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द्रौपदी मुर्मू की उम्मीदवारी से चर्चा में प्रतिभा पाटिल, देश की पहली महिला राष्ट्रपति के लिए कॉन्ग्रेस के मंत्री ने कहा था- इंदिरा के बर्तन धोती थी

राष्ट्रपति चुनाव के लिए भाजपा के नेतृत्व वाले ‘राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA)’ ने ओडिशा के रायरंगपुर की रहने वाली जनजाति समाज की द्रौपदी मुर्मू को उम्मीदवार घोषित किया है और उनकी जीत भी तय है, क्योंकि राज्य की सत्ताधारी पार्टी बीजद ने भी उनका समर्थन करने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने इसे गर्व का क्षण बताया। इसके बाद सोशल मीडिया पर 2007-12 के बीच भारत की राष्ट्रपति रहीं प्रतिभा पाटिल भी लोगों को याद आ रही हैं।

वो प्रतिभा पाटिल का ही कार्यकाल था, जिस दौरान कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाली केंद्र की यूपीए सरकार में तमाम घोटाले हुए। प्रधानमंत्री के रूप में मनमोहन सिंह तो पूरे 10 वर्ष रोबोट की तरह बने रहे, वहीं असली सत्ता गाँधी परिवार के हाथ में रही। इसी दौरान प्रतिभा पाटिल को भी ‘रबड़ स्टांप’ होने का ही लोगों का ख़िताब दिया। राष्ट्रपति भले ही प्रमुख फैसले न लेते हों, लेकिन प्रतिभा पाटिल के कार्यकाल के दौरान शायद ही ऐसी कोई उपलब्धि हो जो लोगों के जेहन में हो।

द्रौपदी मुर्मू ने एक-एक कर चढ़ी सीढियाँ, कदम-कदम पर मनवाया अपना लोहा

जहाँ तक द्रौपदी मुर्मू की बात है, 2015-21 में झारखंड के राज्यपाल के रूप में उनका कार्यकाल निर्विवाद रहा। वो दूसरी महिला हैं, जो राष्ट्रपति बनने जा रही हैं। साथ ही जनजाति समाज से देश को पहली राष्ट्रपति मिलेगी। वो भारत के इतिहास की पहली जनजाति महिला हैं, जो राज्यपाल के पद पर पहुँची थीं। जुलाई 2021 में कार्यकाल ख़त्म होने के बाद से वो रायरंगपुर स्थित अपने गाँव में ही रह रही थीं। 2017 में भी राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी के लिए उनके नाम पर चर्चा हुई थी, लेकिन फिर NDA ने रामनाथ कोविंद के नाम पर मुहर लगाई।

राज्यपाल का कार्यकाल ख़त्म होने के बाद 2020 में उनके कार्यकाल को एक वर्ष के लिए बढ़ा दिया गया था, क्योंकि कोरोना माहमारी आपदा के बीच नए राज्यपाल की नियुक्ति नहीं हो सकी थी। जनजाति मामले, शिक्षा कानून व्यवस्था और स्वास्थ्य सम्बंधित मुद्दे को लेकर वो राज्यपाल के रूप में भी प्रखर रहीं। उन्होंने इन मुद्दों को उठाया और राज्य सरकार के फैसलों पर सवाल भी खड़े किए, लेकिन संवैधानिक मर्यादा और शिष्टाचार के दायरे में रह कर।

राज्यपाल के रूप में वो राज्य के विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति भी थीं, ऐसे में उनके समय में कई यूनिवर्सिटीज के कुलपति के खाली पद को भरा गया। वो उच्च शिक्षा सम्बंधित मुद्दों के लिए ‘लोक अदालत’ लगाती थीं, जिनमें 5000 से अधिक यूनिवर्सिटी शिक्षकों और कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान किया गया। एनरोलमेंट प्रक्रिया को उन्होंने सेंट्रलाइज किया और चांसलर का पोर्टल जारी किया। 1997 में उन्होंने राजनीति में एंट्री ली थी।

उस समय उन्हें रायरंगपुर के डिस्ट्रिक्ट बोर्ड में काउंसिलर चुना गया था। इससे पहले वो ‘श्री ऑरोबिन्दो इंटीग्रल एजुकेशन एंड रिसर्च सेंटर’ में बतौर ऑनररी अस्सिस्टेंट शिक्षिका कार्यरत थीं। फिर उन्होंने सिंचाई विभाग में जूनियर अस्सिस्टेंट के रूप में काम किया। 2 बार विधायक रहीं द्रौपदी मुर्मू भाजपा-बीजद की संयुक्त राज्य सरकार में मंत्री भी थीं। ओडिसा की विधानसभा ने उन्हें सर्वश्रेष्ठ विधायक का ‘नीलकंठ अवॉर्ड’ से सम्मानित किया था।

प्रतिभा पाटिल: लोग कहते हैं कॉन्ग्रेस की ‘रबड़ स्टांप’ राष्ट्रपति

प्रतिभा पाटिल कहने को तो देश की पहली महिला राष्ट्रपति थीं, लेकिन कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी के सामने उस समय राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के पद की क्या इज्जत रह गई थी – ये सभी को बखूबी पता है। अभी भी सोशल मीडिया पर लोग उन्हें ‘Worst President’ बता रहे हैं और सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रपति के रूप में डॉ राजेंद्र प्रसाद और एपीजे अब्दुल कलाम का नाम ले रहे हैं। वहीं प्रणब मुखर्जी और रामनाथ कोविंद की भी लोग तारीफ़ कर रहे हैं।

