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जिस ‘वफादार’ को राहुल गाँधी ने मौत के बाद लपेटा, उनका बेटा भी सोनिया पुत्र पर ‘नरम’: ED के सामने नेशनल हेराल्ड में लिया था मोतीलाल वोरा का नाम

आजीवन गाँधी परिवार के वफादार रहे कॉन्ग्रेस के दिवंगत नेता मोतीलाल वोरा (Motilal Vora) पर यंग इंडिया लिमिटेड और नेशनल हेराल्ड (National Herald) की पैरेंट कंपनी एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) के सभी लेनदेन का आरोप लगाने के बाद उनके बेटे ने प्रतिक्रिया दी है।

मोतीलाल वोरा के बेटे और कॉन्ग्रेस (Congress) विधायक अरुण वोरा (Arun Vora) ने कहा कि पार्टी के वरिष्ठ नेता राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) उनके पिता पर इस तरह का आरोप नहीं लगा सकते।

रिपोर्ट के मुताबिक, अरुण वोरा ने कहा है, ”ये निराधार आरोप हैं। कॉन्ग्रेस नेतृत्व गलत नहीं हो सकता और न ही वोरा जी। राहुल जी मेरे पिता पर इस तरह के आरोप नहीं लगा सकते।”

अरुण वोरा ने कहा कि कॉन्ग्रेस नेतृत्व कभी गलत नहीं हो सकता और राहुल गाँधी द्वारा लेनदेन के लिए पार्टी के पूर्व कोषाध्यक्ष मोतीलाल वोहरा को जिम्मेदार माने जाने की मीडिया खबरों को उन्होंने निराधार बताया। मीडिया रिपोर्ट्स में कही जा रही है कि ED से पूछताछ में राहुल गाँधी ने कहा कि AJL के लेनदेन के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता मोतीलाल वोरा थे।

बता दें कि नेशनल हेराल्ड से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी से प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बुधवार (15 जून 2022) को लगातार तीसरे दिन करीब आठ घंटे तक पूछताछ की।

वहीं ED के अधिकारियों ने राहुल गाँधी को पूछताछ के लिए शुक्रवार (17 जून 2022) को भी बुलाया है। हालाँकि, राहुल गाँधी ने ED से तीन दिनों के रेस्ट की माँग की है और सोमवार को पेश होने के लिए कहा है। हालाँकि, इस पर ED की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

इस मामले में ED की टीम मोतीलाल वोरा, मल्लिकार्जुन खड़गे, पवन बंसल इत्यादि से पहले ही पूछताछ कर चुकी है। इस साल अप्रैल में की गई पूछताछ के दौरान कई ED को कई इनपुट्स मिले थे। इसी आधार पर जाँच का दायरा राहुल गाँधी और सोनिया गाँधी तक पहुँचा है।

बता दें कि नेशनल हेराल्ड से जुड़ा मनी लॉन्ड्रिंग का यह मामला साल 2010 में बनी गाँधी परिवार के स्वामित्व वाली एक कंपनी यंग इंडियन लिमिटेड का है। यह कंपनी 5 लाख रुपए की पूंजी से शुरू हुई थी, लेकिन अभी इसके पास करीब 800 करोड़ रुपए की संपत्ति है।

रेप के बाद लड़कों को मार देता था जावेद इकबाल, एसिड डाल गलाता था लाश: 100 बने थे शिकार, साइको किलर की कहानी OTT पर लाने की तैयारी

पाकिस्तान (Pekistan) का सबसे खूँखार साइको सीरियल किलर जावेद इकबाल। नाम शायद आपने भी सुना हो। अब इस खूँखार हत्यारे पर फिल्म बनी है। नाम है ‘जावेद इकबाल: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ ए सीरियल किलर’ (Javed Iqbal: The Untold Story Of A Serial Killer)। इस फिल्म को बर्लिन फिल्म फेस्टिवल के लिए चुना गया है। पाकिस्तान के कराची में भी इस फिल्म का इसी साल 25 जनवरी को प्रीमियर हुआ था, लेकिन इसके अगले ही दिन पंजाब प्रान्त की सरकार ने इसे बैन कर दिया था।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस फिल्म के निर्देशक अबू अलीहा इसे ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज करने जा रहे हैं। कोशिश ये है कि पाकिस्तानी सरकार द्वारा बैन किए जाने के बाद भी इसे पाकिस्तानी लोगों तक पहुँचाया जा सके।

कौन है जावेद इकबाल

ये घटना 1999 की है। लाहौर के एक उर्दू न्यूज पेपर के एडिटर को एक शख्स का एक पत्र आता है। इस पत्र में उसने जो बातें लिखी होती हैं, उससे एडिटर के पैरों तले जमीन खिसक जाती है। ये पत्र जावेद इकबाल का होता है। इसमें वो 100 लड़कों का रेप करने के बाद बेरहमी से उनकी हत्या करने की बात कबूल करता है। जावेद ये भी खुलासा करता है कि वो लड़कों की हत्याएँ करने के बाद उनके शवों को एसिड में डालकर जला देता था। उसने जिन भी बच्चों का रेप और मर्डर किया था वो या तो अनाथ थे या फिर अपने घर से भागे हुए थे। ये पत्र उसने केवल मीडिया को ही नहीं, बल्कि पुलिस प्रशासन को भी भेजा था।

क्यों इंसान से हैवान बना जावेद

रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब जावेद 20 साल का था तो उसे साजिश के तहत रेप के ही आरोप में फँसाकर जेल भेज दिया गया। उसे उस गुनाह की सजा मिली जो उसने किया ही नहीं था। जेल में उसकी अम्मी मिलने आती थी। अचानक से उनका आना बंद हो गया। जब वो जेल से छूटा तो अपने घर गया तो देखा कि उसकी अम्मी का इंतकाल हो चुका था। यही वो वक्त था जब उसने एक कसम ली। कसम ये थी जिस तरह से उसे रुलाया गया है वो भी 100 माओं को रोने के लिए विवश कर देगा। इसके बाद रेप और हत्या का सिलसिला शुरू हुआ, जो कि 100 पर पहुँचने के बाद थमा। अपनी कसम पूरी करने के बाद उसने पुलिस के समक्ष सरेंडर कर दिया।

बहरहाल जावेद इकबाल पर बनी फिल्म के डायरेक्टर अबू अलीहा ने कहा है कि इस फिल्म के ओटीटी पर रिलीज होने के बाद वो इसके सीक्वल को बनाएँगे। इसका सीक्वल पार्ट-1 से कहीं अधिक ब्रूटल होगा।

नूपुर शर्मा के खिलाफ झूठ फैलाने वाले जुबैर पर FIR करने से मुंबई पुलिस का इनकार: पवार पर पोस्ट करने वाली अभिनेत्री केतकी महीने भर से हैं जेल में

भाजपा (BJP) की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा (Nupur Sharma) के खिलाफ सोशल मीडिया में माहौल बनाकर देश भर में दंगा फैलाने वाले अल्ट न्यूज (AltNews) के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर के खिलाफ महाराष्ट्र पुलिस ने FIR दर्ज करने से मना कर दिया। वहीं, मराठी अभिनेत्री केतकी चितले महीने भर से अधिक समय से जेल में है। उन्होंने शरद पवार पर एक पोस्ट कर दिया था।

महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई के एक थाने में शिकायतकर्ता से कहा से यह भी कहा कि ‘जब देश भर में उसके खिलाफ FIR दर्ज कराई जा रही है तो तुम्हें ऐसा करने की जरूरत क्या है? तुम मामले को राजनीतिक रंग देना चाहते हो?’

