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परशुराम तीर्थ सर्किट को योगी सरकार की हरी झंडी: नैमिषारण्य से बाबा नीम करौली धाम तक जुड़ेंगे 5 तीर्थस्थल, 500+ किमी की परियोजना

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार परशुराम जन्मस्थली का निर्माण करने जा रही है। जिससे 6 जिलों के पाँच तीर्थस्थल आपस में जुड़ जाएँगे। परशुराम तीर्थ सर्किट के निर्माण की जिम्मेदारी राज्य के पीडब्ल्यूडी विभाग को सौंपा गया है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, हिंदुओं की आस्था से जुड़े पाँच धामों जिनमें नैमिष धाम, महर्षि दधीचि स्थल मिश्रिख, गोला गोकर्णनाथ, गोमती उद्गम और पूर्णागिरी माँ के मंदिर को जोड़ा जाएगा। इसके अलावा पूर्णागिरी माता के मंदिर से बाबा नीम करौरी धाम और जलालाबाद स्थित परशुराम की जन्मस्थली को जोड़ दिया जाएगा।

योगी सरकार की योजना के अनुसार, परशुराम तीर्थ सर्किट यूपी के छह जिलों सीतापुर, लखीमपुर, पीलीभीत, बरेली, शाहजहाँपुर, फरुखाबाद से होकर गुजरेगा। वहीं इस सर्किट की लंबाई 500 किमी से ज्यादा बताई जा रही है।

इस परियोजना के बारे में कहा जा रहा है पिछ्ले दिनों में पीडब्ल्यूडी मंत्री जितिन प्रसाद ने परशुराम जन्मस्थली के कई दौरे किए। उन्होंने परशुराम जन्मस्थली के महंत और पुजारियों से भी वार्ता की, इसके बाद नैमिषधाम के पुजारी, गोला गोकर्णनाथ के पुजारी समेत कई साधु-संतों से राय लेकर इस कॉरिडोर की रूपरेखा तैयार कर और प्रस्ताव बना कर एनएच के सहयोग से कॉरिडोर बनाने का निर्णय लिया है।

वहीं इस परियोजना के प्रोग्रेस को लेकर बताया गया है कि इस प्रस्ताव पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से भी चर्चा की गई है। इसमें नैमिष तक के कुछ हिस्से की टेंडर प्रक्रिया संपन्न हो गई है और जल्द केन्द्र से हरी झंडी मिलते ही काम शुरू कर दिया जाएगा।

गौरतलब है कि योगी सरकार में पीडब्ल्यूडी मंत्री जितिन प्रसाद ने शाहजहाँपुर के जलालाबाद स्थित परशुराम जन्मस्थली को पर्यटन स्थल का दर्जा दिलाने की माँग की थी जिसे इसी साल अप्रैल महीने में योगी सरकार ने पूरा करते हुए परशुराम की जन्मस्थली को पर्यटन स्थल के रूप में घोषित कर दिया था। साथ ही परशुराम सर्किट के रास्ते पर जगह-जगह इन सभी तीर्थस्थलों के बारे में वर्णन और चित्रण से इस रूट को काफी खूबसूरत बनाने का भी प्रस्ताव है।

हिन्दू नाबालिग लड़की का अपहरण कर हत्या, फेसबुक पर उसकी तस्वीर पोस्ट कर लिखा- ‘खोजने की जरुरत नहीं, मर चुकी है’, बांग्लादेश की घटना

बांग्लादेश से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। जहाँ एक हिंदू लड़की का एक व्यक्ति ने अपहरण किया और फिर उसकी हत्या कर दी। जिसके बाद उसकी तस्वीर को फेसबुक पर पोस्ट करते हुए घोषित कर दिया कि वह मर चुकी है। मृतक लड़की की पहचान अनुराधा सेन के रूप में हुई है जो बांग्लादेश के शेरपुर के नलिताबाड़ी उपजिला में हिन्दू अल्पसंख्यक समुदाय की थी।

रिपोर्ट के अनुसार, जिस हिन्दू लड़की को पहले अगवा किया गया, फिर उसकी हत्या के बाद आरोपित ने अपने फेसबुक अकाउंट पर उसकी तस्वीर पोस्ट कर दी थी। पोस्ट के साथ कैप्शन में लिखा है, “उसे खोजने की कोई जरूरत नहीं है। वह मर चुकी है।” इस मामले में बारी मेहदी नाम के व्यक्ति पर संदेह जताया जा रहा है क्योंकि उसने पहले भी अनुराधा के भाई को धमकी भरे फोन किए थे।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीड़िता ने इसी साल बांकुरा हाई स्कूल से 10वीं की बोर्ड परीक्षा दी थी। मामले में कहा जा रहा है कि पीड़िता का अपहरण जिसने किया उसने पहले उसकी आगे की पढ़ाई के लिए सरकारी धन मुहैया कराने के लिए उसके स्कूल से फोन करने का नाटक किया था।

