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‘देश से वफादार न रहने वालों की छीनी जा सकती है नागरिकता’: इजरायली सुप्रीम कोर्ट के फैसले से मचा हड़कंप, भड़के मुस्लिम संगठन

इजरायल का जन्म फिलिस्तीन से हुआ है। दोनों देशों की सीमाएँ लगती हैं। इजरायल और फिलिस्तीन के बीच सीमा विवाद नया नहीं है। आए दिन युद्ध की स्थितियाँ बनी रहती हैं। इस बीच इजरायल के सुप्रीम कोर्ट ने देश की सुरक्षा के मद्देनजर 21 जुलाई 2022 को एक फैसला सुनाया कि देश के प्रति वफादार नहीं रहने वाले फिलिस्तीनी नागरिकों की नागरिकता को छीन लिया जाएगा। इसमें ऐसे लोग शामिल हैं, जो कि इजरायल के खिलाफ जासूसी और आतंक जैसी घटनाओं को अंजाम देते हैं।

इजरायल के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार, देश में आतंकवाद, जासूसी या राजद्रोह सहित देश के प्रति ‘वफादारी का उल्लंघन’ करने वाले व्यक्तियों की नागरिकता को रद्द कर सकता है। हालाँकि, मानवाधिकार संगठनों को इस बात की आशंका सता रही है कि कोर्ट के इस फैसले को केवल गैर यहूदी नागरिकों पर थोपा जाएगा।

ये फैसला इजरायल में 2008 के नागरिकता कानून को संबोधित करते हुए दिया गया है। इसमें राज्य को ‘वफादारी का उल्लंघन’ करने वाले कार्यों के आधार पर नागरिकता रद्द करने का अधिकार दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट का ये फैसला इजरायल के दो फिलिस्तीनी नागरिकों के मामलों में अलग-अलग अपीलों के बाद आया था, जिन्हें इजरायली नागरिकों पर हमलों को अंजाम देने का दोषी ठहराया गया था। दोनों को लंबी सजा सुनाई गई, लेकिन राज्य ने उनकी नागरिकता छीनने की कोशिश की।

मुस्लिमों को सताया डर

इजरायल के सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से मुस्लिमों के लिए काम करने वाले संगठनों में नाराजगी है। इसी क्रम में इजरायल में नागरिक अधिकारों के लिए एसोसिएशन और एक अरब अधिकार समूह अदलाह ने इसकी आलोचना की। संगठन ने कोर्ट के फैसले को भेदभावपूर्ण करार देते हुए आशंका व्यक्ति की कि इसका इस्तेमाल इजरायल के फिलिस्तीनी नागरिकों खिलाफ विशेष रूप से इस्तेमाल किया जाएगा। रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल के लगभग 20% नागरिक फिलिस्तीनी हैं।

दुनिया के कई देशों में ऐसे कानून हैं, जिनके जरिए किसी विशेष मामले में दोषी पाए जाने पर व्यक्ति की नागरिकता को खत्म करने की इजाजत है। बीते दो दशक से आतंकवाद के खिलाफ युद्ध के तौर पर इसका इस्तेमाल किया जाता रहा है। हालाँकि, सरकारों की इस नीति को काफी विवादित माना जाता है। अंतरराष्ट्रीय कानून किसी देश की सरकार को उसके नागरिकों की नागरिकता की स्थिति को रद्द करने से रोकता है।

‘फिल्म देखे बिना फैलाई गई नफरत, लोगों ने मेहनत का सम्मान नहीं किया’: ‘शमशेरा’ के फ्लॉप होने से भड़के संजय दत्त, दर्शकों पर ही फोड़ा ठीकरा

यशराज फिल्म्स के बैनर तले बनी शमशेरा फिल्म फ्लॉप हो गई है। रणबीर कपूर (Ranbir Kapoor) और वाणी कपूर स्टारर फिल्म शमशेरा (Shamshera)’ के बुरी तरह से पिट जाने पर मेकर्स के साथ-साथ फिल्म के एक्टर्स के लिए भी सोचने वाली बात है। फिल्म रिलीज होने के बाद से रणबीर कपूर दर्शकों के निशाने पर आ गए हैं, जिसके बाद डायरेक्टर करण मल्होत्रा ने रणबीर का बचाव करते हुए, ट्विटर पर एक नोट लिखा और शमशेरा मेरी है का हैशटैग भी दिया। अब फिल्म के विलेन शुद्ध सिंह यानी संजय दत्त (Sanjay Dutt) भी शमशेरा के सपोर्ट में आ गए हैं। साथ ही उन्होंने फिल्म के फ्लॉप होने पर अपनी भड़ास निकाली है।

