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फरीदाबाद में RSS कार्यकर्ता के रिश्तेदार का कुरैशी ने गला रेता, बाथरूम में बोरे में भर रखी थी लाश

हरियाणा के फरीदाबाद (Faridabad, Haryana) में देवेंद्र नाम के एक युवक की गला रेत कर हत्या कर दी गई है। आरोपित इमाम कुरैशी मृतक का पड़ोसी है। देवेंद्र की लाश कुरैशी के घर से 22 जुलाई 2022 (शुक्रवार) को बरामद हुई। इस मामले में पुलिस ने कुरैशी और मृतक की पत्नी को गिरफ्तार किया है।

जब घटना सामने आई, उसके बाद इलाके में तनाव फैल गया था। इलाके के हिंदू संगठन सड़कों पर उतर आए थे और सड़क को जाम कर दिया था। मृतक देवेंद्र के जीजा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े बताए जा रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना फरीदाबाद के पर्वतीय कालोनी की है। देवेंद्र वेल्डिंग का काम कर अपना परिवार पालते थे। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी कहा जा रहा है कि गुरुवार की रात को तीन युवकों ने उन्हें घर के बाहर बुलाया था। जैसे ही देवेंद्र बाहर निकले, धारदार हथियार से उनका गला काट दिया। इसके बाद आरोपित मौके से फरार हो गए।

वहीं, मृतक के जीजा का कहना है, “मरने वाला व्यक्ति मेरा साला है, जिसकी उम्र 40 साल है। वे जाटौली के हसनपुर के रहने वाले हैं। मृतक के 3 बच्चे हैं। वो मेहनत मजदूरी करके अपना परिवार पालते थे। सामने मुस्लिम का घर है। उन्होंने कोई साजिश रची है। आरोपित को पुलिस पकड़ कर ले गई है। उसने कबूल भी कर लिया है। इसमें एक नहीं बल्कि और भी साजिशकर्ता हैं।”

बताया जा रहा है कि इमाम कुरैशी ने देवेंद्र की हत्या करने के बाद उनकी लाश को बाथरूम में छिपा दिया गया था। पुलिस ने आरोपित कुरैशी के घर को सील कर दिया है। SHO ने मीडिया को बताया कि मृतक के शरीर पर चाकू के निशान मिले हैं।

हत्या के विरोध में प्रदर्शन

देवेंद्र के जीजा के अनुसार, “इमाम ने देवेंद्र को अपने घर में बुलाया और मार डाला। हम इस घटना की निष्पक्ष जाँच और कड़ी कार्रवाई के लिए अन्य हिन्दू संगठनों के साथ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इस घटना में कई और लोग शामिल हैं, जिनका नाम का खुलासा पुलिस नहीं कर रही है। बॉडी को बोरे में पैक करके कहीं और ले जाने की तैयारी थी। हत्या इतनी निर्ममता से हुई है कि उसको मैं देख भी नहीं पाया।”

जीजा ने मृतक की पत्नी पर संदेह जताया और कहा था कि आरोपित और उसकी पत्नी आपस में बात करते थे। मृतक की पत्नी दो साल बाद घर में दिखी है। वहीं, घटनास्थल पर मौजूद गौ रक्षा फ़ोर्स के सदस्य बिट्टू बजरंगी ने ऑपइंडिया से बात करते हुए कहा, “पुलिस मृतक के 10 साल के बच्चे से अपनी मर्जी के मुताबिक बयान लेना चाहती थी, जिसका हमलोगों ने विरोध किया।” मामले में अवैध संबंधों की बात भी कही जा रही है।

फरीदाबाद के DCP (क्राइम) नरेंद्र कादयान ने बताया, “मृतक की पत्नी ने अपने प्रेमी इमाम कुरैशी के साथ मिलकर फरीदाबाद के पर्वतीय कॉलोनी में पति ‘देवेंद्र’ की हत्या कर दी। दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है और उनसे पूछताछ की जा रही है।”

पुलिस का कहना है कि मृतक की पत्नी ने इमाम कुरैशी के साथ मिलकर देवेंद्र को मार दिया था। उसके बाद देवेंद्र की लाश को बोरे में भरकर बाथरूम में रख दिया था।

‘ई तो सरकार का पिट्ठू था, जज हईए नहीं था’: 10 साल की सजा सुनाए जाने के बाद तिलमिलाए अनंत सिंह

बिहार के बाहुबली नेता और RJD के पूर्व विधायक अनंत कुमार सिंह को एक और मामले में कठोर सजा सुनाई गई है। अनंत कुमार सिंह को एमपी-एमएलए विशेष कोर्ट ने गुरुवार (21 जुलाई 2022) को यह सजा दी है। कोर्ट ने उन्हें सरकारी आवास से विस्फोटक हथियारों की बरामदगी के मामले में आरोपित ठहराते हुए 10 साल के कठोर कारावास की सजा दी है। कोर्ट का फैसला आने के बाद अनंत सिंह तिलमिला गए हैं। उन्होंने फैसले पर सवाल खड़ा करते हुए जज को सरकार का आदमी बताया। जबकि अनंत सिंह ने सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट की न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा जताया।

इसका एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इसमें वह पुलिस की गाड़ी में जाते हुए दिखाई दे रहे हैं। इसी दौरान कुछ मीडियाकर्मी उनसे सवाल करते हैं। वीडियो में रिपोर्टर उनसे कहता है कि उन्हें 10 साल की सजा हुई है। क्या वह इस मामले में अपील करेंगे? इस पर अनंत सिंह ने कहा, “हाँ, जरूर करेंगे।” जब उनसे पूछा गया कि उन्हें क्या लगता है कि जानबूझ कर फँसाया गया है, तो वह कहते हैं, “ई तो सरकार का पिट्ठू था, ई जज हईए नहीं था। ई क्लर्क था। हमको कोर्ट पर, न्याय पर भरोसा है। सर्वोच्च न्यायालय पर भरोसा है। हम सुप्रीम कोर्ट तक जाएँगे, हाई कोर्ट तक जाएँगे।”

क्या है मामला?

