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ISI ने फेंका हुस्न का जाल, देश से दगाबाजी करने लगा बंगाल का जवानः सेना के गोपनीय दस्तावेज और युद्धाभ्यास के Video भेजे

राजस्थान में तैनात सेना के एक जवान को गिरफ्तार किया गया है। पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी आईएसआई के हनीट्रैप (Honey Trap) में फँसकर वह सेना की गोपनीय जानकारी भेज रहा था। CID इंटेलिजेंस जयपुर की टीम ने उसे पकड़ा है। जवान की पहचान शांतिमोय राणा के तौर पर हुई है। वह पश्चिम बंगाल का रहने वाला है।

इंटेलीजेंस के डीजी उमेश मिश्रा ने बताया, “करीब एक महीने की निगरानी के बाद पाया गया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, वाट्सएप के जरिए सेना का जवान दो ISI एजेंट के संपर्क में है। यह जवान इन लड़कियों के हनीट्रैप में फँस चुका था। गोपनीय सूचनाएँ शेयर करने के बदले जवान के बैंक खाते में ऑनलाइन पेंमेंट भी किया जाता था। शांतिमोय को 25 जुलाई को हिरासत में लिया गया। पूछताछ के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। उससे आगे पूछताछ की जा रही है।”

मिश्रा के मुताबिक, शांतिमोय राणा पश्चिम बंगाल के बांकुडा जिले के कंचनपुर गाँव का रहने वाला है। मार्च 2018 में वह सेना में भर्ती हुआ था। वह पिछले काफी समय से दो लड़कियों से हर रोज चैटिंग और वीडियो कॉल करता था। इन लड़कियों के कहने पर शांतिमोय राणा ने सेना के गोपनीय दस्तावेज की फोटो और युद्धाभ्यास के वीडियो भेजे थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों लड़कियों ने खुद को यूपी का निवासी बताते हुए राणा से दोस्ती की थी। एक लड़की ने उसे अपना नाम गुरनूर गौर उर्फ अंकिता बताया, जबकि दूसरी ने अपना नाम निशा बताया था। गुरनूर ने खुद को सेना की इंजीनियरिंग सर्विस में यूपी में तैनात होना बताया था। बताया जा रहा है कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी से जुड़ी लड़कियाँ भारतीय जवानों को फेसबुक मैसेंजर के जरिए अपने जाल में फँसाती हैं। फिर उनसे देश से जुड़ी गोपनीय सूचनाएँ मँगवाती हैं।

ISI की महिला एजेंट जवानों को अपने जाल में फँसाने से पहले पूरा होमवर्क करती हैं। कैप्टन रैंक के अफसरों द्वारा इन्हें मारवाड़ी और पंजाबी में बातें करने और रहन-सहन की ट्रेनिंग दी जाती है। यही नहीं, इन युवतियों को रिया, पूजा, अवनी, अनिका, हरलीन, मुस्कान जैसे नाम देकर हिंदू पहचान दी जाती है ताकि आसानी से सेना का जवान इनके जाल में फँस सके। इसी साल मई में यह बात सामने आई थी कि जोधपुर में तैनात गनर प्रदीप कुमार को अपने जाल में फँसाने वाली एजेंट रिया ने खुद को मिलिट्री नर्सिंग सर्विस की नर्स बताया था। उसने 10 लोगों को हनीट्रैप में फँसाया था।

गौरतलब है कि कई वर्षों से पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI द्वारा खूबसूरत लड़कियों को भारतीय नागरिकों और जवानों के पीछे लगाया जाता रहा है। सोशल मीडिया के जरिए सेना के जवानों को अपने झाँसे में लेकर भारतीय सेना व सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े कई राज जुटाए जाते हैं और फिर उसे पाकिस्तान पहुँचाया जाता है। मुख्य तौर पर सेना के मूवमेंट और हथियारों के बारे में जानकारियाँ इकट्ठा करना इनकी मुख्य मंशा होती है।

कर्नाटक के बेल्लारे में घर लौट रहे BJP नेता को कुल्हाड़ी से काटा, केरल नंबर की बाइक से आए थे हमलावर: मस्जिद कनेक्शन की भी चर्चा

कर्नाटक के मंगलूरु के दक्षिण कन्नड़ जिले में मंगलवार (26 जुलाई 2022) रात भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा के जिला सचिव प्रवीण नेत्तारू की हत्या कर दी गई। घटना बेल्लारे इलाके की है। वहाँ कुछ अज्ञात हमलावरों ने भाजपा नेता प्रवीण नेत्तारू पर धारदार हथियार से हमला किया जिसके बाद उनकी मौत हो गई। सामने आई तस्वीरों में नेत्तारू के शव को खून से लथपथ देखा जा सकता है।

बताया जा रहा है कि घटना के वक्त प्रवीण नेत्तारू बेल्लारे स्थित अपनी पोल्ट्री की दुकान पर थे। जब रात में उनके घर जाने का समय हुआ तो वहाँ 9 बजे के करीब कुछ बाइकसवार हमलावर आए और उनके ऊपर कुल्हाड़ी से हमला कर दिया गया।

