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इवेंट में आए थे आप के MLA, आम आदमी ने कर दी जलभराव की कंप्लेन तो ईंट से किया हमला: दिल्ली पुलिस ने दर्ज की FIR

आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक पर दो लोगों को पीटने और धमकाने का आरोप लगा है। आरोपित अखिलेश त्रिपाठी दिल्ली के मॉडल टाउन से विधायक हैं। मामले की शिकायत पुलिस में की गई है। पीड़ितों के मुताबिक उन पर हमला क्षेत्र में जलभराव की समस्या की शिकायत करने के चलते हुआ। घटना बुधवार (6 जुलाई 2022) की है। पुलिस ने FIR दर्ज कर के मामले की जाँच शुरू कर दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पुलिस को घटना के दिन शाम लगभग 4:30 पर कॉल आई। मौके पर PCR पहुँची। पुलिस के पहुँचने पर पता चला कि MLA त्रिपाठी ने मुकेश बाबू और गुड्डू हलवाई नाम के 2 लोगों के साथ मारपीट की है। दोनों को जहांगीरपुरी के BJRM अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। गुड्डू हलवाई के मुतबिक ये घटना तब हुई जब वो अशोक विहार थाना क्षेत्र में एक कार्यक्रम में खाने-पीने की सर्विस दे रहे थे।

शिकायत के मुताबिक जिस कार्यक्रम में दोनों पीड़ित मौजूद थे, उसी में आरोपित विधायक भी आए थे। वहीं पर दोनों ने विधायक से अपने क्षेत्र में जलभराव की शिकायत की। इस बात से विधायक नाराज हो गए। उन्होंने कार्यक्रम के दौरान ही गुड्डू हलवाई पर ईंट से हमला कर दिया। गुड्डू को बचाने दौड़े उसके रिश्तेदार महेश को भी पीटा।

पीड़ितों के वायरल हो रहे वीडियो में उन्हें कहते सुना गया, “उनके (विधायक) के साथ 3-4 शैडो (बॉडीगार्ड) थे। वो बोल रहे थे कि जो बनता हो कर लेना। वो खींच कर हमें ले जा रहे थे। उन्होंने कहा कि SHO साला मेरा गुलाम है। लालबाग को मैंने खरीद रखा है।”

पुलिस ने बताया कि गुड्डू हलवाई के सिर पर मामूली चोट आई है, जबकि मुकेश बाबू को कोई बाहरी चोट नहीं आई है। विधायक पर IPC की धारा 323/341 के तहत केस दर्ज कर जाँच की जा रही है। अभी तक किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है।

आप विधायक अखिलेश पति त्रिपाठी ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया है। विधायक ने इसे अपने खिलाफ भाजपा की गंदी साजिश बताते हुए शिकायतकर्ता पर सवाल खड़े किए हैं। विधायक के अनुसार पुलिस ने जिसकी शिकायत पर मेरे खिलाफ FIR दर्ज की है वो नशे में खड़ा भी नहीं हो पा रहा था।

कन्हैया लाल की बर्बर हत्या के विरोध में 16 साल की लड़की ने किया पोस्ट, अलग-अलग नंबरों से कॉल कर दी हत्या की धमकी-गालियाँ

राजस्थान के उदयपुर में कन्हैया लाल की बर्बर हत्या के विरोध में फेसबुक पोस्ट करने को लेकर नाबालिग लड़की को जान से मारने की धमकी मिली है। पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। घटना दक्षिण मुंबई के गिरगाँव की है। यहाँ रहने वाली 16 साल की लड़की ने कुछ दिनों पहले अपने फेसबुक वॉल पर कन्हैया लाल की हत्या को लेकर पोस्ट किया था। इसके बाद उसे 1 जुलाई की देर रात तीन नंबर से कॉल और व्हाट्सएप मैसेज आए।

कॉल करने वालों ने कन्हैया लाल का समर्थन करने पर नाबालिग लड़की को जान से मारने की धमकी और भद्दी-भद्दी गालियाँ दी। कॉल और मैसेज करने का यह सिलसिला अगले कई घंटों तक चलता रहा। जिसके बाद लड़की के पिता ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। लड़की के पिता की शिकायत पर वीपी रोड पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 506 (2) और 509 के तहत मामला दर्ज किया।

एक अधिकारी ने बताया, “हम आरोपितों का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं और उन्हें जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।” रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस को यह भी संदेह है कि ऐसा भी हो सकता है कि एक ही शख्स अलग-अलग नंबरों से कॉल कर रहा हो। साथ ही वह यह भी पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि फोन करने वाले को लड़की का मोबाइल नंबर कैसे पता चला। डीसीपी जोन 2 नीलोत्पल ने कहा कि इसकी जाँच जारी है।

नुपूर शर्मा के समर्थन में पोस्ट करने पर बिहार में युवक पर हमला

बता दें कि हाल ही में बिहार के भोजपुर जिले के आरा थाना क्षेत्र में नुपूर शर्मा के समर्थन में फेसबुक पोस्ट को लेकर दो युवकों में विवाद हो गया और देखते ही देखते मारपीट शुरू हो गई। दीपक नाम के शख्स ने कुछ दिनों पहले नुपूर शर्मा के समर्थन में पोस्ट शेयर किया था, जिस पर रईस नाम के शख्स ने विवादित टिप्पणी की थी। मंगलवार (5 जुलाई 2022) की शाम रईस और दीपक एक चाय की दुकान पर चाय पी रहे थे। इसी बीच फेसबुक पोस्ट को लेकर विवाद होने लगा। दोनों के बीच जमकर मारपीट हुई। फिर रईस अपने साथ करीब 20 से 30 लोगों को ले आया। सभी ने दीपक की पिटाई शुरू कर दी। उनलोगों ने लात-घूँसों से जमकर दीपक को पीटा। फिलहाल पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया है और इलाके में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

28 जून को की गई थी कन्हैया लाल की हत्या

नुपूर शर्मा का समर्थन करने वाला एक पोस्ट सोशल मीडिया पर शेयर करने को लेकर राजस्थान के उदयपुर में  कन्हैया लाल की 28 जून को उनकी दुकान पर गला रेत कर हत्या कर दी गई थी। इससे तकरीबन एक हफ्ते पहले 22 जून को इसी कारण से महाराष्ट्र के अमरावती शहर में केमिस्ट उमेश कोल्हे की हत्या कर दी गई थी।

‘तू काट कर ले आ नूपुर शर्मा की जीभ, ले जा ₹2 करोड़’: सुप्रीम कोर्ट जजों की टिप्पणी के बाद मेवात से हुआ ऐलान, देखिए Video

बीजेपी की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा की लगातार हत्या की धमकी मिल रही है। हरियाणा के मेवात में एक इस्लामवादी ने नूपुर शर्मा की जीभ काटकर लाने वाले को 2 करोड़ रुपए देने की बात कही है। यह धमकी सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की उस टिप्पणी के बाद दी गई है, जिसमें उन्होंने नूपुर शर्मा को कन्हैया लाल की क्रूर हत्या सहित देश भर में इस्लामवादियों द्वारा की गई हिंसा के लिए दोषी ठहराया था।

