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3 दिन में एफिडेविट दें, अवैध निर्माण तोड़ने में नियम का पालन हो: योगी सरकार के बुलडोजर पर ब्रेक से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

कानपुर दंगे के बाद दंगाइयों के अवैध कब्जों पर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा चलाए जा रहे बुलडोजर (Buldozer) पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने गुरुवार (16 जून 2022) को अहम फैसला सुनाया। इस्लामिक कट्टरपंथी संगठन जमीयत-ए-उलेमा हिन्द (Jamiat-Ulema-E-Hind) की याचिका पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार की बुलडोजर कार्रवाई पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है।

इसके साथ ही कोर्ट ने यूपी सरकार को जमीयत-उलेमा-ए-हिन्द की याचिका पर अपनी आपत्ति दर्ज करने के लिए तीन दिन का समय दिया है। मामले की सुनवाई जस्टिस AS बोपन्ना और जस्टिस बिक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली पीठ ने की। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि वो राज्य सरकार से बुलडोजर एक्शन को रोकने के लिए नहीं कह सकता, लेकिन कोर्ट सरकार को नियम के तहत ऐसा करने को कह सकता है।

ऐसे में कोर्ट ने कोई आदेश जारी नहीं किया, लेकिन अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने को जरूर कहा है कि मंगलवार (21 जून) को मामले की अगली सुनवाई होने तक कुछ भी न करें। कोर्ट ने कहा कि वे भी समाज का हिस्सा हैं।

उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे पैरवी कर रहे थे। उन्होंने दावा किया कि राज्य सरकार की ओर से जो भी विध्वंस किए गए हैं, उनमें सभी तरह की उचित प्रक्रियाओं का पालन किया गया था। इसके साथ ही उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से मामले में एफिडेविट फाइल करने का भी समय माँगा था।

क्या है पूरा मामला

गौरतलब है कि भाजपा से निलंबित चल रहीं नूपुर शर्मा के पैगंबर मुहम्मद पर कथित बयान के बाद 3 जून को कानपुर में इस्लामिक कट्टरपंथियों ने बड़े पैमाने पर हिंसा की। इसके बाद 10 जून को कई जगहों पर कट्टरपंथियों ने जमकर उत्पात मचाया। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने दंगा करने वालों के अवैध ठिकानों को ढहाने का नोटिस जारी किया और बाद में उसे ढहा दिया था।

इन्हीं दंगाइयों के बचाव में उतरते हुए जमीयत-उलेमा-ए-हिन्द ने कानपुर दंगे के मुख्य साजिशकर्ता जफर हयात हाशमी का समर्थन किया था। इस्लामिक संगठन ने ही सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

हेमंत सोरेन की खनन पट्टे की फाइल मंत्री हेमंत सोरेन ने क्लियर की, CM हेमंत सोरेन ने मुहर लगाई: झारखंड में करप्शन की नई खुदाई

संवैधानिक पद पर रहकर उसका दुरुपयोग करने के मामले में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (Jharkhand CM Hemant Soren) ने भ्रष्टाचार की नई कहानी नई तरीके से लिखी है। यह मामला आप में अनोखा मामला है, क्योंकि यहाँ आवेदक से लेकर स्वीकृति देने वाला और घोटाला करने वाला व्यक्ति एक ही है और वह है राज्य का मुख्यमंत्री है। यानी सीएम का सीएम के लिए सीएम द्वारा किया गया अनोखा काम।

खनन पट्टा मामले में भ्रष्टाचार को अगर हम सरल शब्दों में परिभाषित कर पद के दुरुपयोग को समझने की कोशिश करें तो कुछ इस तरह से कर सकते हैं। हेमंत सोरेन नाम का एक कारोबारी खनन पट्टे के लिए गाँव के लोगों के साथ एक समझौता करता है। फिर उसे पर्यावरण की अनुमति के लिए आवेदन करता है। यह आवेदन राज्य सरकार के पर्यावरण संरक्षण विभाग के पास जाता है, जिसका प्रमुख हेमंत सोरेन नाम का व्यक्ति होता है। यह मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सरकार के अंतर्गत आता है। इस तरह हेमंत सोरेन की सरकार में हेमंत सोरेन नाम के कारोबारी को हेमंत सोरेन वाले विभाग द्वारा खनन की स्वीकृति दे दी जाती है।

हाईकोर्ट के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुँची झारखंड सरकार

हेमंत सोरेन (CM Hemant Soren) के मामले में झारखंड हाईकोर्ट में शुक्रवार (17 जून 2022) को सुनवाई होने वाली है। खनन पट्टा का मामला सीएम सोरेन के लिए गले की हड्डी बन चुका है और उनकी कुर्सी को भी खतरे में डाल दिया है। खनन मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने 8 अप्रैल 2022 को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को नोटिस जारी कर विस्तृत एवं बिंदुवार जानकारी माँगा था।

इस मामले में भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने सीएम सोरेन के खिलाफ नाराजगी भी दिखा चुका है। चुनाव आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव सुखदेव सिंह को पत्र लिखकर कहा था कि दस्तावेजों के ‘प्रमाणीकरण’ कर वे बताएँ कि सोरेन ने राँची के अंगारा ब्लॉक में खनन पट्टा लेने के लिए अपने पद का दुरुपयोग किया है या नहीं।

इतना ही नहीं, मुख्यमंत्री पर अपने परिवार के सदस्यों और करीबी लोगों को भी फायदा पहुँचाने का आरोप लगा है। हेमंत सोरेन और उनके परिजनों पर आय से अधिक संपत्ति जमा करने को लेकर ED की भी जाँच का आदेश हाईकोर्ट द्वारा दिया जा चुका है। वहीं, हेमंत सोरेन की सरकार ने झारखंड हाईकोर्ट के निर्णय के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। हाईकोर्ट ने सोरेन के खिलाफ दायर याचिका को तत्काल सुनवाई योग्य बताया था।

सीएम हेमंत के भ्रष्टाचार का मामला कैसे आया सामने?

