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अब इस्लामी राष्ट्र नहीं रहेगा ट्यूनीशिया: नए संविधान में नहीं होगा मजहब, 80% आबादी कट्टरपंथ के खिलाफ

अफ्रीकी देश ट्यूनीशिया में तख्तापलट के एक साल बाद देश के राष्ट्रपति कैस सैईद एक ऐसे संवैधानिक मसौदे को मंजूरी देने जा रहे हैं, जिसके बाद इस्लाम को राज्यधर्म की मान्यता खत्म हो जाएगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, संविधान के मसौदे को शनिवार (25 जून 2022) को जनमत संग्रह के लिए पेश किया जाएगा।

मोरक्को वर्ल्ड न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक देश के राष्ट्रपति ने एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बात करते हुए कहा, “ट्यूनीशिया के अगले संविधान में इस्लाम राज्य के आधिकारिक धर्म के तौर पर नहीं रहेगा, बल्कि ये एक उम्माह (समुदाय) के रूप में होगा।”

गौरतलब है कि उत्तरी अफ्रीकी देश ट्यूनीशिया मुस्लिम बहुल आबादी वाला देश है और अब तक यहाँ के संविधान ने इस्लाम को राज्य धर्म के रूप में अपनाया था। लेकिन अब देश के राष्ट्रपति कैस सईद इसे राज्य के धर्म से बाहर करना चाहते हैं। ट्यूनीशिया ऐसा देश है, जहाँ बहुसंख्यक मुस्लिम आबादी होने के बाद भी वहाँ शरिया का पालन नहीं किया जाता है। इसका कानूनी स्ट्रक्चर अधिकतर यूरोपीय सिविल लॉ पर आधारित है।

दरअसल, कैस सईद ने पिछले साल ही ट्यूनीशिया की संसद को भंग कर दिया था और जुलाई 2021 में देश की सत्ता पर पूरी तरह से अधिकार कर लिया। इस्लामिक देश के कई राजनेता सईद के इस्लाम को राज्य से अलग करने की कोशिशों का विरोध करने लगे हैं। ट्यूनीशिया की इस्लामिक पार्टी एन्हाडा के नेता रचेड घनौनी ने कहा, “राजनीति में सबसे बड़ा भ्रष्टाचार अत्याचार है और इसका इलाज लोकतंत्र की ओर लौटना और शक्तियों को अलग करना है।”

नए संविधान में नहीं होगा इस्लाम

संवैधानिक मसौदा समिति का नेतृत्व कर रहे ट्यूनिस लॉ स्कूल के पूर्व डीन सदोक बेलैड का कहना था कि देश के नए संविधान में इस्लाम का कोई संदर्भ नहीं होगा। उन्होंने कहा कि ट्यूनीशिया के 80% से अधिक लोग इस्लामिक पॉलिटिक्स के विरोधी हैं और कट्टरपंथ के खिलाफ हैं।

उल्लेखनीय है कि 2011 में अरब स्प्रिंग के बाद ट्यूनीशिया ने 2014 में औपचारिक रूप से अपने वर्तमान संविधान को अपनाया था, जिसमें इस बात का जिक्र किया गया है कि इस्लाम धर्म है और अरबी ट्यूनीशिया की भाषा है। वहीं इस महीने एक बड़ा फैसला लेते हुए राष्ट्रपति सईद ने देश के 57 जजों को आतंकवादियों को बचाने और भ्रष्टाचार में लिप्त होने का आरोप लगाकर बर्खास्त कर दिया था। इसके बाद जजों ने सईद के फैसले के खिलाफ देशव्यापी हड़ताल शुरू कर दी थी।

कंगाल पाकिस्तान में कागज का संकट: सिलेबस की किताबों की भी नहीं होगी छपाई, मंत्री दे चुके हैं ‘चाय कटिंग’ का नुस्खा

आर्थिक बदहाली से जूझ रहे पाकिस्तान के बच्चों को अब सिलेबस की किताबें नहीं मिलेंगी। देश में कागज का संकट है। आसमान छूती कीमतों की वजह से प्रकाशकों के लिए छपाई करना मुमकिन नहीं है। पेट्रोल-डीजल, अनाज और दूसरी चीजों की पहले से ही किल्लत चल रही है। कर्ज का बोझ बढ़ रहा है। विदेशी मुद्रा भंडार में तेजी से गिरावट हो रही है। इसे देखते हुए पिछले दिनों एक मंत्री ने लोगों को चाय कम पीने की सलाह भी दी थी।

पाकिस्तान पेपर एसोसिएशन ने कहा है कि देश में कागज का संकट है। इसके कारण अगस्त 2022 से शुरू होने वाले नए शैक्षणिक सत्र में छात्रों के लिए किताबें उपलब्ध नहीं होंगी। बताया जा रहा है कि वैश्विक मुद्रास्फीति, सरकारों की गलत नीतियों और स्थानीय कागज उद्योगों के मनमानी से यह संकट पैदा हुआ है।

ऑल पाकिस्तान पेपर मर्चेंट एसोसिएशन, पाकिस्तान एसोसिएशन ऑफ प्रिंटिंग ग्राफिक आर्ट इंडस्ट्री (PAPGAI) और पेपर उद्योग से जुड़े अन्य संगठनों ने देश के प्रमुख अर्थशास्त्री डॉ. कैसर बंगाली के साथ एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसके बारे में बताया है। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान चेतावनी दी कि नए शैक्षणिक वर्ष में पेपर संकट के कारण छात्रों को किताबें उपलब्ध नहीं होंगी। बताया जा रहा है कि पाकिस्तान में कागज काफी महँगा हो गया है और इसकी कीमत रोज बढ़ती जा रही है। प्रकाशक किताबों की कीमत निर्धारित नहीं कर पा रहे हैं। इसके कारण सिंध, पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा का पाठ्यपुस्तक बोर्ड किताबों की छपाई नहीं कर पाएगा।

