। केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगाँठ के दौरान ‘आज़ादी के अमृत महोत्सव’ के तहत उनके सम्मान में कार्यक्रम आयोजित कर रहा है।

उनके सम्मान में एक और पोस्टेज स्टाम्प केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जारी किया। कई क्षेत्रों में विद्वता रखने वाले पिंगली वेंकैया की रुचि भू-विज्ञान में भी थी। जब वो ब्रिटिश-इंडियन आर्मी का हिस्सा हुआ करते थे, तब उन्हें अंग्रेजों ने द्वितीय बोअर युद्ध में भाग लेने के लिए दक्षिण अफ्रीका भेज दिया था। अक्टूबर 1899 से लेकर मई 1902 तक ये युद्ध बोअर गणराज्य में सोने के खदान मिलने के बाद प्रभावशाली अंग्रेजों के खिलाफ लड़ा गया था।

इसके बाद साक्षिण अफ्रीका के साथ-साथ ‘ऑरेंज फ्री स्टेट’ की भी हार हुई और अंग्रेजों का वहाँ वर्चस्व कायम हो गया। अंग्रेजों की सेना में रहने के दौरान ही पिंगली वेंकैया को इसका अनुभव हुआ कि कैसे उनका झंडा यूनियन जैक अंग्रेजी सेना को एक रखने के लिए एक माध्यम की तरह काम करता था। यूनियन जैन के तले अंग्रेज दुनिया भर में युद्ध जीत रहे थे और अपनी सेना को संगठित कर रहे थे। जब सेना को यूनियन जैक को सलाम करना होता था, उसी समय पिंगली वेंकैया के मन में पूरे भारत के एक राष्ट्रीय ध्वज का सपना आया।

उसी दौरान 19 वर्षीय पिंगली वेंकैया ने दक्षिण अफ्रीका में महात्मा गाँधी से भी मुलाकात की। इसके बाद अगले 5 दशकों तक दोनों में अच्छे सम्बन्ध रहे। आंध्र प्रदेश के बापतला शहर में एक बार उन्होंने एक पूरा का पूरा लेक्चर जापानी में दे दिया। अपने भाषाई ज्ञान की वजह से वो लोगों के बीच स्थापित हुए। उन्हें ‘जापान वेंकैया’ कहा जाने लगा। 1916 में उन्होंने सभी देशों के राष्ट्रीय झंडों की एक बुकलेट प्रकाशित की। भारत लौटने के बाद उन्होंने अपना समय राष्ट्रीय ध्वज के सपने को एकाकार करने में ही लगाया।

उन्होंने ‘A National Flag for India‘ नामक पुस्तिका में भारत के राष्ट्रीय ध्वज के लिए 30 डिजाइंस सुझाए। 1909 से 1921 तक कॉन्ग्रेस के विभिन्न सत्रों में वो इस मुद्दे को उठाते रहे। आखिरकार विजयवाड़ा के कॉन्ग्रेस सेशन में महात्मा गाँधी ने उनकी डिजाइन को अनुमति दे दी। इस झंडे में सबसे ऊपर सफ़ेद, उसके नीचे लाल और सबसे नीचे हरा रंग था। लाल और हरा हिन्दू-मुस्लिम एकता का प्रताक था, चरखा स्वराज का और सफ़ेद रंग शांति का।

उस समय वो आंध्र प्रदेश के एक कॉलेज में कार्यरत थे। शुरू में इस झंडे को ‘स्वराज ध्वज’ कहा गया। सफ़ेद रंग उन्होंने महात्मा गाँधी की सलाह पर डाला था। इस तिरंगे को आधिकारिक रूप से स्वीकृत तो नहीं किया गया था, लेकिन कॉन्ग्रेस के कार्यक्रमों में इसे फहराया जाने लगा था। 1931 में इस ध्वज के धार्मिक पहलुओं को लेकर सवाल खड़े किए गए। इसके बाद ‘पूर्ण स्वराज’ वाला झंडा आया। लाल की जगह केसरिया आ गया और सबसे ऊपर केसरिया को रखा गया।

