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मौलाना ने किन्नर को जबरन बनाया मुस्लिम, आपत्तिजनक चीजें खिलाई-शारीरिक उत्पीड़न भी: प्रयागराज में FIR

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में धर्म परिवर्तन का एक ऐसा मामला सामने आया है जहाँ एक किन्नर ने दूसरे किन्नर पर धर्मांतरण कराने का आरोप लगाया है। जिसके विरोध में जॉर्जटाउन थाने पहुँची अन्य किन्नरों ने जमकर हंगामा किया। इसके साथ ही आरोपित किन्नर के खिलाफ मौलाना की मदद से अवैध धर्मान्तरण का मुकदमा दर्ज करने के लिए शिकायत भी दी। फ़िलहाल, यूपी पुलिस इस मामले की जाँच कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, थाना अल्लापुर के निवासी एक गरीब महिला का आरोप है कि उसका एक बच्चा पंकज किन्नर है। उसे शाहगंज की एक किन्नर ने अपना चेला बनाया है। महिला का आरोप है कि उसके किन्नर बच्चे पंकज को पत्थर गली स्थित मौलाना ने दूसरे किन्नरों के कहने पर इस्लाम में धर्मान्तरण करा दिया। साथ ही उसे जबरन आपत्तिजनक चीजें खिलाई गईं और उसका शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न किया गया।

रिपोर्ट के अनुसार, महिला ने बताया कि जब पंकज किन्नर अपने घर जाना चाहती थी तो उस पर चोरी का आरोप लगाकर मुकदमा दर्ज करा दिया गया। इसके साथ ही पीड़ित पंकज किन्नर के साथ मार-पिटाई भी की गई। वहीं, धर्मान्तरण के मामले में शिकायत के बाद प्रयागराज पुलिस ने जाँच के बाद आवश्यक कार्रवाई की बात कही है।

वहीं, इस धर्मान्तरण के इस मामले में किन्नर कल्याण बोर्ड भी हस्तक्षेपप करते हुए कहा है कि मामले में तहरीर दी गई है, मामला गंभीर है। बोर्ड की वैष्णवी नंद गिरी ने कहा, “हमारी माँग है कि जो भी आरोपित हो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। किसी का भी जबरन धर्म परिवर्तन करवाना गलत है। सरकार और प्रशासन से माँग है कि मामले में कार्रवाई की जाए, क्योंकि न्याय व्यवस्था सभी के लिए है।”

255+ मौतें, 500 से अधिक घायल: अफगानिस्तान में भूकंप ने मचाई तबाही, सैकड़ों घर हुए जमींदोज

अफगानिस्तान और पाकिस्तान में बुधवार (22 जून 2022) को 6.1 मैग्नीट्यूड की तीव्रता वाले भूकंप ने जमकर तबाही मचाई। भूकंप के तेज झटकों के चलते इमारतें धराशाई हो गईं। इस हादसे में अब तक सामने आई जानकारी के मुताबिक, 255+ लोगों की मौत हो गई है। जबकि, 500 से अधिक लोग घायल हुए हैं।

अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे ने कहा है के भूकंप के कारण सबसे अधिक तबाही पक्तिका प्रान्त के चार जिलों में हुई है। इसके अलावा खोस्त और नांगरहार जिलों में भी भूकंप के कारण मौतें हुई हैं। तालिबान प्रशासन के प्राकृतिक आपदा मंत्रालय के प्रमुख मोहम्मद नसीम हक्कानी ने कहा कि अधिकांश मौतें पक्तिका प्रान्त में हुईं हैं, जहाँ 100 लोग मारे गए और 250 घायल हुए।

उन्होंने कहा कि खोस्त में 25 और नंगरहार प्रान्त पाँच और लोग मारे गए हैं। ऐसी कई तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं, जिनमें अफगानिस्तान में भूकंप के कारण हुई तबाही के मंजरों को देखा जा सकता है। यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे ने कहा कि 6.1 तीव्रता का भूकंप पाकिस्तानी सीमा के पास खोस्त शहर से लगभग 44 किमी (27 मील) दूर 51 किमी (31 मील) की गहराई पर आया।

अफगानिस्तान की सरकारी न्यूज एजेंसी बख्तार के हवाले से एसोसिएटेड प्रेस ने कहा कि अकेले पक्तिका में 90 से अधिक घर जमीदोज हो गए हैं। दर्जनों लोग अभी भी मलबे में दबे हुए हैं। तालिबान प्रशासन की तरफ से राहत और बचाव का काम किया जा रहा है। गंभीर रूप से घायलों को एयरलिफ्ट किया गया है।

तालिबान सरकार के डिप्टी स्पोक्सपर्सन बिलाल करीमी के मुताबिक, भीषण भूकंप ने पक्तिका प्रान्त के चार जिलों को झकझोर कर रख दिया। इसमें हमारे सैकड़ों देशवासी मारे गए। करीमी ने सभी सहायता एजेंसियों से मदद की अपील की है।

