Home Blog Page 2646

14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजे गए AAP के मंत्री सत्येंद्र जैन, 14 जून को जमानत पर सुनवाई: घर से मिला था 1.80 kg सोना, ₹2.82 करोड़ कैश

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता व दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र कुमार जैन (Satyendra Kumar Jain) को सोमवार (13 जून 2022) को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। प्रवर्तन निदेशालय ने सत्येंद्र जैन को 30 मई की रात को गिरफ्तार किया था। उन पर मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering Case) का आरोप है। बताया जा रहा है कि कोर्ट दिल्ली के मंत्री की जमानत याचिका पर मंगलवार (14 जून, 2022) को सुनवाई करेगा। यह जमानत याचिका पिछले सप्ताह ही दायर की गई थी।

अदालत में सत्येंद्र जैन की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पूछताछ के तरीके और ईडी के जाँच के अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जाँच एजेंसी केवल परेशान करने के लिए हिरासत की माँग कर रही है। जैन को डिस्पेप्सिया समेत कई बीमारियाँ हैं। उन्हें कोरोना भी हुआ था और वह ईडी के जाँच के तरीके से परेशान हैं।

उल्लेखनीय है कि 6 जून को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने ‘आप’ नेता के घर सहित उनके 7 ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की थी। इस दौरान ईडी ने 2.82 करोड़ की अघोषित नकदी व 1.80 किग्रा सोना बरामद किया था। इसके बाद ईडी ने 9 जून को मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में जैन को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया था। उस वक्त भी कोर्ट ने AAP आप नेता को 13 जून तक के लिए ईडी की कस्टडी में भेज दिया था।

क्या है पूरा मामला

गौरतलब है कि साल 2017 में आय से अधिक संपत्ति रखने के मामले में केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) ने मनी लॉन्ड्रिंग के तहत सत्येंद्र जैन के खिलाफ FIR दर्ज की थी। इसी शिकायत के आधार पर प्रवर्तन निदेशालय ने AAP नेता के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया था। जाँच एजेंसी ने ये आरोप लगाया था कि जैन चार कंपनियों से मिली फंडिंग के स्त्रोत के बारे में नहीं बता सके थे, जबकि वो उसमें शेयर होल्डर थे। इन कंपनियों ने कथित तौर पर 2010 से 2014 तक 16.39 करोड़ रुपए की मनी लॉन्ड्रिंग की थी।

मजहब के नाम पर जज्बाती, हिंदुओं के अराध्यों का अपमान: यह खतरनाक खेल, इस हिंसक भीड़ को हिंदुओं का आक्रोश ही झुलसाएगा

विदेशी शक्तियों की दासता से मुक्त हुए 75 वर्ष बीत रहे हैं। देश आजादी का अमृत-महोत्सव मनाने में मस्त है और देश विरोधी ताकतें आजादी के नाम पर उन्माद, आगजनी, भड़काऊ बयानबाजी, हिंसा और तोड़फोड़ में व्यस्त हैं। आम नागरिक डरा-सहमा है और अपराधी तत्व निरंकुश हो रहे हैं। आंदोलनों और विरोध-प्रदर्शनों के नाम पर भीड़ एकत्रित कर जनजीवन को त्रस्त और अशांत बना देना कुछ लोगों के लिए आम बात हो गई है।

भीड़ को पुलिस-प्रशासन का भय नहीं रह गया है। कानून की परवाह नहीं है। दंड की चिंता नहीं है, क्योंकि हिंसा, आगजनी और तोड़फोड़ पर उतारू भीड़ जानती है कि उसके इन आपराधिक कुकृत्यों पर उसे दंडित करने वाली संवैधानिक प्रक्रियाएँ इतनी लंबी हैं कि उसका कुछ बिगड़ने वाला नहीं है। बड़े-बड़े विपक्षी नेता उसके पक्ष में खड़े मिलते हैं और बड़े-बड़े वकील निचली अदालतों से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक उसकी सुरक्षा और उसके हितों की रक्षा के लिए कमर कसकर खडे़ हैं।

जेएनयू में ‘भारत तेरे टुकड़े होंगे’ जैसे देश विरोधी नारे लगाने वालों के समर्थन में खड़े बड़े नेताओं और दिल्ली के जहाँगीरपुरी इलाके में दंगाइयों के अवैध निर्माण ढहाने की सरकारी मुहिम को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देकर विफल कर देने बाले कानून के रखवालों की कारगुजारियाँ इस तथ्य को दूर तक स्पष्ट करती हैं। जब शीर्ष नेतृत्व, कानून के मंजे हुए खिलाड़ी और दूर विदेशों तक सक्रिय भारत-विरोधी प्रचारतंत्र तथा गुमनाम आर्थिक शक्तियाँ इस उन्मादी भीड़ की पृष्ठभूमि में पूरी ताकत से सक्रिय हों तो प्रतिकूल विषम परिस्थितियों से पार पाना और भी कठिन हो जाता है।

देश की चुनी हुई संवैधानिक लोकतांत्रिक केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के निर्णयों को उग्र हिंसक आंदोलनों के बल पर बदलने, वापस कराने का यह खतरनाक खेल देश की प्रगति, शांति और सुरक्षा के लिए जितना बड़ा खतरा है, विपक्षी राजनेताओं के लिए भी उतना ही अशुभ और विनाशकारी है, क्योंकि भविष्य के निर्वाचनों में यदि वे सत्ता में आए तो यही हिंसक उन्मादी भीड़ उनकी राजनीति का पथ भी कंटकाकीर्ण कर देगी और तब उनके लिए भी लोकतांत्रिक मान-मूल्यों का संरक्षण करना कठिन होगा। अतः उग्र-हिंसक आंदोलनों को उकसाना, दंगे भड़काना किसी के भी हित में नहीं है। ना सत्तापक्ष के, ना विपक्ष के और ना जनता के। अब यह खतरनाक खेल बंद होना चाहिए।

