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महिला उपन्यासकार के साथ ‘स्ट्रॉबेरी वाली फोटो’ डाल छाए शशि थरूर, कॉन्ग्रेसियों का हुड़दंग पड़ा फीका: नेटिजन्स बोले- नेहरू की विरासत को आप ही आगे ले जा रहे

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और केरल के वायनाड के सांसद राहुल गाँधी को सोमवार (13 जून 2022) को प्रवर्तन निदेशालय (ED) के सामने पेश होना पड़ा। उनकी पेशी से पहले से ही कॉन्ग्रेसियों ने सड़क पर हुड़दंग मचाना शुरू कर दिया था। लेकिन ट्विटर पर केरल के तिरुवनंतपुरम से ही कॉन्ग्रेस के सांसद शशि थरूर (Shashi Tharoor) एक पोस्ट से लाइमलाइट चुरा ले गए। हालाँकि उनका ये पोस्ट उस नेशनल हेराल्ड केस से जुड़ा नहीं था, जिसमें राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) से एजेंसी ने पूछताछ की है।

दरअसल, कॉन्ग्रेसियों के प्रदर्शन के बिच कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर लंदन में एक महिला उपन्यासकार का जन्मदिन मनाते हुए नजर आए। उन्होंने ट्विटर पर उपन्यासकार गीतांजलि श्री के साथ फोटो भी शेयर की। इसमें वह गीतांजलि श्री के साथ ‘स्ट्रॉबेरी’ खाते हुए दिख रहे हैं। थरूर जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में शिरकत करने के लिए लंदन गए हुए हैं।

यह तस्वीर सामने आने के बाद नेटिजन्स इसकी तुलना कॉन्ग्रेसियों के प्रदर्शन से करने लगे। एक यूजर ने लिखा, “बाकी कॉन्ग्रेस वाले इंदिरा या राजीव की विरासत आगे बढ़ा रहे होंगे, केवल अकेले आप ही नेहरू की विरासत आगे ले जा रहे हैं, रिस्पेक्ट।” वहीं एक ने लिखा है, “आग लगे बस्ती में, थरूर अपनी मस्ती में!”

शिवा नाम के यूजर ने लिखा, “तुम्हारे दोस्त जेल में हैं और तुम यहाँ स्ट्रॉबेरी से मजे कर रहे हो, वाह जनाब।”

एक अन्य ने लिखा, “चिंता और तनाव दूर करने का बस एक ही उपाय है! आँखे बंद करके सुबह-शाम बोलिए, भाड़ में गई कॉन्ग्रेस।”

बता दें कि ट्विटर पर ट्रोल होने के बाद शशि थरूर ने एक और पोस्ट की। उन्होंने भाजपा और दिल्ली पुलिस पर निशाना साधते हुए लिखा, “एक राजनीतिक दल के सांसदों के धरने के लिए पुलिस का बंदोबस्त ऐसा है, जैसे वे दंगाई हों। क्या दिल्ली पुलिस के पास और कोई काम नहीं बचा है या फिर गृहमंत्री को लगता है कि पुलिस वाले नागरिकों के लिए नहीं सिर्फ सांसदों के लिए हैं।”

गौरतलब है कि नेशनल हेराल्ड से जुड़ा यह मामला कॉन्ग्रेस पार्टी के नेतृत्व में ‘यंग इंडियन’ में वित्तीय अनियमितता की जाँच के सिलसिले में दर्ज किया गया था। समाचार पत्र ‘नेशनल हेराल्ड’, यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड का है। ‘नेशनल हेराल्ड’ एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) द्वारा प्रकाशित किया जाता है और यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड के स्वामित्व में है। भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी और अन्य पर धोखाधड़ी की साजिश रचने और यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड के फंड का गबन करने का आरोप लगाया था। स्वामी ने यह भी आरोप लगाया था कि यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड ने 90.25 करोड़ रुपए की वसूली के अधिकार हासिल करने के लिए सिर्फ 50 लाख रुपए का भुगतान किया था, जो एजेएल पर कॉन्ग्रेस का बकाया था।

प्रयागराज में जावेद के जिस घर पर चला बुलडोजर, उससे मिले हथियार-आपत्तिजनक दस्तावेज: अरब और पाकिस्तान के इस्लामी साहित्य भी बरामद

प्रयागराज में 10 जून 2022 को जुमे की नमाज के बाद हुई हिंसा के मास्टरमाइंड जावेद पंप उर्फ जावेद मोहम्मद के घर से पुलिस ने आपत्तिजनक सामान बरामद किया है। तलाशी के दौरान पुलिस को अवैध हथियार, पोस्टर, झंडे, इस्लामी देशों के साहित्य और ऐसे कागजात मिले हैं, जिसमें अदालतों के ऊपर टिप्पणी की गई है। पुलिस ने ये सभी सामान कब्ज़े में ले लिया है।

जावेद पंप का करेली स्थित घर प्रयागराज विकास प्राधिकरण (पीडीए) ने रविवार (12 जून 2022) को बुलडोजर से ढहा दिया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जावेद के घर से जो साहित्य बरामद हुए उसमें से कई खाड़ी देशों से संबंधित हैं। इसमें कुछ शोध के पेपर भी हैं। कई शोध पत्रों का संबंध पाकिस्तान के प्रोफेसरों से भी है। ‘इज इस्लाम अ वॉयलेंट रिलीजन’ नाम की एक किताब भी मिली है। यह किताब मक्का यूनिवर्सिटी के एक पूर्व प्रोफेसर ने लिखी है। पुलिस के मुताबिक अन्य किताबों और कागजातों की जाँच की जा रही है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक जावेद के घर से पुलिस को 12 बोर और 315 बोर के 2 तमंचे मिले हैं। इसके अलावा कुछ कारतूस भी बरामद किए गए हैं। घर पर बुलडोजर चलने के पहले पुलिस ने पूरे घर की तलाशी ली थी। वहीं इलाहाबाद हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल को 6 वकीलों ने पत्र लिख कर जावेद पंप के मकान पर बुलडोजर चलाए जाने की कार्रवाई को गलत बताया है। इन वकीलों के नाम केके राय, मोहम्मद सईद सिद्दीकी, प्रबल प्रताप, रवींद्र सिंह, नजमुस साकिब खान और रविंद्र सिंह हैं। वकीलों के मुताबिक जिस घर पर बुलडोजर चला है, वह जावेद के ससुर ने अपनी बेटी को गिफ्ट में दिया था।

