Home Blog Page 2726

नेपाल बिना तो हमारे राम भी अधूरे हैं: प्रधानमंत्री मोदी ने ‘बुद्ध की धरती’ पर समझाई भारत से दोस्ती की अहमियत, कहा- यही मानवता के हित में है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर 16 मई 2022 (सोमवार) को नेपाल की यात्रा पर हैं। इस दौरान नेपाल के प्रधानमंत्री शेरबहादुर देउबा ने उनका लुम्बिनी एयरपोर्ट पर स्वागत किया। इस अवसर पर मोदी ने सभी को बुद्ध पूर्णिमा की शुभकामना देते हुए मायदेवी मंदिर के दर्शन किए।

दर्शन के बाद नरेंद्र मोदी ने बुद्ध पूर्णिमा के मौके पर लुम्बिनी में आयोजित एक कार्यक्रम में लोगों को सम्बोधित किया। पीएम मोदी ने भारत-नेपाल के बीच बढ़ते दोस्ताना राजनयिक संबंधों के दोनों देशों के बीच धार्मिक रिश्तों को भी सामने रखा। पीएम ने कहा कि भगवान श्रीराम का मंदिर भारत में बन रहा है जिसकी ख़ुशी नेपाल के नागरिकों को है। नेपाल के बिना हमारे राम भी अधूरे हैं।

मोदी ने आगे कहा, “नेपाल में लुम्बिनी म्यूज़ियम का निर्माण भी दोनों देशों के साझा सहयोग का उदाहरण है। और आज हमने लुम्बिनी बुद्धिस्ट यूनिवर्सिटी में डॉ अम्बेडकर चेयर ऒंन बुद्धिस्ट स्टडीज स्थापित करने का भी निर्णय लिया है। मेरा जन्मस्थान गुजरात का वडनगर सदियों पहले बौद्ध शिक्षा का बहुत बड़ा केंद्र था। वहाँ आज भी वहां प्राचीन अवशेष निकल रहे हैं जिनके संरक्षण का काम जारी है।”

नरेंद्र मोदी ने बुद्ध के जीवन पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बुद्ध के संदेशो में जीवन, ज्ञान और निर्वाण तीनों का समावेश बताया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि जिस हिसाब से आज दुनिया के हालत बन रहे हैं, उनमें भारत-नेपाल की मित्रता मानवता के लिए काम करेगी।

पेशावर में फिर सिखों पर हमला: दो पगड़ीधारियों को दिनदहाड़े दुकान में घुसकर मारी गई गोली, शहर में बचे हैं अब सिर्फ 500 ‘अल्पसंख्यक’ परिवार

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के पेशावर शहर में रविवार (15 मई, 2022) को दो सिखों की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई। मृतकों की पहचान दुकानदार रंजीत सिंह (42) और कुलजीत सिंह (38) के रूप में की गई है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, वे सरबंद इलाके के बट्टा ताल चौक पर अपनी दुकानों पर बैठे थे, तभी दो अज्ञात लोग मोटरसाइकिल पर आए और उन पर गोलियों चला दी।

पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (PSGPC) के सदस्य सतवंत सिंह ने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “यह टार्गेटेड हत्याओं का मामला प्रतीत होता है। दोनों पगड़ीधारी सिख थे जो अपनी दुकानों पर बैठे थे। हत्यारे बाइक पर आए और फायरिंग करने लगे।”

रिपोर्ट के अनुसार, पेशावर में पिछले आठ महीने में अल्पसंख्यक सिख समुदाय के खिलाफ यह दूसरी घटना है। पिछले साल सितंबर में, पेशावर में एक सिख दुकानदार सतवंत सिंह की उनके पारम्परिक दवाखाने में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड में इस्लामिक स्टेट के अफगानिस्तान मॉड्यूल इस्लामिक स्टेट खुरासान ने जिम्मेदारी ली थी।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, रविवार को हुई हत्याओं के बाद पेशावर में स्थानीय सिख समुदाय ने ग्रांड ट्रंक रोड को जाम कर दिया और सरकार से न्याय और सुरक्षा की माँग को लेकर प्रदर्शन मार्च निकाला। उन्होंने दोनों मृतकों के परिवारों को उचित मुआवजा देने की भी माँग की।

द इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए, एक स्थानीय गुरुद्वारा सेवादार एवं शिक्षक, बलबीर सिंह ने कहा, “बस बहुत हो गया और अब पेशावर में बसे स्थानीय सिख समुदाय के पास इस तरह की टार्गेटेड हत्याओं को सहन करने के लिए धैर्य नहीं बचा है।”

बलबीर ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि पेशावर में लगभग 500 सिख परिवार बसे हुए थे जो ज्यादातर मसाले, किराना और दवाओं के दुकान चलाते हैं।” उन्होंने आगे अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा, “पेशावर में यहाँ किसी भी सिख परिवार की किसी से कोई व्यक्तिगत दुश्मनी या द्वेष नहीं है। हम सभी गरीब लोग हैं जो रोज सुबह काम पर जाते हैं लेकिन हम और हमारा परिवार इसी डर में रहते हैं कि शाम को हम जिंदा घर लौटेंगे या नहीं। हत्यारे आते हैं, हमारी दुकानों में घुस जाते हैं, हमारे सिर पर बंदूकें रखते हैं और बस गोली मार देते हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “यहाँ कानून व्यवस्था का कोई डर नहीं है। सिखों को सिर्फ इसलिए गोली मार दी जाती है क्योंकि वे धार्मिक अल्पसंख्यक हैं। सिखों का यह उत्पीड़न बंद होना चाहिए। पाकिस्तान में रहने वाला प्रत्येक सिख अपने देश से बहुत प्यार करता है, हमें पाकिस्तानी होने पर गर्व है लेकिन फिर भी हमारे लोगों को हर दूसरे दिन बिना किसी डर के गोली मार दी जा रही है। हमें पाकिस्तान से मोहब्बत है पर हम यहाँ अमन से रहना चाहते हैं।”