इस बीच, पाकिस्तानी स्तंभकार अयाज आमिर ने दुनिया डेली में प्रकाशित एक लेख में ‘अक्षम और असफल शासकों’ पर सवाल उठाया है। उनसे पूछा है कि जब पुराने कर्ज चुकाने के लिए नए कर्ज लेने पड़ रहे हैं तो सरकारें इन आर्थिक समस्याओं का समाधान कैसे करेंगी। उन्होंने कहा कि ये कभी न खत्म होने वाला सिलसिला अभी भी चल रहा है और अब पाकिस्तान उस मुकाम पर पहुँच गया है, जब कोई भी देश कर्ज देने को तैयार नहीं है।

गौरतलब है कि इससे पहले पाकिस्तान के एक मंत्री ने लोगों से कम चाय पीने के लिए कहा था, ताकि विदेशी मुद्रा की बचत की जा सके। देश के योजना एवं विकास मंत्री अहसान इकबाल ने कहा था कि पाकिस्तानी अपनी चाय की खपत को प्रति दिन ‘एक या दो कप’ कम कर सकते हैं, क्योंकि इसका आयात सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव डाल रहा है। इसके पहले एक एयरपोर्ट कर्मचारी ने देश में बढ़ते पेट्रोल के दामों को लेकर गधा गाड़ी से ऑफिस पहुँचने की अनुमति माँगी थी।

‘ओवैसी साहब, आपका नाम लेकर जफर जुल्म कर रहा’: पत्रकार का दावा- AIMIM विधायक के ड्राइवर ने पीटा, पुलिस ने भी धमकाया

हैदराबाद के एक वायरल वीडियो में 21 जून 2022 (मंगलवार) को खुद को पत्रकार बताते मोहम्मद अली ने AIMIM विधायक के ड्राइवर पर खुद और अपने परिजनों पर हमले का आरोप लगाया है। विधायक का नाम मुमताज अहमद है जो चारमीनार विधानसभा से चुनाव जीते हैं। पुलिस ने इस घटना में FIR दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है। साथ ही घटना में AIMIM विधायक के नाम को राजनैतिक लाभ लेने के लिए प्रयोग किया जाना बताया है।

इस वीडियो में युवक खुद को मोहम्मद अली बता रहा है। वह अपना परिचय HS न्यूज़ चैनल में कैमरामैन के तौर पर दे रहा है। उसके कहना है कि उसने पानी सप्लाई में किल्लत का एक वीडियो बनाया था जिसके बाद उसको AIMIM पार्टी के विधायक के ड्राइवर ने बुरी तरह से पीटा। इसी वीडियो में पीड़ित के पिता भी घायल दिखाई दे रहे हैं। पीड़ित ने आगे कहा कि वो एक ईमानदार पत्रकार है और इस पेशे को बदनाम नहीं कर सकता।

इसी वीडियो में उसने कहा, “असद साहब (असदुद्दीन ओवैसी) हदीस-ए-रसूल से सुन लीजिये कि जुल्म सहना और करना दोनों गुनाह है। नबी फरमाते हैं कि जालिम जहन्नुम में जाएँगे। आपका नाम ले कर जफर हम पर जुल्म कर रहा है। वो हमें झूठे केसों में बुक करवाता है और मारता भी है। मौत तो सबको आनी है। मैं मरने से नहीं डरता। पुलिस वाले उसके ऊपर केस बुक करने के बजाय मुझे धमका रहे हैं।”

एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक घायलों का इलाज उस्मानिया अस्पताल में चल रहा है। पीड़ित मोहम्मद अली तालाब कट्टा खान नगर के निवासी हैं। उन्होंने खान नगर इलाके में रमज़ान के महीने में पानी सप्लाई की शिकायत पर रिपोर्टिंग की थी। उस रिपोर्ट में कई महिलाओं के भी बयान दर्ज किए थे। आरोप है कि इसी बात से नाराज हो कर AIMIM कार्यकर्ताओ ने उन पर हमला किया। इस हमले में मोहम्मद अली के हाथ और नाक की हड्डी में चोटें आईं हैं। इसी हमले में मोहम्मद अली के अब्बा मोहम्मद अहमद पर भी धारदार हथियार से हमला हुआ है

पीड़ित ने बताया, “मुझ पर हमले का आरोपित रफीक नाम का एक पुलिस मुखबिर है। रफीक का एक भाई जफर है जो विधायक मुमताज का ड्राइवर है। हमें इनके पूरे परिवार ने मिल कर पुलिस के आगे ही मारा है। हमले में महिलाएँ भी शामिल थीं। लेकिन विधायक के चलते ही मेरे केस को आगे नहीं बढ़ाया जा रहा है। यहाँ तक कि पुलिस वाले हमलावरों के ही पक्ष में बातें कर रहे हैं। मेरे अब्बा की हालत सीरियस है। मुझे जबरदस्ती अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है।”

पुलिस ने मुताबिक विधायक का नाम राजनैतिक लाभ के लिए

ऑपइंडिया ने इस घटना पर भवानी नगर थाने के SHO से बात की। उन्होंने बताया, “मामले में केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी गई है। मामला 2 पक्षों के बीच विवाद का है जिसमें AIMIM विधायक की कोई संलिप्तता नहीं पाई गई है। विधायक का नाम आरोपों को सनसनीखेज बनाने और राजनैतिक लाभ हासिल करने के लिए लिया गया है। आरोपित ड्राइवर फ्री लांसर वाहन चलाने का काम करता है जिसने कई लोगों की गाड़ियाँ चलाईं हैं। इस मामले में नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।”

SC ने खारिज की जाकिया जाफरी की याचिका, गुजरात दंगों में मोदी को मिली SIT क्लीनचिट को दी थी चुनौती

