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36 साल का सबसे भयंकर बाढ़ लेकर आई गोदावारी, तेलंगाना के CM ने बताया ‘विदेशी साजिश’: बोले BJP सांसद- KCR खुद साजिशकर्ता

देश में एक के बाद एक कई सारी बादल फटने की घटनाएँ सामने आने के बाद तेलंगाना के मुख्यमंत्री चंद्रशेखर राव (केसीआर) ने बड़ा अटपटा बयान दिया है। उन्होंने गोदावरी बेसिन में 36 साल बाद आई भयंकर बाढ़ का दौरा करने के बाद इन प्राकृतिक आपदाओं को ‘विदेशी साजिश’ बताया है।

लगातार बादल फटने की घटनाओं पर बोलते हुए तेलंगाना सीएम ने कहा, “देश के कुछ हिस्सों में बादल फटने के पीछे दूसरे देशों की साजिश हो सकती है। हमें नहीं पता कि इसमें कितनी सच्चाई है। पहले लेह, फिर उत्तराखंड में बादल फटे थे और अब गोदावरी के पास से ऐसी खबरें आ रही हैं।”

अधिकारियों से बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत एवं बचाव कार्यों की जानकारी लेने के बाद केसीआर ने कहा, “मौजूदा स्थिति लगातार हो रही बारिश का नतीजा है। मौसम विभाग और कुछ प्राइवेट अनुमान लगाने वालों के मुताबिक यह स्थिति (भारी बारिश) 29 जुलाई तक जारी रह सकती है। इसलिए खतरा अभी टला नहीं है।”

केसीआर ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे राहत कैंप से लोगों को वापस न भेजें। उनका ख्याल रखना है। इसके अलावा मुख्यमंत्री ने बाढ़ प्रभावित परिवारों को तत्काल सहायता के रूप में 10,000 रुपए देने की घोषणा की।

केसीआर के बादल फटने वाले बयान को बीजेपी ने ‘सदी का सबसे बड़ा मजाक’ बताया है। तेलंगाना बीजेपी के अध्यक्ष और करीमनगर से सांसद बंदी संजय कुमार ने कहा कि अपनी नाकामयाबी छिपाने के लिए केसीआर ड्रामा कर रहे हैं। तेलंगाना बीजेपी अध्यक्ष ने आगे केसीआर पर आरोप लगाते हुए कहा कि सीएम लोगों का ध्यान कालेश्वरम परियोजना के ‘डूबने’ से हटाने की कोशिश कर रहे हैं और एक विदेशी साजिश की बात कह रहे हैं। 

उन्होंने कहा, “गोदावरी में बाढ़ कोई नई बात नहीं है। यह पहले भी हुआ है और भविष्य में भी होगा, लेकिन इसे जानबूझकर विदेशी और मानवीय हाथ के लिए जिम्मेदार ठहराया जाना हास्यास्पद है और सरकार की विफलताओं को कवर करने के लिए उनका एक और ड्रामा है।”

बीजेपी सांसद ने कहा कि केसीआर खुद एक ‘साजिशकर्ता’ हैं, जो खुद के ‘इंजीनियरिंग एक्सपर्ट’ होने का दावा करते हैं, लेकिन कालेश्वरम लिफ्ट सिंचाई परियोजना की बाढ़ और जल निकायों के बाँधों के बह जाने से उनके दावे का खोखलापन उजागर हो गया।

करीमनगर के सांसद ने बाढ़ को रोकने के लिए टीआरएस सरकार के उपायों पर सवाल उठाया और प्रशासन पर उदासीनता का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री को लोगों को प्रभावितों के राहत और पुनर्वास के लिए उठाए गए कदमों के बारे में बताना चाहिए, क्योंकि प्रत्येक परिवार को ₹10,000 का मुआवजा अपर्याप्त है।”

संजय कुमार ने कहा कि सभी को उम्मीद थी कि सीएम बाढ़ से प्रभावित लोगों के लिए एक पूर्ण वित्तीय पैकेज की घोषणा करेंगे, जिसमें कृषि और संपत्ति के कुल नुकसान का विवरण दिया जाएगा, लेकिन उनकी यात्रा खोखली निकली। उन्होंने पिछले आठ वर्षों में गोदावरी में बाँध को मजबूत करने के बारे में कुछ भी नहीं सोचा।

वहीं तेलंगाना प्रदेश कॉन्ग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और पार्टी के सांसद एक रेवती ने भी तंज कसते हुए कहा कि अगर केसीआर के पास बादल फटने के पीछे विदेशी साजिश की सूचना है तो उसे इंटेलिजेंस ब्यूरो, रॉ और केंद्र सरकार को देनी चाहिए। यह मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी है।

तेलंगाना के कई इलाकों में पानी का प्रकोप

गौरतलब है कि करीब एक हफ्ते से लगातार हो रही बारिश से तेलंगाना के कई इलाकों में पानी भर गया है। मंदिरों के शहर भद्राचलम में जल स्तर 70 फीट तक पहुँच गया था, जो तीसरी और अंतिम बाढ़ चेतावनी से काफी ऊपर था। यह 53 फीट पर दी गई थी। अब यह स्तर घटकर 60 फीट पर आ गया है। 

सावन में प्रगट हुए शिव शंभू: सरयू नदी से निकला 53 किलो का चांदी शिवलिंग, देखने जुटी हजारों की भीड़, लगे- ‘हर-हर महादेव के नारे’

उत्तर प्रदेश के मऊ जिले में सरयू नदी पुल के नीचे से एक भारी भरकम शिवलिंग मिलने की खबर आ रही है। लोग सावन में मिले इस शिवलिंग को देख मान रहे हैं कि स्वयं शिव उन्हें दर्शन देने आए हैं। फिलहाल पुलिस ने इसे अपने कब्जे में लिया हुआ है। लेकिन जाँच के बाद यह स्थानीयों को लौटा दिया जाएगा।

सरयू नदी शिवलिंग
सरयू नदी से निकला शिवलिंग (तस्वीर साभार: पंजाब केसरी)

मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि शनिवार (16 जुलाई 2022) को 11 बजे राममिलन साहनी नाम का युवक मातेश्वरी घाट के समीप स्नान करने सरयू नदी पर गया था। वहीं उसे कुछ ठोस पदार्थ दिखा। जब उसने नदी के पास जमे बालू में खुदाई की तो अंदर से डेढ़ फुट लंबा और 1 फुट चौड़ा चांदी का शिवलिंग निकला। सूचना मिलते ही हजारों ग्रामीण शिवदर्शन के लिए इकट्ठा होते गए और जोर-जोर से हर-हर महादेव के नारे लगे।

इसके बाद रामचंद्र निषाद की 14 वर्षीय पुत्री द्वारा इस शिवलिंग की पूजा-अर्चना करवाई गई। फिर इसे मेला राम बाबा मंदिर के बगल में शिव मंदिर में रखा गया। यहाँ शिवलिंग का ब्राह्मणों ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ अभिषेक किया।

