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समझें भारत में कैसे होता है राष्ट्रपति चुनाव: राज्य के हिसाब से तय होता है सांसदों-विधायकों के वोट का ‘वेटेज’, ऐसे बनता है ‘इलेक्टोरल कॉलेज’

भारत के वर्तमान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का कार्यकाल 25 जुलाई, 2022 को समाप्त होने जा रहा है। इससे पहले देश के अगले और 15वें राष्ट्रपति को चुन लिया जाएगा। पिछले 45 सालों से इसी तारीख पर नव निर्वाचित राष्ट्रपति कार्यभार संभालते आ रहे हैं। आइए जानते हैं भारत में कैसे होता है राष्ट्रपति का चुनाव, कौन इसके लिए वोट करते हैं और कैसे इन वोट की वैल्यू निर्धारित होती है।

कैसे होता है राष्ट्रपति चुनाव

भारत में राष्ट्रपति का चुनाव आम चुनाव से बेहद अलग होता है। इस चुनाव में भारत के नागरिक अप्रत्यक्ष रूप से हिस्सा लेते हैं। अर्थात, इस चुनाव में जनता द्वारा चुने गए विधायक और सांसद हिस्सा लेते हैं। वोट में हिस्सा लेने वाले विधायक और सांसद के वोट का वेटेज अलग-अलग होता है। संविधान के अनुच्छेद-54 के अनुसार, राष्ट्रपति का चुनाव एक इलेक्टोरल कॉलेज करता है। इसके सदस्यों का प्रतिनिधित्व आनुपातिक होता है। यानी, उनका सिंगल वोट ट्रांसफर होता है, पर उनकी दूसरी पसंद की भी गिनती होती है।

इनको है वोट देने का अधिकार

इस चुनाव में सभी प्रदेशों की विधानसभाओं के चुने हुए सदस्य, लोकसभा और राज्यसभा में चुनकर आए सांसद वोट डालते हैं। राष्ट्रपति की ओर से राज्य सभा में मनोनीत 12 सदस्य वोट नहीं डाल सकते ​हैं। इसके अलावा राज्यों की विधान परिषदों के सदस्यों को भी वोटिंग का अधिकार नहीं है, क्योंकि उन्हें जनता ने नहीं चुना होता है।

सिंगल ट्रांसफरेबल वोट सिस्टम क्या है

राष्ट्रपति चुनाव में एक खास तरीके से वोटिंग होती है। इस प्रक्रिया में हिस्सा लेने वाले सदस्य तमाम उम्मीदवारों में से पहले अपने पसंदीदा उम्मीदवार को वोट डालते है। अर्थात वह बैलट पेपर में सदस्य बता देते हैं कि राष्ट्रपति पद के लिए उनकी पहली, दूसरी और तीसरी पसंद क्या है। यदि पहली पसंद वाले वोटों से विजेता का फैसला नहीं हो सका, तो उम्मीदवार के खाते में वोटर की दूसरी पसंद को नए सिंगल वोट की तरह ट्रांसफर किया जाता है। इसलिए इसे सिंगल ट्रांसफरेबल वोट कहा जाता है।

राष्ट्रपति चुनाव में वोट की वैल्यू का निर्धारण

जैसा की पहले ही बता चुके है कि चुनाव प्रक्रिया में विधायक और सांसद वोट की वैल्यू अलग-अलग होती है। यह हर एक विधायक के लिए अलग हो सकता है और इसका निर्धारण उसके राज्य की जनसंख्या और विधानसभा क्षेत्र की संख्या पर निर्भर करता है। वोट का वेटेज निकलने के लिए उस प्रदेश की जनसंख्या को चुने गए विधायकों की संख्या से भाग दिया जाता है, इसके बाद जो नंबर आता है, उसे 1000 से भाग दिया जाता है। इस तरह यह उस राज्य के विधायक के एक वोट का वेटेज होता है। यदि भाग देने के बाद प्राप्त संख्या 500 से ज्यादा है तो इसमें 1 जोड़ दिया जाता है।

सांसद के वोट की वैल्यू

सांसदों के वोटों का वेटेज अलग है। इसमें सबसे पहले सभी राज्यों की विधानसभाओं के चुने सदस्यों के वोटों का वेटेज जोड़ा जाता है। अब इस सामूहिक वेटेज को राज्यसभा और लोकसभा के चुने सदस्यों की कुल संख्या से भाग किया जाता है। इस तरह जो नंबर मिलता है, वह एक सांसद के वोट का वेटेज होता है। अगर इस तरह भाग देने पर शेष 0.5 से ज्यादा बचता हो तो वेटेज में एक का इजाफा हो जाता है।

आपको बता दें कि राष्ट्रपति चुनाव की एक और सबसे खास बात यह है कि इस चुनाव में सबसे ज्यादा वोट हासिल करने से ही जीत तय नहीं होती है। राष्ट्रपति वही बनता है, जो सांसदों और विधायकों के वोटों के कुल वेटेज का आधा से ज्यादा हिस्सा हासिल करे। मान लीजिए राष्ट्रपति चुनाव के लिए जो इलेक्टोरल कॉलेज है, उसके सदस्यों के वोटों का कुल वेटेज 10,98,882 है। ऐसे में जीत के लिए राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार को 5,49,442 वोट हासिल करने होंगे। जो प्रत्याशी सबसे पहले यह कोटा हासिल करता है, उसे राष्ट्रपति चुन लिया जाता है।

‘बलूचिस्तान आजाद होता तो अफगानिस्तान से शर्मनाक वापसी नहीं होती’: अमेरिकी नेता और पूर्व नौसेना अधिकारी ने कहा- गिलगिट-बाल्टिस्तान पर भारत का नियंत्रण हित में

