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‘हम हिन्दू थे इसलिए हमारा घर जलाया’ : बांग्लादेशी कट्टरपंथियों का शिकार हुई बुजुर्ग महिला ने सुनाई दर्दनाक आपबीती, पूछा- हमारी गलती तो बताओ

बांग्लादेश (Bangladesh) में नरैल के लोहागारा के सहपारा इलाके में एक फेसबुक पोस्ट से गुस्साए कट्टरपंथी मुस्लिमों (Radical Islam) की भीड़ ने हिन्दुओं के एक मंदिर, किराने की दुकान और कई घरों को तोड़ दिया। इतना ही नहीं उसमें आग भी लगा दी। अब इस्लामिक हिंसा के पीड़ित हिन्दू इस्लामिक कट्टरता की कहानी बयाँ कर रहे हैं।

इसी क्रम में 62 वर्षीय दीपाली रानी साहा ने कहा कि जिस वक्त उन्मादी भीड़ ने हमला किया, उस दौरान वो अपने बेटे के साथ अपने घर से सटे एक शेड में बिस्तर के नीचे छिपी हुई थीं। वो कहती हैं कि उनके घरों को केवल इसलिए जला दिया गया, क्योंकि वो एक हिन्दू हैं।

दीपाली कहती हैं कि वो शुक्रवार की उस रात को कभी नहीं भूल सकती, जब इस्लामिक दंगाइयों ने न सिर्फ घर से कीमती सामानों को लूटा, बल्कि उसे जला भी दिया। वो कहती हैं,

“एक समूह ने हमारा सारा कीमती सामान लूट लिया, दूसरा समूह आया और हमारा दरवाजा खुला पाया। चूँकि लूटने के लिए कुछ नहीं बचा था, उन्होंने हमारे घर में आग लगा दी।”

दीपाली के मुताबिक, “वे (जहाँ हम छिपे हुए थे) अंदर नहीं जा सके क्योंकि यह बंद था। उन्होंने फिर अगले दरवाजे पर मंदिर पर हमला किया और मूर्ति को तोड़ दिया।”

दीपाली का घर उन तीन घरों और दर्जनों दुकानों में से एक था, जिसे नरैल के लोहागरा उपजिला के दिघलिया संघ के सहपारा गाँव में तोड़ कर जला दिया गया। पीड़ित महिला बताती हैं कि भीड़ जुमे की नमाज के बाद 18 वर्षीय छात्रा आकाश साहा के घर के सामने प्रदर्शन कर रही थी, लेकिन जब भीड़ को पता चला कि वो घर में नहीं है, तो उन्होंने पड़ोस के हिन्दुओं के घरों पर हमले शुरू कर दिए, जिनका इससे कोई लेना देना नहीं था।

इस्लामिक दंगाइयों ने जलाया दीपाली रानी का घर (फोटो साभार: डेली स्टार)

उन्होंने बताया कि कैसे राय की छोटी-सी संपत्ति को भी नहीं बख्शा गया। सिर्फ इसलिए कि छात्र हिंदू है। वो कहती हैं, “मैं पैसे नहीं माँग रहा हूँ, मैं मदद नहीं माँग रही हूँ। मैं जवाब माँग रही हूँ – मेरे घर में आग क्यों लगाई गई?” लोगों का कहना था कि अब वो लोग उस गाँव में सुरक्षित महसूस नहीं करते। हमले के बाद सहपारा गाँव में 108 हिन्दू घरों में सन्नाटा पसर गया है।

दिघलिया संघ परिषद की आरक्षित सीट की पूर्व महिला सदस्य ब्यूटी रानी बताती हैं कि अधिकतर सक्षम लोग गाँव छोड़कर चले गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, लगभग सभी घरों में ताला लगा है। कुछ परिवारों के बुजुर्ग ही घर में हैं। वे भी डरे हुए हैं। इसी तरह एक बुजुर्ग राधा-गोविंदा मंदिर के अध्यक्ष 65 वर्षीय शिबनाथ साहा ने कहा कि पुलिस गाँव में पहरा दे रही है, लेकिन हम उन पर भरोसा नहीं कर सकते।

ब्यूटी रानी ने भी यही कहा। उनका आरोप है, “जब हम पर हमला किया जा रहा था, तो पुलिस वहाँ थी। वे दूर से देख रहे थे और कोई भी हमें बचाने नहीं आया। पुलिस पर अब भरोसा नहीं किया जा सकता है और इसलिए लोग गाँव छोड़ रहे हैं।”

इस्लामिक हिंसा का शिकार हुए उर्वरक डीलर गोपाल साहा ने खुद पर हुए हमले का जिक्र किया। उन्होंने कहा, “मैं 22 साल से बाजार में कारोबार कर रहा हूँ। मुझे मारने का एकमात्र कारण यह था कि मैं हिन्दू हूँ था। आरोपित लड़के का घर मुझसे बहुत दूर है। यह मेरी गलती कैसे है? इस गाँव में अब खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करता।” उल्लेखनीय है कि गाँव में 108 हिन्दू परिवार रहते हैं।

