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सोलापुर में गरजे पीएम; सामान्य वर्ग के गरीबों को आरक्षण देने के फैसले को बताया ऐतिहासिक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज महाराष्ट्र के सोलापुर पहुँचे जहाँ उन्होंने कई विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखी और साथ ही एक विशाल जनसभा को भी सम्बोधित किया। इस दौरान पीएम ने नागरिकता संशोधन विधेयक और सामन्य वर्ग के गरीब लोगों को आरक्षण देने संबंधी निर्णय पर भी अपनी बात रखी। इस से पहले पीएम ने 3,168 करोड़ रुपयों के मूल्य की ढांचागत और आवासीय परियोजनाओं का उद्घाटन किया। पीएम ने 1,811 करोड़ रुपए की आवासीय परियोजनाओं का शुभारम्भ किया जिसके अंतर्गत लोगों को करीब तीस हज़ार मकान उपलब्ध कराए जाने हैं।

मोदी ने महाराष्ट्र के पश्चिमी शहर सोलापुर में एक भूमिगत सीवरेज प्रणाली और तीन सीवेज ट्रीटमेंट संयंत्रों की भी शुरुआत की। इसके अलावे उन्होंने सोलापुर स्मार्ट सिटी इलाके में एक जलापूर्ति और सीवेज प्रणाली की आधारशिला भी रखी। इस से वहाँ की आम जनता को बड़े फायदे मिलने की उम्मीद है। इस से शहर की जलापूर्ति में भी सुधार आएगा। साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग 211 (नया राष्ट्रीय राजमार्ग 52) पर सोलापुर (तुलजापुर) उस्मानाबाद खंड में चार लेन के सड़क मार्ग का उद्घाटन किया।

इस अवसर पर आम जनता को सम्बोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आरक्षण को लेकर विपक्षी दलों द्वारा जनता को गुमराह करने का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कल रात को लोकसभा में पास हुआ सामान्य वर्ग के गरीबों को आरक्षण देने वाला बिल ऐतिहासिक है। पीएम ने इसे अपने नारे ‘सबका साथ-सबका विकास’ से जोड़ कर देखने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि इसी तंत्र को मजबूत करने के लिए ये विधेयक लाया गया है।

नागरिकता संशोधन बिल पर बोलते हुए पीएम ने कहा, “पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान और बांग्लादेश से आये माँ भारती के बेटे-बेटियों को, भारत माता की जय बोलने वालों को भारत की नागरिकता देने का रास्ता साफ़ हुआ है। उन्होंने कहा कि ये लोग हमारे भाई-बहन हैं और इन्हे भारत माँ के आँचल में जगह देने का रास्ता साफ़ किया गया है।”

इंफ़्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में अपनी सरकार द्वारा किये गए बड़े कार्यों का जिक्र करते हुए पीएम ने कहा कि सबसे बड़ा पुल हो, सबसे बड़ी सुरंग हो, सबसे बड़े एक्सप्रेसवे हों, सब इसी सरकार में या तो बन चुके हैं या फिर काम चल रहा है। उन्होंने कहा कि इन प्रोजेक्ट्स के बड़े होने से ज्यादा महत्वपूर्ण उनका लोकेशन है क्योंकि ये सभी ऐसी जगहों पर बन रहे हैं या बन गए हैं जहाँ की परिस्थितियाँ पहले काफ़ी मुश्किल थी।

आवासीय योजनाओं के बारे में पीएम ने लोगों को जानकारी देते हुए कहा कि आज गरीब, कामगार परिवारों के 30 हज़ार घरों के प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास यहां हुआ है। उन्होंने बताया:

“इसके जो लाभार्थी हैं वो कारखानों में काम करते हैं, रिक्शा, ऑटो चलाते हैं, ठेले पर काम करते हैं। मैं आप सभी को विश्वास दिलाता हूं कि बहुत जल्द आपके हाथों में आपके अपने घर की चाबी होगी।”

कॉन्ग्रेस पर निशाना साधते हुए प्रधानमंत्री ने अगस्ता-वेस्टलैंड घोटाले में शामिल बिचौलिए मिशेल का नाम लेते हुए अख़बारों के हवाले से कहा कि वो सिर्फ इसी घोटाले में शामिल नहीं था बल्कि पहले की सरकार के समय फ़्रांस से लड़ाकू विमान का जो सौदा किया जा रहा था, उसमें भी उसकी भूमिका थी। उन्होंने सवाल दागा कि कहीं वो डील भी मिशेल ‘मामा’ के कारण ही तो नहीं रुक गई थी? उन्होंने कहा कि जाँच एजेंसियों के साथ-साथ देश की जनता भी इन बातों का जवाब ढूंढ रही है।

प्रधानमंत्री अगस्त 2014 के बाद दूसरी बार सोलापुर के दौरे पर हैं। रैली के मद्देनजर चार हज़ार पुलिसकर्मियों, 10 आईपीएस अधिकारियों और अर्धसैनिक बलों की कई कंपनियों को तैनात किया गया था। वहाँ प्रधानमंत्री की रैली को लेकर सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए थे। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने प्रधानमंत्री का स्वागत किया। गडकरी ने कहा कि पिछले साढ़े चार सालों में पीएम मोदी के नेतृत्व में महाराष्ट्र के विकास को नई रफ़्तार दी गई है।

म्यांमार में सित्वे पोर्ट हुआ चालू, भारत ने चीन को दी मात

ईरान में चाबहार के बाद अब म्यांमार में भी भारत के सहयोग से निर्मित सित्वे पोर्ट चालू हो चुका है जिसके बाद दक्षिण एशिया में भारत की रणनीतिक एवं व्यापारिक साख़ मज़बूत होनी निश्चित है। इसे चीन के बेल्ट एन्ड रोड इनिशिएटिव (BRI) के जवाब के रूप में देखा जा रहा है।