6 जुलाई को वायरल हुए वीडियो में मेवात में एक इस्लामवादी किसी पत्रकार से बात करते हुए नजर आ रहा है। इस्लामवादी ने इस वीडियो में कहा, “मैं यह पूरे मेवात की ओर से कह रहा हूँ। अगर कोई नूपुर शर्मा की जीभ काटकर मेरे पास लाता है, तो उसे 2 करोड़ रुपए का इनाम दिया जाएगा। 2 करोड़ रुपए पूरी मेवात और मैं दूँगा।” इसके बाद वह पत्रकार पर चिल्लाता है और कहता है, “तू काट कर ले आ नूपुर शर्मा की जीभ, 2 करोड़ रुपए का ऑफर तू ले ले पत्रकार।”

इनाम की घोषणा वाला वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही बवाल मच गया। हालाँकि, पुलिस ने वीडियो को संज्ञान में लेते हुए जाँच शुरू कर दी है। मेवात पुलिस वीडियो क्लिप की जाँच के साथ ही आरोपितों के बारे में भी पता लगा रही है। नूंह के पुलिस अधीक्षक वरुण सिंगला ने कहा, “मामला हमारे पास अभी पहुँचा है। हम आरोपितों की पहचान करने के लिए जाँच कर रहे हैं। हम लोगों से इस तरह के वीडियो और सांप्रदायिक चीजों को न फैलाने की अपील करते हैं।”

गौरतलब है कि वीडियो में दिख रहे इस्लामवादी की ये धमकी सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट ने ​कहा था, “जिस तरह से उन्होंने (नूपुर शर्मा) पूरे देश में भावनाओं को भड़काया है … देश में जो हो रहा है उसके लिए यह महिला अकेले जिम्मेदार है।” हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत ने यह टिप्पणी मौखिक की थी और अपने औपचारिक लिखित आदेश में इसे शामिल नहीं किया था। फिर भी जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जेबी पारदीवाला की अवकाश पीठ ने सुनवाई करते हुए हिंसा के लिए पूरी तरह नूपुर शर्मा को दोषी ठहराया था।

मालूम हो कि इससे पहले 8 जून, 2022 को भीम सेना चीफ नवाब सतपाल तंवर ने नूपुर शर्मा की जीभ काटकर लाने वाले को एक करोड़ रुपए का इनाम देने की घोषणा की थी। यही नहीं भीम सेना ने कानपुर में हुई हिंसा में मुस्लिम दंगाइयों का बचाव करते हुए नूपुर शर्मा पर ही घटना का मास्टरमाइंड होने का आरोप लगाया था।

भीम सेना के संस्थापक और राष्ट्रीय अध्यक्ष सतपाल तंवर ने कहा था, “नूपुर शर्मा ने नबी का अपमान किया है, जिससे करोड़ों मुस्लिम समुदाय के लोग आहत हुए हैं।” यही नहीं इस मामले में सीधा मोदी पर आरोप लगाते हुए भीम सेना के संस्थापक ने कहा था कि मोदी सरकार जान-बूझकर नूपुर शर्मा को गिरफ्तार नहीं कर रही है।

‘मैं ऐसे भारत में नहीं रहना चाहती…’: देवी काली का अपमान करने के बाद धौंस दिखा रही TMC सांसद महुआ मोइत्रा, कहा- करो FIR, कोर्ट में ​मिलूँगी

तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा देवी काली पर दिए गए अपमानजनक बयान को लेकर विवादों में हैं। उन पर एफआईआर दर्ज की गई है। देश भर में उनका विरोध हो रहा। उनके इस बयान से उनकी पार्टी भी पल्ला झाड़ चुकी है। हालॉंकि उनके खिलाफ पार्टी ने किसी तरह का एक्शन नहीं लिया है।

अब महुआ मोइत्रा ने कहा है, “मैं ऐसे भारत में नहीं रहना चाहती, जहाँ सिर्फ भाजपा का पितृसत्तात्मक ब्राह्मणवादी दृष्टिकोण हावी रहेगा और बाकी लोग धर्म के ईर्द-गिर्द घूमते रहेंगे। मैं मरते दम तक अपने बयान का बचाव करती रहूँगी। तुम जितना चाहे FIR दर्ज करवा लो, मैं हर बार इसका कोर्ट में सामना करूँगी।”

उन्होंने NDTV के साथ एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में कहा कि वह बीजेपी को उन्हें गलत साबित करने की चुनौती देती हैं। बंगाल में जहाँ उन्होंने मामला दर्ज करवाया है, वहाँ से 5 किमी के भीतर एक काली मंदिर है, जहाँ देवी की पूजा की जाती है। इसके अलावा TMC सांसद ने उज्जैन के काल भैरव मंदिर और असम के कामाख्या मंदिर का हवाला देते हुए दोनों राज्यों की भाजपा सरकारों को उनके विरोध में हलफनामा दाखिल करने की चुनौती दी। बता दें कि मोइत्रा के खिलाफ एक मामला भोपाल में भी दर्ज किया गया है।

इस बयान को लेकर भाजपा नेता शहजाद पूनावाला ने टीएमसी पर निशाना साधते हुए पूछा है कि अगर TMC वाकई में महुआ मोइत्रा के बयान की निंदा करती है तो उन पर कार्रवाई कब करेगी? वह आदतन अपराधी है। वह पहले भी हिंदू देवी-देवताओं का अपमान कर चुकी हैं। उन्होंने शिवलिंग और चोटीवाला राक्षस जैसा बयान देकर मजाक उड़ाया था।

उल्लेखनीय है कि महुआ मोइत्रा ने मंगलावार (5 जुलाई 2022) को डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘काली’ के पोस्टर को लेकर जारी विवाद के बीच कहा था कि काली के कई रूप हैं। उनके लिए काली का मतलब मांस और शराब स्वीकार करने वाली देवी हैं। हालाँकि टीएमसी ने इस बयान से दूरी बना ली थी और इसकी निंदा की थी। पार्टी ने कहा था कि महुआ मोइत्रा द्वारा दिए गए बयान और माँ काली को लेकर उनके द्वारा अभिव्यक्त किए गए विचार उनके निजी हैं और पार्टी किसी भी सूरत में या किसी भी रूप में इसका समर्थन नहीं करती।

महुआ के बयान के बाद बीजेपी ने टीएमसी सांसद को तुरंत गिरफ्तार करने के लिए शिकायत दर्ज कराई थी। ये शिकायत कोलकाता और महुआ मोइत्रा के संसदीय क्षेत्र कृष्णानगर में की गई थी। वहीं, मध्यप्रदेश के भोपाल में भी महुआ मोइत्रा के खिलाफ धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है। इसके अलावा कानपुर में भी ऐसी शिकायत दर्ज कराई गई है।

इधर माँ काली पर महुआ के बयान के खिलाफ पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता नेता शुभेंदु अधिकारी बुधवार (6 जुलाई 2022) को कोलकाता की सड़कों पर उतरे। उन्होंने कहा कि मोइत्रा के खिलाफ विरोध तब तक जारी रहेगा जब तक वह देवी काली पर अपनी टिप्पणी के लिए माफी नहीं माँगतीं। शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि राज्य भर में मोइत्रा के खिलाफ कई पुलिस शिकायतें दर्ज की गई हैं।