क्या है पूरा मामला

गौरतलब है कि नरैल के एक 18 वर्षीय हिन्दू छात्र ने कथित तौर पर फेसबुक पर एक पोस्ट किया था। इस्लामवादियों की कथित तौर पर इससे भावनाएँ आहत हो गईं। जिसके बाद शुक्रवार (15 जुलाई 2022) को जुमे की नमाज के इस्लामिक भीड़ ने नरैल के साहापारा गाँव में जमकर हिंसा की। कई घरों और दुकानों में तोड़फोड़ करने के बाद उनमें आग लगा दी गई। साथ ही मंदिर में घुसकर मूर्ति को भी तोड़ दिया गया।

MP : निर्दलीय प्रत्याशी से हार का गम नहीं हुआ कॉन्ग्रेस नेता को बर्दाश्त, नतीजे सुनते ही हार्ट अटैक, अस्पताल में मौत

मध्य प्रदेश के रीवा में पार्षदी का चुनाव हारने के बाद कॉन्ग्रेस प्रत्याशी की दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई। कॉन्ग्रेस नेता का नाम हरिनारायण गुप्ता था। वह हनुमना इलाके में वार्ड नंबर 9 से निगम पार्षद का चुनाव लड़ रहे थे जहाँ उन्हें निर्दलीय उम्मीदवार अखिलेश कुमार ने मात्र 14 वोट ज्यादा पाकर हराया।

इतने कम फर्क के कारण मिली हार ने हरिनारायण को तोड़ दिया और जैसे ही उन्हें चुनाव के नतीजे सुनने को मिले उन्हें हार्ट अटैक आ गया। खबरों के मुताबिक, पहले उनके सीने में दर्द उठा, जिसे देख कॉन्ग्रेसी कार्यकर्ता उन्हें प्राथमिक उपचार के लिए हनुमना अस्पताल ले गए, लेकिन वहाँ उनका इलाज नहीं हो सका और वह रीवा रेफर किए गए। मगर इसी बीच उनकी साँसे रुक गईं।

मीडिया से बातचीत में ब्लॉक कॉन्ग्रेस कमेटी के अध्यक्ष नरेंद्र सिंह ने कहा, “गुप्ता हमारी पार्टी के 15 साल पुराने कार्यकर्ता है। उन्होंने ही हनुमना में पार्टी को स्थापित किया था। उनके निधन की भरपाई कभी नहीं हो पाएगी। उन्होंने यहाँ पार्टी को जिताने के लिए दिन रात एक कर दिए थे। कॉन्ग्रेस को यहाँ बहुमत में जीत भी मिली लेकिन वह खुद हार गए।”

जानकारी के मुताबिक हनुमना मंडलम के कॉन्ग्रेस अध्यक्ष 40 वर्षीय हरिनारायण गुप्ता के सामने ओमप्रकाश गुप्ता भाजपा की ओर से मैदान में थे। हालाँकि उन्हें जो हार मिली वो निर्दलीय अखिलेश गुप्ता ने दी। यही गम उनसे बर्दाश्त नहीं हुआ। पहले खबर आई थी कि ये हार का फर्क 45 वोटो का हैं। यानी अखिलेश गुप्ता को 229 वोट मिले हैं जबकि हरिनारायण को केवल 184। हालाँकि अब पता चला है कि ये फर्क 45 नहीं बल्कि 14 वोटों का था।

उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश में 16 नगर पालिका निगम, 99 नगर पालिका परिषद और 298 नगर परिषद सहित 413 नगर पालिकाओं के लिए स्थानीय निकाय चुनाव के लिए मतदान दो चरणों में 6 जुलाई और 13 जुलाई को हुए थे। आज उन्हीं चुनावों के नतीजे घोषित हो रहे हैं। भाजपा ने बुरहानपुर, सतना, खंडवा और सागर में जीत हासिल की है जबकि आम आदमी पार्टी ने सिंगरौली से खाता खोला है।

बेटे पर महिला को आपत्तिजनक इमेल्स भेजने के आरोप, माँ बनीं उप-राष्ट्रपति उम्मीदवार: विपक्ष ने रोमन कैथोलिक पर जताया भरोसा

NDA द्वारा उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित करने के बाद अब विपक्ष (UPA) ने भी इसी पद के लिए अपने उम्मीदवार की घोषणा कर दी है। NDA के जगदीप धनकड़ के विरोध में UPA ने मार्गरेट अल्वा को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। इस नाम की घोषणा NCP प्रमुख शरद पवार ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आज 17 जुलाई 2022 (रविवार) को की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस बैठक में विपक्ष की बाकी पार्टियों के नेता भी मौजूद थे। बैठक शरद पवार के दिल्ली स्थित घर पर बुलाई गई थी। कॉन्ग्रेस की तरफ से मल्लिकार्जुन खड़गे, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी की तरफ से सीताराम येचुरी, शिवसेना की तरफ से संजय राऊत इस मीटिंग में मौजूद थे। बैठक के बाद सर्वसम्मति से मार्गरेट अल्वा के नाम पर मुहर लगी।