दिल्ली स्थित UP भवन पर प्रदर्शन

प्रयागराज में जावेद पंप के खिलाफ हुई प्रशासनिक कार्रवाई के विरोध में दिल्ली स्थित UP भवन पर प्रदर्शन हुआ है। प्रदर्शनकारी हाथों में तख्तियाँ लिए हुए थे और योगी सरकार के खिलाफ नारे लगा रहे थे। इस समूह में हिजाब पहनी कुछ मुस्लिम लड़कियाँ सबसे आगे दिखाई दे रही थीं। बताया जा रहा है कि कुछ वामपंथी छात्र छात्र भी इसमें शामिल थे।

₹50 लाख देकर हड़प ली ₹2000 करोड़ की संपत्ति, सोनिया-राहुल के पास 76% शेयर: आसान शब्दों में समझिए ‘नेशनल हेराल्ड’ का ‘खेला’

प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी और उनके बेटे व कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी को पूछताछ के लिए समन भेजा। जहाँ सोनिया गाँधी फ़िलहाल अस्पताल में भर्ती हैं, देश में कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं के शक्ति प्रदर्शन के साथ राहुल गाँधी ED के दफ्तर में पेश हुए। आइए, हम आपको समझाते हैं कि ये नेशनल हेराल्ड मामला है क्या और गाँधी परिवार व कॉन्ग्रेस पार्टी पर कौन सी वित्तीय गड़बड़ियों के आरोप हैं।

सबसे पहले इस मामले में जिन टर्म्स का बार-बार इस्तेमाल हो रहा है, उसे समझ लेते हैं। जैसे, AJL के बारे में आप सुन रहे होंगे। AJL का अर्थ है – एसोसिएट जर्नल लिमिटेड। ये वही प्रकाशन कंपनी थी, जो ‘नेशनल हेराल्ड’ नामक अख़बार निकालती थी। इस अख़बार की स्थापना खुद स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने की थी, जो कई दफे कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष भी रहे। AJL में न सिर्फ जवाहरलाल नेहरू, बल्कि 5000 स्वतंत्रता सेनानियों को शेयरधारक बनाया गया था।

राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली स्थित ITO में इसका पंजीकृत मुख्यालय हुआ करता था। अब दूसरा टर्म जो आप सुन रहे होंगे, वो है – YIL, यानी यंग इंडिया लिमिटेड। ये वो कंपनी है, जिसकी स्थापना 2010 में की गई थी। सोनिया गाँधी और उनके बेटे राहुल गाँधी इसके 76% शेयरों का स्वामित्व रखते हैं, अर्थात मेजोरिटी शेयर्स उनके पास हैं। बाक़ी के 24% शेयर मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मोतीलाल वोरा और पूर्व केंद्रीय मंत्री ऑस्कर फर्नांडिस के पास थे।

ये दोनों ही कॉन्ग्रेस के दिग्गज नेता हुआ करते थे, जिनका अब निधन हो चुका है। मोतीलाल वोरा AJL के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर हुआ करते थे। वो AICC (ऑल इंडिया कॉन्ग्रेस कमिटी) के कोषाध्यक्ष भी रहे हैं। साथ ही ‘यंग इंडियन’ में भी उनके पास 12 शेयर्स थे। इसी तरह ऑस्कर फर्नांडिस भी AJL और YIL के डायरेक्टर रहे थे। अब बात करते हैं कॉन्ग्रेस पार्टी की। ये सब शुरू हुआ ‘नेशनल हेराल्ड’ अख़बार के घाटे में जाने से।

कई वर्षों से सर्कुलेशन कम होने और घाटे में जाने के कारण 2008 में ‘नेशनल हेराल्ड’ अख़बार को बंद कर दिया गया। इसने अपने ऑपरेशन्स बंद कर दिए। लेकिन, दिल्ली, लखनऊ और मुंबई जैसे महानगरों में इसके पाद अकूत संपत्ति थी। अख़बार के पास 2000 करोड़ रुपए की संपत्ति होने का अंदाज़ा लगाया गया। राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम में भागीदारी की बड़ी-बड़ी बातें करते हुए इसी की आड़ में कॉन्ग्रेस ने ‘नेशनल हेराल्ड’ को पुनर्जीवित करने की ठानी।

असली खेल यहीं से शुरू हुआ, जब कॉन्ग्रेस ने अपने पार्टी फंड से अख़बार को 90 करोड़ रुपए का लोन दिया। 2010 में कॉन्ग्रेस ने अपनी नई कंपनी YIL को AJL वाला ऋण असाइन कर दिया। अब AJL ऋण को वापस नहीं कर पाया। फिर उसकी सारी संपत्तियों को YIL को ट्रांसफर कर दिया गया। इस तरह 50 लाख रुपए के बदले AJL की सारी संपत्तियों का मालिकाना हक़ गाँधी परिवार के स्वामित्व वाली YIL के पास चली गई।

ये एक विवादित डील साबित हुआ। 2013 में भाजपा सांसद सुब्रमण्यन स्वामी ने शिकायत दर्ज कराते हुए पूछा कि 1000 शेयरधारकों वाली 2000 करोड़ रुपए की संपत्ति किसी कंपनी से मात्र 50 लाख रुपए का लोन देकर कैसे हड़पी जा सकती है? कुल लोन 90.25 करोड़ रुपए का था, जिसके माध्यम से स्वामी ने गाँधी परिवार पर धोखाधड़ी के करने के आरोप लगाए। कॉन्ग्रेस के इन 4 बड़े नेताओं के अलावा पार्टी की ओवरसीज शाखा के अध्यक्ष सैम पित्रोदा और ‘राजीव गाँधी फाउंडेशन’ के पत्रकार सुमन दुबे भी इस मामले में आरोपित हैं।