गौरतलब है कि इस विवाद की शुरुआत लीना मणिमेकलई नामक फिल्म मेकर के एक पोस्टर शेयर करने के बाद हुई। लीना ने अपनी डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘काली’ के पोस्ट में माँ काली को सिगरेट पीते दिखाया था। इसके साथ ही उनके हाथ में LGBTQ का झंडा भी थी। पोस्टर के सामने आते ही देश भर में इस पर बहस छिड़ गई।

PFI की जिस रैली में लगे थे भड़काऊ नारे, उस मामले में 31 को केरल हाई कोर्ट ने दी जमानत: हिंदुओं की हत्या की धमकी दी गई थी

कट्टरपंथी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) की रैली में भड़काऊ नारे लगाने के 31 आरोपितों को केरल हाई कोर्ट ने जमानत दे दी है। यह रैली इसी साल मई में अलाप्पुझा जिले में हुई थी। रैली के दौरान हिंदुओं और ईसाइयों के खिलाफ भड़काऊ नारे लगे थे। यह रैली एक नाबालिग का वीडियो सामने आने के बाद काफी चर्चा में रहा था। इस वीडियो में नाबालिग हिंदुओं की हत्या की धमकी दे रहा था।

इस मामले में गिरफ्तार 33 आरोपितों में से 32 को हाई कोर्ट ने 5 जुलाई 2022 को जमानत दी। न्यायमूर्ति बेचू कुरियन थॉमस ने कहा, “आरोप गंभीर प्रकृति के हैं, फिर भी वे सभी 30 दिनों से अधिक समय से जेल में हैं। आरोपितों से संबंधित जाँच पूरी हो गई है, इसलिएउन्हें और समय तक हिरासत में रखना उचित नहीं होगा। इस मामले के दो आरोपित अब भी फरार हैं।” न्यायमूर्ति ने कहा, “ऐसी परिस्थितियों में, मैं इन जमानत अर्जियों को स्वीकार करने के पक्ष में हूँ।”

याचिकाकर्ताओं की ओर से एडवोकेट केएस मधुसूदनन, सनी मैथ्यू और रंजीत बी मारार पेश हुए। उन्होंने कहा कि वे सभी निर्दोष हैं। उन्हें 24 मई से 4 जून के बीच अलग-अलग तारीखों में गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने तर्क दिया कि नारों का गलत अर्थ निकाला जा रहा है। यह अपराध की श्रेणी में नहीं आता है।

वहीं, लोक अभियोजक केए नौशाद ने यह कहते हुए याचिका का विरोध किया कि आरोपित ने राज्य में व्याप्त सद्भाव को नुकसान पहुँचाने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि अगर रैलियों के दौरान इस तरह के नारे लगाने की अनुमति दी जाती है तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। इसके अलावा, अभियोजक ने तर्क दिया कि जाँच अभी भी जारी है और दो आरोपितों को गिरफ्तार किया जाना बाकी है। याचिकाकर्ताओं को जमानत पर रिहा करने से जाँच प्रभावित होगी।

क्या है पूरा मामला

अलाप्पुझा में 21 मई 2022 को पीएफआई द्वारा आयोजित ‘गणतंत्र बचाओ’ रैली के दौरान भड़काऊ नारेबाजी हुई थी। इस रैली में एक नाबालिग बच्चे ने भी हिन्दुओं और ईसाइयों को धमकी दी थी। इसमें उसने कहा था, “चावल तैयार रखो। यम (मृत्यु के देवता) आपके घर आएँगे। यदि आप सम्मानपूर्वक रहते हैं, तो आप हमारे स्थान पर रह सकते हैं। अगर नहीं, तो हम नहीं जानते कि क्या होगा।” उस वक्त इस घटना पर आपत्ति जताते हुए केरल हाई कोर्ट ने टिप्पणी की थी, “इस देश में क्या हो रहा है?” न्यायमूर्ति पीवी कुन्हीकृष्णन ने कहा था कि अगर रैली के किसी सदस्य ने भड़काऊ नारे लगाए हैं, तो इसके लिए रैली का आयोजन करने वाले लोग भी जिम्मेदार थे।

वहीं राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के प्रमुख प्रियांक कानूनगो ने नाबालिग बच्चे का वीडियो सामने आने के बाद कहा था, “इस तरह की गतिविधियों में बच्चों को शामिल करना किशोर न्याय अधिनियम के खिलाफ है। इस मामले में सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। यह एक संज्ञेय अपराध है।”

हिंसा से भरा है पीएफआई का इतिहास

कट्टरपंथी इस्लामिक संगठन PFI का इतिहास उठा कर देखें तो उसमें हिन्दुओं के खिलाफ हिंसा ही भरी मिलती है। दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों और देश भर में हिंसा की जाँच के दौरान, पीएफआई की भूमिका संदिग्ध रही थी। संगठन के लोगों को दंगों में शामिल होने के लिए गिरफ्तार भी किया गया था। इसके अलावा 2020 में कट्टरपंथी इस्लामी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया ने देश के विभिन्न हिस्सों में दंगों और हिंसा के लिए उकसाने के आरोपित किसानों के विरोध को अपना समर्थन दिया और प्रदर्शनकारियों को संविधान के संरक्षण के लिए संघर्ष करने के लिए कहा था।

‘उड़न परी’ PT उषा, कलम के जादूगर राजामौली के पिता, संगीत के मास्टर इलैयाराजा, जैन विद्वान हेगड़े: राज्यसभा के लिए 4 नाम, PM मोदी ने दी बधाई

भारत सरकार ने बुधवार (6 जुलाई 2022) को अलग-अलग क्षेत्रों में बेहतरीन कार्यों के जरिए देश का नाम रौशन करने वाले लोगों को राज्यसभा के लिए मनोनीत करने की सिफारिश की। इनमें पीटी उषा,संगीतकार और गायक इलैयाराजा,लेखक वी विजयेंद्र प्रसाद गारू और समाजसेवी वीरेंद्र हेगड़े शामिल हैं।

इन चारों विख्यात नागरिकों को बधाई देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर सभी को प्रत्येक भारतीय के लिए प्रेरणा का स्त्रोत बताया।

पीटी उषा

भारत की उड़नपरी के नाम से मशहूर पीटी उषा को बधाई देते हुए प्रधानमंत्री ने ट्वीट किया, “पीटी उषा जी हर भारतीय के लिए एक प्रेरणा हैं। खेलों में उनकी उपलब्धियों को व्यापक रूप से जाना जाता है, लेकिन पिछले कई वर्षों में नवोदित एथलीटों का मार्गदर्शन करने के लिए उनका काम उतना ही सराहनीय है। राज्यसभा के लिए मनोनीत होने पर उन्हें बधाई।”

उल्लेखनीय है कि उड़नपरी पीटी उषा ने 1984 के ओलंपिक खेलों में शानदार प्रदर्शन करते हुए चौथा स्थान हासिल किया था। उन्होंने सियोल में हुए एशियाई खेलों में 4 गोल्ड मेडल जीतकर देश का मान बढ़ाया था। इसके अलावा को 400 मीटर की बाधा दौड़, 400 मीटर, 200 मीटर और 4 गुणा 400 मीटर में वो गोल्ड जीत चुकी हैं। इतना ही नहीं उनकी इन उपलब्धियों के लिए उन्हें 1985 में पद्म श्री पुरस्कार भी दिया गया था।

