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लेखकों को पैसे नहीं देता है बॉलीवुड, साउथ और हॉलीवुड से उठा रहा कहानियाँ: अपनी संस्कृति का अपमान, फ्लॉप पर फ्लॉप देने के पीछे ये हैं कारण

बॉलीवुड फिल्मों का पिछले कुछ समय से बॉक्स ऑफिस पर बहुत बुरा हश्र हो रहा है। डायरेक्टर विवेक अग्निहोत्री की फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ और कार्तिक आर्यन की ‘भूल भुलैया 2’ को छोड़ दिया जाए, तो अधिकतर फिल्मों ने दर्शकों को निराश किया है। बॉलीवुड (Bollywood) का कोई भी पटकथा लेखक अपनी कहानी से दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचने में कामयाब नहीं हो पा रहा है। वहीं दर्शक भी अब घिसी-पिटी कहानियों को बिल्कुल भी बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।

यही कारण है कि दर्शकों ने 2022 में अब तक रिलीज हुई कई फिल्मों, जैसे जर्सी, जयेशभाई जोरदार, धाकड़ और सम्राट पृथ्वीराज चौहान को सिरे से नकार दिया। वहीं दक्षिण भारतीय फिल्मों को सिनेमाप्रेमियों ने भरपूर प्यार दिया। रीमे​क को सिरे से नकारने के बावजूद आने वाले कुछ सालों तक दर्शकों को बॉलीवुड में केवल हॉलीवुड और साउथ की फिल्मों का रीमेक ही देखने को मिलेगा। ऐसा लगता है कि हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के दिन लदने वाले हैं। हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि सितारे गर्दिश में होने के बावजूद वह कोई भी सबक नहीं ले रहा है।

आमिर खान (Aamir Khan) की फिल्म ‘लाल सिंह चड्ढा’ भी हॉलीवुड (Hollywood) फिल्म ‘फॉरेस्ट गंप’ की ऑफिशियल रीमेक है, जो 11 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। इसके अलावा हॉलीवुड की एक और रीमेक ‘रैंबो’ में टाइगर श्रॉफ नजर आएँगे। इसी तरह हॉलीवुड फिल्म ‘द नाइट मैनेजर’ के हिंदी रीमेक में आदित्य राय कपूर डबल रोल में दिखाई देंगे। ‘द इंटर्न’ के रीमेक में अमिताभ बच्चन और दीपिका पादुकोण नजर आएँगे। जूलियस आईज के रीमेक में तापसी पन्नू नजर आएँगी।

इसी तरह दक्षिण भारतीय फिल्म ‘कैथी’ के रीमेक में अजय देवगन हैं। बॉलीवुड में तेलुगु फिल्म अनुकूकुंडा के रीमेक संडे नाम से बनाई जाएगी। विक्रम वेदा की रीमेक में ऋतिक रोशन और सैफ अली खान होंगे। मास्टर की रीमेक में सलमान खान और पुष्पा फेम अल्लावैकुंठ पुरमुलु में कार्तिक आर्यन नजर दिखाई देंगे। कुल मिलाकर बॉलीवुड अब केवल हॉलीवुड और साउथ सिनेमा के कंटेट पर निर्भर है। यानी, बॉलीवुड का अपना कोई कंटेट नहीं होगा।

यही कारण है कि साउथ की हर फिल्म हिंदी बेल्ट में हर दिन नए रिकॉर्ड तोड़ रही हैं। बॉक्स ऑफिस पर रिलीज हुई कमल हासन की ‘विक्रम’ और अदिवि शेष की ‘मेजर’ इसका ताजा उदाहरण हैं, जिसके सामने अक्षय कुमार की ‘सम्राट पृथ्वीराज’ सुपरफ्लॉप हो गई। बॉलीवुड की टॉलीवुड और हॉलीवुड के कंटेट पर बढ़ती निर्भरता का बड़ा कारण इनकी कमजोर पटकथा है, बड़े स्टार को मुख्य भूमिका देना, पूरी फिल्म केवल उसे ही ध्यान में रखकर लिखना, बड़े और भव्य सेट को दर्शकों के आगे परोसना, अपनी कहानियों में इति​हास के साथ छेड़छाड़ करना और टैलेंटेड कलाकारों की बजाय स्टार किड्स को फिल्म का चेहरा बनाना।

साथ ही ओटीटी प्लेटफॉर्म पर हटकर और जमीनी हकीकत को बयाँ करने वाली कहानियों को मात न दे पाना। बॉलीवुड में बड़े लेखकों की अनदेखी को इसके पतन का मुख्य कारण माना जा रहा है। हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के लेखकों को कमतर आँकना, उन्हें कम पैसा देना भी बॉलीवुड को दिन में तारे दिखा रहा है। इसकी वजह से साउथ सिनेमा बॉलीवुड पर भारी पड़ रहा है। वे लोगों के दिल के करीब और उनकी समस्याओं को सबके समक्ष लाने का प्रयास करते हैं, जो दर्शकों को दिल से जोड़ती है।

उदाहरण के लिए राजामौली के पिता विजयेंद्र प्रसाद का नाम आज भी दक्षिण भारत में काफी मशहूर है। उन्होंने अपने बेटे की सारी फिल्में लिखी हैं, इसके अलावा उनके खाते में बॉलीवुड की बजरंगी भाईजान और मणिकर्णिका भी है। वहीं हॉलीवुड के लेखकों का भी दुनिया में अपना दबदबा होता है। दर्शकों के दिल दिमाग पर खासा असर छोड़ने के लिए वे फिल्म की कहानी को लिखने में सालों बिता देते हैं। लेकिन, बॉलीवुड में ऐसा नहीं है। हाल ही में रिलीज हुई ‘सम्राट पृथ्वीराज चौहान’ फिल्म की कहानी मुहम्मद गोरी और पृथ्वीराज चौहान के ऐतिहासिक तथ्यों के साथ मेल नहीं खाती है।

यह कुछ बड़ी वजहें हैं, जिनकी वजह से साउथ के आगे बॉलीवुड की फिल्में कोई खास कमाल नहीं दिखा पा रही हैं। कुछ सालों में हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के पास साउथ के रीमेक भी नहीं होंगे, क्योंकि अब दक्षिण भारतीय फिल्मों को क्षेत्रीय भाषाओं में डब करके रिलीज करने का चलन बढ़ गया है, जिससे उनकी कमाई भी बॉलीवुड फिल्मों की तुलना में कहीं अधिक हो रही है। य​ही कारण है कि बॉलीवुड के बड़े फिल्ममेकर्स ने साउथ प्रोडक्शन कंपनियों में पैसा लगाना शुरू कर दिया है। ऐसे में हिंदी फिल्म इंडस्ट्री का भविष्य क्या होगा, यह आने वाले कुछ सालों में सबके सामने होगा।

