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मुस्लिम बहुल इलाके में जाने से पहले कमलनाथ के बेटे ने पोछा तिलक, वीडियो वायरल होने के बाद हटाया: बोली कॉन्ग्रेस – वो पसीना पोछ रहे थे

कॉन्ग्रेस नेता कमलनाथ (Kamal Nath) के बेटे और मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा से सांसद नकुलनाथ (Nakul Nath) एक रोड शो को लेकर विवादों में हैं। नकुलनाथ का ए​क वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है, जिसमें वह अपने माथे पर लगे तिलक को साफ करते हुए नजर आ रहे है। बताया जा रहा है कि तीन दिन पहले वह छिंदवाड़ा जिले के परासिया में कॉन्ग्रेस प्रत्‍याशियों के समर्थन में रोड शो कर रहे थे। तभी उन्‍होंने मुस्लिम बहुल क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले अपने माथे पर लगे तिलक को पोछ लिया, जिसका हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद भाजपा नेताओं ने मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम के बेटे की आलोचना की है।

दिल्‍ली भाजपा के नेता तेजिंदर पाल सिंह बग्गा ने इस घटना का वीडियो शेयर करते हुए ट्वीट किया कि कमलनाथ के सुपुत्र नकुलनाथ ने ‘उनके’ इलाके में प्रवेश करने से पहले तिलक मिटा दिया। यहाँ तेजिंदर का ‘उनके’ से इशारा एक विशेष समुदाय के लोगों से था।

भाजपा के एक अन्य सदस्य ने वीडियो पोस्ट करते हुए कहा कि नकुलनाथ ने तिलक को हटाकर कॉन्ग्रेस पार्टी की मानसिकता को उजागर किया है। कमलनाथ के बेटे नकुलनाथ ने इस शांतिपूर्ण इलाके में प्रवेश करने से पहले अपना तिलक ही नहीं हटाया, बल्कि ऐसा करके उन्होंने कॉन्ग्रेस की मानसिकता को भी उजागर किया है। उन्होंने कॉन्ग्रेस नेताओं को गिद्ध बताते हुए कहा, “उनके जैसे लोग अपना महल बनाने के लिए जनता की भावनाओं से खिलवाड़ करते हैं।”

इस वीडियो को सबसे पहले खुद नकुलनाथ ने फेसबुक पर पोस्ट किया था। हिंदुओं को भड़काने वाला यह पोस्ट जल्द ही अन्य सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इस बीच कॉन्ग्रेस मीडिया प्रकोष्ठ के प्रभारी के के मिश्रा ने नकुलनाथ का बचाव करते हुए कहा कि वह प्रचार के दौरान पसीना पोंछ रहे हैं। उन्होंने कहा, “भाजपा नेताओं का ट्वीट राजनीति से प्रेरित है और यह उनकी मानसिकता को दर्शाता है।”

बता दें कि सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस वीडियो को बाद में नकुलनाथ के फेसबुक अकाउंट से हटा दिया गया था। इस बीच यह सवाल उठाए जा रहे हैं कि अगर छिंदवाड़ा में मुस्लिम बहुल इलाके में प्रवेश करने से पहले नेता तिलक नहीं बल्कि अपना पसीना पोंछ रहे हैं, तो इस वीडियो को क्यों हटाया गया।

यशवंत सिन्हा का ‘बुलडोजर दर्द’ उभरा, कहा- नोएडा में रहता हूँ, UP पर कुछ नहीं बोलूँगा: फारूक-महबूबा को बता चुके हैं सबसे बड़ा राष्ट्रभक्त

विपक्ष के राष्ट्रपति उम्मीदवार यशवंत सिन्हा समर्थन जुटाने के लिए इस समय राज्यों के दौरे पर हैं। यह दूसरी बात है कि जिन दलों ने उन्हें प्रत्याशी चुना था उनमें से भी अब कुछ एनडीए की उम्मीदवार द्रौपदी मूर्मु के साथ खड़े दिख रहे हैं। चुनाव प्रचार के क्रम में सिन्हा मंगलवार को चंडीगढ़ में थे। उन्होंने हरियाणा कॉन्ग्रेस के विधायकों से मुलाकात कर अपने पक्ष में वोट डालने की अपील की। इस दौरान उन्होंने उत्तर प्रदेश को लेकर किसी तरह की टिप्पणी से इनकार कर दिया।

दरअसल प्रेस कॉन्फ्रेंस में यशवंत सिन्हा से जनसंख्या नियंत्रण कानून को लेकर सवाल पूछा गया था। इसके जवाब में उनका बुलडोजर दर्द उभर आया। उन्होंने कहा, “मैं उत्तर प्रदेश पर टिप्पणी करने से घबराता हूँ, क्योंकि मैं नोएडा में रहता हूँ। कब वो मेरे घर बुलडोजर लेकर आ जाएँ, इसका पता नहीं। इसलिए मैं उत्तर प्रदेश के बारे में नहीं बोलता हूँ।”

उन्होंने कहा कि पहले की तुलना में इस बार का राष्ट्रपति चुनाव असाधारण परिस्थिति में है। पूरे देश में डर और भय का माहौल है। हिंदू- मुस्लिम एक दूसरे से डर रहे हैं। महाराष्ट्र के राजनीतिक घटनाक्रम का जिक्र करते हुए सिन्हा ने कहा कि एकनाथ शिंदे ने जिस तरह से उद्धव सरकार को गिराया, इसकी लंबी चौड़ी कहानी है। अटल जी के समय की सरकार सहमति के आधार पर आगे बढ़ती थी। ये सरकार टकराव के आधार पर आगे बढ़ती है।