राज्य सभा में केंद्रीय राज्यमंत्री मनसुख मंडविया ने एक प्रश्न के उत्तर में बताया कि म्यांमार में भारत के सहयोग से निर्मित सित्वे पोर्ट अब काम करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। ध्यातव्य है कि सित्वे पोर्ट का निर्माण कालादान मल्टी मोडल ट्रांज़िट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट के अंतर्गत हुआ है जिसके बहुआयामी उद्देश्य हैं।

कालादान प्रोजेक्ट भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों और कलकत्ता को म्यांमार के रखाइन और चिन राज्यों से जल तथा भूमि मार्ग से जोड़ने के लिए 2008 में प्रारंभ किया गया था। भारत ने इस पूरे प्रोजेक्ट पर लगभग ₹3170 करोड़ का निवेश किया है जिसमें से सित्वे पोर्ट और पालेत्वा में अंतर्देशीय जलमार्ग पर लगभग ₹517 करोड़ व्यय हुए हैं।

भारत और म्यांमार ने 22 अक्टूबर 2018 को सित्वे पोर्ट और पालेत्वा में जलमार्ग के संचालन हेतु एमओयू पर हस्ताक्षर किए थे। ईरान में चाबहार के साथ म्यांमार में सित्वे पोर्ट का संचालन प्रारंभ होने से यह पहली बार होगा जब भारत अपनी क्षेत्रीय सीमाओं से बाहर किसी पोर्ट पर कार्य करेगा।

भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति के अंतर्गत सित्वे पोर्ट चालू होने से दक्षिण एशिया में व्यापारिक प्रभुत्व तथा शक्ति संतुलन के आयामों में भी उल्लेखनीय परिवर्तन देखा जाएगा। सैन्य, सुरक्षा एवं रणनीतिक पक्ष देखें जाएँ तो साढ़े चार वर्ष पूर्व प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार चीन म्यांमार को अपना ‘दूसरा तट’ बनाने की योजना बना रहा था।

भारतीय महासागर को घेरने की चीन की तथाकथित ‘स्ट्रिंग ऑफ़ पर्ल्स’ रणनीति का एक मोती सित्वे पोर्ट भी था। इंस्टिट्यूट फॉर डिफेन्स स्टडीज़ एंड एनालिसिस में प्रकाशित नम्रता गोस्वामी की रिपोर्ट के अनुसार अंडमान सागर में चीन सिगनल इंटेलिजेंस एकत्र करने के उपकरण लगा रहा था जिससे भारत की गतिविधियों पर निगरानी रखी जा सके।

चीन ने कालादान परियोजना को बाधित करने के भरसक प्रयास किए थे। यदि चीन म्यांमार स्थित सित्वे पोर्ट पर अपना अधिकार स्थापित कर लेता तो बंगाल की खाड़ी में भारतीय नौसेना को अपनी प्रभावी क्षमता पुनः प्राप्त करना अत्यंत कठिन होता। चीन ने म्यांमार के आतंकी गुटों से भी सम्पर्क स्थापित किए थे ताकि उन्हें बांग्लादेश और म्यांमार के मार्ग से भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों में घुसपैठ कराया जा सके।

सित्वे पोर्ट चालू होने से भारत और म्यांमार के मध्य सांस्कृतिक संबंध भी प्रगाढ़ होंगे। एक समय में तत्कालीन बर्मा के राजा मनुस्मृति के अनुसार राजकाज चलाते थे। स्वतंत्रता आंदोलन में भी बर्मा में रह रहे भारतीयों ने सहयोग किया था। दोनों देशों के मध्य नागरिक संबंध और मजबूत करने के लिए भारत सरकार मिज़ोरम-म्यांमार कालादान सड़क भी बना रही है जिसमें ₹1,600 करोड़ निवेश किए गए हैं।

गत वर्ष 2018 में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने म्यांमार सरकार के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किया जिसके बाद मणिपुर और मिज़ोरम से भारतीय नागरिक अपना वैध पासपोर्ट दिखाकर सीमापार जा सकेंगे।


भारत दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ रही अर्थव्यवस्था, नोटबंदी-जीएसटी से मिला फ़ायदा: वर्ल्ड बैंक

वर्ल्ड बैंक ने हाल में एक रिपोर्ट ज़ारी करके भारत को दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था वाला देश बताया है। इस रिपोर्ट के मुताबिक 2018-19 वित्तीय वर्ष में भारत का विकास दर 7.3% रहने की संभावना है। वर्ल्ड बैंक की मानें तो 2018-19 के दौरान देश की जीडीपी 7.3% के दर से बढ़ेगी। वहीं, अगले दो साल में देश की जीडीपी 7.5% तक पहुँच जाएगी। इस रिपोर्ट में इस बात की भी चर्चा है कि देश की अर्थव्यवस्था इसी रफ़्तार से आगे बढ़ती रही तो अपने आजादी के 100 साल पूरा होने से पहले 2,030 तक भारत उच्च-मध्यवर्गीय आया वाला देश बन जाएगा।

भारत की स्थिति चीन से बेहतर

वर्ल्ड बैंक ने अपने रिपोर्ट में यह दावा किया है कि आने वाले समय में भारत की अर्थव्यवस्था पड़ोसी देश चीन से बेहतर स्थिति में होगी। विश्व बैंक के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2019-20 में चीन की विकास दर 6.2% रहने की संभावना है। यही नहीं 2021 में चीन की विकास दर 2019-20 की तुलना में 0.2% के दर से घटकर महज 6% रह जाएगी। वर्ल्ड बैंक के इस डेटा के हवाले हम कह सकते हैं कि आने वाले समय में भारत की अर्थव्यवस्था चीन से बेहतर और मज़बूत स्थिति में होगी।