‘हिंदुओं की दुकान से मत खरीदो सामान’ : कानपुर हिंसा की साजिश ‘निजाम कुरैशी ग्रुप’ में रची गई, स्क्रीनशॉट वायरल होते ही सपा विधायकों ने छोड़ा ग्रुप

कानपुर हिंसा केस में समाजवादी पार्टी के पूर्व नेता निजाम कुरैशी की व्हॉट्सएप चैट लीक होने के बाद साफ हो गया है कि कैसे शहर में हिंदुओं के विरुद्ध प्लॉनिंग चल रही थी। निजाम कुरैशी ग्रुप की हिंदूफोबिक चैट में मुस्लिमों से अपील की जा रही थी कि वह हिंदुओं से सामान न खरीदें। मैसेज में कुछ हिंदू दुकानदारों के नाम थे जिन्हें खासतौर पर बॉयकॉट करने को कहा गया था। इस ग्रुप चैट के खुलासे के बाद ये भी पता चला है कि इस समूह से कुछ सपा विधायक और पार्टी के महानगर अध्यक्ष डॉ इमरान भी जुड़े थे।

बता दें कि जिस ग्रुप में हिंदुओं के विरुद्ध प्लॉनिंग चल रही थी उस ग्रुप का नाम ‘ टीम निजाम कुरैशी’ था। निजाम के तमाम समर्थक व कुछ सपा नेता इस ग्रुप का हिस्सा थे। निजाम खुद भी पहले पार्टी से जुड़ा था और एक समय में सपा का नगर सचिव चुना गया था। हालाँकि यतीमखाना बवाल में उसका नाम आने के बाद सपा नगर अध्यक्ष ने उसे पार्टी से निकाल दिया था। लेकिन तब तक वह मुस्लिम समुदाय में अपनी अच्छी पकड़ बना चुका था।

उसकी ग्रुप चैट में साझा किए गए संदेश में मुस्लिमों से अपील की गई है कि वो लोग परेड चौराहे के आसपास जो भी खाने-पीने या घर में इस्तेमाल होनी वाली सामग्री है, उसे वह वहाँ (हिंदुओं) के लोगों से नहीं खरीदें। संदेश में कहा गया, “मुसलमान इनकी हर चीजों को बायकॉट करें। खासकर दयाराम स्वीट्स नमकीन हाउस, बंसीलाला जनरल स्टोर, गुप्ता जी घास वाले, गुप्ता जी कूलर वाले, सुमित फल वाला आदि दुकानों से माल नहीं खरीदें।”

इस चैट के वायरल होने के बाद खबर है कि सपा नेताओं ने इस ग्रुप को लीव कर दिया है। महानगर अध्यक्ष डॉ इमरान ने अपनी सफाई में कहा है कि वह ऐसी चीजों का समर्थन नहीं करते। उनके पास बहुत सारे व्हॉट्सएप ग्रुप हैं उनके लिए हर समूह को देख पाना संभव नहीं होता। ग्रुप से जुड़े होने का मतलब यह नहीं है कि वो उसमें शेयर सामग्री का समर्थन करते हैं। चैट का पता लगने के बाद इस ग्रुप को उन्होंने छोड़ दिया, यह जानकारी भी उन्होंने खुद दी।

नूपुर शर्मा की जुबान काटने पर ₹1 करोड़ का ऐलान: सूरत में सड़क पर बिछाए पोस्टर, फोटो पर क्रॉस और जूते के निशान

पैगंबर मोहम्मद पर भाजपा की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा द्वारा की गई विवादित टिप्पणी के मामले में रोज नया बवाल सामने आ रहा है। जहाँ अब इस विवाद में कूदते हुए भीम सेना ने नूपुर शर्मा की जुबान काटने पर ईनाम का ऐलान किया है। वहीं सूरत की सड़कों पर भी नूपुर शर्मा के ऐसे पैम्फलेट फेंके हुए मिले जिन पर उनके चेहरे पर जूतों और क्रॉस के निशान बनाए गए हैं।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, भीम सेना चीफ नवाब सतपाल तंवर ने बुधवार (8 जून, 2022) को नूपुर शर्मा की जीभ काटकर लाने वाले को एक करोड़ रुपए का इनाम देने की घोषणा की है। यही नहीं भीम सेना ने कानपुर में हुई हिंसा में मुस्लिम दंगाइयों का बचाव करते हुए नूपुर शर्मा को ही घटना का मास्टरमाइंड होने का आरोप लगाया है।

रिपोर्ट के अनुसार, भीम सेना के संस्थापक और राष्ट्रीय अध्यक्ष सतपाल तंवर ने आरोप लगाते हुए कहा, “नूपुर शर्मा ने नबी का अपमान किया है, जिससे करोड़ों मुस्लिम समुदाय के लोग आहत हुए हैं।” यही नहीं इस मामले में सीधा मोदी पर आरोप लगते हुए भीम सेना के संस्थापक ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार जानबूझ कर नूपुर शर्मा को गिरफ्तार नहीं कर रही है।

सतपाल तंवर यहीं नहीं रुके। उन्होंने आगे कहा, “नूपुर शर्मा जैसी नेता को समाज में रहने का कोई अधिकार नहीं है। इसे तुरंत जेल भेजना चाहिए या देश निकाला दे देना चाहिए। नूपुर शर्मा द्वारा की गई इस आपत्तिजनक टिप्पणी से भारत पूरे दुनिया में बदनाम हो रहा है।”

वहीं तंवर ने कानपुर हिंसा के बाद ताबतोड़ होती पुलिस कार्रवाई से इतर योगी सरकार पर भी कानपुर दंगे की असली मास्टरमाइंड नूपुर शर्मा को बताते हुए आरोप लगाया कि योगी सरकार ने उसको आरोपित क्यों नहीं बनाया।

बता दें कि नूपुर शर्मा के जो पैम्फलेट सूरत की जिलानी ब्रिज की सड़क पर लगाए और फेंके गए हैं। उन पर नूपुर के चेहरे पर जूतों के निशान भी बने हैं। इनमें नूपुर की गिरफ्तारी की माँग की गई है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ब्रिज पर इस तरह के पैम्फलेट क्यों और किसने लगाए हैं, फिलहाल इसका खुलासा अभी नहीं हुआ है। इस मामले में भी पुलिस आरोपितों का पता लगा रही है।