मामला साल 2015 का है। तब बाढ़ में पुटुस यादव नाम के एक युवक की हत्या के मामले में अनंत सिंह के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई थी। इसके बाद तत्कालीन पटना एसएपी विकास वैभव के नेतृत्व में पटना स्थित सरकारी आवास पर घंटों तलाशी ली गई थी। इस दौरान अनंत सिंह के आवास से इंसास रायफल की छह खाली मैगजीन, बुलेटप्रूफ जैकेट समेत कई चीजें मिली थी। इसके बाद अनंत सिंह को गिरफ्तार भी किया गया था। इसी मामले में अब कोर्ट ने उन्हें दोषी करार दिया है और 10 साल की सजा सुनाई 

AK-47 बरामदगी मामले में चली गई है विधायकी

हाल में ही AK-47 राइफल और हैंड ग्रेनेड बरामदगी मामले में एमपी-एमएलए कोर्ट ने अनंत सिंह के खिलाफ सुनवाई करते हुए उन्‍हें 10 साल कैद की सजा सुनाई थी। सजा के ऐलान के बाद उनकी विधायकी चली गई। विधानसभा सचिवालय ने अनंत सिंह की सदस्यता खत्म करने का आदेश जारी किया था।

बता दें कि 16 अगस्त 2019 को अनंत सिंह के पैतृक गाँव लदमा में तत्कालीन एसपी लिपि सिंह के नेतृत्व में छापेमारी की गई थी। इस छापेमारी के दौरान अनंत सिंह के घर से एके 47 राइफल, जिंदा कारतूस और हैंड ग्रेनेड बरामद हुए थे।

कौन है बॉलीवुड माफिया? तनुश्री दत्ता बोलीं- वह डॉन से डायरेक्ट टच में रहते हैं, मुझे रास्ते से हटाना चाहते हैं; बताया कैसे गुंडों वाले कमरे में ले गए थे

बॉलीवुड अभिनेत्री तनुश्री दत्ता (Tanushree Dutta) ने कहा है कि बॉलीवुड माफिया उनके पीछे पड़ा है। उन्हें रास्ते से हटाना चाहता है। उनसे काम छीन रहा है। ये दावे उन्होंने एक इंटरव्यू में किए हैं। इससे पहले इंस्टाग्राम पर पोस्ट कर भी वह बॉलीवुड माफिया पर बरसीं थी।

दैनिक भास्कर को दिए इंटरव्यू में तनुश्री दत्ता ने दावा किया कि बॉलीवुड माफिया उनके प्रोजेक्ट्स लगातार छीन रहा है। उन्होंने कहा, “मैं इन प्रोजेक्ट्स में काफी टाइम और एनर्जी इनवेस्ट कर देती हूँ। मगर उनके फ्लोर पर जाने से पहले ही संबंधित लोग हाथ खींच लेते हैं। जरूर बॉलीवुड माफिया है, जो मेरा काम बिगाड़ने में लगा हुआ है। दिसंबर 2020 से मेरे हाथ आ रहे काम को लगातार सैबोटाज किया जा रहा है।”

जब उनसे पूछा गया कि ये बॉलीवुड माफिया है कौन। सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद भी इसकी खूब चर्चा हुई थी। जवाब में तनुश्री ने कहा कि वे किसी का नाम नहीं लेना चाहती हैं। लेकिन एक माफिया काम तो करता ही है, जिसके अंडरवर्ल्ड से संपर्क हैं। उन्होंने कहा, “बॉलीवुड में डॉन खुद दुकान खोल बैठे नहीं रहते। उनका बड़ा बिजनेस दो-तीन देशों को लेकर चल रहा होता है। उनके गुर्गे बॉलीवुड के कुछ आर्टिस्टों, मेकर्स के टच में रहते हैं। वैसे टच वाले लोग चाहते हैं कि तनुश्री को रास्ते से हटाया जाए। बॉलीवुड माफिया वो होता है, जो मेन डॉन के टच में रहते हैं।”

अपनी जान को खतरा बताते हुए इंटरव्यू के दौरान तनुश्री ने एक वाकये का जिक्र भी किया। इसके मुताबिक मीटू को लेकर जब उन्होंने मीडिया में बात रखी थी तो उनको मारने की कोशिश हुई थी। एक प्रोजेक्ट की मीटिंग के सिलसिले में उन्हें होटल बुलाया गया। फिर होटल के 10वीं मंजिल के एक कमरे में ले जाने की कोशिश की गई, जहाँ पहले से यूपी-बिहार के कुछ गुंडे टाइप लोग मौजूद थे।

इससे पहले तनुश्री दत्ता ने इंस्टाग्राम पोस्ट के जरिए कहा था, “मुझे बहुत बुरी तरह से परेशान किया जा रहा है और निशाना बनाया जा रहा है। पहले मेरा बॉलीवुड करियर एक साल से ठीक नहीं चल रहा था। फिर मेरी काम वाली के जरिए मेरे खाने-पीने में गड़बड़ी करके मुझे स्टेरॉयड देने की कोशिश की गई। इससे मुझे कई तरह की गंभीर स्वास्थ्य दिक्कतें हुईं, इसके बाद जब मैं मई में उज्जैन गई थी तो मेरे कार के ब्रेक के साथ दो बार छेड़छाड़ की गई, जिसके कारण मैं दो बार दुर्घटना का शिकार हुई, लेकिन मरते-मरते बच गई और करीब 40 दिनों के बाद मुंबई लौटी हूँ। अब मेरे फ्लैट के बाहर मेरे घर में अजीबोगरीब घिनौना सामान मिला है।”