वीरेंद्र हेगड़े

दिगंबर जैन समुदाय से ताल्लुक रखने वाले वीरेंद्र हेगड़े कर्नाटक के धर्माधिकारी रत्नवर्मा हे सबसे बड़े बेटे हैं। वे दक्षिण कन्नड़ स्थित मंजुनाथ स्वामी मंदिर ट्रस्ट के आनुवांशिक ट्रस्टी हैं। भले ही वो जैन हैं, लेकिन बावजूद इसके वो कई हिन्दू मंदिरों के ट्रस्टी हैं।

इतना ही नहीं उन्हें जैनों की 600 साल पुरानी परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए जाना जाता है। धर्मस्थलों से संबद्ध हाईस्कूल प्रति वर्ष नैचुरोपैथी, योग और नैतिक शिक्षा में 30000 से अधिक छात्रों को शिक्षा देते हैं।

उन्हें राज्यसभा के लिए मनोनीत किए जाने पर बधाई देते हुए पीएम मोदी ने ट्वीट किया, “वीरेंद्र हेगड़े जी उत्कृष्ट सामाजिक सेवा में सबसे आगे हैं। मुझे धर्मस्थल मंदिर में प्रार्थना करने और स्वास्थ्य, शिक्षा और संस्कृति के क्षेत्र में उनके द्वारा किए जा रहे महान कार्यों को देखने का अवसर मिला है। वह निश्चित रूप से संसदीय कार्यवाही को समृद्ध करेंगे।”

विजयेंद्र गारू

मशहूर लेखक विजयेंद्र प्रसाद गारू की प्रशंसा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “उनके काम भारत की गौरवशाली संस्कृति को प्रदर्शित करते हैं और विश्व स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। राज्यसभा के लिए मनोनीत होने के लिए उन्हें बधाई।”

गौरतलब है कि गारू बाहुबली, आरआरआर, बजरंगी भाईजान, मणिकर्णिका जैसी कई फिल्मों के लिए स्टोरी लिख चुके हैं। उन्हें फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिल चुका है।

इलैयाराजा

तमिल फिल्मों के मशहूर संगीतकार इलैयाराजा को भी राज्यसभा के लिए मनोनीत किया गया है। उन्हें बधाई देते हुए पीएम ने कहा, “उनकी कृतियाँ अनेक भावनाओं को खूबसूरती से दर्शाती हैं। उनकी जीवन यात्रा भी उतनी ही प्रेरक है-वह एक विनम्र पृष्ठभूमि से उठे और बहुत कुछ हासिल किया। खुशी है कि उन्हें राज्यसभा के लिए नामांकित किया गया है।”

इलैयाराजा को पश्चिमी संगीत को दक्षिण भारतीय फिल्मों में फेमस करने के लिए जाना जाता है। वो अब तक 1400 से अधिक फिल्मों के 7000 से अधिक गानों को संगीतबद्ध कर चुके हैं।

‘आर्यभट्ट पर कोई फिल्म नहीं, उन्होंने मुगलों पर बनाई मूवी’: बोले फिल्म ‘रॉकेट्री’ के डायरेक्टर आर माधवन – नंबी का योगदान किसी को नहीं पता

आर माधवन की फिल्म ‘रॉकेट्री : द नांबी इफेक्ट’ (Rocketry: The Nambi Effect) बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा रही है। 1 जुलाई, 2022 को रिलीज हुई इस फिल्म को पूरे देश में पॉजिटिव रिस्पॉन्स मिल रहे हैं। फिल्म में मुख्य किरदार निभाते हुए आर माधवन ने ISRO के क्रायोजेनिक्स के पूर्व प्रमुख नांबी नारायणन की भूमिका निभाई है। बता दें कि 1994 में कॉन्ग्रेस के दौर में नंबी नारायणन पर जासूसी का झूठा आरोप लगाया गया, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। लेकिन चार साल बाद, सुप्रीम कोर्ट ने उनके खिलाफ सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था।

वहीं इस फिल्म से इंडस्‍ट्री में आर माधवन ने एक्टिंग के अलावा राइटिंग और डायरेक्‍शन में भी कदम रखा है। माधवन इसमें वैज्ञानिक नंबी नारायण की भूमिका निभाई है। इस फिल्म को लेकर माधवन ने लम्बी बातचीत की है। जिसमें उन्होंने बॉलीवुड में फिल्म मेकिंग के ढर्रे पर टिप्पणी भी की है।

दैनिक भास्कर से बात करते हुए माधवन इस फिल्म को अपना राष्ट्रीय कर्तव्य बताते हैं। माधवन बात करते हुए कहते हैं, “ऐसी फिल्‍में और नंबी नारायण जैसों पर फिल्‍म बनाना एक नेशनल ड्यूटी है। हालाँकि, यह थॉट फिल्‍म बनाने से पहले नहीं आया था। वह इसलिए कि मैं तो इसमें बस एक्‍ट करने वाला था। फिल्‍म को डायरेक्‍ट करने वाले काम पर तो मैं बहुत लेट आया। मैंने नंबी नारायण पर रिसर्च कर जाना कि इनकी कहानी दुनिया को पता चलनी ही चाहिए।”

आगे फिल्म को कई भाषाओं में बनाने की बात पर माधवन ने जवाब दिया, “लोगों को शायद पता ना हो, मगर नंबी नारायण इंडिया से ज्‍यादा फ्रांस में पॉपुलर हैं। वहाँ उनके कम्‍युनिकेशन की लैंग्‍वेज इंग्लिश थी। ऐसे में मैं अगर सिर्फ तमिल और इंग्लिश में यह फिल्‍म बनाता तो वह एक तरह का मैनिपुलेशन होता। लिहाजा हमने इसे तीन लैंग्‍वेज हिंदी, इंग्लिश और तमिल में बनाया।”

माधवन बहुत गर्व से आगे बताते हैं, “बॉर्डर पर लड़ने वाले देशभक्‍तों की कहानी तो सब जानते हैं। हमारे बीच ऐसे देशभक्‍त भी हैं, जो रोजाना अपनी जान जोखिम में डालते हैं। यह जानते हुए कि उनके बारे में कोई कभी नहीं लिखेगा। नंबी नारायण वैसे ही गुमनाम हीरो हैं।”

वहीं फ्री प्रेस जर्नल को दिए इंटरव्यू में जब माधवन से सवाल पूछा जाता है कि क्या आपको लगता है कि भारतीय सिनेमा ने अभी तक एयरोस्पेस जॉनर की खोज नहीं की है?