जब पुलिस को इस तरह नदी के पास से शिवलिंग मिलने का पता चला तो वह शिवलिंग लेकर थाने आ गए। शिवलिंग मिलने की जानकारी देते हुए एसपी मऊ अविनाश पांडे ने बताया कि घाघरा नदी में किसी ने कुछ चमकती चीज देखी। जब इसे निकाला तो पता चला कि ये शिवलिंग है। इसे मलखाना के थाने में सम्मान के साथ रखा गया है। साथ ही जाँच एजेंसियों को सूचना दे दी गई है। जैसे ही पड़ताल पूरी होगी इसे लोगों को वापस कर दिया जाएगा।

बता दें कि कुछ लोग इस शिवलिंग का वजन 30 किलो कह रहे हैं जबकि अधिकांश मीडिया रिपोर्ट दावा कर रही हैं कि ये शिवलिंग 53 किलो का है। सोशल मीडिया पर ये खबर आने के बाद लोगों में शिव के प्रति श्रद्धा और बढ़ गई है। लोग हैरान हैं कि सरयू नदी से निकली दमकती चीज वाकई शिवलिंग ही है। यूजर्स इसे देख कह रहे हैं कि लग रहा है कि अब कलयुग का अंत होने वाला है क्योंकि स्वयं बाबा ने दर्शन दे दिए हैं।

‘बायकॉट इंडिया, इंडिया खत्म हो जाएगा…’: 2023 में जिहाद के लिए बना रखे थे स्लीपर सेल, क्रॉस निशान लगा बदल दिया था तिरंगे का रंग

2047 तक भारत को इस्लामी मुल्क बनाने की साजिशों का पर्दाफाश होने के बाद बि​हार पुलिस ने मारगुव/मरगूब अहमद दानिश उर्फ ​​ताहिर को गिरफ्तार किया था। वह 2023 में जेहाद छेड़ने की साजिशों में लगा था। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इसके लिए उसने कई व्हाट्सएप ग्रुप और स्लीपर सेल बना रखे थे। वह सोशल मीडिया में लगातार भड़काऊ पोस्ट करता था।

मरगूब ने गजवा-ए- हिंद नाम से व्हाट्सएप ग्रुप बना रखा था। इसके जरिए युवाओं को भड़काया जाता था। देश के खिलाफ नफरत पैदा की जाती थी। हिंदुओं को टारगेट करने का पाठ पढ़ाया जाता था। उसने अपनी स्लीपर सेल में भी कई युवाओं की भर्ती कर रखी थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मरगूब मूल रूप से पटना से सटे फुलवारी शरीफ की मुनीर कॉलोनी का निवासी है। उसके 3 व्हाट्सएप ग्रुप हैं। इनमें क्रमशः 181, 10 और 11 सदस्य हैं। उसके समूह में कई पाकिस्तानी और बांग्लादेशी भी शामिल बताए जा रहे हैं। तीनों ग्रुपों का नाम गज़वा-ए-हिन्द था जिसकी प्रोफ़ाइल फोटो में भारत के झंडे को हरे रंग से रंगा गया था। उसके ऊपर पाकिस्तान का झंडा लगाया गया था।

12 जून 2022 को मरगूब ने फेसबुक पर बॉयकॉट इंडिया नाम की मुहिम चलाई थी। इस मुहिम में उसने तिरंगे पर क्रॉस का चिन्ह लगा कर नबी से मोहब्बत करने के नाम पर भारतीय सामानों का बहिष्कार करने की अपील की थी। वो अक्सर देश विरोधी करता था, जिसमें भारत के नामोनिशान तक मिट जाने की बातें हुआ करती थी। ऐसे ही एक पोस्ट में उसने लिखा था, “इंडिया खत्म हो जाएगा, मेरे नबी का नाम हमेशा बुलंद रहेगा, इंशा अल्लाह…इंशा अल्लाह।”

एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक मरगूब पाकिस्तान के तहरीक ए लब्बैक के संपर्क में भी था। मरगूब की अम्मी की माने तो उनके बेटे की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। उनका कहना है, “मेरा बेटा दिन भर फोन चलाया करता था। हम लोग जब भी उस से फोन लेने की कोशिश करते थे तब वह झगड़ा करने लगता था। हम नहीं जान पाते थे कि वो फोन में क्या करता है।” उन्होंने कहा, “मेरा बेटा मानसिक बीमार है। वह बाथरूम में बिना कपड़ों के ही घुस जाता था। उसका इलाज एम्स में चल रहा था। वो कुछ गलत नहीं कर सकता है। वो फोन में गाने सुनता था और गंदी वीडियो और फोटो देखा करता था।”

मरगूब अहमद मदरसे में पढ़ा है और स्थानीय बच्चों को कुरान पढ़ाता था। वह कश्मीर में मारे गए आतंकियों की तारीफ करते हुए उनको शहीद बताता था। उसने अपने व्हाट्सएप ग्रुप में एक पाकिस्तानी को भी एडमिन बना रखा है। SSP पटना के मुताबिक, “26 वर्षीय मरगूब साल 2016 से ही अपनी तैयारियों में जुटा था। वह विदेश में नौकरी भी कर चुका है। पाकिस्तान के अलावा वह कुछ कश्मीरी आतंकी संगठनों से भी जुड़ा है।”

जहाँ महादेव ने कालकूट हलाहल पिया, उस कालिंजर को गजनवी और ऐबक भी नहीं जीत पाए: जानिए बीरबल के जागीर इस रहस्यमयी किले के बारे में

भारत में एक से बढ़कर एक कालातीत विरासत एवं धरोहर हैं, जिनको लेकर रहस्य आज भी बरकरार है। ये धरोहर सनातन धर्मांवलंबियों के प्रमुख केंद्र भी हैं। आज हम इस श्रृंखला में बात करेंगे बुंदेलखंड के कालिंजर दुर्ग (Kalinjar Fort) की। कालिंजर का अर्थ होता है, काल का क्षय। यानी जहाँ समय का पहिया ठहर जाए। कालिंजर वही जगह है, जहाँ आध्यात्म और इतिहास का पहिया ठहर जाता है।

उत्तर प्रदेश के बाँदा जिले में विंध्य पर्वतमाला पर 800 फीट की ऊँचाई पर स्थित कालिंजर किले को कालजयी कहा जाता है। कहा जाता है कि यह किला हर युग में विद्यमान रहा। सतयुग में यह कीर्ति नगर, त्रेतायुग में मध्यगढ़, द्वापर में सिंहलगढ़ और कलियुग में कालिंजर के नाम से प्रख्यात रहा।