गौरतलब है कि पिछले दिनों नूपुर शर्मा ने टाइम्स नाउ की एक टीवी डिबेट के दौरान पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। तब से ही शर्मा को कई कट्टरपंथी धमकी भी दे रहे हैं। वहीं नूपुर शर्मा पर बढ़े खतरे के मद्देनजर दिल्ली पुलिस ने उन्हें सुरक्षा प्रदान की है।

बता दें कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने रविवार (5 जून, 2022) को राष्ट्रीय प्रवक्ता नूपुर शर्मा को पार्टी से निलंबित कर दिया था, वहीं दिल्ली इकाई के मीडिया प्रमुख नवीन कुमार जिंदल को पार्टी से निष्कासित कर दिया था। यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि बीजेपी ने अपने दोनों प्रवक्ताओं के खिलाफ यह कार्रवाई ऐसे समय में की है, जब उनके बयानों को लेकर सोशल मीडिया से लेकर विदेशों में भी विवाद खड़ा हो गया था और इस्लामिक देशों ने भारत को इसी मुद्दे पर घेरने की कोशिश की थी।

वहीं इस मुद्दे पर सोशल मीडिया से लेकर मीडिया में मचे बवाल के बाद बीजेपी ने अपने दोनों प्रवक्ताओं पर जहाँ एक्शन लिया था वहीं सोशल मीडिया पर तभी से नुपुर शर्मा को उनके सच बोलने की वजह से अपार जनसमर्थन भी मिल रहा है।

अशोक पंडित ने कतर को याद दिलाए भारत के एहसान, कंगना ने कहा- नुपूर को मन की बात कहने की आजादी, हिंदू देवी-देवताओं का हर रोज होता है अपमान

बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत ने भाजपा की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा का समर्थन किया है और कहा है कि भारत इस्लामिक मुल्क अफगानिस्तान नहीं है। बता दें कि प्रोपगेंडबाजों ने नूपुर शर्मा के खिलाफ अभियान चलाकर उन्हें बदनाम किया कि उन्होंने मुस्लिमों के पैगंबर मुहम्मद का अपमान किया था।

कंगना ने अपनी इंस्टा पोस्ट में लिखा, “नूपुर को अपने मन की बात कहने की पूरी आजादी है। उन्हें दी गई हर तरह की धमकी मैंने देखी है। हिंदू देवताओं को हर दिन अपमानित किया जाता है तो हम कोर्ट जाते हैं। ये अफगानिस्तान नहीं है।”

कंगना रनौत का इंस्टाग्राम पोस्ट

अपने पोस्ट में कंगना ने आगे लिखा, “हमारे पास एक व्यवस्था में चलने वाली सरकार है, जिसे लोगों ने ही चुना है। इस पूरी प्रोसेस को लोकतंत्र कहते हैं। यह बात सिर्फ उन लोगों के लिए है, जो हमेशा इस बात को भूल जाते हैं।”

वहीं, फिल्म प्रोड्यूसर और अभिनेता अशोक पंडित ने एक ट्विस्ट पोस्ट कर नूपुर शर्मा का समर्थन किया है। उन्होंने कतर और वहाँ के लोगों के नमकहराम (कृतघ्न) व्यक्तित्व का बताकर उनकी आलोचना की।

उन्होंने लिखा, “कतर जैसे इस्लामिक मुल्क नूपुर शर्मा के बयान पर भारत को उपदेश दे रहा है। ये लोग चुके हैं कि ये वही भारत है, जिसने कोरोना की वैक्सीन भेजकर उनकी जान बचाई। अन्य देशों ने उनके अनुरोधों को ठुकरा दिया था। नमकहराम।”

बता दें कि भारत को लोकतांत्रिक देश बताते हुए नूपुर को अपनी बात कहने के लिए जहाँ कंगना स्वतंत्र बता रही हैं, वहीं फरहान अख्तर जैसे लोगों ने नूपुर शर्मा की माफी को स्वीकार करने लायक नहीं बताया था। फरहान अख्तर ने कहा था, “जबरन मँगवाई गई माफी कभी दिल नहीं माँगी जाती।”

बता दें कि ये वही ऐक्टर पर हैं, जब फिल्मों के कंटेंट को लेकर विवाद हुआ तब उसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बताकर समर्थन किया है, लेकिन नूपुर शर्मा मामले में इन्होंने इसके ठीक विपरीत का रूख अपनाया।

55 साल के कुर्बान ने 9 साल की बच्ची को सेक्स के लिए खरीदा: इस्लाम में जायज होता है ऐसा निकाह?

अफगानिस्तान से एक छोटी बच्ची का वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में पहले बच्ची अपने दोस्तों के साथ खेलती नजर आती है और उसके बाद उसके अम्मी-अब्बू कमरे में ले जाकर उसे किसी बुजुर्ग शख्स के हाथ में सौंप देते हैं और बदले में कुछ कीमत उस बुजुर्ग से खुद ले लेते हैं।

ये वीडियो सीएनएन द्वारा रिकॉर्ड की गई है। दावा है कि बच्ची के पिता ने उसे इसलिए बेचा था क्योंकि वो बाकी घरवालों का पेट भरना चाहते थे। वहीं बच्ची के खरीददार ने टीवी पर बताया था कि वो खुद 55 साल का है और उसने 9 साल की लड़की को अपने लिए खरीदा है। वह उसके बड़े होने का इंतजार करेगा। रिपोर्ट के अनुसार खरीददार का नाम कुर्बान है, जिससे बच्ची के अब्बू ने कहा था कि वो उनकी बेटी का ख्याल रखे। हालाँकि कुर्बान ने जवाब दिया कि अब उसकी पत्नी है उसका जो मन होगा वो वह करेगा। रिपोर्ट के अनुसार, कुर्बान की यह दूसरी शादी थी। पहली बीवी से उसे 4 बेटियाँ और एक बेटा है।

CNN की यह वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर खूब शेयर हो रही है। लोग ध्यान दिला रहे हैं कि कैसे 55 साल के बुजुर्ग ने 9 साल की बच्ची को सेक्स के लिए खरीदा। अभिजीत मजूमदार लिखते हैं, “एक बार बच्ची का चेहरा देखो… ये सब हलाल है। ये लोग धरती पर चलने वाले सबसे बुरे जीव हैं।”