शिवसेना के संजय राऊत ने मार्गरेट अल्वा के नाम पर सहमति जताते हुए इस फैसले पर पूरे विपक्ष को एकजुट बताया।

गौरतलब है कि जहाँ जगदीप धनकड़ हिन्दू धर्म के जाट समुदाय से ताल्लुक रखते हैं वहीं मार्गरेट अल्वा रोमन कैथोलिक ईसाई मजहब से हैं। वो राजस्थान सहित गोवा, राजस्थान, उत्तराखंड की राज्यपाल भी रह चुकी हैं। दिसंबर 2018 में उनके बेटे निखिल अल्वा पर गुरुग्राम पुलिस ने एक महिला को कई आपत्तिजनक मेल भेजने के आरोप में FIR दर्ज की थी। हालाँकि बाद में निखिल ने इसे फर्जी और आधारहीन शिकायत बताया था।

गौरतलब है कि एक दिन पहले 16 जुलाई को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने उपराष्ट्रपति पद के लिए पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ को राजग का उम्मीदवार घोषित किया था। राजस्थान के मूल निवासी धनकड़ को किसान पुत्र भी कहा जाता है।

भारत को इस्लामी मुल्क बनाने वाले आरोपित PFI आतंकी सिर्फ 3 चैनल से करेंगे बात – BBC, NDTV, TheWire: देखें पोस्टर

बिहार के पटना में पुलिस ने इसी माह एक देशविरोधी गठजोड़ का पर्दाफाश किया था। यह गठजोड़ देश को साल 2047 तक इस्लामी राष्ट्र बनाना चाहता था। इसमें आरोपित नंबर 18 का नाम मंजर परवेज है, जो अतहर परवेज का भाई है। जब मीडियाकर्मियों ने अतहर परवेज का पक्ष जानना चाहा तो उनके घर के आगे एक पोस्टर चिपका दिखाई दिया। उस पोस्टर में परवेज के घर वालों ने केवल द वायर, NDTV और BBC के पत्रकारों से बात करने का एलान किया है।

17 जुलाई 2022 (रविवार) को ब्लॉगर रवि रंजन ने मंजर परवेज के घर की फोटो ट्वीट की है। रवि रंजन का दावा है कि भारत के एक नामी चैनल में उनके मित्र पत्रकार ने उस घर के आगे से वो फोटो खींच कर उन्हें भेजी है। रवि रंजन ने लिखा, “पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है लेकिन हैरानी की बात है कि वो (परवेज के परिजन) कुछ चैनलों के लिए काफी इच्छुक हैं। एक प्रसिद्ध चैनल में पत्रकार मेरे एक दोस्त ने परवेज के परिवार का वर्जन लेना चाहा तो वहाँ लगे इन पोस्टरों ने उन्हें खुद ही जवाब दे दिया।”

रवि रंजन ने आगे लिखा, “ये वो समय है जब सरकार सभी देश विरोधी तत्वों की तलाश कर रही है। सफेद रंग के इस पोस्टर पर हेडलाइन में ‘एलाउड’ लिखा है। उसके नीचे काले रंग की स्याही से क्रमशः NDTV, द वायर और BBC लिखा हुआ है। घर का नीले रंग का गेट बंद था और अंदर एक बाइक खड़ी हुई दिखाई दे रही थी।

ATS की मदरसे में छापेमारी

गौरतलब है कि PFI के देशव्यापी देशविरोधी लिंक की तलाश करते हुए पटना ATS ने फुलवारी शरीफ के एक मदरसे में छापेमारी की है। यह मदरसा मक्का जामा मस्जिद के बगल में है। मदरसे का नाम तालीम वो तरबियत है। यहाँ पर कुल 3 स्टाफ हैं। इस मदरसे में PFI से जुड़े लोगों को ट्रेनिंग दिए जाने का शक है। यहाँ पर तमिलनाडु और तेलंगाना से एक दर्जन लोगों के ट्रेनिंग लिए जाने का शक है।

पुलवामा में आतंकी हमला, CRPF जवान वीरगति को प्राप्त: सेब के बगीचे में छिप कर गोलीबारी, 5 दिन में दूसरा हमला

जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में आतंकियों ने एक बार फिर सुरक्षाबल पर हमला किया है। घटना गंगू क्रॉसिंग की है। हमले में एक सीआरपीएफ जवान के वीरगति प्राप्त करने की खबरें आ रही हैं। उनकी पहचान एएसआई विनोद कुमार के तौर पर हुई है। सुरक्षाबल ने इलाके की घेराबंदी शुरू कर दी है। आतंकियों की तलाश की जा रही है।

अभी तक की पड़ताल में सामने आया है कि सेब के बगीचे के नजदीक से चेकपोस्ट पर फायरिंग की गई जिसमें एएसआई विनोद बुरी तरह घायल हुए। मौके पर मौजूद उनके अन्य साथी उन्हें अस्पताल लेकर गए लेकिन वहाँ वह ज्यादा देर जीवित नहीं रह पाए।

एक अधिकारी ने बताया कि ये हमला रविवार दोपहर 2 बजकर 20 मिनट पर गंगू इलाके में पुलिस और सीआरपीएफ की संयुक्त नाका पार्टी पर अचानक हुआ।