इसके बाद इन रंगों का धर्म से कोई सम्बन्ध नहीं रहा और इन्हें अलग-अलग चीजें दर्शाने के लिए रखा गया। केसरिया जहाँ साहस और बलिदान का प्रतीक बना, सत्य और शांति का, हरा विश्वास और मजबूती का, जबकि बीच में एक चरखा स्वराज का। जन-कल्याण इसका उद्देश्य था। आज़ादी के बाद ‘नेशनल फ्लैग कमिटी’ बनी, जिसकी अध्यक्षता डॉ राजेंद्र प्रसाद ने की। इसी समिति ने चरखे की जगह अशोक चक्र को रखने का निर्णय लिया।

2015 में तब भारत के शहरी विकास मंत्री रहे वेंकैया नायडू ने विजयवाड़ा के ‘ऑल इंडिया रेडियो’ का नाम पिंगली वेंकैया के नाम पर रखा और उस परिसर में उसकी प्रतिमा स्थापित करवाई। वेंकैया नायडू बाद में देश के उप-राष्ट्रपति बने। उन्होंने कहा कि पिंगली वेंकैया आज़ादी के ऐसे नायक हैं, जिनके योगदान पर उतनी चर्चा नहीं हुई। अफ़सोस ये कि पिंगली वेंकैया की मृत्यु के बाद उनके घर में एक रुपया तक नहीं मिला। वो कर्ज में डूबे हुए थे।

सब्जियाँ उगा कर परिवार का भरण-पोषण करने वाले पिंगली वेंकैया की किसी ने मदद नहीं की। अंतिम दिनों में उनका कर्ज बढ़ता ही चला गया। चित्तनगर में वो एक झोपड़ी में रहते थे, वो भी उस जमीन पर थी जो उन्हें सेना में सेवा के बदले में मिली थी। उनके छोटे बेटे चलपति राव ने इलाज के बिना दम तोड़ दिया। उनकी अंतिम इच्छा थी कि उनका शरीर तिरंगे में लपेट कर अंतिम-संस्कार के लिए ले जाया जाए और प्रक्रिया के दौरान उसे एक पेड़ से बाँध कर रखा जाए। उस दौरान जवाहरलाल नेहरू देश के प्रधानमंत्री थे।

बीमार बच्चा, प्रताड़ना, पति ने कर ली दूसरी शादी… फरमान नाज ने पूछा- तब ये कहाँ थे: राहुल ने आवाज को दिलाई पहचान, अब शिव भजन से कट्टरपंथी भड़के

फ़रमानी नाज़ (Farmani Naaz) सोशल मीडिया का चर्चित नाम हैं। लेकन जब से उन्होंने शिव भजन ‘हर-हर शंभू’ गया है मजहब के ठेकेदार उन पर भड़के हुए हैं। उलेमा इसे गैर इस्लामी बता फतवा जारी कर रहे हैं। कट्टरपंथी उन्हें लगातार गालियाँ और धमकियाँ दे रहे हैं। ऐसे लोगों से फरमानी ने पूछा है कि वे तब कहाँ थे जब उनके शौहर ने उन्हें तलाक दिए बिना दूसरी शादी कर ली।

अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार फरमानी ने कहा है, “आज जो लोग विरोध कर रहे हैं वे तब कहाँ थे जब मेरे पति ने बिना तलाक लिए दूसरी शादी कर ली थी। मैं अपने बच्चे का पेट पालने के लिए गाती हूँ। आज समाज में लड़कियाँ आत्मनिर्भर हो गई हैं और अपने टैलेंट से आगे बढ़ रही हैं।”

फरमानी मुजफ्फरनगर जिले के रतनपुरी थाना क्षेत्र के मोहम्मदपुर माफी गाँव की रहने वाली हैं। उनकी शादी मेरठ के छोटा हसनपुर गाँव के इमरान से हुई थी। लेकिन शादी के कुछ ही महीनों बाद ससुराल में उनको प्रताड़ित किया जाने लगा। दरअसल, उनके बेटे को गले की बीमारी थी और ससुराल वाले मायके से पैसे लाने के लिए उन पर दबाव डालते थे। इससे तंग हो वह अपने ससुराल आ गई। यहीं उनकी मुलाकात राहुल मुलहेड़ा से हुई, जिसने उनकी आवाज को पहचान दी और उसे लोगों तक पहुँचाया।