2015 में वयोवृद्ध अधिवक्ता शांति भूषण ने दावा किया कि उनके पिता विश्वामित्र भी AJL में शेयरहोल्डर थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि शेयरहोल्डर्स की सहमति लिए बिना ही इसकी संपत्तियों को ‘यंग इंडियन’ को ट्रंसफर कर दिया गया। 2014 में मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट गोमती मनोचा ने गाँधी परिवार समेत सभी आरोपितों को समन किया। मजिस्ट्रेट ने कहा कि IPC की धारा-403 (संपत्तियों को लेकर बेईमानी), 406 (विश्वास को आपराधिक रूप से धोखा) , 420 (ठगी) और 120B (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत केस दर्ज करने का मामला बनता है।

2014 में ED ने मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जाँच शुरू की। 2015 में गाँधी परिवार के माँ-बेटे पटियाला हाउस कोर्ट से जमानत पाने में सफल रहे। फरवरी 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने आरोपितों पर मामला रद्द करने से इनकार कर दिया। ED फ़िलहाल लेनदेन के विवरण, स्वामित्व का पैटर्न और AJL के प्रमोटर्स के रोल की भी जाँच कर रहा है। PMLA के तहत नया केस दर्ज होने के बाद आयकर विभाग (IT) भी मामले को देख रहा है।

‘नेशनल हेराल्ड’ की स्थापना 1937 में हुई थी। AJL तब उर्दू में ‘कौमी आवाज़’ और हिंदी में ‘नवजीवन’ नामक अख़बार निकालता था। नेहरू के लेख इसमें अक्सर आया करते थे। अंग्रेज सरकार ने इसे 1942 में बैन कर दिया था। नेहरू स्वतंत्रता के बाद इसके बोर्ड के अध्यक्ष पद से तो हट गए, लेकिन अख़बार कॉन्ग्रेस से ही चलता रहा। 1963 में इसके सिल्वर जुबली कार्यक्रम में नेहरू ने सन्देश जारी किया। 2016 में इसे फिर से डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में लॉन्च किया गया।

दरअसल, यंग इंडियन को सेक्शन 25 के तहत एक चैरिटेबल संस्था बनाई गई थी, जिसे टैक्स से छूट दी गई थी। गाँधी परिवार की कंपनी ने आयकर विभाग में इस छूट के लिए मार्च 2011 को आवेदन दिया था, जब केंद्र में मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस की सरकार थी और 9 मई 2011 को बिना किसी दिक्कत के इसे मंजूरी भी दे दी गई। एक गैर-लाभकारी संस्था के रूप में पंजीकृत होने के बावजूद यंग इंडियन ने पब्लिशिंग हाउस होने की आड़ में संपत्तियों का अधिग्रहण करना शुरू कर दिया था। इसे वर्ष 2010-11 में भी टैक्स में छूट प्राप्त हुआ।

उम्र 30 साल, वजन 200 किलो: 80 रोटी, 3kg चावल, 2kg मटन… रोज खाता है रफीक, खाना बनाने के लिए किए 2 निकाह

बिहार के कटिहार का मोहम्मद रफीक अदनान अपने वजन को लेकर सुर्खियों में है। 30 वर्षीय अदनान 20 से 30 कदम भी पैदल नहीं चल सकता। एक दिन में 3 बार खाना खाने वाले रफीक की डाइट सुनकर आप चौंक जाएँगे। आज तक की रिपोर्ट के मुताबिक, रफीक दिन भर में 4 किलो आटे से बनी लगभग 80 रोटी और 2-3 किलो चावल खा लेता है।

दै​निक भास्कर की रिपोर्ट में रफीक का वजन 200 किलो बताया गया है। इस रिपोर्ट के अनुसार रफीक के खुराक के अनुसार एक बीवी खाना नहीं बना पाती थी, इसलिए उसने दूसरी निकाह की। रफीक ने बताया, “मैं दिन में 3 बार खाना खाता हूँ। मुझे इतनी भूख लगती है कि पूरे परिवार से 10 गुना खाना मैं अकेले खा सकता हूँ। 1 बोरा चावल (50 किलो) हमारे परिवार में मुश्किल से सात दिन भी नहीं चलता। मैं रोजाना लगभग 2-3 किलो चावल अकेले ही खाता हूँ। इसके साथ 2 लीटर दूध, 1-2 किलो मटन या चिकन भी खाता खाता हूँ। इसके अलावा करीब 3-4 किलो आटे की रोटी खाता हूँ।”

रफीक 6 बहनों और 4 भाइयों में सबसे छोटा है। उसके पिता गोदाम में काम करते थे और माँ घर पर ही रहती थीं। पाँचवी कक्षा तक पढ़े रफीक ने बताया, “मुझे याद है जब मैं 15 साल का था, तब भी मेरा वजन 80 किलो था, लेकिन उस समय इतना अधिक वजन ना होने के कारण मैं खेलता रहता था। फिर धीरे-धीरे मेरी भूख बढ़ती गई और मेरा वजन भी बढ़ता गया। मुझे जो भी मिलता मैं वो सब खा लिया करता था।”

उसने बताया, “मैं जैसे ही पैदल चलने की कोशिश करता हूँ, थक जाता हूँ और फिर मुझे बैठना पड़ता है। थकान के कारण अगर मुझे कभी जाना भी होता है तो मैं बाइक से जाता हूँ। लेकिन कई बार वह भी मेरा वजन नहीं उठा पाती। मैं दिन भर गाँव के लोगों से बात करता रहता हूँ और घर के बाहर ही एक पलंग पर लेटा रहता हूँ।” एक पड़ोसी के अनुसार वजन के कारण रफीक की बाइक भी कभी-कभी धंस जाती है। लोग उसे शादी-विवाह में बुलाने से भी बचते हैं।

बता दें कि डॉक्टर ने उसको हमेशा भूख लगने का कारण बुलिमिया नर्वोसा (Bulimia nervosa) नाम का ईटिंग डिसऑर्डर बताया है। ईटिंग डिसऑर्डर दो तरह के होते हैं। पहला एनोरेक्सिया नर्वोसा (Anorexia nervosa) और दूसरा बुलिमिया नर्वोसा (Bulimia nervosa)। एनोरेक्सिया नर्वोसा में मरीज अपने आपको पतला रखना चाहता है और इसके लिए वो बहुत ज्यादा सोच-विचार कर खाता है। वहीं बुलिमिया नर्वोसा में मरीज का ध्यान हर वक्त खाने पर ही लगा रहता है। लेकिन खाने के बाद उसे अपने बढ़े हुए वजन को लेकर शर्म भी महसूस होती है।

