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पिता को हुआ ब्रेन हैमरेज तो चंदा इकट्ठा करने सड़क पर निकली थी बेटियाँ, वायरल तस्वीर देख CM धामी ने उठाया गोपाल शर्मा के इलाज का बीड़ा

जैसे जीवन के अगले पल का कोई भरोसा नहीं होता कि इंसान के साथ उस पल में क्या हो जाए, वैसे हल्दवानी के गोपाल शर्मा भी नहीं जानते थे कि उन्हें ब्रेन हैमरेज हो जाएगा और उनके परिवार को सारी जमा पूँजी उनके इलाज में लगानी पड़ेगी। कुल जमा दो लाख था परिवार के पास वो सारा गोपाल शर्मा के अस्पताल में भर्ती होने के बाद खत्म हो गया।

अब उधर गोपाल दिल्ली के सफरदरजंग अस्पताल में बीमारी से जूझ रहे थे और उधर उनकी दो बेटियाँ हल्दवानी की सड़कों पर आ खड़ी हुई थीं ताकि पापा के इलाज के लिए चंदा इकट्ठा हो सके। देखते ही देखते दोनों बेटियों की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई और बात पहुँची प्रदेश मुख्यमंत्री धामी तक।

सीएम धामी का दिल भी गोपाल शर्मा की बेटियों को देख पसीज गया और उन्होंने गोपाल के इलाज का सारा जिम्मा उठाने का ऐलान किया। अपने सोशल मीडिया पर बच्चियों की तस्वीर साझा करते हुए उन्होंने फौरन संबंधित अधिकारियों को गोपाल शर्मा के समुचित इलाज कराने का निर्देश दिया।

उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, “हल्द्वानी में पिता के इलाज के लिए दो मासूम बेटियों द्वारा चंदा माँगने की जानकारी सोशल मीडिया के ज़रिए प्राप्त हुई थी। इस संबंध में त्वरित कार्रवाई करते हुए मरीज़ श्री गोपाल शर्मा जी के इलाज हेतु उचित इंतज़ाम किए जा रहे हैं व उपचार में कोई दिक्कत ना आए, इसके लिए स्वास्थ्य सचिव को जरूरी दिशा-निर्देश दे दिए हैं। दिल्ली में तैनात एडिशनल रेजिडेंट कमिश्नर को भी सफदरजंग अस्पताल में जाकर वहाँ तैनात चिकित्सकों से वार्ता कर, मरीज को बेहतर से बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के लिए निर्देशित किया गया है।”

सीएन ने कहा, “मेरी ईश्वर से प्रार्थना है कि वो श्री गोपाल शर्मा जी को शीघ्र से शीघ्र स्वस्थ बनाएँ। पिता के ठीक होने तक परिजन चाहें तो बच्चों को SOS Children’s Village में रख सकते हैं, यहाँ बच्चों की उचित देखभाल की जाएगी व उन्हें किसी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।”

बता दें कि पुष्कर धामी द्वारा इस तरह बच्चियों के लिए आगे आकर उनके पिता के इलाज का जिम्मा उठाना सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में है। यूजर्स उन्हें इस कदम के लिए सराह रहे हैं। उनकी तारीफ कर रहे हैं। उनका आभार व्यक्त कर रहे हैं। उनकी लंबी उम्र और कामयाब जीवन की प्रार्थना करते हुए कह रहे हैं कि वह आगे भी इस तरह प्रदेशवासियों की मदद करते रहें।

पटना से दिल्ली वाली Spicejet हवाई जहाज में लगी आग, 185 यात्री थे सवार: स्थानीय लोगों ने दी सूचना, वीडियो वायरल

बिहार की राजधानी पटना में स्पाइसजेट की फ्लाइट में आग लग जाने के कारण हड़कंप मच गया, लेकिन किसी तरह उस पर काबू पा लिया गया है। फ्लाइट में कुल 185 लोग सवार थे। एक बड़ा हादसा टल जाने के कारण लोगों ने राहत की साँस ली है। इस घटना का कारण विमान का चिड़िया से टकरा जाना (Bird Hitting) बताया जा रहा है। विमान के टेक ऑफ के दौरान ये हादसा हुआ। अब तक किसी के हताहत या घायल होने की सूचना नहीं है।

फ़िलहाल सभी यात्रियों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। उक्त स्पाइसजेट फ्लाइट को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के लिए जाना था, लेकिन इंजन में गड़बड़ी आ जाने के कारण उसे वापस लौटना पड़ा। उक्त फ्लाइट का नंबर SG723 है, जिसे अब सुरक्षित लैंड करा लिया गया है। पटना के डीएम चंद्रशेखर सिंह ने बताया कि स्थानीय लोगों ने फ्लाइट में आग देखने के बाद जिला समाहरणालय और एयरपोर्ट को इस सम्बन्ध में सूचित किया।

आपात लैंडिंग के बाद सभी यात्री सुरक्षित हैं। चिड़िया से टकराने के बाद पायलट्स ने इंजन को बंद कर दिया और आपात लैंडिंग कराई। लोकल लोगों द्वारा बनाए गए वीडियोज में फ्लाइट से धुआँ निकलते देखा जा सकता है।

