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जिस पाकिस्तानी पत्रकार ने की भारत की जासूसी, उसे नहीं बुलाने पर भड़क गए थे हामिद अंसारी: आयोजक का दावा, कहा- झूठ बोल रहे पूर्व उपराष्ट्रपति, सरकार करे जाँच

पाकिस्तानी पत्रकार नुसरत मिर्जा (Nusrat Mirza) द्वारा भारत आकर जासूसी करने के मामले में नया खुलासा हुआ है। ऑल इंडिया बार एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. आदिश अग्रवाल ने एक विस्तृत बयान जारी कर पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी पर जानकारी छिपाने और झूठ बोलने का आरोप लगाया है। सरकार से इसकी जाँच की माँग की है। डॉ. अग्रवाल इंटरनेशनल काउंसिल ऑफ ज्यूरिस्ट्स के अध्यक्ष भी हैं।

बयान में बताया गया है कि अंसारी का कार्यालय चाहता था कि मिर्जा को सम्मेलन में बुलाया जाए। इसे स्वीकार नहीं किए जाने पर वे नाराज भी हो गए थे। डॉ. अग्रवाल ने जिस सम्मेलन को लेकर यह दावा किया है ​वह दिल्ली के विज्ञान भवन में 11 और 12 दिसंबर 2010 को आयोजित हुआ ​था।

उन्होंने आतंकवाद के मसले पर जामा मस्जिद यूनाइटेड फोरम द्वारा 27 अक्टूबर 2009 को दिल्ली के ओबेरॉय होटल में आयोजित एक सम्मेलन की तस्वीर भी शेयर की है। इसमें अंसारी और मिर्जा को एक साथ मंच साझा करते हुए दिखाया है। बताया है कि इस सम्मेलन में हामिद अंसारी, दिल्ली जामा मस्जिद के शाही इमाम, नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला और अन्य मुस्लिम नेताओं ने भाग लिया था। डॉ अग्रवाल ने आरोप लगाया है कि हामिद अंसारी और उनके दोस्त जामा मस्जिद यूनाइटेड फोरम के सम्मेलन में पाकिस्तानी पत्रकार नुसरत मिर्जा के साथ दोस्ती कर रहे थे।

बयान में कहा गया है कि कि ऐसा लगता है कि हामिद अंसारी और कॉन्ग्रेस नेता जयराम रमेश ने सरकारी एजेंसियों और जनता को गुमराह करने के लिए जामा मस्जिद यूनाइटेड फोरम के सम्मेलन के बारे में खुलासा नहीं किया है। ऐसे में सरकार से अनुरोध है कि वह इस मामले की जाँच करे, क्योंकि यह राष्ट्रीय सुरक्षा और जासूसी से संबंधित है।

बयान में कहा गया है कि अंसारी और रमेश ने केवल 11 और 12 दिसंबर 2010 को विज्ञान भवन में आयोजित न्यायविदों के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का ही उल्लेख किया है। इस सम्मेलन में अंसारी ने हिस्सा लिया था। लेकिन नुसरत मिर्जा इसमें आमंत्रित नहीं थे। यहाँ तक ​​कि नुसरत मिर्जा ने भी अपने साक्षात्कार में इस सम्मेलन का उल्लेख नहीं किया है।

डॉ. अग्रवाल का दावा है कि जब इस सम्मेलन का आयोजन हो रहा था तो तत्कालीन हामिद अंसारी को इसमें शामिल होने का निमंत्रण दिया गया था। अशोक दीवान उस समय उपराष्ट्रपति सचिवालय के निदेशक थे। बयान में कहा गया है, “दीवान ने मुझे बताया था कि उपराष्ट्रपति (हामिद अंसारी) चाहते हैं कि पाकिस्तानी पत्रकार नुसरत मिर्जा को सम्मेलन में आमंत्रित किया जाए। लेकिन हम इस अनुरोध को स्वीकार नहीं कर सके क्योंकि मिर्जा पाकिस्तानी मीडिया से थे और हमने पाकिस्तान से जजों या वकीलों को आमंत्रित नहीं किया था।”

डॉ अग्रवाल के अनुसार जब दीवान को यह बात पता चली कि हमने मिर्जा को आमंत्रित नहीं किया है, तो उन्होंने सम्मेलन से एक दिन मुझे फोन कर नाराजगी जताई। यह भी बताया कि हामिद अंसारी को यह बुरा लगा है और अब वे केवल बीस मिनट के लिए समारोह में शामिल होंगे। अग्रवाल के अनुसार शुरुआत में अंसारी ने एक घंटे के लिए कार्यक्रम में भाग लेने के लिए सहमति दी थी।

गौरतलब है नुसरत मिर्जा (Nusrat Mirza) ने 10 जुलाई, 2022 को एक इंटरव्‍यू में कई हैरान करने वाले खुलासे किए थे। पाकिस्तानी पत्रकार और YouTuber शकील चौधरी (Shakil Chaudhary) को दिए इंटरव्यू में नुरसत मिर्जा ने दावा किया था कि उन्होंने 2005 से 2011 के बीच भारत दौरे के दौरान पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) के लिए कई जानकारियाँ एकत्र की थीं। उन्हें पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी और ‘मिल्‍ली गैजेट’ अखबार के मालिक जफरुल इस्लाम खान ने भारत में आमंत्रित किया था।

जहाँगीरपुरी में हिंदुओं पर हमले की 6 दिन पहले ही हो गई थी तैयारी, छत पर जमा थे शीशे-पत्थर: दिल्ली की कोर्ट में चार्जशीट दाखिल, 8 दंगाई अब भी फरार

दिल्ली के जहाँगीरपुरी में 16 अप्रैल 2022 को हनुमान जयंती शोभायात्रा में शामिल हिंदुओं पर हमला हुआ है। इस मामले में दिल्ली पुलिस ने रोहिणी कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी है। इसके मुताबिक हमले से 6 दिन पहले ही इसकी साजिश रची जा चुकी थी। छतों पर शीशे और पत्थर जमा कर लिए गए थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 45 नामजद आरोपितों में 37 अब तक गिरफ्तार किए गए हैं। हमले की साजिश मुख्य रूप से तबरेज अंसारी, मोहम्मद अंसार और शेख इशर्फिल ने रची थी। मोहम्मद अंसार और तबरेज गिरफ्तार हो चुके हैं, जबकि शेख इशर्फिल की तलाश की जा रही है। काँच की बोतलें और पत्थर फेंकने के लिए शेख इशर्फिल की ही छत का प्रयोग किया गया था। पुलिस ने इन तमाम जानकारियों को जुटाने के लिए 2300 मोबाइल फोन के डाटा और 58 सीसीटीवी फुटेज की जाँच की।

शेख इशर्फिल को इलाके का पार्किंग माफिया भी कहा जाता है। उस पर CAA हिंसा में भी सक्रिय भागीदारी का आरोप है। उसके 2 बेटे भी आपराधिक सोच वाले बताए जा रहे हैं, जिनके नाम अशनूर और मोहम्मद अली हैं। पुलिस ने इस केस में 2 नाबालिगों को भी पकड़ा है जिनका मामला किशोर न्याय बोर्ड में अलग से चल रहा है।

पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक अब तक आरोपितों की निशानदेही पर हमले में प्रयोग कई हथियार बरामद कर लिए गए हैं। पुलिस के मुताबिक आरोपितों से 9 पिस्तौल, 9 तलवारें और कई कारतूस बरामद किए गए हैं। पुलिस ने यह भी बताया है कि हमले के दौरान शोभायात्रा में शामिल लोगों को काफी नुकसान पहुँचाने का इरादा था जो पुलिस की सक्रियता से सफल नहीं हो पाया। 2063 पन्नों की इस चार्जशीट में बताया गया है कि 8 आरोपितों की तलाश की जा रही है। गिरफ्तार 37 आरोपितों में से 20 को CCTV में पहचान कर पकड़ा गया है।

