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‘देवेंद्र फडणवीस होंगे नए CM, एकनाथ शिंदे उप-मुख्यमंत्री’: केंद्रीय मंत्री ने बताया – महाराष्ट्र में होगी नई सरकार; उधर उद्धव ठाकरे कोरोना+

केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्यमंत्री रामदास आठवले ने कहा है कि देवेंद्र फडणवीस महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बनेंगे और एकनाथ शिंदे उप-मुख्यमंत्री। ‘रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (RPI)’ के मुखिया ने ‘TV9 भारतवर्ष’ से बात करते हुए कहा कि भाजपा, एकनाथ शिंदे और RPI मिल कर सरकार बनाएँगे। उद्धव महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के बाद मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे भी कोरोना पॉजिटिव हो गए हैं।

ये जानकारी कॉन्ग्रेस के पर्यवेक्षक बना कर राज्य में भेजे गए कमलनाथ ने दी। वहीं एकनाथ शिंदे ने कहा कि उनके पास 40 से अधिक विधायकों का समर्थन है। अलग से अपना गुट बनाने के सम्बन्ध में उन्होंने कहा कि ऐसी कोई योजना नहीं है। वहीं रामदास आठवले ने कहा कि शिवसेना-भाजपा काफी दिनों तक साथ रही और 2019 में साथ मिल कर चुनाव लड़ने के बाद भी आँकड़े ऐसे आ गए कि दोनों मिल कर ही सरकार बना सकते थे।

उन्होंने कहा कि इसके बावजूद शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे और प्रवक्ता संजय राउत ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री का पद माँगने लगे, जबकि अमित शाह से ऐसी कोई बात नहीं हुई थी और सिर्फ सत्ता में आधी भागीदारी की बात हुई थी। उन्होंने बताया कि शिवसेना में नाराज़गी थी कि बाल ठाकरे का सपना कॉन्ग्रेस-NCP के साथ जाने से पूरा नहीं होगा। उन्होंने कहा कि उनकी बात पर भी शिवसेना ने ध्यान नहीं दिया। उन्होंने कहा कि एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे के सभी धंधे बंद कर दिए।

उन्होंने कहा, “ये सभी शिवसैनिक हैं बालासाहेब ठाकरे के बंदे, जो नहीं रहे अंधे। अब बहुत सरे विधायक, लगभग 40 की संख्या में MLA शिवसेना छोड़ सकते हैं और उद्धव ठाकरे के साथ 10-12 विधायक रह जाएँगे। भाजपा और एकनाथ शिंदे को एक-दूसरे से बात करनी चाहिए। सरकार तो अब भाजपा, एकनाथ शिंदे और RPI की मिल के बनेगी। अभी चुनाव होना ठीक नहीं है। सरकार बनाने में कोई समस्या नहीं है, क्योंकि भाजपा के पास 133 लोग हैं ही।”

कट्टरपंथियों से प्यार, हिंदुत्व से चिढ़: विदेशों तक भारत विरोधी प्रोपेगेंडा फैलाने वाले सीजे वर्लमैन का ट्विटर इंडिया में बैन, मोदी सरकार पर मढ़ा इल्जाम

इस्लामी कट्टरपंथियों को पीड़ित दिखाने वाले और झूठी खबरों से हिंदूफोबिया फैलाने वाला ऑस्ट्रेलियाई लेखक व पत्रकार सीजे वर्लमैन का ट्विटर हैंडल भारत में प्रतिबंधित कर दिया गया है। @cjwerleman के ट्विटर हैंडल पर क्लिक करके देख सकते हैं कि उसका कोई ट्वीट अब नहीं दिख रहा। ट्विटर ने ये कदम अकॉउंट के विरुद्ध हुई लीगल डिमांड की प्रतिक्रिया में उठाया है।

@cjwerleman के अकॉउंट के विरुद्ध उठाए गए इस कदम को भारतीयों द्वारा सराहनीय माना जा रहा है। वहीं कट्टरपंथी सीजे वर्लमैन का ट्विटर रिस्टोर करने की बात कह रहे हैं।

इस संंबंध में वर्लमैन की प्रतिक्रिया भी आई है। द सीजे वर्लमैन अकॉउंट से इस प्रतिक्रिया का स्क्रीनशॉट शेयर हुआ है। इसमें वर्लमैन ने जैक, एलन मस्क को टैग कर कहा, “ये एक और सबूत है इस बात का कि ट्विटर भारत सरकार के विरुद्ध प्रोटेक्शन रैकेट चला रहा है। मेरा अकॉउंट भारत में प्रतिबंधित किया गया क्योंकि दक्षिणपंथी, नरेंद्र मोदी शासन के हिंदू फासीवादी इसकी माँग कर रहे थे।”