यशवंत सिन्हा ने आगे कहा, “सत्ताधारी दल और उनकी सरकार द्वारा लोकतांत्रिक शासन की प्रत्येक संस्था को नष्ट किया जा रहा है। ईडी, सीबीआई, आयकर विभाग जैसी एजेंसियों और यहाँ तक कि राज्यपाल कार्यालय का इस्तेमाल विपक्ष के नेताओं को निशाना बनाने के लिए हो रहा है।” सत्तारूढ़ दल पर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि चुनाव जीतने के लिए इन लोगों ने भारत के विविधता से भरे समाज का सांप्रदायिक रूप से ध्रुवीकरण कर एक साजिश रची है। इसके न केवल सामाजिक शांति के लिए, बल्कि देश की एकता और अखंडता के लिए भी खतरनाक परिणाम होंगे।

गौरतलब है कि यशवंत सिन्हा हाल ही में जम्मू-कश्मीर भी गए थे। उनकी इस बैठक में फारूक अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती समेत कई नेता शामिल हुए थे। इस दौरान सिन्हा ने फारूक अब्दुल्ला समेत बैठक में शामिल तमाम नेताओं को देश का सबसे बड़ा राष्ट्रवादी बताया था। उन्होंने कहा था, “हमारे जो भी लोग यहाँ बैठे हैं, फारूक साहब और महबूबा जी को मिला कर… इनसे बड़ा कोई राष्ट्रभक्त नहीं है। अगर ये राष्ट्रवादी नहीं हैं तो फिर देश में कोई राष्ट्रभक्त नहीं है।”

दो लड़कियों ने बीच सड़क पर लड़के की पत्थर और हेलमेट से की जमकर धुनाई, तमाशाबीन बने रहे लोग: गाजियाबाद की घटना, वीडियो वायरल

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में सड़क पर पुलिस के सामने ही लड़कियों की थप्पड़बाजी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। यह घटना सोमवार (11 जुलाई, 2022) रात की बताई जा रही है, जब एक स्कूटी पर शाम को शॉपिंग करने निकली दो लड़कियाँ जा रही थीं, तभी उनकी स्कूटी दूसरी स्कूटी से टकरा गई, जिसे एक युवक चला रहा था। इसके बाद बहस होते-होते नौबत मारपीट पर आ गई और दोनों दबंग लड़कियों ने अपने साथियों के साथ मिलकर एक युवक को ईंट-पत्‍थरों और हेलमेट से जमकर धो दिया।

इतना ही नहीं, प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि लड़कियाँ जब युवक की बुरी तरह से पिटाई कर रही थीं, तब पुलिस तमाशबीन बनकर इस थप्पड़बाजी को देख रही थी।

यह घटना गाजियाबाद के थाना मधुबन बापूधाम इलाके में सेक्टर 23 चौराहे की है, जहाँ स्कूटी से जा रही दो युवतियों की स्कूटी युवक के स्‍कूटी से टकरा गई। इसके बाद युवतियों ने अपने परिचितों को बुला लिया और उनकी शह पर दोनों लड़कियाँ गाली देते हुए एक लड़के की हेलमेट और ईंट से जब पिटाई कर रहीं थीं तो वहाँ मौजूद जनता तमाशा देख रही थी तो कुछ वीडियो में बनाने में लगे रहे। यहाँ तक मौके पर पहुँची यूपी पुलिस के सामने भी लड़कियों ने ताबड़तोड़ थप्पड़ चलाए। पुलिस ने बीच-बचाव करने की भी कोशिश की, लेकिन साथ में महिला पुलिसकर्मी न होने की वजह से वह भी लाचार नजर आई और ये लड़कियाँ लगातार स्कूटी सवार लड़के पर हमलावर रहीं।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, करीब 10 से 15 मिनट तक चले इस हाथापाई का जब कोई अंत होता नहीं दिख रहा था तो तमाशबीन बनी भीड़ के सब्र का बाँध टूट गया और उन्होंने भी लड़कियों के इस दबंगई का विरोध करना शुरू कर दिया। जिसके बाद दोनों लड़कियाँ वहाँ से भाग खड़ी हुई। और इस तरह से पुलिस मामले को शांत करा पाती है।

वहीं इस पूरे घटनाक्रम का किसी ने वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाल दिया जो कुछ ही घंटों में तेजी से वायरल होने लगा। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में साफ दिख रहा है कि स्कूटी सवार पीड़ित लड़का लड़कियों की मार से बचने की कोशिश कर रहा है, मगर ये लड़कियाँ उछल-उछल कर ताबड़तोड़ थप्पड़ चला रही हैं। पुलिस के बीच-बचाव करने पर भी बार-बार हाथ छुड़ाकर लड़कियाँ पिटाई करती दिखती हैं।

अब इस मामले में वायरल वीडियो के आधार पर गाजियाबाद पुलिस दोनों लड़कियों की तलाश में जुटी है। मधुबन बापूधाम थाने के एसओ मुनेश कुमार ने बताया कि वीडियो के आधार पर लड़कियों को ट्रेस करने की कोशिश की जा रही है। इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