इस प्राकृतिक आपदा को लेकर यूरोपियन मेडिटरेनियन सीस्मोलॉजिकल सेंटर ने दावा किया है कि ये भूकंप 500 किलोमीटर के दायरे में फैला था। इसकी जद में अफगानिस्तान, पाकिस्तान और भारत के 119 मिलियन लोग थे। पाकिस्तान के इस्लामाबाद में भी भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए। बहरहाल पाकिस्तान में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।

‘कानून के मुताबिक ध्वस्त किया गया जावेद पंप का घर’: सुप्रीम कोर्ट में यूपी सरकार ने बताया, प्रयागराज के दंगाई के लिए जमीयत ने डाली है याचिका

हाल ही में उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में अधिकारियों द्वारा कई अवैध निर्माणों को ध्वस्त किया गया है। जिसके बाद जमीयत उलमा-ए-हिंद ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करते हुए इसे चुनौती दी। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपने इस कदम को सही ठहराया है। 

सरकार ने अपने हलफनामे में कहा कि प्रयागराज विध्वंस की प्रक्रिया स्थानीय विकास प्राधिकरण ने किया था। यह राज्य सरकार का एक स्वायत्त निकाय है। विध्वंस की प्रक्रिया शहर को अवैध और अनधिकृत निर्माण से मुक्त करने के उनके प्रयास का एक हिस्सा था।

आफरीन फातिमा के अब्बू जावेद मोहम्मद के घर के विध्वंस के संबंध में, राज्य ने बताया कि निर्माण ‘प्रयागराज विकास प्राधिकरण (PDA) के नियमों का उल्लंघन’ था और इसे गिराने की कार्यवाही दंगों से बहुत पहले ही शुरू कर गई थी।  यह दंगा भाजपा की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा के पैगंबर मोहम्मद पर की गई टिप्पणी के बाद भड़की थी।

आगे कहा गया है कि जमीयत ने इस विध्वंस को गलत रंग देने का प्रयास किया है। इस विध्वंस से प्रभावित पक्ष में से किसी ने भी कोर्ट का रुख नहीं किया है। राज्य सरकार की तरफ से हलफनामे में कहा गया है कि की गई सभी कार्रवाई यूपी शहरी योजना और विकास अधिनियम, 1973 का पालन करते हुए की गई थी।

जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस विक्रम नाथ की पीठ ने पिछली सुनवाई के दौरान अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया था कि जब तक मामले की अगली सुनवाई नहीं हो जाती तब तक कोई अप्रिय घटना न हो।

बता दें कि जमीयत उलमा-ए-हिंद की याचिका में कहा गया है कि राज्य में विध्वंस भाजपा प्रवक्ता नूपुर शर्मा के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के बाद किया गया था, जिन्होंने एक टेलीविजन डिबेट के दौरान पैगंबर मुहम्मद और इस्लाम के खिलाफ टिप्पणी की थी। 

गौरतलब है कि पिछले दिनों प्रयागराज में इस्लामिक कट्टरपंथियों द्वारा की गई हिंसा के मुख्य आरोपित और JNU छात्रा आफरीन फातिमा और उसके अब्बू जावेद उर्फ पंप की घर पर योगी सरकार ने बुलडोजर चला दिया। जावेद का मकान उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम-1973 के प्रावधानों के खिलाफ अनधिकृत रूप से निर्मित किया गया था। इस संबंध में 10 मई 2022 को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया था, मगर 24 मई को सुनवाई के दौरान ना तो जावेद और ना ही उसका वकील उपस्थित हुआ। कोई दस्तावेज भी प्रस्तुत नहीं किया गया।

प्रयागराज विकास प्राधिकरण (PDA) की तरफ से जारी नोटिस में कहा गया था, “इसको ध्यान में रखते हुए 25 मई 2022 को भवन ध्वस्तीकरण के लिए आदेश पारित किया गया। इस संबंध में नोटिस लगा दी गई है। आप भवन को ध्वस्त कर 9 जून 2022 तक सूचित करें, अन्यथा 12 जून 2022 को प्रात: 11 बजे भवन को खाली करें, ताकि ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जा सके।”

बताया जा रहा है कि जावेद अहमद उर्फ पंप प्रयागराज में हिंसा के दौरान बच्चों को आगे करके पुलिस पर पत्थरबाजी करवाई थी। उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। इसकी पुष्टि प्रयागराज के एसएसपी अजय कुमार ने की थी। मामले में जावेद अहमद की बेटी के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

खालिस्तानी समर्थक KTV ने ढाई महीने बाद सरेंडर किया लाइसेंस: प्राइम टाइम पर दिखाता था- जलता लाल किला, इंदिरा गाँधी के मुँह से खून

ब्रिटेन में खालसा टेलीविजन लिमिटेड (Khalsa Telivision Ltd- KTV) ने मीडिया वॉचडॉग ऑफकॉम की कार्रवाई के बाद अपना प्रसारण लाइसेंस सरेंडर कर दिया है। ऑफकॉम की जाँच में पाया गया कि केटीवी पर 95 मिनट के ‘प्राइम टाइम’ शो में हिंसा के लिए उकसाया गया था। 