प्रतिभा पाटिल सोनिया गाँधी के विश्वस्तों में से एक रही हैं। राष्ट्रपति रहते हुए उन पर करदाताओं के ज़रूरत से ज़्यादा रुपए को अपनी विदेशी यात्राओं में लुटाने के आरोप लगे। उनके और उनके परिवार की विदेश यात्राओं का सरकार खर्च 205 करोड़ रुपए के आसपास था। जब वो विदेश में छुट्टियाँ मनाने जाती थीं तो उनके परिजन भी उनके साथ होते थे, खासकर ग्रैंडचिल्ड्रन। एक बार गोवा में छुट्टियाँ मनाते हुए भी उनकी तस्वीर वायरल हुई थी।

इतना ही नहीं, राष्ट्रपति को जो भी गिफ्ट्स मिलते हैं, उन्हें भी वो महाराष्ट्र के अमरावती स्थित अपने घर पर ले गई थीं। इन्हें ‘नेशनल ट्रीजरी’ में जमा कराना होता है। उन्हें बाद में ऐसे 150 गिफ्ट्स को वापस राष्ट्रपति भवन को सौंपने के लिए कहा गया था। 2012 में प्रतिभा पाटिल अपने परिजनों के साथ सेशेल्स और दक्षिण अफ्रीका की यात्रा पर गई थीं। 14 घरेलू और 4 विदेशी यात्राओं पर उनके परिवार के कम से कम 3 से 11 परिवार के सदस्य उनके साथ रहे।

2009-10 के बीच कई राज्यों की यात्राओं के दौरान उनके पति देवीसिंह शेखावत, बेटे राजेन्द्र सिंह शेखावत, बहू मंजरी शेखावत, बेटी शेखावत और दामाद जयेश शेखावत के अलावा उनके बेटे-बेटी के बच्चे सुरभि शेखावत, पृथ्वी सिंह शेखावत, ध्रुवेश राठौड़ और दिव्या राठौड़ साथ रहे। इन सभी को ‘प्रेसिडेंशियल गेस्ट्स’ की सारी सुविधाएँ दी जाती थीं। पोलैंड, स्पेन, रूस, तजाकिस्तान, यूके, साइप्रस और चीन की यात्रा में उनके साथ कम से कम दो परिजन जरूर रहे।

तब की मनमोहन सिंह सरकार ने इसे ‘सामान्य राजनयिक प्रक्रिया’ बताते हुए इसका बचाव किया था। प्रतिभा पाटिल और उनके परिजनों की विदेशी यात्राओं पर ‘एयर इंडिया’ ने 169 करोड़ रुपए खर्च किए और उनके लिए हमेशा बोईंग 747-400 का प्रयोग ही किया जाता था। इसके अलावा विदेश मंत्रालय ने अन्य खर्च के लिए 36 करोड़ रुपए अलग से खर्च किए। प्रतिभा पाटिल ने 79 दिन विदेश में गुजारे। कुल 12 विदेश यात्राओं में उन्होंने 4 महाद्वीपों के 22 देशों का दौरा किया।

रिटायरमेंट के बाद पुणे में रक्षा मंत्रालय की जमीन पर प्रतिभा पाटिल द्वारा एक मकान बनवाने की योजना की खबर भी सामने आई थी। उनका परिवार ‘विद्या भारती शैक्षणिक मंडल’ चलाता है, जिसके म्यूजियम में उन्होंने बतौर राष्ट्रपति मिले 150 गिफ्ट्स को रख दिया था। प्रणब मुखर्जी के राष्ट्रपति बनने के बाद सेक्रेटेरिएट ने उन्हें ये सब वापस सौंपने को कहा। इनमें अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा दिया गया स्टोन बॉक्स, ब्रिटिश पीएम का दिया कैंडल सेट, वियतनाम के राष्ट्रपति का दिया लकड़ी के फ्रेम वाली तस्वीर, FIFA प्रेजिडेंट द्वारा दिया गया मोमेंटो, चीन का गिफ्ट बॉक्स और नेल्सन मंडेला के गोल्ड और सिल्वर मेडल शामिल थे।

गाँधी परिवार की पुरानी वफादार रही हैं प्रतिभा पाटिल

फरवरी 2011 में राजस्थान में कॉन्ग्रेस के ही एक मंत्री अमीन खान ने कहा था कि 1977 में जब इंदिरा गाँधी की प्रधानमंत्री की कुर्सी चली गई थी, तब प्रतिभा पाटिल उनके लिए किचन में भोजन पकाती थीं और बर्तन धोती थीं, इसीलिए उन्हें राष्ट्रपति बनाया गया। उन्होंने कहा था कि प्रतिभा पाटिल ने बदले में कभी कुछ नहीं माँगा, इसीलिए उन्हें राष्ट्रपति बनाया गया। बाद में उन्हें इस बयान के लिए इस्तीफा देना पड़ा था। प्रतिभा पाटिल ने एक ‘श्रम साधना ट्रस्ट’ की स्थापना भी की थी।