शिकायतकर्ता भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के कार्यकर्ता दीप वेद हैं। दीप वेद ने इस संबंध में ट्विटर पर एक पोस्ट भी साझा किया है। उन्होंने अपनी पोस्ट में इस वाकये को साझा किया है।

ऑपइंडिया से बातचीत में दीप वेद ने कहा कि यूपी सरकार की कार्रवाई को लेकर अराजक तत्वों के बीच डर का माहौल है। इसी डर की वजह से मोहम्मद जुबैर ने अपने फेसबुक पेज को डिलीट कर दिया है। इस पेज पर उसने हिंदुओं के खिलाफ कई घृणास्पद बातें कही थीं।

दीप वेद कहते हैं, “हमने पहले ही उसके पोस्ट और प्रोफाइल आदि के लिंक ले लिए थे। मैं 19 पेज की फाइल लेकर पुलिस स्टेशन गया और कल्याण पाटिल नाम के ऑफिसर से मिले। उन्होंने मुझसे पूछा की इसकी क्यों करनी है आपको FIR, फिर मैंने कहा कि पूरे देश में इस पर हो रहा है एफआईआर। इसने गुनाह किया है तो इस पर मामला दर्ज होनी चाहिए।”

वेद ने बताया कि इसके बाद पाटिल ने कहा कि इस पर शिकायत जमा करा देना, क्योंकि इस पर FIR नहीं हो सकती। इसके बाद पाटिल ने उन्हें PI नामदेव यादव से मिलने के लिए कहा। इसके बाद यादव ने भी कह दिया कि इस पर एफआईआर नहीं होगी।

इसके बाद यादव ने कहा कि जब पूरे देश में FIR हो रही है तो फिर एफआईआर कराने की क्या जरूरत है। यादव ने इस मुद्दे को राजनीतिक बनाने का आरोप लगाया। पुलिस ने कहा कि इस पर पहले एन्क्वायरी होगी।

बता दें कि महाराष्ट्र पुलिस राज्य सरकार में साझेदार NCP के मुखिया शरद पवार पर बिना नाम लिए एक पोस्ट लिखने के कारण मराठी अभिनेत्री केतकी चितले को पिछले एक महीने में जेल में बंद करके रखी है। हालाँकि, केतकी को एक मामले में केतकी को बेल मिल चुका है, लेकिन फिलहाल वह जेल में ही रहेंगी, क्योंकि उन पर दूसरा मामला भी दर्ज किया गया है।

‘सीएम पिनराई विजयन को UAE दौरे पर नोटों से भरा बैग भेजा, मंत्री केटी जलील भी इसमें शामिल’: केरल सोना तस्करी मामले में स्वप्ना सुरेश ने खोले कई और राज

केरल सेना तस्करी (Kerala Gold Smuggling Case) के मामले में स्वप्ना सुरेश (Swapna Suresh) ने केरल हाई कोर्ट में राज्य के सीएम पिनराई विजयन (Pinarayi Vijayan) के खिलाफ एफिडेविट फाइल किया है। उन्होंने विजयन के परिवार और पूर्व मंत्री केटी जलील (KT Jalil) के कथित संबंधों को उजागर किया है। स्वप्ना सुरेश का आरोप है कि दिसंबर 2016 में सीएम पी विजयन के UAE के दौरे के दौरान उन्हें करेंसी से भरा एक बैग भेजा गया था। बाद में सीएम के सचिव शिवशंकर ने दावा किया था कि कुछ इमरजेंसी के कारण ये पीछे छूट गया था।

स्वप्ना सुरेश ने आरोप लगाया, “सीएम के सचिव शिवशंकर ने मुझसे संपर्क कर कहा कि मुख्यमंत्री यूएई के दौरे पर हैं और उनका बहुत ही महत्वपूर्ण पार्सल छूट गया है। उन्होंने (सीएम) हमसे किसी तरह से इसे भेजने को कहा है। उन्होंने (शिवशंकर) मुझसे कहा कि इस पार्सल को संयुक्त अरब अमीरात में किसी अमीराती को दे देना। वहाँ हमारा आदमी इसे ले लेगा। असल में वाणिज्य दूतावास ने अबुधाबी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर मुख्यमंत्री को सभी अतिरिक्त राजनयिक सुविधा की व्यवस्था की थी।” स्वप्ना सुरेश ने आरोप लगाया कि उस दिन डिप्लोमैट अहमद अल डौखी जो कि अभी शारजाह में हैं, उन्हें उसी रात एयर शारजाह के लिए उड़ान भरने के लिए कहा गया था।

गोल्ड स्मगलिंग केस की मुख्य आरोपित ने दावा किया कि वाणिज्य दूतावास के पीआरओ सरित पीएस को शिवशंकर ने उनसे पार्सल लेने के लिए कहा था। जब दूतावास ले जाकर सरित ने उसे स्कैन किया तो उसमें करेंसी दिखी। उन्होंने मुझे इसके बारे में तुरंत बताया, लेकिन ऑर्गनाइजेशन में नई होने के कारण मैं कुछ नहीं कर सकती थी।

केटी जलील पर भी तस्करी में शामिल होने का आरोप

स्वप्ना सुरेश ने पूर्व मंत्री केटी जलील की सीएम पी विजयन के परिवार के साथ कथित संलिप्तता को भी एफिडेविट में उजागर किया है। महावाणिज्य दूतावास के साथ जलील के मधुर संबंध थे। सुरेश के मुताबिक, विदेश मंत्रालय की जानकारी के बिना ही उनके बीच कई बैठकें हुई थीं। यहीं नहीं क्लिफ हाउस में महावाणिज्य दूत को शिवशंकर ने बुलाया था। बैठक में सीएम की पत्नी के साथ उनकी बेटी भी थी। दावा है कि ये बैठक शारजाह के राजा और रानी के कहने पर की गई थी।

मंगलवार (14 जून) को स्वप्ना सुरेश ने कहा था मेरे खिलाफ चाहे जितने भी मामले आ जाएँ, मैं अपना 164 बयान वापस नहीं लूँगी। सीएम ने ही शाज किरण को मेरे ऑफिस में भेजा था और वो उनका खास है। अब उन्होंने मेरे खिलाफ एक और मामला दर्ज किया है। वो आगे कहती हैं कि सीएम ने कहा कि वो मुझे नहीं जानते। सीएम और मैंने, उनकी पत्नी, उनकी बेटी और बेटे ने क्लिफ हाउस में बैठकर कई मामलों पर चर्चा की थी। अगर वो सब भूल गए हैं तो मैं उन्हें और उनके परिवार को आपके (मीडिया) के जरिए याद दिलाऊँगी।

