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‘आपसी सहयोग कोरोना के दुष्प्रभावों से वैश्विक अर्थव्यवस्था को बचाएगा’: BRICS की बैठक में बोले पीएम मोदी, दुनिया के 16% व्यापार को कंट्रोल करता है संगठन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने गुरुवार (23 जून 2022) को ब्रिक्स (BRICS) देशों की मीटिंग को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि कोरोना का संकट भले ही टल गया हो, लेकिन वैश्विक अर्थव्यवस्था में इसके दुष्प्रभाव अभी भी दिख रहे हैं। ब्रिक्स के सदस्य देशों का वैश्विक अर्थव्यवस्था के गवर्नेंस के लिए समान दृष्टिकोण है। इसलिए सदस्यों का आपसी सहयोग आर्थिक सुधार में उपयोगी योगदान दे सकता है।

पीएम मोदी ने कहा कि पिछले सालों में हमने ब्रिक्स में कई संस्थागत सुधार किए हैं जिससे इस संगठन की प्रभावशीलता बढ़ी है। हमारी न्यू डेवलपमेंट बैंक की सदस्यता में भी वृद्धि हुई है। ऐसे कई क्षेत्र हैं जहाँ हमारे आपसी सहयोग से हमारे नागरिकों को सीधा लाभ मिल रहा है। इसके साथ ही पीएम ने 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को सफल बनाने के लिए ब्रिक्स के देशों का आभार भी व्यक्त किया।

इसके साथ ही पीएम मोदी ने कहा, “मुझे विश्वास है कि आज हमारे विचार-विमर्श से हमारे संबंधों को और मजबूत करने के लिए सुझाव मिलेंगे।”

ये बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई। बैठक में पीएम मोदी के अलावा चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका के शीर्ष नेता उपस्थित रहे। ये ब्रिक्स की 14वीं मीटिंग है। इस साल का मेजबान चीन रहा है।

उल्लेखनीय है कि ब्रिक्स (ब्राजील-रूस-भारत-चीन-दक्षिण अफ्रीका) दुनिया के पाँच सबसे बड़े विकासशील देशों का संगठन है, जो कि वैश्विक आबादी का 41 फीसदी, वैश्विक जीडीपी का 24 फीसदी और 16% वैश्विक व्यापार का प्रतिनिधित्व करता है।

पुतिन ने भारत को लेकर कही बड़ी बात

ब्रिक्स की बैठक के दौरान रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने मुश्किल वक्त में भारत द्वारा रूस से तेल खरीदकर उसकी मदद करने को लेकर अब भारत की मदद के लिए हाथ बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि रूस में भारतीय स्टोर्स खोलने के लिए बातचीत की जा रही है। पुतिन ने कहा कि इस साल के शुरुआती तीन महीनों में ब्रिक्स देशों का व्यापार 38% तक बढ़ा है।

‘ईसाइयों और मुस्लिमों को फ्री ड्रोन पायलट ट्रेनिंग और प्लेसमेंट’: आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगन रेड्डी की एक और तुष्टिकरण योजना, बीजेपी नेता ने शेयर किया पोस्टर

आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh) की वाईएस जगन मोहन रेड्डी (YS Jagan Mohan Reddy) सरकार ने एक ड्रोन पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है, जिसको लेकर राज्य भाजपा महासचिव विष्णु वर्धन रेड्डी ने निशाना साधा है। उन्होंने ट्विटर के जरिए बताया कि कैसे वाईएस जगन मोहन रेड्डी सरकार ने कथित तौर पर केवल दो अल्पसंख्यक समुदायों के लोगों के लिए ही ड्रोन पायलट प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया है।

भाजपा नेता द्वारा साझा किए गए पोस्टर के अनुसार, आंध्र प्रदेश में ड्रोन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (डीआईटी) द्वारा पाठ्यक्रम की पेशकश की जा रही है। ऑफ़लाइन पाठ्यक्रम के कैंडिडेट वाले विज्ञापन में केवल ईसाई और मुस्लिम उम्मीदवारों को ही फ्री ट्रेनिंग और प्लेसमेंट देने की बात कही गई है।

आंध्र के सीएम के हिन्दू विरोधी पूर्वाग्रह पर सवाल उठाते हुए भाजपा नेता ने ट्वीट किया, “संसाधनों पर सभी का समान अधिकार है फिर आंध्र प्रदेश सीएम ने विशेष रूप से केवल 2 समुदायों के छात्रों के लिए प्रशिक्षण क्यों रखा है? इससे सांप्रदायिक तनाव हो सकता है, आंध्र सरकार हमारे छात्रों के साथ बहुत गंदी राजनीति कर रही है। उन्हें यह फैसला वापस लेना चाहिए।”

जिस पोस्टर को भाजपा नेता ने शेयर किया है उसमें देखा जा सकता है कि आंध्र प्रदेश के प्रतीक के साथ सीएम वाईएस जगन मोहन रेड्डी की तस्वीर है। इसमें मोटे अक्षरों में उल्लेख किया गया है कि पाठ्यक्रम को ड्रोन उड़ान में मुफ्त प्रशिक्षण और बाद में मुफ्त प्लेसमेंट की पेशकश केवल ईसाइयों और मुसलमानों के लिए की गई है। इसमें दो नंबर भी पूछताछ के लिए दिए गए हैं, जिस पर ऑपइंडिया ने कॉल किया तो वो पहुँच से बाहर थे।