पुलिस को अभी सद्दाम, सुलेमान, कलिया, अशनूर, जहाँगीर, हशमत और शेख सिकंदर की भी तलाश है। इस चार्जशीट में कुछ मीडियाकर्मियों को भी गवाह बनाया गया है। पुलिस ने 21 फोन जब्त करने का भी दावा करते हुए मामले में 132 गवाह पेश किए जिसमें 85 गवाह पुलिस विभाग से हैं। उनसे पुलिस ने 34 वायरल वीडियो जमा किए हैं। आरोप पत्र में यह भी बताया गया है कि जिस शोभायात्रा पर हमला किया गया था उसके लिए प्रशासन से अनुमति नहीं ली गई थी, जिसकी जाँच अलग से की जा रही है।

PFI का खतरनाक एजेंडा ‘इंडिया विजन 2047’: इस्लामी सरकार बनाना, ‘कायर हिंदुओं’ की हत्या के लिए हथियार प्रशिक्षण, न्यायपालिका में घुसपैठ- एक्सक्लूसिव रिपोर्ट

बिहार पुलिस ने आज गुरुवार (14 जुलाई 2022) को 8 पन्नों वाले पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के दस्तावेज को लेकर चौंकाने वाले खुलासे किए, जो भारत के ‘कायर हिंदुओं’ को सबक सिखाने की बात करता है। यह दस्तावेज आने वाले वर्षों के लिए पीएफआई के लक्ष्य के बारे में बताता है।

‘इंडिया विज़न 2047’ नाम के दस्तावेज़ को पीएफआई ने अपने कैडर के बीच आंतरिक रूप से प्रसारित किया है। उसका लक्ष्य ‘कायर हिंदुओं’ पर पूरी तरह से हावी होना और उन्हें अपने अधीन करना है। यह लक्ष्य तब ही प्राप्त किया जा सकता है, जब पीएफआई के पीछे 10 प्रतिशत मुस्लिम एकजुट हों।

इसमें यह भी उल्लेख किया गया है कि PFI अपने प्रशिक्षित कैडरों और तुर्की जैसे इस्लामी देशों की मदद से भारत के खिलाफ एक पूर्ण सशस्त्र विद्रोह शुरू करने की योजना बना रहा है। इस कट्टरपंथी इस्लामी संगठन ने अन्य इस्लामी देशों से भी भारत सरकार और बहुसंख्यक हिंदुओं को ‘घुटनों पर’ लाने में मदद करने की अपील की है। पुलिस ने कहा कि सिमी (SIMI) के पूर्व आतंकवादी परवेज और पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए जलालुद्दीन नाम के पूर्व पुलिस अधिकारी ने इसके लिए लाखों रुपए जुटाए हैं।

ऑपइंडिया ने पूरे 8 पृष्ठ के दस्तावेज़ तक पहुँच प्राप्त कर ली है, जिसकी सामग्री पुलिस के अब तक के खुलासे से कहीं अधिक खतरनाक और चौंकाने वाली है। ‘इंडिया विजन 2047’ दस्तावेज़ में एक टैगलाइन है जो पीएफआई के लक्ष्य को रेखांकित करती है – “भारत में इस्लामी शासन की ओर”।

इस खतरनाक दस्तावेज़ में ‘भारत में मुस्लिमों की वर्तमान स्थिति’, ‘हर घर में पीएफआई’ तक की रणनीति, भारत 2047 योजना और भारत में मुस्लिम समुदाय के लिए कार्रवाई योग्य बिंदुओं की बारे में वर्णन डराने वाली है।

इस्लाम का शासन स्थापित करने और ‘कायर हिंदुओं’ को वश में करने के लिए आने वाले वर्षों में मुस्लिम आबादी क्या करना चाहती है, इसका बिंदु-दर-बिंदु विवरण निम्नलिखित है।

भारत में ‘मुस्लिमों की वर्तमान स्थिति’ के बारे में क्या कहता है दस्तावेज़

पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के इस ‘विजन डॉक्युमेंट’ का पहला उपशीर्षक भारत में ‘मुस्लिमों की वर्तमान स्थिति’ है। दस्तावेज़ के इस खंड में मुस्लिमों के पीड़ित होने की उसी कहानी को आगे बढ़ाया गया है, जिसका उपयोग इस्लामवादियों ने अपने मजहबी साथियों को हथियार उठाने के लिए प्रेरित करने के लिए वर्षों से किया है।

  • PFI इस बात पर अफसोस जताता है कि भारत का शासक समुदाय मुस्लिम अब दोयम दर्जे का नागरिक बनकर रह गया है। इसमें कहा गया है कि देश में 9 जिले ऐसे हैं, जहाँ मुस्लिमों की आबादी 75% से ऊपर है।
  • पीएफआई का कहना है कि मुस्लिमों की वर्तमान स्थिति अंग्रेजों के समय से शुरू हुई थी। उसका दावा है कि अंग्रेजों ने मुस्लिमों के खिलाफ भेदभावपूर्ण नीतियाँ अपनाईं और हिंदुओं का ‘पक्ष’ लिया। दस्तावेज में कहा गया है, “संपत्ति के अधिकार आदि के मामले में पहले मुस्लिमों को प्राप्त विशेषाधिकारों को वापस ले लिया गया था, सरकारी नौकरियों से वंचित कर दिया गया था और व्यापार सुविधाओं को प्रतिबंधित कर दिया गया था। स्वतंत्रता की शुरुआत के बाद से उच्च जाति के हिंदुओं के प्रभुत्व वाली भारत सरकार ने मुस्लिमों के खिलाफ भेदभावपूर्ण कदम उठाए।”
  • दस्तावेज़ में कहा गया है कि मुस्लिम बच्चे दलित बच्चों के साथ प्रतिस्पर्धा करते हैं और ‘सांप्रदायिक हिंदुत्ववादी ताकतों के उदय ने मुस्लिमों की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक स्थितियों को और गंभीर कर दिया है। मुस्लिमों का राजनीतिक अस्तित्व इतना नीचे आ गया है कि भारत सरकार शरीयत से संबंधित मामलों पर भी मुस्लिमों से सलाह लेने की जहमत नहीं उठाती’।
  • इसमें कहा गया है कि मुस्लिम समुदाय ‘मूर्खतापूर्ण मतभेदों’ से विभाजित है और इसलिए ‘हिंदुत्व ताकतों’ से लड़ना मुश्किल है। इसमें आगे कहा कि मुस्लिमों को दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा समुदाय (भारतीय आबादी के मामले में) होने के नाते ‘दुनिया को एक मॉडल’ देने की जरूरत है कि कैसे समुदाय को ‘मुस्लिम विरोधी ताकतों’ से लड़ने की जरूरत है।
  • इस्लामी संगठन ने मुस्लिम समुदाय में अपनी भूमिका के बारे में भी बताया है। लिखा है, “दुनिया भारतीय मुस्लिमों को एक मॉडल के रूप में देखती है और भारतीय मुस्लिम समुदाय असहाय होकर किसी चमत्कार का बेसब्री से इंतजार कर रहा है। अभी या बाद में नेतृत्व को समुदाय के भीतर से उभरना होगा, ताकि खुद को तत्कालिक खतरों से बचाया जा सके और स्वतंत्रता, सच्चाई और समानता के आधार पर समाज के वंचित वर्गों के लिए एक वास्तविक विकास मॉडल प्रदान किया जा सके। यह वह भूमिका है, जिसमें पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया खुद को देखता है।

