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6 FIR, जेल, परीक्षा छूटी: 22 साल के छात्र ने जिस पोस्ट को लेकर इतना भोगा उसमें शरद पवार का नाम भी नहीं, हाई कोर्ट ने उद्धव सरकार को फटकारा

नासिक के 22 वर्षीय छात्र निखिल भामरे की रिहाई को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से जवाब तलब किया है। सोशल मीडिया में एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार पर कथित तौर पर पोस्ट करने के कारण भामरे जेल में बंद है। इसी साल मई में इस पोस्ट को लेकर उसकी गिरफ्तारी हुई थी। अपनी रिहाई को लेकर उसने हाई कोर्ट में अपील कर रखी है।

बॉम्बे हाई कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से पूछा कि क्या वह हर उस ट्वीट पर संज्ञान लेंगे जो उन्हें आपत्तिजनक लगता है। छात्र की गिरफ्तारी करने के मामले में कोर्ट ने कहा कि एनसीपी प्रमुख खुद नहीं चाहेंगे कि एक छात्र जेल में रहे।

जस्टिस एसएस शिंदे की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने छात्र निखिल भामरे द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई के दौरान पब्लिक प्रॉजिक्यूटर को गृह विभाग से निर्देश लेकर बताने को कहा कि उन्हें फार्मेसी छात्र की रिहाई से कोई आपत्ति तो नहीं होगी। इस याचिका में निखिल ने खुद के ऊपर दर्ज केस को चुनौती दी थी। कोर्ट ने छात्र की याचिका पर गौर करते हुए पाया कि सोशल मीडिया के जिस पोस्ट पर उसकी गिरफ्तारी की गई उसमें हकीकत में कोई व्यक्ति विशेष का नाम ही नहीं है। इस गिरफ्तारी के कारण निखिल की परीक्षा भी छूट गई।

जस्टिस शिंदे ने यह सब देख महाराष्ट्र सरकार को फटकार लगाई। शिंदे ने कहा, “सोशल मीडिया पोस्ट में किसी का नाम नहीं है… और आप (सरकार) किसी को एक महीने के लिए जेल में रखते हैं। यह सब कुछ करने का अधिकार कैसे हैं।”

जस्टिस ने महाराष्ट्र सरकार से पूछा, “हर दिन सैंकड़ों-हजारों पोस्ट किए जाते हैं। क्या आप हर ट्वीट पर संज्ञान लेंगे?” कोर्ट ने कहा कि वह इस तरह की एफआईआर नहीं चाहते हैं। कुछ अन्य छात्रों को भी इस तरह हिरासत में रखा गया है। अदालत बोली कि इस प्रकार एक व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज करना शरद पवार की प्रतिष्ठा के लिए किसी सोशल मीडिया पोस्ट से अधिक हानिकारक है।

कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को समझाया, “यदि आप इस प्रकार की कार्रवाई करेंगे तो आप उस व्यक्ति के नाम को नुकसान पहुँचाएँगे जिसे देश का दूसरा सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार मिल चुका है। ये सब उस शख्सियत को भी नहीं पसंद आएगा। कोर्ट नहीं चाहता कि उस बड़े व्यक्तित्व के सम्मान में कमी आए।”

कोर्ट ने इस केस की अगली सुनवाई की तारीख 16 जून रखी है। कोर्ट ने पब्लिक प्रॉजिक्यूटर को कहा है कि वो गृह विभाग से छात्र की रिहाई पर अनापत्ति का बयान लाएँ। कोर्ट ने यह भी समझाया कि अगर गृह विभाग इस छात्र की रिहाई के लिए तैयार हो जाता है तो राज्य की छवि बचेगी।

बता दें कि 22 साल के निखिल भामरे नामक छात्र की गिरफ्तारी 11 मई की शाम हुई थी। उनपे 6 एफआईआर हुईं। आरोप लगा था कि उन्होंने शरद पवार पर आपत्तिजनक बात कही। हालाँकि जब कोर्ट ने ट्वीट देखा तो उसमें किसी शख्स की बात नहीं थी। ट्वीट में लिखा था, “बारामती के गाँधी, बारामती में नाथू गोडसे को बनाने का समय आ गया है।” अब चूँकि बारामती शरद पवार का गृह नगर है, इसलिए इस ट्वीट को उनसे जोड़ लिया गया और आईपीसी की धारा 153, 153ए, 500, 501, 504, 505, 506 के तहत केस दर्ज होने के बाद नासिक की डिंडोरी पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

बुर्किना फासो में बड़ा आतंकी हमला, जिहादियों ने 100+ नागरिकों को उतारा मौत के घाट: इलाके में अलकायदा-ISIS रहा है सक्रिय

अफ्रीकी देश बुर्किना फासो में सप्ताहांत में जिहादी हमलों में कम से कम 100 नागरिकों के मारे जाने की खबर सामने आई है। एक स्थानीय नागरिक और एक सुरक्षा सूत्र ने सोमवार (13 जून 2022) को इसकी जानकारी दी। वहीं सरकार का कहना है कि बुर्किना फासो में हुए जिहादी हमलों में कम से कम 50 नागरिक मारे गए हैं।

हमलावरों ने शनिवार और रविवार की रात सेनो प्रांत के सेतेंगा कम्यून में हमला किया था, जो सीमावर्ती इलाकों में स्थित है। यहाँ अल कायदा और इस्लामिक स्टेट से जुड़े आतंकवादी लंबे समय से विद्रोह कर रहे हैं। हमलावरों ने इस भयानक हमले में नागरिकों को निशाना बनाया। एक स्थानीय सूत्र ने रॉयटर्स को बताया कि इस हमले में कम से कम 100 लोग मारे गए हैं।