उल्लेखनीय है कि लंबे वक्त से विपक्षी पार्टियाँ ईसाई समुदाय से आने वाले वाईएस जगन रेड्डी पर ईसाईयों पर जमकर खर्च करने का आरोप लगाती रही हैं। आरोप है कि जब से जगन मोहन रेड्डी राज्य के सीएम बने थे, तभी से वो धर्मान्तरण को प्रमोट करते रहे हैं। आंध्र के सीएम का हिन्दू विरोधी पूर्वाग्रह और धर्मान्तरण पर उनका नरम रुख अल्पसंख्यक तुष्टिकरण को बढ़ाता है। विशेषज्ञों ने इस पर चिंता जाहिर की है।

बीजेपी नेता के द्वारा शेयर किया गया पोस्टर

पिछले साल ही राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (एनसीएससी) ने आंध्र प्रदेश के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर राज्य में अनुसूचित जाति (एससी) समुदाय के जबरन धर्मान्तरण के खिलाफ की गई कार्रवाई के संबंध में रिपोर्ट माँगी थी। एनसीएससी ने ये संज्ञान हिन्दू कानूनी-कार्यकर्ता समूह ‘कानूनी अधिकार संरक्षण मंच’ और एससी-एसटी अधिकार मंच, व एक एनजीओ के जनवरी 2020 के पत्र के बाद लिया था।

इसी तरह से 2019 में जगन सरकार ने 3 लाख रुपए तक की वार्षिक आय वाले लोगों के लिए यरुशलम जाने वाले ईसाई तीर्थयात्रियों को दी जाने वाली वित्तीय सहायता को 40,000 रुपए से बढ़ाकर 60,000 रुपए कर दिया था। वहीं सालाना 3 लाख रुपए से अधिक कमाने वालों को दी जाने वाली सहायता राशि को बढ़ाकर 30,000 रुपए कर दिया गया है। इसके साथ ही उन्होंने अगस्त 2019 में ईसाई पादरियों को प्रति माह 5,000 रुपए का मानदेय देने का ऐलान किया था।

2011 की जनगणना के मुताबिक, राज्य में ईसाइयों की संख्या कुल आबादी का लगभग 1.4% है, हालाँकि, धर्मान्तरण के कारण अब ये संख्या अधिक होने का अनुमान है।

बदला लेने के लिए 10 लोगों को जिंदा जलवा दिया, TMC नेता अनारुल हुसैन के इशारे पर हुई बीरभूम हिंसा: CBI ने पेश की 1192 पन्नों की चार्जशीट

पश्चिम बंगाल (West Bengal) के बीरभूम जिले (Birbhum Violence) में हुई हिंसा के मामले में केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) ने सोमवार को बीरभूम जिले की रामपुरहाट अदालत में चार्जशीट फाइल की। इसमें सीबीआई ने आरोप लगाया कि तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के रामपुरहाट कम्युनिटी ब्लॉक-1 इकाई के पूर्व अध्यक्ष अनारुल हुसैन (Anarul Hossain) ने ही हत्याएँ करने का आदेश दिया था। इसके बाद 21 मार्च 2022 को हुई बोगतुई गाँव में 10 लोगों की बेरहमी से हत्या कर दी गई और पुलिस को भी इससे दूर रखा गया था।

हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सीबीआई ने 1192 पन्नों की चार्जशीट में इसका जिक्र किया है। ये आरोप पत्र चश्मदीद गवाहों, सीसीटीवी फुटेज और रामपुरहाट मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में जल कर मरने वाली दो महिलाओं के बयानों के आधार पर तैयार किया गया है।

इस मामले में अनारुल हुसैन को 24 मार्च 2022 को गिरफ्तार किया गया था, जो कि फिलहाल ज्युडिशियल कस्टडी में है। सीबीआई ने उसे कस्टडी में लेने से पहले उस पर हत्या, आगजनी, घातक हथियारों से दंगा करने और आपराधिक साजिश का आरोप लगाया गया था।

कैसे हुआ बीरभूम नरसंहार

21 मार्च 2022 की 8:20 बजे NH-114A पर बोगटुई चौराहे पर बमबारी हुई, जिसमें टीएमसी समर्थित बरशाल ग्राम पंचायत के उप प्रधान भादू शेख की मौत हो गई। चार्जशीट के मुताबिक, बदला लेने के लिए अनारुल हुसैन ने हमले का आदेश दिया। सीबीआई ने दो अलग-अलग अपराधों में आरोप तय किए हैं, लेकिन जाँच एजेंसी ने ये भी रेखांकित किया कि दोनों घटनाएँ आपस में जुड़ी हुई हैं। भादू शेख हत्याकांड में चार लोग आरोपित हैं, जबकि शेख की हत्या के बाद भड़की हिंसा में अनारुल हुसैन समेत 18 अन्य आरोपित हैं।

उल्लेखनीय है कि टीएमसी नेता के आदेश पर हुई हिंसा में 10 लोगों की मौत हो गई, जबकि दर्जन भर घरों को जलाकर राख कर दिया गया। हमलावरों ने लोगों को घरों में बंद कर दिया था, जिससे वो अपनी जान न बचा सकें। घटना पर संज्ञान लेते हुए 25 मार्च 2022 को कलकत्ता उच्च न्यायालय ने भादू शेख और बीरभूम हिंसा की जाँच का आदेश सीबीआई को दिया।