शिवशंकर वर्मा नाम के एक व्यक्ति ने हेमंत सोरेन द्वारा खनन पट्टा अपने नाम करने को लेकर 11 फरवरी 2022 को हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल की थी। अधिवक्ता राजीव कुमार की ओर से दाखिल उस याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डॉ. रवि रंजन और न्यायाधीश सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने सुनवाई की थी। अदालत ने सरकार को लताड़ लगाते हुए कहा था कि संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को अपनी शक्तियों का दुरुपयोग नहीं करना चाहिए।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि हेमंत सोरेन राज्य के मुख्यमंत्री और वन एवं पर्यावरण विभाग के विभागीय मंत्री हैं। ऐसे में उन्होंने खुद ही पर्यावरण क्लीयरेंस के लिए आवेदन दिया और खुद ही क्लीयरेंस लेकर खुद ही खनन पट्टा हासिल कर लिया। ऐसा करना पद का दुरुपयोग और जनप्रतिनिधि कानून का उल्लंघन है।

हेमंत सोरेन पर खनन पट्टा लेने का आरोप

मुख्यमंत्री सोरेन पर आरोप है कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अपने नाम पर पत्थर खदान का पट्टा लिया। यह खदान राँची जिले के अनगड़ा मौजा, थाना नं-26, खाता नं- 187, प्लॉट नं- 482 में स्थित है। आरोप है कि इस पट्टे की स्वीकृति के लिए हेमंत सोरेन साल 2008 से ही प्रयास कर रहे थे।

मुख्यमंत्री बनने के बाद पत्रांक संख्या 615/M, दिनांक 16-06-2021 के जरिए पट्टा की स्वीकृति का आशय पत्र (LOI) विभाग द्वारा जारी कर दिया गया। यह विभाग मुख्यमंत्री के पास ही है। स्टेट लेबल इंवायरमेंट इंपेक्ट असेसमेंट अथॉरिटी (SEIAA) ने 14-18 सितम्बर 2021 को अपनी 90वीं बैठक में पर्यावरण स्वीकृति की अनुशंसा भी कर दी।

दबाव बनाकर ली गई पर्यावरण मंजूरी

रिपोर्ट के मुताबिक, 14 मार्च 2021 को अनगड़ा में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और गाँव के कुछ लोगों के बीच भूमि के पट्टा का एक समझौता हुआ। इसके बाद खनन के लिए मुख्यमंत्री ने 28 मई 2021 को तत्कालीन जिला खनन पदाधिकारी (DMO) को आवेदन दिया। 16 जून 2021 को DMO ने कुछ शर्तों के साथ खनन लीज की सैद्धांतिक मंजूरी दी। नौ सितंबर 2021 को मुख्यमंत्री ने पर्यावरण मंजूरी के लिए SEIAA को आवेदन दिया। इस पर 22 सितंबर को मंजूरी दे दी गई।

मनी लॉन्ड्रिंग की जाँच के दौरान ED को जानकारी मिली कि अनगड़ा में सीएम सोरेन द्वारा पत्थर खदान का पट्टा लेने के मामले में दबाव बनाकर पर्यावरण मंजूरी ली गई थी। मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) से जुड़े एक प्रभावशाली व्यक्ति ने राज्यस्तरीय पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (SEIAA) के अधिकारी को फोन कर स्वीकृति देने के लिए कहा था। जब जानकारी मिली कि आवेदक खुद मुख्यमंत्री ही हैं तो पर्यावरण मंजूरी दे दी गई।

सोरेन पर मनी लॉन्ड्रिंग का भी आरोप

सीएम सोरेने द्वारा खुद खनन पट्टा लेने का आरोप लगाने वाले याचिकाकर्ता शिवशंकर वर्मा ने मुख्यमंत्री पर मनी लॉन्ड्रिंग का भी आरोप लगाया था और इसकी जाँच कराने की माँग की थी। वर्मा की याचिका पर सुनवाई करते हुए झारखंड हाईकोर्ट ने ED को जाँच का आदेश दिया था। जाँच में रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज भी शामिल रही, जो 300 से अधिक कंपनियों की क्रेडिंशयल जाँच की।

रिपोर्ट के मुताबिक, जाँच के दायरे में आने वाली 28 कंपनियों में हेमंत सोरेन और उनके भाई बसंत सोरेन का पैसा लगा हुआ है। याचिकाकर्ता के मुताबिक इस शेल कंपनियों ने इस मामले में बड़ी भूमिका निभाई है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद ED यह जाँच करेगी कि इन कंपनियों ने पैसों का किस रूप में निवेश कर के कैसे फायदा कमाया है। इसी केस में बसंत सोरेन के महाराष्ट्र निवासी संबंधी सुरेश नागर की भूमिका की भी जाँच शामिल है।

बीजेपी के वरिष्ठ नेता ने आरोप लगाया था कि हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन ने झारखंड राज्य के कई जिलों में खुद को उसी संबंधित थाने का निवासी बताते हुए सैकड़ों एकड़ जमीनों को खरीदा। हेमंत सोरेन के मुताबिक, हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना मुर्मु सोरेन ओडिशा राज्य की आदिवासी वर्ग से आती हैं। उन्होंने साल 2009 में राँची के महत्वपूर्ण माने जाने वाले इलाके अरगोड़ा में कल्पना सोरेन ने 13 कट्टा, 14 छटाक और 17 कट्ठा व 8 छटाक आदिवासियों की जमीन को खरीदा था।