PFI का विजन 2047

  • दस्तावेज़ में PFI का कहना है कि उसने भारत में इस्लामी शासक स्थापित करने के लिए खुद को वर्ष 2047 की तारीख दी है।
  • दस्तावेज़ में कहा गया है, “हम उस 2047 का सपना देखते हैं, जिसमें राजनीतिक सत्ता मुस्लिम समुदाय के पास लौटकर आती है, जिसे ब्रिटिश राज ने अन्यायपूर्ण तरीके से छीन लिया था।”
  • ध्यान देने वाली बात यह है कि कि PFI के दस्तावेज में कहा गया है कि मुस्लिम समुदाय हमेशा से अल्पसंख्यक रहा है और जीतने के लिए उसे बहुमत की जरूरत नहीं है। दस्तावेज में कहा गया है, “अगर हम इस्लाम के इतिहास में देखें तो मुस्लिम हमेशा अल्पसंख्यक थे और जीत के लिए हमें बहुमत की आवश्यकता नहीं है। पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) को विश्वास है कि अगर कुल मुस्लिम आबादी का 10% उसके साथ आता है तो भी PFI कायर बहुसंख्यक समुदाय को उसके घुटनों पर ला देगा और भारत में इस्लाम के वैभव को वापस ला देगा।”
  • दस्तावेज़ स्पष्ट रूप से कहता है कि PFI कैडर और नेता भारत में एक इस्लामी सरकार की स्थापना की दिशा में काम कर रहे हैं। दस्तावेज में कहा गया है, “पीएफआई कैडरों और मुस्लिम युवाओं को बार-बार बताया जाना चाहिए कि वे सभी दीन (इस्लाम) के लिए काम कर रहे हैं। अल्लाह ने दुनिया/कायनात की रचना की थी और मुस्लिम दो वजहों से बने थे। पहला, अल्लाह का कानून स्थापित करने के लिए और दूसरा, मुस्लिम धरती पर दाई है। यह हमेशा ध्यान में रखा जाना चाहिए कि इस्लाम का शासन स्थापित करना है।”

PFI के दस्तावेजों के अनुसार, इस्लामी शासन के चरण

पीएफआई ने अपने दस्तावेज़ में भारत में इस्लामी शासन स्थापित करने की दिशा में प्रगति को चरणों में विभाजित किया है। पीएफआई ने इसके लिए 4 चरण निर्धारित किए हैं।

चरण-1

भारत में इस्लामी शासन स्थापित करने के लेकर पहले चरण में PFI का कहना है कि हर क्षेत्र में और हर वर्ग के मुस्लिमों को पीएफआई के बैनर तले एकजुट होने की जरूरत है। वह और अधिक लोगों की भर्ती करेगा और उन्हें हथियारों का प्रशिक्षण देगा, जिनमें छड़, तलवार और अन्य हथियारों का उपयोग शामिल है। इस प्रशिक्षण में आक्रमण करने और खुद को बचाने की तकनीक भी शामिल होगी।

दस्तावेज में कहा गया है, “इसके लिए मुस्लिम समुदाय को उनके कष्टों को बार-बार याद दिलाने और जहाँ कोई शिकायत निवारण तंत्र (जहाँ मुस्लिमों की समस्याओं के लिए उनकी मदद की जा सके) नहीं है, वहाँ उसे स्थापित करने की जरूरत है। पार्टी सहित हमारे सभी फ्रंटल संगठनों को नए सदस्यों के विस्तार और भर्ती पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। साथ ही हमें भारतीय होने की अवधारणा से परे सभी के बीच एक इस्लामी पहचान स्थापित करनी होगी। हम अपने PE विभाग में सदस्यों की भर्ती और प्रशिक्षण शुरू करेंगे, जिसमें उन्हें तलवारों, छड़ों और अन्य हथियारों के हमलावर और रक्षात्मक तकनीकों का प्रशिक्षण दिए जाएँगे।”

चरण-2

अपने चरण-2 में PFI खुले तौर पर हिंदुओं के खिलाफ हिंसा करने की अपील करता है। इसमें कहा गया है कि मुस्लिमों की कष्टों को बार-बार दोहराया और उन्हें याद दिलाया जाना चाहिए। इसके साथ ही हिंसा का इस्तेमाल ‘चुनिंदा विरोधियों’ (हिंदुओं) को आतंकित करने और उनकी सामूहिक ताकत को देखने के लिए किया जाना चाहिए। वे आगे बड़े पैमाने पर लामबंदी और ‘सुरक्षा बलों के लिए प्रशिक्षित कैडर के एक्सपोजर’ को सीमित करने की बात करता है।

चरण 2 तब बताता है कि वह ‘अम्बेडकर’, ‘संविधान’ आदि जैसी पंच लाइनों का उपयोग करके अपनी नापाक गतिविधियों को कैसे आगे बढ़ाता है।

दस्तावेज कहता है, “उन सभी कैडरों से जिन्हें PE दिया जा रहा है, प्रतिभावान लोगों को देखा जाएगा और उन्हें हथियारों और विस्फोटकों का एडवांस प्रशिक्षण देने के लिए भर्ती किया जाएगा। इस बीच पार्टी को ‘राष्ट्रीय ध्वज’, ‘संविधान’ और ‘अंबेडकर’ जैसी अवधारणाओं का उपयोग इस्लामी शासन स्थापित करने के वास्तविक इरादे को ढालने के रूप में और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/ओबीसी तक पहुँचने के लिए करना चाहिए। हम कार्यपालिका और न्यायपालिका के हर स्तर पर घुसपैठ करेंगे और सूचनाओं को एकत्र करने उसे अपने हित में इस्तेमाल कर अनुकूल परिणाम प्राप्त करने का प्रयास करेंगे। इसके अलावा, फंडिंग और अन्य मदद के लिए विदेशी इस्लामी देशों के साथ संपर्क स्थापित करना है।”

चरण-3

हथियार का प्रशिक्षण देने, कार्यपालिका एवं न्यायपालिका में घुसपैठ करने और विदेशी इस्लामी राष्ट्रों के साथ संपर्क करने की अपनी रणनीति की रूपरेखा तैयार करने के बाद आतंकवादी संगठन PFI अपने तीसरे चरण की बात करता है। इसमें वह कहता है-

  • इस चरण में पीएफआई का कहना है कि पार्टी (PFI) को एससी/एसटी/ओबीसी समुदाय के साथ घनिष्ठ गठबंधन बनाना चाहिए और चुनाव में कम-से-कम कुछ सीटें जीतनी चाहिए। PFI जो गठबंधन बनाना चाहता है, उसमें 50% मुस्लिमों की हिस्सेदारी और 10% एससी/एसटी/ओबीसी की हिस्सेदारी होगी।
  • पीएफआई आरएसएस और एससी/एसटी/ओबीसी के बीच विभाजन पैदा करने की बात करता है। दस्तावेज़ में कहा गया है, “हमें यह दिखाकर आरएसएस और एससी/एसटी/ओबीसी के बीच एक विभाजन पैदा करने की जरूरत है कि आरएसएस केवल उच्च जाति के हिंदुओं के हित की बात करने वाला संगठन है।”
  • पीएफआई एक विशुद्ध मुस्लिम पार्टी की आवश्यकता को आगे बढ़ाने के लिए सभी ‘धर्मनिरपेक्ष’ दलों को बदनाम करने की बात करता है। इससे मुस्लिमों और एससी/एसटी/ओबीसी की जरूरतें पूरा होंगी।
  • पीएफआई ने अपने कैडरों से इस स्तर पर हथियार जमा करने के लिए कहा है।
  • डॉक्यूमेंट में कहा गया है, “PE विभाग को अपने सदस्यों के अनुशासन, यूनीफॉर्म में मार्च और जहाँ कहीं भी आवश्यक हो समुदाय की रक्षा के लिए हमला करके अपनी ताकत का प्रदर्शन करना चाहिए। इस चरण में हथियारों और विस्फोटकों का भंडारण किया जाना चाहिए।”