घटना रविवार 25 जुलाई की बताई जा रही है, जब आरोपित ने अनुराधा की माँ को फोन किया और उसे पैसे लेने के लिए स्कूल भेजने को कहा। फोन करने वाले व्यक्ति ने कहा कि सरकार द्वारा कुछ विशेष छात्रों के लिए धन उपलब्ध कराया जा रहा था और अनुराधा उनमें से एक थी।

हालाँकि, लड़की के परिवार को बाद में पता चला कि उस व्यक्ति ने लड़की को झूठ बोलकर फँसाया था और स्कूल बुलाकर उसका अपहरण कर लिया था। पीड़ित लड़की के पिता ने जब स्कूल जाकर उसकी तलाश की, लेकिन उसका कोई पता नहीं चला। तब उन्होंने नलिताबाड़ी थाने में शिकायत दर्ज कराई।

इस बीच, लड़की के भाई ने खुलासा किया कि उसे कुछ दिन पहले बारी मेहदी नाम के एक व्यक्ति का फोन आया था। दूसरी तरफ के व्यक्ति ने अनुराधा के बारे में बात की थी। उसने कहा था कि वह फेसबुक के जरिए लड़की से मिला था और दावा किया था कि उसके उसके साथ प्रेम संबंध थे।

तब बारी मेहदी ने अनुराधा के भाई से फोन पर कहा, “मैं आपकी बहन से फेसबुक पर मिला था। फिर हम करीब हो गए। तुम्हारी बहन ने मेरी माँ से बहुत बातें कीं। अब मैंने सुना है कि तुम्हारी बहन का रिश्ता किसी और से है। यह ठीक नहीं चल रहा है। यह अच्छा नहीं है।”

भाई ने पुलिस को इस बात की भी पुष्टि की कि उस दिन उसके पास जो कॉल आया था और उसकी माँ को कॉल करके जिसने अनुराधा को स्कूल भेजने के लिए कहा था, दोनों एक ही नंबर से किया गया था। रिपोर्ट्स से आशंका जताई जा रही है कि आरोपित ने किसी और के साथ संबंध होने के शक में लड़की की हत्या कर दी। फ़िलहाल मामले में बांग्लादेश पुलिस जाँच कर रही है।

मौसेरे भाई के साथ मिल शौहर अदनान ने किया बीबी का गैंगरेप, विरोध करने पर बुरी तरह पीटा, फिर दे दिया तीन तलाक: गोंडा की घटना

उत्तर प्रदेश के गोंडा से गैंगरेप के बाद तीन तलाक का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहाँ आरोपित शौहर ने अपने मौसेरे भाई के साथ मिलकर न केवल अपनी ही बीबी का गैंगरेप किया, बल्कि उसे तीन तलाक भी दे दिया। मामला गोंडा जिले के कोतवाली नगर क्षेत्र का है।

रिपोर्ट के अनुसार, घटना के खुलासे के बाद पुलिस को जैसे ही तीन तलाक और गैंगरेप के इस मामले की जानकारी मिली, पुलिस ने तुरंत एक्शन लेते हुए गैंगरेप और तीन तलाक के आरोपित शौहर मोहम्मद अदनान और उसके मौसेरे भाई के खिलाफ संबंधित धाराओं में FIR दर्ज कर लिया है। पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए आरोपित शौहर को गिरफ्तार कर लिया है वहीं उसका मौसेरा भाई फरार बताया जा रहा है। इस मामले में फ़िलहाल आगे की जाँच की जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बताया जा रहा है कि वारदात के बाद पीड़िता ने एसपी से न्याय की गुहार लगाई थी। एसपी के निर्देश पर प्रभारी निरीक्षक ने थाने में संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर गुरुवार की देर शाम कार्रवाई शुरू कर दी।

वहीं एसपी आकाश तोमर ने इस मामले में खुलासा करते हुए बताया, “गोंडा की रहने वाली एक युवती का निकाह लखनऊ के रहने वाले मोहम्मद अदनान के साथ हुआ था। मोहम्मद अदनान दहेज का लालची था और दहेज देने की माँग करता था। इसको लेकर वो आए दिन अपनी बीबी से मारपीट भी करता था। इससे परेशान होकर पत्नी ससुराल से चली आई थी और काफी दिनों से अपने मायके में ही रह रही थी।”

रिपोर्ट के अनुसार, बीते दिन मौका पाकर शौहर मोहम्मद अदनान अपने मौसेरे भाई के साथ पत्नी के मायके आया और उसे अकेली पाकर दोनों ने उससे सामूहिक रेप किया। महिला के विरोध करने पर शौहर ने उसे मारा-पीटा और तीन बार तलाक बोलकर लखनऊ चला गया।

मोहम्मद फाजिल की हत्या के मामले में NDTV ने शिया-सुन्नी प्रेम प्रसंग को छिपाया, वीडियो रिपोर्ट में भगवा कपड़े पहने लोगों को दिखाया: कर्नाटक की घटना

