Home Blog Page 2561

कानपुर में 5 बच्चों और पत्नी के साथ मार डाले गए थे विशाख सिंह, 3 बार कॉन्ग्रेस पार्षद रहा पाल गिरफ्तार: 1984 के सिख विरोधी दंगों में 4 और गिरफ्तार

1984 के सिख विरोधी दंगों (Anti Sikh Riots) के दौरान कानपुर के दबौली और गोविंद नगर इलाकों में 13 लोगों की निर्मम हत्या कर दी गई थी। इस मामले में मंगलवार (12 जुलाई 2022) को विशेष जाँच दल (SIT) ने चार और आरोपितों को गिरफ्तार किया। इनमें से एक तीन बार कॉन्ग्रेस से पार्षद रह चुका है। उसकी उम्र 70 साल है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए चारों आरोपितों की पहचान राजन लाल पांडे, दीपक दम्मूलाल, धीरेंद्र तिवारी और कैलाश पाल के रूप में हुई है। इनमें पांडे 85 साल का है। अन्य उम्र 70-75 साल के बीच है। एसआईटी के डीआईजी बालेंदु भूषण सिंह के अनुसार, एसआईटी की टीम ने चार हत्याकांडों में गिरफ्तारियाँ की हैं। 11 मामलों में 73 आरोपित हैं, जिनमें से टीम ने अब तक 21 को हिरासत में लिया है।

पांडे, दम्मूलाल और तिवारी को तीन मामलों में छह लोगों की बेरहमी से हत्या करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है, जबकि कॉन्ग्रेस के पूर्व पार्षद कैलाश पाल को दबौली में ​हुए हत्याकांड के लिए गिरफ्तार किया गया है। पाल ने कथित तौर पर विशाख सिंह, उसकी पत्नी सिमरन कौर, बेटी गुरबचन कौर और उसके चार बेटों की हत्या कर दी थी।

बताया जा रहा है कि पाल और दो अन्य पार्षद भीड़ को सिंह के घर ले गए थे, जहाँ उन्होंने पहले उनके (सिंह) पैसे और अन्य कीमती सामान चुराए। फिर परिवार के सात सदस्यों की हत्या कर दी। विशाख सिंह के दो बेटे महेंद्र सिंह और अवतार सिंह जीवित हैं। उन्होंने बताया कि पाल ने इस भीड़ का नेतृत्व किया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, चारों आरोपितों को गिरफ्तार करने वाली एसआईटी टीम के अधिकारियों सूर्य प्रताप सिंह, सुनील कनौजिया, जितेंद्र कुमार सिंह और संजय मौर्य को सम्मानित किया जाएगा। एसआईटी के डीआईजी ने कहा कि चारों अधिकारियों के नेतृत्व वाली टीमों को 10,000 रुपए का नकद इनाम मिलेगा।

गौरतलब है कि 1984 के सिख विरोधी दंगे तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की हत्या के बाद हुए थे। ऑपरेशन ब्लू स्टार का बदला लेने के लिए 31 अक्टूबर 1984 को इंदिरा गाँधी के सिख बॉडीगार्ड ने उनकी हत्या कर दी थी। इसके बाद 1 नवंबर से 4 नवंबर तक पूरे देश में सिखों की बेरहमी से हत्या की गई। सरकारी आँकड़ें बताते हैं कि 3350 सिखों की बेरहमी से हत्या की गई थी। हिंसक भीड़ का नेतृत्व करने के आरोप कॉग्रेस नेताओं पर लगे थे। कॉन्ग्रेस नेता सज्जन कुमार और जगदीश टाइटलर पर सीधे तौर पर दंगों की साजिश रचने में बड़ी भूमिका का आरोप है। हालाँकि, कॉन्ग्रेस ने दंगों को सही ठहराने की कोशिश की थी। कॉन्ग्रेस नेता सज्जन कुमार को 1984 सिख नरसंहार से जुड़े मामले में आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई जा चुकी है।

जिस कुत्ते को रोज देती थी खाना, उसी ने मार डाला: 80 साल की मालकिन को नोंचता रहा पालतू Pitbull, शरीर पर मिले 13 बड़े घाव

लखनऊ में 80 साल की रिटायर्ड शिक्षिका सुशीला त्रिपाठी को उनके ही पालतू कुत्ते ने मार डाला। पिटबुल (Pitbull) डॉग ने उन पर हमला तब किया, जब वे उसे खाना देने गईं थी। उन्हें गंभीर रूप से घायल अवस्था में अस्पताल ले जाया गया, जहॉं डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। उल्लेखनीय है कि अपनी आक्रामकता के कारण पिटबुल दुनियाभर के 40 से अधिक देशों में बैन है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये घटना लखनऊ के कैसरबाग इलाके के अंतर्गत आने वाले बंगाली टोला की है। सुशील त्रिपाठी का परिवार यहीं पर रहता है। उनके बेटे अमित ने दो कुत्ते पाल रखे हैं। इनमें से एक लेब्राडोर है तो दूसरा पिटबुल। मंगलवार (12 जुलाई 2022) को शाम के 5 बज रहे थे। अमित एक जिम ट्रेनर है और हमले के समय वह जिम गया हुआ था। सुशीला कुत्ते को खाना देने के लिए उसके कमरे में गईं। इसी दौरान पिटबुल अचानक से हिंसक हो गया।