चरण-4

  • इस चरण में पीएफआई का कहना है कि वह अन्य सभी मुस्लिम और धर्मनिरपेक्ष संगठनों को दरकिनार करते हुए सभी मुस्लिमों का निर्विवाद नेता बनेगा।
  • इसे 50% एससी/एसटी/ओबीसी का विश्वास भी हासिल करना चाहिए और उनके प्रतिनिधि के रूप में भी उभरना चाहिए।
  • पीएफआई का कहना है कि अगर वह इस समर्थन को हासिल कर लेती है तो उसके लिए राष्ट्रीय स्तर पर सत्ता हथियाना काफी आसान होगा।
  • डॉक्युमेंट कहता है, “एक बार सत्ता में आने के बाद कार्यपालिका और न्यायपालिका के साथ-साथ पुलिस और सेना में सभी महत्वपूर्ण पदों को वफादार कार्यकर्ताओं से भरा जाएगा। सेना और पुलिस सहित सभी सरकारी विभागों के दरवाजे वफादार मुस्लिमों और एससी/एसटी/ओबीसी को भरने के लिए खोले जाएँगे, ताकि पिछली भर्ती में उनके साथ हुए अन्याय और असंतुलन को ठीक किया जा सके।”
  • दस्तावेज में आगे कहा गया है, “जिन लोगों को हथियारों का प्रशिक्षण दिया जा रहा था, वे इस बिंदु पर और अधिक ‘खुलकर’ सामने आ जाएँगे और ‘जो उनके (मुस्लिमों के) हितों के विरुद्ध होंगे उन्हें रास्ते से हटा (मार) देंगे’। हमारे PE विभाग की कार्रवाई अधिक स्पष्ट हो जाएगी और इस स्तर पर कैडरों की संख्या में तेजी से वृद्धि होगी। जो हमारे हित के खिलाफ हैं उन्हें खत्म किया जाएगा। ये PE कैडर हमारे विरोधियों द्वारा सुरक्षा बलों पर प्रभाव के खिलाफ एक सुरक्षा कवच के रूप में भी काम करेंगे।”
  • अंतिम चरण में हथियारों के भंडार और सशस्त्र कैडरों को प्रशिक्षित करने के बाद एक इस्लामी संविधान की स्थापना करने और इसके रास्ते में बनने वाले लोगों (खासकर हिंदू) को खत्म करना होगा। डॉक्युमेंट कहता है, “जब हमारे पास पर्याप्त प्रशिक्षित कैडर और हथियारों का भंडार हो जाएगा तो हम इस्लामी सिद्धांतों पर आधारित एक नए संविधान की घोषणा करेंगे। इस समय बाहरी ताकतें भी हमारी मदद के लिए आ जाएँगी। हमारे विरोधियों का व्यवस्थित और व्यापक रूप से सफाया होगा और इस्लामी गौरव की वापसी होगी।”

PFI द्वारा उल्लेखित वर्तमान में कार्रवाई योग्य बिंदु

मुस्लिमों के लिए शिकायत निवारण तंत्र की स्थापना: पीएफआई दस्तावेज़ कहता है कि बढ़ते हिंदुत्व की विचारधारा और आरएसएस समर्थित सरकार ने मुस्लिमों को यह विश्वास दिलाने के लिए पर्याप्त कारण दिए हैं कि यह सरकार इस्लाम के हित के खिलाफ काम कर रही है और सरकार एवं मुस्लिम समुदाय के बीच विश्वास की कमी है। इसके लिए पीएफआई के प्रयास बधाई के पात्र हैं।

दस्तावेज में कहा गया है, “मुस्लिम समुदाय को हमेशा बाबरी मस्जिद के विध्वंस, सांप्रदायिक दंगों और मुस्लिमों की लिंचिंग के दौरान उन पर किए गए अत्याचारों के बारे में याद दिलाया जाना चाहिए। सभी राज्य इकाइयों द्वारा मुस्लिमों को यह विश्वास दिलाने के लिए ठोस प्रयास किए जाने चाहिए कि आरएसएस के नेतृत्व वाली सरकार भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करने और मुस्लिमों को देश से बाहर निकालने की योजना बना रही है।”

सामूहिक लामबंदी: पीएफआई ने ‘इस्लाम की खोई हुई महिमा’ को वापस पाने के लिए सामूहिक लामबंदी को ‘प्राथमिकता वाले क्षेत्र’ के रूप में घोषित किया है। दस्तावेज़ के अनुसार, इसके 3 पहलू हैं – समावेशी, पहुँच और जुड़ाव।

दस्तावेज के अनुसार, “एक समावेशी संगठन होने का मतलब है कि पॉपुलर फ्रंट में उस समुदाय के सभी लोगों के लिए जगह होनी चाहिए, जो हमारे कारण में योगदान देना चाहते हैं। पहुँच का अर्थ है, समुदाय को मुद्दों के बारे में शिक्षित करके और उसकी प्राथमिकताएँ निर्धारित करके समुदाय से संपर्क करना। जुड़ाव का मतलब न केवल हमारी पहुँच को एकतरफा शिक्षा तक सीमित करना है, बल्कि हमारे एजेंडे में भाग लेने के लिए जनता को भी शामिल करना है। लोगों को उनके अधिकारों के लिए आगे लाना सामूहिक लामबंदी का होगा और इसके अपेक्षित परिणाम मिलेंगे। जनता को जोड़ने के लिए संगठन के भीतर के सभी मौजूदा प्लेटफार्मों का उपयोग किया जाना चाहिए और मौजूदा सामुदायिक प्लेटफार्मों को भी प्रभावित किया जाना चाहिए।”

हर घर में PFI: पीएफआई का उद्देश्य हर मुस्लिम घर से हर सदस्य की भर्ती करना है। हालाँकि, यदि यह संभव नहीं है तो 1) प्रत्येक मुस्लिम घर से कम से कम एक सदस्य की भर्ती करें, यदि नहीं, तो 2) एक व्यक्ति को पार्टी में भर्ती करें। यदि नहीं, तो 3) उनमें से किसी को हमारे किसी भी फ्रंटल संगठन में भर्ती करें, यदि नहीं, तो 4) उन्हें हमारी पत्रिकाओं/लेखों का पाठक बनाएँ या कम से कम उन्हें सोशल मीडिया पर पोस्ट करें।

मुस्लिमों की भर्ती और उनका प्रशिक्षण: चौंकाने वाली बात यह है कि इस समय PFI हिंदुओं के खिलाफ बेलगाम हिंसा करने की बात करता जा रहा है। वह कहता है कि वास्तव में वह भी नहीं जानता कि लोगों के बीच उसके कितने सशस्त्र जमीनी कैडर हैं और वह यह भी नहीं जानता है कि वे हिंदुओं में कितना भय पैदा करते हैं। इसलिए इसका परीक्षण करने की आवश्यकता है।

