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असम CM की पत्नी ने मनीष सिसोदिया पर किया ₹100 करोड़ की मानहानि का मुकदमा: दान में दिए PPE किट में लगाया था भ्रष्टाचार का इल्जाम

दिल्ली के उप मुख्यमंत्री और AAP नेता मनीष सिसोदिया के खिलाफ 100 करोड़ रुपए की मानहानि का मुकदमा दायर किया गया है। यह मुकदमा असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी सरमा ने किया है। सिसोदिया ने कोविड महामारी के दौरान असम में पीपीई किट की खरीद में भ्रष्टाचार का आरोप सरमा पर लगाया था।

इस विवाद की शुरुआत वामपंथी प्रोपगेंडा पोर्टल द वायर की एक रिपोर्ट से हुई थी। इसमें आरोप लगाया गया था कथित तौर पर रिंकी भुयान सरमा के मालिकाना हक वाली वाली एक कपंनी को कोरोना से निपटने के लिए पीपीई किट और दूसरे कोविड से जुड़े सामानों की आपूर्ति का ऑर्डर मिला था। तब सर्बानंद सोनोवाल असम के मुख्यमंत्री और हिमंता बिस्वा सरमा राज्य के स्वास्थ्य मंत्री थे। रिपोर्ट में कहा गया था कि सरमा की पत्नी की कंपनी को बिना किसी अनुभव के ही 5000 पीपीई किट, मेडिकल उपकरण और अन्य सुरक्षा सामानों की आपूर्ति का ऑर्डर दिया गया था। इसी रिपोर्ट को आधार बनाकर सिसोदिया ने भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था। हालाँकि, रिंकी सरमा ने तुरंत ही आरोपों का खंडन करते हुए कहा था उन्होंने मानवता के नाते बिना एक पैसा लिए पीपीई किट की मुफ्त आपूर्ति की थी।

इसके बावजूद सिसोदिया ने असम के सीएम सरमा और उनकी पत्नी पर हमला जारी रखा। सिसोदिया ने अपने आरोपों के ‘सबूत’ के रूप में ‘रद्द किए गए खरीद आदेश’ की एक तस्वीर ट्वीट की। इसके बाद हिमंत बिस्वा सरमा ने सिसोदिया सिसोदिया को आपराधिक मानहानि का सामना करने के लिए तैयार रहने को कहा था। अब रिंकी सरमा ने इसी मामले को लेकर आपराधिक मानहानि का मुकदमा दायर किया है।

बता दें कि मनीष सिसोदिया AAP के पहले सीनियर नेता नहीं हैं, जिन पर भ्रष्टाचार के निराधार आरोपों के लिए मानहानि का मुकदमा हुआ है। इससे पहले, पार्टी सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल ने भाजपा नेताओं अरुण जेटली और नितिन गडकरी के खिलाफ झूठा आरोप लगाया था। भाजपा नेता द्वारा मानहानि का मामला दर्ज कराने के बाद दिल्ली के सीएम को माफी माँगनी पड़ी थी।

उद्धव ठाकरे का बहुमत लेकर गुजरात से असम शिफ्ट हुए एकनाथ शिंदे: 40+ MLA साथ, कहा- बालासाहेब के हिंदुत्व को हम आगे ले जाएँगे

महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे के कारण हलचल लगातार बनी हुई है। उन्होंने मीडिया में दावा कर दिया है कि उनके साथ 41 विधायकों का सहयोग है। इनमें 34 पार्टी विधायक और 7 निर्दलीय विधायक हैं। जानकारी के अनुसार, अभी तक एकनाथ शिंदे सूरत के ली मेरीडियन होटल में अपने विधायकों के साथ रुके हुए थे। लेकिन महाराष्ट्र में सरकार बचाने की जिम्मेदारी शरद पवार को मिलते ही वह सभी विधायकों संग असम के लिए रवाना हो गए। वहाँ वह रैडिसन ब्लू होटल में रुके हैं।

असम के लिए निकलने से पहले एकनाथ शिंदे ने गुजरात एयरपोर्ट पर मीडिया को बयान दिया, “हमने बालासाहेब ठाकरे की शिवसेना को नहीं छोड़ा। हम बालासाहेब के हिंदुत्व का अनुसरण कर रहे हैं और इसे आगे भी ले जाएगें।” उन्होंने कहा कि उन्हें मुख्यमंत्री पद का लालच नहीं है। वह बस बालासाहेब के विचार को आगे बढ़ा रहे हैं।

