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1000+ मौतें और 1500 से अधिक घायल: अफगानिस्तान में भूकंप से 3000+ घर धराशायी, धीरे-धीरे सामने आ रही तबाही की तस्वीर

अफगानिस्तान (Afghanistan) में बुधवार को (22 जून 2022) को आए 6.1 मैगेनीट्यूड की तीव्रता वाले एक शक्तिशाली भूकंप (Earthquake) में कम से कम 1,000+ लोगों के मारे जाने की खबर सामने आई है। हादसे के दूसरे दिन दावा किया जा रहा है कि इस आपदा में कम से कम 1,500 से अधिक लोग घायल हुए हैं। भूकंप के कारण अफगानिस्तान में बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान हुआ है।

रिपोर्ट के मुताबिक, कम से कम भूकंप के कारण 3000+ घर धराशाई हो गए हैं। बताया जा रहा है कि भूकंप का केंद्र पाकिस्तान से सटे पक्तिका प्रान्त में था। यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे ने कहा कि 6.1 तीव्रता का भूकंप पाकिस्तानी सीमा के पास खोस्त शहर से लगभग 44 किमी (27 मील) दूर, 51 किमी (31 मील) की गहराई पर आया।

शीर्ष तालिबान सेना के एक प्रवक्ता ने कहा कि कमजोर टेलीफोन नेटवर्क के कारण राहत और बचाव कार्यों में खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ये दो दशकों में अफगानिस्तान का सबसे घातक भूकंप था। आशंका है कि मृतकों की संख्या बढ़ सकती है।

स्थानीय न्यूज चैनल टोलो न्यूज के मुताबिक, तालिबान सरकार ने भूकंप से प्रभावित लोगों की मदद के लिए 1 अरब अफगानी (87.53 करोड़ रुपये के बराबर) का पैकेज जारी किया है। अफगानिस्तान के प्राकृतिक आपदा प्रबंधन राज्य मंत्रालय के उप मंत्री मवलवी शराफुद्दीन मुस्लिम ने भूकंप में मारे गए लोगों के परिवारों के लिए 100,000 अफगानी और घायलों को 50,000 अफगानी की सहायता देने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि देश के प्रधानमंत्री के आदेश पर ये निर्णय लिया गया है।

इसके साथ ही तालिबानी नेता ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भूकंप के कारण हुए विनाश से उबरने में इस्लामी अमीरात की मदद करने की अपील की है।

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अफगानिस्तान में भूकंप से हुई तबाही पर संवेदना जाहिर करते हुए मानवीय मदद की पेशकश की है। इसके अलावा पाकिस्तान, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे कई अन्य देशों ने भी सहायता का ऐलान किया है।

जुमे पर नमाज पढ़ने गए अटाला मस्जिद, हिंसा के लिए उकसाया: प्रयागराज हिंसा में गिरफ्तार मोहम्मद सगीर ने बताया, रिपोर्ट में दावा

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में 10 जून 2022 को जुमे की नमाज़ के बाद हुई हिंसा में फरार आरोपित मोहम्मद सगीर को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस पूछताछ में उसने मस्जिद में खुद के भड़काए जाने की जानकारी दी है। बुधवार (22 जून 2022) को सगीर को जेल भेज दिया गया है। वहीं यूपी पुलिस अभी भी फरार चल रहे 31 अन्य उपद्रवियों की तलाश कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक गिरफ्तार आरोपित सगीर का नाम डियर भी है। वह ई रिक्शा चलाता है और साथ में मांस भी सप्लाई करता है। हिंसा के बाद वो करेली में ही छिपा रहा और मौका देख कर अपने एक रिश्तेदार के घर भाग गया था। वो माहौल शांत होने की प्रतीक्षा कर रहा था। हालात सामान्य होते ही वो वापस लौट आया लेकिन खुल्दाबाद थाने की पुलिस ने उसे दबोच लिया।