गुजरात में 2002 में हुए दंगों के मामले में राज्य के तत्कालीन सीएम नरेंद्र मोदी को एसआईटी की क्लीन चिट को चुनौती देने वाली याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। पूर्व कॉन्ग्रेस सांसद एहसान जाफरी की विधवा जाकिया जाफरी ने यह अर्जी दाखिल की थी। उन्होंने दंगे की साजिश के मामले में मजिस्ट्रेट के आदेश को चुनौती दी थी।

मजिस्ट्रेट ने तत्कालीन सीएम नरेंद्र मोदी समेत 64 लोगों को दंगों की साजिश रचने के आरोप से मुक्त करने वाली SIT की क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार किया था। हाई कोर्ट भी इस फैसले को सही करार दे चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जाकिया की याचिका में मेरिट नहीं है।

जाकिया जाफरी की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने 9 दिसंबर 2021 को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। शुक्रवार (24 जून 2022) को जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और जस्टिस सीटी रविकुमार की बेंच ने इस मामले में सुनवाई पूरी की। 

जस्टिस एएम खानविलकर ने फैसला देते हुए कहा, “हम एसआईटी द्वारा प्रस्तुत अंतिम रिपोर्ट दिनांक 08.02.2012 को स्वीकार करने और अपीलकर्ता (जकिया जाफरी) द्वारा दायर विरोध याचिका को खारिज करने के मजिस्ट्रेट के फैसले को बरकरार रखते हैं।”

उन्होंने कहा, “हम जाँच के संबंध में कानून के शासन के उल्लंघन और अंतिम रिपोर्ट को खारिज करने के लिए मजिस्ट्रेट और उच्च न्यायालय के दृष्टिकोण के संबंध में याचिकाकर्ता के अपील का समर्थन नहीं करते हैं। हमारा मानना है कि इस अपील में मेरिट नहीं है। इसलिए इसे खारिज किया जाता है।”

बता दें कि 2002 में हुए दंगों की जाँच के लिए एसआईटी गठित की गई थी। इस एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी समेत 64 लोगों को क्लीन चिट दी थी। जकिया के पति और कॉन्ग्रेस नेता एहसान जाफरी की 28 फरवरी 2002 को अहमदाबाद की गुलबर्ग सोसायटी में हिंसा के दौरान मौत हो गई थी।

जाकिया ने दंगों के पीछे की बड़ी साजिश होने का दावा किया और 2006 में इसकी शिकायत दर्ज कराई थी। सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात दंगों के मामलों की निगरानी के दौरान 2011 में एसआईटी को आरोपों की जाँच करने का निर्देश दिया था। फरवरी 2012 में एसआईटी ने शिकायत पर क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की। इसके बाद याचिकाकर्ता ने निचली अदालत में अर्जी देकर क्लोजर रिपोर्ट को चुनौती दी थी, जिसे खारिज कर दिया गया।

क्लोजर रिपोर्ट के खिलाफ एक अपील गुजरात उच्च न्यायालय के समक्ष भी लाई गई, जिसने 5 अक्टूबर 2017 को इसे ठुकरा दिया। इसके बाद याचिकाकर्ता ने 2018 में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। मामले की सुनवाई 14 दिनों तक चली और याचिकाकर्ता का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने किया। राज्य सरकार का प्रतिनिधित्व सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने किया जबकि वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी एसआईटी की ओर से पेश हुए। 27 फरवरी 2002 को गोधरा ट्रेन जलाने की घटना में अयोध्या से लौट रहे 59 कारसेवकों के मारे जाने के एक दिन बाद दंगे भड़क उठे थे।

बॉलीवुड की महिला सिंगर की फोटो पोर्न साइट्स पर, लंच बॉक्स में टट्टी: सलमान खान के खिलाफ बोलने पर गैंगरेप-हत्या तक की दी गई धमकी

सिंगर सोना मोहपात्रा (Sona Mohapatra) ने उस दौर के बारे में बताया है, जब उन्हें सलमान खान (Salman Khan) के खिलाफ बोलने पर भयानक ट्रोलिंग का शिकार होना पड़ा था। उन्हें गैंगरेप और हत्या तक की धमकी दी गई थी। उनकी तस्वीरें मॉर्फ कर पोर्न साइट्स पर डाल दी गई थी। स्टूडियो में उन्हें मल से भरे लंचबॉक्स भेजे गए थे।

सोना मोहपात्रा ने ई-टाइम्स को हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में इसका खुलासा किया है। उन्होंने कहा, “मैं सबसे भयानक ट्रोलिंग से गुजरी हूँ। इसमें जान से मारने और रेप की धमकी से लेकर मेरे स्टूडियो में डब्बे (लंच बॉक्स) में टट्टी (Shit) भेजने जैसी घटिया घटनाएँ तक शामिल हैं। ये सब इसलिए हुआ, क्योंकि मैंने सलमान खान को उनकी महिला विरोधी बयानबाजी के लिए लताड़ लगाई थी। मेरा यह बयान वायरल हो गया था।”

सोना ने कहा कि उनके साथ यह सब दो महीने तक चलता रहा और फिर महिला एवं बाल विकास मंत्री को महिलाओं और बच्चों की बेहतर सुरक्षा के लिए ऑनलाइन कैंपेन लॉन्च करना पड़ा। महिला एवं बाल विकास मंत्री को ‘I am being trolled’ हैशटैग निकालना पड़ा। सोना ने बताया कि उनकी प्रताड़ना का सिलसिला यहीं नहीं रुका। पॉर्न साइट्स पर उनकी तस्वीर मॉर्फ्ड कर डाली जाती थी और हर रोज उन्हें गैंगरेप की धमकी जी जाती थी, जो बेहद डरावना था। सिंगर ने कहा कि तब उन्हें एहसास हुआ कि ये सब प्लान्ड था और यह काम एक मजबूत डिजिल आर्मी का था, जरूरी नहीं कि एक्टर के फैंस ने ही ऐसा किया हो।

उन्होंने कहा, “उस वक्त डराने और धमकाने के कल्चर को ये बढ़ावा दे रहे थे ताकि महिलाएँ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से दूर रहे, पर ये सब कुछ सोचा-समझा हुआ प्लान था। बहुत सारे पेड बोट्स थे, जिन्होंने इस खेल को शुरू किया था।” सोना ने बताया कि उनके साथ हुईं घटनाओं का असर उनके परिवार पर भी पड़ा था। उनके पति राम सपंत इन सभी बातों से इतना परेशान हो गए थे कि कई बार वह स्टूडियो से वापस आकर सिसकने लगते थे। परिवार वाले भी काफी परेशान रहते थे।

क्या था पूरा मामला?