क्या है गोल्ड स्मगलिंग केस

केरल में सोना तस्करी का मामला जुलाई 2020 में सामने आया था। डिप्लोमेटिक बैगेज की आड़ में सोने की तस्करी का मामला स्वप्ना सुरेश से शुरू हुआ और फिर इसके तार मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के दफ्तर तक पहुँच गए। स्वप्ना सुरेश पर आरोप था कि उन्होंने फर्जी डाक्यूमेंट्स पेश कर 2 जुलाई 2020 को ‘डिप्लोमेटिक इम्युनिटी’ का प्रयोग कर खाड़ी देशों से 30 किलो सोने की तस्करी की। इसका खुलासा 6 जुलाई को तब हुआ, जब कस्टम के अधिकारियों ने यूएई कॉन्सुलेट के एक अधिकारी से पूछताछ की, जो PRO के पद पर तैनात था।

जाने कौन हैं ये पाकिस्तानी सिंगर? जिसने सोनम कपूर के बेबी शावर में दाढ़ी-मूँछ के साथ वन पीस ड्रेस में किया परफॉर्म: वीडियो वायरल

बॉलीवुड अभिनेत्री सोनम कपूर (Sonam Kapoor) और उनके पति आनंद आहूजा इन दिनों अपने पहले बच्चे के आने की तैयारी कर रहे हैं। हाल ही में सोनम कपूर का लंदन में धमाकेदार बेबी शावर किया गया। उन्होंने अपने इंस्टाग्राम स्टोरीज में बेबी शावर की तस्वीरें और वीडियो भी शेयर की हैं। इस फंक्शन में उन्होंने अपनी बहन रिया, उनके पति के अलावा कई लोगों को बुलाया था, लेकिन शेयर की गई तस्वीरों में सबसे ज्यादा सभी का ध्यान अगर किसी शख्स पर गया, तो वह सोनम के मुस्लिम ब्रिटिश पाकिस्तानी म्यूजिशियन लियो कल्याण हैं। इस खास मौके पर लियो कल्याण को अनिल कपूर की फिल्म ‘1942: अ लव स्टोरी’ के गाने ‘एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा’ और सोनम की फिल्म ‘दिल्ली 6’ के गाने ‘मसकली’ पर परफॉर्म करते हुए देखा गया।

साभार: सोनम कपूर की इंस्टाग्राम स्टोरी

देखते ही देखते ये तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गई हैं। इसमें लियो कल्याण वन पीस स्कर्ट, दाढ़ी और मूँछ में गाना गाते हुए दिख रहे हैं। वहीं फंक्शन में मौजूद लोग उनकी परफॉर्मेंस को देखकर काफी खुश नजर आ रहे हैं।

कौन हैं लियो कल्याण

असल में लियो कल्याण (Leo Kalyan) एक ब्रिटिश-पाकिस्तानी सिंगर, सॉन्ग राइटर, मॉडल, म्यूजिक कंपोजर हैं। इसके अलावा वह गे आर्टिस्ट भी हैं। सोशल मीडिया पर उनके लाखों फॉलोअर्स हैं। खबरें हैं कि लियो ने 13 साल की उम्र से गाना शुरू कर दिया था, लेकिन उनका परिवार इस प्रोफेशन के सपोर्ट में नहीं था। उन्हें साल 2019 में लंदन फैशन वीक में फैशन डिजाइनर रहमुर रहमान के लिए मॉडलिंग करते हुए भी देखा गया था।

लियो कल्याण को उनके मेलेडी सॉन्ग (Leo Kalyan Songs) के लिए जाना जाता है। उन्होंने गेट यॉर लव, डे ड्रीम, फिंगरटिप्स से लेकर करीब 25 गानों पर काम किया है। वह सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा बॉलीवुड के गाने गाते हैं। इनके इंस्टाग्राम पर कई ऐसे वीडियो मौजूद हैं, जिनमें वह हिंदी गाने गा रहे हैं।

एक इंटरव्यू में लियो कल्याण (Leo Kalyan Faimly) ने बताया था, “मैं 13 साल की उम्र से गाना गा रहा हूँ। मैं बचपन से ही सिंगर बनना चाहता था। मैंने शुरुआत में अपने परिवार से इस प्रोफेशन को छुपा कर रखा। एक बार उन्होंने मुझे मेरे कमरे में उमराव जान का गाना गाते हुए पकड़ लिया। मेरे परिवार ने मुझे सपोर्ट नहीं किया। आज भी मेरे पिता कहते हैं कि तुम म्यूजिक लॉयर और म्यूजिक जर्नलिस्ट क्यों नहीं बन जाते हो?”

बता दें कि लियो शायद बीस साल के हैं। उनकी सही उम्र की सटिक जानकारी नहीं है, क्योंकि उन्होंने इसके बारे में कहीं पर भी सार्वजनिक रूप से अपनी डिटेल साझा नहीं ​की हुई है। बताया जाता है कि कल्याण 10 से 17 साल तक साउथ लंदन में बड़े हुए हैं। उन्होंने कहा है कि वह पाकिस्तान की तुलना में लंदन में काफी अच्छा और सुरक्षित महसूस करते हैं।

वासिफ हसनैन ने फेसबुक पर शेयर किया माँ दुर्गा का अपमान करने वाला वीडियो, पटना HC ने अग्रिम जमानत देने से किया इनकार

पटना हाई कोर्ट ने मल्लिक वासिफ मोहम्मद हसनैन बासु को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया है। हसनैन पर आरोप है कि उसने अपने फेसबुक अकाउंट पर देवी दुर्गा का अपमान करने वाला एक वीडियो साझा किया है। लॉ बीट की रिपोर्ट के अनुसार, मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए न्यायमूर्ति सुधीर सिंह की पीठ ने वासिफ हसनैन को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया है।

रिपोर्ट के अनुसार, हसनैन ने आईपीसी की धारा 153 (ए), 295 (ए), 505 (2) और आईटी अधिनियम की धारा 66 के तहत उनके खिलाफ दायर एक मामले में अग्रिम जमानत की माँग करते हुए पटना उच्च न्यायालय का रुख किया था।

हसनैन की ओर से पेश हुए वकील ने अदालत में दलील दी कि उनके मुवक्किल को इस मामले में झूठे आरोप लगाकर फँसाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि हसनैन अपने फेसबुक अकाउंट पर अपलोड किए गए देवी दुर्गा के अपमानजनक वीडियो के बारे में नहीं जानते हैं। वकील ने यह भी दलील दी कि हसनैन का फेसबुक अकाउंट हैक कर लिया गया था और उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं थी। उन्होंने आगे दावा किया कि हसनैन का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और उनके खिलाफ गवाह से छेड़छाड़ का भी कोई आरोप नहीं लगाया गया है।

