दिल्ली की एक अदालत ने भीम सेना वाले नवाब सतपाल तंवर (Satpal Tanwar) को जमानत दे दी है। तंवर को बीजेपी की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा को धमकाने और उन पर एक करोड़ रुपए का इनाम घोषित करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। न्यायाधीश ने आरोपित को 50,000 रुपए की जमानत राशि और इतनी ही राशि के मुचलके पर जमानत दी है। अदालत ने आरोपित को जाँच के दौरान अधिकारियों के समक्ष और सुनवाई की हर तारीख को अदालत में पेश होने का निर्देश दिया। इसके साथ ही पूर्व अनुमति लिए बिना देश से बाहर नहीं जाने को भी कहा है।
न्यायाधीश सरोहा ने अपने 19 जून के आदेश में कहा कि प्राथमिकी दर्ज करने में जल्दबाजी की गई थी। पहले मामला दर्ज किया गया और फिर कथित आपत्तिजनक वीडियो का विश्लेषण किया गया। पूछताछ के बावजूद आईओ (Investigating Officer) जवाब देने में नाकाम रहे कि जब उन्होंने पूरा वीडियो नहीं देखा तो भी एफआईआर दर्ज करने की इतनी जल्दी क्यों थी?
अदालत ने कहा कि मामले में आरोपित को गिरफ्तार करते समय जाँच अधिकारियों ने नियमों को ताक पर रखा। अदालत ने अप्पनइ टिप्पणी में कहा कि आरोपित की गंभीर स्थिति और इस तथ्य पर भी गौर नहीं किया गया कि गिरफ्तारी के बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अदालत ने यह भी कहा कि आरोपित भीम सेना का सदस्य है, यह जमानत अर्जी पर फैसला करते समय प्रासंगिक तथ्य नहीं है, क्योंकि भीम सेना कोई प्रतिबंधित संगठन नहीं है।
मालूम हो कि भीम सेना चीफ नवाब सतपाल तंवर को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने 16 जून 2022 को उसके गुरुग्राम स्थित घर से दबोचा था। नवाब का सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें उसने पैगंबर मुहम्मद पर कथित टिप्पणी करने वाली नूपुर शर्मा की जुबान काटकर लाने वाले व्यक्ति के लिए 1 करोड़ रुपए के इनाम की घोषणा की थी। साथ ही उसने 8 जून को बीजेपी की पूर्व प्रवक्ता पर ईशनिंदा का आरोप लगाते हुए उन्हें सबके सामने ‘मुजरा करवाने’ का आपत्तिजनक एवं स्त्री-विरोधी बयान दिया था।
उसने कहा था, “मुझे खुद पर भरोसा है। अगर इस देश की सरकार, उत्तर प्रदेश की सरकार, योगी आदित्यनाथ और नरेंद्र मोदी की औकात नहीं है नूपुर शर्मा के खिलाफ कार्रवाई करने की तो उसे मेरे हवाले कर दें। उसे सबके सामने मुजरा करवाऊँगा। अपने सामने मुजरा करवाऊँगा और उसे मनमाफिक सजा दूँगा।”
केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार (Narendra Modi Government) की महत्वाकांक्षी अग्निपथ योजना (Agnipath Scheme) को लेकर जारी हिंसा और विपक्षियों के विरोध के बीच भर्ती की घोषणाएँ जारी हैं। एयरफोर्स के बाद अब नौसेना ने अग्निवीरों का भर्ती कैलेंडर जारी किया है।
इंडियन नेवी की भर्ती प्रक्रिया को लेकर नौसेना के कार्मिक प्रमुख (COP) वाइस एडमिरल दिनेश त्रिपाठी ने कहा, “हमारा भर्ती कैलेंडर 25 जून के लिए तय किया गया था, लेकिन यह कल 22 जून से शुरू होगा। ऑनलाइन पंजीकरण की प्रक्रिया 1 जुलाई से शुरू होगी।”
चार साल तक सेना में सेवा देने के बाद अग्निवीरों के भविष्य को लेकर जारी बहस के बीच त्रिपाठी ने कहा, “DG शिपिंग आदेश के अनुसार, 4 साल के प्रशिक्षण के बाद अग्निवीरों सीधे मर्चेंट नेवी में जा सकते हैं।”
As per DG shipping order for Agniveers, after 4 years of training, they can directly get into Merchant Navy: Vice Admiral Dinesh K Tripathi, Chief of Personnel (COP), Indian Navy pic.twitter.com/yPKNyeVeia
रक्षा मंत्रालय के अधीन आने वाले सैन्य मामलों के विभाग में अतिरिक्त सचिव लेफ्टिनेेंट जनरल अनिल पुरी ने कहा, “अग्निपथ योजना तीन चीजों को संतुलित करती है। पहली, सशस्त्र बलों की युवा प्रोफ़ाइल, दूसरा तकनीकी जानकारी एवं सेना में शामिल होने वाले अनुकूलनीय लोग और तीसरा, व्यक्ति को भविष्य के लिए तैयार करना।”
Aginpath scheme balances three things, first youthful profile of the armed forces, technical savvy and adaptable people joining the Army, third makes the individual future-ready: Lt Gen Anil Puri, Addt'l Secy, Dept of Military Affairs, on #AgnipathScheme@adgpipic.twitter.com/KQHMQb0jRg
— Prasar Bharati News Services पी.बी.एन.एस. (@PBNS_India) June 21, 2022
सबसे पहला भर्ती गाइडलाइन जारी करते हुए वायुसेना ने कहा था कि अग्निवीरों को अपनी चार साल की नौकरी पूरी करनी होगी। इससे पहले वे फोर्स नहीं छोड़ सकेंगे। ऐसा करने के लिए उन्हें अधिकारी की सहमति लेनी होगी। इसके साथ ही 18 साल से कम उम्र के अग्निवीरों को अपने माता-पिता या अभिभावक की सहमति आवश्यक होगी।