मालूम हो कि सीजे वर्लमैन अपने ट्वीट से लगातार हिंदूघृणा फैलाने का काम करता था। हाल में उसने 2 साल पुरानी एक वीडियो शेयर करके हिंदुत्व को कोसा था। वीडियो पुलिस लाठी चार्ज की थी। इसे शेयर करकते वर्लमैन ने लिखा था- “देखो कैसे हिंदू कट्टरपंथ से ग्रसित पुलिस एक बुजुर्ग मुस्लिम आदमी को मार रहे हैं।” वीडियो को देखने के बाद कट्टरपंथियों ने धमकी दी थी कि मुंबई में फिर से 1992 जैसे मुंबई ब्लास्ट करने की जरूरत है।

वर्लमैन ने जदयू कार्यकर्ता मोहम्मद खलील आलम रिजवी की हत्या पर भी ऐसा प्रोपेगेंडा फैलाया था। वर्लमैन खलील से जुड़ी वीडियो शेयर करके लिखा था, “एक मुस्लिम व्यक्ति अपनी जान की भीख माँगता रहा और ‘हिन्दू भीड़ ने उसकी हत्या के बाद उसे जला डाला।” जब ऑपइंडिया ने इस संबंध में समस्तीपुर पुलिस अधीक्षक से बात की तो मामले में सांप्रदायिक एंगल का खंडन किया गया था।

उन्होंने कहा, “इसमें कोई सांप्रदायिक दृष्टिकोण नहीं है। गोमांस-गोहत्या को लेकर वायरल एक वीडियो आपको मिला होगा। इस वीडियो को वायरल करने के पीछे उनका मकसद यह था कि अगर पुलिस उन्हें पकड़ लेती है और कांड का खुलासा कर देती है तो हमलोग उसे सोशल मीडिया पर वायरल कर देंगे। जिससे पुलिस का ध्यान उनकी तरफ से हट जाएगा और लोगों को भी उनकी सहानुभूति मिलेगी।”

इसके अलावा वर्लमैन के कई ट्वीट में यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए अपशब्द कहे जाते थे। उसने योगी आदित्यनाथ को ‘हिंदुत्व आतंकी’ तक कहा था।

एकनाथ शिंदे की बगावत से कैसे पार पाएँगे उद्धव, इन 5 को तो बाल ठाकरे भी नहीं रोक पाए: एक ने गिरफ्तार करवाया, दूसरे के कारण कुत्ता पालना छोड़ दिया

हम बाला साहेब के पक्के शिव सैनिक हैं… बाला साहेब ने हमें हिंदुत्व सिखाया है। बाला साहेब के विचारों और धर्मवीर आनंद दीघे साहब की शिक्षाओं के बारे में सत्ता के लिए हमने कभी धोखा नहीं दिया और न कभी धोखा देंगे।

यह बयान एकनाथ शिंदे का है। उन्होंने अपनी बगावत से न केवल शिवसेना और महाराष्ट्र की सरकार को हिला डाला है, बल्कि बाल ठाकरे की हिंदुत्व वाली राजनीति पर भी दावा ठोक दिया है।

वैसे भी शिवसेना की जब भी बात होती है, बाल ठाकरे चर्चा में आ ही जाते हैं। एकनाथ शिंदे की बगावत के बाद से भी वे अलग-अलग वजहों से चर्चा में हैं। उनके पुराने वीडियो तक वायरल हो रहे हैं। शिंदे ने इस समय असम में डेरा डाल रखा है। उनका दावा है कि उनके साथ 40 विधायक हैं। इसने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और बाल ठाकरे के बेटे उद्धव ठाकरे की कुर्सी पर खतरा पैदा कर दिया है। माना जा रहा है कि महाराष्ट्र से महाविकास अघाड़ी, जिसमें कॉन्ग्रेस और एनसीपी भी साझेदार है, की सरकार जानी तय है।

इसकी एक वजह यह भी है कि बाल ठाकरे के जमाने में भी शिवसेना बगावत को रोकने में असफल रही। उनके मुकाबले उद्धव राजनीतिक तौर पर कम प्रभावशाली माने जाते हैं। कम से कम ऐसे मौके बाल ठाकरे के जीवनकाल में शिवसेना ने देखे जब पार्टी को काफी तगड़ा झटका लगा। इन बागियों में से एक ने बाद में महाराष्ट्र का गृह मंत्री बनने पर बाल ठाकरे की गिरफ्तारी भी करवाई थी। उस समय बाल ठाकरे को पुलिस के सामने सरेंडर करने के लिए मजबूर होना पड़ा था।

यह भी दिलचस्प है कि कभी शिवसैनिक रहे यही छगन भुजबल आज की उद्वव सरकार में भी मंत्री हैं। इसी तरह जिस संजय निरूपम की बगावत के बाद बाल ठाकरे ने कुत्ता पालना छोड़ दिया, वो निरूपम आज कॉन्ग्रेस में हैं और उनकी पार्टी उद्धव की सरकार में साझीदार है।