‘घुटने के बल झुका कर भीख मँगवाता’: थम नहीं रही डोनाल्ड ट्रम्प और एलन मस्क की लड़ाई, बोले टेस्ला CEO – बूढ़ा बादल पर चिल्लाता है

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और टेस्ला के सीईओ के बीच शुरू हुआ विवाद लगातार तेज होता जा रहा है। डोनाल्ड ट्रंप द्वारा एलन मस्क ट्विटर डील को रद्द करने के मामले में टिप्पणियाँ करने के बाद अब मस्क ने भी पलटवार किया है।

मंगलवार (12 जुलाई, 2022) शाम को ट्रंप ने कई सारे पोस्ट कर एलन मस्क द्वारा ट्रंप के राजनीतिक करियर को समाप्त करने के लिए प्रोत्साहित करने के मामले में जबाव दिया है। एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए ट्रंप ने कहा, “जब एलन मस्क व्हाइट हाउस में आए और मुझसे उनकी कई सब्सिडी वाली परियोजनाओं पर मदद माँगी। मुझे बताया कि वो एक रपब्लिकन और बड़े ट्रंप प्रशंसक हैं, तो मैं कह सकता था, ‘अपने घुटनों पर बैठो और भीख माँगो’ और वो ऐसा कर भी लेते।”

फोटो साभार: ट्रुथ सोशल

बस फिर क्या था एलन मस्क ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने ट्रंप की आलोचनाओं के जबाव में कहा, “लमाओ” कहा। इसके अगले ट्विटर थ्रेड में उन्होंने एक मीम शेयर किया, ओल्ड मैन येल्स एट द क्लाउड।

टेस्ला प्रमुख ने ट्रंप के आरोपों पर कहा, “मैं उस आदमी से नफरत नहीं करता, लेकिन यह ट्रंप के लिए अपनी टोपी लटकाने और सूर्यास्त में जाने का समय (सक्रिय राजनीति से हटने) है। डेम्स को भी हमले को बंद कर देना चाहिए। ट्रम्प के जीवित रहने का एकमात्र उद्देश्य राष्ट्रपति पद हासिल करना है।”

एलन मस्क ने ये ट्वीट उनके खिलाफ ट्रंप द्वारा लगाए गए आरोपों के जबाव में किया गया। दरअसल, पिछले सप्ताह शनिवार को अमेरिका के अलास्का में ट्रंप ने एक राजनीतिक रैली को संबोधित किया। इसमें उन्होंने मस्क पर चुनाव में उनके लिए मतदान करने के बारे में झूठ बोलने के लिए हमला किया था। उन्होंने कहा, “उसने मुझसे कहा कि उन्होंने मुझे वो दिया था, इसलिए वो एक बुल ** ट आर्टिस्ट हैं।”

इसके अलावा ट्रंप ने इस खबर को लेकर भी मस्क पर कटाक्ष किया कि ट्विटर स्पेस एक्स के सीईओ पर सोशल मीडिया कंपनी को खरीदने के अपने अनुबंध का सम्मान नहीं करने के लिए मुकदमा कर रहा है।

ट्रंप नो कहा, “अब एलन को खुद को ट्विटर की गड़बड़ी से बाहर निकालने पर ध्यान देना चाहिए। क्योंकि वह किसी ऐसी चीज के लिए $ 44 बिलियन (करीब 327354 करोड़ रुपए) का भुगतान कर सकता है जो शायद बेकार है। इसके अलावा इलेक्ट्रिक कारों के लिए बहुत प्रतिस्पर्धा है।”

द्रौपदी मुर्मू से विपक्ष ही नहीं बेचैन, ईसाई मिशनरियों की भी नींद उड़ी: चुनाव राष्ट्रपति का, चोट धर्मांतरण के ठेकेदारों को भी

21 जुलाई 2022 को देश को नया राष्ट्रपति मिल जाएगा। 18 जुलाई को मतदान होना है। माना जा रहा है कि बीजेपी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू (Draupadi Murmu) देश की अगली राष्ट्रपति हो सकती हैं। यदि ऐसा हुआ तो इस पद पर पहुँचने वाली वह दूसरी महिला और अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग से आने वाली पहली शख्सियत होंगी।

द्रौपदी मुर्मू की उम्मीदवारी की घोषणा से पहले ही विपक्ष के कुछ दलों ने मिलकर यशवंत सिन्हा को अपना उम्मीदवार चुना था। लेकिन, मुर्मू के नाम की घोषणा ने इन विपक्षी दलों में से कुछ को अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर कर दिया। इनमें से एक शिवसेना भी है, जिसने अब मुर्मू के समर्थन का ऐलान किया है। झारखंड में कॉन्ग्रेस की सहयोगी झामुमो (JMM) आज भी उधेड़बुन में है कि वह किधर जाए। यही हाल आम आदमी पार्टी (AAP) का भी है।

मतदान से पहले ही विपक्षी एकता फूटने कुलबुलाहट भी देखी जा रही है। इसी व्याकुलता में बुधवार (13 जुलाई 2022) को कॉन्ग्रेस नेता अजय कुमार ने द्रौपदी मुर्मू को ‘बुरे पक्ष का प्रतिनिधि’ बता दिया। इस दौरान उन्होंने मुर्मू की अनुसूचित जनजाति पहचान पर भी सवाल उठाए।