‘…सहारनपुर में तोड़फोड़, रेलवे स्टेशन नष्ट हो’ – WhatsApp पर प्लानिंग, UP पुलिस ने 5 को दबोचा: पहले धराए सपा और कॉन्ग्रेसी नेता

उत्तर प्रदेश की सहारनपुर पुलिस ने अग्निपथ योजना के खिलाफ सेना के अभ्यर्थियों को भड़काने के आरोप में 5 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें से एक कॉन्ग्रेस की छात्र शाखा NSUI का जिलाध्यक्ष है और दूसरा आरोपित समाजवादी पार्टी का सदस्य।

अग्निपथ योजना के खिलाफ लोगों को भड़काने के लिए ये सभी खुद को भी कथित तौर पर अभ्यर्थी बता रहे थे। हास्यास्पद यह है कि इन सभी की उम्र सेना भर्ती के हिसाब से पार कर चुकी है। यह गिरफ्तारी 18 जून 2022 (शनिवार) को हुई है।

सहारनपुर पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार किए गए आरोपितों में से 26 वर्षीय अमित पंवार NSUI का जिलाध्यक्ष है। एक अन्य आरोपित 34 वर्षीय संदीप पूर्व जिला पंचायत सदस्य रह चुका है। वह समाजवादी पार्टी का सदस्य बताया जा रहा है।

अमित पंवार और संदीप के अलावा 26 वर्षीय मोहित चौधरी, 28 वर्षीय सौरभ कुमार और 26 वर्षीय उदय को भी पकड़ा गया है। पुलिस के मुताबिक इन सभी आरोपितों में से कोई भी सेना भर्ती की तैयारी नहीं कर रहा था। साथ ही ये सभी किसी न किसी राजनैतिक दल से जुड़े बताए जा रहे हैं।

इन सभी को शामली-सहारनपुर रोड पर पड़ने वाले रेलवे फाटक मोड़ से पकड़ा गया है। सहारनपुर के SSP आकाश तोमर के मुताबिक, “मामला थाना रामपुर मनिहारान का है। गिरफ्तार पाँच आरोपितों में से 2 राजनैतिक पार्टियों के पदाधिकारी हैं और बाकी 3 सदस्य। इन सभी को जेल भेजा जा रहा है। हम आगे भी इसका प्रयास करेंगे कि असली सेना भर्ती के अभ्यर्थियों को ऐसे कोई अन्य तत्व भड़का न पाएँ। ऐसे लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”

स्टेशन पर तोड़फोड़ की साजिश रचते 5 और गिरफ्तार

ऑपइंडिया से बात करते हुए सहारनपुर SSP आकाश तोमर ने बताया, “आज 19 मई 2022 (रविवार) को सहारनपुर पुलिस ने सहारनपुर स्टेशन पर तोड़फोड़ की साजिश रचते हुए 5 अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया है। पुलिस को इनकी हरकतों की सूचना मिली थी। इस पर स्वाट टीम और कुतुबशेर थाना पुलिस ने साझा अभियान चला कर 5 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है।”

बताया जा रहा है कि ये सभी व्हाट्सएप पर चैट कर रहे थे। इस दौरान किसी ने इनके स्क्रीनशॉट पुलिस को भेज दिए। इस चैटिंग में दीपक सहगल नाम से नंबर दिखाई दे रहा है। उसने लिखा, “अब सहारनपुर स्टेशन पर तोड़फोड़ होगी। अगर हमारी बात नहीं मानी तो सहारनपुर रेलवे स्टेशन नष्ट करो।” उसके जवाब में एक अन्य नंबर वाले ने लिखा, “भाई इसी को लेकर मीटिंग चल रही है। हमारी जीत जरूर होगी। पर ये ध्यान रखना कि किसी भी भाई का नाम केस में न आए वरना जिंदगी खराब हो जाएगी।”

रोज सुबह छात्रों को भड़काते हैं कोचिंग संस्थान, दिखाते हैं आत्महत्या के वीडियो: बिहार जलाने के लिए दिल्ली से कौन दे रहा आदेश?

बिहार में ‘अग्निपथ’ योजना के विरुद्ध चल रहे विरोध प्रदर्शन में कोचिंग संस्थानों की बड़ी भूमिका सामने आई है। बिहार में अब तक 15 ट्रेनों को आग के हवाले किया जा चुका है। आगजनी, मारपीट और लूटपाट आम बात हो गई है। दुःखद ये है कि इन घटनाओं में आम युवा ही शामिल हैं। इस साजिश में कई कोचिंग संस्थानों के नाम सामने आ रहे हैं, जिनके बारे में कहा रहा है कि मंगलवार (21 जून, 2022) तक राज्य को जलाने की साजिश है।

‘दैनिक भास्कर’ ने अपने एक स्टिंग ऑपरेशन के बाद पाया है कि दिल्ली में बैठ कर बिहार में हिंसा की साजिश रची गई। दिल्ली में बैठे ये आका बिहार में कोचिंग संस्थानों को युवाओं को हिंसा के लिए तैयार करने को कहते हैं। इसके बाद वीडियो वगैरह का इस्तेमाल कर के युवाओं को भड़काया जाता है। खबर में बाजार समिति के एक स्कूल स्थित प्रशिक्षण केंद्र का जिक्र किया गया है, जहाँ एक कोचिंग संचालक के पहुँचते 25-30 लड़के और हाई जंप की प्रैक्टिस कर रही लड़कियाँ उसके पैर छूने लगीं।