छगन भुजबल

सबसे पहले छगन भुजबल ने पार्टी में बगावती बिगुल फूँका था। ये कहानी तब की है जब महाराष्ट्र की राजनीति में बाला साहेब ठाकरे का दबदबा हुआ करता था। महाराष्ट्र में छगन भुजबल की पहचान एक दबंग ओबीसी नेता की है। बाला साहेब के साथ भी उनके रिश्ते काफी अच्छे थे। लेकिन 1985 में दोनों के बीच मतभेद होने शुरू हुए। बाला साहेब ने भुजबल के पर कुतरते हुए उन्हें प्रदेश की राजनीति से हटाकर सिर्फ मुंबई तक सीमित कर दिया। छगन भुजबल ने शिवसेना के दिग्गज नेता मनोहर जोशी से विवाद और पार्टी में नेता प्रतिपक्ष का पद ना मिलने से नाराज होकर साल 1991 में भुजबल ने खुलकर बगावत कर दी। वे अपने साथ 17 विधायक लेकर कॉन्ग्रेस में शामिल हो गए। ये पहली बार था जब ठाकरे परिवार को कहीं से धोखा मिला था। हालाँकि, भुजबल कॉन्ग्रेस में भी नहीं रुके और वर्ष 1999 में शरद पवार के नेतृत्व में गठित एनसीपी में शामिल हो गए। आज छगन भुजबल बाला साहेब ठाकरे के बेटे उद्धव ठाकरे की कैबिनेट में मंत्री हैं।

गणेश नाइक

नब्बे के दशक में गणेश नाइक ने शिवसेना को दूसरा बड़ा झटका दिया था। वर्ष 1995 में विधायक बनने के बाद नाइक को उम्मीद थी कि सरकार में उन्हें महत्वपूर्ण मंत्री पद मिलेगा। लेकिन उन्हें पर्यावरण मंत्री बना दिया गया। इससे नाराज हुए नाइक वर्ष 1999 में गठित शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी में शामिल हो गए थे। नाइक वर्षों बाद एनसीपी छोड़ अब बीजेपी में हैं।

नारायण राणे

मनोहर जोशी की जगह जिस नारायण राणे को बाला साहेब ने महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री बनाया था, उन्होंने भी शिवसेना को वर्ष 2005 में अलविदा कह दिया था। राणे अपने 10 समर्थक विधायकों के साथ कॉन्ग्रेस में शामिल हो गए थे। राणे ने उद्धव ठाकरे की वजह से शिवसेना छोड़ने की बात कही थी। उनके बगावत से कोंकण में शिवसेना को जोरदार झटका लगा था। बाद में राणे ने भी कॉन्ग्रेस में भविष्य न देखते हुए बीजेपी का दामन थाम लिया।

राज ठाकरे

वर्ष 2006 में शिवसेना में एक और बड़ी बगावत ठाकरे परिवार के अंदर ही हुई। जब शिवसेना का उत्तराधिकारी बनाने की बात आई तो बाल ठाकरे ने भतीजे राज के बजाय बेटे उद्धव को तरजीह देने के संकेत दिए। इससे नाराज होकर राज ठाकरे ने शिवसेना से बगावत कर दी। उस दौरान शिवसेना के कई दिग्गज नेता और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता राज ठाकरे की नवगठित महाराष्ट्र नव निर्माण सेना में शामिल हो गए थे। आज महाराष्ट्र विधानसभा में उनका सिर्फ एक विधायक है।

संजय निरुपम

संजय निरुपम शिवसेना के संस्थापक बाला साहेब ठाकरे की वजह से राजनीति में आए थे। निरुपम कभी शिवसेना के मुखपत्र ‘दोपहर का सामना’ का एग्जीक्यूटिव एडिटर हुआ करते थे। 1996 में ठाकरे ने निरुपम राज्यसभा भेजा था। हालाँकि 2005 में निरुपम ने शिवसेना से इस्तीफा देकर कॉन्ग्रेस की सदस्यता ले ली। निरुपम के जाने के बाद एक मौके पर बाल ठाकरे ने कहा था कि मैंने कुत्ता पालना छोड़ दिया है। 2014 में लोकसभा चुनाव में निरुपम को बीजेपी के उम्मीदवार से बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा। 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्हें कॉन्ग्रेस के टिकट पर शिवसेना के उम्मीदवार से हार का सामना करना पड़ा था।

‘जब टीशर्ट और जीन्स के भी पैसे नहीं थे, तब अन्ना ने महँगी पर्स दिलाई’: सुनील शेट्टी का नाम लेकर रो पड़े सलमान खान, IIFA का वीडियो

सोशल मीडिया पर बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान (Salman Khan) का एक वीडियो खूब वायरल हो रहा है। इस वीडियो में वह रोते हुए नजर आ रहे हैं। दरअसल, बॉलीवुड का सबसे बड़ा अवॉर्ड IIFA 2022 इस साल अबूधाबी में हो रहा है। इस अवॉर्ड सेरेमनी के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। इसमें सलमान खान के भी कई वीडियो हैं। एक वीडियो में सलमान अपने स्ट्रगल के दिनों को याद करते हुए रो पड़े।