पूर्व सीएम रघुवर दास ने कल्पना सोरेन पर वित्तीय अनियमितता का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि उनके द्वारा 13 कट्ठा 14 छटाक जमीन को लेकर मामले हैं। रघुवर दास कहते हैं कि जिस वक्त इस जमीन को खरीदा गया था तो उस वक्त इसका सरकारी मूल्य 34 लाख 93 हजार रुपए दिखाया गया है, लेकिन इसको बेचने की कीमत केवल 4,16,000 रुपए बताई गई थी। जबकि, दूसरी डीड 17 कट्ठा 8 छटाक को लेकर है। क्रय के क्रम में 5,25,000 रुपए बताया गया है।

कोर्ट ने हेमंत सरकार को याद दिलाया राजधर्म

सीएम सोरेन उनके भाई बसंत सोरेन एवं करीबियों के शेल कंपनी में निवेश के मामले में सुनवाई के दौरान अदालत ने सरकार को राजधर्म याद दिलाया। हालाँकि, अदालत में खनन पट्टा और मनरेगा घोटाला से संबंधित मामले में सुनवाई नहीं की है। इस दौरान ईडी के अधिवक्ता तुषार मेहता ने कहा कि राज्य खनिज संपदाओं से भरा है और उसके रक्षक ही भक्षक बन गए हैं। ऐसे में जरूरी कार्रवाई हो। यह कई आपराधिक गतिविधियों का मुख्य कारण है।

ईडी ने कोर्ट में हलफनामा देकर साफ कहा है कि आईएएस पूजा सिंघल समेत कई लोगों के यहाँ हुई छापेमारी में ऐसे गोपनीय दस्‍तावेज हाथ लगे हैं, जिनसे भ्रष्‍टाचार के तार हेमंत सोरेन से जुड़े होने की पुष्टि हुई है। वहीं, झारखंड सरकार का बचाव कर रहे अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि ये आरोप राजनीति से प्रेरित हैं।

हेमंत सोरेन की संपत्ति 5 साल में दोगुनी और 10 साल में 11 गुनी हुई

झारखंड विधानसभा चुनाव के दौरान साल 2019 में साहेबगंज में बरहेट से पर्चा भरने के दौरान दिए गए शपथ पत्र में शपथ पत्र में अपनी कुल संपत्ति 8 करोड़ 11 लाख 14 हजार 388 रुपए बताई थी। वहीं, 2014 के विधानसभा चुनाव में अपनी कुल संपत्ति 3 करोड़ 50 लाख 76 हजार 527 रुपए बताई थी।

वहीं 2009 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने अपनी और पत्नी की कुल संपत्ति 73 लाख 57 हजार रुपए बताई थी। 2009 के विवरण के हिसाब से दस साल में हेमंत सोरेन की संपत्ति 11 गुना से अधिक हो गई। वहीं 2014 के हिसाब से 5 साल में इनकी संपत्ति दो गुना से अधिक हो गई। अब 2019 में इनकी चल-अचल संपत्ति बढ़कर 2 करोड़ 29 लाख 29 हजार 153 हो गई, वहीं उनकी पत्नी की चल-अचल संपत्ति 5 करोड़ 81 लाख 85 हजार 235 हो गई।

झारखंड में खुद को दोहरा रहा है इतिहास

ऊपर की पूरी कहानी कहानी पढ़ने के बाद स्पष्ट है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने ना सिर्फ खनन पट्टा अवैध तरीके से अपने नाम लिया, बल्कि उन्होंने अपने परिजनों और करीबियों को भी अनुचित लाभ दिया। इस अनुचित लाभ के लिए कई तरह की शेल कंपनियों का गठन किया गया और मनी लॉन्ड्रिंग की गई। मनरेगा जैसे घोटोले किए गए।

यह पहली बार नहीं है कि हेमंत सोरेन की सरकार भ्रष्टाचार के घेरे में है। इसके पहले शिबू सोरेन और मधु कोड़ा की सरकार भी भ्रष्टाचार में आकंठ लिप्त रही है और उन्हें कोर्ट की कार्रवाई का सामना करना पड़ा। सबसे बड़ी बात यह है कि इन सब मुख्यमंत्रियों के काल में कॉन्ग्रेस पार्टी सरकार की महत्वपूर्ण साझेदार रही है। कॉन्ग्रेस या तो सरकार में शामिल रही है या फिर सरकार को समर्थन दे रही होती है।

शिबू सोरेन के मुख्यमंत्रित्व काल में कई राजनेताओं और नौकरशाहों पर भ्रष्टाचार के छींटे पड़े। बाद में शिबू सोरेन खुद कोयला घोटाले में फँसे। जब झारखंड के मुख्यमंत्री मधु कोड़ा बने तब उन्होंने 4,000 करोड़ रुपए के हवाला कांड में जेल की हवा खाई।

हेमंत सोरेन की सरकार में एक बार फिर इतिहास दुहराता दिख रहा है। इस दौरान भाजपा का ही एक ऐसा शासनकाल रहा, जिसमें घोटाले का आरोप नहीं लगे। अब देखना है कि हेमंत सोरेन मामले में कोर्ट का क्या फैसला होता है।

जिस नेशनल लेवल शूटर की हत्या में गिरफ्तार हुई HC जज की बेटी, उससे ही था अफेयर: जिस पार्क में मिलने बुलाया वहीं मारी गई थी गोली