कर्नाटक (Karnataka) के मंगलुरु में कृष्णापुरा-एमआरपीएल रोड पर हमलावरों द्वारा मोहम्मद फाजिल नाम के युवक की हत्या की खबर सामने आने के बाद एनडीटीवी दुष्प्रचार में जुट गया है। वामपंथी चैनल ने घटना के कुछ घंटों बाद ही यह बताने की कोशिश की कि भाजपा ने युवा मोर्चा (BJYM) के नेता प्रवीण नेट्टारू की हत्या का बदला लेने के लिए इस घटना को अंजाम दिया है।

पुलिस के मुताबिक, फाजिल पर 4-5 अज्ञात बदमाशों ने घातक हथियार से हमला किया था। पुलिस ने अपनी प्रारंभिक जाँच में कथित तौर पर पाया कि मृतक की हत्या इसलिए की गई, क्योंकि वह सुन्नी था और एक शिया महिला से प्यार करता था। हमलावरों ने चेहरे पर नकाब पहन रखा था। वे सभी हुंडई कार से आए थे और फाजिल की हत्या कर कार में बैठकर फरार हो गए।

हालाँकि, पुलिस ने अभी तक इसकी पुष्टि नहीं की है कि हमलावरों ने किस कारण से फाजिल की हत्या की है। वहीं, एनडीटीवी ने इस घटना की वीडियो रिपोर्ट में दावा किया है कि ये संदिग्ध हिंदू हो सकते हैं। चैनल ने 26 जुलाई को इस्लामवादियों द्वारा की गई प्रवीण नेट्टारू की हत्या का हवाला देते हुए कहा कि प्रतिशोध लेने के लिए मोहम्मद फाजिल की हत्या की गई। दूरदर्शन से चुराए गए टेपों, उपकरणों को बेचकर खुद को स्थापित करने वाले एनडीटीवी ने इस मामले में शिया-सुन्नी प्रेम प्रसंग को नजरअंदाज करते हुए हिंदू संगठनों पर निशाना साधा।

वीडियो में NDTV ने फाजिल की हत्या के संबंध में कर्नाटक पुलिस द्वारा एक्सेस किए गए सीसीटीवी फुटेज को दिखाया। इसके बाद प्रवीण नेट्टारू की हत्या के विरोध में विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं को दिखाया। रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से अप्रत्यक्ष रूप से यह बताने का प्रयास किया गयाहै कि 28 जुलाई को प्रवीण की हत्या के प्रतिशोध में हिंदुओं द्वारा फाजिल की कथित तौर पर हत्या कर दी गई थी। एनडीटीवी द्वारा किए गए इस तरह के कथित दावों को अन्य मीडिया रिपोर्टों ने खारिज कर दिया है। वहीं, दूसरे मीडिया रिपोर्ट्स में फाजिल की हत्या को शिया-सुन्नी प्रेम संबंध से जोड़ कर दिखाया गया है।

मेंगलुरु के पुलिस आयुक्त एन शशि कुमार ने 28 जुलाई को फाजिल की मौत की पुष्टि करते हुए कहा था कि यह घटना मंगलुरु सिटी के सूरतकल की है। जहाँ कृष्णापुरा कटिपल्ला रोड पर रात करीब 8 बजे 23 वर्षीय लड़के पर 4-5 लोगों ने बेरहमी से हमला किया था। हमलावरों से बचने के लिए फाजिल ने दौड़ भी लगाई, लेकिन वह बच नहीं पाया। गंभीर हालत में फाजिल को अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उसने दम तोड़ दिया।

घटना के बाद मंगलुरु के पुलिस कमिश्नर एनएस कुमार ने मुस्लिम उलेमाओं और मौलानाओं से घर के अंदर ही नमाज़ पढ़ने की अपील की थी। मंगलुरु पुलिस ने शिक्षण संस्थानों, क्षेत्र की शराब की दुकानों को भी 29 जुलाई तक बंद रखने का आदेश दिया था।

गौरतलब है कि इससे पहले कर्नाटक के बेल्लारे इलाके में मंगलवार (26 जुलाई 2022) की रात करीब 9 बजे कुछ हमलावरों ने कुल्हाड़ी से हमला कर भाजपा युवा मोर्चा के जिला सचिव प्रवीण नेट्टारू की हत्या कर दी थी। यह हमला तब हुआ जब वे बाइक से घर जा रहे थे। प्रवीण की हत्या के मामले में PFI और SDPI पर संदेह जताया गया है। वहीं कुछ मीडिया रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि पुलिस को संदेह है कि हत्या बेल्लारे के मुस्लिम युवक मसूद की हत्या के बदले में की गई होगी। क्योंकि कुछ दिनों पहले एक युवक की हत्या हुई थी।

वहीं इस मामले में केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता प्रह्लाद जोशी ने कहा था, “प्रारंभिक रिपोर्ट और कुछ मीडिया रिपोर्ट एसडीपीआई और पीएफआई लिंक की तरफ इशारा करती हैं। उन्हें केरल में बढ़ावा दिया जा रहा है। कर्नाटक में कॉन्ग्रेस उन्हें प्रोत्साहित कर रही है। कर्नाटक में हमारी सरकार कार्रवाई करेगी और दोषियों को सजा देगी।”

