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जिस कब्र पर कुत्ता भी पेशाब न करे… ओवैसी के बाद श्रीनगर के मेयर जुनैद ने औरंगजेब के लिए की दुआ: भड़के यूजर्स ने कहा- ऐसे लोग हैं तभी कश्मीर आतंकवाद मुक्त नहीं होता

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) नेता अकबरुद्दीन ओवैसी के बाद श्रीनगर के मेयर जुनैद अजीम मट्टू ने मुगल आक्रांता औरंगजेब के प्रति अपना प्रेम जगजाहिर किया है। जुनैद ने महाराष्ट्र के पूर्व सीएम देवेंद्र फडणवीस के उस बयान पर ट्वीट किया जिसमें उन्होंने कहा था कि औरंगजेब की कब्र पर कुत्ता भी नहीं पेशाब करेगा।

जुनैद मट्टू ने भाजपा नेता फडणवीस के ट्वीट पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “हाफिज-ए-कुरान, शहंशाह हजरत मुही-उद-दीन मुहम्मद औरंगजेब और उनकी कब्र पर अल्लाह की रहमो करम हो।”

गौरतलब है कि ओवैसी द्वारा औरंगजेब की कब्र पर फातिहा पढ़ने के बाद बीजेपी नेता फडणवीस ने महाराष्ट्र सरकार पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा था, “ओवैसी औरंगजेब की कब्र पर जाता है और माथा टेकता है, और तुम (राज्य सरकार) देखते रह जाते हो, अरे डूब मरो! चुल्लू भर पानी में डूब मरो।”

उन्होंने आगे कहा, “अरे ओवैसी सुन ले, कुत्ता भी ना पेशाब करेगा, औरंगजेब की पहचान पर। अब तो भगवा लहराएगा पूरे हिंदुस्तान पर।” उन्होंने ऐलान किया कि ‘हनुमान चालीसा’ की तो शुरुआत हो ही चुकी है, अब लंका दहन भी होगा। उन्होंने शिवसेना सुप्रीमो और राज्य के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की हालिया रैली के बारे में कहा कि अध्यक्ष सोनिया गाँधी को समर्पित थी। उन्होंने कहा कि RSS के लिए जिस भाषा का इस्तेमाल कॉन्ग्रेस करती थी, उद्धव ठाकरे भी उसी भाषा का प्रयोग कर रहे हैं।

इसी बयान के ऊपर जुनैद मट्टू की प्रतिक्रिया आई जिसे देख यूजर भड़क गए। लोगों ने कहा कि अगर यहाँ का मेयर ही औरंगजेब की इज्जत कर रहा है तो फिर हम कैसे उम्मीद कर सकते हैं कि कश्मीर कभी बिन आतंकवाद के हो सकता है।

एक यूजर ने लिखा, मट्टू जैसे लोग ही 1990 में कश्मीर में आतंकवाद को समर्थन करने वाले लोग थे। जिस औरंगजेब ने गुरु तेगबहादुर का सिर कलम किया। इस इंसान के लिए वो शहंशाह है। अगर ऐसे लोग कश्मीर में मेयर हैं तो उस कश्मीर का भगवान मालिक है।

शिवराम कृष्ण लिखते हैं, “औरंगजेब 17 वीं सदी का बगदादी था। उसके लिए दुआ करना ठीक वैसे ही है जैसे आज से 100-200 साल बाद तुम जैसे लोग लादेन और बगदादी के लिए दुआएँ पढ़ें। वैसे असल चेहरा दिखाने के लिए धन्यवाद।”

बता दें कि जुनैद मट्टू जम्मू-कश्मीर अपनी पार्टी के यूथ विंग के अध्यक्ष हैं। इससे पहले मट्टू अनुच्छेद 370 के हटने पर विरोध करते दिखाई दिए थे।

CRPF करेगी ज्ञानवापी में मिले शिवलिंग की सुरक्षा, अदालत ने सील की जगह, वजू पर मनाही: जैसे ही दिखे बाबा, ‘हर-हर महादेव’ से गूँजा विवादित ढाँचा

वाराणसी स्थित ज्ञानवापी विवादित (Gyanvapi Mosque Survey) ढाँचे का तीन दिनों तक चले सर्वे का काम समाप्त हो गया है। सर्वे के तीसरे दिन हिन्दू पक्ष की तरफ से सोमवार (16 मई, 2022) को करीब 12 फीट 8 इंच लंबा शिवलिंग नंदी के सामने विवादित ढाँचे के वजूखाने में मिलने का दावा किया गया है। जिसके बाद वाराणसी सिविल कोर्ट के जज रवि कुमार दिवाकर ने शिवलिंग की जगह को सील करते हुए उसे सीआरपीएफ के हवाले कर दिया है। वहीं वजू पर भी पाबन्दी लगा दी है।