राहुल मेरठ के मुलहेड़ा गाँव में रहते हैं। उन्होंने 2017 में गाँव के प्रतिभाशाली लोगों को वैश्विक मंच देने के उद्देश्य से एक यूट्यूब चैनल शुरू किया था। महज दो साल में यूट्यूब चैनल के 8 लाख सब्रस्क्राइबर हो गए। राहुल की टीम में भूरा ढोलक भी था। फरमानी नाज इसी भूरा ढोलक की चाची की बेटी है।

आज तक के मुताबिक, फरमानी नाज के मायके की आर्थिक स्थिति भी ठीक नहीं थी। उन्हें जेवर बेचकर बेटे का पेट पालने पर मजबूर होना पड़ा। इस बीच एक दिन भूरा ने फरमानी को गुनगुनाते हुए सुना और उसे राहुल के यूट्यूब चैनल के लिए गाने का प्रस्ताव दिया। राहुल बताते हैं, “मैंने बिना गाना रिकॉर्ड किए ही फरमानी को 25 हजार रुपए प्रति महीने की सैलरी का ऑफर दिया। साथ ही उसके बच्चे के इलाज का पूरा खर्च और दूध के लिए अलग से पैसे देने का वादा किया।” 2020 में राहुल ने अपने यूट्यूब चैनल का नाम ही फरमानी नाज सिंगर कर दिया।

2020 में फरमानी नाज ने इंडियन आइडल का ऑडिशन दिया। उन्हें गोल्डन टिकट भी मिला। लेकिन बेटे के इलाज के चलते वे मुंबई नहीं जा सकी। लेकिन बच्चे का सफल इलाज होने के बाद फरमानी के दिन बदल गए और राहुल ने भी उनकी सैलरी बढ़ाकर 35 हजार कर दी। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। गानों से मिले पैसों से अपने निकाह में लिए गए 8 लाख का कर्ज चुकाया। 3 लाख खर्च कर घर दुरुस्त करवाया।

बता दें कि राहुल ने नाज भक्ति, नाज नज्म और नाज म्यूजिक नाम से तीन और यू-ट्यूब चैनल की शुरुआत की। तीनों चैनल में राहुल और फरमानी पार्टनर हैं। फरमानी नाज ने 22 जुलाई 2022 को गाना  ‘हर हर शम्भू (Farmani Naaz Har Har Shambhu)’ रिलीज किया था। इस गाने में वो शिव की स्तुति ‘कर्पूर गौरं करुणावतारम’ गाते हुए सुनाई दे रही हैं।

किसी के गहने गिरवी, कई की नहीं हुई शादी, 100+ तो पक्के घर का ख्वाब देखते मर गए: पात्रा चॉल के पीड़ितों की दर्दभरी कहानी, संजय राउत की गिरफ्तारी से जगी आस

शिवसेना सांसद संजय राउत पात्रा चॉल केस की वजह से चर्चा में हैं। यह घोटाला 1034 करोड़ रुपए से ज्यादा का बताया जाता है। जहाँ अदालत ने पात्रा चॉल घोटाले में संजय राउत को 4 अगस्त तक ED की रिमांड पर भेज दिया है वहीं इस कार्रवाई से पात्रा चाल के निवासियों में उम्मीद जगी है कि शायद अब उन्हें अपने सपनों का घर मिल जाए।

इंडियन एक्सप्रेस ने इस मामले में ऐसे कई निवासियों से बात की जिन्होंने अपनी परेशानियों को साझा किया है। उसमें से एक हैं गोरेगाँव में छह लोगों के परिवार के साथ किराए के मकान में रहने वाले संजय नाइक, जिन्होंने 30 की उम्र में नया आशियाना पाने के लिए सिद्धार्थ नगर स्थित 47 एकड़ में फैले पात्रा चाल का अपना मकान खाली कर दिया था। तब उन्हें तीन साल में अपना मकान मिलने का ख्वाब दिखाया गया था। लेकिन आज 14 साल बाद भी वो मकान के लिए इंतज़ार ही कर रहे हैं।

नाइक आज भी पात्रा चाल के 671 अन्य किरायेदारों के साथ अपना मकान पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। बता दें कि उस समय सभी ने अपने मकान महाराष्ट्र हाउसिंग एंड एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (MHADA) को सौपें थे।