तारीख थी 20 सितंबर 2015। चंडीगढ़ के एक पार्क में गोलियाँ चली। राष्ट्रीय स्तर के एक शूटर की मौत हो गई। यह शूटर थे सुखमनप्रीत सिंह सिद्धू उर्फ सिप्पी सिद्धू। हत्या के इस मामले (Sippy Sidhu Murder Case) में करीब सात साल बाद कल्याणी सिंह नाम की एक महिला को गिरफ्तार किया गया है।

कल्याणी हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट की मौजूदा कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश सबीना की बेटी हैं। यह बात भी सामने आई है कि कल्याणी का सिप्पी से अफेयर चल रहा था। उसने सिप्पी को पार्क में मिलने के बहाने बुलाया था और उसकी हत्या करवा दी। 35 साल के सिद्धू कॉरपोरेट वकील भी थे और हत्या से दो दिन पहले ही कनाडा से लौटे थे।

CBI ने आरोपित कल्याणी सिंह की रिमांड के लिए IPC की धारा 167 के तहत दायर आवेदन में इसका खुलासा किया है। इसमें कहा गया है कि सिद्धू और कल्याणी रिश्ते में थे। दोनों शादी करना चाहते थे ,लेकिन सिद्धू के माता-पिता ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया था। इस बीच, सिद्धू ने कल्याणी की कुछ आपत्तिजनक तस्वीरें उसके माता-पिता और दोस्तों को लीक कर दीं, जिससे उसके परिवार को शर्मिंदगी उठानी पड़ी।

CBI के मुताबिक, इसके बाद कल्याणी ने सिद्धू को चंडीगढ़ के सेक्टर-27 के एक पार्क में मिलने के लिए बुलाया। यहीं उसने 20 सितंबर 2015 को एक अन्य हमलावर के साथ मिलकर गोली मार उसकी हत्या कर दी। सिप्पी को 12 बोर की बंदूक से 4 गोलियाँ मारी गई थी।

2016 में सीबीआई को ट्रांसफर किया गया केस

सिप्पी सिद्धू की हत्या के केस को जनवरी 2016 में CBI को ट्रांसफर किया गया था। जाँच के दौरान एजेंसी को इसमें किसी महिला की संलिप्तता का संदेह हुआ। इस संबंध में सुराग देने वाले को 5 लाख का इनाम देने की घोषणा सीबीआई ने सितंबर 2016 में की। इस संबंध में अखबार में प्रकाशित विज्ञापन में कहा गया था, “यह मानने का कारण है कि हत्या के समय एक महिला सिप्पी के हत्यारे के साथ थी। उक्त महिला को भी आगे आकर निर्दोष होने पर संपर्क का मौका दिया जा रहा है। अन्यथा मान लिया जाएगा कि वह अपराध में शामिल थी।”

फिर भी सुराग नहीं मिलने पर एजेंसी ने दिसंबर 2021 में इनाम राशि बढ़ाकर 10 लाख रुपए कर दी। बावजूद हाथ खाली ही रहे। फिर सीबीआई ने 2020 में कोर्ट में ‘अनट्रेस्ड रिपोर्ट’ दायर करते की जो खारिज कर दिया गया। 7 दिसंबर 2020 को अदालत से कल्याणी सिंह की भूमिका की जाँच की अनुमति माँगी गई। उसी साल 14 दिसंबर को इसकी अनुमति मिलने के बाद अब सीबीआई ने कल्याणी सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। कल्याणी सिंह चंडीगढ़ के सेक्टर-42 स्थित एक कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं।

चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी की वेबसाइट पर लगे मैप में जम्मू-कश्मीर का हिस्सा पाकिस्तान का दिखाया, नेटिजन्स की लताड़ के बाद एलुमिनी सेक्शन हटाया

चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी अपने पूर्व छात्रों के कारण विवादों में है। नेटिजन्स ने बुधवार (15 जून 2022) को यूनिवर्सिटी को जानकारी दी कि उनके एलुमनी सेक्शन (Alumni Section) में भारत का गलत नक्शा दिखता है। इसमें उन्होंने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) को पाक का हिस्सा बताया है। ट्विटर पर यह जानकारी सबसे पहले यूजर root3vil ने दी। उन्होंने पेज का एक स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए पूछा, “अरे चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी, क्या आप पीओके को भारत का हिस्सा नहीं मानते हैं?”

इसके बाद कई नेटिजन्स ने उनके पोस्ट पर प्रतिक्रिया व्यक्त की और उन छात्रों के खिलाफ कार्रवाई की माँग की। सुप्रीम कोर्ट के वकील शशांक शेखर झा ने पंजाब पुलिस को टैग करते हुए कहा, “प्रिय पंजाब पुलिस, कृपया भारत का अधूरा नक्शा अपनी वेबसाइट पर डालने और पाकिस्तान में लद्दाख और कश्मीर के कुछ हिस्सों को दिखाने के लिए चंडीगढ़ विश्वविद्यालय के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू करें।”

लेखक अरिन कुमार शुक्ला लिखते हैं, “देश में इस तरह के नक्शों का इस्तेमाल प्रतिबंधित होना चाहिए। यह न केवल भारत विरोधी है, बल्कि हमारे कश्मीरी भाइयों और बहनों की भावनाओं को भी आहत करता है।” शुक्ला ने अपने ट्वीट में गृह मंत्री अमित शाह, गृह मंत्रालय और पीएमओ को भी टैग किया।