बता दें कि जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबल पर आतंकियों का एक हफ्ते में ये दूसरा हमला है। इससे पहले 12 जुलाई 2022 को कश्मीर जोन पुलिस के ट्विटर हैंडल से किए गए ट्वीट में कहा गया था कि श्रीनगर शहर में आतंकियों ने लाल बाजार क्षेत्र में फायरिंग की। घटना में 3 पुलिसकर्मी जख्मी हो गए और उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया गया है।

हालाँकि बाद में खबर आई कि मंगलवार को हुए इस हमले में एएसआई मुश्ताक अहमद लोन वीरगति को प्राप्त हो गए। मुश्ताक उस समय लाल चौक ड्यूटी पर थे कि तभी आतंकियों ने फायरिंग शुरू कर दी। आतंकियों के जाने के बाद मुश्ताक को अस्पताल भी लेकर जाया गया, लेकिन उन्होंने दम तोड़ दिया। घटना की जिम्मेदारी आईएसआईएस द्वारा ली गई थी।

उल्लेखनीय है कुछ पाकिस्तानी पिछले दिनों पुलवामा जैसे हमलों को दोहराने की बात करते सोशल मीडिया पर करते हुए दिखे थे। खुलेआम भारतीय पत्रकार आदित्य राज कौल से कहा गया कि वो लोग बस पुलवामा और उरी स्ट्राइकों का इंतजार करें। ये ट्वीट 8 जुलाई का ही है।

इमाम ने मीट की बढ़ती कीमतों के लिए महिलाओं की जाँघों को बताया जिम्मेदार, कहा – नंगी होने से सस्ता हो जाता है महिलाओं का मांस

सोवियत संघ (USSR) टूटने के बाद अलग देश बने मुस्लिम बहुल किर्गिस्तान (Kyrgyzstan) में एक इमाम ने देश में मांस की आसमान छूती कीमतों के लिए महिलाओं को दोषी ठहराया है। इमाम का कहना है कि महिलाएँ अपनी बहुत अधिक देह दिखाकर खुद को ‘सस्ता’ ली हैं।

राजधानी बिश्केक में में इमाम सदाबकास डूलोव ने कहा, “क्या आप जानते हैं कि आपके शहर में मांस की कीमतें कब बढ़ जाती हैं? यह तब बढ़ जाता है जब महिलाओं का मांस सस्ता हो जाता है। महिला का मांस सस्ता हो जाता है जब वह अपनी त्वचा को नंगा करती है। अपनी जांघों को अंगूठे की तरह दिखाती है।”

एक इस्लामिक विश्वविद्यालय के प्रमुख के रूप में काम कर चुके और पुरस्कार प्राप्त कर चुके इस मुल्ला ने बुजुर्ग मर्दों से ‘इस अपमानजनक’ काम को समाप्त करने कहा था। उसने महिलाओं से कम और चिपके कपड़े नहीं पहनने का आह्वान किया।

53 वर्षीय डूलोव की इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर उनकी खूब आलोचना हो रही है। किर्गिस्तान के लोग इमाम पर महिलाओं का अपमान करने और उसके साथ भेदभाव करने का आरोप लगाते हुए उसके खिलाफ आपराधिक जाँच की माँग कर रहे हैं।

हालाँकि,मदेश की सर्वोच्च इस्लामी संस्था इमाम के साथ है और उसका कहना है कि उनकी टिप्पणियों ने कोई नियम नहीं तोड़ा है। सरकार समर्थित किर्गिस्तानी मुस्लिम आध्यात्मिक प्रशासन (DUMKE) ने डूलोव के विवादास्पद भाषण की जाँच शुरू की है।

DUMK ने कहा कि जाँच में पाया गया कि डूलोव की टिप्पणी ने किसी भी इस्लामी कानून का उल्लंघन नहीं किया और ना ही किसी का अपमान है। इसके अलावा राजनीति में हस्तक्षेप भी नहीं की गई है। डूलोव को साल 2020 में DUMK के प्रतिष्ठित आइकोल पदक से सम्मानित किया गया था। DUMK के अनुसार, डूलोव के भाषण को कई लोगों ने गलत समझा।

डूलोव का कहना है कि 30 मिनट के उनकी तकरीर के दौरान की गई टिप्पणियों को संदर्भ से बाहर लेकर आलोचकों द्वारा गलत व्याख्या की गई। उन्होंने कहा कि इससे उनका मतलब नैतिक मूल्यों से था। डूलोव ने कहा, “कुछ शब्द थे कि आप मांस की (उच्च) कीमतों के बारे में क्यों बात कर रहे हैं, लेकिन जब महिलाएँ अपने नग्न शरीर के साथ घूमती हैं तो आपका सम्मान खराब नहीं होता है।”