संजय दत्त ने इंस्टाग्राम पर लिखा, “फिल्में बनाना जुनून का काम हैं। एक कहानी कहने का जुनून, उन किरदारों को जीवन में लाने का जुनून, जिनसे आप पहले कभी नहीं मिले हैं। शमशेरा प्यार का एक ऐसा श्रम है, जिसे हमने अपना सब कुछ दे दिया। यह खून, पसीने और आँसूओं से बनी फिल्म है। यह एक सपना है जिसे हम पर्दे पर लेकर आए हैं। दर्शकों के मनोरंजन के लिए फिल्में बनाई जाती हैं और हर फिल्म को अपने दर्शक मिल जाते हैं, भले ही देर से मिलें। शमशेरा से बहुत से लोग नफरत करते हैं। कुछ लोग तो फिल्म से इस हद तक नफरत कर रहे हैं कि उन्होंने बिना देखे ही इसे बुरी फिल्म बता दिया है। मुझे यह बहुत अजीब लगता है कि लोग आपकी मेहनत की इज्जत नहीं करते। ये ठीक नहीं है। करण मल्होत्रा उन निर्देशकों में से एक हैं, जिन्होंने मुझे अग्निपथ फिल्म में कांचा चीना जैसा किरदार दिया। मैं उनका साथ हमेशा दूँगा।”

संजय दत्त ने फिल्ममेकर करण मल्होत्रा (Karan Malhotra) को लेकर अपने पोस्ट में आगे कहा कि वह मेरे परिवार की तरह हैं। एक्टर ने कहा, “मैं करण को फिल्ममेकर के तौर पर काफी एडमायर करता हूँ। अपने 4 दशक के करियर में मैंने जितने भी डायरेक्टर्स के साथ काम किया है, वह उन सब में से बेस्ट हैं। करण मेरे लिए परिवार की तरह है। कामयाबी और असफलता को एक तरफ रख दें तो हमेशा करण के साथ काम करना मेरे लिए काफी गर्व की बात होती है। उन्होंने मुझ पर फिर से विश्वास जताया और शमशेरा में शुद्ध सिंह का किरदार दिया। मैं हमेशा उनके साथ खड़ा रहूँगा।”

रणबीर कपूर को लेकर संजय ने लिखा, “मुझे यह देखकर बहुत दुख होता है कि कैसे लोग हमारे समय के सबसे हार्ड वर्किंग और टैलेंटेड एक्टर्स में से एक के काम के बारे में नफरत फैलाने के लिए उत्सुक हैं। हमारे लिए नफरत से ज्यादा आर्ट और कमिटमेंट्स मायने रखते हैं। जो प्यार हम फिल्म और उससे जुड़े लोगों के लिए फील करते हैं वो इन सारी चीजों से परे है।” ‘शमशेरा (Shamshera)’ की कास्ट और क्रू को धन्यवाद देते हुए संजय दत्त ने पोस्ट के आखिर में लिखा, “कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना।”

बता दें कि इससे पहले करण मल्होत्रा ने चुप्पी तोड़ते हुए ट्विटर पर लिखा, “मेरे प्यारे शमशेरा, आप जैसे हैं वैसे ही प्रभावशाली हैं। मेरे लिए इस मंच पर खुद को व्यक्त करना बेहद जरूरी है, क्योंकि यह वो जगह है जहाँ आपके लिए प्यार, नफरत, खुशी और अपमान मौजूद है।” करण ने आगे लिखा, “मैं आपसे माफी माँगना चाहता हूँ। पिछले कुछ दिनों से मैं कुछ कह नहीं पा रहा था, क्योंकि मैं नफरत और गुस्सा सहन नहीं कर सकता था। मेरा तुम्हारा साथ न दे पाना मेरी कमजोरी थी और इसके लिए कोई बहाना नहीं है, लेकिन अब मैं आपके साथ खड़े होकर गर्व और सम्मानित महसूस कर रहा हूँ कि आप मेरे हैं।

शमशेरा के निर्देशक ने यह भी कहा, “हर चीज का एक साथ सामना करेंगे, अच्छा बुरा और बदसूरत। शमशेरा परिवार, शमशेरा के कलाकारों और क्रू मेंबर्स के लिए बहुत सम्मान है। जिन्होंने हमें इतना प्यार, आशीर्वाद दिया और हमारे बारे में सोचा। वह सबसे कीमती है और कोई भी इसे हमसे दूर नहीं कर सकता है।”