भगवान शिव ने समुद्र मंथन से निकले कालकूट विष को यहीं पिया

कालिंजर का उल्लेख वेदों, पुराणों, उपनिषदों और तमाम प्राचीन ग्रंथों में मिलता है। पद्म पुराण में इस क्षेत्र को नवखल कहा गया है और इसे विश्व का सबसे प्राचीन स्थल बताया गया है। वहीं, मत्स्य पुराण में इसे अवंतिका एवं अमरकंटक के साथ अविमुक्त क्षेत्र कहा गया है। जैन धर्म एवं बौद्ध धर्म के जातक कथाओं में इसे कालगिरी नाम से जाना गया है।

कहा जाता है कि सृष्टि के आरंभिक काल में जब समुद्र मंथन हुआ तो उससे 14 रत्न निकले। उन रत्नों में कालकूट नाम का एक विष भी था। इस घातक विष को ना ही देवता और ना ही दानव पीने को तैयार थे। अंत में भगवान शिव इस विषपान के लिए तैयार हुए।

भगवान शिव ने यहीं पर कालकूट का पान कर इसे कंठ में धारण किया था। जब विष की तीव्रता शांत हुई तो वे कैलाश पर्वत की ओर प्रस्थान करने लगे, लेकिन इसके प्रभाव के कारण वे असहज महसूस करने लगे। फिर भगवान शिव यहीं कालिंजर पर्वत पर ही रूक कर तपस्या करने लगे और उसके ज्वाला से मुक्ति पाई। यहाँ एक अति प्राचीन भगवान नीलकंठ का मंदिर भी है, जिसकी चर्चा हम आगे करेंगे।

त्रेता युग से लेकर कलियुग तक में है अस्तित्व

हिंदू महाकव्यों के अनुसार, सतयुग में कालिंजर चेदि नरेश राजा उपरिचरि बसु के अधीन रहा, जिसकी राजधानी सूक्तिमति थी। त्रेता युग में यह कौशल कोसल नरेश श्री रामचंद्र के अधीन था। द्वापर युग में यह चेदि वंश के राजा शिशुपाल के अधीन रहा। उसके बाद यह राजा विराट के अधिकार में आ गया।

कलियुग में कालिंजर के किले पर अधिकार का सर्वप्रथम उल्लेख हस्तिनापुर के राजा दुष्यंत और शकुंतला के पुत्र महाराजा भरत का मिलता है। इतिहासकार कर्नल जेम्स टॉड के अनुसार, चक्रवर्ती सम्राट भरत ने चार महत्वपूर्ण किले बनवाए थे, जिनमें कालिंजर का किला भी था और यह सर्वाधिक महत्व का था।

कुछ विद्वानों का यह भी मत है कि इस किले का निर्माण नागों ने कराया था। कालिंजर का किला गुप्तकालीन जेजाकभुक्ति क्षत्रियवंश के महाराजा जयशक्ति चंदेल के अधीन था। यह 14वीं सदी के मध्य तक चंदेल क्षत्रियों के अधीन रहा, उसके बाद यह सोलंकी क्षत्रियों के हाथों में आ गया।

भगवान गौतम बुद्ध के समय यानी 563-480 ईसा पूर्व यहाँ चेदि वंश का शासन था। इसके बाद यह क्षेत्र मौर्य साम्राज्य के अधिकार में आ गया। मशहूर चीनी यात्री ह्वेन त्सांग ने भी 7वीं शताब्दी में अपने दस्तावेज़ों में कालिंजर और खजुराहो का जिक्र किया है। इसके ऐतिहासिक साक्ष्य गुप्त काल से मिलने शुरू होते हैं। पुरातत्ववेताओं को वहाँ से गुप्त काल के कुछ शिलालेख मिले हैं।

गजनवी से लेकर पेशवा तक का आक्रमण, शेरशाह की मौत का बना कारण

सामरिक और आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण कालिंजर का दुर्ग 16वीं सदी तक अपराजेय रहा। इस दौरान महमूद गजनवी, कुतुबद्दीन ऐबक, हूमायूँ, शेर शाह सूरी, बाजीराव पेशवा जैसे कितनों ने इस पर आक्रमण कर अपने अधीन करने की कोशिश की, लेकिन वे असफल रहे।

कालिंजर को जीतना अपना शौर्य सिद्ध करने की एक कसौटी भी थी। इसकी दीवारें पाँच मीटर मोटी थीं। दुर्ग की ऊँचाई ही 108 फुट थी। ख़ास बात यह कि जिस पहाड़ी पर इसे बनाया गया है, उसके चारों तरफ खड़ी ढलान है। इसी वजह से दुर्ग पर तोप से हमला करना भी बेहद मुश्किल था।

इसके महत्व को समझते हुए शेरशाह सूरी कालिंजर किले को किसी भी हाल में हथियाना चाहता था। एक महीने की लगातार घेराबंदी के बावजूद वह किले को जीत नहीं पाया तो उसने इसके दीवारों को तोप से उड़ाने का आदेश दिया। कहा जाता है कि तोप का एक गोला कालिंजर के दीवार से टकराकर वापस आकर शेरशाह को लगा और वह बुरी तरह जख्मी हो गया। इस जख्म के कारण बाद में उसकी मौत हो गई।

हालाँकि, बाद में मुगल आक्रांता अकबर ने 1569 ई. में इस किले को जीत लिया। इसके बाद उसने किले को अपने प्रमुख दरबारी और नवरत्न बीरबल को जागीर के रूप में दिया। आगे चलकर यह किला फिर से क्षत्रिय राजा छत्रसाल के अधीन आ गया।

अकबर का नवरत्न बीरबल पूरी जिंदगी इसी किले में रहा

अकबर के नवरत्नों में सबसे प्रमुख था बीरबल। वह अकबर का प्रधान सेनापति और प्रधान राजनीतिक सलाहकार भी था। बीरबल ने इसी कालिंजर के राजा के प्रमुख पुरोहित की बेटी से शादी की थी और बाद में उसने कालिंजर को जीतने में अकबर की मदद की थी। जिस कालिंजर को आजतक कोई जीत नहीं पाया था, वह बीरबल का जागीर बन गया था।

बीरबल के बारे में सार्वजनिक रूप से बहुत कम जानकारियाँ मिलती हैं। सबसे पहले हमने जानने की कोशिश है कि बीरबल कौन था, जिसकी रण-कौशल और सूझबूझ से अकबर इस किले को जीतने में समर्थ हो पाया। बीरबल को बेहद बुद्धिमान मुगल दरबारी माना जाता है। कहा जाता है कि अकबर आँख मूँद कर बीरबल पर भरोसा करता था। वह बीरबल की बातों को प्रायः कम ही काटता था।