नोटबंदी-जीएसटी से देश की अर्थव्यवस्था को मिला फ़ायदा

वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट में नोटबंदी और जीएसटी का भी ज़िक्र किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार नोटबंदी और जीएसटी के कारण अस्थाई मंदी के बाद देश की अर्थव्यस्था में आश्चर्यजनक वृद्धि हो रही है। वर्ल्ड बैंक के इस रिपोर्ट ने नोटबंदी पर विपक्षी दलों द्वारा लगाए जाने वाले आरोपों को गलत साबित किया है। यही नहीं अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए मोदी सरकार द्वारा जो साहसी कदम उठाया गया, उस सराहनीय प्रयास के परिणाम की एक झलक वर्ल्ड बैंक के इस रिपोर्ट में देखने को मिल रही है।

कृषि व विनिर्माण क्षेत्र में सुधार

वर्ल्ड बैंक के रिपोर्ट से पहले केंन्द्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) ने एक रिपोर्ट जारी करके वित्तीय वर्ष 2018-19 में देश की जीडीपी 7.2% रहने की संभावना ज़ाहिर की है। जीडीपी में वृद्धि के लिए सीएसओ ने कृषि व विनिर्माण क्षेत्र को सराहा है। इस रिपोर्ट के मुताबिक कृषि व विनिर्माण सेक्टर में अच्छे प्रदर्शन की वजह से 2017-18 की तुलना में 2018-19 में जीडीपी में वृद्धि हुई है।

पढ़े-लिखे युवा बन रहें हैं आतंकवाद का हिस्सा, सोशल मीडिया पर नियंत्रण ज़रूरी: बिपिन रावत

रायसीना संवाद में पैनल चर्चा के दौरान बिपिन रावत सोशल मीडिया की तरफ़ ध्यान खींचते हुए कहा कि हमें सोशल मीडिया पर नियंत्रण पाने की जरूरत है, क्योंकि सोशल मीडिया के ज़रिए ही आज के समय में सबसे ज़्यादा कट्टरता फैलाई जा रही है।

उनका कहना था कि तरह-तरह की कट्टरता के प्रमाण हमें भारत के कई जगहों पर और जम्मू-कश्मीर में देखने को मिल सकते हैं। आज का युवा झूठी खबरों की वज़ह से, दुष्प्रचार के कारण और कई धार्मिक बातों को गलत बताकर बरगलाए जाने के कारण कट्टरता का शिकार होता जा रहा है, इसलिए हम देखते हैं कि आतंकवाद का हिस्सा सबसे ज्यादा पढ़े-लिखे युवा बन रहे हैं।

आतंकवाद को युद्ध का एक नया रूप बताते हुए आर्मी चीफ़ जनरल बिपिन रावत ने बुधवार को कहा कि हमारे ऊपर आतंकवाद का खतरा ठीक उसी तरह बढ़ रहा है जैसे दसमुखी रावण का सिर (Multi-headed monster) और ये तब तक बढ़ता ही रहेगा जब तक देश इसे ‘स्टेट पॉलिसी’ की तरह इस्तेमाल करते रहेंगे। उनका इशारा पाकिस्तान की तरफ़ था। बिना पाकिस्तान का नाम लेते हुए आर्मी चीफ जनरल ने कहा कि आतंकवाद तब तक बना ही रहेगा जब तक देश इसे अपनी नीतियों का हिस्सा बनाते रहेंगे।

आगे उन्होंने कहा कि आतंकवाद एक नए तरह के युद्ध के रूप में उभरा है। कमज़ोर समुदाय आज के समय में अपने प्रतिनिधि के रूप में आतंकवाद का सहारा ले रहे हैं, ताकि वो दूसरे देशों पर दबाव बना सकें। अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए आतंकवाद की इस प्रक्रिया को उन्होंने कहा कि ये ख़तरा अपने सर उसी तरह पसार रहा है जैसे कोई अनेक सर वाला दानव हो।

अफ़ग़ान शांति प्रक्रिया पर उन्होंने कहा कि तालिबान के साथ बातचीत ज़रूर होनी चाहिए, लेकिन बिना किसी शर्त के। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि पाकिस्तान हमेशा से ही तालिबान को अपने आँगन में जगह देता आया है ऐसे में हमें चिंताशील रहना चाहिए।

‘सबका साथ, सबका विकास’: मोदी सरकार के कार्यकाल में प्रति व्यक्ति आय में 45 प्रतिशत की वृद्धि

बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (CSO) द्वारा जारी किए गए नवीनतम अनुमानों के अनुसार एक भारतीय नागरिक की औसत प्रति व्यक्ति आय, नरेंद्र मोदी सरकार के पहले चार वर्षों में 45 प्रतिशत से अधिक बढ़ी है।

साथ ही, 2011-12 से 2018-19 के बीच, सात वर्षों में प्रति व्यक्ति औसत आय दोगुनी हो गई है। पहले यही आय प्रति वर्ष 63,642 रुपए थी जो कि बाद में बढ़कर 1.25 लाख रुपए हो गई।

सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अनुसार 2018-19 के दौरान प्रति व्यक्ति शुद्ध राष्ट्रीय आय अनुमानित रूप से 11.1 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 1,25,397 रुपए है, जो 2017-18 के दौरान 8.6 प्रतिशत की वृद्धि दर के साथ 1,12,835 रुपए थी।

