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मदर मतलब ‘अम्मी’, फादर मतलब ‘अब्बू’: राजस्थान के इंग्लिश मीडियम स्कूल की ‘पढ़ाई’ से अभिभावक नाराज, बोले- घर में भी बच्चे माँगने लगे हैं बिरयानी

दंगों और कन्हैया लाल की इस्लामिक आतंकियों द्वारा हत्या के बाद राजस्थान (Rajasthan) एक बार फिर चर्चा में है। राज्य के कोटा जिले के प्राइवेट स्कूल के कक्षा-2 में ऐसे पाठ्य-पुस्तकों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसमें उर्दू नामों और शब्दों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसको लेकर बवाल हो गया है। अभिभावकों का आरोप है कि छोटे-छोटे बच्चों के मन में उर्दू शब्द भरे जा रहे हैं।

बताया जा रहा है कि इस स्कूल में बड़ी संख्या में गैर-मुस्लिम छात्र पढ़ते हैं। इनके अभिभावकों ने इस तरह के स्कूली पुस्तकों के इस्तेमाल पर रोष जताया है। कहा जा रहा है कि किताब में माँ-पिताजी के बदले बच्चों को अम्मी-अब्बू बोलना और बिरयानी बनाना सिखाया जा रहा है।

इसको लेकर न्यूज24 ने कुछ बच्चों के अभिभावकों का एक वीडियो साझा किया है। इस वीडियो में अभिभावक पाठ्य-पुस्तकों का विरोध कर रहे हैं। वीडियो में एक महिला कहती है, “बच्चों को ऐसी शिक्षा कैसे दे रहे हैं ये लोग? हम हिंदू लोग हैं। हम बिरयानी बनाना नहीं जानते। आप हर एक दिन के बाद बच्चों से कहते हो बिरयानी बनाकर लाओ, बिरयानी बनाकर खाओ। बच्चा बोलता है मम्मी, वहाँ सिखाया जाता है अम्मी बोलो… अब्बू बोलो। ये भाषा हमारे बच्चों को क्यों समझाते हैं आप?”

वीडियो में एक अन्य महिला एक किताब दिखाते हुए कहती है, “ये देखो, इसमें अम्मी-अब्बू कहना सीखा रहे हैं। ये अपनी संस्कृति की भाषा है क्या? इसमें देखो, बिरयानी बनाना सिखा रहे हैं। कहते हैं सप्ताह में एक बार बनाकर लाओ।”

इसमें माँ के लिए अम्मी और पिताजी के लिए अब्बू जैसे संदर्भों के अलावा पुस्तक में कहानी के पात्रों के लिए शानू, सानिया, शिरीन, आमिर, नसीम जैसे मुस्लिम नामों का इस्तेमाल किया गया है। अभिभावकों का कहना है कि एक निजी अंग्रेजी माध्यम के स्कूल में पढ़ने वाले उनके बच्चे अब्बू और अम्मी जैसे शब्दों का इस्तेमाल घर पर भी करने लगे हैं और खाने के लिए बिरयानी की माँग भी करने लगे हैं।

वीडियो में कक्षा-2 की जिस पुस्तक को अभिभावक दिखा रहे हैं, उसका नाम ‘गुलमोहर’ है। गुलमोहर पुस्तक का प्रकाशन हैदराबाद के एक प्रकाशक द्वारा किया गया है। इस पुस्तक में 113 पृष्ठ हैं और इसकी कीमत 352 रुपए है। यह किताब CBSE से संबद्ध इंग्लिश मीडियम स्कूल की कक्षा 2 की बताई जा रही है।

इस किताब किताब के पहले चैप्टर ‘टू बिग! टू स्मॉल’ में बच्चे को नए शब्द के रूप में मदर को अम्मी और फादर को अब्बू बताया गया है। दूसरा चैप्टर ‘ग्रैंडपा फारूक’स गार्डन (दादाजी फारूक का बगीचा)’ शीर्षक से है। इसमें मुस्लिम बच्चा आमिर और उसके दादा फारूक को दर्शाया गया है। वहीं, छठे चैप्टर में पेज नंबर 20 पर बताया गया है कि पेरेंट्स किचन में हैं और वे बिरयानी बना रहे हैं।

स्कूली बच्चों के माता-पिता ने किताब के बारे में बजरंग दल के स्थानीय प्रतिनिधियों से शिकायत की। इसके बाद संगठन ने राज्य के शिक्षा विभाग में शिकायत दर्ज कराई है। इस किताब को स्कूली शिक्षा के इस्लामीकरण के प्रयास बताया जा रहा है।

बता दें कि यह मामला ऐसे समय में सामने आया है, जब झारखंड के कई इलाकों में सरकारी स्कूलों के नाम में उर्दू जोड़ दिया गया है और रविवार की जगह उनमें शुक्रवार (जुम्मे) की छुट्टी घोषित कर दी गई है। ऐसा स्थानीय लोगों ने खुद ही दवाब बनाकर कर दिया है। उनका कहना है कि उन इलाकों में 70 प्रतिशत आबादी मुस्लिम है, इसलिए उनके अनुसार नियम-कायदे होने चाहिए।

‘हनीमून-हनुमान’ वाले ट्वीट में मोहम्मद जुबैर को जमानत, लेकिन जेल से नहीं आ पाएगा बाहर: UP में दर्ज मामलों में अभी राहत नहीं

दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर को आपत्तिजनक ट्वीट ‘हनुमान होटल’ के मामले में जमानत दे दी है। अदालत ने जुबैर को 50 हजार रुपए के निजी मुचलके एवं इतने ही रुपए मूल्य के जमानती के आधार पर बेल मंजूर की है। इससे पहले जुबैर को यूपी के सीतापुर मामले में सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम राहत मिली थी। हालाँकि इसके बाद भी मोहम्मद ज़ुबैर की रिहाई नहीं हो पाएगी क्योंकि उन पर यूपी में कई मामलों में केस दर्ज है।

बता दें कि पटियाला हाउस कोर्ट ने गुरुवार 14 जुलाई, 2022 आपत्तिजनक ट्वीट के मामले में सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। जिसके बाद अब उन्हें जमानत देने का फैसला सुनाया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने बीते माह 27 जून को मोहम्मद जुबैर को दुश्मनी को बढ़ावा देने और धार्मिक भावनाओं को आहत करने, सोशल मीडिया पर सांप्रदायिक अशांति फैलाने के आरोप में गिरफ्तार किया था। दिल्ली पुलिस ने जुबैर के खिलाफ आईपीसी की धारा 153/295 के तहत केस दर्ज किया था।

दिल्ली पुलिस के मुताबिक, उसे जुबैर के खिलाफ ट्विटर के जरिए एक शिकायत मिली थी, जिसमें जुबैर के एक ट्वीट का जिक्र किया गया था। पुलिस ने इस संबंध में आईपीसी की धारा 153ए और 295ए के तहत केस दर्ज कर जुबैर को पूछताछ के लिए बुलाया था। इसके बाद जुबैर के खिलाफ पर्याप्त सबूत होने के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया था।

गौरतलब है कि यह मामला ट्विटर हैंडल हनुमान भक्त @balajikijaiin की एक पोस्ट के आधार पर दर्ज किया गया था, जहाँ उन्होंने, “2014 से पहले: हनीमून होटल” और “2014 के बाद: हनुमान होटल” पोस्ट के संबंध में मोहम्मद जुबैर के नाम से एक अन्य ट्विटर हैंडल के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर करते हुए शिकायत दर्ज कराई थी।

दिल्ली पुलिस ने कहा था कि एक फोटो (ट्वीट में) दिख रहा है जहाँ होटल के साइनबोर्ड ‘हनीमून होटल’ को बदलकर ‘हनुमान होटल’ कर दिया गया है। हनुमान भक्त @balajikijaiin ने ट्वीट किया, “हमारे भगवान हनुमान जी को हनीमून से जोड़ना हिंदुओं का सीधा अपमान है क्योंकि वह ब्रह्मचारी हैं। कृपया इस आदमी के खिलाफ कार्रवाई करें।”

पुलिस ने बताया कि एक विशेष धार्मिक समुदाय के खिलाफ तस्वीर और भड़काऊ बयान वाली मोहम्मद जुबैर की उक्त पोस्ट जानबूझकर की गई है, जो लोगों के बीच नफरत को भड़काने के लिए पर्याप्त है, जो सार्वजनिक शांति बनाए रखने के लिए हानिकारक हो सकती है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि उक्त पोस्ट के आधार पर उपरोक्त मामला दर्ज किया गया था। इसके अलावा भी मोहम्मद ज़ुबैर हिन्दुओं की धार्मिक भावना भड़काने के कई मामलों में लिप्त रहा है।

आज PFI से RSS की तुलना, कभी दुर्गा विसर्जन फायरिंग पर लीपापोती: पटना के आज के SSP ढिल्लों को कभी मुंगेर से हटाने का हाई कोर्ट ने दिया था आदेश

बिहार की राजधानी पटना से सटे फुलवारी शरीफ में आतंकी ट्रेनिंग चल रही थी। इस्लामी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) से जुड़े आतंकी 2047 तक भारत को इस्लामी मुल्क बनाने के मिशन पर काम कर रहे थे। इस खुलासे के बाद पटना के एसएसपी मानवजीत सिंह ढिल्लों ने आश्चर्यजनक तौर पर पीएफआई की तुलना राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से कर दी।

इस बयान पर विवाद खड़ा होने के बाद पुलिस मुख्यालय ने गुरुवार (14 जुलाई 2022) को उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी कर 48 घंटे के भीतर जवाब माँगा है। बीजेपी ने उनकी फौरन बर्खास्तगी की माँग की है। वहीं राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और जीतनराम मांझी की पार्टी हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) ढिल्लों के समर्थन में आगे आई है। ढिल्लों ने कहा था कि जिस तरह से आरएसएस अपनी शाखा ऑर्गेनाइज करते हैं और लाठी की ट्रेनिंग देते हैं। उसी तरह से ये लोग शारीरिक शिक्षा के नाम पर युवाओं को प्रशिक्षण दे रहे थे।

