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अडानी ग्रुप ने BYD और बीजिंग वेलियन के साथ सहयोग की खबरों का किया खंडन, ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट को बताया आधारहीन: बैटरी निर्माण को लेकर चीनी कंपनियों संग पार्टनरशिप का किया था दावा

अडानी ग्रुप ने ब्लूमबर्ग की उस रिपोर्ट का खंडन किया है, जिसमें दावा किया गया था कि ग्रुप चीनी कंपनियों BYD और बीजिंग वेलियन न्यू एनर्जी टेक्नोलॉजी के साथ बैटरी निर्माण और स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग की योजना बना रहा है। अडानी ग्रुप की प्रमुख कंपनी अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड ने स्टॉक एक्सचेंज को दी गई जानकारी में स्पष्ट किया कि ऐसी कोई बातचीत या सहयोग की योजना नहीं है।

कंपनी ने ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट को ‘आधारहीन, गलत और भ्रामक’ बताया है। ब्लूमबर्ग ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि अडानी ग्रुप, जो भारत में सौर ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी है, चीनी इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता BYD के साथ मिलकर भारत में बैटरी निर्माण शुरू करने की दिशा में काम कर रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, गौतम अडानी स्वयं BYD के अधिकारियों के साथ बातचीत कर रहे थे और यह चर्चा पिछले हफ्ते तक चली थी। इसका मकसद लिथियम-आयन बैटरी का बड़े पैमाने पर उत्पादन करना था, जो इलेक्ट्रिक वाहनों और ऊर्जा भंडारण प्रणालियों के लिए जरूरी है।

इसके अलावा ब्लूमबर्ग ने यह भी दावा किया कि अडानी ग्रुप बीजिंग वेलियन न्यू एनर्जी टेक्नोलॉजी और अन्य चीनी कंपनियों के साथ भी बातचीत कर रहा है, साथ ही यूरोपीय और दक्षिण कोरियाई बैटरी निर्माताओं से भी संपर्क में है।

हालाँकि, अडानी ग्रुप ने इन सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया। कंपनी ने कहा कि वह न तो BYD के साथ बैटरी निर्माण के लिए कोई सहयोग कर रही है और न ही बीजिंग वेलियन के साथ किसी तरह की साझेदारी की बात चल रही है। ग्रुप ने यह भी दोहराया कि वह भारत की स्वच्छ ऊर्जा क्रांति में योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध है।

अडानी ग्रुप पहले से ही सौर, पवन और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे क्षेत्रों में काम कर रहा है। कंपनी अपनी सौर मॉड्यूल उत्पादन क्षमता को 10 गीगावाट प्रति वर्ष तक बढ़ाने और पवन टरबाइन उत्पादन को 5 गीगावाट तक दोगुना करने की योजना बना रही है। साथ ही ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन के लिए इलेक्ट्रोलाइज़र निर्माण की सुविधा विकसित करने पर भी काम चल रहा है।

भारत और चीन के बीच तनाव, जैसे सीमा विवाद और आर्थिक प्रतिस्पर्धा, इस तरह के सहयोग को जटिल बनाते हैं। ब्लूमबर्ग ने अपनी रिपोर्ट में उल्लेख किया था कि चीन ने अप्रैल से भारतीय ऑटोमोबाइल कंपनियों को रेयर अर्थ मैग्नेट का निर्यात रोक दिया है और भारत ने BYD के वरिष्ठ अधिकारियों को वीजा देने से इनकार कर दिया है, जिसके कारण बैठकें पड़ोसी देशों में हो रही थीं। फिर भी अडानी ग्रुप ने साफ किया कि वह किसी भी चीनी कंपनी के साथ साझेदारी की दिशा में काम नहीं कर रहा है।

इजरायली मंत्री ने अल-अक्सा मस्जिद परिसर में जाकर की प्रार्थना तो इस्लामी मुल्कों को लगी मिर्ची, पाकिस्तान बताने लगा शांति को खतरा: सऊदी अरब-जॉर्डन ने भी की निंदा

इजरायल के सुरक्षा मंत्री इतेमार बेन-ग्वेर ने यरुशलम में अल-अक्सा मस्जिद परिसर का दौरा कर वहाँ प्रार्थना की है। पूर्वी यरुशलम के जिस परिसर में बेन-ग्वेर ने प्रार्थना की है उसे यहूदी ‘टेंपल माउंट’ कहते हैं।

इस स्थल को लेकर नियम है कि यहूदी वहाँ जा सकते हैं लेकिन उन्हें प्रार्थना करने की अनुमति नहीं है। बेन-ग्वेर के इसका एक वीडियो अपने X अकाउंट पर भी शेयर किया है जिसके बाद बवाल मच गया है और कई इस्लामी देशों ने उनके इस कदम की निंदा की है।

बेन-ग्वेर का यह दौरा ‘तिशा बाव’ के दिन हुआ है। यह दिन यहूदी धर्म में एक उपवास और शोक का दिन होता है। इसे यरुशलम में यहूदियों के पहले और दूसरे पवित्र मंदिरों के विनाश समेत यहूदी इतिहास की त्रासदियों की याद में मनाया जाता है।

परिसर की मौजूदा स्थिति

मान्यता है कि सोलोमन राजा ने 1000 ईसा पूर्व में यहूदियों के लिए इसी जगह पर दो मंदिर बनवाए थे। वहीं, मुसलमानों के लिए तीसरा सबसे पवित्र स्थान है और मान्यता है कि पैगंबर मोहम्मद यहीं से जन्नत की यात्रा पर गए थे। यहूदियों के मंदिर के स्थान पर अब केवल एक दीवार बची है जिसे ‘वेस्ट वॉल’ कहा जाता है।

ईसाइयों में मान्यता है कि इस ‘वेस्ट वॉल’ के पास ही यीशू का जन्म हुआ था और वे भी इसे पवित्र मानते हैं। 1967 के युद्ध में इजरायल ने इसे जॉर्डन से अपने कब्जे में लिया था और दोनों देशों के बीच इसे लेकर समझौता हुआ था।

मौजूदा व्यवस्था के तहत जॉर्डन को इस जगह का पारंपरिक संरक्षक बने रहने की अनुमति है। वहीं, इजरायल के पास सुरक्षा और यहां किसी के पहुंचने की अनुमति देने की जिम्मेदारी है। यहाँ अक्सर झड़पें होती रहती हैं।

इज़रायल के पीएम और इस्लामिक मुल्कों ने क्या कहा?

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बेन-ग्वेर की यात्रा को लेकर एक बयान जारी किया है। नेतन्याहू के बयान में कहा गया कि टेंपल माउंट पर यथास्थिति बनाए रखने की इज़राइल की नीति न तो बदली है और न ही बदलेगी।

हालाँकि, सऊदी अरब, पाकिस्तान और जॉर्डन समेत कई इस्लामिक मुल्कों ने इसकी निंदा की है। इस स्थल के संरक्षक जॉर्डन ने बेन-ग्वेर की इस यात्रा को ‘उकसावे वाली यात्रा’ बताया है। फलस्तीनी अथॉरिटी के राष्ट्रपति महमूद अब्बास के एक प्रवक्ता ने कहा कि इस यात्रा से ‘सभी हदें पार हो गई हैं’। सऊदी अरब ने भी इस कदम की निंदा करते हुए कहा कि इस तरह की गतिविधियाँ क्षेत्र में संघर्ष को बढ़ावा देती हैं।

पाकिस्तान ने क्या कहा?

दुनिया में धार्मिक कट्टरता के लिए कुख्यात पाकिस्तान को भी इससे मिर्ची लग गई है। जो देश अपने यहाँ अल्पसंख्यकों के धार्मिक स्थलों को नष्ट करता है वो भी इजरायल को शांति का पाठ पढ़ा रहा है। खुद सुरक्षा के लिए दूसरों पर निर्भर पाकिस्तान यहूदियों को नैतिकता का पाठ पढ़ा रहा है।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इसे लेकर X पर एक लंबा पोस्ट लिखा है। शहबाज ने बेन-ग्वेर की यात्रा की निंदा करते हुए लिखा, “यह अपवित्रता न केवल दुनिया भर के मुसलमानों का अपमान है बल्कि अंतर्राष्ट्रीय कानून और मानवता की चेतना पर सीधा हमला है।”

शहबाज ने आगे लिखा, “इस तरह के उकसावे शांति की संभावनाओं को खतरे में डालते हैं। इजरायल की बेशर्म हरकतें जानबूझकर फिलीस्तीन और पूरे इलाके में तनाव को भड़का रही हैं, जिससे मध्य पूर्व संघर्ष की ओर बढ़ रहा है।” पाकिस्तान ने इलाके में शांति की बात कही है।

सच्चे भारतीय होते तो नहीं करते ऐसी बात… सेना पर राहुल गाँधी ने दिया अपमानजनक बयान तो सुप्रीम कोर्ट ने फटकारा: गलवान की लड़ाई के दौरान भी आर्मी का मनोबल गिरा रहे थे कॉन्ग्रेस नेता

भारतीय सेना पर आपतिजनक बयान देने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कॉन्ग्रेस सांसद राहुल गाँधी को लताड़ लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर राहुल गाँधी सच्चे भारतीय होते तो वह सेना पर ऐसा बयान नहीं देते। राहुल गाँधी से सुप्रीम कोर्ट ने उनके बयान का आधार भी पूछा है।

यह टिप्पणियाँ सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (4 अगस्त, 2025) को की हैं। सुप्रीम कोर्ट लोकसभा में अब नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी की एक याचिका पर सुनवाई कर रहा था। राहुल गाँधी ने इन बयानों पर दर्ज मामले रद्द करने की माँग की थी। इसको लेकर वह सुप्रीम कोर्ट पहुँचे थे।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस एजी मसीह की बेंच ने इस याचिका की सुनवाई करते हुए कहा, “आपको कैसे पता चला कि चीन ने 2000 वर्ग किलोमीटर भारतीय ज़मीन पर कब्ज़ा कर लिया है? क्या आप वहाँ थे? क्या आपके पास कोई विश्वसनीय जानकारी है? आप बिना किसी सबूत के ये बयान क्यों दे रहे हैं… अगर आप सच्चे भारतीय होते, तो ये सब नहीं कहते।” सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गाँधी का पक्ष रख रहे वकील अभिषेक मनु सिंघवी से यह बातें कहीं।

सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गाँधी से कहा कि उन्हें अगर यह सब बयान देने हैं तो संसद में जाकर यह सब कह सकते हैं। शीर्ष अदालत ने प्रश्न उठाया कि उन्हें यह सब बातें सोशल मीडिया पोस्ट में क्यों कहनी होती हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय सैनिकों के नुकसान को लेकर भी राहुल गाँधी पर प्रश्न उठाए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब कोई लड़ाई होती है तो दोनों तरफ के सैनिक मारे जाते हैं या नुकसान होता है। सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि इसमें अजीब सा क्या है।

सुप्रीम कोर्ट ने हालाँकि राहुल गाँधी को राहत दे दी। राहुल गाँधी के खिलाफ दर्ज मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है। उनकी केस खत्म करने की अर्जी सुप्रीम कोर्ट ने नहीं स्वीकार की। इससे पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी।

क्या था मामला?

राहुल गाँधी पर यह मामला सीमा सड़क संगठन के एक अधिकारी ने दर्ज करवाया था। उन्होंने कहा था कि 2022 में भारत जोड़ो यात्रा के दौरान राहुल गाँधी ने सेना का अपमान किया है। उनके बयान में भारतीय सैनिकों के चीनी सैनिकों से ‘पीटे जाने’ की बात कही गई थी।

राहुल गाँधी ने कहा था, “लोग भारत जोड़ो यात्रा, अशोक गहलोत और सचिन पायलट वगैरह के बारे में तो पूछेंगे ही। लेकिन चीन द्वारा 2000 वर्ग किलोमीटर भारतीय ज़मीन पर कब्ज़ा करने, 20 भारतीय सैनिकों को पीटने और अरुणाचल प्रदेश में हमारे सैनिकों की पिटाई के बारे में एक भी सवाल नहीं पूछेंगे। लेकिन भारतीय प्रेस उनसे इस बारे में एक भी सवाल नहीं पूछता। क्या यह सच नहीं है?”