पीएफआई के दस्तावेज में कहा गया है कि योग कक्षाओं और ‘स्वस्थ लोग स्वस्थ राष्ट्र’ अभियान की आड़ में उसके PE कैडर को हथियारों की ट्रेनिंग दी जानी चाहिए। दस्तावेज में कहा गया है, “हमारे अच्छी तरह से प्रशिक्षित PE प्रशिक्षकों को कैडरों को हथियारों और विस्फोटकों का प्रशिक्षण देने के लिए राज्य-दर-राज्य भेजा जा रहा है। हमारे पास प्रशिक्षकों की कमी है और संभावित प्रशिक्षुओं की संख्या बहुत बड़ी है। इसके लिए साधन संपन्न उम्मीदवारों की पहचान की जानी चाहिए और उन्हें बेसिक PE कोर्स इंस्ट्रक्टर, सेकेंडरी PE कोर्स इंस्ट्रक्टर और PE मास्टर्स बनने के लिए प्रशिक्षित किया जाना चाहिए।”

दस्तावेज में आगे कहा गया है, “हमारे पास एडवांस PE पाठ्यक्रम संचालित करने के लिए अभी तक उचित एवं एकांत प्रशिक्षण केंद्र/स्थान नहीं हैं। चुनौती का सामना करने के लिए राज्य इकाइयों को मुस्लिम बहुल इलाकों या दूरदराज के स्थानों में भूखंडों का अधिग्रहण करना चाहिए, ताकि हथियारों और विस्फोटकों के भंडार के लिए उचित प्रशिक्षण सुविधाएँ और डिपो स्थापित किए जा सकें। इन केंद्रों के बारे में केवल चुनिंदा लोगों को जानकारी होना चाहिए। हमारे पास सभी पीएफआई कैडरों और हमसे सहानुभूति रखने वालों को बुनियादी PE में प्रशिक्षित करने के साथ-साथ प्रशिक्षित PE कैडरों की अपनी समर्पित सेना बनाने के लिए एक लंबा रास्ता तय करना है।”

हिंदुओं और उनके नेताओं के बारे में जानकारी जुटाना तथा विदेशों से मदद माँगना

इस ‘कार्रवाई योग्य बिंदु’ में पीएफआई यह कहता है कि उसे ‘अंतिम शक्ति प्रदर्शन’ से पहले हिंदुओं और हिंदू नेताओं के बारे में विवरण रखना चाहिए। इसका मतलब है कि वह इन हिंदुओं और हिंदू नेताओं की हत्या के लिए जानकारी अपने साथ तैयार रखना चाहता है।

पुलिस द्वारा बरामद PFI के डॉक्यूमेंट में कहा गया है, “अंतिम प्रदर्शन के चरण से पहले हिंदू/आरएसएस नेताओं और उनके कार्यालयों के स्थानों के व्यक्तिगत विवरण के बारे में विस्तृत जानकारी एकत्र करना और तैयार रखना अनिवार्य है। विभिन्न स्तरों पर सूचना विंगों को अपने डेटा-बेस का फॉलोअप और अपडेट करते रहना चाहिए। उनकी गतिविधियों पर नज़र रखने से हमें उनके खिलाफ कार्रवाई करने में भी मदद मिलेगी। हमारे अंतिम लक्ष्य के रोडमैप में सूचना विंग के महत्व को ध्यान में रखते हुए सभी स्तरों पर विंग के कामकाज को मजबूत और तेज करने की जरूरत है।”

पीएफआई अपने ‘विज़न डॉक्यूमेंट’ को यह कहकर समाप्त करता है कि भारतीय राज्य के साथ पूर्ण रूप से टकराव की स्थिति में उसे तुर्की जैसे ‘दोस्ताना इस्लामी राष्ट्रों’ से मदद की आवश्यकता होगी। PFI कहता है कि उसने तुर्की के साथ घनिष्ठ संबंध विकसित किए हैं, जबकि अन्य इस्लामी राष्ट्रों तक भी पहुँचने की आवश्यकता है।

दस्तावेज में आगे कहा गया है, “सरकार के साथ पूर्ण शक्ति प्रदर्शन की स्थित में अपने प्रशिक्षित PE कैडरों पर भरोसा करने के अलावा हमें मित्र इस्लामिक देशों से मदद की आवश्यकता होगी। पिछले कुछ वर्षों में PFI ने इस्लाम के ध्वजवाहक तुर्की के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध विकसित किए हैं। कुछ अन्य इस्लामी मुल्कों के साथ विश्वसनीय दोस्ती बढ़ाने के प्रयास जारी हैं।”

कौन है गौहर चिश्ती जिसने दी थी नूपुर शर्मा का ‘सिर तन से जुदा’ करने की धमकी, अब हैदराबाद से हुआ गिरफ्तार, कन्हैयालाल के हत्यारों से भी है कनेक्शन

पैगंबर मुहम्मद को लेकर कथित बयान देने के मामले में नूपुर शर्मा को ‘सिर तन से जुदा’ की धमकी देने वाले अजमेर दरगाह के खादिम गौहर चिश्ती को पुलिस ने हैदराबाद से गिरफ्तार कर लिया है। 17 जून को गौहर चिश्ती ने अजमेर दरगाह के बाहर सिर तन से जुदा के नारे लगवाए थे। गौहर चिश्ती का कन्हैयालाल की हत्या में भी नाम सामने आया था।

पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है और अब उसे अजमेर लाया जा रहा है। दरअसल, भड़काऊ बयानबाजी के मामले में केस दर्ज होने के बाद से ही वो परिवार समेत फरार हो गया था। उसके इस्लामिक कट्टरपंथियों से संबंध भी बताए जा रहे हैं।

कौन है गौहर चिश्ती

उल्लेखनीय है कि अजमेर की ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह के खादिम गौहर चिश्ती से कन्हैयालाल के हत्यारों के कनेक्शन सामने आए थे। गौहर चिश्ती 17 जून को उदयपुर गया था। उसने सर कलम करने के नारे लगवाए थे। वहाँ उसकी मोहम्मद रियाज से मुलाकात की बात भी कही जा रही है। दिलचस्प बात यह है कि इसी दिन रियाज ने वह वीडियो शूट किया था, जिसमें नबी की शान में गुस्ताखी करने वालों का सिर काटने की बात कही गई थी।

बहिन यह भी बताया जा रहा है कि कन्हैयालाल की हत्या के बाद दोनों हत्यारे गौस मोहम्मद और मोहम्मद रियाज अजमेर में गौहर चिश्ती से मिलने के लिए आ रहे थे, लेकिन रास्ते में पकड़े गए। इसके अलावा गौहर चिश्ती कट्टरपंथी इस्लामिक संगठन पीएफआई का एक्टिव मेंबर भी बताया गया है। ज्ञात हो कि सरवर चिश्ती, गौहर चिश्ती औऱ आदिल चिश्ती एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। सरवर चिश्ती गौहर चिश्ती का चाचा है। जबकि, आदिल, सरवर का बेटा है।

वहीं आदिल चिश्ती ने भी गुरुवार (14 जुलाई 2022) को हिन्दू देवी-देवताओं का मजाक उड़ाया था। उसने हिन्दू धर्म की गलत व्याख्या करते हुए कहा, “अगर नुपुर शर्मा हिंदू हैं, तो मेरे पास उनसे कुछ सवाल हैं। 333 करोड़ खुदाओं का अस्तित्व कैसे माना जाएगा? यह कैसे तार्किक है? एक खुदा का तो समझ में आता है। विभिन्न धर्मों के लोगों की अलग-अलग व्याख्याएँ हो सकती हैं। लेकिन, 333 करोड़ खुदा, थोक में देवता (Wholesale of Gods), उसको कैसे माना जाएगा? मैं सोचता हूँ कि अगर व्यक्ति को हजार साल की जिंदगी मिले तो भी वह सभी 333 करोड़ खुदाओं को राजी नहीं कर सकता है।”