चार्जशीट में सीबीआई ने दावा किया है कि शेख और उनके सहयोगियों के बीच संदिग्ध भूमि सौदों, धोखाधड़ी वाली कंपनियों और जबरन वसूली के पैसे के हिस्से को लेकर झगड़ा हुआ, जिसमें उसकी हत्या कर दी गई। चार्जशीट में दावा किया गया है कि हुसैन ने भीड़ को सोना शेख और फातिक शेख के घरों पर हमला करने को कहा था।

उसके आदेश के बाद रामपुरहाट शहर से महज 150 मीटर की दूरी पर बोगतुई गाँव के रहने वाले सोना शेख और फातिक शेख के घर पर हमले किए गए। वहाँ पास के एक स्टोर से एक ई-रिक्शा में ईंधन पहुँचाया गया, जिसके चालक को सीबीआई ने हिरासत में लिया था। इस दौरान कम से कम आठ अन्य घरों में रहने वाले परिवारों पर हमला किया गया था। लेकिन वे बाहर निकलने में सफल रहे। 10 पीड़ित तीनों भाइयों मिहिलाल, शेखलाल और बनिरुल शेख के परिवारों के साथ-साथ सोना और फातिक शेख के परिवार के सदस्य हैं।

अनारुल हुसैन की भूमिका

अनारुल हुसैन ही वो शख्स है, जिसने हमलावरों को बोगतुई गाँव में हमले का निर्देश दिया था। सीबीआई ने चार्जशीट में दावा किया है कि हुसैन ने ही हमलावरों को निश्चिंत कर दिया था कि घटनास्थल पर एक घंटे तक पुलिस नहीं आएगी। जबकि, बोगतुई गाँव थाने से एक किमी से भी कम दूरी पर स्थित है। कई गवाहों ने सीबीआई को सूचित किया कि जब उन्होंने हुसैन को सहायता के लिए फोन किया, तो उन्होंने उनसे कहा कि उन्हें एक टीएमसी नेता पर हुए हमले के नतीजे भुगतने होंगे। चार्जशीट के मुताबिक, हुसैन ने सबूत मिटाने के लिए अपने फोन से कॉल लॉग्स डिलीट कर दिए।

कौन है अनारुल हुसैन

रामपुरहाट ब्लॉक नंबर 1 से अनारुल हुसैन टीएमसी अध्यक्ष है। इंडिया टुडे के मुताबिक, टीएमसी में शामिल होने से पहले हुसैन कॉन्ग्रेस पार्टी से जुड़ा था। TV9 बांग्ला की एक रिपोर्ट के अनुसार, हुसैन 1998 में तृणमूल कॉन्ग्रेस में शामिल हुआ और एक दशक से अधिक समय तक पार्टी के ब्लॉक अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। पार्टी रैंक के भीतर एक ‘कुशल आयोजक’ के रूप में जाना जाता है, वह रामपुरहाट क्षेत्र में नगर निगम और रेत खनन व्यवसाय को नियंत्रित करता है।

एबीपी आनंद के मुताबिक, गरीबी में पला बढ़ा हुसैन राजमिस्त्री के तौर पर काम करता था। वो अपने परिवार के साथ कच्चे घर में रहता था। 2011 के बाद उसका ‘भाग्य’ बदल गया। आज वो हुगली जिले में स्थित संधिपुर गाँव में एक बंगले में रहते हैं। वह कई घरों और कारों के मालिक भी हैं।

रमीज तुमने बहुत बुरा किया… आयशा की तरह नदी में कूद नहीं पाई तो नफीसा ने लगा ली फाँसी: Video वायरल, निकाह के नाम पर धोखा दुनिया को बता गई

गुजरात के वडोदरा की रहने वाली नफीसा ने प्रेमी के निकाह से मुकरने के बाद 20 जून को फाँसी लगाकर आत्महत्या कर ली। आत्महत्या करने से पहले उसने भी अहमदाबाद की आयशा की तरह अपना एक वीडियो बनाया है। इसमें उसने बताया कि रमीज ने पहले उसे निकाह के लिए हाँ कहा, फिर बाद में वह मुकर गया।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, नफीसा ने आयशा की तरह अहमदाबाद की साबरमती नदी में कूदकर आत्महत्या करने की कोशिश की थी, लेकिन आसपास लोगों की भीड़ होने के कारण वह ऐसा नहीं कर पाई। इसलिए उसने वापस वडोदरा आकर घर में फाँसी लगा ली।

नफीसा ने अपनी वीडियो में कहा था, “रमीज तुमने मेरे साथ बहुत बुरा किया है। बहुत मतलब बहुत बुरा किया है। निकाह के लिए हाँ कहकर मुझे बेवकूफ बनाते रहे। आए ही नहीं, ये तो गलत है ना यार। बहुत गलत, ऐसा नहीं करना चाहिए था। जिंदगी में मैंने तुमसे सबसे ज्यादा प्यार किया, और तुमने ये किया मेरे साथ। मुझे बहुत धोखा दिया। मुझे लगा तुम सबसे अलग हो, लेकिन तुम भी सभी के जैसे ही हो। तुममें और और सभी में कोई फर्क नहीं है।”

25 साल की नफीसा ने रोते हुए कहा था, “पूरी दुनिया को पता चल जाने के बाद भी तुमने मेरा हाथ नहीं थामा। बहुत बुरे हो तुम। मुझे नहीं आता समझ में। तुम्हारे घरवाले कहते हैं कि हमारा उससे कोई कॉन्टैक्ट नहीं। लेकिन, तुम्हें परसों ही देखा था वहाँ पर। तुम्हारे कपड़े सूख रहे थे वहाँ पर। कितनी बुरी हालत कर दी है मेरी। न घर की रही न घाट की। चार दिनों से तुम्हारे लिए यहाँ भटक रही हूँ। तुम्हें ढूंढ़ रही हूँ। मैंने तो पुलिस को भी नहीं बताया। मैं क्या बोलूँ?”