तेलंगाना के मंत्री के जन्मदिन में गैर हाजिर होने पर अस्पताल के 4 स्टाफ को नोटिस, 24 घंटे में माँगा जवाब, नहीं तो होगी कार्रवाई

तेलंगाना के मानचेरियल जिले में एक सरकारी अस्पताल के 4 कर्मचारियों को नगर विकास मंत्री के टी रामाराव के 24 जुलाई 2022 को मनाए गए जन्मदिन में शामिल न होने पर नोटिस दिया गया है। चारों से उनकी गैर हाजिरी की वजह पूछी गई है। जवाब देने के लिए कर्मचारियों को 24 घंटे का समय दिया गया है। यह नोटिस बेलमपल्ली नगर परिषद के कमिश्नर ने 25 जुलाई 2022 को जारी किया है।

सिटी कमिश्नर गोपू गंगाधर द्वारा जारी इस पत्र में लिखा गया है, “माननीय नगर विकास मंत्री के टी रामाराव का जन्मदिन 24 जुलाई को सुबह 10 बजे बेलमपल्ली के सरकारी अस्पताल में आयोजित हुआ था। सभी स्टाफ को व्हाट्सएप पर सूचना दे कर इसमें शामिल होने का आदेश दिया गया था। लेकिन कुछ लोगों द्वारा इस आदेश की अनदेखी की गई। यह नोटिस इसी वजह से जारी की जा रही है। नोटिस रिसीव होने के 24 घंटे में जवाब दें कि जन्मदिन के कार्यक्रम में शामिल न होने पर आपके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों न की जाए?”

जिन 4 कर्मचारियों को यह नोटिस दी गई है उसमें एक महिला कर्मचारी भी शामिल हैं। ये स्टाफ वरिष्ठ सहायिका टी राजेश्वरी, जूनियर सहायक एस. पुन्नमचंदर, सिस्टम मैनेजर ए मोहन और बिल कलेक्टर श्रवण हैं। नोटिस में तीन नाम प्रिंट हैं जबकि चौथे को कलम से लिखा गया है। 24 घंटे में इन चारों से जवाब न मिलने की दशा में आगे की कार्रवाई के लिए सीनियर अधिकारियों को सूचित करने की चेतावनी दी गई है।

के टी रामाराव के पास तेलंगाना सरकार के उद्योग, शहरी विकास और आईटी मंत्रालय हैं। उन्होंने खुद राज्य में बाढ़ और बारिश के चलते किसी से भी अपना जन्मदिन कार्यक्रम न आयोजित करने की अपील की थी। हालाँकि, उनकी अपील का कोई खास फर्क नहीं पड़ा और उनके कार्यकर्ताओं ने कई जगहों पर जन्मदिन मनाया जबकि खुद मंत्री ने अपना जन्मदिन नहीं मनाया।

NIA करेगी प्रवीण नेट्टारू हत्याकांड की जाँच: कर्नाटक के CM बोम्मई ने कहा- यह संगठित अपराध का मामला, अंतर्राज्यीय गिरोह हैं शामिल

कर्नाटक सरकार (Karnataka Government) ने भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के कार्यकर्ता प्रवीण नेट्टारू की हत्या की जाँच राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) को सौंपने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने शुक्रवार (29 जुलाई 2022) को इसकी घोषणा की।

बता दें कि 26 जुलाई 2022 को प्रवीण नेट्टारू की मंगलुरु इलाके में कुल्हाड़ी से काटकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में पुलिस ने शफीक और ज़ाकिर नाम के 2 आरोपितों को गिरफ्तार किया है। हत्या के प्रदेश में तनाव का माहौल है।

मुख्यमंत्री बोम्मई ने कहा, “हम सब ने आपस में चर्चा करके यह तय किया है कि प्रवीण हत्याकांड की जाँच NIA को सौंपी जाएगी। यह हत्या संगठित अपराध है, जो अंतर्राज्यीय अपराधियों द्वारा की गई है। इस मामले में NIA द्वारा और अधिक तेज गति से जाँच करवाने के लिए हम गृह मंत्रालय को पत्र भेज रहे हैं।”

गौरतलब है कि प्रवीण की हत्या के बाद से उनके परिजन और भाजपा के स्थानीय नेता मामले की उच्चस्तरीय जाँच की माँग कर रहे थे। खुद मुख्यमंत्री ने मामला अन्य राज्यों के सीमा क्षेत्र में होना बताकर अपने अधिकार सीमित बताए थे। कर्नाटक पुलिस के अधिकारी लगातार केरल पुलिस के सम्पर्क में भी बने हुए थे। इधर भाजपा नेताओं ने विरोध स्वरूप इस्तीफे भी देने शुरू कर दिए थे।

एक दिन पहले मुख्यमंत्री बोम्मई ने मृतक के परिजनों से मुलाक़ात की थी और उन्हें 25 लाख रुपए का चेक सौंपा था। मुख्यमंत्री ने खुद टारगेट किलिंग के खिलाफ टास्क फ़ोर्स बनाने की घोषणा करते हुए अलग से एक मजबूत खुफिया तंत्र बनाने का एलान किया था।