25 जून को गौहर चिश्ती पर दर्ज हुआ था FIR

गौरतलब है कि अजमेर पुलिस ने 25 जून को गौहर चिश्ती के खिलाफ भड़काऊ नारे लगाने का केस दर्ज किया था। इसके बाद से वह फरार हो गया था। गौहर चिश्ती का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वो कहता है, “हम अपने हुजूर की शान में गुस्ताखी कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे। गुस्ताख ए रसूल की एक सज़ा, सर तन से जुदा, सर तन से जुदा। अपने आका की इज्जत के लिए हम सिर कटाने को तैयार हैं। नूपुर ने हमारे आका की शान में गुस्ताखी की है, इसलिए उसे जीने का हक नहीं है। नूपुर शर्मा मुर्दाबाद।”

पटना के एसएसपी ने RSS की तुलना इस्लामिक कट्टरपंथी संगठन PFI से की, बीजेपी ने किया बर्खास्त करने की माँग, कहा- राजनीति करनी है तो पद से इस्तीफा दें

बिहार में पटना के फुलवारी शरीफ में गुरुवार (14 जुलाई 2022) को बिहार पुलिस ने इस्लामिक कट्टरपंथी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के ऑफिस पर छापा मारा। इसके बाद इसको लेकर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पटना पुलिस ने इसकी जानकारी दी। इस दौरान पटना के एसएसपी मानवजीत सिंह ढिल्लों ने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की तुलना पीएफआई से कर दी। इसको लेकर अब बीजेपी ने उनसे माफी की माँग की है।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से एसएसपी को तुरंत बर्खास्त करने की माँग करते हुए बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता मनोज शर्मा ने कहा, “उनका मानसिक संतुलन बिगड़ गया है और वो अब दिवालिया हो चुके हैं। ऐसे व्यक्ति को एसएसपी के रूप में मिनट भी नहीं रखना चाहिए। उन्होंने पुलिस अधिकारी पर अपनी मर्यादा के उल्लंघन का आरोप लगाया। उन्होंने पुलिस अधिकारी को बड़बोला और बददिमाग करार दिया। साथ ही कहा कि इनके इस पद पर रहने से शहर की कानून व्यवस्था और माहौल बिगड़ रहा है। सीएम इस पर संज्ञान लें।”

मनोज शर्मा ने आरएसएस को राष्ट्र निर्माण करने वाली संस्था करार दिया और कहा कि शाखाओं में भारतीय संस्कृति और सभ्यता को मजबूत करने की ट्रेनिंग दी जाती है। वहीं भाजपा पिछड़ा वर्ग के राष्ट्रीय महामंत्री निखिल आनंद ने एसएसपी के बयान पर कटाक्ष करते हुए कहा कि राजनीति करना है तो पद से इस्तीफा दें और राजनीति में आएँ।

मनोज शर्मा ने आगे कहा, “आरएसएस एक राष्ट्र निर्माण करने वाली संस्था है। यहाँ भारतीय संस्कृति और सभ्यता सुदृढ़ करने की ट्रेंनिग दी जाती है। यहाँ लोगों में एकता और अहिंसा का पाठ पढ़ाया जाता है। पटना एसएसपी को एक बार आरएसएस के शाखा में जाकर ट्रेंनिग लेनी चाहिए, तब उन्हें पता चलेगा कि आरएसएस में किस तरह की ट्रेनिंग दी जाती है।”

एसएसपी ने क्या बोला

गौरतलब है कि पीएफआई के दफ्तर पर छापेमारी के बाद पटना पुलिस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस किया। इस दौरान एसएसपी मानवजीत सिंह ढिल्लो ने कहा, “इसका जो मोडस था कि ये लोग, जैसे शाखा होती है, आरएसएस अपनी शाखा ऑर्गेनाइज करते हैं, और लाठी की ट्रेनिंग देते हैं, उसी तरह से ये लोग शारीरिक शिक्षा के नाम पर युवाओं को प्रशिक्षण दे रहे थे। उसी के साथ अपना एजेंडा और प्रोपेगेंडा के जरिए युवकों का ब्रेनवाश कर रहे थे।”

ललित मोदी ने सुष्मिता सेन से की शादी! ट्वीट कर खुद दी जानकारी, अब कह रहे डेटिंग की बात, रोमांटिक तस्वीरें शेयर कर किया ऐलान

क्या ललित मोदी ने सुष्मिता सेन से शादी कर ली है? ललित मोदी ने अपने इंस्टाग्राम पर सुष्मिता के साथ रोमांटिक तस्वीरें शेयर कर इस बात का ऐलान किया है। हालाँकि, बाद में डेटिंग की खबर आई है। बॉलीवुड एक्ट्रेस सुष्मिता सेन और ललित मोदी रिलेशनशिप में हैं। इस बात की जानकारी खुद ललित मोदी ने ट्वीट करके दी है। इससे पहले ललित मोदी ने सुष्मिता सेन के साथ कुछ रोमांटिक तस्वीरें शेयर करते हुए ट्वीट किया। जिनसे पहले ये कयास लगाए जा रहे थे कि दोनों ने शादी कर ली है, लेकिन कुछ ही देर बाद उन्होंने साफ कर दिया कि वो रिलेशनशिप में हैं।

दरअसल, ललित मोदी ने ट्वीट में सुष्मिता सेन के लिए ‘Betterhalf’ लिखा था। जिसके बाद लोगों को लगा कि दोनों ने शादी हो गई है। ललित मोदी ने ट्वीट करते हुए लिखा, “परिवार के साथ मालदीव्स, सार्डिनिया सहित एक लम्बे वैश्विक दौरे के बाद अभी वापस लंदन में, मेरे साथ है मेरी बेटरहाफ सुष्मिता सेन, एक नई शुरुआत एक नया जीवन आखिरकार, चाँद के पार चलें टाइप!”

हालाँकि, अब यह मामला मामला साफ़ हो गया है कि दोनों डेट कर रहे हैं। ललित मोदी के पहले पोस्ट के बाद ही सोशल मीडिया यूजर्स और सेलेब्स उन्हें बधाई देने लगे। ऐसे में ललित मोदी ने कुछ ही देर बाद दूसरा ट्वीट किया और लिखा, “साफ कर दूँ कि शादी नहीं हुई है, हम एक दूसरे को डेट कर रहे हैं। लेकिन शादी भी बहुत जल्दी होगी एक दिन।”

वहीं बता दें कि सुष्मिता सेन बीते दिनों रोहमन शॉल से अपने ब्रेकअप को लेकर सुर्खियों में थीं।

गौरतलब है कि ललित मोदी मौजूदा वक्‍त में एक बिजनेस मैन हैं। साल 2008 में उन्‍होंने ही आईपीएल मॉडल की शुरुआत की थी। वहीं बाद में विवाद सामने आने के बाद सीबीआई, प्रवर्तन निदेशालय के शिकंजे से बचने के लिए वो लंदन भाग गए थे। जबकि सुष्मिता सेन साल 1994 में मिस यूनिवर्स बनी थी।

7 महीने 46 केस: हर महीने औसतन 7 लड़कियाँ हो रहीं लव जिहाद का शिकार, पहचान छुपाकर हिन्दू लड़कियों को फँसा रहे मुस्लिम युवक

उत्तर प्रदेश का बरेली जिला लव जिहाद की घटनाओं को लेकर चर्चा में है। जिले में लव जिहाद की बढ़ती घटनाएँ चिंता का विषय हैं। इस साल जनवरी 2022 से 10 जुलाई तक जिले में लव जिहाद के 46 मामले सामने आ चुके हैं। तेजी से बढ़ रही ये घटनाएँ एक प्रकार की सुनियोजित साजिश की ओर इशारा कर रही हैं। जागरण की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस तरह के मामलों में भी पुलिस ने कई मामले रंगदारी के तौर पर दर्ज किए हैं, हालाँकि, पीड़ितों के बयान कुछ और ही कहानी बयाँ कर रहे हैं।