बताया जा रहा है कि नफीसा खोखर नूरजहाँ पार्क इलाके में अपने परिवार के साथ रहती थी। वह अहमदाबाद के शेख रमीज अहमद से प्यार थी। रमीज ने भी नफीसा से निकाह का वादा किया था। यह बात नफीसा और रमीज के परिवार वालों को भी पता थी। लेकिन, अचानक ही रमीज ने उससे बात करना बंद कर दी, जिसके चलते नफीसा पिछले कई दिनों से उससे मिलने की कोशिश कर रही थी। उससे मिलने के लिए वह अहमदाबाद भी गई, लेकिन युवक के परिवार वालों ने उसे मिलने नहीं दिया। रमीज के धोखा देने से वह बुरी तरह टूट गई थीं, जिसके चलते उसने सुसाइड जैसा कदम उठाया। नफीसा के परिवार वालों ने रमीज के खिलाफ थाने में शिकायत दर्ज करवाई है।

गौरतलब है कि बीते साल मार्च में अहमदाबाद की आयशा ने साबरमती नदी में हँसते-हँसते कूद कर आत्महत्या कर ली थी। आयशा ने उससे ठीक पहले एक वीडियो बनाया था। आत्महत्या से पहले बनाए गए वीडियो में आयशा ने कहा था, “प्यार करते हैं आरिफ से। उसे परेशान थोड़े न करेंगे। उसे आज़ादी चाहिए, आज़ाद रहे वो। चलो, अपनी ज़िंदगी तो यहीं तक है। मैं खुश हूँ कि मैं अल्लाह से मिलूँगी। मैं उनसे पूछूँगी कि मुझसे क्या गलती हुई। अच्छे माँ-बाप मिले, दोस्त भी बहुत अच्छे मिले- फिर भी कमी कहाँ रह गई? सुकून के साथ जाना चाहती हूँ। और अल्लाह से मैं ये भी कहूँगी कि मुझे दोबारा इंसानों की शक्ल न दिखाए।” कोर्ट ने भी आयशा के वीडियो को पुख्ता सबूत मानते हुए आरिफ को 10 साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी।

आपत्तिजनक अवस्था में थे फादर-नन, देखने वाली सिस्टर पर कुल्हाड़ी से वार; कुएँ में फेंका: 28 साल में सजा, 18 महीने में बेल

बहुचर्चित सिस्टर अभया मर्डर केस (Sister Abhaya Murder Case) के दोषियों को केरल हाईकोर्ट ने जमानत दे दी है। इस मामले में तिरुवनंतपुरम की सीबीआई अदालत ने दिसंबर 2020 में फादर थॉमस कोट्टूर और नन सिस्टर सेफी को हत्या का दोषी पाते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। अभया की लाश 27 मार्च 1992 को सेंट पायस कॉन्वेंट के कुएँ से मिली थी।

इस फैसले को दोषियों ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। इस याचिका पर गुरुवार 23 जून 2022 को जस्टिस के विनोद चंद्रन और जस्टिस सी जयचंद्रन की खंडपीठ ने सुनवाई की। सिस्टर सेफी और फादर थॉमस को 5-5 लाख रुपए के निजी मुचलके पर जमानत दे दी। साथ ही जमानत पर रहने के दौरान अदालत की अनुमति के बिना राज्य नहीं छोड़ने के निर्देश दिए। दोनों को 6 महीने तक हर शनिवार जाँच अधिकारी के सामने भी पेश होना होगा।

उल्लेखनीय है कि इस मामले की जाँच शुरुआत में स्थानीय पुलिस और राज्य अपराध शाखा ने की थी। अभया के आत्महत्या की बात कहते हुए जाँच बंद कर दी गई। लेकिन लेकिन मानवाधिकार कार्यकर्ता जोमोन पुथेनपुराकल के संघर्ष और कानूनी लड़ाई के बाद 29 मार्च, 1993 को इस मामले को सीबीआई को सौंपा गया। CBI ने वर्ष 2008 में कोट्टूर, पूथरुकायिल और सेफी को हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया था। लेकिन एक महीने बाद ही इन्हें जमानत मिल गई थी। इसके बाद सीबीआई ने इस मामले में चार्जशीट दायर की। हत्या, सबूत नष्ट करने, आपराधिक साजिश और अन्य आरोप लगाए गए। फादर जोस पूथरुकायिल को अदालत ने सबूत न मिलने के कारण छोड़ दिया था। लेकिन फादर कोट्टूर और सिस्टर सेफी को दोषी पाया था।

क्या है पूरा मामला

सीबीआई आरोप-पत्र के अनुसार, घटना के दिन सिस्टर अभया एग्ज़ाम के लिए सुबह के चार बजे उठी और पानी लेने किचन में गईं। अभया ने दो पादरियों और एक नन- थॉमस कुट्टूर, जोस पूथरुकायिल, और सिस्टर सेफी को ‘आपत्तिजनक स्थिति’ में पाया। सिस्टर अभया ये बात किसी को बता न दें, इस डर से तीनों ने मिलकर उस पर हमला किया और सिस्टर अभया बेहोश हो गई। इसके बाद तीनों ने मिलकर उसे कुऍं में डाल दिया।