इस वीडियो को कलर्स टीवी ने अपने इंस्टाग्राम पर शेयर किया है। आईफा अवॉर्ड्स 2022 के वायरल वीडियो में होस्ट रितेश देशमुख सलमान खान से पूछते हैं, “भाउ आपकी लाइफ का सबसे मेमोरेबल मोमेंट कौन सा है।”

इसके जवाब में वह (सलमान खान) कहते हैं, “काफी साल पहले मेरे पास पैसे नहीं हुआ करते थे। उस वक्त सुनील शेट्टी (Suniel Shetty) अन्ना की दुकान थी। एक दिन मैं वहाँ पर चला गया। वह बहुत महँगी दुकान थी। मैं वहाँ एक टी-शर्ट और जीन्स भी अफॉर्ड नहीं कर सकता था। यही वजह थी कि मैं सिर्फ एक जींस खरीदकर घर वापस लौट आया। उन्होंने (सुनील शेट्टी) मुझे अपनी तरफ से एक स्टोन वॉश जीन्स दी थी, लेकिन मेरी नजर उस पर्स पर थी। मुझे पता था मैं यह नहीं खरीद सकता, क्योंकि मेरे पास इतने पैसे नहीं थे, लेकिन सुनील ने मेरी आँखें देखी और मुझे वो दिलाने का फैसला लिया जो भी मैं चाहता था।”

इस दौरान वहाँ मौजूद सुनील शेट्टी के बेटे अहान शेट्टी की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा, “इसके बाद इनके फादर मुझे अपने घर पर लेकर गए और मुझे वह पर्स दिया।” ये किस्सा बताते हुए सलमान खान भावुक हो गए और अपने आँसू रोक नहीं पाए। इसके बाद उन्होंने अहान शेट्टी को गले लगा लिया।

वर्क फ्रंट की बात करें तो, सलमान खान को फिल्म इंडस्ट्री में 34 साल हो चुके हैं। वह जल्द ही ‘टाइगर 3’, ‘कभी ईद कभी दिवाली’ और ‘गॉडफादर’ में फिल्म में नजर आएँगे। बता दें कि आईफा अवॉर्ड्स 2022 कलर्स टीवी पर 25 जून को रात 8 बजे दिखाया जाएगा।

‘मेरी बेटी को BTS पसंद, मैं उन्हें जानता भी नहीं’: Pak अभिनेता ने उड़ाया कोरियन बैंड का मजाक, फैन्स बोले- कंटेंट तुम्हारा घटिया है

पाकिस्तानी एक्ट्रेस माहिरा खान (Mahira Khan) और फहद मुस्तफा (Fahad Mustafa) इन दिनों अपनी नई फिल्म कायदे आजम जिंदाबाद (Quaid-e-Azam Zindabad) का जमकर प्रमोशन कर रहे हैं। फिल्म के प्रमोशन दौरान उन्होंने अपने स्कूल टाइम लव, किशोर कुमार और मुहम्मद रफी के गानों, अपनी पसंद-नापसंद के साथ कोरियाई इंडस्ट्री पर चर्चा की। इस दौरान फहद मुस्तफा कोरिया के मशहूर बैंड बीटीएस (BTS Members) से बेहद खफा नजर आए, जो इस समय पूरी दुनिया में धूम मचा रहा है।

मुस्तफा ने ‘फुशिया’ से बातचीत के दौरान बच्चों के साथ अपने रिश्ते पर खुलकर बात की। अभिनेता ने खुलासा किया कि जहाँ उनका बेटा अपने पापा का फैन है और उन्हें फॉलो करता है, वहीं उनकी बेटी फातिमा के-पॉप की बहुत बड़ी फैन है। उन्होंने कहा, “फातिमा बीटीएस की बहुत बड़ी फैन है। वह अभी 11 साल की है। मैं उसकी के-पॉप के प्रति ऐसी दीवानगी देखकर दंग हूँ।”

बताया जा रहा है कि मुस्तफा ने कभी भी इस दक्षिण कोरियाई बॉय बैंड का म्यूजिक नहीं सुना है। जब उनसे कहा गया कि आपकी बेटी सुन रही है, तो आपको भी सुनना चाहिए। इस पर वह कहते हैं, “नो हेल नो।” उन्होंने कहा, “मैं तो यह भी नहीं जानता हूँ कि मेरी बेटी बैंड के किस गाने को सबसे ज्यादा पसंद करती है।” अभिनेता ने बेटी के व्यवहार पर निराशा व्यक्त करते हुए कहा, “जब मैं उन्हें बिहाइंड द सीन्स बैंड (Behind the Scenes band) बुलाता हूँ, तब वह मुझे कहती है ‘नो पापा’। वह सिंधी बोलने की बजाय कोरियाई भाषा बोलती है, लेकिन मैं चाहता हूँ कि वह अपनी मातृभाषा बोले।” इस बीच पास में बैठी अभिनेत्री ने कहा, “कोरियाई इंडस्ट्री के इतनी तेजी से पूरी दुनिया में फेमस होना वास्तव में बहुत बड़ी बात है। हालाँकि मैंने अभी तक उनका कोई भी वीडियो नहीं देखा है।”