नेटिजन दुर्गेश कुमार लाठ ने गृह मंत्री अमित शाह को टैग करते हुए कहा, “क्या इसे ठीक किया जा सकता है? ऐसा कई बार होता है, या तो भूल से या जानबूझ कर? कॉरपोरेट/शैक्षणिक संस्थानों/व्यक्तियों को सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए नक्शे का उपयोग करना चाहिए।”

ट्विटर यूजर श्रीनिवास ने कहा, “चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी शर्म करो! डीजीपी चंडीगढ़ पुलिस, गृह मंत्री अमित शाह, गृह मंत्रालय दोषियों पर सख्त और तत्काल कार्रवाई करें। चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी का बेहद गैर-जिम्मेदाराना रवैया इस देश की युवा पीढ़ी को बिगाड़ने के लिए जिम्मेदार है।”

मौके का फायदा उठाते हुए पाकिस्तानी यूजर्स इस पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करने लगे। पाकिस्तान में अलीगोगा नाम के एक ट्विटर यूजर ने कहा, “चंडीगढ़ विश्वविद्यालय भी जानता है कि कश्मीर पाकिस्तान का है।” हालाँकि, उसने अपने ट्वीट में गलत ट्विटर हैंडल को टैग किया।

पाकिस्तानी यूजर का ट्वीट। साभार: ट्विटर।

सोशल मीडिया पर फैले आक्रोश के बाद चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी ने एलुमनी सेक्शन (Alumni section) को हटा दिया है। नेटिजन्स द्वारा गलत नक्शे की जानकारी देने के बाद हमने इसकी सत्यता की पुष्टि की। ​हमने देखा कि विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट से (Alumni Section) इसे हटा दिया गया है, क्योंकि वेबसाइट का यह पेज अब ओपन नहीं हो रहा है।

चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी की वेबसाइट से एलुमनी सेक्शन को हटा दिया गया है। साभार: चंडीगढ़ विश्वविद्यालय की वेबसाइट

हालाँकि, पेज Archive.org पर उपलब्ध है। ट्विटर पर उपलब्ध स्क्रीनशॉट और आर्काइव पेज से यह स्पष्ट है कि विश्वविद्यालय ने भारत के गलत नक्शे का इस्तेमाल किया।

चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी ने एलुमनी सेक्शन अब हटा दिया है। साभार: Archive.org

बता दें कि चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी पंजाब में स्थित एक प्राइवेट यूनिवर्सिटी है। यह पंजाब यूनिवर्सिटी से किसी भी तरह से जुड़ी हुई नहीं है।

हिंदुओं का ‘स्वयंभू ठेकेदार’ बना संगीतकार विशाल ददलानी, मुस्लिमों से कहा- आपका दर्द हमारा दर्द: नुपूर शर्मा को धमकी, पत्थरबाजी का जिक्र तक नहीं किया

भारतीय जनता पार्टी (BJP) की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा (Nupur Sharma) के पैगंबर मोहम्मद पर बयान के बाद उन्हें इस्लामी कट्टरपंथियों की तरफ से लगातार धमकी मिल रही है। इस्लामी कट्टरपंथी लगातार नूपुर शर्मा का सिर तन से जुदा करने की माँग कर रहे हैं। 

इस बीच सिंगर और म्यूजिक कंपोजर विशाल ददलानी (Vishal Dadlani) ने ट्वीट कर भारतीय मुस्लिमों को विश्वास दिलाया है कि वो भी इस देश का हिस्सा हैं और उनका दर्द हमारा दर्द है। इसके अलावा उन्होंने कहा है कि वो देश की राजनीति पर शर्मिंदा हैं। 

विशाल ने लिखा, “मैं भारतीय मुसलमानों को बहुसंख्यक भारतीय हिंदुओं की ओर से ये कहना चाहता हूँ। आपको देखा और सुना जाता है, प्यार किया जाता है और सराहा भी जाता है। आपका दर्द हमारा दर्द है। आपकी देशभक्ति पर कोई सवाल नहीं है, आपकी पहचान भारत या किसी और के धर्म के लिए खतरा नहीं है। हम एक राष्ट्र, एक परिवार है।”

एक अन्य ट्वीट में विशाल ददलानी ने लिखा, “मैं सभी भारतीयों से ये भी कहना चाहता हूँ। मुझे भारतीय राजनीति की कुरूप प्रकृति के लिए वाकई में खेद है, जो हमें खुशी-खुशी छोटे-छोटे समूहों में बाँट देगी, जब तक कि हम अकेले खड़े नहीं हो जाते। ये सब निजी फायदे के लिए किया जा रहा है, लोगों के लिए नहीं। उन्हें जीतने ना दें।”

विशाल ददलानी के इस ट्वीट पर तमाम लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। कई लोगों ने उनकी खिंचाई भी की है।

संजय कुमार नाम के एक शख्स ने लिखा, “मुस्लिम शरीया का पालन करते हैं, यहाँ तक ​​कि हमारे लोकतांत्रिक व्यवस्था में भी। वे यहाँ केवल एक इरादे से रहते हैं। वह जिहाद करने के लिए गजवा ए हिंद के निर्माण के लिए रहते हैं। आप जैसे लोग उनके सपने को पूरा करने में उनकी मदद करते हैं। हमारी लड़ाई इस्लामवादी और आप जैसे तथाकथित सेक्युलर के साथ है।”

एक अन्य यूजर ने लिखा, “विशाल भैया हम सब एक हैं तो नूपुर दीदी से कब सॉरी बोलोगे मुस्लिम की तरफ से। उनके माफी माँगने के बाद भी रेप, मर्डर की धमकी मिल रही है रोज। कमलेश तिवारी के घरवालों से कब माफी माँगोगे।”