अभी तक मिली जानकारी के अनुसार बता दें कि प्रवीण भाजपा युवा मोर्चा के सदस्य थे और साथ ही सोशल व पॉलिटिकल सर्कल में काफी सक्रिय थे। उनकी हत्या के बाद दक्षिण कन्नड़ जिले की पुलिस ने केस को दर्ज किया है। पुलिस का कहना है कि अभी हत्या का मालूम नहीं चल सका है लेकिन जाँच चल रही है।

एक रिपोर्ट बताती है कि जिन लोगों ने प्रवीण पर हमला किया वह केरल के रजिस्ट्रेशन नंबर वाली बाइक से आए थे। घटना भी केरल के बॉर्डर के नजदीक वाले इलाके की है। टाइम्स नाऊ नवभारत ने भी कहा है कि केरल के नंबर वाली बाइक पर हमलावर आए थे। अंदाजा लग रहा है कि शायद ये हत्या पिछले दिनों हुई एक मुस्लिम व्यक्ति की हत्या या फिर मस्जिद से जुड़े मामले को लेकर की गई है। पुलिस ने हालातों के मद्देनजर फोर्स इलाके में तैनात की हुई है।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने भाजपा नेता की हत्या पर दुख जताया। साथ ही परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की है। उन्होंने कहा, “दक्षिण कन्नड़ जिले से हमारी पार्टी के कार्यकर्ता प्रवीण नेत्तारू की बर्बर हत्या निंदनीय है। इस तरह का जघन्य अपराध करने वालों को जल्द ही अरेस्ट किया जाएगा और कानून के तहत सजा मिलेगी। प्रवीण की आत्मा को शांति मिले। ईश्वर उनके परिवार को इस दुख को सहने की शक्ति दे।”

इस बीच भाजपा नेता की हत्या के विरोध में कई लोग रात से सड़कों पर आ गए हैं। पार्टी के अन्य कार्यकर्ता इंसाफ माँगते हुए ‘हमें न्याय चाहिए’ के नारे लगा रहे हैं। माहौल देखते हुए पुत्तूर के अस्पताल के बाहर पुलिस तैनात की गई है।

कर्नाटक में घटी ऐसी अन्य घटनाएँ

बता दें कि कर्नाटक में भाजपा नेताओं, आरएएस व बजरंग दल कार्यकर्ताओं पर हमले के अब तक कई मामले सामने आ चुके हैं। 23 जून 2018 को भाजपा नेता मोहम्मद अनवर की रात करीब साढ़े 9 बजे गौरी कनुवे इलाके में बाइक सवार अज्ञात हमलावरों ने इसी तरह चाकू मार कर हत्या कर दी थी। वह चिकमंगलुर के अर्बन यूनिट के बीजेपी महासचिव पद थे।

इसी प्रकार बजरंग दल के 26 वर्षीय कार्यकर्ता हर्षा की इसी साल 20 फरवरी को चाकुओं से गोदकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस की जाँच में सामने आया था कि हर्षा ने हाल में अपने फेसबुक प्रोफाइल पर हिजाब के ख़िलाफ़ और भगवा शॉल के समर्थन में पोस्ट लिखी थी। घटना को 10 कट्टरपंथियों ने मिल कर अंजाम दिया था। कुछ दिन पहले हर्षा के दोस्त पर भी कट्टरपंथियों ने हमला किया था।

‘यहाँ कोई भेदभाव नहीं’: बोलीं काँवड़ यात्रा में शामिल महिलाएँ, काँवड़ियों ने कहा – कोई नहीं पूछता जाति, लंगर में ‘भोले’ मान कर सभी की सेवा

जो वामपंथी समाज हिन्दू धर्म में जातिवाद का ढोल पीट कर अपने तरह-तरह के स्वार्थ सिद्ध करता है उसको कहीं न कहीं काँवड़ यात्रा एक बड़ा और कड़ा संदेश देती है। पिछली रिपोर्टों में जमीनी तौर पर जुटाई जानकारी से हमने ये बताया कि शिव सबके हैं। इनके साथ इस यात्रा में यह साबित हुआ कि काँवड़ यात्रा न सिर्फ हिन्दुओं में जातिवाद का खंडन करती है बल्कि यह भी बताती है कि हिन्दू धर्म में लिंग भेद का कोई स्थान नहीं है।

मुजफ्फरनगर से हरिद्वार रोड पर बागोवाली चौराहे के पास आराम कर रहे काँवड़ यात्रियों से हमने सवाल किया कि क्या किसी ने उनकी जाति पूछी? इस पर उन्होंने बताया, “हरिद्वार से ले कर अब तक लगभग 100 किलोमीटर का सफर तय कर चुके हैं हम। हमसे किसी ने जाति का नाम भी नहीं लिया। हर कोई एक दूसरे को भोले कह कर ही बुला रहा है। इस यात्रा में लग ही नहीं रहा कि जाति होती भी है।”

एक साथ बैठ कर थकान मिटाते काँवड़िए

काँवड़ यात्रा में शामिल किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर भवानी माँ ने ऑपइंडिया को बताया, “मेरा खुद का जन्म दलित परिवार में हुआ था। आज मैं जूना अखाड़े के पवित्र आश्रम में सम्मान के साथ रुकी हूँ और किन्नर अखाड़े में महामंडलेश्वर की पदवी पर हूँ।”