वहीं आज तीसरे दिन 2 घंटे के सर्वे के बाद सर्वे का काम अब पूरा हो गया और कल यानी मंगलवार 17 मई को कोर्ट के सामने टीम की तरफ से रिपोर्ट रखी जाएगी। रिपोर्ट के अनुसार, सर्वे के फोटोग्राफर ने बताया कि करीब एक से डेढ़ हजार तस्वीर ली गई है। वहीं सभी तस्वीरें कोर्ट कमिश्नर को सौंप दी गईं हैं। मुस्लिम पक्ष के वकील ने बताया कि हमें तो कुछ नहीं दिखा। हम अपना पक्ष कोर्ट में रखेंगे।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, शिवलिंग मिलाने के बाद से ही परिसर में हर-हर महादेव के नारे लगने लगे वहीं शिवलिंग की सुरक्षा के लिए एक याचिका दाखिल की गई थी, जिसमें अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने कहा कि सर्वे के दौरान शिवलिंग मिला है। उन्होंने कहा कि बाबा मिल गए हैं। जिसके बाद वाराणसी सिविल कोर्ट के जगह को सील करने का आदेश दिया है। वाराणसी सिविल कोर्ट ने जिला प्रशासन को कहा है कि जिस जगह पर शिवलिंग मिला है उसे सील किया जाए, उसे संरक्षित करते हुए किसी को भी अंदर जाने की इजाजत न दी जाए।

बता दें कि कमिश्नर की अगुवाई में 52 सदस्यीय टीम ने परिसर के तहखाने से लेकर ऊपरी हिस्से तक सर्वेक्षण किया। हालाँकि, तीन दिन तक चले इस सर्वे में तीसरे दिन सूचनाएँ लीक करने के आरोप में एक सदस्य को हटा भी दिया गया। जानकारी के अनुसार पत्रकार राम प्रसाद सिंह को हटाया गया है। सर्वे की समाप्ति के साथ ही हिंदू पक्ष ने संस्कृत श्लोक, दिया रखने की जगह, शिवलिंग, स्वास्तिक, प्राचीन शिलाएँ मिलने का दावा किया है।

इस बीच परिसर से बाहर निकले सर्वे टीम में शामिल वादी पक्ष के पैरोकार सोहनलाल आर्य ने मीडिया से कहा कि सर्वे में बाबा मिल गए हैं। उन्होंने दावा किया कि गुंबद, दीवार और फर्श के सर्वे के दौरान कई साक्ष्य दबे हुए से दिखे।

इधर, डीएम कौशल राज शर्मा ने ज्ञानवापी विवादित ढाँचे के सर्वे के बारे में बताया कि कोर्ट कमिश्नर की कार्यवाही आज खत्म हुई है। सवा दस बजे कोर्ट कमीशन के तीन सदस्यों ने कार्यवाही समाप्त की। उन्होंने बताया कि अब अदालत में सुनवाई होगी और अगला निर्णय कोर्ट के आदेश पर होगा। कोर्ट के आदेश द्वारा जो ऑर्डर आएगा उसका पालन होगा। इस बीच वादी और प्रतिवादी पक्ष के जो भी दावे हैं वो उनके निजी हैं। उधर कोर्ट कमिश्नर विशाल सिंह ने भी कहा कि सभी पक्षों के दावे उनके निजी हैं।

गौरतलब है कि पहले दिन के सर्वे के बाद दूसरे दिन काम पूरा नहीं हो सका था, जिस वजह से तीसरे दिन यानी आज सोमवार को दो घंटे का सर्वे पूरा किया गया। सर्वे के आखिरी दिन टीम के अधिकारियों और उच्चाधिकारियों के फैसले के बाद परिसर में मौजूद वजूखाने का पानी निकालकर वीडियोग्राफी कराई गई। जिसके बाद ही हिन्दू पक्ष के वकील ने दावा किया कि अंदर एक शिवलिंग मिला है। वकील विष्णु जैन ने कोर्ट में शिवलिंग वाली जगह को सील करने की याचिका दाखिल की थी, जिसे स्वीकार करते हुए कोर्ट ने जिला प्रशासन को निर्देश दिया कि मस्जिद के जिस वजू खाने के अंदर से शिवलिंग मिला है, उस जगह को सील करके प्रशासन अभी अपनी सुरक्षा में ले ले।

रंगदारी न देने पर असलहा सटा कर कारोबारी को लाठी-डंडों से पीटा, असलहा सटा कर गालियाँ: अतीक अहमद के भाई पर मामला दर्ज

अतीक अहमद की मुश्किलें कम होती नजर नहीं आ रही है। पहले बाहुबली अतीक अहमद पर केस, उसके बाद छोटे भाई और फिर दोनों बेटे पर कई FIR। अब एक नया मामला बाहुबली के परिवार के खिलाफ दर्ज हुआ है।