इमाम डूलोव ने कहा कि उनका इरादा महिलाओं को नीचा दिखाने का नहीं था। हालाँकि, लेकिन कई किर्गिज़ सोशल-मीडिया यूजर ने उन पर गलतफहमी, अज्ञानता और धर्म को गलत तरीके से प्रस्तुत करने का आरोप लगाया है। एक किर्गिज़ व्यक्ति ने लिखा है कि डूलोव की टिप्पणी चरमपंथी विचारों का प्रतिनिधित्व करती हैं।

वहीं, एक किर्गिज़ महिला ने कटाक्ष करते हुए कहा कि उसने छोटी स्कर्ट नहीं पहनी होती अगर उसे पता होता कि इसके इतने गंभीर परिणाम निकलेंगे। महिला ने लिखा, “आर्थिक संकट और खराब सड़कों के पीछे भी महिलाएँ ही हैं।”

कुछ लोगों ने कहा कि इमाम द्वारा इस्लाम की व्याख्या की भी जाँच की जानी चाहिए। कई अन्य लोगों ने चिंता व्यक्त की कि संदिग्ध विचारों वाला धार्मिक व्यक्ति आज के युवा पीढ़ी को इस्लाम सिखा रहा है।

कहा जाता है कि डूलोव ने 80-90 के दशक में पड़ोसी देश ताजिकिस्तान के मदरसे में धार्मिक शिक्षा प्राप्त की थी। वह दक्षिणी किर्गिस्तान में ओश स्टेट यूनिवर्सिटी में भाषाशास्त्र का भी अध्ययन किया। डूलोव ने किर्गिस्तान में कम से कम दो इस्लामिक स्कूलों के प्रमुख के रूप में काम किया था। वह वर्तमान में बिश्केक के स्वेर्दलोव जिले की एक मस्जिद में इमाम हैं।

‘वो सुपर रिच, पैसे की खातिर बिक गई?’: सुष्मिता सेन और ललित मोदी के रिश्ते पर बोलीं तसलीमा नसरीन – जिन्हें पैसों से प्यार, वो खो देते हैं आत्मसम्मान

बॉलीवुड एक्ट्रेस सुष्मिता सेन और ललित मोदी के अफेयर की खबरों के बीच प्रसिद्ध बांग्लादेशी लेखिका तसलीमा नसरीन ने एक्ट्रेस पर कटाक्ष किया है। उन्होंने कहा कि जिन्हें पैसों से प्यार हो जाता है वो बहुत ही जल्दी अपने आत्म सम्मान को भी खो देता है। हाल ही में ललित मोदी ने भी सुष्मिता सेन को अपना बेटर हाफ बताया था।

तसलीमा नसरीन ने दोनों के बीच नजदीकियों की खबरों को लेकर कहा, “मुझे सुष्मिता सेन का व्यक्तित्व बहुत अधिक पसंद आया था। उन्होंने कम उम्र में ही दो बेटियों को गोद ले लिया था। मुझे उनकी ईमानदारी, दृढ़ता, बहादुरी, सीधापन अच्छा लगा था। लेकिन, अब वो अलग-अलग अपराधों में शामिल एक व्यक्ति के साथ अपना जीवन बिता रही हैं। वह व्यक्ति बहुत ही अनाकर्षक है। क्या इसका मतलब ये है कि वो व्यक्ति सुपर रिच है? क्या वो पैसे की खातिर बिक गईं?”

लेखिका कहती हैं कि हो सकता है कि सुष्मिता सेन को उस व्यक्ति से प्यार हो, लेकिन मैं इस पर विश्वास नहीं कर सकती। पैसों से प्यार करने वाले मेरी नजरों में अपनी इज्जत खो देते हैं। पूर्व मिस यूनिवर्स के साथ अपनी मुलाकात को याद कर तसलीमा ने लिखा, “मैं सुष्मिता सेन से केवल एक बार मिली थी वो भी कोलकाता एयरपोर्ट पर। उन्होंने मुझे गले लगाया और ‘आई लव यू’ कहा। वो अच्छी-खासी लंबी हैं, इसलिए उनके बगल में खड़े होकर मुझे लगा कि मैं अचानक से छोटी हो गई हूँ। मैं उनकी सुंदरता को अपनी आँखों से आसानी से नहीं हटा पा रही थी।”

क्यों ट्रोल हो रही सुष्मिता सेन

गौरतलब है कि हाल ही में आईपीएल फिक्सिंग के आरोपित भगोड़े ललित मोदी ने एक ट्वीट किया था, जिसमें उन्होंने एक्ट्रेस को बेटर हाफ करार दिया था। बाद में ललित मोदी ने ये स्पष्ट किया कि वे दोनों एक दूसरे को डेट कर रहे हैं। ललित मोदी मौजूदा वक्त में एक व्यवसायी हैं। फिक्सिंग मामले में फंसने के बाद ललित मोदी लंदन भाग गए थे।

‘उर्दू नहीं बोल पाया तो 22 साल के चंदू को मार डाला’: कर्नाटक पुलिस की चार्जशीट में खुलासा, छुरा घोंप कर हुई थी हत्या