उसने हमला कर दिया। चीख-चिल्लाहट सुनकर घर की नौकरानी ने जाकर देखा तो पिटबुल उन्हें नोच रहा था। इसके बाद उसने तुरंत अमित को फोन किया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला है कि सुशीला के सर, चेहरे, हाथों और जाँघो पर नोचने के 13 बड़े घाव थे। यह कुत्ता 3 साल से उनके साथ रह रहा था। उसे खाना देना उनका रोज का काम था।

41 देशों में पिटबुल कुत्ता है बैन

पिटबुल नस्ल के कुत्ते की आक्रामकता को देखते हुए अमेरिकी, जर्मनी, आयरलैंड, इटली, रोमानिया समेत दुनियाभर के 41 देशों में इस पर प्रतिबंध है। हालाँकि, लखनऊ में ये बहुत ही आसानी से उपलब्ध है। ये अपने शिकार को पकड़कर जबड़े को लॉक कर लेता है, इस कारण से उसे छुड़ा पाना काफी मुश्किल हो जाता है। इस घटना को लेकर मेडिकल कॉलेज चौकी के प्रभारी सत्यपाल सिंह ने बताया कि महिला को मृत अवस्था में अस्पताल लाया गया था।

पत्थरबाजों को ₹1000, बमबाजी के लिए ₹5000: कानपुर में जुमे पर हुई हिंसा का ‘रेट कार्ड’ आया सामने, दंगों की दी गई थी ट्रेनिंग

उत्तर प्रदेश के कानपुर में 3 जून, 2022 को हुई हिंसा को लेकर मंगलवार को कोर्ट में SIT की केस डायरी दाखिल की गई। जिस पर कोर्ट में सुनवाई के दौरान कई खुलासे हुए हैं, जिसमें यह बात सामने आई है कि उपद्रवियों की ओर से पत्थरबाजी से लेकर बमबाजी तक के रेट निर्धारित किए गए थे। मामले में केस डायरी लोक अभियोजक दिनेश अग्रवाल ने दायर की थी।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कोर्ट में दाखिल की गई SIT की केस डायरी में इस बात का जिक्र है कि कानपुर में हुई हिंसा को लेकर पूरी प्लानिंग की गई थी, जिसमें फाइनेंस से लेकर हर व्यक्ति की अलग-अलग जिम्मेदारी तय की गई थी। यहाँ तक कि उपद्रव करने वाले को किस तरह से रकम देनी है और उन्हें कैसे काम करना है और उसके लिए कितने पैसे मिलेंगे, इसका भी रेट पहले से तय किया गया था।

केस डायरी में इस बात का उल्लेख है कि पथराव करने वालों को कथित तौर पर 500-1,000 रुपए दिए गए थे और जिन्होंने दंगों के दौरान पेट्रोल बम का इस्तेमाल किया था, उन्हें और ठेले पर पत्थर भरकर लाने वालों को 5,000 रुपए का भुगतान किया गया था। इसके अलावा SIT की केस डायरी में इस बात का भी दावा किया गया है कि भीड़ बढ़ाने के लिए युवाओं के साथ-साथ हिंसा में नाबालिगों को भी शामिल किया गया था। नाबालिगों को केवल हिंसा में आगे रखने और पथराव करने के लिए रखा गया था।

वहीं पुलिस की जाँच में यह बात भी सामने आई है कि बिल्डर हाजी वसी और हयात जफर हाशमी ने बवाल में फंडिंग के लिए संपत्ति बेचकर एक करोड़ 30 लाख रुपए जुटाए थे। इसी से पत्थरबाजों को 1000 से 5000 तक रुपए दिए गए थे। एसआईटी को पता चला है कि बवाल के एक दिन पहले हाजी वसी ने 34 लाख रुपए की दो संपत्तियां बेची थीं। पुलिस इसकी भी जाँच में जुटी है। पुलिस इन सभी संपत्तियों की जाँच के लिए संबंधित विभाग से संपर्क कर रिपोर्ट माँगा है।

साथ ही एसआईटी की केस डायरी से इस बात का भी खुलासा हुआ है कि पकड़े जाने पर दंगाइयों को मुफ्त कानूनी मदद और परिवार को आर्थिक मदद का भी भरोसा दिलाया गया था। केस डायरी में आगे उल्लेख किया गया है कि उपद्रवियों को हंगामे के लिए सात से नौ दिन का प्रशिक्षण भी दिया गया था। इस काम के लिए बाबा बिरयानी के मालिक मुख्तार अहमद और हाजी वशी के द्वारा नियुक्त किए गए लोगों ने उपद्रवियों को आश्वासन दिया था।

