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अग्निपथ योजना के विरोध में ₹260 करोड़ खाक, बीते 4 साल में रेलवे को ₹1376 करोड़ का नुकसान: मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संसद में दी जानकारी

केंद्र सरकार जब से अग्निपथ योजना (Aginipath Scheme) लाई है, तभी से विपक्ष ने ऐसा माहौल बनाया कि देशभर में इसके खिलाफ जमकर हिंसक प्रदर्शन हुए। इस योजना का सर्वाधिक विरोध बिहार में किया गया। कई ट्रेनों को जला दिया गया। लाखों-करोड़ों की संपत्तियों को जलाकर खाक कर दिया गया। इस बीच शुक्रवार (22 जुलाई 2022) को रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव (Ashwini Vaishnaw) ने संसद में एक लिखित जबाव में बताया कि अग्निपथ के विरोध प्रदर्शनों के दौरान रेलवे (Indian Railway) को 259.44 करोड़ रुपए का भारी-भरकम नुकसान हुआ है।

रेल मंत्री के मुताबिक, केवल 14 से 22 जून तक रेलवे का संचालन ठप होने के कारण 102.96 करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ा है। जबकि, अग्निपथ स्कीम के विरोध के दौरान ही 260 करोड़ रुपए की सार्वजनिक संपत्तियों को खाक कर दिया गया। वहीं अगर बीते तीन साल यानि के साल 2019 से अब तक की बात की जाए तो रेलवे को कुल 1376 करोड़ का भारी-भरकम नुकसान उठाना पड़ा है। इसमें 2019-20 में 151 करोड़ और 2020-21 में 904 व 2021-22 में 62 करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ा है।

मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सदन में जानकारी दी कि अग्निपथ विरोधों के दौरान देशभर में कुल 2132 ट्रेनों को कैंसिल करना पड़ा था। वो भी केवल एक सप्ताह के अंदर। हिंसक विरोध प्रदर्शनों में 2 लोगों की जान गई थी और 35 अन्य घायल भी हुए थे। जबकि 2642 उपद्रवियों को अरेस्ट किया गया था।

मालगाड़ी ने रेलवे को डूबने से बचाया

सदन में एम आरिफ के सवाल के लिखित जबाव में अश्विनी वैश्णव ने कहा कि यात्री ट्रेनों से ही रेलवे को सबसे अधिक घाटा होता है। वो तो मालगाड़ियों ने रेलवे को बचाए रखा था। अन्यथा इसका भट्ठा बैठ जाता। उन्होंने ये स्पष्ट किया कि रेलवे यात्रियों से कुल यात्रा लागत का केवल आधा ही वसूल करता है। केंद्रीय मंत्री ने ये भी स्पष्ट किया कि कोरोना महामारी के कारण बीते दो साल से रेलवे की कमाई 2019-20 की तुलना में कम रही है।

सरकार बदलते ही मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना ने पकड़ी रफ्तार: BKT स्टेशन बनाने के लिए टेंडर जारी, उद्धव ठाकरे ने लटका दी थी परियोजना

महाराष्ट्र (Maharashtra) में सरकार बदलते ही मुंबई-अहमदाबाद (Mumbai-Ahmedabad Bullet Train Project) के बीच प्रस्तावित भारत की पहली बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट को गति मिल गई है। नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) ने इस रूट के लिए बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) में भूमिगत स्टेशन बनाने के लिए शुक्रवार (22 जुलाई 2022) को टेंडर जारी किया है।

यह इस रेल कॉरिडोर का एकमात्र भूमिगत स्टेशन होगा। इस स्टेशन पर 6 प्लेटफॉर्म होंगे और हर प्लेफॉर्म की लंबाई 415 मीटर होगी, जो 16 कोच वाले बुलेट ट्रेन के लिए पर्याप्त होगी। प्लेटफॉर्म को जमीनी से लगभग 24 मीटर नीचे बनाने की योजना है। इसमें तीन फ्लोर होंगे।

यह बुलेट ट्रेन स्टेशन सारी अत्याधुनिक सुविधाओं से पूर्ण होगा। इसके साथ ही यह मेट्रो स्टेशन और सड़क मार्ग से जुड़ेगा। बता दें कि इस रूट पर साल 2027 से बुलेट ट्रेन चलाने की योजना है। वहीं, इसका पहला ट्रायल साल 2026 में पूरा हो जाएगा।

उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) की नेतृत्व वाली महाविकास अघाड़ी की सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की इस महत्वाकांक्षी परियोजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया। राज्य में भूमि अधिग्रहण पर ध्यान नहीं दिया गया। हालाँकि, शिवसेना के बागी नेता व मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (CM Eknath Shinde) के नेतृत्व में नई सरकार बनने के बाद पहली निविदा जारी हो गई है।

महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बुधवार (20 जुलाई 2022) को मुंबई में जापान के महावाणिज्य दूत फुकाहोरी यासुकाता से मुलाकात की थी और प्रोजेक्ट में तेजी लाने का आश्वासन दिया था। निविदा को लेकर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने ट्वीट कर जानकारी दी।

बता दें कि उद्धव ठाकरे के मुख्यमंत्री रहते NHSRCL ने नवंबर 2019 में ब्रांदा-कुर्ला कॉप्लेक्स में भूमिगत स्टेशन बनाने के लिए निकाली गई निविदाओं को इस साल की शुरुआत में रद्द कर दिया था। NHSRCL द्वारा 11 बार समय सीमा बढ़ाने के बाद भी राज्य सरकार जमीन उपलब्ध नहीं करा पाई थी।

जापान की हाई स्पीड ट्रेन शिंकानसेन (भारत में बुलेट ट्रेन) को भारतीय परिस्थितियों के अनुसार से ढाला जा रहा है। भारत के तापमान, धूल और भार के हिसाब से इसमें बदलाव किए जा रहे हैं। इस बदलाव के बाद जापान की E5 शिंकानसेन सीरीज की ट्रेनों को भारत भेजा जाएगा।

E5 सीरीज शिंकानसेन ट्रेन को हिताची और कावासाकी हेवी इंडस्ट्रीज ने बनाया है। 3.35 मीटर चौड़ी यह ट्रेन 320 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से दौड़ने में सक्षम है। भारत में यह इसी रफ्तार से दौड़ेगी। इस गति में यह ट्रेन 508 किलोमीटर की दूरी लगभग दो घंटों में पूरी कर लेंगी। फिलहाल वर्तमान ट्रेनों द्वारा यह दूरी सात घंटों और विमान से लगभग एक घंटे में तय होती है।

इस परियोजना की कुल लागत 1.08 लाख करोड़ रुपए है। इसमें केंद्र सरकार NHSRCL को 10,000 करोड़ रुपए देगी, जबकि गुजरात और महाराष्ट्र पाँच-पाँच हजार करोड़ रुपए देंगे। इसमें शेष राशि जापान 0.1 प्रतिशत की ब्याज पर ऋण के रूप में देगा।

पश्चिम बंगाल में युवाओं को लगी कंडोम की लत, नशे के रूप में हो रहा इस्तेमाल: अचानक बढ़ी डिमांड से चिंता में प्रशासन

सामान्यतया कंडोम का इस्तेमाल सुरक्षित यौन संबंधों के लिए किया जाता है, लेकिन पश्चिम बंगाल से इसके जरिए नशा करने का मामला सामने आया है। अचानक से कंडोम की बड़ी माँग ने प्रशासन को चिंता में डाल दिया है। स्थिति ये है कि दुर्गापुर शहर में मेडिकल स्टोर्स पर कंडोम आते ही खत्म हो जा रहे हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, दुर्गापुर जिले के सिटी सेंटर, बेनाचिती, मुचिपारा, बिधाननगर, सी जोन, ए जोन में कुछ लोग धड़ल्ले से फ्लेवर्ड कंडोम खरीद रहे हैं। जब एक दुकानदार ने इसके बारे में जानने की कोशिश की तो पता चला कि नशे के लिए कंडोम का इस्तेमाल किया जा रहा है। दुकानदारों का कहना है कि पहले प्रतिदिन केवल 3-4 कंडोम ही बिकते थे, लेकिन अब तो एक झटके में सभी बिक जा रहे हैं।

कैसे होता है कंडोम से नशा

कंडोम से नशे की एक प्रक्रिया है। इसको लेकर दुर्गापुर मंडल में काम करने वाले धीमान मंडल बताते हैं कि कंडोम में कुछ महकने वाले यौगिक पाए जाते हैं, लेकिन जब एल्कोहल तैयार करने के लिए इनका इस्तेमाल किया जाता है तो ये टूट जाता है। इसके इस्तेमाल से नशा जैसा महसूस होता है। ये लोगों को लती बनाने के लिए काफी होते हैं। धीमान के मुताबिक, डेंड्राइट में भी यही सुगन्धित पदार्थ पाया जाता है, इसलिए कई लोग उसका भी नशे के तौर पर इस्तेमाल करते हैं।

दुर्गापुर आरई मेडिकल कॉलेज स्कूल के केमिस्ट्री विभाग के शिक्षक नूरुल हक के मुताबिक, कंडोम को गर्म पानी में लंबे समय तक भिगोकर रखने से इसमें मौजूद कार्बनिक अणु अल्कोहल यौगिक के तौर पर टूट जाते हैं। इसी से नशा होता है। इसी तरह से नाइजीरिया में टूथपेस्ट और जूते की माँग अचानक से 6 गुणा तक बढ़ गई थी। इसका इस्तेमाल भी नशे के लिए किया गया था। बहरहाल अब प्रशासन की चिंताएँ बढ़ी हुई हैं।