कर्नाटक पुलिस ने 5 अप्रैल 2022 को बेंगलुरु शहर में हुई चंदू नाम के हिन्दू युवक की हत्या के केस में कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी है। इस चार्जशीट के मुताबिक, चंदू को उर्दू न बोल पाने के चलते मारा गया था। इस केस में पुलिस ने मुस्लिम समुदाय के कुल 4 आरोपितों को गिरफ्तार किया था जिसमें एक नाबालिग भी था। चंदू की हत्या छुरा घोंप कर की गई थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कर्नाटक पुलिस के CID डिपार्टमेंट ने 171 पन्नों की चर्जशीट ACJM कोर्ट में दाखिल कर दी है। इस चार्जशीट में कुल 49 लोगों को गवाह बनाया गया है। पुलिस की चार्जशीट के मुताबिक, 22 साल का चंदू 5 अप्रैल को अपने दोस्त साइमन राज के साथ बाइक से जा रहा था। उसी दिन उसके दोस्त साइमन का जन्मदिन भी था। इसी बीच सड़क पर पैदल चल रहे शाहिद पाशा ने साइमन को गालियाँ देनी शुरू कर दी। दोनों ने पाशा से पूछताछ की तो उसने गाली देने के आरोप से इनकार कर दिया।”

चार्जशीट के मुताबिक, “थोड़ी देर बाद राजू और साइमन एक बेकरी की दुकान पर गए। वहाँ पर उन्हें आरोपितों में से एक अन्य मिला जिसने राजू और उसके दोस्त से बदतमीजी की। वाद-विवाद बढ़ा तो राजू और साइमन ने आरोपित को धक्का दे दिया था। कुछ देर बाद आरोपितों ने एक साथ जुट कर चंदू और उसके दोस्त पर चाकुओं से हमला कर दिया। इस हमले के बीच साइमन राज भाग निकला लेकिन चंदू की जाँघ में चाकू लग जाने के चलते वो भाग नहीं पाया। थोड़ी देर बाद साइमन फिर लौट कर वापस आया और स्थानीय लोगों की मदद से चंदू को अस्पताल में भर्ती करवाया। वहाँ अधिक खून बह जाने के चलते चंदू ने दम तोड़ दिया।”

एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक बेकरी पर शाहिद पाशा ने अपने साथियों को जमा कर लिया था। चंदू कन्नड़ बोल रहा था जिस पर शाहिद पाशा ने उसे उर्दू बोलने के लिए कहा। चंदू उर्दू नहीं बोल पाया और इस बीच हमलावरों ने उसकी हत्या कर दी। चंदू की हत्या के बाद बेंगलुरु के तत्कालीन पुलिस कमिश्नर कमल पंत ने इसमें किसी साम्प्रदायिक एंगल से इंकार किया था। तब उन्होंने घटना को महज रोड रेज बताया था। हालाँकि, राज्य के भाजपा नेताओं ने लगातार इस घटना को उर्दू न बोलने के चलते हुआ विवाद बताया था।

‘तो राबड़ी देवी क्या थीं?’: तेजस्वी यादव ने द्रौपदी मुर्मू को बता दिया ‘मूर्ति’ तो लोगों ने लपेटा, BJP का तंज- अपना बचपन याद कीजिए

राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की राष्ट्रपति प्रत्याशी और भाजपा नेता द्रौपदी मुर्मू (Draupadi Murmu) को बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता और राजद प्रमुख लालू यादव के बेटे तेजस्वी यादव ने टिप्पणी की है। इस टिप्पणी पर बवाल हो गया है। वहीं, सोशल मीडिया पर लोग उनकी माँ राबड़ी देवी की याद दिला रहे हैं, जब उन्हें बिहार का मुख्यमंत्री बनाया गया था।

तेजस्वी ने कहा, “राष्ट्रपति भवन में हमें कोई मूर्ति तो नहीं चाहिए। हम राष्ट्रपति का चुनाव कर रहे हैं। आपने यशवंत सिन्हा को हमेशा सुना होगा, लेकिन सत्ता पक्ष की राष्ट्रपति की उम्मीदवार को हमने कभी नहीं सुना है। वे जब से उम्मीदवार बनी हैं उन्होंने एक भी प्रेस वार्ता नहीं की है।”

तेजस्वी यादव की इस टिप्पणी को भाजपा (BJP) ने महिला विरोधी बताया है। बीजेपी नेता शाहजाद पूनावाला ने कहा कि तेजस्वी यादव अपने बयान के लिए माफी माँगनी चाहिए। पूनावाला ने ट्वीट किया, “पुडुचेरी कॉन्ग्रेस ने उन्हें ‘डमी’ कहा और अब आरजेडी उन्हें ‘मूर्ति’ बता रही है। तेजस्वी यादव का बयान आदिवासी विरोधी मानसिकता को दिखाता है।”

राबड़ी देवी को बिहार का मुख्यमंत्री की घटना की याद दिलाते हुए बिहार भाजपा के अध्यक्ष संजय जायसवाल ने कहा, “अब तेजस्वी यादव को अपना बचपन याद आ गया होगा कि किस तरह बिहार के तथाकथित समाजवाद नेता ने एक घरेलू महिला को अपना मुख्यमंत्री मानकर उसकी गुलामी का काम किया। इसलिए वह देश की सभी महिलाओं को वही महिला मुख्यमंत्री के रूप में ही पहचान कर पाते हैं।”