किन्नर अखाड़ा महामंडलेश्वर भवानी माँ

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्री महंत रविंद्र पुरी ने ऑपइंडिया को बताया, “जिसे हिन्दू धर्म जाति व्यवस्था में बँटा दिखाई देता है वो यहाँ आए। हम संतों को भी बेवजह जातिवाद के नाम पर बदनाम किया जाता है जबकि हमने सिर्फ समाज को जोड़ने का काम किया है। हरिद्वार में अनगिनत लंगर चल रहे हैं। न उसमें खाने वाले की कोई जाति पूछ रहा है और न ही खिलाने वाले की।”

श्री महंत रविंद्र पुरी

हरिद्वार के कथावाचक पवन शास्त्री ने ऑपइंडिया को बताया, “जातिवाद के नाम पर महज राजनीति करने वाले कुछ लोग ही हिन्दू धर्म को बदनाम करते हैं। मैंने अनगिनत काँवड़ वेदमंत्रों से अभिमंत्रित कर के उठवाई है। किसी से जाति तो दूर उसका धर्म भी नहीं पूछा। शिव पर सबका समान अधिकार है। ये काँवड़ तो छोड़िए, मेरी उम्र 40 साल से अधिक है और मैंने अपने अब तक के जीवन में एक भी केस ऐसा नहीं सुना जिसमें किसी भी काँवड़िए की किसी ने जाति पूछी हो।”

कथावाचक पवन शास्त्री

हरिद्वार के समाजसेवी अधीर कौशिक ने हमसे बात करते हुए कहा, “अफ़सोस की बात ये है कि मीडिया यहाँ दिख रही सामाजिक समानता को नहीं दिखाती। फर्जी खबरें फैलाने वालों को मेरी चुनौती है कि वो हिन्दुओं की आस्था के केंद्र पूरे हरिद्वार में एक भी स्थान या मंदिर ऐसा दिखा दें जिसमें किसी भी जाति विशेष के आने पर रोक हो। जातिवाद तो दूर, यहाँ क्षेत्रवाद भी नहीं है। किसी ने किसी भी काँवड़िए से ये नहीं पूछा कि कहाँ से आए हो। असल में वामपंथी हमारे तीर्थस्थलों और संतों को बस अफवाह उड़ा कर बदनाम करना चाहते हैं।”

समाजसेवी अधीर कौशिक

काँवड़ यात्रा में लिंगभेद भी नहीं

काँवड़ यात्रा में महिलाओं की भी अच्छी-खासी तादाद देखी गई। यात्रा में शामिल कुछ महिलाओं ने ऑपइंडिया से बताया, “पूरी काँवड़ यात्रा में हमें कहीं भी किसी भी भेदभाव का सामना नहीं करना पड़ा। हम पुरुष काँवड़ यात्रियों के साथ कंधे से कंधा मिला कर चल रहे हैं।”

जत्थे में सबसे आगे चल रही महिला काँवड़ यात्री

इसके अलावा महिलाएँ कई दुकानों पर सामान बेचने के साथ भंडारे आदि में काँवड़ियों की सेवा करते दिखाई दीं। उन सभी के चेहरे पर संतोष और सेवा के भाव दिखे।

सेल्फी के चक्कर में ब्रिटिश टूरिस्ट की गई जान, हेलीकॉप्टर की ब्लेड से ग्रीस में हुआ हादसा

ग्रीस में सोमवार (25 जुलाई, 2022) शाम एक हेलीकॉप्टर के प्रोपेलर की चपेट में आने से एक 22 वर्षीय ब्रिटिश पर्यटक की मौत हो गई है। ब्रिटेन के टाइम्स अखबार ने बताया कि पुलिस ने पीड़ित की पहचान जैक फेंटन के रूप में की और कहा कि वह अपने चार्टर्ड विमान से उतरते समय गंभीर रूप से घायल हो गया था। जिससे उसकी मौत हो गई।

इस मामले में एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने टाइम्स को बताया, “वह एथेंस में बेल 407 हेलीकॉप्टर से उतरने वाले पहले व्यक्ति थे और जैसे ही वह पीछे की ओर बढ़े, विमान के छोटे रियर रोटर से उनके सिर में चोट लग गई।” वहीं द सन की रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि सेल्फी लेने के चक्कर में पीछे जाने से यह हादसा हो गया।

टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, फ़िलहाल, हेलीकॉप्टर पायलट और दो ग्राउंड क्रू को फिलहाल हिरासत में लिया गया है और जिन्हें कथित लापरवाही के आरोपों में कोर्ट के पेश किया गया।

वहीं इस मामले में एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने मीडिया को बताया, “हम यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या गलत हुआ और यह दुखद दुर्घटना कैसे हुई।”

रिपोर्ट के अनुसार, दरअसल, जैक फेंटन ने अपने तीन दोस्तों के साथ मायकोनोस (Mykonos) से स्पाटा के एक निजी हवाई अड्डे के लिए उड़ान भरने के लिए दो हेलीकॉप्टर किराए पर लिए थे। वे तब एक निजी जेट से वापस यूके जाने की योजना बना रहे थे। इसी दौरान ग्रीस के एथेंस में हेलीकॉप्टर ब्लेड से उसके सिर में चोट लग गई, जिससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई।