घटना के समय फादर थॉमस ने कथित तौर पर रसोई में उसका गला घोंट दिया, जबकि तीसरे आरोपित ने उस पर कुल्हाड़ी से वार किया। इसके बाद फादर जोस सहित तीनों लोगों ने फिर उसे एक कुएँ में फेंक दिया, जबकि वह तब भी जिन्दा थी। सिस्टर अभया की डूबने से मौत हो गई। हमले के समय एक पानी की बोतल किचन में गिर गई थी, उनके बाहर निकलते समय दरवाजे के नीचे एक कपड़ा मिला था और रसोई में विभिन्न स्थानों पर पाए गए अभया के चप्पल सभी सबूत का हिस्सा बने।

बसपा के पूर्व MLC हाजी इकबाल, उनके भाई पर नाबालिग से रेप का मामला, खनन माफिया के चारों बेटों पर भी छेड़छाड़ का आरोप, पुलिस ने कहा- जल्द होगी गिरफ्तारी

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में खनन माफिया और बहुजन समाज पार्टी के पूर्व MLC हाजी इकबाल और उसके भाई पर एक नाबालिग लड़की से रेप का केस दर्ज हुआ है। इकबाल के आरोपित भाई का नाम महमूद अली है। महमूद अली भी बसपा के पूर्व MLC हैं। पीड़िता ने हाजी इकबाल के चारों बेटों पर छेड़छाड़ का आरोप लगाया है। युवती ने कुछ दिन पहले पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई थी। इस घटना में पुलिस ने कुल 6 आरोपितों के खिलाफ केस दर्ज किया है। इस मामले के बाबत SSP सहारनपुर ने यह जानकारी आज 23 जून 2022 (गुरुवार) को दी है।

एसएसपी सहारनपुर के मुताबिक, “कुछ समय पहले सहारनपुर पुलिस को एक प्रार्थना पत्र प्राप्त हुआ था। इसमें नाबालिग के साथ रेप और छेड़खानी के गंभीर आरोप लगाए गए थे। इस मामले की DSP स्तर के अधिकारी से जाँच करवाई गई जिसमें आरोप सत्य पाए गए। इसके बाद हमने 6 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है जिसमें से हाजी इकबाल और महमूद अली पर रेप का आरोप है। साथ ही 4 अन्य पर नाबालिग से छेड़छाड़ और मारपीट का आरोप है। इस केस में जाँच की जा रही है। जाँच के दौरान जो भी तथ्य सामने आएँगे उसके आधार पर प्रभावी कार्रवाई की जाएगी।”

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक SSP सहारनपुर आकाश तोमर ने आरोपित हाजी इकबाल की जल्द गिरफ्तारी का दावा किया है। हाजी इकबाल की तलाश में पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है। अब तक हाजी इकबाल के 3 बेटों को जेल भेजा जा चुका है। साथ ही उसकी व उसके सहयोगियों की मिला कर कुल 130 करोड़ सम्पत्ति को कुर्क भी किया गया है। बता दें कि हाजी इकबाल पर अवैध खनन, आय से अधिक सम्पत्ति, जमीन पर अवैध कब्ज़े के कई मामले दर्ज हैं। सहारनपुर पुलिस के अलावा हाजी इकबाल की सम्पत्तियों की जाँच ED भी कर रही है।

DHFL ने किया देश का सबसे बड़ा बैंक घोटाला: 17 बैंकों के ₹34615 करोड़ डकारे, मनमोहन सिंह के राज से शुरू किया था लोन का नाम पर खेला

देश का अब तक का सबसे बड़ा बैंक घोटाला सामने आया है। इसे दीवान हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (DHFL) और उसके सहयोगियों ने अंजाम दिया है। यह घोटाला 34,615 करोड़ रुपए का है। आरोप है कि बैंकों से जिस काम के नाम पर लोन लिए गए है, पैसा वहाँ लगाने की जगह अन्य कंपनियों को ट्रांसफर कर दिए गए। इसकी शुरुआत 2010 से हुई, जब केंद्र में मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए की सरकार थी। 2019 तक यह धोखाधड़ी चलती रही।

इस संबंध में केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) ने दीवान हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (DHFL) के पूर्व सीएमडी कपिल वाधवान और डायरेक्टर धीरज वाधवान समेत अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया है। रिपोर्ट्स की माने तो DHFL के वाधवान ब्रदर्स ने 17 बैंकों के साथ धोखाधड़ी की है। सीबीआई ने आरोपितों के मुबंई स्थित 12 ठिकानों की तलाशी ली है। इन जगहों में वाधवान का ऑफिस और घर भी शामिल है। इससे पहले एबीजी शिपयार्ड (ABG Shipyards) का 23,000 करोड़ रुपए का फ्रॉड सामने आया था, जो सबसे बड़ी बैंकिंग धोखाधड़ी थी।

सीबीआई (CBI) ने इस मामले में DHFL, कपिल वाधवान, धीरज वाधवान, स्काईलार्क बिल्डकॉन प्रा. लिमिटेड, दर्शन डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड, सिगटिया कंस्ट्रक्शन बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड, टाउनशिप डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड, शिशिर रियलिटी प्राइवेट लिमिटेड, सनब्लिंक रियल एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड, सुधाकर शेट्टी और अन्य को आरोपित बनाया है।