इस मामले में एक्शन लेते हुए बाल कल्याण समिति ने ग्रूमिंग जिहाद के पीड़ितों के बयान दर्ज किए हैं। समिति के अधिकारियों के अनुसार, अधिकांश लड़कियों ने अपने बयानों में कहा कि उन्हें अंधेरे में रखा गया और बाद में जबरन इस्लाम कबूल कराया गया। आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, इस तरह के मामलों में 250 से अधिक केस ऐसे थे, जिनमें पीड़ित नाबालिग थे। इसमें से 46 लड़कियों को मुस्लिमों ने झूठ बोलकर या नाम बदलकर पहले अपने जाल में फँसाया और बाद में उन्हें इस्लामिक धर्मान्तरण के लिए मजबूर किया। बरेली में औसतन हर महीने कम से कम सात लड़कियों को लव जिहाद का शिकार बनाया गया है। इनमें से अधिकतर ने किसी न किसी दबाव में आकर इस्लाम कबूल कर लिया।

बाल कल्याण समिति ने दावा किया है कि कम से कम आठ लड़कियों ने ऑन रिकॉर्ड ये स्वीकार किया है कि मुस्लिम लड़कों ने हिन्दू नाम रखकर उन्हें रिश्ते में फंसाया। उन्हें अपने वास्तविक धर्म के बारे में घर से बाहर निकलने के बाद ही पता चला। इतना ही इस्लामवादियों ने लड़कियों को अपने जाल में फँसाने के बाद पाँच लड़कियों से उनके ही घरों में चोरी करने के लिए मजबूर किया। दरअसल, घर से भगाने से पहले इन मुस्लिमों ने लड़कियों से उनके घरों से नकदी और जेवर चोरी कर लाने को कहा था। इन पीड़ितों में एक स्थानीय नेता की भी बेटी है।

बताया जाता है कि दाउद नाम का एक मुस्लिम युवक उसके घर में सीसीटीवी की फिटिंग करने के लिए आया था। उसी दौरान किशोरी के साथ उसके संबंध बन गए। उसके झाँसे में आकर 26 जून को रात में नकदी व जेवरात लेकर पीड़िता घर से घर से निकली थी। दाऊद ने उसे अपने घर में रखा था। हालाँकि, 28 जून को पुलिस ने उसे ट्रैक कर आरोपित को गिरफ्तार कर लिया। बाद में पुलिस को पीड़िता ने बताया कि इसमें उसके घर वाले भी शामिल हैं। दाऊद को पोक्सो एक्ट के तहत जेल भेज दिया गया।

निकाह के लिए पंजाब ले गए हिन्दू लड़की को

इसी तरह के एक अन्य मामले में आमिर नाम के मुस्लिम युवक ने 15 साल की हिन्दू नाबालिग लड़की को फँसाया। उसने पीड़िता से हिन्दू बनकर जान पहचान की। दोनों एक ही थाना क्षेत्र में रहते थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, आमिर ने कई मौकों पर उससे बात करने की कोशिश की। वह इलाके का चक्कर लगाता था और गिफ्ट के तौर पर एक मोबाइल फोन भी दिया था। फोन देने के बाद उन दोनों की बातचीत शुरू हुई और आरोपित ने उसका ब्रेनवॉश कर दिया। उसने उसे दुनिया घुमाने और रानी की तरह रखने का लालच दिया।

एक दिन वो पीड़िता को लेकर पंजाब चला गया और वहाँ उससे निकाह करने को कहा। जब लड़की ने कहा कि वो तो एक हिन्दू है तो भी उसने उसे निकाह के लिए मना लिया। इस बीच आरोपित ने पीड़िता का उसके परिवार से बात करना भी बंद करवा दिया। किशोरी गर्भवती भी थी। इसी बीच एक दिन मौका देखकर उसने अपने माता-पिता से बात कर उन्हें सारी सच्चाई बताई। बाद में उसके माता-पिता पंजाब गए और उसे वापस ले आए। आमिर के खिलाफ लड़की के परिजनों के केस दर्ज कराया है। जबकि लड़की अब 5 महीने की गर्भवती है।

किशोरी को उसकी सहेली के प्रेमी के जरिए फँसाया

बरेली में ही बारिश नाम के एक मुस्लिम आरोपित ने हिन्दू लड़की को फँसाने के लिए उसकी सहेली के ब्वॉयफ्रेंड का इस्तेमाल किया। लड़की की दोस्त के प्रेमी से वो हिन्दू बनकर मिला और उसके जरिए लड़की से संपर्क साधा। आखिरकार वो अपने मकसद में सफल हो गया। उसने पीड़िता का ब्रेनवॉश कर उसे अपने साथ रहने के लिए मना लिया। इतना ही नहीं घर से अपने साथ भागने से पहले उसने लड़की से उसके ही घर में चोरी भी करवाई। एक रात लड़की घर से कैश और जेवरात लेकर निकल गई। हालाँकि, बाद में आरोपित पकड़ा गया और उसके खिलाफ पोक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई की गई।

न्याय की ये कैसी रफ्तार: 94 साल बाद जमीन विवाद में SC का फैसला, 60 साल पुराने केस को 16 साल बाद हाईकोर्ट भेजा

आखिर न्याय की यह कैसी रफ़्तार कि फैसले आने में करीब 100 साल लग जाए। यूपी के तीन भाइयों के संपत्ति विवाद के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए 94 साल पुराने पारिवारिक संपत्ति विवाद को बुधवार (13 जुलाई 2022) को निपटा दिया। यह विवाद उत्तर प्रदेश के गजाघर मिश्रा के तीन बेटों सीताराम, रामेसर और जागेसर से जुड़ा हुआ है, जो 1928 से चला आ रहा था। वहीं दूसरी ओर 60 साल पुराने एक अन्य जमीन बँटवारे के मामले को शीर्ष न्यायालय ने 16 साल बाद वापस इलाहाबाद हाई कोर्ट (Allahabad High Court) के पास भेज दिया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सीताराम की कोई संतान नहीं थी, जबकि रामेसर के बेटे का नाम भगौती था। वहीं जगेसर के तीन बेटे बासदेव, सरजू और साधू था। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट ने चकबंदी अधिकारी के फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि हमें ऐसा कोई कारण नहीं दिखता, जिससे कि इसमें दखल दिया जाए। कोर्ट ने कहा कि रामेसर और सीताराम में पहले किसकी मौत हुई इसको साबित करने के लिए कोई साक्ष्य नहीं है, इसलिए पुनरीक्षण अधिकारी ने कहा था कि रामेसर और जागेसर की संतानों को बराबर-बराबर हिस्सा मिलेगा। हाई कोर्ट में यह मामला 1974 में आया था। हाई कोर्ट ने 11 सितंबर 2009 को अपने आदेश में चकबंदी डिप्टी डायरेक्टर के आदेश को बरकरार रखा था।

मालूम हो कि इलाहाबाद हाई कोर्ट ने दो भाइयों रामेसर और जगेसर ​को बराबर हिस्सा रखने की इजाजत दी थी। हाई कोर्ट ने चकबंदी डिप्टी डायरेक्टर के उस आदेश को सही ठहराया था, जिसमें परिवार के जोत की जमीन के दो हिस्सों रामेसर और जागेसर को बराबर-बराबर बाँटने का आदेश दिया था।