बागी विधायक असम में

सूरत से गुवाहाटी जाने के बीच एयरपोर्ट पर दिखे इन सभी नेताओं से पत्रकारों ने कई बार बातें निकलवाने की कोशिश की लेकिन किसी ने कुछ स्पष्ट नहीं बताया। किसी ने कहा वह बिरयानी खाने आए हैं तो कोई जय महाराष्ट्र का नारा लगाकर आगे बढ़ गया। अब सारे सियासी खेल को देख अंदाजा लग रहा है कि एकनाथ शिंदे अपने खेमे के विधायकों की संख्या वाला पत्र जल्द राज्यपाल को देने वाले हैं। कुछ रिपोर्ट में उनके पास 40 विधायकों का समर्थन बताया जा रहा है और कुछ में 46 का।

उल्लेखनीय है कि एकनाथ शिंदे समेत उनके सभी विधायक आज सुबह गुवाहटी में उतरे। जहाँ इन सबको लेने भाजपा विधायक सुशांत बोरगोहेन आए हुए थे। जब सुशांत से इस संबंध में पूछा गया तो उन्होंने कहा, “मैं यहाँ इन्हें (शिंदे के साथ आए विधायकों) लेने आया हूँ। मैं व्यक्तिगत रिश्ते की वजह से इन्हें यहाँ लेने आया हूँ। मैंने गिनती नहीं की हुई है कि कितने विधायक यहाँ आए हुए हैं। मु्झे उन्होंने अपने कार्यक्रम के बारे में नहीं बताया है।”

बागी विधायकों को मनाने में जुटी उद्धव सरकार

मालूम हो कि शिवसेना के इन सभी विधायकों से मुंबई में संपर्क टूटा था। उसके बाद सत्ताधारी पार्टी के अन्य नेताओं ने लगातार इनसे संपर्क की कोशिश की, पर कोई असर नहीं हुआ। सरकार पर आए संकट को लेकर उद्धव ठाकरे ने बैठक बुलाई और शरद पवार को सरकार बचाने की कमान दी। जैसे ही सूरत में बैठे विधायकों को ये मालूम हुआ तो उन्होंने सूरत से निकल गुवाहाटी जाने का निर्णय लिया।

वहीं शिवसेना नेता संजय राउत ने मीडिया को दिए बयान में शिंदे को ‘पुराना दोस्त’ कह कर मनाने की कोशिश की। राउत ने कहा, “एकनाथ हमारे पुराने दोस्त हैं। वह जानते हैं कि हमने भाजपा क्यों छोड़ी। वह इसके गवाह हैं। हमारे दो नेता सूरत गए थे। वहाँ उन्होंने एकनाथ से बात की है।”

महाराष्ट्र की राजनीति में इन 40 विधायकों का क्या महत्व है?

महाराष्ट्र में कुल विधायकों की संख्या 288 है। इनमें भाजपा के पास अभी 106, शिवसेना पर 55, एनसीपी पर 52, और कॉन्ग्रेस पर 42 सीटें हैं। बहुमत के लिए किसी भी दल को 144 सीटें चाहिए। साल 2019 के चुनाव में भाजपा से अलग होकर शिवसेना ने कॉन्ग्रेस-एनसीपी के साथ मिल ये आँकड़ा जुटाया था। लेकिन अब स्थिति पलटती नजर आ रही है। भाजपा को सरकार बनाने के लिए 30-32 विधायकों की जरूरत है। अगर ऐसे में शिंदे भाजपा को समर्थन दे देते हैं तो उद्धव सरकार गिर जाएगी। यही वजह है कि लगातार इन सभी नेताओं को मनाने के प्रयास हो रहे हैं।

भगवान राम से जुड़े सभी स्थलों का भ्रमण एक ही बार में, भारतीय रेलवे लेकर आई ‘रामायण यात्रा’ ट्रेन: 8000 km, की यात्रा ऐसे करें बुकिंग