नाम न बताने की शर्त पर एक अन्य स्थानीय सूत्र ने रायटर्स को बताया कि अस्थायी तौर पर मरने वाले नागरिकों की संख्या 165 थी। वहीं संयुक्त राष्ट्र ने सोमवार को एक बयान में हमले की निंदा की और अधिकारियों को लोगों को जल्द से जल्द न्याय दिलाने की सलाह दी। ऐसा कहा जा रहा है कि सरकार बाद में मरने वालों की सही संख्या जारी कर सकती है।

बता दें कि हथियारबंद लोगों ने पिछले हफ्ते इसी इलाके में 11 जवानों की हत्या कर दी थी। सिर्फ 2019 में ही माली, नाइजर और बुर्किना फासो में हुए जिहादी हमलों में 4000 लोगों की जान गई थी और कम से कम 6 लाख लोगों को अपना घर छोड़कर भागना पड़ा था।

‘किसानों और सरकार में होगी भयंकर लड़ाई, मैं खुद उतरूँगा मैदान में’: राज्यपाल सत्यपाल मलिक का ऐलान – अडानी का गोदाम उखाड़ फेंको

अपने विवादित बयानों के कारण अक्सर विवादों में रहने मेघालय के गवर्नर सत्यपाल मलिक (Satya Pal Malik) ने एक बार फिर केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधा है। सत्यपाल मलिक ने कहा, “किसानों का आंदोलन अभी खत्म नहीं हुआ है। उन्होंने सिर्फ धरना खत्म किया है। अगर समय रहते MSP पर कानून नहीं बनाया, तो देश में किसानों और सरकार के बीच भयंकर लड़ाई होगी। मैं खुद अपना इस्तीफा जेब में लेकर घूमता हूँ, किसानों के लिए 4 महीने बाद मैदान में उतर जाऊँगा।”

उन्होंने रविवार (12 जून 2022) को जयपुर में राष्ट्रीय जाट संसद को संबोधित करते हुए अंबानी-अडानी पर भी पर हमला बोला। मलिक ने किसानों को भड़काते हुए कहा, “अडानी ने किसानों की फसल सस्ते दाम पर खरीदने और महँगे दामों पर बेचने के लिए पानीपत में बड़ा गोदाम बनाया है। अडानी का ऐसा गोदाम उखाड़ फेंको। डरने की जरूरत नहीं है, मैं आपके साथ जेल चलूँगा। अडानी और अंबानी मालदार कैसे हो गए हैं, जब तक इन लोगों पर हमला नहीं होगा, तब तक ये लोग रुकेंगे नहीं।”

राज्यपाल सतपाल मलिक ने आगे कहा, “जब किसान आंदोलन में हमारे लोग सड़कों पर मरने लगे, तब मैं अपना इस्तीफा जेब में लेकर प्रधानमंत्री जी से मिलने गया। मैंने उन्हें समझाया कि इन लोगों के साथ ज्यादती हो रही है। कुछ ले-देकर इन्हें हटा दीजिए। उन्होंने कहा कि वे चले जाएँगे। इस पर मैंने उनसे कहा ये किसान समझौता करने वाली कौम नहीं है। बाद में उन्हें समझ में आया। तब उन्होंने माफी माँगकर कानून वापस लिए।”

गौरतलब है कि इससे पहले मार्च में सत्यपाल मलिक ने किसानों को हिंसा के लिए भड़काते हुए केंद्र की मोदी सरकार को धमकी दी थी। उन्होंने कहा था कि अगर किसानों की माँगें नहीं मानी गईं तो वो उन्हें मनवाने के लिए हिंसा का रास्ता अपना सकते हैं। उन्होंने कहा था, “दिल्ली को मेरी सलाह है कि उनके साथ न भिड़े, वे खतरनाक लोग हैं। किसानों का मुद्दा उठाने के कारण मुझे अपना राज्यपाल का पद खोने का कोई डर नहीं है। किसान जो चाहते हैं, उसे हासिल कर के रहेंगे।”

आरक्षण के लिए सड़क पर उतरे कुशवाहा, सैनी, माली और मौर्य समाज: राजस्थान में हाइवे जाम, लाठी लेकर पहुँचे हजारों लोग

राजस्थान (Rajasthan) के भरतपुर में 12 प्रतिशत आरक्षण (12 Percent Reservation) की माँग को लेकर कुशवाहा, सैनी, माली और मौर्य समाज के लोग सड़कों पर उतर गए हैं। ये आंदोलनकारी रविवार (12 जून 2022) से जयपुर-आगरा नेशनल हाईवे पर प्रदर्शन कर रहे हैं। यह आंदोलन राजस्थान फुले आरक्षण संघर्ष समिति के बैनर तले किया जा रहा है। आंदोलनकारी जयपुर आगरा हाइवे पर अरौदा के पास जाम लगाकर बैठे हैं। ये लोग सरकार के प्रतिनिधि से बातचीत पर अड़े हैं। सोमवार (13 जून, 2022) को आंदोलनकारियों से बातचीत करने के लिए जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक नेशनल हाइवे पर पहुँचे थे, लेकिन आंदोलनकारियों ने उनसे कोई बात नहीं की।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, आरक्षण की माँग को लेकर पहले महापंचायत की गई थी और आंदोलन में शामिल होने के लिए लोगों को पीले चावल तक बाँटे गए थे। महापंचायत को देखते हुए अधिकारियों के अलावा भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। पंचायत खत्म होने से पहले ही लाठियाँ लेकर हजारों लोग हाईवे पर पहुँच गए और जाम लगा दिया। कुशवाहा, सैनी, माली और मौर्य समाज की माँग है कि प्रदेश में उनकी जनसंख्या 15 प्रतिशत है, इसलिए उनको 12 प्रतिशत आरक्षण दिया जाए। माली समाज के लोग पहले ही सरकार की अल्टीमेटम दे चुके हैं।