वैसे यह पहला मौका नहीं है जब ढिल्लों विवादों में हैं। मुंगेर से उन्हें हाई कोर्ट की फटकार के बाद हटाया गया था। दरअसल, 26 अक्टूबर 2020 को मुंगेर में दुर्गा पूजा विसर्जन के दौरान फायरिंग में 18 साल के युवक अनुराग पोद्दार की मौत हो गई थी। पीड़ित पिता ने कहा था कि पुलिस की चलाई गोली से उनके बेटे की हत्या की गई। इस मामले में उस समय मुंगेर की एसपी रहीं लिपि सिंह की भूमिका भी सवालों के घेरे में थी। लोगों के आक्रोश को देखते हुए चुनाव आयोग ने डीएम राजेश मीणा और लिपि सिंह को उनके पद से हटा दिया था। ध्यान रहे कि उस समय बिहार में विधानसभा चुनाव हो रहे थे। अचार संहिता लागू थी।

इसके बाद ढिल्लों को मुंगेर भेजा गया। माना गया कि न केवल लोगों का आक्रोश शांत होगा बल्कि दोषियों पर कार्रवाई भी होगी। लेकिन इस पूरे मामले पर जिस तरह की लीपापोती की कोशिश की गई उस पर 7 अप्रैल 2021 को पटना हाई कोर्ट बेहद सख्त रवैया दिखाया।

हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई थी कि अक्टूबर 2020 से लेकर फरवरी 2021 तक पुलिस जाँच में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है। कोर्ट ने जाँच पर असंतोष जताते हुए एसपी मानवजीत समेत कई पुलिस पदाधिकारियों के तबादले का आदेश दिया था। साथ ही पूरे मामले की जाँच हाई कोर्ट की निगरानी में सीआईडी को करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद ढिल्लों का मुंगेर से राज्य सरकार ने तबादला कर दिया था। 

ऐसे में ढिल्लों के ताजा बयान के बाद लोग मुंगेर गोलीकांड पर पुलिसिया लीपापोती को याद कर रहे हैं। आशंका जता रहे हैं कि बिहार में बढ़ते इस्लामी कट्टरपंथ और आतंकवाद से ध्यान हटाने के मकसद से तो उन्होंने ऐसा बयान नहीं दिया है। मीडिया रिपोर्टों में बताया गया था कि फुलवारी शरीफ से गिरफ्तार किए आतंकियों के निशाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी थे। हालाँकि बिहार पुलिस ने प्रधानमंत्री को सीधे कोई खतरा होने से इनकार किया था। लेकिन यह माना था कि प्रधानमंत्री के बिहार दौरे को लेकर वे अलर्ट पर थे और इसी दौरान इन आतंकियों की गतिविधियों का सुराग हाथ लगा था।

एलन मस्क के पिता का अपनी ही ‘बेटी’ से शारीरिक संबंध, 2 बच्चे भी: खुद किया खुलासा, कहा- हम बच्चे पैदा करने के लिए ही पृथ्वी पर आए हैं

विश्‍व के सबसे अमीर शख्‍स और टेस्ला, स्पेसएक्स के मालिक एलन मस्क (Elon Musk) के 76 वर्षीय पिता एरोल मस्क ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। उन्होंने बताया है वह अपनी 35 वर्षीय सौतेली बेटी जाना बेजुइडेनहौट (Jana Bezuidenhout) के साथ रिश्ते में थे। उससे उनके दो बच्चे हैं। तीन साल पहले उनकी सौतेली बेटी ने गुपचुप तरीके से उनके दूसरे बच्चे को जन्म दिया था।

द सन को 13 जुलाई 2022 को दिए इंटरव्यू में 76 वर्षीय एरोल मस्क ने सार्वजनिक तौर पर इसकी पुष्टि की। उन्होंने कहा, “मैंने अपनी सौतेली बेटी जाना के साथ संबंध बनाए थे। 2019 में 35 वर्षीय जाना ने उनकी दूसरी संतान एक बच्ची को जन्म दिया था। हमने पृथ्वी पर केवल एक चीज के लिए जन्म लिया है और वो है बच्चे पैदा करना।” बता दें कि एरोल मस्क और जाना की पहली संतान ने 2017 में जन्म लिया था। उनके बेटे का नाम इलियट रश है।

जाना बेजुइडेनहौट एरोल की दूसरी पत्नी हाइड बेजुइडेनहौट की बेटी हैं, जिनसे उन्होंने 1979 में एलोन मस्क की माँ मेय हल्दमैन मस्क से अलग होने के बाद शादी की थी। एरोल के दो बच्चे हैं जाना और एलन मस्क। जाना सिर्फ 4 साल की थी तब एरोल उसके सौतेले पिता बने थे। एरोल और हाइड ने 18 साल बाद तलाक ले लिया था। एरोल ने स्वीकार किया कि जाना की प्रेग्नेंसी प्रीप्लांड नहीं थी। उन्होंने बताया कि दोनों की उम्र में 41 साल का अंतर है। इसलिए वे अब एक साथ नहीं रह रहे हैं।

एरोल ने आगे बताया कि जब 2017 में एलन मस्क को उनके पहले बच्चे के बारे में पता चला तो वह शॉक्ड हो गए थे। इस बात को लेकर एलन और उसके पिता के बीच काफी विवाद भी ​हुआ। उन्होंने बताया कि एलन मस्क अभी भी उन्हें इस वजह से पसंद नहीं करते हैं। वे ये सब सोचकर अभी भी उनसे नफरत करते हैं, क्योंकि वह उनकी बहन है। भले ही सौतेली हो।