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (PSGPC) के अध्यक्ष, अमीर सिंह ने भी कहा कि पाकिस्तान में सिर्फ 15,000-20,000 सिख बचे हैं, जिनमें से लगभग 500 परिवार अकेले पेशावर में रहते हैं।

उन्होंने कहा, “हमारे दोनों भाई जिनकी आज हत्या कर दी गई है, वे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से थे और किराने की छोटी-छोटी दुकानें चलाकर अपनी आजीविका चलाते थे। वे अपनी दुकानों पर बैठे थे कि तभी मोटरसाइकिल पर सवार दो लोगों ने अंदर घुसकर उनके सिर में गोली मार दी। पाकिस्तान हमारी मातृभूमि है, हर किसी की तरह हम भी अपने देश से प्यार करते हैं।”

वहीं रिपोर्ट के अनुसार कहा जा रहा है कि स्थानीय सिख समुदाय के सदस्यों ने नाम न छापने का अनुरोध करते हुए कहा कि 2014 के बाद से खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में कम से कम 10 ऐसी घटनाएँ हुई हैं जब अज्ञात आरोपितों ने आकर सिखों को निशाना बनाया, जबकि उनमें से कुछ घायल हो गए, वहीं कई अन्य की जान चली गई।

उन्होंने आगे इस मामले में बात करते हुए कहा, “2016 में डॉ सोरन सिंह, 2018 में चरणजीत सिंह, 2020 में रविंदर सिंह और 2021 में सतवंत सिंह… ये लिस्ट बहुत लम्बी है। सिख अल्पसंख्यक समूह के सदस्यों को पाकिस्तान में सताया जा रहा है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही है और उन्हें कोई डर नहीं है।”

ज्ञानवापी पर ‘शांति और सौहार्दता’ की दलील लेकर सुप्रीम कोर्ट भागा मुस्लिम पक्ष, जस्टिस चंद्रचूड़ की बेंच करेगी सुनवाई: कार्यवाही रोकने की माँग

उत्तर प्रदेश के वाराणसी (Varanasi) के विवादित ज्ञानवापी ढाँचे का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुँच गया है। अदालत के समक्ष अंजुमन इंतेज़ामिया मस्जिद प्रबंधन समिति (Anjuman Intezamia Masajid Management Committee) ने कुछ हिंदू भक्तों की याचिका पर वाराणसी की एक अदालत द्वारा ज्ञानवापी विवादित ढाँचे के सर्वेक्षण के आदेश को चुनौती देते हुए इसे ‘सांप्रदायिक सौहार्द और शांति बिगाड़ने का प्रयास और उपासना स्थल अधिनियम का उल्लंघन’ बताया है। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की बेंच इस मामले की सुनवाई करेगी।

बता दें कि वाराणसी कोर्ट ने ज्ञानवापी ढाँचे का सर्वेक्षण कार्य जारी रखने का आदेश दिया था। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने भी वाराणसी कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था। ऐसे में मुस्लिम पक्ष द्वारा इलाहाबाद हाई कोर्ट के हालिया आदेश को चुनौती देते हुए वर्तमान में विशेष याचिका दायर की गई। हिंदू भक्तों और अंजुमन इंतेज़ामिया मस्जिद की दलीलों पर 1991 के बाद से वाराणसी सिविल कोर्ट और इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा कई आदेश पारित किए जाने के बाद अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुँच गया है।

लाइव लॉ के मुताबिक, याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट में तर्क दिया कि हाई कोर्ट यह ध्यान देने में विफल रहा है कि ज्ञानवापी के सर्वेक्षण की माँग करने वाले प्रतिवादियों के आवेदन को हाई कोर्ट की एक समन्वय पीठ द्वारा दायर किया गया था। इसके अलावा, यह सांप्रदायिक शांति और सद्भाव को बिगाड़ने का एक प्रयास है और उपासना स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 का उल्लंघन है। मालूम हो कि 1998 में अंजुमन इंतेज़ामिया द्वारा दायर याचिका को लेकर एक आदेश पारित किया गया था, जिसमें विवादित ढाँचे की सुनवाई पर अंतरिम रोक लगा दी गई थी। वहीं हिन्दू भक्तों का इस मामले को लेकर कहना था विवादित स्थान स्वयंभू भगवान विशेश्वर का निवास है और उसे अन्य धर्मों के लिए पूजा स्थल नहीं बनाया जा सकता है।

वर्तमान में यह विवाद वाराणसी में उस भूमि से संबंधित है, जहाँ ज्ञानवापी विवादित ढाँचा स्थित है। यह मामला 1991 से अदालतों में है। 1991 में काशी विश्वनाथ मंदिर के भक्तों ने यह आरोप लगाते हुए एक याचिका दायर की थी। इसमें उन्होंने कहा था कि इस ज्ञानवापी ढाँचे का निर्माण मुगल बादशाह औरंगजेब द्वारा भगवान विश्वेश्वर के मंदिर को तोड़ने के बाद किया गया था।