इस साल 31 मार्च को जाँच के बाद ब्रिटिश टेलीकॉम रेगुलेटर ‘ऑफिस ऑफ कम्युनिकेशंस- ऑफकॉम’ (British Telecom regulator Ofcom) ने उसका (KTV) प्रसारण लाइसेंस निलंबित कर दिया था। जाँच के दौरान यह खुलासा हुआ था कि खालसा टेलीविजन लिमिटेड या केटीवी ने प्रसारण नियमों का उल्लंघन किया और खालिस्तान समर्थक दुष्प्रचार में शामिल रहा।

ऑफकॉम के मुताबिक, ‘प्राइम टाइम’ शो के दौरान प्रस्तुतकर्ता (Anchor) जगजीत सिंह जीता ने भड़काऊ बयान दिए थे। उसने सिखों से सिख अलगाववादी नेताओं का अनुसरण करने और खालिस्तान के लिए हत्या सहित किसी भी तरह की हिंसा को जायज बताया था। यह टेलीविजन चैनल यूनाइटेड किंगडम (UK) में सिख समुदाय द्वारा संचालित किया जाता है।

ऑफकॉम ने अपने आदेश में कहा था कि यह बयान अपराध और अव्यवस्था को बढ़ावा देने वाला और नियमों के खिलाफ है। आदेश में यह भी कहा गया था, “इस उल्लंघन की गंभीर प्रकृति को देखते हुए और हमारे निलंबन नोटिस में निर्धारित कारणों के तहत हम खालसा टेलीविजन लिमिटेड के यूके में प्रसारण के लाइसेंस को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर रहे हैं।”

खालिस्तानी नेटवर्क ने भारत के खिलाफ हिंसा का किया था आह्वान

यह टीवी चैनल भारत में हिंसा को बढ़ावा देने के लिए कुख्यात है। पिछले साल फरवरी में ऑफकॉम ने खालिस्तान समर्थक नेटवर्क- खालसा टेलीविजन (KTV) पर एक कार्यक्रम के दौरान चर्चा में घृणा फैलाने और हिंसा को बढ़ावा देने के कारण 50,000 पाउंड का जुर्माना लगाया था। इस चर्चा में आतंक का संदर्भ देते हुए ब्रिटिश सिखों को हिंसा करने के लिए उकसाया गया था। उस दौरान ब्रिटिश मीडिया नियामक ऑफकॉम ने केटीवी को चेतावनी दी थी कि वह इस तरह की भड़काऊ सामग्री परोस कर नियमों का उल्लंघन ना करे।

वीडियो एवं शो में भारतीय लोगों के खिलाफ हिंसक कार्रवाई की अपील और सिख अलगाववादी आंदोलनों को बढ़ावा देने वाले हिंसक कृत्यों का महिमामंडन किया गया था। शो में सिख धर्म की आलोचना करने वालों के खिलाफ हिंसा और आतंकवादी संगठनों को वैध बताया। संगीत वीडियो में पूर्व भारतीय प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की तस्वीरें थीं और उस तस्वीर के मुँह से खून टपक रहा था।

उसके कैप्शन में लिखा था, “तूने मासूमों का खून पिया, दुष्ट औरत”। गीत में लिखा था, “लड़ाके तेरे राज्य को नष्ट कर देंगे”। इस में दिल्ली के लाल किले को आग की लपटों में दिखाया गया था। इस शो और वीडियो को ऑफकॉम ने ‘भारत के खिलाफ हिंसक कार्रवाई की वकालत करने वाला’ माना था।

‘देवेंद्र फडणवीस होंगे नए CM, एकनाथ शिंदे उप-मुख्यमंत्री’: केंद्रीय मंत्री ने बताया – महाराष्ट्र में होगी नई सरकार; उधर उद्धव ठाकरे कोरोना+

केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्यमंत्री रामदास आठवले ने कहा है कि देवेंद्र फडणवीस महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बनेंगे और एकनाथ शिंदे उप-मुख्यमंत्री। ‘रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (RPI)’ के मुखिया ने ‘TV9 भारतवर्ष’ से बात करते हुए कहा कि भाजपा, एकनाथ शिंदे और RPI मिल कर सरकार बनाएँगे। उद्धव महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के बाद मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे भी कोरोना पॉजिटिव हो गए हैं।

ये जानकारी कॉन्ग्रेस के पर्यवेक्षक बना कर राज्य में भेजे गए कमलनाथ ने दी। वहीं एकनाथ शिंदे ने कहा कि उनके पास 40 से अधिक विधायकों का समर्थन है। अलग से अपना गुट बनाने के सम्बन्ध में उन्होंने कहा कि ऐसी कोई योजना नहीं है। वहीं रामदास आठवले ने कहा कि शिवसेना-भाजपा काफी दिनों तक साथ रही और 2019 में साथ मिल कर चुनाव लड़ने के बाद भी आँकड़े ऐसे आ गए कि दोनों मिल कर ही सरकार बना सकते थे।