टेस्ला प्रमुख के 76 वर्षीय पिता एरोल मस्क को मिला स्पर्म डोनेट करने का ऑफर, हाल ही में बेटी के साथ संबंधों को स्वीकार कर मचाई थी सनसनी

अपनी सौतेली बेटी के साथ संबंध बनाने और बच्चे पैदा करने की बात कहकर सबको चकित कर देने वाले टेस्ला प्रमुख एलोन मस्क (Elon Musk) के पिता एरोल मस्क (Errol Musk) एक बार फिर से चर्चा में हैं। इस बार उन्होंने दावा किया है कि एक कंपनी ने उनसे संपर्क कर अपना स्पर्म डोनेट करने की माँग की है, ताकि धरती पर एलोन मस्क जैसे कई सारे व्यक्तियों को पैदा किया जा सके।

ब्रिटिश टैबलॉयड द सन को 18 जुलाई 2022 को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने ये खुलासा किया है। उनका कहना है कि कंपनी अगली पीढ़ी के एलोन मस्क बनाना चाहती है। उन्होंने कहा, “कोलंबिया में एक कंपनी है जो चाहती है कि मैं हाई क्लास कोलंबियाई महिलाओं को गर्भवती करने के लिए अपने शुक्राणु दान (Sprem Donation) करूँ, क्योंकि वे कहते हैं कि एलोन के पास क्यों जाएँ जब वे एलोन को बनाने वाले वास्तविक व्यक्ति के पास जा सकते हैं?”

उन्होंने कहा कि उन्हें उनकी सेवाओं के लिए किसी भी तरह का कोई भुगतान नहीं किया गया है, लेकिन अगर वो स्पर्म डोनेट करने के लिए सहमत होते हैं तो उन्हें कई तरह के भत्ते मिल सकते हैं।

दक्षिण अफ्रीकी मूल के निवासी एरोल (76) कहते हैं, “उन्होंने मुझे कोई पैसे की पेशकश नहीं की है, लेकिन उन्होंने मुझे फर्स्ट क्लास की ट्रैवेल और फाइव स्टार होटल में रुकने की सुविधा और उस तरह की कई अन्य चीजों की पेशकश की है।” जब उनसे ये पूछा गया कि क्या वो बिना पैसे के ही अपने स्पर्म को दे देंगे तो उन्होंने कहा, “क्यों नहीं।”

बेटी के साथ संबंधों को किया था स्वीकार

गौरतलब है कि हाल ही में एरोल मस्क ने चौंकाने वाला खुलासा करते हुए कहा था कि वह अपनी 35 वर्षीय सौतेली बेटी जाना बेजुइडेनहौट (Jana Bezuidenhout) के साथ रिश्ते में थे। उससे उनके दो बच्चे हैं। तीन साल पहले 2019 में उनकी सौतेली बेटी ने गुपचुप तरीके से उनके दूसरे बच्चे को जन्म दिया था। दोनों की पहली संतान 2017 में पैदा हुई थी। एरोल मस्क का कहना था, “हमने पृथ्वी पर केवल एक चीज के लिए जन्म लिया है और वो है बच्चे पैदा करना।”

जाना बेजुइडेनहौट एरोल की दूसरी पत्नी हाइड बेजुइडेनहौट की बेटी हैं, जिनसे उन्होंने 1979 में एलोन मस्क की माँ मेय हल्दमैन मस्क से अलग होने के बाद शादी की थी। एरोल के दो बच्चे हैं जाना और एलन मस्क। एरोल ने इस बात को स्वीकार किया था कि बेटी के साथ संबंधों के बारे में जानने के बाद से एलन मस्क अभी भी उनसे नफरत करते हैं। वे ये सोचते हैं कि कुछ भी हो वह उनकी बहन है। भले ही सौतेली हो।

68वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों का ऐलान: तमिल फिल्म सूराराई पोट्रू ने बटोरे सबसे अधिक पुरस्कार, अजय देवगन और सूर्या को मिला बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड

68वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों (National Film Awards 2022) का ऐलान कर दिया गया है। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने आज (22 जुलाई, 2022) दिल्ली के नेशनल मीडिया सेंटर में साल 2020 में बनी फिल्मों के लिए प्रतिष्ठित राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की घोषणा की है। इस साल के फिल्म पुरस्कारों की 10 सदस्यीय जूरी की अध्यक्षता फिल्ममेकर विपुल शाह ने की है। बॉलीवुड अभिनेता अजय देवगन (Ajay Devgn) को फिल्म ‘तान्हाजी द अनसंग वॉरियर’ और साउथ सुपरस्टार सूर्या (Suriya) को तमिल फिल्म सूराराई पोट्रू (Soorarai Pottru) के लिए बेस्ट एक्टर के अवॉर्ड से नवाजा गया है।

सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार सूराराई पोट्रू में सूर्या की को-स्टार अपर्णा बालमुरली (Aparna Balamurali) को मिला है। इस फिल्म को सर्वश्रेष्ठ मूल पटकथा का अवॉर्ड भी दिया गया है। बेस्ट क्रिटिक अवॉर्ड इस साल किसी को नहीं मिला है।

सर्वश्रेष्ठ गीत का पुरस्कार साइना के लिए मनोज मुंतशिर को दिया गया है। सच्चिदानंदन केआर (Sachidanandan KR) को मरणोपरांत मलयालम फिल्म एके अय्यप्पनम कोशियुम (AK Ayyappanum Koshiyum) के लिए सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का अवॉर्ड मिला है। सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का अवॉर्ड तमिल फिल्म सूराराई पोट्रू को मिला है। वहीं, बेस्ट हिंदी फीचर फिल्म का अवॉर्ड मृदुल तुलसीदास की फिल्म तुलसीदास जूनियर को मिला। फिल्म में संजय दत्त लीड रोल में थे।

68वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार के विजेताओं की सूची

  • सर्वश्रेष्ठ बंगाली फिल्म – अविजात्रिक
  • सर्वश्रेष्ठ हिंदी फिल्म – तुलसीदास जूनियर
  • सर्वश्रेष्ठ कन्नड़ फिल्म – डोलू
  • सर्वश्रेष्ठ मराठी फिल्म – गोष्ठा एका पैठानाची
  • सर्वश्रेष्ठ तमिल फिल्म – शिवरंजनियम इन्नुम सिला पैंगुल्लमट
  • सर्वश्रेष्ठ तेलुगु फिल्म – कलर फोटो
  • सर्वश्रेष्ठ असामी फिल्म – ब्रिज
  • सर्वश्रेष्ठ मलायलम फिल्म – थिंकड़युवा निश्चियम
  • सर्वश्रेष्ठ हरियाणवी फिल्म – दादा लखमी
  • सर्वश्रेष्ठ तुलु फिल्म – जितिगे
  • बेस्ट फीचर फिल्म – सूरराई पोट्रू (तमिल फिल्म)
  • बेस्ट एक्ट्रेस – अपर्णा बालामुरली (सूराराई पोट्रू)
  • बेस्ट एक्‍टर – अजय देवगन (तान्हाजी: द अनसंग वॉरियर), सूर्या (सूराराई पोट्रू )
  • बेस्टर मेल प्लेबैक सिंगर – राहुल देशपांडे (मी वसंतराव)
  • बेस्टर फीमेल प्लेबैक सिंगर – नचम्मा (ए.के.अयप्पन कोशियम)
  • बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर – बिजू मेनन (ए.के.अयप्पन कोशियम)
  • बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस – लक्ष्मी प्रिया चंद्रमौली (सिवरंजमनियम इन्नम सिले पेंगल्लम)
  • बेस्ट डायरेक्टर – सच्चीदानंद के.आर (ए.के.अयप्पन कोशियम)
  • बेस्ट एक्शन एंड डायरेक्शन- राजशेखर, माफिया सासी और सुप्रीम सुंदर (ए.के.अयप्पन कोशियम)
  • बेस्ट कोरियोग्राफर- संध्या राजू (नाट्यम, तेलुगु)
  • बेस्ट लिरिक्स- मनोज मुतंशिर (साइना)
  • बेस्ट म्यूजिक डायरेक्शन- थमन एस (अला वेकेंटापुर्रामुल्लू)
  • बेस्ट कॉस्ट्यूम डिजाइनर- नचिकेत बर्वे और महेश शेर्ला (तान्हाजी द अनसंग वॉरियर)
  • बेस्ट स्क्रीनप्लो (ऑरिजनल)- शालिनी ऊषा नायर और सुधा कोंगारा (सूराराई पोट्रू)

बता दें कि सूराराई पोट्रू फिल्म को सबसे ज्यादा अवॉर्ड मिले हैं। आम तौर पर कोई फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज होने के बाद ओटीटी प्लेटफॉर्म पर स्ट्रीम की जाती है, लेकिन साउथ इंडस्ट्री के जाने माने कलाकार सूर्या की फिल्म सूराराई पोट्रू को ओटीटी पर रिलीज करने के लगभग 15 महीने बाद तमिलनाडु के सिनेमाघरों में रिलीज किया गया था। सूर्या की फिल्म को समीक्षकों ने इसे तमिल की बेहतरीन फिल्मों में से एक बताया था। मालूम हो कि साल 2020 में कोरोना महामारी के प्रकोप के चलते सूराराई पोट्रू को ओटीटी प्लेटफॉर्म अमेजान पर रिलीज किया गया था। इसके अलावा इसे हिंदी भाषा में डब करके ‘उड़ान’ नाम से रिलीज किया गया है, जो हिंदी बेल्ट को काफी पसंद आई है।