पुलिस की पूछताछ में सगीर ने बताया कि घटना के दिन वो अटाला की मस्जिद में नमाज़ पढ़ने गया था। तभी वहाँ उसे प्रदर्शन के लिए उकसाया गया। इसी के बाद वो अन्य उपद्रवियों के साथ हिंसा में शामिल हो गया। बाद में पुलिस का दबाव बनते ही वो छिप गया था। पूछताछ में सगीर ने अन्य उपद्रवियों के नाम भी बताए है जिनकी पुलिस तलाश कर रही है। DSP प्रथम सत्येंन्द्र तिवारी ने जागरण से बताया कि गिरफ्तार सगीर अटाला मोहल्ले का ही रहने वाला है।

पुलिस अटाला मस्जिद के मुतवल्ली हाफिज, पार्षद फ़ज़ल खान और AIMIM के जिलाध्यक्ष शाह आलम की भी तलाश कर रही। इन सभी पर मस्जिद में मौजूद लोगों को हिंसा के लिए भड़काने का आरोप है। इन सभी के खिलाफ गैर जमानती वारंट भी जारी है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक प्रयागराज में हुई हिंसा में कुल 95 नामजद और 5400 अज्ञात उपद्रवियों पर केस दर्ज हुआ है। इन नामजदों में 31 आरोपित अभी भी फरार चल रहे हैं। बता दें कि प्रयागराज हिंसा में शामिल अब तक 103 आरोपित जेल भेजे जा चुके हैं जिसमें कुछ नामजद और कुछ CCTV व अन्य फुटेज से चिन्हित किए गए हैं।

शिवसेना के ‘तलाक’ में ‘दीदी’ के नेता हुए बावले, असम के उस होटल के बाहर TMC का प्रदर्शन जहाँ विधायकों के साथ हैं एकनाथ शिंदे

महाराष्ट्र की राजनीति में चल रहे उथलपुथल के बीच अब ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की भी एंट्री हो गई है। असम के जिस होटल में शिवसेना के बागी विधायक ठहरे हुए हैं, उसके बाहर तृणमूल कॉन्ग्रेस ने आज (23 जून 2022) सुबह जमकर विरोध प्रदर्शन किया। विरोध का नेतृत्व तृणमूल कॉन्ग्रेस के असम प्रमुख रिपुन बोरा (Assam chief Ripun bora) ने की। विरोध के बीच बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी और सुरक्षाकर्मी प्रदर्शनकारियों को काबू में करने में लगे रहे।

न्यूज एजेंसी ANI की खबर के मुताबिक, गुवाहाटी में रैडिसन ब्लू होटल के बाहर प्रदर्शन कर रहे टीएमसी नेताओं और कार्यकर्ताओं को पुलिस ने अपनी हिरासत में ले लिया है। प्रदर्शन कर रहे टीएमसी के एक कार्यकर्ता का कहना है, “असम में लगभग 20 लाख लोग बाढ़ के कारण पीड़ित हैं। लेकिन सीएम महाराष्ट्र सरकार को गिराने में व्यस्त हैं।” 

बता दें कि एमएलसी चुनाव के नतीजों के ठीक बाद से महाराष्ट्र की राजनीति में भारी उथल-पुथल मचा हुआ है। इस उथल-पुथल का सीधा असर उद्धव ठाकरे की सरकार पर पड़ा है। शिवसेना के कद्दावर नेता एकनाथ शिंदे ने अपने बागी तेवर दिखा दिए है, जिसके बाद ऐसा माना जा रहा है कि उद्धव सरकार कभी भी गिर सकती है। महाराष्ट्र से आए शिवसेना के बागी विधायकों के समूह को गुवाहाटी के रैडिसन ब्लू होटल में रखा गया है। 

बताया जा रहा है कि असम के गुवाहाटी में रैडिसन ब्लू होटल में एकनाथ शिंदे के साथ महाराष्ट्र के कुल 42 विधायक मौजूद हैं। इसमें शिवसेना के 34 विधायक और 8 निर्दलीय विधायक शामिल हैं। वहीं होटल में मौजूद सभी बागी विधायक पूर्व गृह राज्य मंत्री और शिवसेना नेता दीपक केसरकर से भी मिले। होटल के बाहर सुरक्षाकर्मी तैनात हैं। इस होटल में आम लोगों के प्रवेश करने पर तकरीबन अब रोक लगा दी गई है। इतना ही नहीं, गुवाहाटी पुलिस ने होटल के निजी सुरक्षकर्मियों से सुरक्षा की जिम्मेदारी अपने हाथ में ले ली है।