वहीं दूसरे मामले में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एस अब्दुल नज़ीर और जस्टिस विक्रम नाथ की पीठ ने मंगलवार (12 जुलाई 2022) को हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ याचिका पर फैसला सुनाते हुए 16 साल के बाद इसे वापस इलाहाबाद हाई कोर्ट भेजने का फैसला लिया। 27 पन्नों के फैसले में न्यायमूर्ति नाथ ने कहा, “हमारा विचार है कि हाई कोर्ट इस मामले में ठोस सबूतों के आधार पर फैसला नहीं कर पाया। हाई कोर्ट को रिकॉर्ड में उपलब्ध सबूतों की सावधानीपूर्वक जाँच करनी चाहिए और उसके बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुँचना चाहिए। इस फैसले को रद्द कर दिया जाता है। यह मामला वापस हाई कोर्ट के पास भेजा जाता है। ”

दलेर मेंहदी गिरफ्तार, कबूतरबाजी में 2 साल की सजा पटियाला कोर्ट ने रखी बरकरार: 19 साल पुराना मानव तस्करी का मामला

मशहूर पंजाबी सिंगर दलेर मेंहदी को 2003 के कबूतरबाजी (मानव तस्करी) के मामले में पटियाला की सेशन कोर्ट ने 2 साल जेल की सजा सुनाई है। उनपर 2000 रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। इसी के साथ गुरुवार (14 जुलाई 2022) को उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। इससे पहले पटियाला के ज्युडिशियल मजिस्ट्रेट ने भी मेंहदी को यही सजा सुनाई थी, जिसे कोर्ट ने बरकरार रखा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, मेंहदी को पटियाला सेंट्रल जेल में भेज दिया गया है। दलेर मेंहदी के मामले में सुनवाई के बाद फैसला सुनाते हुए पटियाला के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एचएस ग्रेवाल ने गायक की तत्काल गिरफ्तारी का आदेश दिया था। यहीं पर कॉन्ग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू भी रोड रेज के मामले में सजा काट रहे हैं। इस मामले में शिकायतकर्ता के वकील गुरमीत सिंह ने कहा कि उन्हें 2003 के मानव तस्करी मामले में हिरासत में लिया गया है। कोर्ट ने प्रोबेशन पर उनकी रिहाई की अपील को भी खारिज कर दिया है।

क्या है पूरा मामला

गौरतलब है कि साल 2003 में पटियाला के थाना सदर की पुलिस ने बलवेड़ा गाँव के रहने वाले बख्शीश सिंह की शिकायत पर दलेर मेंहदी, उनके भाई शमशेर सिंह, ध्यान सिंह और बुलबुल मेहता के खिलाफ कबूतरबाजी का केस दर्ज किया था। आरोप था कि इन सभी ने लोगों को विदेश भेजने के नाम पर लाखों रुपए की धोखाधड़ी की थी। बख्शीश सिंह ने पुलिस को दी गई शिकायत में ये आरोप लगाया था कि दलेर मेंहदी ने उनसे विदेश भेजने का वादा किया था। इसके बदले में उन्होंनें उनसे 13 लाख रुपए लिए थे। हालाँकि, बाद में वो इससे पलट गए। उन्होंने न तो उन्हें विदेश भेजा और न ही पैसे वापस किए। दलेर मेंहदी और उनके भाई शमशेर सिंह के खिलाफ कुल 31 केस दर्ज किए गए थे।

इस केस में न्यायिक मजिस्ट्रेट ने दलेर मेंहदी को दोषी करार देते हुए उन्हें सजा सुनाई थी। कोर्ट की इसी सजा को उन्होंने चुनौती दी थी। लेकिन, पटियाला सेशन कोर्ट ने उन्हें झटका देते हुए उनकी सजा को बरकरार रखा।

वर्षों सऊदी अरब में रहा है मोहम्मद जुबैर, ‘हनीमून-हनुमान’ वाला ट्वीट प्लान का हिस्सा: दिल्ली की कोर्ट को बताया, UP में दर्ज FIR रद्द कराने सुप्रीम कोर्ट पहुँचा AltNews का को-फाउंडर

हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाले AltNews के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर (Mohammad Zubair) की अतीत को लेकर सोशल मीडिया पर अक्सर लोग सवाल उठाते रहे हैं। अब यह बात सामने आई है कि वह कई वर्षों तक सऊदी अरब (Saudi Arab) में रहा है।

यह आरोप अभियोजन पक्ष के वकील अतुल श्रीवास्तव ने कोर्ट में लगाया है। वकील का कहना है कि उसके टेलीफोन नंबर से पता चलता है कि वह कई वर्षों तक सऊदी अरब रहा है। हनीमून-हनुमान वाला ट्वीट उसके प्लान का हिस्सा है। उन्होंने यह भी कहा कि जुबैर को पाकिस्तान, सऊदी अरब, सीरिया जैसे देशों से चंदा मिल रहा है।

वहीं, जुबैर के वकील वृंदा ग्रोवर ने किसी भी विदेशी चंदे से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि ना ही व्यक्तिगत रूप से मोहम्मद जुबैर ने और ना ही प्रवदा मीडिया ने विदेश से कोई चंदा लिया है। उन्होंने कहा कि उन्हें सिर्फ भारतीय दानदाताओं से चंदा लिया है और वह भी भारतीय बैंक के खाते में।

इस पर अभियोजन पक्ष के वकील ने कहा, जुबैर ने बहुत ही चतुराई से ‘गुमनाम’ नाम से कई चंदे लिए हैं। कोई दे रहा है और इसे लिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जुबैर ने FCRA का उल्लंघन करते हुए 56,00,000 रुपए लिए हैं। चंदे लेने के दौरान कई तरह की फॉरजरी की गई है।

अर्णव गोस्वामी केस का उदाहरण देते हुए वृंदा ग्रोवर ने कहा, “मैं (जुबैर) एक पत्रकार हूँ। मैं एक फैक्ट चेकर हूँ। मेरे द्वारा कही गई बातें अप्रसन्नता वाली हो सकती हैं। मेरी व्यक्तिगत स्वतंत्रता को कम करना मेरे अधिकार का उल्लंघन होगा।

बता दें कि मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट ने पाया था कि मोहम्मद जुबैर के खिलाफ जाँच अभी शुरुआती चरण में है और उनके खिलाफ गंभीर आरोप हैं। इस मामले में जुबैर की जमानत की याचिका पर अगली सुनवाई शुक्रवार (15 जुलाई 2022) को सुनवाई होगी।

उधर, जुबैर ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका देकर उत्तर पुलिस द्वारा दर्ज की गई 6 FIR को रद्द करने की माँग की है। याचिका में सीतापुर, लखीमपुर खीरी, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद और हाथरस की दो FIR का जिक्र है। याचिका में यह भी कहा गया है कि दिल्ली से बाहर की सी FIR को दिल्ली वाली FIR के साथ क्लब कर दी जाए।

इसके साथ ही याचिका में इन सभी मामलों में सुप्रीम कोर्ट से जमानत की माँग की गई है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया गया है कि इन मामलों की जाँच के लिए यूपी सरकार द्वारा SIT गठन को भी चुनौती दी गई है।

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस इंदिरा बनर्जी और जस्टिस जेके माहेश्वरी के बेंच ने ज़ुबैर को यूपी के सीतापुर मामले में कुछ निश्चित शर्तों के साथ पाँच दिन की अंतरिम बेल दी थी।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश में कहा गया था कि इस दौरान ज़ुबैर ट्वीट नहीं करेगा। इसके साथ ही वह दिल्ली छोड़कर कहीं नहीं जाएगा। हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट से पाँच दिन की अंतरिम जमानत के बाद भी वह अन्य मामलों में पुलिस हिरासत में है।