आंदोलनकारी पुलिस और प्रशासन के अधिकारी से बात करने के लिए तैयार नहीं है। उनका कहना है कि वह सरकार के प्रतिनिधि से ही बात करेंगे। सुबह से महापंचायत में कोई भी राजस्थान सरकार का प्रतिनिधि नहीं पहुँचा। इसके बाद सैकड़ों की संख्या में लोग हाथों में लाठियाँ लेकर नेशनल हाईवे पर जाम लगाकर बैठ गए। हालाँकि, आंदोलनकारी एम्बुलेंस को निकलने दे रहे हैं।

सैनी समाज आरक्षण आंदोलन संघर्ष समिति के संयोजक मुरारीलाल सैनी का कहना है कि वह पिछले 6 सालों से माली समाज को आरक्षण दिलाने की माँग को लेकर आंदोलन कर रहे है। उन्होंने कहा कि अब तक वह प्रदेश के 33 जिला कलेक्टर को ज्ञापन दे चुके हैं और 4500 से अधिक गाँवों में नुक्कड़ सभाएँ की गई, लेकिन हमारी माँग कोई भी नहीं सुन रहा है। इसलिए हमें हाइवे पर उतरना पड़ा।

बिजनेस वुमन के साथ ‘लव जिहाद’: ‘राहुल जैन’ बन कर वसीम खान ने की दोस्ती, 2 साल में कई बार बलात्कार, भाई नसीम ने भी की जबरदस्ती

राजस्थान की राजधानी जयपुर से ‘लव जिहाद’ का मामला सामने आया है। बिजनेस वुमन को युवक ने अपने जाल में फँसा कर उसका कई बार बलात्कार भी किया। आरोपित का नाम वसीम खान है, जिसने ‘राहुल जैन’ छद्म नाम रख कर 34 वर्षीय महिला को अपने जाल में फाँसा। पीड़िता ऑनलाइन कपड़ों का व्यापार करती है। आरोपित ने उसे 2 वर्षों से लिव-इन रिलेशनशिप में रखा हुआ था। ये घटना जयपुर के वैशालीनगर थाना क्षेत्र की है। पुलिस ने मेडिकल कराया है।

‘दैनिक भास्कर’ की खबर के अनुसार, SHO हीरालाल सैनी ने जानकारी दी कि खातीपुरा वैशाली नगर की रहने वाली महिला ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है। वो अपने पति से तलाक के बाद दो बच्चों के साथ यहाँ पर रहती है। 2020 में फेसबुक से उसकी दोस्ती एक युवक के साथ हुई, बातचीत के दौरान दोनों ने एक-दूसरे को अपना फोन नंबर दिया। पति से तलाक के बारे में पता चलने के बाद युवक ने महिला से मिलने की इच्छा जताई।

मई 2020 में वसीम खान उससे मिलने के लिए जयपुर आया था। युवक ने उससे शादी का वादा कर के उसके साथ बलात्कार किया। आरोपित ने लालच दिया कि वो उसके साथ रह कर उसके बिजनेस में भी हाथ बँटाएगा व मदद करेगा। लिव-इन रिलेशनशिप में रह कर दोनों साथ-साथ बिजनेस भी करने लगे। आरोप है कि 2 साल साथ रहने के दौरान वसीम खान ने उसका कई बार बलात्कार किया। एक सप्ताह पहले आरोपित उसे अपने घर मेरठ भी ले गया था।

मेरठ में पीड़िता उसके साथ 2 दिनों तक रही। पुलिस ने जानकारी दी है कि घर में एक बार महिला को अकेला पाकर वसीम खान के छोटे भाई ने भी उसके बलात्कार की कोशिश की। चिल्लाने पर वो भाग गया। उसी दौरान महिला को कथित ‘राहुल जैन’ की असली सच्चाई भी पता चली। वसीम के भाई का नाम नसीम खान है, जिसने पीड़िता के साथ बदतमीजी की। 11 जून को सुबह 5 बजे भाग कर वो किसी तरह जयपुर पहुँची। अब आरोपित उसके बच्चों की हत्या की धमकी देते हुए वापस बुला रहे हैं।

गाय के गोबर के बिना फीका होगा कुवैत का खजूर, इस्लामी मुल्क ने भारत से खरीदा 192000 किलो गाय का गोबर: वैज्ञानिक रिसर्च के बाद फैसला

कृषि क्षेत्र में पशु उत्पादों के निर्यात मामले में भारत पहले से ही एक बड़ा हब रहा है, वही अब इसमें एक और बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। कृषि क्षेत्र में भारत में पशु उत्पादों का सफल इस्तेमाल हजारों वर्षों से होता आ रहा है। इस्लामी मुल्क कुवैत के एक वैज्ञानिक रिसर्च में पता चला है कि फसलों के लिए गाय का गोबर काफी उपयोगी है, जिसके बाद भारत को इसके लिए आर्डर दे दिया गया है। पहली खेप में 192 मीट्रिक टन गाय का गोबर कुवैत भेजा जाएगा। गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह से इसे कुवैत भेजा जाएगा।

बताया जा रहा है कि ये पहली बार है जब भारत को कुवैत से गाय के गोबर के लिए ऑर्डर मिला है। भारत इससे पहले पशु उत्पादों में मानस और पशुओं के खाल के अलावा दूध और दूध से बने अन्य प्रोडक्ट्स का निर्यात करता रहा है। अब गाय के गोबर की गुणवत्ता को विदेशी वैज्ञानिक रिसर्चों में पुष्टि मिलने के बाद भारत को और भी ऑर्डर्स मिल सकते हैं। सबसे बड़ी बात कि ये निर्यात सरकारी नहीं, बल्कि सहकारी स्तर पर हो रहा है। कुवैत ने पाया है कि गाय के गोबर के इस्तेमाल से खजूर के फसल का आकर और उत्पादन बढ़ता है।