लिप-लॉक चैलेन्ज! कॉलेज के छात्र-छात्राओं का किसिंग वीडियो वायरल, कर्नाटक पुलिस ने 8 स्टूडेंट्स पर दर्ज की पॉक्सो एक्ट में FIR, एक छात्र गिरफ्तार

कर्नाटक के मंगलुरु शहर के कालेज स्‍टूडेंट्स ने एक ऐसा चैलेंज दिया, जिसे देखकर लोग हैरत में है। दरअसल, कॉलेज छात्र-छात्राओं का लिप-लॉक किसिंग का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। जिसके बाद स्‍थानीय पुलिस ने छात्रों को हिरासत में लेकर जाँच शुरू कर दी है। हालाँकि, लिप-लॉक के ये वीडियो एक सप्ताह पहले का बताए जा रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, फ़िलहाल वीडियो में दिख रहे छात्रों को कॉलेज प्रशासन ने सस्पेंड कर दिया है। जबकि इस मामले में पुलिस ने एक छात्र को हिरासत में भी लिया है।

वायरल हो रहे इस वीडियो में लिप-लॉक करने वालों के साथ कुछ अन्य छात्र भी मौजूद दिखाई दे रहे हैं। वो दोनों को शाबाशी देते सुनाई दे रहे हैं। एक लड़की अपने कॉलेज के दोस्त की गोद में लेटी हुई है। वहाँ मौजूद उन तमाम लोगों में से किसी ने इस वीडियो को बना कर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया था।

वीडियो देख कर कुछ लोगों का मानना है कि जैसे वहाँ कम्पटीशन चल रहा हो। इस वीडियो के वायरल होने के बाद अन्य अभिभावक चिंतित बताए जा रहे हैं और कई लोग इसे अपनी संस्कृति के खिलाफ बता रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वीडियो के वायरल हो जाने के बाद पुलिस ने 8 आरोपितों पर केस दर्ज किया है। मंगलुरु के पुलिस कमिश्नर एन. शशिकुमार ने गुरुवार (21 जुलाई 2022) को की जा रही कार्रवाई की जानकारी दी। उन्होंने बताया, “वीडियो फरवरी 2022 का है। इसे मंगलुरु के ही एक फ़्लैट पर शूट किया गया था। वीडियो में दिख रहे लोग ‘ट्रथ एंड डेयर’ नाम का गेम खेल रहे थे। उस दौरान बने वीडियो को एक हफ्ते पहले किसी ने व्हाट्सएप पर शेयर कर दिया जहाँ से ये वायरल हो गया है।”

पुलिस ने वीडियो में दिख रहे छात्र को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस इस बात की भी जाँच कर रही है कि क्या उस दौरा उन छात्रों में से किसी ने ड्रग्स का सेवन तो नहीं किया था।

एक रिपोर्ट के मुताबिक इस वीडियो में दिख रहे कुल 8 लड़कों ने वीडियो में दिखाई दे रही 2 लड़कियों के साथ अलग-अलग स्थानों पर कई बार रेप किया है। ऐसा करने के लिए वो वीडियो दिखाने का डर दिखाया करते थे। इस वीडियो को लीक करने वाला लड़का 17 साल का नाबालिग है। पुलिस ने कुल 8 आरोपितों पर IPC की धारा 376, 354, 354 (C) व 120 (B) के साथ पॉक्सो व IT एक्ट के तहत कार्रवाई की है। वहीं बाकी आरोपितों की तलाश की जा रही है।

जमानत के बाद भी सदमे में है साद अंसारी: नूपुर शर्मा का समर्थन करने वाले के घर कॉन्ग्रेस नेता बाउद्दीन ने जुटाई भीड़, कहा- ‘मैं पहले मुस्लिम, फिर जनप्रतिनिधि’

इस्लाम के पैगंबर मोहम्मद (Islamic Prophet Muhammad) पर टिप्पणी मामले में नूपुर शर्मा का समर्थन करने वाले साद अशफाक अंसारी जेल से छूटने के बाद दहशत और सदमे में हैं। दरअसल, नूपुर शर्मा का समर्थन करने के बाद कट्टरपंथी इस्लामियों ने उनके खिलाफ मुंबई पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। साद 27 जून को जमानत पर बाहर आए हैं, लेकिन अब उनकी दुनिया बदल चुकी है।

साद अंसारी के परिजनों का कहना है कि पिछले कुछ हफ्तों में उन्हें जिस आघात से गुज़रना पड़ा है, उससे उबरने में उन्हें समय लगेगा। परिवार के एक करीबी का कहना है, “हमें कानून और पुलिस पर भरोसा है, लेकिन साद को थप्पड़ मारने और गाली देने वालों को भी उनके द्वारा किए गए अपराध के लिए दंडित किए जाने की जरूरत है।”