देश की पहली भारत गौरव टूरिस्‍ट ट्रेन ‘श्री रामायण यात्रा’ (Shri Ramayana Yatra) को मंगलवार (21 जून 2022) शाम को दिल्‍ली के सफदरजंग रेलवे स्‍टेशन से रवाना किया गया। रेल मंत्री अश्विनी वैष्‍णव और पर्यटन मंत्री जी किशन रेड्डी ने झंडी दिखाकर टूरिस्‍ट ट्रेन को रवाना किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत गौरव ट्रेन (Bharat Gaurav Train) नाम से चलाई जाने वाली यह ट्रेन दिल्ली से नेपाल (Nepal) के जनकपुर (Janakpur) तक जाएगी। वहाँ से फिर भारत आकर काशी होते हुए दक्षिण भारत (South India) के भ्रमण कराएगी। सफर के दौरान यात्रियों का रहना-खाना सब मुफ्त रहेगा।

भारतीय रेलवे ने देश भर में भगवान राम से जुड़े तीर्थों की यात्रा कराने के लिए ‘श्री रामायण यात्रा’ टूर पैकेज की शुरूआत की है। यह यात्रा कुल 18 दिनों की है। इसकी बुकिंग IRCTC की साइट पर जाकर करवानी होगी। इस यात्रा के लिए पैकेज की कीमत 62,370 रुपए प्रति व्यक्ति रखी गई है। ट्रेन में सुरक्षा के लिए गार्ड भी रखे गए हैं। इस दौरान यात्रियों को भगवान राम से जुड़े धार्मिक स्थलों के दर्शन कराए जाएँगे। इसके अलावा इस ट्रेन में भारत के अलग-अलग राज्यों के परिधानों, खानपान, पर्यटक स्थल, संस्कृति और त्योहारों को दर्शाया गया है।

उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी ‘भारत गौरव श्री रामायण यात्रा ट्रेन’ शुरू करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री का आभार व्यक्त किया है।

भारत गौरव नाम की यह ट्रेन पर्यटकों को लेकर भगवान राम से जुड़े स्थानों जिसमें अयोध्या, बक्सर, सीतामढ़ी, काशी, प्रयाग, श्रृंगेश्वर, चित्रकूट नासिक, हंपी, रामेश्वरम, कांचीपुरम और भद्राचलम समेत कई जगहों तक जाएगी। इसी पैकेज में भारत गौरव ट्रेन नेपाल के जनकपुर भी जाएगी। भगवान राम के दर्शन के लिए यह यात्रा 8000 किलोमीटर की है, जो दिल्ली के सफदरजंग रेलवे स्टेशन से 21 जून को शुरु होगी। इसमें 600 यात्री थर्ड एसी में यात्रा कर सकते हैं।

देश को मिलेगी पहली महिला आदिवासी राष्ट्रपति! BJP ने द्रौपदी मुर्मू को बनाया उम्मीदवार, JP नड्डा ने बैठक के बाद किया ऐलान

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने झारखंड की पूर्व राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया है। जेपी नड्डा ने किया ऐलान। 64 वर्षीय द्रौपदी मुर्मू 2000 झारखंड के गठन के बाद से पहली ऐसी राज्यपाल थीं, उन्होंने अपना कार्यकाल पूरा किया था। उनका जन्म 20 जून, 1958 को ओडिशा के मयूरभंज जिले में स्थित बैदापोसी गाँव में हुआ था। वो संथाल जनजाति से ताल्लुक रखती हैं। उनके पति का नाम श्याम चरण मुर्मू है।

उनके व्यक्तिगत जीवन की बात करें तो द्रौपदी मुर्मू के दो बेटे और एक बेटी हैं। उनका पिता का नाम बिरंचि नारायण टुडू था। उनका जीवन त्रासदियों और संघर्षों से भरा हुआ है। उनके पति का निधन हो चुका है। उनके दोनों बेटे भी चल बसे। 2000 के दशक की शुरुआत में जब ओडिशा में बीजद-भाजपा ने मिल कर सरकार बनाई थी, तब उन्हें राज्य में कॉमर्स और ट्रांसपोर्ट मंत्रालय मिला था। फिर उन्होंने मत्स्य पालन और पशुपालन विभाग को सँभाला।