फहद मुस्तफा द्वारा इस तरह बीटीएस का अपमान किए जाने पर सोशल मीडिया पर कई यूजर्स उनसे नाराज दिखे। लोगों ने कहा कि ये बेहद घटिया चीज है जो फहद ने की। उन्हें अपनी बेटी की पसंद का खुले में मजाक नहीं उड़ाना चाहिए था। कुछ यूजर्स ने उन्हें बीटीएस को देखने को सलाह दी। उन्हें कहा गया कि पहले वो वीडियो देखकर समझें कि आखिर क्यों बीटीएस इतनी तेजी से फेमस हुआ, क्यों लोग उसे देख रहे हैं और क्यों उन लोगों (फहद मुस्तफा को) नहीं पसंद किया जा रहा।

दरअसल, इन दिनों पूरी दुनिया में कोरियन वेब सीरीज के अलावा कोरियन गानों का भी क्रेज बढ़ता जा रहा है। अब हर किसी के बीच कोरियन म्यूजिक बैंड बीटीएस (BTS Members) और उसके सातों मेंबर बेहद पॉपुलर हैं। इस बैंड को लोग Bangtan Boys के नाम से भी जाने जाते हैं। BTS मेंबर्स ने साल 2013 में ‘2 Cool 4 Skool’ म्यूजिक एलबम से अपना करियर शुरू किया था।

आज विदेश में ही नहीं बल्कि भारत का भी बच्चा-बच्चा बीटीएस के गानों से वाकिफ है। भले ही अभी तक k-pop सिंगर्स भारत नहीं आए हों, लेकिन BTS ARMYs अक्सर अपने पसंदीदा बॉलीवुड गानों पर थिरकते हुए वीडियो पोस्ट करते हैं। हाल ही में उन्हें बॉलीवुड अभिनेता कार्तिक आर्यन की फिल्म ‘भूल भुलैया 2’ के गाने पर ‘हरे राम हरे कृष्णा’ पर थिरकते हुए देखा गया था।

बता दें कि पाकिस्तान फिल्म इंडस्ट्री की सुपरस्टार माहिरा खान, फहद मुस्तफा और नबील कुरैशी की कायदे आजम जिंदाबाद ईद-उल-अजहा के मौके पर रिलीज होगी। इस फिल्म की कहानी करप्शन पर बेस्ड है। हाल ही में फिल्म का ट्रेलर रिलीज किया गया था। माहिरा बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान के साथ ‘रईस’ फिल्म में भी काम कर चुकी हैं।

राष्ट्रपति उम्मीदवारी के बाद द्रौपदी मुर्मू ने भगवान जगन्नाथ के किए दर्शन, शिव मंदिर में साफ-सफाई: बोले ओडिशा के CM- यह गर्व का क्षण

एनडीए की ओर से मंगलवार (21 जून 2022) को राष्ट्रपति पद के लिए द्रौपदी मुर्मू का नाम घोषित होने के बाद मुर्मू ने आज (22 जून 2022) सुबह मंदिरों के दर्शन किए। वह ओडिशा के मयूरभंज में रायरंगपुर जगन्नाथ मंदिर गईं। फिर वहाँ से वह शिव मंदिर पहुँची और इसके बाद उन्होंने आदिवासी पूजा स्थल जहिरा जाकर भी आशीर्वाद लिया।

एनडीए द्वारा मुर्मू को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद उनको जेड प्लस सेक्योरिटी मिल गई है। इस बीच उनकी एक वीडियो भी सामने आई है। ये वीडियो रायरंगपुर के शिवमंदिर की ही है। इस वीडियो में वह पूजा अर्चना से पहले मंदिर के फर्श पर झाड़ू से साफ-सफाई करती नजर आ रही हैं। देख सकते हैं कि सफाई के बाद वह अपने हाथ धोती हैं, नंदी महाराज के चरण छूती हैं, घंटी बजाती है और फिर मंदिर में अंदर घुसती हैं।

उनकी यह वीडियो देखने के बाद लोग उनकी तारीफ करते नहीं थक रहे। उनका नाम राष्ट्रपति पद के लिए भेजे जाने पर लोग इस गौरवान्वित करने वाला क्षण कह रहे हैं और कुछ लोग अभी से उन्हें अपना राष्ट्रपति मान चुके हैं।

वहीं ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने राज्य के लिए इसे गर्व का क्षण बताया है। अपने ट्वीट में उन्होंने लिखा, “एनडीए द्वारा देश के सर्वोच्च पद के लिए उम्मीदवार बनाने पर द्रौपदी मुर्मू को बहुत बधाई। मैं बहुत ज्यादा खुश था जब पीएम मोदी इस पर बात कर रहे हैं। ये ओडिशा की जनता के लिए गर्व का क्षण है। मुझे यकीन है कि वो देश में महिला सशक्तिकरण का एक दमकता उदाहरण बनेंगी। “