इसके अलावा वो ‘संत मुक्ताबाई सहकारी साखर कारखाना’ का संचालन भी करती हैं। ‘प्रतिभा महिला सहकारी बैंक’ की फंडिंग भी वो करती थीं। 2003 में RBI ने इसका लाइसेंस सीज कर दिया और ट्रेडिंग बंद हो गई। बैंक के शेयर कैपिटल से ज्यादा तो उनके सम्बन्धियों को लोन दे दिए गए थे। बैंक के शीर्ष 10 डिफॉलटर्स में 6 उनके सम्बन्धी थे। रिटायरमेंट के बाद वो अपने प्राइवेट कार के ईंधन का खर्च भी सरकार से ही चाहती थीं।

प्रतिभा पाटिल पर आरोप लगे थे कि जब वो अमरावती की सांसद हुआ करती थीं, तब उन्होंने अपने पति द्वारा संचालित ट्रस्ट में MPLADS फंड के 36 लाख रुपए उधर डाइवर्ट कर दिए थे। ये भी याद रखने वाली बात है कि तब शिवसेना ने राजद में रहते गठबंधन प्रत्याशी भैरोंसिंह शेखावत की जगह प्रतिभा पाटिल का समर्थन किया था, क्योंकि वो मराठी थीं। वंशानुगत बीमारियों से पीड़ित लोगों को उन्होंने स्टरलाइज करने की बात कही थी, ताकि आगे कोई बीमारी न हो। उन्होंने 1975 में ये बयान दिया था।

कानपुर में जुमे पर हुई हिंसा में बाबा बिरयानी वाला मुख्तार गिरफ्तार: पत्थरबाजों को बिरयानी सप्लाई के लगे थे आरोप, रेस्टोरेंट के भी मंदिर पर खड़े होने का दावा

उत्तर प्रदेश के कानपुर में 3 जून 2022 को जुमे की नमाज के बाद हुई हिंसा में एसआईटी ने मुख्तार बाबा को गिरफ्तार किया है। वह कानपुर के बाबा बिरयानी रेस्टोरेंट का मालिक है। बताया जा रहा है कि वह कानपुर हिंसा के मुख्य आरोपित हयात जफर हाशमी की संस्था जौहर फैंस एसोसिएशन को फंडिंग करता था।

रिपोर्ट के मुताबिक, बिल्डर मोहम्मद बसी और मुख्तार बाबा हिंसा के बाद से ही एसआईटी और कानपुर पुलिस की रडार पर थे। इनके नाम हिंसा के सिलसिले में गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ में सामने आए थे। अब इसी क्रम में मुख्तार बाबा की गिरफ्तारी हुई है। ये फरार चल रहे थे। न्यूज 18 ने ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर आनंद प्रकाश तिवारी के हवाले से उसकी गिरफ्तारी की पुष्टि की है। उन्होंने बताया, “कई नाम सामने आए हैं। इनसे पूछताछ की जा रही है। मुख्तार बाबा का नाम भीड़ की फंडिंग में सामने आया था। उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।”

गौरतलब है कि बाबा बिरयानी पर 3 जून की हिंसा में शामिल पत्थरबाजों को बिरयानी खिलाने के आरोप भी लगे थे। हालॉंकि मुख्तार के बेटे महमूद ने ऑपइंडिया से बातचीत में इन आरोपों का खंडन किया था। लेकिन कुछ स्थानीय नेताओं का दावा था कि अपना अवैध कब्जा बनाए रखने के लिए बाबा बिरयानी और उसके साथी हिंसा की काफी समय से साजिश रच रहे थे। दरअसल, बाबा बिरयानी जिस जगह पर खड़ा है उसके भी मंदिर की जमीन होने की बात कही जाती है।

पिछले दिनों कुछ रिपोर्टों में बताया गया था कि सरकारी रिकॉर्ड में जो जगह राम-जानकी मंदिर के तौर पर दर्ज है, वहीं इस समय बाबा बिरयानी रेस्टोरेंट की चल रही है। शत्रु संपत्तियों की तलाश के दौरान यह बात सामने आई थी। रिपोर्टों के अनुसार कानपुर के बेकनगंज स्थित डॉक्टर बेरी चौराहा का भवन संख्या 99/14ए रिकॉर्ड में राम-जानकी मंदिर ट्रस्ट का है। यहाँ भगवान श्रीराम का मंदिर था। अस्सी के दशक तक यहाँ पूजा हुआ करती थी। लेकिन अब मंदिर का कुछ ही हिस्सा बचा हुआ है। वह भी जर्जर हाल में है। मंदिर के अन्य हिस्सों को तोड़कर उसका इस्तेमाल रेस्टोरेंट की रसोई के तौर पर किया जा रहा है। कथित तौर पर मुख़्तार कभी राम-जानकी मंदिर के एक हिस्से में साइकिल रिपेयरिंग का काम करता था। 

विजय माल्या ने क्रिस गेल के साथ डाली फोटो, बताया- गुड फ्रेंड: नेटीजन्स ने याद दिलाए फ्रॉड, पूछा- अपना बकाया तो माँगने नहीं आया था