इलाहाबाद HC ने मोहम्मद जुबैर पर दर्ज FIR रद्द करने से किया इनकार, उसकी याचिका को बताया अयोग्य: हिन्दू संतों पर उगला था ज़हर

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने AltNews के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर पर उत्तर प्रदेश में दर्ज FIR को रद्द करने से इनकार कर दिया है। किया था घृणा फैलाने वाला ट्वीट। मोहम्मद जुबैर ने अपने ट्वीट में महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती, बजरंग मुनि और आनंद स्वरूप जैसे धार्मिक नेताओं पर घृणास्पद टिप्पणी की थी। उसके खिलाफ IPC की धारा-295A (धार्मिक भावनाओं का अपमान) के अलावा IT एक्ट की धारा-67 के तहत केस दर्ज किया गया था।

मोहम्मद जुबैर ने इस मामले में राहत के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। मोहम्मद जुबैर ने इन तीनों को ‘घृणा फैलाने वाला (Hate Mongers)’ कहा था, जिसके बाद खैराबाद स्थित ‘बड़ी संगत’ के मुखिया और ‘राष्ट्रीय हिन्दू शेर सेना’ के संरथापक बजरंग मुनि के शिष्यगणों ने विरोध प्रदर्शन किया था। जबकि उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से पेश अधिवक्ता ने कहा कि मोहम्मद जुबैर आदतन ऐसी करतूतें करता रहा है और उस पर पहले भी मामले दर्ज हुए हैं।

उसके खिलाफ एक बच्ची की ऑनलाइन प्रताड़ना के सम्बन्ध में दर्ज केस की भी चर्चा की गई। हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि मामला अभी शुरुआती चरण में ही है और आगे जाँच होनी बाकी है। साथ ही उच्च न्यायालय ने कहा कि इस मामले में सबूत जुटा कर पेश किए जाने के बाद ही कुछ निष्कर्ष निकाला जा सकेगा। कोर्ट ने कहा कि अगर ये आरोप झूठे हैं और जानबूझ कर बदनाम करने के लिए लगाए गए हैं, तो जाँच में ये सब सामने आ जाएगा।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मोहम्मद जुबैर पर दर्ज FIR रद्द करने से किया इनकार

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि FIR रद्द करने का अधिकार दुर्लभ में भी दुर्लभतम मामलों में ही है। साथ ही कहा कि याचिकाकर्ता ने जो बातें कही हैं, वो ट्रायल कोर्ट में सुनवाई और उचित जाँच के बाद ही स्पष्ट हो सकती हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले में जो शुरुआती आरोप लगे हैं, वो जाँच की अनुमति के लिए पर्याप्त हैं। इसीलिए, याचिका को अयोग्य पाते हुए रद्द कर दिया गया।

याद दिला दें कि

मोहम्मद जुबैर ने 27 मई 2022 को किए गए अपने ट्वीट में टाइम्स ऑफ इंडिया के विनीत जैन को टैग करते हुए लिखा था, “बहुत बढ़िया! हमें यति नरसिंहानंद सरस्वती या बजरंग मुनि या आनंद स्वरूप जैसे हेट मोंगर को किसी समुदाय या मजहब के खिलाफ बोलने के लिए धर्म संसद आयोजित करने की क्या जरूरत है, जब उससे बढ़िया काम करने के लिए स्टूडियो में एंकर मौजूद हैं।” महंतों को हेट मोंगर कहने पर राष्ट्रीय हिंदू शेर सेना के सीतापुर जिलाध्यक्ष भगवान शरण ने खैराबाद में FIR दर्ज कराई थी।

बरखा दत्त की ‘Shero’ का हिजाब खींचकर केरल पुलिस ने गाड़ी में बैठाया, प्रयागराज में ‘बुलडोजर’ का एक्शन देख करवा रही थी हाईवे ब्लॉक

साल 2019 में सीएए विरोधी प्रदर्शनों के दौरान Shero बनकर उभरी आयशा रेन्ना एक बार फिर से केरल में प्रदर्शन के कारण चर्चा में आई है। दरअसल, आयशा केरल के मल्लापुरम में भीड़ जुटाकर उस जावेद के घर पर हुई ‘बुलडोजर कार्रवाई’ का विरोध कर रही थी, जो प्रयागराज हिंसा का मुख्य साजिशकर्ता कहा जा रहा है। आयशा पर आरोप है कि उसने मल्लापुरम में हाईवे को ब्लॉक करने के लिए भीड़ का नेतृत्व किया, जिसके बाद केरल पुलिस उस प्रदर्शन में पहुँची और खींचते हुए आयशा को वहाँ से बाहर ले गई।

सामने आई तस्वीर में आयशा नारे लगाने वाली मुद्रा में हैं और केरल की महिला पुलिसकर्मी उनका हिजाब पकड़कर उन्हें खींचते हुए ले जा रही हैं। अगली वीडियो में कुछ अन्य महिला पुलिसकर्मी आयशा को उठाकर गाड़ी में बिठा रही हैं वही आयशा गाड़ी में बैठने से मना कर रही है। ताजा जानकारी के मुताबिक पुलिस ने आयशा को हिरासत में ले लिया है। कुछ लोग आयशा के साथ हुए ऐसे बर्ताव के लिए केरल पुलिस की आलोचना कर रहे हैं। लेकिन कुछ लोग केरल पुलिस को सही भी ठहरा रहे हैं।