बीरबल दरबार में अकबर के बराबर और ठीक बगल में बैठता था। मुगल सल्तनत में कोई राजनीतिक या रणनीतिक कदम बीरबल के सलाह के बिना अकबर नहीं लेता था। बीरबल पहला व्यक्ति और हिंदू था जिसने अकबर के शुरू किए दीन-ए-इलाही धर्म को अपनाया था। यही कारण था कि अकबर के चार प्रमुख मुस्लिम दरबारी बीरबल से मन ही मन द्वेष भी रखते थे, लेकिन चाह कर भी कुछ कह नहीं पाते थे।

बीरबल का असली नाम महेश दास था। कुछ विद्वान उनका जन्म यूपी के कानपुर में तो कुछ मध्य प्रदेश के सीधी में बताते हैं। हालाँकि, अधिकांश विद्वान सीधी के घोघरा गाँव को ही उसका जन्मस्थान मानते हैं। महेश दास के परिवार को लेकर भी विद्वानों में मतभेद है। कुछ विद्वान उन्हें भट्ट तो कुछ उन्हें कान्यकुब्ज ब्राह्मण बताते हैं। हालाँकि, इस बात पर सभी एकमत हैं कि वह ब्राह्मण ही था।

महेश दास बचपन से से चतुर और होनहार था। उसे कविता का बेहद शौक था। पिता गंगा दास की मृत्यु के बाद वह आमेर के राजा भगवान दास के दरबार में ब्रह्म कवि के नाम से दरबारी हो गया। कहा जाता है कि राजस्थान में उसे पहली बार संगरमर के बारे में पता चला और उसने अकबर को चिट्ठी लिखकर इसके बारे में बताया था। वह रीवा के राजा रामचंद्र का भी दरबारी रहा और वहाँ से वह तानसेन के माध्यम से 1556 ईस्वी या इससे थोड़ा बाद में (तिथि स्पष्ट नहीं है) अकबर के दरबार में चला गया।

‘स्टोरीज ऑफ राजा बीरबल’ में कुलीख राम लिखे हैं कि महेश दास से खुश होकर अकबर ने उसे वीर वर नाम दिया, जो आगे चलकर बीरबल हो गया। समय के साथ और अकबर से विश्वासभाजन की वजह से उसे राजा सहित कई उपाधियाँ मिलीं।

पी.पी. सिन्हा ने अपनी पुस्तक ‘राजा बीरबल: लाइफ एंड टाइम्स’ में लिखा है कि बीरबल अकेला ऐसा व्यक्ति था, जिसके लिए अकबर ने अपने महल में महल में बनवाया था। फतेहपुर सिकरी के महल में बीरबल के लिए अलग महल था और यहाँ तक इसके नौ दरवाजों में से एक बीरबल के नाम पर था।

अकबर लड़ाई में जाता था, वह अपने साथ बीरबल को रखता था। बिहार और गुजरात अभियान के दौरान भी बीरबल अकबर के साथ था। बीरबल ने 1584 ईस्वी में रीवा के उसी राजा रामचंद्र को अकबर की अधीनता स्वीकार करने के लिए बाध्य किया, जिसका वह कभी दरबारी कवि था। बीरबल ही था, जिसने अकबर को राजाओं से वैवाहिक संबंध स्थापित करने की सलाह दी था। इसके बाद पहली बार भारमल की बेटी से अकबर ने शादी की थी। उसकी यह नीति कारगर साबित हुई थी।

‘राजा बीरबल: लाइफ एंड टाइम्स’ के अनुसार, राजपूत-समर्थक नीति का पालन करने में अकबर को राजा बीरबल से अमूल्य सहायता प्राप्त हुई था। बीरबल ने अपना प्रारंभिक जीवन आमेर के राजा भगवान दास और रीवा के राजा रामचंद्र के दरबारों में बिताया था और वह राजपूतों के लक्षणों और आदतों के बारे में भली-भाँति परिचित था। इतिहासकारों के अनुसार, बीरबल ने देश के दर्जनों राजाओं पर विजय प्राप्त करने में अकबर की मदद की थी।

बीरबल मुगल अकबर को इरोटिक कहानियाँ और कविताएँ सुनाया करता था। इसे वह श्रृंगार रस कहता था। इसमें वह महिलाओं के अंग-प्रत्यंग और नख से लेकर शिख तक का वर्णन करता था। बाल-चाल-आँखे और खूबसूरती को वह उत्तेजक अंदाज में अकबर को सुनाया करता था। अकबर का नवरत्न दरबारी बदायूँनी बीरबल को गदई यानी तुच्छ और चापलूस कहता था। बदायूँनी के अनुसार, चापलूसी के दम पर उससे बाद में आया बीरबल अकबर का करीबी बन गया था।

बदायूँनी लिखता है कि बीरबल के खिलाफ दो आरोप लगे- एक वेश्यावृत्ति कराने का और दूसरा अपनी बेटी के साथ नाजायज संबंध रखने का। पहले मामले में जिन-जिन लोगों का नाम आया, अकबर ने सबको दंड दिया, लेकिन बीरबल को कुछ नहीं कहा। वहीं, दूसरे मामले में बीरबल ने कहा कि वह बेटी के साथ वैष्णव आश्रम गया था। कहा जाता है कि बीरबल का कोई बेटा नहीं था और उनकी सिर्फ एक बेटी थी कमला, जिसने शादी नहीं की थी।

बीरबल 1572-73 में काँगड़ा में मुगल अभियान में शामिल था। इस अभियान में मुगल सैनिकों ने प्रसिद्ध महामाई देवी मंदिर की छतरी को तीरों से बिंध दिया था। मुस्लिमों सैनिकों ने 200 गायों को मंदिर परिसर में लाकर मारा और मंदिर की दीवारों और दरवाजों पर खून से भरे जूते फेंक दिए थे। उसके बाद मंदिर को मस्जिद में बदल दिया गया। महामाई मंदिर को अपवित्र करने के लिए बदायूँनी ने सीधे तौर पर बीरबल को जिम्मेदार ठहराया था। इससे दुखी होकर बीरबल ने नगरकोट और कालिंजर की जागीर अकबर को लौटा दी थी।

बीरबल के गुजरात अभियान के दौरान भी जैन मूर्तियों को बर्बरता से तोड़ दिया गया। हालाँकि, अफगानिस्तान के युसुफजई अभियान में बीरबल की मौत हो गई। बीरबल की मौत पर अकबर बहुत उदास हुआ था। इतिहासकार बीरबल को चतुर रणनीतिकार, कूटनीतिज्ञ के साथ-साथ एक कुशल योद्धा मानते थे।

किले का स्थापत्य और बनावट

कई राजवंशों के अधिकार क्षेत्र में रहने के कारण कालिंजर दुर्ग में स्थापत्य कला की कई शैलियाँ दिखाई देती हैं। इसमें गुप्त शैली, प्रतिहार शैली, पंचायतन नागर शैली आदि प्रमुख हैं। कहा जाता है कि वास्तुकार ने इसका निर्माण अग्निपुराण, बृहद् संहिता तथा अन्य वास्तु ग्रन्थों के अनुसार किया था।