हालाँकि, 2018-19 के दौरान, वास्तविक रूप से प्रति व्यक्ति आय (2011-12 की कीमतों में) 91,921 रुपए के स्तर को छूने की संभावना है। वास्तविक प्रति व्यक्ति आय का आँकड़ा मुद्रास्फीति की कटौती के बाद प्राप्त होता है।

यह भी ध्यान दिया जाना चाहिए कि 2014-15 और 2016-17 के बीच भारत की प्रति व्यक्ति आय वृद्धि भूटान, नेपाल, चीन, बांग्लादेश और पाकिस्तान जैसे उसके पड़ोसियों की तुलना में कम थी। भारत केवल श्रीलंका से आगे था।

गाय संबंधी हिंसा पर शशि थरूर के झूठ का पर्दाफ़ाश, ट्रोल स्वाति चतुर्वेदी ने लिया था इंटरव्यू

कॉन्ग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता शशि थरूर के अपने नये साल की शुरुआत एक ट्रोल से हुई। इस ट्रोल के पीछे उनका वो साक्षात्कार था जो उन्होंने Gulfnews को दिया। बता दें कि इस साक्षात्कार में वो कुछ ऐसा कह गए जिससे उनके झूठ का पर्दाफ़ाश हो गया।

साल 2015 में कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के 57 दिनों के रहस्यमय अवकाश को ‘विपश्यना’ के रूप में संदर्भित करने के अलावा, थरूर को भारत में गाय संबंधी हिंसा के बारे में झूठ बोलते हुए भी पकड़ा गया था।

इंटरव्यू का स्क्रीनशॉट

पत्रकार और आदत से लाचार ट्रोल स्वाति चतुर्वेदी ने लिया था साक्षात्कार

ट्रोल स्वाति चतुर्वेदी द्वारा लिए गए इस साक्षात्कार में शशि थरूर को यह दावा करते पाया गया कि साल 2014 के बाद से स्वतंत्र भारत में गाय के प्रति 97% हिंसा हुई। जिसके लिए इस जानकारी का स्रोत वो गृहमंत्री राजनाथ सिंह के गृह मंत्रालय को मानते थे।

जानकारी के मुताबिक, उन्हें दोनों ही पहलुओं पर झूठ बोलते पाया गया। वास्तव में उनका यह दावा मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित था, जिसके लिए IndiaSpend को दोषी करार दिया गया था, जो हिंदू-विरोधी प्रचार फैलाने के लिए गलत आँकड़ों का इस्तेमाल करनेवाली वेबसाइट है।

‘97%’ से संबंधित यह संदिग्ध डेटा पुलिस रिकॉर्ड को देखकर नहीं, बल्कि कुछ कीवर्ड के साथ Google पर सर्च करने पर संकलित किया गया था! इससे भी बदतर तो यह था कि उन्होंने केवल अंग्रेज़ी भाषा के मीडिया से चिपके रहने का फ़ैसला किया और यह कहते हुए गर्व महसूस किया कि हिंदी मीडिया के माध्यम से एक “सरसरी निगाह” के ज़रिये उन्हीं घटनाओं को दिखाने के लिए “प्रदर्शित” किया गया।

बीबीसी और न्यूयॉर्क टाइम्स को भी मिली फ़र्ज़ी जानकारी

मुख्यधारा की मीडिया द्वारा तीव्र गति से इस फ़ेक न्यूज़ को चर्चित किया गया और जल्द ही बीबीसी एवं न्यूयॉर्क टाइम्स सहित कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों को भी इसकी सूचना दी गई। हमने 2014 के चुनावों से पहले गाय से संबंधित अपराधों की कमी पर IndiaSpend की फ़र्जी रिपोर्ट को व्यवस्थित रूप से ध्वस्त कर दिया था।

थरूर का दूसरा दावा था कि यह जानकारी राजनाथ सिंह के गृह मंत्रालय द्वारा दी गई, जो कि पूरी तरह से ग़लत साबित हुआ। वास्तव में, IndiaSpend की बहुत-सी रिपोर्ट जिसमें इसे विचित्र और तथ्यात्मक रूप से ग़लत दावे का उल्लेख किया गया, गलत ही है क्योंकि गृह मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो गाय संबंधी अपराध रिकॉर्ड एकत्र नहीं करता।

इसलिए, न केवल एक कॉन्ग्रेस नेता (कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के अलावा) ने झूठ बोला, बल्कि भ्रम पैदा करने वाले इस आँकड़े को साक्षात्कारकर्ता स्वाति चतुर्वेदी द्वारा ठीक भी नहीं किया गया, जो कि निंदनीय है।

कॉन्ग्रेस के पास BJP को बदनाम करने के अलावा कोई काम नहीं

आपको बता दें कि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि जब शशि थरूर या स्वाति चतुर्वेदी द्वारा झूठ बोला गया हो, ये इससे पहले भी ऐसे भ्रामक काम करते रहे हैं।

कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी को ढाल देने की अपनी कोशिश में, शशि थरूर ने फ़्रांसीसी राष्ट्रपति के साक्षात्कार के बारे में भी झूठ बोला था। उन्होंने मोदी सरकार पर हमला करने के लिए एक इस्लामवादी वेबसाइट से एक फ़र्जी ख़बर भी साझा की थी।

साहित्यिक चोरी की आरोपित स्वाति चतुर्वेदी नियमित रूप से फ़र्जी ख़बरें फैलाने का काम करती हैं। कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता द्वारा एक के बाद एक इस तरह के झूठे दावे ये साबित करते हैं कि जैसे पार्टी के आलाकमान के पास मोदी सरकार को बदनाम करने के अलावा और कोई काम न हो।