दरअसल, माफिया अतीक अहमद के छोटे भाई और पूर्व विधायक खालिद अजीम उर्फ अशरफ सहित 6 लोगों पर रंगदारी माँगने का मुकदमा दर्ज हुआ है। प्रयागराज के धूमनगंज इलाके के रहने वाले सूरजपाल ने यह मुकदमा दर्ज कराया है।

सूरजपाल ने कुछ दिन पहले भीटी गाँव के असदुल्लाहपुर में जमीन ली थी। जमीन पर निर्माण कराने के लिए सामान गिरवाकर मकान बनवाना शुरू किया। उसी दौरान खालिद जफर, मो. माज, मो. मुस्लिम, दिलीप कुशवाहा, मोहम्मद हसन और अन्य लोग आ धमके। यह सभी अतीक के भाई खालिद अजीम उर्फ अशरफ के कहने पर आए थे और जमीन पर निर्माण करने से रोक दिया। 

वह उनसे 20 लाख रुपए की रंगदारी माँगने लगे। विरोध पर खालिद व मुस्लिम असलहा सटाकर गालियाँ देने लगे। सूरजपाल ने आरोप लगाया है कि उन लोगों ने रंगदारी माँगने के अलावा ये भी कहा कि यह खालिद अजीम उर्फ अशरफ की प्लाटिंग है। यही नहीं, सूरजपाल ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने पैसा देने से इनकार किया तो उन लोगों ने लाठी-डंडों से उनकी पिटाई की। बहुत हाथ-पैर जोड़ने पर छोड़ा लेकिन यह भी धमकाया कि शिकायत करने पर जान से मार दिए जाओगे। घटना 13 नवंबर, 2021 को हुई थी।

घटना की लिखित शिकायत धूमनगंज थाने में की गई लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। जिसके बाद उसने उच्चाधिकारियों से गुहार लगाई और तब जाकर रविवार (15 मई 2022) को मुकदमा दर्ज हुआ। धूमनगंज थाना प्रभारी राजेश मौर्य ने बताया कि जाँच पड़ताल शुरू कर दी गई है। बता दें कि बाहुबली अतीक अहमद का छोटा भाई और पूर्व विधायक खालिद अजीम उर्फ अशरफ इन दिनों यूपी के बरेली जेल में बंद है।

संजय राउत के खिलाफ उत्पीड़न और मानहानि का मुकदमा दायर करेंगी किरीट सोमैया की पत्नी, ₹100 करोड़ घोटाले के आरोप का मामला

महाराष्ट्र भाजपा नेता किरीट सोमैया (Kirit Somaiya) की पत्नी प्रोफेसर डॉ. मेधा किरीट सोमैया शिवसेना सांसद संजय राउत के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर करने जा रही हैं। इस बात की जानकारी खुद भाजपा नेता ने ट्विटर पर दी है। पूर्व सांसद ने सोमवार (16 मई, 2022) को कहा, “उनकी पत्नी प्रोफेसर डॉक्टर मेधा किरीट सोमैया 18 मई को शिवसेना नेता संजय राउत के खिलाफ मानहानि और उत्पीड़न का मामला दर्ज करेंगी।” उन्होंने वीडियो मैसेज के जरिए बताया कि यह मामला IPC की धारा 499, 500 के तहत मुंबई की सेवरी कोर्ट में दर्ज किया जाएगा, जिसके तहत 100 करोड़ रुपए के टॉयलेट घोटाला आरोप मामले में कार्रवाई की जाएगी।

अपने ट्विटर हैंडल पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में भाजपा नेता कहते हैं कि 100 करोड़ रुपए के टॉयलेट घोटाले मामले में उन्हें मानहानि का नोटिस दिया गया था और उनके खिलाफ शिकायत भी दर्ज कराई गई थी। बीते सप्ताह यानी 9 मई, 2022 को भाजपा नेता किरीट सोमैया की पत्नी ने शिवसेना के संजय राउत के खिलाफ मुंबई पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। अपनी शिकायत में डॉ मेधा सोमैया ने संजय राउत पर अपने खिलाफ मीडिया में दिए गए बयान को अनुचित और दुर्भावनापूर्ण बताया था। उन्होंने शिवसेना नेता के बयान को अपने चरित्र के हनन का प्रयास बताया था। इसी शिकायत में उन्होंने राउत पर डराने और धमकाने का भी आरोप लगाया था।

यह शिकायत मुलुंड थाने के सीनियर इंस्पेक्टर को दी गई थी। शिकायत की घोषणा किरीट सोमैया ने एक दिन पहले ही कर दी थी। 8 मई 2022 (रविवार) को ही किरीट ने सुबह 10.49 पर लिखा था, “मेधा, नील और मैं कल 11 बजे मुलुंड ईस्ट पुलिस स्टेशन जाएँगे। वहाँ हम संजय राउत के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाएँगे।”