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इस बयान पर दर्ज मामले को रद्द करने से मई, 2025 में मना कर दिया था। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा था कि बोलने की आजादी का मतलब यह नहीं है कि कोई सेना का अपमान करेगा। इस मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने राहुल गाँधी को समन भी किया था।

गलवान की लड़ाई के दौरान चीन के पक्ष में दिखे थे राहुल गाँधी

राहुल गाँधी ने भारत जोड़ो यात्रा के दौरान ही नहीं बल्कि जून, 2020 में गलवान लड़ाई के दौरान भी सेना और सरकार का साथ नहीं दिया था। कहीं उन्होंने हजारों वर्ग किलोमीटर चीन के हाथ चले जाने की बात कही थी तो कहीं सैनिकों की सुविधाओं को लेकर बात कर रहे थे। वह कह रहे थे कि सरकार सो रही है और चीन युद्ध की तैयारी कर रहा है। यह सारे बयान एस समय में दिए जा रहे थे जब चीन के खिलाफ पूरा देश चीन के साथ खड़ा था।

गलवान की लड़ाई के बाद जारी हुए चीन से तनाव के बीच राहुल गाँधी के दिल्ली में चीनी राजदूत से मिलने की खबर भी सामने आई थी। राहुल गाँधी इस पर कुछ स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए थे। इसके अलावा कॉन्ग्रेस और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के भी आपस में समझौता करने की रिपोर्ट्स आ चुकी हैं। भाजपा ने यह भी आरोप लगाया है कि राजीव गाँधी फाउंडेशन ₹1 करोड़ से अधिक का चन्दा चीन से ले चुका है। राजीव गाँधी फाउंडेशन का FCRA लाइसेंस भी कैंसिल हो गया था।

50 हजार की इनामी अम्मी के फर्जी साइन किए, कोर्ट में डाल दी करोड़ों की दौलत छुड़ाने की याचिका: मुख्तार अंसारी के बेटे उमर को UP पुलिस ने दबोचा, वकील भी गिरफ्तार

यूपी पुलिस ने पूर्व विधायक मुख्तार अंसारी का बेटा उमर अंसारी को गिरफ्तार कर लिया है। उसने अपनी अम्मी अफ्शा अंसारी की फर्जी हस्ताक्षर कर कोर्ट में एक याचिका दायर की थी। जब हस्ताक्षर का मिलान गया तो ये फर्जी पाया गया। इसके बाद उमर अंसारी को यूपी की मुहम्मदाबाद पुलिस ने रविवार (3 अगस्त 2025) को हजरतगंज पुलिस की मदद से दाउलशफा में विधायक निवास से गिरफ्तार किया। उसे गाजीपुर ले जाया गया है।

अम्मी की फर्जी हस्ताक्षर किए उमर अंसारी ने

दरअसल गाजीपुर में फर्जी हस्ताक्षर का मामला सामने आया था। उमर अंसारी ने अपनी अम्मी 50 हजार की इनामी और फरार चल रही अफ्शा अंसारी के हस्ताक्षर किए थे। उसने यूपी गैंगस्टर अधिनियम की धारा 14 (1) के तहत जब्त संपत्ति को छुड़वाने के लिए कोर्ट में याचिका दायर की थी। ये संपत्ति मृतक पिता मुख्तार अंसारी के जुड़ी थी। पुलिस की टीम ने मेसर्स विकास कंस्ट्रक्शन की पार्टनरशिप डीड में अफ्शा अंसारी के हस्ताक्षर और याचिका में किए गए हस्ताक्षर में काफी अंतर पाया।

जाँच में ये भी सामने आयी कि याचिका में अफ्शा अंसारी का हस्ताक्षर नहीं है और ये फर्जी हस्ताक्षर उसके बेटे उमर अंसारी ने किया है। इसके बाद पुलिस ने जानबूझ कर फर्जी दस्तावेज बनाने और कोर्ट को गुमराह करने के आरोप में उमर अंसारी पर कई धाराओं में केस दर्ज किया।

गाजीपुर के एसपी डॉक्टर ईरज राजा के मुताबिक, ” मुख्तार अंसारी की गैंगस्टर एक्ट के तहत जो संपत्ति कुर्क की गई थी, उसे छुड़ाने के लिए फर्जीवाड़ा किया गया। उमर ने संपत्ति को छुड़ाने के लिए कोर्ट में अर्जी दायर थी, उसमें अपनी अम्मी अफशां अंसारी का फर्जी हस्ताक्षर कर कोर्ट को गुमराह किया “

वकील लियाकत अली पर एफआईआर दर्ज

इस मामले में उमर अंसारी के वकील लियाकत अली पर एफआईआर दर्ज की गई है। कोर्ट में वकील ने फर्जी हस्ताक्षर वाले दस्तावेज पेश किए। पुलिस ने इस मामले में उसे भी बराबर का दोषी माना है। पुलिस अन्य पहलुओं की जाँच कर अन्य दोषियों पर भी कड़ी कार्रवाई करेगी।

चीनी और इस्लामी कट्टरपंथियों ने फैलाई US के साथ ट्रेड बंद करने की खबर, ताकि लोगों में फैल जाए पैनिक: MEA ने खारिज की अफवाहें, भारत-अमेरिका के बीच FTA पर बातचीत जारी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ के ऐलान के बाद सोशल मीडिया पर ऐसे पोस्ट की बाढ़ आ गई, जिसमें भारत-अमेरिका के बीच सबकुछ ‘सही’ नहीं होने की बात कही जा रही थी। यही नहीं, दावे ये भी किए जा रहे थे कि अब भारत अमेरिका के साथ कोई संबंध नहीं रखेगा और वो अमेरिका पर पलटवार की तैयारी कर रहा है। भारत अब अमेरिका की ‘शत्रुतापूर्ण आर्थिक नीतियों’ के जवाब में ‘दोगुना’ तक टैरिफ लगा देगा।

भारत-अमेरिका के बीच वैमनस्य को बढ़ावा देने वाले फर्जी सोशल मीडिया पोस्ट चीन समर्थित या इस्लामी देशों से जुड़े दिखने वाले हैंडल्स से लगातार किए जा रहे थे। ऐसे ही एक हैंडल ‘मिडिल ईस्टर्स अफेयर्स’ की पोस्ट में दावा किया गया कि अगर अमेरिका अपनी ‘होस्टाइल’ नीतियों को नहीं बदलता है, तो भारत सरकार अमेरिका से साथ सभी व्यापारिक समझौतों को रद्द कर सकती है।

इसी तरह से ‘चाइना इन इंग्लिश’ नाम के हैंडल से बाकायदा एक लिस्ट ही जारी कर दी गई, जिसके इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट को लेकर भारत सरकार फैसले लेने वाली है। दावा किया गया कि भारत अमेरिका को देने वाली व्यापार छूटों को खत्म कर देगा।

हालाँकि विदेश मंत्रालय ने उन अफवाहों को सिरे से खारिज कर दिया है। मंत्रालय की फैक्ट चेक यूनिट ने साफ कहा कि ऐसी कोई योजना नहीं है। ये भी साफ कर दिया गया है कि भारत सरकार फिलहाल किसी भी जल्दबाजी में नहीं है। वो अमेरिका को दी गई व्यापारिक छूटों को वापस लेने या समीक्षा करने की दिशा में कोई कदम नहीं उठा रही।

बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 25% टैरिफ लगाने की घोषणा की थी, जो 1 अगस्त से लागू हो चुका है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर भारत की आलोचना करते हुए कहा था कि भारत के टैरिफ दुनिया में सबसे ज्यादा हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत और रूस को अपनी अर्थव्यवस्थाओं के साथ ‘डूब जाना चाहिए।’ ट्रंप का यह बयान भारत द्वारा रूस से तेल और सैन्य उपकरण खरीदने के कारण भी आया, क्योंकि यूक्रेन युद्ध के बीच अमेरिका इससे नाराज है।

इन तनावों के बावजूद भारत और अमेरिका व्यापारिक रिश्तों को बेहतर करने की दिशा में काम कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों देश आपसी सहमति से लाभकारी व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहे हैं। सूत्रों ने बताया कि वर्चुअल मोड में चर्चा चल रही है और 24 अगस्त को अमेरिकी व्यापार वार्ता टीम नई दिल्ली आएगी। इस दौरे में छठे दौर की वार्ता होगी, जिसमें व्यापारिक मुद्दों को सुलझाने पर जोर रहेगा।

इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से ‘स्वदेशी’ अपनाने का आह्वान किया है, ताकि भारतीय उत्पादों को बढ़ावा मिले। वहीं, विदेश मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही गलत खबरें, जैसे कि भारत का ‘कोई सम्मान नहीं तो कोई छूट नहीं’ जैसा बयान, पूरी तरह बेबुनियाद हैं। सरकार का ध्यान व्यापारिक रिश्तों को मजबूत करने पर है, न कि उन्हें तोड़ने पर।

कर्नाटक धर्मस्थल में सामूहिक दफनाने की जाँच में सिर्फ पुरुष हड्डियाँ मिलीं, SIT की 10 जगहों की खुदाई बेनतीजा: सफाईकर्मी के दावों पर उठने लगे सवाल, क्या हिंदुओं को बदनाम करने की साजिश?

कर्नाटक के एक धर्मस्थल से जुड़े सामूहिक दफनाने के मामले में SIT की जाँच फिलहाल सवालों के घेरे में है। सफाईकर्मी ने दावा किया था कि धर्मस्थल के आसपास 13 जगहों पर महिलाओं और लड़कियों के शव दफनाए गए हैं।

(29 जुलाई 2025) से शुरू हुई खुदाई में अब तक 10 जगहों की जाँच हो चुकी है, लेकिन ज्यादातर जगहों से कोई मानव अवशेष नहीं मिले। सिर्फ (31 जुलाई 2025) को नेत्रवती नदी के पास छठे स्थान से कुछ मानव हड्डियाँ मिलीं, जो प्रारंभिक जाँच में एक पुरुष की बताई गईं। वहाँ से करीब 15 हड्डियाँ मिलीं, जिनमें खोपड़ी नहीं थी।

इसके अलावा, जाँच के दौरान एक महिला का डेबिट कार्ड और एक पुरुष का पैन कार्ड भी मिला। पैन कार्ड नेलमंगला के रहने वाले सुरेश का निकला, जिसकी मार्च 2025 में पीलिया से मौत हो चुकी है।

पुलिस को शक है कि सुरेश ने मरने से पहले धर्मस्थल में पैन कार्ड खोया होगा। डेबिट कार्ड की जानकारी के लिए बैंक से संपर्क किया गया है। अब तक की जाँच में न तो कोई महिला का शव मिला है, न ही सफाईकर्मी के दावों को पुख्ता करने वाला कोई ठोस सबूत।

वहीं, सफाईकर्मी के खिलाफ भी फिलहाल किसी तरह की झूठी जानकारी देने का कोई सबूत नहीं मिला है। ऐसे में पूरा मामला अब और उलझता जा रहा है।

एक चश्मदीद गवाह एसआईटी के सामने पेश हुआ

जयंत टी नाम का एक व्यक्ति शनिवार (2 अगस्त 2025) को बेल्थांगडी में SIT के सामने पेश हुआ। उसने दावा किया कि उसे कथित सामूहिक दफनाने के मामले में अहम जानकारी है और वह इसकी गवाही दे सकता है।

जयंत ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि उसने खुद अपनी आँखों से कई जगहों पर अवैध रूप से किए गए दफनाने के काम को देखा हैं, इसलिए उसे इस मामले की प्रत्यक्ष जानकारी है।

केस की सुनवाई कर रहे जज ने खुद को किया अलग

बेंगलुरु के 10वें कोर्ट के जज विजय कुमार राय बी ने धर्मस्थल सामूहिक दफनाने के मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है। उन्होंने कोर्ट को आवेदन देकर यह केस किसी और अदालत में भेजने की अपील की है।