गाइडलाइन में अग्निवीरों की छुट्टी और मेडिकल फैसिलिटी से संबंधित संशयों का निराकरण किया गया है। गाइडलाइन में कहा गया है कि अग्निवीर सभी सैन्य सम्मान और पुरस्कार के हकदार होंगे। इन्हें साल में तीस दिन की छुट्टी दी जाएगी। इसके अलावा, बीमार होने पर डॉक्टर की सलाह पर सिक लीव भी मिलेगी।
अग्निवीरों की भर्ती 17.5 से 21 साल के बीच के आयु वालों की और फिजिकल फिटनेस एवं शैक्षणिक योग्यता के आधार पर की जाएगी। 18 साल से कम आयु के अभ्यर्थियों को अपने माता-पिता या अभिभावकों की सहमति जरूरी होगी। चुने जाने के बाद उन्हें मिलिट्री की ट्रेनिंग दी जाएगी।
अग्निवीरों की ड्रेस तय होगी और उन्हें अपनी वर्दी में ही ड्यूटी करनी होगी। किसी भी ड्यूटी के लिए कहीं भी भेजा जा सकता है। इस दौरान उन्हें मेडिकल फैसिलिटी और कैंटीन की सुविधा दी जाएगी। इसके अलावा, वेतन के साथ-साथ रिस्क, हार्डशिप, ड्रेस एवं ट्रैवल अलाउंस भी दिया जाएगा। अग्निवीरों को 48 लाख रुपए का बीमा कवर दिया जाएगा।
अगर कोई अग्निवीर अपनी सेवाकाल के दौरान वीरगति को प्राप्त होता है तो उसके परिवार को बीमा समेत करीब एक करोड़ रुपए से अधिक की राशि दी जाएगी। विकलांगता पर एक्स-ग्रेशिया और बची हुई नौकरी की वेतन और सेवा निधि की 10.04 लाख सहित राशि दी जाएगी।
अगर सेवाकाल के दौरान किसी अग्निवीर की मौत हो जाती है तो उसे 48 रुपए की बीमा राशि, सेवा निधि और बाकी बचे सेवा काल का वेतन दिया जाएगा। चार साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद ऐसे लोगों को अग्निवीर का प्रमाण पत्र दिया जाएगा।
इसके अलावा, मेडिकल ट्रेडमैन को छोड़कर भारतीय वायुसेना के नियमित कैडर में उन्हीं अभ्यर्थियों को लिया जाएगा, जिन्होंने अग्निवीर के रूप में अपना कार्यकाल पूरा किया है। सेना या किसी अन्य फोर्स में इनकी नियुक्ति सरकारी नियमों के अनुसार ही होगी।
मनी लॉन्ड्रिंग केस में राहुल गाँधी से चल रही प्रवर्तन निदेशालय की पूछताछ के बीच कॉन्ग्रेसियों द्वारा लगातार सड़कों पर हंगामा जारी हो रखा है। इस बीच ऑल इंडिया महिला कॉन्ग्रेस की अध्यक्ष नेट्टा डिसूजा का एक वीडियो सामने आया है। इस वीडियो में वह सुरक्षाकर्मियों पर थूक रही हैं।
आजतक पत्रकार शुभांकर मिश्रा द्वारा शेयर की गई वीडियो में देख सकते हैं कि महिला सुरक्षाकर्मी नेट्टा को गाड़ी में बैठा रही हैं जबकि नेट्टा वाहन के दरवाजे पर खड़े होकर उनके ऊपर थूक रही हैं। नेट्टा के थूक फेंकने की यह हरकत वीडियो में स्पष्ट रिकॉर्ड हुई है। वीडियो को देखने के बाद लोग कह इन्हें ‘थूक गैंग’ बता रहे हैं। इसके अलावा ये भी कहा जा रहा है कि नेट्टा का कोविड चेक अप होना चाहिए
— Shubhankar Mishra (@shubhankrmishra) June 21, 2022
नेट्टा डिसूजा का वीडियो सामने आने से पहले कॉन्ग्रेस की कुछ और महिला नेत्रियों का वीडियो सामने आया था। एक वीडियो में अलका लांबा पुलिस के सामने सड़क पर अजीबोगरीब ढंग से रोते-चिल्लाते दिखी थीं। उन्होंने पुलिसकर्मी को हाथ पीछे करके कहा था कि अब उन्हें कहा जाएगा कि उन्होंने वर्दी पर हाथ डाल दिया जबकि ये सब तो वह खुद को बचाने के लिए कर रही हैं।
अलका और नेट्टा की तरह ही एक और कॉन्ग्रेस की वरिष्ठ महिला नेता हैं जो कुछ दिन पहले अपनी हरकत के कारण चर्चा में आई। नाम है- रेणुका चौधरी। रेणुका का पिछले दिनों पुलिस से बदसलूकी का वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर हुआ था। हैदराबाद में पार्टी के विरोध प्रदर्शन के दौरान वह एक पुलिसकर्मी का कॉलर पकड़ते हुए नजर आ रही थीं। उस दौरान 7-8 महिला पुलिसकर्मियों ने पकड़कर काबूल किया था।
#BREAKING | Senior Congress leader and former Minister Renuka Chowdhury snatches collar of a Sub Inspector during a protest called by AICC over ED summons to Rahul Gandhi
केरल की कोच्चि पुलिस ने 17 जून को एक महिला सहकर्मी की शिकायत के आधार पर पत्रकार टीपी नंदकुमार (TP Nandakumar) को गिरफ्तार किया था। ‘क्राइम’ के नाम से मशहूर पत्रकार टीपी नंदकुमार क्राइम मैगजीन के मुख्य संपादक हैं। पत्रकार को कलूर स्थित उनके आवास से उन्हें गिरफ्तार किया गया था। उन पर कथित तौर पर एक महिला सहकर्मी का यौन उत्पीड़न, उसके साथ बदसलूकी करने और फर्जी अश्लील वीडियो बनाने के लिए उस पर दबाव डालने का आरोप है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, महिला ने 27 मई को कोच्चि पुलिस आयुक्त के पास अपनी शिकायत दर्ज कराई थी। उसने आरोप लगाया था कि पत्रकार टीपी नंदकुमार ने उसे स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज को निशाना बनाते हुए एक पोर्न वीडियो बनाने के लिए मजबूर किया था। नंदकुमार ने उससे यह भी कहा था कि वह जॉर्ज की तरह दिखती है।