मीडिया रिपोर्ट में यह बात भी सामने आई है कि हिंसा कराने के लिए हाजी वशी के मैनेजर अफजाल ने पूरी टीम तैयार की थी और उपद्रवियों को 10 लाख रुपए एडवांस के तौर पर भी दिए थे। पूरे इलाके में हिंसा का खाका कुछ इस तरह से तैयार किया गया था कि हयात जफर हाशमी और निजाम कुरैशी को बंदी सफल कराने के निर्देश दिए गए थे, तो वहीं बाबा बिरयानी का मालिक मुख्तार अहमद, उसका बेटा महमूद, हाजी वशी और मैनेजर अफजाल दंगे का पूरा मैनेजमेंट संभाल रहे थे और हिंसा कराने के लिए पूरी तैयारियों की जिम्मेदारी लिए थे।

यमुना के द्वीप पर जन्मा साँवला लड़का, निषाद कन्या के बेटे की जयंती यूँ बन गई ‘गुरु पूर्णिमा’: कहानी भीष्म पितामह के उन्हीं भाई की

प्रत्येक वर्ष आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को गुरु पूर्णिमा का त्यौहार मनाया जा रहा है। लेकिन क्यों? हमें यह भी जानना चाहिए कि इसके पीछे के कारण क्या हैं। दरअसल, ये महर्षि वेद-व्यास के जन्मदिवस के रूप में मनाया जाता है। वही महर्षि वेद-व्यास, जिन्होंने वेदों का विभाजन किया और महाभारत जैसे महान ग्रन्थ की रचना की। वो किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं लेकिन अब तक आपने उनके बारे में जनश्रुतियों में ही सुना होगा।

लेकिन, हमारी अति-प्राचीन पुस्तकें क्या कहती हैं? दरअसल, अच्छे से समझाने के लिए हमें कहानी तब से शुरू करनी पड़ेगी, जब महाराज शांतनु के दोनों बेटे विचित्रवीर्य और चित्रांगद की मृत्यु हो गई थी। चूँकि, हमेशा राज्य के प्रति वफादार रहने और आजीवन ब्रह्मचारी रहने की प्रतिज्ञा कर के देवव्रत भीष्म ने अपने पिता का सत्यवती से रिश्ता कराया था, ऐसे में उन्होंने राजा बनने से इनकार कर दिया। कुछ समय पहले भीष्म ने जो सब त्यागा वो उनके सामने फिर से खड़ा था।

माँ सत्यवती की बातों को भी भीष्म ने प्रतिज्ञाबद्ध होने के कारण मानने से इनकार कर दिया, जिससे समस्या आ गई कि अब कुरुवंश का राजा कौन होगा? विचित्रवीर्य और चित्रांगद की पत्नियाँ अम्बिका और अम्बालिका विधवा हो चुकी थीं। मनुस्मृति ने ऐसे समय में ‘नियोग विधि’ का प्रावधान समझाया था, जो कलियुग में इसीलिए लागू नहीं होता क्योंकि लोग अधिक भ्रष्ट और कामातुर हो चुके हैं।

नियोग विधि से उन दोनों से संतान उत्पन्न करने के लिए किसी ज्ञानी व्यक्ति की आवश्यकता थी। ठीक इसी समय सत्यवती ने अपने सौतेले बेटे भीष्म को बताया कि उनका एक और बेटा है, जो विवाह के पूर्व ही उत्पन्न हुआ था। ज्ञान, तपस्या, वेद-वेदांग और नीति-नियमों, सब में निपुण। जिन्होंने जन्म के साथ ही अपने पिता से सारी शिक्षाएँ प्राप्त कर ली थीं। सत्यवती ने कहा कि उन्हें बुला कर संतान उत्पन्न करने की प्रक्रिया अपनाई जाए।

इस कहानी को और अच्छे से जानने के लिए थोड़ा और पीछे चलते हैं। सत्यवती चूँकि मछली के पेट से निकली थीं, उनमें वैसी ही दुर्गन्ध थी लेकिन सुंदरता बेमिसाल थी। निषादराज की पुत्री थीं और वो नाव भी चलाया करती थीं। इसी दौरान एक बार महर्षि पराशर उनकी नौका पर बैठे और मोहित हो गए। सत्यवती ने लोक-लाज के डर से पूछा कि यमुना नदी के बीच में स्थित नौका में प्रेम-विहार करने से चारों तरफ से लोग देखेंगे, उनका क्या?