अमेरिकी राजनेता और पूर्व नौसेना अधिकारी रॉबर्ट बॉब लानसिया (Robert Bob Lancia) ने कहा कि पाकिस्तान (Pakistan) पर भरोसा करने के बजाए अगर बलूचिस्तान (Balochistan) को स्वतंत्र करने की रणनीति पर काम किया गया होता तो अफगानिस्तान (Afghanistan) में आतंकवाद के खिलाफ अमेरिकी अभियान सफल रहा होता।

लानसिया ने ट्विटर पर कई ट्‌वीट के जरिए अपनी राय रखते हुए कहा कि अगर अमेरिका ने भारत के साथ मिलकर काम किया होता तो अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना की वापसी को शर्मनाक वापसी नहीं करनी पड़ती और ना ही अपने 13 सैनिकों को खोना पड़ता। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि गिलगित-बाल्टिस्तान पर भारत का नियंत्रण अमेरिका के हित में रहता।

लानसिया ने कहा, “जैसा कि कर्नल राल्फ पीटर्स ने कॉन्ग्रेस में अपनी दिए गए बयान में बताया कि मैंने पहले ही कहा था कि एक स्वतंत्र बलूचिस्तान दोहरा खेल खेलने वाले पाकिस्तान पर भरोसा किए बिना हमारे सैनिकों को सीधे अफगानिस्तान भेजने के लिए अमेरिका को सीधी पहुँच प्रदान करेगा।”

लानसिया ने कहा कि यदि गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र भारत के नियंत्रण में होता तो अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों को पाकिस्तान से अविश्वसनीय और दोहरे खेल में नहीं फँसना पड़ता और अमेरिका को एक मित्र लोकतांत्रिक देश भारत से सीधे सहायता मिल सकती थी। बता दें कि गिलगित-बाल्टीस्तान पाकिस्तान का प्रांत है, जिस पर पाकिस्तान ने अवैध कब्जा कर रखा है।

गिलगित-बाल्टिस्तान के रणनीतिक महत्व को बारे में बात करते हुए बॉब लानसिया ने कहा, “भारत द्वारा नियंत्रित गिलगित-बाल्टिस्तान अमेरिका के नंबर 1 प्रतिद्वंद्वी चीन और उसकी वन बेल्ट एंड वन रोड (OBOR) के लिए एक बड़ा झटका होगा। इससे चीन को अरब सागर के बंदरगाहों तक सीधे पहुँच नहीं हासिल हो पाती।”

बता दें कि इस्लामिक आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान की दोहरी नीति के कारण अफगानिस्तान में अमेरिका को करारी हार का सामना करना पड़ा और शर्मनाक वापसी के लिए निर्णय लेना पड़ा। पाकिस्तान अमेरिका सहायता के नाम पर उसके अरबों डॉलर वित्तीय सहायता लेता था और दूसरी तरफ तालिबान जैसे आतंकी संगठनों को वित्तीय और सैनिक मदद करता था। इससे अमेरिकी सेना के अभियान को गहरा नुकसान पहुँचा।

अमेरिकी सेना की वापसी के बाद पाकिस्तान के सहयोग से इस्लामिक संगठन तालिबान ने 15 अगस्त 2021 को अफगानिस्तान पर कब्जा जमा कर लिया और लगभग पूरे देश पर नियंत्रण स्थापित कर लिया। वहीं, वर्तमान में पाकिस्तान के नियंत्रण में स्थित भारत के अभिन्न अंग गिलगित-बाल्टिस्तान के रास्ते चीन अपनी महत्वाकांक्षी परियोजना OBOR को एशिया से यूरोप तक विस्तार देने में लगा है। इसके साथ ही वह अपनी सामरिक बढ़त भी बना रहा है।

बता दें कि आतंकी संगठन अल कायदा ने 11 सितंबर 2001 को इस्लामिक आतंकियों ने अमेरिका के ट्वीन टावर से विमान टकरा कर उसे ध्वस्त कर दिया था और पूरी दुनिया को सकते में डाल दिया था। इसके बाद अमेरिका ने अल कायदा के सफाए के लिए अफगानिस्तान पर हमला किया था। मार्च 2020 में अफगानिस्तान छोड़ने की घोषणा और 15 अगस्त 2021 तक अफगानिस्तान छोड़ने तक वहाँ लगभग 20 सालों तक युद्ध तक चला।

जिस घटना को छिपाना चाहता था PMO, उसकी तस्वीर लेने वाले फोटोग्राफर का निधन: श्रीलंका में राजीव गाँधी पर राइफल से हुआ था हमला

श्रीलंका के फोटो जर्नलिस्ट सेना विदानागमा (Sena Vidanagama) का बुधवार (8 जून 2022) को निधन हो गया। वह 76 वर्ष के थे। विदानगमा को 30 जुलाई, 1987 को श्रीलंका में गार्ड ऑफ ऑनर समारोह के दौरान पूर्व भारतीय प्रधानमंत्री राजीव गाँधी पर राइफल बट से हमला करने वाले एक पूर्व श्रीलंकाई नौसेना अधिकारी की तस्वीर लेने के लिए जाना जाता था

सेना विदानगमा द्वारा ली गई तस्वीर

सेना विदानगमा ने AFP फ्रेंच न्यूज सर्विस सहित कई वैश्विक समाचार एजेंसियों के लिए एक आधिकारिक फोटोग्राफर के रूप में काम किया। विदानगमा का जन्म 1945 में श्रीलंका के मतारा में हुआ था। उनकी तस्वीरें व्यापक रूप से स्थानीय और विदेशों में फैली हुई है।

30 जुलाई 1987 को क्या हुआ था?