भारत में भगौड़ा घोषित हो चुके विजय माल्या ने हाल में वेस्टइंडीज के दिग्गज क्रिकेट खिलाड़ी क्रिस गेल से मुलाकात करके सोशल मीडिया पर एक तस्वीर साझा की। अपनी फोटो के साथ माल्या ने बताया कि उसकी दोस्ती गेल के साथ कितनी गहरी है।

तस्वीर के कैप्शन में माल्या ने लिखा, “अपने दोस्‍त क्रिस्‍टोफर हेनरी गेल- यूनिवर्स बॉस से मिलकर काफी अच्‍छ लगा। जबसे मैंने उन्‍हें आरसीबी की टीम में नियुक्त किया था तभी से हमारी दोस्‍ती है। सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी का चुनाव।”

माल्या के इस ट्वीट में क्रिस गेल को देखते ही सोशल मीडिया पर लोगों को अलग-अलग प्रतिक्रिया आने लगी। तारीफ तो दूर लोगों ने गेल के नाम पर माल्या को ट्रोल करना शुरू कर दिया।

यूजर पूछने लगे कि आखिर माल्या होता कौन है ये कहने वाला कि उसने गेल को नियुक्त किया। परितोष अरोड़ा ने कहा, “तुमने उसे आरसीबी की तरफ से खेलने के लिए फीस दी थी। वह तुम्हारा कर्मचारी नहीं है।”

यूजर्स ने माल्या को एसबीआई के नाम से ट्रोल करना शुरू किया। यूजर बोले कि माल्या भारत आकर अपने पुराने दोस्त स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से भी मुलाकात कर ले।

भारतीय यूजर्स ने क्रिस गेल के साथ यह तस्वीर देख गेल को चेतावनी दी कि वह बचकर रहें वरना हो सकता है कि माल्या उनका रुपया भी खा जाए।

कुछ नेटीजन्स ने तंज कसते हुए पूछा- “क्रिस गेल का कहीं कुछ पैसा तो बकाया नहीं था, कहीं वो भी अपना उधार माँगने आया हो।”

इसी तरह अन्य यूजर्स भी माल्या का मजाक उड़ाते दिखे। किसी ने गाना गाते हुए कहा- “घर आजा परदेसी तुझको बैंक बुलाए रहे।” किसी ने लिखा- “दादाजी अय्याशी बंद करो और मेरे पैसे मेरे अकॉउंट में डालो।”

भगौड़ा विजय माल्या ने किस बैंक से लिया कितना कर्ज

बता दें कि SBI की अगुवाई वाले 11 बैंकों ने विजय माल्या को लोन दिया था, जिसे उसने चुकाया भी नहीं और 9000 करोड़ की धोखाधड़ी व मनीलॉन्ड्रिंग करके देश से फरार हो गया। फिलहाल भारत सरकार ने उसे भगौड़ा घोषित किया हुआ है और उसे लगातार भारत वापस लाने की कोशिश कर रही है। यहाँ माल्या के ख़िलाफ देश की कई अदालतों में मुकदमा चल रहा है।

जानकारी के अनुसार माल्या की किंगफिशर एयरलाइन को दिए गए 6,900 करोड़ रुपए के मूल कर्ज में सर्वाधिक 1,600 करोड़ रुपए स्टेट बैंक ने दिए हैं। इसके अलावा, जिन अन्य बैंकों ने एयरलाइन को कर्ज दे रखा है, उनमें पंजाब नेशनल बैंक (800 करोड़ रुपए), आईडीबीआई बैंक (800 करोड़ रुपए), बैंक ऑफ इंडिया (650 करोड़ रुपए), बैंक ऑफ बड़ौदा (550 करोड़ रुपए), सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया (410 करोड़ रुपए) शामिल हैं।

46 MLA साथ, शिवसेना-उद्धव से बात नहीं: एकनाथ शिंदे ने क्लियर किया प्लान, बोले असम के CM- बाढ़ के समय टैक्स देने वाले पर्यटकों का स्वागत

महाराष्ट्र में सियासी उठा-पटक के बीच सूरत में डेरा जमाए शिवसेना के बागी विधायकों को अब असम के गुवाहाटी में शिफ्ट किया गया है। बागी दल के नेता एकनाथ शिंदे ने बताया है कि उनके पास 46 विधायकों का समर्थन है, जिनमें से 6-7 निर्दलीय हैं और बाकी के शिवसेना के हैं। उन्होंने बताया कि फ़िलहाल न तो उन्हें भाजपा की तरफ से कोई ऑफर आया है, न ही उनकी पार्टी से कोई बात हो रही है। उन्होंने बताया कि शिवसेना या पार्टी सुप्रीमो उद्धव ठाकरे से भी फ़िलहाल कोई बात नहीं हो रही।

ANI से बात करते हुए एकनाथ शिंदे ने कहा, “जहाँ तक ताज़ा राजनीतिक हालात की बात है, हमलोग बालासाहेब ठाकरे के शिवसैनिक हैं और हमेशा शिवसैनिक ही रहेंगे। भविष्य में क्या करना है, इस सम्बन्ध में अभी हमने कोई निर्णय नहीं लिया है।” उधर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा है कि बाढ़ आपदा के इस समय में टैक्स देने वाले होटल अतिथियों का राज्य में स्वागत है। उन्होंने कहा कि ये जो टैक्स देते हैं, उससे सरकार को राजस्व प्राप्त होता है।