गलत आँकड़ों के ज़रिए ‘IndiaSpend’ कर रहा है पीड़ित मुस्लिमों की संख्या में इज़ाफ़ा

सबसे खतरनाक वो लोग हैं जिनके पास खोने के लिए कुछ भी नहीं होता है। अपने दोषपूर्ण आँकड़ों और पक्षपातपूर्ण रिपोर्टिंग, जिसे कि समय-समय पर एक्सपोज़ किया जा चुका है, IndiaSpend के पास शायद ही कोई विश्वसनीयता बाकी रह गई है। जो कि उन्हें एक खतरनाक एजेंडा फ़ैलाने वाला प्लेटफॉर्म साबित करता है।

अपनी नवीनतम रिपोर्ट में ‘स्वराज्य’ ने उनके ‘भ्रामक और सेलेक्टिव रिपोर्टिंग’ के माध्यम से अपने ‘Hate Crime Watch’ लिस्ट में  पीड़ित मुस्लिमों की संख्या को बढ़ाकर दिखाने के, उनके एक और प्रयास को एक्स्पोज़ किया है।

अक्टूबर 2018 में, दक्षिण दिल्ली में रहने वाले आठ साल के अज़ीम की खेल के मैदान में हाथापाई के दौरान मृत्यु हो गयी थी। ‘लिबरल्स’ ने उसकी मृत्यु को पुलिस के नकारने के बाद भी ‘घृणा-जन्य अपराध’ साबित कर दिया था। इस घटना के एक महीने बाद, उसी स्थान पर एक दूसरी घटना में मस्जिद जाने वाले लोगों ने दावा किया कि लोगों ने उनपर पत्थरबाज़ी की। IndiaSpend के अनुसार यह घृणा-जन्य अपराध है।




इसमें अपराधियों के धर्म का उल्लेख ‘अज्ञात’ (Not Known) के रूप में किया गया है।

सच्चाई IndiaSpend के दावे से बहुत अलग है। स्वराज्य की रिपोर्ट के अनुसार, ऊपर दी गई रिपोर्ट में वर्णित दोनों युगल, मुमताज़ तथा उसकी पत्नी शबाना और लियाक़त तथा उसकी पत्नी सरोज की आपस में लड़ाई हुई और उन्होंने एक-दूसरे को घायल कर दिया। निश्चित है कि यहाँ पर पीड़ित ही अपराधी हैं और अपराधी ही पीड़ित भी हैं। इसे वास्तव में किसी दूसरी तरह से पेश नहीं किया जा सकता है।

हौज़ ख़ास के नज़दीक बेगमपुर में ही दक्षिण दिल्ली का सबसे बड़ा मदरसा स्थित है। यहाँ पर स्थित जामिया फरीदिया और जामा मस्जिद वाल्मीकि समाज की झुग्गियों से घिरी हुई है, जहाँ लगभग वाल्मीकि समाज (अनुसूचित जाति) के 500 परिवार और लगभग 20-25 मुस्लिम परिवार रहते हैं। इसके पास ही एक मैदान है, जिसे लोग सार्वजनिक बताते हैं और मदरसा इसे अपनी जमीन बताता है। इन दोनों समुदायों के बीच तनाव का यह एक प्रमुख कारण है। इस मामले में पुलिस ने हताक्षेप किया और विवादास्पद प्रवेश को स्थायी रूप से  प्रतिबंधित कर दिया गया, साथ ही निवास करने वालों के लिए एक अलग रास्ता बनाया गया।

नवम्बर के आख़िरी सप्ताह में स्थानीय निवासी और मदरसा के मालिकों के बीच एक दूसरा विवाद सामने आया। IndiaSpend ने अपने कहानी बनाने के आदतानुसार, इंस्पेक्टर विजय सिंह के बयान को ‘इंडियन एक्सप्रेस’ से उठाकर अपना विशेष कलेवर दे दिया।

इंस्पेक्टर विजय सिंह ने कहा, “मुमताज़ और उसकी पत्नी शबाना, लियाक़त और उसकी पत्नी सरोज और उसकी बेटियों को कुछ मामूली चोटें आई हैं, और उन्हें अस्पताल पहुँचा दिया गया है। झगड़े की वजह एक आम रास्ता है।” IndiaSpend ने इस घटना से सुविधानुसार चारों को पीड़ित तो बता दिया, लेकिन यह नहीं बताया कि झगड़े की वज़ह एक आम रास्ता है।

स्वराज्य की रिपोर्ट के अनुसार, लियाक़त अली और उसकी पत्नी शबाना (दूसरा नाम सरोज) वाल्मीकि कॉलोनी में रहते हैं। मोहम्मद मुमताज़ मदरसा में शिक्षक और संरक्षक है। मूलरूप से विवाद इन दोनों के बीच का ही है।

वाल्मीकि कॉलोनी के निवासियों के अनुसार, कुछ महिलाएँ निर्माणाधीन नए रास्ते की जानकारी लेने गई थीं। वहाँ पर इन दोनों के बीच विवाद उत्पन्न हो गया और मदरसा संरक्षक मुमताज़ ने उन पर लाठी से हमला कर दिया। लियाक़त के अनुसार, उसे मोहम्मद मुमताज़ के हाथों से चोट लगी, जब वो महिला और खुदको बचाने के लिए आगे आया। लियाक़त ने कहा, “मुल्ला महिला पर हमला कर रहा था। जब मैंने बीच-बचाव की कोशिश की तो उन्होंने मुझे ये कहकर मारा कि मैं हिन्दुओं के साथ खड़ा रहता हूँ, इसलिए मेरी पिटाई ज़रूर की जानी चाहिए।”