रिपोर्ट्स के मुताबिक, राउत ने दावा किया था कि डॉक्टर मेधा किरीट सोमैया और सोमैया परिवार की तरफ से संभाले जाने वाले एनजीओ युवा प्रतिष्ठान 100 करोड़ रुपए के टॉयलेट घोटाले में शामिल हैं। राउत ने साथ ही उन पर यह आरोप लगाए थे कि विक्रांत (INS) घोटाला करने वाले पर भरोसा नहीं किया जा सकता।

रेलवे की जमीन पर बना दी दरगाह, नमाज पढ़ने में दिक्कत बता कर ट्रैक बिछाने से रोका: गुजरात HC ने निरस्त किया वक्फ का आदेश

गुजरात हाईकोर्ट (Gujarat High Court) ने राज्य वक्फ ट्रिब्यूनल के उस फैसले को रद्द कर दिया है, जिसमें उसने रेलवे (Indian Railway) को दरगाह के निकट पटरियाँ बिछाने से यह कहते हुए मना कर दिया था यह वक्फ की संपत्ति है। हाईकोर्ट ने ट्रिब्यूनल के फैसले को पलटते हुए कहा कि यह दरगाह रेलवे की जमीन पर बनी है और रेलवे ने उसे भक्तों के कारण नहीं तोड़ा तो इसका मतलब यह नहीं कि उसके आसपास की जमीन दरगाह की संपत्ति हो गई।

हाईकोर्ट ने कहा कि दावा किया जा रहा है कि यदि रेल पटरियों को बिछाने की अनुमति दी जाएगी तो दरगाह तक लोगों को पहुँचने में बाधी आएगी, क्योंकि पटरियाँ दरगाह के दोनों ओर बिछाई जाएँगी। इस मामले में ट्रिब्यूनल द्वारा दरगाह के ट्रस्टी के पक्ष में दिए गए निर्णय से इस राष्ट्रीय परियोजना पर सीधा प्रभाव पड़ रहा है। हाईकोर्ट ने दरगाह के ट्रस्टी के पक्ष में दी रेल पटरियाँ बिछाने की दी गई निषेधाज्ञा को रद्द कर दिया।

दरअसल, गुजरात हाईकोर्ट वक्फ ट्रिब्यूनल द्वारा दिए गए निर्णय को लेकर जिला कलेक्टर द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा था। वक्फ ट्रिब्यूनल ने अपने आदेश में अधिकारियों को रेलवे ट्रैक बिछाने से पहले वक्फ बोर्ड से अनुमति लेने के लिए कहा था। इस दौरान ट्रिब्यूनल ने वक्फ अधिनियम, 1995 की धारा 91 का हवाला दिया।

दरअसल, रेलवे की संपत्ति पर बनी फिरोज साहब नी दरगाह के एक ट्रस्टी ने वक्फ अधिनियम का हवाला देते हुए ट्रिब्यूनल में आवेदन दिया कि वहाँ चार निर्माण किए हैं और वहाँ पर नियमित रूप से मुस्लिम भक्त आते रहते हैं। कई अवसरों पर यहाँ बड़ा आयोजन भी होता है। इसलिए अगर नया ट्रैक बिछाया जाता है तो वह वक्फ की संपत्ति से होकर गुजरेगा और वहाँ नमाज पढ़ने वालों को भी दिक्कत होगी।

वहीं, हाईकोर्ट में याचिका देने वाले अधिकारियों ने दरगाह के ट्रस्टियों से कहा था कि रेलवे लाइन दरगाह से नहीं, बल्कि उसके रास्ते से गुजर रही है और दरगाह से उसकी उचित दूरी भी है। अधिकारियों ने ट्रस्टियों को वैकल्पिक रास्ता निकालने के लिए बातचीत के लिए बुलाया, लेकिन वे नहीं आए और वक्फ ट्रिब्यूनल चले गए।

लाइव लॉ के अनुसार, उधर वक्फ बोर्ड ने कहा कि उसके यहाँ फिरोज साहब नी दरगाह नाम की कोई वक्फ संपत्ति दर्ज नहीं है, लेकिन मुस्लिम ने दस्तावेज के जरिए बताया कि वहाँ दरगाह मिजार-ए-कुतुबी नाम की एक वक्फ संपत्ति है। इसलिए अधिकारी वक्फ संपत्ति के पास पटरी बिछाकर बाधा उत्पन्न नहीं कर सकता।

न्यायाधिकरण और वक्फ बोर्ड के रुख के बाद अधिकारियों ने मामले को गुजरात हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने कहा कि जब संपत्ति वक्फ के यहाँ पंजीकृत नहीं है तो ट्रस्टी होकर संपत्ति का दावा कैसे किया जा सकता। इसके बाद प्रतिवादी ने खुद को मजार का प्रबंधक बताया। हाईकोर्ट ने कहा कि न्यायाधिकरण को बिना स्थिति स्पष्ट हुए वक्फ बोर्ड के पास भेजने का आदेश नहीं देना चाहिए।