उन्होंने कहा कि इसके बावजूद शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे और प्रवक्ता संजय राउत ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री का पद माँगने लगे, जबकि अमित शाह से ऐसी कोई बात नहीं हुई थी और सिर्फ सत्ता में आधी भागीदारी की बात हुई थी। उन्होंने बताया कि शिवसेना में नाराज़गी थी कि बाल ठाकरे का सपना कॉन्ग्रेस-NCP के साथ जाने से पूरा नहीं होगा। उन्होंने कहा कि उनकी बात पर भी शिवसेना ने ध्यान नहीं दिया। उन्होंने कहा कि एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे के सभी धंधे बंद कर दिए।

उन्होंने कहा, “ये सभी शिवसैनिक हैं बालासाहेब ठाकरे के बंदे, जो नहीं रहे अंधे। अब बहुत सरे विधायक, लगभग 40 की संख्या में MLA शिवसेना छोड़ सकते हैं और उद्धव ठाकरे के साथ 10-12 विधायक रह जाएँगे। भाजपा और एकनाथ शिंदे को एक-दूसरे से बात करनी चाहिए। सरकार तो अब भाजपा, एकनाथ शिंदे और RPI की मिल के बनेगी। अभी चुनाव होना ठीक नहीं है। सरकार बनाने में कोई समस्या नहीं है, क्योंकि भाजपा के पास 133 लोग हैं ही।”

कट्टरपंथियों से प्यार, हिंदुत्व से चिढ़: विदेशों तक भारत विरोधी प्रोपेगेंडा फैलाने वाले सीजे वर्लमैन का ट्विटर इंडिया में बैन, मोदी सरकार पर मढ़ा इल्जाम

इस्लामी कट्टरपंथियों को पीड़ित दिखाने वाले और झूठी खबरों से हिंदूफोबिया फैलाने वाला ऑस्ट्रेलियाई लेखक व पत्रकार सीजे वर्लमैन का ट्विटर हैंडल भारत में प्रतिबंधित कर दिया गया है। @cjwerleman के ट्विटर हैंडल पर क्लिक करके देख सकते हैं कि उसका कोई ट्वीट अब नहीं दिख रहा। ट्विटर ने ये कदम अकॉउंट के विरुद्ध हुई लीगल डिमांड की प्रतिक्रिया में उठाया है।

@cjwerleman के अकॉउंट के विरुद्ध उठाए गए इस कदम को भारतीयों द्वारा सराहनीय माना जा रहा है। वहीं कट्टरपंथी सीजे वर्लमैन का ट्विटर रिस्टोर करने की बात कह रहे हैं।

इस संंबंध में वर्लमैन की प्रतिक्रिया भी आई है। द सीजे वर्लमैन अकॉउंट से इस प्रतिक्रिया का स्क्रीनशॉट शेयर हुआ है। इसमें वर्लमैन ने जैक, एलन मस्क को टैग कर कहा, “ये एक और सबूत है इस बात का कि ट्विटर भारत सरकार के विरुद्ध प्रोटेक्शन रैकेट चला रहा है। मेरा अकॉउंट भारत में प्रतिबंधित किया गया क्योंकि दक्षिणपंथी, नरेंद्र मोदी शासन के हिंदू फासीवादी इसकी माँग कर रहे थे।”

मालूम हो कि सीजे वर्लमैन अपने ट्वीट से लगातार हिंदूघृणा फैलाने का काम करता था। हाल में उसने 2 साल पुरानी एक वीडियो शेयर करके हिंदुत्व को कोसा था। वीडियो पुलिस लाठी चार्ज की थी। इसे शेयर करकते वर्लमैन ने लिखा था- “देखो कैसे हिंदू कट्टरपंथ से ग्रसित पुलिस एक बुजुर्ग मुस्लिम आदमी को मार रहे हैं।” वीडियो को देखने के बाद कट्टरपंथियों ने धमकी दी थी कि मुंबई में फिर से 1992 जैसे मुंबई ब्लास्ट करने की जरूरत है।

वर्लमैन ने जदयू कार्यकर्ता मोहम्मद खलील आलम रिजवी की हत्या पर भी ऐसा प्रोपेगेंडा फैलाया था। वर्लमैन खलील से जुड़ी वीडियो शेयर करके लिखा था, “एक मुस्लिम व्यक्ति अपनी जान की भीख माँगता रहा और ‘हिन्दू भीड़ ने उसकी हत्या के बाद उसे जला डाला।” जब ऑपइंडिया ने इस संबंध में समस्तीपुर पुलिस अधीक्षक से बात की तो मामले में सांप्रदायिक एंगल का खंडन किया गया था।