लियाक़त ने आगे कहा कि वो मदरसे के पक्ष में सिर्फ इसलिए खड़ा नहीं हो सकता क्योंकि उनका एक ही धर्म है। उसने कहा कि वो सिर्फ अपने पड़ोसियों और सही लोगों का ही साथ देगा।

लियाक़त ने अपने कथन में आगे कहा कि उसकी पत्नी शबनम भी घटनास्थल पर पहुँची और उसे भी पीटा गया। शबनम ने बताया की उनकी 13 साल की लड़की को भी ज़ख़्मी किया गया।

शबनम उसी कॉलोनी में पली-बढ़ी है और उसका कहना है कि 30 साल पहले ये कुछ परिवारों के लिए ही सिर्फ एक छोटी सी मस्जिद हुआ करती थी। लेकिन समय के साथ इसका अवैध तरीके से एक मदरसे के रूप में विस्तार किया गया, जिसमें 40 कमरे हैं।

वर्तमान में, इस मदरसे का भी अपनी ही अलग स्वरुप है। मुमताज़ और उसका भाई इजाज़ अली, जो कि मदरसे में पढ़ाते हैं और उसका संरक्षण भी करते हैं, का दावा है कि झगड़ा लियाक़त और उसकी पत्नी द्वारा शुरू किया गया था, जिन्होंने उन पर पथराव किया था। मुमताज़ का कहना है कि क्योंकि उन्होंने मुमताज़ को गुंडा और आतंकवादी कहा था, इसीलिए उसने छड़ी उठाई थी (लेकिन किसी पर उससे हमला नहीं किया था)। ये लोग वहाँ पर भड़काने और लड़ने के लिए गए थे, न कि रास्ते का काम देखने।

मुमताज़ ने आगे जोड़ा कि यहाँ पर मस्जिद विवादित जगह पर वाल्मीकि समाज के लोगों के आने से पहले से थी। उसने एक क़ब्रिस्तान भी दिखाया और दावा किया कि पूरी ज़मीन कब्रिस्तान हुआ करती थी और उन्होंने ही बाद में आकर झुग्गियाँ बनाकर जमीन पर अतिक्रमण किया।

दोनों समूह नए रास्ते के तैयार हो जाने के बाद दावा कर रहे हैं कि मामला समाप्त हो गया है। लेकिन जमीन विवाद के थमने के अभी आसार नहीं हैं।

ज़ुबैर, वाल्मीकि कॉलोनी के दूसरे निवासी, मदरसे द्वारा रास्ता रोककर सार्वजनिक ज़मीन के हड़पे जाने के ख़िलाफ़ हाई कोर्ट चले गए हैं। मुमताज़ का कहना है कि ज़ुबैर ही है जिसने इलाके में हिन्दू-मुस्लिम तनाव को हवा दी और वास्तव में वो खुद मदरसे की जमीन में हस्तक्षेप चाहता था।

इस मामले से अब तक ये तो स्पष्ट है कि विवाद की वजह ज़मीन है, न कि घृणा-जन्य अपराध। स्पष्ट रूप से, अपराध पीड़ितों की धार्मिक और जाति जैसे मुद्दों से पैदा नहीं हुआ था। सवाल ये है कि IndiaSpend लगातार अपनी आदतानुसार किस कारण फ़र्ज़ी ख़बरों को तैयार कर रहा है? ऐसा प्रतीत होता है कि अब IndiaSpend अपने हिन्दू-विरोधी पूर्वग्रहों को छुपाने तक की भी कोशिश नहीं कर रहा है।

यह एकमात्र वाकया नहीं है जब प्रोपगेंडा वेबसाइटों ने अपने कथित विश्लेषण में हिंदू-विरोधी पूर्वग्रह को दिखाया है। हमने पहले भी रिपोर्ट में बताया है किस तरह हिन्दुतान टाइम्स ने भी एक पक्षपातपूर्ण ‘हेट ट्रेकर’ जारी किया था, जिसमें इसी तरह से तथ्यों में त्रुटि और पक्षपातपूर्ण रिपोर्टिंग मौजूद थी।  IndiaSpend की ‘फैक्ट-चेकर’ वेबसाईट ने भी एक ‘ट्रेकर’ शुरू किया था, जिसने गाय से सम्बंधित अपराधों पर नज़र रखने की कोशिश की थी, उसमें दिया गया डेटा भी त्रुटिपूर्ण और पक्षपाती था।

अभिषेक बनर्जी ने, जो कि Opindia पर कॉलम लिखते हैं, IndiaSpend के बारे में पहले भी लिखा है कि किस तरह IndiaSpend रोजाना इस तरह की कहानी को बनाने में मशगूल रहता है। उन्होंने पहले भी एक रिपोर्ट लिखी है कि किस तरह से एक गाय से सम्बंधित हिंसा में 87 लोग मारे गए, जिनमें से 97 प्रतिशत अपराध नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद हुए हैं। ऊपर दी गई रिपोर्ट उसी एक रिपोर्ट का चित्रण है। जैसा कि देखा जा सकता है, उनकी ‘रिसर्च’ गूगल सर्च भी कुछ विशेष ‘कीवर्ड्स’ पर आधारित थी। पाठकों को यह भी मालूम होना चाहिए कि Indiaspend का संस्थापक ट्रस्टी,  factchecker.in का मूल ऑर्गनाइजेशन, अब कॉन्ग्रेस पार्टी में डेटा अनालिस्ट प्रमुख बन चुके हैं। क्या हमें इन कड़ियों को जोड़ना चाहिए?