यह फैसला तब आया जब कुछ पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस बात पर चिंता जताई कि जज ने उसी संस्था के स्कूलों से पढ़ाई की है, जो धर्मस्थल मंदिर ट्रस्ट चलाता है। साथ ही, कहा जा रहा है कि उन्होंने राज्यसभा सांसद वीरेंद्र हेगड़े का प्रतिनिधित्व करने वाली एक कानूनी फर्म में जूनियर वकील के रूप में काम भी किया था।

इसी केस से जुड़ी एक याचिका में वीरेंद्र हेगड़े के भाई डी. हर्षेंद्र कुमार ने 8,000 से ज्यादा सोशल मीडिया पोस्ट, खबरें और वीडियो हटाने की माँग की थी। उनका कहना था कि इनमें उनके, उनके परिवार और मंदिर संस्थानों के खिलाफ आपत्तिजनक बातें कही गई हैं।

इस याचिका पर सुनवाई करते हुए, जस्टिस विजय कुमार राय बी ने पहले ही मीडिया कवरेज और सोशल मीडिया पर चल रही टिप्पणियों पर एकपक्षीय रोक (एकतरफा आदेश) लगा दी थी, जिससे जाँच पर हो रही रिपोर्टिंग पर भी रोक लग गई थी।

रहस्यमय सफाई कर्मचारी और खौफनाक आरोप

यह मामला तब सामने आया जब एक सफाईकर्मी ने चौंकाने वाला दावा किया कि उसे 1998 से 2014 के बीच धर्मस्थल में कई जगहों पर सैकड़ों शव दफनाने के लिए मजबूर किया गया था। यह सफाईकर्मी भगवान मंजूनाथ मंदिर में काम करता था और उसने 3 जून 2025 को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

उसके आरोपों की गंभीरता को देखते हुए, राज्य सरकार ने 19 जुलाई को इस मामले की जाँच के लिए SIT  का गठन किया। इसके बाद SIT उसे धर्मस्थल के स्नान घाट लेकर गई, जहाँ उसने 13 जगहों की पहचान की, जहाँ कथित रूप से शव दफनाए गए थे।

सफाईकर्मी ने अपनी शिकायत में बताया कि जिन शवों को वह दफनाता था, उनमें कई महिलाएँ और नाबालिग लड़कियाँ थीं, जिनका यौन शोषण किया गया था।

उसकी शिकायत के कुछ समय बाद, सुजाता नाम की 60 साल की एक महिला ने भी पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई। उसने बताया कि उसकी बेटी धर्मस्थल की तीर्थ यात्रा के दौरान लापता हो गई थी।

कश्मीर में पुराने हिंदू राजवंश के जीवंत प्रमाण, पवित्र झील के पास से मिलीं कई मूर्तियाँ-शिवलिंग: कभी करकोटा वंश का बजता था डंका, कल्हण की राजतरंगिनी में भी है जिक्र

जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में एक बड़ी खोज हुई है। यहाँ सालिया क्षेत्र में ‘करकूट नाग’ नाम के पवित्र झरने के पास लोक निर्माण विभाग के मरम्मत कार्य के दौरान जमीन से प्राचीन हिंदू मूर्तियाँ और शिवलिंग मिले हैं। इनमें 11 शिवलिंग, एक देवमूर्ति और कुछ धार्मिक चिह्न शामिल हैं।

ये अवशेष जल स्रोत के किनारे खुदाई के समय निकले। मजदूर जब इस स्थान की मरम्मत कर रहे थे, तो उन्हें पानी के नीचे एक तरह का गुप्त पत्थर का कक्ष दिखाई दिया। जब इसे खोला गया, तो इन मूर्तियों का पता चला।

यह खोज उस समय हुई है जब घाटी में पारंपरिक तीर्थ स्थलों के पुनरुद्धार की माँग उठ रही है। इस स्थान की ऐतिहासिकता को देखते हुए जम्मू-कश्मीर के अभिलेखागार, पुरातत्व और संग्रहालय विभाग की टीम ने इस स्थल का निरीक्षण किया है।

उन्होंने पुष्टि की है कि इन मूर्तियों को अब श्रीनगर भेजा जाएगा, जहाँ उनकी उम्र और उत्पत्ति का पता लगाने के लिए वैज्ञानिक परीक्षण किए जाएंगे। इसके लिए सामग्री परीक्षण (material analysis) और तिथि निर्धारण (dating tests) जैसे तकनीकी परीक्षण किए जाएंगे।

इसके बाद इन प्राचीन वस्तुओं को श्रीनगर स्थित एसपीएस संग्रहालय में भेजा जाएगा, जहाँ शोधार्थी और इतिहासकार इनका गहराई से अध्ययन कर सकेंगे। विभागीय अधिकारियों का मानना है कि ये मूर्तियाँ 7वीं से 9वीं सदी के बीच की हो सकती हैं, यानी अंदाजन करकोटा वंश के शासनकाल की।

इंडियान एक्स्प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार स्थानीय लोगों, विशेषकर कश्मीरी पंडित समुदाय का मानना है कि इस स्थान का संबंध करकोटा वंश से है। उनका यह भी कहना है कि इस स्थल पर पहले कोई मंदिर रहा होगा और संभवतः उस मंदिर की मूर्तियों को बाद में सुरक्षित रखने के लिए जल स्रोत में छिपा दिया गया होगा।

उनका यह भी अनुरोध है कि इस स्थल को धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर के रूप में फिर से स्थापित किया जाए। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से यह माँग की है कि यहाँ एक नया मंदिर बनाकर उन मूर्तियों को पुनः स्थापित किया जाए और इसे एक मान्यता प्राप्त तीर्थस्थल का रूप दिया जाए।

करकोटा वंश: कश्मीर का स्वर्ण युग

करकोटा वंश कश्मीर के इतिहास का गौरवशाली अध्याय है। यह वंश 7वीं सदी के मध्य से 9वीं सदी के उत्तरार्ध तक कश्मीर पर शासन करता रहा। इस काल को अक्सर ‘कश्मीर का स्वर्ण युग’ कहा जाता है, जब राजनीतिक स्थिरता, सांस्कृतिक समृद्धि और धार्मिक सहिष्णुता अपने शिखर पर थी।

करकोटा वंश का संस्थापक दुर्लभवर्धन थे, जिसने 625 ईस्वी के आस-पास कश्मीर की सत्ता संभाली। प्रसिद्ध इतिहासकार कल्हण ने अपनी ऐतिहासिक कृति राजतरंगिणी में करकोटा वंश का विस्तृत वर्णन किया है।

कल्हण के अनुसार, दुर्लभवर्धन मूलतः किसी निम्न कुल से थे, लेकिन उनकी प्रतिभा और योग्यता देखकर उस समय के राजा बालादित्य ने उन्हें अपनी पुत्री अंगलेखा से विवाह करवा दिया और राजगद्दी सौंप दी।

दुर्लभवर्धन ने अपनी मूल पहचान छुपाकर खुद को नागों की संतति घोषित किया और खुद को कर्कोटक नामक पौराणिक नाग राजा का वंशज बताया। इसी से इस वंश का नाम ‘करकोटा’ पड़ा। नाग परंपरा कश्मीर में बहुत पुरानी रही है और नागों को वहाँ अत्यंत आदरपूर्वक पूजा जाता था।

नीलमत पुराण, जो कश्मीर की उत्पत्ति से संबंधित एक पुराण है, यह बताता है कि कश्मीर एक समय पर एक विशाल झील थी जिसे ऋषि कश्यप ने सुखाया और नागों को बसने के लिए दिया।

करकोटा वंश के सबसे प्रसिद्ध सम्राट ललितादित्य मुक्तापीड़ थे, जिन्होंने 724 से 761 ईस्वी तक शासन किया। ललितादित्य को कश्मीर का ‘अलेक्ज़ेंडर’ भी कहा जाता है क्योंकि उन्होंने सिर्फ कश्मीर ही नहीं, बल्कि अफगानिस्तान, पंजाब, मध्य एशिया और पूर्वी भारत तक अपना साम्राज्य फैलाया।

उनकी विजय यात्राओं का वर्णन काल्हण ने बहुत ही विस्तार से किया है। उन्होंने केवल सैनिक अभियानों में ही नहीं, बल्कि वास्तुकला और संस्कृति में भी महान योगदान दिया। उनकी राजधानी परिहासपुरा (Parihaspura) थी, जिसे उन्होंने खुद बसाया था और वह उस समय उत्तर भारत के सबसे समृद्ध और सुंदर नगरों में से एक माना जाता था।

ललितादित्य ने कश्मीर में कई भव्य मंदिरों और धार्मिक स्थलों का निर्माण कराया। उनका सबसे प्रसिद्ध निर्माण ‘मार्तंड सूर्य मंदिर’ है, जो अनंतनाग के निकट स्थित है। यह मंदिर पत्थरों से बना हुआ है और भारतीय मंदिर वास्तुकला का एक अद्भुत उदाहरण है।

यह सूर्य को समर्पित था और इसका निर्माण 8वीं सदी में हुआ था। मंदिर के चारों ओर लगभग 84 छोटे मंदिर बने हुए थे और इसका पूरा परिसर पत्थर की दीवारों से घिरा था। ललितादित्य ने न केवल हिंदू धर्म के लिए, बल्कि बौद्ध धर्म के लिए भी कई मठ  बनवाए। उन्होंने मंदिरों में स्वर्ण और रत्नों से सुसज्जित देवमूर्तियाँ स्थापित करवाईं।

इस काल में कश्मीर में धार्मिक सहिष्णुता थी। हिंदू, बौद्ध और नाग परंपराओं के अनुयायी मिलजुल कर रहते थे। ललितादित्य की शासन प्रणाली भी एक सुचारु प्रशासनिक ढाँचे पर आधारित थी और उन्होंने अपने साम्राज्य को अनेक प्रांतों में विभाजित करके शासन किया। चीन के प्रसिद्ध यात्री ह्वेन त्सांग भी इस काल में कश्मीर आए थे और उन्होंने कश्मीर को अत्यंत समृद्ध और सांस्कृतिक दृष्टि से उन्नत प्रदेश बताया था।

भविष्य की संभावनाएँ

सालिया क्षेत्र से मिली ये मूर्तियाँ केवल पत्थर की वस्तुएँ नहीं हैं, बल्कि एक पूरे सभ्यता और संस्कृति के प्रतीक हैं। ये मूर्तियाँ हमें करकोटा कालीन स्थापत्य और धार्मिक विश्वासों की झलक देती हैं। जब वैज्ञानिक परीक्षण पूरे होंगे, तो इनसे जुड़ा कालखंड और स्पष्ट रूप से सामने आ सकेगा।

यह कश्मीर के इतिहास के उस दौर की पुष्टि करेगा, जिसे अब तक केवल ग्रंथों या मौखिक परंपराओं के माध्यम से जाना गया था। इस खोज का एक और बड़ा पहलू यह है कि यह स्थानीय लोगों के धार्मिक और सांस्कृतिक जुड़ाव को फिर से सशक्त कर सकता है।

यह जगह कभी एक तीर्थ रही होगी, इसकी पुष्टि खुद वहाँ मिले अवशेष कर रहे हैं। ऐसे में, एक मंदिर का पुनर्निर्माण कर इन मूर्तियों को वहीं स्थापित किया जाना न केवल ऐतिहासिक न्याय होगा, बल्कि धार्मिक और सामाजिक सौहार्द के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण कदम होगा।

यह भी उम्मीद की जा रही है कि यदि सरकार और पुरातत्व विभाग इस स्थल को संरक्षित करने की दिशा में कार्य करते हैं, तो यह स्थान आने वाले समय में एक प्रमुख पर्यटन स्थल और शोध केंद्र बन सकता है। इससे न केवल स्थानीय रोजगार में वृद्धि होगी, बल्कि कश्मीर की ऐतिहासिक विरासत का भी प्रचार-प्रसार होगा।

न साध्वी प्रज्ञा के पास थी बाइक, न कर्नल पुरोहित के घर मिला RDX: फिर भी मालेगाँव ब्लास्ट के आरोप में वर्षों तक जेल में किए गए प्रताड़ित, कोर्ट में एजेंसियों ने खुद मानी हार

2008 के मालेगाँव ब्लास्ट केस में पूर्व बीजेपी सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर और लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित के नाम सबसे अधिक चर्चा में रहे थे। इन दोनों को विस्फोट के कुछ ही समय बाद गिरफ्तार किया गया था। अब ये दोनों भी 5 अन्य आरोपियों के साथ इस केस से बरी कर दिए गए हैं।

साध्वी प्रज्ञा और कर्नल पुरोहित के ऊपर जो आरोप लगे वो कोर्ट में साबित नहीं हो पाए हैं। खुद जाँच एजेंसियों ने ही माना है कि इन दोनों के खिलाफ सबूत नहीं थे। फिर भी कई वर्षों तक इन दोनों को जेल में रखा गया। इतना ही नहीं, दोनों को उन पर लगे आरोप कबूलने के लिए बुरी तरह प्रताड़ित भी किया गया।

ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि जब एजेंसियों को इनके खिलाफ सबूत नहीं मिले थे तो क्यों इन्हें गिरफ्तार किया गया और फिर अलग-अलग तरह की प्रताड़नाएँ दी गईं। क्या ऐसा किसी बड़ी साजिश के तहत किया गया था?