30 जुलाई, 1987 को, भारतीय प्रधानमंत्री राजीव गाँधी कोलंबो में राष्ट्रपति भवन में एक नौसेना कैडेट सभा में भाग ले रहे थे। इसी दौरान उन पर श्रीलंकाई सिंहल नौसेना के एक सैनिक ने राइफल की बट से हमला किया था। स्थिति बिगड़ने से पहले पीएम के गार्डों ने उन्हें बचा लिया और अपराधी को तुरंत पकड़ लिया।

हमलावर विजेमुनि विजेता, रोहाना डी सिल्वा, एक श्रीलंकाई नाविक थे, जो राजीव गाँधी द्वारा श्रीलंकाई ऑनर गार्ड को देखने के लिए मौजूद थे। लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (LTTE) को भारत द्वारा कथित रूप से समर्थन दिए जाने से रोहाना नाराज हो गए थे। इसका बदला लेने के लिए उन्होंने अपनी औपचारिक राइफल को भारतीय प्रधानमंत्री राजीव गाँधी के कंधे के पीछे रख दिया। हालाँकि, पीएम रुक गए और स्ट्राइक की फोर्स से बच गए।

रोहाना पर अदालत में मुकदमा चला और उसे छह साल जेल की सजा सुनाई गई। राष्ट्रपति की क्षमा प्राप्त करने के ढाई साल बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। बाद में डेली मिरर के साथ एक इंटरव्यू में, विजेमुनि ने अपना आक्रोश व्यक्त किया और बताया कि उन्होंने राजीव गाँधी पर हमला क्यों किया।

उन्होंने कहा, “मैं गार्ड ऑफ ऑनर का इंतजार कर रहा था, भारत और प्रधानमंत्री गाँधी ने हमारे देश के साथ जो किया उससे मैं बेचैन और गुस्से में था। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी क्योंकि समझौते पर पहले ही हस्ताक्षर हो चुके थे। इससे मुझे गुस्सा आ गया और मैंने सोचा कि मुझे अपने देश में हुई आपदा का बदला लेने के लिए कुछ करना चाहिए। मैं सोच रहा था कि भारत किस तरह लिट्टे को पैसे, हथियार और सैन्य प्रशिक्षण से मदद कर रहा है। राइफल से हमला करने का विचार मेरे दिमाग में तब आया जब राजीव गाँधी मुझसे लगभग दो या तीन फीट दूर थे।”

घटना की रिकॉर्डिंग

अनुभवी पत्रकार और ANI के अध्यक्ष प्रेम प्रकाश ने भी राजीव गाँधी पर हमले की रिकॉर्डिंग की थी। ANI की स्मिता प्रकाश ने इस घटना के बारे में ट्विटर पर करते हुए बताया कि प्रेम प्रकाश ने ही श्रीलंका से रिपोर्ट करते हुए घटना का वीडियो बनाया था। स्मिता के मुताबिक, पीएमओ इस घटना से इनकार करना चाहता था, लेकिन यह श्रीलंका में पहले ही सुर्खियाँ बटोर चुका था।

वीडियो क्लिप को उस समय श्रीलंका में भारतीय अधिकारियों ने लिया भी था। हालाँकि, जब प्रधानमंत्री ने कहने के बाद इसे प्रेम प्रकाश को वापस कर दिया गया।

पहली बार दवा ने जड़ से खत्म किया कैंसर: ड्रग ट्रायल में सिर्फ 6 महीने में ठीक हुए मरीज, विशेषज्ञों ने कहा- ‘अविश्वसनीय’

मेडिकल क्षेत्र में नित नए प्रयोग होने के बावजूद कैंसर आज भी एक जानलेवा बीमारी मानी जाती है। हालाँकि अब इस बीमारी के लिए एक संजीवनी की आस जगी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक Dostarlimab नामक ड्रग ने क्लिनिकल ट्रायल में शत प्रतिशत नतीजे दिए हैं। इसका प्रयोग रेक्टल कैंसर से जूझ रहे पीड़ितों पर किया गया और पाया गया कि हर मरीज से मलाशय कैंसर गायब हो गया।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ये छोटा क्लीनिकल ट्रायल मेमोरियल स्लोन केटरिंग कैंसर सेंटर में 18 मरीजों पर हुआ। इन सभी लोगों को 6 माह तक DostarLimab दवाई दी गई और 6 माह बाद नतीजे सामने आए कि हर किसी के शरीर से कैंसर का ट्यूमर गायब था।

कैंसर सेंटर की डॉ लुइस ए डियाज जे ने इन नतीजों को देख कहा कि कैंसर के इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है। डॉक्टरों ने मरीजों का फिजिकल परीक्षण किया जैसे एंडोस्कोपी, पॉजिट्रॉन एमिशन टोमोग्राफी या पीईटी स्कैन या एमआरआई स्कैन आदि। इन सबमें में चिकित्सकों को कैंसर का नामोनिशान नहीं मिला और ये साबित हो पाया कि ये दवाई कैंसर मरीजों के लिए संजीवनी का काम कर सकती है।

रिपोर्ट बताती है कि क्लीनिकल ट्रायल में जिन मरीजों को शामिल किया गया वो पहले कीमोथेरेपी, रेडिएशन, और सर्जरी से गुजरे थे जिनके कारण आंतों से लेकर यौन रोग भी हो सकता है। इस परीक्षण के बाद जो नतीजा आया उसे देख मेडिकल जगत में अविश्वनीय माना जा रहा है। कैनिफोर्निया विश्वविद्यालय में कोलोरेक्टल कैंसर विशेषज्ञ के तौरा पर काम करने वाले डॉ एलन पी वेनुक ने इस रिसर्च को पहली ऐसी रिसर्च कहा जहाँ सभी रोगी ठीक हो गए। इस ड्रग के नतीजों को उन्होंने अविश्वसनीय और विशेष रूप से कारगर बताया क्योंकि इसमें सभी रोगियों को परीक्षण दवा के दौरान परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ा।