जानें क्या है उपासना स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम 1991

उपासना स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम 1991 देश के प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव की कॉन्ग्रेस सरकार के समय बनाया गया था। इस कानून के अनुसार, 15 अगस्‍त 1947 से पहले मौजूद किसी भी धर्म की उपासना स्‍थल को किसी दूसरे धर्म के उपासना स्‍थल में नहीं बदला जा सकता। अगर कोई ऐसा करने की कोश‍िश करता है तो उसे जेल भी हो सकती है। मतलब 15 अगस्‍त 1947 को जो जहां था, उसे वहीं का माना जाएगा।

गौरतलब है कि वाराणसी में ज्ञानवापी का सर्वे पूरा किया जा चुका है। इस दौरान हिन्दू पक्ष ने शिवलिंग भी मिलने का दावा किया है। यह शिवलिंग कुएँ में मिला था। इस दौरान दीवारों पर हिन्दू मंदिर के अवशेष दिखाई देने का भी दावा किया गया है। यह जानकारी 16 मई 2022 (सोमवार) को दी गई है। वाराणसी के DM के मुताबिक सर्वे रिपोर्ट कोर्ट में 17 मई 2022 (मंगलवार) को पेश की जाएगी।

जहाँ पढ़ी जाती है नमाज, वहाँ ॐ का चिह्न: सर्वे टीम के मेंबर का बड़ा खुलासा – ज्ञानवापी के इंच-इंच पर हिन्दू प्रतीक, संस्कृत श्लोक, खंभों पर मूर्तियाँ

उत्तर प्रदेश के वाराणसी (Varanasi, Uttar Pradesh) में स्थित ज्ञानवापी विवादित ढाँचे (Gyanvapi Controversial Structure) में तीन दिवसीय वीडियाग्राफिक सर्वे का काम सोमवार (16 मई 2022) को पूरा हो गया। सर्वे पूरा होने के बाद हिंदू पक्ष के चेहरे पर संतोष और उमंग के भाव नजर आए। जाहिर सी बात है कि जिस उम्मीद को लेकर और जिस खोज में वे वहाँ पहुँचे थे, उन्हें वहाँ दिखा है। हिंदू पक्ष का कहना है कि ये तो ऊपरी तौर पर सर्वे था, वे अब 35 फीट ऊँचे मलबे की सर्वे की माँग भी करेंगे। उनका कहना है कि शायद उनमें उन्हें देवताओं की प्रतिमाएँ या काशी विश्वनाथ की असली ज्योतिर्लिंग मिल जाए।

सर्वे टीम में शामिल लोगों का कहना है कि संस्कृत श्लोक, दीया रखने की जगह, शिवलिंग, स्वास्तिक, प्राचीन शिलाएँ, कमल के फूल, मूर्तियाँ, सर्प, स्वान सहित तमाम तरह के साक्ष्य मिले हैं। उनका कहना है कि ये साक्ष्य विवादित ढाँचे के मंदिर होने के दावे को पुख्ता करेगा। इसके अलावा, हिंदू पक्ष के वकील विष्णु जैन ने परिसर के अंदर स्थित कुएँ में भी शिवलिंग मिला है। नंदी के सामने बने कुएँ में वाटर रेजिस्टेंस कैमरे डालकर वहाँ का सर्वे किया गया।

हिंदू पक्ष का कहना है कि उन्हें जो सबसे बड़ी चीज हासिल हुई है, वह है भगवान भोलेनाथ का शिवलिंग। 12 फीट ऊँचा और 8 इंच के परिधि वाला यह शिवलिंग वजूखाने में मिला है। यह इस शिवलिंग की वास्तविक आकार के बारे में कोई भी स्पष्ट नहीं है। यह शिवलिंग कम से कम तीन फीट गहरा बताया जा रहा है। यहाँ एक तालाब को वजूखाने के रूप में इस्तेमाल किया करते हैं मुस्लिम। नमाज पढ़ने से पहले वे इसमें हाथ-पैर धोखे हैं और कुल्ला करते हैं। तालाब रूपी वजूखाने का जब पानी निकाला गया तो, यहाँ शिवलिंग निकलकर बाहर आ गया।

बताया जा रहा है कि सर्वे के दौरान जब तालाब से पानी निकाला गया और शिवलिंग प्रकट हुआ, तब हर-हर महादेव के नारे लगने लगे। लोग भाव-विह्वल होकर नाचने तक लगे। लोगों ने कहा कि जो नंदी बाहर सदियों से जिसकी प्रतीक्षा कर रहा है, उसे उसका बाबा मिल गए। बता दें कि शिव मंदिर के बाहर उनके वाहन नंदी वृषभ की मूर्ति लगी रहती है। काशी विश्वनाथ की इस मंदिर में भी नंदी की विशाल मूर्ति है, लेकिन मंदिर विध्वंस के बाद उसकी मस्जिद बना दी गई और उसके पश्चिमी दीवार के पास नंदी की मूर्ति आज भी वैसी ही है।