गोभक्तों का भी इसमें बड़ा योगदान है। जयपुर के टोंक मोड़ पर स्थित पिंजरापोल गौशाला स्थित ‘सनराइज आर्गेनिक पार्क’ में कस्टम विभाग की देखरेख में कंटेनरों में गाय के गोबर की पैकिंग का काम चालू है। बुधवार (15 जून, 2022) को कनकपुरा रेलवे स्टेशन से पहली खेप रवाना की जाएगी। ‘भारतीय जैविक किसान उत्पादक संघ’ के अध्यक्ष डॉ अतुल गुप्ता के प्रयासों से ये सफलता मिली है। ‘सनराइज एग्रीलैंड एंड डेवलपमेंट रिसर्च प्राइवेट लिमिटेड’ को ये ऑर्डर मिला है। लैमोर नामक कंपनी ने गोबर मँगाया है।

कंपनी के डायरेक्टर प्रशांत चतुर्वेदी का कहना है कि भारत में पहली बार शायद इस किस्म का कुछ हो रहा है। उन्होंने बताया कि 2020-21 में भारत का पशु उत्पाद निर्यात 27,155.56 करोड़ रुपए था और जैविक खाद की माँग लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कई वैज्ञानिक रिसर्चों का हवाला देते हुए बताया कि गाय के गोबर के इस्तेमाल से हुई फसल से कई बीमारियाँ भी ठीक होती हैं। भारत के मवेशी रोज 30 लाख टन के आसपास गोबर देते हैं। चीन 1.5 करोड़ परिवारों को बिजली देने के लिए गोबर का इस्तेमाल करता है।

महाराष्ट्र के बाद अब बंगाल पुलिस ने नूपुर शर्मा को जारी किया समन, पूछताछ के लिए पेश होने को कहा: TMC के अबू सोहैल ने कराई थी FIR

पैगंबर मुहम्मद और उनकी बीवी आयशा के बारे में कथित टिप्पणी को लेकर कोलकाता पुलिस ने बीजेपी की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा (Nupur Sharma)को सोमवार को समन जारी किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, नारकेलडांगा पुलिस स्टेशन (Narkeldanga Police Station) ने यह समन जारी किया है। पूर्व भाजपा नेता को सीआरपीसी की धारा 41 ए के तहत 20 जून को पूछताछ के लिए तलब किया गया है।

पुलिस ने नूपुर शर्मा के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 34, 153 ए (धर्म के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना) के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। उनके ऊपर आईपीसी की धारा 295ए (जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कृत्य, जिसका उद्देश्य किसी भी वर्ग की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाना) और 298 (किसी भी व्यक्ति की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के इरादे से बोले गए शब्द) के तहत भी आरोप लगाए गए हैं।

इससे पहले तृणमूल कॉन्ग्रेस अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के नेता अबू सौहेल ने उनके खिलाफ पश्चिम बंगाल के पुरबा मेदिनीपुर जिले के कांथी पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। अबू सोहैल के मुताबिक, नूपुर शर्मा ने पैगंबर मोहम्मद का अपमान किया है और इसलिए उनके खिलाफ एक्शन होना ही चाहिए। उसने धमकी दी थी कि अगर पुलिस उसे गिरफ्तार नहीं करती है तो वह सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करेगा। मुंबई पुलिस ने भी पूर्व भाजपा प्रवक्ता को समन जारी किया है और उन्हें 25 जून, 2022 को सुबह 11:00 बजे पेश होने के लिए कहा है। इसके अलावा मुंब्रा थाने से भी नूपूर को 22 जून को पेश होने को कहा गया है।

बता दें कि नूपुर शर्मा (Nupur Sharma) के खिलाफ जब से ऑल्ट न्यूज के को-फाउंडर जुबैर ने कट्टरपंथियों इस्लामवादियों को भड़काया है, तभी से उन्हें लगातार जान से मारने की धमकियाँ दी जा रही हैं। पाकिस्तान के आतंकी संगठन TLP के समर्थकों ने शर्मा पर 50 लाख रुपए का इनाम घोषित किया था।

हैदराबाद की स्थानीय पार्टी AIMIM (इंकलाब) ने 29 मई 2022 को नूपुर शर्मा की हत्या करने वाले को 1,00,00,000 रुपए का इनाम देने का ऐलान किया था। इसके नेता कवी अब्बासी का नूपुर शर्मा को धमकी देने और हिन्दू धर्म को लेकर अपमानजनक टिप्पणी करने का वीडियो सामने आया था। इसमें वह शर्मा को ‘सफेदपोश वेश्या’ कहता है।

वहीं, नूपुर शर्मा ने दावा किया है कि पैगंबर मुहम्मद के बारे में उनकी टिप्पणी ‘भगवान शिव का अपमान’ किए जाने की प्रतिक्रिया के रूप में थी, क्योंकि वह इसे बर्दाश्त नहीं कर सकीं। पार्टी से निलंबित किए जाने के बाद उन्होंने इसके लिए माफी भी माँग ली है। इसके बावजूद कट्टरपंथी लोगों द्वारा उन्हें लगातार जान से मारने की धमकी दी जा रही है।

स्वीमिंग पूल में नहाते-नहाते मुस्लिमों के लिए रो पड़ीं चंदा-ए-आज़म राणा अयूब: इंस्टाग्राम और ट्विटर से हुआ खुलासा

कहते हैं आर्कमडीज़ को नहाते-नहाते भौतिकी का एक सिद्धांत दिमाग में आया था और वो बिना कपड़े पहने ही ‘यूरेका-यूरेका’ चिल्ला कर बाथटब से निकल लिए थे। न्यूटन भी अपने बगीचे में चिल्ल मार रहे थे कि सर पे सेब गिरा और उन्हें गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत का ज्ञान प्राप्त हुआ। बड़े-बड़े लोग छोटी-छोटी बातों में जीवन का गूढ़ रहस्य ढूँढ़ ही लेते हैं। ऐसा ही कुछ किया है इस्लामी पत्रकारिता की बहुत बड़ी वाहक और चंदाकार सुश्री राणा अयूब ने। 