श्रीरंगपट्ट्नम के अंजनेय मंदिर को ध्वस्त कर टीपू सुल्तान ने बनवाई जामिया मस्जिद, मैसूर पुरातत्व विभाग की 1935 की रिपोर्ट से खुलासा

कर्नाटक के मांड्या जिले के श्रीरंगपट्ट्नम शहर में मंदिर-मस्जिद विवाद के बीच मैसूर पुरातत्व विभाग की 1935 की रिपोर्ट को ध्यान में लाया गया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पुरातत्व विभाग की रिपोर्ट में कहा गया है कि टीपू सुल्तान ने अंजनेय मंदिर को ध्वस्त कर दिया था और मंदिर के मलबे से भूतल को पाटकर जामिया मस्जिद का निर्माण कराया था।

रिपोर्ट के अनुसार, मैसूर और श्रीरंगपट्ट्नम के तत्कालीन शासक टीपू सुल्तान ने क्षेत्र में मस्जिदों के निर्माण के लिए कई मंदिरों को ध्वस्त कर दिया था। रिपब्लिक टीवी ने अपने रिपोर्ट में कहा, “जामिया मस्जिद का निर्माण टीपू सुल्तान ने अंजनेय मंदिर को ध्वस्त करने के बाद, उसके मलबे से भूतल को भरने के बाद करवाया था।”

कथित तौर पर, 2004 में प्रकाशित एक एएसआई पत्र, जिसमें मैसूर पुरातत्व विभाग की 1935 की रिपोर्ट का हवाला दिया गया था, ने यह भी कहा कि वर्तमान जामिया मस्जिद परिसर में संचालित मदरसा भी अवैध है। रिपब्लिक टीवी द्वारा एक्सेस किए गए पत्र में उल्लेख किया गया है कि वक्फ बोर्ड 1979 से मस्जिद परिसर में मदरसे को अवैध रूप से चला रहा है।

हाल ही में विहिप और बजरंग दल के सदस्यों ने ‘श्रीरंगपट्ट्नम चलो’ रैली का आयोजन किया और मस्जिद के अंदर हिंदू धार्मिक में पूजा करने के लिए श्रीरंगपट्ट्नम में जामिया मस्जिद की ओर मार्च करने का आह्वान किया। वहीं हिंदू संगठनों का कहना है कि जामिया मस्जिद का निर्माण टीपू सुल्तान ने 1782 में एक हनुमान मंदिर को तोड़कर किया था।

बता दें कि 4 जून को कर्नाटक के मांड्या जिले के श्रीरंगपट्ट्नम शहर में ‘श्रीरंगपट्ट्नम चलो’ रैली से पहले सीआरपीसी अधिनियम की धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी गई थी। कार्यक्रम से पहले एहतियात के तौर पर कस्बे में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था और इलाके में 4 चेक पोस्ट लगाए गए थे।

हिंदू संगठनों ने इससे पहले 16 मई को कहा था कि कर्नाटक के मांड्या में जामिया मस्जिद मूल रूप से एक अंजनेय मंदिर था। उन्होंने मस्जिद में अंजनेय की मूर्ति की पूजा करने की अनुमति माँगी थी और एएसआई से मामले की जाँच करने की भी माँग की थी। कार्यकर्ताओं ने मस्जिद परिसर में स्थित तालाब में नहाने की अनुमति भी माँगी थी।

रिपोर्ट के अनुसार, हिंदू जनजागृति समिति ने बेंगलुरु में टीपू सुल्तान के महल में भी एक सर्वेक्षण की माँग की है, जिसमें दावा किया गया है कि यह एक मंदिर से अतिक्रमित भूमि पर बनाया गया है। हिंदू संगठन के प्रवक्ता मोहन गौड़ा ने कहा, “अतीत में कई लोगों ने कहा है कि टीपू सुल्तान समर पैलेस के पीछे, यह सब कोटे वेंकटरमण मंदिर था और इस पर सुल्तान ने अवैध रूप से कब्जा कर लिया था। यहाँ एक संस्कृत विद्यालय भी हुआ करता था। इस हिंदू मंदिर पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया गया था और अब इसका एक सर्वेक्षण किया जाना चाहिए।”

इसके अलावा, पिछले हफ्ते, “नरेंद्र मोदी विचार मंच’ (NMVM) नाम के एक समूह ने भी मंड्या के डिप्टी कमिश्नर से संपर्क किया और दावा किया कि मस्जिद-ए-आला, ‘मूडला बगिलु अंजनेया स्वामी मंदिर’ था। इसने मांड्या के उपायुक्त से अनुरोध किया था कि उन्हें उक्त मस्जिद के अंदर हनुमान जी की पूजा करने की अनुमति दी जाए।”

इस बीच विहिप ने दावा किया है कि कर्नाटक के बीदर जिले के बसवकल्याण में एक दरगाह, बसवन्ना मंदिर भी थी। विहिप के सदस्यों ने इस मामले में सरकारी हस्तक्षेप की माँग करते हुए दावा किया है कि इस बात के स्पष्ट सबूत हैं कि दरगाह ऐतिहासिक रूप से एक मंदिर थी।

100+ महिला आतंकियों को दी थी हथियार की ट्रेनिंग, कॉलेज पर हमले की साजिश: IS की महिला सरगना ने क़बूले जुर्म, 5 बार किया निकाह

अमेरिका के मध्यपश्चिमी राज्य कैंसास में एक महिला को आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक और अल-शाम (Islamic State of Iraq and al-Sham) को मदद पहुँचाने के लिए दोषी ठहराया गया है। ट्रायल के दौरान महिला ने कबूल किया उसने एक अमेरिकी कॉलेज पर हमले की साजिश पर काम किया था। इसके लिए उसने सीरिया में एक महिला दल के 100 से अधिक लड़ाकों को ट्रेनिंग भी दी थी।