शिकायतकर्ता ने पुलिस को बताया कि पत्रकार ने उसे इस काम के लिए मोटी रकम की पेशकश की थी। जब उसने पोर्न वीडियो को करने से इनकार कर दिया तो उसने उसके साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया। शिकायत के आधार पर केरल पुलिस ने नंदकुमार के कार्यालय की तलाशी ली, वहाँ से उन्होंने कई डिजिटल उपकरण और दस्तावेज जब्त किए।
इस बीच कोच्चि के पुलिस आयुक्त सीएच नागराजू ने आरोप लगाया कि पत्रकार ने शिकायतकर्ता से केरल की स्वास्थ्य मंत्री का एक फर्जी वीडियो बनाने के लिए कहा था। पत्रकार के खिलाफ अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की धारा 509 (किसी महिला की गरिमा को ठेस पहुँचाने के इरादे से शब्द, भाव-भंगिमा का इस्तेमाल करना या हरकत करना), 294 बी (अश्लील हरकत करना) और 506 के तहत मामला दर्ज किया गया है।
बता दें कि महीनों पहले पत्रकार टीपी नंदकुमार ने क्राइम पत्रिका में एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि उनके पास स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज के कई न्यूड वीडियो हैं। सितंबर 2021 में पत्रकार नंदकुमार ने केरल के पूर्व कॉन्ग्रेस नेता पीसी जॉर्ज का इंटरव्यू लिया था। इस दौरान पीसी जॉर्ज ने स्वास्थ्य मंत्री के बारे में अपमानजनक टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि वीना जॉर्ज को सिर्फ इसलिए स्वास्थ्य मंत्री बनाया गया है, क्योंकि वह सीएम पिनराई विजयन की ‘अस्सिटेंट’ थीं।
क्राइम मैगजीन ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर इस फोन-इन इंटरव्यू शेयर किया था। जिसके बाद क्राइम मैगजीन के मुख्य संपादक टीपी नंदकुमार को गिरफ्तार किया गया। कक्कनड पुलिस ने उन पर वीना जॉर्ज के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने और उसका ऑडियो क्लिप सोशल मीडिया वायरल करने का आरोप लगाया था। बाद में पूर्व विधायक पीसी जॉर्ज के खिलाफ राज्य की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने का मामला दर्ज किया गया था।
Kerala: Enforcement Directorate (ED) summoned TP Nandakumar, who is a journalist, to present evidences in connection with SNC Lavalin case tomorrow.
In 2006, TP Nandakumar filed a complaint to Directorate of Revenue Intelligence against Kerala CM Pinarayi Vijayan and two others.
गौरतलब है कि पत्रकार टीपी नंदकुमार और पूर्व नेता पीसी जॉर्ज का सीएम पिनराई विजयन के खिलाफ कानूनी लड़ाई का इतिहास रहा है। वर्ष 2006 में, नंदकुमार ने एसएनसी-लवलिन भ्रष्टाचार मामले में ईडी को महत्वपूर्ण सबूत पेश करके सीएम विजयन को बेनकाब किया था। उन्होंने राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) में सीएम विजयन के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी और उन पर आपराधिक साजिश में शामिल होने का आरोप लगाया था, जब वह मई 1996 से अक्टूबर 1998 तक केरल के बिजली मंत्री के रूप में कार्यरत थे। पुलिस का कहना है कि सोने की तस्करी के मामले में सीएम विजयन के खिलाफ स्वप्ना सुरेश द्वारा लगाए गए आरोपों के पीछे भी नंदकुमार हैं।
उत्तराखंड (Uttarakhand) को देवभूमि कहा जाता है और यहाँ एक से बढ़ एक मानव को दिए गए प्रकृति के उपहार हैं। कलकल करतीं नदियाँ, हरियाली से आच्छादित भूमि, स्वर्ग को छूते प्रतीत होने वाले पहाड़, सुंदर एवं मनोरम घाटियाँ लोगों को अपनी तरफ आकृष्ट करती हैं। इसके साथ ही यहाँ अति प्राचीन मंदिरों की एक पूरी श्रृंखला भी है। इन्हीं में से एक है बिंदेश्वर महादेव (लोक भाषा में बिनसर महादेव) (Bindeshwar or Binsar Mahadev)का मंदिर है। इस मंदिर से महारानी कर्णावती (Maharani Karnavati) का भी इतिहास जुड़ा है, जिन्होंने मुगलों की हेकड़ी निकाल दी थी।
उत्तराखंड के अल्मोड़ा (Almora) जिले में दूधातोली पर्वत श्रृंखला की चोटी पर देवदार, ओक और अन्य वृक्षों के घने जंगलों में 2,500 मीटर (8,202 फीट) की ऊँचाई पर स्थित है बिनसर महादेव का मंदिर। यह दिव्यता, भव्यता और मनमोहकता के लिए विख्यात है।
कहा जाता है कि स्वर्गारोहन के दौरान पांडवों ने अंतिम बार यहाँ महादेव को स्थापित कर उनकी पूजा की थी। तब से इस मंदिर का महात्म्य बना हुआ है। यहाँ आने वाले भक्तों की मनोकामना भगवान महादेव जरूर पूरी करते हैं।
मंदिर (फोटो साभार: hmoob.in)
कहा जाता है कि गढ़वाल साम्राज्य के महाराजा महिपत शाह (Raja Mahipat Shah) के युद्ध में वीरगति प्राप्त करने के बाद राज्य की बागडोर महारानी कर्णावती (मेवाड़ के महाराणा सांगा की पत्नी कर्णावती या कर्मावती से अलग हैं ये) के हाथों में आ गया था। एक महिला को राज्य चलाते देख मुगलों ने आक्रमण कर दिया।