उक्त शिक्षक से बात कर के और गाँधी मैदान में एक अन्य शिक्षक से बात कर के ‘दैनिक भास्कर’ ने इस नेटवर्क का खुलासा किया है। एक शिक्षक ने बताया कि प्रशिक्षण के बाद छात्रों को विरोध प्रदर्शनों में ले जाया जाता है। नालंदा और जहानाबाद जैसे इलाकों से छात्रों को पटना लाया जाता है। उसने ये भी बताया कि दिल्ली से नेटवर्क बना कर 3-4 लाख छात्रों को जोड़ा गया है। छात्रों को ब्रेनवॉश किया जाता है कि वो अब अपने हक़ के लिए खड़े नहीं हुए थे केंद्र से लेकर राज्य पुलिस तक में ऐसी ही योजना आ जाएगी। रोज सुबह प्रशिक्षण के बहाने उन्हें भड़काया जाता है।

वीडियो बना-बना कर केंद्र सरकार की योजनाओं का विरोध किया जाता है। देश भर में आत्महत्या के आँकड़े गिना कर और वीडियो दिखा कर छात्रों की भावनाओं को भड़काया जाता है। बिहार पुलिस ने बताया है कि हर जिले के एसपी को वहाँ के कोचिंग संस्थानों की भूमिका की जाँच के आदेश दिए गए हैं। छात्रों की आड़ में उपद्रवी हिंसा में शैल हो रहे हैं, जिसकी जाँच चल रही है। पटना के डीएम ने भी जाँच के आदेश दिए हैं।

बिहार के कई जिलों में 2 दिनों से इंटरनेट सेवाएँ बंद हैं। पटना के 5 कोचिंग सेंटर्स पर आगजनी की साजिश रचने के आरोप लगे हैं। उनके विरुद्ध FIR भी दर्ज की गई है। व्हाट्सएप्प चैट के माध्यम से छात्रों को उकसाने की बात भी सामने आई है। अकेले पटना में 8 कोचिंग सेंटरों की भूमिकाओं की जाँच चल रही है। राजस्थान के सीकर और मध्य प्रदेश के ग्वालियर में भी कोचिंग संस्थानों पर ही हिंसा की साजिश रचने के आरोप लगे हैं।

इस्लामोफोबिया है तो हिंदुफोबिया भी है, दोहरा मापदंड स्वीकार नहीं: भारत ने UN में दी इस्लामी देशों को नसीहत, बामियान का दिया उदाहरण

धार्मिक घृणा को लेकर संयुक्त राष्ट्र संघ (UN) में भारत ने दुनिया के देशों द्वारा अपनाए जा रहे दोहरे मानदंड पर लताड़ लगाई है। भारत ने कहा कि ‘रिलीजियोफोबिया (Religiophobia)’ सिर्फ अब्राहमिक मजहबों (यहूदी, ईसाई और मुस्लिम) के लिए नहीं, बल्कि सभी धर्मों पर लागू होना चाहिए।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि टीएस तिरुमूर्ति (TS Tirumurti) ने कहा, “रिलिजियोफोबिया केवल 1 या 2 धर्मों को शामिल करने वाला एक चयनात्मक अभ्यास नहीं होना चाहिए, बल्कि गैर-अब्राहम धर्मों के खिलाफ भी यह समान रूप से लागू होना चाहिए। धार्मिक भय पर दोहरे मानदंड नहीं हो सकते।”

तिरुमूर्ति ने कहा, “हमने बार-बार इस बात पर जोर दिया है कि धार्मिक भय का मुकाबला करना केवल एक या दो धर्मों को शामिल करने वाला एक चुनिंदा अभ्यास नहीं होना चाहिए, बल्कि गैर-अब्राहम धर्मों के खिलाफ भी समान रूप से लागू होना चाहिए। जब ​​तक ऐसा नहीं किया जाता, हम अपने उद्देश्यों को प्राप्त करने में कभी सफल नहीं हो सकेंगे।”

उन्होंने कहा कि भारत ने अब्राहिमक धर्मों के खिलाफ ही नहीं, बल्कि सिख धर्म, बौद्ध धर्म और हिंदू धर्म सहित सभी धर्मों के खिलाफ नफरत और हिंसा का मुकाबला करने के लिए लगातार कोशिश की है। दरअसल, तिरुमूर्ति हेट स्पीच (Hate Speech), गैर-भेदभाव और शांति के मूल कारणों को लेकर शिक्षा की भूमिका नाम से आयोजित अंतर्राष्ट्रीय दिवस की पहली वर्षगाँठ पर बोल रहे थे।