जानकारी के मुताबिक, कोर्ट ने कहा है कि 42 साल की एलिसन फ्ल्यूक एक्रेन (Allison Fluke-Ekren) ने 2011-19 के बीच सीरिया, लीबिया और इराक में आतंकी गतिविधियों में शामिल होने की बात कबूल की है। सजा 25 अक्टूबर को सुनाई जाएगी। बताया जा रहा है कि उसे अधिकतम 20 साल की जेल की सजा हो सकती है। पुलिस की चार्जशीट में उसे एक माँ, शिक्षिका और आईएसआईएस बटालियन का सरगना बताया गया है। रिकॉर्ड के मुताबिक, वह आखिरी बार अमेरिका में 8 जनवरी, 2011 को देखी गई थी। इससे पहले उसने इजिप्ट और लीबिया की यात्रा की थी। फिर 2014 में सीरिया का रुख किया था।

सीरिया में छह सरकारी गवाहों में एक गवाह के अनुसार, एकरेन ने अमेरिकी कॉलेज पर हमले की योजना पेश की थी। इसमें कॉलेज कैंपस में विस्फोटक से धमाका करना था। एलिसन ने इस्लामिक स्टेट सैन्य बटालियन के सरगना और आयोजक के तौर पर काम किया। उसने महिलाओं को ऑटोमेटिक फायरिंग एके -47 राइफल, ग्रेनेड और आत्मघाती बेल्ट के इस्तेमाल को लेकर ट्रेनिंग दी थी। एलिसन ने 100 से अधिक महिलाओं को सैन्य ट्रेनिंग दी जिसमें युवा लड़कियाँ भी शामिल थी।

रिपोर्ट के मुताबिक, फ्लूक-एकरेन ने कैंसास यूनिवर्सिटी में बायोलॉजी की पढ़ाई की और इंडियाना के एक कॉलेज में भी दाखिला लिया। सोमवार (6 जून 2022) को अदालत में उसने कहा कि उसके समूह ने जानबूझकर युवा लड़कियों को हथियारों का प्रशिक्षण नहीं दिया था, लेकिन वे भीड़ का हिस्सा हो सकते हैं। समूह को इसका फायदा मिल सकता था। इससे पहले असिस्टेंट यूएस अटॉर्नी राज पारेख ने अदालत में कहा कि कुछ युवा लड़कियों ने जूरी के सामने गवाही दी थी कि उन्होंने फ्लूक-एकरेन से हथियार चलाने की ट्रेनिंग ली थी।

कोर्ट में मंगलवार को खुलासा हुआ कि फ्लूक-एकरेन ने 2012 के हमले के पीछे के आतंकवादी समूह अंसार अल-शरिया के नेताओं की सहायता की थी, जिसने लीबिया में चार अमेरिकियों को मार डाला था। याचिका के दस्तावेजों से पता चलता है कि एकरेन का दूसरा पति उस आतंकवादी संगठन अंसार अल-शरिया का सदस्य था, जिसने उस साल लीबिया के बेंगाजी में एक अमेरिकी परिसर पर हुए घातक हमले की जिम्मेदारी ली थी। उसका पति यूएस सरकार की इमारतों से दस्तावेजों का एक बॉक्स घर ले आया और साथ में कपल ने बॉक्स की सामग्री की जाँच की। एकरेन ने याचिका दस्तावेजों में स्वीकार किया कि उसके पति ने बाद में आतंकवादी समूह के अधिकारियों को अमेरिकी कागजात दिए। हालाँकि मामले में फ्लूक-एकरेन पर हमले में शामिल होने का आरोप नहीं लगा था। 

इसके बाद कपल ने लीबिया छोड़ दिया, क्योंकि उस समय, उनका मानना ​​​​था कि असनर अल-शरिया अब वहाँ हमले नहीं कर रहा था और वे कहीं और हिंसक जिहाद में शामिल होना चाहते थे। 2016 की गर्मियों में, अदालत के दस्तावेजों के अनुसार, फ्लूक-एकरेन ने अपने तीसरे पति, एक बांग्लादेशी आईएसआईएस सदस्य से शादी की, जिसने आईएसआईएस के लिए ड्रोन बनाया। बाद में उसकी हत्या कर दी गई। दस्तावेजों से पता चला है कि फ्लूक-एकरेन की पाँच बार शादी हुई है और पाँच बच्चे हैं।

बाद में एलिसन महिला यूनिट खतीबा नुसायबा बटालियन की नेता बनी,  जो इस्लामिक स्टेट के मिशन को बनाए रखने के लिए महिला लड़ाकों का समूह है। इसने इस्लामिक स्टेट का समर्थन करने के लिए शारीरिक, चिकित्सा, हथियारों, मजहबी कक्षाओं के साथ-साथ मार्शल आर्ट की भी ट्रेनिंग दी गई। इसके अलावा उसने वाहन बम विस्फोट पर कोर्स और राइफल एवं सैन्य आपूर्ति के साथ ‘गो बैग’ कैसे पैक करें, इसकी भी ट्रेनिंग दी। एलिसन ने कबूल किया कि वह मई 2019 तक ISIS के साथ जुड़ी हुई थी। फिर 2021 की गर्मियों में स्थानीय सीरियाई पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया। उसे 28 जनवरी, 2022 को अमेरिकी हिरासत में ट्रांसफर कर दिया गया।

सलमान खान का धमकी मिलने से इनकार: सलीम खान को बेंच पर मिला था लेटर, मुंबई पुलिस ने दर्ज की थी FIR

बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान (Salman Khan) ने धमकी भरा लेटर मिलने के मामले में बड़ा बयान दिया है। उन्होंने मंगलवार (7 जून 2022) को पुलिस के दिए अपने बयान में कहा कि उन्हें किसी भी व्यक्ति से धमकी, धमकी भरा कॉल और लेटर नहीं मिला है। दरअसल, 5 जून की ​शाम को सलमान और उनके पिता सलीम खान को एक लेटर मिलने की खबर आई थी, जिसमें दोनों को जान से मारने की धमकी दी गई थी। लेटर में हिंदी में लिखा गया था कि उन्हें और उनके बेटे सलमान खान को सिद्धू मूसेवाला की तरह ही मौत के घाट उतार दिया जाएगा। इसके साथ ही लेटर में एलबी (लॉरेस बिश्नोई) और जीबी (गोल्डी बरार) के साइन भी थे।

पुलिस के अनुसार, जब धमकी भरा लेटर मिला था, उस वक्त सलमान खान दुबई में थे। वहाँ पर आईफा 2022 का आयोजन किया गया था। सलीम खान को यह लेटर एक बेंच पर मिला, जहाँ वह रोजाना सुबह टहलने के बाद बैठते हैं।

सिद्धू की हत्या के छह दिनों बाद ही सलीम खान को यह लेटर सुबह साढ़े सात से आठ बजे के करीब अपने और सलमान के नाम से मिला था, जिसके बाद बांद्रा पुलिस ने एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज आगे की जाँच शुरू कर दी थी। लेटर सामने आने के बाद यह भी खबर सामने आई थी कि महाराष्ट्र गृह मंत्रालय के आदेश पर सलमान खान के घर के बाहर भारी संख्या में पुलिस बल की तैनात की गई है।

गौरतलब है कि लॉरेंस बिश्नोई ने 1998 में फिल्म ‘हम साथ साथ हैं’ की शूटिंग के दौरान काले हिरण के शिकार मामले को लेकर सलमान खान को धमकी दी थी। इस वक्त लॉरेंस बिश्नोई तिहाड़ जेल में बंद है, जहाँ उसका नाम पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या में सामने आया है और उससे दिल्ली व पंजाब पुलिस की स्पेशल सेल द्वारा रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है।

‘हिंदू गंदे हैं, वे मूर्ति पूजते हैं’: जिहाद के लिए ऐसे तैयार करते हैं मदरसे, बांग्लादेश के मुस्लिम बच्चे का वीडियो वायरल

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर (Twitter) पर ‘वॉयस ऑफ बांग्लादेशी हिंदुओं’ (Voice of Bangladeshi Hindus) ने 5 जून को एक वीडियो शेयर किया था। इस वीडियो में बांग्लादेश के मदरसा में पढ़ने वाला एक मुस्लिम लड़का हिंदुओं के खिलाफ जहर उगलता नजर आ रहा है। वीडियो रिकॉर्ड करने वाले ने जब उस लड़के से हिंदुओं के बारे में पूछा गया तो उसने कहा, “हिंदू गंदे होते हैं।” जब उससे इसका कारण पूछा गया तो उसने कहा, “हिंदू गंदे हैं, क्योंकि वे मूर्तियों की पूजा करते हैं।”

बांग्ला भाषा में रिकॉर्ड किया गया यह वीडियो एक मिनट का है। इसमें खुद को आरिफ बताने वाला लड़का बांग्लादेश के एक मदरसे में पढ़ता है। जब उससे पूछा गया कि हिंदू गंदे हैं या अच्छे, तब उसने जवाब दिया, “हिंदू गंदे हैं, क्योंकि वे मूर्तियों की पूजा करते हैं।” फिर उससे पूछा गया कि मूर्ति पूजा करने में क्या समस्या है। इस पर वह कहता ​है, “यह हराम है।” यानी उसके अनुसार, जो भी हराम गतिविधियों में लिप्त हैं, वे सभी गंदे हैं। ये सब उसे मदरसे में सिखाया गया है।

मदरसा सिखाता है जिहाद

वीडियो रिकॉर्ड करने वाले ने आरिफ से आगे पूछा कि उसने मदरसा में और क्या-क्या सीखा। उसने कहा, “जिहाद के बारे में।” जिहाद की परिभाषा पूछे जाने पर मुस्लिम लड़का कहता है, “गैर-मुस्लिमों के खिलाफ युद्ध।” क्या मदरसा के हुजूर (गुरु) ने उन्हें जिहाद के बारे में सब कुछ सिखाया है, इसके जवाब में वह ‘हाँ’ कहता है। वह बोला, “इमाम महदी के आने पर जिहाद होगा।”

कौन है इमाम महदी?

ब्रिटानिका के अनुसार, महदी या इमाम महदी (जिसका अर्थ अरबी में मार्ग दिखाने वाला होता है) उसे एक मसीहा के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जो पूरी दुनिया में न्याय और समानता लाएगा। कुरान में महदी और दो सबसे महत्वपूर्ण हदीसों- अल-बुखारी एवं मुस्लिम इब्न अल-अज्जाज का उल्लेख नहीं है। हालाँकि, हदीस के अन्य संकलनों में महदी का उल्लेख किया गया है।

हिंदुओं के खिलाफ जंग छेड़ने के लिए बच्चों का ब्रेनवॉश

हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर कई ऐसे वीडियो सामने आए हैं, जिनमें मुस्लिम बच्चे हिंदुओं के खिलाफ जहर उगलते नजर आए। बच्चों का लगातार ब्रेनवॉश करने से न केवल भारत में, बल्कि दुनिया के अन्य हिस्सों में भी हिंदू समुदाय के खिलाफ अभूतपूर्व नफरत पैदा हो रही है। सबसे ताजा उदाहरण केरल के एक मुस्लिम लड़के का है, जो मई 2022 में पीएफआई (पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया) की एक रैली में हिंदू विरोधी नारे लगाता नजर आया था। वीडियो में पीएफआई के सदस्यों और बच्चे को हिंदुओं और ईसाइयों को उनके अंतिम संस्कार की तैयारी करने की धमकी देते हुए सुना जा सकता है।