दरअसल, मुर्मू का अनुसूचित जनजाति से होना वह मसला है, जिससे ईसाई मिशनरी भी भड़के हुए है। उनका देश के शीर्ष पद पर होना हिंदू आदिवासियों को निशाना बनाने वाले धर्मांतरण माफियाओं के खिलाफ एक अचूक हथियार साबित हो सकता है। मुर्मू ने ओडिशा के रायरंगपुर के आदिवासी क्षेत्रों में धर्मांतरण माफिया के खिलाफ बड़े पैमाने पर काम भी किया है।

हम सब जानते हैं कि किस प्रकार से ईसाई मिशनरी गरीब और अनुसूचित जनजाति के लोगों को प्रलोभन देकर धर्मांतरण करवाते हैं। ऐसे में द्रौपदी मुर्मू के राष्ट्रपति उम्मीदवार बनने और उनकी जीत करीब-करीब तय होने से इस समाज में एक नई जनचेतना का संचार हुआ है। इस फैसले से मोदी सरकार अनुसूचित जनजाति के लोगों को यह संदेश देने में कामयाब रही है कि सरकार उनके साथ खड़ी है। यह संदेश धर्मांतरण के ठेकेदारों के लिए बड़ा झटका है। इससे उनके लिए निर्धारित लक्ष्यों को पूरा कर पाना कठिन हो गया। इससे विदेशी फंडिंग से हिंदुस्तान की धरती पर धर्मांतरण कर अस्थिरता पैदा करने की साजिशों पर भी विराम लगेगा।

एनडीए के इस फैसले के बाद अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक यह संदेश गया है कि वे भी देश के सर्वोच्च पद तक जा सकते हैं। प्रथम नागरिक बनने की क्षमता उनमें भी है। यह आत्मविश्वास न केवल उनके विकास को गति देगी, बल्कि हिंदुत्व के प्रति भी उन्हें अडिग करेगी।

एक अति सामान्य परिवार से आने के बावजूद द्रौपदी मुर्मू जिस तरह मिशनरियों से लड़ीं, जिस प्रकार हिंदुत्व को मजबूत करने का कार्य करती रहीं, यह उनके समाज के अन्य लोगों को भी प्रेरित करेगी। उनके पास राज्यपाल के तौर पर 6 साल से भी ज्यादा के कार्यकाल का अनुभव है। झारखंड की राज्यपाल रहते हुए उन्होंने शिक्षा, कानून व्यवस्था, स्वास्थ्य और जनजातीय मामलों में बेहद संवेदनशीलता का परिचय दिया। ऐसे कई मौके आए जब राज्य सरकारों के निर्णयों में हस्तक्षेप किया। बावजूद उनकी छवि निर्विवाद बनी रही, क्योंकि उन्होंने ये हस्तक्षेप पूरी तरह से संवैधानिक मर्यादा में रहकर आम लोगों के हक में किए।

झारखंड के कई विश्वविद्यालयों में कुलपति और प्रतिकुलपतियों के रिक्त पदों पर नियुक्तियाँ उनके ही कार्यकाल में हुई। बता दें कि राज्यपाल विश्वविद्यालयों की पदेन कुलाधिपति होते हैं। राज्यपाल द्रौपदी मुर्म की संवेदनशीलता ही थी कि उन्होंने पदेन कुलाधिपति के रूप में उच्च शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर लोक अदालत का आयोजन किया। इस लोक अदालत में विश्वविद्यालय शिक्षकों और कर्मचारियों के तकरीबन 5000 मामले निबटाए गए। झारखंड में आज विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में केंद्रीयकृत नामांकन प्रक्रिया अपनाई जाती है। इसके लिए द्रौपदी मुर्मू ने ही चांसलर पोर्टल का निर्माण कराया था।

उनकी उम्मीदवारी से राजनैतिक तौर पर भी बीजेपी ने कई सांकेतिक संदेश दिए हैं। इससे जनजातीय समाज में पार्टी की पैठ और भी गहरी हो सकती है। साथ ही ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के बाद बीजद में नेतृत्व के स्तर पर शून्यता दिखती है। माना जा रहा है कि पटनायक का ये आखिरी कार्यकाल होगा। ऐसे में मुर्मू की उम्मीदवार ओडिशा में भी बीजेपी के लिए नई राजनैतिक संभावनाओं को जन्म दे सकती हैं। मुर्मू न केवल ओडिशा से आती हैं, बल्कि यहॉं से मंत्री भी रहीं हैं। जनजानतीय समाज के बीच उनकी गहरी प्रतिष्ठा भी है। जाहिर है, विपक्ष की बेचैनी बढ़नी ही है।

OPPO ने की ₹4400 करोड़ की टैक्स चोरी, फोन कंपनी के ऑफिस और कैंपस की ली गई तलाशी: VIVO ने भी चीन भेजे थे ₹62476 करोड़

वीवो के बाद चीन की एक और स्मार्टफोन कंपनी ओप्पो इंडिया (Oppo India) पर भारत में टैक्स चोरी के आरोप लगे हैं। डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलीजेंस (DRI) ने ओप्पो इंडिया द्वारा 4389 करोड़ रुपए कस्टम ड्यूटी की चोरी के मामले का खुलासा किया है।