दरअसरल राणा इन दिनों अपने परिवार के साथ छुट्टियों पर केरल गई हुई हैं। तस्वीरों से लगता है कि वो किसी बड़े रिजॉर्ट में होंगी जहाँ एक बड़ा सा एक ऐसा स्वीमिंग पूल भी है जिसे देख आप और हम शायद इस सोच में डूब जाएँ कि कहीं पानी ठंडा या पूल गहरा तो नहीं है। पर, इसी स्वीमिंग पूल में रविवार की शाम जब राणा अयूब अपनी सेल्फ़ी ले रही थीं तो उनके दिलो-दिमाग़ में बस उन्हीं लोगों की चिंता थी जिनके स्वीमिंग पूल तो छोड़िए योगीजी ने जिनके लिए बाथरूम तक न छोड़ा और पूरा मकान तुड़वा दिए। 

जब हमें राणा अयूब के इस दुख का पता चला तो हमने उनके सोशल मीडिया अकॉउंट खंगालकर उस तस्वीर और वीडियो को निकाला जिसे देख साफ हो गया कि वो स्वीमिंग पूल में नहाते-नहाते भी देश के मुस्लिमों की चिंता में इतना डूबीं थी कि उनके काले चश्मे के बावजूद आँसू रुक न सके और इतना बहे कि स्वीमिंग पूल का पानी, समुद्र के पानी जितना खारा हो गया। हमने जब वह वीडियो देखी तो हमें भी लगा कि आखिर परिवार के साथ छुट्टी मनाते-मनाते भी राणा के कंधों पर कौम की कितनी जिम्मेदारी है कि एक ओर उन्हें स्वीमिंग पूल में खड़े रहकर फोटो भी निकालनी है और दूसरी ओर कौम पर क्या अत्याचार हो रहे हैं इसकी सूचना आगे तक देनी है।

ट्रोल्स उनकी इस जिम्मेदारी को नहीं समझते। वो बस इस बात पर आपत्ति जताने में लगे हैं कि अगर राणा वाकई मुस्लिमों के प्रति चिंतित हैं तो इतनी चिल्ल करने वाली तस्वीरें इंस्टा पर क्यों डाल रही हैं… तो ऐसे ट्रोल्स को राणा पर सवाल उठाने से पहले ये ध्यान देने की जरूरत है कि राणा ने अपनी वीडियो में पाउट बनाया है। पाउट का मतलब होता है होठों को गोल और छोटा बनाना। अब ट्रोल्स क्या इतना भी नहीं समझ सकते कि क्रूर योगी सरकार ने बुलडोजर कार्रवाई कर करके उनका व उनकी कौम के लबों को छोटा कर दिया है, बोलने की स्वतंत्रता कम कर दी है!

जैसे राणा का पाउट योगी जी की फासीवादी नीतियों का एक प्रमाण है वैसे ही उनका काला चश्मा भी कोई स्वैग के लिए नहीं लगाया गया। राणा ने उसे लगाया है ताकि वह उससे अपने आँसू छिपा सकें जो यूपी में बुलडोजर कार्रवाई देख उनकी आँखों से बह रहे हैं।

आप यदि राणा के ट्विटर पर जाएँगे तो आपको लगेगा ही नहीं कि राणा ने अपने काम से ब्रेक लिया है। वह लगातार ट्विटर पर पोस्ट कर करके अपने समुदाय पर होते अत्याचार का दुख व्यतीत कर रही हैं। वहीं इंस्टा पर क्लोज फ्रेंड्स के लिए स्वीमिंग पूल सेल्फी भी भेज रही हैं। सोशल मीडिया पर इतने बैलेंस ढंग से किए जा रहे पोस्ट से आपको आखिर दिक्कत ही क्या है। अगर दोनों ही पोस्ट एक समय शेयर किए जा रहे हैं तो क्या जरूरी है इस बात को पूछना कि एक सोशल मीडिया पर इतना गंभीर पोस्ट और एक पर इतना चिल्ल करता पोस्ट क्यों शेयर किया।

ट्रोलर्स को नहीं पता चलता लेकिन जो लोग उन्हें लगातार फॉलो करते हैं उन्हें मालूम है कि राणा के सिर पर कितना भार है। उन्होंने जब ट्विटर पर दंगाइयों को मुस्लिम कार्यकर्ता बताकर उनके घरों पर होती कार्रवाई का दुख जताया तो वह वैकेशंस पर थीं। कोई करता है क्या वैकेशंस पर भी कौम के लिए काम…?

राणा अयूब के पोस्ट के पीछे असली कहानी

राणा अयूब के अलग-अलग सोशल मीडिया पर अलग-अलग मूड को दिखाते पोस्ट चंद घंटे पहले के हैं। हम समझ सकते हैं कि व्यथित होकर उन्होंने इस ट्वीट को किया होगा। जब हमने उनकी यही व्यथा समझने के लिए उनके इंस्टा अकॉउंट को देखा तो हमें पता चला कि अल्पसंख्यकों पर होते अत्याचारों की बात विदेश तक पहुँचाते पहुँचाते वह इतना थक गईं कि कुछ दिन पहले ही परिवार संग छुट्टियों पर गई थी। लेकिन इसी बीच क्रूर योगी सरकार ने जावेद पंप को पत्थर बता कर उसके घर पर बुलडोजर चलवा दिया। जिस समय यह खबर आई उस समय राणा पूल में बैठकर अल्पसंख्यकों पर होते तरह-तरह के अत्याचार की सूची बना रही थीं ताकि गल्फ देशों से शिकायत कर सकें। देश का तेल पानी बंद कर करवा सकें। मगर ये लिस्ट पूरी होती ही कि फासीवादी योगी सरकार एक्शन में आ गई। जावेद के घर की एक-एक ईंट को गिरता देख राणा के आँसू नहीं थमे और वह दर्द से कराह उठीं।