बता दें कि आयशा रेन्ना केरल के मल्लापुरम के कोनडोट्टी की रहने वाली है। साल 2019 में जब सीएए एनआरसी के खिलाफ प्रोटेस्ट हुए तो आयशा की तस्वीर मीडिया में वायरल हुई थी। वह अपने साथियों को बचाने के लिए पुलिस के आगे खड़ी दिखी थी। इसके बाद प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते उसकी फोटोज आई, जिन्हें देख बरखा दत्त ने उन्हें अपने ट्वीट में अपनी जामिया और शाहीन बाग की शीरो बताया। 2019 से पहले की बात करें तो आयशा 2015 में भी नागपुर में मुंबई ब्लास्ट के दोषी याकूब मेमन को सजा मिलने पर दुख जता चुकी हैं। हाल में उन्होंने यूपी के दंगों के साजिशकर्ता जावेद पंप और उनकी बेटी आफरीन फातिमा को समर्थन दिया है। आफरीन को लेकर भी पुलिस ने कहा है कि वो भी ऐसी ही गतिविधियों में शामिल हैं।

श्रीलंका में भारतीय कंपनी को पावर प्रोजेक्ट मिलने से राहुल गाँधी निराश, द वायर के ‘प्रोपेगेंडा’ को हथियार बना PM मोदी पर किया वार

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) ने वामपंथी वेबसाइट ‘द वायर’ के एक लेख को आधार बनाकर भाजपा और प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधा है। ‘द वायर’ ने श्रीलंका में अडानी ग्रुप से जुड़े एक सौदे में पीएम मोदी की भूमिका को लेकर लेख प्रकाशित किया था। हालाँकि, श्रीलंकाई राष्ट्रपति इस दावे को नकार चुके हैं। इस संबंध में गलत दावा करने को लेकर सीलोन इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड (CEB) के अध्यक्ष एमसीसी फर्डिनेंडो भी बिना शर्त माफी माँग चुके हैं।

फर्डिनेंडो का कहना है कि वे COPE मीटिंग में भावुक हो गए थे, जिसके कारण उन्होंने झूठ बोल दिया। साथ ही कहा है कि पीएम मोदी को लेकर उन्होंने जो कहा था, वह उसे वापस ले रहे हैं। वहीं, श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे भी इसको नकार चुके हैं।

इसके बावजूद राहुल गाँधी मोदी सरकार पर आरोप लगाने से बाज नहीं आ रहे हैं। यह समझ में नहीं आ रहा है कि कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष एक भारतीय कंपनी के विदेश में एक बड़े प्रोजेक्ट को लगाने को लेकर इतना आगबबूला क्यों हो रहे हैं। राहुल ने ट्विटर के जरिए द वायर के दावों को सच मानते हुए पीएम मोदी पर हमला बोला है। ट्वीट में उन्होंने द वायर के लेख का स्क्रीनशॉट लगाते हुए लिखा है कि बीजेपी की उद्योगपतियों को फायदा पहुँचाने की नीति अब पाल्क स्ट्रीट पार कर श्रीलंका तक चली गई है।

उल्लेखनीय है कि 10 जून को हुई COPE मीटिंग के दौरान CEB चेयरमैन ने दावा किया था कि पवन ऊर्जा का एक टेंडर अडानी ग्रुप को पीएम मोदी के जोर देने पर मिला है। उन्होंने कहा था कि राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे ने उन्हें ये सब बताया। हालाँकि, इस बयान के तुरंत बाद श्रीलंका के राष्ट्रपति ने इन आरोपों का खंडन करते हुए ट्वीट किया था। राजपक्षे ने लिखा था कि उन्होंने किसी भी समय किसी भी संस्था या व्यक्ति को पवन ऊर्जा का टेंडर देने के लिए नहीं कहा है। ऐसे में कहा जा सकता है कि द वायर जैसी वामपंथी झुकाव वाली वेबसाइट ने इस लेख को केवल मोदी सरकार के खिलाफ दुष्प्रचार और नफरत फैलाने के मकसद से प्रकाशित किया।

बता दें कि यह मामला मन्नार पवन ऊर्जा परियोजना के विकास से संबंधित है। अडानी ग्रुप ने मन्नार के पास एक बिलियन डॉलर से अधिक की 1,000 मेगावाट की पवन ऊर्जा परियोजना लगाने की बोली जीती है।

‘राजस्थान में हिन्दुओं पर चुन-चुन कर केस, कइयों को छोड़ना पड़ा पढ़ाई और घर’: करौली के पीड़ित का दर्द, कहा – मुस्लिम पक्ष के साथ सरकार

राजस्थान के करौली में 2 अप्रैल 2022 (शनिवार) को हिन्दू नववर्ष पर निकली शोभायात्रा के दौरान हिंसा हुई थी। मुस्लिम भीड़ के हमले में शोभायात्रा में शामिल हिन्दू कार्यकर्ताओं के साथ हिंसा को काबू कर रहे पुलिसकर्मी भी घायल हुए थे। पुलिस ने अपनी FIR दोनों पक्षों को आरोपित किया था। कुछ लोग जेल काट कर निकल चुके हैं जबकि अभी कई लोग फरार हैं। ऑपइंडिया ने 10 जून, 2022 (शनिवार) को इस घटना में नामजद किए गए वैभव पाल से अभी के हालात की जानकारी ली।

प्रशासन साथ था तो हम निश्चिन्त थे

वैभव पाल ने ऑपइंडिया को बताया, “हमने शोभायात्रा की सभी कानूनी औपचारिकताएँ पूरी की थीं। इसी वजह से प्रशासन हमारे साथ था और हम निश्चिंत थे। जो हुआ उसका तो अनुमान भी नहीं था हमें। जहाँ घटना हुई थी वो जगह मुख्य मार्ग है और मंदिर जाने का रास्ता था। कोई मुस्लिम बहुल आबादी नहीं थी वहाँ। घटना स्थल से लगभग 100 मीटर दूरी से मुस्लिमों के घर शुरू होते हैं। हमला मुख्य मार्ग से हुआ था जिसमें हमलावर औरतें और बच्चे भी शामिल थे।”