उन्होंने कहा, “इसमें कोई सांप्रदायिक दृष्टिकोण नहीं है। गोमांस-गोहत्या को लेकर वायरल एक वीडियो आपको मिला होगा। इस वीडियो को वायरल करने के पीछे उनका मकसद यह था कि अगर पुलिस उन्हें पकड़ लेती है और कांड का खुलासा कर देती है तो हमलोग उसे सोशल मीडिया पर वायरल कर देंगे। जिससे पुलिस का ध्यान उनकी तरफ से हट जाएगा और लोगों को भी उनकी सहानुभूति मिलेगी।”

इसके अलावा वर्लमैन के कई ट्वीट में यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए अपशब्द कहे जाते थे। उसने योगी आदित्यनाथ को ‘हिंदुत्व आतंकी’ तक कहा था।

एकनाथ शिंदे की बगावत से कैसे पार पाएँगे उद्धव, इन 5 को तो बाल ठाकरे भी नहीं रोक पाए: एक ने गिरफ्तार करवाया, दूसरे के कारण कुत्ता पालना छोड़ दिया

हम बाला साहेब के पक्के शिव सैनिक हैं… बाला साहेब ने हमें हिंदुत्व सिखाया है। बाला साहेब के विचारों और धर्मवीर आनंद दीघे साहब की शिक्षाओं के बारे में सत्ता के लिए हमने कभी धोखा नहीं दिया और न कभी धोखा देंगे।

यह बयान एकनाथ शिंदे का है। उन्होंने अपनी बगावत से न केवल शिवसेना और महाराष्ट्र की सरकार को हिला डाला है, बल्कि बाल ठाकरे की हिंदुत्व वाली राजनीति पर भी दावा ठोक दिया है।

वैसे भी शिवसेना की जब भी बात होती है, बाल ठाकरे चर्चा में आ ही जाते हैं। एकनाथ शिंदे की बगावत के बाद से भी वे अलग-अलग वजहों से चर्चा में हैं। उनके पुराने वीडियो तक वायरल हो रहे हैं। शिंदे ने इस समय असम में डेरा डाल रखा है। उनका दावा है कि उनके साथ 40 विधायक हैं। इसने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और बाल ठाकरे के बेटे उद्धव ठाकरे की कुर्सी पर खतरा पैदा कर दिया है। माना जा रहा है कि महाराष्ट्र से महाविकास अघाड़ी, जिसमें कॉन्ग्रेस और एनसीपी भी साझेदार है, की सरकार जानी तय है।

इसकी एक वजह यह भी है कि बाल ठाकरे के जमाने में भी शिवसेना बगावत को रोकने में असफल रही। उनके मुकाबले उद्धव राजनीतिक तौर पर कम प्रभावशाली माने जाते हैं। कम से कम ऐसे मौके बाल ठाकरे के जीवनकाल में शिवसेना ने देखे जब पार्टी को काफी तगड़ा झटका लगा। इन बागियों में से एक ने बाद में महाराष्ट्र का गृह मंत्री बनने पर बाल ठाकरे की गिरफ्तारी भी करवाई थी। उस समय बाल ठाकरे को पुलिस के सामने सरेंडर करने के लिए मजबूर होना पड़ा था।

यह भी दिलचस्प है कि कभी शिवसैनिक रहे यही छगन भुजबल आज की उद्वव सरकार में भी मंत्री हैं। इसी तरह जिस संजय निरूपम की बगावत के बाद बाल ठाकरे ने कुत्ता पालना छोड़ दिया, वो निरूपम आज कॉन्ग्रेस में हैं और उनकी पार्टी उद्धव की सरकार में साझीदार है।

छगन भुजबल

सबसे पहले छगन भुजबल ने पार्टी में बगावती बिगुल फूँका था। ये कहानी तब की है जब महाराष्ट्र की राजनीति में बाला साहेब ठाकरे का दबदबा हुआ करता था। महाराष्ट्र में छगन भुजबल की पहचान एक दबंग ओबीसी नेता की है। बाला साहेब के साथ भी उनके रिश्ते काफी अच्छे थे। लेकिन 1985 में दोनों के बीच मतभेद होने शुरू हुए। बाला साहेब ने भुजबल के पर कुतरते हुए उन्हें प्रदेश की राजनीति से हटाकर सिर्फ मुंबई तक सीमित कर दिया। छगन भुजबल ने शिवसेना के दिग्गज नेता मनोहर जोशी से विवाद और पार्टी में नेता प्रतिपक्ष का पद ना मिलने से नाराज होकर साल 1991 में भुजबल ने खुलकर बगावत कर दी। वे अपने साथ 17 विधायक लेकर कॉन्ग्रेस में शामिल हो गए। ये पहली बार था जब ठाकरे परिवार को कहीं से धोखा मिला था। हालाँकि, भुजबल कॉन्ग्रेस में भी नहीं रुके और वर्ष 1999 में शरद पवार के नेतृत्व में गठित एनसीपी में शामिल हो गए। आज छगन भुजबल बाला साहेब ठाकरे के बेटे उद्धव ठाकरे की कैबिनेट में मंत्री हैं।