उस दौरान महारानी कर्णावती ने इस बिनसर मंदिर में रहकर अपने दुश्मनों का सामना किया था। कहा जाता है कि जब उनकी स्थिति कमजोर पड़ने लगी, तभी अचानक ओलावृष्टि (ओला गिरना) होने लगी। बड़े-बड़े ओलों की मार से परेशान दुश्मन भागने को मजबूर हो गए।
विख्यात अंग्रेज़ विद्वान एडविन एटकिंसन ने ‘हिमालयन गजेटियर’ (Himalayan Gazetteer) लिखा है कि इसके बाद महारानी ने इसे अपने कुलदेवता का आशीर्वाद समझा और वीणेश्वर महादेव (जो कालांतर में बिनसर महादेव हो गया) का जीर्णोद्धार हो गया।
महाराजा पृथु, पांडव और बिनसर मंदिर की स्थापना
इस मंदिर को लेकर कई कहानियाँ प्रचलित हैं। कहा जाता है कि यहाँ से शिवलिंग को महाराज पृथु (Raja Prithu) ने अपने पिता बिंदु की याद में स्थापित कराया था और इसका नाम बिंदेश्वर महादेव रखा था।
वहीं, स्थानीय लोगों का कहना है कि बिनसर महादेव पांडवों ने स्थापित किया था। कहा जाता है कि पाँचों पांडव जब अपनी पत्नी सहित द्रौपदी के साथ स्वर्गारोहण के लिए जाने लगे तो उससे पहले महादेव का यही पूजन किया था। यह भी कहा जाता है कि पांडवों ने यहाँ पर अपना अज्ञातवास गुजारा था। यहाँ पर आज भी भीमघट नाम की एक शिला है।
बिनसर महादेव शिवलिंग को स्वयंभू शिवलिंग और आदिकाल का बताया जाता है। लोक मान्यताओं के अनुसार, स्थानीय लोगों ने देखा की एक गाय रोज एक पत्थर पर दूध गिराती है। गुस्साए ग्रामीणों ने गाय को धक्का देकर उस स्थान पर कुल्हाड़ी से वार किया तो खून निकलने लगा। कुल्हाड़ी का यह निशान आज भी उस शिवलिंग पर है। कहा जाता है कि उस बाद वहाँ रहने वाले मनिहार लोग गाँव छोड़ कर चले। आज भी इस मंदिर के आसपास दूर तक मानव बस्ती नहीं है।
मंदिर परिसर (फोटो साभार: hmoob.in)
मंदिर का वर्तमान स्वरूप 9-10वीं सदी में बनाया गया बताया जाता है। इस मंदिर में भगवान गणेश, हर गौरी और महिषमर्दिनी की मूर्तियाँ स्थापित की गई है। मंदिर की स्थापत्य कला के लिए जाना जाता है। महेशमर्दिनी की मूर्ति 9 वीं शताब्दी की तारीख में ‘नगरीलिपी’ में ग्रंथों के साथ उत्कीर्ण है।
मंदिर को रहस्यमयी बताया जाता है। कहा जाता है कि इसके गर्भगृह में ठंडे पानी का एक गोलाकार, छोटा और गहरा जलाशय था, जो एक कुएँ जैसा दिखता था। इसके चारों ओर अनेक मूर्तियाँ रखी हुई थीं। जलाशय के अंदर एक सांप के रहने की बात कही गई थी। हालाँकि, इस कुएँ को अब पाट दिया गया है। इसमें एक अज्ञात देवता की मूर्ति भी बताई जाती है।
अज्ञात देवता की मूर्ति (फोटो साभार: hmoob.in)
मुगलों का नाक काटने वाली महारानी कर्णावती
सन 1622 में महाराजा श्याम शाह की मौत अलकनंदा में डूबने के कारण होगई। उसके बाद उनके पुत्र महाराजा महिपत शाह ने मुगलों की सत्ता को कई बार चुनौती दी। इतना ही नहीं, उन्होंने तिब्बत तीन बार आक्रमण किया, लेकिन 1631 में में वह युद्ध में वीरगति को प्राप्त हो गए।
उस समय उनके बेटे पृथ्वी शाह की उम्र सिर्फ 7 साल थी। ऐसे राज्य की बागडोर महारानी कर्णावती के हाथों में आ गई। महारानी कर्णावती हिमाचल के राजपरिवार से थीं, इसलिए शासन कला में वह सिद्धहस्त थीं। लेकिन, एक महिला को शासन करते देख काँगड़ा का मुगल सूबेदार नजाबत खान (Nazabat Khan) ने मुगल बादशाह शाहजहाँ (Mughal Ruler Shahjahan) से आज्ञा लेकर 1635 में गढ़वाल की राजधानी श्रीनगर पर आक्रमण करने के लिए बढ़ चला।
17वीं शताब्दी भारत आए इटली के यात्री निकोलाओ मानूची ने कर्णावती और मुगलों के संघर्ष के बारे में विस्तार लिखा है। उसने लिखा है कि मुगल सैनिक जब शिवालिक की तलहटी से ऊपर चढ़ना शुरू किया, तब गढ़वाली सैनिकों ने गुरिल्ला युद्ध शुरू कर दिया।
हिमालयन गजेटियर में अंग्रेज़ विद्वान एडविन एटकिंसन ने लिखा है कि महारानी कर्णावती पर्वत की चोटी पर मौजूद बिनसर मंदिर से दुश्मनों के खिलाफ सेना का संचालनकर रही थीं। एक समय ऐसा भी आया, जब उनकी स्थिति कमजोर होने लगी तब अचानक ओलावृष्टि शुरू हो गई। इससे दुश्मन पीछे हटने पर मजबूर हो गया। महारानी ने इसे भगवान का आशीर्वाद समझा।
मंदिर (फोटो साभार: hmoob.in)
मुगल सैनिक भागकर पहाड़ियों की तलहटी में पहुँच गए। वहाँ पहले से छिपे सैनिकों ने उन्हें घेर लिया और महारानी कर्णावती के आदेश पर घाटी के दोनों तरफ के रास्ते बंद करा दिए। लगभग 50 हजार मुगल सैनिक घाटियों में फँसकर रह गए। इसके बाद सेनापति नजाबत खान ने शांति प्रस्ताव भेजा, लेकिन महारानी तैयार नहीं हुईं। रसद खत्म होने के बाद नजाबत खान ने महारानी से वापस लौटने की इजाजत में माँगी। इसके लिए महारानी ने एक शर्त रखी।