‘जजों को निशाना बनाने की भी हद होती है, हमें भी थोड़ा ब्रेक दीजिए’: मीडिया से खफा हुए जस्टिस चंद्रचूड़, केस में देरी को लेकर छपी थी खबर

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़ ने जजों को मीडिया में निशाना बनाए जाने पर अपना गुस्सा जाहिर किया है। जस्टिस चंद्रचूड ने उस मीडिया आउट्लेट का उल्लेख किया था कि जिसमें ये लिखा गया था कि एंटी क्रिश्चियन वायलेंस से जुड़ी याचिका पर सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट देरी कर रहा है। दरअसल, गुरुवार (28 जुलाई, 2022) को जस्टिस चंद्रचूड़ की बेंच के सामने एक वकील ने ईसाई समुदाय के खिलाफ हिंसा के संबंध में एक मामले का उल्लेख किया। उसी दौरान जस्टिस चंद्रचूड ने यह टिप्पणी की।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, जजों को निशाना बनाते हुए लिखे गए इस आर्टिकल से जस्टिस चंद्रचूड भड़क गए और कहा, “जजों को भी ब्रेक दें और उन्हें निशाना बनाने की भी एक हद होती है।” न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड और न्यायमूर्ति सूर्यकांत की पीठ ने कहा कि हम पर दबाव बनाना बंद करें।

जस्टिस चंद्रचूड ने इस मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा, “मैं कोविड से संक्रमित था, इसलिए इस मामले को नहीं उठाया जा सका। लेकिन मैंने हाल ही में एक न्यूज आर्टिकल पढ़ा जिसमें कहा गया था कि सुप्रीम कोर्ट मामले की सुनवाई में देरी कर रहा है। हमें भी ब्रेक दो। जजों में से एक कोविड से पीड़ित था, इसलिए सुनवाई नहीं हो पाई। आप जजों को कितना टारगेट करेंगे, इसकी भी एक लिमिट होती है।”

जस्टिस चंद्रचूड़ ने ये भी पूछा कि इस तरह की खबरें पब्लिश पब्लिश करने वाले हैं कौन? फिर उन्होंने आगे कहा कि हम इसे सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करेंगे, नहीं तो फिर कोई और खबर आएगी।

ANI की रिपोर्ट के अनुसार, पीठ ने याचिकाकर्ता के वकील द्वारा मामले पर सुनवाई किए जाने के अनुरोध पर ये टिप्पणियाँ की। बता दें कि वरिष्ठ अधिवक्ता कोलिन गोन्साल्वेज ने जून, 2022 में अवकाशकालीन पीठ के समक्ष एक मामले का उल्लेख किया था जिसमें कहा गया था कि देशभर में ईसाई संस्थानों और पादरियों के खिलाफ हर महीने औसतन 45 से 50 हिंसक हमले होते हैं।

गौरतलब है कि बेंगलोर डीओसिस के आर्क बिशप पीटर मचाडो (Peter Machado) और नेशनल सॉलिडेरिटी फोरम द्वारा अप्रैल, 2022 में एक याचिका दायर की गई थी। जिसमें दावा किया गया था कि ईसाइयों के खिलाफ टारगेट के तहत वॉयलेंस किया जा रहा है। दरअसल, इस याचिका में FIR दर्ज करने और स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम से जाँच कराने की माँग की गई है।

बता दें कि इस याचिका पर सुनवाई चल रही थी लेकिन एक जज के कोरोना से संक्रमित हो जाने के कारण सुनवाई में थोड़ी देरी हुई। वहीं खबर ये भी है कि जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ इस साल नवंबर से सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस का पद सँभालने वाले हैं।

‘You Don’t Talk To Me’: अचानक अध्यक्ष की तरफ बढ़ने लगीं सोनिया गाँधी, स्मृति ईरानी से भी बहस – जानें संसद में ऑफ कैमरा क्या हुआ