राहुल भट की 5 साल पहले की फेसबुक पोस्ट – ‘हम मुस्लिम हैं, रोहिंग्या मुस्लिमों की हत्या बंद करो’, ‘संघी’ और ‘भारतीय एजेंट’ बता कर मारे जा रहे हिन्दू

हाल ही में जम्मू कश्मीर में कश्मीरी पंडित राहुल भट की हत्या के बाद सोशल मीडिया पर एक स्क्रीनशॉट वायरल हो रहा है। यह स्क्रीनशॉट राहुल भट के फेसबुक आईडी के प्रोफाइल पिक्चर का है, जिसमें उन्होंने अपनी तस्वीर के साथ एक फ्रेम लगाया है, जिस पर लिखा हुआ है, “WE ARE MUSLIMS. STOP KILLING ROHINGYA MUSLIMS.” इस तस्वीर के वायरल होने के बाद कहा जा रहा है कि वह रोहिंग्या मुस्लिम को बचाना चाहते थे, मगर वह खुद इस्लामी आतंकियों के शिकार हो गए।

फोटो साभार: राहुल भट फेसबुक

राहुल भट के फेसबुक प्रोफाइल के अनुसार, उन्होंने यह तस्वीर 7 सितंबर, 2017 को लगाई थी। जम्मू-कश्मीर के बडगाम में आतंकियों ने तहसील कार्यालय में घुसकर राहुल भट की गोली मारकर हत्या कर दी, जिसके बाद से ही तनाव का माहौल है। इस घटना के बाद से कश्मीरी पंडित (Kashmiri pandit) सड़कों पर हैं। उनकी हत्या के बाद से घाटी में सड़क से लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म तक लोगों में खासा गुस्सा देखने को मिल रहा है। इस दौरान लोग हाथों में बैनर और तख्तियाँ लिए हुए दिखाई दिए। प्रदर्शन कर रहे लोगों का साफ तौर पर कहना था कि हमारा क्या कसूर है जो हमें इस तरह एक बार फिर से निशाना बनाया जा रहा है। आखिर कब तक वह इस्लामिक जिहाद का शिकार होते रहेंगे?

फोटो साभार: राहुल भट फेसबुक

यह हत्या दिखाती है कि किस तरह से इस्लामवादी अपने जिहाद को जस्टिफाई करने के लिए ‘संघी’ या ‘भारतीय राज्य के एजेंट’ जैसे शब्द का इस्तेमाल करते हैं। वास्तव में उनके इस शब्द का इस्तेमाल मजहबी युद्ध को राजनीतिक कवर देने के लिए एक तरीका मात्र है। इसकी आड़ में वह मजहबी खेल खेलते हैं और जिहाद को अंजाम देते हैं।

तहसील कर्मचारी राहुल भट की 12 मई को हत्या के बाद कश्‍मीरी पंडितों की सुरक्षा के मसले ने फिर तूल पकड़ लिया है। सवाल उठने लगा है कि आखिर कश्‍मीर में हिंदुओं को निशाना क्‍यों बनाया जा रहा है। इसके पहले 7 अक्‍टूबर को आतंकियों ने प्रिंसिपल सतिंदर कौर और अध्‍यापक दीपक चंद की हत्‍या कर दी थी। 5 अक्‍टूबर को माखनलाल बिंद्रू को मौत के घाट उतारा गया था। 17 सितंबर को कॉन्‍स्‍टेबल बंटू शर्मा को जान से हाथ धोना पड़ा था। 8 जून को सरपंच अजय पंडिता की जान गई थी। यह सिलसिला मानो थमने का नाम नहीं ले रहा है। 

उल्लेखनीय है कि गुरुवार (12 मई, 2022) की शाम को चडूरा गाँव में स्थित तहसीलदार ऑफिस में घुसकर जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादियों ने 36 साल के राहुल भट पर गोलियाँ बरसा दी थीं। राहुल को हमले के तुरंत बाद अस्पताल पहुँचाया गया था, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। 

राहुल भट की हत्या करने वाले जैश-ए-मोहम्मद के 3 आतंकियों को शुक्रवार (13 मई, 2022) को ही सुरक्षाबलों ने ढेर कर दिया। बावजूद इसके कश्मीरी हिंदू भय के साए में जीने को मजबूर हैं, क्योंकि उन्हें टारगेट कर हमले किए जा रहे हैं। इस हत्या के बाद प्रधानमंत्री के रोजगार पैकेज के तहत काम करने वाले करीब 350 सरकारी कर्मचारियों ने सामूहिक इस्तीफा दे दिया। इन लोगों का कहना था कि राज्य सरकार उन्हें पर्याप्त सुरक्षा प्रदान नहीं कर सकता है। ऐसे में वे सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं। राहुल भट भी इसी योजना के तहत 2011 से घाटी में कार्यरत थे। वो और बडगाम में अपनी पत्नी और 7 साल की बेटी के साथ रहते थे।