बता दें कि इस्लाम में पीरियड के बाद लड़की से निकाह को अक्सर जायज बताया जाता रहा है। लेकिन कुछ लोग लड़कियों से शादी की उम्र 9 साल भी बताते हैं। 2017 में देवबंद के मौलाना ने शरीयत का हवाला देकर लड़की की शादी की सही उम्र को 9 साल और लड़कों की निकाह की सही उम्र 14 साल बताई थी।

रही बात लड़की के साथ सेक्स की तो ईरान के संस्थापक अयातुल्लाह खुमैनी आगे कहते हैं, “लड़की के 9 साल के होने से पहले सेक्स नहीं करना चाहिए। भले ही वह स्थाई या अस्थाई निकाह ही क्यों न हो। इसके अलावा अन्य तमाम हरकतें की जा सकती हैं जिसमें कामुक टच, गले लगाना और पैरों के बीच में प्राइवेट पार्ट रगड़ना शामिल है। यहाँ तक कि ये सब किसी दूध पीती बच्ची के साथ भी जायज है।”

नौकरी या पढ़ाई के कारण अपने राज्य से बाहर रह रहे हैं? अब वहीं से बैठे-बैठे डाल पाएँगे वोट: EC लेकर आया पायलट प्रोजेक्ट

वर्ष 2024 में होने वाले आम चुनाव में देशवासियों को रिमोट वोटिंग का विकल्प मिल सकता है। जैसे अगर आप महाराष्ट्र में रहते हैं और आपका नाम दिल्ली की वोटिंग लिस्ट में है और वहाँ विधानसभा चुनाव होने हैं तो ऐसे में आप महाराष्ट्र में बैठे-बैठे अपना वोट डाल सकते हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार के उत्तराखंड के एक दूरदराज मतदान केंद्र की एक घंटे की यात्रा के कुछ दिन बाद मंगलवार (6 जून, 2022) को अहम फैसला लिया। चुनाव आयोग ने अपने एक बयान में प्रवासियों का मतदान प्रतिशत बढ़ाने का आदेश दिया है।

आयोग ने कहा कि अब समय आ गया है कि रिमोट वोटिंग की संभावनाओं का पता लगाया जाए, शायद पायलट आधार पर ऐसा किया जा सकता है।

आयोग ने कहा कि मतदाता शिक्षा, रोजगार और अन्य उद्देश्यों के लिए दूसरे राज्यों में पलायन करते हैं। ऐसे में उनके लिए वोट डालने के लिए अपने राज्य में आना बेहद मुश्किल हो जाता है। इसलिए, अब रिमोट वोटिंग की संभावनाएँ तलाशने का समय आ गया है।

निर्वाचन आयोग ने 6 जून को चुनाव आयुक्त अनूप चंद्र पांडे के साथ मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक में सीईसी के गाँव दुमक और कलगोठ के दौरे के बाद अपने विचार रखे थे। उन्होंने सीईसी को बताया कि हाल के चुनावों में दुमक गाँव जैसे दूरदराज के इलाकों में 71.14% मतदान हुआ और कलगोथ गाँव में 80.45% मतदान हुआ। महिला मतदाताओं की समान संख्या में भागीदारी रही। लेकिन इन दोनों ही गाँवों में लगभग 20-25% पंजीकृत मतदाता अपने निर्वाचन क्षेत्रों में वोट डालने में असमर्थ रहे हैं, क्योंकि वे अपनी नौकरी और पढ़ाई के कारण मतदान के समय अपने गाँव/राज्य से बाहर होते हैं।

चुनाव आयोग ने बताया है कि प्रवासी मतदाताओं से संबंधी मुद्दों की जाँच के लिए एक समिति का गठन किया जाएगा। ये कमेटी उन सारे तरीकों पर विचार करेगी, जिससे प्रवासी मतदाता जहाँ हैं, वहीं रहकर वोट डाल सकेंगे। इसके अलावा 3 दिन पहले से मतदान केंद्रों पर जाने वाले मतदान अधिकारियों का पारिश्रमिक दोगुना कर दिया गया है।

बताया जा रहा है कि जिस तरह से सर्विस वोटर्स इलेक्ट्रॉनिकली ट्रासमिटेड पोस्टल बैलेट सिस्टम यानी ETPBS के जरिए वोट डालते हैं, वही सिस्टम प्रवासी मतदाताओं के लिए भी हो जाए। अगर प्रवासी मतदाताओं के लिए ऐसी सुविधा हो जाती है, तो इससे दो बड़े फायदे होंगे। पहला दूरदराज इलाकों में रहने वाले मतदाता अपना वोट डाल सकेंगे और दूसरा ये कि इससे वोटिंग प्रतिशत भी बढ़ेगा।

‘केरल सोना तस्करी के आरोपित का अपहरण’: स्वप्ना सुरेश ने कहा था- घोटाले में CM पिनाराई विजयन शामिल, कर रहे हैं गंदी राजनीति

केरल सोना तस्करी (Gold Smuggling) मामले की मुख्य आरोपित स्वप्ना सुरेश ने जहाँ मंगलवार (7 जून, 2022) को मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाए। वहीं अब स्वप्ना सुरेश ने बुधवार (8 जून, 2022) को आरोप लगाया कि राजनयिक सोने की तस्करी मामले में पहले आरोपित पीएस सरित का उसके आवास से अपहरण कर लिया गया है।

बता दें कि स्वप्ना इस मामले में दूसरी आरोपित हैं। उन्होंने कहा, “चार लोगों के एक गैंग ने पुलिस के रूप में सरित का उसके पलक्कड़ के फ्लैट से अपहरण कर लिया। यहाँ तक कि उन्होंने कोई पहचान पत्र भी नहीं दिखाया।” स्वप्ना ने खुलासा किया कि आज बुधवार को पलक्कड़ में मीडिया से बात करते हुए सरित का अपहरण कर लिया गया। उसने आरोप लगाया कि अपहरण आज सुबह उसकी प्रेस कॉन्फ्रेंस के कुछ मिनट बाद हुआ।

उन्होंने दावा किया, “पहले आपने पूछा कि धमकी क्या थी। अब यह धमकी नहीं तो और क्या है, हमले शुरू हो गए हैं। एचआरडीएस इंडिया के कर्मचारी सरित को घर से 3-4 अज्ञात लोगों ने जबरन अपहरण कर लिया है।” उन्होंने यह भी कहा, “उन्होंने अपने हमले शुरू कर दिए हैं। मैं कम बोलती हूँ और वे पहले से ही डरे हुए हैं। यह उसी का संकेत है। वे इस तरह की गंदी रणनीति के जरिए अपनी संलिप्तता स्वीकार रहे हैं।”