इस बीच, राज्य सरकार की ओर से पेश वकील ने अदालत में कहा कि हसनैन द्वारा अपलोड किए गए वीडियो में देवी दुर्गा के संबंध में अपशब्दों का प्रयोग किया गया है। उन पर अपमानजनक टिप्पणी की गई है। उन्होंने तर्क दिया कि हसनैन का कृत्य और कुछ नहीं बल्कि समाज में सामाजिक सद्भाव को बिगाड़ने वाला था।

इस मामले पर विचार करने के बाद कोर्ट ने फैसला किया कि हसनैन का कृत्य अग्रिम जमानत के लिए उपयुक्त नहीं है। फिर भी यह कहा गया कि यदि हसनैन अदालत में आत्मसमर्पण करता है और सामान्य जमानत का अनुरोध करता है, तो एक बार फिर से इस मामले में विचार किया जा सकता है।

7 राज्यों में प्रदर्शन, बिहार में 5 ट्रेनों में लगाई आग, हरियाणा में खुद की जान ली: अग्निपथ पर आपके सारे सवालों का जवाब यहाँ है

युवाओं में राष्ट्रवाद, अनुशासन और संयम सिखाने के लिए इस्रायल (Israel) की तर्ज पर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार (Narendra Modi Government) द्वारा शुरू की गई महात्वकांक्षी परियोजना ‘अग्निपथ’ का की जगहों पर विरोध हो रहा है। इस विरोध प्रदर्शन में अपना हित साधने वाले राजनीतिक दलों का भी बड़ा हाथ है।

सेना में युवाओं की भर्ती को लेकर केंद्र की अग्निपथ योजना का विरोध बिहार से शुरू होकर 7 राज्यों में फैल चुकी है। इनमें यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान आदि राज्यों में छात्रों ने जबरदस्त विरोध किया है।

बिहार में प्रदर्शनकारियों ने 5 ट्रेनों को आग के हवाले कर दिया है। वहीं, संपत्ति को भारी नुकसान पहुँचाया गया है। हरियाणा के पलवल में प्रदर्शनकारियों ने DC पर पथराव किया और पुलिस की 5 गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया। नेशनल हाइवे को कब्जे से मुक्त कराने के लिए पुलिस को आँसू गैस के गोल छोड़ने पड़े और हवाई फायरिंग करनी पड़ी।

वहीं, हरियाणा के रोहतक में एक पीजी हॉस्टल में रहने वाले एक युवक ने इस योजना के विरोध में आत्महत्या कर ली। सचिन नाम का यह युवक जींद जिले के लिजवाना गाँव का रहने वाला था। बताया जा रहा है कि वह सेना भर्ती की नई पॉलिसी से परेशान था। वहीं, राज्यों में भी युवा तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं।

यह विरोध तक शुरू हुआ है, जब कुछ राजनीतिक दलों ने इस इस योजना पर सवाल उठाते हुए कहा कि सेना में पेंशन को खत्म करने के लिए ही सरकार यह पॉलिसी लेकर आई है। इतना ही नहीं नेताओं ने इस योजना के तहत युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने का भी आरोप लगाया।

क्या है अग्निपथ की अग्निवीर योजना

अग्निपथ योजना भारतीय सेना के लिए एक देशव्यापी शॉर्ट-टर्म यूथ रिक्रूटमेंट स्कीम है। इस स्कीम के तहत भर्ती होने वाले युवाओं को अग्निवीर कहा जाएगा। इन्हें सेना के मानकों के तहत भर्ती किया जाएगा और उन्हें 4 वर्षों तक सेना में सेवा देनी होगी। इसके बाद इनमें से 25 प्रतिशत युवाओं को सेना में नियमित कर लिया जाएगा, जबकि बाकी के 75 प्रतिशत वापस लौट जाएँगे।

इस दौरान सरकार ने युवाओं को प्रशिक्षण और उन्हें तय मानदेय देने का भी निर्णय लिया है। इसके साथ ही चार वर्ष की अवधि पूरा होने के उपरांत उन्हें एकमुश्त देय राशि का भी प्रावधान किया गया है।

इन सबके बावजूद युवाओं के मन में कई तरह के सवाल हैं। ऐसे ही कुच महत्वपूर्ण सवालों और सरकार द्वारा दिए गए उनके जवाबों को हम रख रहे हैं।

  1. चार साल सेना में बिताकर लौटे युवाओं का भविष्य क्या होगा? उनकी शिक्षा पर क्या असर होगा?

अग्निपथ योजना के तहत सेना में शामिल होने वाले अग्निवीरों में से 25 प्रतिशत को नियमित किया जाएगा। बाकी 75 प्रतिशत युवकों को सरकार CRPF और असम राइफल्स में प्राथमिकता के आधार पर बहाल करेगी। इसके अलावा, यूपी और उत्तराखंड जैसी सरकारों ने भी इन्हें राज्य पुलिस में प्राथमिकता देने की बात कही है। वहीं, कई मंत्रालय, सरकारी कंपनियाँ ने भी अग्निवीरों को नौकरी देने में सहमति जताई है।

इसके अलावा, इन चार सालों बाद उनके युवाओं के पास 11.7 लाख रुपए की एकमुश्त राशि रहेगी। इससे वे इसका उपयोग पेशेवर पढ़ाई या किसी तरह के व्यवसाय के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।

इस चार वर्षों के दौरान अग्निवीरों की शिक्षा के लिए केंद्र सरकार ने विशेष डिग्री की अनुमति दी है। इस डिग्री कोर्स का संचालन इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU) द्वारा किया जाएगा। अग्निवीरों को पहले साल ग्रेजुएशन सर्टिफिकेट, दूसरे साल ग्रेजुएशन डिप्लोमा और तीसरे साल ग्रेजुएशन डिग्री मिल जाएगी।

इसका 50 प्रतिशत हिस्सा कौशल विकास, जो अग्निवीरों के अनुभव से जुड़ा होगा और बाकी का 50 प्रतिशत हिस्सा विषय से जुड़ा होगा। यह कोर्स UGC-AICTE सहित सभी नियामकों तथा देश-दुनिया में भी मान्य होगा।

2. क्या अग्निवीरों को हर ट्रेड के लिए अलग-अलग उम्र सीमा होगी और भर्ती की प्रक्रिया क्या होगी?

आर्मी के अनुसार, सेना में सारी भर्तियाँ अब अग्निपथ योजना के तहत ही होंगी और इन भर्तियों की आयु सीमा 17.5 साल से 21 साल तक की सीमा के बीच होंगी। इसके लिए 90 दिन में भर्ती रैली होगी और योग्यता पूरा करने वाले उम्मीदवार इसमें भाग ले सकते हैं।

अग्निपथ योजना के अंतर्गत सेना के तीनों अंगों- थल सेना, वायुसेना और नौसेना में भर्ती प्रक्रिया होगी। पहले के सारे नोटिफिकेशन अब मान्य नहीं होंगे। अगर तीनों सेनाओं के किसी भी भर्ती में कोई अभ्यर्थी फिजिकल या मेडिकल टेस्ट पास कर चुका है तो भी वह मान्य नहीं होगा।

3. एक वक्त ऐसा भी आएगा, जब सेना में अग्निवीर अधिक और स्थायी सैनिक कम हो जाएँगे?