नाइक जैसे कई अन्य लोगों ने दावा किया है कि पात्रा चाल खाली करने के बाद कहीं और रहने के किराए भरने के लिए उन्हें अपने सोने के गहने तक गिरवी रखने पड़े। नाइक का कहना है कि उनकी कमाई का 20 हजार रूपया तो हर महीने बस किराया भरने में जा रहा है और बाकी खर्चों ने मुंबई जैसे शहर में उनकी कमर तोड़ दी है। उनका कहना है कि उनका कहना है कि अगर परियोजना में देरी हुई तो हमें वो किराया भी नहीं मिल रहा है जो हमसे वादा किया गया था।

पात्रा चाल के निवासियों का कहना है कि समझौते के अनुसार, डेवलपर को सभी 672 किरायेदारों को हर महीने परियोजना के पूरा होने तक किराए का भुगतान करना था। जबकि, किराए का भुगतान केवल 2014-15 तक ही किया गया था। बाद में यह पूरी परियोजना जीएसीपीएल से जुड़े घोटाले की वजह से छह साल से अधिक समय तक रोक दिया गया था। इसके बाद फरवरी 2022 में फिर से इस परियोजना पर काम शुरू हो सका।

वहीं अभी भी पात्रा चाल की जगह आवासीय परियोजना पर निर्माण के कोई संकेत नजर नहीं आ रहे हैं। तस्वीरों में वहाँ बैरिकेड्स नजर आ रहे हैं। चॉल के सहकारी समिति के किराएदार व सदस्य नरेश सावंत ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि सैकड़ों परिवार जो चॉल में रहते थे, वे अब मुंबई महानगर क्षेत्र में फैले गए हैं। हर रोज लम्बी यात्रा करने को मजबूर हैं क्योंकि यहाँ मुंबई में एक कमरे के मकान का भी किराया 20 हजार से ज़्यादा है। जिसको सब लोग नहीं दे सकते इसलिए सब बहुत दूर-दूर तक बिखर गए हैं। जैसे विरार, वसई, नालासोपारा, कल्याण, डोंबिवली और नवी मुंबई। कुछ तो वापस अपने गाँव लौट गए हैं। और सब उम्मीदें छोड़ दिया है।

सावंत का यह भी कहना है, “कम से कम 100-150 निवासियों की तो मृत्यु भी हो गई है जो अपने मकान का सपना लिए ही डेढ़ दशक तक इंतजार करते-करते चल बसे। यहाँ तक परिवारों को किराया मिले भी छह साल से अधिक समय हो गया है। हम म्हाडा से अनुरोध करते रहे हैं लेकिन कुछ नहीं हुआ।”

उन्होंने बताया कि जब तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने परियोजना पर फरवरी 2021 में फिर से काम शुरू किया था तब राज्य सरकार ने घोषणा की थी कि वह मार्च से किराया देना शुरू करेगी। अब तो अगस्त 2022 आ गया लेकिन अभी तक कोई किराया नहीं मिला है। उनका कहना है, “अपना घर न होने से कई लोगों की तो शादी भी नहीं हुई। क्योंकि शादी के मामले में लोग जानना चाहते हैं कि दूल्हे के पास क्या है? उसका अपना घर है या नहीं। हमारे मामले में, हमारे पास घर तो है, लेकिन एक नहीं दिखा सकते।”

पात्रा चॉल जमीन घोटाला क्या है?

इस घोटाले की शुरुआत साल 2007 में हुई थी। तब, महाराष्ट्र हाउसिंग एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (MHADA) की 47 एकड़ जमीन पर 672 किराएदार रहते थे। इन्हीं 672 किराएदारों के पुनर्वास के लिए पात्रा चॉल परियोजना के तहत चॉल के विकास का काम प्रवीण राउत की कंपनी गुरु आशीष कंस्ट्रक्शन और हाउसिंग डेवलपमेंट एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड को सौंपा गया।

कॉन्ट्रैक्ट में कहा गया था कि 47 एकड़ पर जो बिल्डिंग बनेगी उसके 672 फ्लैट चॉल के किराएदारों को देने होंगे और तीन हजार फ्लैट एमएचडीए को हैंडओवर करने होंगे। बाद में जो जमीन बचेगी उसे बेचने और विकसित करने के लिए भी अनुमति जरूरी होगी। अब चॉल विकास के कॉन्ट्रैक्ट में सब चीजें तय थीं। लेकिन घोटाले की शुरुआत तब हुई जब कंपनी ने न तो इस जगह का विकास किया और न किराएदारों को मकान दिए और न ही MHADA को फ्लैट हैंडओवर किए।