साध्वी प्रज्ञा पर आरोप

भोपाल से बीजेपी की लोकसभा सांसद रहीं साध्वी प्रज्ञा का बचपन भिंड में बीता था। प्रज्ञा के पिता आयुर्वेदाचार्य थे और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े रहे थे। प्रज्ञा, स्वामी अवधेशानंद गिरी से प्रभावित होकर साध्वी बन गईं और इंदौर में उन्होंने राष्ट्रीय जागरण मंच की स्थापना की थी।

मालेगाँव में सितंबर 2008 में एक LML फ्रीडम बाइक पर बँधे बम में विस्फोट हुआ जिसमें 6 लोगों की मौत हुई और करीब 100 लोग घायल हुए। साध्वी प्रज्ञा पर आरोप लगाया गया कि जिस बाइक की मदद से बम धमाके को अंजाम दिया गया है, वो उनके नाम पर रजिस्टर्ड है।

इस धमाके के कुछ ही दिनों बाद 8 अक्टूबर 2008 को महाराष्ट्र ATS ने साध्वी प्रज्ञा को गिरफ्तार कर लिया था। हालाँकि, तब तक वो साध्वी बन चुकी थीं और वाहन उनके कब्जे में नहीं था। यह बाइक रामजी कलसांगरा के पास थी। कोर्ट में कई गवाहों ने इस बात को माना है।

एक अहम बात यह भी थी कि साध्वी प्रज्ञा की गिरफ्तारी बेशक 8 अक्टूबर को हो गई थी लेकिन ATS ने बाइक की जानकारी जुटाने के लिए रजिस्ट्रेशन नंबर के आधार पर पहली बार आवेदन 17 अक्टूबर को दिया था यानी गिरफ्तारी के 9 दिन बाद और यह बात तब सूरत के आरटीओ रहे जीतेंद्र सिंह वाघेला ने अपनी गवाही में मानी थी।

कोर्ट में यह भी पता चला कि इंजन नंबर के दो हिस्से (श्रृंखला संख्या और क्रमांक संख्या) होते हैं और इसमें पहली संख्या पूरी तरह नहीं मिली थीं। सिर्फ अनुमान के आधार पर ही यह मान लिया गया था कि यह वाहन साध्वी प्रज्ञा के नाम पर है।

साध्वी प्रज्ञा को कैसे किया गया प्रताड़ित

साध्वी प्रज्ञा ने गिरफ्तारी के बाद उनके साथ हुए उत्पीड़न की कहानी सुनाई थी। उन्होंने बताया था कि उन्हें एक बेल्ट से बुरी तरह पीटा जाता था। इसकी मार से पूरा नर्वस सिस्टम ढीला पड़ जाता था। साध्वी प्रज्ञा को सोने नहीं दिया जाता था और उन्हें गंदी-गंदी गालियाँ तक दी जाती थीं। उन्होंने यह भी बताया कि उन्हें उल्टा लटकाकर पीटा जाता था।

साध्वी प्रज्ञा ने बताया था कि उन्हें 24 दिनों तक भूखा रखा गया था, उनको बिजली के झटके दिए जाते थे। गाली-गलौज आम बात थी। उनको पुरुष कैदियों के साथ रखकर पोर्न वीडियो देखने पर मजबूर किया जाता था।

इस केस में बरी किए गए 7 आरोपियों में शामिल मेजर रमेश उपाध्याय ने 2017 में बताया था कि साध्वी प्रज्ञा को उनकी मौजूदगी में पोर्नोग्राफिक ऑडियो सुनाया गया था। उन्होंने बताया था कि हमें बराबर के कमरों से साध्वी प्रज्ञा के चीखने की आवाजे सुनाई देती थीं और इस तरह की प्रताड़ना को शब्दों में नहीं व्यक्त किया जा सकता है।

कोर्ट ने साध्वी प्रज्ञा को लेकर क्या कहा?

बार ऐंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, NIA अदालत ने माना है कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि मोटरसाइकिल ठाकुर की थी या विस्फोट स्थल पर मिली मोटरसाइकल पर सिर्फ उनका ही नियंत्रण था।

कोर्ट ने कहा कि वाहन का चेसिस और इंजन नंबर पूरी तरह बरामद नहीं किया जा सका और अगर यह मान भी लिया जाए कि यह वाहन वही था, तो भी घटना से दो साल पहले तक प्रज्ञा के पास वाहन का कब्जा नहीं था।

अदालत ने कहा, “आरोप-पत्रों और गवाही से यह स्पष्ट रूप से पता चलता है कि संन्यास लेने के बाद ए-1 के पास यह वाहन नहीं था। यह वाहन केवल एए-1 (रामजी कलसांगरा) के कब्जे में था। ATS और NIA ने खुद दावा किया कि वाहन शुरू से ही रामजी कलसांगरा के कब्जे में था।”

इसके अलावा, कोर्ट ने यह भी कहा कि मोटरसाइकल पर बम बाँधे जाने का दावा केवल ‘अनुमान’ था और वाहन को हुए नुकसान के आधार पर संभावना है कि बम मोटरसाइकिल पर बाँधे जाने के बजाय उसके बाहर रखा या लटकाया गया था।

अदालत ने कहा कि NIA ने पूरक आरोपपत्र में ठाकुर को दोषमुक्त कर दिया था और निष्कर्ष निकाला था कि उनके खिलाफ कोई मामला नहीं बनता। प्रज्ञा पर इंदौर और उज्जैन में धमाके के षड्यंत्र से जुड़ी कथित बैठकों में शामिल होने का भी आरोप था, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया।

यानी कोर्ट ने साफ किया कि साध्वी प्रज्ञा को लेकर जो कथित सबूत इकट्ठा किए गए थे, उनमें कोई दम नहीं था, खुद NIA भी ATS के सबूतों को नहीं मान सकी था। ऐसे में ये सवाल उठता है कि क्या ATS जल्दबाजी में जाँच कर रही थी या उस पर कोई राजनीतिक दबाव था, जिसके चलते ऐसे फैसले लिए गए।

कर्नल पुरोहित के घर नहीं मिला RDX, फिर भी बनाए गए आरोपित

महाराष्ट्र के पुणे में जन्मे पुरोहित के पिता बैंक ऑफिसर थे और उन्हें 1994 में मराठा लाइट इन्फेंट्री में जगह मिली थी। बाद में उन्हें मिलिट्री इंटेलीजेंस में भेजा गया था। मालेगाँव धमाके के बाद नवंबर 2008 में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था।

कर्नल पुरोहित पर मालेगाँव विस्फोट के लिए RDX की खरीद और भंडारण का आरोप था। साथ ही उन पर पचमढ़ी, उज्जैन, इंदौर और नासिक फार्म हाउस जैसे स्थानों पर हुईं षड्यंत्रकारी बैठकों में भाग लेने का भी आरोप था।

पुरोहित पर आरोप लगाया गया था कि वह अपनी पोस्टिंग पूरी करने के बाद कश्मीर से लगभग 60 किलोग्राम RDX अपने साथ लाए और उसे अपने घर में रखा हुआ था। आरोप था कि इसी RDX में से कुछ का इस्तेमाल बम विस्फोट के लिए हुआ था।

साध्वी प्रज्ञा और अन्य आरोपियों की तरह कर्नल पुरोहित को भी जेल में खूब टॉर्चर सहना पड़ा, उन पर जुर्म कबूल करने के लिए दबाव बनाया गया। उन्होंने बताया था कि मारपीट के दौरान उनका घुटना तक तोड़ दिया गया था और अवैध तरीके से उनसे पूछताछ की गई।

कोर्ट ने कर्नल पुरोहित पर लगे आरोपों पर क्या कहा?

जब कर्नल पुरोहित पर लगे आरोपों को साबित करने की बारी आई तो कोर्ट में एजेंसियाँ उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं साबित कर पाईं। पुरोहित पर आरोप लगाया गया कि वे कश्मीर से RDX चुराकर लाए हैं लेकिन कोर्ट में यह तक साबित नहीं हो पाया कि वे कश्मीर में तैनात भी थे।

कोर्ट ने कहा, “अभियोजन पक्ष के अनुसार, ए-9 (कर्नल पुरोहित) ने कश्मीर से RDX लाकर अपने घर में रखा था और सह-अभियुक्तों की मदद से ए-11 (सुधाकर चतुर्वेदी) के घर में IED तैयार किया था। आरडीएक्स से लैस कथित मोटरसाइकिल के स्रोत, परिवहन, भंडारण, फिटिंग, रेकी और पार्किंग के बारे में केवल आरोपों के अलावा कोई सबूत नहीं है।”

रिपोर्ट्स के मुताबिक, कर्नल पुरोहित के घर के तलाशी के दौरान पहली बार 12 नवंबर 2008 को महाराष्ट्र ATS को केवल दो CD मिलीं। वहीं, 26 नवंबर 2008 को दूसरी बार तलाशी के दौरान पुणे की फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) की टीम को भी जाँच के लिए बुलाया गया था जिसने वहाँ से सैंपल लेकर उनकी लैब में जाँच की।

कोर्ट के आदेश के मुताबिक, “कर्नल पुरोहित के घर से मिलने सैंपल को लेकर रासायनिक विश्लेषक ने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की है और RDX की संभावना खारिज की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ‘जाँच में कोई विस्फोटक या विस्फोटक अवशेष नहीं मिले। डेटोनेटर, डेटोनेटर के लिए प्रयुक्त तार जैसे कोई संदिग्ध उपकरण नहीं मिले। IED बनाने में प्रयुक्त घड़ियाँ आदि भी नहीं मिलीं’।”

कोर्ट ने कहा, “RDX के परिवहन के लिए कई जाँच और प्रतिबंध हैं। किसी ने गवाही नहीं दी है कि उन्होंने कर्नल पुरोहित को कश्मीर में तैनाती के दौरान देखा था या उन्होंने RDX खरीदा था या वह RDX लेकर आए। साक्ष्य के अभाव में, मैं यह मानने को तैयार नहीं हूँ कि कर्नल पुरोहित कश्मीर से कोई आरडीएक्स लाए।” इसके अलावा पुरोहित द्वारा षड्यंत्रकारी बैठकों में भाग लेने के आरोप भी साबित नहीं हुए।

कुल मिलाकर देखा जाए तो जिन दो शुरुआती सबूतों के आधार पर साध्वी प्रज्ञा और कर्नल पुरोहित को गिरफ्तार किया गया। उन्हें जुर्म कबूल करने के लिए प्रताड़ित किया गया और वर्षों तक जेल में रखा गया वो दोनों ही कोर्ट में साबित नहीं हो पाए। दोनों ने जेल में लंबा समय बिताया है और मानवाधिकारों की दुहाई देने वाले संगठन और लोग इस पर खामोश हैं।

इन दोनों की गिरफ्तारी कोई राजनीतिक प्रतिशोध थी या ये दोनों उस बड़े खेल का मोहरा थे जिसमें इस देश की बहुसंख्यक हिंदू आबादी को आतंकवादी साबित करने की साजिश रची जा रही था। यह अगर भविष्य में कोई जाँच होगी तो शायद सामने आ पाए।