महारानी कर्णावती ने नजाबत खान को संदेश भेजवाया कि उसके सैनिक वापस लौट सकते हैं, लेकिन उन्हें अपनी नाक कटवानी होगी। मुगल सैनिकों ने आत्मसमर्पण कर नाक कटवा कर वापस लौट चले। इस घटना से लज्जित होकर नजाबत खान ने रास्ते में आत्महत्या कर ली। वहीं शाहजहाँ ने गढ़वाल पर कभी आक्रमण नहीं करने का फरमान जारी कर दिया।
इस घटना के बाद महारानी कर्णावती को नक्कटी रानी यानी दुश्मन की नाक काट लेने वाली रानी कहकर संबोधित किया जाने लगा। तंत्र-मंत्र से संबंधित एक अत्यंत लोकप्रिय पुस्तक ‘सांवरी ग्रंथ’ में उन्हें माता कर्णावती कहा गया है। वहीं, मुगल दरबारों की वृस्तांत वाली पुस्तक ‘मआसिर-उल-उमरा’ और यूरोपीय इतिहासकार टेवर्नियर ने अपनी किताबों में महारानी कर्णावती को मुगलों की हेकड़ी निकाल वाली रानी कहा गया है।
जनकल्याण के लिए महारानी ने कई काम किए
1646 में पृथ्वी शाह को गद्दी सौंपी गई, तब तक महारानी कर्णावती ने लोकोपकार के लिए अनेक काम किए। सबसे पहले उन्होंने इस मंदिर का जीर्णोद्धार कराया। उन्होंने राज्य में कृषि और सामाजिक कल्याण के लिए कई कार्य किए। उन्होंने राजपुर की नहर बनवाई। देहरादून में अजबपुर, करनपुर, कौलागढ़, भोगपुर जैसे आधुनिक नगर बसाए, जो बाद में मुहल्ले बन गए। नवादा में उनका बनवाया हुआ महल आज भी खंडहर के रूप में मौजूद है।
वहीं, बिनसर महादेव आज श्रद्धा का एक केंद्र बन चुका है। गढ़वाल सहित हिंदू धर्म में आस्था रखने वाले लोग इस मंदिर में एक बार जरूर जाना चाहते हैं। यहाँ दर्शन करने जाने के लिए जब यात्रा शुरू होती है तो उसे ‘जात्रा’ कहा जाता है। जात्रा के दौरान स्त्री और पुरुष लोकगीत गाते हैं।
महाराष्ट्र की सत्ताधारी पार्टी शिवसेना के विधायक दल के नेता एकनाथ शिंदे कई विधायकों के साथ गायब हैं, जिसके बाद पार्टी सुप्रीमो और मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने उन्हें इस पद से हटा दिया है। उनकी जगह अजय चौधरी को ये पद दिया गया है। दादर में शिवसेना भवन के बाहर कार्यकर्ताओं की बड़ी भीड़ लगी हुई है। उधर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने कहा है कि एकनाथ शिंदे और भाजपा ने एक-दूसरे से कोई संपर्क नहीं किया है, लेकिन भविष्य का वो कुछ कह नहीं सकते।
उन्होंने कहा कि राजनीति में कुछ भी संभव है। वहीं शिवसेना के प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने आरोप लगाया कि विधायकों के अपहरण हुआ है। पार्टी मुखपत्र ‘सामना’ के एग्जीक्यूटिव एडिटर ने कहा कि विधायकों को झूठ बोल कर कार से ले जाया गया। उन्होंने कहा कि भाजपा को गुजरात से ‘ऑपरेशन लोटस’ चलाने दीजिए, हमारा ऑपरेशन बाद में शुरू होगा। उन्होंने गायब विधायकों की सही संख्या की पुष्टि नहीं की और कहा कि कुछ के साथ पार्टी संपर्क में है।
उन्होंने कहा, “14-15 विधायक सूरत में हैं और उनमें से कुछ वापस आना चाहते हैं। हमारी फ़िलहाल कोई योजना नहीं है। हम स्थिति को देख रहे हैं। भाजपा जो कर रही है, करने दीजिए।” मुंबई के ‘सेना भवन’ के बाहर शिवसैनिकों को 4 बजे जुटने को कहा गया था, जिसके बाद वहाँ भीड़ लगी हुई है। संजय राउत का कहना है कि इन विधायकों के परिवार वाले मिसिंग कंप्लेंट लिखा रहे हैं, जिनमें नितिन देशमुख की पत्नी भी शामिल हैं।
मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के आवास के बाहर भी भीड़ लगी हुई है। NCP नेता जयंत पाटिल ने कहा कि MVA (महा विकास अघाड़ी) सरकार अल्पमत में नहीं आएगी और उन्हें उम्मीद है कि उद्धव ठाकरे के विधायक उनके साथ रहेंगे। भाजपा कह रही है कि फ़िलहाल विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की माँग नहीं है, 18 जुलाई से नया सत्र शुरू होने के बाद वो इस मामले को देखेंगे। उन्होंने 35 विधायकों के गायब होने की बात कही है।
NCP के मुखिया शरद पवार ने कहा कि राज्य सरकार को गिराने का ये तीसरा प्रयास है। उनकी पार्टी के ही नेता और मंत्री छगन भुजबल ने कहा कि महाराष्ट्र की राजनीति में एक किस्म का तूफ़ान आ गया है, लेकिन ये शांत भी होगा और ख़त्म भी हो जाएगा। उन्होंने दावा किया कि आने वाले दिनों में स्थिति सामान्य हो जाएगी। मीडिया रिपोर्ट्स का ये भी दावा है कि उद्धव ठाकरे की बैठक में सिर्फ 20 विधायक ही पहुँचे। शिवसेना अब शक्ति प्रदर्शन की तैयारी में है।
Watch: एकनाथ शिंदे को मनाने गए शिवसेना नेताओं को पुलिस ने रोका
राजस्थान कॉन्ग्रेस के नेता सचिन पायलट ने दावा किया कि चिंता की कोई बात नहीं है, MVA सरकार अपना बचा हुआ कार्यकाल पूरा करेगी और सरकार स्थिर है। कहा जा रहा है कि 7 और शिवसेना विधायक सूरत के उस होटल में पहुँचे हैं, जहाँ एकनाथ शिंदे जमे हुए हैं। वहीं एक एकनाथ शिंदे ने कहा है कि वो सत्ता के लिए बाल ठाकरे की शिक्षाओं को कभी नहीं छोड़ेंगे। उन्होंने कहा कि बालासाहेब ने शिवसैनिकों को हिंदुत्व सिखाया था।
पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा राष्ट्रपति चुनाव में आधे-अधूरे विपक्ष के साझा उम्मीदवार होंगे। दिल्ली में मंगलवार (21 जून, 2022) को विपक्षी दलों की बैठक में यशवंत सिन्हा का नाम सर्वसम्मति से पारित किया गया। यहाँ आधे-अधूरे विपक्ष की बात इसलिए कही गई है क्योंकि कई ऐसे दल जो एनडीए में शामिल नहीं हैं मसलन, बीजद, टीआरएस, वाईएसआर कॉन्ग्रेस, अकाली दल वे इस विपक्षी गुट से अलग रहे हैं।
तृणमूल कॉन्ग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी दलों की बैठक के बाद कॉन्ग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा, “हमने (विपक्षी दलों ने) सर्वसम्मति से फैसला किया है कि यशवंत सिन्हा राष्ट्रपति चुनाव के लिए विपक्ष के साझा उम्मीदवार होंगे।”
We (opposition parties) have unanimously decided that Yashwant Sinha will be the common candidate of the Opposition for the Presidential elections: Congress leader Jairam Ramesh pic.twitter.com/lhnfE7Vj8d
बता दें कि इससे पहले आज ही यशवंत सिन्हा ने तृणमूल कॉन्ग्रेस पार्टी छोड़ने का ऐलान करते हुए कहा कि अब वह वृहद विपक्षी एकता के व्यापक राष्ट्रीय उद्देश्य के लिए काम करेंगे। वहीं राष्ट्रपति चुनाव को लेकर आज विपक्षी दलों की बैठक में जयराम रमेश, सुधींद्र कुलकर्णी, दीपांकर भट्टाचार्य, शरद पवार, डी राजा, तिरुचि शिवा (डीएमके), प्रफुल्ल पटेल, येचुरी, एन के प्रेमचंद्रन (आरएसपी), मनोज झा, मल्लिकार्जुन खड़गे, रणदीप सुरजेवाला, हसनैन मसूदी (नेशनल कॉन्फ्रेंस), अभिषेक बनर्जी और रामगोपाल यादव के रूप में कई विपक्षी नेता शामिल थे।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बताया जा रहा है कि ओवैसी की पार्टी के सांसद इम्तियाज जलील भी बैठक में मौजूद रहे। वहीं, इस बैठक में शामिल होने से पहले यशवंत सिन्हा ने ट्वीट कर कहा था, “जो सम्मान और प्रतिष्ठा दी उसके लिए मैं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को शुक्रिया करता हूँ। अब वो वक्त आ गया है जब पार्टी से हटकर एक बड़े उद्देश्य के लिए काम करना है।”
गौरतलब है कि सेवानिवृत्त IAS अधिकारी यशवंत सिन्हा ने पहले अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली NDA सरकार में केंद्रीय वित्तमंत्री और फिर विदेश मंत्री के रूप में कार्यभार सँभाला था। लेकिन एक लम्बे समय तक मोदी सरकार से चल रहे टकराव के बीच 2021 में तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) में शामिल होने से पहले 2018 में भाजपा छोड़ दी। उन्हें पिछले साल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले TMC का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी नियुक्त किया गया था।
बता दें कि इससे पहले बीते 15 जून को तृणमूल ने दिल्ली में विपक्ष की बैठक बुलाई थी, जिसमें सर्वसम्मति से विपक्ष के उम्मीदवार के रूप में शरद पवार का नाम प्रस्तावित किया गया था। हालाँकि, बाद में पवार ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया था। फिर ममता बनर्जी ने तब नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख फारूक अब्दुल्ला और पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल गोपाल कृष्ण गाँधी के नामों को दो संभावित नामों के रूप में प्रस्तावित किया था। लेकिन, फारुख अब्दुल्ला और गोपाल कृष्ण गाँधी, दोनों ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया था।
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध बढ़ रही यौन हिंसा के बाद वहाँ आपातकाल की घोषणा कर दी गई है। पंजाब के गृह मंत्री अट्टा तरार ने कहा कि उन्हें ये करने पर मजबूर होना पड़ा क्योंकि महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होते अपराथ समाज और सरकार दोनों के लिए चिंताजनक हैं।
गृह मंत्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कानून मंत्री मलिक मोहम्मद की मौजूदगी में बताया कि बलात्कार और कानून व्यवस्था पर कैबिनेट समिति द्वारा सभी केसों की समीक्षा की जाएगी। ऐसी घटना पर निगरानी के लिए नागरिक संस्थाओं, महिला अधिकार संगठनों, शिक्षकों और वकीलों से परामर्श लिया जाएगा।
तरार ने बच्चों के माता पिता से अपील की कि वह लोग अपने बच्चों को सुरक्षा के मायने समझाएँ और किशोरों को घर पर बिना किसी बड़े के अकेला न छोड़ें। गृह मंत्री ने सूचित किया कि पुलिस लगातार आरोपितों को हिरासत में ले रही है। इसके अलावा हालात सुधारने के लिए उनके द्वारा एंटी रेप अभियान चलाया जा रहा है और छात्रों को स्कूल में यौन शोषण से जुड़ी जानकारी भी दिलवाई जा रही है।