एक पुरानी फिल्म का गीत है ‘पीने वालों को पीने का बहाना चाहिए’। यही बात आज हमारे देश में उग्र-हिंसक आंदोलनों के संदर्भ में सत्य सिद्ध हो रही है। रोज किसी न किसी बहाने से उग्र-हिंसक प्रदर्शन हो रहे हैं। कभी किसी राजनीतिक दल की शक्ति प्रदर्शनकारी रैली के नाम पर, कभी आरक्षण अथवा अन्य किसी माँग की पूर्ति के नाम पर, कभी एनआरसी, सीएए अथवा किसान आंदोलन के नाम पर तो कभी किसी धार्मिक उत्सव के अवसर के विरुद्ध एकत्रित की गई भीड़ ध्वंस का नग्न-नृत्य करती ही रहती है। हर बार भीड़ कुछ निर्दोषों की बलि ले लेती है, कुछ पुलिसकर्मी अधिकारी हत-आहत हो जाते हैं, फिर पुलिस फ्लैग मार्च निकालती है, एफआईआर दर्ज होती है, कानून की चक्की धीमी गति से चलती है और तब तक केंद्र अथवा राज्य सरकार बदल जाने पर केस वापस ले लिए जाते हैं।

प्रायः अपराधी अपराध करने के बाद भी दंडित नहीं हो पाते। ऐसी स्थितियों में भीड़ को एकत्रित कर उसे अपने निहित स्वार्थों के लिए देश के विरुद्ध एक प्रभावी शस्त्र के रूप में प्रयोग करना देश-विरोधी और सत्ता की प्रतिपक्षी ताकतों के लिए और भी सहज हो जाता है। इन्हीं कारणों से ये हिंसक प्रदर्शन बराबर बढ़ रहे हैं, बढ़ते ही जा रहे हैं। यदि समय रहते कठोर कदम नहीं उठाए गए तो इन्हें नियंत्रित कर पाना और भी कठिन हो जाएगा।

हमारी संवैधानिक व्यवस्था में अपनी बात रखने का सबको बराबर अधिकार है। किंतु झूठी बयानबाजी करने और मनमाने कृत्यों द्वारा दूसरों की भावनाओं को आहत करने की छूट किसी को नहीं है। भाजपा की प्रवक्ता नूपुर शर्मा के जिस बयान को लेकर जुमे की नमाज के बाद देश में अनेक स्थानों पर उग्र प्रदर्शन हुए वह बयान भी इसी दृष्टि से विचारणीय है। यदि नूपुर शर्मा ने हजरत मोहम्मद साहब के विरुद्ध कोई मनगढ़ंत झूठी बात कहकर उनका अपमान करके संप्रदाय विशेष के लोगों की भावनाओं को आहत किया है तो उनके विरुद्ध भारतीय दंड विधान के अनुरूप न्यायिक कार्यवाही अवश्य होनी चाहिए, किंतु यदि उन्होंने इस्लामी पवित्र ग्रंथों में कथित तथ्यों की ही पुनः प्रस्तुति की है तो फिर इतना बवाल क्यों ?

क्या संप्रदाय विशेष अपने ही ग्रंथों में उल्लिखित तथ्यों के प्रति आस्था और विश्वास नहीं रखता? धार्मिक महापुरुषों और कथित पैगंबरों-अवतारों के जीवन सत्य को आज बदला नहीं जा सकता। उसे उसी रूप में स्वीकार करना होगा जिस रूप में वह उनसे संबंधित मूल प्राचीन ग्रंथों में वर्णित है। अतः विवेचना का विषय यह होना चाहिए कि नूपुर शर्मा के कथन के स्रोत क्या हैं और उन स्रोतों की सत्यता विश्वसनीयता कितनी है? सच को सामने लाए बिना केवल उग्र प्रदर्शन कर जनजीवन को अशांत करना आज के इक्कीसवीं शताब्दी के सभ्य समाज के मस्तक पर कलंक के सिवा कुछ भी नहीं है। इसे प्रदर्शनकारियों का बौद्धिक दिवालियापन ही कहा जा सकता है।

यह भी अत्यंत रोचक और दुखद विषय है कि जिस संप्रदाय विशेष के लोग अपनी धार्मिक भावनाएँ आहत होने के कारण उग्र हिंसक प्रदर्शन पर जब-तब उतर आते हैं वे समाज के अन्य संप्रदायों की भावनाओं के साथ निरंतर खिलवाड़ करते रहते हैं? राँची में हिंसक भीड़ से बचने के लिए मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों, पत्रकारों और अन्य धर्मावलंबियों ने मेन रोड स्थित महावीर मंदिर में शरण लेकर अपने प्राण बचाए तो उपद्रवियों ने मंदिर के बंद द्वार और छत पर पत्थर फेंक कर महावीर मंदिर को क्षतिग्रस्त कर दिया। क्या महावीर मंदिर पर हुए इस आक्रमण के कारण इस मंदिर से जुड़े लोगों की भावनाएँ आहत नहीं हुईं?