इंडियन आर्मी के वाइस चीफ ने कहा कि सेना में अधिकतम 50 प्रतिशत ही अग्नवीर होंगे। यानी अग्निवीर और स्थायी सैनिकों का अनुपात 50:50 का होगा, इससे ज्यादा का नहीं। सेना का कहना है कि आगे अगर कोई दिक्कत आती है तो वह आवश्यक बदलाव के लिए तैयार है।

4. पिछले 2 साल से सेना में कोई भर्ती नहीं हुई है, तो क्या सेना में जाने के इच्छुक लोगों को उम्र में छूट का प्रावधान है?

अग्निपथ योजना के शुरू करने के बाद इसमें उम्र को लेकर किसी भी तरह की छूट का प्रावधान नहीं किया गया है। सरकार का मानना है कि कोविड को लेकर पिछले सालों के दौरान भर्तियाँ नहीं हुई हैं, इसके बावजूद उम्र में छूट नहीं दी गई है।

5. अग्निवीरों को सेना की तरह पेंशन और एक्स सर्विसमैन को मिलने वाली दूसरी सुविधाएँ मिलेंगी?

अग्निपथ योजना में इसका प्रावधान नहीं किया गया है। चार साल की सेवा के बाद ना तो पेंशन मिलेगी और ना ही पूर्व सैनिक वाली दूसरी सुविधाएँ। इस सेवा काल के दौरान अग्निवीरों को 30 हजार रुपए से लेकर 40 हजार रुपए तक की सैलरी मिलेगी। सेवा निधि स्कीम के तहत जो पैसे जमा होंगे वह उन्हें मिलेंगे।

6. अस्थायी नौकरी को लेकर सेना के प्रति युवा कितने उत्सुक होंगे?

इस विषय पर एयरफोर्स चीफ का कहना है कि युवाओं को एक साथ तीन मौके दिए जा रहे हैं। उन्हें अच्छा वेतन दिया जाएगा, चार साल में ठीक-ठाक बैक बैलेंस दिया जाएगा और स्किल ट्रेनिंग दी जाएगी। सेना में ट्रेनिंग के क्रेडिट पॉइंट भी मिलेंगे। यह चार साल बाद हायर एजुकेशन लेने में सहायता करेगा।

इसके अलावा, राज्य सरकार की पुलिस और मंत्रालयों एवं PSUs में में वरीयता मिलने के कारण यह नौकरी अस्थायी जैसी नहीं रहेगी। यह एक तरह से सेना का प्रशिक्षण जैसा हो जाएगा। जो 25 प्रतिशत शानदार काम करेंगे, उन्हें नियमित किया जाएगा।

7. अग्निपथ के तहत भर्ती कब शुरू होगी और कितने लोगों की होगी?

सेना की भर्तीय रैली 90 दिन में होगी। करीब 180 दिन बाद पहले चरण के अग्निवीर सेंटर में पहुँच जाएँगे। एक साल में अग्निवीर भारतीय सेना की बटालियन का हिस्सा हो जाएँगे। पहले साल आर्मी में 40 हजार, नेवी में 3 हजार और एयरफोर्स में करीब 3,500 अग्निवीरों की भर्ती होगी।

8. अग्निपथ योजना के तहत अग्निवीर ‘ऑल इंडिया ऑल क्लास’ बेस पर आएँगे। ऐसे में पुराना रेजीमेंटेशन सिस्टम खत्म होगा?

नहीं ऐसा नहीं होगा। इंडियन आर्मी के वाइस चीफ लेफ्टिनेंट जनरल बीएस राजू के अनुसार, रेजीमेंटेशन का मतलब सिर्फ एक समुदाय से आने वाले लोग नहीं है। इसका मतलब है कि साथ रहना, खाना, बैठना, ट्रेनिंग करना और साथ लड़ना।

अग्निवीर साढ़े तीन साल साथ रहेंगे और 25 प्रतिशत जो नियमित होंगे वह बटालियन में ही रहेंगे। राजू के अनुसार, सेना में अभी भी 75 प्रतिशत यूनिट में ऑल इंडिया ऑल क्लास ही हैं। फाइटिंग फॉर्मेंशन में कुछ फिक्स्ड क्लास हैं। जैसे राष्ट्रीय राइफल में अलग-अलग रेजिमेंट से आकर लोग लड़ते हैं।

9. अग्निवीरों के स्थायी होने का कितना चांस है?

अग्निवीरों में से सिर्फ 25 प्रतिशत ही स्थायी होंगे। बाकी के 75 प्रतिशत लोग वापस सिविल के तौर पर लौट जाएँगे। हालाँकि, कई भर्तियों में उन्हें वरीयता दी जाएगी।

10. अग्निपथ योजना का उद्देश्य क्या है?

सैन्य बजट का एक बड़ा हिस्सा सेवानिवृत सैनिकों के पेंशन में खर्च हो जाता है। सेना को आधुनिक बनाने के लिए पेंशन खर्च को कम करने पर कई बार चर्चा हुई है। हालाँकि, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के अनुसार, अग्निपथ योजना का उद्देश्य बचत करना नहीं है। इसके पीछे युवाओं में अनुशासन, देशभक्ति और आंतरिक गुणों का विकास भी बताया जा रहा है।

शंका, हंगामा, हिंसा… सोचा है जब सेना से लौटेंगे ‘अग्निवीर’ तो कितना सबल होगा समाज: घर के भीतर साजिशों का भी जवाब होगा ‘अग्निपथ’

केंद्र सरकार ने युवाओं के लिए अग्निपथ/अग्निवीर योजना (Agnipath/Agniveer scheme) की घोषणा की है। जितना इस योजना का विस्तृत विवरण सामने नहीं आया है, उससे अधिक इसकी आलोचना आरम्भ हो गई है। विपक्ष को तो मजबूरन विरोध करना ही होता है, इस बार सेना के कुछ भूतपूर्व अफसर भी इसकी आलोचना कर रहे हैं। कुछ लोगों को ठीक भी लग रही है।