शौहर आशिक ने बीवी नरगिस को मारा-पीटा, फिर कड़ाही में उबालकर मार डाला: अवैध संबंधों से मना करने पर बच्चों के सामने दिया घटना को अंजाम

पाकिस्तान के कराची (Karachi, Pakistan) से दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। कराची के गुलशन-ए-इकबाल (Gulshan-e-Iqbal) इलाके में एक 33 वर्षीय महिला को उसके शौहर ने अवैध संबंध बनाने से इनकार करने पर कड़ाही में उबालकर मार डाला। पुलिस के अनुसार, गुलशन-ए-इकबाल ब्लॉक नंबर 4 में स्थित एक स्कूल की रसोई की कड़ाही में महिला का शव मिला है।

एसएचओ सलीम अवान ने मीडिया को बताया, “मृतका की पहचान नरगिस के रूप में हुई है। उसके शौहर आशिक हुसैन ने पहले नरगिस को बेरहमी से पीटा, फिर उसे बच्चों के सामने ही कड़ाही में डालकर जिंदा उबालकर मार डाला। पुलिस केस दर्ज कर आरोपित की तलाश में जुट गई है।”

पाकिस्तान टुडे के मुताबिक, जाँच में पाया कि शौहर आशिक अपनी बीवी नरगिस को अवैध संबंध बनाने के लिए मजबूर करता था। नरगिस ने उसकी बात मानने से इनकार कर दिया। इसके बाद शौहर आशिक ने नरगिस की क्रूरतापूर्वक हत्या कर दी।

नरगिस की 15 वर्षीय बेटी ने पुलिस को घटना के बारे में सूचित किया, जिसके बाद वह घटनास्थल पर पहुँची। पूर्वी कराची के एसएसपी अब्दुर रहीम शेराजी भी इस घटना से हैरान हैं। उन्होंने बताया कि मृत महिला का शौहर आशिक स्कूल का चौकीदार है और अपने परिवार के साथ स्कूल के ही क्वार्टर में रहता है।

शेराजी ने बताया कि यह स्कूल बीते 8-9 महीने से बंद पड़ा है। घटना को अंजाम देने के बाद आरोपित चौकीदार अपने तीन बच्चों के साथ फरार हो गया है। पुलिस ने तीन अन्य बच्चों को हिरासत में लिया है।

शुरुआती जाँच और बच्चों के बयानों से पता चलता है कि आरोपित ने पहले अपनी बीवी को बुरी तरह मारा और फिर तकिए से मुँह दबाया। उसके बाद उसने अपने बच्चों के सामने कड़ाही में उबालकर मार डाला। इस दौरान महिला का एक पैर भी शरीर से अलग हो गया।

पुलिस के मुताबिक, आरोपित आशिक हुसैन के पास दो सिम कार्ड हैं। घटना को अंजाम देने के बाद उसने अपने दोनों सिम कार्ड बंद कर दिए हैं। जल्द ही आरोपित को ट्रेस करके उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

Lulu मॉल से नमाज का एक और Video आया सामने, हिंदू संगठनों ने सुन्दर काण्ड और गायंत्री मंत्र जाप का किया ऐलान

UP की राजधानी लखनऊ में नव निर्मित लुलु मॉल में नमाज़ पढ़ने के विवाद ने तूल पकड़ लिया है। हिन्दू संगठनों ने कड़ी कार्रवाई की माँग करते हुए उसी जगह पर हनुमान चालीसा, सुन्दरकाण्ड और गायत्री मंत्र पढ़ने की अनुमति देने की माँग की है। नमाज़ के विरोध में हिन्दू महासभा ने मॉल के गेट पर प्रदर्शन भी किया। वहीं मॉल में नमाज़ पढ़ने वालों पर मॉल के जन संपर्क अधिकारी सिब्तैन हुसैन की शिकायत पर FIR दर्ज कर ली गई है। वहीं ABP न्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार, लुलु मॉल में नमाज का एक दूसरा वीडियो भी सामने आया है जिसमें दो लोग नमाज पढ़ते दिख रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक लुलु मॉल में 12 जुलाई 2022 को वायरल हुए एक वीडियो में कुछ लोगों को नमाज़ पढ़ते देखा गया। इसके विरोध में अखिल भारतीय हिन्दू महासभा ने 14 जुलाई (गुरुवार) को मॉल के गेट पर प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारी ने कहा, “आज हम मॉल के गेट पर सांकेतिक रूप से बैठे हैं। कल यहाँ सुंदरकांड का पाठ किया जाएगा। लुलु मॉल लव जिहाद का अड्डा है। ये सरकारी छूट पर जमीनें प्राप्त करते हैं। योगी सरकार ने सार्वजानिक स्थानों पर नमाज़ पर रोक लगाई है। फिर भी यहाँ नमाज़ हुई जिसका हम विरोध कर रहे हैं। हम पुलिस के आदेश को मानते हुए अंदर नहीं जा रहे हैं। हमने नमाज़ पढ़ने वालों के खिलाफ थाने में तहरीर दी है।”

गायंत्री मंत्र पढ़ने का एलान

मॉल के खिलाफ प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे हिन्दू महासभा के पदाधिकारी और एडवोकेट शिशिर चतुर्वेदी ने आज 15 जुलाई को शाम 6 बजे लू लू मॉल में गायत्री मंत्र पढ़ने का ऐलान किया है। उन्होंने इसे अपना निजी आयोजन बताया है।