कैसी विडंबना है कि जो कट्टर मानसिकता पिछले 1000 वर्षों से भी अधिक समय से भारतवर्ष के पूजा स्थलों को नष्ट करती आ रही है, उनकी मूर्तियों को तोड़ती रही है, उनके अश्लील चित्र अंकित करके हर प्रकार से उन्हें अपमानित करने में ही स्वयं को गौरवान्वित मानती है, वह अन्य धर्मावलंबियों द्वारा उनके पैगंबर के संबंध में कुछ कहे जाने मात्र से हिंसा पर उतर आती है। अपने महापुरुष, अपने पूजास्थल और अपनी संस्कृति के सम्मान के प्रति अत्यंत जागरूक इस समुदाय को अन्य धर्मों का सम्मान करना भी सीखना होगा, सीखना भी चाहिए अन्यथा अन्य पक्षों की रोषाग्नि उन्हें भी झुलसा सकती है। शिवाजी का आक्रोश औरंगजेब की सत्ता को कमजोर कर उसे विनाश की ओर ही धकेलेगा।

अनेक मीडिया चैनलों पर प्रसारित होने वाले तथाकथित डिबेट के ऐसे कार्यक्रम भी गंभीर चिंता का विषय हैं। धर्म आदि अत्यंत संवेदनशील ऐसे मुद्दे जो प्रशासनिक एवं न्यायिक स्तरों पर विचाराधीन हैं, उन पर ऐसी बहसों का आयोजन उनकी टीआरपी बढ़ाने की दृष्टि से भले ही उनके लिए लाभप्रद हो किंतु जनमानस पर कोई सकारात्मक प्रभाव नहीं डाल पाता क्योंकि इन विमर्शों का निष्कर्षहीन अंत कुछ ज्वलंत प्रश्न ही छोड़ता है, कोई सार्थक समाधान नहीं देता। सब जानते हैं कि जो प्रवक्ता जिस धर्म अथवा राजनीतिक दल की ओर से आया है, वह हर प्रकार से अपने पक्ष का ही समर्थन करेगा।

सत्य-असत्य से दूर जाकर तर्कों-कुतर्कों के सहारे प्रस्तुत होने वाली ये बहसें सच को सामने लाने के स्थान पर भ्रांतियाँ ही अधिक निर्मित करती हैं। सामंतवादी युग में तीतर-बटेर और मुर्गों की लड़ाई के प्रदर्शन जैसे यह डिबेट आयोजन समय और श्रम की बर्बादी के साथ-साथ जनता जनार्दन के मध्य वैमनस्य भी उत्पन्न करते हैं। अतः इनकी आवश्यकता भी विचार का विषय है। नूपुर शर्मा का बयान और उससे उपजा बवाल इस दिशा में गंभीरता पूर्वक विचार की अपेक्षा करता है। यदि यह डिबेट नहीं हुई होती तो यह अनावश्यक बवाल भी नहीं होता।

इस प्रकार के उग्र-हिंसक प्रदर्शन भी आतंक का ही एक रूप हैं जो समाज और शासन-प्रशासन पर अनुचित दबाव डालकर अपनी बात मनवाने का प्रयत्न करते हैं। लोकतांत्रिक व्यवस्था में ऐसे दबाव स्वीकार नहीं किए जा सकते, किए भी नहीं जाने चाहिए, क्योंकि इनसे राज्य-सत्ता की दुर्बलता प्रकट होती है और दबाव डालने वाली अलोकतांत्रिक ताकतों का मनोबल बढ़ता है।

कृषि-विधेयक के विरोध में गणतंत्र दिवस के दिन लाल किले पर हुए तथाकथित किसानों का उग्र खालिस्तानी अलगाववादी प्रदर्शन, शाहीन बाग का प्रदर्शन, कोविड-19 के समय कुछ विशेष बस्तियों के लोगों द्वारा चिकित्सकों और नर्सों पर की गई पत्थरबाजी तथा जब-तब भड़कते दंगों में पुलिस बल पर होने वाले हमले लोकतंत्र के आकाश पर मंडराते गहराते काले बादलों की ओर इशारा कर रहे हैं। सबका साथ और सबका विकास का नारा देकर सबको समान रूप से निशुल्क अन्न बाँटने वाली, आवास और अन्य सुविधाएँ देने वाली सरकार सब का विश्वास जीतने में अभी भी विफल है, क्योंकि हैदराबाद से ओवैसी और कश्मीर घाटी से महबूबा मुफ्ती जैसे नेता अभी भी समुदाय विशेष को बहकाने-भड़काने में लगे हैं।

परिस्थितियाँ विषम हैं। देश एक अघोषित अराजक आपातकाल की ओर जा रहा है। राजनेता अपने-अपने दलों का हित ध्यान में रखकर निर्णय ले रहे हैं। अतः हम नागरिकों का दायित्व है कि वर्ग, धर्म आदि के खांचों में विभाजित राजनीति और उसके रहनुमाओं के चंगुल से निकलकर देशहित में स्वयं निर्णय लें और आपराधिक मानसिकता वाले कथित नेताओं के हाथों में हथियार बन कर अपने ही देश की देह लहूलुहान ना करें। राष्ट्र की एकता, अखंडता और स्वायत्तता के लिए समर्पित हों।

(लेखक डॉ. कृष्णगोपाल मिश्र, शासकीय नर्मदा स्नातकोत्तर महाविद्यालय, नर्मदापुरम् (मध्य प्रदेश) में हिन्दी के विभागाध्यक्ष हैं)