भारत और तालिबान के बीच मध्यस्थता को तैयार ईरान

ईरान ने कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान के तालिबान में उसका प्रभाव है और वो भारत के लिए उस प्रभाव का इस्तेमाल करने के लिए तैयार है। ईरान के विदेश मंत्री जवाद जरीफ ने अपने भारत दौरे के दौरान बताया कि उनका देश भारत और तालिबान के बीच बातचीत शुरू करा सकता है। ईरानी विदेश मंत्री ने रायसीना डायलॉग को भी सम्बोधित किया और कई भारतीय नेताओं से भी मुलाक़ात किया। पिछले सप्ताह ईरान के एक प्रतिनिधि-मंडल ने तालिबान के नेताओं से मुलाकात की थी। ईरान भी भारत की तरह ही अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के बढ़ते प्रभाव से चिंतित है लेकिन उसने तालिबान के एक धड़े से बातचीत शुरू कर दी है।

ईरानी विदेश मंत्री ने कहा की अफ़ग़ानिस्तानी तालिबान में उनके कुछ प्रभाव हैं। उन्होंने कहा कि ईरानी सरकार अपने उस प्रभाव का इस्तेमाल अफ़ग़ानिस्तान के लिए करना चाहेगी लेकिन अगर भारत चाहता है तो उसके लिए भी ऐसा करने में उन्हें ख़ुशी मिलेगी।

हलाँकि भारत द्वारा इस प्रस्ताव को स्वीकार करने के कम ही आसार हैं। कई ख़बरों में कहा गया है कि इस मामले में भारत हमेशा अफ़ग़ानिस्तान सरकार की तरफ ही है और तालिबान से किसी भी तरह की बातचीत अभी नही की जाएगी। विश्लेषकों का ये भी मानना है की भारत ने पिछले 17 सालों में तालिबान में कुछ सम्पर्क बनाए हैं लेकिन वो सम्पर्क कितने गहरे हैं, इसका अंदाजा लगा पाना मुश्किल है।

ज्ञात हो कि अमेरिका द्वारा अफ़ग़ानिस्तान में अपनी उपस्थिति घटाने और वहाँ स्थित अपने सेना के जवानों की संख्या कम करने की ख़बरों के बाद वहाँ कई तालिबान लड़ाके वापस आ गए हैं और उन्होंने फिर से अपने पाँव पसारने शुरू कर दिए हैं जिस से भारत जैसे देशों की चिंता बढ़ गई है। भारत अफ़ग़ानिस्तान में वहाँ के लोगों के लिए कई तरह के जन-कल्याणकारी योजनाएँ चला रहा है और शांति स्थापना की प्रक्रिया में अफ़ग़ानिस्तान सरकार के साथ कदमताल कर काम कर रहा है।

अमेरिका ने ही तालिबान से बातचीत की प्रक्रिया शुरू कर दी है आज इसी सिलसिले में दोनों पक्षों के बीच चौथे दौर की बैठक होने वाली है। कुछ दिनों पहले पाकिस्तान की मध्यस्थता में दोनों पक्षों के बीच अबु-धाबी में दो दिनों तक बैठकों का दौर चला था। हलाँकि अब कई देश तालिबान से बातचीत कर रहे हैं या फिर उसके लिए तैयार हैं लेकिन भारत इस मामले में आशंकित है। भारत तालिबान के भीतर पाकिस्तान के बढ़ते दबदबे से ख़ासा चिंतित है और इसी कारण उसने तालिबान के साथ कई देश के हुए बैठक में अपने वरिष्ठ अधिकारीयों को नहीं भेजा था। उस बैठक में भारत ने गैर आधिकारिक तौर पर हिस्सा लिया था।

ईरान और अफ़ग़ानिस्तान के रिश्ते पूर्व में काफी तल्ख़ रहे हैं क्योंकि ईरान अपने देश से सटे कुछ इलाके में तालिबान खिलाफ रहा है लेकिन पाकिस्तान और तलिबान के रिश्ते हमेशा से सही रहे हैं। तालिबान से अमेरिका से बातचीत करा कराने की प्रक्रिया में शामिल पाकिस्तान इसे अपनी कूटनीतिक जीत के तौर पर पेश करता है। भारत दौरे पर आए ईरानी मंत्री के इस प्रस्ताव के बाद अब कयास लगाने जाने लगे हैं कि क्या अब भारत आधिकारिक तौर पर तालिबान से बातचीत में शामिल होगा या नहीं?

अंतरिम बजट में मध्यम वर्ग को मिल सकता है बड़ा तोहफा

1 फरवरी को वित्त मंत्री अरुण जेटली संसद में साल 2019 के लिए अंतरिम बजट पेश करने जा रहे हैं। मोदी सरकार द्वारा आर्थिक आधार पर आरक्षण देने की घोषणा के बाद अब ये कयास लगाए जा रहे हैं कि इस बजट में मध्यम वर्ग के लिए पिटारा खोला जा सकता है। बता दें कि ये पूर्णकालिक बजट नहीं होगा बल्कि अंतरिम बजट होगा। इस साल होने वाले चुनावों के बाद जो सरकार जीत कर आएगी उसके द्वारा इस वित्त वर्ष के ख़त्म होने तक का बजट पेश किया जाएगा। इस बजट में किसानों के लिए भी बहुत कुछ रहने की उम्मीद है, वहीं छोटे औद्योदिक इकाइयों के लिए भी अहम घोषणाएँ किए जाने की संभावना है।