महर्षि पराशर ने तत्क्षण कोहरा उत्पन्न किया और उसी नौका पर उन दोनों का समागम हुआ। इसके बाद जो पुत्र उत्पन्न हुआ, उसका नाम था कृष्ण द्वैपायन। चूँकि वह साँवले थे, इसीलिए कृष्ण। और उनका जन्म यमुना के एक द्वीप पर हुआ था, इसीलिए द्वैपायन। यही श्री कृष्ण द्वैपायन बाद में वेद-व्यास की पदवी को प्राप्त हुए और वेदों का विभाजन किया। ध्यान दीजिए, रचना नहीं की क्योंकि वेद आदिकाल से हैं, ऐसा माना जाता है।

दरअसल, वेद-व्यास एक पदवी ही है और हर मन्वन्तर के एक व्यास होते हैं जो वेदों का विभाजन के साथ-साथ धर्म का पाठ पढ़ाते हैं। पहले मन्वन्तर में ख़ुद ब्रह्मा ही वेद-व्यास हुए थे। इसी तरह वर्तमान मन्वन्तर में कृष्ण द्वैपायन वेद व्यास हैं। क्या आपको पता है कि अगले मन्वन्तर में कौन वेद-व्यास होंगे? अश्वस्थामा। प्रायश्चित और तपस्या से दग्ध होकर अपने पापों को धो कर वो इस पदवी को प्राप्त होंगे।

अब वापस लौटते हैं वहाँ, जहाँ सत्यवती ने भीष्म को अपने बेटे के बारे में बताया। निर्णय हुआ और वेद-व्यास का स्मरण करते मात्र वो प्रकट हुए। माँ को संकट में देख नियोग विधि से संतान उत्पन्न करने की बात कही और साथ ही कुरुकुल का अंश होने से बचाया। चूँकि वो भयंकर रूप लेकर समागम हेतु पहुँचे थे, अम्बिका ने आँखें बंद कर लीं और उनके पुत्र धृतराष्ट्र अंधे ही पैदा हुआ। अब अँधा व्यक्ति राज कैसे चलाएगा, इसीलिए उन्होंने अम्बालिका के साथ ‘नियोग विधि’ का पालन किया।

अम्बालिका का डर के मारे शरीर ही पीला पड़ गया और इसीलिए उनके पुत्र पाण्डु पीलिया ग्रसित ही पैदा हुए। उनका शरीर पीला ही था। हालाँकि, पाण्डु बाद में आगे चल कर चक्रवर्ती राजा हुए और भरतखण्ड का विस्तार किया। माँ सत्यवती ने फिर से संतान उत्पन्न करने को कहा। इस बार अम्बालिका ने अपनी जगह किसी दासी को भेज दिया, जिन्होंने वेद-व्यास की खूब सेवा की और डरी भी नहीं।

इस बार महात्मा विदुर पैदा हुए। उनका मन धर्म में हमेशा लगा रहता था और आज भी विदुर-नीति वैसे ही विख्यात है, जैसे चाणक्य नीति। इसी तरह धृतराष्ट्र, पाण्डु और विदुर वेद-व्यास के ही संतान हुए। उनसे ही कौरव और पांडवों का जन्म हुआ, जिनका युद्ध महभारत नाम से प्रसिद्ध हुआ। वेद-व्यास अमर हैं। उस समय भी उन्होंने सब कुछ देखा-सुना था, इसीलिए महाभारत को उन्होंने इतिहास बताया है।

जाते-जाते एक बात बता दें कि शांतनु की पहली पत्नी गंगा से उनके पुत्र भीष्म हुए थे। बाद में उन्होंने सत्यवती से शादी की। सत्यवती से उनके पुत्र विचित्रवीर्य और चित्रांगद हुए। शादी से पहले सत्यवती और महर्षि पराशर के संगम से वेद-व्यास का जन्म हुआ था। जिनका जन्मदिवस गुरु पूर्णिमा बना। इस तरह भीष्म और वेद व्यास भाई हुए क्योंकि वेद-व्यास की माँ भीष्म की सौतेली माँ थीं। महाभारत में कई ऐसे मौके आपको मिलेंगे, जब वेद व्यास अचानक से परिदृश्य में आ जाते हैं।

घर में घुस कर सैयद ने सास और बीवी पर की फायरिंग, फिर साले को फँसाने के लिए खुद को ही मार ली गोली: पहले भी किया जा चुका है शहर बदर

मुंबई में मंगलवार (12 जुलाई, 2022) को पैसे को लेकर हुए विवाद में गोलियाँ चलाने की खबर सामने आई है। घटना मुंबई के धारावी इलाके की है। घटनास्थल पर पहुँची पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार आरोपित की पहचान खोयमुद्दीन सैयद के रूप में हुई है और उसकी उम्र 32 साल बताई जा रही है।