तिरुमूर्ति ने आगे कहा, “हम सहनशीलता और समावेश को बढ़ावा देने की पूरी कोशिश करते हैं। किसी भी विचार में भिन्नता को कानूनी ढाँचे के भीतर हल किया जाना चाहिए।” बीजेपी के दो नेताओं की टिप्पणी को लेकर कई मुस्लिम देशों द्वारा दी गई प्रतिक्रिया के मामले में सलाह देते हुए उन्होंने कहा, “दूसरे देशों को विशेष बात को मसला बनाकर भारत को आक्रोश दिखाने की बिल्कुल भी आवश्यकता नहीं है।”

हिंदू-सिखों पर बढ़ते हमलों को लेकर उन्होंने कहा कि धार्मिक भय के रूपों को गुरुद्वारों, मठों और मंदिरों जैसे धार्मिक स्थलों पर हमलों में वृद्धि के रूप में देखा जा सकता है। गैर-अब्राहमिक धर्मों के खिलाफ घृणा और दुष्प्रचार के प्रसार में वृद्धि इसका उदाहरण है।

अफगानिस्तान (Afghanistan) में इस्लामिक कट्टरपंथ का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि कट्टरपंथियों द्वारा बामियान स्थित प्रतिष्ठित बुद्ध की मूर्ति को तोड़ना, गुरुद्वारे पर आतंकवादी हमला करना, हिंदू और बौद्ध मंदिरों का विनाश जैसे धार्मिक घृणा वाले कृत्यों की भी निंदा की जानी चाहिए।

बता दें कि अफगानिस्तान के काबुल में शनिवार (19 जून 2022) को गुरुद्वारा करते परवान पर आतंकी हमला किया गया, जिसमें दो लोगों के मौत हो गई है। वहीं, मार्च 2020 में अफगानिस्तान के ही एक गुरुद्वारे पर इस्लामिक आतंकियों ने हमला किया गया था, जिसमें 25 सिख मारे गए थे।

तिरुमूर्ति ने यह भी कहा कि भारतीय समाज की बहु-सांस्कृतिक ढाँचे ने सदियों से भारत को आश्रयदाता बनाया है। चाहे वह यहूदी समुदाय हो, पारसी समुदाय हो या पड़ोस का तिब्बती समुदाय, भारत ने सबको सुरक्षित शरण दिया है।

टीएस तिरुमूर्ति ने कहा कि भारत आतंकवाद, खासकर सीमा पार आतंकवाद का सबसे बड़ा शिकार रहा है। उन्होंने कहा कि सभी देशों को एक ऐसी शिक्षा प्रणाली विकसित करनी चाहिए, जो लोकतंत्र के सिद्धांतों को बढ़ावा देकर आतंकवाद का मुकाबला करने में सही अर्थों में योगदान दे सके।

दरअसल, संयुक्त राष्ट्र महासभा ने इस्लामोफोबिया का मुकाबला करने के लिए 15 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय दिवस के रूप में घोषित करने के लिए इस साल के शुरू में एक प्रस्ताव पारित किया था। इस प्रस्ताव को पाकिस्तान द्वारा पेश किया गया था।

भारत ने सिर्फ धर्म के खिलाफ फोबिया के लिए एक अंतरराष्ट्रीय दिवस मनाए जाने पर चिंता व्यक्त की थी। भारत ने कहा था कि धार्मिक भय के कई रूप आजकल बढ़ रहे हैं, जिनमें हिंदू विरोधी, बौद्ध विरोधी और सिख विरोधी फोबिया विशेष रूप से शामिल है।

तिरुमूर्ति ने तब कहा था कि भारत को उम्मीद है कि इससे चुनिंदा धर्मों के आधार पर फोबिया पर कई प्रस्तावों को जन्म देगा और संयुक्त राष्ट्र को धार्मिक में विभाजित करेगा। उन्होंने कहा था कि अब समय आ गया है कि केवल एक धर्म के बजाय संपूर्ण धार्मिक भय के प्रसार के रोक को स्वीकार किया जाए।

गौरतलब है कि हिंदू धर्म के 1.2 अरब, बौद्ध धर्म के 53.5 करोड़ और सिख धर्म के 3 करोड़ से अधिक अनुयायी दुनिया भर में फैले हुए हैं। वहीं, दुनिया भर इस्लाम मानने लोगों की संख्या 1.8 अरब और ईसाइयों की संख्या 2.3 अरब है। यहूदियों की संख्या 1.52 करोड़ और पारसियों की संख्या लगभग 2 लाख है।

जिस मुस्तकीम ने किया रेप, उससे समझौता… फिर ‘हिंदू नाम’ वाले मुस्लिम से शादी: फैशन डिजायनर ने अब लगाया अबॉर्शन और छोड़ देने का आरोप

मध्य प्रदेश के इंदौर में एक फैशन डिजायनर ने एक मुस्लिम युवक पर हिन्दू नाम से शादी करने और बाद में छोड़ कर भाग जाने का आरोप लगाया है। आरोपित का नाम मोहम्मद वासिल है। पीड़िता का आरोप है कि वासिल का दोस्त मुस्तकीम भी उनका रेप कर चुका है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जाँच कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आरोपित वासिल इंदौर के ही बंबई बाजार का रहने वाला है। पुलिस को दी गई शिकायत के मुताबिक:

“साल 2018 में मैं पलसिया में फैशन डिजायनिंग का कोर्स कर रही थी। वहाँ पर शाहबाज मुस्तकीम खान नाम के व्यक्ति ने मुझे नशा देकर मेरे साथ रेप किया। मैंने इसकी शिकायत पुलिस में की। इसी दौरान वासिल मुझसे महेश यादव बन कर मिला। उसने मुझे मुस्तकीम से समझौता करने की सलाह दी और इसके लिए मुझे डराया भी। बाद में मैंने मुस्तकीम से समझौता कर लिया।”

पीड़िता ने आगे बताया, “बाद में मेरी और महेश बने वासिल की अच्छी जान-पहचान हो गई। हम लोगों ने शादी कर ली। इस दौरान गर्भवती होने पर वासिल ने दरगाह चौराहे के पास एक नर्सिंग होम में मेरा अबॉर्शन भी करवाया। अब 21 दिन पहले वो मुझसे अजमेर जाने के लिए कह कर निकला और अभी तक नहीं आया। उसने अपने मुस्लिम होने की जानकारी मुझे कुछ ही दिन पहले दी थी।”

पीड़िता ने आरोप लगाया है कि गर्भपात के दौरान वासिल ने उसे नशे के इंजेक्शन दिए थे। इसी के साथ जानवरों के लिए बनी दवाईयाँ भी उसे खिलाईं। पीड़िता ने इस पूरे मामले में साजिश का सूत्रधार अपने साथ पहले रेप कर चुके मुस्तकीम को बताया है।

इस मामले पर थाना प्रभारी के अजय वर्मा के मुताबिक, “हमें शिकायत मिली है। साथ ही घटना की गहनता से जाँच करवाई जा रही है। जिस नर्सिंग होम पर अबॉर्शन का आरोप लगा है, वहाँ जाँच करवाने पर पीड़िता के डेंगू के मरीज के तौर पर भर्ती होने का रिकॉर्ड मिला। पीड़िता पर खजराना में अपनी माँ पर हमला करने का आरोप भी है।

रेलवे का ₹700 करोड़ स्वाहा, जलाने से पहले लूटी विक्रमशिला: हिंसक प्रदर्शनों में छात्र बेहद कम, राजनैतिक लोग शामिल

युवाओं में देशभक्ति और अनुशासन का भाव भरने के मकसद से केंद्र सरकार की अग्निपथ योजना के विरोध में हिंसा व प्रदर्शन जारी है। इस विरोध के हिंसक स्वरूप लेने के बाद असामाजिक तत्वों ने रेलवे और सार्वजनिक सम्पत्तियों को नुकसान पहुँचाया है। इससे न सिर्फ करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ बल्कि आम जनता को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्रदर्शन की आड़ में लूटपाट की भी घटनाएँ सामने आई हैं।

लूट ली विक्रमशिला एक्सप्रेस

बिहार के लखीसराय में पुलिस ने पंजाबी मोहल्ला और संतर मोहल्ला में छापेमारी की। इस छापेमारी के दौरान हिंसक उपद्रवियों द्वारा जलाई गई विक्रमशिला एक्सप्रेस से लूटे गए सामान बरामद किए गए। बरामद माल का मूल्य लाखों में है। इनमें मिक्सिंग मशीन, इलेक्ट्रॉनिक सामान, रेडियो और हीटर आदि शामिल हैं। पुलिस ने लूट में शामिल 2 आरोपितों को गिरफ्तार भी किया है। इन आरोपितों की पहचान स्टेशन पर लगे CCTV कैमरों से हुई थी। पुलिस के मुताबिक अभी छापेमारी जारी है।

9 राज्यों में विरोध

बिहार से शुरू हुआ अग्निपथ योजना का विरोध धीरे-धीरे 9 राज्यों में फ़ैल गया। इसमें UP, बिहार, हरियाणा, केरल, तेलंगाना, असम, उड़ीसा, बंगाल और कर्नाटक शामिल हैं।

उत्तर प्रदेश में बलिया और अलीगढ़ जिले मुख्य रूप से हिंसा से प्रभावित हुए। हालाँकि कुल 13 जिलों में विरोध-प्रदर्शन आदि के मामले दर्ज हुए हैं। पूरे प्रदेश में कुल 6 FIR दर्ज करके अब तक लगभग 260 आरोपितों की गिरफ्तारी की गई है। फुटेज आदि में दिख रहे अन्य आरोपितों की पुलिस लगातार तलाश कर रही है।

वहीं हिंसा से सबसे अधिक प्रभावित बिहार में अब तक 138 FIR दर्ज हुई है। इसके तहत कुल 718 आरोपित गिरफ्तार किए जा चुके हैं। अन्य आरोपितों की तलाश में छापेमारी लगातार चल रही है। बिहार पुलिस के ADG कानून व्यवस्था संजय कुमार के मुताबिक हिंसक प्रदर्शनों में छात्रों की संख्या बेहद कम थी, ज्यादातर राजनैतिक दलों के लोग शामिल पाए जा रहे हैं।