वो ओडिशा की पहली महिला और आदिवासी नेता हैं, जिन्हें राज्यपाल के पद पर नियुक्त किया गया। वो 2000 और 2009 में भाजपा के टिकट पर ओडिशा के मयूरभंज स्थित रायरंगपुर से विधायक चुनी जा चुकी हैं। वो 1997 में वहाँ के नगर पंचायत की काउंसिलर भी रह चुकी हैं। भाजपा ने उन्हें अपने जनजातीय मोर्चे का अध्यक्ष बनाया था। 2015 में उन्हें झारखंड का राज्यपाल नियुक्त किया गया। उनका कार्यकाल लगभग निर्विवाद रहा।

भाजपा ने संसदीय दल की बैठक में चर्चा के बाद और उससे पहले NDA के सभी घटक दलों से बात कर के उनके नाम पर मुहर लगाई।

नक्सली हमले में बलिदान हुए 3 जवान: वामपंथी आतंकियों ने घात लगा कर की फायरिंग, जंगल में सड़क निर्माण की कर रहे थे सुरक्षा

छत्तीसगढ़ और ओडिशा बॉर्डर पर नौपाड़ा में CRPF पर नक्सली हमला हुआ है। हमले में जहाँ सीआरपीएफ G/19 बटालियन के 3 जवान बलिदान हो गए हैं वहीं कुछ जवानों के घायल होने की भी सूचना सामने आई है। घटना मंगलवार (21 जून, 2022) की दोपहर को हुई है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सीआरपीएफ के जवानों की टीम ने ओड़िसा राज्य के नौपाड़ा जिला के बोडेन पुलिस थाना इलाके के भैंसदानी के जंगल में सड़क निर्माण कार्य को सुरक्षा देने के लिए निकली हुई थी। कहा जा रहा है कि दोपहर करीब 2.30 बजे नक्सलियों ने घात लगाकर अचानक फायरिंग शुरू कर दी। यहाँ तक कि जवानों को संभलने का मौका तक नहीं मिला।

कहा जा रहा है कि नक्सलियों को पहले से ही सीआरपीएफ टीम की मूवमेंट की जानकारी थी। जानकारी के मुताबिक, जब यह हमला हुआ तब सीआरपीएफ टीम के 7 जवान साथ थे। जिसमें से हमले में शिशुपाल सिंह (ASI), शिवलाल (ASI) व कांस्टेबल धर्मेंद्र कुमार सिंह (आरक्षक) की घटनास्थल पर ही मौत हो गई।

मुठभेड़ के बारें में जानकारी देते हुए ओडिशा के डीजीपी एसके बंसल ने बताया, “दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से नुआपाड़ा में 3 जवान शहीद हो गए। हमारे वरिष्ठ अधिकारी घटनास्थल पहुँच गए हैं। राज्य सरकार ने प्रत्येक बलिदानी के परिवार को 20-20 लाख रुपए की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है।” वहीं डीजीपी ने शोक संतप्त परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि माओवादियों को पकड़ने के लिए क्षेत्र में सघन अभियान जारी रहेगा।

दरअसल, नक्सली जवानों को अपने एम्बुश में फँसाने की कोशिश कर रहे थे। इसमें तीन जवान बुरी तरह से फँस गए और गोली लगने से घटनास्थल पर ही बलिदान हो गए। इधर अन्य दूसरे जवानों ने मोर्चा संभालते हुए नक्सलियों पर जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी। लगभग डेढ़ से दो घंटे तक हुई मुठभेड़ में नक्सली भाग खड़े हुए। जानकारी के मुताबिक अब मुठभेड़ पूरी तरह से थम चुकी है और इलाके की लगातार सर्चिंग जारी है। वहीं बताया जा रहा है कि नक्सलियों ने जवानों पर बीजीएल (बैरल ग्रेनेड लॉन्चर ) भी दागे और मौके पर बड़ी संख्या में BGL के अवशेष बरामद हुए हैं।

‘जो जेल में थे, उनको भी FREE इलाज दिया’: आज़म खान पर गरजे CM योगी, कहा – रस्सी जल गई, ऐंठन नहीं जा रही

उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ और रामपुर लोकसभा सीटों पर 23 जून को उपचुनाव होने हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चुनाव प्रचार के अंतिम दिन आज रामपुर में भाजपा प्रत्‍याशी घनश्‍याम लोधी के समर्थन में अलग-अलग स्‍थानों पर जनसभाएँ कीं। बिलासपुर के बाद मिलक में जनसभा को सम्‍बोधित करते हुए सीएम योगी (Yogi Adityanath) ने आजम खान पर जमकर निशाना साधा।

सीएम योगी ने कहा कि कुछ लोगों ने रामपुर की पहचान का दुरुपयोग किया। सीएम बोले, “उन्होंने जमीनों पर कब्जा करने, गरीबों को उजाड़ने, गुंडा-माफियाराज स्थापित करने व सरकारी धन का दुरुपयोग करने के लिए ‘रामपुर के चाकू’ का दुरुपयोग किया था। लेकिन, जब रामपुर का चाकू डबल इंजन की भाजपा सरकार के हाथ में आया, तब यहाँ पर गुंडों और माफिया के खिलाफ कार्रवाई हुई।”

उन्होंने आगे कहा, “डबल इंजन की भाजपा सरकार रामपुर की धरोहरों को नष्ट नहीं होने देगी, न ही किसी प्रकार का खिलवाड़ होने देगी। चाहे वह व्यक्ति कितना भी बड़ा, कितने ही गुरूर वाला क्यों न हो।”

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, “कोरोना काल में हमने किसी के साथ भेदभाव नहीं किया। जो जेल में थे, उनको भी फ्री में इलाज मिला। वे उस समय कहते थे कि जेल ही जन्‍नत है। आज कहते हैं जेल नरक है। मैं जानता था वे लोग इतनी जल्‍दी रंग बदलते हैं कि गिरगिट भी शरमा जाए। रस्सी जल गई, लेकिन ऐंठन नहीं जा रही है।” उन्होंने पिछली सरकारों पर हमला बोलते हुए कहा, “प्रदेश में आप किसी भी सभ्य परिवार से समाजवादी पार्टी के बारे में पूछ लिजिए। छोटे बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक, हर व्यक्ति यही बोलेगा, इनसे तो भगवान ही बचाए।”

बता दें कि रामपुर की जनसभाओं में सीएम योगी ने केंद्र सरकार की ‘अग्निपथ’ योजना की भी जमकर तारीफ की। उन्‍होंने कहा कि हमारे समय में किसी के साथ भेदभाव नहीं होता है। यूपी का कोई भी नौजवान जब नौकरी पर लगता है तो यूपी का नौजवान होता है। यही कारण है कि 5 साल में 5 लाख नौजवानों को हमने सरकारी नौकरी दी। 1.61 करोड़ नौजवानों को हमने निजी क्षेत्र में निवेश कराकर रोजगार और नौकरी के साथ जोड़ा। इतने बड़े पैमाने पर यूपी में नौकरी कभी नहीं आई और हम इसके लिए प्रधानमंत्री मोदी के आभारी हैं।

नकली एक्सचेंज, महिला का प्रोफ़ाइल…भारत के क्रिप्टो निवेशकों से ₹1000 करोड़ की ठगी, Bitcoin में पैसा लगाने वालों को यूँ बनाया जा रहा निशाना

क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करने वालों के लिए बुरी खबर है। भारतीय निवेशकों से ‘CoinEgg’ नामक स्कैम ने 1000 करोड़ रुपए की ठगी कर ली है। सिक्योरिटी फर्म ‘CloudSEK’ के रिसर्च में इसका खुलासा हुआ है। एंड्राइड यूजर्स को खासकर के इसका निशाना बनाया गया। आम लोगों को गैंबलिंग में आकर्षित कर के ऐसा किया गया। इसमें प्रमुख क्रिप्टो ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म्स के नकली मॉडल बनाए गए और ग्राहकों से धोखाधड़ी की गई।

