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इस्लामी कट्टरपंथी काटते रहे और हिंदू आत्मरक्षा भी न करें… आखिर ये किस तरह की ‘शांति’ चाहता है TOI

भारत आज उथल-पुथल के दौर से गुजर रहा है। इस्लामवादियों के हौसले लगातार बढ़ रहे हैं और जो उनकी मर्जी के मुताबिक बोल-सुन नहीं रहा है, उसे वे धमकियाँ दे रहे हैं। पिछले एक महीने से नूपुर शर्मा को मौत और रेप की धमकियों के बाद इस्लामवादियों ने उन्हें समर्थन करने वालों का सिर कलम करना और धमकाना शुरू कर दिया है। कन्हैया लाल का सिर काटने की घटना ने देश को झकझोर कर रख दिया, क्योंकि दो इस्लामवादियों ने न केवल न केवल घटना को अंजाम दिया, बल्कि इसका वीडियो भी जारी किया।

कन्हैया लाल की घटना के तुरंत बाद पता चला कि कुछ दिन पहले हुई उमेश कोल्हे की हत्या भी नूपुर शर्मा का समर्थन करने के कारण की गई थी। तब से कई लोगों को नूपुर शर्मा और कन्हैया लाल के समर्थन में सोशल मीडिया पोस्ट के लिए सिर काटने की धमकी मिली है। इससे पहले यह बात भी सामने आई है कि नूपुर शर्मा को समर्थन देने के कारण जान से मारने की लगातार धमकी मिलने के कारण एक व्यक्ति नागपुर भाग गया था।

सुप्रीम कोर्ट के दो जजों ने तो यहाँ तक कह दिया कि कन्हैया लाल की हत्या के लिए नूपुर शर्मा जिम्मेदार हैं और उन्होंने शर्मा की ‘ढीली जीभ’ को दोषी ठहराते हुए टीवी पर पूरे देश से माफी माँगने की बात कह दी। सीधे शब्दों में कहें तो सुप्रीम कोर्ट ने इस्लामवादियों की इन हत्याओं के लिए नूपुर शर्मा द्वारा एक टीवी डिबेट में दिए गए बयान को जिम्मेदार ठहराया।

इस तरह हिंदुओं को मिलने वाली धमकी के विरोध में विश्व हिंदू परिषद (VHP) और बजरंग दल सामने आए और कहा कि अगर किसी भी हिंदू को इस तरह की मौत की धमकी मिलती है तो उन्हें डरना नहीं चाहिए और तुरंत पुलिस से संपर्क करना चाहिए। इन दलों ने आगे कहा कि हिंदुओं को भी सहायता के लिए अपनी स्थानीय बजरंग दल इकाइयों से संपर्क करना चाहिए।

विहिप ने सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों के बयानों की निंदा की और कहा कि उनकी टिप्पणियों में (जो लिखित आदेश में नहीं आया) न्यायाधीशों ने कट्टरपंथी इस्लाम के खतरे को नजरअंदाज कर दिया। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, विहिप के कार्यकारी अध्यक्ष ने व्यंग्य करते हुए कहा था कि सुप्रीम कोर्ट ने हम सभी को बताया था कि 1400 साल के इस्लामी हमले नूपुर शर्मा की गलती थी।

हालाँकि, हमें यह भी याद रखना होगा कि कई मामलों में पुलिस संज्ञान लेने से ही इनकार कर देती है, जैसे कि कन्हैया लाल के मामले में हुआ। जब कन्हैया लाल को जान से मारने की धमकी मिल रही थी, तब राजस्थान पुलिस ने मामला दर्ज करने से इनकार कर दिया था और उन्हें इस्लामवादियों से ‘समझौता’ करा दिया था। हालाँकि, कुछ दिन बाद उन्हीं लोगों ने समझौता तोड़ते हुए कन्हैया लाल का सिर कलम कर दिया।

ऐसी स्थिति में, जब प्रशासन एक हिंदू को बचाने में विफल रहता है तो समुदाय के नेताओं को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा जाता है कि दबाव बनाया जाए। दूसरा परिदृश्य शायद तब हो सकता है जब किसी के घर के बाहर भीड़ हो और पुलिस प्रशासन की संख्या बहुत कम हो। ये ऐसी वास्तविकताएँ हैं और इसके बहुत से उदाहरण हैं।

हालाँकि टाइम्स ऑफ इंडिया खुश नहीं था। अपने प्रिंट संस्करण में उसने इस समाचार को एक वाक्य के साथ प्रस्तुत किया, जो इस बात की ओर इंगित करता है कि वे चाहते हैं कि हिंदू बिना किसी लड़ाई के बस हार मान लें और केवल ‘शांति’ बनाए रखने के लिए इस्लामवादियों द्वारा मारे जाएँ।

7 जुलाई 2022 के दिल्ली संस्करण के पहले पृष्ठ पर टाइम्स ऑफ इंडिया ने कहा है कि वीएचपी द्वारा बजरंग दल को नूपुर शर्मा के समर्थन के कारण मौत की धमकी मिलने वालों की रक्षा करने के लिए कहने का निर्णय ‘तनाव को बढ़ा सकता है’।

टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, इस्लामवादियों द्वारा मौत की धमकी मिलने वालों का समर्थन करने वाला कोई भी हिंदू संगठन ‘तनाव बढ़ा सकता है’। उसके अनुसार, जिहादियों के सामने हिंदू असहाय हो जाएँ, ताकि समुदायों के बीच शांति बनी रह सके।

अगर उसे लगता है कि विहिप और बजरंग दल द्वारा मौत की धमकी देने वालों की रक्षा करने से तनाव बढ़ सकता है तो उसे यह भी कह देना चाहिए कि हिंदुओं को कोई सुरक्षा नहीं मिलनी चाहिए और उन्हें धमकी देने वालों की दया पर छोड़ दिया जाना चाहिए, ताकि ‘तनाव’ न हो।

ये ‘तनाव’ क्या है, जिसके बारे में टाइम्स ऑफ इंडिया बात कर रहा है? सच्चाई यह है कि अगर हिंदू संगठन धमकियों को पाने वालों की रक्षा करना शुरू कर देंगे तो इस्लामवादी हिंसक हो जाएँगे? या इस्लामवादी सड़कों पर और अधिक हिंसा फैला सकते हैं, यदि उन्हें रोका गया तो? TOI के पृष्ठ 16 पर प्रकाशित इस बारे में वास्तविक लेख में ‘तनाव के बढ़ने’ का कोई उल्लेख नहीं है, जबकि पेज 1 पर वह चिंतित इसी को लेकर वह चिंतित दिखाई दे रहा है।

रिपोर्ट की डिजिटल कॉपी में भी ‘बढ़ते तनाव’ का कोई उल्लेख नहीं है। हालाँकि, अपने प्रिंट संस्करण के पहले पृष्ठ पर वे उस सहज पंक्ति का उल्लेख करते हैं, जो बताती है कि वे क्या सोचते हैं।

पार्क में खेल रही थी 9 और 14 साल की बच्ची, मलयालम एक्टर ने नग्न हो दिखाया प्राइवेट पार्ट: 6 साल पहले स्कूली बच्चों के साथ भी ऐसी ही हरकत

मलयालम फिल्मों के अभिनेता श्रीजीत रवि (Sreejith Ravi) को केरल की त्रिशुर पुलिस ने गुरुवार (7 जुलाई 2022) को गिरफ्तार किया। उस पर 2 बच्चियों के यौन शोषण का आरोप है। इस संबंध में एक्टर के खिलाफ यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (POCSO) के तहत केस दर्ज किया गया है। श्रीजीत रवि पर कुछ साल पहले भी इसी तरह के आरोप लगे थे।

रिपोर्ट के मुताबिक, पीड़ित बच्चियों की उम्र 9 और 14 साल है। दोनों 4 जुलाई को त्रिशुर के एसएन पार्क में खेल रहीं थी। इसी दौरान एक व्यक्ति कार से वहाँ आया। उसने नग्न होते हुए बच्चियों को अपने गुप्तांग दिखाए। बच्चियों ने इसके बारे में अपने माता-पिता को बताया और उन्होंने पुलिस से शिकायत की। जब पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज की जाँच की तो पता पता चला अश्लील हरकत करने वाला शख्स एक्टर श्रीजीत है। इसके बाद अभिनेता को गिरफ्तार कर लिया गया। श्रीजीत का कहना है कि वे मानसिक परेशानी से जूझ रहे हैं।

यह पहली बार नहीं है, जब एक्टर श्रीजीत पर इस तरह के आरोप लगे हैं। इससे पहले साल 2016 में इसी तरह के एक मामले में उसे ओट्टापलम पुलिस ने गिरफ्तार किया था। आरोप था कि एक्टर ने स्कूल जाती लड़कियों की फोटो खींची थी और उन्हें अपना गुप्तांग दिखाया था। उनकी इस हरकत को करीब 15 लड़कियों ने देख लिया था। लड़कियों ने इसकी शिकायत स्कूल प्रिंसिपल से की। प्रिंसिपल की शिकायत बाद श्रीजीत पर मामला दर्ज किया गया था।

यह घटना 27 अगस्त 2016 की थी। उस समय एक्टर ने शुरुआत में इन आरोपों से इनकार किया था। जब उन्हें उनकी गाड़ी के नंबर का हवाला दिया गया तो उन्होंने कहा कि हो सकता है छात्राओं से गाड़ी का नंबर नोट करते वक्त गलती हो गई होगी।

इस घटना के बाद भी श्रीजीत के करियर पर इसर नहीं पड़ा। वे मलयालम फिल्मों में काम करते रहे। उन्होंने कई फिल्मों में विलेन की भूमिका भी निभाई है। गौरतलब है कि श्रीजीत लोकप्रिय अभिनेता टीजी रवि के बेटे हैं।

‘ह्यूमैनिटी टूर’ पर प्रोपेगेंडा, कश्मीर फाइल्स ‘इस्लामोफोबिक’: द क्विंट को विवेक अग्निहोत्री ने किया बेनकाब