60 गेंद-6 विकेट, मिस्ट्री फ्री हिट-महिला और पुरुष क्रिकेटर साथ: क्या 6ixty से क्रिकेट बदल देगा वेस्टइंडीज, अगस्त में शुरुआत

क्रिकेट को एक नए फॉर्मेट में लाने की तैयारी है। वेस्टइंडीज क्रिकेट (CWI) और कैरेबियन प्रीमियर लीग (CPL) मिलकर यह फॉर्मेट ला रहा है। इस साल अगस्त से इसकी शुरुआत होगी। नाम रखा गया है- द सिक्सटी (The 6IXTY)।

24 से 28 अगस्त तक सेंट किट्स एंड नेविस में आयोजित इस टूर्नामेंट के ब्रांड एंबेसडर है वेस्टइंडीज के धाकड़ बल्लेबाज क्रिस गेल। इसमें दुनिया भर के क्रिकेटरों के शिरकत करने की उम्मीद है। खास बात यह है कि टूर्नामेंट में पुरुष और महिला दोनों क्रिकेटरों की टीमों की भिड़ंत होगी।

‘The 6ixty’ में पुरुष क्रिकेटरों की छह टीम होगी। नाम रखा गया है- सेंट लूसिया किंग्स, गुयाना अमेज़ॅन वॉरियर्स, बारबाडोस रॉयल्स, ट्रिनबागो नाइट राइडर्स, जमैका तल्लावाह और सेंट किट्स एंड नेविस पैट्रियट्स। महिलाओं की तीन टीम होंगी। नाम हैं- ट्रिनबागो, बारबाडोस और गुयाना।

रिपोर्ट के मुताबिक इस टूर्नामेंट के नियम काफी अलग हैं। 20 ओवर का गेम होगा। हरेक टीम को 10-10 ओवर यानी 60 गेंद खेलने को मिलेंगे। शुरुआती 30 गेंद एक छोर से फेके जाएँगे। इसके बाद अगली 30 गेंद दूसरी छोर से। एक गेंदबाज पारी में अधिकतम 2 ओवर ही कर सकेगा। 6 विकेट गिरने पर टीम ऑल आउट मानी जाएगी। अनिवार्य पावरप्ले केवल 2 ओवर का होगा। लेकिन इन 12 गेंद में यदि कोई टीम दो छक्के लगा देती है तो वह तीसरा पावर प्ले भी ले सकती है। अतिरिक्त पावर प्ले 3 से 9 ओवर के बीच कभी भी लिया जा सकता है।

तय समय के भीतर कोई टीम अपने ओवर पूरी नहीं कर पाई तो आखिर के 6 गेंदों में उसे एक फील्डर भी कम करना होगा। गेम को रोचक बनाने के लिए मिस्ट्री-फ्री हिट रखा गया है। इसके तहत फैंस एक तय समय पर वोट करेंगे। इस दौरान बल्लेबाज आउट नहीं होगा।

वेस्टइंडीज क्रिकेट के अध्यक्ष रिकी स्केरिट ने कहा है, “6IXTY सीपीएल और सीडब्ल्यूआई के घनिष्ठ संबंधों से निकला है। यह आगे का रास्ता है। मैं प्रशंसकों के लिए लाए जा रहे इस इनोवेशन, उत्साह और मनोरंजन को लेकर उत्साहित हूँ।” सीपीएल के सीईओ पीट रसेल का मानना है कि टी10 टूर्नामेंट क्रिकेट प्रेमियों को खेल के और करीब लाएगा।

भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा के घर के बाहर आग लगाने वाले NSUI के 4 सदस्यों को दिल्ली पुलिस ने किया गिरफ्तार, CCTV फुटेज से हुई पहचान

दिल्ली पुलिस ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे पी नड्डा के आवास के आगे आगजनी करने के आरोप में कॉन्ग्रेस पार्टी की स्टूडेंट विंग NSUI के 4 सदस्यों को गिरफ्तार किया है। यह आगजनी केंद्र सरकार की अग्निपथ योजना और राहुल गाँधी से नेशनल हेराल्ड केस में ED की हो रही पूछताछ के विरोध में की गई थी। पुलिस इसी घटना में शामिल अन्य आरोपितों की भी तलाश कर रही है। चारों की गिरफ्तारी 22 जून 2022 (बुधवार) को हुई है।

NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीरज कुंदन ने गिरफ्तार चारों आरोपितों की वीडियो शेयर करते हुए पुलिस कार्रवाई की निंदा की है। उन्होंने लिखा, “BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे पी नड्डा के घर के बाहर प्रदर्शन करने पर NSUI के पदाधिकारियों पर गैरजमानती धाराएँ लगा दी गई हैं व तिहाड़ जेल भेज दिया गया है। पर हम चट्टान से हौंसलों के साथ अब भी योजना के खिलाफ तमाम छात्रों के साथ सीना ताने खड़े है। अगर NSUI के पदाधिकारियों व छात्रों की रिहाई नहीं कि गई तो सरकार छात्र आक्रोश के महाआंदोलन को झेलने के लिए तैयार रहे।”

रिपोर्ट्स के मुताबिक दिल्ली पुलिस के स्पेशल कमिश्नर सागर प्रीत हुडा ने बताया कि चारो आरोपितों की पहचान जगदीप सिंह, सर्वोत्तम राणा, प्रणव पांडेय और विशाल के रूप में हुई है। उन्होंने बताया, “घटना के दौरान आग के पुतले आवास के गेट और सुरक्षाकर्मियों के कमरों में फेंके गए थे। हालाँकि घर के अंदर मौजूद स्टाफ की सक्रियता के चलते कोई बड़ी घटना नहीं हो पाई।”

सागर प्रीत हुडा के मुताबिक, “घटना के CCTV फुटेज के आधार पर जानकारी जुटाई गई। जाँच के दौरान 10 से 12 लोगों के 2 अलग-अलग वाहनों से घटनास्थल पर पहुँचने की पुष्टि हुई। इसमें से एक वाहन हरियाणा के रोहतक के रजिस्ट्रेशन नंबर पर मिला और दूसरा उत्तर प्रदेश के बिजनौर के पते पर। मिले फुटेज के आधार पर छापेमारी की कार्रवाई की गई और आरोपितों के घरों से उन्हें पकड़ा गया।”

पुलिस के मुताबिक घटना के बाद आरोपितों पर IPC की धारा 188/146/147/149/278/285/ 307/436/120-B के तहत केस दर्ज किया गया था। इसमें दंगे भड़काने और हत्या की साजिश के साथ आपराधिक साजिश रचने की धाराएँ भी शामिल हैं।

गौरतलब है कि 21 जून 2022 को शाम लगभग 4.30 पर लगभग 1 दर्जन लोग दिल्ली के मोती लाल नेहरू मार्ग स्थित जे पी नड्डा के आवास के आगे जमा हुए थे। उन्होंने न सिर्फ भाजपा और सरकार के विरोध में नारेबाजी की बल्कि एक डंडे में बाँध कर 2 जलते पुतलों को जे पी नड्डा के आवास में फेंकने का भी प्रयास किया था। इस घटना का वीडियो भी वायरल हुआ था।

पुलिस के मुताबिक कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन के नाम पर मिली अनुमित का उललंघन किया है। दिल्ली पुलिस के स्पेशल कमिश्नर के मुताबिक, “20 जून को कॉन्ग्रेस के सचिव द्वारा जंतर मंतर पर सत्याग्रह करने की अनुमति माँगी गई थी। यह अनुमति अग्निपथ योजना और राहुल गाँधी से ED की पूछताछ के विरोध में किया जाना बताया गया। प्रदर्शन की अनुमति में सिर्फ 1000 प्रदर्शनकारियों को दी गई। लेकिन इसके बाद भी कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता जंतर मंतर पर धरना देने के बजाए 24 अकबर रोड पर बिना अनुमति के पहुँच गए। ऐसा करके उन्होंने लागू धारा 144 के नियमों की अनदेखी की थी।”

क्या एकनाथ शिंदे की मुट्ठी में है 37 का मैजिक फिगर, उद्धव ठाकरे से छिन जाएगा शिवसेना का निशान भी: जानिए क्या कहता है दलबदल कानून