प्राइवेट कंपनी पर आरोप है कि उन्होंने 47 एकड़ जमीन पर गरीबों के लिए फ्लैट बनाने की बजाए उसे 9 अलग-अलग बिल्डरों को बेचा और खासा पैसा कमाया। जब म्हाडा को इसकी सूचना हुई तो उन्होंने 2018 में जाकर उनके विरुद्ध एफआईआर करवाई और केस अपराध विंग के पास गया। इसके बाद 2020 में प्रवीण राउत की गिरफ्तारी हुई और यही से शुरु हुआ संजय राउत का इस केस से कनेक्शन।

अक्टूबर से मिल सकती हैं 5जी सेवाएँ: जानिए नीलामी से सरकार को क्या मिला, रिलायंस Jio सबसे आगे

भारत में अब तक की सबसे बड़ी 5जी स्पेक्ट्रम की नीलामी (5G Spectrum Auction) प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। 7 दिनों (26 जुलाई से 1 अगस्त 2022) तक चली इस नीलामी में 5जी स्पेक्ट्रम की रिकॉर्ड बिक्री से केंद्र सरकार को 150173 करोड़ रुपए की कमाई हुई है। यानी सरकार ने 1.5 लाख करोड़ रुपए से अधिक की राशि के स्पेक्ट्रम मोबाइल कंपनियों को बेचे हैं।

दूरसंचार मंत्री अश्विनी वैष्णव (Ashwini Vaishnaw) के मुताबिक, 5जी स्पेक्ट्रम नीलामी में 72098 Mhz में से 51236 Mhz स्पेक्ट्रम बिक चुके हैं। कंपनियों ने कुल 150173 करोड़ रुपए के स्पेक्ट्रम के लिए बोली लगाई। स्पेक्ट्रम नीलामी में सबसे अधिक बोली रिलायंस जियो इंफोकॉम ने अपने नाम की है। इसने कुल 24,740Mhz स्पेक्ट्रम की खरीदारी की है। रिलायंस ने 700Mhz, 800Mhz, 1800Mhz, 3300Mhz और 26Ghz स्पेक्ट्रम के लिए बोलियाँ लगाई है।

स्पेक्ट्रम खरीदारी में जियो के बाद दूसरे नंबर पर भारती एयरटेल (19867Mhz) और फिर वोडाफोन आइडिया (6228Mhz) लिमिटेड का स्थान रहा। वहीं, दूरसंचार की दुनिया में पहली बार कदम रख रहे अडानी ग्रुप ने प्राइवेट टेलीकॉम नेटवर्क स्थापित करने के लिए 26 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम खरीदा है।

कब से शुरू हो रही 5जी की सेवाएँ

मोबाइल कम्युनिकेशन की पाँचवीं पीढ़ी यानी 5G का फायदा देश के नागरिकों को इसी साल अक्टूबर से मिलना शुरू हो सकता है। सरकार को उम्मीद है कि अक्टूबर से सुपरफास्ट 5जी सेवाएँ देश के नागरिकों को उपलब्ध होने लगेगी। नीलामी प्रक्रिया समाप्त होने के बाद केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मीडियाकर्मियों से सोमवार (1 अगस्त 2022) को कहा कि देश में इस साल अक्टूबर से 5जी सेवाएँ लॉन्च होने की उम्मीद है। बताया जा रहा है कि पहले चरण में देश के 13 शहरों में 5जी सेवा शुरू हो सकती है। इसमें अहमदाबाद, बेंगलुरु, चंडीगढ़, चेन्नई, दिल्ली, गाँधीनगर, गुरुग्राम, हैदराबाद, जामनगर, कोलकाता, लखनऊ, मुंबई और पुणे शामिल हैं।