सीबीआई के अनुसार, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के डिप्टी जनरल मैनेजर और ब्रांच हेड विपिन कुमार शुक्ला की 11 फरवरी, 2022 को मिली शिकायत के आधार पर यह कार्रवाई की गई है। इस मामले में सोमवार (20 जून 2022) को प्राथमिकी दर्ज की गई थी। शुक्ला ने अपनी शिकायत में सीबीआई को बताया था कि 2010 में बैंकों के कंसोर्टियम ने डीएचएफएल को क्रेडिट सुविधा दी थी। इस कंसोर्टियम में 17 बैंक थे। इससे पहले 2021 में यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने सीबीआई को डीएचएफएल के प्रमोटर्स और तत्कालीन प्रबंधन की जाँच करने के लिए लिखा था। इसमें यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के नेतृत्व वाले बैंकों के कंसोर्टियम को 40,623.36 करोड़ रुपए (30 जुलाई, 2020 तक) का नुकसान होने की बात कही गई थी।

रिपोर्ट के अनुसार बैंकों से 42 हजार करोड़ से ज्यादा का लोन लिया गया। इसमें 34615 हजार करोड़ रुपए का लोन कंपनी ने नहीं लौटाया। अकाउंट बुक में फर्जीवाड़ा कर लोन का पैसा 65 से ज्यादा कंपनियों में भेजा दिया गया। मजबूरन बैंकों ने अलग-अलग समय पर खाते को एनपीए घोषित कर दिया। इसके बाद ऑडिट से बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं, फंड की हेराफेरी, दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा आदि का पता चला था।

अग्निपथ विरोधी हिंसा को लेकर UP में अब तक 387 गिरफ्तार, 34 FIR, अलीगढ़ में जाँच के डर से कोचिंग सेंटरों ने गिराए शटर

अग्निपथ योजना के खिलाफ हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद UP के अलीगढ़ जिले के टप्पल में तमाम कोचिंग सेंटरों ने बुधवार (22 जून 2022) को अपने शटर बंद रखे। ऐसा कदम हिंसक प्रदर्शनों में उनकी भूमिका की चल रही जाँच के चलते उठाया गया। बताया जा रहा है कि अब तक कोचिंग सेंटरों के 11 संचालकों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। इनमें अलीगढ़ से सबसे बड़े कोचिंग संस्थान यंग इंडिया के मालिक सुधीर शर्मा भी शामिल हैं।

हिंसा के बाद अब तक अलीगढ़ में 11 कोचिंग संस्थानों के संचालकों सहित कुल 76 आरोपित गिरफ्तार हुए हैं। अलीगढ़ पुलिस ने 18 जून को उपद्रवियों के पोस्टर जारी किए। ये पोस्टर हिंसा के बाद निकाले गए CCTV फुटेज के आधार पर बनाए गए हैं। इन प्रदर्शनकारियों ने न सिर्फ यमुना एक्सप्रेसवे पर तोड़फोड़ की थी बल्कि जट्टारी पुलिस चौकी को भी जला दिया था। इन्हे सँभालने के लिए पुलिस को आँसू गैस के गोले छोड़ने पड़े थे। इन पोस्टरों में पुलिस ने आरोपितों को पकड़वाने के लिए इनाम भी घोषित किया है।

प्रदेश में वर्तमान में सेना की तैयारी करवाने वाले तमाम कोचिंग संस्थानों पर पुलिस की नजर है। प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में इनमे से कईयों की गिरफ्तारी भी की गई है। पुलिस का मानना है कि कई कोचिंग संस्थानों में छात्रों को अग्निपथ योजना के खिलाफ भड़काया गया है। UP में फिलहाल लगभग 2200 कोचिंग संस्थान चल रहे हैं जहाँ सेना भर्ती की तैयारी करवाई जा रही है। इन स्थानों में न सिर्फ सेना बल्कि पैरामिलिट्री, स्टेट पुलिस और रेलवे आदि की भी तैयारी करवाई जा रही है।

उत्तर प्रदेश के जिन अन्य स्थानों पर प्रदर्शन के दौरान हालात तनावपूर्ण रहे उनमें वाराणसी, फ़िरोज़ाबाद, अमेठी, बलिया, मथुरा, आगरा और सहारनपुर जिले शामिल हैं। बलिया और वाराणसी में ट्रेनों को भी निशाना बनाया गया। यमुना एक्सप्रेसवे से गुजर रहे वाहनों पर पथराव किया गया था। बलिया में पुलिस ने 100 से अधिक उपद्रवियों को हिरासत में लिया है।

अग्निपथ के विरोध में हुई हिंसा में उत्तर प्रदेश पुलिस ने अब तक 34 FIR दर्ज की हैं। कुल 387 आरोपितों को अब तक प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से गिरफ्तार किया गया है। इसी के साथ CCTV फुटेज और अन्य माध्यमों से उपद्रवियों की पहचान के प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही फरार आरोपितों की तलाश में पुलिस लगातार छापेमारी भी कर रही है।

रात भर शिवसैनिकों ने मुंबई की सड़कों पर चलाया सर्च ऑपरेशन, पर उद्धव के बागी मंत्री को रोक नहीं पाए: जानिए कैसे एकनाथ शिंदे के कैंप में पहुँचे गुलाबराव पाटिल