इस मामले में कहा जा रहा है कि फेंटन हेलीकॉप्टर से उतरने के बाद पीछे की ओर चले गए, जबकि इसके इंजन अभी भी चल रहे थे। और टेल रोटर से घायल होने की वजह से मौत हो गई।

वहीं फेंटन के माता-पिता दूसरे हेलीकॉप्टर में थे, जो दुर्घटना के समय तक जमीन नहीं उतरा था। द इंडिपेंडेंट की रिपोर्ट के अनुसार, उस हेलीकॉप्टर के पायलट ने जमीन पर अपने सहयोगियों द्वारा सतर्क किए जाने के बाद दूसरे हवाई अड्डे के लिए उड़ान भरने का फैसला किया, ताकि उनके माता-पिता को दुर्घटना का यह भयावह दृश्य न देखना पड़े।

जबकि इस मामले में फेंटन के दोस्त जैक स्टैंटन-ग्रीव्स, जो हेलीकॉप्टर में साथ में थे, ने द सन को बताया कि हेलिकॉप्टर से बाहर निकलते समय उन्हें कोई निर्देश नहीं दिया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें नहीं पता कि उनका दोस्त पीछे के ब्लेड की ओर क्यों मुड़ा।

वहीं ग्रीक अधिकारियों ने दावा किया है कि समूह को हेलीकॉप्टर से दूर ले जाया गया था – लेकिन जैक अपने फोन पर बिजी था। पुलिस इस एंगल से भी जाँच कर रही है कि हो सकता है कि युवक हेलिकॉप्टर के साथ सेल्फी लेने की कोशिश कर रहा हो।

हिन्दू विरोधी ही नहीं, जातिवादी लड़ाई को भी बढ़ावा देती है ‘शमशेरा’: ‘दरोगा शुद्ध सिंह’ अंग्रेजों का दलाल, चौथे दिन 70% गिरा कलेक्शन

बॉलीवुड अभिनेता रणबीर कपूर (Ranbir Kapoor) की फिल्म ‘शमशेरा’ (Shamshera) बॉक्‍स ऑफिस पर 4 दिनों में ही ढेर हो गई। 4 साल के बाद सिल्वर स्क्रीन पर लौटे रणबीर कपूर ने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि उनकी फिल्म ‘शमशेरा’ का इतना बुरा हश्र होगा। 4000 से अधिक स्क्रीन पर रिलीज होने के बावजूद यह फिल्म दर्शक जुटा पाने में सफल नहीं हो पाई। ओपनिंग डे पर 10 करोड़ रुपए की कमाई करने वाली ‘शमशेरा’ चौथे दिन केवल 3.25 करोड़ रुपए का बिजनेस ही कर पाई।

150 करोड़ रुपए के बजट में बनी यह फिल्‍म बॉक्‍स ऑफिस पर बॉलीवुड की अगली डिजास्‍टर साबित होने वाली है। सोमवार की कमाई देखकर यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि ‘शमशेरा’ 100 करोड़ रुपए भी नहीं कमाए पाएगी। ‘शमशेरा’ फिल्म जाति के नाम पर भी लड़ाती है, जहाँ अंग्रेजों के दलाल ‘दरोगा शुद्ध सिंह’ (संजय दत्त) को जनजातीय लोगों पर क्रूरता करते हुए दिखाया गया है और डाकू के किरदार में हीरो को ‘सवर्णों’ को लूटते हुए दिखाया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सोमवार को ‘शमशेरा’ के कलेक्शन में 70 फीसदी गिरावट दर्ज की गई। ‘शमशेरा’ के चौथे दिन की कमाई मिलाकर मूवी की कुल कमाई 34 करोड़ हो गई है। ‘शमशेरा’ ने शुक्रवार को 10.25 करोड़, शनिवार 10.50 करोड़, रविवार 11 करोड़ का कलेक्शन किया है।

‘शमशेरा’ फिल्‍म की सबसे कमजोर कड़ी इसकी कहानी को बताया जा रहा है। यही नहीं सिनेमाघरों में साउथ की फ़िल्में जैसे ‘पुष्‍पा’, ‘आरआरआर’ और ‘केजीएफ 2’ के रिलीज होने के बाद से दर्शकों की अपेक्षाएं बढ़ गई हैं। उन्हें बॉलीवुड फिल्मों की कहानी पसंद नहीं आ रही है। यही कारण है कि ‘शमशेरा’ का फर्स्‍ट वीकेंड भी बहुत ही बुरा रहा। हालाँकि, एक के बाद बॉलीवुड फिल्मों के फ्लॉप होने की वजह यही बताई जा रही है।

बता दें कि राजकुमार हिरानी की फिल्म ‘संजू’ की रिलीज के चार साल बाद ‘शमशेरा’ से रणबीर कपूर ने बड़े पर्दे पर वापसी की है। फिल्‍म में वह डबल रोल में हैं। इसमें उनके साथ संजय दत्त, वाणी कपूर, रोनित रॉय और सौरभ शुक्‍ला भी हैं, लेकिन दमदार स्टारकास्ट और डायरेक्‍टर करण मल्‍होत्रा के बावजूद यह फिल्‍म दर्शक बटोरने में नाकाम रही है।

जम्मू कश्मीर में क्रिकेट को भी नहीं छोड़ा, वहाँ भी मनी लॉन्ड्रिंग: फारूक अब्दुल्ला के खिलाफ ED की चार्जशीट, 11 साल थे JKCA के अध्यक्ष

जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन (JKCA) से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार (26 जुलाई, 2022) को जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला (Farooq Abdullah) के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। इस चार्जशीट में अब्दुल्ला के साथ-साथ JKCA के तब के अधिकारी अहसान अहमद मिर्जा, मीर मंजूर गजानफर आदि को भी आरोपित बनाया गया है। इस मामले में अब्दुल्ला समेत बाकी आरोपितों की 27 अगस्त 2022 को पेशी होगी।

मालूम हो कि ईडी जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन (जेकेसीए) से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जाँच कर रहा है, जब फारूक अब्दुल्ला 2001 से 2012 तक जेकेसीए अध्यक्ष थे। ईडी ने विशेष पीएमएलए कोर्ट श्रीनगर के समक्ष मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट 2002 के तहत फारूक अब्दुल्ला, अहसान अहमद मिर्जा, मीर मंजूर गजनफ्फर और अन्य के खिलाफ एक पूरक अभियोजन शिकायत (The Supplementary Prosecution Complaint) दायर की है। इससे पहले अनुपूरक अभियोजन शिकायत 28 फरवरी 2020, 18 दिसंबर 2020 और 25 फरवरी 2022 को तीन अंतिम कुर्की आदेशों से पहले की गई थी। इसमें फारूक अब्दुल्ला, मिर्जा सन्स, मीर मंजूर गजनफ्फर और अहसान अहमद मिर्जा से संबंधित कुल 21.55 करोड़ रुपए की चल एवं अचल संपत्ति को अटैच किया गया था।

ईडी के मुताबिक, जाँच में पाया गया है कि JKCA बैंक अकाउंट से बिना किसी कारण कैश निकासी हुई। इसके साथ-साथ JKCA का पैसा कई निजी खातों में ट्रांसफर हुआ, जिसमें JKCA के कुछ अधिकारियों के खाते भी शामिल थे। ईडी ने सीबीआई द्वारा दर्ज FIR को इस मामले में जाँच का आधार बनाया था। सीबीआई ने यह FIR जुलाई 2018 में दर्ज की थी। इसमें जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन को गलत तरीके से नुकसान पहुँचाने और आरोपितों को 43.69 करोड़ रुपए का फायदा कराने का आरोप था, जिसके बाद मनी लॉन्ड्रिंग की जाँच शुरू की गई थी।

बता दें कि इस मामले में ईडी अब तक 21.55 करोड़ रुपए की संपत्ति अटैच कर चुका है। JKCA के तत्कालीन कोषाध्यक्ष अहसान अहमद मिर्जा को CBI ने 4 सितंबर, 2019 को गिरफ्तार किया था।

अस्पताल के कमरे में मस्त सो रहे थे सत्येंद्र जैन, ED के पहुँचते ऑक्सीजन मास्क और बीपी बेल्ट लगा लिया: जिस हॉस्पिटल में भर्ती, वो दिल्ली सरकार का

दिल्ली के मंत्री सत्येंद्र जैन को LNJP की बजाए AIIMS में भर्ती कराने की माँग ED ने की है, क्योंकि उनकी मेडिकल रिपोर्ट्स में छेड़छाड़ की आशंका है। ED अधिकारियों का कहना है कि जब वो अस्पताल में भर्ती सत्येंद्र जैन के कमरे में पहुँचे तो वो वहाँ सो रहे थे और किसी भी मेडिकल उपकरण से उनकी निगरानी नहीं की जा रही थी। उनकी पत्नी भी वहाँ उनके साथ में ही थी। ED ने कहा है कि उन्हें RML या सफदरगंज अस्पताल में भी भर्ती कराया जा सकता है।

यही माँग करते हुए ED ने दिल्ली उच्च-न्यायालय में याचिका भी दायर की है। LNJP अस्पताल दिल्ली सरकार के अंतर्गत ही आती है और दिल्ली में AAP की सरकार है। सत्येंद्र जैन इसी सरकार में मंत्री हैं। ED का कहना है कि सत्येंद्र जैन स्वस्थ हैं और बीमारी का बहाना बना कर अस्पताल में भर्ती हैं, जिसमें अस्पताल प्रशासन उनका सहयोग कर रहा है। उनके स्वास्थ्य की स्वतंत्र जाँच हो सके, इसीलिए किसी केंद्रीय अस्पताल में परीक्षण की माँग की गई है।

27 जून को इसकी जाँच के लिए ED के अधिकारी अस्पताल में उनके कमरे में गए थे, जहाँ उन्होंने पाया कि मल्टीपारा रोगी मॉनिटर बंद पड़ा था और सत्येंद्र जैन मस्त सो रहे थे। उन्हें कोई परेशानी नहीं दिख रही थी। जैसे ही ED के अधिकारी वहाँ पहुँचे, सत्येंद्र जैन ने तुरंत ऑक्सीजन मास्क पहन कर बीपी जाँचने वाला बेल्ट लगा लिया और मॉनिटर चालू कर के लेट गए। निचली अदालत पहले ही ED की माँग को ख़ारिज कर चुकी है।