पूर्व नियोजित था हैदराबाद गैंगरेप, खरीदे गए थे कंडोम: 6 आरोपितों में सदुद्दीन मलिक एकमात्र बालिग़, पुलिस खँगाल रही कॉल रिकार्ड्स

हैदराबाद गैंगरेप मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। शुरुआती सबूतों से पता चला है कि 28 मई को जुबली हिल्स में 17 वर्षीय लड़की का सामूहिक बलात्कार पूर्व नियोजित था। इसे अंजाम देने के लिए पूरी तैयारी की गई थी।  

एक पुलिस अधिकारी ने रविवार (12 जून 2022) को टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए कहा, “चार नाबालिगों और एक बालिग सहित पाँच आरोपितों ने पूर्व नियोजित तरीके से अपराध को अंजाम दिया। उनके पास कंडोम भी था और अपराध करते समय उन्होंने प्रोटेक्शन का भी इस्तेमाल किया था।” अब पुलिस अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि आरोपितोंको कंडोम कहाँ से मिला।

बता दें कि आरोपितों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। इस दौरान यह भी जानने की तफ्तीश की जा रही है कि आरोपितों ने पब में जाने से पहले कंडोम खरीदा था या फिर पब से निकल कर बेकरी और फिर रोड नंबर 44 पर वारदात को अंजाम देने के लिए जाने के दौरान खरीदा था। पुलिस ने सभी आरोपियों के कॉल डेटा रिकॉर्ड (CDR) को भी खँगाला है और सोमवार (13 जून, 2022) को उनसे आगे की पूछताछ में इसके बारे में सवाल-जवाब किया जाएगा। अधिकारी ने बताया कि इससे पता चलेगा कि अपराध को अंजाम देने के दौरान कौन-कौन से आरोपित पीड़िता के साथ संपर्क में था।

इस बीच, रविवार को नाबालिग समेत सभी छह आरोपितों को क्राइम का सीन रीक्रिएट करने के लिए जुबली हिल्स रोड नंबर 44 पर ले जाया गया, ताकि घटनाओं के सीक्वेंस को एक साथ जोड़कर समझा जा सके कि अपराध को किस तरह से अंजाम दिया गया और फिर इसके बाद वो लोग कहाँ फरार हो गए थे। हालाँकि, पुलिस सूत्रों ने कहा कि आरोपितों द्वारा दिए गए बयानों में कुछ असमानताएँ थीं। एक सूत्र ने कहा, “कॉल रिकॉर्ड के आधार पर हमें उनसे दोबारा पूछताछ करने की जरूरत है।”

रविवार को पूछताछ के दौरान आरोपित ने पीड़िता को मिलनसार बताया और कबूल किया कि उन्होंने उसके ‘दोस्ताना रवैये’ का फायदा उठाकर उसका यौन शोषण किया। अधिकारी ने कहा, “यह मायने नहीं रख सकता कि किसने पहले उसका बलात्कार किया और किसके उकसावे पर किया, सच्चाई यही है कि सभी लड़के अपराध में शामिल थे।” पुलिस उस्मानिया जनरल अस्पताल (OGH) के डॉक्टरों से पाँचों मुख्य आरोपितों की शक्ति परीक्षण रिपोर्ट (Potency Test) का इंतजार कर रही है।

गौरतलब है कि पिछले दिनों यह बात भी सामने आई थी कि नाबालिग से गैंगरेप को अंजाम देने के लिए सरकारी गाड़ी का इस्तेमाल हुआ था। आरोपितों की निशानदेही पर वह इनोवा जब्त कर ली गई। पुलिस कमिश्नर सीवी आनंद ने बताया था कि यह गाड़ी एक वरिष्ठ नेता को अलॉट की गई थी। इस मामले में कुल 6 गिरफ्तारी हुई है। इनमें से 5 नाबालिग हैं। एकमात्र बालिग आरोपित की पहचान सदुद्दीन मलिक बताई गई।

UK ने इमाम को पद से हटाया, पैगंबर मुहम्मद की बेटी पर बनी फिल्म का किया था विरोध: सिनेमाघरों के बाहर जुटी है मुस्लिम भीड़, कई शो रद्द

यूनाइटेड किंगडम ने पैगंबर मुहम्मद की बेटी पर बनी फिल्म का विरोध करने वाले इमाम को सलाहकार पद से हटा दिया है। इस फिल्म पर ‘ईशनिंदा (Blasphemy)’ का आरोप लगाते हुए ब्रिटेन में हजारों मुस्लिम सड़क पर हैं। इसी क्रम में इमाम कारी मुहम्मद असीम ने भी सिनेम हॉल्स को ये फिल्म न लगाने को कहा था। लीड्स स्थित मक्का मस्जिद के मुखिया इमाम कारी मुहम्मद असीम को इस्लामोफोबिया पर सरकार ने सलाहकार बनाया हुआ था।

साथ ही वो ‘एंटी मुस्लिम हेट्रेड वर्किंग ग्रुप (मुस्लिम विरोधी घृणा कार्यकारी समूह)’ का अध्यक्ष भी था। इस पद से भी उसे मुक्त कर दिया गया है। ये सारा विवाद ‘The Lady Of Heaven’ नामक फिल्म को लेकर हो रहा है, जिसमें पैगंबर मुहम्मद की बेटी फातिमा की कहानी दिखाई गई है। इंग्लैंड के कई शहरों में इस फिल्म की स्क्रीनिंग के खिलाफ मुस्लिम भीड़ प्रदर्शन करने में लगी हुई है। इमाम ने इस फिल्म को इस्लाम को नीचे दिखाने वाला बताया था।