कश्मीरी हिंदुओं के नरसंहार पर बनी फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ के डायरेक्टर विवेक अग्निहोत्री (Vivek Agnihotri) ने हिंदूफोबिक प्रोपेगेंडा वेबसाइट द क्विंट (The Quint) पर ट्वीट कर गंभीर आरोप लगाए हैं। विवेक अग्निहोत्री ने बुधवार (6 जुलाई 2022) को सिलसिलेवार कई ट्वीट्स किए। इसमें उन्होंने बताया कि कैसे क्विंट ने हाल ही में आयोजित ‘ह्यूमैनिटी टूर’ को लेकर उनके खिलाफ दुष्प्रचार किया। अग्निहोत्री ने अपने ट्वीट में लिखा, “वामपंथी हिंदूफोबिक प्रोपेगेंडा साइट द क्विंट ने मेरे खिलाफ दुष्प्रचार करने की कोशिश की, लेकिन उनका ये दावा उन्हीं पर भारी पड़ गया। यहाँ एक उदाहरण आपके सामने है। हम इन फे​क FACT-CHECKERS को नजरअंदाज करते थे, लेकिन सच्ची देशभक्ति इन देशद्रोही Urban Naxals (अर्बन नक्सलियों) को बेनकाब करना और हराना है।”

अग्निहोत्री ने अपने ट्वीट में क्विंट के पत्रकार अभिलाष मलिक द्वारा नीदरलैंड (Netherland) के हेग (Hague) में ग्लोबल ह्यूमन राइट्स डिफेंस को भेजे गए एक ईमेल को साझा किया है, जहाँ ह्यूमैनिटी टूर (Humanity Tours) का एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। यह टूर इस साल 28 मई से 26 जून के बीच हुआ था।

GHRD को क्विंट का ईमेल

अपने मेल में मलिक ने खुद को क्विंट का एक फैक्ट-चेकर बताते हुए अग्निहोत्री की सोशल मीडिया पोस्ट का लिंक लगाया, जिसमें ह्यूमैनिटी टूर के आयोजनों के स्थानों का उल्लेख किया गया था। द कश्मीर फाइल्स को ‘इस्लामोफोबिक’ फिल्म बताते हएु मलिक ने कहा, “अग्निहोत्री ने हाल ही में ‘द कश्मीर फाइल्स’ नाम की एक फिल्म बनाई है, जो 1990 के दशक में कश्मीर घाटी से कश्मीरी पंडितों के पलायन के बारे में थी। हालाँकि, फिल्म को काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है, कुछ का कहना है कि इसमें तथ्यों को छिपाया गया है और यह इस्लामोफोबिक है। वह ‘ह्यूमैनिटी टूर’ नाम की एक यात्रा पर गए हैं, जहाँ उन्होंने अपनी फिल्म के प्रचार के संबंध में यूके और जर्मनी में कई स्थानों का दौरा किया है। कम से कम दो जगहों ने उन्हें बुलाने से इनकार कर दिया, जबकि दूसरे ने दावा किया है कि उन्हें इस कार्यक्रम के बारे में कोई जानकारी नहीं है।”

मलिक ने दावा किया कि दो स्थानों ने उन्हें आमंत्रित करने से इनकार कर दिया था। वहीं एक जगह ने कहा कि उन्हें कार्यक्रम के बारे कोई भी जानकारी नहीं है। विवेक ने मलिक के दावों को झूठ बताया है। उन्होंने GHRD के एक अधिकारी द्वारा मलिक को भेजा गया जवाब भी साझा किया, जिसमें उन्होंने उस जगह के बारे में पूरी जानकारी दी है।

GHRD का जवाब

पत्र में लिखा है, “जीएचआरडी अग्निहोत्री और उनकी फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स‘ की आलोचनाओं से अवगत है। हम इन आलोचनाओं को सिरे से खारिज करते हैं। यह साफ है कि कश्मीरी पंडितों का सामूहिक नरसंहार किया गया और भारतीय संस्थान और मीडिया संस्थान लगातार इसकी उपेक्षा कर रहे हैं।” इसमें यूरोपीय कश्मीरी पंडित समुदाय (ईकेपीसी) द्वारा आयोजित फिल्म की स्क्रीनिंग का विवरण जोड़ा गया है, जिसमें 17 जून, 2022 को हेग में एक पैनल चर्चा शामिल है।

इसमें जीएचआरडी ने कहा, “इस कार्यक्रम की मेजबानी जीएचआरडी के सहयोग से की गई थी और इसमें श्री मार्को रेस्पिंटी (एक प्रसिद्ध इतालवी पत्रकार जो बिटर विंटर मैगजीन के निदेशक प्रभारी हैं) का योगदान भी शामिल है। नीदरलैंड में कुल 5 राजदूत उपस्थित थे। जीएचआरडी कश्मीरी पीड़ितों के साथ खड़ा है, और श्री अग्निहोत्री की फिल्म की आलोचनाओं का विरोध करता है, जिसमें कश्मीरी हिन्दुओं का नरसंहार दिखाया गया है।”

इसके अलावा, विवेक ने 21 जून के एक ट्वीट को भी कोट किया, जिसमें उन्होंने नीदरलैंड के एक कार्यक्रम का वीडियो साझा किया था। इसमें टीम के साथ विवेक और पल्लवी जोशी दोनों को दर्शकों ने खूब सराहा था।