डीआरआई ने बुधवार (13 जुलाई 2022) को एक बयान जारी किया, “जाँच के दौरान, DRI ने ओप्पो इंडिया के ऑफिस, कैंपस की तलाशी ली। इसके अलावा मैनेजमेंट के लोगों के आवास पर भी छापेमारी की गई। इस दौरान ओप्पो इंडिया द्वारा आयात की गई कुछ वस्तुओं के विवरण में जानबूझकर गलत जानकारी दिए जाने के सबूत मिले हैं।”

बयान के मुताबिक, ओप्पो इंडिया ने गलत जानकारी की वजह से 2981 करोड़ रुपए का अवैध लाभ उठाया है। इसके अलावा इस कंपनी के सीनियर मैनेजमेंट कर्मचारियों और घरेलू आपूर्तिकर्ताओं से पूछताछ भी की गई है। इनमें से कुछ लोगों ने अपने बयान में कस्टम अधिकारियों के सामने आयात को लेकर गलत जानकारी देने की बात स्वीकार कर ली है।

जाँच में यह भी सामने आया है कि ओप्पो इंडिया ने चीन में मल्टीनेशनल कंपनियों को भुगतान की गई ‘रॉयल्टी’ और ‘लाइसेंस शुल्क’ को उनके द्वारा आयात किए गए सामान के लेनदेन मूल्य में नहीं जोड़ा था। यह सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 की धारा 14 का उल्लंघन है। इस वजह से ओप्पो इंडिया द्वारा 1,408 करोड़ रुपए की टैक्स चोरी की गई।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मामले में ओप्पो इंडिया को कारण बताओ नोटिस जारी कर कुल 4389 करोड़ रुपए की कस्टम ड्यूटी की माँग की गई है। नोटिस में सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 के प्रावधानों के तहत ओप्पो इंडिया, कंपनी के कर्मचारियों, ओप्पो चीन पर जरूरी दंड का भी उल्लेख है। ओप्पो इंडिया ने अपनी तरफ से कस्टम ड्यूटी के नाम पर केवल 450 करोड़ रुपए रकम का भुगतान ही किया है।

गौरतलब है कि चीनी स्मार्टफोन कंपनी वीवो (Vivo) को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 7 जुलाई 2022 को बड़ा खुलासा किया था। ईडी ने बताया था कि वीवो ने भारत में टैक्स चोरी के लिए 62476 करोड़ रुपए ‘गैरकानूनी तरीके से’ चीन को भेजे। यह रकम वीवो के कुल टर्नओवर 125185 करोड़ रुपए का लगभग आधा है। यह रकम 2017 से 2021 के बीच भेजी गई थी। प्रवर्तन निदेशालय ने यह कार्रवाई भारत में 23 कंपनियाँ बनाने में चीन के तीन नागरिकों के शामिल होने की जानकारी सामने आने के बाद की थी।

‘मुस्लिम टारगेट’ की योगी सरकार ने निकाली हवा, कहा- एक ही समुदाय भारतीय: बुलडोजर पर रोक से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

उत्तर प्रदेश में बुलडोजर एक्शन पर जमीयत उलमा-ए-हिंद की रोक की माँग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सर्वव्यापी आदेश देने से इनकार कर दिया है। बुधवार (13 जुलाई, 2022) को केस की सुनवाई के दौरान जस्टिस बीआर गवई और पीएस नरसिम्हा की बेंच ने कहा, “नियम का पालन होना चाहिए। इसमें कोई विवाद नहीं है। यदि निकाय के नियमों के मुताबिक निर्माण अवैध है तो फिर हम उसे कैसे गिराने से रोकने के लिए अथॉरिटीज को आदेश दे सकते हैं।” इस मामले में अब अगली सुनवाई के लिए कोर्ट ने 10 अगस्त की तारीख तय की है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में जमीयत उलमा-ए-हिंद के वकील एडवोकेट दुष्यंत दवे ने अपनी दलील में कहा था, “कोई किसी अपराध में आरोपित है तो उसके घरों को गिराने की कार्रवाई हमारे समाज में स्वीकार नहीं की जा सकती। हम कानून के शासन से चलते हैं।”

दुष्यंत दवे ने कोर्ट में सुनवाई के दौरान यह भी आरोप लगाया, “दंगा करने के आरोपितों के खिलाफ सरकार चुनकर कार्रवाई कर रही है। पूरा सैनिक फार्म ही अवैध है, लेकिन बीते सालों में उस पर कोई ऐक्शन नहीं हुआ। दिल्ली में ही अवैध फार्म हाउस देख सकते हैं। कोई ऐक्शन नहीं हुआ। इन मामलों में चुनकर कार्रवाई की जा रही है।”

इस तर्क पर गहरी आपत्ति जताते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, “देश में कोई दूसरा समुदाय नहीं है। सिर्फ एक ही समुदाय है, जिसे हम भारतीय कहते हैं।”

वहीं इस मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने यूपी सरकार का पक्ष रखते हुए कहा, “कोई व्यक्ति किसी मामले में आरोपित है, सिर्फ इसलिए उसके अवैध निर्माण को हटाने की कार्रवाई रोकी नहीं जा सकती।” उन्होंने कहा कि ऐसे आरोप ठीक नहीं है। अथॉरिटीज ने यह प्रक्रिया दंगों से पहले ही शुरू कर दी थी। उन्होंने कहा कि जिनके अवैध निर्माणों को गिराया गया है, उन्हें पहले ही नोटिस देकर कार्रवाई के बारे में जानकारी दी गई थी।