महाराष्ट्र में उठे सियासी बवंडर से न केवल राज्य की महाविकास अघाड़ी की सरकार को खतरा है, बल्कि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के हाथों से शिवसेना भी निकल सकती है। रिपोर्टों की माने तो एकनाथ शिंदे पार्टी निशान पर भी दावा कर सकते हैं। इसके संकेत उन्होंने बुधवार (22 जून 2022) को उस वक्त ही दे दिए थे, जब पार्टी के व्हिप पर सवाल उठाया गया था। बागी विधायकों ने शिंदे को विधायक दल का नेता चुना था। साथ ही नया व्हिप भी नियुक्त कर दिया था।

दलबदल कानून के प्रावधानों के अनुसार शिंदे यदि दो तिहाई विधायकों का समर्थन जुटा लेते हैं तो पार्टी पर अपना दावा कर सकते हैं। महाराष्ट्र में फिलहाल शिवसेना के 55 विधायक हैं। ऐसे में एकनाथ शिंदे को 37 पार्टी विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी। ऐसा होने पर वे शिवसेना के नाम, निशान, झंडे और रंग को अपने हवाले करने का दावा ठोक सकते हैं।

फिलहाल शिंदे समर्थक विधायकों की संख्या को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। न्यूज एजेंसी एएनआई ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि उनके साथ असम के गुवाहाटी रेडिसन ब्लू होटल में 42 विधायक हैं। इनमें 8 निर्दलीय, जबकि 34 शिवसेना के हैं। यदि यह जानकारी सही है तो शिंदे फिलहाल मैजिक फिगर जुटाने में असफल दिख रहे हैं। लेकिन खुद शिंदे 46 विधायकों के समर्थन का दावा कर चुके हैं। इनमें 6-7 निर्दलीय हैं। यदि उनका दावा सही है तो फिर उद्धव ठाकरे के हाथों से शिवसेना भी निकल सकती है।

वैसे यह तो स्पष्ट तौर पर दिख रहा है कि शिंदे समर्थकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। यहाँ तक कि उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री का आधिकारिक आवास भी खाली कर चुके हैं। शिवसेना के बागी विधायकों ने शिंदे को अपना नेता चुनने के बाद राज्‍यपाल और महाराष्‍ट्र विधानसभा के डिप्‍टी स्‍पीकर को पत्र लिखा भी है।

शिवसेना में पैदा यह संकट अब केवल विधायकों तक ही सीमित नहीं है। उद्धव की कार्यशैली से पार्टी के कुछ सांसद भी नाराज बताए जा रहे हैं। पार्टी के 19 सांसद हैं। इनमें से 9 नाराज बताए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि ये भी शिवसेना को अलविदा भी कह सकते हैं। हालाँकि इनमें से को भी सांसद अभी खुलकर अपनी बात नहीं कह रहे हैं और वक्त का इंतजार कर रहे हैं।

कानपुर के पत्थरबाजों को मिले थे ₹500-1000, बाबा बिरयानी में रची गई साजिश: रिपोर्ट में दावा पुलिस के सामने मुख्तार अहमद ने उगले कई राज

कानपुर के बेकनगंज इलाके में 3 जून 2022 को हुई हिंसा मामले में गिरफ्तार किया गया बाबा बिरयानी का मालिक मुख्तार अहमद ने पुलिस की पूछताछ में कई राज उजागर किए हैं। पुलिस को मुख़्तार से क्राउड फंडिंग के बारे में कई अहम जानकारियाँ मिली हैं। इसी के साथ पूछताछ में पत्थरबाजों के रेट का भी खुलासा हुआ है। वहीं बाबा बिरयानी के मालिक को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। इन सबके साथ मुख़्तार अहमद पर मंदिर कब्ज़ा कर के बिरयानी की दुकान खोलने का भी आरोप है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पुलिस की पूछताछ में मुख़्तार ने बताया कि 500 रुपए से 1000 रुपए दे कर बाहर से पत्थरबाज बुलाए गए थे। वहीं पुलिस ने खुलासा किया है कि हिंसा की साजिश बाबा बिरयानी की दुकान में रची गई थी। इस साजिश में 15 से 16 युवकों को हिंसा फैलाने के लिए अलग-अलग टास्क दिए गए थे। पथराव के दौरान आरोपित वीडियो कॉल करके पूरे हंगामे को देख रहा था। पूछताछ में उसने कई अन्य आरोपितों के नाम भी पुलिस को बताए हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने मुख़्तार के आर्थिक स्रोतों के बारे में भी जानकारी जुटाई है। मुख़्तार को करोड़पति बनाने में एक बैंक मैनेजर का भी नाम भी सामने आ रहा है। इसके लिए हुई धोखाधड़ी में मैनेजर भी शामिल बताया जा रहा। उस पर नियमों के खिलाफ जाकर मुख़्तार को मनमानी ढंग से लोन देने का आरोप है। हालाँकि, बाद में बैंक मैनेजर को बर्खास्त कर दिया गया था। कहा जा रहा है कि पुलिस द्वारा गठित SIT जल्द ही उस बैंक मैनेजर से भी पूछताछ कर सकती है।