मान लीजिए, आप किसी ‘A’ नामक क्रिप्टो एक्सचेंज का प्रयोग करते हैं। हैकरों ने इसी का एक डुप्लीकेट तैयार कर दिया और आपके फोन में ये इंस्टॉल हो गया। फिर आप जब इसे खोलेंगे तो इसका डैशबोर्ड हूबहू ओरिजिनल जैसा ही दिखेगा। 7 चरणों में इस स्कैम को अंजाम दिया गया है। फेक डोमेन बनाने के बाद दूसरे चरण में सोशल मीडिया पर एक महिला की प्रोफ़ाइल बनाई जाती है। इसके बाद किसी ग्राहक से संपर्क कर के उसे लालच दिया जाता है।

क्रिप्टो निवेश के जरिए उसे अमीर बनने के सपने दिखाए जाते हैं। ये सब उससे उस महिला प्रोफ़ाइल के जरिए दोस्ती के बाद किया जाता है। किसी क्रिप्टो एक्सचेन्ज की तरफ से गिफ्ट का दावा करते हुए 100 डॉलर रुपए का क्रेडिट भी दिया जाता है। इस फ्री क्रेडिट के लिए उन्हें साइन-अप करने के लिए कहा जाता है। 100 डॉलर क्रेडिट के लिए वो ऐसा करते हैं और बाद में अपना रुपया निवेश करने लगते हैं। इससे हैकरों को ठगी का मौका मिल जाता है।

पीड़ित के वॉलेट को फ्रीज कर के उन सारे रुपयों को निकाल लिया जाता है और फिर उक्त नकली एक्सचेंज से ग्राहक के कोई संपर्क ही नहीं हो पाता। यहाँ भी ठगी नहीं रुकती। जब ग्राहक ओरिजिनल एक्सचेंज के पास शिकायत लेकर जाता है तो ये ठग उनके एजेंट्स बन कर इनबॉक्स में संपर्क करते हैं। फ्रीज हुए हैंडल को वापस दिलाने के लालच में उनसे आईडी कार्ड और बैंक डिटेल्स ले लेते हैं। इसके बाद अन्य वित्तीय धोखाधड़ी में इसका इस्तेमाल किया जाता है।

’24 जून से अग्निपथ के खिलाफ देश भर में सड़क पर उतरेंगे किसान’: राकेश टिकैत ने शुरू की तैयारी, कहा – सरकार पर यकीन नहीं

केंद्र सरकार की ‘अग्निपथ योजना’ (Agnipath Scheme) को लेकर देश भर में विरोध प्रदर्शन जारी है। इसी बीच मंगलवार (21 जून 2022) को हिमाचल प्रदेश के गुरुद्वारा पांवटा साहिब पहुँचे भारतीय किसान यूनियन नेता राकेश टिकैत (Rakesh Tikait) ने अग्निपथ योजना के खिलाफ आंदोलन छेड़ने का ऐलान किया। टिकैत ने कहा, “इस योजना के विरोध में आंदोलन शुरू किया जाएगा। इसकी तैयारी 24 जून से शुरू होगी। केंद्र सरकार रोजाना अपना स्टैंड बदलती है। सुबह कुछ और शाम को कुछ कहती है। अग्निपथ पर भी सरकार का यही हाल है। इसलिए हम उसकी किसी भी बात पर यकीन नहीं कर सकते हैं।”

टिकैत ने आगे कहा कि केंद्र सरकार को यह स्पष्ट कर देना चाहिए कि आखिर बेरोजगारों को किस तरह की नियुक्ति दी जाएगी? उन्होंने सभी किसान नेता और संगठनों से मिलकर इस आंदोलन में शामिल होने का आह्वान किया है। सोमवार (20 जून 2022) को भी राकेश टिकैत ने हरियाणा के करनाल में कहा था कि 24 जून को संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) देश भर के जिला मुख्यालयों पर ‘अग्निपथ योजना‘ का विरोध करेगा।

इससे पहले कथित किसान नेता राकेश टिकैत ने 18 जून को उत्तराखंड के हरिद्वार में आक्रोश रैली निकाली थी। इस दौरान टिकैत ने सरकार पर युवाओं के साथ भद्दा मजाक करने का आरोप लगाया था। टिकैत के पैदल मार्च में किसानों के साथ भारी संख्या में भारतीय किसान यूनियन के कार्यकर्ता और नेता मौजूद थे।