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को कॉन्ग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी द्वारा ‘राष्ट्रपत्नी’ कहने के मामले में सियासत गरमा गई। इसका नजारा संसद भवन और उसके बाहर हर जगह देखने को मिला। इस मामले में सदन के अंदर जब केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी से माफी माँगने की माँग की तो दोनों नेताओं में जमकर तकरार हुई। अपने अहंकार को दिखाते हुए सोनिया गाँधी ने स्मृति ईरानी से इंग्लिश में कहा ‘You don’t talk to me’ यानि कि आप मुझसे बात मत कीजिए। सोनिया गाँधी का यह अहंकार भरा लहजा अब वायरल हो रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, संसद में अधीर रंजन चौधरी के बयान के बाद स्मृति ईरानी ने उन पर और सोनिया गाँधी पर निशाना साधते हुए कॉन्ग्रेस पर भारत की पहली जनजातीय महिला राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का अपमान करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जब से राष्ट्रपति के उम्मीदवार के तौर पर द्रौपदी मुर्मू के नाम का ऐलान किया गया है, तभी विपक्ष लगातार उनका अपमान कर रहा है। केंद्रीय मंत्री ने कहा, “कॉन्ग्रेस एक जनजातीय समाज की महिला के सम्मान को पचा नहीं सकती। पार्टी इस बात को पचा नहीं पा रही है कि गरीब परिवार से आने वाली महिला देश की राष्ट्रपति बन सकती है।”

यहीं नहीं ईरानी ने संसद में इस मुद्दे को उठाते हुए कॉन्ग्रेस अध्यक्ष से माफी माँगने को कहा। उन्होंने कहा, “सोनिया गाँधी आपने द्रौपदी मुर्मू के अपमान को सहमति दी है। सोनिया जी ने सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन महिला के अपमान के लिए देश से माफी माँगें।”

सोनिया गाँधी के विरोध में बीजेपी सांसदों के हंगामे के बीच सदन को स्थगित कर दिया। सदन स्थगित होने के बाद वो संसद सत्र को चेयर कर रहीं रमा देवी के पास गईं और उनसे कहा, “अधीर रंजन चौधरी पहले ही माफी माँग चुके हैं। मुझे इसमें क्यों घसीटा जा रहा है?” इस पर बीच में आते स्मृति ईरानी ने कहा, ‘Madam, may I help you’ (क्या मैं आपकी मदद कर सकती हूँ?) मैंने आपका नाम लिया।” (ये शब्द उन्होंने अंग्रेजी में कहे)। इस पर फटाक से सोनिया गाँधी ने केंद्रीय मंत्री से दो टूक कहा, “मुझसे बात मत करो।”

पड़ोसियों ने हिन्दू युवती को पीटा, सिर-पेट-छाती सब पर किए वार, जूते-चप्पल से भी मारा: रशीद, शहनाज और सरफराज समेत 5 पर FIR

हरियाणा के फरीदाबाद में रशीद, कपील अहमद, शहनाज़, सरफ़राज़ और तबस्सुम पर रेखा नाम की एक लड़की की पिटाई का आरोप लगा है। 24 वर्षीया पीड़िता ने पुलिस को दिए गए प्रार्थना पत्र में अपनी छाती पर भी वार का जिक्र किया है। पुलिस ने FIR दर्ज कर के सभी आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। घटना 26 जुलाई, 2022 (मंगलवार) की है।

पीड़िता द्वारा पुलिस में दी गई शिकायत के मुताबिक, “मैं गाँव बडखल में रहती हूँ। घटना के दिन मैं गाडी से अपने घर आई थी। थोड़ी देर बाद पड़ोस में रहने वाला रशीद अपनी बाइक ले कर उधर से गुजरा। उसने मुझ से पूछा कि गाड़ी क्यों खड़ी की है? इसी बात पर हमारी बहस हो गई। बहस के दौरान ही रशीद की तरफ से कपील अहमद, शहनाज, सरफराज और तबस्सुम में मुझ पर हमला कर दिया। इन सभी ने मुझे लात-घूँसों के साथ चप्पलों से मारा। हमले में मेरे सिर, पेट और छाती को निशाना बनाया गया। मेरे पूरे शरीर में दर्ज हो रहा है।”

शिकायत कॉपी

पीड़िता ने अपनी शिकायत में पुलिस ने केस दर्ज कर के आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की थी। पीड़िता की इस शिकायत पर पुलिस ने लिखा, “घटना के दिन हमें रेखा नाम की लड़की के साथ पड़ोसियों द्वारा मारपीट की सूचना मिली। पुलिस ने मौके पर पहुँच कर पीड़िता का मेडिकल परीक्षण करवाया। मेडिकल में रेखा को कुल 4 चोटें आना पाया गया। घटना की FIR दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी गई है।