वहीं स्वप्ना सुरेश ने अपने बयान में कहा, “अब आप मेरे, मेरे परिवार और सरित के सामने आने वाली धमकियों को जानते हैं। केरल के लोगों को यह महसूस करने की आवश्यकता है कि यहाँ दिन के उजाले में भी किसी को भी मारा या अपहरण किया जा सकता है।”

जब बाद में सरित को राज्य सरकार के सतर्कता अधिकारियों द्वारा उठाए जाने की खबरों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उनके वकील ने उनकी रिहाई सुनिश्चित करने के लिए बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर करने सहित कानूनी कदम पहले ही शुरू कर दिए हैं।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पलक्कड़ डीवाईएसपी के तहत एक जाँच दल ने इस घटना की जाँच शुरू कर दी है। वे सरित के आवास पहुँचे और सीसीटीवी फुटेज की जाँच की। वहीं अब इस मामले में खुलासा हुआ है कि सोने की तस्करी के मामले में आरोपित सरित पी को एक दूसरे केरल लाइफ मिशन वाले मामले में पुलिस की सतर्कता टीम ने आज हिरासत में ले लिया था। और बाद में हुए हंगामे के बाद अब पुलिस ने उसका फोन जब्त कर उसे छोड़ दिया है।

ता दें कि इससे पहले कोच्चि की एक अदालत में पेश होने के बाद स्वप्ना सुरेश ने मीडियाकर्मियों से बात करते हुए कहा मंगलवार को कहा था कि विजयन डिप्लोमेटिक बैगेज की आड़ में सोने की तस्करी घोटाले में शामिल थे। उन्होंने दावा किया कि जब विजयन 2016 में दुबई में थे, तब उन्हें करंसी से भरा एक बैग भेजा गया था।

स्वप्ना सुरेश ने कहा, “इस मामले में मैंने अदालत से केरल के मुख्यमंत्री, उनके पूर्व प्रमुख सचिव एम. शिवशंकर, विजयन की पत्नी कमला, बेटी वीणा, उनके अतिरिक्त निजी सचिव सी.एम. रवींद्रन, पूर्व नौकरशाह नलिनी नेट्टो और पूर्व मंत्री के.टी. जलील की संलिप्तता के बारे में भी बताया है। साथ ही मैंने कोर्ट में अपनी सुरक्षा की माँग करते हुए याचिका भी दायर की है।”

इससे पहले सुरेश ने सोमवार (6 जून 2022) को कहा था, “मेरी जान को खतरा है। इसलिए मैंने अदालत को एक बयान देने का फैसला किया है। मैं सभी तथ्यों (सोने की तस्करी से संबंधित) और इसमें शामिल लोगों के नाम का खुलासा करूँगी।’’ गिरफ्तारी के 16 महीने बाद सुरेश को पिछले साल नवंबर में जेल से रिहा किया गया था। सुरेश को राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) ने एक अन्य आरोपित संदीप नायर के साथ 11 जुलाई, 2020 को बेंगलुरु से हिरासत में लिया था।

खाड़ी देशों से 30 किलो सोने की तस्करी

केरल में सोना तस्करी का मामला जुलाई 2020 में सामने आया था। डिप्लोमेटिक बैगेज की आड़ में सोने की तस्करी का मामला स्वप्ना सुरेश से शुरू हुआ और फिर इसके तार मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के दफ्तर तक पहुँच गए। स्वप्ना सुरेश पर आरोप था कि उन्होंने फर्जी डाक्यूमेंट्स पेश कर के 2 जुलाई, 2020 को ‘डिप्लोमेटिक इम्युनिटी’ का प्रयोग कर के खाड़ी देशों से 30 किलो सोने की तस्करी की। इतना सारा सोना डिप्लोमैटिक बैग में भर कर लाया गया था। इसका खुलासा 6 जुलाई को तब हुआ, जब कस्टम के अधिकारियों ने यूएई कॉन्सुलेट के एक अधिकारी सरित से पूछताछ की, जो PRO के पद पर तैनात था। मीडिया में यह कहा जाता रहा है कि स्वप्ना को आईटी विभाग में इतना बड़ा पद दिए जाने के पीछे एम शिवशंकर का हाथ था।

उसको एक संवेदनशील स्पेस पार्क प्रोजेक्ट में काम दिया गया था, बावजूद इसके कि उनके खिलाफ पहले से ही क्राइम ब्रांच का एक मामला चल रहा था। साथ ही इंटेलिजेंस विंग ने भी उनके खिलाफ बयान दिया था, जिसे नज़रअंदाज़ कर दिया गया। कॉन्ग्रेस और भाजपा, राज्य के दोनों ही विपक्षी दलों ने कम्युनिस्ट सरकार पर स्वप्ना को बचाने का आरोप लगाया है। हालाँकि, कस्टम अधिकारियों ने स्वप्ना के आवास पर छापेमारी की थी।

‘लाइफ मिशन प्रोजेक्ट’ के लिए 1 करोड़ का कमीशन

उस वक्त स्वप्ना ने कहा था कि उनके अकाउंट से जो 1 करोड़ रुपए जब्त किए गए हैं, वो उन्हें केरल सरकार से ‘लाइफ मिशन प्रोजेक्ट’ के एजेंट के रूप में काम करने के लिए बतौर कमीशन मिले थे। ये केरल सरकार का फ्लैगशिप प्रोजेक्ट है जिसे 2017 में लॉन्च किया गया था। इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य था कि भूमिहीन और जिनके पास आवास नहीं है, ऐसे परिवारों को बसाया जाए और उनके लिए घर बनाए जाएँ। अब इसमें केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन का नाम इसीलिए आता है क्योंकि इस प्रोजेक्ट के मुखिया वही हैं और उन्होंने UAE की यात्रा भी की थी, ताकि इसके लिए 20 करोड़ का डोनेशन जुटा सकें।

UAE के ‘Red Crescent’ से उन्हें 20 करोड़ रुपए मिले थे, जिस पर सवाल उठाए गए थे। कॉन्ग्रेस का तो यहाँ तक आरोप था कि केरल सीएम के UAE जाने के बाद ही स्वप्ना सुरेश और IT सचिव एम शिवशंकर भी दुबई चले गए थे। ऐसे में विपक्षी नेताओं का सवाल था कि विजयन ने जो MoU पर हस्ताक्षर किए, वो कहाँ और किसकी मौजूदगी में किए। क्या उस समय वहाँ स्वप्ना सुरेश भी उपस्थित थी?

आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए तस्करी

गौरतलब है कि इस मामले को लेकर NIA ने अगस्त 2020 में खुलासा किया था कि पिछले 10 महीनों में केरल में लगभग 150 किलोग्राम सोने की तस्करी की गई थी। एजेंसी ने अदालत को बताया था कि जाँच में यह भी पता चला है कि तस्करी मुख्य रूप से आभूषण बनाने के लिए नहीं बल्कि आतंकी गतिविधियों के लिए की जाती थी, क्योंकि नकदी में लेन-देन करना मुश्किल हो गया था। एनआईए ने अदालत में यह भी बताया था कि आरोपितों ने सोना तस्करी के लिए यूएई दूतावास की सील और राजकीय चिन्ह से छेड़छाड़ कर अपराध को अंंजाम दिया।

प्रजा के बप्पा, भीलों के रावल, खलीफा को हराने वाले कालभोज: अरबों को ईरान तक खदेड़ने वाले महाराव, जिनसे 500 सालों तक काँपते रहे इस्लामी शासक

अगर आपने बप्पा रावल का नाम नहीं सुना है तो दोष आपका नहीं, उस व्यवस्था का है जिसके तहत हमने या आपने अपनी शिक्षा-दीक्षा पाई है। नागादित और कमलावती के पुत्र कालभोज को ही मेवाड़ के लोगों के प्यार और सम्मान ने बप्पा रावल बना दिया। उन्होंने इस्लामी आक्रांताओं को रोका और अरब तक पहुँच कर उन्हें धूल चटाई। उनका जन्म गुहिल वंश में हुआ था, जिसका इतिहास भगवान श्रीराम के पुत्र लव तक जाता है।

कौन थे मेवाड़ के बप्पा रावल

बाद में ये सिसोदिया राजवंश कहलाया, जिसने 1400 वर्षों तक मेवाड़ की गद्दी को सुशोभित रखा और आज भी ये वहाँ के मानद राजा कहलाते हैं। बप्पा रावल का बचपन संघर्षों में गुजरा। उनकी माँ ने भीण्डर के जंगलों में भाग कर बेटे की जान बचाई, जहाँ यदु वंश के भील राजा मांडलिक ने उनकी रक्षा की। भीलों का मेवाड़ के राजपूत राजाओं के साथ तभी से गठबंधन है। महाराणा प्रताप की अकबर के खिलाफ लड़ाई में भीलों की वीरता की गाथा आज भी राजस्थान में गाई जाती है।

बप्पा रावल का जीवन ऐसा था कि उनकी कहानी में बहादुरी के साथ-साथ चमत्कार भी हैं। कहते हैं हरित साधु नाम के एक ऋषि से उनकी मुलाकात हुई थी, जिन्होंने उन्हें ‘शैव तंत्र’ का शिक्षण दिया। इसके तहत उन्हें युद्धकला से लेकर जीवन के हर पहलू सिखाए गए। फिर उक्त साधु ने उन्हें इस्लामी आक्रांताओं से मेवाड़ को मुक्त करने को कहा। उन्हें स्वप्न में माँ भवानी ने चित्तौर के मोरी राजवंश की मदद करने का आदेश दिया। बप्पा रावल ने इस्लामी फ़ौज को ऐसा खदेड़ा था कि अगले 200 वर्षों तक उनकी भारत पर बड़े आक्रमण की हिम्मत नहीं हुई।

‘शैव तंत्र’ का ही प्रभाव था कि बप्पा रावल ने भगवान एकलिंग को अपना इष्ट बनाया और तब से मेवाड़ की सेना ‘जय एकलिंग’ के उद्घोष के साथ ही युद्ध में उतरती रही। आज भी मेवाड़ राजवंश के इष्ट एकलिंग ही हैं। जब इधर राजा मान मोरी वीर बप्पा रावल को ‘सामंत’ की उपाधि से नवाज कर उनके हिस्से की जागीर उन्हें दे रहे थे, उसी दौर में एक तरफ सिंध में मुहम्मद कासिम के रूप में पहली बार इस्लामी आक्रांता भारतवर्ष में घुसे।

राजा दाहिर की हार और हत्या के साथ भारत ने पहली बार युद्ध के बाद बलात्कार और सिर कलम करने जैसी घटनाओं को देखा, वो भी थोक में। भारतीय राजा हार-जीत के बाद भी एक-दूसरे की प्रजा और परिवार का सम्मान करते थे, लेकिन अरब के इस्लामी आक्रांताओं के साथ ऐसा नहीं था। ब्राह्मण राजा दाहिर और उनके बहादुर भाई ने कई बार मुहम्मद बिन कासिम को पीछे धकेला। लेकिन, सन् 712 में सब कुछ बदल गया।

अरब के खलीफा की फ़ौज को खदेड़ने वाला बप्पा रावल

अपनी पुस्तक ‘MAHARANAS: A Thousand Year War for Dharma (महाराणा: सहस्त्र वर्षों का धर्मयुद्ध)’ में ओमेंद्र रतनु लिखते हैं कि सिंध के बौद्ध समुदाय ने इस्लामी आक्रांताओं का साथ दिया और सिंध के नेरून शहर (अब पाकिस्तान का हैदराबाद) के बौद्ध मुखिया भंडारकर समाणी ने न सिर्फ सिंधु नदी पार करने में मुहम्मद बिन कासिम की मदद की, बल्कि उसकी फ़ौज के लिए रसद-पानी व अन्य ज़रूरी वस्तुओं का भी प्रबंध किया।

इसके अलावा मातृभूमि से गद्दारी करने वालों में वो स्थानीय ‘मेड़’ कबीले का नाम भी लेते हैं। बौद्धों और मेड़ की मदद से इस्लामी फ़ौज राजा दाहिर के गढ़ में घुसी और अरोड़ के युद्ध में उनकी हार हुई। राजा दाहिर और उनके भाई का सिर कलम कर दिया गया, उनकी बेटियों को खलीफा हज्जाज बिन युसूफ को भेंट के रूप में भेजा गया, कई महिलाओं को सेक्स स्लेव बना लिया गया और सिंध के अमीरों को लूट कर मुहम्मद बिन कासिम मेवाड़ की तरफ बढ़ा।

राजा दाहिर के बेटे ने भाग कर मेवाड़ में शरण ली और बप्पा रावल को पूरी स्थिति के बारे में बताया। महिलाओं के साथ इस अत्याचार ने बप्पा रावल को क्रोधित कर दिया, लेकिन वो एक लंबे युद्ध के लिए गठबंधन तैयार करने में लग गए। उनका मानना था कि ये ‘म्लेच्छ’ आसानी से नहीं मानेंगे और बार-बार भारत पर आक्रमण करेंगे। बप्पा रावल ने मालवा (मध्य प्रदेश) के शासक गुर्जर-प्रतिहार राजवंश के नागभट्ट I के साथ गठबंधन किया।