मार्च के दौरान बीकेयू नेता ने सरकार से अग्निपथ योजना को वापस लेने की माँग करते हुए नारेबाजी की थी। उल्लेखनीय है कि हरिद्वार में चल रहे किसान महाकुंभ का शनिवार (18 जून 2022) को तीसरा दिन था। इस मौके पर राकेश टिकैत ने कहा था कि 30 जून को भारतीय किसान यूनियन देश भर के राज्यों के जिला मुख्यालयों के बाहर प्रदर्शन करेगी।

गौरतलब है कि ​हरिद्वार में प्रदर्शन के दौरान राकेश टिकैत समेत बीकेयू के सभी कार्यकर्ता बाँह पर काली पट्टी बाँधे लालकोठी से वीआईपी घाट पहुँचे और फिर वहाँ से सीसीआर होते हुए रोड़ी बेलवाला मैदान गए थे। किसान नेताओं का कहना था कि या तो केंद्र सरकार इस योजना को वापस ले या फिर इस पर अपना स्पष्टीकरण दे। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को ये नियम बनाना चाहिए कि 18 साल के युवाओं को मिलिट्री की ट्रेनिंग दी जाए, न कि 4 साल की नौकरी के बाद बेरोजगार कर दिया जाए।

यशवंत सिन्हा ने चुपके से डिलीट किया ‘Ch&*iya’ वाला ट्वीट, स्क्रीनशॉट वायरल: आधे-अधूरे विपक्ष ने बनाया है राष्ट्रपति उम्मीदवार

आधे-अधूरे विपक्ष के साझा आधिकारिक राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के रूप में घोषित होने के तुरंत बाद, तृणमूल कॉन्ग्रेस के नेता यशवंत सिन्हा ने अपने पुराने आपत्तिजनक ट्वीट डिलीट करने लगे हैं। उनका एक ट्वीट वायरल है जिस पर लोग उन्हें घेर रहे हैं। हालाँकि, सिन्हा ने यह ट्वीट अप्रैल 2022 में एक ट्विटर यूजर की टिप्पणी के जवाब में किया था। जिसे फ़िलहाल उन्होंने डिलीट कर दिया है।

मंगलवार (21 जून, 2022) को, टीएमसी उपाध्यक्ष यशवंत सिन्हा को आगामी राष्ट्रपति चुनाव के लिए विपक्ष द्वारा अपना साझा उम्मीदवार घोषित किया गया, जो 18 जुलाई को होने वाला है। सिन्हा को ममता बनर्जी, एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार, कॉन्ग्रेस और अन्य दलों ने राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के रूप में समर्थन दिया।

सिन्हा को राष्ट्रपति चुनाव के लिए विपक्ष का उम्मीदवार घोषित किए जाने के तुरंत बाद, उनके एक पुराने ट्वीट ने ट्विटर यूजर का ध्यान आकर्षित किया, जिसमें वह एक हिंदी गाली ‘Ch*&%’ का उपयोग करते हुए ट्विटर यूजर को जवाब दे रहे हैं। मामला, इसी साल अप्रैल का है, जब यशवंत सिन्हा ने एक असंगत ट्वीट किया जिसमें उन्होंने ईंधन की बढ़ती कीमतों के बारे में बात करते हुए इसकी तुलना देश के मिजाज से कर डाली।

उस पर, एक ट्विटर यूजर ने सांसद को ‘Ch$%&’ के रूप में संदर्भित करते हुए उनसे पूछा कि वह क्या कहना चाह रहे हैं? जिस पर, टीएमसी नेता ने अपना आपा खो दिया और जवाब दिया कि वह उनके ट्वीट को नहीं समझ सकता- “…कि वह एक Ch&% है।” जानकारी के लिए बता दें कि Ch&%* एक गाली है जिसे अपमानजनक रूप से कुछ राज्यों में उपयोग किया जाता है।

आज कई ट्विटर यूजर ने यशवंत सिन्हा के उसी अपमानजनक ट्वीट की तरफ ध्यान आकर्षित कराया कि एक देश के प्रमुख के रूप में ऐसा व्यवहार कहाँ तक उचित होगा?