इस प्रश्न के जवाब में माधवन ने कहा, “भारतीय फिल्म निर्माता इस तरह की विशिष्ट शैली में फिल्में बनाने के लिए उस तरह की पृष्ठभूमि के साथ नहीं आएंगे। यह बजट के बारे में बिल्कुल नहीं है। अगर आप राज कपूर परिवार या सत्यजीत रे परिवार से आते हैं, तो आप इस तरह की फिल्में ही बना रहे हैं। आर्यभट्ट पर कोई फिल्म नहीं बनाना चाहता था। इसके बजाय, उन्होंने मुगल-ए-आज़म बनाया, और इसमें कुछ भी गलत नहीं है। कहानीकारों का भारत में वैज्ञानिक झुकाव नहीं है, जिसने एक बड़ा अंतराल पैदा किया है। जब मैं फिल्मों में आया तो बहुत से लोगों ने मुझसे पूछा कि अगर मैं इंजीनियर हूँ तो मैं अभिनेता क्यों बन रहा हूँ? रॉकेट्री: नांबी इफेक्ट अभी शुरुआत है।”

माधवन ने नम्बी नारायण पर फिल्म बनाना क्यों चुना? इस पर बात करते हुए बताया कि नम्बी नारायण का अंतरिक्ष में भारत की तरक्‍की में जो योगदान है, उस बारे में किसी को ज़्यादा नहीं पता। मालूम है तो बस उनसे जुड़ी कंट्रोवर्सी कि उनका तो अफेयर था और उन्‍होंने दुश्‍मन देश को भारत की गुप्‍त बातें लीक कर दीं। जबकि भारत के रॉकेटों के प्रक्षेपण उनके बनाए इंजन की वजह से होते हैं। लिहाजा मैंने उन पर फिल्म बनाना तय किया।

फिल्म की एक और खास बात ये है कि फिल्म में सिर्फ नम्बी नारायण का महिमामंडन नहीं है। बल्कि आर माधवन नम्बी नारायण की खामियों पर भी जोर देते हुए कहते हैं, “दर्शकों को जब तक उनकी खामियों के बारे में नहीं बताता, तब तक उनकी अचीवमेंट भी लोगों को समझ नहीं आती। मैं खुद नहीं समझ पाया कि बॉलीवुड में करोड़ों की मेगाबजट फिल्‍में मुगलों और बाकियों पर बनती रही हैं, मगर विज्ञान और वैज्ञानिकों के विषय पर हमारा बॉलीवुड दूर रहा है। हॉलीवुड वाले साइंस पर बेस्‍ड ‘इंटरस्‍टेलर’ वगैरह बनाते हैं तो लोग खुश हो जाते हैं।”

वहीं फिल्म में नम्बी नारायण के हस्तक्षेप के सवाल पर माधवन कहते हैं कि एक तो नंबी नारायण खुद सेट्स पर नहीं रहते थे। अगर रहते भी तो सिर्फ इसलिए कि साइंस वाला पार्ट सही से शूट हो। माधवन ने फिल्म में नम्बी नारायण के द्वारा किसी भी तरह के अनावश्यक हस्तक्षेप से इनकार किया है।

‘आतंक को नहीं सहेंगे, सब हिन्दू एक रहेंगे’: उदयपुर-अमरावती की घटनाओं के विरोध में हिन्दुओं ने बुलाया पाली बंद, हनुमान चालीसा का पाठ

बीजेपी से निलंबित चल रहीं नूपुर शर्मा के कथित बयान को लेकर राजस्थान के उदयपुर में हिन्दू कन्हैयालाल और महाराष्ट्र के अमरावती में उमेश कोल्हे की हत्या के विरोध में अब हिन्दू संगठन खड़े हो गए हैं। इसी क्रम में बुधवार (6 जुलाई 2022) को सर्व हिन्दू समाज की ओर से पाली बंद आह्वान किया गया।

इस मौके पाली जिले (राजस्थान) सूरजपोल चौराहे पर हजारों की तादात में हिन्दुओं ने रैली निकाली और कलेक्ट्रेट पहुँचे। रिपोर्ट के मुताबिक, इस रैली में करीब 4-5 हजार लोग शामिल थे। रैली के दौरान संत सुरजनदास, संत ओम महाराज 72 फीट बालाजी, संत परशुराम और संत रामविचार के नेतृत्व में पाँच बार सामूहिक हनुमान चालीसा का पाठ किया गया। इस मौके पर संतों ने कॉन्ग्रेस पार्टी पर इस्लामिक हत्याएँ करने वालों का संरक्षण करने का आरोप लगाया।

रैली के दौरान लोगों ने अपने हाथ में तख्तियाँ ले रखी थी। इसमें लिखा था, आतंक को नहीं सहेंगे, सब हिन्दू एक रहेंगे। उसके साथ ही जय श्री राम के नारे भी लगाए गए। कलेक्ट्रेट में संतों ने जिलाधिकारी नमित मेहता से मिलकर राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन सौंपा। गौरतलब है कि इससे पहले मंगलवार को सर्व समाज की बैठक में 65 समाजों के 850 से भी अधिक लोग मौजूद रहे। इसके अलावा इस बंद को बार एसोसिएशन, ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन और पाली जिला केमिस्ट एसोसिएशन ने सपोर्ट किया।

राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन में हिन्दू समाज में गहलोत सरकार को बर्खास्त कर प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाने, पीएफआई को बैन करने, मृतक के परिवार को मुआवजा और सुरक्षा देने, देश विरोधी तत्वों पर कार्रवाई करने और उदयपुर-अमरावती जैसी घटनाओं को अंजाम देने वालों को फाँसी देने की माँग की गई है।

इसके अलावा इस रैली में बीजेपी के जिलाध्यक्ष मंशा राम परमार, बीजेपी महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष मनोहर कंवर, विधायक ज्ञानचंद परमार समेत कई नेता भी शामिल रहे।

कन्हैया लाल की पत्नी को ₹1 करोड़, उमेश कोल्हे के परिवार को ₹30 लाख: कपिल मिश्रा के आह्वान पर हिंदुओं ने जुटाया था चंदा

राजस्थान के उदयपुर जिले में कन्हैयालाल की जघन्य हत्या के बाद उनके लिए फंड जुटाने वाले बीजेपी नेता कपिल मिश्रा ने आज बुधवार (6 जुलाई, 2022) को उनके परिवार के नाम एक करोड़ की राशि ट्रांसफर कर दी। साथ ही उन्होंने कहा कि कल अमरावती के उमेश कोल्हे के परिवार से मिलकर 30 लाख रुपए की सहायता राशि दूँगा एवं आगे की कानूनी लड़ाई में भी साथ देने का वादा किया।

इस बात की जानकारी उन्होंने ट्विटर पर दो अलग-अलग ट्वीट के जरिए दी। पहले ट्वीट में उन्होंने लिखा, “कन्हैया लाल जी की धर्मपत्नी के खाते में आपके दिए एक करोड़ रुपए पहुँच गए हैं।” जिसका उन्होंने स्क्रीनशॉट भी साझा किया।

दूसरे ट्वीट में कपिल मिश्रा ने महाराष्ट्र के अमरावती के उमेश कोल्हे के पपरिवार को सहायता राशि देने के बारे में जानकारी देते हुए लिखा, “कल अमरावती में उमेश कोल्हे जी के परिवार से मिलूँगा। हम उनके परिवार को ₹ 30 लाख की सहायता दे रहे हैं। कानूनी लड़ाई में भी हमेशा साथ खड़े रहेंगे।”