सीएम सरमा ने कहा कि अगर गुवाहाटी सभी राज्यों का राजनीतिक केंद्र बन जाता है, यहाँ तक कि केंद्र सरकार और अन्य देशों का भी, वो इसका स्वागत करेंगे। असम के मुख्यमंत्री ने कहा कि बस यहाँ के होटल बुक रहने चाहिए। उन्होंने कहा कि बाढ़ के इस आपदा के समय राज्य को वित्त चाहिए और टैक्स देने वाले पर्यटक चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर होटल के कमरे फुल हो जाते हैं तो इससे सरकार की भी कमाई होगी।

उधर शिवसेना के चीफ व्हिप सुनील प्रभु ने पार्टी के सभी विधायकों के नाम एक पत्र जारी किया है, जिसमें उन्हें बुधवार (22 जून, 2022) की शाम होने वाली महत्वपूर्ण बैठक में उपस्थित रहने के लिए कहा गया है। पत्र में कहा गया है कि जो भी विधायक अनुपस्थित रहेगा, ये समझा जाएगा कि उसने स्वेच्छा से शिवसेना छोड़ दी है। साथ ही बिना किसी पूर्व सूचना या वैध कारण के अनुपस्थित रहने वाले विधायकों को संवैधानिक प्रक्रिया के तहत उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द कराने की धमकी भी दी गई है।

‘तेरा घमंड तो चार दिन का है… हमारी बादशाही खानदानी है’: महाराष्ट्र में सियासी उठापठक के बीच संजय राउत के घर के बाहर लगे पोस्टर

महाराष्ट्र की सियासत में एकनाथ शिंदे ने भूचाल ला दिया है। शिवसेना टूट की ओर बढ़ती दिख रही है। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की सरकार के भविष्य को लेकर कयास लग रहे। इस बीच शिवसेना नेता संजय राउत के घर के बाहर बुधवार (22 जून 2022) की सुबह दिखे पोस्टर की भी चर्चा हो रही है।

इस पोस्टर पर राउत की तस्वीर लगी है। साथ ही लिखा है, “तेरा घमंड तो 4 दिन का है पगले, हमारी बादशाही तो खानदानी है। जय महाराष्ट्र।” पोस्टर पर इसे लगाने वाली महिला की तस्वीर भी है। दीपमाला बढ़े नामक की इस महिला नेता को शिवसेना का कॉरपोरेटर बताया गया है।

इधर शिंदे अपने समर्थक विधायकों के साथ असम में डेरा डाले हुए है। उन्होंने अपने साथ 40 से अधिक विधायकों के होने का दावा किया है। इनमें 7 निर्दलीय बताए जा रहे हैं।

इस बीच, केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्यमंत्री रामदास आठवले ने कहा है कि देवेंद्र फडणवीस महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बनेंगे और एकनाथ शिंदे उप-मुख्यमंत्री। ‘रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (RPI)’ के मुखिया ने ‘TV9 भारतवर्ष’ से बात करते हुए कहा कि भाजपा, एकनाथ शिंदे और RPI मिल कर सरकार बनाएँगे। उधर महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के बाद मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे भी कोरोना पॉजिटिव हो गए हैं।

गौरतलब है कि महाराष्ट्र में कुल विधायकों की संख्या 288 है। इनमें भाजपा के पास अभी 106, शिवसेना पर 55, एनसीपी पर 52, और कॉन्ग्रेस पर 42 सीटें हैं। बहुमत के लिए किसी भी दल को 144 सीटें चाहिए। साल 2019 के चुनाव में भाजपा से अलग होकर शिवसेना ने कॉन्ग्रेस-एनसीपी के साथ मिल ये आँकड़ा जुटाया था। लेकिन अब स्थिति पलटती नजर आ रही है। भाजपा को सरकार बनाने के लिए 30-32 विधायकों की जरूरत है। अगर ऐसे में शिंदे भाजपा को समर्थन दे देते हैं तो उद्धव सरकार गिर जाएगी। यही वजह है कि लगातार इन सभी नेताओं को मनाने के प्रयास हो रहे हैं।

जिस एक्ट्रेस को शरद पवार पर पोस्ट के लिए पकड़ा, उसकी जमानत का अब विरोध नहीं करेगी महाराष्ट्र पुलिस: फार्मेसी स्टूडेंट को भी बेल

महाराष्ट्र (Maharashtra) में NCP के मुखिया शरद पवार (Sharad Pawar) को लेकर कथित तौर पर ट्विटर पोस्ट करने के मामले में महाराष्ट्र पुलिस के द्वारा गिरफ्तार किए गए 21 साल की फार्मेसी स्टूडेंट निखिल भामरे को बॉम्बे हाई कोर्ट ने जमानत दे दी। वहीं मराठी एक्ट्रेस केतकी चितले को भी लंबे वक्त के बाद राहत मिली है।