हालाँकि, सोशल मीडिया पर अपने गुस्से की वजह से फँसने के बाद यशवंत सिन्हा ने चतुराई से अपने कदम पीछे खींच लिए और चुपचाप ट्वीट को डिलीट कर दिया। क्योंकि लोगों को सिन्हा का वह अपमानजनक ट्वीट आज दोपहर के बाद से ही ट्विटर पर नजर नहीं आ रहा था। हालाँकि, यह पहली बार नहीं है जब उन्होंने गाली-गलौज की है। 2014 में भी उन्होंने कहा था कि कोई भी Ch*&% छत्तीसगढ़ का मुख्यमंत्री बन सकता है।

आँखों के सामने हो गई थी बेटे-बेटी की मौत, तब आए ‘गुरु’ और सँभाला: ठाणे में शिवसेना मतलब एकनाथ शिंदे, ऑटो ड्राइवर से मंत्री तक का सफर

महाराष्ट्र की राजनीति अभी एक ही व्यक्ति के इर्दगिर्द घूम रही है और वो हैं एकनाथ शिंदे, जो मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली सरकार में शहरी विकास और पब्लिक वर्क्स मंत्रालय सँभाल रहे हैं। साथ ही वो शिवसेना के विधायक दल के नेता भी थे, लेकिन अब उन्हें इस पद से हटा दिया गया है। 35 विधायकों के समर्थन का दावा करने वाले एकनाथ शिंदे कौन हैं, आइए हम आपको बताते हैं। वो देवेंद्र फड़नवीस की सरकार में भी मंत्री रहे थे।

वो ठाणे के कोपरी-पाचपाखाडी विधानसभा से पिछले 18 वर्षों से लगातार विधायक हैं और उन्होंने लगातार 4 बार यहाँ से जीत दर्ज की है। ठाणे जिले में उनकी तूती बोलती है और 2019 विधानसभा चुनाव के दौरान वहाँ के शिवसेना कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री के चेहरे के रूप में उनके पोस्टर-बैनर लगाए थे। एकनाथ शिंदे ने अचानक से ऐसा फैसला लिया है, क्योंकि हाल ही में आदित्य ठाकरे के अयोध्या दौरे के दौरान वो उनके साथ थे।

शिवसेना ने उन्हें पार्टी का चीफ व्हिप भी बना रखा था। बता दें कि एकनाथ शिंदे पहले ऑटो रिक्शा ड्राइवर हुआ करते थे। 80 के दशक में ठाणे में उन्हें शिवसेना का शाखा प्रमुख बनाया गया था। फिर वो 1997 में म्युनिसिपल कॉर्पोरेटर बने। 3 वर्षों तक वो सिविक एजेंसी स्टैंडिंग कमिटी से सदस्य रहे। उनके बेटे श्रीकांत शिंदे कल्याण से शिवसेना सांसद हैं। आदित्य ठाकरे को जिस तरह से बढ़ा-चढ़ा कर पेश किया जा रहा था, उससे वो खुश नहीं थे।

ठाणे को मुंबई का सैटेलाइट सिटी भी कहा जाता है और शिवसेना का इसे गढ़ भी माना जाता है। बता दें कि एकनाथ शिंदे के जीवन में एक त्रासदी भी हो चुकी हाउ, जब दुर्घटना में उनके दो बच्चों का निधन हो गया था। सतारा में उनका एक बेटा और एक बेटी उनके सामने ही पानी में बह गए थे। तब वो शिवसेना कॉर्पोरेटर थे और राजनीति से इस घटना के बाद उनका मोहभंग हो गया था। उनके राजनीतिक गुरु आनंद दिघे उन्हें वापस लेकर आए।

उनके निधन के बाद 2001 में एकनाथ शिंदे को ठाणे म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन में सदन का नेता चुना गया। शिवसेना के कई कार्यक्रमों का आयोजन उनके ही जिम्मे होता था। राज ठाकरे और नारायण राणे के बगावत के बाद एकनाथ शिंदे ने ही शिवसेना से जनता को फिर से जोड़ा। 2019 में कई विधायकों को वही वापस लेकर आए। सतारा जिले के पहाड़ी जवाली तालुका से आने वाले एकनाथ शिंदे ने ठाणे शहर में आने के बाद 11वीं कक्षा तक मंगला हाई स्कूल और जूनियर कालेज, ठाणे से पढ़ाई की। वो कुछ दिनों के लिए नेता प्रतिपक्ष भी रहे।