सलमान खान ने 2016 एक विवादित बयान दिया था। फिल्म सुल्तान की शूटिंग के बाद कहा था कि उन्हें एक रेप की हुई महिला जैसा महसूस हो रहा है। इस पर उन्हें लताड़ लगाते हुए सोना मोहपात्रा ने कहा था, “महिलाओं की पिटाई, लोगों पर चढ़ाई कर देना, वाइल्ड लाइफ कत्लेआम और फिर देश का हीरो। ये सही नहीं है। ऐसे फैंस से भरा है भारत। सुना है कि सलमान ने अपने बयान को वापस लेने की कोशिश की थी। सॉरी बोलने से दुख नहीं होगा, करोड़ों लोगों के आइडल। अपने पापा से हर रोज सॉरी बुलवाना अच्छी बात नहीं है। अपने फैंस को प्लीज कुछ अच्छा सिखाएँ।” उल्लेखनीय है कि सलमान के इस बयान को लेकर उनके पिता सलीम खान को माफी माँगनी पड़ी थी।

इसके बाद भी कई मौकों पर सलमान के खिलाफ सोना बोल चुकी हैं। प्रियंका चोपड़ा ने जब शादी के लिए ‘भारत’ का ऑफर ठुकरा दिया था तो सलमान ने कहा था कि प्रियंका ने सिंगर-एक्टर निक जोनस से शादी करने के लिए अपने करियर की सबसे बड़ी फिल्म छोड़ दी है, जबकि लोग इसके लिए अपने पति को छोड़ देते हैं।” तब सोना मोहपात्रा ने सलमान खान को जवाब देते हुए ट्वीट किया था, “प्रियंका चोपड़ा के पास जीवन में करने के लिए बेहतर चीजें हैं। खास तौर पर वह अपनी जर्नी से महिलाओं को प्रेरित कर रही हैं।”

अब्बा लगाते थे पंचर, बेटा पत्थरबाजों पर लगाने लगा पैसा: कानपुर के चंद्रेश्वर हाता पर कब्जा करना चाहता था मुख्तार, जुमे पर हुई थी हिंसा

कानपुर में 3 जून 2022 को जुमे पर हिंसा हुई थी। इस मामले में मुख्तार अहमद की गिरफ्तारी हुई है। वह बाबा बिरयानी के नाम से रेस्टोरेंट चलाता है। उस पर पत्थरबाजों को फंडिंग का आरोप है। बताया जा रहा है कि हिंसा की आड़ में वह चंद्रेश्वर हाते पर कब्जा करना चाहता था।

दरअसल, अवैध कब्जा और मुख्तार का पुराना नाता रहा है। पिछले दिनों यह बात भी सामने आई थी कि जिस जगह बाबा बिरयानी चल रही, वह जगह सरकारी दस्तावेजों में राम जानकी मंदिर के नाम पर है। इसके दम पर ही उसके अकूत संपत्ति जुटाने की बात कही जाती है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मुख़्तार के अब्बा मोहम्मद इशहाक अहमद उर्फ बाबा साल 1968 में बेकनगंज के राम-जानकी मंदिर के पास साइकिल का पंचर लगाया करते थे। शुरुआत में मुख्तार भी इस पंचर शॉप में काम करता था। बाद में वह इसी जगह पर बिस्किट और मिठाई बेचने लगा। 1990 के दशक में उसने कथित तौर पर कानपुर गैंगस्टर लाला हड्डी के साथ मिलकर प्रॉपर्टी डीलिंग का काम शुरू किया। बाद में वह विवादित जमीनों को खरीदने और कब्ज़ा हटवाने जैसे अवैध कामों में भी शामिल हो गया। इस काम में उसकी मदद करने वाले SBI के एक मैनेजर को नौकरी भी गँवानी पड़ी थी।

बजरंग दल के कानपुर जिला संयोजक कृष्णा तिवारी के मुताबिक, “मुख़्तार अहमद कानपुर के कई बड़े अपराधियों का संरक्षक रहा है। साल 2017 में कानपुर गैंगवार में मारे गए डी-2 गैंग के दुर्दांत अपराधी गुलाम नबी से मुख़्तार के सम्पर्क पाए गए थे। मात्र 25 सालों में वो एक सामान्य आदमी से करोड़पति कैसे हो गया इसकी जाँच हर हल में होनी चाहिए।”

प्रॉपर्टी के क्षेत्र में मुख़्तार अहमद अहमद का नया साथी मोहम्मद वसी है। उस पर भी दंगाइयों को फंडिंग का आरोप है। माना जा रहा है कि मुख्तार अहमद ने कागजों में फेरफेरी करते हुए कई शत्रु संपत्तियों की खरीद-फरोख्त की है। मुख़्तार अहमद उर्फ़ बाबा पर न सिर्फ अपराधियों से गठजोड़ बल्कि मंदिरों की जमीनों पर भी कब्ज़े के आरोप लगे हैं।