क्या है 5जी

5जी बहुत तेज इंटरनेट स्पीड (मल्टी-Gbps पीक स्पीड) वाला नेटवर्क है। इसमें यूजर को पहले के मुकाबले ज्यादा भरोसेमंद नेटवर्क स्पीड मिलती है। 4जी के मुकाबले 5जी टेक्नोलॉजी ज्यादा बेहतर इंटरफेस के साथ आएगी। जहाँ 4जी में 150Mbps तक की अधिकतम स्पीड मिलती है, वहीं 5जी में 10Gbps तक डाउनलोड स्पीड होने के बारे में कहा जा रहा है। आसान शब्दों में इसे समझें तो यूजर्स 5जी स्पीड के साथ एक पूरी HD फिल्म को महज कुछ सेकेंड में डाउनलोड कर सकेंगे। हालाँकि, इसका इस्तेमाल महज वीडियो डाउनलोड करने से कहीं बड़ा है। 5जी टेक्नोलॉजी आने से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस काफी बेहतर हो जाएगा और इससे तमाम मशीनें जैसे स्मार्ट TV, वाशिंग मशीन, होम स्पीकर और रोबोट्स काफी तेज और ऑटोमेटिक फीचर्स से लैस होंगे।

5जी में कई डिवाइस जुड़ सकते हैं

5G बेहद हाईटेक टेक्नोलॉजी है, जो बहुत तेज वायरलेस नेटवर्क देती है। 5जी की मदद से यूजर्स को ड्राइवरलेस ट्रांसपोर्ट, स्मार्ट सिटीज, वर्चुअल रियलिटी और बहुत तेज रियल टाइम अपडेट मिलेगा। इसके अलावा, यूजर्स जहाँ 4G की मदद से चलते-फिरते म्यूजिक और वीडियो स्ट्रीम कर सकते हैं, वहीं 5G की मदद से स्मार्टफोन से वह कई सारे डिवाइस एक साथ जोड़ सकते हैं।

22 साल की हिंदू युवती को फँसाने के लिए ‘पंडित’ बन गया ऑटो ड्राइवर ‘चाँद’, शादी का डाल रहा था दबाव: कॉलेज आते-जाते हुई थी पहचान

उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर जिले की पुलिस ने चाँद नाम के ऑटो ड्राइवर को गिरफ्तार किया है। वह पहचान छिपाकर एक हिंदू युवती पर डोरे डाल रहा था। युवती ने दनकौर कोतवाली में उसके खिलाफ मामला दर्ज करवाया है।

दनकौर थाना प्रभारी ने बताया कि मूल रूप से मऊ जिले की रहने वाली 22 वर्षीय युवती गाजियाबाद में अपने परिवार के साथ रहती है। वह ग्रेटर नोएडा के दनकौर में स्थित डाइट से डीएलएफ का कोर्स कर रही है। वह रोजाना गाजियाबाद से दनकौर ऑटो से आती-जाती थी।

युवती का आरोप है कि कॉलेज जाने के दौरान उसकी जान-पहचान ऑटो चालक से हुई। उसने अपना नाम पिंटू पंडित बताया। युवती का कहना है कि ऑटो चालक ने खुद को हिंदू बताकर प्रेम जाल में फँसाया। दोनों करीब छह महीनों से संपर्क में थे। वह लड़की पर शादी का दवाब डाल रहा था। जब पीड़िता को पता चला कि ऑटो चालक का असली नाम चाँद है तो उसने दनकौर कोतवाली में मुकदमा दर्ज करवाया। 

पुलिस जाँच में पता चला है कि ऑटो चालक का असली नाम चाँद है। वह शादीशुदा भी है। इस मामले में पीड़िता ने कोतवाली में लिखित शिकायत दी और पुलिस ने उसके आधार पर मुकदमा दर्ज किया है। थाना प्रभारी का कहना है कि इस मामले में आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। वहीं मामले में हिंदू युवा वाहिनी के सदस्यों ने थाना पहुँच कर हंगामा किया।

गौरतलब है कि पिछले दिनों उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले से एक हिंदू लड़की को अगवा कर उसका धर्मांतरण कर निकाह किए जाने की खबर आई थी। लड़की को अगवा कर आरोपित साबिर मिर्जा बांदा की एक मस्जिद में ले गया। वहाँ धर्म परिवर्तन करवाकर उससे निकाह किया। पुलिस ने लड़की को बरामद कर आरोपित को गिरफ्तार कर लिया था।