वहीं, अप्रैल 2022 में एक इंस्टाग्राम लाइव चैट सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें एक इन्फ्लुएंसर सबनाम और उसके दोस्त नदीम ने हिंदुओं के खिलाफ जान से मारने की धमकी दी थी। वायरल ऑडियो क्लिप में नदीम ने कहा था कि अगर उसके पास एके-47 होती तो वह हिंदुओं को मार डालता।

फरवरी 2021 में पाकिस्तान से 2 मिनट का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें बच्चों को लकड़ी की तलवारों से खेलते हुए दिखाया गया था। जब वीडियो रिकॉर्ड करने वाले ने उनसे पूछा कि वे तलवारों का क्या करेंगे तो उन्होंने जवाब दिया, “काफिरों का सिर काटेंगे”। जब वीडियो रिकॉर्ड करने वाले ने उनसे आगे पूछा कि अगर वे काफिरों का सिर कलम करेंगे तो उन्हें क्या मिलेगा और उन्होंने जवाब दिया, “जन्नत (स्वर्ग)”।

‘साथ सोना चाहता था कोच, कहा – मेरी बीवी बन जाओ, वरना करियर तबाह कर दूँगा’: महिला साइकिलिस्ट के खुलासे के बाद विदेश से टीम को वापस बुलाया

भारत की टॉप महिला साइकिलिस्ट ने हाल ही में अपने कोच पर सनसनीखेज आरोप लगाया। इसमें कहा गया कि कोच इस महिला खिलाड़ी के साथ सोना चाहता था, अपनी बीवी बनाना चाहता था। साइकिलिस्ट ने आरोप लगाया कि चीफ नेशनल टीम के कोच आरके शर्मा जबरदस्ती उनके रूम में घुस गए और वे ट्रेनिंग के बाद उनको मसाज भी देना चाहते थे। इस दौरान शारीरिक संबंध बनाने की भी ख्वाहिश जारी की।

यह सब चीजें महिला साइकिलिस्ट ने स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) को एक ईमेल में दर्ज अपनी शिकायत में कही गई हैं। शिकायत में कहा गया है कि शर्मा साइकिलिस्ट को अपनी बीबी के तौर पर देखना चाहता था। जब लड़की नहीं मानी तो कोच ने उसके करियर को खत्म करने की धमकी भी दी। जब साइकिलिस्ट ने कैंप छोड़कर भारत आने की बात की तो शर्मा ने उसके परिवार को फोन लगाया और उसकी शादी करने की बात की और दावा किया कि इस खेल में लड़की का कोई भविष्य नहीं है।

शर्मा अभी भी स्लोवेनिया में भारतीय टीम के बाकी सदस्यों के साथ हैं। वहाँ वे इसी महीने होने वाली एशियन चैंपियनशिप के लिए ट्रेनिंग कैंप को कोच कर रहे हैं। कोच आरके शर्मा 14 जून को लौटेंगे। स्लोवेनिया में आयोजित यह कैंप एशियाई खेलों के लिए तैयारी के लिए था। ट्रैक साइकिलिंग चैंपियनशिप 18 से 22 जून 2022 तक दिल्ली में आयोजित होने वाली है। यह कोच नेशनल टीम के साथ 2014 से शामिल रहा है।

इस मामले की जाँच SAI कर रहा है। इसके अलावा भारत के साइकिल फेडरेशन ने भी शिकायत दर्ज की है और एक कमेटी गठित की है। ‘साइकिल फेडरेशन ऑफ इंडिया’ के महासचिव मनिन्दर पास सिंह ने बताया कि SAI ने सभी खिलाड़ियों के पासपोर्ट माँगे हैं और स्लोवेनिया से दल को वापस बुलाया है।

शिकायत में महिला साइकिलिस्ट ने बताया कि वह स्लोवेनिया में 15 मई से 14 जून तक साइकिलिंग ट्रेनिंग कैंप में जाने के लिए तैयार थी। मगर वहाँ जाने के तीन दिन पहले ही कोच ने फोन कर कहा कि वह स्लोवेनिया में उसके साथ अकेले में होटल का कमरा शेयर करना चाहते हैं। वह कोच की बात को सुनकर काफी परेशान-हैरान थी। लेकिन, ट्रेनिंग भी जरूरी थी जिसके चलते खिलाड़ी ने तय किया कि स्लोवेनिया जाकर अपने रहने का अलग बंदोबस्त करने के लिए अनुरोध करेगी। 

शिकायत के अनुसार, 16 मई को जब खिलाड़ी स्लोवेनिया पहुँची तो वहाँ उन्होंने अलग कमरे की माँग की लेकिन कोच शर्मा ने काफी रुखा बर्ताव किया और कहा कि इससे अच्छा तो वह भारत में ही रह लेती। शिकायतकर्ता के मुताबिक उसकी यह माँग नहीं सुनी गई और उनके पास कोच के रूम में रहने के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचा। इसके बाद टीम के सपोर्ट स्टाफ SAI के सीनियर अधिकारियों के संज्ञान में मामला पहुँचाया। जिसके बाद उनके लिए तुरंत एक अलग कमरे का इंतजाम किया गया। 

हालाँकि इन सब से कोच बड़ा परेशान हो गया और उसने लड़की का करियर तबाह करने की धमकी दी। कोच ने कहा कि वह खिलाड़ी को नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (NCOE) से हटा देगा और सड़क पर सब्जी बेचने के लिए मजबूर कर देगा। शिकायत के अनुसार, कोच ने 19 मई को साइकिलिस्ट को ट्रेनिंग के बाद अपने कमरे में मसाज देने के लिए बुलाया। हालाँकि, खिलाड़ी ने इसे नजरअंदाज कर दिया। इसके बाद 25 मई को, साइकिल चालक को लड़कों की टीम के साथ एक कार्यक्रम के लिए जर्मनी जाना था, लेकिन शर्मा यह दावा करते हुए उन्हें साथ नहीं ले गए कि कोई अतिरिक्त कमरा नहीं था।