बता दें कि यूपी सरकार ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा था कि प्रयागराज विध्वंस स्थानीय विकास प्राधिकरण द्वारा किया गया था जो कि राज्य सरकार का एक स्वायत्त निकाय है और शहर को अवैध और अनधिकृत निर्माण से मुक्त करने के उनके प्रयास का एक हिस्सा है।

गौरतलब है कि जमीयत उलमा-ए-हिंद ने हाल ही में उन लोगों के घरों को गिराए जाने को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत का रुख किया था, जिन्होंने कथित तौर पर भाजपा प्रवक्ता नूपुर शर्मा के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में भाग लेते हुए उपद्रव और हिंसा किया था।

CBI ने मछली घोटाले में CBI ने लक्षद्वीप के NCP सांसद मोहम्मद फैजल और भतीजे पर दर्ज किया केस, बीफ खाने को बता चुके हैं संवैधानिक अधिकार

केंद्रीय जाँच एजेंसी (CBI) ने टूना मछली घोटाले के मामले में केंद्र शासित प्रदेश लक्षद्वीप से एनसीपी के सांसद मोहम्मद फैजल और उनके भतीजे अब्दुल रज्जाक के खिलाफ केस दर्ज किया है। चाचा-भतीजे पर स्थानीय मथुआरों को धोखा देकर श्रीलंका की एक कंपनी के साथ कथित तौर पर मिलीभगत करने का आरोप लगाया गया है। इस मामले में मंगलवार (12 जुलाई, 2022) को एजेंसी ने फैजल के लक्षद्वीप और दिल्ली स्थित दोनों ठिकानों पर छापेमारी की।

सीबीआई सूत्रों ने कहा कि इस मामले में अन्य आरोपितों के लक्षद्वीप, दिल्ली और कोझीकोड केरल में भी तलाशी ली गई। वहीं इस मामले में फैजल ने कहा, “सीबीआई ने कुछ दस्तावेजों की माँग की थी, जिसे उन्हें उपलब्ध करा दिया गया है। उन्होंने मेरे घर की तलाशी ली। उन्होंने ठीक होने पर शून्य रिपोर्ट दी है। देखते हैं वे आगे क्या कार्रवाई करते हैं। हम वहाँ से देखेंगे।”

क्या है पूरा मामला

गौरतलब है कि पिछले महीने यह मामला उस वक्त प्रकाश में आया था, जब सीबीआई ने लोकल विजिलेंस के साथ मिलकर इस मामले में कार्रवाई शुरू की। सीबीआई ने लक्षद्वीप सहकारी विपणन संघ (एलसीएमएफ), मत्स्य पालन, लोक निर्माण विभाग, खादी बोर्ड और सहकारी समिति और पशुपालन सहित विभिन्न विभागों पर एक संयुक्त औचक निरीक्षण किया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक DIG रैंक के अधिकारी के नेतृत्व में CBI की 25 सदस्यीय टीम इस कथित भ्रष्टाचार की जाँच कर रही है। टूना मछली की अंतर्राष्ट्रीय मार्केट में कीमत लगभग 400 रुपए प्रति किलो है। इसे LCMF (लक्ष्यद्वीप कॉर्पोरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन) द्वारा स्थानीय मछुआरों से खरीदा गया। बाद में इसे श्रीलंका की राजधानी कोलंबो स्थित SRT जनरल मर्चेंट नाम की कम्पनी को बेचा गया था। लेकिन बदले में ART कम्पनी ने LCMF को पैसे नहीं दिए। इस से स्थानीय मछुआरों को काफी नुकसान उठाना पड़ा।

फैज़ल का रिश्तेदार अब्दुल रज़्ज़ाक श्रीलंका की उसी कम्पनी में प्रतिनिधि था जिस पर मछलियों के बदले LCMF का पैसा न देने का आरोप है।

उल्लेखनीय है कि ये वहीं मोहम्मद फैजल हैं, जिन्होंने पिछले साल 2021 में प्रशासनिक सुधारों का विरोध किया था और बीफ को लेकर विवादित बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि बीफ खाना हमारा संवैधानिक अधिकार है।

2008 में विष्णु की हत्या, 2016 में RSS के 13 कार्यकर्ता को गुनाहगार बता सुनाई सजा: 2022 में केरल हाई कोर्ट में पूरी कहानी ही निकली फर्जी, सारे बरी

केरल हाईकोर्ट ने मंगलवार (12 जुलाई 2022) को 13 आरएसएस कार्यकर्ताओं को हत्या केस से बरी करते हुए पुलिस पर बड़ी टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि ये पूरा मामला साफतौर पर राजनीतिक प्रतिशोध का उदाहरण है। इस केस में बिन पर्याप्त सबूतों के कार्यकर्ताओं को पकड़ा गया और गवाहों को सिखा-पढ़ाकर केस को एक तय दिशा में मोड़ने की कोशिश हुई। 

कोर्ट ने पूरे केस पर सुनवाई कर कहा कि विष्णु की हत्या के समय लोगों ने चेहरे ढँके हुए थे। मगर जाँच अधिकारियों ने इस संबंध में कोर्ट को कुछ नहीं बतााया। उन्होंने अपनी कहानी के हिसाब से घटना को समझाने के लिए वैसे ही सबूत इकट्ठा किए और गवाहों से भी वही सब बुलवाया।