एक यूजर ने लिखा, “ये तेरी सोच है टकले, कुछ भी निजी लाभ लेने के लिए नहीं हो रहा है। हर फ्राइडे को ये नल्ले क्यूँ पत्थरबाजी करते हैं। किसने कहा है इन्हें।”

एक यूजर लिखता है, “दम है तो महा विकास अघाड़ी सरकार, बॉलीवुड खान माफिया, करण जौहर गैंग के खिलाफ एक ट्वीट करो। पता चलेगा कि फ्रीडम ऑफ स्पीच की क्या कीमत है।”

गौरतलब है कि नूपुर शर्मा द्वारा पैगंबर मुहम्मद के कथित अपमान के नाम पर भारत में जगह-जगह दंगे किए गए। इस दौरान दंगाइयों ने पुलिस पर हमला किया। तोड़फोड़, आगजनी और पथराव की कई गंभीर एवं चिंताजनक घटनाएँ भी सामने आईं। नूपुर शर्मा को हत्या और रेप की लगातार धमकी दी जा रही है।

‘जुमे पर जो रोके उस पर करो हमला’: प्रयागराज वाले जावेद पंप के घर से मिला पर्चा, फरार दंगाइयों ने सरेंडर नहीं किया तो घर की होगी कुर्की

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में 10 जून 2022 को जुमे पर हुई हिंसा के सुनियोजित होने को लेकर पुलिस को तगड़ा सुराग हाथ लगा है। रिपोर्टों के अनुसार हिंसा के मास्टरमाइंड जावेद पंप के घर से एक पर्चा मिला है। इसमें कथित तौर पर अटाला में बड़ी संख्या में जुटने और रास्ते में बाधक बनने वाले लोगों पर हमला करने की बात कही गई है।

रिपोर्ट के अनुसार पंप की घर की तलाशी के दौरान यह पर्चा मिला था। पर्चे को जाँच के लिए पुलिस ने सीज कर दिया है। SSP प्रयागराज अजय कुमार के मुताबिक, “जावेद पंप के घर से आधे पेज के कुछ फ़टे पर्चे में काफी आत्तिजनक बातें लिखी हुई हैं। हम जाँच कर रहे हैं कि कितने पर्चे किसको और कहाँ बाँटे गए हैं।” अमर उजाला के अनुसार इस पर्चे पर लिखा था, “सुनो साथियों, जुमे के दिन में दो बजे हम सबको मिलजुलकर अटाला पहुँचना होगा। जो भी अड़चन बनेगा, उस पर वार करना होगा। बाकी बातें हम मिलकर समझाएँगे। हमें अदालत पर भरोसा नहीं है।”

गौरतलब है कि जावेद पंप का करेली स्थित घर प्रयागराज विकास प्राधिकरण (पीडीए) ने 12 जून को बुलडोजर से ढहा दिया था। उससे पहले पंप के घर से अवैध हथियार और अरबी व पाकिस्तानी इस्लामी साहित्य बरामद होने की बात भी सामने आई थी। हालाँकि जावेद पंप की बेटी सुमैया ने पर्चे की बरामदगी को झूठ बताया है। उसने कहा है कि ये मेरे अब्बा को फँसाने की साजिश है और अगर कोई पर्चा मिला था उसी दिन क्यों नहीं बताया गया।

सरेंडर नहीं करने पर घर होंगे कुर्क

प्रयागराज SSP अजय कुमार ने जुमे की नमाज़ के बाद भड़की हिंसा के फरार आरोपितों जल्द से जल्द सरेंडर करने की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा, “10 जून को हुई घटना में 29 गंभीर धाराओं में केस दर्ज हुआ है। अब तक 92 लोग न्यायिक अभिरक्षा में भेजे जा चुके हैं। इसके अलावा लगभग 40 लोग बाद में जाँच के दौरान प्रकाश में आए हैं। वे अपने घरों को बंद कर फरार हैं। उनकी पुलिस तलाश कर रही है। यदि वे जल्द से जल्द पुलिस या अदालत के सामने हाजिर नहीं हुए तो उनके खिलाफ वारंट जारी किया जाएगा। साथ ही उनके घरों की कुर्की भी करवाई जाएगी।”

प्रयागराज पुलिस ने आरोपितों के पोस्टर छपवा कर सार्वजानिक स्थलों पर भी चिपकवा दिए हैं।

गौरतलब है कि प्रयागराज विकास प्राधिकरण (PDA) पथराव और हिंसा में शामिल 37 आरोपितों के बारे में भी जानकारी जुटा रहा है। यदि उनके मकान में नियमों की अनियमितता मिली वहाँ भी बुलडोजर चल सकता है।

ट्रक से आए-घर को फूँक दिया, 3 जिंदा जले- 1 को छत से फेंक मार डाला: सिख दंगों में 38 साल बाद कानपुर से 4 गिरफ्तार, योगी सरकार ने 2019 में बनाई थी SIT

पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की हत्या के बाद साल 1984 में देश में भड़के सिख विरोधी दंगों (Anti Sikh Riots) मे कई सिखों की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश के कानपुर (Kanpur) में भी हुए दंगों में 127 लोगों की मौत हो गई थी। उस घटना के 38 साल बाद बुधवार (15 जून 2022) को 4 आरोपितों को स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने गिरफ्तार कर लिया। इस मामले में कुल 96 आरोपितों की पहचान की गई थी, जिनमें से 22 की मौत हो चुकी है। बाकी के बचे 74 को न्याय के दायरे में लाया जाना है।