ट्विटर पर उनका यही दर्द लगातार किए गए ट्वीट में देखने को मिला और इंस्टाग्राम पर उनकी यह पीड़ा वीडियोज में सामने आई। परिवार वाले उनके आँसू देख दुखी न हों इसलिए उन्होंने काला चश्मा लगाए रखा। इसके बाद 360 डिग्री घूमकर अपने दर्शकों को स्वीमिंग का का नजारा दिखाया। वह चाहती थी कि इस वीडियो के साथ वह कोई मजहबी गीत लगाएँ ताकि उनके फॉलोवर्स समझ पाएँ कि छुट्टियों के दौरान भी उनके भीतर से इस्लाम का प्रेम खत्म नहीं हुआ। हालाँकि उन्हें इंस्ट्राग्राम की ट्रेंडिंग रील का कोई गाना लगाना पड़ा ताकि रील ज्यादा रीच पाए।

अब उनके ट्विटर और इंस्टा पर पोस्ट देख कुछ कट्टर हिंदूवादी उनकी मंशा पर सवाल उठा रहे हैं और ये दिखाया जा रहा है कि कैसे सोशल मीडिया के जरिए मुसलमानों को भड़काने वाले परिवार के साथ मौज उड़ा रहे हैं और जो उनकी बातों में आकर दंगा किए, वो पुलिस द्वारा पीटे जा रहे हैं। लेकिन अगर आप राना अयूब का ट्विटर-इंस्टा देखेंगे तो पाएँगे कि भले ही वो परिवार के साथ छुट्टियाँ मनाने गईं हों लेकिन जिस तरह उनके अल्पसंख्यक भाइयों ने सड़कों पर कर्तव्य समझ जगह-जगह दंगा मचाया, वैसे ही वो भी अपने काम में जुटी हैं। अभी देखिए उनकी चेकलिस्ट में पहला काम आफरीम फातिमा का स्टैंड लेना था वो उन्होंने स्वीमिंग पूल में खड़े होकर ट्वीट करके ले लिया है। दूसरा काम भारत को फासीवादी बताने का था वो भी वह कर चुकी हैं।

अब थोड़ा बहुत जो समय मिला है वह उसे परिवार के साथ व्यतीत कर रही हैं, उन्हें खुश रहकर दिखा रही हैं। लेकिन वास्तविकता ये है कि जैसे ही अल्पसंख्यकों पर अत्याचार की घटना समाज में घटी तो वो दोबारe से स्वीमिंग पूल में आकर खड़ी होंगी और अपनी सेल्फी… ओह सॉरी-सॉरी ‘स्टैंड’ लेंगी।

‘एक मुदस्सिर शहीद हुआ है, 100 पैदा होगा’: दंगाई की अम्मी की PM मोदी को धमकी, कहा – जान के बदले जान, चाहे वो मंदिर का घंटा बजाने वाला ही क्यों हो

झारखंड की राजधानी राँची में 10 जून 2022 (शुक्रवार) को जुमे की नमाज़ को हुई हिंसा में एक और खुलासा हुआ है। पुलिस के मुताबिक हिंसा के लिए भीड़ जुटाने के लिए एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया था। इस ग्रुप का नाम ‘वासेपुर गैंग’ दिया गया था। पुलिस इस ग्रुप के एडमिन की तलाश कर रही है।

वासेपुर झारखंड का ही एक स्थान है जो राँची के बगल के धनबाद जिले में स्थित है। इस स्थान के नाम पर जून 2012 में बॉलीवुड में फिल्म भी बन चुकी है जिसमें इस जगह को अपराधियों का गढ़ बताने की कोशिश की गई थी। एक स्थानीय समाचार के मुताबिक, राँची में हुए प्रदर्शन के दौरान हिंसक भीड़ द्वारा भी गोली चलाने की खबर है। इसकी जाँच के लिए फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुँच कर जाँच कर रही है। इस दौरान एक खंबे में लगी गोली को निकला गया जिसे परीक्षण के लिए टीम अपने साथ ले गई।

मुदस्सिर की अम्मी ने पुलिस को दी ईंट से ईंट बजाने की धमकी

उधर हिंसा के दौरान मारे गए मुदस्सिर की अम्मी ने पुलिस को धमकी दी है। एक इंटरवियु में उन्होंने कहा, “गुंडई अब नहीं चलने वाली। वो वर्दी में गुंडा बनेंगे? क्या सोच कर रखा है कि FIR नहीं लिखेगा? ईंट का ईंट बजा देंगे। उन्हें FIR हर हाल में लिखना होगा वरना हम उन्हें शांति से नहीं रहने देंगे। मेरे बाबू को कैसे मारा? वो सिर्फ इस्लाम जिंदाबाद बोला था। क्या सरकार ने उन्हें (पुलिसवालों) को आदेश दिया था कि जो इस्लाम जिंदाबाद बोले उसे गोली मार देना ? मेरा बेटा अभी 10 वीं का एग्जाम दिया था और कम्प्यूटर भी पढ़ रहा था।”

मुदस्सिर की अम्मी ने आगे कहा, “वहाँ लिटिल-लिटिल बच्चा था। कोई बड़ा नहीं था। उन्हें गोली मरने के लिए क्या मोदी ने कहा था? हम हर चैनल में देखना चाहते हैं ये। वरना मैं आप लोगों को मोदी का दल्ला समझूँगी। आज मेरे दिल में आग लगी है। क्या मेरा बच्चा किसी की मुंडी काट रहा था? मुसलमानों पर फायरिंग क्यों की? क्या सोच रहा है मोदी कि 1 करोड़ फ़ौज खड़ी कर के मुसलमान को दबोच लेगा? वो कभी नहीं कर पाएगा। अभी तो एक बच्चा गया है। मेरे साथ 10 बच्चे सिर कटाने के लिए खड़े हैं। मुझे मुआवजा नहीं बल्कि जान के बदले जान चाहिए। जिसने मेरे बच्चे को मारा है मुझे उसकी जान चाहिए। चाहे वो पुलिस वाला हो या मंदिर में घंटा बजाने वाला। मोदी तूने गलत औरत से पंगा ले लिया।”