FIR कॉपी और आरोपित

पुलिस ने पाँचों आरोपितों पर IPC की धारा 147, 149, 323, 506 के तहत कार्रवाई की है। जब इस मामले की सूचना हिन्दू संगठनों को मिली तब वो अनखीर चौकी पर पहुँच कर हंगामा करने लगे। हिन्दू संगठन का नेतृत्व कर रहे बिट्टू बजरंगी ने ऑपइंडिया से कहा, “कुछ दिन पहले इसी फरीदाबाद में देवेंद्र नाम के व्यक्ति का कत्ल करने वाला भी पड़ोसी था और अब रेखा नाम की लड़की को पीटने वाला भी पड़ोसी ही है। ऐसी घटनाएँ सहन नहीं की जाएँगी।”

पीड़िता के ममेरे भाई ने ऑपइंडिया से बात करते हुए बताया, “हिन्दू संगठनों ने हमारी काफी मदद की है। हमारी बहन अपनी गाड़ी से पानी की बोतल निकाल कर घर में रख रही थी। तभी रशीद आ कर उस से लड़ने लगा था।”

‘अधीर रंजन चौधरी पेश हों’: महिला आयोग ने कॉन्ग्रेस नेता को भेजा नोटिस, ‘राष्ट्रपत्नी’ कह कर द्रौपदी मुर्मू का किया था अपमान

कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी (Adhir Ranjan Chowdhury) द्वारा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के लिए ‘राष्ट्रपत्नी’ (Rashtrapatni comment)) शब्द का इस्तेमाल किए जाने पर राष्ट्रीय महिला आयोग ने उन्हें नोटिस भेजा है। ‘राष्ट्रपत्नी’ वाले विवाद पर राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने कॉन्ग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी को व्यक्तिगत रूप से पेश होने और अपनी टिप्पणी के लिए लिखित स्पष्टीकरण देने के लिए एक नोटिस भेजा है। इस मामले में 3 अगस्त को सुबह 11:30 बजे सुनवाई की जाएगी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, राष्ट्रीय महिला आयोग (National Commission for Women) और 12 राज्य महिला आयोगों ने गुरुवार (28 जुलाई, 2022) को कॉन्ग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी द्वारा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (Draupadi Murmu) को ‘राष्ट्रपत्नी’ कहने पर उनकी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि यह टिप्पणी बेहद अपमानजनक और सेक्सिस्ट है।

NCW की चेयरपर्सन रेखा शर्मा ने ट्विटर पर कहा, “राष्ट्रीय महिला आयोग और विशाखापत्तनम की बैठक में मौजूद 12 राज्य महिला आयोग की महिलाओं ने अधीर रंजन चौधरी द्वारा भारत की राष्ट्रपति के लिए की गई अपमानजनक और सेक्सिस्ट टिप्पणी की निंदा की है। राष्ट्रीय महिला आयोग उन्हें समन भेज रहा है।” उन्होंने कहा कि 12 राज्य महिला आयोग में आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और त्रिपुरा के आयोग शामिल हैं। शर्मा ने अपने पोस्ट के साथ एक संयुक्त बयान को भी टैग किया है।

इसमें लिखा है, “राष्ट्रीय महिला आयोग और सभी राज्य महिला आयोग अधीर रंजन चौधरी की कड़ी निंदा करते हैं, उन्होंने भारत की माननीय राष्ट्रपति को ‘राष्ट्रपत्नी’ कहा है। उनके शब्द बेहद अपमानजनक और सेक्सिस्ट हैं।” बयान में यह भी कहा गया है, “हम सही सोच रखने वाले लोगों से उनके अपमानजनक शब्दों की कड़ी से कड़ी निंदा करने का आह्वान करते हैं।”

बता दें कि कॉन्ग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी द्वारा राष्ट्रपति पर दिए बयान को लेकर बीजेपी ने आज लोकसभा में जोरदार तरीके से विरोध किया। बीजेपी ने कहा कि कॉन्ग्रेस आदिवासी और गरीब, महिला विरोधी है। भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने इसे देश का अपमान बताया है। स्मृति ईरानी ने कहा कि जब से द्रौपदी मुर्मू का नाम राष्ट्रपति के उम्मीदवार के रूप में घोषित हुआ है तभी से द्रौपदी मुर्मू कॉन्ग्रेस पार्टी की घृणा और उपहास का शिकार हो रही हैं। राष्ट्रपति के रूप में चुने जाने के बाद भी उनके खिलाफ हमले रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं।