निखिल की जमानत याचिका को मंजूर करते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि वह एक छात्र हैं और एक महीने से पुलिस की हिरासत में हैं। इसके साथ ही अदालत ने पुलिस को सख्त आदेश दिया कि जिन मामलों में उसे गिरफ्तार नहीं किया गया। उन मामलों में किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी। निखिल भामरे के मामले में सुनवाई जस्टिस नितिन जामदार और जस्टिस एनआर बोरकर की बेंच ने की। कोर्ट ने सीआरपीसी की धारा 256, 482 और 407 का हवाला देकर दायर की गई याचिका पर अपना फैसला सुनाया।

इससे पहले 14 जून 2022 को इस मामले में सुनवाई करते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट के जस्टिस एसएस शिंदे की बेंच ने महाराष्ट्र सरकार को फटकार लगाते हुए कहा था कि सोशल मीडिया के जिस पोस्ट पर उसकी गिरफ्तारी की गई उसमें हकीकत में कोई व्यक्ति विशेष का नाम ही नहीं है। इस गिरफ्तारी के कारण निखिल की परीक्षा भी छूट गई। इसके अलावा कोर्ट ने ये भी कहा था कि खुद शरद पवार भी नहीं चाहेंगे कि एक छात्र जेल में रहे। उल्लेखनीय है कि निखिल को 11 मई को गिरफ्तार किया गया था। उनके खिलाफ 6 एफआईआर दर्ज की गई थी।

केतकी चितले को भी मिली राहत

शरद पवार पर कथित पोस्ट के मामले में बीते एक महीने से जेल में बंद मराठी अभिनेत्री केतकी चितले को भी बड़ी राहत मिली है। अभी तक उनकी जमानत याचिका का विरोध कर रही महाराष्ट्र पुलिस ने ठाणे सत्र अदालत में अचानक से यूटर्न लेते हुए एक्ट्रेस के बेल का विरोध नहीं करने का फैसला किया है।

सेशन जज न्यायाधीश एचएम पटवर्धन के समक्ष सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने ये बात कही। गौरतलब है कि चितले को 14 मई को 2022 को महाराष्ट्र पुलिस ने शरद पवार पर कमेंट करने को लेकर उठाया था। उनके खिलाफ कई सारे केस दर्ज किए गए थे।

मौलाना ने किन्नर को जबरन बनाया मुस्लिम, आपत्तिजनक चीजें खिलाई-शारीरिक उत्पीड़न भी: प्रयागराज में FIR

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में धर्म परिवर्तन का एक ऐसा मामला सामने आया है जहाँ एक किन्नर ने दूसरे किन्नर पर धर्मांतरण कराने का आरोप लगाया है। जिसके विरोध में जॉर्जटाउन थाने पहुँची अन्य किन्नरों ने जमकर हंगामा किया। इसके साथ ही आरोपित किन्नर के खिलाफ मौलाना की मदद से अवैध धर्मान्तरण का मुकदमा दर्ज करने के लिए शिकायत भी दी। फ़िलहाल, यूपी पुलिस इस मामले की जाँच कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, थाना अल्लापुर के निवासी एक गरीब महिला का आरोप है कि उसका एक बच्चा पंकज किन्नर है। उसे शाहगंज की एक किन्नर ने अपना चेला बनाया है। महिला का आरोप है कि उसके किन्नर बच्चे पंकज को पत्थर गली स्थित मौलाना ने दूसरे किन्नरों के कहने पर इस्लाम में धर्मान्तरण करा दिया। साथ ही उसे जबरन आपत्तिजनक चीजें खिलाई गईं और उसका शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न किया गया।

रिपोर्ट के अनुसार, महिला ने बताया कि जब पंकज किन्नर अपने घर जाना चाहती थी तो उस पर चोरी का आरोप लगाकर मुकदमा दर्ज करा दिया गया। इसके साथ ही पीड़ित पंकज किन्नर के साथ मार-पिटाई भी की गई। वहीं, धर्मान्तरण के मामले में शिकायत के बाद प्रयागराज पुलिस ने जाँच के बाद आवश्यक कार्रवाई की बात कही है।

वहीं, इस धर्मान्तरण के इस मामले में किन्नर कल्याण बोर्ड भी हस्तक्षेपप करते हुए कहा है कि मामले में तहरीर दी गई है, मामला गंभीर है। बोर्ड की वैष्णवी नंद गिरी ने कहा, “हमारी माँग है कि जो भी आरोपित हो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। किसी का भी जबरन धर्म परिवर्तन करवाना गलत है। सरकार और प्रशासन से माँग है कि मामले में कार्रवाई की जाए, क्योंकि न्याय व्यवस्था सभी के लिए है।”

255+ मौतें, 500 से अधिक घायल: अफगानिस्तान में भूकंप ने मचाई तबाही, सैकड़ों घर हुए जमींदोज

अफगानिस्तान और पाकिस्तान में बुधवार (22 जून 2022) को 6.1 मैग्नीट्यूड की तीव्रता वाले भूकंप ने जमकर तबाही मचाई। भूकंप के तेज झटकों के चलते इमारतें धराशाई हो गईं। इस हादसे में अब तक सामने आई जानकारी के मुताबिक, 255+ लोगों की मौत हो गई है। जबकि, 500 से अधिक लोग घायल हुए हैं।

अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे ने कहा है के भूकंप के कारण सबसे अधिक तबाही पक्तिका प्रान्त के चार जिलों में हुई है। इसके अलावा खोस्त और नांगरहार जिलों में भी भूकंप के कारण मौतें हुई हैं। तालिबान प्रशासन के प्राकृतिक आपदा मंत्रालय के प्रमुख मोहम्मद नसीम हक्कानी ने कहा कि अधिकांश मौतें पक्तिका प्रान्त में हुईं हैं, जहाँ 100 लोग मारे गए और 250 घायल हुए।

उन्होंने कहा कि खोस्त में 25 और नंगरहार प्रान्त पाँच और लोग मारे गए हैं। ऐसी कई तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं, जिनमें अफगानिस्तान में भूकंप के कारण हुई तबाही के मंजरों को देखा जा सकता है। यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे ने कहा कि 6.1 तीव्रता का भूकंप पाकिस्तानी सीमा के पास खोस्त शहर से लगभग 44 किमी (27 मील) दूर 51 किमी (31 मील) की गहराई पर आया।

अफगानिस्तान की सरकारी न्यूज एजेंसी बख्तार के हवाले से एसोसिएटेड प्रेस ने कहा कि अकेले पक्तिका में 90 से अधिक घर जमीदोज हो गए हैं। दर्जनों लोग अभी भी मलबे में दबे हुए हैं। तालिबान प्रशासन की तरफ से राहत और बचाव का काम किया जा रहा है। गंभीर रूप से घायलों को एयरलिफ्ट किया गया है।

तालिबान सरकार के डिप्टी स्पोक्सपर्सन बिलाल करीमी के मुताबिक, भीषण भूकंप ने पक्तिका प्रान्त के चार जिलों को झकझोर कर रख दिया। इसमें हमारे सैकड़ों देशवासी मारे गए। करीमी ने सभी सहायता एजेंसियों से मदद की अपील की है।

इस प्राकृतिक आपदा को लेकर यूरोपियन मेडिटरेनियन सीस्मोलॉजिकल सेंटर ने दावा किया है कि ये भूकंप 500 किलोमीटर के दायरे में फैला था। इसकी जद में अफगानिस्तान, पाकिस्तान और भारत के 119 मिलियन लोग थे। पाकिस्तान के इस्लामाबाद में भी भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए। बहरहाल पाकिस्तान में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।

‘कानून के मुताबिक ध्वस्त किया गया जावेद पंप का घर’: सुप्रीम कोर्ट में यूपी सरकार ने बताया, प्रयागराज के दंगाई के लिए जमीयत ने डाली है याचिका

हाल ही में उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में अधिकारियों द्वारा कई अवैध निर्माणों को ध्वस्त किया गया है। जिसके बाद जमीयत उलमा-ए-हिंद ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करते हुए इसे चुनौती दी। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपने इस कदम को सही ठहराया है। 

सरकार ने अपने हलफनामे में कहा कि प्रयागराज विध्वंस की प्रक्रिया स्थानीय विकास प्राधिकरण ने किया था। यह राज्य सरकार का एक स्वायत्त निकाय है। विध्वंस की प्रक्रिया शहर को अवैध और अनधिकृत निर्माण से मुक्त करने के उनके प्रयास का एक हिस्सा था।

आफरीन फातिमा के अब्बू जावेद मोहम्मद के घर के विध्वंस के संबंध में, राज्य ने बताया कि निर्माण ‘प्रयागराज विकास प्राधिकरण (PDA) के नियमों का उल्लंघन’ था और इसे गिराने की कार्यवाही दंगों से बहुत पहले ही शुरू कर गई थी।  यह दंगा भाजपा की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा के पैगंबर मोहम्मद पर की गई टिप्पणी के बाद भड़की थी।

आगे कहा गया है कि जमीयत ने इस विध्वंस को गलत रंग देने का प्रयास किया है। इस विध्वंस से प्रभावित पक्ष में से किसी ने भी कोर्ट का रुख नहीं किया है। राज्य सरकार की तरफ से हलफनामे में कहा गया है कि की गई सभी कार्रवाई यूपी शहरी योजना और विकास अधिनियम, 1973 का पालन करते हुए की गई थी।

जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस विक्रम नाथ की पीठ ने पिछली सुनवाई के दौरान अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया था कि जब तक मामले की अगली सुनवाई नहीं हो जाती तब तक कोई अप्रिय घटना न हो।

बता दें कि जमीयत उलमा-ए-हिंद की याचिका में कहा गया है कि राज्य में विध्वंस भाजपा प्रवक्ता नूपुर शर्मा के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के बाद किया गया था, जिन्होंने एक टेलीविजन डिबेट के दौरान पैगंबर मुहम्मद और इस्लाम के खिलाफ टिप्पणी की थी। 

गौरतलब है कि पिछले दिनों प्रयागराज में इस्लामिक कट्टरपंथियों द्वारा की गई हिंसा के मुख्य आरोपित और JNU छात्रा आफरीन फातिमा और उसके अब्बू जावेद उर्फ पंप की घर पर योगी सरकार ने बुलडोजर चला दिया। जावेद का मकान उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम-1973 के प्रावधानों के खिलाफ अनधिकृत रूप से निर्मित किया गया था। इस संबंध में 10 मई 2022 को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया था, मगर 24 मई को सुनवाई के दौरान ना तो जावेद और ना ही उसका वकील उपस्थित हुआ। कोई दस्तावेज भी प्रस्तुत नहीं किया गया।