उसने कहा था कि इससे मुस्लिमों को काफी दर्द पहुँचा है और उनकी भावनाएँ आहत हुई हैं। यूके सरकार ने एक पत्र में कहा है कि उसकी सेवाएँ त्वरित रूप से ख़त्म करने के अलावा अब कोई विकल्प नहीं बचा है। सरकार ने कहा है कि फिल्म के विरोध में चल रहे अभियान से सांप्रदायिक तनाव पैदा हुआ है और इमाम ने इस अभियान को समर्थन देकर फ्री स्पीच के विरुद्ध काम किया है। इसीलिए, सांप्रदायिक अमन-चैन कायम करने के सरकार के प्रयासों में उसका कोई रोल न बताते हुए उसे हटा दिया गया है।

यूके सरकार ने कहा, “कई सिनेमाघरों के बाहर जो दृश्य हैं, उन्हें आपने देखा-सुना होगा। इसमें मजहबी नारों के साथ शिया समुदाय के खिलाफ घृणा फैलाई जा रही है। इसका हमें विरोध करना चाहिए, अगर हमें मुस्लिम विरोधी घृणा से निपटना है तो। आप इस तरह की करतूतों की निंदा करने में विफल रहे हैं।” बता दें कि ‘Cineworld’ थिएटर चेन ने सबसे पहले इस फिल्म की स्क्रीनिंग्स को रद्द किया। कारी इमाम ने कई इमामों के साथ मिल कर सिनेमघरों से बात कर के और प्रदर्शन कर के स्क्रीनिंग्स रद्द कराने की योजना बनाई थी।

इस फिल्म में ईराक में युद्ध की कहानी दिखाते हुए 1400 साल पहले पैगंबर मुहम्मद की बेटी फातिमा की कहानी बताई गई है, जिन्हें बुर्के में दिखाया गया है। फिल्म के एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर मलिक शिबाक को सोशल मीडिया पर जान से मार डालने की धमकियाँ मिली हैं। उन्होंने कहा कि इस देश में बोलने और अभिव्यक्त करने की आज़ादी है, इसीलिए फिल्म को रोकना सही नहीं है। उन्हें काफिर बताया जा रहा है। हालाँकि, उनका कहना है कि वो इन सबसे डरने वाले नहीं हैं।

‘ये काफिर हैं इन्हें मत छोड़ो’: प्रयागराज की अटाला मस्जिद का इमाम गिरफ्तार, फिरोजाबाद में दंगाइयों के लगे पोस्टर; UP में जुमे की हिंसा को लेकर 300 से अधिक गिरफ्तार

प्रयागराज की बड़ी अटाला मस्जिद के इमाम अली अहमद को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। उस पर 10 जून 2022 को जुमे की नमाज के बाद भीड़ को भड़काने का आरोप है। रिपोर्ट के अनुसार इमाम ने पुलिस वालों को काफिर कह कर उन पर हमले के लिए उकसाया था। इसके बाद हुई हिंसा और आगजनी को लेकर दर्ज FIR में इमाम को नामजद किया गया था। 12 जून 2022 (रविवार) को उसकी गिरफ्तारी हुई।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इमाम अली अहमद के ही भड़काने के बाद भीड़ ने पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया था। इसी के बाद हिंसा की शुरुआत हो गई जिसमें कई अधिकारी और पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। प्रयागराज हिंसा में गिरफ्तार हो चुके इमाम अली अहमद और जावेद पंप के अलावा जीशान रहमानी, सारा अहमद, पार्षद मोईनुद्दीन और वामपंथी विचारधारा के आशीष मित्तल मुख्य आरोपितों के तौर पर शामिल हैं। पुलिस बाकी आरोपितों की तलाश कर रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक अली अहमद ने भीड़ को भड़काने के लिए मस्जिद के लाऊडस्पीकर का प्रयोग किया था। आरोप है कि उसने पुलिस वालों की तरफ इशारा करते हुए कहा था कि ये काफिर हैं इन्हें मत छोड़ो। अली अहमद से पुलिस की पूछताछ जारी है। इस केस में 80 नामजद आरोपित हैं। 5 हजार अज्ञात आरोपित भी हैं। जावेद पंप के बाद AIMIM प्रयागराज के जिलाध्यक्ष शाह आलम भी पुलिस की रडार पर है।

फिरोजाबाद में लगे पोस्टर

फ़िरोज़ाबाद में 10 जून को जुमे की नमाज़ के बाद उपद्रव करने वालों के पोस्टर चिपकाए गए हैं। पोस्टर में दिख रहे 18 आरोपितों की पहचानने वालों से उनकी जानकारी पुलिस को देने की अपील की गई है। पुलिस ने सूचना और सुराग देने वालों का नाम व अन्य जानकारी गुप्त रखने का भी भरोसा दिया है। फ़िरोज़ाबाद में 8 नामजद और 80 अज्ञात लोगों पर केस दर्ज किया गया है। अब तक 15 लोगों की गिरफ्तारी की भी खबर है।