जो रिजवान नूपुर शर्मा को मारने पाकिस्तान से आया, उसने ही लाहौर में तोड़ी थी महाराजा रणजीत सिंह की मूर्ति

पैगंबर मुहम्मद पर न्यूज़ डिबेट में टिप्पणी के बाद से इस्लामिक कट्टरपंथी बीजेपी की निलंबित नेता नूपुर शर्मा को लगातार हत्या की धमकियाँ दे रहे हैं। इसी क्रम में पाकिस्तान से घुसपैठ कर भारत में घुसे रिजवान (24) नाम के पाकिस्तानी ने भी पकड़े जाने के बाद खुलासा किया है कि वो यहाँ नूपुर शर्मा की हत्या करने के लिए आया था। वो पाकिस्तान के कट्टरपंथी इस्लामिक राजनीतिक संगठन तहरीक-ए-लब्बैक से जुड़ा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, रिजवान को श्रीगंगानगर में बीएसएफ, मिलिट्री इंटेलीजेंस और पुलिस ने मिलकर पकड़ा है। एडीजी (सिक्योरिटी) एस सेंगाथिर ने बताया कि 16 जुलाई की रात श्रीगंगानगर से सटे हिंदूमलकोट सीमा के पास से गिरफ्तार किया गया है। अधिकारी ने दावा किया कि किसी लोकल सपोर्ट के बिना वो ऐसा नहीं कर सकता है। ऐसे में अब उसके लोकल कनेक्शन को ट्रेस किया जा रहा है।

रिजवान के पास से धार्मिक किताबों के अतिरिक्त कुछ भी नहीं मिला। उसने जाँच एजेंसियों को बताया कि वो 8वीं पास है उसका एक भाई इटली तो दूसरा दुबई में रहता है। जाँच एजेंसियों का मानना है कि रिजवान काफी शातिर है वो कनेक्शन को लेकर कोई खुलासा नहीं कर रहा है। इसके साथ ही एडीजी ने ये स्पष्ट किया है कि तहरीक-ए-लब्बैक घुसपैठिए को इस इलाके में प्लांट किया गया है या वो खुद ही आया था, इसको लेकर कुछ नहीं कहा जा सकता। उल्लेखनीय है कि तहरीक ए लब्बैक की स्थापना 2015 में की गई थी। इसका संस्थापक खामिद हुसैन है। भारत भेजने से पहले इसी संगठन के मुख्यालय मंडी बहाउद्दीन में उसकी ट्रेनिंग और ब्रेनवॉश किया गया था।

कौन है रिजवान

रिजवान मुख्यरूप से पाकिस्तान के मंडी बहाउद्दीन का रहने वाला है। वो इससे पहले पिछले साल अगस्त 2021 में उस वक्त चर्चा में आया था, जब लाहौर में ‘या अली या अली’ की नारेबाजी करते हुए शेर ए पंजाब महाराजा रणजीत सिंह की प्रतिमा को तोड़ दिया था। इस मामले में उसे गिरफ्तार भी किया गया था।

द्रौपदी मुर्मू की जीत तय थी, लेकिन कॉन्ग्रेस-ममता के टशन में ‘बलि का छागर’ बन गए यशवंत सिन्हा: क्रॉस वोटिंग से विपक्षी एकता की निकली हवा

राष्ट्रपति चुनाव में NDA की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू (Draupadi Murmu) की भारी जीत हुई है और वे देश का अगला राष्ट्रपति बनने जा रही हैं। वहीं, विपक्ष के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा (Yashwant Sinha) को जितनी उम्मीद थी, उससे कम वोट मिले। इसका प्रमुख कारण क्रॉस वोटिंग रहा।

विपक्षी दल NDA, खासकर भाजपा के खिलाफ संयुक्त मोर्चा बनाने की कोशिश लगातार कई वर्षों से कर रहे हैं, लेकिन वे इसमें सफल होते नहीं दिख रहे हैं। कभी कॉन्ग्रेस की सोनिया गाँधी, कभी NCP के शरद पवार तो कभी TMC की ममता बनर्जी ये प्रयास करती दिखीं। दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव, RJD के तेजस्वी यादव, TRS के के चंद्रशेखर राव की समय-समय पर अलग-अलग राहें दिखीं।

हालाँकि, जब राष्ट्रपति चुनाव में विपक्षी दलों ने एक प्रयास और किया। इस दौरान संयुक्त उम्मीदवार उतारकर अधिकांश एक मंच पर दिखे। इनमें कॉन्ग्रेस, TMC, NCP, तब की शिवसेना, BJD आदि प्रमुख दल थे और यशवंत का नाम उम्मीदवार के तौर पर घोषित करने के दौरान उपस्थित रहे। हालाँकि, जब वोट डालने की बारी आई तो यह एकता नहीं दिखी।

यशवंत सिन्हा भले ही संयुक्त विपक्ष के साझा उम्मीदवार थे, लेकिन द्रौपदी मुर्मू का नाम उम्मीदवार के तौर पर सामने आते ही BJD, JMM, YSR कॉन्ग्रेस, शिव सेना के उद्धव गुट ने यशवंत सिन्हा से किनारा कर लिया। हालाँकि, यशवंत सिन्हा भले ही कहें कि उम्मीदवार बनने का उनका उद्देश्य विपक्षी दलों को एक मंच पर लाना था, फिर भी उनका यह उद्देश्य पूरा नहीं हुआ।