यह योजना युवाओं के लिए है जिसके अनुसार उन्हें चार वर्ष तक सेना में सेवा का अवसर प्राप्त होगा। आर्थिक दृष्टि से देखा जाए युवाओं के लिए पैकेज अच्छा है और अवसर की दृष्टि से देखा जाए तो इससे अच्छा अवसर हो नहीं सकता। बहुत समय से एक वर्ग का विचार था कि सभी नागरिकों के लिए दो या तीन वर्ष के लिए सैन्य सेवा अनिवार्य कर दी जाए। किन्तु हमारे यहाँ जनसंख्या इतनी है कि सभी के लिए सैन्य सेवा अनिवार्य होना असंभव है। फिर सरकार का यह सोचना कि एक वर्ष में पचास हजार बच्चे लेकर उन्हें ट्रेनिंग देकर चार वर्ष तक अवसर मिले, उनमें से पच्चीस प्रतिशत को सेना में ले लिया जाए बाकी को बाहर जाना होगा। इसको लेकर लोगों ने तरह तरह की शंकाएँ व्यक्त की हैं।

पहली यह कि यह एक अनुबंध की तरह है और सेना अनुबंध के आधार पर नहीं चलती। इससे सेना कमजोर होगी। इस पर तर्क यह दिया जा सकता है कि सामान्य नियुक्तियाँ तो चलती ही रहेंगी, यह एक अलग दिशा है। अनुबंध चार वर्ष का है। उसके बाद जो सेना में जाएँगे वे तो नियमित ही रहेंगे।

दूसरा लोगों का मत है कि इस तरह से आए हुए लोग सेना के प्रति समर्पण नहीं रखेंगे। वे शत-प्रतिशत नहीं देंगे। प्राण दांव पर नहीं लगाएँगे। जहाँ तक सेना का सवाल है, यह एक कठोर सत्य है कि सेना में जाने के विषय में हर कोई नहीं सोचता और जो सोचता है उसके समर्पण पर शंका नहीं की जानी चाहिए। इन पचास हजार अग्निवीरों के लिए भी प्रतियोगिता निश्चित है। अयोग्य तो वैसे भी नहीं आएँगे, और जो आएँगे उनके समर्पण और निष्ठा पर प्रश्न उठाना कहाँ तक सही है?

एक वर्ग वह है जो सेना में जाना ही चाहता है। वही उसके जीवन का लक्ष्य है। अगर ऐसे सभी युवा अग्निवीर बनते हैं, तो उनमें से अधिकतर को बाहर निकलने का भय रहेगा। युवाओं के विरोध का एक कारण बस यही हो सकता है। उनको ये भी तो सोचना चाहिए, अग्निवीर योजना से उनके सेना में नियमित होने की सम्भावना अधिक होगी और न भी हुए तो चार साल का अनुभव उन्हें वैसे भी बहुत काम आएगा और फिर भी शंका है तो उन्हें सामान्य भर्तियों की प्रतीक्षा करनी चाहिए। सामान्य भर्तियाँ बंद करने की कोई घोषणा नहीं हुई है, बल्कि एक नई, वैकल्पिक व्यवस्था की नींव डाली गई है। पच्चीस प्रतिशत तो सेना में ले लिए जाएँगे। संभवतः चुने गए लोगों के लिए अतिरिक्त ट्रेनिंग दी जाने की योजना हो और सेना के स्तर के हिसाब से दी भी जानी चाहिए, क्योंकि प्रारम्भिक छह महीने की ट्रेनिंग में कोई परिपक्व सैनिक नहीं बन जाता। अगर यह स्पष्टीकरण आता है तो भूतपूर्व सैनिकों की अग्निवीर सैनिकों के समर्पण को लेकर व्यक्त की जाने वाली शंका का समाधान हो जाएगा।

लोगों की शंका है कि चार वर्ष बाद ये बचे हुए लोग क्या करेंगे? क्या वो सभी हाई स्कूल पास रह जाएँगे? आगे जीवन-यापन कैसे करेंगे? अभी यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि सरकार की इन चार वर्षों में इन सभी लोगों को उच्च शिक्षा दिलवाने का कोई विचार है या नहीं। अगर प्रशिक्षण के साथ इनको पढ़ने का भी अवसर मिले तो बेहतर होगा। सेना के अनुशासन में रहते हुए शिक्षा प्राप्त करने वाले युवा कितने बेहतरीन नागरिक होंगे, यह कल्पना पता नहीं किसी ने की है या नहीं। यहाँ सरकार को शायद बेहतर प्रस्तुतीकरण की आवश्यकता थी।

शिक्षा का यह पक्ष सरकार स्पष्ट कर दे तो बहुत सी शंकाओं का समाधान हो जाएगा, क्योकि उसके बाद ये युवा जिन भी क्षेत्रों में जाएँगे, वहाँ बेहतर ही साबित होंगे। वे एक ऐसे वर्ग का निर्माण करेंगे जो राष्ट्रभक्त, अनुशासित, मानसिक और शारीरिक रूप से दृढ़ होगा। साथ ही कुछ वर्षों में आपातकालीन स्थितियों के लिए उपलब्ध निष्क्रिय सैन्य बल देश के पास होगा, जिसे आवश्यकता पड़ने पर सक्रिय किया जा सकेगा। UGC ने पहले ही इस योजना का समर्थन किया है। इसमें IGNOU महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

एक संभावना यह भी है कि कुछ क्षेत्रों जैसे पुलिस, प्रशासन, शिक्षा, अग्निशमन, आपदा प्रबंधन में उन्हें वरीयता मिले। असम और उत्तर प्रदेश ने ऐसे संकेत दिए हैं। राज्य सरकारों को पुलिस जैसी संस्थाओं के लिए अगर पहले से ही प्रशिक्षित लोग मिल जाएँ तो इससे अच्छा क्या होगा? किन्तु ऐसा रोडमैप केंद्र सरकार को ही बनाना होगा।

एक शंका कुछ वोक-वामपंथी गिरोह ने भी व्यक्ति की है कि सरकार प्रशिक्षित राष्ट्रवादियों का दल बनाने का प्रयास कर रही है। जो सत्य ही है, देश को राष्ट्रवादियों की आवश्यकता भी है। उनकी दूसरी शंका यह है कि प्रशिक्षित युवाओं को चरमपंथी बहका सकते हैं और ऐसे युवा कट्टरपंथी बन सकते हैं। सेना के प्रशिक्षण के पश्चात अगर कोई कट्टरता किसी व्यक्ति में आ सकती है तो वह राष्ट्र के प्रति ही आ सकती है। अगर ऐसा कोई व्यक्ति राष्ट्र या समाज विरोधी कट्टरपंथ से फिर भी प्रभावित होता है तो वह सेना के योग्य कभी था ही नहीं।

शंका तो यह भी है कि समय के साथ अगर इस योजना में आरक्षण लाया गया तो भविष्य में सेना में निश्चित रूप से फूट पड़ जाएगी। अतः चयन योग्यता के आधार पर ही किया जाए, और जैसे सेना में कोई आरक्षण नहीं है वैसे ही इस योजना को इससे दूर रखा जाए। सेना को जाति-धर्म की राजनीति से दूर रखना ही उचित है।