महाराष्ट्र में शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे से लेकर उद्धव ठाकरे के खास मानें जाने वाले एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे का सारा खेल बिगाड़ दिया है। विधायकों के पाला बदलने से शिवसेना प्रमुख एक तरफ छटपटा रहे हैं और विधायकों की तलाश में मुंबई का चप्पा-चप्पा छान मार रहे हैं। वहीं दूसरी ओर अपने मुख पत्र ‘सामना’ के जरिए विधायकों को चेतावनी भी दे रहे हैं कि तुम्हे कचरे में फेंक दिया जाएगा। यह सब देखने के बाद अगर हम यह कहें कि एंटरटेनमेंट के मामले में महाराष्ट्र का सियासी ड्रामा बॉलीवुड की फिल्मों से भी आगे निकल गया है, तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। अपनी कुर्सी बचाने और शिवसैनिकों को बागी खेमे में जाने से रोकने के लिए उद्धव ठाकरे अपनी पूरी ताकत झोंक दे रहे हैं, लेकिन विधायकों के पाला बदलने की खबरें रुकने का नाम नहीं ले रही हैं।

उद्धव ठाकरे की नाक के नीचे से निकल बागी नेता एकनाथ शिंदे के खेमे में शामिल हो रहे हैं, लेकिन शिवसेना प्रमुख को इसकी भनक भी नहीं लग पा रही है। इस बौखलाहट में शिवसेना को समझ नहीं आ रहा है कि वह क्या करें और क्या बोले? शिवसेना ने अपने मुख पत्र ‘सामना’ के संपादकीय में मौजूदा सियासी तूफान को ‘स्वप्न दोष’ की तरह बताया है। पार्टी ने अपने बागियों को चेताया है कि समय रहते सावधान हो जाएँ, वरना उन्हें कचरे में फेंक दिया जाएगा।

खैर, शिवसेना बागियों के लिए सार्वजनिक तौर पर भले ही कड़े तेवर दिखा रही हो, लेकिन जमीनी तौर पर वह मुंबई की गलियों में इन्हें तलाश रही है। मंगलवार (21 जून 2022) की रात को एक ऐसी ही रोमांचक घटना सामने आई। शिवसैनिक पूरी रात शिकारियों की तरह महाराष्ट्र के मंत्री और वरिष्ठ शिवसेना नेता गुलाबराव पाटिल (Gulabrao Patil) को ढ़ूंढते रहे। लेकिन वह उन्हें चकमा देकर एकनाथ शिंदे तक पहुँचने में कामयाब रहे, जो इस वक्त असम के गुवाहाटी में रेडिसन ब्लू होटल में डेरा जमाए हुए हैं। खुद शिंदे 46 विधायकों के समर्थन का दावा कर चुके हैं। इनमें 6-7 निर्दलीय भी हैं।

खबरों के मुताबिक, उद्धव ठाकरे खेमे के एक वरिष्ठ नेता ने दक्षिण मुंबई में अपने कार्यकर्ताओं को किसी भी कीमत पर पाटिल का पता लगाने का आदेश दिया था। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, शाखा प्रमुख पांडुरंग सकपाल (Shakha Pramukh Pandurang Sakpal) के नेतृत्व में दक्षिण मुंबई के शिवसैनिक तुरंत हरकत में आए और पाटिल को ट्रैक करने के लिए रात भर बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चलाया।

21 जून को शिवसेना के कार्यकर्ताओं ने पाटिल को पकड़ने में अपनी पूरी ताकत लगा दी, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। शिवसैनिक पहले उस होटल में गए, जहाँ विधायक ठहरे हुए थे, लेकिन उन्हें वहाँ कोई नहीं मिला। फिर भी आलाकमान के दबाव में पार्टी के कार्यकर्ता पूरी रात दक्षिण मुंबई की सड़कों पर घूमते रहे, क्योंकि उद्धव ठाकरे ने उन्हें आदेश दिया था कि वे किसी भी कीमत पर पाटिल को पकड़कर ले आए। इसके बाद कार्यकर्ताओं ने दक्षिण मुंबई में पाटिल के बंगले के बाहर डेरा डालने का फैसला किया। वहाँ आखिरकार बुधवार (22 जून 2022) की सुबह ही उन्हें पकड़ लिया गया।

पार्टी के कार्यकर्ता ने बताया “हमें रात 11 बजे फोन आया और कहा गया कि पाटिल की तलाश करें। हमने लोअर परेल में सेंट रेजिस होटल सहित हर जगह उनको ढ़ूंढा, लेकिन वह नहीं मिले। इसके बाद हमने सुबह उनके घर के बाहर डेरा डालने का फैसला किया। हम बुधवार सुबह करीब साढ़े आठ बजे उन्हें पकड़ने में सफल रहे।” जैसे ही सकपाल ने पाटिल को देखा, उन्होंने जोर देकर कहा कि आप उद्धव ठाकरे से बात करें।

पाटिल भी डेढ़ शाड़े ठहरे, उन्होंने शिवसैनिकों को गुमराह करते हुए कहा, “पार्टी प्रमुख के साथ मेरी पहले ही बात हो चुकी है। उन्हें मंत्रालय में कुछ काम है। उसके बाद वह मुख्यमंत्री से मिलने वर्षा बंगले जाएँगे।” इसके बाद शिवसैनिकों को भी यकीन हो गया कि वह जल्द ही उद्धव ठाकरे से मिलने उनके सरकारी आवास वर्षा बंगले पर जाएँगे। हालाँकि, पाटिल वर्षा की ओर जाने के बजाय शिवसैनिकों को चकमा दे कर अपनी पर्सनल कार से भाग गए। शिवसेना के कार्यकर्ताओं ने उनका पीछा किया, लेकिन तब तक वह गायब हो गए। बाद में पाटिल को गुवाहाटी में शिवसेना के अन्य बागी विधायकों के साथ देखा गया।