डायरेक्टर ने द क्विंट को चुनौती देते हुए उससे दो सवालों के जवाब माँगे हैं। उन्होंने उसे यह बताने के लिए कहा कि फिल्म का कौन सा सीन है, तथ्य पर आधारित नहीं है। उन्होंने आगे उनसे यह साबित करने के लिए कहा कि उन्होंने किस आधार पर फिल्म को इस्लामोफोबिक कहा। उन्होंने यह भी कहा, “अगर वे ऐसा नहीं कर सकते तो मैं बिना शर्त माफी का पात्र हूँ। या फिर तुम बेनकाब हो चुके हो।”

‘द कश्मीर फाइल्स’ को लिबरल गैंग के विरोध का सामना करना पड़ा

प्रधानमंत्री मोदी से लेकर सीएम योगी आदित्यनाथ ने ‘द कश्मीर फाइल्स’ फिल्म की सराहना की है। वहीं दर्शकों ने भी इस फिल्म को भरपूर प्यार दिया है। जबकि कट्टरपंथी-वामपंथी समूह इस फिल्म से खासा नाराज नजर आए हैं। एनडीटीवी ने तो इस फिल्म की रिलीज से पहले ही इसे प्रोपेगेंडा फिल्म बता दिया था और विरोध के बाद उन्हें अपनी रिपोर्ट से प्रोपेगेंडा शब्द हटाना पड़ा था।

‘द कश्मीर फाइल्स’ 1990 में हुए कश्मीरी पंडितों के साथ अत्याचार, उनके दर्द और पलायन के बाद के संघर्ष की कहानी है। 1990 के दशक में घाटी में इस्लामिक आतंकियों ने जेहाद के नाम पर घाटी के पंडितों का कत्लेआम मचा दिया था। औरतों के साथ बलात्कार और हत्या आम बात सी हो गई थी। इस फिल्म को निर्माता विवेक अग्निहोत्री ने अपनी पत्नी पल्लवी जोशी के साथ मिलकर बनाया है। इसमें मुख्य भूमिका अनुपम खेर, मिथुन चक्रवर्ती, पल्लवी जोशी और चिन्मय मंडलेकर ने निभाई है।

‘हिंदू हमारे दुश्मन’: देश भर में हिंसा फैलाने के लिए 200 मुस्लिमों को मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग देने वाले 3 गिरफ्तार, PFI के साहित्य और हथियार बरामद

तेलंगाना (Telangana) की निजामाबाद पुलिस ने कराटे और मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग की आड़ में देश विरोधी गतिविधियों के आरोप में PFI के 3 सदस्यों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपितों के नाम शेख शहदुल्लाह, अब्दुल मोबीन और मोहम्मद इमरान हैं। इनमें एक आरोपित ने अब तक 200 मुस्लिमों को ट्रेनिंग दिए जाने की बात कबूली है।

इन लोगों को देश के अलग-अलग हिस्सों में अस्थिरता फैलाने का टास्क मिला था। गिरफ्तारी बुधवार (6 जुलाई 2022) को की गई है। तेलंगाना की निजामाबाद पुलिस इस नेटवर्क के बाकी सदस्यों की तलाश में जुट गई है।

निजामाबाद पुलिस कमिश्नर द्वारा शेयर मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कराटे और मार्शल आर्ट के इस ट्रेनिंग सेंटर में देश की धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ शिक्षा दी जा रही थी। यहाँ शरिया कानून लागू करने के लिए उकसाया जाता था। ट्रेनिंग के लिए गरीब और मध्यम वर्ग के युवाओं को भर्ती किया जा रहा था। इस सभी ने पूछताछ में स्वीकार किया कि इनके एजेंडे में अन्य धर्म के लोगों पर हमला करना भी शामिल है।

पुलिस के मुताबिक, आरोपित इमरान चिकन और अब्दुल मोबिन वेल्डिंग का काम करता है। इन सभी ने बताया कि इन्होंने न सिर्फ तेलंगाना, बल्कि आंध्र प्रदेश के भी कई जिलों के मुस्लिमों को भी प्रशिक्षित किया है। इस प्रशिक्षण में जूडो और मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग की आड़ में घातक हथियारों को भी चलाना सिखाया जाता था।

पुलिस को इन तीनों की जानकारी 2 दिन पहले गिरफ्तार हुए अब्दुल क़ादिर से मिली थी। कादिर ही युवाओं को कराटे और मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग देता था। पुलिस कमिश्नर के अनुसार, “गिरफ्तार किए गए लोगों ने मुस्लिम युवाओं को मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग देने के लिए कादिर को नियुक्त किया था। उन्होंने कादिर से कहा था कि वे उसे 6 लाख रुपए देंगे और उसका घर बनवाने में उसकी मदद करेंगे।”

आरोपितों पर 120-ए, 120-बी, 153-ए, 141 IPC के साथ-साथ UAPA एक्ट की धारा 13(1) के तहत कार्रवाई की गई है। टाइम्स नाउ के मुताबिक, आरोपितों के पास से ट्रेनिंग का सामान, हथियार और भड़काऊ साहित्य बरामद किया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन सभी का सरगना 52 साल का कादिर है। वह ट्रेनिंग में आने वाले युवाओं को यह कहकर भड़काता था कि हिन्दू तुम्हारे दुश्मन हैं। पुलिस का मानना है कि यहाँ तैयार किए जा रहे लोगों को हिन्दू समाज को निशाना बनाने के लिए उकसाया जा रहा था। गिरफ्तार आरोपित पहले बैन आतंकी संगठन सिमी के सदस्य थे। बाद में ये सभी PFI से जुड़ गए।