इसी के साथ उन्होंने जरूरत पड़ने पर कर्नाटक में भी उत्तर प्रदेश सरकार का ‘योगी मॉडल’ लाने की बात भी कही थी। प्रवीण की हत्या के आरोपित PFI के सदस्य बताए जा रहे हैं। उधर, आरोपित शफीक के अब्बा मुस्लिम होने के नाते खुद को फँसाने का पुराना और घिसा-पिटा राग अलाप रहे हैं।

फुलवारी शरीफ में पकड़े गए PFI के आतंकियों पर NIA ने दर्ज की 2 FIR, PM मोदी के बिहार दौरे में हमले की थी साजिश

केंद्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने बिहार के फुलवारी शरीफ से पकड़े गए आतंकियों पर दो अलग-अलग FIR दर्ज करवाई है। पहली FIR में 26 संदिग्धों का नाम है जबकि दूसरी FIR में एक आरोपित नामजद है। पहली FIR के मुताबिक कुछ संदिग्ध बिहार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावित दौरे में गड़बड़ी करना चाह रहे थे। वहीं दूसरी FIR गिरफ्तार हुए आरोपित मरगूब अहमद के विरुद्ध दर्ज है। ये सभी आरोपित पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया (PFI) के सदस्य बताए जा रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रधानमंत्री के बिहार के प्रस्तावित दौरे से पहले 11 जुलाई को कुछ संदिग्ध लोगों को फुलवारी शरीफ में शिफ्ट किया गया था। इन सभी को मोदी के दौरे में गड़बड़ी फैलाने के निर्देश थे। NIA उन आरोपितों की तलाश में बिहार के कई हिस्सों में छापेमारी कर रही है। वहीं मरगूब अहमद दानिश उर्फ़ ताहिर के कारनामों की नए सिरे से जाँच के लिए NIA ने अपनी तरफ से केस दर्ज करवाया है। मरगूब अहमद दानिश फ़िलहाल जेल में है।

28 जुलाई को जारी NIA की प्रेसनोट के मुताबिक फुलवारी शरीफ केस से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में लगातार जाँच और छापेमारी की जा रही है। इस दौरान NIA ने पटना, दरभंगा, पूर्वी चम्पारण, नालंदा और मधुबनी जिलों में कुल 10 ठिकानों पर छापेमारी की है। इस मामले में बिहार पुलिस द्वारा 12 जुलाई 2022 को FIR दर्ज की गई थी लेकिन NIA ने 22 जुलाई 2022 को एक बार फिर से FIR दर्ज करवाई है जिसमें IPC की धारा 120, 120- बी, 121, 121-A, 153-A, 153-बी और 34 लगाई गईं है।

NIA के मुताबिक छापेमारी के दौरान कई डिजिटल उपकरण और अन्य सामान बरामद किए गए हैं जिनकी जाँच करवाई जा रही है। गौरतलब है कि पटना पुलिस द्वारा पकड़े गए आरोपित भारत में गज़वा-ए-हिन्द की तैयारी कर रहे थे। इसके लिए इन सभी ने 2023 से काम शुरू करने और 2047 तक भारत में इस्लामी शासन लाने का टारगेट तय किया था।

प्राणघातक ‘पड़ोसी’, जानलेवा ‘पहचान’: प्रवीण हो या कन्हैया लाल या फिर उमेश कोल्हे… हर हिंदू की हत्या में कश्मीर वाला पैटर्न

हाल के दिनों में हिंदुओं की हत्याओं में मृतक के दोस्तों, पड़ोसियों और सहकर्मियों के ही साजिश में शामिल होने के मामले सामने आए हैं। विश्वासघात की ये खबरें भारत की उस ‘गंगा-जमुनी तहजीब’ की पोल खोल कर रख दी हैं, जिसे कई दशकों से भारत की आत्मा के तौर पर प्रचारित किया जाता रहा। इसे स्कूलों-कॉलेजों में खूब पढ़ाया और सिखाया गया।

इस तहजीब को देश के बहुसंख्यक वर्ग ने भाईचारा के रूप में लिया और अपनाया भी, लेकिन दूसरे वर्ग के कट्टरपंथियों ने इसे हमेशा एक अवसर के रूप में इस्तेमाल किया। आज इस भाईचारे और विश्वास का एक-एक तिनका बिखरता दिख रहा है, जो कभी था ही नहीं। साल 2017 में CSDS के सर्वे में खुलासा हुआ था कि देश में केवल 5 फीसदी मुस्लिम ही हिंदुओं को अपना करीबी दोस्त मानते हैं।

कर्नाटक के प्रवीण नेट्टारू की हत्या से लेकर कन्हैया लाल, उमेश कोल्हे, कश्मीर के राजस्व अधिकारी राहुल भट, बैंक मैनेजर विजय कुमार, स्कूल की प्रिंसिपल प्रिंसिपल सुपिन्दर कौर और शिक्षक दीपक चंद से लेकर 1990 के दशक के बालकृष्ण गंजू तक की हत्या में दोस्त, पड़ोसी और सहकर्मियों की संलिप्तता सामने आई है या फिर उन पर शक जाहिर किया गया है।