राष्ट्रपति चुनाव में खूब क्रॉस वोटिंग हुई। मुर्मू के पक्ष में 13 राज्यों के 119 विधायकों ने क्रॉस वोटिंग किया। इसके अलावा, 17 सांसदों ने भी क्रॉस वोटिंग की। कयास लगाए जा रहे हैं कि क्रॉस वोटिंग करने वालों में सबसे अधिक कॉन्ग्रेस के नेता हैं।

इस बार राष्ट्रपति चुनाव में सांसदों और विधायकों के कुल 4,809 वोट थे और इनका कुल मूल्य 10,86,431 था। हालाँकि, 18 जुलाई को हुए मतदान में सिर्फ 4,754 ही वोट डाले, जिनका कुल मूल्य 10,72,377 था।

दोनों सदन के सांसदों के कुल 776 वोट थे, जिनका का कुल मूल्य 5,43,200 था। इनमें से 763 सांसदों ने मतदान में अपने मत का प्रयोग किया, जिनका कुल मूल्य 5,34,100 है। वहीं, 14 सांसदों ने इस चुनाव में मतदान नहीं किया।

अगर विधानसभा की बात करें तो सभी राज्यों के विधायकों की कुल संख्या 4,033 है और इनके वोटों का कुल मूल्य 5,38,277 था। इस चुनाव में 3,991 विधायकों ने मतदान किया, जबकि 42 विधायक मतदान से अनुपस्थित रहे। 

द्रौपदी मुर्मू को 540 सांसदों के वोट मिले, जिनका कुल मूल्य 3,78,000 था। वहीं, देश भर के 2,284 विधायकों ने वोट दिया, जिनके वोटों का कुल मूल्य 2,98,803 था। दूसरी तरफ यशवंत सिन्हा को 206 सांसदों के वोट मिले, जिनका कुल मूल्य 1,45,600 था। इसके अलावा उन्हें 1,669 विधायकों ने वोट दिया, जिनका कुल मूल्य 2,34,577 था।

इस बार के मतदान में 15 सांसदों के वोट रद्द हो गए, जिनका कुल मूल्य 10,500 था। इसके अलावा, 38 विधायकों के वोटों भी रद्द हो गए। इस तरह द्रौपदी मुर्मू को कुल 6,76,803 मूल्य के वोट मिले, जबकि यशवंत सिन्हा को 3,80,177 मूल्य के वोट मिले। यानी कुल वोट का 64.04 प्रतिशत द्रौपदी मुर्मू को और 35.97 प्रतिशत यशवंत सिन्हा को मिले।

यशवंत सिन्हा ने मतदान के दिन सांसदों और विधायकों से आग्रह किया था कि वे अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनें और उन्हें वोट करें, लेकिन उनकी अपील का कोई खास असर नहीं हुआ। उन्हें आंध्र प्रदेश, नगालैंड और सिक्किम से एक भी वोट नहीं मिला। वहीं, केरल में NDA का एक भी वोट नहीं था, फिर भी द्रौपदी मुर्मू को एक विधायक का वोट मिला।

जिन राज्यों में सबसे अधिक क्रॉस वोटिंग हुई, उनमें सबसे ऊपर असम है। यहाँ के 22 विधायकों ने द्रौपदी मुर्मू को वोट दिया। असम में कॉन्ग्रेस के 25 विधायकों सहित विपक्ष में 39 विधायक हैं। इसके बाद मध्य प्रदेश के 19 विधायकों और महाराष्ट्र के 16 विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की।

मध्य प्रदेश में कॉन्ग्रेस सहित विपक्ष के 100 विधायक हैं। बता दें कि असम और मध्य प्रदेश में आदिवासियों की बड़ी संख्या है। असम की कुल आबादी का लगभग 6 प्रतिशत आदिवासी हैं। वहीं मध्य प्रदेश विधानसभा में आदिवासियों के लिए 47 सीटें रिजर्व हैं। द्रौपदी मुर्मू के पक्ष में मतदान का एक बड़ा कारण उनका आदिवासी समाज से होना भी हो सकता है।

इसके बाद उत्तर प्रदेश के 12, गुजरात के 10, झारखंड के 10, मेघालय के 7, छत्तीसगढ़ के 6, बिहार के 6, राजस्थान के 5, गोवा के 4, हरियाणा एवं अरुणाचल प्रदेश के एक-एक विधायकों ने क्रॉस वोटिंग करते हुए द्रौपदी मुर्मू के पक्ष में मतदान किया। इनमें से कई राज्यों में कॉन्ग्रेस या तो सत्ता में है या फिर विपक्ष की भूमिका में है।

इस तरह यशवंत सिन्हा विपक्ष के साझा उम्मीदवार होकर भी विपक्ष का वोट नहीं ले पाए। हालाँकि, राष्ट्रपति चुनाव के नतीजे घोषित होने के बाद यशवंत सिन्हा ने भावी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को बधाई देते हुए दावा कि ये जानते हुए भी कि हार तय है, वे दो लक्ष्य के लिए लड़े। इनमें से प्रमुख था अधिकांश विपक्षी दलों को एक साथ लाना, लेकिन नतीजे बता रहे हैं कि उनका यह लक्ष्य भी पूरा नहीं हुआ।

कहा जा रहा है कि जिन नेताओं ने क्रॉस वोटिंग की है, उनमें अधिकांश कॉन्ग्रेस के नेता हैं। यहाँ यह भी बताना आवश्यक है कि यशवंत सिन्हा तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के नेता रहे हैं और पिछले साल उन्होंने ममता बनर्जी की पार्टी ज्वॉइन की थी। ये अलग बात है कि उम्मीदवार घोषित होने के बाद उन्होंने पार्टी से इस्तीफा दे दिया था।