बता दें कि मुख़्तार अहमद को 22 जून 2022 (बुधवार) को कानपुर की एक अदालत में पेश किया गया जहाँ से उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। पुलिस की सारी पूछताछ की वीडियोग्राफ़ी करवाई गई है। हालाँकि, शुरुआत में उसने अपनी किसी भी तरह की संलिप्तता से इंकार किया था लेकिन बाद में उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया। बताया जा रहा है कि आगे की जानकारी के लिए पुलिस मुख़्तार अहमद का कस्टडी रिमांड भी ले सकती है।

गौरतलब है कि कानपुर पुलिस के मीडिया सेल ने ऑपइंडिया को बताया, “हम सभी अपडेट के बारे में प्रेसनोट जारी कर के आधिकारिक घोषणा करते हैं। फिलहाल बाबा बिरयानी के पत्थरबाजी की फंडिंग और बैंक मैनेजर केस में अभी तक हमने कोई आधिकारिक प्रेसनोट जारी नहीं की है। इसलिए हम इस खबर की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं कर सकते।” साथ ही DCP पश्चिम ने फोन नहीं उठाया। पुलिस वर्जन मिलने के बाद हम उसे खबर में अपडेट करेंगे।

‘खेत में चली गई गाय तो घोंप दिया भाला, आँत बाहर निकल लटक गई’: पीलीभीत की घटना, मनप्रीत सिंह गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत से खेत में घुसने पर गाय की हत्या का मामला सामने आया है। पुलिस ने बुधवार (22 जून 2022) को आरोपित युवक को गिरफ्तार कर लिया। उसकी पहचान मनप्रीत सिंह उर्फ मन्ना के तौर पर हुई है। उस पर भाला घोंप गाय को मार डालने का आरोप है।

घटना पीलीभीत के गांव चकशिवपुरी की है। शिकायतकर्ता बाबूराम नीय दियोरिया कला पुलिस थाने में चौकीदार हैं। उन्होंने अपनी शिकायत में कहा है, “हमारे गाँव के धर्मपाल का खेत गाँव के ही सरदार जोगिंदर सिंह उर्फ बिट्टू ने बँटाई पर लिया है। इस खेत में गन्ना बोया गया है। 20 जून को काले रंग की एक गाय घास चरते हुए धर्मपाल के खेत में चली गई। तभी जोगिंदर सिंह के बेटे मनप्रीत सिंह ने गाय के पेट में भाला घोंप दिया।”

शिकायत के मुताबिक भाले से गाय की आँत बाहर निकल कर लटक गई। बाद में गाय गाँव के पश्चिम बाग में मरी मिली। चौकीदार बाबूराम की शिकायत पर पुलिस ने मनप्रीत के खिलाफ गौ हत्या निवारण अधिनियम उत्तर प्रदेश की धारा 3/8 के साथ पशु क्रूरता निवारण अधिनियम की धारा 11 के तहत FIR दर्ज की है। उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

पिछले दिनों इस तरह की पशु क्रूरता राजस्थान से भी सामने आई थी। जयपुर में एक किसान ने कुत्ते पर एयर गन से 22 गोलियाँ दाग दी थी, जिससे उसकी मौत हो गई। वह कुत्ते के बार-बार खेत घुसने से गुस्साया था। किसान के खिलाफ तूंगा थाने में FIR दर्ज कराई गई थी।