वित्त मंत्रालय के भीतर लगातार इस बात पर चर्चा जारी है की अंतरिम बजट का स्वरूप क्या होगा। इस बजट से मोदी सरकार की आगे की नीतियों के बाजरे में भी बहुत कुछ पता चलने की उम्मीद है। कुल मिला कर देखा जाये तो चुनावों से तीन महीने पहले आ रहे इस बजट में आम लोगों के लिए बहुत कुछ होगा। विश्लेषकों का मानना है कि इस बजट में किसानों के लिए एक ख़ास पैकेज की घोषणा भी की जा सकती है।

एक सप्ताह पहले दिए अपने एक साक्षात्कार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि हमे मध्यम वर्ग के प्रति अपनी सोच और नजरिया बदलने की जरूरत है। नवभारत टाइम्स ने अपने गोपनीय सूत्रों के हवाले से बताया;

“पिछले चार बजट में हमने सैलरीड क्लास को राहत दी, क्योंकि वे देश के सबसे ईमानदार टैक्सपेयर्स हैं। अंतरिम बजट की सीमाओं के भीतर हम इस बार भी जितना अधिक कर सकते हैं करेंगे।”

इसके अलावे इनकम टैक्स छूट की सीमा भी बढ़ाए जाने की सम्भावना है। इस से सैलरीड मध्यम वर्ग को बड़ी राहत मिलेगी। उनके लिए बचत सीमा भी बढ़ाई जाएगी। सैलरीड मध्यम वर्ग को आय कर में मिलने वाली छूट इस बजट की हाईलाइट होगी। इन सब के अलावे कई सारी वस्तुओं पर कस्टम ड्यूटी भी घटाए जाने की सम्भावना है। साथ ही, इस बजट में होम लोन के ब्याज में भी छूट दी जा सकती है। सरकार पेंशनधारी बुजुर्गों को भी टैक्स छूट देने पर विचार कर रही है।

इस से पहले 2014 में चिदंबरम और 2009 में प्रणब मुखर्जी ने वित्त मंत्री रहते हुए अंतरिम बजट पेश किया था और दोनों में ही काफी लोक-लुभावन घोषणाएँ की गई थी। ये दोनों बजट भी चुनावी वर्ष में ही पेश हुए थे और नई सरकार आने के बाद पूर्ण बजट पेश किया गया था।

बलात्कार आरोपित बिशप फ्रैंको के ख़िलाफ़ आंदोलन में शामिल होने वाली नन को चर्च की धमकी

केरल में फ्रांसिस्कन क्लेरिस्ट कांग्रेगेशन (FCC) के सुपीरियर जनरल सर एन जोसेफ (Sr. Ann Joseph FCC) ने लकी कलपुरा नाम की नन को हुजूम से निकाल देने की धमकी दी है।

ऐसी धमकी उन्हें केवल इसलिए मिली है क्योंकि वह रेप आरोपी बिशप फ्रैंको मुलक्कल के खिलाफ न्यूज़ चैनलों में बातचीत का हिस्सा बनती थी, गैर-ईसाई अखबारों में उनके लेख छपते थे और साथ ही उनपर कैथोलिक नेतृत्व के खिलाफ गलत आरोप लगाने का इल्ज़ाम है।

मुलक्कल पर 2014 और 2016 के बीच जीसस मिशनरी की एक नर्स पर कई बार रेप करने का आरोप है। जिसके कारण वो अपनी बेल से पहले 3 हफ़्ते पाला की सब-जेल में भी गुज़ार कर आ चुके हैं। इसी मामले पर कुछ ननों के साथ मिलकर कलपुरा ने कोचिन के उच्च न्यायलय के परिसर में पिछले साल कई हफ्तों तक भूख हड़ताल की थी।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार कलपुरा को जो नोटिस प्राप्त हुआ है, उसमें लिखा हुआ है- “20 सितंबर से लेकर अभी तक तुम्हारे द्वारा किए गए काम बेहद शर्मसार करने वाले रहे जोकि चर्च को और FCC को नुकसान पहुँचा सकते हैं। तुम अपने से ऊपर पद पर आसित लोगों की अनुमति लिए बिना अरन्नाकुलम हाई कोर्ट गईं और SOS एक्शन काऊंसिल द्वारा किए 20 सितंबर 2018 के आंदोलन में भाग लिया। तुमने गैर-ईसाई अखबारों में और मंगलम (MANGALAM) और मध्यम्म(MADHYAMAM) जैसी साप्तिहिकी में भी लिखा, इसके अलावा समय (Samayam) को बिना किसी की अनुमति के तुमने इंटरव्यू भी दिया। फ़ेसबुक के ज़रिए और चैनलों की बातचीत का हिस्सा बनकर तुमने कैथोलिक नेतृत्व पर आरोप लगाया और साथ ही हमारे मूल्यों को भी गिराने की कोशिश की है। तुमने FCC की छवि बिगाड़ने का भी प्रयास किया है। तुम्हारा सोशल मीडिया पर बतौर धार्मिक सिस्टर होकर ऐसा प्रदर्शन बेहद शर्मनाक है।”

इंडियन एक्सप्रेस से हुई बातचीत में कलपुरा ने बताया कि उन्हें नहीं लगता कि कैथोलिक चर्च के नोटिस में जिन कार्यों का वर्णन हैं, उनमें से कुछ भी गलत है, उनका कहना है कि अगर उन्हें पहले पता होता कि वो लोग गलत हैं, तो वो कभी भी उनसे नहीं जुड़ती। उन्होंने कहा कि उन्हें इस मामले से संबंधित किसी भी प्रकार का कोई स्पष्टीकरण नहीं देना है। इसमें कोई दो राय नहीं हैं कि ये बदला लेने जैसा काम है।