बता दें कि कन्हैयालाल और उमेश कोल्हे दोनों की हत्या बीजेपी की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा के समर्थन के कारण कट्टरपंथी मुस्लिमों द्वारा कर दी गई थी। दोनों मामलों की जाँच NIA कर रही है। इसी बीच पिछले शनिवार को जब कपिल मिश्रा कन्हैयालाल के परिवार से मिलने पहुँचे तभी उन्होंने उनके परिजनों से मुलाकात के बाद उन्हें एक करोड़ रुपए सहायता राशि देने की घोषणा की थी। इस दौरान कपिल मिश्रा ने मृतक के बेटे सहित उनके पत्नी और बहिनों से भी मुलाकात की थी। करीब 20 मिनट की मुलाकात के दौरान कपिल मिश्रा ने कहा था कि कन्हैयालाल के बलिदान को भुलाया नहीं जा सकता, लेकिन उनकी सहायता कर उनके परिवार के बोझ को कम किया जा सकता है।

बता दें कि कपिल मिश्रा ने मृतक कन्हैयालाल के घर पर मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए हत्या करने वाले लोगों को चुनौती देते हुए कहा कि जिन लोगों ने हत्या की है, वे लोग न तो हरा सकते और न ही डरा सकते है। जब-जब देश में आंतक का साया रहा है तब-तब लोगों ने डटकर मुकाबला किया है। कपिल मिश्रा ने कन्हैयालाल के परिवार से भी मिलकर कहा था कि न तो उनके परिवार को कभी अकेला पड़ने देगें न ही कमजोर पड़ने देगें।

गौरतलब है कि कपिल मिश्रा ने कन्हैयालाल के परिवार को सहयोग करने के बारे में बताते हुए कहा कि कन्हैयालाल के परिवार के लिए देश ही नहीं बल्कि कई अन्य देशों से 14 हजार से ज्यादा लोगों ने छोटी-छोटी राशि प्रदान की है। एक करोड रूपए का लक्ष्य रखा गया था लेकिन अभी तक एक करोड 70 लाख रूपए इकठ्ठा हो चुका है। इसलिए कन्हैयालाल के साथ-साथ अन्य लोगों को भी सहायता राशि प्रदान की जाएगी।

बता दें कि लगातार हिन्दुओं की मदद करने वाले बीजेपी नेता कपिल मिश्रा को भी हाल ही में जान से मारने की धमकी दी गई है। हिंदू सेना के दिल्ली चैप्टर के अध्यक्ष दीपक मलिक ने भी इस्लामी कट्टरपंथियों से धमकी मिलने की शिकायत पुलिस से की है।

मिश्रा को धमकी भरा ई-मेल भेजा गया है। मिश्रा ने इस मेल का स्क्रीनशॉट ट्विटर पर साझा किया है। ईमेल करने वाले अकबर आलम ने लिखा है, “कपिल मिश्रा आतंकवादी तुमको ज्यादा दिन तक जीने नहीं देंगे। मेरे आदमी ने प्लान बना लिया है तुमको गोली मारने के लिए।” यह ईमेल रविवार (3 जुलाई 2022) शाम 7:48 पर भेजा गया था।

हिन्दुओं पर ‘जूते चलाने’ की बातें, मीम का फैक्ट चेक, 4 जिलों में दंगे लेकिन पीछा अमन चोपड़ा का: चिश्ती को बचाने वाली राजस्थान पुलिस, कन्हैया लाल को नहीं दी थी सुरक्षा

राजस्थान पुलिस लोगों के निशाने पर है। कारण ये है कि वो एक ऐसे मुस्लिम कट्टरपंथी को बचा रही है, जिसने एक महिला की गर्दन पर इनाम रखा है। वो एक ऐसे मुस्लिम कट्टरपंथी को बचा रही है, जो अजमेर के ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती दरगाह का खादिम है। वो एक ऐसे मुस्लिम कट्टरपंथी को बचा रही है, जिसके ऊपर पहले से 13 मामले दर्ज हैं और जो हिस्ट्रीशीटर है। अब भला क्यों न उस पर इस्लामी कट्टरवादियों का साथ देने का आरोप लगाया जाए?

राजस्थान पुलिस का एक नया वीडियो वायरल हुआ है। इसमें वो सलमान चिश्ती से कहते दिख रही है, “बेफिकर रह, सब बात हो गई है।” आखिर एक हिस्ट्रीशीटर अपराधी से पुलिस के इस प्रेम का क्या कारण हो सकता है? यही कि राजस्थान में मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए कुख्यात कॉन्ग्रेस पार्टी की सरकार है? यही कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की पूरी सियासत ही हर एक घटना के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को जिम्मेदार ठहराने पर टिकी हुई है।

राजस्थान पुलिस का वायरल वीडियो: सलमान चिश्ती से कहा – बोल देना नशे में था

राजस्थान पुलिस का एक नया वीडियो वायरल हो रहा है, जिसके बाद उस पर इस्लामी कट्टरवादियों से मिले होने के आरोप लगाए जा रहे हैं। इसमें राजस्थान पुलिस सलमान चिश्ती को गिरफ्तार कर के ले जा रही है। साथ ही ‘आ जाओ’ की आवाजें आ रही हैं। वीडियो में कोई कहता है, “हम साथ में ही हैं, चिंता मत कर।” इसमें पुलिस वाले ‘चलो-चलो, बेफिकर रह’ भी कह रहे हैं। साथ ही पूछते हैं, “कौन सा नशा कर रखा था वीडियो बनाते समय?”

इसके बाद पुलिस वाले सलमान चिश्ती को सलाह देते हैं कि बोल देना, नशे में था। राजस्थान पुलिस ने अपने बयान में भी कहा था कि खादिम भड़काऊ बयान देने वक्त नशे में था। अजमेर पुलिस बार-बार जोर दे रही है कि वो नशे में था। भाजपा नेता तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने इसे सीएम अशोक गहलोत का हिन्दू विरोधी चेहरा का सबूत करार दिया। उन्होंने वीडियो साझा करते हुए बताया कि खादिम सलमान चिश्ती कह रहा है कि वो नशा नहीं करता, लेकिन इसके बावजूद राजस्थान पुलिस उससे कहती है, “बोल देना नशे में था, ताकि बचाया जा सके।”

एक महिला की गर्दन पर इनाम रखने वाले व्यक्ति के साथ राजस्थान पुलिस की इस मिलीभगत के बाद कॉन्ग्रेस के मुस्लिम तुष्टिकरण पर भी सवाल उठ रहे हैं। अजमेर में ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती के दरगाह के खादिमों का शासन चलता है या फिर कानून का? एक और खादिम सैयद सरवर चिश्ती खुलेआम भारत को हिला देने की धमकी दे रहा है और कह रहा है कि अजमेर के दुकानदार खाते दरगाह की हैं और नूपुर शर्मा के समर्थन में दुकानें बंद रखते हैं, उनके साथ क्या सलूक हो। इन भड़काऊ बयानों पर क्या कार्रवाई होगी, जब गर्दन काटने वाले बयान को भी हल्के में लिया जा रहा।

‘नशे की हालत’ में क्यों अटकी है राजस्थान पुलिस? खादिम अपराध करेगा तो सज़ा क्यों नहीं पाएगा?