हिन्दू हमलावर नहीं बल्कि पीड़ित

बकौल वैभव पाल, “हिन्दुओं की तरफ से हम तो हमला हुआ और न ही हिंसा। हम तो पीड़ित हैं। हमारे लगभग 70 लोग घायल हुए और हमारे वाहनों को भी तोड़ा गया। इसके बाद हम लोगों पर ही केस दर्ज कर दिया गया। अब कई दर्जन हिन्दू पुलिस के डर से घरों से फरार चल रहे हैं। न सिर्फ कई नामजद हिन्दू भागे हुए हैं बल्कि कई अन्य लोग भी सहमें हैं क्योकि पुलिस की FIR में कई आरोपित अज्ञात में भी हैं। मैं इस केस में नामजद हूँ और तब से अपने घर नहीं जा पाया हूँ। हालाँकि पुलिस हमारे परिवार से कोई अभद्रता नहीं कर रही है। शायद उन्हें भी पता है कि हम बेगुनाह हैं। लेकिन कॉन्ग्रेस सरकार न जाने क्या करवा रही है।”

अब खतरे से बाहर है अमित शर्मा की हालत

वैभव पाल ने आगे बताया, “हमले में सबसे ज्यादा अमित शर्मा घायल हुए थे। उन्हें छत से एक बड़ा पत्थर फेंक कर मारा गया था जो कई वीडियो में भी दिखा है। उनकी हालत गंभीर थी इसलिए उन्हें जयपुर भेज दिया गया था। फ़िलहाल अब वो ठीक हैं और उनकी हालत खतरे से बाहर है। इसी के साथ हमारे साथ एक संघ कार्यकर्ता को भी चाकू मार दी गई थी जिनकी हालत अब ठीक है। कई अन्य को भी पत्थर लगे थे लेकिन वो स्थानीय स्तर पर ही इलाज से ठीक हो गए थे।”

घटना के बाद मुस्लिमों ने हिन्दू युवाओं पर चुन-चुन कर दर्ज करवाए केस

वैभव ने बताया, “जिस दिन हिंसा हुई उस दिन पुलिस ने FIR दर्ज कर के दोनों पक्षों के दर्जनों लोगों को नामजद किया। लेकिन उसके लगभग 8 से 10 दिन बीत जाने के बाद मुस्लिम समुदाय के लोगों ने चुन-चुन कर अलग-अलग घटनाओं में कई हिन्दू लड़कों पर FIR दर्ज करवाई। ये FIR अलग-अलग दिनों में लगातार दर्ज हुईं जिनकी संख्या लगभग 80 है। लगभग 60 से 70 हिन्दू युवक इन केसों में नामजद कर दिए गए जिसमें से अधिकतर फिलहाल इधर-उधर छिप और भटक रहे हैं। ये वो हिन्दू युवक हैं जो पुलिस द्वारा दर्ज FIR में नहीं आ पाये थे। इसका मकसद सिर्फ हिन्दुओं की प्रताड़ना है। इसमें कार्रवाई भी एकतरफा हो रही है।” वैभव ने ऑपइंडिया के पास दर्जनों FIR की कॉपी भी भेजी।

पुलिस FIR में दर्ज लगभग कई हिन्दुओं की गिरफ्तारी हुई

वैभव ने आगे कहा, “घटना के दिन पुलिस द्वारा दर्ज करवाई गई FIR में नामजद 1 या 3 को छोड़ कर लगभग सभी लोग गिरफ्तार कर लिए गए हैं। उनमें से कईयों की जमानत भी हो चुकी है। घटना के दिन अपने काम से भी कहीं जा रहे व्यक्ति को पकड़ कर FIR में नामजद किया गया। कार्रवाई एकतरफा हो रही है। FIR में नामजद किए जा रहे अधिकतर 20 से 22 साल की उम्र के हैं। जबकि पुलिस ने अपनी ही FIR में लिखा है कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से हो रहा था। फिर हमको दोषी क्यों बना दिया गया ये अब तक नहीं जान पाया।”

हिंदुत्व और धर्म का काम करने वाले निशाने पर

वैभव ने कहा, “FIR करवाते समय उन सभी पर नजर रखी गई जो हिंदुत्व का काम करते थे। यहाँ तक कि धार्मिक आस्था रखने वाले और पूजा-पाठ करने वालों को भी जान बूझ कर निशाने पर लिया गया। 30-40 लोग ऐसे भी हैं जिन्हें धारा-151 में पकड़ा गया। हिन्दू सेना के साहिब गुर्जर और राजाराम गुर्जर को पुलिस ने हिंसा का मुख्य आरोपित बनाया है। मुस्लिम पक्ष को कॉन्ग्रेस पार्टी के विधायक लाखन सिंह मीणा ने पूरा सपोर्ट किया।”

मुख्य आरोपित मतलूब फरार जबकि उसके करीबी अस्पताल में कम्पाऊंडर

वैभव ने आगे कहा, “अब तक मतलूब नहीं पकड़ा गया। इलाके में चर्चा है कि मुख्य आरोपित कॉन्ग्रेस नेता मतलूब के करीबी मुश्ताक अहमद ने RSS कार्यकर्ता विपिन को चाकू मारी थी। मुश्ताक अहमद यहीं करौली के ही एक सरकारी अस्पताल में कम्पाउंडर है। उस पर पुलिस एक्शन लेगी या नहीं ये नहीं पता पर मुश्ताक अभी भी अस्पताल में दवाएँ बाँटने के काऊँटर पर काम करते हुए बताया जा रहा। करौली में इस बात की भी चर्चा है कि मुख्य आरोपित मतलूब को भागने में कॉन्ग्रेस विधायक ने मदद की थी। मुस्लिमों की तरफ से जेल भेजे गए तमाम लोग जमानत पा चुके हैं।”

फँसाए गए तमाम लोग छात्र इसलिए उनकी आर्थिक स्थिति खराब

वैभव के मुताबिक, “केसों में फँसाए गए अधिकतर लड़के युवा और छात्र जीवन वाले हैं। उनकी आर्थिक स्थिति काफी खराब हैं। उनके पास पैरवी के पैसे नहीं हैं। उनकी पढ़ाई लिखाई भी खराब हो रही है। हम लोगों की तरफ से कोई भी बोलने वाला नहीं है। हिन्दुओं में बहुत ऐसे परिवार हैं जिनके घर की हालत बहुत खराब है और वो जमानत आदि में सक्षम नहीं हैं। जबकि दूसरे पक्ष की तरफ से सीधे सरकार ही काम पर लगी हुई है। उनका साथ कॉन्ग्रेस विधायक ही दे रहा है।”