इस मामले में 20 जून को साद अंसारी की पहली जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी। हालाँकि, 27 जून को जमानत मिल गई। इंडिया टुडे टीवी के अनुसार, साद अंसारी के वकील नारायण अय्यर ने कहा कि कॉलेज का छात्र सिर्फ अपने विचार व्यक्त कर रहा था और वह किसी भी प्रकार की हिंसा या किसी भी धार्मिक भावनाओं को आहत नहीं कर रहा था।

इधर कॉन्ग्रेस के पूर्व पार्षद बाबा बाउद्दीन का एक वीडियो वायरल हो रहा है। बाउद्दीन पर आरोप लगाया जा रहा है कि उन्होंने साद के घर के बाहर जमा होने के लिए भीड़ को उकसाया। इंडिया टुडे के अनुसार, बाउद्दीन ने इन आरोपों से इनकार किया है।

बाउद्दीन का कहना है, “मैं पहले मुसलमान हूँ और फिर जनप्रतिनिधि। मैं मामला सुलझाने के लिए उनके (साद के) घर गया था। फिर हम थाने में FIR दर्ज कराने गए थे। मेरे खिलाफ भी केस किया गया। पुलिस ने मुझसे दो दिन तक पूछताछ की। मैं सिर्फ इतना कहूँगा कि कोई धर्म और लोगों की भावनाओं के साथ नहीं खेल सकता।”

नूपुर शर्मा का मामला सामने आने के बाद 19 वर्षीय इंजीनियरिंग छात्र साद अशफाक अंसारी ने इंस्टाग्राम पर नूपुर शर्मा को समर्थन देते हुए पैगंबर मोहम्मद से जुड़े कुछ सवाल खड़े किए थे। इसके साथ ही उन्होंने नूपुर शर्मा को बहादुर महिला भी बताया था।

साद ने अपने इंस्टाग्राम पर लिखा था, “50 साल का आदमी 6-9 साल की बच्ची से शादी करे, ये साफ तौर पर बाल शोषण है। मुझे नहीं पता कि लोग इसे कैसे समर्थन कर रहे हैं। क्या आप अपनी 6 साल की बेटी 50 साल के आदमी को देंगे (इस बारे में सोचिएगा।)”

एक और इंस्टा स्टोरी में साद ने लिखा था, “मैं किसी मजहब को समर्थन नहीं देता। मुझे सबसे नफरत है। मैं सिर्फ एक ऐसी दुनिया में रहने से डरता हूँ, जहाँ आपको और आपके परिवार को मार दिया जाए, क्योंकि आपने एक ऐसे व्यक्ति के लिए कुछ बोल दिया जिनका इंतकाल सालों पहले हो चुका है।”

इंजीनियरिंग छात्र ने अपील की थी, “बड़े हो जाओ यार। ऐसे मजहब को छोड़ो जो दुनिया में आतंक फैलाए। इंसान बनो। ये बहुत आसान है। मैं जानता हूँ ये सब पोस्ट करने के बाद मुझे कितनी नफरत झेलनी पड़ेगी। मैं गलत समझे जाने के लिए तैयार हूँ क्योंकि तुम लोग अब भी बच्चे ही हो।”

साद के इन सोशल मीडिया पोस्ट के बाद कट्टरपंथी भीड़ 11 जून की रात उसके घर पहुँची और उससे बाहर निकलने को कहा गया। लड़के ने किसी तरह भीड़ को समझाने का प्रयास किया। उसने घबराते हुए कहा, “मैं चाहता तो अंदर रह सकता था, लेकिन मैं तुम लोगों से बाहर बात करने आया हूँ।”

इसके बाद भीड़ से एक व्यक्ति ने कहा, “अगर तू अंदर रहता तो हम तुझे खींचकर बाहर लाते और मारते।” लड़के ने हाथ जोड़कर भीड़ को समझाने की बहुत कोशिशें की, लेकिन भीड़ नहीं मानी। अंत में उससे जबरन कलमा और शाहदा पढ़वाया गया। जब लड़के ने इसे पढ़ना शुरू किया तो एक व्यक्ति ने उसके मुँह पर झापड़ मारा और दूसरे ने लगातार धमकी दी।

इसके बाद 12 जून को दोबारा मुस्लिम भीड़ साद के घर पहुँची और अपना प्रदर्शन किया। बाद में भिवंडी के निजामपुर पुलिस थाने में साद के खिलाफ शिकायत दर्ज हुई। कट्टरपंथी भीड़ ने आरोप लगाया कि साद ने पैगंबर पर आपत्तिजनक की। भीड़ ने कहा कि उन्हें माफी नहीं, गिरफ्तारी चाहिए। एक प्रदर्शनकारी ने तो ये तक कहा कि अगर ऐसी घटना दोबारा घटित हुई तो कानून अपना काम करेगा और वे लोग अपना।

बिहार के किशनगंज में भी जुमे पर बंद रहते हैं स्कूल: शिक्षा विभाग ने कहा- इलाका मुस्लिम बहुल, इसलिए बन गई परंपरा