जानकारी के मुताबिक, खोयमुद्दीन मंगलवार सुबह करीब सात बजे सैयद पीएमजीपी कॉलोनी स्थित अपनी सास के घर में घुस गया। यहाँ उसकी 30 वर्षीय बीवी नाजनीन रह रही है। पुलिस ने बताया कि सैयद ने अपनी बीबी को 40,000 रुपए दिए था। कुछ समय पहले शौहर-बीवी के बीच कुछ बातों को लेकर कहासुनी हो गई थी, जिसके बाद नाजनीन ने सैयद से कहा था कि वह उसके पैसे वापस कर देगी। सैयद वही पैसे लेने वहाँ पर आया था।

इसी दौरान दोनों के बीच तेज बहस हो गई। जिसके बाद सैयद गुस्से में अपनी सास के घर से बाहर निकल गया। उसकी सास का घर चौथी मंजिल पर था। वह वहाँ से उतर कर जब तक सड़क पर पहुँचा तब तक उसकी बीवी और सास उसे बुरा-भला कहती रही। इससे बौखलाए सैयद ने अपनी रिवॉल्वर निकाली और उनकी तरफ फायरिंग कर दी। हालाँकि, पुलिस अधिकारी का कहना है कि गोली किसी को भी नहीं लगी। 

इधर सैयद की सास ने इस बारे में पुलिस को सूचना उधर दी, उसने अपने आप को पीड़ित साबित करने के लिए खुद से अपनी बाएँ हाथ पर गोली मार ली। इसके कुछ देर बाद सैयद ने भी पुलिस हेल्पलाइन 100 पर डायल किया और दावा किया कि उसके साले पप्पू उर्फ ​​शोएब शेख ने उसे गोली मार दी, जिसमें उसका बायाँ हाथ घायल हो गया।

धारावी पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ निरीक्षक विजय कंदलगाँवकर ने मामले में जानकारी देते हुए बताया, “हमें संदेह है कि सैयद के बाएँ हाथ में जो गोली लगी है, वह उसके खुद के द्वारा मारी गई है। हालाँकि, डॉक्टरों ने उसे एक दिन के लिए सायन अस्पताल में निगरानी में रखा है।” अधिकारी ने कहा, “कई लोगों के बयान दर्ज करने के बाद, हमने सैयद पर उसकी सास की शिकायत पर हत्या के प्रयास के साथ-साथ आर्म्स एक्ट की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।”

इसके साथ ही पुलिस ने यह भी बताया कि सैयद को 10 फरवरी, 2021 को दो साल के लिए शहर की सीमा से बाहर कर दिया गया था। तब से वह कर्जत में रह रहा था। उस पर मारपीट और लूट समेत 10 मामले दर्ज हैं।

श्रीलंका में इमरजेंसी, देश छोड़ मालदीव भागे राष्ट्रपति राजपक्षे: भारतीय उच्चायोग ने कहा- हम जनता के साथ

श्रीलंका (Sri Lanka) के राष्‍ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे (Gotabaya Rajapaksa) देश छोड़कर मालदीव पहुँच गए हैं। श्रीलंकाई प्रधानमंत्री के मीडिया प्रभाग ने इसकी जानकारी दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, श्रीलंका की वायुसेना के विशेष विमान की मदद से गोटाबाया राजपक्षे पत्‍नी और बॉडीगार्ड के साथ मालदीव (Maldives) की राजधानी माले पहुँचे हैं।

राष्ट्रपति के भागने के बाद श्रीलंका ने ‘स्टेट ऑफ इमरजेंसी’ की घोषणा कर दी है। साथ ही राजधानी कोलंबो सहित देश के पश्चिमी इलाके में अनिश्चितकाल के लिए कर्फ्यू भी लगा दिया गया है।

इसी बीच श्रीलंका के सोशल मीडिया में दावा किया जा रहा है कि भारत ने गोटाबाया को मालदीव भागने में मदद की। इस अफवाह पर भारतीय उच्‍चायोग ने तत्‍काल ट्वीट करके इसका पुरजोर खंडन किया है।

श्रीलंका में भारतीय उच्‍चायोग ने ट्वीट करके कहा, “उच्‍चायोग आधारहीन और अटकलों पर आधारित मीडिया में आई उन सभी खबरों को खंडन करता है, जिसमें कहा गया है कि भारत ने गोटाबाया राजपक्षे और बासिल राजपक्षे के श्रीलंका छोड़कर जाने में मदद की। यह बार-बार कहा गया है कि भारत श्रीलंका की जनता का समर्थन करना जारी रखेगा, क्‍योंकि वे समृद्धि करना चाहते हैं। लोकतांत्रिक तरीके और मूल्‍यों के जरिए प्रगति चाहते हैं। साथ ही लोकतांत्रिक संस्‍थान और संवैधानिक ढाँचा विकस‍ित करना चाहते हैं।”