MD, इंस्टाग्राम, लूडो… ड्रग्स से लेकर ऑनलाइन गेमिंग तक, लव जिहादी खोज रहे नए-नए टूल्स: केबिन कैफे को इस्लामी कट्टरपंथियो में बनाया रेप का अड्डा

लव जिहाद और इस्लामी धर्मांतरण की खबरें अब मीडिया में रोज की हो गई हैं। एक समय था जब दक्षिणपंथियों को इन समस्याओं के बारे मे बताने के लिए आलोचना सहनी पड़ती थी, मगर अब आए दिन सामने आ रही पीड़िताएँ और उनकी कहानियाँ इस बात की गवाह हैं कि ये कोई आभासी शब्द नहीं हैं।

समय के साथ इसे अंजाम देने के लिए इस्लामी कट्टरपंथी रोज नए पैंतरे खोज रहे हैं। हर माध्यम का इस्तेमाल करके हिंदू लड़कियों को इस्लाम कबूल कराने के प्रयास हो रहे हैं। पिछले दिनों मीडिया में आई कुछ रिपोर्ट्स इस बात के प्रमाण हैं जिनसे साबित होता है कि अब लव जिहाद के लिए या धर्मांतरण से पहले ब्रेनवाश करने के लिए, सिर्फ पुरानी चालबाजी ही नहीं, बल्कि नई-नई तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है।

आज इस लेख में हम आपके सामने उस हर तरीके पर चर्चा करेंगे जिनके जरिए इस्लामी कट्टरपंथी अपने मकसद की ओर धड़ल्ले से आगे बढ़ कर रहे हैं। ये लेख निराधार नहीं, बल्कि उन्हीं घटनाओं पर आधारित है जिन्हें मीडिया रिपोर्ट कर चुका है और कभी न कभी अलग-अलग जगह और दिन आप भी उन खबरों से होकर गुजरे हैं, लेकिन उन्हें कभी जोड़कर आगामी परिणाम सोचने का प्रयास नहीं किया।

ड्रग की लत और धर्मांतरण रिजल्ट

हालिया खबरों से शुरू करें तो हिंदुओं के लिए चिंताजनक बात ये है कि ये जिहादी हिंदू बच्चियों को बर्बाद करके उन्हें धर्मांतरण की राह पर धकेलने के लिए उन्हें ड्रग्स की लत लगावा रहे हैं। भोपाल, बिजनौर, इंदौर, नैनीताल से आए मामले इसके सबूत हैं।

  • सबसे पहले बात मध्यप्रदेश के भोपाल वाले मामले से करते हैं। इस केस का खुलासा पिछले महीने तब हुआ जब ड्रग गैंग चलाने वाले यासीन मछली और शाहवर मछली की गिरफ्तारी हुई। छानबीन में पता चला कि इनका मकसद सिर्फ ड्रग्स की तस्करी करना नहीं था बल्कि इनके निशाने पर हिंदू लड़कियाँ थीं। ये लोग ये लोग हिंदू युवतियों को एमडी (MD) ड्रग देकर शारीरिक शोषण करते थे और उनसे ड्रग भी बिकवाते थे। इनका मकसद लड़कियों को बर्बाद करते हुए धर्मांतरण करवाना था ताकि उनके पास और कोई विकल्प न बचे।
  • भोपाल-इंंदौर से ऐसी ही एक मुस्लिम गैंग का खुलासा हुआ था। गैंग का मास्टरमाइंड फरहान था। इस गैंग ने निजी कॉलेज में पढ़ने वाली हिंदू लड़कियों को निशाने पर लिया हुआ था। पीड़िताएँ इस मामले में लंबे समय तक चुप थीं, लेकिन बाद में जब ये केस खुला तो एक-एक करके कई लड़कियाँ सामने आईं, जिन्होंने बताया कि कैसे उन्हें नशा देकर उनसे बलात्कार होता था और इसके बाद उनपर धर्मांतरण का दबाव बनाया जाता था।
  • इंदौर के मूसाखेड़ी में भी जीशान खान ने ‘अभिषेक ठाकुर’ बनकर हिंदू युवती को फँसाया हुआ था। उसने लड़की को अपने जाल में उलझाए रखने के लिए उसको ड्रग्स की लत लगाई, फिर उसका यौन शोषण किया और उसे ब्लैकमेल करके उसपर धर्मांतरण का दबाव बनाने लगा।
  • इसी तरह का केस नैनीताल से भी जुलाई को सामने आया था… यहाँ 11 वीं क्लास की हिंदू युवती को 30 साल के मुस्लिम युवक ने प्रेम जाल में फँसा रखा था। लड़की का परिवार इतना बेबस था कि उन्हें मदद के लिए हिंदू संगठनों का सहारा लेना पड़ा। परिवार ने गिड़गिड़ा कर बताया कि उनकी बेटी को नशा दिया जाता है, उसे लत लगवा दी गई है। घरवाले इसलिए मजबूर हो गए हैं क्योंकि बेटी परिवार के विरोध पर उतर आई है।
  • एक अन्य मामला इंदौर से… यहाँ सुल्तान रोशन नागोरी ने कोचिंग सेंटर में जाने वाली हिंदू युवतियों को टारगेट पर ले रखा था। सारी पोल तब खुली जब एक ब्राह्मण लड़की शिकायत लेकर सामने आई। युवती ने बताया कि सुल्तान ने उसके साथ शारीरिक शोषण तो किया ही था। साथ में उसे अश्लील फोटो-वीडियो वायरल की धमकी देकर धर्म परिवर्तन का दबाव भी बना रहा था।
    पीड़िता का कहना था कि सुल्तान उसके ऊपर झाड़-फूँक भी कराता था और उसे नशे भी देता था। इस मामले में पीड़िता ने कॉल सेंटर्स में एक्टिव धर्मांतरण सेल का भी खुलासा किया था। उसका दावा था कि इस सेल में हिंदू लड़कियों को फँसाने के लिए मुस्लिम लड़कों को रखा जाता था। उनका ब्रेनवॉश ये कहकर होता था- अल्लाह ने तुम्हें हमारे लिए बनाया है। बाद में उन लड़कियों को नशे का आदी बनाया जाता था और उनका शारीरिक शोषण होता था।
  • कर्नाटक के मंगलुरु से भी 2024 में एक हिंदू युवती के गायब होने का मामला सामने आया था। जाँच हुई तो पता चला कि पुत्तूर के ड्रग तस्कर शाहरुख ने उसे अपने जाल में फँसा रखा था और वही उससे मिलने पेइंग गेस्ट हाउस में भी आता-जाता था।

ऊपर दी गई ये खबरें चंद उदाहरण हैं कि कैसे हिंदू लड़कियों को ड्रग की लत लगाकर धर्मांतरण की ओर धकेला जा रहा है। इस दरमियाँ उनके साथ ऐसे कुकर्म होते हैं, उनकी तस्वीरें-वीडियो निकाली जाती हैं कि वो बाद में चाहकर भी पीछे नहीं हट पातीं और इस दलदल में धँसती जाती हैं। कुछ को नशे का आदी बनाकर इतना ब्रेनॉश कर दिया जाता है कि वो इस्लाम के अलावा किसी और बात को सत्य ही नहीं मानती।

हिरोइन तक फँसी ड्रग और इस्लाम के चंगुल में

हैरानी की बात ये है कि ड्रग और धर्मांतरण के चंगुल में केवल सामान्य हिंदू लड़कियाँ शिकार नहीं बनती बल्कि बड़ी हस्तियाँ भी इसमें फँसती हैं। साल 2020 में एक कन्नड़ अभिनेत्री के ड्रग केस में जेल में बंद होने की खबर आई थी। बाद में खुलासा हुआ कि उसे 10 साल से इस्लाम के बारे में पढ़ाया जा रहा था। इस केस के बाद सोशल मीडिया पर खूब माँग उठी थी कि अब लव जिहाद के साथ ड्रग एंगल की जाँच भी होनी चाहिए कि कहीं लड़कियों को फँसाने के लिए नशे का आदी बनाकर तो ब्रेनवॉश नहीं किया जाता!

लव के साथ नार्कोटिक जिहाद का भी शिकार हो रहीं हिंदू लड़कियाँ- जब बिशप ने दी चेतावनी

एक बार इस मामले पर केरल के कोट्टयम में सायरो मालाबार चर्च पाला धर्मप्रांत के ‘मार जोसेफ कल्लारंगट’ नामक एक बिशप ने चेतावनी भी दी थी। उन्होंने केरल में कैथोलिक और हिंदू लड़कियों के धर्मांतरण पर चिंता जताते हुए कहा था कि लड़कियाँ लव के साथ नार्कोटिक जिहाद की शिकार हो रही हैं। उन्होंने कहा था कि केरल में एक खास ग्रुप है जो विभिन्न इलाकों में कैथोलिक और हिंदू युवाओं को ड्रग व अन्य नशों का आदी बना रहे हैं। ऐसे लोगों का मकसद दूसरे धर्म को भ्रष्ट करने का है। लव जिहाद और नार्कोटिक्स जिहाद दो चीजें हैं जिन पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

एक तरफ हिंदू परिवार अपने बच्चों के नशे करने की आदत के लिए आधुनिक होते जमाने को कोसने में व्यस्त हैं और दूसरी तरफ इस्लामी कट्टरपंथी इसी ढिलाई का फायदा उठाते हुए अपने गजवा-ए-हिंद के मकसद की ओर आगे बढ़ रहे हैं।

लव जिहाद से शुरुआत, नए माध्यम हथियार

याद दिला दें आज से दशक भर पहले जब लव जिहाद शब्द पर दक्षिणपंथियों ने आवाज उठानी शुरू की थी उस समय वामपंथी नैरैटिव चलाते थे कि कट्टर हिंदुओं द्वारा दी गई शब्दावली है जो सिर्फ इस्लामोफोबिया फैलाना चाहते हैं। इसका वास्तविकता से लेना-देना नहीं है। लेकिन आज अगर आप अखबार उठाकर देख लें तो आपको समझ आएगा कि एक भी दिन ऐसा नहीं होता जब किसी हिंदू पीड़िता की आपबीती मीडिया में खबर न बने। कई बार अपने साथ हुए अत्याचार को बताने के लिए लड़कियाँ जिंदा रहती हैं और कई बार सिर्फ उनकी लाश या फिर उसके टुकड़े मिलते हैं।

  • साल 2023 में उजागर हुआ दिल्ली का श्रद्धा वॉकर हत्याकांड याद है न आपको। आफताब के जाल में फँसी श्रद्धा ने अपने माता-पिता तक को छोड़ दिया था और उसके साथ लिव-इन में रहने लगी थी। हुआ क्या… 35 टुकड़े, जिन्हें दिल्ली के अलग-अलग जंगली इलाकों में फेंका गया ताकि जानवर उन्हें नोच लें। छानबीन में ये भी सामने आया था कि आफताब ने श्रद्धा को मारकर उसे काटा था, फिर फ्रिज में रखकर उन्हें धीरे-धीरे अलग-अलग जगह फेंकता था।
  • इसके बाद मेरठ का प्रिया-कशिश हत्याकांड। साल 2020 में प्रिया और उसकी बेटी कशिश की हत्या की गई थी। हत्या करने वाला कोई और नहीं बल्कि वो शमशाद था जो प्रिया से ‘अमित गुर्जर’ बनकर मिला था। धीरे-धीरे शमशाद की पोल खुली तो प्रिया ने सवाल किए, लड़ाइयाँ बढ़ीं और अंत क्या हुआ… प्रिया और कशिश का कत्ल। शमशाद ने प्रिया को मारने के बाद उसे उसी के घर के बेडरूम में गड्ढा खोदकर गाड़ा था और पूरे तीन महीने बाद जब ये गुत्थी सुलझी तो वहाँ सिर्फ दोनों माँ-बेटी का कंकाल था।
  • गाजियाबाद की पिंकी गुप्ता का मामला याद करें तो पता चलेगा कि लव जिहाद का शिकार एक हिंदू युवती कैसे एक लव जिहादी के शाकिब के चंगुल में फँसी। शाकिब ने उसे मिलते समय उसे अपना नाम बन्नी बताया और बाद में पता चला कि एक तो वो शाकिब है और दूसरा वो शादीशुदा है। पिंकी को उसने उस स्थिति में लाकर खड़ा कर दिया कि उसने परेशान होकर खुद ही फाँसी लगा ली। ये सब उसके साथ तब हुआ जब वो शाकिब के प्रेम में पड़कर इस्लाम कबूलने को भी तैयार थी।