इसके बाद जस्टिस के विनोद चंद्रन और जस्टिस सी चंद्रन की पीठ ने 13 कार्यकर्ताओं को विष्णु हत्या मामले में बरी कर दिया। इन कार्यकर्ताओं के नामटी संतोष, मनोज, उर्फ कक्कोटा मनो, बीनूकुमार, हरिलाल, रंजीत कुमार, बालू महेंद्र, विपिनस सतीश कुमार, बोस, मणिकांतन, विनोद कुमार, सुभाष, शिवलाल हैं। कोर्ट ने इन्हें रिहा करते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष बुरी तरह से ये साबित करने में विफल रहा कि जो आरोप उन्होंने कार्यकर्ताओं पर लगाए वो किस आधार पर हैं।

केरल में वामपंथ और संघ

बता दें कि केरल के कई जिलों (खासकर कन्नर और तिरुनवंतपुरम) के ग्रामीण इलाकों में संघ और सीपीएम कार्यकर्ताओं के बीच आपसी झड़पों के कई मामले सामने आते रहे हैं। 2016 की रिपोर्ट में बताया गया था कि क्षेत्र में तीन दशक में दोनों पक्षों के 200 से अधिक कार्यकर्ता मारे गए थे।

2001 में दोनों पक्षों में झड़पें अचानक बढ़ी और कभी संघ कार्यरकर्ताओं पर तो कभी वामपंथियों पर हमले होने लगे। पहले साल 2001 में एक भाजपा कार्यकर्ता के पिता को मारा गया और उसके बाद खुद भाजपा कार्यकर्ता रमित को भी मौत के घाट उतार दिया गया। भाजपा ने इन हत्याओं को लेकर प्रदर्शन भी किया लेकिन सुनवाई नहीं हुई।

पुरानी रिपोर्ट्स को यदि पढ़ें तो पता चलता है कि विष्णु की हत्या आरएसएस पर हुए एक हमले के बाद हुई थी और पुलिस ने इस पर संदेह जताया था कि चूँकि आरएसएस वाले मानते हैं कि विष्णु 2001 से इलाके में आरएसएस पर होते हमलों के पीछे सक्रिय रूप से था, इसलिए हमला उन्होंने किया।

बता दें कि 1 अप्रैल 2008 से भी पहले आरएसएस कार्यालय पर एक हमला हुआ था। इसके बाद ही विष्णु की हत्या घटना घटी। 1 अप्रैल 2008 को कुछ लोगों ने कैथामुक्कू के पासपोर्ट ऑफिस के पास उसे दिनदहाड़े मारा था। वह चूँकि सीपीएम कार्यकर्ता था तो हल्ला बहुत हुआ। देखते ही देखते ही इस केस में 16 लोग आरोपित बनाए गए और तिरुवनंतपुरम अतिरिक्त सत्र न्यायालय में इसकी सुनवाई चली।

इनमें 13 को साल 2016 में कोर्ट ने दोषी माना और ज्याजातर को आजीवन कारावास की सजा दी। निचली अदालत के इस आदेश के बाद आरएसएस कार्यकर्ताओं ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। जहाँ सुनवाई के बाद कोर्ट ने पूरा केस समझा और राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता को हत्या का कारण बताया। साथ ही ये भी कहा कि पूरे केस को बरगलाकर एक नैरेटिव गढ़ने की कोशिश हुई।

मालूम हो कि विष्णु की हत्या के बाद क्षेत्र में आरएसएस पर दोबारा हमला हुआ था। 2008 में एक मोहन नाम के कार्यकर्ता पर रंजीत नाम के वामपंथी कार्यकर्ता ने अपने 12 साथियों के साथ हमला किया था। उस समय भी पुलिस ने मामले पर सुनवाई की जगह ये पड़ताल शुरू कर दी थी कि क्या वाकई मोहन विष्णु की हत्या के पीछे था।

यूपी के 5 जिलों में मोहम्मद जुबैर पर 6 FIR, दिल्ली में भी चल रहा एक मामला: जानिए सातों केस की डिटेल, हत्या की धमकी से लेकर हिन्दू घृणा तक

उत्तर प्रदेश सरकार ने मंगलवार (12 जुलाई, 2022) को ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर के खिलाफ दर्ज सात मामलों की जाँच के लिए विशेष जाँच दल (SIT) का गठन किया। सात मामलों में से दो मामले हाथरस जिले में जबकि एक-एक मामला सीतापुर, लखीमपुर खीरी, गाजियाबाद, मुजफ्फरनगर और दिल्ली में दर्ज है।

यूपी पुलिस की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि इस समय जेल प्रशासन एवं सुधार विभाग में तैनात महानिरीक्षक डॉ. प्रीतिंदर सिंह को एसआईटी का अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि पुलिस उप महानिरीक्षक अमित वर्मा को एसआईटी का सदस्य बनाया गया है। 