ठाणे में शिवसेना के 67 पार्षद, 66 ने थामा CM एकनाथ शिंदे का हाथ: 12 सांसद भी छोड़ सकते हैं उद्धव ठाकरे का साथ

महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे के हाथों सत्ता गँवाने के बाद उद्धव ठाकरे के सामने शिवसेना पर अधिकार बचाए रखने की चुनौती गहराती जा रही है। विधायक दल के बाद पार्टी के संसदीय दल में भी फूट पड़ने की खबरें हैं। इस बीच ठाणे में पार्टी के 66 पार्षद मुख्यमंत्री शिंदे के साथ चले गए हैं। ठाणे नगर निगम में शिवसेना के 66 पार्षद थे। ठाणे शिंदे के वर्चस्व वाला इलाका भी माना जाता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, ठाणे के 66 पार्षदों ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से उनके आवास पर मुलाकात की। मुंबई मनपा के बाद ठाणे नगर निगम राज्य की दूसरी सबसे बड़ी नगर निगम है। मूल रूप से सातारा के रहने वाले एकनाथ शिंदे ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत ठाणे से ही की थी। वो यहाँ से 4 बार विधायक भी रह चुके हैं।

इस बीच खबर ये भी है कि शिवसेना के 12 सांसद भी शिंदे के साथ जाने की तैयारी कर रहे हैं। बुधवार को ही शिंदे गुट के विधायक गुलाबराव पाटिल ने इसको लेकर दावा किया था। इसके बाद शिवसेना नेता आनंद राव ने इस्तीफा दे दिया था। जिन सांसदों के शिंदे के साथ आने की संभावना है, उनमें रामटेक से रामकृपाल तुमाने, शिंदे के बेटे और कल्याण से सांसद श्रीकांत शिंदे, शिर्डी से सदाशिव लोखंडे, हिंगोली से हेमंत पाटिल, दक्षिण-मध्य मुंबई से राहुल शेवाले, पालघर से राजेंद्र गावित, बुलढाणा से प्रतापराव जाधव, नासिक से हेमंत गोडसे, मावल से श्रीरंग बारणे और ठाणे से राजन विचारे के नाम शामिल हैं।

वहीं संसदीय दल में फूट की खबरों के बीच संजय राउत ने लोकसभा स्पीकर को पार्टी का व्हिप बदलने के लिए पत्र लिखा है। इसमें कहा गया कि रंजन विचारे को पार्टी का नया व्हिप बनाया गया है।

राजस्थान पुलिस की कस्टडी में मुस्कुराता दिखा नूपुर शर्मा का गर्दन माँगने वाला अजमेर दरगाह का खादिम, जिस CO ने ‘नशे की बात’ पर किया गाइड वे हटाए गए

राजस्थान के अजमेर शरीफ दरगाह के सर्किल ऑफिसर (CO) एवं DSP संदीप सारस्वत को उनके पद से हटा दिया गया है। अजमेर के SP ने बताया कि उन्हें लाइन हाजिर किया गया है। यह कार्रवाई एक वीडियो के वायरल होने के बाद की गई, जिसमें सारस्वत नुपूर शर्मा की हत्या के लिए उकसाने वाले दरगाह के खादिम सलमान चिश्ती को बचाव का टिप्स देते नजर आए। हालाँकि, अजमेर पुलिस का कहना है कि वीडियो में आई आवाज किसकी है, यह स्पष्ट नहीं कहा जा सकता।

बता दें कि यह वीडियो चिश्ती के गिरफ्तारी के वक्त का है। वीडियो में पुलिस उसे समझाती नजर आ रही है कि तुम यह कहना कि नशे में थे, ताकि बच जाओ। हालाँकि, वीडियो वायरल होने के बाद संदीप सारस्वत ने इसे रणनीति का हिस्सा बताया था। पूर्व मंत्री एवं बीजेपी नेता वासुदेव देवनानी समेत कई लोगों ने पुलिस की इस कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे। 

वहीं सलमान चिश्ती का राजस्थान पुलिस की कस्टडी में एक और वीडियो सोशल मीडिया पर बहुत तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में अजमेर दरगाह के खादिम सलमान चिश्ती को मुस्कुराते हुए और थंब का निशान दिखाते हुए पूरे तेवर में देखा जा सकता है, उसके इस अंदाज से ऐसा लगता है कि सलमान चिश्ती को अपनी गलती का बिलकुल अहसास नहीं है। या फिर उसे सजा का कोई डर नहीं है। मीडिया रिपोर्टों में यह वीडियो बुधवार (6 जुलाई, 2022) का बताया जा रहा है, जब उसे जज के आवास पर ले जाया जा रहा था।