झारखंड के बाद बिहार के स्कूलों में रविवार के बदले शुक्रवार को जुमे के नमाज की छुट्टी दिए जाने की खबर सामने आई है। यहाँ किशनगंज जिले के 19 स्कूलों में बिना किसी आदेश के शुक्रवार को अवकाश दिया जा रहा है और ​रविवार को बच्चों को पढ़ाया जा रहा है। शिक्षा विभाग के मुताबिक, मुस्लिम बहुल इलाका होने के कारण यहाँ शुरू से ये परंपरा चली आ रही है।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक, मुस्लिम बहुल इलाका और मुस्लिम छात्रों की संख्या अधिक होने के कारण इन स्कूलों में शुक्रवार को नमाज पढ़ने की छुट्टी दी जाती है। शहर के लाइन उर्दू स्कूल, उत्क्रमित मध्य विद्यालय लाइन कर्बला, उत्क्रमित मध्य विद्यालय महेशबथना, उत्क्रमित मध्य विद्यालय हालामाला, प्राथमिक स्कूल मोतिहारा वेस्ट सहित कई ऐसे स्कूल हैं, जिनमें रविवार को छात्रों को पढ़ाने के लिए शिक्षक पहुँचते हैं।

लाइन उर्दू मध्य विद्यालय की प्राचार्य झरना बाला साहा ने बताया कि इनमें से कोई भी उर्दू स्कूल नहीं हैं। यह सभी हिंदी स्कूल हैं। यहाँ मुस्लिम छात्रों की संख्या 80 प्रतिशत से अधिक है। स्कूल की स्थापना 1901 में हुई थी, तभी से शुक्रवार को नमाज अदा करने के नाम पर अवकाश रहता है और रविवार को पढ़ाया जाता है।

वहीं, किशनगंज के जिला शिक्षा पदाधिकारी सुभाष कुमार गुप्ता का कहना है कि जिले के अल्पसंख्यक क्षेत्र के स्कूलों में पुरानी परंपरा के अनुसार शुक्रवार को अवकाश और रविवार को पढ़ाई हो रही है। इस संबंध में कोई आदेश नहीं दिया गया है। अन्य स्कूलों की तरह इन्‍हें भी शुक्रवार को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों से बात की जाएगी। किशनगंज के पूर्व विधायक गोपाल अग्रवाल ने इसका विरोध जताते हुए कहा कि शिक्षा को जाति और धर्म से अलग रखना चाहिए।

गौरतलब है कि इससे पहले झारखंड के जामताड़ा जिले के कुछ सरकारी स्कूलों में रविवार की बजाय शुक्रवार की छुट्टी दिए जाने की खबर सामने आई थी। दावा किया गया था कि स्कूल के नोटिस बोर्ड पर बकायदा शुक्रवार को जुमे का दिन घोषित करके अवकाश लिखा गया है। वहीं शिक्षा विभाग द्वारा उन स्कूलों को उर्दू स्कूल बताते हुए ऐसा कदम शिक्षकों की सुविधा को देखकर उठाया जाना बताया गया था।

अब उत्तराखंड के ब्राइट एंजेल पब्लिक स्कूल में जुमे के नमाज की छुट्टी, देहरादून में प्रबंधक एम के हुसैन के विरोध में आगे आए हिन्दू संगठन और अभिभावक

झारखंड के बाद अब उत्तराखंड के एक स्कूल में शुक्रवार को जुमे की नमाज की छुट्टी देने का मामला सामने आया है। स्कूल का नाम ब्राइट एंजेल पब्लिक स्कूल है जो राजधानी देहरादून के विकासनगर क्षेत्र में पड़ता है। इस स्कूल के प्रबंधक एम के हुसैन और प्रिंसिपल अज़रा हुसैन हैं। लोगों के कड़े विरोध के बाद स्कूल ने शुक्रवार को छुट्टी देने का फैसला वापस लिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ब्राइट एंजेल स्कूल के बच्चों का नियमित समय सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक होता है। इसमें पढ़ने वाले छात्र पिछले गुरुवार (21 जुलाई 2022) को जब घर आए तो उनकी डायरी में लिखा था कि हर शुक्रवार दोपहर 12 बजे स्कूल बंद हो जाएगा। अभिभावकों को स्कूल का ये आदेश अजीब लगा और उन्होंने इसका विरोध किया। जब इसकी जानकारी हिन्दू संगठनों को हुई तब उन्होंने इस फरमान की शिकायत जिलाधिकारी (DM) से की। DM ने फौरन ही SDM को मामले की जाँच के आदेश दिए।

हिन्दू जागरण मंच के पदाधिकारी राकेश तोमर ने आरोप लगाया, “स्कूल के प्रबंधक मुस्लिम समुदाय से हैं। वो मज़हबी कट्टरता फैला रहे हैं। स्कूल में हर धर्म के बच्चे पढ़ते हैं। स्कूल मैनेजमेंट का यह कदम उत्तराखंड की शिक्षा प्रणाली पर बुरा असर डालेगा।” कुछ ही देर में स्कूल का फरमान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और लोग स्कूल प्रबंधन पर कार्रवाई की माँग करने लगे।