लव जिहाद के ये चर्चित मामले न पहले हैं और न ही आखिरी। अगर साजिश नहीं होती तो एक के बाद एक मामले सामने नहीं आते। आपको जानकार हैरानी होगी कि साल 2023 में ऑपइंडिया ने लव जिहाद से जुड़ी 153 खबरों को रिपोर्ट किया था और 2022 में भी ये लिस्ट 152+ थी। साल बदले हैं, लेकिन लव जिहाद और धर्मांतरण की खबरों ने आना अब भी बंद नहीं किया है। खबरों का विश्लेषण अगर करेंगे तो पता चलेगा कि हर बार हिंदू युवतियों को फँसाने का पैटर्न एक सा होता है।

पहले के लव जिहाद और अब के लव जिहाद में आ रहा क्या अंतर

मालूम हो कि इस्लामी कट्टरपंथियों के लिए पहले हिंदू लड़कियों को फँसाने के लिए सीमित माध्यम थे। इनके निशाने पर घर के बगल में रहने वाली लड़कियाँ, स्कूल में पढ़ने वाली छात्राएँ, कॉलेज या कोचिंग जाने वाली लड़कियाँ होती थीं। हालाँकि अब जैसे-जैसे सोशल मीडिया का विस्तार हुआ है, लव जिहादियों ने अपना दायरा बढ़ा लिया है। इंस्टा और फेसबुक के माध्यम से ये अलग-अलग राज्यों की हिंदू लड़कियों को फँसा रहे हैं क्योंकि सोशल मीडिया ने तो इनके इस काम को और सरल बना दिया है। सोशल मीडिया पर पहले ये लड़कियों के डीएम तक जाते हैं, उनसे मीठी बातें करके उन्हें बहलाते हैं, उन्हें प्रेम जाल में फँसाते हैं और फिर ब्रेनवॉश करके धर्मांतरण की कगार पर ले आते हैं

इंस्टाग्राम-फेकबुक और लव जिहाद

आप आज अखबारों या समाचार चैनलों में जब लव जिहाद की खबरें पढ़ते होंगे तो उनमें अधिकांश मामलों में एक एंगल कॉमन मिलता होगा- इंस्टाग्राम-फेसबुक से दोस्ती का। ड्रग्स की लत की तरह इस्लामी कट्टरपंथी आज युवाओं को लगी सोशल मीडिया की लत का भी फायदा उठा रहे हैं। कैसे? आइए समझते हैं।

दरअसल, हिंदू लड़कियों को फँसाने के लिए इंस्टाग्राम और फेसबुक का इसलिए भी इस्तेमाल किया जाता है क्योंकि वहाँ पहचान, प्रमाण पत्र के साथ उजागर नहीं होती। एक आईडी बनाई, एडिट डीपी लगाई, फर्जी नाम लिखा और बन गई नई पहचान। आप इन प्लेटफॉर्म पर जो नाम लिख देते हैं, दुनिया उसी को सच मान लेती है। और, इस्लामी कट्टरपंथी इसी का फायदा उठाते हैं।

पहले सोशल मीडिया पर ऐसी तस्वीरें डालते हैं कि हिंदू लड़कियों को गुमराह करने में आसानी हो। अपने आपको सेकुलर दिखाते हैं। हाथ में कलावा, प्रोफाइल में मंदिर की तस्वीर होती है। इसके बाद हिंदू लड़कियों को मैसेज करके उनसे करीबी बढ़ाई जाती है, उनसे मुलाकात के लिए बोला जाता है, उन्हें प्रेम जाल में फँसाया जाता है, होटल या कमरे में बुलाकर उनके साथ शारीरिक संबंध बनाए जाते हैं, उनकी फोटो-वीडियो ली जाती है और फिर शुरू होता है ब्लैकमेलिंग का असली काम।

इतना सब होने के बाद लड़की के पास सिर्फ दो रास्ते बचते हैं या तो बदनाम हो जाए या फिर धर्मांतरण कर ले।

सोशल मीडिया की यारी दोस्ती कितनी भयावह

  • साल 2023 में दिल्ली के शाहबाद डेयरी से एक बच्ची की निर्मम हत्या का मामला प्रकाश में आया था। आरोपित उसी का दोस्त मोहम्मद साहिल था, जिसने बीच गली में पत्थर से कूचकर लड़की को मार डाला था। बाद में साहिल गिरफ्तार हुआ। जब छानबीन बढ़ी तो पता चला दोनों की बातचीत इंस्टाग्राम पर हुई थी और साहिल उसके बाद से लड़की के पीछे था।
  • साल 2025 का मामला देखिए। मेरठ के गौतमबुद्धनगर में मुबस्सिर ने सचिन बनकर हिंदू युवती से इंस्टाग्राम पर दोस्ती की थी। उसके बाद उससे जाकर शादी भी रचाई। जब लड़की प्रेगनेंट हो गई तो वो उसपर धर्मांतरण का दबाव बनाने लगा। बाद में सामने आया कि कट्टरपंथी मुबस्सिर ने ऐसा पहली लड़की के साथ नहीं किया था वो कई लड़कियों को इस तरह फँसाकर धर्मांतरण करवा चुका था। 
  • यूपी के मैनपुरी से भी ऐसा केस सामने आया था। एक दिन एक 17 साल की लड़की अपने घर से अचानक गायब हो गई। घरवालों ने परेशान होकर पुलिस में शिकायत दी। छानबीन हुई तो पता चला कि वो इंस्टाग्राम पर एक मुस्लिम लड़के से बात करती थी। लड़के का नाम अब्दुल्ला था। उसी ने उसे अगवा किया है। पुलिस जहा इसके बाद अब्दुल्ला और लड़की की तलाश में जुटी। वहीं परिवार केवल ये सोचता रहा कि उनकी बेटी के साथ ये सब हुआ क्या।
  • इनके अलावा ऊपर जो प्रिया-शमशाद के मामले का जिक्र किया था उसमें भी प्रिया को फेसबुक के जरिए ‘अमित गुर्जर’ नाम की आईडी से फँसाया गया था। ये दिखाकर कि गुर्जरों के साथ रहने वाला शमशाद गुर्जर ही है। हालाँकि सच्चाई खुली तो पैरों तले जमीन खिसक गई, लेकिन प्रिया करती भी क्या उस समय तक वो शमशाद से शादी कर चुकी थी और उसके पास लौटकर परिवार के पास जाने का विकल्प भी नहीं था।

आप इंस्टाग्राम और फेसबुक के जरिए ठगी गई हिंदू लड़कियों की स्थिति के बारे में पढ़ेंगे तो आपको उनपर दया और गुस्सा दोनों आएगा। समझ नहीं पाएँगे कि आखिर कैसे जिहादियों के ट्रैप में आपकी बच्चियाँ फँस रही हैं, लेकिन जिस समय आपके मन में ये बातें चल रही होंगी उसी वक्त कोई ‘अब्दुल्लाह’ अमित बनकर आपके आसपास रहने वाली किसी और हिंदू लड़की को निशाना बना रहा होगा।

हमारे लिए ये समझना भले ही मुश्किल हो कि आखिर इतने मामले खबरों में आने के बाद कैसे जिहादियों के चंगुल में लड़कियाँ फँस जाती है, लेकिन आप अगर गौर से देखेंगे तो समझ पाएँगे कि इस काम के लिए पूरा माहौल बनाया जाता है। ऐसा माहौल जिसके भीतर की साजिश को समझना एक 15-16 साल की लड़की के लिए मुश्किल होता है। उन्हें सिर्फ वो सुहानी तस्वीरें ही दिखती हैं जो उस लड़के ने अपने प्रोफाइल पर डाली हों, वो मीठी बातें ही अच्छी लगती हैं जो उसने डीएम में की हो। धीरे-धीरे उसे पता नहीं चलता कि हिंदू घर में पली-बढ़ी लड़की को बुर्का-हिजाब क्यों अच्छा लगने लगता है और मंदिर-भगवान से जुड़ी बातें उसे क्यों खटकती जाती हैं। कुछ दिन बाद उसके पोस्ट में एक सेकुलर झुकाव दिखाई देता है और एक समय आता है जब वो स्पष्ट तौर पर सिर्फ इस्लाम की बातों को प्रचारित-प्रसारित करना ही अपना उद्देश्य मान लेती है।

ऑनलाइन गेमिंग के बीच इस्लाम कबूलों की धुन

इस्लामी कट्टरपंथी इस बात को अच्छे से जानते हैं कि आज मॉर्डन होने की रेस में हिंदू परिवार बच्चों को धर्म से जोड़ने में उनके परिवारों से पीछे हैं। वो इसी लूपहोल का फायदा उठाकर अपने मजहब की बातें लड़कियों को पढ़ाते-समझाते हैं और अपने मकसद की ओर आगे बढ़ते हैं। हिंदुओं के लिए चिंताजनक बात ये है कि उनकी बेटियों को फँसाने के लिए ये कट्टरपंथी हर माध्यम पर अपनी पैठ बनाकर बैठे हैं। आप सोचते हैं कि बच्चे सोशल मीडिया नहीं चला रहे, फोन में सिर्फ गेम खेल रहे हैं और इससे वो जिहादी मानसिकता से बच्चे बच जाएँगे… तो आपकी ये गलतफहमी है।

आपको ये बता दें कि अब ‘ऑनलाइन गेमिंग’ भी जिहादियों के लिए धर्मांतरण के लिए एक मीडियम बन गया है। आज के युवाओं में एक ओर जहाँ ऑनलाइन गेमिंग (लूडो, पबजी) का क्रेज बढ़ रहा है और इसका असर उनके करियर, शिक्षा पर पड़ रहा है तो वहीं दूसरी तरफ इस्लामी कट्टरपंथियों के लिए लव जिहाद और धर्मांतरण करने का एक हाईटेक माध्यम है। सोशल मीडिया की तरह यहाँ भी कट्टरपंथी नाम बदलकर हिंदू लड़कियों के साथ संपर्क में आते हैं। खेल खेलते-खेलते उनसे दोस्ती करते हैं और फिर शुरू होता है बातों-बातों में ब्रेनवॉश करने का सिलसिला। अचंभित करने वाली बात ये है इस हद तक हिंदू युवाओं को फाँसा जाता है कि बिन सामने वाले को जाने-पहचाने ही पीड़ित धर्म बदलने की बात को मान जाता है।

ऑनलाइन गेमिंग के जरिए किए जा रहे खेल को भी उदाहरण के साथ समझते हैं।

पिछले दिनों धर्मांतरण गिरोहों को पकड़ने के लिए ऑपरेशन कालनेमि शुरू हुआ था। इस ऑपरेशन के तहत पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ किया जो हाईटेकनॉलजी का इस्तेमाल करके युवाओं का ब्रेनवॉश करता था, फिर उन्हें धर्मांतरित कराता था। छानबीन में पता चला कि इस गैंग का कनेक्शन सिर्फ पाकिस्तान से नहीं बल्कि दुबई से भी है। विदेश में बैठे इस्लामी कट्टरपंथी हिंदू लड़कियों को रिझाने के लिए काम पर लगाए गए हैं जो उन्हें बहला-फुसलाकर मुस्लिम बनने को कहते हैं, उन्हें इस्लाम कबूल करने के फायदे गिनाते हैं। 

मामला तब खुला था जब दो लड़कियों ने आकर इस संबंध में शिकायत दी और इसमें जो उन्होंने बताया उससे पता चला कि इस्लामी गैंग पहले ऑनलाइन गेम्स के जरिए लड़कियों को फँसाते थे और उसके बाद उन्हें पाकिस्तान से सीधा कुरान की तालीम दिलवाई जाती थी। बाद में दिल्ली बुलाकर उनका आधार कार्ड बदला जाता था और फिर उनका निकाह कर उन्हें मुस्लिम समाज से जोड़ा जाता था।