कर्नाटक में भाजपा युवा मोर्चा (BJYM) के नेता प्रवीण नेट्टारू की 28 जुलाई 2022 को हुई हत्या के सिलसिले में शफीक बेल्लारे और जाकिर सावानुरु को गिरफ्तार किया गया है। शफीक के अब्बू इब्राहिम मृतक प्रवीण की दुकान में काम कर चुके हैं और इनका एक-दूसरे के घर भी आना-जाना भी था।

कहा जा रहा है कि प्रवीण की इसलिए हत्या कर दी गई, क्योंकि उन्होंने राजस्थान के उदयपुर में कन्हैया लाल साहू की इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा दिन-दहाड़े गला रेतकर की गई हत्या की आलोचना की थी। प्रवीण ने अपने फेसबुक पोस्ट में कथित सेक्युलर लोगों को लताड़ लगाई थी।

प्रवीण ने लिखा था, “आज एक गरीब दर्जी को सरेआम काटकर वीडियो बना दिया गया है। ये कट्टरपंथी कह रहे हैं कि हमारा अगला टारगेट प्रधानमंत्री मोदी हैं। आप सब (सेक्युलर) कहाँ हैं… अब आपका वॉइस बॉक्स क्यों जल गया? उस राज्य में कॉन्ग्रेस की सरकार है। अब मुँह क्यों नहीं खोल रहे हैं? क्या तुम्हें गरीब की जिंदगी पर रहम नहीं आया?”

कन्हैया लाल की हत्या भाजपा की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा (Nupur Sharma) के समर्थन में पोस्ट डालने पर की गई थी। कन्हैया लाल की हत्या में भी उसके जानने वालों का हाथ था। कन्हैया लाल जिन पड़ोसियों को अपना दोस्त और मददगार मानते थे, उसी में से एक नाजिम ने उनकी रेकी की थी।

इसी तरह नूपुर शर्मा का समर्थन करने वाले महाराष्ट्र के अमरावती के फर्मासिस्ट उमेश कोल्हे की हत्या में भी उनके दशकों पुराने दोस्त डॉक्टर यूसुफ शामिल था। यूसुफ ने हत्यारों को उकसाया था और खुद रेकी की थी। उमेश के परिवार ने कई बार यूसुफ के परिवार की मदद की थी, लेकिन इसका कोई लाभ नहीं हुआ।

इतना ही नहीं, जम्मू-कश्मीर में हाल ही हुए हिंदू टीचरों और एक राजस्व अधिकारी की हत्या में भी उनके ऑफिस के कुछ मुस्लिम सहकर्मियों पर शक जाहिर किया गया था। कहा गया था कि ऑफिस के कुछ सहकर्मियों ने ही आतंकियों को इनके बारे में सूचना दी थी। इसके बाद आतंकियों ने सबके बीच उनकी हत्या कर दी थी।

अगर खबरों का विश्लेषण करें तो पाएँगे कि लव जिहाद, डकैती, हत्या के देश में ऐसे कई मामले आए हैं, जिनमें पड़ोसी या पहचान वाला व्यक्ति शामिल है। अगर घटनाओं की वर्तमान श्रृंखला सामने नहीं आती तो उन्हें भी एक आम आपराधिक घटना मानकर छोड़ दिया जाता और पहले ऐसा ही माना भी गया। हालाँकि, गुजरात के किशन भराड़, कन्हैया लाल, उमेश कोल्हे, प्रवीण जैसों की हत्या के बाद यह सोचने पर मजबूर होना पड़ रहा है कि ये घटनाएँ भी बहुसंख्यकों के प्रति सुनियोजित ‘हेट क्राइम’ का ही हिस्सा हैं।

पाकिस्तान के जन्मदाता मुहम्मद अली जिन्ना की उस शादी को कौन नहीं जानता, जिसे उन्होंने अपने ही दोस्त सर दीन शॉ की नाबालिग बेटी के साथ अंजाम दिया था। यह भी तो विश्वासघात था। जिस घर में जिन्ना दोस्त और अंकल की हैसियत से आते-जाते थे, उसी घर की 16 साल की नाबालिग पारसी लड़की रति को बहला लिया और अपने से 24 साल छोटी लड़की से शादी कर ली और धर्मांतरण भी कराया।

मुख्य सवाल है कि आखिर हिंदुओं या कह लें गैर-मुस्लिमों से इस्लाम के मानने वाले लोगों में इतनी नफरत क्यों है, कि वे दोस्त और पड़ोसी तक को नहीं बख्श रहे हैं। इसका जवाब उनके मजहबी किताबों में मिलेगा। मुस्लिमों की धार्मिक किताब कुरान में लिखा है, “हे ‘ईमान’ लाने वालों! (मुसलमानों) उन ‘काफिरों’ से लड़ो जो तुम्हारे आसपास हैं, और चाहिए कि वे तुममें सख्ती पाएँ।” (११.९.१२३ पृ. ३९१)