स्कूल प्रबंधन का माफ़ीनामा

इस पूरे मामले में जब SDM विकासनगर ने स्कूल के प्रबंधक और प्रिंसिपल को अपने ऑफिस में बुला कर जवाब-तलब किया तब उन दोनों ने बिना शर्त माफ़ी माँग ली। फ़ौरन ही स्कूल प्रबंधन ने अपने आदेश को वापस लेने का ऐलान किया। स्कूल के डायरेक्टर ने इस फैसले को स्टाफ की सुविधा के लिए लिया गया कदम बताया था।

डायरेक्टर एम के हुसैन

गौरतलब है कि ब्राइट एंजेल पब्लिक स्कूल के प्रबंधक एम के हुसैन को स्थानीय लोग मेजर साहब बुलाते हैं। प्रिंसिपल अजरा हुसैन उन्ही के परिवार से हैं। वो सेना में लेफ्टिनेंट कर्नल के पद से रिटायर हुए थे। बाद में वो उत्तराखंड मुस्लिम एजुकेशनल लॉ बोर्ड के चेयरमैन भी बने थे। जब ऑपइंडिया ने उनका पक्ष जानने के लिए उन्हें कॉल किया तो उन्होंने फोन नहीं उठाया।

‘इस्लामी कट्टरपंथी बच्चों पर शरिया थोप रहे हैं’: झारखंड में स्कूलों का इस्लामीकरण रोकने के लिए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर

झारखंड (Jharkhand) में इस्लामीकरण (Islamization) एक बड़ी समस्या बनकर उभरा है। स्थिति यह है कि इस्लामीकरण के इस खेल में स्कूल भी सुरक्षित नहीं रह गए हैं। स्कूलों में उर्दू और जबरन इस्लामिक शिक्षा का विवाद अब हाईकोर्ट की दहलीज तक पहुँच गया है।

इस मामले में वकील राजीव कुमार के जरिए सामाजिक कार्यकर्ता पंकज यादव ने झारखंड हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की है। अपनी याचिका में उन्होंने स्कूलों के ‘इस्लामीकरण’ पर प्रतिबंध लगाने का निर्देश देने की माँग की है।

याचिकाकर्ता ने अपनी जनहित याचिका में उल्लेख किया है कि झारखंड के मुस्लिम बहुल इलाकों जामताड़़ा, पाकुड और गढ़वा सहित कम-से-कम छह जिलों में स्कूलों का ‘इस्लामीकरण’ हो चुका है। यहाँ स्कूलों में जबरदस्ती उर्दू को जोड़ा जा रहा है। यहीं नहीं, स्कूल बोर्ड और रविवार के बजाय शुक्रवार (जुम्मा) को छुट्टी दे रहा है।

पंकज यादव ने अपनी याचिका में कहा है, “इस्लामी कट्टरपंथी नाबालिग स्कूली बच्चों पर शरीयत और इस्लामी प्रथाओं को लागू करने की कोशिश कर रहे हैं। स्कूली प्रार्थना को जबरदस्ती बदल दिया गया है और बच्चों को प्रार्थना के दौरान हाथ नहीं जोड़ने के लिए मजबूर किया जा रहा है।”

कोर्ट में दायर याचिका में पंकज यादव ने दावा किया है कि अब तक दस जिलों से स्कूलों को शुक्रवार को बंद रखने की जानकारी मिली है और अगर सही तरीके से जाँच की जाए तो जिलों की संख्या बढ़ सकती है।

याचिका में कहा गया है कि हिंदू छात्रों का गढ़़वा के एक स्कूल में सिर्फ इसलिए दाखिला नहीं दिया गया, क्योंकि उस स्कूल में मुस्लिम छात्रों की संख्या ज्यादा थी। पंकज यादव का कहना है कि शिक्षा मंत्री के आदेश के बाद जामताड़ा के स्कूल शुक्रवार को खोले जा रहे हैं, लेकिन छात्रों और शिक्षकों को स्कूल में घुसने नहीं दिया जा रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि झारखंड में एक बड़ी साजिश के तहत इस तरह की ‘असंवैधानिक और अनैतिक हरकतें’ की जा रही हैं। इससे समाज का सौहार्द्र बिगड़ रहा है। इसके साथ ही जनहित याचिका में उन्होंने ऐसा करने वाले स्कूलों पर एक्शन लेने की माँग की है।

यादव ने कहा है, “अगर यह जनसंख्या के आधार पर तय किया जाना है कि कोई स्कूल हिंदी या उर्दू माध्यम होगा तो राज्य में कोई भी स्कूल उर्दू नहीं रहेगा, क्योंकि पूरे राज्य में हिन्दू 70-75 प्रतिशत से अधिक हैं।”