रिपोर्ट्स के मुताबिक, गोटबाया राजपक्षे राष्ट्रपति पद से इस्तीफे के कागज पर हस्ताक्षर कर चुके हैं। इसका ऐलान आज किया जाएगा। राजपक्षे के इस्तीफे के बाद अब देश में राष्ट्रपति की कमान संसद के स्पीकर महिंदा यापा अभयवर्दना के हाथों में आ जाएगी। गोटबाया को 2019 में राष्ट्रपति के रूप में चुना गया था। जानकारी के मुताबिक, राजपक्षे के देश छोड़ने की खबर के बाद से जनता में जबरदस्त गुस्सा है। प्रदर्शनकारी अब श्रीलंकाई प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर आगे बढ़ रहे हैं।

बता दें कि मंगलवार (12 जुलाई 2022) तड़के राष्ट्रपति के भाई और पूर्व वित्त मंत्री बासिल राजपक्षे ने अमेरिका जाने की कोशिश की थी, लेकिन कोलंबो के मुख्य हवाईअड्डे के वीवीआईपी लाउंज के जरिए उन्हें देश छोड़ने से रोक दिया गया। इसके बाद राजपक्षे को हवाईअड्डा छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा था।

गौरतलब है कि श्रीलंका में आर्थिक संकट को लेकर लोगों में उपजे असंतोष के बाद राष्ट्रपति भवन पर प्रदर्शनकारियों ने कब्जा कर लिया है। कब्जे के बाद मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि राष्ट्रपति भवन में रखी गोटबाया राजपक्षे की करोड़ों रुपए की नकदी प्रदर्शनकारियों के हाथ लगी है। इसका एक वीडियो भी वायरल भी सामने आया है। वीडियो में देखा जा सकता है राष्ट्रपति भवन पर कब्जा करने वाले प्रदर्शनकारियों में से एक नोटों की गड्डियाँ गिन रहा है। वहीं एक प्रदर्शनकारी नोटों का बंडल दिखा रहा है।

मुँह में बाँध रहे थे रस्सी, गाय को काटने की थी पूरी तैयारी, अचानक कुछ हुआ ऐसा कि कसाई की जान पर बन आई: देखिए Video

पाकिस्तान में बकरीद पर एक गाय की कुर्बानी देने की तैयारी हो रही थी। अचानक कुछ ऐसा हुआ कि कसाई की जान पर ही बन आई। यह वीडियो सोशल मीडिया (Social Media) पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो कराची के गुलिस्‍तान-ए-जौहर इलाके का बताया जा रहा है। वीडियो में गाय कसाई को काफी दूर तक घसीटते हुए ले जाती दिखाई दे रही है और उसे बचाने के लिए कुछ लोग पीछे-पीछे दौड़ते नजर आ रहे हैं।

बताया जा रहा है कि ये घटना तब हुई जब बकरीद पर गाय की कुर्बानी देने की तैयारी हो रही थी। वीडियो में आप देख सकते हैं कि कुछ लोग गाय का मुँह में बाँधने की कोशिश कर रहे हैं। कुछ लोग पहले पैर बाँधने को भी कह रहे है। वीडियो में आसपास अन्य पशु भी नजर आ रहे हैं। मुँह में रस्सी बाँधने वक्त गाय संघर्ष करने लगती है। अचानक गाय एक जोर का झटका देते हुए भागने लगी। इस दौरान रस्सी में कसाई भी फँस गया और गाय के साथ ही काफी दूर तक घिसटता रहा।

ये सब देख वहाँ मौजूद कुछ और लोग भी उसे बचाने के लिए शोर मचाते हुए गाय के पीछ भागे। थोड़ी दूर जाकर गाय की रस्सी में फँसा शख्स बाहर निकल पाया और उसे बचाने आए लोगों ने गाय को नियंत्रित किया। बाद के एक सीसीटीवी फुटेज में देखा जा रहा है कि गाय रोड पर आ गई है और कसाई को एक जगह पर बहुत सारे लोग घेरे हुए हैं। कसाई बुरी तरह जख्मी है। लोग मदद के लिए शोर मचा रहे हैं।

सुशांत को ड्रग्स के लिए ‘पागल’ बनाया, गांजा देती थी रिया चकवर्ती: NCB ने बताया- पूजा सामग्री के नाम पर खरीदे गए ड्रग्स

सुशांत सिंह राजपूत केस में नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने चार्जशीट का ड्राफ्ट दाखिल कर दिया है। इसमें रिया चक्रवर्ती और उनके भाई शौविक समेत 35 लोगों पर 38 आरोप लगाए गए हैं। रिया के ऊपर सुशांत को ड्रग्स मुहैया कराने का, उन्हें ड्रग के लिए पागल बनाने का और ड्रग्स खरीदने के लिए उनके (सुशांत के) बैंक अकॉउंट का प्रयोग करने का आरोप लगा है।

एनसीबी ने पाया है कि रिया ने अपने भाई शौविक, सैमुअल मिरांडा और दीपेश सावंत समेत कुछ और लोगों से सुशांत के गांजा खरीदकर उन्हें पेमेंट दी। ये भुगतान मार्च 2020 से सितंबर 2020 में हुआ। अब उनके विरुद्ध एनडीपीएस अधिनियम 1985 की धारा 8 (सी)के साथ 20 (ब) (2), 27 ए, 28, 29 और 30 लगी है।