तेजस्वी यादव के बयान की सोशल मीडिया पर भी खूब आलोचना हो रही है। लोग उन्हें 1990 का दशक याद दिला रहे हैं, जब लालू यादव ने अपने पार्टी के दिग्गज नेताओं को दरकिनार को पत्नी राबड़ी देवी को अचानक ही बिहार का मुख्यमंत्री घोषित कर दिया था और पार्टी ने नेताओं ने चुपचाप इसे स्वीकार कर लिया था।

प्रशांत भारती नाम के एक ट्विटर यूजर ने लिखा, “द्रौपदी जी को तो हमने नहीं सुना। वैसे हमें तेजस्वी जैसे लोग चाहिए। आपने तो सुना ही होगा। जिसने नहीं सुना वो जाकर राबड़ी देवी के भाषण को सुनें, मंच पर भी पढ़ाने के लिए एक ट्यूटर सामने रहते थे।”

वीरेंद्र पाल नाम के एक यूजर ने लिखा, “द्रौपदी मुर्मू मूर्ति हैं तेजस्वी यादव। राबड़ी देवी क्या थीं? राबड़ी देवी को कोई राजनीतिक अनुभव था क्या? राबड़ी देवी को कोई शिक्षा प्राप्त थी क्या? राबड़ी देवी को कोई प्रशासनिक अनुभव था क्या? तेजस्वी खुद 6 मिनट के भाषण में 4 बार अटकते हैं। लिखे हुए को पढ़ नहीं पाते हैं।”

भाजपा नेता अतुल कुमार लिखते हैं, “बिहार के 9वीं पास तेजस्वी यादव ने कहा कि की माननीय द्रौपदी मुर्मू जी को आज तक बोलते नही सुना! राष्ट्रपति भवन में मूर्ति को बैठाया जा रहा है! महिलाओं का सम्मान करना सीखो और अपनी माँ राबड़ी देवी को भी याद करो! शर्म करो और थोड़ा भाषण भी सुन लो वो भी अंग्रेजी में!”

रवि रंजन गिरि नाम के एक यूजर ने कटाक्ष करते हुए लिखा, “सही बोले हैं तेजस्वी, अगर किसी महिला को ही राष्ट्रपति बनाना मजबूरी था तो देश की तेजतर्रार और जेएनयू की पूर्व प्रोफेसर डॉ. (श्रीमती) राबड़ी देवी में क्या कमी थी।”

राष्ट्रपति और PM के पद पर मुस्लिमों को देखना चाहते हैं ‘जय श्री राम’ से घृणा करने वाले ये लिबरल पत्रकार: जैन-पारसी अल्पसंख्यक नहीं? लोकतंत्र से नहीं चलेगा देश?

भारत में एक ओर जहाँ कट्टरपंथियों द्वारा देश को इस्लामी मुल्क बनाने की कोशिशें चल रही हैं, आए दिन बयान और दस्तावेज बरामद हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सेकुलर गिरोह इस चिंता में डूब रखा है कि क्या भारत में कभी कोई मुस्लिम दोबारा से राज कर पाएगा! 

पत्रकार प्रीतिश नंदी ने आज (17 जुलाई 2022) इस संबंध में एक ट्वीट किया है। इस ट्वीट में उन्होंने अपने फॉलोवर्स को समझाया है कि देखो विदेशों में भारतीयों को राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री तक बनाया जा रहा है जबकि भारत में भारतीय मुसलमानों को इन पदों के लिए कोई पूछ भी नहीं रहा।

प्रीतिश नंदी का दुख जाहिरतौर पर भारत में मुस्लिमों के भविष्य को लेकर है या कह सकते हैं कि उनके लिए भारतीयों का अर्थ ही मुस्लिम होना है।

अगर ऐसा नहीं होता तो शायद उनके ट्वीट में विदेश के साथ भारत की तुलना इतनी अटपटे ढंग से नहीं होती और तुलना का आधार ‘समान मानक’ होते। इसके अलावा उनके ट्वीट में अन्य अल्पसंख्यक समुदायों की भी चिंता दिखती।

लेकिन नहीं! ट्वीट को पढ़िए। इसमें खासतौर पर सिर्फ ‘मुस्लिम’ शब्द लिखा गया है। इसमें न पारसी है, न जैन है, न ईसाई है और न ही सिख हैं। जबकि इन लोगों की संख्या देश में मुस्लिमों से कम है।

अगर कोई वाकई अल्पसंख्यक समुदाय को लेकर चिंतित है तो पहले तो इन समुदायों के अधिकार की बात उठाई जानी चाहिए। मगर, एक समय में जय श्रीराम पर सवाल उठाने वाले प्रीतिश या उनके गिरोह वाले ऐसा नहीं करेंगे। वो जानते हैं कि उन्हें समााजिक कल्याण नहीं, एक तय एजेंडा को लेकर आगे बढ़ना है और ये तभी पूरा हो पाएगा जब विदेशों से भारत की तुलना गलत ढंग से करेंगे।

डॉ एपीजे अब्दुल कलाम से लेकर रामनाथ कोविंद तक

प्रीतिश ने अपने ट्वीट में लिखा है, “भारतीय मूल की महिला अमेरिका में उप-राष्ट्रपति है। एक भारतीय मूल का व्यक्ति ब्रिटेन का प्रधानमंत्री बनने जा रहा है। लेकिन क्या कभी भारत में दोबारा भारतीय मुस्लिम प्रधानमंत्री बन या राष्ट्रपति दोबारा बन पाएगा?”