सर्वे टीम के सदस्य आरपी सिंह ने इंडिया टीवी को बताया, वहाँ मूर्तियाँ, कलश, मंदिर के ऊपर बने कलश आदि कई सारे सबूत मिले हैं। तहखानों के खंभों पर मूर्तियाँ मिली हैं। इन खंभों पर स्वास्तिक, ऊँ, कमल जैसे हिंदुओं के प्रतीक चिह्न मिले हैं। उन्होंने कहा कि ये चिह्न वहाँ इंच-इंच पर मौजूद है। उन्होंने कहा कि वर्तमान मस्जिद के तीन गुंबद दिखते हैं, लेकिन वे गुंबद के ऊपर बने गुंबद हैं। मस्जिद के गुंबद के 6-7 फीट नीचे भी गुंबद है, जो शंकु के आकार के हैं, यानी मंदिर के गुंबद हैं। मस्जिद के गुंबद तक पहुँचने के लिए बेहद संकरी सीढ़ियाँ बनीं हैं और वहाँ झरोखे हैं। झरोखे से देखने पर मस्जिद के नीचे मंदिर की असली गुंबद दिखती है। टीम ने इनकी भी वीडियोग्राफी की है।

आरपी सिंह ने कहा कि विवादित ढाँचे में जहाँ नमाज पढ़ा जाता है, वहाँ ऊँ के निशान हैं, त्रिशूल के निशान हैं। संस्कृत के श्लोक लिखे हुए हैं। उन्होंने कहा कि तहखाना पुराने हिंदू वास्तुकला के अनुसार पत्थरों पर बना है। वह अभी भी उतना ही मजबूत है, लेकिन जीर्ण-शीर्ण हालत में पहुँचा हुआ दिख रहा है।

काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत डॉ. कुलपति ने कहा कि ज्ञानवापी विवादित ढाँचे में जिसे तहखाना बताया जा रहा है, वह असल में मंदिर मंडपम है। उन्होंने बताया कि जो शिवलिंग सामने आया है, वह हरा पन्ना का बना शिवलिंग है। इस शिवलिंग को राजा टोडरमल ने स्थापित करवाया था। डॉ. कुलपति ने बताया कि 90 के दशक में वाराणसी के तत्कालीन कलेक्टर सौरभचंद्र श्रीवास्तव ने जब तहखाने में ताला बंद कराया था तो उस समय भी अंदर की फोटोग्राफी हुई थी, जिसमें वह शामिल थे। उस समय उन्होंने देखा था कि अंदर नंदी के ठीक सामने ही शिवलिंग है।

दैनिक भास्कर के अनुसार, साल 1868 में रेव एमए शेरिंग द्वारा लिखित ‘द सेक्रेड सिटी ऑफ हिंदू’ किताब में ज्ञानवापी विवादित ढाँचे नीचे चारों कोनों पर मंडपम की बात कही गई है। इनके नाम हैं- ज्ञान मंडपम, श्रृंगार मंडपम, ऐश्वर्य मंडपम और मुक्ति मंडपम। वहीं, लेखक अल्टेयर ने इन मंडपम की साइज 16-16 फीट और गोलंबर की ऊँचाई 128 फीट बताई है।

इस्लाम कबूलो, वरना जेल जाओ: बंगाल की हिंदू महिलाओं ने इंस्पेक्टर पर लगाया ‘धर्मांतरण के लिए दबाव’ का आरोप, पुलिस ने कहा- झूठ है ये

पश्चिम बंगाल में हिन्दू महिलाओं के एक समूह ने एक पुलिस इंस्पेक्टर पर धर्मान्तरण का दबाव बनाने का आरोप लगाया है। आरोपित पुलिस इंस्पेक्टर थाना प्रभारी के पद कर कार्यरत है। घटना मालदा जिले के कालीचक बाजार की है। यह घटना भाजपा की महिला नेत्री के एक वीडियो वायरल होने के बाद सामने आई है। इस घटना के विरोध में प्रदर्शन भी किया गया है। वहीं पुलिस ने इन आरोपों को गलत बताया है।

इस विरोध प्रदर्शन में इंग्लिश बाजार इलाके में पोस्ट ऑफिस के पास कई पोस्टर लगे दिखाई दे रहे हैं। पोस्टरों में पुलिस अधिकारी पर धर्मान्तरण का दबाव बनाने का आरोप लगाते हुए धर्म परिवर्तन न करने और संघर्ष करते रहने का ऐलान किया गया है। भाजपा महिला नेत्री के मुताबिक यह प्रदर्शन 3 महिलाओं द्वारा आयोजित हुआ था।

भाजपा नेत्री ने इन महिलाओं को सैल्यूट किया है। बताया जा रहा है कि उनके पतियों को कैद कर लिया गया है। महिला नेत्री द्वारा यह भी कहा गया कि हम लोग इन पीड़ितों पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। महिला नेत्री ने कहा, “उनका संघर्ष धर्म परिवर्तन न करने को ले कर है जबकि उन पर भारी दबाव बनाया जा रहा है। यह एक बहदुरी की पहचान है।” इस दौरान वीडियो में कुछ भगवा पोस्टर भी दिखाई दे रहे हैं। उन भगवा पोस्टरों के पीछे 3 प्रदर्शनकारी महिलाएँ दिखाई दे रही हैं।

भाजपा नेत्री ने पहले बैनर को दिखाया जिसमें उनके मुताबिक लिखा है, “कालियाचक थाने के प्रभारी इंस्पेक्टर ने हमें इस्लाम कबूल करने के लिए कहा है। लेकिन हम मुस्लिम नहीं बनेंगे। वो हम पर तमाम तरह के दबाव डाल रहे हैं।” वहीं दूसरे बैनर में लिखा है, “अगर हम उनकी बात नहीं मानते हैं तो हमें लगातार परेशान किया जाएगा और हम गिरफ्तार होते रहेंगे।” इसी वीडियो के साथ भाजपा नेत्री ने कहा, “हमें डर है कि जल्दी ही बंगाल बांग्लादेश न बन जाए। सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस ने घुसपैठी बांग्लादेशी और रोहिंग्याओ को खुली छूट दे रखी है। अब हम सभी को एकजुट होना पड़ेगा। यह किसी अकेले की लड़ाई नहीं है।”