शिकायत में आगे बताया गया है जो 29 मई को हुआ। तब कोच ने जर्मनी से वापस आने के बाद सुबह 7:00 बजे लड़की के कमरे का दरवाजा खटखटाया और जबरदस्ती उसके कमरे में घुसने की कोशिश करने लगा। उसके बाद भी वह लड़की के बेड पर लेटने की कोशिश करने लगा और जब शिकायतकर्ता नहीं मानी तो कोच उसको अपनी ओर खींचने की कोशिश करने लगा और कहा कि वह उसके साथ सो जाए।

कोच ने यह भी कहा कि अब लड़की को उसकी बीवी की तरह बर्ताव करना चाहिए क्योंकि वो उसको बहुत पसंद करता है और अपनी बीवी के तौर पर ही उसको अपने जीवन में चाहता है। लड़की इस दौरान लगातार रोती रही और कोच से गुहार लगाती रही कि वह कमरा छोड़कर चला जाए। लड़की बहुत डरी हुई थी, उसको अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित थी। इसके बाद इस घटना के बारे में लड़की ने स्पोर्ट्स मनोवैज्ञानिक को बताया। 

इन सब घटनाओं के बाद लड़की की दिमागी हालत ऐसी नहीं थी कि वह ट्रेनिंग कर पाती, इसलिए उन्होंने कमरा छोड़ने का फैसला किया और टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS) के सीईओ पुष्पेंद्र गर्ग को इस बारे में जानकारी दी। इसके बाद उन्होंने 3 जून की टिकट करवाई और लड़की को भारत वापस लाया गया। इस पूरी अवधि के दौरान SAI के अधिकारी और एथलीट रिलेशनशिप मैनेजर लड़की के संपर्क में रहे। लड़की ने आर के शर्मा के खिलाफ सबसे कड़े कदम उठाने की माँग की है।

कानपुर दंगों में भी PFI का हाथ: CAA विरोधी हिंसा में जो पकड़े गए वे फिर गिरफ्तार, सपा में रहे निजाम कुरैशी का हिंदूफोबिक चैट भी सामने आया

कानपुर हिंसा मामले के तार अब कट्टरपंथी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) से जुड़े पाए गए हैं। बताया जा रहा है कि हाल में हिंसा आरोपितों की धरपकड़ में पुलिस ने इस संगठन के तीन सदस्यों को पकड़ा जिनकी पहचान सैफुल्ला, नसीम और उमर के तौर पर हुई है। कथिततौर पर ये तीन सीएए हिंसा के दौरान भी पकड़े गए थे।

PFI सदस्यों समेत 54 गिरफ्तार

पुलिस कमिश्नर विजय सिंह मीणा ने गिरफ्तारियों पर बताया कि कानपुर हिंसा केस में पुलिस ने पीएफआई के 5 सदस्यों की पहचान की थी। इनमें से 3 सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है। एक फरार है और एक चलने की स्थिति में नहीं है। पुलिस को शक है कि पीएफआई के अन्य सदस्य भी शहर में मौजूद हो सकते हैं जिसके मद्देनजर जाँच चल रही है। हिंसा केस में अब तक 54 गिरफ्तारियाँ हुई हैं। बीजेपी के युवा विंग के नेता हर्षित श्रीवास्तव को भी पुलिस ने भड़काऊ सामग्री पोस्ट करने पर पकड़ा है।

पुलिस ने इकट्ठा किए सबूत

ताजा जानकारी बताती है कि जाँच टीमें लगातार घटनास्थल पर जाकर सबूत जुटाने में लगी हैं। आज भी पुलिस एसआईटी सदस्यों ने और कानपुर एसीपी त्रिपुरारी पांडे ने हिंसा वाली जगह जाकर सफाई कर्मचारियों से बात की। घटना संबंधी सारे सबूत जुटाने के प्रयास हो रहे हैं। मंगलवार को सुबह ताबड़तोड़ दबिश दी गई थी। अभियान में कुल 11 आरोपित पुलिस के हत्थे चढ़े थे। बुधवार को एसीपी पांडे ने बताया कि उन्हें सबूतों में पत्थर ईंट मिली। इलाके में फोटो ग्राफी और वीडियोग्राफी करके लोगों से उनकी राय ली गई है।

पूर्व सपा नेता का हिंसा में नाम

टाइम्स नाऊ की रिपोर्ट के अनुसार, कानपुर हिंसा में निजाम कुरैशी का नाम भी आया है उसके तार पूर्व में समाजवादी पार्टी से जुड़े मिले हैं। और उसके नाम से चल रहे वॉट्सएप ग्रुप में हिंदुओं के प्रति घृणा देखने को मिली है। साझा स्क्रीनशॉट में हिंदू दुकानदारों से सामान लेने से मुस्लिमों को मना किया जा रहा है। मैसेज में दुकानों के नाम अलग से लिखे गए हैं जिनसे किसी भी सामान की खरीददारी करने से मना किया जा रहा है। मैसेज के ऊपर ‘मुसलमानों के नाम संदेश’ साफ लिखा है। इसमें हिंदू दुकानदारों के नाम के साथ बताया गया है- “जैसे इनको अपने सिर पर बैठाया है उसी तरह एकजुट होकर इन्हें सिरों से नीचे उतार भी सकते हैं।” जिस ग्रुप में ये सारी बातें हुई हैं उस ग्रुप का नाम ‘टीम निजाम कुरैशी’ है।