रिपोर्ट के मुताबिक, सिख दंगों के मामले में फाइनल रिपोर्ट सबमिट की जा चुकी थी, लेकिन कुछ सिख संगठनों की सक्रियता चलते मामला सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में गया। कोर्ट के आदेश के बाद मामले को दोबारा से खोला गया। इस मामले में फरवरी 2019 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सिख दंगों की जाँच के लिए UP सरकार ने एक SIT का गठन किया था। SIT के DIG बालेंदु भूषण सिंह के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए चारों आरोपितों का मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान दर्ज कराया जा चुका है।

अधिकारी के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए चारों आरोपितों की पहचान सफीउल्लाह (65), योगेंद्र सिंह (65), विजय नारायण सिंह (62) व अब्दुल रहमान (65) हैं। ये चारों पूर्व राज्यमंत्री शिवनाथ सिंह कुशवाहा के खास गुर्गे थे। शिवनाथ सिंह कुशवाहा के भतीजे राघवेंद्र सिंह कुशवाहा के साथ मिलकर ही ये सभी घाटमपुर से ट्रक के जरिए निराला नगर गए। वहाँ पर आरिपितों ने भूपेंद्र सिंह, रक्षपाल सिंह और मकान मालिक के बेटे सतपाल सिंह की बेरहमी से हत्या कर दी थी। इन आरोपितों ने पूरे घर को आग लगा दी थी, जिसमें तीन लोगों की जलकर मौत हो गई थी, जबकि एक को छत के नीचे फेंककर मार डाला था।

SIT की जाँच पूरी

SIT ने 11 मामलों की जाँच पूरी कर ली है। अब 74 में से 70 अन्य आरोपितों पर कार्रवाई होनी है। उल्लेखनीय है कि सिख दंगों में 20 ऐसे केसों को एसआईटी ने फिर से री-ओपेन किया था, जिसमें फाइनल रिपोर्ट लगा दी गई थी। बीजेपी नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को धन्यवाद कहा है।

मुस्लिम कर्मचारियों के विरोध में हिंदू ड्राइवरों ने ओढ़ी भगवा शॉल: कन्नड़ चैनल का दावा BMTC की जाँच में निकला झूठा

कर्नाटक में पिछले दिन हिजाब का मुद्दा काफी चर्चा में रहा। इसके बाद एक प्राइवेट कन्नड़ चैनल ने आरोप लगाया कि बैंगलोर मेट्रोपॉलिटन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (BMTC) के हिंदू ड्राइवरों ने मुस्लिम कर्मचारियों का विरोध करने के लिए भगवा शॉल ओढ़ रखा था। चैनल ने हाल ही में बीएमटीसी ड्राइवरों के मोंटाज दिखाते हुए जोर देकर कहा था कि कुछ हिंदू कर्मचारियों ने मुस्लिम सहयोगियों द्वारा काम के दौरान टोपी पहनने का विरोध भगवा रंग की शॉल पहनकर दर्ज कराया था। हालाँकि, BMTC ने इन आरोपों का खंडन किया और कहा कि विस्तृत जाँच के बाद पता चला कि न्यूज चैनल के दावे झूठे थे।

बीएमटीसी के एक अधिकारी ने TNM को बताया, “उन्होंने अलग-अलग क्लिपिंग का एक कोलाज दिखाया और फिर दावा किया कि हिंदू कर्मचारियों ने मुस्लिम कर्मचारियों के टोपी पहनने का विरोध करने के लिए भगवा शॉल ओढ़ रखी थी। यह बिल्कुल भी सच नहीं है। जिस ड्राइवर से उन्होंने बात की, उसके पास भगवा रंग का कपड़ा था और जब रिपोर्टर ने उससे इसके बारे में पूछा, तो ड्राइवर ने जवाब दिया कि वह इसका इस्तेमाल अपना चेहरा पोंछने के लिए कर रहा है। लेकिन उन्होंने आगे बढ़कर इसे मुस्लिम कर्मचारियों के विरोध के रूप में रिपोर्ट किया। यह खबर फर्जी है।”

उन्होंने आगे कहा, “मैं मीडिया से अनुरोध करता हूँ कि इस खबर को तूल न दें। बीएमटीसी का पुलिस विभाग की तरह एक यूनिफॉर्म कोड है। कर्मचारियों को समान यूनिफॉर्म नियम का उसी तरह पालन करना होगा जैसे वे इन दिनों कर रहे हैं। उन्हें अनुशासित रहना होगा। इसमें कोई संशय नहीं है।”

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया था कि भगवा का समर्थन करने वाले कर्मचारियों ने एक संगठन भी बनाया था। इसमें करीब 1,500 रजिस्टर्ड सदस्य थे। बीएमटीसी का एक यूनिफॉर्म है जिसे उसके ड्राइवरों और कंडक्टर और अन्य कर्मचारी पहनते हैं।

बीएमटीसी के अनुसार, उनमें से कुछ कर्मचारी यूनिफॉर्म के साथ जालीदार टोपी (Skull Cap) पहनते हैं। यह अब कई वर्षों से चलन में है। टीएनएम से बात करते हुए, केएसआरटीसी स्टाफ एंड वर्कर्स फेडरेशन के अध्यक्ष एचवी अनंत सुब्बाराव ने बताया कि उन्हें भी घटना के बारे में मीडिया रिपोर्टों से ही पता चला था। हालाँकि, जब उन्होंने इसके बारे में कर्मचारियों से पूछा तो उन्हें कोई शिकायत नहीं मिली। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटना राज्य में कहीं नहीं हुई है।