राष्ट्रपति उम्मीदवार के रूप में यशवंत सिन्हा का नाम भी ममता बनर्जी ने ही आगे बढ़ाया था। यशवंत सिन्हा के नाम पर कॉन्ग्रेस के नेता पूरी तरह सहमत नहीं थे, लेकिन NDA से लड़ने के नाम पर वे एक मंच पर दिखने की कोशिश जरूर किए थे।

दरअसल, गोवा विधानसभा चुनावों के दौरान से ही ममता बनर्जी विपक्ष का चेहरा बनने की कोशिश करती रही हैं। वह विपक्षी दलों को एक मंच पर लाने का प्रयास करती दिखीं, लेकिन कॉन्ग्रेस नेताओं ने ममता के नेतृत्व में विपक्षी मोर्चे को मानने से इनकार कर दिया था।

कॉन्ग्रेस के नेताओं का तर्क था कि विपक्षी दलों के किसी भी गठबंधन या मोर्चे का स्वाभाविक नेतृत्वकर्ता कॉन्ग्रेस और सोनिया गाँधी ही हैं। कॉन्ग्रेस ने इसके पीछे तर्क दिया था कि कॉन्ग्रेस राष्ट्रीय पार्टी है, जबकि TMC क्षेत्रीय।

यहाँ पर अप्रैल 2022 में तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) नेता रिपुन बोरा के बयान के याद करना भी आवश्यक हो जाता है। बोरा ने कहा था कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी 2024 के लोकसभा चुनावों में विपक्षी मोर्चे का नेतृत्व करने के लिए सबसे उपयुक्त नेता हैं। उन्होंने कॉन्ग्रेस पर सवाल उठाए थे।

अगर राष्ट्रपति चुनावों में यशवंत सिन्हा विपक्षी दलों का पूरा वोट पाने में सफल हो जाते तो इससे ममता बनर्जी का भी कद बढ़ जाता। कहा तो यहाँ तक जा रहा है कि आगामी लोकसभा चुनावों में विपक्षी दलों का नेतृत्व ममता के हाथों में आ जाता।

केजरीवाल सरकार की एक्साइज पॉलिसी की होगी CBI जाँच, दिल्ली के LG का आदेश: शराब माफिया पर मेहरबानी के आरोप

दिल्ली (Delhi) के उप राज्यपाल वी के सक्सेना (VK Saxena) ने एक्साइज ड्यूटी-2021-22 के नियमों का उल्लंघन करने के मामले में दिल्ली की केजरीवाल सरकार पर शिकंजा कसते हुए सीबीआई जाँच की सिफारिश कर दी है। आरोप है कि अरविंद केजरीवाल सरकार (Arvind Kejriwal Government) ने एक्साइज ड्यूटी के नियमों का उल्लंघन करते हुए शराब लाइसेंसधारियों को गलत तरीके से लाभ पहुँचाया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस महीने की शुरुआत में दिल्ली के मुख्य सचिव ने अपनी रिपोर्ट जारी की थी, जिसमें दावा किया गया था कि की GNCTD अधिनियम 1991, व्यापार नियमों के लेनदेन (TOBR)-1993, दिल्ली उत्पाद शुल्क अधिनियम-2009 और दिल्ली उत्पाद शुल्क नियम-2010 का प्रथम दृष्टया उल्लंघन किया गया है। इसके अलावा एक्साइज पॉलिसी में नियमों को ताक पर रखकर शराब बेचने वालों को टेंडर बाँटे गए। शुक्रवार (22 जुलाई 2022) को अधिकारियों ने कहा कि इसी रिपोर्ट के आधार पर एलजी ने सीबीआई जाँच की सिफारिश कर दी है।

गौरतलब है कि नई आबकारी नीति 2021-22 को पिछले साल 17 नवंबर से लागू किया गया था, जिसके तहत दिल्ली को 32 जोन में बाँटा गया था। इसके तहत शहर भर में 849 दुकानों के लिए निजी बोलीदाताओं को खुदरा लाइसेंस दिए गए थे। शहर के गैर-पुष्टि क्षेत्रों में स्थित होने के कारण कई शराब की दुकानें नहीं खुल सकीं। उन्होंने बताया कि नगर निगमों ने ऐसे कई ठेकों को सील कर दिया है।

मुश्किल में पड़ सकते हैं मनीष सिसोदिया

दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को आबकारी विभाग की भी जिम्मेदारी दी गई है। मुख्य सचिव की रिपोर्ट में उनकी भूमिका पर भी सवाल खड़े किए गए हैं। इसमें इस बात का खुलासा किया गया है कि नई आबकारी नीति के जरिए कोरोना का बहाना बनाकर लाइसेंसिंग फीस को माफ कर दिया गया था। आरोप है कि दिल्ली सरकार ने शराब कारोबारियों को टेंडर प्रक्रिया के जरिए 144.36 करोड़ रुपए का लाभ पहुँचाया है।

बौखलाई AAP

CBI जाँच की सिफारिश होते ही दिल्ली में आम आदमी पार्टी तिलमिला गई है। आप नेता सौरभ भारद्वाज ने केंद्र सरकार पर राजनीतिक कार्रवाई करने का आरोप लगाया। भारद्वाज ने कहा, “सीएम केजरीवाल की देश भर में बढ़ती प्रतिष्ठा पंचायत चुनाव में भी केंद्र के लिए खतरा बन गई है। हम कह रहे हैं कि पंजाब की जीत के बाद बीजेपी की केंद्र सरकार हमसे डरी हुई है। आने वाले दिनों में पूछताछ शुरू की जाएँगी।”

AAP नेता ने आरोप लगाया, “अब 2016 की स्थिति आने वाली है। हमें रोकने के लिए सीबीआई, आयकर, ईडी द्वारा पूछताछ शुरू की जाएगी। हमारे काम में बाधा डालने के लिए हर संभव कोशिश की जा रही है। स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन के बाद अब उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को टार्गेट किया जा रहा है।”