रिपोर्टों के अनुसार कानपुर के बेकनगंज स्थित डॉक्टर बेरी चौराहा का भवन संख्या 99/14ए रिकॉर्ड में राम-जानकी मंदिर ट्रस्ट का है। यहाँ भगवान श्रीराम का मंदिर था। अस्सी के दशक तक यहाँ पूजा हुआ करती थी। लेकिन अब मंदिर का कुछ ही हिस्सा बचा हुआ है। वह भी जर्जर हाल में है। मंदिर के अन्य हिस्सों को तोड़कर उसका इस्तेमाल रेस्टोरेंट की रसोई के तौर पर किया जा रहा है। 

मुख़्तार से SIT की पूछताछ में हुए खुलासे के मुताबिक चंद्रेश्वर हाते पर मुख़्तार के कुछ बिल्डर साथियों की नजर थी। हिंसा के दौरान मुख़्तार के ही एक सहयोगी ने रुमाल लहराते हुए भीड़ को चंद्रेश्वर हाते की तरफ आने का इशारा किया था। माना जा रहा है कि चंद्रेश्वर हाते को कब्ज़ा कर वहाँ आपर्टमेंट बनाने की प्लानिंग थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पुलिस की पूछताछ में मुख़्तार ने बताया कि 500 रुपए से 1000 रुपए दे कर बाहर से पत्थरबाज बुलाए गए थे। हिंसा की साजिश बाबा बिरयानी में रची गई थी। इस साजिश में 15 से 16 युवकों को हिंसा फैलाने के लिए अलग-अलग टास्क दिए गए थे। पथराव के दौरान वह वीडियो कॉल कर पूरे हंगामे को देख रहा था। पूछताछ में उसने कई अन्य आरोपितों के नाम भी पुलिस को बताए हैं। उसे 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। 

बोले एकनाथ शिंदे- हमें डरा नहीं सकते… हम असली शिवसैनिक: गुवाहाटी के होटल में विधायकों का आना जारी, क्या उद्धव बाप-बेटे ही बचेंगे

क्या एकनाथ शिंदे 37 का वो मैजिक फिगर हासिल कर पाएँगे जो उन्हें और उनके समर्थक शिवसेना विधायकों को दलबदल कानून के तहत कार्रवाई से बचा पाएगा?

ये वो सवाल है जो महाराष्ट्र में सियासी बवंडर की शुरुआत के बाद से लगातार पूछा जा रहा था। इसका जवाब मिल गया है। 37 शिवसेना विधायकों के हस्ताक्षर वाला पत्र महाराष्ट्र विधानसभा के उपाध्यक्ष नरहरि झिरवाल को भेजा जा चुका है। इसमें बताया गया है कि इन विधायकों ने आम सहमति से एकनाथ शिंदे को अपना नेता और भारत गोगावले को व्हिप ​चुना है।

दलबदल कानून के प्रावधानों के अनुसार शिंदे दो तिहाई विधायकों का समर्थन मिलने पर पार्टी पर अपना दावा कर सकते हैं। महाराष्ट्र में फिलहाल शिवसेना के 55 विधायक हैं। ऐसे में एकनाथ शिंदे को 37 पार्टी विधायकों के समर्थन की जरूरत थी। डिप्टी स्पीकर को भेजे गए पत्र के बाद स्पष्ट है कि अब शिवसेना के नाम, निशान, झंडे और रंग पर उनका दावा बनता है।

इस पत्र के बाद भी महाराष्ट्र के विधायकों का असम के गुवाहाटी पहुँचना जारी है। यहीं के रेडिसन ब्लू होटल में शिंदे अपने समर्थक विधायकों के साथ हैं। इनमें कुछ निर्दलीय भी है। मीडिया रिपोर्टों में अब शिंदे समर्थक विधायकों की संख्या 50 के करीब बताई जा रही है। साथ ही कई और विधायकों के उनके साथ आने की बात कही जा रही है। इस सिलसिले को देखते हुए अब यह पूछा जाने लगा है कि आखिर में क्या उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे अकेले रह जाएँगे?

इधर शिवसेना सांसद अरविंद सावंत ने एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) समेत 12 बागी विधायकों को अयोग्य ठहराने की अर्जी दी है। याचिका पर एकनाथ शिंदे ने पलटवार किया है। एकनाथ शिंदे ने मराठी में ट्वीट कर कहा, “आप धमकी देकर किसे डराने की कोशिश कर रहे हैं? हम आपकी चाल के साथ-साथ कानून भी जानते हैं। संविधान की दसवीं अनुसूची के अनुसार विधायी कार्यों के लिए व्हिप की आवश्यकता होती है न कि विधायक दल की बैठकों के लिए। इस पर सुप्रीम कोर्ट के कई फैसले हैं।”

उन्होंने कहा, “12 विधायकों के खिलाफ कार्रवाई की अर्जी देकर आप हमें डरा नहीं सकते, क्योंकि हम शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे के असली शिवसेना और असली शिव सैनिक हैं। इसके अलावा, हम कानून भी जानते हैं। इसलिए हम इस तरह की धमकियों पर ध्यान नहीं देते। नंबर्स नहीं होने के बावजूद अवैध समूह बनाने के लिए हम आपके खिलाफ कार्रवाई की माँग करते हैं।”

अरविंद सावंत ने कहा था कि उन्होंने महाराष्ट्र विधानसभा के डिप्टी स्पीकर के समक्ष याचिका दायर कर माँग की है कि 12 विधायकों की सदस्यता रद्द कर दी जानी चाहिए, क्योंकि वे कल की बैठक में शामिल नहीं हुए थे। उन्होंने कहा कि बैठक से पहले नोटिस जारी किया गया था, जिसमें कहा गया था कि अगर वह बैठक में शामिल नहीं हुए तो संविधान के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

जिन विधायकों की सदस्यता रद्द करने की माँग की गई है उनमें एकनाथ शिंदे, प्रकाश सुर्वे, तानाजी सावंतो, महेश शिंदे, अब्दुल सत्तारी, संदीप भुमरे, भरत गोगावाले, संजय शिरसातो, यामिनी यादव, अनिल बाबरी, बालाजी देवदास और लता चौधरी का नाम शामिल है।