भाजपा ने की पश्चिम बंगाल में हिन्दुओं के सुरक्षा की माँग

इस घटना की निंदा करते हुए पश्चिम बंगाल भाजपा प्रमुख सुकांता मजूमदार ने कहा, “कानून का रक्षक ही गरीब हिन्दुओं पर इस्लाम कबूलने का दबाव बना रहा है। अब यह राज्य सरकार की जिम्मेदारी है कि वो हिन्दुओं के धार्मिक अधिकारों के स्वतंत्रता और हिन्दुओं की रक्षा करे। पीड़ित परिवार की शिकायत को गंभीरता से लिया जाए और आरोपित पुलिसकर्मी को बर्खास्त किया जाए। यदि ऐसा न हुआ तो भाजपा सड़कों पर उतर कर आंदोलन करेगी।” भाजपा बंगाल ने भी अपने ट्विटर हैंडल से इन घटना को शेयर किया है।

मेघालय के पूर्व राज्यपाल तथागत रॉय ने भी इस घटना पर ट्वीट करते हुए लिखा कि बंगाली हिन्दू समुदाय अपने खिलाफ किए गए अत्याचारों को बड़ी आसानी से भूल जाता है।

पुलिस ने आरोपों से किया इंकार

वहीं इन आरोपों को मालदा पुलिस ने गलत बताया है। मालदा पुलिस के मुताबिक, “कालियाचक थाने में 31 जनवरी 2022 तक इंस्पेक्टर मदन मोहन रॉय प्रभारी रहे और अभी वहाँ पर इंस्पेक्टर उदय शंकर घोष की पोस्टिंग है। उन्होने पीड़ित परिवार का हमेशा कानूनी तौर पर साथ दिया और सहयोग किया है।”

पुलिस के मुताबिक, “यह मामला नवम्बर 2021 से शुरू हुआ। तब दोनों भाईयों को SDO कोर्ट में पेश किया गया था। बाद में उनमें से एक के कोर्ट में बयान भी दर्ज हुए थे। कोर्ट में दोनों ने अपनी मर्जी से बिना किसी दबाव के धर्म परिवर्तन की बात कही थी। तब से इस केस में कोई शिकायत नहीं मिली है। अगर मामले में शिकायत मिलती है तो आगे की नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।”

जिस कब्र पर कुत्ता भी पेशाब न करे… ओवैसी के बाद श्रीनगर के मेयर जुनैद ने औरंगजेब के लिए की दुआ: भड़के यूजर्स ने कहा- ऐसे लोग हैं तभी कश्मीर आतंकवाद मुक्त नहीं होता

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) नेता अकबरुद्दीन ओवैसी के बाद श्रीनगर के मेयर जुनैद अजीम मट्टू ने मुगल आक्रांता औरंगजेब के प्रति अपना प्रेम जगजाहिर किया है। जुनैद ने महाराष्ट्र के पूर्व सीएम देवेंद्र फडणवीस के उस बयान पर ट्वीट किया जिसमें उन्होंने कहा था कि औरंगजेब की कब्र पर कुत्ता भी नहीं पेशाब करेगा।

जुनैद मट्टू ने भाजपा नेता फडणवीस के ट्वीट पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “हाफिज-ए-कुरान, शहंशाह हजरत मुही-उद-दीन मुहम्मद औरंगजेब और उनकी कब्र पर अल्लाह की रहमो करम हो।”

गौरतलब है कि ओवैसी द्वारा औरंगजेब की कब्र पर फातिहा पढ़ने के बाद बीजेपी नेता फडणवीस ने महाराष्ट्र सरकार पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा था, “ओवैसी औरंगजेब की कब्र पर जाता है और माथा टेकता है, और तुम (राज्य सरकार) देखते रह जाते हो, अरे डूब मरो! चुल्लू भर पानी में डूब मरो।”

उन्होंने आगे कहा, “अरे ओवैसी सुन ले, कुत्ता भी ना पेशाब करेगा, औरंगजेब की पहचान पर। अब तो भगवा लहराएगा पूरे हिंदुस्तान पर।” उन्होंने ऐलान किया कि ‘हनुमान चालीसा’ की तो शुरुआत हो ही चुकी है, अब लंका दहन भी होगा। उन्होंने शिवसेना सुप्रीमो और राज्य के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की हालिया रैली के बारे में कहा कि अध्यक्ष सोनिया गाँधी को समर्पित थी। उन्होंने कहा कि RSS के लिए जिस भाषा का इस्तेमाल कॉन्ग्रेस करती थी, उद्धव ठाकरे भी उसी भाषा का प्रयोग कर रहे हैं।

इसी बयान के ऊपर जुनैद मट्टू की प्रतिक्रिया आई जिसे देख यूजर भड़क गए। लोगों ने कहा कि अगर यहाँ का मेयर ही औरंगजेब की इज्जत कर रहा है तो फिर हम कैसे उम्मीद कर सकते हैं कि कश्मीर कभी बिन आतंकवाद के हो सकता है।

एक यूजर ने लिखा, मट्टू जैसे लोग ही 1990 में कश्मीर में आतंकवाद को समर्थन करने वाले लोग थे। जिस औरंगजेब ने गुरु तेगबहादुर का सिर कलम किया। इस इंसान के लिए वो शहंशाह है। अगर ऐसे लोग कश्मीर में मेयर हैं तो उस कश्मीर का भगवान मालिक है।