नूपुर शर्मा के समर्थन में पोस्ट करने पर तमिलनाडु में ABVP कार्यकर्ता गिरफ्तार: कोयंबटूर पुलिस ने कहा- दो समुदायों को बीच नफरत बढ़ाने वाला

BJP की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा (Nupur Sharma) के समर्थन में सोशल मीडिया पोस्ट करने के कारण तमिलनाडु की कोयंबटूर (Coimbatore, Tamil Nadu) पुलिस ने मंगलवार (14 जून 2022) को एक ABVP कार्यकर्ता को गिरफ्तार कर लिया। कोयंबटूर के बाहरी इलाके सेनानूर से गिरफ्तार किए गए एबीवीपी कार्यकर्ता की पहचान 24 वर्षीय कार्ति के रूप में हुई है। 

पुलिस ने कहा कि कार्ति ने पिछले महीने एक टीवी न्यूज डिबेट के दौरान नूपुर शर्मा द्वारा इस्लाम के पैगंबर मुहम्मद के बारे में की गई आपत्तिजनक टिप्पणियों का वीडियो शेयर किया था। वीडियो को शेयर करते हुए उन्होंने लिखा था, “मैं इसे रोज कहूँगा। नूपुर शर्मा ने वही कहा जो लिखा हुआ है। उन्होंने क्या गलत कहा?”

कोयंबटूर पुलिस की साइबर क्राइम यूनिट ने कार्ति के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 153ए और आईटी एक्ट की धारा 67 के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस का कहना है कि इस पोस्ट से दो समुदायों के बीच दुश्मनी बढ़ सकती है, इसलिए केस दर्ज किया गया। कार्ति के सोशल मीडिया पोस्ट को भी डिलीट कर दिया गया है।

कार्ति को गिरफ्तार करने के बाद उन्हें न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया और फिर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। कई दक्षिणपंथी संगठनों ने कार्ति को गिरफ्तार करने के लिए तमिलनाडु सरकार पर सवाल उठाया है। इससे पहले नूपुर शर्मा के समर्थन में पोस्ट करने के आरोप में साद अशफाक अंसारी नाम के एक 19 वर्षीय इंजीनियरिंग छात्र को महाराष्ट्र के भिवंडी में पुलिस ने गिरफ्तार किया था। 

गौरतलब है कि नूपुर शर्मा द्वारा पैगंबर के कथित अपमान के नाम पर भारत में जगह-जगह दंगे किए गए। इस दौरान दंगाइयों ने पुलिस पर हमला किया। तोड़फोड़, आगजनी और पथराव की कई गंभीर एवं चिंताजनक घटनाएँ भी सामने आईं।

रेनबो कलर्स के खिलौने, LGBT फ्लैग वाले कपड़े सऊदी अरब कर रहा जब्त, कहा- ये रंग बच्चों को जहरीले संदेश देते हैं, समलैंगिकता को मिलता है बढ़ावा

सऊदी अरब (Saudi Arabia) में समलैंगिकता गैरकानूनी है। इसके तहत अधिकारियों ने राजधानी रियाद में रेनबो कलर्स के खिलौने और एलजीबीटी फ्लैग जैसे दिखने वाले कपड़ों को दुकानों से जब्त कर लिया है। स्थानीय मीडिया के मुताबिक, अधिकारी समलैंगिकता को बढ़ावा देने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर रहे हैं, जिसके चलते उन्होंने दुकानों से रेनबो कलर्स के खिलौने और कपड़े जब्त किए हैं।

सऊदी अरब के न्यूज चैनल अल-एखबरिया (Al-Ekhbariya News Channel) की रिपोर्ट के अनुसार, जब्त किए गए सामान में रेनबो कलर की स्कर्ट, टोपी और पेंसिल हैं। इनमें ज्यादातर सामान छोटे बच्चों के खेलने का है।

जानकारी के मुताबिक वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने रियाद के अलग-अलग क्षेत्रों की दुकानों में जाँच अभियान चलाने के आदेश दिए हैं। अभियान से जुड़े वाणिज्य मंत्रालय के एक अधिकारी का कहना है, “हम उन लोगो और डिजाइन का पता लगा रहे हैं, जो इस्लाम विरोधी, यौन उत्पीड़न, युवा पीढ़ी को निशाना बनाने वाले और समलैंगिकता को बढ़ावा देने के लिए प्रयोग में लाए जा रहे हैं।”

रेनबो फ्लैग की ओर इशारा करते हुए एक पत्रकार कहता है, “एलजीबीटी का फ्लैग रियाद के बाजारों में उपलब्ध है।” रिपोर्ट में कहा गया है कि ये कलर बच्चों को ‘Poisoned Message’ भेजते हैं।

बता दें कि सऊदी अरब में समलैंगिक रिश्ते बनाना इस्लामी शरिया कानून के तहत बहुत बड़ा अपराध है। सऊदी अरब के अलावा कतर, सुडान, ईरान, यमन में समलैंगिक रिश्ता बनाने के लिए मौत की सजा दी जाती है।

गौरतलब है कि पिछले साल दिसंबर में कतर ने अपने यहाँ बच्चों के कुछ खिलौनों को प्रतिबंधित कर दिया था। इसकी वजह इनका रंग बताया गया था, जो कथित तौर पर इस्लामी मूल्यों के खिलाफ हैं। उस वक्त रंगे बिरंगे खिलौनों को कतर की दुकानों से जब्त किया गया था। देश के वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा था कि उन्हें रंग-बिरंगे खिलौनों पर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन रेनबो कलर्स के कुछ खिलौने LGBTQ फ्लैग जैसे दिखते हैं। इसलिए उन खिलौनों को बैन किया गया है।