इस योजना का जो सामजिक पक्ष है, वह यही है कि वर्तमान युवा वोक संस्कृति का शिकार हो रहा है। राष्ट्रप्रेम पर तरह-तरह की पट्टियाँ बाँधी जा चुकी हैं। कानून की सीमाओं में रहना अलग बात है, किन्तु समाज में होती घटनाओं को देखकर आँख पर पट्टी बाँध लेना अलग बात है। जिस प्रकार की परिस्थितयाँ हमारे सामने हैं, उसमें अधिकतर लोग केवल सरकार से कानून का पालन करवाने की अपेक्षा करते हैं, स्वयं कुछ नहीं करते। जब ढाई मोर्चे के युद्ध की बात होती है तब ऐसे दृढ़ निश्चयी राष्ट्रभक्तों की बहुत आवश्यकता है, जो समाज के अंदर से आधा मोर्चा संभाल सकें, ताकि सेना बाकी दो मोर्चे ठीक से संभाल सके। केवल सीमाओं पर खड़ी सेना के बल पर न तो युद्ध लड़े जाने हैं, न जीते जाने हैं। समाज के बीच में ऐसे लोगों का रहना बहुत आवश्यक है जो स्वयं प्रतिबद्ध, अनुशासित नागरिक बनकर उदाहरण बन सकें।

सीधे शब्दों में कहें तो भारत के अंदर और बाहर पर्याप्त शत्रु हैं जो भारत को कभी भी सिविल वार की और धकेलने का प्रयास कर सकते हैं। वहाँ केवल सेना काम नहीं आएगी। आज नहीं तो कुछ वर्षों के पश्चात संघर्ष निश्चित है। ऐसे संकेत समाज के एक वर्ग से स्पष्ट हो रहे हैं। समय-समय पर उनका शक्ति परीक्षण होता रहता है। छतों पर रखी फिलिस्तीन की तरह बड़ी बड़ी गुलेलें, बच्चों के पीछे से पुलिस पर पथराव और बात-बात पर गुंडागर्दी पर उतर आने वाले उस हिंसक वर्ग के सामने सबल नागरिकों की आवश्यकता है। मध्यम वर्ग का व्यापारी या नौकरीपेशा व्यक्ति सभी प्रकार की हिंसा से बचना चाहता है, जो सही भी है। किन्तु भविष्य में सब ठीक रहेगा यह कैसे कहा जा सकता है। कोई नहीं चाहेगा की उसका बच्चा सड़क पर निकले, पर दूसरी तरफ सिर्फ इसी की तैयारी हो रही है। इन अग्निवीरों के समाज के बीच रहने से समाज में आत्मबल बढ़ेगा। यह अपेक्षा इन अग्निवीरों से नहीं होगी कि बिना किसी आपात परिस्थिति के इन्हें सीमाओं पर जाना पड़े। जहाँ तक अनुमान है इन्हें आरम्भ में आपदा प्रबंधन में ही काम करना होगा। इनसे पहले चार वर्षों में युद्ध की अपेक्षा नहीं होगी, किन्तु इनका होना अपने आप में एक बड़ी शक्ति होगी।

बाकी सरकार ने यह एक विकल्प दिया है, न किसी पर थोपा है, न अन्य व्यवस्थाएँ द की हैं, तो चाहें तो विवेक से काम भी ले सकते हैं और चाहें तो टायर वगैरह जलाने की परंपरा का निर्वाह कर सकते हैं।

कॉन्ग्रेस नेता रेणुका चौधरी ने पुलिसकर्मी का कॉलर पकड़ा, लोगों ने कहा- इसकी चौधराहट पर लगाम लगनी चाहिए, गिरफ्तार करके जेल भेजो

नेशनल हेराल्ड मामले में कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) से ईडी लगातार पूछताछ कर रही है। इसको लेकर पार्टी के कार्यकर्ता और नेता आगबबूला हो रहे और जगह-जगह प्रदर्शन कर रहे हैं। इस बीच कॉन्ग्रेस की वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री रेणुका चौधरी (Renuka Choudhary) का एक पुलिसकर्मी से बदसलूकी करने का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। हैदराबाद में पार्टी के विरोध प्रदर्शन के दौरान वह एक पुलिसकर्मी का कॉलर पकड़ते हुए नजर आ रही हैं। इस दौरान 7 से 8 महिला पुलिसकर्मियों ने मिलकर उन्हें काबू किया। इस घटना के बाद से वह यूजर्स के निशाने पर आ गई हैं।

एक राजेंद्र शर्मा लिखते हैं, “रेणुका चौधरी को तुरंत गिरफ्तार करके जेल भेजो, सरकार के काम में बाधा पहुँचाना गंभीर अपराध है, इसकी चौधराहट पर लगाम लगाना चाहिए।”

शिवम त्यागी लिखते हैं, “पुलिसकर्मी का कॉलर पकड़ कर अभद्रता करती रेणुका चौधरी। अहंकार देख रहे हैं…।ये है कॉन्ग्रेस मतलब रस्सी जल गई, लेकिन बल नहीं गया।”

अनिला सिंह लिखती हैं, “ED के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने में कॉन्ग्रेस ने सारी हदें पार कर दी हैं। कॉन्ग्रेस की महिला नेता रेणुका चौधरी ने पुलिसकर्मी से बदसलूकी की और कॉलर पकड़कर खींचा। हद है, कुछ तो शर्म कीजिए।”

एक और यूजर ने लिखा, “कॉन्ग्रेस की सरकार न रहने पर इतनी हेकड़ी पुलिस वाले पर दिखा रही हैं रेणुका चौधरी, सोचिए जब कॉन्ग्रेस की सरकार थी तब ये क्या करती होगी। मुझे तो पूतना की याद आ गई।”

गौरतलब है कि दिल्ली में कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर ईडी की कार्रवाई के विरोध में जमकर प्रदर्शन किया। उन्होंने भाजपा और पीएम मोदी पर भी हमला बोला। उनका कहना है कि राहुल गाँधी को इस मामले में जानबूझकर फँसाया जा रहा है। राहुल गाँधी हर मोर्चे पर सरकार से सवाल करते रहे हैं, इसलिए सरकार उनको परेशान कर रही है।

बता दें कि नेशनल हेराल्ड से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने राहुल गाँधी से लगातार तीसरे दिन बुधवार (15 जून 2022) को कई घंटों तक पूछताछ की। इस दौरान राहुल ने ईडी को बताया कि एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) और यंग इंडिया लिमिटेड (YIL) के अधिग्रहण से संबंधित सभी लेन-देन कॉन्ग्रेस के पूर्व कोषाध्यक्ष मोतीलाल वोरा ही देखते थे।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने यंग इंडिया लिमिटेड द्वारा लिए गए लोन की कोई भी जानकारी होने से इनकार किया। बताया जा रहा है कि उन्होंने इसकी सारी जिम्मेदारी वोरा पर डाल दी। कॉन्ग्रेस सचिव प्रणव झा ने टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा कि ईडी की कार्रवाई न्यायिक प्रक्रिया के तहत है और उसे लीक करना अपराध है। इसलिए हम इस पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे। ईडी राहुल से अब तक कई सत्रों में करीब 30 घंटे पूछताछ कर चुकी है। एजेंसी ने केरल के वायनाड से सांसद राहुल गाँधी को 17 जून 2022 को भी पूछताछ के लिए तलब किया है।