अग्निपथ योजना के विरोध में हरियाणा के पलवल और फरीदाबाद जिलों में विरोध का व्यापक असर दिखा। इसी के साथ गुरुग्राम, रेवाड़ी और रोहतक में भी विरोध हुआ। जींद-भटिंडा रेल मार्ग को रोका गया। प्रदेश में 56 से अधिक आंदोलनकारी गिरफ्तार किए जा चुके हैं। वीडियो फुटेज के आधार पर हजारों अज्ञात आरोपितों की पहचान की कोशिश की जा रही है।

तेलंगाना के सिकंदराबाद में जब विरोध ने हिंसक रूप लिया, तब पुलिस को फायरिंग करनी पड़ी। इस फायरिंग में दामोदर नाम के एक युवक की जान चली गई। उड़ीसा, बंगाल और असम में ट्रेनों को रोका गया। इसके चलते कई ट्रेनों का आंशिक संचालन प्रभावित रहा। केरल के कोझिकोड में अग्निपथ के विरोध में रैली निकाली गई। कर्नाटक के धारवाड़ में प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा।

सबसे अधिक नुकसान रेलवे को

अग्निपथ योजना के खिलाफ हिंसक हुए प्रदर्शनकारियों की हिंसा में सबसे ज्यादा नुकसान रेलवे को हुआ है। एहतियात के तौर पर 350 से अधिक रेलगाड़ियों को निरस्त कर दिया गया है। इसमें 210 ट्रेनें एक्सप्रेस/मेल थीं और 159 लोकल पैसेंजर। रेलवे स्टेशनों पर भी तोड़फोड़ हुई है। उत्तर प्रदेश के बलिया में इसकी FIR दर्ज हुई है। इसी के साथ UP और बिहार में राज्य परिवहन निगम की बसों को भी निशाना बनाया गया है।

एक आँकड़े के मुताबिक हिंसक प्रदर्शन में अब तक अलग-अलग ट्रेनों के 60 डिब्बों और 11 इंजनों को जलाया गया है। स्टेशनो में लगे स्टॉल में भी तोड़फोड़ की घटनाएँ सामने आईं हैं। रेलवे को अब तक कुल लगभग 700 करोड़ रुपए के नुकसान का अनुमान है।

पैगंबर मोहम्मद और आयशा के निकाह पर सऊदी अरब के मौलाना ने कहा – 100% सही, अब थमेगा नूपुर शर्मा पर बवाल?

भारतीय जनता पार्टी (BJP) की पूर्व नेता नूपुर शर्मा (Nupur Sharma) के इस्लाम के पैगंबर मुहम्मद (Prophet Muhammad) पर दिए गए बयान को भारी हंगामा हुआ था। उनके बयान को पैगंबर का अपमान बताया गया था। हालाँकि, जो बात नूपुर शर्मा ने कही थी उसे सऊदी अरब के मौलाना ने सौ फीसदी सच कहा है।

सऊदी अरब के मौलाना अस्सीम अल हकीम से ट्विटर पर मौलाना फयाज नाम के यूजर ने पूछा, “भारत में यह कहा जाता है कि पैगंबर मुहम्मद ने 6 साल की उम्र में आयशा से निकाह किया और 9 साल की उम्र में हमबिस्तरी की। क्या यह सच है? कृपया स्पष्ट करें।”

इसका जवाब मौलाना अस्सीम अल हकीम ने हाँ में दिया। उन्होंने मौलाना फयाज नाम के यूजर के प्रश्न का जवाब देते हुए कहा, “यह सौ फीसदी सच है।”

इसी तरह के सवाल को लेकर अमांडा फ्यगेरा नाम की एक पत्रकार ने साल 2016 में अल हकीम से पूछा था, “क्या यह सच है कि आयशा जब पैगंबर के पाई थी वह 9 साल की थी? मैं इन्वेस्टिगेशन को पढ़ रही हूँ और उसमें कहा गया है कि उस समय वह 17 साल की थी।”

इस पर मौलाना अल हकीम ने जवाब दिया था, “ये सब झूठ है! आयशा ने खुद हमें (मुस्लिमों को) बताया था कि वह नौ साल की थी! यह सही बुखारी और अन्य हदीसों में भी है।”

क्या है हदीस अल बुखारी

हदीस अल बुखारी इस्लाम में कुरान के बाद दो सबसे भरोसेमंद हदीसों में से एक है। इसे पैैगंबर के मौत के लगभग 200 साल बाद यानी 846 ईस्वी में मौलाना बुखारी (पूरा नाम- अबू अब्दुल्लाह मुहम्मद बिन इस्माईल बिन इब्राहिम बिन अल-मुघिरा अल-जाफा) द्वारा संकलित किया गया था।

कहा जाता है कि इसे संकलित करने में उन्होंने 16 साल लगाए थे। इसको संकलित करने के लिए उन्होंने लगातार यात्राएँ की थी। बुखारी का जन्म वर्तमान ईरान (तब फारस) में हुआ था। अल बुखारी की आयतों पर मुस्लिमों का पूर्ण विश्वास होता है।

नूपुर शर्मा के बयान पर विवाद

इस्लामी मौलाना इस्लाम का सच बता रहे हैं। वहीं, नूपुर शर्मा ने जब एक टीवी डिबेट के दौरान यह बात कही तो सऊदी अरब, कतर, कुवैत, ईरान जैसे कई मुस्लिम मुल्कों ने भारत पर निशाना साधकर कर अपना दोहरा चरित्र जाहिर किया था। इन मुल्कों ने इस पैगंबर का अपमान बताया था। बाद में सरकार ने नूपुर शर्मा और नवीन जिंदल को पार्टी से निकाल दिया था।