भारत का अगला राष्ट्रपति किसका? NDA को करना होगा 9194 वोटों का जुगाड़, BJD-YSR के साथ आने के आसार; ममता को लेफ्ट का झटका

चुनाव आयोग ने राष्ट्रपति चुनाव के तारीख की घोषणा कर दी। 18 जुलाई को मतदान होना है और 21 जुलाई को हमें देश का अगला राष्ट्रपति मिल जाएगा। वर्तमान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का कार्यकाल आगामी 25 जुलाई को समाप्त हो रहा है। इससे पहले चुनावी प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। राष्ट्रपति के चुनाव में लोकसभा के सांसद, राज्यसभा सदस्य और विधायक अपना मत डालते हैं, लेकिन विधान परिषद के सदस्य और किसी सदन के नामित सदस्यों को वोट करने का अधिकार नहीं है।

भारत में राष्ट्रपति चुनाव की वर्तमान व्यवस्था 1974 से चली आ रही है और यह 2026 तक लागू रहेगी। इसमें 1971 की जनसंख्या को आधार माना गया है।

किसके पास कितने वोट?

चुनाव के कुल वोटरों की संख्या 4809 है। इसमें लोकसभा के सांसद और सभी राज्यों के विधानसभा के विधायक शामिल हैं। राष्ट्रपति चुने जाने के लिए किसी भी उम्मीदवार को 50 फीसदी वोट चाहिए। एनडीए के पक्ष में 440 सांसद हैं जबकि यूपीए के पास लगभग 180 सांसद हैं। एनडीए के पास तकरीबन 5,35,000 वोट हैं। इसमें उसके सहयोगियों के साथ उसके सांसदों के समर्थन से 3,08,000 वोट शामिल हैं। 

राज्यों में बीजेपी के पास उत्तर प्रदेश से सबसे ज्यादा 56,784 वोट हैं, जहाँ उसके 273 विधायक हैं। उत्तर प्रदेश में प्रत्येक विधायक के पास अधिकतम 208 वोट हैं। राज्यों में एनडीए को बिहार में अपना दूसरा सबसे ज्यादा वोट मिलेगा, जहाँ 127 विधायकों के साथ, उसे 21,971 वोट मिलेंगे, क्योंकि प्रत्येक विधायक के पास 173 वोट हैं। इसके बाद महाराष्ट्र से 18,375 वोट हैं, जहाँ उसके 105 विधायक हैं और प्रत्येक के पास 175 वोट हैं।

वर्ष 2017 के राष्ट्रपति चुनाव के मुकाबले देखा जाए तो भाजपा और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के उसके सहयोगियों के विधायकों में संख्या में कमी आई है लेकिन उसके सांसदों की संख्या में वृद्धि जरूर हुई है। भाजपा के पास 465,797 वोट हैं और उसके गठबंधन सहयोगी के पास 71,329 वोट हैं। यानी कुल मिलाकर 5,37,126 वोट है। NDA को जीत के लिए 9194 और वोटों की जरूरत है।

बहुमत का आँकड़ा आसानी से पार करने के लिए भाजपा की BJD और YSR कॉन्ग्रेस से बातचीत अंतिम दौर में है। दोनों ने ही 2017 के राष्‍ट्रपति चुनाव में बीजेपी का साथ देते हुए राम नाथ कोविंद के लिए वोट किया था। बीजेपी को एक बार फिर इन दोनों से अपने उम्‍मीदवार को समर्थन की उम्‍मीद है। अगर YSR कॉन्ग्रेस या BJD का समर्थन मिल जाता है तो एनडीए उम्‍मीदवार की जीत का रास्‍ता साफ हो जाएगा।

सबसे ज्यादा वोट मिलने पर भी जीत जरूरी नहीं

सामान्य तौर पर चुनाव में जो उम्मीदवार सबसे ज्यादा वोट पाता है वह अपनी सीट पर विजेता घोषित कर दिया जाता है, लेकिन राष्ट्रपति चुनाव में हार या जीत वोटों की संख्या से नहीं बल्कि वोटों की वैल्यू से तय होती है। राष्ट्रपति चुनाव में उम्मीदवार को सांसदों और विधायकों के वोटों के कुल मूल्य का आधा से ज्यादा हिस्सा हासिल करना होता है। इस समय राष्ट्रपति चुनाव के लिए निर्वाचक मंडल या इलेक्टोरल कॉलेज के सदस्यों के वोटों का वेटेज 10,98,903 है। किसी प्रत्याशी को राष्ट्रपति पद के लिए जीत हासिल करने के लिए वोटों के कम से कम 5,46,320 वोटों की जरूरत होगी। यह संख्या हासिल करने वाले प्रत्याशी देश के राष्ट्रपति चुने जाते हैं। 

शरद पवार को विपक्ष का उम्मीदवार बना सकती है कॉन्ग्रेस

इस बीच, कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने राष्ट्रपति चुनाव को लेकर राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (राकांपा) प्रमुख शरद पवार, तृणमूल कॉन्ग्रेस की अध्यक्ष व पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सहित कुछ विपक्ष के नेताओं से संपर्क किया है। राष्ट्रपति चुनाव में बहुमत का आँकड़ा नहीं होने के बावजूद कॉन्ग्रेस ने विपक्ष की ओर से साझा उम्मीदवार को खड़ा कर सकती है। सोनिया गाँधी ने कभी उनकी नागरिकता के मुद्दे पर पार्टी छोड़ने वाले राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी के नेता शरद पवार के साथ ही मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के सीताराम येचुरी एवं तृणमूल कॉन्ग्रेस की अध्यक्ष और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से फोन पर बात की।

माना जाता है कि गाँधी ने इन विपक्षी नेताओं के साथ बातचीत में राष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष की एकजुटता दिखाने की जरूरत पर बल दिया। बताया जा रहा है कि सोनिया गाँधी शरद पवार को संयुक्त विपक्ष का उम्मीदवार बना सकती है। हालाँकि एनसीपी या शरद पवार की ओर से इस मामले में अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