उनकी पत्नी ने आरोप लगाया है कि राहुल भट के ठिकाने की जानकारी उनके ही ऑफिस से आतंकियों को मिली होगी। इसके बाद ही आतंकवादियों ने गुरुवार को बडगाम के चदूरा में एक युवा कश्मीरी हिंदू राहुल भट की हत्या की थी। इधर बडगाम जिले में कश्मीरी हिंदुओं ने राहुल भट के सम्मान में एक कॉलोनी का नाम उनके नाम पर रख दिया है।

ज्ञानवापी के भीतर कुएँ में मिला शिवलिंग: विवादित ढाँचे का सर्वे खत्म होने के बाद हिन्दू पक्ष का दावा

वाराणसी में ज्ञानवापी का सर्वे पूरा किया जा चुका है। इस दौरान हिन्दू पक्ष ने शिवलिंग भी मिलने का दावा किया है। यह शिवलिंग कुएँ में मिला था। इस दौरान दीवारों पर हिन्दू मंदिर के अवशेष दिखाई देने का भी दावा किया गया है। यह जानकारी 16 मई 2022 (सोमवार) को दी गई है। वाराणसी के DM के मुताबिक सर्वे रिपोर्ट कोर्ट में 17 मई 2022 (मंगलवार) को पेश की जाएगी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हिन्दू पक्ष के वकील विष्णु जैन ने ज्ञानवापी के कुएँ में शिवलिंग मिलने का दावा करते हुए उसके संरक्षण के लिए कोर्ट जाने का ऐलान किया है। इस सर्वे के लिए गई टीम को भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच ले जाया गया था।

याचिकाकर्ता सोहनलाल ने कहा, “आज कमीशन खत्म हो गया। अब दूसरे कमीशन की माँग होगी। बाबा मिल गए हैं। आप मेरी बातों से सब समझ लीजिए। बाबा नंदी महराज और देशवासियों को मिले हैं। जाँच कमिश्नर विशाल सिंह को हम धन्यवाद देते हैं।”

Z न्यूज़ के एक शो में बोलते हुए एडवोकेट विष्णु जैन ने कहा, “मैंने कोई गोपनीयता भंग नहीं की है। मैं वही सब बता रहा हूँ जो प्रकाशित हो चुका है। तथाकथित मस्जिद ज्ञानवापी की जो भी पश्चिमी दीवार को देख लेगा वो इसे हिन्दू मंदिर ही कहेगा। उसमें देवी-देवताओं की मूर्तियाँ रखने के लिए स्थान बना हुआ है। इसी के साथ घंटियाँ बनी हुई हैं। इस मामले में कुल 7 केस दाखिल हुए हैं। उन केसों में भक्त, भगवान, स्थान और मालिकाना हक सब शामिल है। आने वाले समय में सभी दावे एक साथ जोड़ दिए जाएँगे।”

एडवोकेट विष्णु जैन ने आगे कहा, “1996 में भी सर्वे हुआ था ज्ञानवापी का। अब दुबारा हुआ है। अगर दोनों स्थितियों में कोई फर्क मिला तो प्लेसेस ऑफ़ वर्शिप एक्ट विपक्षी पर लागू होगा। प्लेसेस ऑफ़ वर्शिप एक्ट हमारे अदालत जाने का अधिकार छीन लेता है। यह एक्ट सुप्रीम कोर्ट द्वारा वर्णित हर किसी के अदालत जाने के अधिकारों का उललंघन है।”

योगी सरकार के कारण टूटा संगठन: BKU से निकलने के बाद टिकैत भाइयों के बयानों में फूट, एक ने मढ़ा BJP पर इल्जाम, दूसरा बोला- इसमें कोई राजनीति नहीं

भारतीय किसान यूनियन में हुई टूट और बिखराव के मामले में राकेश टिकैत के ही परिवार में 3 अलग-अलग बयान आए हैं। जहाँ राकेश टिकैत इस पूरे घटनाक्रम का दोषी भाजपा सरकार को बता रहे हैं तो वहीं नरेश टिकैत ने इस पूरे घटनाक्रम में किसी भी राजनैतिक हस्तक्षेप होने से इंकार किया है। इससे पहले 15 मई 2022 (रविवार) को कभी राकेश टिकैत के सहयोगी रहे राजेश सिंह चौहान ने राकेश टिकैत और उनके भाई नरेश टिकैत को संगठन से अलग कर दिया था। इसी के साथ नए संगठन का नाम भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) दिया था।

अब राकेश टिकैत ने खुद से बगावत करने वाले उन सभी पदाधिकारियों को किसान विरोधी घोषित किया है। इसी के साथ उन्होंने 7 सदस्यों की लिस्ट जारी कर के उनको बर्खास्त करने की भी घोषणा की है।