शिवराम कृष्ण लिखते हैं, “औरंगजेब 17 वीं सदी का बगदादी था। उसके लिए दुआ करना ठीक वैसे ही है जैसे आज से 100-200 साल बाद तुम जैसे लोग लादेन और बगदादी के लिए दुआएँ पढ़ें। वैसे असल चेहरा दिखाने के लिए धन्यवाद।”

बता दें कि जुनैद मट्टू जम्मू-कश्मीर अपनी पार्टी के यूथ विंग के अध्यक्ष हैं। इससे पहले मट्टू अनुच्छेद 370 के हटने पर विरोध करते दिखाई दिए थे।

CRPF करेगी ज्ञानवापी में मिले शिवलिंग की सुरक्षा, अदालत ने सील की जगह, वजू पर मनाही: जैसे ही दिखे बाबा, ‘हर-हर महादेव’ से गूँजा विवादित ढाँचा

वाराणसी स्थित ज्ञानवापी विवादित (Gyanvapi Mosque Survey) ढाँचे का तीन दिनों तक चले सर्वे का काम समाप्त हो गया है। सर्वे के तीसरे दिन हिन्दू पक्ष की तरफ से सोमवार (16 मई, 2022) को करीब 12 फीट 8 इंच लंबा शिवलिंग नंदी के सामने विवादित ढाँचे के वजूखाने में मिलने का दावा किया गया है। जिसके बाद वाराणसी सिविल कोर्ट के जज रवि कुमार दिवाकर ने शिवलिंग की जगह को सील करते हुए उसे सीआरपीएफ के हवाले कर दिया है। वहीं वजू पर भी पाबन्दी लगा दी है।

वहीं आज तीसरे दिन 2 घंटे के सर्वे के बाद सर्वे का काम अब पूरा हो गया और कल यानी मंगलवार 17 मई को कोर्ट के सामने टीम की तरफ से रिपोर्ट रखी जाएगी। रिपोर्ट के अनुसार, सर्वे के फोटोग्राफर ने बताया कि करीब एक से डेढ़ हजार तस्वीर ली गई है। वहीं सभी तस्वीरें कोर्ट कमिश्नर को सौंप दी गईं हैं। मुस्लिम पक्ष के वकील ने बताया कि हमें तो कुछ नहीं दिखा। हम अपना पक्ष कोर्ट में रखेंगे।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, शिवलिंग मिलाने के बाद से ही परिसर में हर-हर महादेव के नारे लगने लगे वहीं शिवलिंग की सुरक्षा के लिए एक याचिका दाखिल की गई थी, जिसमें अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने कहा कि सर्वे के दौरान शिवलिंग मिला है। उन्होंने कहा कि बाबा मिल गए हैं। जिसके बाद वाराणसी सिविल कोर्ट के जगह को सील करने का आदेश दिया है। वाराणसी सिविल कोर्ट ने जिला प्रशासन को कहा है कि जिस जगह पर शिवलिंग मिला है उसे सील किया जाए, उसे संरक्षित करते हुए किसी को भी अंदर जाने की इजाजत न दी जाए।

बता दें कि कमिश्नर की अगुवाई में 52 सदस्यीय टीम ने परिसर के तहखाने से लेकर ऊपरी हिस्से तक सर्वेक्षण किया। हालाँकि, तीन दिन तक चले इस सर्वे में तीसरे दिन सूचनाएँ लीक करने के आरोप में एक सदस्य को हटा भी दिया गया। जानकारी के अनुसार पत्रकार राम प्रसाद सिंह को हटाया गया है। सर्वे की समाप्ति के साथ ही हिंदू पक्ष ने संस्कृत श्लोक, दिया रखने की जगह, शिवलिंग, स्वास्तिक, प्राचीन शिलाएँ मिलने का दावा किया है।

इस बीच परिसर से बाहर निकले सर्वे टीम में शामिल वादी पक्ष के पैरोकार सोहनलाल आर्य ने मीडिया से कहा कि सर्वे में बाबा मिल गए हैं। उन्होंने दावा किया कि गुंबद, दीवार और फर्श के सर्वे के दौरान कई साक्ष्य दबे हुए से दिखे।

इधर, डीएम कौशल राज शर्मा ने ज्ञानवापी विवादित ढाँचे के सर्वे के बारे में बताया कि कोर्ट कमिश्नर की कार्यवाही आज खत्म हुई है। सवा दस बजे कोर्ट कमीशन के तीन सदस्यों ने कार्यवाही समाप्त की। उन्होंने बताया कि अब अदालत में सुनवाई होगी और अगला निर्णय कोर्ट के आदेश पर होगा। कोर्ट के आदेश द्वारा जो ऑर्डर आएगा उसका पालन होगा। इस बीच वादी और प्रतिवादी पक्ष के जो भी दावे हैं वो उनके निजी हैं। उधर कोर्ट कमिश्नर विशाल सिंह ने भी कहा कि सभी पक्षों के दावे उनके निजी हैं।