नमाज़ियों पर FIR दर्ज

एडीसीपी दक्षिण राजेश कुमार श्रीवास्तव के मुताबिक, लुलु मॉल के जनसंपर्क अधिकारी सिब्तैन हुसैन ने गुरुवार (14 जुलाई, 2022) शाम को सुशांत गोल्फ सिटी थाने में तहरीर दी। इसमें आरोप लगाया गया है कि मॉल परिसर में बिना अनुमति के कुछ लोगों ने नमाज पढ़ी जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो की जाँच कराई गई जो राजधानी के नवसृजित लुलु मॉल का निकला। इसके बाद जनसंपर्क अधिकारी सिब्तैन हुसैन ने पुलिस से शिकायत की।

लखनऊ पुलिस ने शिकायत की जाँच करते हुए बताया, “नमाज़ पढ़ने में लुलु मॉल का कोई अधिकारी या कर्मचारी शामिल नहीं था। मॉल के मैनेजमेंट ने अज्ञात नमाज़ियों के खिलाफ लिखित शिकायत दी है। इस शिकायत पर 14 जुलाई को IPC की धारा 153 A (1), 341, 505 और 295 A के तहत थाना सुशांत गोल्फ सिटी में अज्ञात नमाज़ियों के खिलाफ FIR दर्ज करके आगे की कार्रवाई की जा रही है।”

हम किसी भी धार्मिक गतिविधियों की अनुमति नहीं देते

लुलु मॉल लखनऊ के GM समीर वर्मा ने इस विवाद पर कहा, “हम यहाँ किसी भी संगठित धार्मिक कार्यक्रम या प्रार्थना की अनुमति नहीं देते। हम सभी धर्मों का आदर करते हैं। हम अपने फ्लोर और सुरक्षा स्टाफ पर ऐसी गतिविधियों पर नजर रखने की ट्रेनिंग देते हैं।”

गौरतलब है कि लुलु मॉल भारत के मूल निवासी व्यापारी युसूफ अली द्वारा संचालित है। इसका मुख्यालय दुबई में है। 10 जुलाई 2022 को इसका लखनऊ में उद्घाटन UP के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया था।

33 सरकारी स्कूलों के नाम में जुड़ गया ‘उर्दू’, रविवार की जगह शुक्रवार को होने लगी छुट्टी: झारखंड सरकार को भनक तक नहीं लगी

दुमका झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का गृह जिला है। बावजूद इसके जिले के 33 सरकारी स्कूलों ने अपने नाम में ‘उर्दू’ जोड़ लिया ताकि रविवार की जगह शुक्रवार को छुट्टी दी जा सके। लेकिन प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं लगी। उसकी नींद तब टूटी जब मीडिया में यह मामला सामने आया और शिक्षा के कथित इस्लामीकरण को लेकर राज्य सरकार की किरकिरी शुरू हुई।

अब दुमका के जिला शिक्षा अधीक्षक (DSE) संजय कुमार दास ने इसकी जाँच की बात कही है। उन्होंने कहा है, “हमने 33 स्कूलों के BO को पत्र लिखकर इस मामले की जाँच को कहा है। सभी स्कूलों के नाम उर्दू हैं। इस बात की जाँच की जा रही है कि उर्दू इन स्कूलों के नाम से कैसे जुड़ी और सरकारी स्कूलों में किन परिस्थितियों में शुक्रवार को साप्ताहिक अवकाश दिया जाता है। शुक्रवार को स्कूल बंद रखने के लिए विभाग की ओर से कोई निर्देश नहीं है।”

हालाँकि, अभी यह साफ नहीं है कि जिले के स्कूलों में जुमे की छुट्टी कब से चल रही है। लेकिन, यह इस तरह का पहला मामला नहीं है। राज्य के जामताड़ा में भी 100 से ज्यादा सरकारी स्कूल ऐसे सामने आए थे जहाँ शुक्रवार को छुट्टी दी जा रही थी। इसकी वजह इन स्कूलों में मुस्लिम बच्चों की संख्या 70 प्रतिशत से ज्यादा होना बताया गया था। मीडिया रिपोर्टों में बताया गया था कि इलाके के कुछ मुस्लिम युवकों ने छुट्टी के दिन बदलने की शुरुआत दो-तीन स्कूलों से करवाई थी। फिर यह बढ़ते-बढ़ते 100 से ज्यादा स्कूलों तक पहुँच गई।

इसके बाद ही दुमका में 33 सरकारी स्कूलों के नाम में उर्दू जोड़े जाने का मामला सामने आया था। ख़बरों में बताया गया था कि इन स्कूलों में भी दूसरे स्कूलों की तरह हिंदी मीडियम में पढ़ाई होती है। लेकिन, छुट्टी जुमे को होती है। मुस्लिम बहुल इलाके में इन स्कूलों में सप्ताह की शुरुआत शनिवार से होती है। बच्चों को दिए जाने वाले मिड डे मिल का जो मेन्यू स्कूल की दीवारों में लिखा गया है, उसमें भी सप्ताह की शुरुआत शनिवार से दिखाया गया है। रविवार को मेन्यू में चावल, दाल व हरी सब्जी के प्रावधान का उल्लेख है। साथ ही शुक्रवार के दिन वाला कॉलम छुट्टी के चलते खाली है। यहाँ पर जुमा लिखा हुआ है।