6 जुलाई के इसी आदेश को अब ED ने दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है। LNJP अस्पताल की वेबसाइट पर सत्येंद्र जैन की तस्वीर प्रमुखता से दिखाई जा रही है, क्योंकि वो दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री हैं। उनके द्वारा यहाँ एक पट्टिका के उद्घाटन की भी तस्वीर है। LNJP अस्पताल से इस सम्बन्ध में जवाब माँगा गया है और 29 जुलाई को इसकी सुनवाई होगी। उधर पश्चिम बंगाल में शिक्षक भर्ती घोटाले में फँसे TMC के मंत्री पार्था चटर्जी ने यही तिकड़म आजमाया, लेकिन कलकत्ता हाईकोर्ट ने उनकी याचिका ख़ारिज करते हुए भुवनेश्वर के AIIMS में मेडिकल जाँच कराने को कहा।

‘जेल में AC कमरे में रहा मोहम्मद ज़ुबैर’: TNM ने घंटे भर में बदली अपनी खबर, फेक न्यूज़ फैलाने की कोशिश या विक्टिम कार्ड खेलने की?

द न्यूज मिनट (टीएनएम) ने हाल ही में ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर के जेल से छूट के आने के बाद एक इंटरव्यू प्रकाशित किया था। हाल ही में मोहम्मद ज़ुबैर को उत्तर प्रदेश में दर्ज करीब आधा दर्जन से अधिक मामलों में सुप्रीम कोर्ट द्वारा जमानत दी गई थी, जिसमें हिंदू संतों को बदनाम करने से लेकर फर्जी खबरें फैलाने तक के कई मामले शामिल थे।

हालाँकि, इंटरव्यू प्रकाशित होने के तुरंत बाद ही उसे अपडेट किया गया क्योंकि पाठकों ने इस बात पर घेर लिया कि कैसे ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक मोहम्मद ज़ुबैर यूपी के जेलों में आराम से से रहे जबकि लिबरल-वामपंथी गिरोह ऐसी कई कहानियाँ बुनी थी जिसमें ज़ुबैर को गंभीर पीड़ित के रूप दिखाया गया था। उनके द्वारा ऐसा नैरेटिव बनाया गया था जैसर ज़ुबैर के साथ जेल में दुर्व्यवहार हो रहा हो या कठोर परिस्थिति में रखा गया हो।

द न्यूज मिनट में प्रकाशित रिपोर्ट, एक ऐसा संस्थान जो अपने वामपंथी झुकाव के लिए जाना जाता है और जिसके वरिष्ठ नेतृत्व ने ऑल्ट न्यूज़ और मोहम्मद जुबैर के लिए प्रोपेगेंडा चलाने में, झूठ फैलाने में कोई कसर नहीं छोड़ा। हालाँकि, दिल्ली पुलिस हिरासत में जुबैर को जेल में अच्छी तरह से रखा गया था। लेख में कहा गया है कि उन्हें दिल्ली पुलिस द्वारा एक वातानुकूलित कमरे में रखा गया था।

लेकिन घंटों बाद, लेख में वातानुकूलित कमरे के संदर्भ को सिर्फ एक “कमरे” से बदल दिया। नीचे दिए गए स्क्रीनशॉट में देखा जा सकता है कि “एसी रूम” को एडिट करके केवल “रूम” में बदल दिया गया है।

यहाँ AC कमरे के संदर्भ को हटाने का मतलब केवल दो चीजें हो सकती हैं- या तो द न्यूज मिनट ने लेख को एडिट किया क्योंकि इसने दिल्ली पुलिस द्वारा मोहम्मद जुबैर को एसी कमरे में रखने के बारे में फर्जी खबर की रिपोर्ट की- या अपने पीड़ित वाले नैरेटिव को बचाए रखने के लिए इसे बदल दिया गया। जिसको वामपंथी मीडिया ने मोहम्मद ज़ुबैर के 24 दिनों की पुलिस हिरासत में रहने के दौरान गढ़ा था।

यह देखते हुए कि द न्यूज मिनट का लेख एक इंटरव्यू के रूप में प्रकाशित हुआ है और इसमें जुबैर ने जो उत्तर दिए वही बात लिखी गई थी। ऐसे में इस बात की संभावना न के बराबर है कि उस कमरे के प्रकार के बारे में जानकारी नहीं थी जिसमें दिल्ली पुलिस ने ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक मोहम्मद ज़ुबैर को रखा था।

इसलिए, यह कहा जा सकता है कि रिपोर्ट में वही प्रकाशित किया गया था जो जुबैर ने उन्हें बताया था, ऐसे में यह संभावना ज़्यादा है कि लेख को दिल्ली पुलिस हिरासत के दौरान एसी कमरे में मोहम्मद ज़ुबैर के रहने के संदर्भ को अपने विक्टिमहुड वाले नैरेटिव के हिसाब से एडिट किया गया था ताकि पीड़ित वाली नैरेटिव को बनाए रखा जा सके। जिसे पिछले महीने ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक की हिन्दुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के आरोप में गिरफ्तार किए जाने के बाद वामपंथी और लिबरल मीडिया संगठनों द्वारा फैलाया गया था। यह नैरेटिव मोहम्मद ज़ुबैर के हिंदूफोबिक ट्वीट और फेसबुक पोस्ट इंटरनेट पर वायरल होने के बाद बड़ी सावधानी से गढ़ा गया था।