बता दें कि भाजपा की पूर्व प्रवक्ता नुपुर शर्मा के बारे में भड़काऊ वीडियो बनाने और उनकी हत्या के लिए उकसाने के आरोप में अजमेर दरगाह के खादिम सलमान चिश्ती को मंगलवार (5 जुलाई 2022) देर रात अजमेर में गिरफ्तार कर लिया गया। सलमान ने वीडियो में शर्मा का सिर कलम करने वाले को अपना घर इनाम में देने की बात कही थी। गिरफ्तारी के बाद उसे एक स्थानीय अदालत में पेश किया गया। मजिस्ट्रेट की इस अदालत ने उसे दो दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है।

गौरतलब है कि सलमान चिश्ती हिस्ट्रीशीटर है। उसके खिलाफ 13 से अधिक मामले दर्ज हैं, जिसमें हत्या और हत्या का प्रयास जैसे गंभीर अपराध भी शामिल हैं। इसके बावजूद उसके लिए राजस्थान पुलिस की सहानुभूति लोगों की समझ से बाहर है। राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नेतृत्व में कॉन्ग्रेस की सरकार है। अजमेर पुलिस बार-बार जोर दे रही है कि वो नशे में था।

6 जुलाई को वायरल हुए वीडियो में अजमेर पुलिस सलमान चिश्ती को उसके घर से गिरफ्तार करती नजर आ रही थी। चिश्ती को उसके घर से बाहर निकालते समय, कोई कहता है, “वीडियो बनाते समय कौन सा नशा कर रखा था?” वीडियो में आगे सलमान चिश्ती को यह कहते हुए सुना जाता है कि वह शराब नहीं पीता है और न ही ड्रग्स लेता है। तभी एक पुलिस अधिकारी उससे कहता है, “कहना कि तुम नशे में थे ताकि तुम्हें बचाया जा सके।” इससे पहले एएसपी विकास सांगवान ने भी यही कहा था कि खादिम भड़काऊ बयान देते समय नशे में था।                      

‘बच्चे की गार्डियन नहीं हो सकती मुस्लिम माँ’: केरल हाई कोर्ट ने संविधान से ऊपर रखा शरिया, माना ‘गलत’ पर बताया सुप्रीम कोर्ट के फैसलों से बँधे हैं हाथ

केरल हाईकोर्ट (Kerala High Court) ने बुधवार (6 जुलाई 2022) को कहा कि एक मुस्लिम महिला अपने नाबालिग बच्चे और संपत्ति की संरक्षक नहीं हो सकती है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) इस बात की मिसाल दे चुका है। हालाँकि कुरान या हदीस में मुस्लिम महिला के बच्चे के अभिभावक होने के अधिकार पर कोई रोक नहीं है, लेकिन कोर्ट ने कहा कि वह संविधान के अनुच्छेद 141 के तहत शीर्ष अदालत द्वारा व्याख्या किए गए कानून का पालन करने के लिए बाध्य है।

रिपोर्ट के अनुसार, न्यायमूर्ति पीबी सुरेश कुमार और न्यायमूर्ति सीएस सुधा की खंडपीठ ने कहा कि मुस्लिम महिलाओं को अभिभावक होने से रोकने वाले कानून को संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 का उल्लंघन माना जा सकता है और इसलिए यह शून्य है, लेकिन उच्च न्यायालय इसमें नहीं जा सकता, क्योंकि यह है शीर्ष अदालत द्वारा निर्धारित मिसाल से बँधा हुआ है।

अदालत ने कहा, “इसमें कोई संदेह नहीं है कि इस आधुनिक युग में महिलाओं ने ऊँचाइयों को बढ़ाया है और धीरे-धीरे लेकिन लगातार कई पुरुष गढ़ों में प्रवेश किया है। जैसा कि बताया गया है, कई इस्लामी मुल्कों या मुस्लिम बहुल देशों में राज्य की प्रमुख के रूप में महिलाएँ हैं। महिलाएँ भी अंतरिक्ष में अभियानों का हिस्सा रही है। चाहे जो भी हो, यह अदालत माननीय सर्वोच्च न्यायालय के फैसलों से बाध्य है।”

इस बीच अपीलकर्ता ने हदीस का हवाला देते हुए तर्क दिया कि महिला को उसके पति की संपत्ति के संरक्षक के रूप में भी मान्यता दी गई थी। उन्होंने कहा कि कुरान या हदीस में ऐसा कुछ भी नहीं है जो एक महिला को अपने बेटे या उसकी संपत्ति का संरक्षक होने से रोकता है। उन्होंने यह भी कहा कि इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के किसी भी फैसले में हदीसों पर कभी विचार नहीं किया गया।

दूसरी ओर, प्रतिवादी ने कहा कि न तो कुरान और न ही हदीस यह कहती है कि एक माँ अभिभावक हो सकती है और वास्तव में कुरान की कई आयतों ने ऐसा कहा है। कोर्ट ने कहा कि हालाँकि, कुरान में विशेष रूप से यह उल्लेख नहीं किया गया है कि एक माँ अभिभावक नहीं हो सकती है, लेकिन यह कोर्ट पर निर्भर नहीं है कि वह इसकी व्याख्या करे, खासकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा लिए गए विचार के आलोक में।

कोर्ट ने शायरा बानो मामले का जिक्र करते हुए कहा कि शरीयत अधिनियम एकमात्र कानून है जो अधिनियम की धारा 2 में वर्णित मामलों में मुस्लिमों पर लागू होता है, जिसमें संरक्षक की भूमिका भी शामिल है।