रिपोर्ट के मुताबिक किसान ने बेजुबान जानवर पर अपनी एयर गन से ताबड़तोड़ फायरिंग की थी। इससे कुत्ते की बॉडी में 22 छर्रे घुस गए थे। कुत्ता खेत में करीब 2 घंटे तक दर्द से कराहता रहा। लेकिन किसान को दया नहीं आई। तभी वहाँ से जाते हुए एक शख्स की नजर कुत्ते पर पड़ी। वह तपड़ते कुत्ते को हिंगोनिया गौशाला ले गया, जहाँ उसकी गंभीर स्थिति देखते हुए डॉक्टरों ने उसे पाँच बत्ती स्थित एनिमल हॉस्पिटल रेफर कर दिया। इलाज के दौरान करीब 2 घंटे बाद कुत्ते की मौत हो गई।

केजरीवाल की सीट ‘रिक्त’ घोषित करने का NDMC में प्रस्ताव, LG ने दिल्ली मुख्यमंत्री कार्यालय में तैनात डिप्टी सेक्रेटरी को करप्शन में सस्पेंड किया

दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने तीन अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। इनमें से एक दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के कार्यालय में तैनात डिप्टी सेक्रेटरी रैंक के अधिकारी हैं। उनके अलावा दो SDM पर भी भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते कार्रवाई हुई है। दूसरी ओर नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) के सदस्य कुलजीत चहल ने मुख्यमंत्री केजरीवाल की सीट को ‘रिक्त’ घोषित करने का प्रस्ताव पेश किया है।

NDMC में यह प्रस्ताव केजरीवाल के लगातार चार बार मीटिंग से गैरहाजिर रहने की वजह से लाया गया है। चहल ने बताया कि केजरीवाल दिसंबर 2021 में और इस साल (2022) जनवरी, फरवरी और मार्च में चार बैठकों के दौरान बिना पूर्व सूचना के अनुपस्थित रहे हैं। इसके चलते बुधवार (22 जून 2022) परिषद की बैठक के दौरान मुख्यमंत्री की सीट को रिक्त घोषित करने का प्रस्ताव पेश किया गया। 

प्रस्ताव के मुताबिक, “नई दिल्ली नगरपालिका परिषद अधिनियम के अनुसार, यदि लगातार तीन महीनों के दौरान, कोई सदस्य बिना पूर्व अनुमति के सभी बैठकों से अनुपस्थित रहता है, तो परिषद केंद्र सरकार को सिफारिश कर सकती है कि ऐसे सदस्य की सीट रिक्त घोषित की जाए।” इसमें कहा गया, “परिषद केंद्र सरकार को सिफारिश कर सकती है कि एनडीएमसी अधिनियम, 1994 में निहित प्रावधानों के अनुसार आगे आवश्यक कार्रवाई शुरू करने की सिफारिश के साथ परिषद के सदस्य के रूप में अरविंद केजरीवाल की सीट को रिक्त घोषित किया जा सकता है।” बता दें कि नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र से विधायक होने के कारण केजरीवाल NDMC के सदस्य हैं।

वहीं दिल्ली के उपराज्यपाल ने जिन अधिकारियों को निलंबित किया है, उसमें मुख्यमंत्री कार्यालय में उप सचिव के पद पर तैनात प्रकाश चंद्र ठाकुर, वसंत विहार के एसडीएम हर्षित जैन और विवेक विहार के एसडीएम देवेंद्र शर्मा का नाम शामिल है। इनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई का आदेश दिया गया है। उपराज्यपाल कार्यालय के अधिकारियों के अनुसार, मामला कथित रूप से प्राइवेट संस्थाओं को बेची गई सरकारी जमीन से जुड़े भ्रष्टाचार से संबंधित हैं।

इससे पहले उपराज्यपाल ने सोमवार (20 जून 2022) को कालकाजी एक्सटेंशन में ईडब्ल्यूएस फ्लैटों के निर्माण में खामियाँ पाए जाने पर दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के दो सहायक इंजीनियरों को भी निलंबित कर दिया था। पिछले हफ्ते, उप राज्यपाल ने राष्ट्रीय राजधानी की कानून-व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा के लिए एक बैठक की थी।