इसके बाद उन्होंने गुजरात के पुलकेशीराजा और जयभट्ट को भी अपने साथ लिया। नागभट्ट के आग्रह पर चालुक्य राजा जय सिम्हा वर्मन ने अपने पुत्र पुलकेशीराजा को इस्लामी फ़ौज के खिलाफ इस युद्ध में भेजा। तब तक अरब सेना का नेतृत्व कर रहे जुनैद अल मर्री ने दक्षिणी गुजरात, मालवा और दक्षिणी राजस्थान के कुछ इलाकों पर कब्ज़ा कर लिया था। सन् 738 में हिन्दुओं की 6000 की सेना ने 60,000 की अरब फ़ौज के साथ जोधपुर के नजदीक युद्ध किया।

जुनैद का इस युद्ध में वध कर दिया गया और इस्लामी फ़ौज को खदेड़ कर अरब की उम्मैयद वंश को कड़ा सन्देश भी दे दिया गया। मध्य पूर्व, पर्शिया, मेसोपोटामिया, सीरिया और उत्तरी अफ्रीका में उन्होंने जो सफलता पाई थी, उसे वो भारत में नहीं दोहरा पाए। बप्पा रावल की रणनीति ने पश्चिमी भारत का गणित ऐसा बदला कि इसकी चर्चा दुनिया भर में होने लगी। सोचिए, भारत पर खलीफा का राज हो जाता तो यहाँ के हिन्दुओं, खासकर महिलाओं की क्या स्थिति होती।

जेम्स टॉड ने लिखा है कि हिन्दू सेना ने ईरान तक अरबों को खदेड़ा और उन्हें कहीं शरण नहीं मिल रही थी। बप्पा रावल मानवीय मस्तिष्क को समझने वाले व्यक्ति थे। बप्पा रावल जब अफगानिस्तान पहुँचे तो गजनी नामक शहर पर उन्होंने किसी सलीम को शासन करते हुए पाया। बप्पा रावल ने सलीम को हरा कर अपने भतीजे को वहाँ बिठाया, जिससे अगले कई शताब्दियों तक वहाँ हिन्दुओं का शासन रहा। बप्पा रावल ने सलीम की बेटी से शादी भी की।

राजा दाहिर की बेटियों ने लिया बदला, चित्तौड़ की कमान बप्पा रावल के हाथों में

अरब से लौटते समय दूरदर्शी बप्पा रावल ने कई चेक पोस्ट्स स्थापित किए। राजा दाहिर सेन की बेटियों प्रेमला और सूर्या ने खलीफा से झूठ बोला कि मुहम्मद बिन कासिम ने खलीफा के पास भेजने से पहले उन दोनों को ‘अपवित्र’ कर दिया है। इसे सुनते क्रोशित खलीफा ने कासिम को तलब किया। उसे बाँध कर बंद कर के लाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में ही वो कुत्ते की मौत मर गया। बाद में राजा दाहिर की बहादुर बेटियों ने खलीफा को बता दिया कि उन्होंने झूठ बोला था, जिसके बाद क्रूर इस्लामी शासक ने दोनों को दीवार में ज़िंदा दफनाने का हुक्म जारी कर दिया।

पर्शियन पुस्तक ‘चचनामा’ में इस घटना का जिक्र है। बप्पा रावल की इस जीत के बाद चित्तौर की कमान भी मोरी राजवंश से उनके हाथ में आ गई। उन्हें ‘महाराव’ की उपाधि मिली। उन्हें ‘हिन्द सूरज’ भी कहा गया। उन्हें ‘राजगुरु’ की उपाधि भी मिली। बप्पा को भील समाज ने ‘रावल (रा – राज्य, व – वर्वत/आशीर्वाद, ल – लक्ष्मी/धन)’। पाकिस्तान का ‘रावलपिंडी’ कभी बप्पा रावल का एक बड़ा चेकपोस्ट हुआ करता था, जिस पर उस जगह का ये नाम पड़ा।

बप्पा रावल ने दर्जनों छोट-बड़े मुस्लिम शासकों को हराया और हिन्दू साम्राज्य का पुनः विस्तार किया। कई ऐसे शासकों की बेटियों से उन्होंने शादियाँ की। इन महिलाओं से उन्हें 130 बेटे हुए, जिनके वंशजों को आज ‘नौशेरा पठान’ कहा जाता है। 8वीं शताब्दी के इस महायोद्धा का नाम शायद ही हमारे पाठ्य पुस्तकों में मिलता हो, जबकि अरबी आक्रांताओं के नाम सभी को बताए जाते हैं। एक गौपालक परिवार से मेवाड़ पर देश हजार वर्ष शासन करने वाले परिवार की स्थापना तक, बप्पा रावल ने हिंदुत्व के लिए बड़ा योगदान दिया।

थम गया 23 साल से भारत के लिए रन बरसाने वाला बल्ला: मिताली राज ने क्रिकेट को कहा अलविदा, बोलीं – टीम अब सही हाथों में

भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान रहीं मिताली राज ने 23 वर्ष क्रिकेट खेलने के बाद आज अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के सभी फॉर्मेट से संन्यास ले लिया। यह खबर उन्होंने अपने ट्वीट के जरिए दी। अपने मैसेज में उन्होंने बताया कि उन्होंने छोटी बच्ची रहते हुए क्रिकेट खेलना शुरू किया था और आज उन्हें इस क्षेत्र में एक लंबा सफर तय कर लिया है।

मिताली राज की संदेश में उन्होंने लिखा, “मैं एक छोटी बच्ची थी जब मैंने ब्लू जर्सी पहनकर अपने देश का प्रतिनिधित्व करना शुरू किया। ये सफर काफी लंबा रहा जिसमें मैंने हर के पल देखा। पिछले 23 साल मेरे जीवन के सबसे उम्दा पलों में से एक थे। हर सफर की तरह ये सफर भी खत्म हो रहा है। आज मैं इंटरनेशनल क्रिकेट के सभी फॉर्मेट से संन्यास लेने का ऐलान करती हूँ। मैने जितनी बार मैदार में पाँव रखा। हर बार मैंने इस मंशा से अपना बेस्ट दिया कि भारत जीते। मैंने अपने उस अवसर को जिया जब मुझे तिरंगे का प्रतिनिधि बनने का मौका मिला। मुझे लगता है कि अब सबसे सही समय है जब मैं अपने खेल करियर को विराम दूँ क्योंकि टीम कुछ काबिल युवाओं के हाथों मे है और भारतीय क्रिकेट का भविष्य सनुहरा है।”