गणेश नाइक

नब्बे के दशक में गणेश नाइक ने शिवसेना को दूसरा बड़ा झटका दिया था। वर्ष 1995 में विधायक बनने के बाद नाइक को उम्मीद थी कि सरकार में उन्हें महत्वपूर्ण मंत्री पद मिलेगा। लेकिन उन्हें पर्यावरण मंत्री बना दिया गया। इससे नाराज हुए नाइक वर्ष 1999 में गठित शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी में शामिल हो गए थे। नाइक वर्षों बाद एनसीपी छोड़ अब बीजेपी में हैं।

नारायण राणे

मनोहर जोशी की जगह जिस नारायण राणे को बाला साहेब ने महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री बनाया था, उन्होंने भी शिवसेना को वर्ष 2005 में अलविदा कह दिया था। राणे अपने 10 समर्थक विधायकों के साथ कॉन्ग्रेस में शामिल हो गए थे। राणे ने उद्धव ठाकरे की वजह से शिवसेना छोड़ने की बात कही थी। उनके बगावत से कोंकण में शिवसेना को जोरदार झटका लगा था। बाद में राणे ने भी कॉन्ग्रेस में भविष्य न देखते हुए बीजेपी का दामन थाम लिया।

राज ठाकरे

वर्ष 2006 में शिवसेना में एक और बड़ी बगावत ठाकरे परिवार के अंदर ही हुई। जब शिवसेना का उत्तराधिकारी बनाने की बात आई तो बाल ठाकरे ने भतीजे राज के बजाय बेटे उद्धव को तरजीह देने के संकेत दिए। इससे नाराज होकर राज ठाकरे ने शिवसेना से बगावत कर दी। उस दौरान शिवसेना के कई दिग्गज नेता और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता राज ठाकरे की नवगठित महाराष्ट्र नव निर्माण सेना में शामिल हो गए थे। आज महाराष्ट्र विधानसभा में उनका सिर्फ एक विधायक है।

संजय निरुपम

संजय निरुपम शिवसेना के संस्थापक बाला साहेब ठाकरे की वजह से राजनीति में आए थे। निरुपम कभी शिवसेना के मुखपत्र ‘दोपहर का सामना’ का एग्जीक्यूटिव एडिटर हुआ करते थे। 1996 में ठाकरे ने निरुपम राज्यसभा भेजा था। हालाँकि 2005 में निरुपम ने शिवसेना से इस्तीफा देकर कॉन्ग्रेस की सदस्यता ले ली। निरुपम के जाने के बाद एक मौके पर बाल ठाकरे ने कहा था कि मैंने कुत्ता पालना छोड़ दिया है। 2014 में लोकसभा चुनाव में निरुपम को बीजेपी के उम्मीदवार से बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा। 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्हें कॉन्ग्रेस के टिकट पर शिवसेना के उम्मीदवार से हार का सामना करना पड़ा था।

‘जब टीशर्ट और जीन्स के भी पैसे नहीं थे, तब अन्ना ने महँगी पर्स दिलाई’: सुनील शेट्टी का नाम लेकर रो पड़े सलमान खान, IIFA का वीडियो

सोशल मीडिया पर बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान (Salman Khan) का एक वीडियो खूब वायरल हो रहा है। इस वीडियो में वह रोते हुए नजर आ रहे हैं। दरअसल, बॉलीवुड का सबसे बड़ा अवॉर्ड IIFA 2022 इस साल अबूधाबी में हो रहा है। इस अवॉर्ड सेरेमनी के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। इसमें सलमान खान के भी कई वीडियो हैं। एक वीडियो में सलमान अपने स्ट्रगल के दिनों को याद करते हुए रो पड़े।

इस वीडियो को कलर्स टीवी ने अपने इंस्टाग्राम पर शेयर किया है। आईफा अवॉर्ड्स 2022 के वायरल वीडियो में होस्ट रितेश देशमुख सलमान खान से पूछते हैं, “भाउ आपकी लाइफ का सबसे मेमोरेबल मोमेंट कौन सा है।”

इसके जवाब में वह (सलमान खान) कहते हैं, “काफी साल पहले मेरे पास पैसे नहीं हुआ करते थे। उस वक्त सुनील शेट्टी (Suniel Shetty) अन्ना की दुकान थी। एक दिन मैं वहाँ पर चला गया। वह बहुत महँगी दुकान थी। मैं वहाँ एक टी-शर्ट और जीन्स भी अफॉर्ड नहीं कर सकता था। यही वजह थी कि मैं सिर्फ एक जींस खरीदकर घर वापस लौट आया। उन्होंने (सुनील शेट्टी) मुझे अपनी तरफ से एक स्टोन वॉश जीन्स दी थी, लेकिन मेरी नजर उस पर्स पर थी। मुझे पता था मैं यह नहीं खरीद सकता, क्योंकि मेरे पास इतने पैसे नहीं थे, लेकिन सुनील ने मेरी आँखें देखी और मुझे वो दिलाने का फैसला लिया जो भी मैं चाहता था।”