कालिंजर पहाड़ी की चोटी पर स्थित इस किले में अनेक स्मारक और मूर्तियाँ हैं। इसे मूर्तियों का खजाना कहा जाए तो गलत नहीं होगा। यह किला चंदेल वंश के शासन काल की भव्य वास्तुकला का उदाहरण है। इस विशाल किले में भव्य महल और छतरियाँ हैं, जिन पर बारीक डिजाइन और नक्काशी की गई हैं।

दुर्ग में प्रवेश के लिए सात द्वार हैं और ये सभी एक-दूसरे से भिन्न शैलियों से अलंकृत हैं। किले की दीवारों पर कई कलाकृतियाँ हैं, जो कि अपने आप में अद्भुत हैं। किले के बीचों-बीच अजय पलका नाम का एक झील है। इसकी परिधि में कई प्राचीन मंदिर स्थित हैं। यहाँ ऐसे तीन मंदिर हैं, जिन्हें अंकगणितीय विधि से बनाया गया है।

मंदिर के ठीक पीछे की तरफ पहाड़ काटकर पानी का एक कुंड बनाया गया है। इसमें बने मोटे-मोटे स्तंभों और दीवारों पर प्रतिलिपियाँ लिखी हुई हैं। इस मंदिर के ऊपर पहाड़ है, जहाँ से पानी रिसता रहता है। बुंदेलखंड सूखे वाला इलाका है, लेकिन इस पहाड़ से सैकड़ों सालों से लगातार पानी रिस रहा है। इसके बारे में किसी को भी ठोस जानकारी नहीं है।

भगवान नीलकंठ का मंदिर

कालिंजर किले को भगवान शिव का निवास स्थान माना जाता है। इसमें नीलकंठ महादेव का एक अनोखा मंदिर है, जिसे चंदेल शासक परमादित्य देव ने बनवाया था। मंदिर में 18 भुजा वाली विशालकाय प्रतिमा के अलावा नीले पत्थर का एक शिवलिंग है। शिवलिंग की खासियत यह है कि उससे पानी रिसता रहता है।

नीलकंठ मंदिर के ऊपर ही जल का एक प्राकृतिक स्रोत है, जो कभी सूखता नहीं है। इसी जल से मंदिर में मौजूद शिवलिंग का निरंतर प्राकृतिक तरीके से जलाभिषेक होते रहता है। यहीं पर काल भैरव की प्रतिमा के बगल में चट्टान काटकर एक जलाशय बनाया गया है। इसे ‌’स्वर्गारोहण जलाशय’ कहा जाता है। कहा जाता है कि इसी जलाशय में स्नान करने से कीर्तिवर्मन का कुष्ठ रोग खत्म हुआ था। ये जलाशय पहाड़ से पूरी तरह से ढँका हुआ है।

मंदिर जाने के रास्ते में पत्थरों पर भगवान शिव, काल भैरव, गणेश, हनुमान आदि की प्रतिमाएँ उकेरी गई हैं। इसके अलवा, यक्ष-यक्षिणी, योगिनी एवं विभिन्न मुद्राओं वाली नर्तकियों की भी प्रतिमाएँ यहाँ उकेरी गई हैं, जो अद्भुत हैं।

इसके अलावा यहाँ सीता सेज नाम का एक स्थान है। कहा जाता है कि जब भगवान श्रीराम माता सीता के साथ चित्रकूट आए थे, तब वे यहाँ भी आए थे। इस दौरान इसी जगह पर माता सीता ने विश्राम किया था। यहाँ पर ताल भी है, जिसमें कहा जाता है कि नहाने के बाद कोढ़ जैसा रोग दूर हो जाता है।

किले में पाताल गंगा, पांडव कुंड, बुढ्डा-बुढ्डी ताल, भगवान सेज, भैरव कुंड, मृगधार, कोटितीर्थ, चौबे महल, जुझौतिया बस्ती, मूर्ति संग्रहालय, रामकटोरा ताल, भरचाचर, राठौर महल, रनिवास, ठा. मतोला सिंह संग्रहालय, बेला ताल, सगरा बाँध प्रमुख है।

कुछ समय तक इस्लामी शासन के अधीन रहने के कारण किले में शाही मस्जिद, मजार ताल, शेरशाह सूरी का मक़बरा, वाऊचोप मकबरा, हुमायूँ की छावनी और बीरबल की छतरी भी मौजूद है। यहाँ आज भी कई दुर्लभ जड़ी-बुटियाँ पाई जाती हैं।

रहस्यमयी किला है कालिंजर

कहा जाता है कि कालिंजर के किले में कई रहस्यमयी गुफाएँ हैं। ये गुफाएँ किले से शुरू होती हैं, लेकिन कहाँ तक जाती हैं ये कोई नहीं जानता। इसके अलावा, किले में रात के वक्त घुँघरुओं की आवाज आने की बात भी कही जाती है।

लोग कहते हैं रात होते ही यहाँ एक अजीब तरह की वीरानगी छा जाती है और उस वीरानगी में भी एक हलचल महसूस होती है। यहाँ के एक महल से रात को घुंघरुओं की आवाजें सुनाई देती हैं। किवदंतियों के अनुसार, प्राचीन काल में राज दरबार में पद्मा नाम एक बेहद खूबसूरत नर्तकी रहती थी।

पद्मा भगवान शिव की अन्यन्य भक्त थी। कार्तिक पूर्णिमा की रात को वह भगवान शिव के लिए समर्पित होकर नृत्य करती थी। आज 1500 साल बाद भी उस नर्तकी के घुँघरुओं की आवाज किले में सुनाई देती है। इतिहासकार भी इस घटना को सच मानते हैं।

कुछ लोगों का यह भी मानना है इस किले में अकूत खजाना छिपा हुआ है। इसमें हीरे-जवाहरातों जैसे अमूल्य रत्न हैं। कहा जाता है कि इस किले पर अधिकार को लेकर जितनी भी लड़ाइयाँ लड़ी गई हैं, वे खजाने को लेकर ही हुई हैं।

खैर कालिंजर को लेकर जो भी लोगों की मान्यता हो, लेकिन इतिहास में इस किले का अमूल्य स्थान है। आज भी यहाँ लाखों पर्यटक आते हैं और इतिहास का साक्षी बनने की कोशिश करते हैं। इसके साथ ही किले में स्थित मंदिर में भगवान नीलकंठ का दर्शन करने आने वाले लोगों की भी कमी नहीं है।

अमेरिकी मॉल में ताबड़तोड़ फायरिंग, हमलावर को हथियारों से लैस ‘आम आदमी’ ने मार गिराया: 4 की मौत, बाथरूम में मिला संदिग्ध ‘बस्ता’