ये थे अधीर रंजन चौधरी के बेतुके बोल

संसद भवन परिसर में कॉन्ग्रेस का प्रदर्शन चल रहा था, तभी पत्रकारों के सवाल पर जवाब देते हुए कॉन्ग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने राष्ट्रपति के लिए ‘राष्ट्रपत्नी’ शब्द का इस्तेमाल किया। एक पत्रकार ने पूछा था कि कल आप राष्ट्रपति भवन जा रहे थे, जाने नहीं दिया गया। इसके जवाब में कॉन्ग्रेस नेता ने कहा कि आज भी जाने की कोशिश करेंगे। इसके बाद चौधरी ने कहा कि हिंदुस्तान की राष्ट्रपति सबके लिए है। हिंदुस्तान की ‘राष्ट्रपत्नी’ सबके लिए है। हमारे लिए क्यों नहीं। अब इसी को लेकर भाजपा अब हमलावर है।

‘घृणा और गुस्से का सामना नहीं कर पा रहा’: हिन्दू विरोधी ‘शमशेरा’ के डायरेक्टर का छलका दर्द, फिल्म से कहा – मुझे माफ कर दो

बॉलीवुड एक्टर रणबीर कपूर (Ranbir Kapoor) की फिल्म शमशेरा (Shamshera) बॉक्स ऑफिस पर धराशाही हो गई है। चार साल बाद बड़े पर्दे पर वापसी करने वाले रणबीर कपूर दर्शकों की उम्मीदों पर खरा उतरने में नाकामयाब रहे। 22 जुलाई को सिनेमाघरों में रिलीज हुई शमशेरा की कुल बॉक्स ऑफिस कलेक्शन केवल 39.75 करोड़ रुपए ही हो पाई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 150 करोड़ रुपए के बजट में बनी यह फिल्म छठे दिन मुश्किल से 2.30 करोड़ रुपए ही कमा पाई। शमशेरा फिल्म से मेकर्स को काफी उम्मीदें थीं। फिल्म के फ्लॉप होने के बाद डायरेक्टर करण मल्होत्रा ने अपना दर्द बयाँ किया है।

करण मल्होत्रा ने चुप्पी तोड़ते हुए ट्विटर पर लिखा, “मेरे प्यारे शमशेरा, आप जैसे हैं वैसे ही प्रभावशाली हैं। मेरे लिए इस मंच पर खुद को व्यक्त करना बेहद जरूरी है, क्योंकि यह वो जगह है जहाँ आपके लिए प्यार, नफरत, खुशी और अपमान मौजूद है।”

करण ने आगे लिखा, “मैं आपसे माफी माँगना चाहता हूँ। पिछले कुछ दिनों से मैं कुछ कह नहीं पा रहा था, क्योंकि मैं नफरत और गुस्सा सहन नहीं सकता था। मेरा तुम्हारा साथ न दे पाना मेरी कमजोरी थी और इसके लिए कोई बहाना नहीं है, लेकिन अब मैं आपके साथ खड़े होकर गर्व और सम्मानित महसूस कर रहा हूँ कि आप मेरे हैं।

शमशेरा के निर्देशक ने यह भी कहा, “हर चीज का एक साथ सामना करेंगे, अच्छा बुरा और बदसूरत। शमशेरा परिवार, शमशेरा के कलाकारों और क्रू मेंबर्स के लिए बहुत सम्मान है। जिन्होंने हमें इतना प्यार, आशीर्वाद दिया और हमारे बारे में सोचा। वह सबसे कीमती है और कोई भी इसे हमसे दूर नहीं कर सकता है।”

बता दें कि ‘शमशेरा’ फिल्म की स्क्रिप्ट बेहद खराब है, जिसे समीक्षकों ने भी नकार दिया। कहानी में कोई दम नहीं है। रणबीर कपूर डाकू के रोल में जँचे नहीं हैं, बल्कि उनकी आवाज़ अभी भी डाकू वाली नहीं बन पाई। स्क्रीनप्ले को भी समीक्षकों ने नकार दिया। संजय दत्त कुछ इसी तरह का किरदार ‘KGF 2’ सहित कई फिल्मों में कर चुके हैं। ज़रूरत से ज्यादा गानों और एक्शन दृश्यों को दोहराए जाने ने लोगों को बोर कर दिया।

मुंबई के डॉक्टर ने अब्दुल को नौकर रखा: पहले की चोरी, अब पत्नी की अंतरंग तस्वीरें वायरल करने की धमकी