इसी वीडियो में मुदस्सिर की अम्मी के साथ बैठी और औरतें बोल रहीं, “इस्लाम जिंदाबाद था और इस्लाम ही जिंदाबाद रहेगा। एक मुदस्सिर शहीद हुआ है तो 100 मुदस्सिर पैदा होगा। वही जिंदाबाद करेगा। जितनी भी अन्य जातियाँ हैं, एक दिन सब खत्म होनी हैं। इस्लाम ही रहेगा। ये सारी दुनिया इस्लाम से ही ज़िंदा है। जब तक इस्लाम है तब तक ही ये दुनिया है।”

अंत में मुदस्सिर की अम्मी ने मीडिया वालों को चेतावनी दी। उन्होंने कहा, “मेरा एक-एक शब्द सभी TV चैनल में चलना चाहिए। अगर एक भी शब्द छूटा तो मैं तुम मीडिया वालों को पकड़ूँगी। मेरे लोग भी यहाँ रिकार्डिंग कर रहे हैं। बाद में ये मत कहना कि मुझे क्यों पकड़ लिया ?”

‘चोर’ राहुल को पुलिस ने लतियाया… सुरक्षा के लिए राहुल गाँधी के पीछे खुद को भगाया: लुटियंस सोच आखिर कब तक?

राहुल ने चोरी की। पुलिस राहुल को पकड़ के ले गई। थाने में मरम्मत भी की। जज साहब ने राहुल को जेल भेज दिया। यह है आम… बोले तो देशी-ठेठ जिंदगी।

राहुल गाँधी पर मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगा। पूछताछ के लिए राहुल गाँधी को बुलाया गया। पूरा कॉन्ग्रेस राहुल गाँधी के नाम पर देश भर में सड़क पर उतर गया। यह है बिंदास… बोले तो लुटियंस जिंदगी।

ऊपर के 2 पैराग्राफ को ध्यान से पढ़िए। राहुल और राहुल गाँधी – दो अलग-अलग आदमी हैं। देशी-ठेठ जिंदगी में राहुल को डायरेक्ट चोर कह दिया जाता है, आरोपित कभी नहीं। भले ही परचून की दुकान से गल्ला चुराने का आरोप कानून की नजर में लगा हो। लुटियंस जिंदगी का मजा लूट रहे राहुल गाँधी के साथ ऐसा कुछ करने/कहने की औकात नेता से लेकर शासन-प्रशासन तक की नहीं… आम लोग तो खैर क्या ही कह पाएँगे!

राहुल गाँधी स्पेशल क्यों?

अपने देश का लोकतंत्र “हम भारत के लोग…” से चलता है। यह लिखना आसान है, पढ़ने-सुनने में अच्छा लगता है। जमीनी हकीकत लेकिन 13 जून 2022 को कॉन्ग्रेस के लोग दिखा-समझा देते हैं। कॉन्ग्रेस यह बता देती है कि वो और उनके लोग “हम” जैसे आम नागरिक नहीं हैं… वो समझा देती है कि वो हमारे माई-बाप हैं, हमारे सर्वेसर्वा हैं, हमसे 100-50 फीट ऊपर हैं।

धोखाधड़ी की साजिश रचने, फंड का गबन करने… आदि-इत्यादि का आरोप राहुल गाँधी पर लगा है। ध्यान दीजिए सिर्फ आरोप लगा है, साबित नहीं हुआ है। क्या करना चाहिए ऐसे में? आरोप का सामना कीजिए। जो भी जाँच एजेंसी है, उसके सामने बिना झुके खड़े हो जाइए। जितना पूछा जाए, सब कुछ खोल कर बता दीजिए… लेकिन नहीं! अपने ही बाप-दादा के बनाए कानूनों-संस्थानों के खिलाफ खड़ा होना है इन्हें। “राहुल गाँधी झुकेगा नहीं, सत्य झुकेगा नहीं” वाला फिल्मी डायलॉग मारना है। नेता यंग हो ना हो, एंग्री यंग मैन बने रहना है।

कॉन्ग्रेस यह कैसे कर लेती है? कोई स्पेशल पावर है उसके पास? या कोई दैवीय शक्ति? नहीं। वो कर लेती है क्योंकि उन्हें यह लगता है कि देश का संविधान कॉन्ग्रेस के द्वारा, कॉन्ग्रेस का और कॉन्ग्रेस के लिए बना है। वो कर लेती है क्योंकि हमारे-आपके जैसे राहुलों की बेहतरी सोच कर वो समय और उर्जा खर्च नहीं करती। उनके लिए राहुल गाँधी हिताय, राहुल गाँधी सुखाय ही एकमात्र सूत्रवाक्य है।

भाजपा वाले मोदी Vs कॉन्ग्रेस वाले गाँधी

गोधरा में कट्टरपंथी मुस्लिमों ने कारसेवकों की ट्रेन जला दी थी। प्रतिक्रिया में गुजरात के कई इलाकों में दंगे हुए। इन दंगों का आरोप तब के गुजरात सीएम रहे नरेंद्र मोदी पर भी लगा। क्या किया था उन्होंने? सड़क पर उतरे थे, चक्का-जाम किया था? BJP ने जाँच करने वाली एजेंसी के ऑफिस को घेर लिया था?