गौरतलब है कि झारखंड के ही गढ़वा में एक स्कूल में मुस्लिम समुदाय द्वारा प्रिंसिपल पर इस्लामी नियम लागू करवाने के लिए दबाव बनाने का मामला भी सामने आया था। रिपोर्ट के अनुसार, मुस्लिम समुदाय ने प्रिंसिपल को कहा था कि क्षेत्र में उनकी आबादी 75% है। इसलिए नियम भी उन्हीं के हिसाब से होंगे। पहले यहाँ ‘दया का दान विद्या का…’ प्रार्थना करवाई जाती थी। हालाँकि अब ‘तू ही राम है तू ही रहीम’ प्रार्थना स्कूल में होने लगी। इसके साथ स्कूल में बच्चों को हाथ जोड़ कर प्रार्थना करने से भी मना कर दिया गया था।

कनाडा में रिपुदमन सिंह की गोली मारकर हत्या, ISI का हाथ होने का अंदेशा: सिखों के लिए PM मोदी के कार्यों को सराहा था

कनाडा (Canada) के मशहूर सिख नेता 75 वर्षीय रिपुदमन सिंह मलिक (Ripudaman Singh Malik) की गुरुवार (14 जुलाई 2022) सुबह 9:30 बजे गोली मारकर हत्या कर दी गई। जब वह अपने ऑफिस के सामने कार में बैठे थे, तभी कुछ अज्ञात युवकों ने उन्हें गोलियों से छलनी कर दिया। पुलिस अधिकारियों ने प्राथमिक उपचार देकर उन्हें होश में लाने की कोशिश की थी, लेकिन उन्होंने मौके पर ही दम तोड़ दिया। घटनास्थल से एक जलती हुई कार बरामद की गई है।

यह घटना ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत के सरे शहर के 128 स्ट्रीट के 8200 ब्लॉक की घटना है। हत्यारे एक कार में आए थे। हत्या को अंजाम देने के बाद आरोपितों ने कार को आग के हवाले कर दिया। ऐसा बताया जा रहा है कि सुबूत मिटाने के लिए कार में आग लगाई गई। फिलहाल हत्या के कारणों का पता नहीं चला है। सीबीसी न्यूज ने चश्मदीदों का हवाला देते हुए बताया है कि उन्होंने 3 गोलियाँ चलने की आवाज सुनी और यह टारगेट किलिंग का मामला लगता है।

खबर की पुष्टि करते हुए मलिक के बहनोई जसपाल सिंह ने ANI से बात करते हुए कहा, “हमें इसके बारे में जानकारी नहीं है कि रिपुदमन को किसने मारा। उनकी छोटी बहन कनाडा जा रही है।”

शिरोमणि अकाली दल दिल्ली के अध्यक्ष और दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (DSGMC) के पूर्व प्रमुख परमजीत सिंह सरना ने एक बयान में कहा, “कनाडा में सरदार रिपुदमन सिंह मलिक की मौत पर मुझे काफी दुख हुआ है। क्षति अपूरणीय है। सरदार मलिक ने कई खालसा स्कूल चलाए और कनाडा में मानवीय प्रयासों में सबसे आगे थे। उनके परिवार के प्रति मेरी हार्दिक संवेदना है। हमें उम्मीद है कि कनाडा के अधिकारी उनकी हत्या की गहन जाँच शुरू करेंगे और दोषियों को सजा दिलाएँगे।”

हाल ही में रिपुदमन सिंह ने की थी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ

रिपुदमन सिंह मलिक भारतीय पीएम मोदी के प्रशंसक थे। उन्हें साल 2020 में सिंगल एंट्री वीजा और 2022 में मल्टीपल एंट्री वीजा दिया गया था। इस दौरान उन्होंने भारत में आंध्र प्रदेश, दिल्ली, पंजाब और महाराष्ट्र में कई तीर्थ यात्रा की थी।

इस साल की शुरुआत में उन्होंने पीएम मोदी को एक खत लिखकर उनकी तारीफ की थी। खालसा स्कूल कनाडा के प्रधान, खालसा क्रेडिट यूनियन के संस्थापक रिपुदमन सिंह मलिक ने अपनी चिट्ठी में मोदी सरकार की ओर से सिख समुदाय के लिए उठाए गए कई अभूतपूर्व सकारात्मक कदमों के लिए ह्रदय से आभार व्यक्त किया था।

मोदी सरकार ने 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस घोषित कर दिया था। रिपुदमन ने इसके लिए भी पीएम मोदी की तारीफ की थी। उल्लेखनीय है कि 26 दिसंबर 1704 को सिखों के दसवें एवं अंतिम गुरु गोबिंद सिंह के 9 वर्ष और 6 वर्ष के दो बेटों को मुगल आक्रांता ने दीवारों में चुनवा दिया था।