विपक्ष को लामबंद करने में जुटी ममता बनर्जी

बता दें कि ममता बनर्जी ने राष्ट्रपति चुनाव के मद्देनजर राजधानी दिल्ली में 15 जून को विपक्षी दलों के नेताओं की एक बैठक बुलाई है। उन्होंने इसमें गैर एनडीए दलों और विपक्षी पार्टियों के मुख्यमंत्रियों को भी आमंत्रित किया है। यह कॉन्फ्रेंस कांस्टीट्यूशन क्लब में होगी। जिन प्रमुख नेताओं को इसमें बुलाया गया है इसमें कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी, आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल, सीताराम येचुरी, उद्धव ठाकरे सहित विपक्ष के 22 नेताओं के नाम शामिल हैं।

बता दें कि राष्ट्रपति चुनाव के लिए अधिसूचना 15 जून को जारी की जाएगी। नामांकन की अंतिम तिथि 29 जून और नामांकन पत्रों की जाँच 30 जून को निर्धारित की गई है। उम्मीदवार अपना नामांकन दो जुलाई तक वापस ले सकते हैं।

राहुल गाँधी से ED कर रही पूछताछ, प्रियंका भी गईं साथ: जिनको हुड़दंग के लिए कॉन्ग्रेस ने जुटाया वे भी विरोध के मुद्दे से अनजान, हिरासत में कई नेता

नेशनल हेराल्ड से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग केस में कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी प्रवर्तन निदेशालय के कार्यालय अपनी बहन व पार्टी महासचिव प्रियंका गाँधी के साथ पहुँचे। इस दौरान उनके साथ पार्टी के कई अन्य वरिष्ठ नेता भी साथ रहे। ईडी कार्यालय के बाहर पहुँचते ही सैंकड़ों की तादाद में वह अपने कार्यकर्ताओं के साथ आगे बढ़े। हालाँकि मौके पर तैनात पुलिस ने अन्य लोगों को वहीं रोक दिया और ज्यादा हुड़दंग मचाने वाले व बिन अनुमति इकट्ठा हुए लोग हिरासत में लिए गए। प्रदर्शनस्थल पर कुछ महिलाएँ भी पहुँची जिनसे सवाल किए जाने पर पता चला कि प्रदर्शनस्थल पर इकट्ठा भीड़ को ये भी नहीं पता कि वहाँ हो क्या रहा है।

हिरासत में लिए गए कॉन्ग्रेस नेता

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, दिल्ली पुलिस द्वारा हिरासत में लिए गए लोगों में कॉन्ग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी, केसी वेणुगोपाल भी शामिल हैं। पुलिस उन्हें तुगलक रोड थाने में लेकर गई। उनके अलावा दीपेंद्र सिंह हुड्डा, अशोक गहलोत भी हिरासत में लिए गए हैं। इन लोगों को फतेहपुर थाने ले जाया गया है।

बता दें कि राहुल गाँधी के साथ एकजुटता दिखाने के लिए दिल्ली में अलग-अलग राज्यों से कॉन्ग्रेस नेता आए हैं। अधीर रंजन चौधरी जहाँ राहुल गाँधी के साथ न जा पाने के लिए कारण मीडिया में शिकायतें कर रहे हैं। वहीं कार्ति चिदंबरम ने दावा किया है कि ईडी का पूरा केस ही फर्जी है। उन्हें भी ईडी से कई बार नोटिस मिल चुके हैं। इसलिए वो इन मामलों में जानकार हैं।

ईडी कार्यालय के बाहर नारेबाजी

ईडी कार्यालय के बाहर कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ता लगातार राहुल गाँधी जिंदाबाद, जिंदाबाद के नारे बुलंद कर रहे हैं। केंद्र पर जाँच एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाया जा रहा है। राजस्थान सीएम अशोक गहलोत भी प्रदर्शन में शामिल हुए हैं। उन्होंने कहा है कि देश में जो कुछ भी चल रहा है उसे किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उनके अलावा जयराम रमेश, सचिन पायलट, मल्लिकार्जुन खड़गे, कार्ति चिदंबरम आदि शामिल हैं।

मुद्दे से अंजान महिलाएँ पहुँची प्रदर्शन में

राहुल गाँधी के लिए प्रदर्शन में कुछ महिलाएँ भी आती दिखीं। मीडिया ने जब इन महिलाओं से पूछा कि वो प्रदर्शन में क्यों आई हैं तो बुजुर्ग महिला को कहते सुना गया- “हमारी बात नहीं सुनी जाती, महंगाई बढ़ रही है, हमारा घर कहाँ से चलाएँ।” रिपोर्टर ने पूछा कि क्या वो लोग जानती हैं कि ये प्रदर्शन क्यों हैं। इस पर महिला ने कहा राहुल गाँधी के लिए है इसलिए वो लोग मिलने आई हैं। जब रिपोर्टर ने दोबारा सवाल किया तो महिलाएँ कैमरे से अलग चली गईं।

पुलिस ने प्रदर्शन से किया मना

पुलिस ने इस संबंध में बताया कि कॉन्ग्रेस नेताओं ने उन्हें पिछली रात 200 अधिकारी, सांसदों और वरिष्ठ नेताओं समेत 1000 कार्यकर्ताओं को कॉन्ग्रेस हेडक्वार्टर के बाहर इकट्ठा होने की परमिशन माँगी थी। लेकिन पुलिस ने उन्हें साफ कहा था कि अगर उन्हें इतना बड़ी भीड़ इकट्ठा करनी है तो वो जंतर-मंतर जा सकते हैं। क्षेत्र में धारा 144 लगा दी गई थी। इसलिए पुलिस उन्हें अनुमति नहीं दे सकती थी। पुलिस ने 100 लोगों को जाने की अनुमति दी। फिर आज सुबह पता चला कि 198 लोग कॉन्ग्रेस कार्यालय जाएँगे। बाद में ये लिस्ट 200 हो गई। पुलिस की मानें तो उन्होंने कॉन्ग्रेस नेताओं को इतने लोगों की अनुमति दी और बिन अनुमति के लगी भीड़ से लोगों को हिरासत में लिया। पुलिस ने कहा कि अब हालात स्थिर हैं। किसी प्रकार के प्रदर्शन को अनुमति नहीं दी गई है।