इतना ही नहीं, पैगंबर के इस कथित अपमान को लेकर देश भर में दंगे किए गए थे। कानपुर से लेकर हैदराबाद और बिहार तक मुस्लिमों की भीड़ ने पत्थरबाजी, आगजनी, हिंसा और सुरक्षा बलों पर हमला किया था। इसे पूरे देश में बड़े ही सुनियोजित ढंग से लागू किया गया था।

क्या कहा था नूपुर शर्मा ने

गौरतलब है कि ज्ञानवापी शिवलिंग मामले में 26 मई 2022 की शाम को टाइम्स नाउ पर एक बहस हुई थी। इस डिबेट में नुपूर ने ज्ञानवापी के शिवलिंग पर मजाक बनाने वाले से सवाल किया था कि जैसे उनके भगवान का मजाक उड़ रहा है, क्या वो भी दूसरे मजहब पर इस तरह बात रख सकती हैं? उसके बाद कुरान और हदीसों का हवाला देकर पैगंबर के निकाह का जिक्र किया।

इसी के बाद AltNews के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर ने नुपूर शर्मा पर पैगंबर मुहम्मद का अपमान करने का आरोप लगाते हुए एक ऑनलाइन कैंपेन चलाया था। इसी कैंपेन के बाद कट्टरपंथी नुपूर को और उनके परिवार को जान से मारने और रेप की धमकियाँ दे रहे थे। वहीं, कुछ कट्टरपंथियों ने नूपुर की हत्या करने वाले को इनाम देने का ऐलान किया था।

हाल ही में ऑपइंडिया के साथ एक इंटरव्यू में नूपुर शर्मा ने कहा था कि उन्होंने पैगंबर मुहम्मद पर कोई अपनी राय नहीं दी थी। उन्होंने जो कुछ भी कहा, उसका उल्लेख उनकी अपनी हदीस में पहले से ही है। उन्होंने कहा था, “शिवलिंग पर टिप्पणियों से नाराज होने के बाद मैंने केवल इतना ही पूछा था कि क्या उनको भी उनकी मजहबी आस्था का मजाक उड़ाना शुरू कर देना चाहिए, जैसे वे हमारा मजाक उड़ाते हैं।”

उन्होंने यह भी कहा था कि अगर कोई स्थापित इस्लामी विद्वान उसे ठीक करने के लिए आगे आएगा तो उन्हें अपनी टिप्पणी वापस लेने में खुशी होगी। उन्होंने कहा था, “अगर मैं तथ्यात्मक रूप से गलत हूँ, तो मुझे अपने बयान वापस लेने में खुशी होगी।”

कौन है मौलाना अल हकीम

अल हकीम वही मौलाना हैं, जिन्होंने साल 2020 में कहा था कि इस्लाम में विरोध प्रदर्शन और धरना आदि की इजाजत नहीं है। यह हराम है। अल हकीम ने लोकतंत्र को भी इस्लाम विरोधी बताया था। उन्होंने कहा था कि लोकतंत्र इस्लामी शरीया के खिलाफ है।

इसी मौलाना ने नवरात्री को ‘कुफ्र (काफिरों द्वारा किया जाने वाले कार्य)’ बताते हुए साल 2021 में कहा था कि अगर किसी मुस्लिम व्यक्ति की बीवी इसमें हिस्सा लेती है या फिर उपवास रखती है तो उसे तुरंत तलाक दे देना चाहिए। मौलाना बिटकॉइन को भी हराम बता चुका है।

मौलाना असीम अल हकीम सऊदी अरब में जाना-पहचाना नाम है और वो अक्सर टीवी व रेडियो के जरिए अंग्रेजी व अरबी में इस्लाम के बारे में बताता है। ‘हुडा टीवी’ और जाकिर नाइक की ‘पीस टीवी’ के माध्यम से वो कुरान और हदीथ पढ़ाता है। उसने ‘किंग अब्दुल अजीज यूनिवर्सिटी’ से ‘भाषा विज्ञान’ में स्नातक कर रखा है।

बाढ़ प्रभावित असम में 62 लोगों की मौत, कई लापता: कई गाँव हुए जलमग्न, 30 लाख प्रभावित, PM मोदी ने CM सरमा से की बात

उत्तर-पूर्वी राज्य असम (Assam) बाढ़ और भूस्खलन की विभीषिका झेल रहा है। बाढ़ के कारण राज्य में 62 लोगों की मौत हो गई है, जबकि कई लोग लापता बताए जा रहे हैं। बाढ़ के कारण 30 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। वहीं, 500 से अधिक जानवर भी इसमें बह गए हैं। प्रभावित लोगों को विभिन्न जगहों पर राहत कैंपों में रखा गया है।