शरद पवार ने फ्लोर टेस्ट के लिए तैयार रहने को कहा, इधर उद्धव ठाकरे के दूत रवींद्र पाठक ने भी मारी पलटी: शिंदे बोले- राष्ट्रीय पार्टी हमारे साथ

महाराष्ट्र में आए सियासी संकट के कारण शिवसेना की मुश्किलें लगातार बढ़ती ही जा रही हैं। एक के बाद एक शिवसेना के बागी विधायक उसका साथ छोड़कर एकनाथ शिंदे के साथ मिलते जा रहे हैं। इस बीच एनसीपी के मुखिया शरद पवार ने कहा है कि फ्लोर टेस्ट से ही तय होगा कि किसके पास बहुमत है और किसके पास नहीं। उन्होंने एनसीपी को फ्लोर टेस्ट के लिए तैयार रहने को कहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, कथित तौर पर मुंबई में अपने ‘सिल्वर ओक’ आवास पर अपनी पार्टी के प्रमुख नेताओं की बैठक की अध्यक्षता की। इस दौरान उन्होंने फ्लोर टेस्ट की संभावनाओं पर बात की। उन्होंने कहा है कि उनकी पार्टी पूरी तरह से उद्धव ठाकरे का समर्थन करेगी। सूत्रों का कहना है कि शरद पवार को इस बात की उम्मीद है कि गुवाहाटी गए शिवसेना के कुछ विधायक अपना मन बदल लेंगे और वापस शिवसेना में लौट आएँगे।

बागियों को मनाने गुवाहाटी गए शिवसेना विधायकों ने मारी पलटी

हालाँकि, पवार के दावे के उलटा ही होता दिख रहा है। रिपब्लिक टीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे ने शिवसेना विधायक रवींद्र पाठक को एकनाथ शिंदे को मनाने का काम सौंपा था। हालाँकि, पाठक ने अपना पाला बदल लिया है। उनके साथ शिवसेना के दो अन्य विधायक मिलिंद नारवेकर और संजय राठौर अब गुवाहाटी चले गए हैं।

गौरतलब है कि गुवाहाटी में एकनाथ शिंदे जिस होटल में बागी विधायकों के साथ ठहरे हुए हैं, उसका एक वीडियो भी सामने आया था। इसमें शिंदे समेत 42 विधायकों को देखा गया था। अब अगर शिवसेना के ये तीन और विधायक शिंदे के साथ मिल जाते हैं तो एकनाथ शिंदे का समर्थन करने वाले विधायकों की संख्या बढ़कर 45 हो जाएगी।

इस बीच एकनाथ शिंदे ने जबरन बंधक बनाने का आरोप लगाने वाले नितिन देशमुख के आरोपों पर पलटवार किया है। शिंदे ने उनके साथ नितिन देशमुख के साथ तस्वीरों को जारी किया है।

राष्ट्रीय पार्टी हमारे साथ

इसी क्रम में एक और वीडियो सामने आया है, जिसमें बागी विधायकों से शिंदे कहते हैं कि वे एक राष्ट्रीय पार्टी हैं और उन्होंने मुझे अपना समर्थन दिया है। राष्ट्रीय पार्टी ने हमें कहा है कि मैंने ऐतिहासिक फैसला लिया है। शिंदे के मुताबिक, वो महाशक्ति उनके पीछे खड़ी है और आवश्यकता पड़ने पर वो मदद करेगी। इसके साथ ही उन्होंने सर्जिकल स्ट्राइक का उदाहरण देकर बीजेपी की तारीफ भी की।

हालाँकि, शिंदे ने खुलकर बीजेपी नाम तो नहीं लिया, लेकिन माना जा रहा है कि उनका इशारा बीजेपी की ही तरफ था।

NDTV के पूर्व पत्रकार ने शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे पर की अपमानजनक टिप्पणी, चैनल की भी उधेड़ी बखिया, ये है मामला

महाराष्ट्र में जारी सियासी उठापटक के बीच पत्रकार नदीम अहमद काजमी ने ट्विटर पर शिवसेना के बागी नेता एकनाथ शिंदे का अपमान किया और उनका मजाक उड़ाया। हालाँकि, जब यह बताया गया कि वह NDTV के लिए काम नहीं करता है, तो पत्रकार अपने पूर्व चैनल की ही बखिया उधेड़ने लगा। दरअसल, काजमी इस वक्त एनडीटीवी में काम नहीं करते हैं। चैनल ने उन्हें (काजमी) वर्ष 2017 में ही निकाल दिया था, लेकिन उनके ट्विटर बायो में अभी भी वर्किंग विद एनडीटीवी लिखा हुआ है, जिससे किसी को भी भ्रम हो सकता है कि वह इस विवादास्पद चैनल के लिए काम कर रहे हैं।

नदीम अहमद काजमी ने बुधवार (22 जून 2022) को शिंदे के खिलाफ एक अपमानजनक ट्वीट किया था, जो इस वक्त अपने सभी विधायकों के साथ असम के गुवाहाटी में रेडिसन ब्लू होटल में डेरा जमाए हुए हैं। पत्रकार ने ट्वीट किया, “शालीनता मायने रखती है… शिंदे फिर से एक ऑटो चालक बनेंगे… बस मेरे शब्दों पर गौर करें।”