प्रांत मंत्री ने जानकारी दी कि रेप केसों से निपटने के लिए पंजाब की फॉरेंसिक साइंस एजेंसी ने डीएनए सैंपल को फ्रास्ट ट्रैक आधार पर चेक करना शुरू कर दिया है। सोमवार को लैब अधिकारियों से भी इसके लिए पंजाब प्रशासन ने बैठक की थी। तरार ने कहा कि आज के जमाने में ड्रग्स लेना बड़े स्कूलों में फैशन बन गया है जिसकी वजह से ऐसे अपराधों में बढ़ोतरी हो रही है।
तरार ने आगे पंजाब की बिगड़ी स्थिति के लिए पाकिस्तान की पूर्व सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पीटीआई के राज में कानून व्यवस्था चरमरा गई थी। पुलिस अधिकारी जो तैनात थे वो रिश्वत लेकर फरार गुज्जर के कहने पर तैनात किए गए थे। फराह बुशरा बीबी की सहेली है। इन पुलिस अधिकारियों को हटाने का काम हो रहा है।
जहाँ एक तरफ ED (प्रवर्तन निदेशालय) कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी से लगातार 5वें दिन ‘नेशनल हेराल्ड’ में घोटाले को लेकर पूछताछ कर रही है, वहीं दूसरी तरफ देश भर में कॉन्ग्रेस पार्टी के नेता-कार्यकर्ता इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी क्रम में अलका लांबा का वीडियो सामने आया है, जहाँ उन्हें विरोध प्रदर्शन के दौरान अजीबोगरीब हरकतें करते हुए देखा जा सकता है। एक बार को तो वो जमीन पर ही लेट गईं।
इस दौरान आसपास मौजूद पुलिसकर्मियों से हाथ जोड़ कर जमीन पर बैठीं अलका लांबा कहती हैं, “भारत माता की जय! हाथ बँधे हुए हैं। जय जवाब, जय किसान। नहीं करने दे रहे हैं। कौन से संविधान या कानून में ये लिखा हुआ है? कैसी ट्रेनंग इन्हें दी गई है? जब अग्निपथ में 4 साल की ट्रेनिंग देकर बाहर हथियार देकर भेजोगे ना, ऐसे ही गर्दनें तोड़ेंगे। निहत्थों की गर्दनें तोड़ते हैं। मेरी भी गर्दन टूटेगी।” इस दौरान वो पुलिस वालों की तरफ इशारा कर रही थीं।
इतना कहते-कहते अचानक पूर्व विधायक अलका लंबा ने पुलिसकर्मियों को धक्का देना शुरू कर दिया और कहने लगीं कि वो अपनी गर्दन बचाने के लिए ऐसा कर रही हैं, लेकिन इसे दिखाया जाएगा कि अलका लांबा ने वर्दी पर हाथ डाल दिया। इस दौरान वो जमीन पर लेट कर नारेबाजी करती रहीं। फिर चिल्लाते और रोते हुए उन्होंने कहा कि मीडिया देख रहा है, वो अपनी गर्दन को बचाने के लिए पुलिस का हाथ पकड़ रही हैं, तो दिखाया जाएगा कि उन्होंने वर्दी का हाथ पकड़ लिया।
उन्होंने दावा किया कि पुलिसकर्मी ने उनकी गर्दन को तोड़ने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा, “इनको बोलो कि मत करें। निहत्थी और अकेली है। यहाँ सब खड़े हैं। मेरे से कोई खतरा है? मेरे हाथ में बम है। बंदूक है? मैंने AK-47 रखी है? मैं सिर्फ बैठी हूँ। गाँधी के देश में…” इस पर महिला पुलिसकर्मियों ने कहा कि वो भी निहत्थी हैं। अलका लंबा इसके बाद जमीन पर लेट कर ‘भारत माता की जय’ और ”जय जवान, जय किसान’ का नारा लगाती रहीं।
अग्निपथ योजना पर देश के कई राज्यों में मचे बवाल के बीच विरोध प्रदर्शन करने वाले युवाओं को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने दो टूक संदेश दिया है। डोभाल ने कहा कि जो अग्निवीर बनने वाला होता है, वह न किसी प्रलोभन में आता है, न वह किसी से बहकाया जा सकता है, न ही वह किसी के दुष्प्रचार के लिए प्रेरित किया जा सकता है। ये जितने भी लोग हैं, मुझे नहीं लगता है कि ये वे लोग हैं जो सेना के लिए और सेना में जाने के इच्छुक और फिट हैं। अग्निवीर अपने घरों में बैठकर तैयारी कर रहे होंगे। उन्होंने कहा कि अग्निपथ योजना की माँग 22-25 साल से लंबित थी।
आज भारत में बनी AK-203 के साथ नई असॉल्ट राइफल को सेना में शामिल किया जा रहा है। यह दुनिया की सबसे अच्छी असॉल्ट राइफल है। सैन्य उपकरणों में बहुत प्रगति की जा रही है: राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल
न्यूज़ एजेंसी ANI से बातचीत के दौरान, अजीत डोभाल ने अग्निपथ योजना को समय की जरूरत बताया है। अजीत डोभाल ने अग्निपथ योजना समेत राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर भी बात की है। उन्होंने कहा, “माहौल बदल रहा है और अब प्राथमिकता देश को सुरक्षित करना है। हालात को देखते हुए संरचना में बदलाव करना होगा। रक्षा क्षेत्र के हर स्तर पर सुधार हो रहा है। सेना की आधुनिकता के लिए सरकार नए हथियार खरीद रही है। हमें अपनी सेना को विश्व स्तरीय सेना बनाना है। ऐसे में इस योजना को वापस लेने का कोई सवाल ही नहीं है।”
डोभाल ने कहा कि आर्म्ड फोर्सेज की भर्ती प्रक्रिया में बदलाव ‘जरूरत’ के चलते हुआ है। अग्निपथ योजना पर डोभाल का कहना है, “अगर हमें कल के लिए तैयारी करनी है तो हमें बदलना ही होगा। अग्निपथ कोई ‘स्टैंडअलोन’ योजना नहीं है। सेना में चार साल बिताने के बाद अग्निवीर जब वापस जाएगा तो वह स्किल्ड और ट्रेन्ड होगा। वह समाज में सामान्य नागरिक की तुलना में कहीं ज्यादा योगदान कर पाएगा।”