बाढ़ के कारण राज्य के 32 जिलों के 4,291 गाँव प्रभावित हुए हैं और लगभग 66,500 हेक्टेयर कृषि भूमि जलमग्न हो गई हैं। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में स्थिति और खराब हो सकती है। हालाँकि, बड़े पैमाने पर राहत कार्य का काम जारी है।

राज्य में ब्रह्मपुत्र, बेकी, मानस, पगलाडिया, पुथिमारी, कोपिली और जिया-भराली जैसी नदियाँ खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। नदियों के बहाव और जलस्तर के कारण कई तटबंध टूट गए हैं। वहीं सड़कें, पुलों और नहरों को भारी नुकसान हुआ है।

जो जिले सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं उनमें बजली, बक्सा, बारपेटा, विश्वनाथ, बोंगाईगांव, कछार, चिरांग, दरांग, धेमाजी, धुबरी, डिब्रूगढ़, दीमा-हसाओ, गोलपारा, गोलाघाट, होजई, कामरूप, कामरूप (एम), कार्बी आंगलोंग पश्चिम, करीमगंज, कोकराझार, लखीमपुर, माजुली, मोरीगांव, नगांव, नलबाड़ी, शिवसागर, सोनितपुर, दक्षिण सलमारा, तामूलपुर, तिनसुकिया और उदलगुरी शामिल हैं।

आपदा से प्रभावित लोगों को राहत देने के लिए राज्य भर में लगभग 500 राहत कैंप बनाए गए हैं। वर्तमान समय में करीब 1.50 लाख बाढ़ प्रभावित लोग विभिन्न राहत शिविरों में हैं। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने राज्य के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा (Himanta Biswa sarma) से स्थिति की जानकारी ली और हरसंभव मदद का भरोसा दिया।

नरेंद्र मोदी ने शनिवार (18 जून 2022) को ट्वीट कर कहा, “आज असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से बात की और राज्य में बाढ़ के कारण स्थिति का जायजा लिया। केंद्र की ओर से हरसंभव मदद का आश्वासन दिया। मैं बाढ़ से प्रभावित असम के लोगों की सुरक्षा और कुशलक्षेम की प्रार्थना करता हूँ।”

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया और लोगों के बातचीत की। वहीं, अधिकारियों को आवश्यक राहत सामग्री उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया। वहीं, राज्य के रंगिया के मोरंजना क्षेत्र में बाढ़ के पानी की वजह से नेशनल हाइवे डूब गया है और लोग वहाँ मछली पकड़ रहे हैं।

सलमान खान के अलावा करण जौहर भी थे लॉरेंस बिश्नोई गैंग के निशाने पर, मूसेवाला हत्याकांड में पकड़े गए ‘महाकाल’ ने किया खुलासा

सिद्धू मूसेवाला की हत्या के बाद सलमान खान को धमकी देने वाले लॉरेंस बिश्नोई गैंग को लेकर खुलासा हुआ है कि ये गैंग कई अन्य बॉलीवुड हस्तियों को भी अपने निशाने पर लेकर ब्लैकमेल करते थे। मूसेवाला हत्याकांड में पकड़ा गया सौरव कांबले उर्फ महाकाल ने बताया कि उन लोगों के निशाने पर कई और भी बॉलीवुड शख्सियतें थीं जिनमें से एक प्रोड्यूसर करण जौहर भी थे।

रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि सौरव कांबले ने पुणे पुलिस की पूछताछ में बताया कि करण जौहर बिश्नोई गैंग की हिट लिस्ट में थे। कांबले ने कहा कि करण जौहर अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या के लिए जिम्मेदार था और इसलिए वह करण जौहर से नाराज थे और उन्हें धमका कर 5 करोड़ रुपए की वसूली करना चाहते थे।

कांबले ने पुलिस को बताया कि वो विक्रम बराड़ के लिए काम करता था जिसके साथ वह सिग्नल ऐप से जुड़ा था। इसी के बाद उसे बिश्नोई गैंग की तमाम साजिशों और टारगेट्स का पहले से पता चलने लगा। अब पुलिस सौरव कांबले के दावों की जाँच कर रही है। जिस विक्रम बराड़ का नाम सौरव ने पुलिस के सामने लिया है कनाडा के गोल्डी बराड़ का भाई है।

मूसेवासा हत्या केस में पकड़े गए आरोपित ने ये भी बताया कि ड्रग तस्करी में शामिल एक महिला और सिखों की गुरु ग्रंथ साहिब का अपमान करने वाले डॉक्टर भी उनकी हिट लिस्ट में हैं।

बता दें कि पुलिस ने अभी कांबले के इन सभी दावों की सत्यापित नहीं किया है। लेकिन एक अधिकारी के हवाले से बताया जा रहा है कि करण जौहर से गैंग ने 5 करोड़ रुपए वसूलने की साजिश रची थी। पुलिस ने ये भी बताया कि कुछ आरोपित अपने गुनाह कबूलते समय डींगे भी मारते हैं। ऐसा करने के पीछे उनका उद्देश्य अपना प्रचार करना और फिरौती में बड़ी रकम माँहना होता है। ऐसी घटना पंजा और अन्य राज्यों में आम हैं। गैंग्सटर चाहते हैं कि उनका नाम किसी हाई प्रोफाइल व्यक्ति से जुड़े।