मलिक ने पीएम मोदी और भारत सरकार के खिलाफ सिख समुदाय के कुछ सदस्यों के संगठित अभियान पर भी चिंता व्यक्त की थी। उन्होंने पेंडिंग मुद्दों के समाधान के लिए सरकार के साथ काम करने का वादा करते हुए सिख समुदाय को एक अलग पत्र भी लिखा था। पत्र में उन्होंने कहा था, “पंजाब में हिंसा पंजाब और पूरे भारत और दुनिया भर में सिख समुदाय के हितों को नुकसान पहुँचाएगी। मैं विश्व शांति के लिए अपना दैनिक अरदास करता हूँ, क्योंकि मुझे अपने समुदाय या किसी समुदाय को हिंसा के कारण पीड़ित देखना पसंद नहीं है।”

उन्होंने पत्र में आगे कहा था, “मैं नहीं मानता कि सिख समुदाय के प्रति सकारात्मक संकेतों को देखते हुए प्रधानमंत्री की गलत तरीके से आलोचना करना सही है। आलोचना करने के बजाय हमें भविष्य के लिए सकारात्मक साझेदारी की दिशा में उनके नेतृत्व में भारत सरकार की सराहना और सार्थक रूप से जुड़ना चाहिए।”

खालिस्तानी विचारधारा से दूर हो गए थे रिपुदमन सिंह

बताया जाता है कि रिपुदमन सिंह पहले खालिस्तान हिमायती थे, लेकिन बाद में उनकी विचारधारा बदल गई थी। अंतिम समय तक वह सिख समुदाय के लोगों को अलगाववादी नेताओं से दूर रहने के लिए प्रेरित करते थे। रिपुदमन सिंह की हत्या कट्टरपंथियों द्वारा किए जाने की आशंका जताई जा रही है। वह खालिस्तान की विचारधारा से दूर होकर भारत सरकार के प्रति कनाडा के कट्टरपंथियों में अलख जगा रहे थे।

रिपुदमन सिंह मलिक श्री गुरु ग्रंथ साहिब की छपाई कर चर्चा में आए थे। रिपुदमन और बलवंत सिंह की ओर से प्रकाशित पावन स्वरूपों के मुद्दे पर कनाडा की सिख संगत में भारी रोष था। मामला श्री अकाल तख्त साहिब तक भी पहुँचा, इस कारण रिपुदमन सिंह ने छपाई बंद कर दी थी और पावन स्वरूप शिरोमणि कमेटी को सौंप दिए थे।

बता दें कि रिपुदमन सिंह मलिक उन व्यक्तियों में से एक थे, जिन पर साल 1985 में एयर इंडिया की फ्लाइट (Air India bombing Case) 182 ‘कनिष्क’ पर बम हमले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का आरोप लगाया गया था। इस मामले में उन पर 20 सालों तक मुकदमा भी चला था। हालाँकि, साल 2005 में उन्हें बरी कर दिया गया था।

क्या हो सकती है हत्या की वजह?

वैंकूवर सन ने 1985 के कनिष्क बम विस्फोट के बाद आतंकवाद की जाँच करने वाले रिटायर्ड आरसीएमपी डिप्टी कमिश्नर गैरी बास के हवाले से कहा कि बमबारी के बाद मलिक के कई दुश्मन थे। बास का कहना है कि एयर इंडिया बमबारी में उनकी कथित संलिप्तता उनकी हत्या के कारणों में से एक हो सकती है। हालाँकि, भारतीय रक्षा विश्लेषकों का मानना ​​​​है कि उनकी हत्या का एयर इंडिया बमबारी से नहीं, बल्कि पीएम मोदी की तारीफ करना हो सकता है।

वहीं पूर्व आर्मी मेजर और डिफेंस एनालिस्ट गौरव आर्य ने ऑपइंडिया से बात करते हुए कहा, “खालिस्तानियों में निराशा की एक भावना है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई उन्हें पहले की तरह समर्थन नहीं दे रही है। यह धन की कमी और FATF के कारण भी हो सकता है। रिपुदमन सिंह ने हाल ही में पीएम मोदी की तारीफ की थी। ऐसा हो सकता है कि ISI ने इसे अपमान की तरह देखा और उन्हें खत्म कर दिया।”

रिपुदमन सिंह ने प्रधानमंत्री को सिख समुदाय के लाभ के लिए उनके और भारतीय अधिकारियों द्वारा किए गए कार्यों को बदनाम करने की कोशिश करने वाले खालिस्तानियों को लेकर भी चेतावनी दी थी। इसे भी हत्या की वजह के रूप में देखा जा रहा है।

बरेली में BJP नेता पर तलवार से हमला, सावन में मीट शॉप बंद करवाने की प्रशासनिक कार्रवाई से भड़के लोगों ने दिया अंजाम

उत्तर प्रदेश के बरेली में मीट शॉप बंद करवाने की कार्रवाई से नाराज कुछ लोगों ने भाजपा नेता अंकित भाटिया पर हमला कर दिया। जख्मी नेता का इलाज चल रहा है। घटना के विरोध में हिन्दू संगठनों द्वारा मस्ज्दि के आगे धरने की भी सूचना है। पुलिस ने FIR दर्ज करते हुए 4 आरोपितों को हिरासत में लिया है। घटना 14 जुलाई 2022 (गुरुवार) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना प्रेम नगर थाना क्षेत्र के रामजानकी रोड की है। यहाँ पर प्रशासन के आदेश पर सावन के पहले दिन नगर निगम की टीम माँस की दुकानें बंद करवाने पहुँची थी। इस दौरान वहाँ मौजूद भाजपा नेता अंकित भाटिया पर प्रशासन की मुखबिरी का आरोप लगा कर उन पर तलवारों से हमला कर दिया गया। भाजपा नेता को अस्पताल ले जाया गया और मौके पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया।