इतना ही नहीं, ये भी कहा गया है कि सारे आरोपित मार्च 2020 से दिसंबर 2020 के दौरान आपराधिक साजिश में शामिल हुए जिसका मकसद एक दूसरे से नशीले पदार्थ खरीदकर उनकी बिक्री बॉलीवुड समेत अन्य हाई सोसायटी में करना था।

रिया के भाई पर आरोप लगा है कि वो ड्रग तस्करों के साथ संपर्क में था और गांजा, चरस की डिलीवरी के लिए ऑर्डर देता था। उसने अब्देल बासित, कैजान इब्राहिम, कर्मजीत सिंह आनंद और सूर्यादीप मल्होत्रा समेत अन्य लोगों से गांजा की डिलीवरी लेकर उसे सुशांत को सौंपा था।

इसके बाद सुशांत के दोस्त सिद्धार्थ पिठानी पर भी एनसीबी ने आरोप लगाए हैं कि वो ड्रग की लेन-देन करने वालों यानी कि रिया, शौविक, दीपेश के सीधे संपर्क में था। उसने कोटक बैंक के अकॉउंट से ड्रग खरीदे और उन्हें ट्रांजैक्शन में पूजा सामग्री के तौर पर दिखाया।

गौरतलब है कि साल 2020 में सुशांत सिंह राजपूत अपने अपार्टमेंट में मृत पाए गए थे। कहा गया था कि उन्होंने आत्महत्या की। हालाँकि उनके फैन्स ने इस पर सवाल खड़े किए और ड्रग एंगल पर पड़ताल होना शुरू हुई। धीरे-धीरे सुशांत के दोस्त से लेकर गर्लफ्रेंड सबका नाम एनसीबी ने नोट किया और कई बॉलीवुड हस्तियों से भी ड्रग्स को लेकर पूछताछ हुई। इसके बाद रिया को 8 सितंबर 2020 को गिरफ्तार किया गया और उन्हें जमानत 7 अक्टूबर को मिली थी। ये जमानच 1 लाख रुपए के निजी मुचलके पर दी गई थी। साथ ही शर्त रखी गई थी कि अगर रिया कहीं बाहर गईं तो उन्हें मंजूरी लेनी होगी और जब भी उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा तो हाजिर होना होगा।

No2Hijab: ईरान में हिजाब से आजादी के लिए मुस्लिम औरतों की क्रांति, सोशल मीडिया में चेहरा दिखाकर Video/फोटो शेयर कर रहीं

ईरान की औरतें हिजाब से आजादी चाहती हैं। वे हिजाब कानून के विरोध में सोशल मीडिया में तस्वीरें शेयर कर रही हैं, जिनमें उनका चेहरा दिखाई देता है। ईरान के रूढ़िवादी कानून के मुताबिक सार्व​जनिक तौर पर महिलाओं के लिए अपना बाल ढंकना अनिवार्य है।

ईरान की महिलाएँ (Iranian Women) सख्त नियमों के विरोध में हिजाब उतारते हुए खुद की तस्वीरें और वीडियो साझा कर रही हैं। कई महिलाएँ हिजाब निकालकर हवा में लहराती हुई दिख रही हैं। इस विरोध-प्रदर्शन की कई तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं।

ईरान के अधिकारियों ने 12 जुलाई को ‘हिजाब और शुद्धता दिवस’ ​​(Hijab and Chastity Day) के रूप में घोषित किया था। इसका तहत कार्यक्रम आयोजित कर महिलाओं को हिजाब कानून का पालन करने का संदेश दिया गया। लेहकन इस दिन भी ईरान में महिलाएँ हिजाब उतारकर विरोध कर करती दिखाई दीं। कुछ पुरुष भी इस प्रदर्शन में उनका साथ देते हुए नजर आए।

सोशल मीडिया पर महिलाओं ने कई वीडियो शेयर किए हैं। इसमें महिला खुले बालों में दिखाई दे रही हैं। सार्वजनिक जगहों पर वे हिजाब को उड़ाते हुए नजर आ रही हैं। इस दौरान कुछ कट्टरपंथी मुस्लिम उनका विरोध करते हुए दिखाई दे रहे हैं। इसके बावजूद वह डरी नहीं और उनका डटकर सामना करती हुई नजर आ रही हैं।

ईरानी-अमेरिकी पत्रकार और महिला अधिकार कार्यकर्ता मसीह अलीनेजाद इस कानून के खिलाफ हमेशा से मुखर रही हैं। वह सालों से इस प्रथा का विरोध करती आ रही हैं और इसे बदलने के लिए महिलाओं के साथ खड़ी हैं। उन्होंने ट्वीट किया, “ईरानी महिलाएँ अपना हिजाब हटाकर देश की सड़कों पर No2Hijab कहकर ईरान की सरकार को झुका देंगी। इसे महिला क्रांति कहा जाता है। ईरान में Walking Unveiled अपराध है। ईरानी पुरुष भी हमारे साथ आएँगे।”