अमेरिका में फिर से सरेआम लोगों पर गोली चलाए जाने का मामला प्रकाश में आया है। घटना ग्रीनवुड शहर के इंडियाना मॉल की है। यहाँ एक शख्स ने अचानक फूड कोर्ड में बैठे लोगों के ऊपर रविवार (17 जुलाई 2022) शाम गोली दागनी शुरू कर दी। गोलीबारी में 4 लोगों की मौत हो गई जबकि एक 12 साल की बच्ची समेत 2 लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। मरने वालों में से एक हमलावर भी है।

ग्रीनवुड पुलिस डिपार्टमेंट चीफ जिम इसॉन ने बताया कि रविवार शाम को (अमेरिकी टाइम के अनुसार) 6 बजे इमरजेंसी कॉल सेंटर से पता चला कि इंडियाना मॉल हुई ताबड़तोड़ फायरिंग हो रही है। घटना में 4 लोगों की मौत हो गई है। हमलावर भी मारा गया है। उसे मॉल में हथियारों से लैस एक व्यक्ति ने मारा, तब जाकर फायरिंग रुकी।

इसॉन ने कहा कि घटना के बाद पुलिस अपनी जाँच कर रही है। पुलिस को पता चला था कि शूटर ने मॉल के बाथरूम में ‘संदिग्ध’ बैग छोड़ दिया था, जिसके बाद बम स्क्वॉड ने उसकी जाँच की और पता लगाया कि कहीं कुछ विस्फोटक तो नहीं है। हालाँकि बैग में ऐसा कुछ नहीं मिला और जाँच को आगे बढ़ाया गया।

मास शूटिंग के इस नए मामले पर ग्रीनवुड के मेयर ने कहा, “मॉल में बड़े पैमाने पर शूटिंग हुई। ग्रीनवुड पुलिस ने हालात पर काबू पा लिया है। मैं कमांड पोस्ट से सीधे संपर्क में हूँ और अब खतरा नहीं है। मैं जनता से अपील करता हूँ कि अभी इस क्षेत्र से दूर रहें।”

मेयर ने हमलावर को मारने वाले युवक का आभार जताते हुए कहा, “इस आदमी ने सबकी जान बचाई है। ग्रीनवुड शहर की ओर से मैं उनको धन्यवाद देता हूँ कि उन्होंने इतनी त्वरित कार्रवाई करके ऐसी स्थिति में साहस दिखाया।”

पुलिस ने हमलावर की जानकारी देते हुए बताया कि इस बार हमला करने वाला 22 वर्षीय व्यक्ति है और उसके पास लंबी राइफल व कई सारी मैग्जीन थीं। अंदर मौजूद लोगों ने बताया कि उन्हें फूड कोर्ड से अचानक 20 गोली चलने की आवाज सुनाई दीं थी। हमलावर फूड कोर्ट में ही गोली बारी कर रहा था जब उसे मारा गया।

बता दें कि मास शूटिंग के मामले लगातार अमेरिका में बढ़ रहे हैं। 4 जून 2022 फिलाडेल्फिया में साउथ स्ट्रीट पर जमा भीड़ पर अज्ञात बंदूकधारियों ने अंधाधुंध फायरिंग की थीं। इस हमले में 14 लोगों को गोली लगी थी जिनमें तीन ने दम तोड़ दिया था और 11 घायल हो गए थे।

अमेरिकका में मास शूटिंग

अमेरिका में बढ़ रहे मास शूटिंग के मामलों को देखते हुए कुछ दिन पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा था कि अमेरिका में बच्चों और परिवारों की रक्षा करने के लिए हथियारों की खरीद पर प्रतिबंध लगना चाहिए या फिर हथियार खरीदने की उम्र को 18 से बढ़ाकर 21 किया जाना चाहिए।

उल्लेखनीय है कि अमेरिका में बीते कुछ दिनों में उवाल्डे, बफेलो और टेक्सास में गोलीबारी की कई घटना घट चुकी हैं। ऐसे में 22 जून को अमेरिकी सांसदों के ग्रुप ने एक नया सुरक्षा विधेयक तैयार किया था जिसमें खतरनाक लोगों से हथियार वापस लेने का प्रस्ताव है। साथ ही कई बिलियन डॉलर लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर खर्चने की बात है।

कॉन्ग्रेसी मंत्री ने ज्ञापन देने वाली महिला को बाहर निकलवाया, कहा – भागो यहाँ से: लेडीज टॉयलेट से निकलते हुए वीडियो भी हुई थी वायरल

अक्सर विवादों में रहने वाले राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार के स्वास्थ्य मंत्री परसादी लाल मीणा द्वारा एक महिला समाजसेविका के साथ दुर्व्यवहार किए जाने का मामला सामने आया है। महिला समाजसेवी राजेश्वरी मीणा ईस्टर्न राजस्थान कैनाल प्रोजेक्ट (ERCP) के डीपीआर में संशोधन को लेकर मंत्री को ज्ञापन सौंपने गई, लेकिन मंत्री ने उन्हें ‘गेट आउट’ कह दिया।

अति तो तब हो गई जब मंत्री के आदेश पर वहाँ तैनात पुरुष पुलिसकर्मियों ने राजेश्वरी मीणा को धक्का मारकर बाहर निकाल दिया। रिपोर्ट के मुताबिक, ये घटना दौसा जिले लालसोट में रविवार (17 जुलाई 2022) को घटी। मंत्री परसादी लाल मीणा लालसोट के मंजावरी गाँव स्थित अपने घर पर जनसुनवाई कर रहे थे। इसी दौरान ईआरसीपी में संशोधन की माँग को लेकर पहुँची राजेश्वरी मीणा ने मंत्री से दौसा क्षेत्र के बाँधों को भी इससे जोड़ने की माँग की। हालाँकि, मंत्री को ये बात नहीं जमी और उन्होंने डीपीआर में बदलाव करने से साफ इनकार कर दिया।

उन्होंने डीपीआर के मुद्दे को केंद्र सरकार के मत्थे मढ़ने की कोशिश करते हुए कहा कि सिंचाई के लिए एरिया बढ़ाना चाहे तो बढ़ा सकती है। उन्होंने महिला को गुस्से में धमकाया कि वो राज्य और भारत सरकार के बीच टकराव में ने आए। उन्होंने कहा कि ईआरसीपी को राष्ट्रीय परियोजना घोषित करने की हमारी माँग है, बकवास बंद करो। इस पर महिला ने कहा कि ये तो आपके दाँव पेंच हैं। इस पर परसादी लाल मीणा बिफर उठे। उन्होंने समाजसेवी राजेश्वरी मीणा को डपटते हुए कहा, भाग जाओ यहाँ से, बिना परमीशन के ये कैसे अंदर आई, गेट आउट। इस पर महिला ने कहा कि तमीज से बात करिए। इसके बाद तो उन्होंने पुलिसकर्मियों से महिला को बाहर निकालने को कह दिया।