#WATCH जो हम कल कर रहे थे अगर वही भविष्य में भी करते रहे तो हम सुरक्षित रहेंगे ये जरूरी नहीं। यदि हमें कल की तैयारी करनी है तो हमें परिवर्तित होना पड़ेगा। आवश्यक इसलिए था क्योंकि भारत में, भारत के चारों तरफ माहौल बदल रहा है: अग्निपथ योजना पर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल pic.twitter.com/2VDR0C1Ugm
वहीं ट्रेनिंग पर बात करते हुए डोभाल ने कहा, “अकेले अग्निवीर कभी पूरी सेना तो बनेंगे नहीं। जो अग्निवीर रेगुलर आर्मी में जाएँगे, उनकी कड़ी ट्रेनिंग होगी, अनुभव हासिल करने के लिए वक्त मिलेगा। अग्निवीर को बेहद कम उम्र में इतना अनुभव हासिल होगा, उनकी स्किल्स डिवेलप होंगी। 25 साल की उम्र में वे सामान्य नागरिकों से कहीं ज्यादा योग्य और प्रशिक्षित होंगे। पहला अग्निवीर जब रिटायर होगा तो 25 साल का होगा। उस वक्त भारत की इकनॉमी 5 ट्रिलियन डॉलर की होगी। ऐसे में तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था को ऐसे लोग चाहिए होंगे। उनमें सेना का जूनून और जज्बा कूट-कूटकर भरा होगा। ये लोग बदलाव के वाहक बनेंगे।”
#WATCH अकेले अग्निवीर पूरी आर्मी कभी नहीं होंगे, अग्निवीर सिर्फ पहले 4 साल में भर्ती किए गए जवान होंगे। बाकी सेना का बड़ा हिस्सा अनुभवी लोगों का होगा। जो अग्निवीर नियमित होंगे(4 साल बाद) उन्हें घनिष्ठ ट्रेनिंग दी जाएगी: राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल pic.twitter.com/tCC8FXmOSD
नई भर्ती योजना के खिलाफ देशभर में प्रदर्शन हुए इस सवाल के जवाब में डोभाल ने कहा कि जब बदलाव आता है तो ऐसा होता ही है, घबराहट होती है। उन्होंने कहा कि एक दूसरा वर्ग भी है जिसे देश की शांति, सुरक्षा से कोई मतलब नहीं है। वे बस ऐसे मुद्दे ढूंढ़ते हैं जहाँ भावुकता को बढ़ावा दिया जा सकता है। जो अग्निवीर बनना चाहते हैं, वो इस तरह हिंसा नहीं करते।
उन्होंने इसी मुद्दे पर आगे कहा, “इसमें दो तरह के प्रदर्शन हो रहे हैं, एक तो वे हैं जिन्हें चिंता है, उन्होंने देश की सेवा भी की है। जब भी कोई बदलाव आता है कुछ चिंताएँ उसके साथ आती हैं। हम इसे समझ सकते हैं। जैसे-जैसे उन्हें पूरी बात का पता चल रहा है वे समझ रहे हैं। जो दूसरा वर्ग है उन्हें न राष्ट्र से कोई मतलब है, न राष्ट्र की सुरक्षा से मतलब है। वे समाज में टकराव पैदा करना चाहते हैं। वे ट्रेन जलाते हैं, पथराव करते हैं, प्रदर्शन करते हैं। वे लोगों को भटकाना चाहते हैं।”
जो दूसरा वर्ग है उन्हें न राष्ट्र से कोई मतलब है, न राष्ट्र की सुरक्षा से मतलब है। वे समाज में टकराव पैदा करना चाहते हैं। वे ट्रेन जलाते हैं, पथराव करते हैं, प्रदर्शन करते हैं। वे लोगों को भटकाना चाहते हैं: अग्निपथ योजना के खिलाफ प्रदर्शन पर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल
डोभाल ने आगे यह भी कहा, “कुछ लोग जिनके पश्चिमी हित हैं, कोचिंग चला रहे हैं, हमें अंदाजा था कि ऐसा होगा। लेकिन जब उन्होंने प्रदर्शन की हदें पार कीं, राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के लिए खतरा बनने लगे, सख्ती करनी पड़ेगी। लोकतंत्र में विरोध की इजाजत है, अराजकता की नहीं।” उन्होंने कहा कि ऐलान के बाद से धीरे-धीरे युवाओं को समझ आने लगा है कि ये तो उनके फायदे की बात है। युवाओं के जो भय और आकांक्षाएँ हैं, वो दूर हो जाएँगे।
डोभाल ने इस बात पर जोर देकर कहा, “ये मैसेज बड़ा क्लियर होना चाहिए। सेना में जो लोग जाते हैं, वह सिर्फ पैसे के लिए नहीं जाते हैं। वे एक जज्बे के साथ जाते हैं। उनमें देशप्रेम होता है। उनके अंदर राष्ट्र की भक्ति और यौवन की शक्ति होती है। वो अपने आपको इन्वेस्ट करते हैं। अगर वह भावना नहीं है, तो आप इसके लिए नहीं बने हैं।”
उन्होंने कहा कि भारत सबसे ज्यादा युवा आबादी है। यह दुनिया में सबसे अधिक है। सेना में 25 प्रतिशत युवाओं को एक अलग स्तर का प्रशिक्षण दिया जाएगा। भारतीय सेना की औसत उम्र सबसे ज्यादा है। देश में अब तक 2 से 3 तीन ही जाति आधारित रेजिमेंट हैं। ऐसे में रेजिमेंट के सिद्धांत के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं होगी। जो रेजिमेंट हैं वे रहेंगी। अग्निवीरों को नई चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार किया जाएगा। दुनिया के सबसे अच्छे असाल्ट राइफल भारतीय सेना के पास हैं।
#WATCH रेजिमेंट के सिद्धांत के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं होगी। जो रेजिमेंट हैं वे रहेंगी: राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल pic.twitter.com/NvoFNz6ufK