कानपुर में पहले बिरयानी खिलाई, फिर पत्थरबाजी करवाई: उस बाबा बिरयानी पर सप्लाई का आरोप जिसके राम-जानकी मंदिर पर खड़े होने का दावा

पिछले दिनों यह बात सामने आई थी कि उत्तर प्रदेश के कानपुर में जो जगह सरकारी रिकॉर्ड में राम-जानकी मंदिर के तौर पर दर्ज है, वहाँ आज बाबा बिरयानी नाम से रेस्टोरेंट की चल रही है। अब खबर आई है कि शहर में 3 जून 2022 को जुमे की नमाज के बाद जो हिंसा भड़की थी, उस दिन पत्थरबाजों को बिरयानी खिलाई गई थी। इसकी सप्लाई बाबा बिरयानी ने ही की थी। पिछले मौके की तरह ही इस बार भी बाबा बिरयानी ने आरोपों को नकार दिया है।

दरअसल 3 जून को हुई हिंसा में कम उम्र के बच्चों द्वारा पथराव के CCTV फुटेज सामने आए थे। ताजा खुलासे के मुताबिक आरोपितों को न सिर्फ कुछ बिल्डरों द्वारा फंडिंग की गईए बल्कि शहर की चर्चित और विवादित बाबा बिरयानी की भी हिंसा में संलिप्तता थी। आरोप है कि बाबा बिरयानी ने न सिर्फ हिंसा के लिए फंड जुटाए, बल्कि पथराव से पहले हमलावरों को बिरयानी भी खिलाई थी।

बाबा बिरयानी के मालिक का नाम मुख्तार अहमद बाबा है। उस पर मंदिर की जमीन को कब्ज़ा कर वहाँ बिरयानी की दुकान खोल लेने के आरोप पहले से हैं। मुख़्तार कभी राम-जानकी मंदिर के एक हिस्से में साइकिल रिपेयरिंग का काम करता था। अब नए आरोपों के मुताबिक पड़ोसी जिले उन्नाव से बुलाए गए हमलावरों के खाने-पीने का इंतज़ाम बाबा बिरयानी ने ही करवाया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हिंसा के मुख्य आरोपित जफर हयात ने पुलिस पूछताछ में बाबा बिरयानी के मुख्तार अहमद के साथ बिल्डर हाजी वसी का भी नाम लिया है।

न्यूज़ 18 और MSB न्यूज़ में भी जफर हयात के कबूलनामे में बाबा बिरयानी का नाम होने की बात कही है। ऑपइंडिया ने कानपुर पश्चिम के DCP और जाँच अधिकारी ACP केमलगंज से इसकी पुष्टि का प्रयास किया। लेकिन दोनों ने बैठक में व्यस्त होने का हवाला दे बात करने से इनकार कर दिया। हिंसा के बाद फौरी तौर पर कानपुर भेजे गए IPS अजयपाल शर्मा ने कहा कि वे इस मामले में मीडिया से बात करने को अधिकृत नहीं हैं। कानपुर पुलिस कमिश्नर विजय सिंह मीणा से भी उनके बैठक में होने के कारण संपर्क नहीं हो सका। पुलिस का वर्जन आने के बाद खबर को अपडेट किया जाएगा।

अवैध कब्ज़ा कायम रहे इसलिए करवाई गई हिंसा

कानपुर के स्थानीय हिन्दू नेता प्रभात कुमार ने ऑपइंडिया को बताया, “बाबा बिरयानी और उसके साथियों की कानपुर में हिंसा करवाने की लम्बे समय से तैयारी थी। जब से उन्हें पता चला है कि उनके द्वारा कब्ज़ा की गई मंदिर की जमीन और शत्रु सम्पत्तियों पर सरकार कार्रवाई करने वाली है, तब से वे साजिश रचने में लगे थे। अभी तो शुरुआत है, सही से जाँच हुई तो आगे कई और भी खुलासे होंगे।”

अपराधियों का संरक्षक है बाबा बिरयानी वाला

बजरंग दल के कानपुर जिला संयोजक कृष्णा तिवारी ने ऑपइंडिया को बताया, “हमने बाबा बिरयानी द्वारा मंदिर की जमीन पर कब्जा करने की कई बार शिकायत प्रशासन में की है। इसका मालिक मुख़्तार कानपुर के कई बड़े अपराधियों का संरक्षक रहा है। साल 2017 में कानपुर गैंगवार में मारे गए डी-2 गैंग के दुर्दांत अपराधी गुलाम नबी से मुख़्तार के सम्पर्क पाए गए थे। गुलाम नबी के फंडिग सोर्स भी कुछ बिल्डर ही बताए गए थे।” उन्होंने बताया, “मुख्तार अहमद बाबा ने बेकनगंज में ही दारुल शफा नाम से अपनी एक बिल्डिंग बना रखी है, जिसमे चमड़े का कारोबार होता था। अचानक 25 सालों में उसके पास इतना रुपया कहाँ से आ गया, इसकी भी जाँच होनी चाहिए।”

मंदिर गिराने का भी शक

कृष्णा तिवारी ने आगे बताया, “साल 2021 में कानपुर के चमनगंज में एक मंदिर अचानक ही गिर गया था। बात फैला दी गई कि मंदिर पुराना था और जर्जर होकर गिर गया। लेकिन कई लोगों का मानना है कि वो बाबा बिरयानी वाले मुख्तार की ही साजिश थी। कुछ लोग तो ये भी बताते हैं कि मंदिर में हल्का सा विस्फोट भी हुआ था।” कानपुर नगर के ही एक अन्य हिन्दू संगठन से जुड़े कार्यकर्ता प्रांजल राय का दावा है, “दंगे में बाबा बिरयानी वाले ने ही मुख्य तौर पर फंडिग की थी।”

महमूद उमर ने आरोपों को नकारा

ऑपइंडिया ने बाबा बिरयानी के मालिक मुख़्तार अहमद के बेटे महमूद उमर से बात की। महमूद ने बताया, “हम पर लगे तमाम आरोप गलत हैं। हम शहर के इज्जतदार लोग हैं। हम से अब तक इस हिंसा में किसी भी पुलिस वाले ने कोई बात नहीं की है। मेरे अब्बू आराम से घर पर हैं और मीडिया में चल रही खबरों से चिंतित हैं। जो कुछ भी चल रहा वो मीडिया में है। हमारे खिलाफ अगर किसी के पास कोई भी सबूत हो तो दिखाए। हमारा परिवार इन खबरों से परेशान है। ये असल में हमारे नाम को खराब करने की साजिश है। हम पर पहले भी मंदिर कब्ज़ा करने जैसे आरोप लगे थे जो बेबुनियाद हैं। कोर्ट से हमारे पास पक्के कागजात के साथ स्टे ऑर्डर भी है।”