इस दौरान वहाँ मौजूद सुनील शेट्टी के बेटे अहान शेट्टी की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा, “इसके बाद इनके फादर मुझे अपने घर पर लेकर गए और मुझे वह पर्स दिया।” ये किस्सा बताते हुए सलमान खान भावुक हो गए और अपने आँसू रोक नहीं पाए। इसके बाद उन्होंने अहान शेट्टी को गले लगा लिया।

वर्क फ्रंट की बात करें तो, सलमान खान को फिल्म इंडस्ट्री में 34 साल हो चुके हैं। वह जल्द ही ‘टाइगर 3’, ‘कभी ईद कभी दिवाली’ और ‘गॉडफादर’ में फिल्म में नजर आएँगे। बता दें कि आईफा अवॉर्ड्स 2022 कलर्स टीवी पर 25 जून को रात 8 बजे दिखाया जाएगा।

‘मेरी बेटी को BTS पसंद, मैं उन्हें जानता भी नहीं’: Pak अभिनेता ने उड़ाया कोरियन बैंड का मजाक, फैन्स बोले- कंटेंट तुम्हारा घटिया है

पाकिस्तानी एक्ट्रेस माहिरा खान (Mahira Khan) और फहद मुस्तफा (Fahad Mustafa) इन दिनों अपनी नई फिल्म कायदे आजम जिंदाबाद (Quaid-e-Azam Zindabad) का जमकर प्रमोशन कर रहे हैं। फिल्म के प्रमोशन दौरान उन्होंने अपने स्कूल टाइम लव, किशोर कुमार और मुहम्मद रफी के गानों, अपनी पसंद-नापसंद के साथ कोरियाई इंडस्ट्री पर चर्चा की। इस दौरान फहद मुस्तफा कोरिया के मशहूर बैंड बीटीएस (BTS Members) से बेहद खफा नजर आए, जो इस समय पूरी दुनिया में धूम मचा रहा है।

मुस्तफा ने ‘फुशिया’ से बातचीत के दौरान बच्चों के साथ अपने रिश्ते पर खुलकर बात की। अभिनेता ने खुलासा किया कि जहाँ उनका बेटा अपने पापा का फैन है और उन्हें फॉलो करता है, वहीं उनकी बेटी फातिमा के-पॉप की बहुत बड़ी फैन है। उन्होंने कहा, “फातिमा बीटीएस की बहुत बड़ी फैन है। वह अभी 11 साल की है। मैं उसकी के-पॉप के प्रति ऐसी दीवानगी देखकर दंग हूँ।”

बताया जा रहा है कि मुस्तफा ने कभी भी इस दक्षिण कोरियाई बॉय बैंड का म्यूजिक नहीं सुना है। जब उनसे कहा गया कि आपकी बेटी सुन रही है, तो आपको भी सुनना चाहिए। इस पर वह कहते हैं, “नो हेल नो।” उन्होंने कहा, “मैं तो यह भी नहीं जानता हूँ कि मेरी बेटी बैंड के किस गाने को सबसे ज्यादा पसंद करती है।” अभिनेता ने बेटी के व्यवहार पर निराशा व्यक्त करते हुए कहा, “जब मैं उन्हें बिहाइंड द सीन्स बैंड (Behind the Scenes band) बुलाता हूँ, तब वह मुझे कहती है ‘नो पापा’। वह सिंधी बोलने की बजाय कोरियाई भाषा बोलती है, लेकिन मैं चाहता हूँ कि वह अपनी मातृभाषा बोले।” इस बीच पास में बैठी अभिनेत्री ने कहा, “कोरियाई इंडस्ट्री के इतनी तेजी से पूरी दुनिया में फेमस होना वास्तव में बहुत बड़ी बात है। हालाँकि मैंने अभी तक उनका कोई भी वीडियो नहीं देखा है।”

फहद मुस्तफा द्वारा इस तरह बीटीएस का अपमान किए जाने पर सोशल मीडिया पर कई यूजर्स उनसे नाराज दिखे। लोगों ने कहा कि ये बेहद घटिया चीज है जो फहद ने की। उन्हें अपनी बेटी की पसंद का खुले में मजाक नहीं उड़ाना चाहिए था। कुछ यूजर्स ने उन्हें बीटीएस को देखने को सलाह दी। उन्हें कहा गया कि पहले वो वीडियो देखकर समझें कि आखिर क्यों बीटीएस इतनी तेजी से फेमस हुआ, क्यों लोग उसे देख रहे हैं और क्यों उन लोगों (फहद मुस्तफा को) नहीं पसंद किया जा रहा।

दरअसल, इन दिनों पूरी दुनिया में कोरियन वेब सीरीज के अलावा कोरियन गानों का भी क्रेज बढ़ता जा रहा है। अब हर किसी के बीच कोरियन म्यूजिक बैंड बीटीएस (BTS Members) और उसके सातों मेंबर बेहद पॉपुलर हैं। इस बैंड को लोग Bangtan Boys के नाम से भी जाने जाते हैं। BTS मेंबर्स ने साल 2013 में ‘2 Cool 4 Skool’ म्यूजिक एलबम से अपना करियर शुरू किया था।