इसी के साथ राकेश टिकैत ने इस पूरे मामले का दोष UP सरकार पर मढ़ दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक टिकैत ने कहा, “मैंने इस बिखराव को रोकने की काफी कोशिश की जिसके लिए मैं लखनऊ तक गया। पहले तो राजेश सिंह मान गए थे लेकिन शायद बाद में अधिक दबाव से टूट गए। वो सरकार की नोटिस से डर गए थे। जो गए हैं उनके जाने से संगठन पर फर्क नहीं पड़ने वाला। ये टूट पहली बार नहीं हुई है। इस से पहले 8-10 बार अलग-अलग संगठन टूट कर हमसे अलग हो चुके हैं। जनवरी 2021 में भी कुछ लोग सरकार के आगे झुक गए थे। यह सब सरकार का किया धरा है। सरकार अपनी मंशा में कामयाब रही।”

नरेश टिकैत ने किसी भी राजनैतिक संगठन की भूमिका से इंकार किया था

राकेश टिकैत के बयान से ठीक उलट नरेश टिकैत ने 15 मई 2022 (रविवार) को ऑपइंडिया से बात करते हुए किसान यूनियन के विभाजन में किसी भी राजनैतिक दल की भूमिका से इंकार किया था। तब उन्होंने कहा था कि इस पूरे मामले में कोई भी राजनीति नहीं है।

अश्लील तस्वीर साझा कर अविनाश दास ने किया तिरंगे का अपमान, गृहमंत्री अमित शाह की तस्वीर पर भी झूठा दावा: क्राइम ब्रांच ने दर्ज किया केस

अहमदाबाद की क्राइम ब्रांच ने हाल ही में फिल्म निर्देशक अविनाश दास के खिलाफ केस दर्ज किया है। जानकारी के मुताबिक मनी लांड्रिंग मामले में गिरफ्तार झारखंड की निलंबित आइएएस अधिकारी पूजा सिंघल के साथ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का पाँच साल पुराना फोटो इंटरनेट मीडिया पर पोस्ट करने और तिरंगा के अपमान को लेकर मुंबई के फिल्म निर्देशक अविनाश दास पर अहमदाबाद अपराध शाखा ने केस दर्ज किया है।

बता दें कि फिल्म निर्देशक अविनाश दास ने ‘अनारकली ऑफ आरा’ जैसी फिल्म बनाई है। इसके साथ ही उन्होंने कई वेब सीरीज का भी निर्देशन किया है। अविनाश फिल्म निर्माण से पहले पत्रकार रह चुके हैं। अविनाश ने झारखंड और बिहार के कई शहरों में पत्रकारिता की है। वे एनडीटीवी में भी काम कर चुके हैं।

अहमदाबाद अपराध शाखा के अनुसार, मुंबई के अविनाश दास ने आठ मई 2022 को अपने ट्विटर अकाउंट पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह व झारखंड की निलंबित आइएएस अफसर पूजा सिंघल का पुराना फोटो अपलोड किया। यह फोटो करीब पाँच साल पुराना बताया गया। ऐसा उनकी छवि को धूमिल करने के उद्देश्य से किया गया।

17 मार्च को पोस्ट की थी महिला की तस्वीर

अपराध शाखा के अधिकारियों के अनुसार उन्हें सोशल मीडिया पर 17 मार्च की एक पोस्ट मिली, जिसमें मुंबई के अंधेरी में रहनेवाले फिल्म निर्देशक अविनाश दास ने एक कथित अश्लील तस्वीर साझा की, जिसमें एक महिला को तिरंगे के रंग से रंगा गया था। इसके अलावा, अविनाश दास ने 8 मई को गृह मंत्री अमित शाह के साथ झारखंड की आईएएस अधिकारी पूजा सिंघल की 5 साल पुरानी तस्वीर साझा की थी।

अधिकारियों के मुताबिक, अविनाश दास ने इस तस्वीर को लोगों के मन में गलतफहमी पैदा करने और देश के शीर्ष पद पर नियुक्त गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) की छवि खराब करने के इरादे से पोस्ट किया है। शाह और पूजा सिंघल (Pooja Singhal) को दिखाते हुए इस ट्वीट में दास ने लिखा था, ‘घर से करोड़ों का कैश पकड़ाने से थोड़े दिन पहले पूजा सिंघल की एक तस्वीर।’

वहीं, अविनाश ने मार्च 2022 में राष्ट्रध्वज में लिपटी एक अ‌र्द्धनग्न युवती का फोटो फेसबुक व इंस्टाग्राम पर पोस्ट किया था। पुलिस ने इसे राष्ट्रध्वज का अपमान बताते हुए अविनाश के खिलाफ आइपीसी की धारा- 469, आइटी एक्ट की धारा- 67 और राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम 1971 के तहत मुकदमा दर्ज किया है।