श्रीलंका के PM बने दिनेश गुणवर्धने, माता-पिता भारत की स्वतंत्रता के लिए लड़े थे: प्रदर्शनकारियों के कैंप पर सैन्य कार्रवाई

श्रीलंका के वरिष्ठ नेता दिनेश गुणवर्धने को देश का नया प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया है। उन्हें नवनिर्वाचित राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने शुक्रवार (22 जुलाई 2022) को पद व गोपनीयता की शपथ दिलाई। इससे पहले छह बार प्रधानमंत्री रह चुके रानिल विक्रमसिंघे ने गुरुवार (21 जुलाई 2022) को श्रीलंका के आठवें राष्ट्रपति के तौर पर शपथ ली थी। उनके राष्ट्रपति बनने के बाद पीएम का पद खाली हो गया था। अब गुणवर्धने ने नए प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ ली है।

गुणवर्धने को अप्रैल में, पूर्व राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे के कार्यकाल के दौरान गृह मंत्री बनाया गया था। वह विदेश मंत्री और शिक्षा मंत्री के तौर पर भी अपनी सेवाएँ दे चुके हैं।  उनके परिवार का भारत से गहरा नाता रहा है। गुणवर्धने के पिता फिलिप गुणवर्धने ने भारत की स्वतंत्रता के लिए लड़ाई लड़ी थी। संयुक्त राज्य अमेरिका और नीदरलैंड में पढ़े दिनेश गुणवर्धने एक ट्रेड यूनियन नेता और अपने पिता फिलिप गुणवर्धने की तरह एक सेनानी रह चुके हैं।

फिलिप गुणवर्धने को श्रीलंका में समाजवाद के जनक के रूप में जाना जाता है। फिलिप गुणवर्धने का भारत के प्रति प्रेम और साम्राज्यवादी कब्जे के खिलाफ स्वतंत्रता की दिशा में प्रयास 1920 के दशक की शुरुआत में संयुक्त राज्य अमेरिका से शुरू हुआ था। इस काम में उनकी पत्नी मे भी बखूबी साथ दिया।

फिलिप गुणवर्धने विस्कॉन्सिन विश्वविद्यालय में जयप्रकाश नारायण और वीके कृष्ण मेनन के सहपाठी रह चुके थे। उन्होंने अमेरिकी राजनीतिक हलकों में साम्राज्यवाद से स्वतंत्रता की वकालत की। बाद में लंदन में भारत की साम्राज्यवाद विरोधी लीग का नेतृत्व भी किया। बहुत कम लोग जानते हैं कि उनके परिवार का भारत से घनिष्ठ संबंध रहा है। पूरे गुणवर्धने परिवार का भारत की तरफ झुकाव है।

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान श्रीलंका से भागने के बाद प्रधानमंत्री के पिता फिलिप और माँ कुसुमा ने भारत में शरण ली थी। वे उन अंडरग्राउंड वर्करों में शामिल हो गए थे, जो आजादी के लिए लड़ रहे थे और कुछ समय के लिए गिरफ्तारी से बच गए थे। 1943 में उन दोनों को ब्रिटिश खुफिया विभाग ने पकड़ लिया था। कुछ समय के लिए उन्हें बॉम्बे की आर्थर रोड जेल में रखा था। एक साल बाद फिलिप और उनकी पत्नी को श्रीलंका डिपोर्ट कर दिया गया और आजादी के बाद रिहा किया गया।

यह उनके लिए बहुत गर्व की बात है कि फिलिप, रॉबर्ट और कुसुमा सभी ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया और बॉम्बे में जेल गए। भारत के साथ उनका जुड़ाव लगभग सौ साल पहले दक्षिण एशिया को ब्रिटिश राज से मुक्त करने के लिए शुरू हुआ था।

भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में फिलिप गुणवर्धने के बलिदान की तारीफ की थी। नेहरू तब कोलंबो दौरे के समय फिलिप के घर भी पहुँचे थे। आजादी के आंदोलन में उनके योगदान के लिए व्यक्तिगत रूप से परिवार को धन्यवाद भी दिया था। 1948 में श्रीलंका को यूनाइटेड किंगडम से स्वतंत्रता मिलने के बाद फिलिप और कुसुमा दोनों संसद के सदस्य बने। फिलिप 1956 में पीपुल्स रिवोल्यूशन सरकार के संस्थापक नेता और कैबिनेट मंत्री थे। उनके सभी चार बच्चों ने कोलंबो के मेयर, कैबिनेट मंत्रियों, सांसदों आदि सहित उच्च राजनीतिक पदों पर भी काम किया है।

अपने माता-पिता की तरह साफ-सुथरी छवि रखने वाले दिनेश गुणवर्धने से भारत के साथ बेहतर संबंधों के पैरोकार हैं। वह 22 वर्षों से अधिक समय तक एक शक्तिशाली कैबिनेट मंत्री रहे हैं। दिनेश गुणावर्धने का जन्म 2 मार्च 1949 को हुआ था। उन्होंने संसद सदस्य, कैबिनेट मंत्री के रूप में काम किया है। वर्तमान में वह वामपंथी महाजन एकथ पेरामुना पार्टी के नेता हैं।

इधर श्रीलंकाई सेना ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ एक्शन शुरू कर दिया है। प्रदर्शनकारियों के कब्जे से राष्ट्रपति सचिवालय को खाली करवाया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों ने पिछले कुछ दिनों से राष्ट्रपति सचिवालय पर कब्जा किया हुआ था। सचिवालय को खाली कराने के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच झड़प भी हुई है। प्रदर्शनकारियों को सचिवालय से खदेड़ा जा रहा है। 