अपने संदेश में मिताली ने कप्तान रहने के दौरान जो सम्मान पाया उसके लिए उन्होंने बीसीसीआई और जय शाह को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि इतने साल टीम को आगे ले जाना उनके लिए गर्व करने वाली है। उन्होंने कहा कि ये सफर भले ही यहाँ खत्म हो गया लेकिन वह किसी न किसी रूप में क्रिकेट से जुड़ी रहेंगी।

बता दें कि मिताली राज भारतीय महिला क्रिकेट टीम में एक स्तंभ की तरह थीं जिन्होंने पिछले 23 सालों से टीम को संभाला हुआ था। उन्होंने मैदान में उतर भारत का नाम तो रौशन किया ही किया, लेकिन साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन्होंने कई रिकॉड बनाए। 39 साल की मिताली अपनी बल्लेबाजी के लिए जानी जाती हैं। बतौर भारतीय कप्तान उन्होंने अब तक क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाए। मात्र 16 साल की उम्र में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 114 रन बनाकर खुद को बल्लेबाज के तौर पर स्थापित किया था। मिताली को भरतनाट्यम का शौक था जिसके चलते कई बार उनके पैरों का कमाल फील्ड पर देखने को मिला। उनके खुद के सबसे ज्यादा रनों की बात करें तो 2002 में टेस्ट मैच के दौरान उन्होंने 214 रन बनाए थे। 2017 में वह इंग्लैंड की शार्ले एडवर्ड को पिछाड़कर ओडीआई में 6000 रन बनाने वाली पहनी महिला क्रिकेटर बनी थी। 2019 में मिताली ने ओडीआई क्रिकेट में दो दशक पूरा बिताने वाली पहली महिला खिलाड़ी का रिकॉर्ड बनाया था।

आज संन्यास लेने से पहले तक मिताली अपने 232 वनडे मैच खेल चुकी है। इनमें उन्होंने 7805 रन बनाए। वहीं टेस्ट क्रिकेट की बात करें तो बात 12 टेस्ट खेलने वाली मिताली ने 43.68 की औसत से 699 रन बनाए जिसमें उनका दोहरा शतक भी शामिल है। इस पूरे करियर में मिताली ने 89 मैच खेले जिनमें उन्होंने 2364 पन बनाए। उनके नाम बतौर कप्तान सबसे ज्यादा जीत दर्ज कराने का रिकॉर्ड हैं। इतना ही नहीं, वो अकेली कप्तान हैं जो 150 वनडे मैच में कप्तानी की और 89 में जीत हासिल की वहीं 63 में हार का मुँह भी देखने को मिला। मगर मिताली डरमगाई नहीं और टीम का नेतृत्व पूरे दमखम से किया। आज उनका क्रिकेट को अलविदा कहना न केवल उनके लिए बल्कि पूरी महिला क्रिकेट टीम के लिए भावुक करने वाला क्षण है। मिताली को भारतीय क्रिकेट टीम का सचिन तेंदुलकर भी कहा जाता था।

नूपुर शर्मा पर गाल बजाने वाले क़तर में हिन्दुओं को अंतिम संस्कार की भी इजाजत नहीं, 76 लाख भारतीयों पर टिकी है खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्था

नुपुर शर्मा द्वारा सच बोलने पर नाराजगी दिखाने वाले खाड़ी देश कतर (Qatar) में अल्पसंख्यकों को मानवाधिकारों के घोर उल्लंघन से गुजरना पड़ता है। कतर उन्हीं मुलकों में शामिल है, जो प्रोपगेंडा पर भारत जैसे विशाल देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप तो करता है, लेकिन अर्थव्यवस्था और अनाज एवं फलों के लिए भारत भी और भारतीयों पर निर्भर है।

अब भारत ने कतर सरकार से वहाँ रहने वाले हिंदुओं के पूजा स्थल के लिए जमीन और अंतिम संस्कार के लिए श्मशान भूमि देने के लिए कहा है। बता दें कि कतर सहित विभिन्न खाड़ी देशों में हिंदू समुदाय के लाखों लोग रहते हैं, जो वहाँ के विकास में अपना अतुलनीय योगदान दे रहे हैं।

कतर में रहने वाले इन हिंदुओं के किसी परिजनों की मृत्यु होने पर उन्हें या तो दफनाना पड़ता है या फिर अंतिम संस्कार के लिए शव को भारत लाना पड़ता है। कतर एक इस्लामिक मुल्क है और वह हिंदुओं को मौत के बाद अंतिम संस्कार करने की अनुमति नहीं देता है।

बता दें कि उपराष्ट्रपति एम वैंकया नायडू हाल में ही कतर, गेबान और सेनेगल की आठ दिवसीय राजकीय यात्रा से लौटें हैं। प्रतिनिधिमंडल के सदस्य हे सुशील मोदी ने बताया कि भाजपा के कुछ नेताओं के आपत्तिजनक बयान के बाद की गई कार्रवाई से कतर संतुष्ट दिखा।

इस समय खाड़ी देशों में 76 लाख से अधिक भारतीय काम कर रहे हैं। ये भारतीय वहाँ की अर्थव्यवस्था को नया आयाम दे रहे हैं। इतना ही नहीं, कोरोना महामारी दे दौरान भारत ने अरब देशों को अनाज और फलों की आपूर्ति की।

विदेश मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, UAE ने साल 2020 में काजू की अपनी कुल आयात का 21 प्रतिशत और डेयरी उत्पाद के आयात का कुल 15 प्रतिशत भारत से खरीदा। वहीं, ईरान ने अपनी चाय का 24 प्रतिशत भारत से आयात किया।

बता दें कि इस्लामिक देशों के संगठन इस्लामी सहयोग संगठन (IOC) में 56 देश शामिल हैं। यहाँ रहने वाले लोगों की कुल आबादी 190 करोड़ है, जो विश्व की जनसंख्या का लगभग 24.4 प्रतिशत है। IOC की स्थापना 25 सितंबर 1969 को मोरक्को में हुई थी। तब नाम ऑर्गनाइजेशन ऑफ द इस्लामिक कॉन्फ्रेंस (OIC) था। 28 जून 2011 को नाम IOC पड़ा।