धमकी वाला वीडियो वायरल होने और काफी दबाव के बाद आखिरकार अजमेर पुलिस ने मंगलवार (5 जुलाई ,2022) रात उसे उसके घर से गिरफ्तार कर लिया। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) विकास सांगवान ने भड़काऊ बयान देने के आरोप में उसकी गिरफ्तारी की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि आपत्तिजनक वीडियो सामने आने के बाद उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज किया गया था। गिरफ्तारी के बाद उससे पूछताछ की जा रही है। उन्होंने भी कहा, “ऐसा लगता है कि वीडियो बनाते समय वह नशे की हालत में था।”

उल्लेखनीय है कि वीडियो वायरल होने के बाद सलमान चिश्ती के खिलाफ अजमेर के अलवर गेट थाने में मुकदमा दर्ज किया था। इसके बाद एएसपी विकास सांगवान ने कहा था कि उसकी तलाश की जा रही है। कश्मीर में उसका लोकेशन मिलने की बात कही जा रही है। एफआईआर के बाद भी एएसपी ने कहा था, “वीडियो में सलमान चिश्ती नशे की हालत में नजर आ रहा है।” ये हाल उस पुलिस का है, जहाँ गर्दन कट चुकी है जिहाद के नाम पर हाल ही में। उदयपुर की घटना से देश उबरा नहीं है।

जहाँ कुछ ही दिन पहले नूपुर शर्मा को बहाना बना कर ही किसी आम हिन्दू का सिर कलम कर दिया गया हो, वहाँ इसी तरह की धमकी को गंभीरता से न लिया जाना और इस पर कार्रवाई की बजाए धमकीबाज का बचाव करना उस पुलिस के बारे में क्या कहता है? पुलिस को पता है, कल को किसी और की भी गर्दन कट जाती है तो राज्य की कानून-व्यवस्था देखने वाले गृह मंत्रालय सँभालने वाले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ये कह कर इतिश्री कर लेंगे कि प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री देश को सम्बोधित करें। फिर पुलिस कहेगी ये मजहब का मामला नहीं, जबकि गर्दन काटने वाला मजहब की बातें करते हुए ऐसा करेगा।

मीम का फैक्ट चेक करने वाली पुलिस से और भला क्या उम्मीद करे जनता?

ध्यान दीजिए, ये वही राजस्थान पुलिस है जिसकी रुचि गर्दन काटने की धमकी देने वालों को बचाने में तो है ही, साथ-साथ मीम का फैक्ट चेक करने में भी है। आखिरकार बहुत समय जो है इनके पास। जिस राजस्थान के जैसलमेर में पिछले 5 दशक से एक मौलवी गाजी फकीर की सामानांतर सत्ता चल रही हो और जिसका बेटा अशोक गहलोत सरकार में मंत्री हो, उस राजस्थान में पुलिस इस्लामी कट्टपंथियों पर कार्रवाई कैसे करेगी? जिस राजस्थान की सीमा आतंकी मुल्क पाकिस्तान से लगती हो, उस संवेदनशील इलाके में पुलिस का इस तरह का व्यवहार ‘टुकड़े-टुकड़े’ गिरोह को उत्साहित ही करेगा।

राजस्थान पुलिस और मीम पर आते हैं अब। इससे अंदाज़ा लगता है कि ये पुलिस कितनी गंभीर है, कितनी सजग है और इसके पास कितना दिमाग है। कन्हैया लाल का गला काटने वाले मोहम्मद रियाज अख्तर और मोहम्मद गौस की गिरफ़्तारी के बाद एक पत्रकार ने दोनों हत्यारों की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा कि राजस्थान की जेल में इन्हें बिरयानी परोसी जाएगी, अगर उत्तर प्रदेश होता तो? राजस्थान पुलिस फटाक से इसका फैक्ट चेक करने उतर गई।

राजस्थान पुलिस ने लिखा कि ये तथ्य गलत हैं, आरोपित बख्शे नहीं जाएँगी। सबसे बड़ी बात तो ये कि इसे उसने ‘फेक न्यूज़ अलर्ट’ की श्रेणी में डाल दिया। साथ ही ‘Fake’ का ठप्पा भी लगा दिया। असल में ये एक कहावत की तरह लिखा गया था। 26/11 मुंबई हमलों में पकड़े गए आतंकी अजमल कसाब ने कई वर्षों तक जेल में बिरयानी खाई और उसे 4 साल बाद फाँसी हुई, इसीलिए धीमी न्यायिक व्यवस्था और जेल में अपराधियों-आतंकियों को मिले वाली सुविधाओं को निशाना बनाते हुए बिरयानी वाला तंज कसा जाने लगा।

किसी के विचार को, किसी के तंज को या फिर किसी के द्वारा भविष्य के लिए लगाई गई किसी अटकल को राजस्थान पुलिस ही फैक्ट-चेक कर सकती है। अब भविष्य में उस जेल में कभी बिरयानी बनती है जिसमें दोनों हत्यारों को रखा गया है, तो क्या राजस्थान पुलिस झूठी नहीं हो जाएगी? अगर मैं कहता हूँ कि राजस्थान पुलिस की कार्रवाई ऊँट के मुँह में जीरा के बराबर है, तो क्या वो मेरा फैक्ट-चेक कर के ये बोलेगी कि ये फेक न्यूज़ है, हमारी कार्रवाई ऊँट के मुँह में जीरा नहीं, कद्दू के बराबर है?

कन्हैया लाल के बार-बार आग्रह के बावजूद नहीं दी सुरक्षा: लापरवाह राजस्थान पुलिस, हिन्दू का हो गया सिर कलम

मीम का फैक्ट चेक करने वाली और एक महिला की गर्दन उड़ाने की धमकी देने वाले को बचाने वाली राजस्थान पुलिस ने अगर कन्हैया लाल की शिकायत और आग्रह पर जरा सा भी ध्यान दिया होता तो एक निर्दोष टेलर का सिर कलम नहीं हुआ होता। ये आरोप हमारे नहीं, कन्हैया लाल के परिजनों और इस घटना के चश्मदीद के हैं। कन्हैया लाल की शिकायत पर पुलिस ने जैसा रवैया दिखाया था उसके कारण चश्मदीद राजकुमार को प्रशासन की ओर से किए गए सुरक्षा के वादों पर भी नहीं भरोसा हो रहा है।

राजकुमार ने बताया था, “मास्टर जी (कन्हैया लाल) ने जब अपनी जान को खतरा बताया था तब पुलिस ने उन्हें 2 दिन की सुरक्षा दी थी। बाद में पुलिस ने CCTV लगवाने की सलाह देते हुए सुरक्षा हटा ली थी।” इसके बाद कन्हैया लाल ने 16 जून को दुकान में कैमरे भी लगवा लिए थे। हत्यारों ने दुकान में घुसने से पहले ही CCTV का कनेक्शन काट दिया था। अब उन्हें अपनी जान का ख़तरा सता रहा है, क्योंकि उनका कहना है कि राजस्थान पुलिस ने कुछ ऐसा ही भरोसा कन्हैया लाल को भी दिया था।