गौरतलब है कि पहले दिन के सर्वे के बाद दूसरे दिन काम पूरा नहीं हो सका था, जिस वजह से तीसरे दिन यानी आज सोमवार को दो घंटे का सर्वे पूरा किया गया। सर्वे के आखिरी दिन टीम के अधिकारियों और उच्चाधिकारियों के फैसले के बाद परिसर में मौजूद वजूखाने का पानी निकालकर वीडियोग्राफी कराई गई। जिसके बाद ही हिन्दू पक्ष के वकील ने दावा किया कि अंदर एक शिवलिंग मिला है। वकील विष्णु जैन ने कोर्ट में शिवलिंग वाली जगह को सील करने की याचिका दाखिल की थी, जिसे स्वीकार करते हुए कोर्ट ने जिला प्रशासन को निर्देश दिया कि मस्जिद के जिस वजू खाने के अंदर से शिवलिंग मिला है, उस जगह को सील करके प्रशासन अभी अपनी सुरक्षा में ले ले।

रंगदारी न देने पर असलहा सटा कर कारोबारी को लाठी-डंडों से पीटा, असलहा सटा कर गालियाँ: अतीक अहमद के भाई पर मामला दर्ज

अतीक अहमद की मुश्किलें कम होती नजर नहीं आ रही है। पहले बाहुबली अतीक अहमद पर केस, उसके बाद छोटे भाई और फिर दोनों बेटे पर कई FIR। अब एक नया मामला बाहुबली के परिवार के खिलाफ दर्ज हुआ है।

दरअसल, माफिया अतीक अहमद के छोटे भाई और पूर्व विधायक खालिद अजीम उर्फ अशरफ सहित 6 लोगों पर रंगदारी माँगने का मुकदमा दर्ज हुआ है। प्रयागराज के धूमनगंज इलाके के रहने वाले सूरजपाल ने यह मुकदमा दर्ज कराया है।

सूरजपाल ने कुछ दिन पहले भीटी गाँव के असदुल्लाहपुर में जमीन ली थी। जमीन पर निर्माण कराने के लिए सामान गिरवाकर मकान बनवाना शुरू किया। उसी दौरान खालिद जफर, मो. माज, मो. मुस्लिम, दिलीप कुशवाहा, मोहम्मद हसन और अन्य लोग आ धमके। यह सभी अतीक के भाई खालिद अजीम उर्फ अशरफ के कहने पर आए थे और जमीन पर निर्माण करने से रोक दिया। 

वह उनसे 20 लाख रुपए की रंगदारी माँगने लगे। विरोध पर खालिद व मुस्लिम असलहा सटाकर गालियाँ देने लगे। सूरजपाल ने आरोप लगाया है कि उन लोगों ने रंगदारी माँगने के अलावा ये भी कहा कि यह खालिद अजीम उर्फ अशरफ की प्लाटिंग है। यही नहीं, सूरजपाल ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने पैसा देने से इनकार किया तो उन लोगों ने लाठी-डंडों से उनकी पिटाई की। बहुत हाथ-पैर जोड़ने पर छोड़ा लेकिन यह भी धमकाया कि शिकायत करने पर जान से मार दिए जाओगे। घटना 13 नवंबर, 2021 को हुई थी।

घटना की लिखित शिकायत धूमनगंज थाने में की गई लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। जिसके बाद उसने उच्चाधिकारियों से गुहार लगाई और तब जाकर रविवार (15 मई 2022) को मुकदमा दर्ज हुआ। धूमनगंज थाना प्रभारी राजेश मौर्य ने बताया कि जाँच पड़ताल शुरू कर दी गई है। बता दें कि बाहुबली अतीक अहमद का छोटा भाई और पूर्व विधायक खालिद अजीम उर्फ अशरफ इन दिनों यूपी के बरेली जेल में बंद है।

संजय राउत के खिलाफ उत्पीड़न और मानहानि का मुकदमा दायर करेंगी किरीट सोमैया की पत्नी, ₹100 करोड़ घोटाले के आरोप का मामला

महाराष्ट्र भाजपा नेता किरीट सोमैया (Kirit Somaiya) की पत्नी प्रोफेसर डॉ. मेधा किरीट सोमैया शिवसेना सांसद संजय राउत के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर करने जा रही हैं। इस बात की जानकारी खुद भाजपा नेता ने ट्विटर पर दी है। पूर्व सांसद ने सोमवार (16 मई, 2022) को कहा, “उनकी पत्नी प्रोफेसर डॉक्टर मेधा किरीट सोमैया 18 मई को शिवसेना नेता संजय राउत के खिलाफ मानहानि और उत्पीड़न का मामला दर्ज करेंगी।” उन्होंने वीडियो मैसेज के जरिए बताया कि यह मामला IPC की धारा 499, 500 के तहत मुंबई की सेवरी कोर्ट में दर्ज किया जाएगा, जिसके तहत 100 करोड़ रुपए के टॉयलेट घोटाला आरोप मामले में कार्रवाई की जाएगी।

अपने ट्विटर हैंडल पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में भाजपा नेता कहते हैं कि 100 करोड़ रुपए के टॉयलेट घोटाले मामले में उन्हें मानहानि का नोटिस दिया गया था और उनके खिलाफ शिकायत भी दर्ज कराई गई थी। बीते सप्ताह यानी 9 मई, 2022 को भाजपा नेता किरीट सोमैया की पत्नी ने शिवसेना के संजय राउत के खिलाफ मुंबई पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। अपनी शिकायत में डॉ मेधा सोमैया ने संजय राउत पर अपने खिलाफ मीडिया में दिए गए बयान को अनुचित और दुर्भावनापूर्ण बताया था। उन्होंने शिवसेना नेता के बयान को अपने चरित्र के हनन का प्रयास बताया था। इसी शिकायत में उन्होंने राउत पर डराने और धमकाने का भी आरोप लगाया था।