बता दें कि द्रौपदी मुर्मू झारखंड की पहली महिला राज्यपाल रही हैं। उनका जन्म ओडिशा के आदिवासी जिले मयूरभंज के बैदापोसी गाँव में हुआ था। 1997 में वह रायरंगपुर से बतौर पार्षद जीतीं। इसके बाद उन्हें भारतीय जनता पार्टी की आदिवासी मोर्चा का उपाध्यक्ष बनाया गया। साल 2000 और 2009 में वह रायरंगपुर से विधायक भी चुनी गईं।

2015 में जब उन्हें झारखंड का राज्यपाल नियुक्त किया गया तो उनका कार्यकाल लगभग निर्विवाद रहा। 64 वर्षीय द्रौपदी मुर्मू 2000 झारखंड के गठन के बाद से पहली ऐसी राज्यपाल बनीं, जिन्होंने अपना कार्यकाल पूरा किया था। व्यक्तिगत जीवन की बात करें तो द्रौपदी मुर्मू के दो बेटे और एक बेटी हैं। उनका पिता का नाम बिरंचि नारायण टुडू था। उनका जीवन त्रासदियों और संघर्षों से भरा हुआ है। उनके पति का निधन हो चुका है। उनके दोनों बेटे भी चल बसे।

असम CM की पत्नी ने मनीष सिसोदिया पर किया ₹100 करोड़ की मानहानि का मुकदमा: दान में दिए PPE किट में लगाया था भ्रष्टाचार का इल्जाम

दिल्ली के उप मुख्यमंत्री और AAP नेता मनीष सिसोदिया के खिलाफ 100 करोड़ रुपए की मानहानि का मुकदमा दायर किया गया है। यह मुकदमा असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी सरमा ने किया है। सिसोदिया ने कोविड महामारी के दौरान असम में पीपीई किट की खरीद में भ्रष्टाचार का आरोप सरमा पर लगाया था।

इस विवाद की शुरुआत वामपंथी प्रोपगेंडा पोर्टल द वायर की एक रिपोर्ट से हुई थी। इसमें आरोप लगाया गया था कथित तौर पर रिंकी भुयान सरमा के मालिकाना हक वाली वाली एक कपंनी को कोरोना से निपटने के लिए पीपीई किट और दूसरे कोविड से जुड़े सामानों की आपूर्ति का ऑर्डर मिला था। तब सर्बानंद सोनोवाल असम के मुख्यमंत्री और हिमंता बिस्वा सरमा राज्य के स्वास्थ्य मंत्री थे। रिपोर्ट में कहा गया था कि सरमा की पत्नी की कंपनी को बिना किसी अनुभव के ही 5000 पीपीई किट, मेडिकल उपकरण और अन्य सुरक्षा सामानों की आपूर्ति का ऑर्डर दिया गया था। इसी रिपोर्ट को आधार बनाकर सिसोदिया ने भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था। हालाँकि, रिंकी सरमा ने तुरंत ही आरोपों का खंडन करते हुए कहा था उन्होंने मानवता के नाते बिना एक पैसा लिए पीपीई किट की मुफ्त आपूर्ति की थी।

इसके बावजूद सिसोदिया ने असम के सीएम सरमा और उनकी पत्नी पर हमला जारी रखा। सिसोदिया ने अपने आरोपों के ‘सबूत’ के रूप में ‘रद्द किए गए खरीद आदेश’ की एक तस्वीर ट्वीट की। इसके बाद हिमंत बिस्वा सरमा ने सिसोदिया सिसोदिया को आपराधिक मानहानि का सामना करने के लिए तैयार रहने को कहा था। अब रिंकी सरमा ने इसी मामले को लेकर आपराधिक मानहानि का मुकदमा दायर किया है।

बता दें कि मनीष सिसोदिया AAP के पहले सीनियर नेता नहीं हैं, जिन पर भ्रष्टाचार के निराधार आरोपों के लिए मानहानि का मुकदमा हुआ है। इससे पहले, पार्टी सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल ने भाजपा नेताओं अरुण जेटली और नितिन गडकरी के खिलाफ झूठा आरोप लगाया था। भाजपा नेता द्वारा मानहानि का मामला दर्ज कराने के बाद दिल्ली के सीएम को माफी माँगनी पड़ी थी।

उद्धव ठाकरे का बहुमत लेकर गुजरात से असम शिफ्ट हुए एकनाथ शिंदे: 40+ MLA साथ, कहा- बालासाहेब के हिंदुत्व को हम आगे ले जाएँगे

महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे के कारण हलचल लगातार बनी हुई है। उन्होंने मीडिया में दावा कर दिया है कि उनके साथ 41 विधायकों का सहयोग है। इनमें 34 पार्टी विधायक और 7 निर्दलीय विधायक हैं। जानकारी के अनुसार, अभी तक एकनाथ शिंदे सूरत के ली मेरीडियन होटल में अपने विधायकों के साथ रुके हुए थे। लेकिन महाराष्ट्र में सरकार बचाने की जिम्मेदारी शरद पवार को मिलते ही वह सभी विधायकों संग असम के लिए रवाना हो गए। वहाँ वह रैडिसन ब्लू होटल में रुके हैं।

असम के लिए निकलने से पहले एकनाथ शिंदे ने गुजरात एयरपोर्ट पर मीडिया को बयान दिया, “हमने बालासाहेब ठाकरे की शिवसेना को नहीं छोड़ा। हम बालासाहेब के हिंदुत्व का अनुसरण कर रहे हैं और इसे आगे भी ले जाएगें।” उन्होंने कहा कि उन्हें मुख्यमंत्री पद का लालच नहीं है। वह बस बालासाहेब के विचार को आगे बढ़ा रहे हैं।

बागी विधायक असम में

सूरत से गुवाहाटी जाने के बीच एयरपोर्ट पर दिखे इन सभी नेताओं से पत्रकारों ने कई बार बातें निकलवाने की कोशिश की लेकिन किसी ने कुछ स्पष्ट नहीं बताया। किसी ने कहा वह बिरयानी खाने आए हैं तो कोई जय महाराष्ट्र का नारा लगाकर आगे बढ़ गया। अब सारे सियासी खेल को देख अंदाजा लग रहा है कि एकनाथ शिंदे अपने खेमे के विधायकों की संख्या वाला पत्र जल्द राज्यपाल को देने वाले हैं। कुछ रिपोर्ट में उनके पास 40 विधायकों का समर्थन बताया जा रहा है और कुछ में 46 का।

उल्लेखनीय है कि एकनाथ शिंदे समेत उनके सभी विधायक आज सुबह गुवाहटी में उतरे। जहाँ इन सबको लेने भाजपा विधायक सुशांत बोरगोहेन आए हुए थे। जब सुशांत से इस संबंध में पूछा गया तो उन्होंने कहा, “मैं यहाँ इन्हें (शिंदे के साथ आए विधायकों) लेने आया हूँ। मैं व्यक्तिगत रिश्ते की वजह से इन्हें यहाँ लेने आया हूँ। मैंने गिनती नहीं की हुई है कि कितने विधायक यहाँ आए हुए हैं। मु्झे उन्होंने अपने कार्यक्रम के बारे में नहीं बताया है।”

बागी विधायकों को मनाने में जुटी उद्धव सरकार

मालूम हो कि शिवसेना के इन सभी विधायकों से मुंबई में संपर्क टूटा था। उसके बाद सत्ताधारी पार्टी के अन्य नेताओं ने लगातार इनसे संपर्क की कोशिश की, पर कोई असर नहीं हुआ। सरकार पर आए संकट को लेकर उद्धव ठाकरे ने बैठक बुलाई और शरद पवार को सरकार बचाने की कमान दी। जैसे ही सूरत में बैठे विधायकों को ये मालूम हुआ तो उन्होंने सूरत से निकल गुवाहाटी जाने का निर्णय लिया।

वहीं शिवसेना नेता संजय राउत ने मीडिया को दिए बयान में शिंदे को ‘पुराना दोस्त’ कह कर मनाने की कोशिश की। राउत ने कहा, “एकनाथ हमारे पुराने दोस्त हैं। वह जानते हैं कि हमने भाजपा क्यों छोड़ी। वह इसके गवाह हैं। हमारे दो नेता सूरत गए थे। वहाँ उन्होंने एकनाथ से बात की है।”

महाराष्ट्र की राजनीति में इन 40 विधायकों का क्या महत्व है?

महाराष्ट्र में कुल विधायकों की संख्या 288 है। इनमें भाजपा के पास अभी 106, शिवसेना पर 55, एनसीपी पर 52, और कॉन्ग्रेस पर 42 सीटें हैं। बहुमत के लिए किसी भी दल को 144 सीटें चाहिए। साल 2019 के चुनाव में भाजपा से अलग होकर शिवसेना ने कॉन्ग्रेस-एनसीपी के साथ मिल ये आँकड़ा जुटाया था। लेकिन अब स्थिति पलटती नजर आ रही है। भाजपा को सरकार बनाने के लिए 30-32 विधायकों की जरूरत है। अगर ऐसे में शिंदे भाजपा को समर्थन दे देते हैं तो उद्धव सरकार गिर जाएगी। यही वजह है कि लगातार इन सभी नेताओं को मनाने के प्रयास हो रहे हैं।

भगवान राम से जुड़े सभी स्थलों का भ्रमण एक ही बार में, भारतीय रेलवे लेकर आई ‘रामायण यात्रा’ ट्रेन: 8000 km, की यात्रा ऐसे करें बुकिंग