जी नहीं। ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था। गुजरात दंगों की जाँच के लिए जिस एसआईटी का गठन हुआ था, वहाँ तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने करीब 9 घंटे बिताए थे। हँसी-ठिठोली नहीं की थी, पूछताछ का सामना किया था। सीएम मोदी ने तब सभी 100 सवालों (यह लगभग आँकड़ा है) के जवाब दिए थे। पूरी पूछताछ के दौरान सहज भी रहे थे। यह सब बातें खुद एसआईटी के हेड रहे आरके राघवन ने लिख छोड़ा है।

पूरे राज्य का मुख्यमंत्री, जिसे जनता चुन कर भेजती है… वो एसआईटी के सामने पेश होता है। सवालों को झेलता है, उनके जवाब देता है। आखिर क्यों? क्योंकि मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को संविधान-कानून पर भरोसा था। क्योंकि मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूछताछ के बाद मीडिया से कहा भी था कि कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं।

इसके उलट राहुल गाँधी क्या करते हैं? या इंदिरा गाँधी ने क्या किया था? संजय गाँधी को लेकर कॉन्ग्रेसियों ने कितना बवाल काटा था? इन सवालों के 1-2 लाइन में जवाब यह हैं:

  1. ED राहुल गाँधी को पूछताछ के लिए बुलाती है, कॉन्ग्रेसी सड़क जाम कर देते हैं। कोर्ट आदेश कुछ और देती है, इंदिरा गाँधी आपातकाल ही लगा डालती है।
  2. जीप घोटाले का आरोप जब इंदिरा गाँधी पर लगता है तो बवाल इतना कि गिरफ्तारी के बावजूद थाने या जेल में नहीं बल्कि मजबूरन गेस्ट हाउस में रखा जाता है उन्हें।
  3. इंदिरा गाँधी के बेटे संजय गाँधी की तो बात ही निराली है। फिल्म ‘किस्सा कुर्सी का’ उन्होंने प्रिंट ही जला दिया था, कोर्ट ने उन्हें जेल भेज दिया था, लेकिन कॉन्ग्रेसियों ने क्या-क्या और कितना बवाल किया होगा… एक उदाहरण से समझिए। तब कमलनाथ नामक नेता (बाद में यह मंत्री-सीएम भी बने) ने तो जज से ही लड़ाई कर ली थी।

कॉन्ग्रेसी सिस्टम अपने नेता (सिर्फ गाँधी पढ़ा-समझा जाए) के लिए जो करता है, शायद वो उनके लिए एकमात्र या आखिरी रास्ता होगा लेकिन झेलना आम नागरिकों को पड़ता है। पुलिस वाले चोरों-अपराधियों के बजाय नेताओं के पीछे भागते-दौड़ते हैं। आखिर क्यों? आपके दुख का बोझ जनता क्यों उठाए?

नेता या नागरिक: दोष किसका?

SPG सिक्यॉरिटी वाला मामला याद है? (सोनिया-राहुल-प्रियंका) गाँधी सबका SPG कवर हटा लिया गया था। इसके बदले Z+ कवर दिया गया था। तब भी कॉन्ग्रेसियों ने बहुत बवाल किया था। सच्चाई जबकि यह है कि Z+ कवर में भी 55 सुरक्षाकर्मी होते हैं।

एक आदमी के लिए 55 सुरक्षाकर्मी! जी हाँ। क्योंकि उस आदमी की जान को खतरा है। यह और बात है कि यह खतरा सटीक नहीं होता है, बस आकलन किया जाता है। बात अगर आकलन की है तो कश्मीर में हिंदुओं की जान को भी तो खतरा है। सुरक्षा उन्हें क्यों नहीं फिर? या यूँ कह लें कि आम नागरिक की जान का आकलन लगाने वाला गणित पैदा नहीं हुआ है… नेताओं की जान कीमती है, ऐसा नासा-इसरो ने साबित कर दिया है?

दरअसल दोष नेताओं या कॉन्ग्रेसियों का है ही नहीं। वो तो अपने फायदे की ही सोचेंगे। जनता को क्या करना है, यह तो जनता को ही सोचना होगा। नदी की धारा जिस विज्ञान पर चलती है, जनता वैसे ही सोचे, वैसा ही आचरण करे – यहीं से समस्या का समाधान निकल कर आएगा। ऊँचाई से नीचे की ओर बहती है नदी। आम नागरिक को ऊँचे पदों पर बैठे लोगों जैसा ही आचरण करना चाहिए। यह थोड़े समय के लिए देश में अशांति ला सकती है लेकिन इसके दूरगामी परिणाम होंगे और बढ़िया होंगे, इसकी गारंटी है।

चोरी, रेप, हत्या, गबन, अपहरण… अपराध चाहे जो हो, आरोपित को जब भी कोई संस्था (पुलिस वाले भी) पूछताछ के लिए बुलाए या गिरफ्तार करे तो उसके पूरे परिवार, उसके पूरे समाज को सड़क पर उतर जाना चाहिए। समाधान किसी एक के ऐसा करने से आ जाएगा, इस भुलावे में मत रहिएगा। हर गाँव-पंचायत-तहसील-ब्लॉक-जिला-राज्य में हर एक परिवार को यह कदम उठाने के लिए तत्पर रहना होगा। जब कोई आरोप लगे, बिना हिंसा किए फटाक से सड़क जाम। रेल को रोक दीजिए। दफ्तरों में ताला मार दीजिए। शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार सिर्फ कॉन्ग्रेसियों को है, ऐसा संविधान में कहीं नहीं लिखा है।

जान को जरा सा भी खतरा मालूम हो, डीएम-एसपी से सुरक्षा माँगिए। न दे तो उनके ऑफिस को घेर लीजिए। हर वो काम कीजिए, जो-जो काम नेता हर दिन करते हैं, उन्हें अपना अधिकार मानते हैं। उन्हें उनके ही बनाए अधिकारों के शतरंज में मात दीजिए। अगर ऐसा नहीं करते हैं तो कल को ऐसे नेता “चाय क्यों नहीं मिली” मामले पर भी चक्का जाम कर देंगे और आप लोकतंत्र के सिपाही बन कर तमाशा देखते रह जाएँगे। अगर आप ऐसा करते हैं तो देश में जो शासन-प्रशासन में भूचाल आएगा, उससे शायद ये नेता संसद में बैठ कर अपनी भूलों को सुधारने पर चर्चा करेंगे, अधिकारों को बपौती न मान कर कुछ हमारे-आपके बारे में भी सोचेंगे।