बता दें कि शिवसेना में पैदा यह संकट अब केवल विधायकों तक ही सीमित नहीं है। उद्धव की कार्यशैली से पार्टी के कुछ सांसद भी नाराज बताए जा रहे हैं। पार्टी के 19 सांसद हैं। इनमें से 9 नाराज बताए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि ये भी शिवसेना को अलविदा भी कह सकते हैं। हालाँकि, इनमें से कोई भी सांसद अभी खुलकर अपनी बात नहीं कह रहे हैं और वक्त का इंतजार कर रहे हैं।

एकनाथ शिंदे ने 42 MLA वाला Video दिखा बताई ताकत, विधायक ने उद्धव से पूछा- अयोध्या जाने से क्यों रोका: संजय राउत बोले- कॉन्ग्रेस-NCP को छोड़ देंगे

एकनाथ शिंदे असम के गुवाहाटी स्थित जिस रेडिसन ब्लू होटल में डेरा डाले हुए हैं, वहाँ से एक वीडियो आया है। इस वीडियो में कुल 42 विधायक दिख रहे हैं। इनमें शिंदे भी हैं। इसके बाद बागियों को मनाने के मकसद से संजय राउत ने कहा है कि महाविकास अघाड़ी से शिवसेना बाहर आने को तैयार है। इससे पहले शिंदे ने अपने समर्थक शिवसेना विधायक संजय सिरसत का एक पत्र ट्विटर पर साझा किया था। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे को लिखे पत्र में सिरसत ने पार्टी के कुछ नेताओं को अयोध्या जाने से रोके जाने को लेकर सवाल पूछा है।

होटल से आए वीडियो में जो विधायक दिख रहे हैं उनमें 35 शिवसेना के हैं। अन्य 7 निर्दलीय हैं। इस वीडियो में कुछ विधायक शिंदे और बाल ठाकरे के समर्थन में नारे लगाते हुए भी सुने जा रहे हैं।

यह वीडियो एकनाथ शिंदे के शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है। बागी विधायक उन्हें पहले ही शिवसेना विधायक दल का नेता चुन चुके हैं। ऐसी खबरें भी सामने आई है कि वे शिवसेना पर भी अपना दावा ठोंक सकते हैं। हालाँकि दलबदल कानून के तहत उन्हें शिवसेना के दो तिहाई विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होगी। फिलहाल महाराष्ट्र विधानसभा में शिवसेना के 55 सदस्य है। लिहाजा यह नंबर 37 है।

इस वीडियो के सामने आने के बाद शिवसेना सांसद संजय राउत ने बागियों को मनाने के मकसद से कॉन्ग्रेस और एनसीपी से नाता तोड़ने की बात कही है। उन्होंने कहा है कि विधायक गुवाहाटी से बातचीत नहीं कर सकते। उन्हें मुंबई लौटकर इन मसलों पर मुख्यमंत्री से चर्चा करनी चाहिए। राउत ने कहा, “यदि सभी विधायकों की इच्छा हुई तो हम ​महाविकास अघाड़ी से बाहर आने को तैयार हैं। लेकिन इसके लिए उन्हें मुंबई आकर मुख्यमंत्री (उद्धव ठाकरे) से चर्चा करनी होगी।” राउत के इस बयान के बाद कॉन्ग्रेस और एनसीपी के कैंप में भी खलबली मच गई है। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महाविकास अघाड़ी में दोनों दल साझेदार हैं।

इससे पहले शिंदे ने विधायक सिरसत का जो पत्र साझा किया था उसमें भी अप्रत्यक्ष तौर पर संजय राउत पर निशाना साधा गया है। 22 जून को लिखे इस पत्र में कहा गया कि शिवसेना का मुख्यमंत्री होने के बावजूद पार्टी विधायक वर्षा (मुख्यमंत्री आवास) में नहीं जा सकते थे। सीएम के आसपास के लोग तय करते थे कि हम उनसे मिल सकते हैं या नहीं।

पत्र में कहा गया है कि अयोध्या, राम मंदिर और हिंदुत्व शिवसेना का एजेंडा रहा है। बावजूद इसके कुछ नेताओं को आदित्य ठाकरे के साथ हालिया अयोध्या दौरे पर जाने से रोका गया। अंतिम क्षणों में नेताओं को रोके जाने की वजह पत्र में पूछी गई है। साथ ही कहा गया है कि पार्टी नेताओं से ज्यादा तवज्जो एनसीपी और कॉन्ग्रेस नेताओं को मिल रहा है।

गौरतलब है कि संकट गहराने के बाद उद्धव ठाकरे ने बुधवार की रात मुख्यमंत्री का आधिकारिक आवास खाली कर दिया था। लेकिन रिपोर्टों के अनुसार शिवसेना में पैदा यह संकट अब केवल विधायकों तक ही सीमित नहीं है। उद्धव की कार्यशैली से पार्टी के कुछ सांसद भी नाराज बताए जा रहे हैं। पार्टी के 19 सांसद हैं। इनमें से 9 नाराज बताए जा रहे हैं।