मुंबई में एक डॉक्टर ने अपने पूर्व नौकर पर अपनी अंतरंग तस्वीरें ले कर ब्लैकमेल करने की शिकायत दर्ज करवाई है। आरोप है कि आरोपित नौकर ने अपने मालिक की पत्नी को तस्वीरें भेज कर फिरौती माँगी। साथ ही पैसे न मिलने पर तस्वीरों को वायरल करने की धमकी भी दी गई। आरोपित नौकर का नाम मोहम्मद जियाबुद्दीन अब्दुल अजीज है। पुलिस ने FIR दर्ज कर के आरोपित की तलाश शुरू कर दी है। तस्वीरें 24 जुलाई, 2022 (रविवार) को भेजी गई थीं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला खार इलाके का है। शिकायतकर्ता का वहाँ पर एक अस्पताल है। बताया जा रहा है कि आरोपित नौकर ने 4 साल तक डॉक्टर के घर पर काम किया था। साल 2016 में वह चोरी कर के भाग निकला था। तब डॉक्टर ने उसके खिलाफ चोरी की शिकायत दर्ज करवाई थी। लगभग 6 साल बाद उसने डॉक्टर की 39 वर्षीय पत्नी को अचानक ही उनके व्हाट्सएप पर अंतरंग तस्वीरें भेजीं।

पीड़ित डॉक्टर के मुताबिक, भेजी गईं तस्वीरें साल 2016 में खींचीं गई थीं और वो डॉक्टर के लॉकर में रखी गई थीं। डॉक्टर की पत्नी ने लॉकर चेक किया तो फोटो वहाँ नहीं थी। डॉक्टर की पत्नी ने तस्वीर भेजने वाले से तस्वीर को ले कर सवाल किया तो वो उसे वायरल करने की धमकी देते हुए पैसे की माँग करने लगा। आरोप है कि तस्वीर भेजने वाले ने खुद को डॉक्टर के पूर्व नौकर के ही तौर पर परिचित करवाया था। उसने धमकाते हुए तस्वीरों को डॉक्टर के रिश्तेदारों को भी भेज कर उनकी छवि को धूमिल करने की धमकी दी।

आख़िरकार डॉक्टर ने इसकी शिकायत पुलिस में दर्ज करवाई। पुलिस के मुताबिक आरोपित को पकड़ने के लिए टीमें काम कर रही हैं। शक इस बात का भी जताया जा रहा है कि आरोपित ने खुद पर दर्ज चोरी के केस का बदला लेने के ये कदम उठाया हो। पुलिस ने आरोपित पर IPC की धारा 381 और 385 के तहत FIR दर्ज की है।

‘पीरियड के दौरान पेड़ लगाओगी तो सड़ जाएँगे..’: महाराष्ट्र में शिक्षक ने आदिवासी छात्राओं को वृक्षारोपण से रोका, जाँच के आदेश

महाराष्ट्र के नासिक जिले में पीरियड्स की वजह से छात्राओं से भेदभाव का मामला सामने आया है। जहाँ एक सरकारी आवासीय स्कूल की आदिवासी छात्रा ने आरोप लगाया है कि एक पुरुष शिक्षक ने पीरियड की वजह से उसे और अन्य लड़कियों को पौधरोपण अभियान में भाग लेने से रोक दिया। वहीं अब आदिवासी विकास विभाग ने इस मामले में जाँच के आदेश दिए हैं। महाराष्ट्र के महिला आयोग ने भी इस घटना का संज्ञान लिया है और कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र के नासिक जिले के त्र्यंबकेश्वर ब्लॉक के देवगाँव में लड़कियों के लिए संचालित माध्यमिक और उच्च माध्यमिक आवासीय स्कूल की यह घटना है। जहाँ 12वीं कक्षा की छात्रा ने आरोप लगाया कि शिक्षक ने उसे और अन्य आदिवासी लड़कियों से कहा था कि अगर पीरियड्स वाली लड़कियाँ पेड़ लगाती हैं तो वो नहीं उगेंगे और जल जाएँगे। छात्रा का कहना है कि शिक्षक ने अपनी विकृत मानसिकता के कारण ऐसा किया।

बता दें कि स्कूल में घाटी इस घटना को जब छात्रा ने अपने घर में बताया तो सब लोग शिक्षक के ऊपर नाराजगी जताने लगे। इसके बाद छात्रा के परिजनों ने आदिवासी विकास विभाग के पास इस मामले की शिकायत दर्ज करवाई। इसके बाद मामला आदिवासियों से जुड़ा होने की वजह से तूल पकड़ लिया और अपर आयुक्त ने दोषी शिक्षक पर कार्रवाई करने के आदेश दिए। इसके बाद इस मामले में महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग ने भी संज्ञान लिया।