UP में 300 से अधिक दंगाई गिरफ्तार

गौरतलब है कि UP पुलिस ने अब तक जुमे की नमाज़ के बाद हिंसा करने और कानून तोड़ने वाले 300 से अधिक आरोपितों को गिरफ्तार किया है। 9 जिलों में अब तक कुल 13 FIR दर्ज हुई हैं। इसमें सहारनपुर में 84, हाथरस में 51, अंबेडकरनगर में 34, प्रयागराज में 92, मुरादाबाद में 35, फिरोजाबाद में 15, अलीगढ़ में 6 और जालौन में 2 आरोपित शामिल हैं।

शक्ति कपूर का बेटा सिद्धांत बेंगलुरु के होटल से ड्रग्स केस में गिरफ्तार, रिपोर्ट पॉजिटिव: बेटी श्रद्धा कपूर से भी NCB कर चुकी है पूछताछ

बेंगलुरु के होटल में चल रही रेव पार्टी पर रेड के दौरान पुलिस ने बॉलीवुड अभिनेत्री श्रद्धा कपूर के भाई सिद्धांत कपूर को हिरासत में लिया है। सिद्धांत होटल के कमरे में मौजूद उन 6 लोगों में से एक हैं जिन्होंने रेड के दौरान ड्रग्स लिए हुए थे।

पुलिस ने बताया कि उन्होंने छापेमारी के बाद कुछ लोगों हिरासत में लेकर इनका टेस्ट कराया था जिसमें सिद्धांत की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। बेंगलुरु सिटी के डीसीपी डॉ भीमाशंकर गुलेड ने बताया कि पुलिस अब सिद्धांत को अपने साथ उलसूर थाने ले गई है।

बता दें कि सिद्धांत कपूर बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता शक्ति कपूर के बेटे और फेमस एक्ट्रेस श्रद्धा कपूर के भाई हैं। बॉलीवुड में उन्होंने अपने करियर की शुरुआत शूटआउट एड वडाला से की थी। इसके बाद वह अनुराग कश्यप की ‘अगली’ में नजर आए और फिर उन्होंने अपने बहन के साथ ‘हसीना पार्कर’ में भी किरदार निभाया था। तमाम कोशिशों के बावजूद सिद्धांत का बॉलीवुड सफर सफल नहीं माना जाता है। वहीं उनकी बहन बॉलीवुड में अच्छा नाम कमा चुकी हैं।

जानकारी के लिए बता दें कि जिस तरह सिद्धांत कपूर का नाम अचानक से ड्रग मामले में सामने आया है। वैसे ही उनकी बहन भी साल 2020 में ड्रग केस में काफी चर्चा में रही थीं। सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या मामले में ड्रग एंगल खुलने के बाद श्रद्धा से पूछताछ हुई थी। श्रद्धा ने सुशांत के साथ पार्टी की बात कुबूल की थी लेकिन ड्रग्स लेने से इनकार कर दिया था। वहीं जया साहा नाम ने स्वीकार किया था कि उन्होंने जो सीबीडी ऑयल खरीदा वो श्रद्धा के लिए ही था।

बिहार: गोपालगंज में ​हर जगह लगे ‘आई सपोर्ट नूपुर शर्मा’ के पोस्टर, राजद नेता के ‘विरोध मार्च’ को पुलिस ने नहीं दी इजाजत

बिहार के गोपालगंज में नूपुर शर्मा के समर्थन में पोस्टर लगाए गए हैं। पोस्टर शहर के तमाम हिस्सों में दिखाई दे रहे हैं। पोस्टर में नूपुर शर्मा की फोटो के साथ ‘आई सपोर्ट नुपूर शर्मा’ लिखा हुआ है। बताया जा रहा है कि ये पोस्टर 12-13 जून की दरम्यानी रात लगाए गए हैं। इसके बाद खुफिया विभाग और पुलिस डिपार्टमेंट अलर्ट मोड पर है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ये पोस्टर बिहार के हिंदूवादी संगठनों ने लगाए हैं। पार्क, मंदिर, चौक-चौराहों और कोचिंग सेंटर के आस-पास पोस्टर लगाए गए हैं। दूसरी तरफ गोपालगंज पुलिस ने नूपुर शर्मा के खिलाफ प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन को अनुमति देने से इनकार कर दिया। यह अनुमति पूर्व विधायक रियाजुल हक ने माँगी थी। विरोध रैली 12 जून को निकलनी थी।

बिहार पुलिस आदेश

राजद के पूर्व विधायक रियाजुल हक ने इसे ‘विरोध मार्च’ का नाम दिया था। यह जुलूस अम्बेडकर चौक से निकलना था। पुलिस ने इस प्रदर्शन की अनुमति यह कहते हुए देने से इनकार कर दिया कि इससे सामाजिक सौहार्द को खतरा हो सकता है। अनुमति नहीं मिलने पर हक ने कहा कि जिला प्रशासन को RSS के द्वारा दंगा फैलाने का शक है। उन्होंने कहा, “हमने उलेमा आदि के साथ मिलकर फैसला किया है कि हम इस प्रदर्शन को निरस्त कर रहे हैं। हम नहीं चाहते कि हमारे लोगों पर कार्रवाई हो। हम राष्ट्रपति के नाम पत्र भेज कर नूपुर शर्मा पर कार्रवाई की माँग करते हैं। रसूल के चाहने वालों से निवदेन है कि बे जहाँ रहें वहाँ शांति से रहें और सब्र करें।”

मुस्लिमों के एक संगठन ने गोपालगंज के एक थाने में नूपुर शर्मा के खिलाफ FIR करने की माँग के साथ लिखित शिकायत दी है। वहीं प्रशासन ऐसे लोगों की लिस्ट तैयार कर रहा है जो सोशल मीडिया पर साम्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने का प्रयास कर रहे हैं। पुलिस के मुताबिक अब तक ऐसे 70 लोगों को चिन्हित किया गया है।