मीडिया रिपोर्ट्स से तो यहाँ तक पता चला था कि कन्हैया लाल की पत्नी का कहना था कि उनका पूरा परिवार खतरे में है, लेकिन घर के बाहर एक कॉन्स्टेबल तक की तैनाती नहीं है। कन्हैया लाल की पत्नी जसोदा देवी ने मुख्य सचिव उषा देवी से परिवार की सुरक्षा की गुहार लगाई थी। वहीं आरोपित रियाज के आसींद स्थित घर के बाहर राजस्थान पुलिस ने कड़ा पहरा लगा रखा था। रियाज के परिवार के अन्य सदस्यों के घर के बाहर भारी पुलिस बल की तैनाती थी।

याद रखिए, ये वही राजस्थान पुलिस है जिसने कन्हैया लाल को सुरक्षा देने की बजाए उलटा उन्हें गिरफ्तार कर लिया था और धमकियों के बाद ‘सुलह’ करवाने का दवा किया था। उनकी हत्या के बाद परिजन जिस श्मशान घाट में अंतिम संस्कार करने जा रहे थे, वहाँ ले जाने में भी राजस्थान पुलिस ने आनाकानी की। पड़ोसी कन्हैया लाल की फोटो बाँट रहे थे, उनकी रेकी हो रही थी और इतने गंभीर मामले में कार्रवाई की बजाए ये पुलिस ‘समझौता’ करा रही थी।

जब राजस्थान में हो रहे थे हिन्दू विरोधी दंगे, तब राजस्थान पुलिस ने पीड़ित हिन्दुओं को ही बनाया निशाना

राजस्थान में हाल ही में एक के बाद एक दंगे हुए, लेकिन पुलिस सोई रही और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कहते रहे कि यहाँ तो कुछ हुआ ही नहीं है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने इस तरफ इशारा भी किया कि दंगों की आग में जलते राजस्थान में सीएम गहलोत ने वास्तविकता स्वीकार नहीं की। करौली में दंगे हुए, भीलवाड़ा में मुस्लिम भीड़ पर उत्पात मचाने के आरोप लगे और जोधपुर भी सांप्रदायिक दंगों की आग में जला, लेकिन एक SIT का गठन कर इतिश्री कर ली गई।

करौली में हिन्दू नववर्ष की शोभा यात्रा पर हमले के बाद जिस तरह से हिंसा हुई, उसके बाद राजस्थान पुलिस पर उलटा हिन्दुओं पर ही कार्रवाई के आरोप लगे। स्थानीय लोगों ने बताया था कि कैसे रामनवमी से 2 दिन पहले करौली के DM और SP ने सभी धर्मों के प्रतिनिधियों की एक सभा बुलाई और इस सभा में हिन्दुओं के लिए तमाम नियम और प्रतिबंध लगा दिए गए, शोभा यात्रा का रूट बदलवा दिया गया। एक हिन्दू ने बताया कि SP बार-बार कह रहे थे कि अगर रामनवमी जुलूस में 5 से अधिक लोग शामिल हुए तो जूते से मारूँगा।

ये भाषा है हिन्दुओं के लिए राजस्थान पुलिस की, जो मुस्लिम धमकीबाज को बचाने में दिन-रात एक कर रही है। भाजपा सांसद ने देखा कि मुस्लिमों की छतों पर पत्थर जमा के, लेकिन FIR चुन-चुन कर हिन्दुओं पर करने के आरोप लगे। हिन्दुओं का कहना है कि उन पर झूठे चार्ज लगाने के कारण कइयों की पढ़ाई-नौकरी बंद है तो कई घर से भाग कर रहने को मजबूर हैं। हिन्दू बच्चों के माता-पिता डरे हुए हैं और हिंदुत्व की बात करने वालों को निशाना बनाए जाने के आरोप लगे हैं।

जोधपुर में एक बार नहीं, कई बार दंगे हुए। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के गृह जिले में जून के पहले हफ्ते में ईंट-पत्थर जम कर चले। इससे पहले 2 मई को (ईद के मौके पर) भी जोधपुर में अल्लाह-हू-अकबर के नारों के साथ हिंसा हुई थी। स्वतंत्रता सेनानी बिस्सा जी की प्रतिमा पर कट्टरपंथी मुस्लिम इस्लामी झंडे लगा रहे थे, जिसका विरोध करने पर मुस्लिम भीड़ ने तलवार, सरिया, लाठी और तेजाब की बोतलों के साथ हमला बोल दिया।

करौली, जोधपुर और भीलवाड़ा के बाद अब राजस्थान के हनुमानगढ़ में साम्प्रदायिक तनाव की घटना हुई। वहाँ मंदिर के पास खड़ी लड़कियों से छेड़छाड़ से मना करने पर उनके ऊपर हमला किया गया। इससे पहले राजस्थान के भीलवाड़ा में हिंदू युवक की हत्या को अंजाम दिया गया था। अगले दिन हनुमानगढ़ में VHP नेता पर हमला हुआ। इन घटनाओं के दौरान पुलिस क्या कर रही थी? कितने दंगाइयों को पकड़ा गया? या फिर कार्रवाई के बिना दंगाइयों और जिहादियों का मनोबल बढ़ता चला गया?

इस्लामी जिहादियों पर कार्रवाई के लिए समय कहाँ? पत्रकारों की प्रताड़ना में लगी है राजस्थान पुलिस

राजस्थान की पूरी की पूरी सरकारी मशीनरी किस तरह हाथ धो कर ‘न्यूज़ 18’ के पत्रकार अमन चोपड़ा के पीछे पड़ी थी, ये हमने देखा। अदालत से राहत मिलने के बावजूद उनके घर पहुँच कर उन्हें गिरफ्तार करने का प्रयास किया गया। मीडिया चैनल के दफ्तर में राजस्थान पुलिस ने धावा बोल दिया। अलवर में मंदिर गिराए जाने पर शो करने पर उनके साथ ये सब हुआ। नोएडा तक पहुँच गई उनके लिए राजस्थान पुलिस। 6 घंटे पूछताछ के नाम पर खाना-चाय तक उन्हें नहीं लेने दिया गया। काश, इतना समय और संसाधन इस पुलिस ने दंगाइयों को पकड़ने में लगाया होता तो एक के बाद एक दंगे और हत्याएँ नहीं होतीं!

वहीं अगर अपराधी एक मौलवी हो तो राजस्थान में क्या होता है? उदयपुर में कन्हैया लाल की हत्या से पहले जिस मौलाना नदीम ने राजस्थान में भड़काऊ बयानबाजी की थी, उसे गिरफ्तारी के बाद सिर्फ 24 घंटों में जमानत मिल गई। समझिए, अदालत में किस तरह से राजस्थान पुलिस ने इस केस को रखा होगा। राजस्थान पुलिस ने भड़काऊ बयान देने के 28 दिन बाद दबाव में उसे गिरफ्तार किया था। उसने कहा था, मेरे नबी की शान में एक लफ्ज भी बोला तो याद रखो कि जुबान काट ली जाएगी। हाथ उठाओगे तो हाथ काट लिए जाएँगे। ऊँगली उठाओगे तो ऊँगली काट ली जाएगी। अगर निगाहें भी उठीं तो निकाल कर बाहर फेंक देंगे।”