पुलिस ने कहा कि आर्मी और पुलिस ने सचिवालय को खाली कराने के लिए आपरेशन शुरू कर दिया है। पुलिस अधिकारी ने कहा कि सचिवालय पर कब्जे का किसी को अधिकार नहीं है। झड़प में 50 प्रदर्शनकारी घायल हुए हैं। इसके अलावा 9 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया है। ये प्रदर्शनकारी पूर्व राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे के देश से भागने के बाद लोग सड़कों पर उतर गए थे। प्रदर्शनकारी रानिल विक्रमसिंघे को राष्ट्रपति चुने जाने के भी खिलाफ हैं। 

उल्लेखनीय है स्वतंत्रता प्राप्त करने के बाद से श्रीलंका अपने सबसे खराब आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। देश में संकट की शुरुआत विदेशी कर्ज के बोझ के कारण हुई। कर्ज की किस्तें चुकाते-चुकाते श्रीलंका का विदेशी मुद्रा भंडार समाप्त होने की कगार पर पहुँच गया है। हालात ऐसे हो गए कि श्रीलंका में डीजल-पेट्रोल और खाने-पीने की चीजों की कमी हो गई। जरूरी दवाएँ खत्म हो गईं। सरकार को पेट्रोल पंप पर सेना तैनात करने की जरूरत पड़ गई। 

जुम्मा दे रहा था ऑर्डर, कटने वाला था पुजारी का गला… ‘सिख’ होने की बात पता चली तो केश काट बख्श दी जान: राजस्थान के अलवर की घटना

राजस्थान के अलवर में गुरुवार (21 जुलाई 2022) की रात एक व्यक्ति को कुछ लोगों ने घेर लिया। इरादा हत्या करने की थी। लेकिन जब हमलावरों को पता चला कि उन्होंने जिसे घेरा है वह ‘सिख’ है तो जान बख्श दी। फरार होने से पहले हमलावरों ने पीड़ित सिख के केश काट दिए और आँखों में मिर्ची डाल दी।

पीड़ित सिख की पहचान गुरुबख्श सिंह के तौर पर हुई है। वे एक गुरुद्वारे में ग्रंथी हैं। कहा जा रहा है कि उन्हें पुजारी समझकर घेरा गया था। कथित तौर पर हमलावरों को फोन पर कोई जुम्मा ऑर्डर दे रहा था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना अलवर के रामगढ़ इलाके की है। मिलकपुर गाँव के ग्रंथी गुरुबख्श सिंह दवा लेने बाइक से बाजार जा रहे थे। रास्ते में कुछ अज्ञात लोगों ने उन्हें रोक लिया। बाइक रोकते ही हमलारों ने गुरबख्श को एक तरफ खींच लिया और उन्हें पीटने लगे। आँखों में मिर्ची झोंक हमलावर उनकी गर्दन काटने की बात करने लगे।

गुरबख्श सिंह ने दैनिक भास्कर को बताया, “वे लोग मेरी गर्दन काटने की बात कर रहे थे। मैंने घबराकर कहा कि मुझे क्यों मार रहे हो? मैं तो गुरुद्वारे का पुजारी हूँ। तब उन्होंने किसी जुम्मा नाम के व्यक्ति को फोन किया। उसे बताया कि ये तो गुरुद्वारा का पुजारी है।” सिंह के अनुसार जुम्मा से बात होने के बाद हमलावरों ने आपस में बात करते हुए कहा कि गुरुद्वारे का आदमी है तो इसके केश ही काट दो। वही बहुत है। इसके बाद हमलावर उन्हें धमकाते हुए फरार हो गए। पीड़ित के मुताबिक हमलावरों की संख्या 5 थी।

इस घटना की जानकारी होने के बाद सिख समाज के लोग आक्रोशित हो गए। उन्होंने रात में ही थाने पर पहुँच कर कार्रवाई की माँग की। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अलवर के DM और SP रात में ही थाने पहुँच गए। उन्होंने नाराज लोगों को समझाया और हमलावरों की जल्द गिरफ्तारी कर कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिलाया। गौरतलब है कि 28 जून 2022 को राजस्थान के ही उदयपुर में मोहम्मद रियाज और गौस मोहम्मद ने कन्हैया लाल का गला काट डाला था।

‘समलैंगिक विवाह, आदिवासी राष्ट्रपति, सफाईकर्मी’: इंडिया टुडे के GM ने द्रौपदी मुर्मू का किया अपमान, अकाउंट डिएक्टिवेट- कंपनी से बर्खास्त

इंडिया टुडे मीडिया ग्रुप के महाप्रबंधक ने निर्वाचित राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (Draupadi Murmu) के बारे में फेसबुक पर आपत्तिजनक पोस्ट की है। यह विवादित पोस्ट इंद्रनील चटर्जी ने की है, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है। इंद्रनील चटर्जी के लिंक्डइन प्रोफाइल में लिखा गया है कि वह इंडिया टुडे ग्रुप में उप महाप्रबंधक (Deputy General Manager) हैं। बता दें कि आज इंडिया टुडे ग्रुप ने इंद्रनील की टिप्पणियों पपर खेद जताते हुए उन्हें बर्खास्त कर दिया।

पोस्ट में इंद्रनील ने लिखा, “जिस तरह मैं समलैंगिक विवाह का समर्थन नहीं करता, उसी तरह मैं एक आदिवासी राष्ट्रपति का समर्थन नहीं करता।” उन्होंने निर्वाचित राष्ट्रपति का अपमान करते हुए लिखा, “कुछ कुर्सियाँ सभी के लिए नहीं होती हैं। इससे एक सम्मान जुड़ा होता है। क्या हम एक सफाईकर्मी को दुर्गा पूजा करने की अनुमति देते हैं? क्या मदरसे में कोई हिंदू पढ़ा सकता है? यह कुछ और नहीं बल्कि रबड़ स्टाम्प संवैधानिक प्रमुख बनाने का सत्ताधारी दल का बेहद घटिया सामाजिक-राजनीतिक हथकंडा है, ताकि विपक्षी दलों को ठेंगा दिखाकर कानून आसानी से पारित किया जा सके।”