मंदिर में चप्पल पहन घूमने वाली हिरोइन का इंटीमेट सीन से तौबा: नयनतारा को लेकर रिपोर्ट में दावा- शादी के बाद फिल्मों में रोमांटिक सीन नहीं करने का फैसला

तमिल फिल्मों की ‘लेडी सुपरस्टार’ नयनतारा (Nayanthara) शादी के बाद से लगतार चर्चा में बनी हुई हैं। उन्होंने पिछले दिनों ब्वॉयफ्रेंड विग्नेश शिवन से शादी की थी। फिलहाल दोनों शादीशुदा लाइफ एंजॉय कर रहे हैं। इस बीच मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि नयनतारा अब फिल्मों में इंटीमेट सीन नहीं करेंगी।

बॉलीवुड हंगामा की रिपोर्ट के मुताबिक नयनतारा अब फिल्मों में मेल एक्टर्स के साथ इंटीमेट सीन्स से दूरी बनाएँगी। उन्होंने ऑनस्क्रीन अपने मेल को-एक्टर्स के साथ रोमांटिक सीन नहीं करने का फैसला किया है। साथ ही बताया गया है कि नयनतारा अपने डायरेक्टर पति संग क्वालिटी टाइम बिताने के लिए फिल्मों से ब्रेक भी लेंगी। ब्रेक से लौटने के बाद वह इंटीमेट सीन नहीं करेंगी। हालाँकि अभी तक नयनतारा की तरफ से इस पर कोई ऑफिशियल कंफर्मेशन नहीं आई है।

गौरतलब है कि नयनतारा और डायरेक्टर विग्नेश शादी के बात मुसीबत में फँस गए थे। दोनों 9 जून 2022 को शादी के बंधन में बंधने के तुरंत बाद तिरुपति बाला जी का आशीर्वाद लेने के लिए पहुँचे थे। इस दौरान नयनतारा को मंदिर परिसर के अंदर चप्पल पहन कर टहलते और फोटोशूट कराते हुए देखा गया था, जबकि वहाँ पर जूते-चप्पल पहना और फोटोग्राफी करना सख्त मना है। इसके बाद तिरुमला तिरुपति देवस्‍थानम समिति के चीफ विजिलेंस सिक्‍योरिटी ऑफिसर नरसिम्‍हा किशोर ने उन्हें लीगल नोटिस दिया था।

विग्नेश ने इसके बाद मंदिर के नियमों के उल्लंघन के लिए माफी माँगते हुए कहा था, “शादी के तुरंत बाद, घर जाने के बजाए हम सीधे तिरुपति मंदिर गए। वहाँ पर बहुत सारे लोगों ने हमें घेर लिया था तो हम वहाँ से आगे चले गए। थोड़ी देर बाद एझुमालयन मंदिर के सामने वापस आ गए। हमने जल्दी से फोटोशूट खत्म किया और वहाँ से निकलने का फैसला किया, क्योंकि अगर फैंस हमें देखते तो वे हमें घेर लेते।”

विग्नेश ने आगे कहा, “इन सब के बाद हमने ये नोटिस किया कि हम उस जगह चप्पल पहनकर चल रहे थे, जहाँ जूते-चप्पल पहनना मना है। हमें असुविधा के लिए खेद है। हम पिछले महीने में तिरुपति पाँच बार गए हैं, क्योंकि हम वहाँ शादी करने की प्लानिंग कर रहे थे। लेकिन कई कारणों से हम वहाँ शादी नहीं कर पाए।” वर्किंग फ्रंट की बात करें तो नयनतारा जल्द ही शाहरुख खान के साथ जवान फिल्म में नजर आने वाली हैं।

अब्दुल के घर में ब्लास्ट, टूटे खिड़कियों के शीशे: पूछताछ में बोला- वाशिंग मशीन में गैस भर रहा था, पुलिस ने जब्त किए 4 सिम और पासपोर्ट

महाराष्ट्र में पुणे के एक अपार्टमेंट में ब्लास्ट की खबर है। ब्लास्ट में किसी के मारे जाने की सूचना नहीं हैं। विस्फोट के बाद पुलिस ने अब्दुल रशीद नाम के व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। अब्दुल उसी आपर्टमेंट में वाशिंग मशीन बनाने का काम करता है। घटना रविवार (12 जून 2022) की है।

ANI के मुताबिक घटनास्थल पुणे स्थित भवानी पेठ में मौजूद विशाल सोसाईटी नाम की जगह है। ये जगह समर्थ नगर थानाक्षेत्र में आती है। थाने के सीनियर इंस्पेक्टर विष्णु तम्हाने ने इस विस्फोट की पुष्टि करते हुए बताया, “ये कम तीव्रता का विस्फोट था जो वाशिंग मशीन बनाने के दौरान हुआ।” वहीं एक अन्य सीनियर पुलिस अधिकारी ने कहा, “पूछताछ में रशीद शेख इसे वाशिंग मशीन रिपेयरिंग के दौरान हुआ ब्लास्ट बता रहा है लेकिन हम इसके पीछ असल कारणों की बारीकी से जाँच कर रहे हैं।”

एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक हिरासत में लिए गए रशीद शेख की उम्र लगभग 45 साल है। वह विशाल सोसाइटी के एक आपर्टमेंट में किराए पर रहता था। इसी अपार्टमेंट से वह वाशिंग मशीन बनाने का व्यवसाय करता था। पुणे में उसके कई रिश्तेदार रहते हैं। ब्लास्ट की आवाज काफी दूर तक सुनाई दी और उस के बाद कई लोगों की खिड़कियों के शीशे टूट गए। मौके पर बम निरोधक दस्ते को बुलाया गया।

आरोपित का पूरा नाम रशीद मोहम्मद अली शेख है। वो अपार्टमेंट की तीसरी मंजिल पर रहता था। विस्फोट के बाद पूरे अपार्टमेंट में अफरातफरी मच गई थी। लोगों द्वारा पूछने पर उसने गैस फिलिंग के दौरान ब्लास्ट होना बताया। जल्द ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुणे में दौरा है। इसलिए पुलिस इस पूरे मामले की बेहद बारीकी से जाँच कर रही। रशीद शेख के पास 3 से 4 सिम कार्ड बरामद हुए हैं। शेख का पासपोर्ट भी पुलिस ने जब्त कर लिया है।

‘राहुल गाँधी हमारे राम, मोदी सरकार रावण’: ED के सामने पूर्व अध्यक्ष की पेशी से पहले कॉन्ग्रेसियों का सड़क पर हुड़दंग

नेशनल हेराल्ड केस में कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी के आज (13 जून 2022) प्रवर्तन निदेशालय के सामने पेश होने से पहले कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए। दिल्ली की सड़कों को बंद करके कॉन्ग्रेसियों ने राहुल के समर्थन में नारेबाजी की। शक्ति प्रदर्शन की योजना से इकट्ठा हुए कॉन्ग्रेसी समर्थकों ने सड़क पर खूब हल्ला किया, जिसके बाद दिल्ली पुलिस द्वारा उन्हें हिरासत में ले लिया गया। माहौल देखते हुए पुलिस ने ईडी कार्यालय के बाहर और राहुल गाँधी के आवास के बाहर सुरक्षा बढ़ाई हैं।

सामने आई वीडियोज में देख सकते हैं कि कैसे दिल्ली पुलिस कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं को अपनी गाड़ी में भर रही है और कॉन्ग्रेस नेता नारे लगा रहे हैं- “राहुल गाँधी हम तुम्हारे साथ है।” इसके अलावा कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन वाली जगहों पर ‘राहुल झुकेगा नहीं, सत्य झुकेगा नहीं’ जैसे नारे वाले पोस्टर लगाए। अन्य पोस्टरों में लिखा हुआ था- ‘राहुल गाँधी संघर्ष करो, हम तुम्हारे साथ हैं।’

कॉन्ग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष की ईडी के सामने पेशी मामले में कहा कि राहुल गाँधी के नेतृत्व में ‘सत्या का संग्राम’ जारी रहेगा। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अंग्रेज भी कॉन्ग्रेस की आवाज को दबा नहीं पाए, फिर यह सत्ताधारी सरकार कैसे कर सकती है? एक कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता ने कहा, “जब तक राहुल जी ईडी कार्यालय से नहीं निकलते, हम अपना विरोध जारी रखेंगे। सत्तारूढ़ सरकार ‘रावण’ की भूमिका निभा रही है। हम उन्हें बताना चाहते हैं कि राहुल गाँधी हमारे ‘राम’ हैं और हम उनके प्रति समर्पित हैं।”

बता दें कि कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं के हड़कंप के बीच दिल्ली पुलिस ने एडवाइजरी जारी की है। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने जनता से कहा है कि गोल मेथी जंक्शन, तुगलक रोड जंक्शन, क्लेरिजेस जंक्शन, क्यू-पॉइंट जंक्शन, सुनहरी मस्जिद जंक्शन, मौलाना आज़ाद रोड जंक्शन और मान सिंह रोड जंक्शन पर सुबह 7 बजे से दोपहर के 12 बजे के बीच जाने से बचें। पुलिस ने बताया है कि विशेष यातायात व्यवस्था के कारण नई दिल्ली में गोल डाक खाना जंक्शन, पटेल चौक, विंडसर प्लेस, तीन मूर्ति चौक, पृथ्वीराज रोड से आगे बसों की आवाजाही प्रतिबंधित रहेगी।

सोनिया गाँधी अस्पताल में भर्ती

गौरतलब है कि राहुल गाँधी की पेशी के एक दिन पहले कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी के अस्पताल में भर्ती होने की खबरें आई थीं। उन्हें भी ईडी ने 23 जून को पेश होने के लिए समन भेजा है। मालूम हो कि नेशनल हेराल्ड से जुड़ा यह मामला कॉन्ग्रेस पार्टी के नेतृत्व में ‘यंग इंडियन’ में वित्तीय अनियमितता की जाँच के सिलसिले में दर्ज किया गया था। समाचार पत्र ‘नेशनल हेराल्ड’, यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड का है। ‘नेशनल हेराल्ड’ एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) द्वारा प्रकाशित किया जाता है और यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड के स्वामित्व में है। भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी और अन्य पर धोखाधड़ी की साजिश रचने और यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड के फंड का गबन करने का आरोप लगाया था। स्वामी ने यह भी आरोप लगाया था कि यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड ने 90.25 करोड़ रुपए की वसूली के अधिकार हासिल करने के लिए सिर्फ 50 लाख रुपए का भुगतान किया था, जो एजेएल पर कॉन्ग्रेस का बकाया था।