याचिका एक विभाजन विलेख (Partition Deed) पर दायर की गई थी, जिसमें एक मुस्लिम माँ ने अपने बेटे की संपत्ति के कानूनी अभिभावक के रूप में काम किया था। केरल उच्च न्यायालय ने पाया कि पक्ष विभाजन अनुबंध से बँधे थे, लेकिन माँ को एक सही अभिभावक मानने से इनकार किया।

केरल में साजी चेरियन पर FIR, संविधान विरोधी बयान के बाद मंत्री पद से देना पड़ा था इस्तीफा

केरल में पिनराई विजयन के नेतृत्व वाली वामपंथी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) सरकार के मंत्री रहे साजी चेरियन की संविधान का अपमान करने के मामले में मुश्किलें बढ़ गई हैं। साजी चेरियन के खिलाफ गुरुवार (7 जुलाई 2022) को केस दर्ज किया गया है। इस बीच अब उन्होंने राज्य कैबिनेट के मंत्री पद से भी इस्तीफा दे दिया है।

इस मामले में एक स्थानीय अदालत के आदेश पर पठानमथिट्टा जिले की कीझवईपुर पुलिस ने राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम की धारा-2 के तहत केस दर्ज किया है। इस बात की पुष्टि एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने की है। संविधान के अपमान के मामले में दोषी पाए जाने पर उन्हें अधिकतम तीन साल कारावास या जुर्माना या दोनों की सजा मिल सकती है। खास बात ये है कि जिस दौरान संविधान के अपमान के मामले में चेरियन के खिलाफ ये केस दर्ज किया जा रहा था, उस वक्त वो विधानसभा सत्र में भाग ले रहे थे।

क्या है ये मामला

गौरतलब है कि एक स्थानीय टीवी चैनल में एक कार्यक्रम के दौरान साजी चेरियन ये कहते देखे गए कि देश का संविधान ‘शोषण को क्षमा करता है’ और देश के लोगों को ‘लूट’ करने में मदद करने के लिए लिखा गया है।

उनका ये बयान वायरल हो गया। इसके बाद एर्नाकुलम के एक वकील ने कथित तौर पर संविधान का अपमान करने के मामले में मंत्री के खिलाफ तिरुवल्ला मजिस्ट्रेट कोर्ट में एक याचिका दायर कर आरोपित के खिलाफ कार्रवाई की माँग की। इसी के बाद बुधवार को अदालत ने मामले में केस दर्ज करने का आदेश दिया।

हालाँकि, उससे पहले मंगलवार (5 जुलाई, 2022) दोपहर को विधानसभा में एक बयान में चेरियन ने कहा कि पठानमथिट्टा जिले के मल्लपल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में संविधान की आलोचना करने का दावा करने वाली समाचार रिपोर्टों को ‘विकृत’ किया गया था।

उन्होंने कहा था, “मैं एक लोक सेवक हूँ जो संविधान का सम्मान करता है और इसके महान मूल्यों को कायम रखता है। मेरा कभी भी संविधान का अपमान करने या इसके खिलाफ कुछ भी कहने का इरादा नहीं था।”

बीवी ने तलाक माँगा तो शौहर रईस खान ने सड़क पर ही पेट्रोल डालकर लगाई आग, लोगों ने गड्ढों का पानी डालकर बचाई जान, CCTV में कैद हुई घटना

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक शौहर ने दरिंदगी की हद पार करते हुए अपनी बीवी पर सरेआम पेट्रोल डाल कर आग लगा दी। आरोपित का नाम रईस खान और पीड़िता का नाम मुस्कान है। रईस अपनी बीवी द्वारा तलाक माँगे जाने से नाराज था। मुस्कान को जली हालत में अस्पताल में भर्ती करवाया गया है जबकि रईस घटना के बाद से फरार चल रहा है। पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है। घटना मंगलवार (5 जुलाई 2022) की है।

इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में बुरका पहन कर चल रही मुस्कान के साथ आरोपित रईस के होने का दावा किया जा रहा है। कुछ देर बाद भीड़-भाड़ वाले इलाके में रईस ने अपनी बीवी के ऊपर ज्वलनशील पदार्थ डाल कर आग लगा दी और मौके से भाग निकला।

वहीं घटना के सीसीटीवी फुटेज में साफ दिख रहा है कि एक 22 वर्षीय महिला को आग के हवाले कर दिया गया है। वीडियो में उसके सिर और ऊपरी शरीर से आग की लपटें उठ रही हैं। वह मदद के लिए चिल्लाती हुई इधर-उधर भाग रही है। पीड़िता चौराहे पर जलती हुई छटपटा रही थी जिसे राहगीरों ने गड्ढों में जमा पानी डाल कर बचाया। कुछ लोग अपने घरों से पानी की बाल्टी लेकर भी बचाने को दौड़े।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मुस्कान का निकाह रईस के साथ 4 अप्रैल 2019 में हुआ था। मुस्कान भोपाल और रईस राजस्थान के छाबड़ा अलीगंज का रहने वाला है। निकाह के कुछ दिनों बाद ही दोनों में झगड़े शुरू हो गए। आरोप है कि रईस आए दिन मुस्कान की पिटाई करने लगा और रिश्तेदारों से भी फोन पर बात करने पर टोकने लगा। आखिरकार तंग आ कर मुस्कान इसी साल 18 मार्च को अपनी बहन के पास आकर रहने लगी।