द्रनील चटर्जी का फेसबुक पोस्ट।

भारत के राष्ट्रपति पद का जिक्र करते हुए इंद्रनील ने आगे लिखा, “आज हमने रायसीना हिल्स की उस कुर्सी को ही नहीं बल्कि एपीजे अब्दुल कलाम, प्रणब मुखर्जी, एस राधाकृष्णन, जाकिर हुसैन, डॉ. शंकर दयाल शर्मा और राजेंद्र प्रसाद जैसे लोगों को भी अपमानित किया है।” सोशल मीडिया पर पोस्ट वायरल होने के बाद इंद्रनील ने अपना फेसबुक अकाउंट डीएक्टिवेट कर दिया है। इंद्रनील चटर्जी के लिंक्डइन प्रोफाइल के अनुसार, वह इंडिया टुडे ग्रुप में डिप्टी जनरल मैनेजर और ईस्ट के रीजनल हेड हैं।

वहीं इंडिया टुडे ग्रुप ने शुक्रवार (22 जुलाई, 2022) को कोलकाता स्थित अपने उप महाप्रबंधक इंद्रनील चटर्जी को निर्वाचित राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के खिलाफ अपमानजनक और अपमानजनक पोस्ट करने पर बर्खास्त कर दिया है।

इंडिया टुडे ग्रुप ने अपने एक सेल्स स्टाफ द्वारा किए गए अपमानजनक पोस्ट के लिए खेद व्यक्त किया है। इंडिया टुडे के ग्रुप चीफ एक्जीक्यूटिव ऑफिसर दिनेश भाटिया ने एक बयान जारी कर इंद्रनील चटर्जी के पोस्ट को आहत करने वाला और मानवीय शालीनता के बुनियादी सिद्धांतों के खिलाफ बताया।

बता दें कि द्रौपदी मुर्मू (Droupadi Murmu) देश की 15वीं राष्ट्रपति चुन ली गई हैं। वह देश की पहली आदिवासी और दूसरी महिला राष्ट्रपति होंगी। कुल 10,86,431 मतों में से राजग उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू के पास 6.67 लाख से अधिक वोट होने का अनुमान लगाया गया है। जबकि, विपक्ष के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा को 3,80,177 वोट ही मिले हैं। उन्हें (द्रौपदी मुर्मू) सत्ताधारी गठबंधन के अलावा बीजद, वाईएसआर कॉन्ग्रेस, अकाली दल ही नहीं विपक्षी खेमे के कई दलों जैसे जेडीएस, झामुमो, शिवसेना और तेदेपा का समर्थन भी मिला है।

NSUI नेता रहा है भीलवाड़ा का लव जिहादी, कॉलेज में चुनाव भी जीता: हिंदू नाम रख लड़कियों का करता है शिकार, कई शहरों में नाम बदलकर रहा

राजस्थान के भीलवाड़ा में हिंदू लड़की को ब्लैकमेल करने के आरोप में पकड़ा गया शाहिद खान गोरी कॉन्ग्रेस की छात्र शाखा NSUI का सदस्य रहा है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक कॉलेज में उसने चुनाव भी जीत था। अंदेशा जताया जा रहा है कि उसने पहचान छिपाकर कई अन्य लड़कियों को भी शिकार बनाया है। शाहिद को 18 जुलाई 2022 को गिरफ्तार किया गया था।

दैनिक भास्कर के मुताबिक आरोपित शाहिद के कमरे की तलाशी में पुलिस ने फर्जी कागज और आधार कार्ड बरामद किया है। शाहिद पाली जिले के बादशाह झंडा का रहने वाला है। भीलवाड़ा के पंचवटी इलाके में उसने अपना नाम मनीष सेन बता किराए पर कमरा लिया था। पहचान छिपाने के लिए खुद ही आधार कार्ड भी एडिट कर लिया था।

वह भीलवाड़ा की एक मोबाइल कंपनी में काम कर रहा था। माना जा रहा है कि बीते 10 साल से वह पाली और भीलवाड़ा में अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग नामा से रहा है। साल 2014-15 में वह बांगड़ कॉलेज में हुए छात्रसंघ चुनाव में संयुक्त महासचिव के पद पर जीता था। वह पाली में NSUI का सक्रिय कार्यकर्ता था।

पुलिस को शाहिद गोरी के मोबाईल की जाँच में पीड़िता के कई फोटो मिले हैं। पुलिस यह जानने का भी प्रयास कर रही है कि कहीं उसने सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से कुछ और लड़कियों को भी तो शिकार नहीं बनाया है।

क्या है मामला

भीलवाड़ा जिले के कोतवाली थाना क्षेत्र में एक कॉलेज छात्रा ने मनीष सेन बने शाहिद के खिलाफ ब्लैकमेल करने की शिकायत दर्ज करवाई थी। पीड़िता का कहना था कि शाहिद के पास उसकी कुछ आपत्तिजनक तस्वीरें हैं। उसी के बलबूते वह उसे धमका कर कमरे में ले गया था। इस दौरान रेप का प्रयास किया। लेकिन लड़की के शोर मचाने पर वह सफल नहीं हो पाया। बाद में पीड़िता ने अपने परिजनों को सारी जानकारी दी। पुलिस के आगे शाहिद ने मनीष सेन के नाम से सोशल मीडिया पर फर्जी आईडी बनाने की बात कबूली थी।