राजेश्वरी मीणा ने कहा कि आपको जनता ने चुनकर भेजा है। कोई मुझे हाथ नहीं लगा सकता। तीखी नोकझोंक के बाद मंत्री के आदेश के बाद मंडावरी थाने के पुलिसकर्मियों ने जबरदस्ती महिला को धक्के मारकर बाहर निकाल दिया। इस पर समाजसेवी रोने लगीं। उन्होंने कहा कि एक पुरुष पुलिसकर्मी मुझे कैसे हाथ लगा सकता है। उल्लेखनीय है कि परसादी लाल मीणा मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के करीबी नेता माने जाते हैं।

इसी तरह से पिछले साल नवंबर 2021 में लखनपुर गाँव के मीठा लाल मीणा का बेटा महाराष्ट्र से लापता हो गया था, जिसकी शिकायत के लिए वो मंत्री मीणा के पास गया था और उन्होंने उसे भी गेट आउट कर दिया था। ऐसे ही परसादी लाल मीणा पिछले साल फरवरी में एक महिला टॉयलेट में घुस गए थे। उस दौरान वो उद्योग मंत्री थे।

8 साल पुराने ‘धांधली’ मामले में अमानतुल्लाह खान के ऊपर CBI कसेगी शिकंजा, LG से मिली अनुमति, अब दर्ज होगा केस

आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह खान के खिलाफ दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने सीबीआई जाँच के आदेश दे दिए हैं। ये जाँच साल 2016 में दिल्ली वक्फ बोर्ड में हुई नियुक्तियों की धांधली और सरकारी खराजने को नुकसान पहुँचाने को लेकर है।

अमानतुल्लाह खान के साथ वक्फ बोर्ड के तत्कालीन मुख्य कार्यकारी अधिकारी महबूब आलम के खिलाफ भी सीबीआई को केस दर्ज करने की अनुमति दी गई है। आरोप है कि अमानतुल्लाह खान और महबूब आलम ने अपने पदों का दुरुपयोग करके वक्फ बोर्ड में अपने जानने वालों की नियुक्ति की।

इस संबंध में दिल्ली सरकार के राजस्व विभाग के एसडीएम ने नवंबर 2016 में वक्फ बोर्ड के तत्कालीन अध्यक्ष के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई थी। उन्होंने कहा था कि इन लोगों ने वक्फ बोर्ड में स्वीकृत और गैरस्वीकृत पदों पर मनमाने ढंग से नियुक्तियाँ करवाईं।

इसके बाद सीबीआई जाँच में भी यह सामने आया कि जानबूझकर नियमों की अनदेखी की गई और हजारों योग्य व्यक्तियों को नजरअंदाज करके भर्ती प्रक्रिया में मनमाने ढंग से अपने लोगों को वक्फ बोर्ड में शामिल किया गया। सीबीआई ने जाँच के बाद कहा था कि उन्हें अमानतुल्लाह खान और महबूब आलम के खिलाफ पर्याप्त सबूत मिले हैं कि उनके ऊपर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13 (1) (डी) और धारा 13 (2) के तहत व आईपीसी की धारा 120 बी के तहत केस चल सके।

जाँच से यह भी सामने आया कि अगर भर्ती की प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष किया जाता तो योग्य लोग नौकरी पाते। मगर, आप विधायक अमातुल्लाह खान और वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष आलम ने अन्य लोगों को समानता और अवसर के अधिकार से दूर रखा और उन्हीं की नियुक्ति की गई, जिन्हें वह चाहते थे। अब मीडिया में सीबीआई की इसी जाँच को आधार बनाकर दावा किया जा रहा है कि दिल्ली के उपराज्यपाल ने जाँच एजेंसी को केस शुरू करने की अनुमति दे दी है। सीबीआई ने 2016 से जुड़े इस केस को लेकर मई में केस शुरू करने की अनुमति माँगी थी।

‘अपने एक्स बॉयफ्रेंड के साथ करना चाहेंगी सेक्स?’: करण जौहर के सवाल का जाह्नवी ने दिया जवाब, रणवीर से शादी करना चाहती हैं सारा

बॉलीवुड फिल्म निर्माता करण जौहर के पापुलर चैट शो ‘कॉफी विद करण’ का 7वां सीजन शुरू हो चुका है और इसका दूसरा एपिसोड भी लॉन्च हो गया है। इस एपिसोड में एक्ट्रेस जाह्नवी कपूर और सारा अली खान शामिल हुईं। इस दौरान करण जौहर ने सारा अली खान से पूर्व ब्वॉयफ्रेंड के साथ सेक्स को लेकर सवाल किया, जिसका सारा ने गोलमोल तरीके से जबाव दिया। उन्होंने कहा, सही जवाब है नहीं, सही जवाब है शायद।

वहीं जाह्नवी कपूर ने कहा कि वो पीछे मुड़कर देखना नहीं चाहेंगी। इस मौके पर सारा अली खान ने कार्तिक ऑर्यन को डेट करने को लेकर बात की। साथ ही उन्होंने इच्छा जताई कि वो दक्षिण भारतीय फिल्मों के एक्टर विजय देवरकोंडा को डेट करना चाहती हैं। उल्लेखनीय है कि विजय देवरकोंडा तेलुगू फिल्मों के स्टार हैं। सारा का कहना था कि वो अपने भविष्य के पति के तौर पर रणवीर सिंह को चुनना चाहेंगी। एक्ट्रेस का कहना है कि उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता है कि वो शादीशुदा हैं। ये कोई बड़ी बात नहीं है।

जब मौत के निकट पहुँच गई थीं सारा

करण जौहर के शो में बातचीत के दौरान सारा अली खान और जान्हवी कपूर ने केदारनाथ ट्रिप के एक किस्से को भी साझा किया। जान्हवी कपूर ने खुलासा किया कि केदारनाथ की ट्रिप के दौरान वो मौत के करीब पहुँच गई थीं। उन्होंने बताया कि रोड ब्लॉक हो गया था, जिस कारण से उन लोगों ने भैरवनाथ के रास्ते से जाने का फैसला किया। हमें इस बात का जरा सा भी इल्म नहीं था कि वहाँ का रास्ता इतना अधिक खराब था कि एक वक्त तो हम लोग लगभग मौत के करीब ही पहुँच गए थे। जान्हवी ने खुलासा किया कि पैसे बचाने की कोशिश में सारा अली खान ने सस्ता होटल बुक किया, जिस कारण से उनका हालत और अधिक खराब हो गई।

2380 शहर, 3000 शाखाएँ: 86 साल पहले लक्ष्मीबाई केलकर ने शुरू किया था महिला RSS, मातृशक्ति से राष्ट्र निर्माण करना था विजन

भारत में स्त्री-आरएसएस यानी कि राष्ट्र सेविका समिति की नींव रखने वाली लक्ष्मीबाई केलकर (मौसी जी) के 117 वें जन्मदिवस के मौके पर दिल्ली में ‘संकल्प दिवस’ कार्यक्रम का आयोजन हुआ।