धार्मिक भावनाएँ आहत करने के आरोप में मोहम्मद जुबैर गिरफ्तार

बता दें कि मोहम्मद जुबैर को 28 जून, 2022 को दिल्ली पुलिस ने हिंदू धर्म को निशाना बनाते हुए अपमानजनक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए हिन्दुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 153ए और 295 के तहत मामला दर्ज किया गया था। यह प्राथमिकी ट्विटर यूजर @balajikijaiin के एक ट्वीट पर आधारित थी जिसमें यूजर ने जुबैर के एक पुराने ट्वीट का स्क्रीनशॉट शेयर किया था जिसमें ज़ुबैर ने भगवान हनुमान का मजाक उड़ाया था। @balajikijain ने अपने ट्वीट में दिल्ली पुलिस को टैग किया था और उनसे भगवान हनुमान के खिलाफ अपमानजनक पोस्ट के साथ हिंदुओं की भावनाओं को आहत करने के लिए जुबैर के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कहा था।

गौरतलब है कि इससे पहले जून में, जुबैर द्वारा हिंदू देवी-देवताओं का मजाक उड़ाते हुए उसके पुराने हिंदूफोबिक पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे। वहीं मोहम्मद ज़ुबैर के हिंदूफोबिक ट्वीट और सोशल मीडिया पोस्ट इंटरनेट पर वायरल होने से कुछ दिन पहले, जुबैर ने टाइम्स नाउ की एक डिबेट के दौरान एक टिप्पणी को आधार बनाकर भाजपा की पूर्व प्रवक्ता नुपुर शर्मा के खिलाफ मुस्लिम भीड़ को उकसाया था। जिसके परिणामस्वरूप कट्टरपंथी मुस्लिम उनके जान के पीछे पड़ गए थे। और इसके बाद कम से कम तीन लोगों को नूपुर शर्मा के समर्थन के कारण बेरहमी से जान से मार दिया गया था।

बिहार के 500+ सरकारी स्कूलों में रविवार की जगह जुमे के दिन छुट्टी, अधिकारी बताते हैं ‘परंपरा’: मुस्लिम बहुल सीमांचल में नेताओं का दबाव भी

बिहार के सीमांचल क्षेत्र में कई वर्षों से बिना किसी आधिकारिक आदेश के 500 से अधिक सरकारी स्कूलों में रविवार की बजाय शुक्रवार को साप्ताहिक अवकाश दिया जा रहा है। मुस्लिम बहुल आबादी वाले किशनगंज, अररिया, कटिहार और पूर्णिया जिले में स्थित स्कूलों में इस परंपरा का पालन किया जा रहा है। 2011 की जनगणना के अनुसार, बिहार के पूर्वी हिस्से में मुस्लिम आबादी 30 प्रतिशत से 70 प्रतिशत के बीच है।

अररिया जिले के जोकीहाट ब्लॉक में अधिकांश स्कूलों, यानी 244 सरकारी स्कूलों में से 229 का साप्ताहिक अवकाश शुक्रवार को होता है। जोकीहाट ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (बीईओ) शिव नारायण सुमन ने इन आँकड़ों की पुष्टि की है। उनके मुताबिक, यहाँ शुक्रवार को साप्ताहिक अवकाश की परंपरा शुरू से चली आ रही है।

इस बीच, अररिया जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) राज कुमार ने ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ से बात करते हुए कहा, “जोकीहाट ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले लगभग सभी स्कूल शुक्रवार को बंद रहते हैं। इसके लिए कोई आधिकारिक आदेश नहीं दिया गया है।” पूर्णिया में 200, जबकि किशनगंज में 19 ऐसे सरकारी स्कूल हैं, जो शुक्रवार को बंद रहते हैं। शिक्षा अधिकारियों ने साप्ताहिक छुट्टी शुक्रवार को देने वाले किसी भी आदेश को मंजूरी नहीं दी है। शिक्षकों का मानना ​​है कि यह प्रथा लगभग एक दशक पहले स्थानीय मुस्लिम नेताओं के आदेश पर शुरू हुई थी।

एक सरकारी स्कूल के शिक्षक ने कहा, “2014 में, जद (यू) नेता महमूद असरफ (अब मृतक) ने पूर्णिया जिले के बैसी ब्लॉक के तहत अपनी मीनापुर पंचायत में सरकारी स्कूलों को रविवार की बजाय शुक्रवार को साप्ताहिक अवकाश देने के लिए मजबूर किया था। शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने इस प्रस्ताव का कभी विरोध नहीं किया।”

वहीं, किशनगंज डीईओ सुभाष कुमार गुप्ता ने दावा किया कि शुक्रवार को साप्ताहिक अवकाश का पालन करना बिहार में एक सामान्य प्रथा थी। इसके लिए कोई आधिकारिक आदेश नहीं जारी किया गया था। जबकि बलरामपुर के ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (बीईओ) मुमताज अहमद ने कहा कि बिहार सरकार ने इस संबंध में 2010 में एक पत्र लिखा था, और तब से इन स्कूलों ने शुक्रवार को छुट्टी घोषित कर दी है। हालाँकि, बिहार के शिक्षा मंत्री, विजय कुमार चौधरी इन सबसे अनजान थे।