भाजपा नेता पर हमले का CCTV फुटेज सामने आया है। इसमें आप देख सकते हैं कि सड़क किनारे कुछ लोगों से बात कर रहे भाटिया पर अचानक ही करीब आधे दर्जन लोगों की भीड़ हमला कर देती है। कुछ के हाथों में हथियार भी दिखाई दे रहे हैं। उनसे बचने के लिए भाजपा नेता अंकित भाटिया भागते हैं तो उनका पीछा किया जाता है। इससे बाजार में अफरातफरी मच जाती है।

इस घटना के वायरल हो रहे एक अन्य वीडियो में अंकित भाटिया के कपड़े फ़टे दिखाई दे रहे हैं। कपड़ों पर खून के धब्बे भी हैं। आसपास हिन्दू संगठन के लोग और पुलिसकर्मी भी खड़े हैं। सामने की तरफ HDFC बैंक है। इस स्थान पर अल-हंब और अल-नवाब नाम की चिकन की दुकानें हैं।

एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक घटना की शुरुआत शाम 4 बजेहुई। बिरयानी बेचने वाले अल नवाज होटल द्वारा पक्के नाले पर अवैध अतिक्रमण किया गया था। उसी को हटाने के दौरान ये नोकझोंक हुई। हालाँकि नगर निगम की टीम ने इस अतिक्रमण को हटा दिया। इसी से नाराज हो कर नवाज और उसके साथियों ने अंकित भाटिया के साथ हिन्दू युवा वाहिनी के पदाधिकारी नरेंद्र राणा और कमल राणा पर धारदार हथियार से हमला कर दिया। इस घटना के चलते दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए और बाद में पथराव भी हुआ।

2013 के ट्वीट्स दिखा ‘पुरानी करीबी’ बता रहे नेटिजन्स, रिपोर्ट में दावा- रोहमन से ब्रेकअप के बाद ललित मोदी के करीब आईं सुष्मिता सेन

IPL के पूर्व चेयरमैन और भगोड़े कारोबारी ललित मोदी (Lalit Modi) ने गुरुवार (14 जुलाई 2022) को एक ट्वीट से हलचल मचा दी। उन्होंने पूर्व मिस यूनिवर्स और अभिनेत्री सुष्मिता सेन (Sushmita Sen) के साथ कुछ तस्वीरें साझा करते हुए उन्हें ‘बेटरहाफ’ बताया।

जब दोनों की शादी की खबरें मीडिया में आई तो कुछ देर बाद उनका एक और ट्वीट आया। इसमें सफाई देते हुए उन्होंने लिखा- स्पष्ट कर दूँ कि शादी नहीं हुई है, एक-दूसरे को डेट कर रहे हैं। शादी भी जल्द होगी। सुष्मिता सेन की अब तक इस पर कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई हैं। हालाँकि, निजी जिंदगी को लेकर वे लगातार चर्चा में रहती हैं। कुछ समय पहले तक वे अपने से 15 साल छोटे रोहमन शॉल (Rohman Shawl) के साथ लिव इन में रहने को लेकर चर्चा में थीं। दोनों के जल्द शादी की खबरें भी आई। फिर पता चला कि ब्रेकअप हो गया है।

ऐसे में ललित मोदी के ताजा ट्वीट के बाद 2013 के कुछ ट्वीट्स वायरल हो रहे हैं। इसके आधार पर नेटिजन्स अटकलें लगा रहे हैं कि दोनों काफी समय से एक-दूसरे को डेट कर रहे थे। कुछ ऐसी तस्वीरें भी वायरल हो रही हैं जिनमें ललित मोदी और उनकी दिवंगत पत्नी मीनल के साथ भी सुष्मिता नजर आ रही हैं।

फोटो साभार: ईटाइम्स

हालॉंकि ईटाइम्स ने अपनी एक रिपोर्ट में इन अटकलों को खारिज करते हुए कहा है कि रोहमन के साथ रिश्ते से अलग होने तक सुष्मिता और ललित मोदी एक-दूसरे को डेट नहीं कर रहे थे। रिपोर्ट बताती है कि ललित मोदी की वाइफ मीनल साल 2018 तक जीवित थीं। दोनों बहुत खुश थे और अपने रिश्ते के प्रति कमिटेड भी थे। मीनल के निधन के बाद से ललित मोदी सिंगल थे। रोहमन से ब्रेकअप के बाद सुष्मिता भी अकेली थीं। इसके बाद ही दोनों करीब आए और अब जल्द शादी भी कर सकते हैं।

फोटो साभार: ईटाइम्स

बता दें कि सुष्मिता सेन और रोहमन शॉल का दिसंबर 2021 में ब्रेकअप हुआ था। रोहमन से पहले उनका कई हस्तियों के साथ नाम जुड़ा। इनमें विक्रम भट्‌ट, रणदीप हुड्‌डा, वसीम अकरम, ऋतिक भसीन और मुद्दसर अजीज शामिल हैं।