पुलिस ने बताया कि जिस लड़की ने इस संबंध में शिकायत दी उसका धर्मांतरण करवाकर नाम सुमैया किया जा चुका था। उसका कनेक्शन पाकिस्तान और मिस्र के लड़कों से था। वो लड़के ही इसे धर्मांतरण के लिए बार-बार बोलते थे और तरह-तरह के लालच देते थे। इन लड़कों ने समुैया के अकॉउंट में भी बहुत सारे पैसे डलवाए थे। उसे लगातार अरबी का ज्ञान दिया जा रहा था। पुलिस का कहना था कि एक लड़की के ब्रेनवॉश और उसके धर्मांतरण के लिए पूरी एक टीम काम में लगी हुई थी।

देहरादून पुलिस ने यहाँ एक महत्वपूर्ण खुलासा और किया कि ये गैंग लड़कियों को फँसाने के लिए रिवर्ट मुस्लिमों का इस्तेमाल करती थी। इसका अर्थ होता है कि जो लोग हिंदू से मुस्लिम बनाए गए हों और वो ब्रेनवॉश में सहायता करें। सुमैया के मामले में अब्दुल रहमान को आधार बनाया गया था। अब्दुल रहमान उसे बताता था कि कैसे मुसलमान बनने के बाद उसके जीवन में परिवर्तन आए।

लड़की इस जाल में फँसी और जब होश आया तो शिकायत लेकर पुलिस के पास पहुँची। लड़की ने देश के हिंदुओं से अनुरोध किया कि अपने बच्चों को धर्म से जुड़ी जानकारी दीजिए, उनसे जुड़े रहिए, उनकी अच्छी-बुरी आदतों पर नजर रखिए, माता-पिता अपने बच्चों से जितना क्लोज कनेक्शन रखें उतना बच्चों के लिए अच्छा है।

अगला मामला जबलपुर से है

मॉर्डन हिंदू परिवार बन रहे इस्लामी कट्टरपंथियों का शिकार

हिंदू आज ऐसी स्थिति में आ चुके हैं कि उनके सामने मॉर्डन होने और सेकुलर दिखने का एक सामाजिक दबाव ज्यादा है। शायद यही वजह है कि अपने बच्चों की एक्टिविटीज पर उनका ध्यान अब उतना नहीं रहा। नतीजा क्या है हम सब जानते हैं। ड्रग का लती बनाना हो, इंस्टाग्राम पर लड़कियों को फँसाना हो या ऑनलाइन गेमिंग के जरिए ब्रेनवॉश करना… इस्लामी कट्टरपंथी सब अच्छे से कर पा रहे हैं।

हालाँकि, ये उनकी गलतफहमी है कि उनके ये हथकंडे और ये नए पैटर्न कोई डिकोड नहीं कर पा रहा। हिंदू धीरे-धीरे जागरूक हो रहे हैं और हिंदू संगठन सक्रिय। जगह-जगह जिहादियों के कुकर्मों की पोल इन्हीं कारणों से खुल रही है। आपको होटलों के कमरों और पार्क की झाड़ियों तक में किसी ऐसे मामले के बारे में यदि पता चलता है तो शुरू में शायद आपको ये किसी की निजता पर हमला करने का प्रयास तक लगे, लेकिन आपको ये पता होना चाहिए कि हिंदू लड़कियों को सोशल मीडिया पर फँसाकर मिलने के नाम पर जिहादी ऐसी ही जगहों पर लाते हैं। जहाँ कभी ड्रग्स देकर लड़कियों के साथ सामूहिक दुष्कर्म होता है या कभी बहला-फुसलाकर उनके साथ संबध बनाकर उनकी वीडियो-फोटो बना ली जाती है।

कैफे-क्लब- लव जिहाद के मॉर्डन अड्डे

प्रेम का झाँसा देकर लड़कियों के धर्म से लेकर उनकी अस्मत को सब छीन लिया जाता है और ऐसा तब से और धड़ल्ले से होता दिख रहा है जब से इस्लामी कट्टरपंथियों को ये सब करने के लिए जगह उपलब्ध होने लगीं। इन जगहों में होटल-कैफे-क्लब जैसे स्थान आते हैं। यहाँ हिंदू लड़कियों को दोस्त बनाकर लाया जाता है, उन्हें नशा देकर फिर उनका यौन शोषण होता है।

मुरादाबाद से लेकर देहरादून तक में ऐसे कई कैफेज का खुलासा हो चुका है, जो धंधे की आड़ में लव जिहाद करवा रहे थे। हिंदू संगठनों को इनकी जानकारी हुई तो इनसे जुड़ी खबरें मीडिया में आईं और सामने आया कि कैसे मुस्लिम युवक हिंदू युवतियों को यहाँ लाते हैं और फिर उन्हें अलग से बैठकर गलत काम करने के लिए जगह उपलब्ध कराई जाती है। इस दौरान कुछ ऐसे भी कैफेज के बारे में भी पता चला जहाँ छोटे-छोटे केबिन बनाकर पर्दा लगा दिया जाता है। फिर उस स्पेस को 400-500 रुपए में आसानी से ऐसे लोगों को उपलब्ध करवाया जाता है

  • पिछले दिनों ऐसी घटना के लिए देहरादून के विकास मॉल में चल रहा ‘7th हेवन कैफे खूब बदनाम हुआ था। बताया गया था कि वहाँ हिंदू युवती के साथ लव जिहाद की कोशिश की जा रही थी। लड़की इतनी लाचार हो गई थी कि उसे बजरंग दल से इस मामले में मदद माँगनी पड़ी और बाद में ये मामला सामने आ पाया।
  • इसी तरह राजस्थान के भीलवाड़ा में मुस्लिम युवकों ने हिंदू लड़कियों को ब्लैकमेल और यौन शोषण के मामले में फँसाया था। घटना मार्च की है। पीड़िता का कहना था कि मार्च 2024 में वो अपनी सहेली के साथ कैफे गई थी। वहीं उसे कॉफी के नाम नशीला पदार्थ पिलाकर रेप किया गया, फिर आरोपितों ने यहाँ उसके अश्लील फोटो खींचे, वीडियो बनाए और बाद में उसे ब्लैकमेल किया गया। इसके बाद अन्य साथियों ने भी युवती का शोषण किया था। इस केस में कुल 8 गिरफ्तारियाँ हुई थीं- इनमें अशरफ अली, सनवीर मोहम्मद, शाहरुख खान, सोयबनूर, फैजान, सोहेब, खालिद और आमिर का नाम था।
  • इसी प्रकार ‘कैफे जिहाद’ से जुड़ा मामला ब्यावर से भी सामने आया था। फरवरी 2025 में सामने आई इस घटना ने अजमेर कांड की याद दिला दी थी। इस मामले में मुस्लिम गैंग कैफे में ले जाकर हिंदू लड़कियों के साथ गलत काम करती थी। उनका यौन उत्पीड़न किया जाता था। फिर उन्हें लालच देकर, बरगलाकर, धर्मांतरित करने का प्रयास किया जाता था।
  • फिर, भोपाल का कैफे‑क्लब ‘क्लब‑90’ भी लव जिहादों के कारण सुर्खियों में। आरोप लगा था कि यहीं हिंदू छात्राओं से बलात्कार कर उनका वीडियो बनाया गया और फिर उन्हें परेशान किया गया। जब प्रशासन के पास ये मामला खुला तो प्रशासन ने एक्शन में आया। छानबीन हुई तो पता चला कैफे सरकारी जमीन पर गैर कानूनी तरीके चल रहा था। प्रशासन ने फौरन उसकी लीज रद्द करके वहाँ बुलडोजर चलाया।

अजीबोगरीब बात ये है कि कैफे-होटल और क्लबों में होती ऐसी गतिविधियों के बारे में तमाम खबरें आने के बावजूद इनपर एक्शन तब लिया जाता है जब कोई हिंदू संगठन आवाज उठाए। उससे पहले जिस समय ये कैफे खुलते हैं, इनका विज्ञापन शुरू होता है और इसमें दी जाने वाली सुविधाओं के विजुअल्स दिखाए जाते हैं, तब कोई आवाज नहीं उठाता। बड़े-बड़े इन्फ्लुएंसर यहाँ लोगों को आने के लिए रील बनाते हैं। ऐसे कमरों को खुलेआम दिखाया जाता है जहाँ सेक्स टॉय आदि रखे हों। प्राइवेट स्पेस के लिए कैबिन बने हों।

ब्रिटेन में ग्रूमिंग गैंग का पैटर्न और भारत में इस्लामी कट्टरपंथियों में क्या समानता है

गौरतलब है कि भारत में हिंदू लड़कियों को जिस तरह से फँसाने के लिए अलग-अलग पैटर्न अपनाए जा रहे हैं और इ्न्हें देखकर सतर्क रहने की जो चेतावनी दी जा रही है वो बेकार की नहीं है। एक तरफ इस्लामी कट्टरपंथी है जिनका 2047 तक उद्देश्य है कि भारत को इस्लामी मुल्क बनाएँ और दूसरी तरफ हिंदू हैं जिन्हें आधुनिक होने में अंग्रेजों को भी पीछे छोड़ना है। वही अंग्रेज जो खुद इस कट्टर मानसिकता से अपनी बच्चियों को नहीं बचा पाए।

जी हाँ! 1980 से लेकर 2011 के बीच ब्रिटेन में ग्रूमिंग गैंग एक्टिव था। इस गैंग में अधिकांश सदस्य पाकिस्तानी मूल के थे जिनके लिए श्वेत लड़कियाँ सिर्फ यूज एंड थ्रो वाला सामान थीं। वो छोटी-छोटी मासूम लड़कियों को अपने जाल में फँसाते थे और फिर उनका ड्रग देकर उनसे रेप करते थे और दूसरों से भी रेप करवाते थे। इस गैंग का प्रभाव वहाँ इतना था कि अगर कोई पीड़ित शिकायत करने जाता था तो पुलिस उलटा उसे दोषी बताने में जुट जाती थी। न पीड़त परिजनों की सुनी जाती थी और न उस लड़की की जिसके साथ ग्रूमिंग गैंग ने अत्याचार पर अत्याचार किए हों। उन्हें सेक्स स्लेव बनकर जीने को मजबूर किया हो।

मीडिया में ही मौजूद पीड़िताओं के बयान को पढ़ेंगे तो आपकी रूह काँप जाएगी। पता चलेगा कि कैसे कट्टर मानसिकता वाले इन लोगों में ‘काफिर’ श्वेत युवतियों के लिए नफरत भरी थी। इन लड़कियों का ग्रूमिंग गैंग खुद तो रेप करती ही थी। साथ में दूसरों के आगे भी परोसती थी कि वो एक-एक कर बच्चियों को नोचें।

एमिली (बदला नाम) एक पीड़िता ने इस संबंध में मीडिया को बताया भी था। उसने खुलासा किया था कि कैसे एक उसे गैंग ने अपने चंगुल में तब फँसाया जब वो मात्र 14 साल की थी। एमिली ने खुलासा करते हुए बताया था कि ग्रूमिंग गैंग ने उसके साथ 1000 से अधिक बार रेप करवाया था। लड़के आते थे उसे गाली देते थे और दरिंदगी हद्द रोज पार होती थी। एमिली के मामले में और भारत में सामने आ रहे केसों में ज्यादा अंतर नहीं है। जितना आधुनिक हम दिखना चाह रहे हैं वहाँ लड़कियाँ एमिली वाली ही गलतियाँ कर रही हैं।

एमिली के केस में ग्रूमिंग गैंग ने उसे कबाब, शराब, फ्री सिगरेट और पार्टी के नाम पर अपने चंगुल में फँसाया था और भारत में लड़कियों को लक्जरी से भरी जिंदगी दिखाकर अपने वश में करने का काम हो रहा। एमिली को शराब-सिगरेट का लालच दिया गया था भारत में लड़कियों को MD जैसे ड्रग्स का लती बनाया जा रहा है। ब्रिटेन में रहकर वहाँ की मूल श्वेत लड़कियों को निशाना बनाया जा रहा था और हिंदुस्तान में रहकर हिंदू लड़कियाँ निशाने पर हैं। आपके भीतर का सेकुलरिज्म चाहे स्वीकार करे या न करे लेकर जगह-जगह से आने वाली घटनाएँ इस बात का सबूत हैं कि इस्लामी कट्टरपंथियों का मकसद हर जगह एक ही है। चाहे वो भारत हो या ब्रिटेन। उन्हें नफरत हर उस शख्स से है जो उनके मजहब के अंतर्गत नहीं आता।