प्रयागराज विकास प्राधिकरण (PDA) की तरफ से जारी नोटिस में कहा गया था, “इसको ध्यान में रखते हुए 25 मई 2022 को भवन ध्वस्तीकरण के लिए आदेश पारित किया गया। इस संबंध में नोटिस लगा दी गई है। आप भवन को ध्वस्त कर 9 जून 2022 तक सूचित करें, अन्यथा 12 जून 2022 को प्रात: 11 बजे भवन को खाली करें, ताकि ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जा सके।”

बताया जा रहा है कि जावेद अहमद उर्फ पंप प्रयागराज में हिंसा के दौरान बच्चों को आगे करके पुलिस पर पत्थरबाजी करवाई थी। उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। इसकी पुष्टि प्रयागराज के एसएसपी अजय कुमार ने की थी। मामले में जावेद अहमद की बेटी के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

खालिस्तानी समर्थक KTV ने ढाई महीने बाद सरेंडर किया लाइसेंस: प्राइम टाइम पर दिखाता था- जलता लाल किला, इंदिरा गाँधी के मुँह से खून

ब्रिटेन में खालसा टेलीविजन लिमिटेड (Khalsa Telivision Ltd- KTV) ने मीडिया वॉचडॉग ऑफकॉम की कार्रवाई के बाद अपना प्रसारण लाइसेंस सरेंडर कर दिया है। ऑफकॉम की जाँच में पाया गया कि केटीवी पर 95 मिनट के ‘प्राइम टाइम’ शो में हिंसा के लिए उकसाया गया था। 

इस साल 31 मार्च को जाँच के बाद ब्रिटिश टेलीकॉम रेगुलेटर ‘ऑफिस ऑफ कम्युनिकेशंस- ऑफकॉम’ (British Telecom regulator Ofcom) ने उसका (KTV) प्रसारण लाइसेंस निलंबित कर दिया था। जाँच के दौरान यह खुलासा हुआ था कि खालसा टेलीविजन लिमिटेड या केटीवी ने प्रसारण नियमों का उल्लंघन किया और खालिस्तान समर्थक दुष्प्रचार में शामिल रहा।

ऑफकॉम के मुताबिक, ‘प्राइम टाइम’ शो के दौरान प्रस्तुतकर्ता (Anchor) जगजीत सिंह जीता ने भड़काऊ बयान दिए थे। उसने सिखों से सिख अलगाववादी नेताओं का अनुसरण करने और खालिस्तान के लिए हत्या सहित किसी भी तरह की हिंसा को जायज बताया था। यह टेलीविजन चैनल यूनाइटेड किंगडम (UK) में सिख समुदाय द्वारा संचालित किया जाता है।

ऑफकॉम ने अपने आदेश में कहा था कि यह बयान अपराध और अव्यवस्था को बढ़ावा देने वाला और नियमों के खिलाफ है। आदेश में यह भी कहा गया था, “इस उल्लंघन की गंभीर प्रकृति को देखते हुए और हमारे निलंबन नोटिस में निर्धारित कारणों के तहत हम खालसा टेलीविजन लिमिटेड के यूके में प्रसारण के लाइसेंस को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर रहे हैं।”

खालिस्तानी नेटवर्क ने भारत के खिलाफ हिंसा का किया था आह्वान

यह टीवी चैनल भारत में हिंसा को बढ़ावा देने के लिए कुख्यात है। पिछले साल फरवरी में ऑफकॉम ने खालिस्तान समर्थक नेटवर्क- खालसा टेलीविजन (KTV) पर एक कार्यक्रम के दौरान चर्चा में घृणा फैलाने और हिंसा को बढ़ावा देने के कारण 50,000 पाउंड का जुर्माना लगाया था। इस चर्चा में आतंक का संदर्भ देते हुए ब्रिटिश सिखों को हिंसा करने के लिए उकसाया गया था। उस दौरान ब्रिटिश मीडिया नियामक ऑफकॉम ने केटीवी को चेतावनी दी थी कि वह इस तरह की भड़काऊ सामग्री परोस कर नियमों का उल्लंघन ना करे।

वीडियो एवं शो में भारतीय लोगों के खिलाफ हिंसक कार्रवाई की अपील और सिख अलगाववादी आंदोलनों को बढ़ावा देने वाले हिंसक कृत्यों का महिमामंडन किया गया था। शो में सिख धर्म की आलोचना करने वालों के खिलाफ हिंसा और आतंकवादी संगठनों को वैध बताया। संगीत वीडियो में पूर्व भारतीय प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की तस्वीरें थीं और उस तस्वीर के मुँह से खून टपक रहा था।

उसके कैप्शन में लिखा था, “तूने मासूमों का खून पिया, दुष्ट औरत”। गीत में लिखा था, “लड़ाके तेरे राज्य को नष्ट कर देंगे”। इस में दिल्ली के लाल किले को आग की लपटों में दिखाया गया था। इस शो और वीडियो को ऑफकॉम ने ‘भारत के खिलाफ हिंसक कार्रवाई की वकालत करने वाला’ माना था।