किताब में आगे लिखा है, “हे ‘ईमान’ लाने वालों! ‘मुशरिक’ (मूर्तिपूजक) नापाक हैं।” (१०.९.२८ पृ. ३७१)। एक आयत में लिखा है, ”निःसंदेह ‘काफिर’ तुम्हारे खुले दुश्मन हैं।” (५.४.१०१. पृ. २३९)। ये वो छब्बीस आयतें हैं, जिनको लेकर कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी और कहा गया था कि ये दूसरे धर्म के प्रति नफरत फैलाते हैं।

उन्हीं छब्बीस आयतों में एक आयत यह भी है, “हे नबी! ‘ईमान वालों’ (मुसलमानों) को लड़ाई पर उभारो। यदि तुम में बीस जमे रहने वाले होंगे तो वे दो सौ पर प्रभुत्व प्राप्त करेंगे और यदि तुम में सौ हो तो एक हजार काफिरों पर भारी रहेंगे, क्योंकि वे ऐसे लोग हैं जो समझ-बूझ नहीं रखते।” (१०.८.६५ पृ. ३५८)

AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी के भाई अकबरूद्दीन 24 घंटे के लिए पुलिस हटाकर हिंदुओं को सबक सिखाने की बात भी इसी से प्रेरित है। यही नहीं, पटना के फुलवारी शरीफ में छापेमारी में मिला PFI का ‘मिशन 2047’ दस्तावेज भी इसी से प्रेरित है। दस्तावेज में कहा गया है कि अगर 5 फीसदी मुस्लिम साथ आ जाएँ तो भारत के काफिर घुटने पर आ जाएँगे।

मुगल काल के दौरान देश में जबरन धर्मांतरण के बावजूद भारत के लोग अपनी संस्कृति से जुड़े हुए थे। वे जानते थे कि उन्होंने मजबूरी में धर्मांतरण तो कर लिया है, लेकिन उनका हृदय और स्वभाव हिंदू ही रहा। कश्मीर और राजस्थान एवं यूपी के कई ऐसे गाँव हैं, जो मुस्लिम होने के बावजूद खुद को हिंदू मानते रहे। इनमें से एक हरियाणा और राजस्थान का क्षेत्र मेवात भी है।

मेवात के मुस्लिम कुछ दशक पहले तक खुद को हिंदू मूल के बताते रहे, लेकिन बरेली, सलफी जैसे कट्टरपंथी मुस्लिम विचारधारा के फैलाव और कुछ हद तक राजनीतिक तुष्टिकरण ने उन्हें कट्टर और हिंदुओं को ‘काफिर’ बना दिया। आज मेवात का क्षेत्र आतंकी एवं आपराधिक गतिविधियों के लिए कुख्यात हो चुका है। वहाँ पर आज वही मुस्लिम अपने पड़ोसी हिंदुओं को प्रताड़ित और जबरन धर्मांतरित कराने में लगे हैं, जिन्हें कुछ दशक पहले तक अपना मानते थे।

कट्टरपंथी मुल्ले-मौलवियों की तकरीरों में लोगों को और देश विरोधी गतिविधियों में शामिल कुछ मदरसों में बच्चों को यह बार-बार याद दिलाया जाता है कि उन्हें क्या करना है। परिणाम यह होता है कि दशकों की दोस्ती के बावजूद सिर्फ उस एक पोस्ट के लिए निर्मम हत्या कर दी जाती है, जिसमें वह उस महिला के पक्ष में खड़ा होता है, जो डिबेट में वही बात कहती है, जो हत्यारों के मजहबी किताब कहते हैं।

अगर इस हेट क्राइम को समाज ने इसे गंभीरता से नहीं लिया और इसके प्रति जागरूक नहीं हुए तो वह दिन दूर नहीं जब इसके गंभीर परिणाम देखने के मिल सकते हैं। इसमें सरकार की भूमिका तो महत्वपूर्ण है ही, इसके साथ ही उन उदारवादी मुस्लिमों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है जो आज भी भारत और भारतीयता से तन-मन-धन से जुड़े हैं और हृदय से प्यार करते हैं।

कॉन्ग्रेस नेता अधीर रंजन के खिलाफ मध्य प्रदेश में FIR, महामहिम द्रौपदी मुर्मू को ‘राष्ट्रपत्नी’ कहने का मामला

भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पर अभद्र टिप्पणी करने के मामले में कॉन्ग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी पर मध्य प्रदेश के डिंडोरी में FIR दर्ज कर ली गई है। डिंडोरी के एडिशनल SP मरकाम ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया है कि केस को दिल्ली ट्रांसफर किया जा रहा है। यह FIR भाजपा के एक नेता की शिकायत पर 28 जुलाई 2022 (गुरुवार) को दर्ज हुई है।

पुलिस के मुताबिक, “आवेदक का नाम ओम प्रकाश ध्रुवे है। आवेदक ने भारत के राष्ट्रपति पर अधीर रंजन के बयान पर कार्रवाई की माँग की है। यह घटना दिल्ली में घटी है इसलिए थाना कोतवाली, जिला डिंडोरी में जीरो FIR दर्ज कर के केस को दिल्ली भेजा जा रहा है।”