जो ‘डर’ दिखा 30 साल पहले शिवसेना बचा ले गए थे बाल ठाकरे, वह भी उद्धव के काम न आया: 7 और MLA एकनाथ शिंदे के पास पहुँचे

महाराष्ट्र में सियासी घटनाक्रम तेजी से बदल रहा है। असम में डेरा डाले एकनाथ शिंदे के पास 7 और विधायकों के पहुँचने की खबर है। इनमें से 3 विधायक गुरुवार (23 जून 2022) की सुबह पहुँचे, जबकि चार बुधवार की रात ही गुवाहाटी के रेडिसन ब्लू होटल पहुँच गए थे। शिंदे का दावा है कि उनके साथ 48 विधायक हैं। हालाँकि नंबर को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में अलग-अलग तरह की बातें कही जा रही है।

शिंदे समर्थक विधायकों की लगातार बढ़ती संख्या ने उद्धव ठाकरे के सामने दोहरा खतरा पैदा कर दिया है। न केवल उनकी मुख्यमंत्री की कुर्सी खतरे में है, बल्कि शिवसेना भी हाथ से निकलने की आशंका बढ़ गई है। यह आशंका तब पैदा हुई, जब बुधवार को शिंदे ने शिवसेना के व्हिप पर सवाल उठाते हुए नया व्हिप नियुक्त कर दिया था। इतना ही नहीं बागी विधायकों ने उन्हें शिवसेना विधायक दल का नेता भी चुन लिया था।

एक तरफ शिंदे लगातार शिकंजा कसते जा रहे हैं, दूसरी तरफ उद्धव ठाकरे की हर चाल बेअसर दिख रही है। बुधवार की रात महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री का आधिकारिक आवास खाली कर वे अपने निजी घर मातोश्री चले गए थे। उससे पहले एक फेसबुक लाइव में उन्होंने पार्टी संस्थापक और अपने पिता बाल ठाकरे की दुहाई दी। यहाँ तक कहा कि पार्टी नेता कहें तो वे इस्तीफा देने को तैयार हैं। लेकिन, इनका कोई असर अब तक नहीं दिखा है। उल्लेखनीय है कि 1992 में इसी तरह की स्थिति में बाल ठाकरे ने शिवसेना से इस्तीफे की बात कह पार्टी में बगावत शांत कर ली थी। तब उनके पुराने साथी माधव देशपांडे ने पार्टी की कार्यशैली को लेकर सवाल उठाए थे।

बग्गा ने की उद्धव ठाकरे के खिलाफ शिकायत

दिल्ली के भाजपा नेता तेजिंदर पाल सिंह बग्गा ने उद्धव ठाकरे के खिलाफ बुधवार (22 जून 2022) रात कोविड-19 संबंधी प्रोटोकॉल का उल्लंघन करने को लेकर शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में कहा गया है कि सीएम ठाकरे ने अपने सरकारी आवास से निजी आवास की ओर जाते समय समर्थकों से मुलाकात कर कोविड-19 संबंधी प्रोटोकॉल का उल्लंघन किया है। बग्गा ने पुलिस को दी शिकायत ट्वीट भी की है।

शिकायत में कहा गया है, “कोविड प्रोटोकॉल  के अनुसार मरीज किसी से भी नहीं मिल सकता। उसे आइसोलेशन में रहना चाहिए। सीएम उद्धव ठाकरे ने कोविड प्रोटोकॉल तोड़ा और अपने समर्थकों से मुलाकात की।” बता दें कि उद्धव ठाकरे की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव होने की खबरें कल सामने आई थी। हालाँकि बाद में बताया गया कि उन्होंने आरटीपीसीआर टेस्ट करवाया और उनकी रिपोर्ट नेगेटिव आई है। 

महाराष्ट्र में सियासी संकट के बीच मध्य प्रदेश महिला कॉन्ग्रेस अध्यक्ष जया ठाकुर ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का दरवाजा खटखटाया है। याचिका में दलबदल में शामिल सभी विधायकों पर कार्रवाई की माँग की है। दलबदल करने वाले विधायकों के चुनाव लड़ने पर 5 साल के लिए रोक की माँग की है।