  • मुजफ्फरनगर: मोहम्मद ज़ुबैर ने उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के एक स्थानीय निवासी अंकुर राणा को जान से मारने की धमकी दी थी। जिसके बाद उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई। यह मामला जुलाई 2021 का है। दरअसल इजराइल-फ़िलिस्तीन के बीच चलते विवाद को लेकर सुदर्शन न्यूज द्वारा एक खबर पर मोहम्मद जुबैर ने झूठ फैलाया था। ज़ुबैर ने एक ग्राफिक को मदीना की मस्जिद बताया था जिसे लेकर काफी विवाद हुआ था। इसी संबंध में अंकुर राणा ने 24 जुलाई, 2021 को मुजफ्फरनगर जिले के चरथावल थाने में FIR दर्ज कराई। 

राणा ने बताया कि 13 मई, 2021 को सुदर्शन न्यूज़ द्वारा इजराइल-फिलिस्तीन के विवाद को लेकर चलाई गई खबर को राणा ने देखा। इसके बाद उन्हें ज़ुबैर द्वारा चलाई गई गलत खबर के विषय में जानकारी मिली। इस विषय में अंकुर ने जब ज़ुबैर से बात की और सवाल किया तो ज़ुबैर ने उनके साथ गाली-गलौज की तथा इस मामले में बीच में पड़ने पर जान से मारने की धमकी भी दी। इसके बाद अंकुर ने शिकायत दर्ज करवाई। इसेक बाद ज़ुबैर के खिलाफ आईपीसी की धारा 192, 504 और 506 के तहत FIR दर्ज की गई। मामले में चार्जशीट फाइळ कर दी गई है और कोर्ट में ट्रायल पेंडिंग है।

  • गाजियाबाद: जुबैर के खिलाफ गाजियाबाद के लोनी बॉर्डर थाने में केस दर्ज है। यह मामला जून 2021 का है, जब मोहम्मद ज़ुबैर, राणा अय्यूब, सबा नक्वी समेत ‘द वायर’ और ‘इंडियन एक्सप्रेस’ जैसे मीडिया संस्थानों ने एक मुस्लिम व्यक्ति की कुछ मुस्लिम युवकों द्वारा पिटाई को लेकर फेक न्यूज चलाई थी। इन लोगों ने इंटरनेट पर एक बूढ़े मुस्लिम व्यक्ति की पिटते हुए वीडियो डालकर लिखा था कि इस व्यक्ति को हिंदू युवकों द्वारा ‘जय श्री राम’ बोलने के लिए दबाव बनाया जा रहा है तथा मारा-पीटा जा रहा है। बाद में वीडियो का खुलासा सामने आया कि उस व्यक्ति को कुछ मुस्लिम युवकों द्वारा ही ताबीज़ बनाने को लेकर हुए विवाद में मारा-पीटा गया था। जुबैर पर आईपीसी की धारा 153, 153-A, 295-A, 505,120-B और 34 के तहत FIR दर्ज की गई। मामले में जाँच जारी है।
  • हाथरस के सिकन्दराराऊ थाने में दर्ज शिकायत: मामला 2018 का है। जुबैर की भड़काऊ पोस्ट के बाद पुरदिलनगर में जुमे की नमाज के बाद खूब वबाल हुआ था। उपद्रवियों ने पुलिस पर पथराव किया था। इस मामले में जुबैर को आरोपित बनाया गया था। उन पर आईपीसी की धारा 147, 149, 153A, 353, 188 और 120B के तहत मामला दर्ज किया गया है। मामले में जाँच जारी है।
  • हाथरस के कोतवाली में दर्ज शिकायत: कोतवाली इलाके में उनके खिलाफ आईपीसी की धारा 153ए, 295ए और 298 के तहत मामला दर्ज किया गया है। इसके अलावा आईटी एक्च की धारा 67 के तहत भी मामला दर्ज किया गया है। सीजेएम कोर्ट से पुलिस बी वारंट जारी करा चुकी है। सीतापुर जेल में वारंट दाखिल हो चुका है। 14 जुलाई को पुलिस उन्हें कोर्ट में पेश करेगी।
  • लखीमपुर खीरी: लखीमपुर खीरी पुलिस ने जुबैर के खिलाफ 2021 में दुश्मनी को बढ़ावा देने के लिए दर्ज एक FIR के संबंध में अदालत में पेश होने के लिए वारंट जारी किया था। मोहम्मद जुबैर के खिलाफ मामला 25 नवंबर को स्थानीय पत्रकार द्वारा दर्ज किया गया था। सोमवार को मोहम्मद जुबैर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया था। अभियोजन पक्ष ने पुलिस हिरासत की माँग की थी, अदालत ने उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
  • सीतापुर: जुबैर को एक हफ्ते पहले दिल्ली पुलिस ने धार्मिक भावनाओं के उल्लंघन के आरोप में हिरासत में लिया था। सीतापुर के खैराबाद थाने में आईपीसी की धारा 295ए और आईटी एक्ट की धारा 67 के तहत मामला दर्ज किया गया था। उत्तर प्रदेश में सीतापुर पुलिस ने साधुओं के खिलाफ कथित रूप से आपत्तिजनक ट्वीट करने से जुड़े एक मामले में उन्हें हिरासत में लेने का अनुरोध किया था। जुबैर को राहत देते हुए अंतरिम जमानत की अवधि अगले आदेश तक बढ़ा दी है। मामले की अगली सुनवाई 7 सितंबर को होगी।
  • दिल्ली: दिल्ली पुलिस ने 2018 में हिंदू देवता के खिलाफ आपत्तिजनक ट्वीट करने के आरोप में जुबैर के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। मामले में 15 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।