लिबरल बुद्धिजीवी के इस ट्वीट में ‘मूल’ को आधार बनाकर विदेश की तारीफ की गई है और दूसरी ओर ‘मजहब’ को आधार बनाकर भारत को बदनाम किया गया है।

ये तुलना वाजिब कैसे हो सकती है जब न स्थिति एक जैसी है, न राजनीति और न ही मानक। नंदी की तुलना उचित तो तब होती न जब उन्होंने ये बताया होता कि भारतीय मुस्लिमों को अमेरिका और ब्रिटेन में राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री बनाया जा रहा है जबकि भारत में ऐसा नहीं हो रहा है।

प्रीतिश भूल चुके हैं कि जिस मजहब के बूते वह देश को बदनाम करने की साजिश रच रहे हैं। उसी मजहब के डॉ एपीजे अब्दुल कलाम का नाम देश के सबसे पॉपुलर राष्ट्रपतियों की लिस्ट में शुमार है। अगर भारत की रणनीति भेदभाव वाली होती तो क्या कभी ऐसा संभव होता कि देश में वह राष्ट्रपति बनते या मनमोहन सिंह के तौर पर एक सिख को प्रधानमंत्री चुना जाता या फिर दलित रामनाथ कोविंद को देश के सर्वोच्च पद पर बिठाकर पूरे समुदाय का सम्मान किया जाता।

आज द्रौपदी मुर्मू राष्ट्रपति पद की सशक्त उम्मीदवार हैं। पूरा देश उन्हें समर्थन दे रहा है। इसकी वजह यही है कि जाति-धर्म से उठकर देश में पिछड़े तबकों का कल्याण प्राथमिकता है। मगर प्रीतिश जैसे लोगों का क्या किया जाए तो रह-रहकर देश को एक सिरे पर बाँधना चाहते हैं और सोचते हैं कि उसी सिरे से देश की चाल तय हो।

हिंदू बहुल देश में मुस्लिम समुदाय के व्यक्ति को पीएम और राष्ट्रपति बनाने की जो इच्छा जाहिर की जा रही है। वैसे इच्छाएँ कभी दूसरे देश जहाँ हिंदू अल्पसंख्यक हैं उन्हें लेकर क्यों नहीं होती?

आखिर क्यों जब आम आदमी पार्टी को पंजाब में राजनीति करनी होती है तो वो चेहरा भगवंत मान को बनाते हैं। क्यों गुजरात में जाकर कहा जाता है कि आखिर कोई मराठी गुजरातियों पर राज कैसे कर सकता है… क्या इन स्थितियों में भेदभाव की गंध नहीं आती। क्या तब सवाल नहीं बनता जब कॉन्ग्रेस दसियों पार्टी मीटिंग के बाद भी अध्यक्ष के तौर पर या तो सोनिया गाँधी को चुनती है या फिर राहुल गाँधी को अगला अध्यक्ष चाहती है।

लोकतांत्रिक प्रक्रिया से चुने जाते हैं राष्ट्रपति और पीएम

परिवारवाद पर सवाल न उठा पाने वाले पत्रकार ही हैं जिन्होंने देश का अर्थ केवल मुस्लिम समुदाय को आँक लिया है। वो भूल चुके हैं उस लोकतांत्रिक प्रक्रिया को, जिसके तहत देश में प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति का चुनाव होता है। ये सीधा इल्जाम देश की बहुसंख्यक जनता पर लगाते हैं। ऐसे दिखाया जाता है कि जैसे हिंदुओं ने किसी को पीएम और राष्ट्रपति बनने से रोक दिया हो।

संवैधानिक प्रक्रिया कहती है कि अगर किसी को प्रधानमंत्री बनना है तो उनके दल की लोकसभा चुनावों में जीत होनी चाहिए। इसी तरह अगर कोई दल चाहता है कि उनका प्रत्याशी राष्ट्रपति बने तो उसके साथ अन्य पार्टियों का समर्थन होना चाहिए। जैसे कल राष्ट्रपति चुनाव हैं और द्रौपदी मुर्मू के पास अभी से 60 फीसद से ज्यादा समर्थन आ गया है। लोग उन्हें इसलिए सपोर्ट नहीं कर रहे कि उन्हें एनडीए ने मैदान में उतारा है। उनका साथ इसलिए दिया जा रहा है क्योंकि वो जनजाति समुदाय से आती हैं और इस तरह उनके पद पर बैठने से संदेश समाज में जाएगा कि किसी समुदाय के साथ देश में भेदभाव नहीं हो रहा।