उल्लेखनीय है कि ईरान में 1979 की क्रांति के बाद से लागू इस्लामिक लॉ के तहत हिजाब पहनना अनिवार्य है। ईरान के कट्टरपंथी इसके विरोध को इस्लामिक रिपब्लिक के खिलाफ पश्चिम की ‘सॉफ्ट वॉर’ मानते हैं। यदि कोई महिला हिजाब नहीं पहनती तो उसे जुर्माने से लेकर कारावास तक की सजा हो सकती है।

सद्भावना रैली में अजमेर दरगाह का ‘भड़काऊ’ सरवर चिश्ती भी दिखा: कहा था- मुस्लिम बर्दाश्त नहीं करेंगे, पूरा भारत हिल जाएगा

राजस्थान के उदयपुर में कन्हैया लाल की निर्मम हत्या के बाद मंगलवार (12 जुलाई 2022) को अजमेर में एक सद्भावना रैली निकाली गई। इसका उद्देश्य सभी धर्मों के प्रति शांति और सद्भावना का संदेश देना था। लेकिन रैली से कुछ ऐसी तस्वीरें निकल कर सामने आई हैं, जो इसके मकसद पर सवाल उठाती है। दरअसल इस रैली में अजमेर की दरगाह शरीफ मैनेजमेंट कमिटी के सचिव सैयद सरवर चिश्ती को भी देखा गया।

सरवर चिश्ती, वही शख्स है जिसने कुछ दिनों पहले नूपुर शर्मा को लेकर भड़काऊ बातें की थी। उसने नुपूर शर्मा को समर्थन पर ऐतराज जताते हुए कहा था कि मु​स्लिम इसे बर्दश्त नहीं करेंगे। उसने कहा था, “इस वक्त मुल्क में जो हालात हैं। नामूस ए रसूल सललल्लाहु अलेही वसल्लम की शान में गुस्ताखी हो रही है। ये हम कभी कबूल नहीं करेंगे। ऐसा आंदोलन करेंगे कि पूरा भारत हिल जाएगा।”

सरवर चिश्ती ने जिस अंदाज में यह ऐलान किया था, वह उसके इरादों को साफ तौर पर जाहिर कर रहा था। ऐसे में भड़काऊ भाषण देने वाले सरवर चिश्ती का सद्भावना रैली में शामिल होना सवाल खड़ा करता है।

इसके अलावा चिश्ती ने उन हिंदू दुकानदारों पर भी निशाना साधा था, जिनकी दुकानें दरगाह के आसपास के इलाकों में हैं। सरवर चिश्ती ने कहा था, “आज जो अजमेर शहर में हिन्दू भाई जुलूस निकाल रहे हैं, हमने तो पिछले जुमे को निकाला था जब हमारे पैगंबर मुहम्मद की शान में गुस्ताखी की गई थी। हमारे पास तो इसका वाजिब कारण है। हम तो किसी के देवी-देवताओं की बेइज्जती नहीं करते। हमने नूपुर शर्मा की गिरफ़्तारी की माँग की थी, इस बात का जुलूस था। आप किस बात के लिए जुलूस निकाल रहे हैं? ये नूपुर शर्मा के समर्थन में जुलूस निकाला गया था, लेकिन अंत समय में पोस्टर-बैनर बदल दिया गया।

इसके साथ ही चिश्ती पर पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) से कनेक्शन होने का भी आरोप है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरवर चिश्ती खुद को पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया का सदस्य बताता है। उसे इस संगठन के सदस्यों के साथ कई बार देखा जा चुका है। वह मंचों से कई बार पीएफआई की तारीफ कर चुका है। 2020 में, उसने यह कहते हुए पीएफआई का बचाव किया था कि संगठन ‘भारत के संविधान को बचा रहा है’। 

गौरतलब है कि कन्हैया लाल की 28 जून 2022 को उनके दुकान में घुसकर मोहम्मद रियाज और गौस मोहम्मद ने गला काट डाला था। इन हत्यारों के कनेक्शन अजमेर दरगाह के खादिम गौहर चिश्ती से सामने आए थे। रिपोर्टों में बताया गया था कि कन्हैया लाल की हत्या से पहले गौहर उदयपुर गया था। हत्यारे उसके पास ही शरण लेने अजमेर आ रहे थे लेकिन रास्ते में पकड़े गए। गौहर फिलहाल फरार है। वहीं एक अन्य खादिम सलमान चिश्ती का वीडियो सामने आया था जिसमें वह नूपुर शर्मा की हत्या के लिए उकसा रहा था। दरगाह के बाहर भड़काऊ नारेबाजी में भी ये शामिल थे।