ये कार्यक्रम 16 जुलाई 2022 को समिति के प्रबुद्ध वर्ग, जिन्हें ‘मेधाविनी सिन्धु सृजन’ के नाम से जाना जाता है, उन्होंने दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज में आयोजित किया।

इस कार्यक्रम में मातृशक्ति का महत्व समझाते हुए राष्ट्रनिर्माण को लेकर बात हुई। कार्यक्रम की अध्यक्षता पायल मागो ने की जबकि मुख्य वक्ता संवर्धिनी न्यास की अखिल भारतीय संगठन सचिव माधुरी मराठे रहीं।

माधुरी मराठे ने मंच से कहा कि चरित्र निर्माण तथा राष्ट्र निर्माण में मातृशक्ति की अहम भूमिका होती है। मातृ शक्ति संगठन के जरिए ही राष्ट्र और विश्व में परिवर्तन किया जा सकता है।

उन्होंने लक्ष्मीबाई केलकर द्वारा समाज में दिए गए योगदान से प्रेरणा लेने को कहा। वह बोलीं, “लक्ष्मीबाई केलकर जी ने अपने विधवा होने को अभिशाप न मानकर शक्ति माना और राष्ट्र निर्माण के कार्य में जुट गईं तथा वर्धा में समिति की स्थापना की। हम अपनी कमियों को अपनी शक्ति बनाएँ और जिस प्रकार भी संभव हो राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दें। यही लक्ष्मी बाई केलकर के जीवन का आदर्श वाक्य था।”

कार्यक्रम की तस्वीर

उन्होंने कहा कि समाज में नेतृत्व करने वाले शख्स को ‘मौसी जी’ जैसा होना चाहिए। उनके जीवन में ‘मैं’ का स्थान नहीं था। उन्होंने सबकुछ राष्ट्र को समर्पित कर दिया था।

आगे देश की संस्कृति को बनाए रखने की जरूरत पर बात करते हुए माधुरी मराठे ने बताया कि कैसे महिलाओं के जागरण के लिए केलकर ने अपना पूरा जीवन समर्थन किया हुआ।

उन्होंने कहा, “देश के विभाजन के वक्त सेविकाओं के आह्वान पर लक्ष्मीबाई केलकर कराची पहुँची और सेविकाओं को विषम परिस्थितियों का साहस के साथ सामना करने के लिए प्रेरित किया।”

बता दें कि राष्ट्र सेविका समिति की आद्य संचालिका लक्ष्मीबाई केलकर के 117 वें जन्मदिन के मौके पर दीन दयाल कॉलेज में हुए इस कार्यक्रम में 300 की तादाद में महिलाएँ शामिल हुईं और लगभग 250 के करीब महिलाओं ने गूगल मीट के जरिए इसमें अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

राष्ट्र सेविका समिति

राष्ट्र सेविका समिति के बारे में बता दें कि 25 अक्टूबर 1936 को विजयदशमी के दिन इस संगठन की नींव रखी गई थी। आज ये भारतीय महिलाओं का सबसे बड़ा और सुदृढ़ संगठन है जिसकी शाखाएँ पूरे भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी फैली हुई हैं। भारत के 2380 शहरों ,कस्बों और गाँवों में समिति की 3000 शाखाएँ चल रही हैं।

समिति के 1000 सेवा प्रकल्प चल रहे हैं। दुनिया के 16 देशों में समिति की सशक्त उपस्थिति दर्ज हो चुकी है। इसके अलावा सेविका समिति सामाजिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक धरातल पर 1936 से काम कर रही है । शाखाओं के माध्यम से समिति की सेविकाएँ (सदस्या) समाज और देश के समग्र विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।

लुलु मॉल ने नमाजियों के खिलाफ दर्ज कराई FIR, केरल का अरबपति युसूफ अली है मालिक: मॉल में लगे 1016 CCTV, 200 गार्ड

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित लुलु मॉल में मुस्लिमों द्वारा नमाज पढ़े जाने के बाद मचे बवाल के बाद उसकी सुरक्षा को बढ़ा दिया गया है। शॉपिंग मॉल के प्रबंधन ने इसके हर फ्लोर पर सिक्योरिटी को बढ़ाते हुए 200 सुरक्षा गार्डों को तैनात कर दिया है। इसके साथ ही 1016 सीसीटीवी कैमरों को एक्टिव कर दिया है।

मॉल प्रबंधन ने ये फैसला करणी सेना से जुड़े 10 लोगों को कस्टडी में लिए जाने के बाद लिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, करणी सेना के लोग मॉल का बॉयकॉट करने वाले पोस्टर लिए हुए थे। इस बीच लखनऊ पुलिस कमिश्नर डीके ठाकुर ने एक्शन लेते हुए गोल्फ सिटी के एसएचओ अजय प्रताप सिंह को पुलिस लाइन अटैच कर लिया है। उनके स्थान पर शैलेंद्र गिरि को नया एसएचओ नियुक्त किया गया है। यहीं नहीं साउथ जोन के डीसीपी गोपाल चौधरी को क्राइम ब्रांच का डीसीपी बना दिया गया है।

मॉल प्रबंधन ने नमाज पढ़ने वालों के खिलाफ किया केस

इस बीच लुलु मॉल के प्रबंधन ने उन लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है, जिन्होंने कुछ दिन पहले इसके परिसर में नमाज अदा की थी। लुलु इंडिया शॉपिंग मॉल, लखनऊ के क्षेत्रीय निदेशक जयकुमार गंगाधर ने कहा, “प्रतिष्ठान में धार्मिक प्रथाओं में शामिल होना प्रतिबंधित है।”

गंगाधर ने कहा कि कुछ स्वार्थी तत्व लुलु मॉल को निशाना बनाने की कोशिश कर रहे थे। मॉल प्रशासन ने पहले एक नोटिस जारी कर कहा था कि मॉल परिसर में किसी भी धार्मिक प्रार्थना की अनुमति नहीं दी जाएगी। लोगों द्वारा नमाज अदा करने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद यह नया निर्देश आया है। मॉल प्रबंधन ने दावा किया कि उसके यहाँ 80% से अधिक कर्मचारी हिन्दू हैं और बाकी मुस्लिम, ईसाई व अन्य हैं।

गौरतलब है कि इस मॉल के मालिक यूसुफ अली हैं, जो कि एक अरबपति व्यवसायी हैं। वो मूल रूप से केरल के रहने वाले हैं। लेकिन, रहते अबू धाबी में हैं। दरअसल लुलु मॉल में नमाज पढ़ने का मामले सबसे पहले 12 जुलाई 2022 को उस वक्त आया था, जब कुछ मुस्लिमों ने वहाँ पर नमाज पढ़ी और इसका वीडियो वायरल हो गया था।