एनडीटीवी के तथाकथित पूर्व पत्रकार ने शिंदे को नीचा दिखाने के लिए उनके अतीत का सहारा लिया। एकनाथ शिंदे कभी मुंबई से सटे ठाणे शहर में एक ऑटो-रिक्शा चालक थे। 1980 में, वह शिवसेना सुप्रीमो बालासाहेब ठाकरे से प्रभावित हुए थे। वह राज्य की राजनीति में अपनी सफलता के पीछे पार्टी संस्थापक बाला साहेब ठाकरे का कई बार आभार जता चुके हैं। शिंदे ने एक कार्यकर्ता के रूप में अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत की थी। वह अपने संगठनात्मक कौशल और जनसमर्थन के बल पर शिवसेना के शीर्ष नेताओं में शुमार हो गए। चार बार विधायक रह चुके शिंदे, महा विकास अघाड़ी (एमवीए) सरकार में शहरी विकास और पीडब्ल्यूडी विभागों को संभालते हैं। 58 वर्षीय शिंदे ने राजनीति में कदम रखने के बाद बेहद कम समय में महाराष्ट्र के ठाणे-पालघर में शिवसेना के प्रमुख नेता के तौर पर अपनी पहचान बनाई। उन्हें जनता से जुड़े मुद्दों को आक्रामक तरीके से उठाने के लिए पहचाना जाता है।

एक यूजर वरुण शर्मा (@LogicalHindu_) ने अपने ट्विटर हैंडल पर काजमी के ट्विटर बायो के स्क्रीनशॉट के साथ उसका अपमानजनक ट्वीट का स्क्रीनशॉट साझा किया है। इस बायो में वह खुद को अभी भी एनडीटीवी का पत्रकार बताता है। वरुण शर्मा ने चैनल की एडिटोरियल डायरेक्टर सोनिया सिंह, कंसल्टिंग एडिटर निधि राजदान और न्यूज एंकर गार्गी रावत अंसारी को टैग करते हुए लिखा, “नदीम काजमी NDTV के पत्रकार हैं। अपने साथियों को शालीनता, शिष्टाचार और नैतिकता सिखाने वाली सोनिया सिंह, निधि राजदान और गार्गी रावत आप पर गर्व है।”

ट्विटर यूजर वरुण शर्मा ने अपने दूसरे ट्वीट में प्रेस क्लब ऑफ इंडिया को टैग करते हुए पूछा कि क्या वे अपने महासचिव नदीम अहमद काजमी द्वारा की गई टिप्पणी का समर्थन करते हैं।

NDTV की एडिटोरियल डायरेक्टर सोनिया सिंह ने वरुण शर्मा के ट्वीट का जवाब देते हुए कहा, “नदीम अहमद काज़मी 2017 से एनडीटीवी के साथ नहीं हैं।”

सोनिया सिंह के जवाब से काजमी का चैनल को लेकर पुराना जख्म फिर से ताजा हो गया और उन्होंने एनडीटीवी के लिए बेहद निम्नस्तरीय भाषा का प्रयोग किया। काजमी ने लिखा, “मामला विचाराधीन है। अदालत में पेश नहीं होने पर एनडीटीवी पर 10 हजार जुर्माना लगाया गया है कृपया अपने वकीलों से पता करें। धन्यवाद।” एक अन्य ट्विटर यूजर ने उनसे पूछा कि उनके और एनडीटीवी के बीच ऐसा क्या गलत हुआ है? इस पर काजमी ने दावा किया कि 2017 में चैनल ने ​उन्हें निकाल दिया था, जबकि उन्होंने दो दशक तक चैनल में अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान दिया।

वह यही नहीं रुके उन्होंने अपने दर्द बयाँ करते हुए आगे कहा, “मैं संस्थान के साथ पूरी ईमानदारी के साथ 2 दशक तक मजबूती से खड़ा रहा। अपने कर्तव्यों से पीछे नहीं हटा। लेकिन आप जानते हैं.. उस वक्त मुझे बहुत कष्ट हुआ जब मुझे दिल्ली छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा। 58 साल की उम्र में जीवन के अंतिम पड़ाव पर मेरे पास आय का कोई साधन नहीं है।”

नदीम अहमद काज़मी के ट्विटर बायो का स्क्रीनशॉट

काजमी ने खुद शिकायत की थी कि चैनल ने उन्हें गलत तरीके से निकाल दिया था। ऐसे में यह बेहद हैरान करने वाली बात है कि वह फिर भी खुद को एनडीटीवी का पत्रकार बताते हैं। उनके ट्विटर बायो में 2017 के बाद से यानी 5 सालों से एनडीटीवी लिखा हुआ है। यही नहीं उनके लिंक्डइन प्रोफाइल में भी लिखा है कि वह ‘एनडीटीवी में असाइनमेंट‘ पर हैं।

नदीम काजमी के लिंक्डइन प्रोफाइल का स्क्रीनशॉट।

बता दें कि महाराष्ट्र में शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे से लेकर उद्धव ठाकरे के खास मानें जाने वाले एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे का सारा खेल बिगाड़ दिया है। विधायकों के पाला बदलने से शिवसेना प्रमुख एक तरफ छटपटा रहे हैं और विधायकों की तलाश में मुंबई का चप्पा-चप्पा छान मार रहे हैं। उद्धव ठाकरे की नाक के नीचे से निकल बागी नेता एकनाथ शिंदे के खेमे में शामिल हो रहे हैं, लेकिन शिवसेना प्रमुख को इसकी भनक भी नहीं लग पा रही है। इस बौखलाहट में शिवसेना को समझ नहीं आ रहा है कि वह क्या करें और क्या बोले? शिवसेना ने अपने मुख पत्र ‘सामना’ के संपादकीय में मौजूदा सियासी तूफान को ‘स्वप्न दोष’ की तरह बताया है। पार्टी ने अपने बागियों को चेताया है कि समय रहते सावधान हो जाएँ, वरना उन्हें कचरे में फेंक दिया जाएगा।

जमात-ए-इस्लामी से जुड़े IAMC ने द वायर, न्यूजलॉन्ड्री, स्क्रॉल और कारवां के पत्रकारों को बाँटे नकद पुरस्कार: भारत के खिलाफ प्रोपेगेंडा है ‘मुख्य एजेंडा’

इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल (IAMC) एक कट्टरपंथी इस्लामी समूह है। इसका कथित तौर पर प्रतिबंधित आतंकी संगठनों जैसे स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) के साथ गहरा संबंध है। वहीं, सिमी का भारत के खिलाफ साजिश रचने का पुराना इतिहास है। इस कट्टरपंथी संगठन (IAMC) ने द वायर, न्यूज मिनट, न्यूज़लॉन्ड्री और अन्य संस्थानों के ‘पत्रकारों’ को अपने प्रोपेगेंडा को आगे बढ़ाने के लिए नकद पुरस्कार वितरित किए हैं।

अपने वार्षिक ह्यूमन राइट्स एंड रिलिजियस फ्रीडम जर्नलिज़्म अवार्ड्स-2022 (HRRF) के लिए IAMC ने दुष्प्रचार करने वाले संस्थानों से अपने पसंदीदा पत्रकारों को चुना है। IAMC अमेरिका में भारतीय मुस्लिमों की पैरवी करने वाला सबसे बड़ा संगठन होने का दावा करता है। यह अक्सर शरिया कानून की वकालत करता है और भारत के खिलाफ गलत सूचना देता है। उसने अपने कुछ पसंदीदा ‘पत्रकारों’ के लिए लाखों रुपए नकद पुरस्कार के रूप में दिया है।

विभिन्न नकद पुरस्कारों के लिए चुने गए नामों में द कारवां मैगज़ीन के शाहिद तांत्रे, स्क्रॉल की ऐश्वर्या एस अय्यर, द वायर की इस्मत आरा, द कारवां की सुमेधा मित्तल, द वायर की नाओमी बार्टन, द न्यूज़ मिनट की प्रियंका तिरुमूर्ति और न्यूज़लॉन्ड्री की आकांक्षा कुमार शामिल हैं। सर्वश्रेष्ठ मीडिया संस्थानों के पुरस्कार लिए इस्लामिक आतंकवाद की पैरवी करने वाले द स्क्रॉल, न्यूज़लॉन्ड्री, मकतूब मीडिया, आर्टिकल 14 और ‘मूकनायक’ जैसे पोर्टलों को शॉर्टलिस्ट किया है।

लोकप्रिय ट्विटर हैंडल The Hawkeye ने शॉर्टलिस्ट किए गए सभी नामों के स्क्रीनशॉट साझा किए हैं, जिसमें विभिन्न कैटेगरी में विजेताओं की घोषणा की गई है।

मानवाधिकारों एवं धार्मिक स्वतंत्रता पर सर्वश्रेष्ठ रिपोर्टिंग के लिए न्यूज़लॉन्ड्री की आकांक्षा शर्मा के नाम की घोषणा की है। इनकी ज्यादातर स्टोरी यूपी में धर्मांतरण के मास्टरमाइंड मौलाना उमर गौतम के बारे में थीं।

फोटो साभार: आईएएमसी की वेबसाइट से लिया गया स्क्रीनशॉट

वीडियो स्टोरी कैटेगरी में न्यूज मिनट की प्रियंका तिरुमूर्ति और कारवां मैगजीन के शाहिद तांत्रे ​को विनर घोषित किया गया।

फोटो साभार: आईएएमसी की वेबसाइट से लिया गया स्क्रीनशॉट

यूके स्थित एक मैगजीन का सैयद शहरियार सर्वश्रेष्ठ फोटो कैटेगरी में विजेता है। द वायर की इस्मत आरा, जो हाल ही में मनाफ नाम के एक चाय विक्रेता की ‘स्टोरी’ के लिए सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी। वह ‘यंग जर्नलिस्ट ऑफ द ईयर’ कैटेगरी में स्क्रॉल की ऐश्वर्या एस अय्यर के साथ विजेता घोषित की गई हैं। ये सभी पुरस्कार उन मीडिया संस्थानों को दिए गए हैं, जो इस्लामवादी और पाकिस्तान के समर्थक हैं। ये संस्थान भारत के खिलाफ दुष्प्रचार करते हैं। ये दावा करते हैं कि भारत के मुस्लिमों को मोदी सरकार में डराया जा रहा है।

सर्वश्रेष्ठ मीडिया संस्थान की कैटेगरी में आर्टिकल 14 और मूकनायक विजेता हैं। अवॉर्ड शो में अमेरिका स्थित पत्रकार और शो ‘डेमोक्रेसी नाउ’ के निर्माता एमी गुडमैन पुरस्कार समारोह में मुख्य वक्ता थे। IAMC वेबसाइट के अनुसार, इस दौरान ब्रिटिश पत्रकार यवोन रिडले ने कहा, “नरेंद्र मोदी सरकार में भारत के अहम पहलुओं के बारे में चर्चा करना और इस पर लिखना यहाँ के पत्रकारों के लिए जोखिम भरा है।”

गौरतलब है कि IAMC एक जमात-ए-इस्लामी समर्थित लॉबिस्ट संगठन है। यह भारतीय मुस्लिमों के अधिकारों की वकालत करने का दावा करता है। इस साल जनवरी में भारत के पूर्व उप-राष्ट्रपति हामिद अंसारी और बॉलीवुड अभिनेत्री स्वरा भास्कर के ‘इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल (IAMC)’ के एक कार्यक्रम में अतिथि के रूप में जाने को लेकर उन पर कई सवाल उठ रहे थे, क्योंकि अब तक IAMC का रुख भारत विरोधी रहा है और मुस्लिमों के हित के नाम पर वो देश के विरुद्ध प्रोपेगेंडा चलाता रहा है। अमेरिका में ‘भारत में मुस्लिम खतरे में हैं’ में वाला माहौल बनाने में उसका हाथ है। साथ ही वो अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी ये नैरेटिव चलाता है। यही नहीं आईएएमसी भारत को ब्लैकलिस्ट करने की पैरवी की थी।