भाजपा ने शुक्रवार को साप्ताहिक अवकाश किए जाने का विरोध किया और कहा कि संविधान के अनुसार एक धर्म के लिए उपयुक्त नियमों के बदलाव की अनुमति नहीं दी जा सकती है। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता निखिल आनंद ने कहा, “भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है और संविधान के तहत किसी के धर्म के अनुसार नियम बनाने की अनुमति नहीं है। यदि मुस्लिमों के अनुरूप शुक्रवार को स्कूल बंद रहते हैं, तो हिंदू मंगलवार को स्कूलों को बंद करने की माँग कर सकते हैं। इस तरह की प्रथा को धार्मिक तुष्टिकरण के लिए बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए।”

गौरतलब है कि बीते दिनों झारखंड के जामताड़ा और दुमका जिलों के सरकारी स्कूलों में रविवार के बजाय शुक्रवार को साप्ताहिक अवकाश देने की खबर सामने आई थी। दावा किया गया था कि स्कूल के नोटिस बोर्ड पर बाकायदा शुक्रवार को जुमे का दिन घोषित करके अवकाश लिखा गया था। वहीं शिक्षा विभाग द्वारा उन स्कूलों को उर्दू स्कूल बताते हुए ऐसा कदम शिक्षकों की सुविधा को देख कर उठाया जाना बताया गया था।

वहीं, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के गृह जिला दुमका के 33 सरकारी स्कूलों ने अपने नाम में ‘उर्दू’ जोड़ लिया, ताकि रविवार की जगह शुक्रवार को छुट्टी दी जा सके। लेकिन प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं लगी। उसकी नींद तब टूटी जब मीडिया में यह मामला सामने आया और शिक्षा के कथित इस्लामीकरण को लेकर राज्य सरकार की किरकिरी शुरू हुई।

‘आमिर खान ने कराया सामंथा का तलाक’: ‘लाल सिंह चड्ढा’ के लिए हथियाना चाहते हैं ज्यादा से ज्यादा स्क्रीन्स, सबसे बड़े थिएटर चेन से करार

आमिर खान ने ‘लाल सिंह चड्ढा’ को ज्यादा से ज्यादा स्क्रीन्स दिलाने के लिए मल्टीप्लेक्स थिएटर चेन PVR के साथ एक बड़ा करार किया है। उसी दिन अक्षय कुमार की ‘रक्षा बंधन’ और निखिल सिद्धार्थ की ‘कार्तिकेय 2’ भी रिलीज हो रही है, ऐसे में आमिर खान चाहते हैं कि शहरों में लोग उनकी फिल्म ज्यादा देखें और ये ज्यादा थिएटरों में रिलीज हो। PVR भारत का सबसे बड़ा सिनेमा हॉल चेन है, ऐसे में आमिर खान को उम्मीद है कि उनकी फिल्म को फायदा होगा।

बताया जा रहा है कि ये डील आदान-प्रदान वाली है और इस पर तेजी से काम चल रहा है। इससे PVR के अधिकतर स्क्रीन्स आमिर खान की ‘लाल सिंह चड्ढा’ को मिल जाएँगे। पूरे देश में फैला PVR चेन भारत के 55% मल्टीप्लेक्स कारोबार का अकेला हिस्सेदार है। हालाँकि, आनंद एल रॉय द्वारा निर्देशित ‘रक्षा बंधन’ की टीम को उम्मीद है कि इससे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ेगा। फिल्म की टीम ग्रामीण इलाकों और छोटे शहरों के दर्शकों को अपना टारगेट मान कर चल रही है।

हालाँकि, जहाँ ‘रक्षा बंधन’ को लाभ कमाने के लिए 85 करोड़ रुपए का आँकड़ा पार करना होगा, आमिर खान और करीना कपूर की ‘लाल सिंह चड्ढा’ 200 करोड़ रुपए के भारी भरकम बजट में बनी है और इसे केवल भारत में इतने का नेट कारोबार करना होगा। वहीं भगवान श्रीकृष्ण के रहस्यों पर आ रही फिल्म ‘कार्तिकेय 2’ के निर्माता अभिषेक अग्रवाल कह चुके हैं कि फेस्टिवल वीकेंड होने के कारण क्लैश होता रहता है और तीनों अलग जॉनर की फिल्म है। अभिषेक अग्रवाल ने ही ‘द कश्मीर फाइल्स’ का निर्माण किया था।

आमिर खान की ‘लाल सिंह चड्ढा’ में तेलुगु अभिनेता नाग चैतन्य भी हैं, जो वरिष्ठ अभिनेता नागार्जुन के बेटे और अभिनेत्री सामंथा के पूर्व पति हैं। अब फिल्म समीक्षक कमाल आर खान (KRK) ने आरोप लगाया है कि आमिर खान ने ही नाग चैतन्य का घर तोड़ा। फिल्म में नाग चैतन्य एक आर्मी मेजर के किरदार में दिखेंगे। KRK ने दावा किया कि नाग चैतन्य ने अपने एक निर्देशक दोस्त को बताया है कि वो ‘लाल सिंह चड्ढा’ कर के पछता रहे हैं, उन्हें उम्मीद नहीं थी कि ये तनी खराब होगी लेकिन मजबूरी में तारीफ़ करनी पड़ेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि आमिर ने चैतन्य को सामंथा को तलाक देने के लिए मनाया।