शिकायतकर्ता ओम प्रकाश भाजपा के राष्ट्रीय मंत्री भी हैं। शिकायतकर्ता ने कहा, “देश की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति के खिलाफ जिस प्रकार से अधीर रंजन ने टिप्पणी की है उस से पूरा देश और ख़ास कर महिला व आदिवासी समाज आहत है। हम अधीर रंजन पर कड़ी कार्रवाई की माँग करते हैं।”

देश भर में हो रहा विरोध प्रदर्शन

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अधीर रंजन चौधरी के खिलाफ देश भर में भाजपा कार्यकर्ता विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इस विरोध प्रदर्शन में केंद्रीय मंत्री भी शामिल हैं। दिल्ली में अधीर रंजन के घर के आगे पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी है। अब वहाँ बैरिकेड लगा दिए गए हैं।

गौरतलब है कि गुरुवार (28 जुलाई, 2022) को कॉन्ग्रेस राज्यसभा सांसद अधीर रंजन चौधरी द्वारा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (Draupadi Murmu) को ‘राष्ट्रपत्नी’ शब्द से सम्बोधित किया था। इस मामले में राष्ट्रीय महिला आयोग ने अधीर रंजन को नोटिस भेज कर जवाब माँगा है जिसकी सुनवाई आगामी 3 अगस्त को है।

दिल्ली की कोर्ट ने माना जहाँगीरपुरी हिंसा ‘साजिश’, 37 आरोपितों को पेश होने का आदेश: हिंदुओं पर हमले की 6 दिन पहले हो गई थी तैयारी

दिल्ली की एक अदालत ने गुरुवार (28 जुलाई 2022) को जहाँगीरपुरी हिंसा पर दाखिल आरोप-पत्र पर संज्ञान लिया। सभी 37 आरोपितों को अदालत ने 6 अगस्त को पेश होने का आदेश दिया है। रोहिणी कोर्ट ने यह भी माना कि हिंसा साजिश के तहत अंजाम देने की बात को साबित करने के लिए चार्जशीट में पर्याप्त सबूत हैं।

मुख्य मेट्रोपोलिटिन मजिस्ट्रेट दीपिका सिंह की कोर्ट ने आरोपितों को नोटिस जारी करते हुए यह भी माना कि हिंसा 2020 में दिल्ली में हुए सीएए विरोधी दंगों की कड़ी है। जहाँगीरपुरी में इस साल अप्रैल में हुनमान जयंती पर निकाली गई शोभा यात्रा पर हमला किया गया था।

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 15 जुलाई 2022 को कोर्ट में चार्जशीट दाखिल करते हुए 16 अप्रैल 2022 को हुई हिंसा को सुनियोजित बताया था। पुलिस ने अपनी चार्जशीट में मोहम्मद अंसार, तबरेज और शेख इशर्फिल को मुख्य आरोपित बनाया है। इन तीनों पर दंगों की प्लानिंग और उसे अंजाम देने का आरोप है।

चार्जशीट के मुताबिक हमले से 6 दिन पहले ही इसकी साजिश रची जा चुकी थी। छतों पर शीशे और पत्थर जमा कर लिए गए थे। काँच की बोतलें और पत्थर फेंकने के लिए शेख इशर्फिल की ही छत का प्रयोग किया गया था। पुलिस ने इन तमाम जानकारियों को जुटाने के लिए 2300 मोबाइल फोन के डाटा और 58 सीसीटीवी फुटेज की जाँच की।

शेख इशर्फिल को इलाके का पार्किंग माफिया भी कहा जाता है। उस पर CAA हिंसा में भी सक्रिय भागीदारी का आरोप है। उसके 2 बेटे भी आपराधिक सोच वाले बताए जा रहे हैं, जिनके नाम अशनूर और मोहम्मद अली हैं। पुलिस ने इस केस में 2 नाबालिगों को भी पकड़ा है जिनका मामला किशोर न्याय बोर्ड में अलग से चल रहा है।

यह चार्जशीट 2000 पन्नों की है। पुलिस ने अपनी चार्जशीट में कुल 45 लोगों को आरोपित किया है। इसमें 37 को अब तक गिरफ्तार किया जा चुका है, जिसमें तीनों मुख्य आरोपित भी शामिल हैं। आरोप पत्र में यह भी बताया गया है कि जिस शोभायात्रा पर हमला किया गया था उसके लिए प्रशासन से अनुमति नहीं ली गई थी, जिसकी जाँच अलग से की जा रही है।

गिरफ्तार आरोपितों में से कुछ को जमानत भी मिल चुकी है। पुलिस ने कोर्ट में सबूत के तौर पर वो वीडियो भी पेश किए हैं जो आरोपितों की पहचान में काम आए थे। चार्जशीट में आरोपितों पर IPC की धारा 147, 148, 149, 186, 353, 332, 323, 427, 436, 307 और आर्म्स एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है।