कुछ दिनों बाद मुस्कान ने भोपाल की फैमिली कोर्ट में तलाक की अर्जी डाली। इसी के साथ वो एक जगह छोटा-मोटा काम भी करने लगी। घटना के दिन रईस ने उसे तलाक के कागजातों पर दस्तखत करने के बहाने पुराने भोपाल की एक गली में बुलवाया। वो ई मेल पर आए कागजातों का प्रिंट आउट लेने के बहाने उसे अपने साथ थोड़ी दूर ले गया। रास्ते में रईस ने मुस्कान पर अपने साथ वापस चलने का दबाव बनाया जिसे मुस्कान ने मना कर दिया। इसी से नाराज हो कर उसने मुस्कान के ऊपर पेट्रोल डाल कर आग लगा दी।

हिंदू घृणा की नई हाइट पर लीना: पहले ‘काली’ को सिगरेट पीते दिखाया, अब शिव-पार्वती को; विदेशी मीडिया से कहा- भारत नफरत की मशीन

हिंदू घृणा में सनी फिल्ममेकर लीना मणिमेकलई (Leena Manimekalai) ने एक नया ट्वीट किया है। इसमें भगवान शिव और देवी पार्वती का मजाक बनाया है। जो फोटो ट्वीट की गई है उसमें शिव-पार्वती बने कलाकारों को धूम्रपान करते दिखाया गया है। लीना वही फिल्ममेकर हैं जिनकी डॉक्यूमेंट्री ‘काली’ विवादों में है।

लीना ने बीते 2 जुलाई को ‘काली’ का पोस्टर ट्विटर पर रिलीज किया था। इसमें ‘काली’ बनी एक्ट्रेस को सिगरेट पीते दिखाया गया था। साथ ही एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे हाथ में LGBT का झंडा था। इस पर विवाद होने के बाद लीना ने माफी माँगने से इनकार कर दिया था। वहीं, इसके प्रदर्शन के लिए कनाडा की आगा खान म्यूजियम ने माफी माँगी थी

लीना एक तरफ सोशल मीडिया में हिंदुओं और उनके अराध्यों को लेकर लगातार जहर उगल रही हैं, दूसरी तरफ वह अंतरराष्ट्रीय मीडिया में खुद को असुरक्षित बताकर भारत विरोधी प्रोपेगेंडा को भी आगे बढ़ा रही है। द गार्डियन को उन्होंने बताया कि भारत नफरत की मशीन बन चुका है।

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि दक्षिण भारत के तमिलनाडु के मदुरै में पैदा हुईं लीना मणिमेकलई का पालन-पोषण एक हिंदू के रूप में हुआ। लेकिन अब वह एक नास्तिक है। उन्होंने इस बात से इनकार किया है कि ‘काली’ हिंदू धर्म के प्रति अपमानजनक है। साथ ही अपनी सांस्कृतिक और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हवाला देते हुए सेंसरशिप पर एतराज जताया है।

इस रिपोर्ट में लीना के हवाले से कहा गया है, “मैं जिस राज्य से आती हूँ, वहाँ काली को एक बुतपरस्त देवी माना जाता है। वह बकरी के खून में पका हुआ मांस खाती हैं। शराब पीती हैं। बीड़ी (सिगरेट) पीती हैं और जंगली नृत्य करती हैं। यही वह काली है जिसे मैंने फिल्म के लिए अपनाया है।”

लीना का दावा है कि ‘काली’ का पोस्टर ऑनलाइन शेयर करने के बाद उन्हें, उनके परिवार और सहयोगियों को 200,000 से अधिक अकाउंट्स से ऑनलाइन धमकी मिली। उन्होंने इसके लिए दक्षिणपंथी हिंदू समूहों को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा, “मुझे अपनी संस्कृति, परंपराओं और ग्रंथों को कट्टरपंथी तत्वों से वापस लेने का पूरा अधिकार है। इन ट्रोल्स का धर्म या आस्था से कोई लेना-देना नहीं है।” साथ ही कहा है कि भारत सबसे बड़े लोकतंत्र से नफरत की सबसे बड़ी मशीन बन गई है। लिहाजा मैं सुरक्षित महसूस नहीं कर रही हूँ।

लीना के ताजा ट्वीट को लेकर भी नेटिजन्स ने नाराजगी जताई है। बीजेपी नेता शहजाद पूनावाला ने कहा है कि ये रचनात्मक अभिव्यक्ति नहीं है, बल्कि जानबूझकर उकसावे का मामला है। उन्होंने कहा कि हिंदुओ को गाली देना- धर्मनिरपेक्षता? हिंदू आस्था का अपमान- उदारवाद है? बीजेपी नेता ने कहा कि लीना का हौसला केवल इसलिए बढ़ रहा है क्योंकि उन्हें पता है कि लेफ्ट पार्टियाँ, कॉन्ग्रेस, टीएमसी उनको सपोर्ट करेंगी।