देश की पहली भारत गौरव टूरिस्‍ट ट्रेन ‘श्री रामायण यात्रा’ (Shri Ramayana Yatra) को मंगलवार (21 जून 2022) शाम को दिल्‍ली के सफदरजंग रेलवे स्‍टेशन से रवाना किया गया। रेल मंत्री अश्विनी वैष्‍णव और पर्यटन मंत्री जी किशन रेड्डी ने झंडी दिखाकर टूरिस्‍ट ट्रेन को रवाना किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत गौरव ट्रेन (Bharat Gaurav Train) नाम से चलाई जाने वाली यह ट्रेन दिल्ली से नेपाल (Nepal) के जनकपुर (Janakpur) तक जाएगी। वहाँ से फिर भारत आकर काशी होते हुए दक्षिण भारत (South India) के भ्रमण कराएगी। सफर के दौरान यात्रियों का रहना-खाना सब मुफ्त रहेगा।

भारतीय रेलवे ने देश भर में भगवान राम से जुड़े तीर्थों की यात्रा कराने के लिए ‘श्री रामायण यात्रा’ टूर पैकेज की शुरूआत की है। यह यात्रा कुल 18 दिनों की है। इसकी बुकिंग IRCTC की साइट पर जाकर करवानी होगी। इस यात्रा के लिए पैकेज की कीमत 62,370 रुपए प्रति व्यक्ति रखी गई है। ट्रेन में सुरक्षा के लिए गार्ड भी रखे गए हैं। इस दौरान यात्रियों को भगवान राम से जुड़े धार्मिक स्थलों के दर्शन कराए जाएँगे। इसके अलावा इस ट्रेन में भारत के अलग-अलग राज्यों के परिधानों, खानपान, पर्यटक स्थल, संस्कृति और त्योहारों को दर्शाया गया है।

उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी ‘भारत गौरव श्री रामायण यात्रा ट्रेन’ शुरू करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री का आभार व्यक्त किया है।

भारत गौरव नाम की यह ट्रेन पर्यटकों को लेकर भगवान राम से जुड़े स्थानों जिसमें अयोध्या, बक्सर, सीतामढ़ी, काशी, प्रयाग, श्रृंगेश्वर, चित्रकूट नासिक, हंपी, रामेश्वरम, कांचीपुरम और भद्राचलम समेत कई जगहों तक जाएगी। इसी पैकेज में भारत गौरव ट्रेन नेपाल के जनकपुर भी जाएगी। भगवान राम के दर्शन के लिए यह यात्रा 8000 किलोमीटर की है, जो दिल्ली के सफदरजंग रेलवे स्टेशन से 21 जून को शुरु होगी। इसमें 600 यात्री थर्ड एसी में यात्रा कर सकते हैं।

देश को मिलेगी पहली महिला आदिवासी राष्ट्रपति! BJP ने द्रौपदी मुर्मू को बनाया उम्मीदवार, JP नड्डा ने बैठक के बाद किया ऐलान

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने झारखंड की पूर्व राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया है। जेपी नड्डा ने किया ऐलान। 64 वर्षीय द्रौपदी मुर्मू 2000 झारखंड के गठन के बाद से पहली ऐसी राज्यपाल थीं, उन्होंने अपना कार्यकाल पूरा किया था। उनका जन्म 20 जून, 1958 को ओडिशा के मयूरभंज जिले में स्थित बैदापोसी गाँव में हुआ था। वो संथाल जनजाति से ताल्लुक रखती हैं। उनके पति का नाम श्याम चरण मुर्मू है।

उनके व्यक्तिगत जीवन की बात करें तो द्रौपदी मुर्मू के दो बेटे और एक बेटी हैं। उनका पिता का नाम बिरंचि नारायण टुडू था। उनका जीवन त्रासदियों और संघर्षों से भरा हुआ है। उनके पति का निधन हो चुका है। उनके दोनों बेटे भी चल बसे। 2000 के दशक की शुरुआत में जब ओडिशा में बीजद-भाजपा ने मिल कर सरकार बनाई थी, तब उन्हें राज्य में कॉमर्स और ट्रांसपोर्ट मंत्रालय मिला था। फिर उन्होंने मत्स्य पालन और पशुपालन विभाग को सँभाला।

वो ओडिशा की पहली महिला और आदिवासी नेता हैं, जिन्हें राज्यपाल के पद पर नियुक्त किया गया। वो 2000 और 2009 में भाजपा के टिकट पर ओडिशा के मयूरभंज स्थित रायरंगपुर से विधायक चुनी जा चुकी हैं। वो 1997 में वहाँ के नगर पंचायत की काउंसिलर भी रह चुकी हैं। भाजपा ने उन्हें अपने जनजातीय मोर्चे का अध्यक्ष बनाया था। 2015 में उन्हें झारखंड का राज्यपाल नियुक्त किया गया। उनका कार्यकाल लगभग निर्विवाद रहा।

भाजपा ने संसदीय दल की बैठक में चर्चा के बाद और उससे पहले NDA के सभी घटक दलों से बात कर के उनके नाम पर मुहर लगाई।