गौरतलब है कि स्कूल में 500 छात्राएँ हैं। वहीं छात्रा ने अपनी शिकायत में कहा है कि शिक्षक ने पिछले सप्ताह स्कूल परिसर में आयोजित वृक्षारोपण अभियान के दौरान मासिक धर्म वाली लड़कियों को पेड़ लगाने से रोक दिया था। शिक्षक ने छात्राओं से कहा कि वे पेड़ों के पास न जाएँ क्योंकि पिछले साल लगाए गए पौधे मासिक धर्म के कारण नहीं बढ़े थे।

इसके बाद छात्रा के परिजनों ने श्रमजीवी संगठन के नासिक जिला सचिव भगवान मधे से संपर्क किया। मधे ने कहा कि लड़की पुरुष शिक्षक का विरोध नहीं कर सकती क्योंकि वह उसका कक्षा शिक्षक है और उसे धमकी दी थी कि मूल्यांकन के 80 प्रतिशत अंक स्कूल अधिकारियों के हाथ में हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, आदिवासी विकास विभाग (टीडीडी) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस मामले में शिकायत मिलने की पुष्टि की है। इस मामले में जानकारी देते हुए अतिरिक्त आयुक्त संदीप गोलेत ने कहा कि छात्राओं, शिक्षकों, अधीक्षक और प्राचार्य सहित सभी के बयान लिए जाएँगे और जाँच की जाएगी।

वहीं बुधवार को नासिक जिले की अतिरिक्त कलेक्टर और टीडीडी परियोजना अधिकारी वर्षा मीणा ने इसी सिलसिले में स्कूल में आदिवासी छात्राओं से मुलाकात की और उनकी समस्याओं के बारे में पूछा। संबंधित अधिकारी ने कहा कि मामले की जाँच की जा रही है और जल्द ही इस पर कुछ ना कुछ निर्णय लिया जाएगा।

BJYM नेता की हत्या के मामले में कर्नाटक पुलिस ने 2 को पकड़ा, नाम – ज़ाकिर और शफीक: 15 से पूछताछ, कई जिलों में हिन्दुओं ने बुलाया बंद

कर्नाटक (Kranataka) के दक्षिण कन्नड़ में भाजपा युवा मोर्चा (BJYM) के कार्यकर्ता प्रवीण नेत्तारू (Praveen Nettaru) की हत्या (Murder) के मामले में कर्नाटक पुलिस ने एक्शन लेते हुए गुरुवार (28 जुलाई, 2022) को दो आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। पकड़े गए आरोपितों की पहचान जाकिर और शफीक के तौर पर हुई है।

इस मामले को लेकर दक्षिण कन्नड़ जिले के एसपी सोनावने ऋषिकेश ने कहा कि प्रवीण की हत्या के दोषियों की पहचान जाकिर और शफीक के रूप में हुई है। जाकिर को हावेरी जिले के सावनूर से गिरफ्तार किया गया, जबकि शफीक को बेल्लारी में हिरासत में लिया गया। शफीक पर पहले से केस चल रहा है। इस मामले में 15 लोगों से पूछताछ की गई है। कई जिलों में बाजार वगैरह बंद रहे।

रिपोर्ट के मुताबिक, आशंका जताई जा रही है कि पकड़े गए दोनों ही आरोपितों का संबंध पीएफआई और एसडीपीआई से हो सकता है।

इस बीच प्रवीण नेत्तारू की हत्या बाद कर्नाटक सरकार ने अपने कार्यकाल के एक साल पूरे होने के मौके पर मनाए जाने वाले ‘जनोत्सव’ कार्यक्रम को रद्द कर दिया है। मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने बुधवार (27 जुलाई 2022) देर रात इसकी घोषणा की। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मुख्यमंत्री ने कहा, “अपनी सरकार के एक साल पूरे होने पर हम 28 जुलाई को ‘जनोत्सव’ नाम से डोड्डाबल्लापुरा में कार्यक्रम आयोजित करने वाले थे। लेकिन अब हमने इसे रद्द कर दिया है।” उन्होंने इस घटना को जघन्य करार दिया है।

गौरतलब है कि प्रवीण नेट्टारू पर 26 जुलाई 2022 की रात दक्षिण कन्नड़ जिले की बेल्लारे में कुल्हाड़ी से हमला हुआ था, जिसमें उनकी मौत हो गई थी। हत्या के पीछे PFI और SDPI का हाथ होने की आशंका जताई जा रही है। ऐसा बताया जा रहा है कि उदयपुर में कन्हैया लाल की हत्या के विरोध में प्रवीण ने फेसबुक पर किया पोस्ट था, जिसके कारण उन्हें निशाना बनाया गया। हालाँकि हत्या की वजह आधिकारिक तौर पर अभी सामने नहीं आई है।