ऑपरेशन सिंदूर से लेकर राफेल, एअर इंडिया क्रैश से तेल खरीद तक… भारत के खिलाफ प्रोपेगेंडा कर रहा Reuters: पाकिस्तान-चीन का बना भोंपू, जानें ब्रिटिश संस्थान के कारनामे

भारत ने आजादी के बाद से तेजी से तरक्की की है। वर्ष 2025 में वह विश्व की चौथी सबसे बड़ी इकॉनमी है। उसके पास विश्व में सबसे ताकतवर में से एक सेना है। भारत लोकतंत्र के मोर्चे पर भी सफल रहा है। यह सभी उपलब्धियाँ जहाँ भारतीयों को गर्व से भरती हैं तो वहीं विदेशी मीडिया को इससे चिढ़ होती है। विदेशी मीडिया संस्थान भारत को गरीब, कमजोर, पिछड़ा और अनपढ़ देखना चाहते हैं। उनकी रिपोर्टिंग में औपनिवेशिक झलक अब तक दिखती है। इस काम में एक ब्रिटिश संस्थान सबसे आगे है, नाम है रायटर्स (Reuters)।

रायटर्स ब्रिटिश संस्थान है और इसका मुख्यालय लन्दन में है। इसका फोकस अमूमन बिजनेस से जुड़े मामले रहते हैं। हालाँकि, यह अंतरराष्ट्रीय मामलों में खबर देने वाली वैश्विक एजेंसी भी है। रायटर्स भारत में लम्बे समय से काम करता आया है। लेकिन इसकी भारत के प्रति रिपोर्टिंग हमेशा ही ईर्ष्या से भरी रही है। रायटर्स ने ऑपरेशन सिंदूर से लेकर ऑपरेशन महादेव और यहाँ तक कि एअर इंडिया विमान हादसे मामले तक में झूठी या फिर भ्रामक रिपोर्टिंग की है और भारत विरोधी प्रोपेगेंडा चलाया है। यह सिलसिला लम्बे समय से चला आ रहा है।

ऑपरेशन सिंदूर बना चीन-पाकिस्तान का भोंपू

रायटर्स लगातार भारत विरोधी खबरें छापने में आगे रहा है। वह भारत का पक्ष तो अपनी खबरों में नहीं ही रखता, बल्कि पाकिस्तान और चीन जैसे देशों के हवा-हवाई दावों के आधार पर रिपोर्ट भी बना देता है। इसका एक बड़ा उदाहरण रायटर्स ने मई, 2025 में पाकिस्तान के खिलाफ हुए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पेश किया। 9 मई, 2025 को रायटर्स ने भारतीय लड़ाकू विमानों के ऑपरेशन सिंदूर के दौरान गिरने की एक खबर प्रकाशित की।

ऑपरेशन सिंदूर पर रायटर्स का पाकिस्तान समर्थक प्रोपेगेंडा

इस खबर में कहा गया कि पाकिस्तानी एयर फ़ोर्स में शामिल चीन के बनाए लड़ाकू विमानों ने भारत के 2 लड़ाकू विमान गिरा दिए। दावा किया गया कि चीन में निर्मित यह विमान भारतीय वायु सेना के खिलाफ काफी कारगर रहा। यह खबर पूरी तरह से कथित अमेरिकी सूत्रों पर लिखी गई और इसे लिखने वाले भी 2 पाकिस्तानी पत्रकार हैं जो अमेरिका और लन्दन में रहते हैं। इनके नाम सईद शाह और इदरीस अली हैं। इन्होंने यह तथ्यहीन कहानी तब बेची जब भारत ने कोई भी लड़ाकू विमान गिरने की बात स्पष्ट ही नहीं की थी।

भारत के किसी लड़ाकू विमान गिरने की पुष्टि ऑपरेशन सिंदूर के 2 महीने पूरा होने बाद भी नहीं हो पाई है। लम्बे-लम्बे दावे करने वाला पाकिस्तान भी इससे जुड़े सबूत पेश नहीं कर सका है। हालाँकि, रायटर्स के लिए यह सब तथ्य मायने नहीं रखते। रायटर्स ने इन सब तथ्यों को किनारे करते हुए पाकिस्तान के प्रवक्ता की तरह भारतीय लड़ाकू विमानों के गिरने की घोषणा कर दी। उसने चीन का पक्ष लेने को बिना किसी सबूत के चीनी लड़ाकू विमान सफल भी बता दिए। रायटर्स यह अब भी कर रहा है।

अब भी जारी राफेल पर प्रोपेगेंडा

रायटर्स का प्रोपेगेंडा राफेल पर अब भी जारी है। ऑपरेशन सिंदूर के लगभग तीन महीने पूरे होने के बाद भी रायटर्स पाकिस्तान की बोली बोल रही है। रायटर्स ने अब एक प्रोपेगेंडा लेख में दावा किया है कि भारतीय सेनाएँ इस बात का अंदाजा नहीं लगा पाईं कि पाकिस्तान के पास जो चीनी हथियार हैं वह ज्यादा दूरी तक मार कर सकते हैं। रायटर्स का कहना है कि इसी के चलते भारतीय एयर फ़ोर्स के विमान पाकिस्तानी मिसाइल का निशाना बने।

रायटर्स का दावा है कि चीन में बनी इस PL-15 मिसाइल ने लगभग 200 किलोमीटर दूर भारतीय विमान मार गिराए। रायटर्स ने अपने इस आर्टिकल में पाकिस्तानी वायु सेना प्रमुख को किसी युद्ध के हीरो की तरह पेश किया है। इसके अलावा इस लेख में पाकिस्तानियों के पक्ष का बोलबाला है जबकि ना भारतीय वायु सेना के किसी अधिकारी का जिक्र है और ना ही भारत का पक्ष रखा गया है। रायटर्स का यह लेख पाकिस्तान को विजेता दिखाने के साथ ही चीन के हथियारों के लिए एड सरीखा लगता है।

यह कोई पहली बार नहीं है जब किसी पश्चिमी देश के मीडिया आउटलेट ने चीन के हथियार दुकानदार की तरह का रवैया अपनाया हो। इससे पहले ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी रायटर्स, ब्लूमबर्ग, FRANCE24 समेत बाकी पश्चिमी देशों के मीडिया आउटलेट्स ने चीन के हथियारों के लिए प्रशस्ति गान गाए थे। हालाँकि, सच्चाई यह है कि इस ऑपरेशन के दौरान चीन की बनाई PL-15 मिसाइल और उसके ड्रोन ताश के पत्तों की तरह जमीन में आकर गिरे। भारत को इनका मलबा भी बरामद हुआ है।

एअर इंडिया हादसे पर बोइंग के बचाव में उतरा

रायटर्स सिर्फ पाकिस्तानी या अमेरिकी हितों के लिए काम करता हो, ऐसा नहीं है। वह अपने अमेरिकी आकाओं के लिए भी वफादार है। 12 जून, 2025 को अहमदाबाद में हुए विमान हादसे में यही बात सामने आई। एअर इंडिया हादसे की प्रारम्भिक जाँच रिपोर्ट आने से पहले ही रायटर्स समेत बाकी विदेशी मीडिया ने पायलट को दोषी ठहराना चालू कर दिया था। रायटर्स ने अपनी रिपोर्ट्स के माध्यम से यह दिखाने का प्रयास किया जैसे पायलट की गलती की वजह से ही विमान क्रैश हुआ है।

इन्हीं रिपोर्ट्स में बोइंग को लेकर एक शब्द नहीं कहा गया था। बोइंग को साफ़ तौर पर इन रिपोर्ट्स में क्लीन चिट दी गई थी। 13 जुलाई, 2025 को भी एक रिपोर्ट में रायटर्स ने फिर से पायलटों को दोषी ठहराया। उसने AAIB की शुरूआती जाँच रिपोर्ट के सहारे पायलटों को दोषी बताया था। रायटर्स के रिपोर्ट करने के तरीके से यह भ्रम होता कि पायलट ने जान-बूझ कर फ्यूल कंट्रोल स्विच बंद किया, जिसके चलते इंजन बंद हुए और 250 से अधिक लोग मारे गए।

कश्मीर में मारे गए आतंकियों को बताया ‘मेन’

कश्मीर को लेकर पश्चिमी देशों के प्रेस का पक्षपाती रवैया किसी से छुपा नहीं है। रायटर्स लेकिन कश्मीर पर प्रोपगेंडा करते-करते आतंकियों का पक्ष लेना भी चालू कर देता है। हाल ही में भारतीय सेना ने कश्मीर में ‘ऑपरेशन महादेव’ चला कर तीन आंतकी मार गिराए। यह वही आतंकी थे, जिन्होंने पहलगाम में 26 निर्दोष लोगों की हत्या कर दी थी। यह तीनों पाकिस्तानी आतंकी थे। इनकी पहचान को लेकर भी जानकारी स्पष्ट हो गई थी।

रायटर्स को इनके प्रति सहनुभूति का ज्वर आ गया और उसने इन्हें ‘मेन’ बता कर संबोधित किया। रायटर्स ने इस एनकाउंटर पर ऐसी खबर बनाई जिससे लगे कि सेना ने किन्हीं तीन निर्दोष नागरिकों को मार दिया है। रायटर्स की इस खबर को लेकर खूब ट्रोलिंग हुई। बाद में उसने चुपके से इस खबर में हैडलाइन भी बदल दी। हालाँकि, रायटर्स ने इस पर ना कोई माफी माँगी ना ही कोई सफाई पेश की। रायटर्स जम्मू-कश्मीर को इंडियन एडमिनिस्टर्ड कश्मीर लिखता है जबकि पाकिस्तान द्वारा अवैध रूप से कब्जाए हिस्से को सीधे पाकिस्तानी बताता है।

रूसी तेल खरीद पर भी बोला झूठ

रायटर्स भारत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी नीचा दिखाना चाहता है। उसने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत पर टैरिफ के ऐलान के बाद रूस से तेल खरीद को लेकर एक फर्जी खबर चलाई। रायटर्स ने दावा किया कि ट्रंप के टैरिफ के ऐलान के बाद भारतीय तेल कम्पनियों ने रूस से तेल खरीदना बंद कर दिया है। इसका आधार रायटर्स ने कोई ‘सूत्र’ बताए। रायटर्स की खबर में सूत्र कौन थे, बस यह स्पष्ट नहीं किया गया। इस खबर का सन्देश था कि भारत सरकार, ट्रंप की धमकी से डर गई है।

रायटर्स के इस झूठ का खंडन सरकार ने ही कर दिया। सरकारी सूत्रों ने मीडिया को बताया कि किसी के कहने से भारत तेल की खरीद ना चालू करता ना रोकता है। न्यू यॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, दो वरिष्ठ भारतीय अधिकारियों ने कहा कि भारत की तेल खरीदने की नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है। रिपोर्ट में एक अधिकारी के हवाल से दावा किया गया है कि सरकार ने तेल कंपनियों को रूस से आयात कम करने का कोई निर्देश नहीं दिया है।

रायटर्स ने लेकिन इस बीच यह सिद्ध करने का प्रयास किया कि भारत के निर्णय अमेरिका के दबाव में तय होते हैं। दरअसल, रायटर्स के लगातार भारत पर झूठी और भ्रामक खबरें फ़ैलाने का एक बड़ा कारण है पहचान। यह एक ब्रिटिश संस्थान है। ब्रिटिश मीडिया संस्थान आज भी भारत को औपनिवेशिक चश्मे से ही देखते हैं। उनको भारत 1947 से पहले वाला ही दिखाई पड़ता है जहाँ आधे जनों के पास कपड़े नहीं हैं, करोड़ों के पास अन्न नहीं है और जो एलीट हैं वो खुद काले अंग्रेज हैं।

रायटर्स को यह समझना चाहिए कि यह नया भारत है जो बदल चुका है।