आज विदेश में ही नहीं बल्कि भारत का भी बच्चा-बच्चा बीटीएस के गानों से वाकिफ है। भले ही अभी तक k-pop सिंगर्स भारत नहीं आए हों, लेकिन BTS ARMYs अक्सर अपने पसंदीदा बॉलीवुड गानों पर थिरकते हुए वीडियो पोस्ट करते हैं। हाल ही में उन्हें बॉलीवुड अभिनेता कार्तिक आर्यन की फिल्म ‘भूल भुलैया 2’ के गाने पर ‘हरे राम हरे कृष्णा’ पर थिरकते हुए देखा गया था।

बता दें कि पाकिस्तान फिल्म इंडस्ट्री की सुपरस्टार माहिरा खान, फहद मुस्तफा और नबील कुरैशी की कायदे आजम जिंदाबाद ईद-उल-अजहा के मौके पर रिलीज होगी। इस फिल्म की कहानी करप्शन पर बेस्ड है। हाल ही में फिल्म का ट्रेलर रिलीज किया गया था। माहिरा बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान के साथ ‘रईस’ फिल्म में भी काम कर चुकी हैं।

राष्ट्रपति उम्मीदवारी के बाद द्रौपदी मुर्मू ने भगवान जगन्नाथ के किए दर्शन, शिव मंदिर में साफ-सफाई: बोले ओडिशा के CM- यह गर्व का क्षण

एनडीए की ओर से मंगलवार (21 जून 2022) को राष्ट्रपति पद के लिए द्रौपदी मुर्मू का नाम घोषित होने के बाद मुर्मू ने आज (22 जून 2022) सुबह मंदिरों के दर्शन किए। वह ओडिशा के मयूरभंज में रायरंगपुर जगन्नाथ मंदिर गईं। फिर वहाँ से वह शिव मंदिर पहुँची और इसके बाद उन्होंने आदिवासी पूजा स्थल जहिरा जाकर भी आशीर्वाद लिया।

एनडीए द्वारा मुर्मू को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद उनको जेड प्लस सेक्योरिटी मिल गई है। इस बीच उनकी एक वीडियो भी सामने आई है। ये वीडियो रायरंगपुर के शिवमंदिर की ही है। इस वीडियो में वह पूजा अर्चना से पहले मंदिर के फर्श पर झाड़ू से साफ-सफाई करती नजर आ रही हैं। देख सकते हैं कि सफाई के बाद वह अपने हाथ धोती हैं, नंदी महाराज के चरण छूती हैं, घंटी बजाती है और फिर मंदिर में अंदर घुसती हैं।

उनकी यह वीडियो देखने के बाद लोग उनकी तारीफ करते नहीं थक रहे। उनका नाम राष्ट्रपति पद के लिए भेजे जाने पर लोग इस गौरवान्वित करने वाला क्षण कह रहे हैं और कुछ लोग अभी से उन्हें अपना राष्ट्रपति मान चुके हैं।

वहीं ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने राज्य के लिए इसे गर्व का क्षण बताया है। अपने ट्वीट में उन्होंने लिखा, “एनडीए द्वारा देश के सर्वोच्च पद के लिए उम्मीदवार बनाने पर द्रौपदी मुर्मू को बहुत बधाई। मैं बहुत ज्यादा खुश था जब पीएम मोदी इस पर बात कर रहे हैं। ये ओडिशा की जनता के लिए गर्व का क्षण है। मुझे यकीन है कि वो देश में महिला सशक्तिकरण का एक दमकता उदाहरण बनेंगी। “

बता दें कि द्रौपदी मुर्मू झारखंड की पहली महिला राज्यपाल रही हैं। उनका जन्म ओडिशा के आदिवासी जिले मयूरभंज के बैदापोसी गाँव में हुआ था। 1997 में वह रायरंगपुर से बतौर पार्षद जीतीं। इसके बाद उन्हें भारतीय जनता पार्टी की आदिवासी मोर्चा का उपाध्यक्ष बनाया गया। साल 2000 और 2009 में वह रायरंगपुर से विधायक भी चुनी गईं।

2015 में जब उन्हें झारखंड का राज्यपाल नियुक्त किया गया तो उनका कार्यकाल लगभग निर्विवाद रहा। 64 वर्षीय द्रौपदी मुर्मू 2000 झारखंड के गठन के बाद से पहली ऐसी राज्यपाल बनीं, जिन्होंने अपना कार्यकाल पूरा किया था। व्यक्तिगत जीवन की बात करें तो द्रौपदी मुर्मू के दो बेटे और एक बेटी हैं। उनका पिता का नाम बिरंचि नारायण टुडू था। उनका जीवन त्रासदियों और संघर्षों से भरा हुआ है। उनके पति का निधन हो चुका है। उनके दोनों बेटे भी चल बसे।