यह शिकायत मुलुंड थाने के सीनियर इंस्पेक्टर को दी गई थी। शिकायत की घोषणा किरीट सोमैया ने एक दिन पहले ही कर दी थी। 8 मई 2022 (रविवार) को ही किरीट ने सुबह 10.49 पर लिखा था, “मेधा, नील और मैं कल 11 बजे मुलुंड ईस्ट पुलिस स्टेशन जाएँगे। वहाँ हम संजय राउत के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाएँगे।”

रिपोर्ट्स के मुताबिक, राउत ने दावा किया था कि डॉक्टर मेधा किरीट सोमैया और सोमैया परिवार की तरफ से संभाले जाने वाले एनजीओ युवा प्रतिष्ठान 100 करोड़ रुपए के टॉयलेट घोटाले में शामिल हैं। राउत ने साथ ही उन पर यह आरोप लगाए थे कि विक्रांत (INS) घोटाला करने वाले पर भरोसा नहीं किया जा सकता।

रेलवे की जमीन पर बना दी दरगाह, नमाज पढ़ने में दिक्कत बता कर ट्रैक बिछाने से रोका: गुजरात HC ने निरस्त किया वक्फ का आदेश

गुजरात हाईकोर्ट (Gujarat High Court) ने राज्य वक्फ ट्रिब्यूनल के उस फैसले को रद्द कर दिया है, जिसमें उसने रेलवे (Indian Railway) को दरगाह के निकट पटरियाँ बिछाने से यह कहते हुए मना कर दिया था यह वक्फ की संपत्ति है। हाईकोर्ट ने ट्रिब्यूनल के फैसले को पलटते हुए कहा कि यह दरगाह रेलवे की जमीन पर बनी है और रेलवे ने उसे भक्तों के कारण नहीं तोड़ा तो इसका मतलब यह नहीं कि उसके आसपास की जमीन दरगाह की संपत्ति हो गई।

हाईकोर्ट ने कहा कि दावा किया जा रहा है कि यदि रेल पटरियों को बिछाने की अनुमति दी जाएगी तो दरगाह तक लोगों को पहुँचने में बाधी आएगी, क्योंकि पटरियाँ दरगाह के दोनों ओर बिछाई जाएँगी। इस मामले में ट्रिब्यूनल द्वारा दरगाह के ट्रस्टी के पक्ष में दिए गए निर्णय से इस राष्ट्रीय परियोजना पर सीधा प्रभाव पड़ रहा है। हाईकोर्ट ने दरगाह के ट्रस्टी के पक्ष में दी रेल पटरियाँ बिछाने की दी गई निषेधाज्ञा को रद्द कर दिया।

दरअसल, गुजरात हाईकोर्ट वक्फ ट्रिब्यूनल द्वारा दिए गए निर्णय को लेकर जिला कलेक्टर द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा था। वक्फ ट्रिब्यूनल ने अपने आदेश में अधिकारियों को रेलवे ट्रैक बिछाने से पहले वक्फ बोर्ड से अनुमति लेने के लिए कहा था। इस दौरान ट्रिब्यूनल ने वक्फ अधिनियम, 1995 की धारा 91 का हवाला दिया।

दरअसल, रेलवे की संपत्ति पर बनी फिरोज साहब नी दरगाह के एक ट्रस्टी ने वक्फ अधिनियम का हवाला देते हुए ट्रिब्यूनल में आवेदन दिया कि वहाँ चार निर्माण किए हैं और वहाँ पर नियमित रूप से मुस्लिम भक्त आते रहते हैं। कई अवसरों पर यहाँ बड़ा आयोजन भी होता है। इसलिए अगर नया ट्रैक बिछाया जाता है तो वह वक्फ की संपत्ति से होकर गुजरेगा और वहाँ नमाज पढ़ने वालों को भी दिक्कत होगी।

वहीं, हाईकोर्ट में याचिका देने वाले अधिकारियों ने दरगाह के ट्रस्टियों से कहा था कि रेलवे लाइन दरगाह से नहीं, बल्कि उसके रास्ते से गुजर रही है और दरगाह से उसकी उचित दूरी भी है। अधिकारियों ने ट्रस्टियों को वैकल्पिक रास्ता निकालने के लिए बातचीत के लिए बुलाया, लेकिन वे नहीं आए और वक्फ ट्रिब्यूनल चले गए।

लाइव लॉ के अनुसार, उधर वक्फ बोर्ड ने कहा कि उसके यहाँ फिरोज साहब नी दरगाह नाम की कोई वक्फ संपत्ति दर्ज नहीं है, लेकिन मुस्लिम ने दस्तावेज के जरिए बताया कि वहाँ दरगाह मिजार-ए-कुतुबी नाम की एक वक्फ संपत्ति है। इसलिए अधिकारी वक्फ संपत्ति के पास पटरी बिछाकर बाधा उत्पन्न नहीं कर सकता।

न्यायाधिकरण और वक्फ बोर्ड के रुख के बाद अधिकारियों ने मामले को गुजरात हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने कहा कि जब संपत्ति वक्फ के यहाँ पंजीकृत नहीं है तो ट्रस्टी होकर संपत्ति का दावा कैसे किया जा सकता। इसके बाद प्रतिवादी ने खुद को मजार का प्रबंधक बताया। हाईकोर्ट ने कहा कि न्यायाधिकरण को बिना स्थिति स्पष्ट हुए वक्फ बोर्ड के पास भेजने का आदेश नहीं देना चाहिए।