दास के खिलाफ तीन साल पहले उत्तर प्रदेश पुलिस ने यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ की गायों के साथ तस्वीर दिखाने के लिए मामला दर्ज किया था, जिसमें दावा किया गया था कि वह गायों को बचाना चाहते हैं, लड़कियों को नहीं।

गौरतलब है कि प्रवर्तन निदेशालय ने पिछले दिनों आईएएस पूजा सिंघल को 18 करोड़ रुपए के मनरेगा घोटाले में गिरफ्तार किया था। इतना ही नहीं बाद में उन्हें निलंबित भी कर दिया गया था। घोटाले के मामले में ईडी की छापेमारी में सिंघल के करीबी सहयोगी के घर से भी भारी मात्रा में नकदी मिली थी, जिसकी तस्वीर सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई थी।

बॉलीवुड फिल्मों के फेल होने के पीछे कंगना ने स्टार किड्स को बताया जिम्मेदार, बोलीं- उबले अंडे जैसी शक्ल होती है इनकी, कौन देखेगा

बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत ने अपनी फिल्म धाकड़ के प्रमोशन के दौरान एक बार फिर से स्टार किड्स के ऊपर निशाना साधा। उन्होंने एबीपी लाइव को दिए इंटरव्यू में साउथ की फिल्मों की तारीफ करते हुए कंगना ने कहा कि आरआरआर और केजीएफ 2 जैसी फिल्मों ने बॉलीवुड फिल्मों को बॉक्स ऑफिस पर फेल कर दिया। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि लोग स्टार किड्स को पसंद नहीं करते और ये लोग भी अपने दर्शकों से नहीं जुड़ पाते। इन्हें देखकर ऐसा लगता है जैसे ये कोई उबले अंडे हों।

कंगना रनौत ने बॉलीवुड के स्टार किड्स पर अपनी टिप्पणी करते हुए कहा, “बीते कुछ समय से साउथ फिल्में बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा रही हैं। RRR और KGF चैप्टर 2 दोनों ही फिल्मों ने 100 करोड़ से ज्यादा की कमाई की। वहीं, अल्लू अर्जुन की फिल्म पुष्पा ने भी 100 करोड़ रुपए का बिजनेस किया। कंगना कहती हैं कि इन सारी फिल्मों के हिंदी वर्जन ने बॉलीवुड फिल्मों को कई मायनों में पीछे छोड़ दिया है।”

कंगना से जब साउथ की फिल्मों की सफलता और बॉलीवुड के नीचे जाते ग्राफ पर बात की गई तो कंगना ने इसके पीछे स्टार किड्स को वजह बताया। कंगना ने कहा कि दर्शकों को स्टार किड्स पसंद नहीं है, लेकिन बॉलीवुड में उनकी ही फिल्म देखने को दी जा रही हैं। दर्शक उनसे जुड़ाव ही महसूस नहीं कर पाते जबकि साउथ फिल्म इंडस्ट्री का अपने दर्शकों से कनेक्शन हैं। इसी कारण ये फिल्में ज्यादा सफल होती हैं। उन्होंने कहा कि स्टार किड्स शुरू से तो पढ़ने के लिए विदेश में रहते हैं। फिर अंग्रेजी में बात करते हैं, हॉलीवुड फिल्में देखते हैं और चाकू-छुरी से खाना खाते हैं, उनका तो एक्सेंट भी अलग होता है।

कंगना कहती हैं, “स्टार किड्स देखने में भी अजीब ही लगते हैं। जैसे उबले हुए अंडे हों। उनका पूरा लुक बदल चुका होता है। इसलिए दर्शक उनसे कनेक्ट नहीं कर पाते हैं।” कंगना ने अपने बयान में साफ किया कि उनका मकसद किसी को ट्रोल का नहीं है। लेकिन साउथ के अल्लू अर्जुन की पुष्पा अगर देखें तो पता लगता है कि मजदूर उनसे जुड़ पा रहा है। वह पूछती हैं, “बॉलीवुड का कौन सा हीरो मजदूक की तरह लगता है और इस रोल में फिट बैठता है।”

गौरतलब है कि इससे पहले कंगना रनौत साउथ सुपरस्टार महेश बाबू के समर्थन में भी अपनी टिप्पणी दे चुकी हैं। कंगना ने 12 मई को महेश बाबू के बयान पर कहा था, “महेश बाबू सही थे कि बॉलीवुड उन्हें अफॉर्ड नहीं कर सकता। मैं उनसे सहमत हूँ। मैं जानती हूँ कि कई फिल्ममेकर्स ने उन्हें अपनी फिल्मों के लिए अप्रोच किया है।” कंगना ने आगे कहा था, “महेश बाबू की जनरेशन ने अपने बलबूते पर तेलुगू इंडस्ट्री को भारत की नंबर बन इंडस्ट्री बनाया है। अब बॉलीवुड तो यकीनन उन्हें अफॉर्ड नहीं कर सकता। मुझे नहीं पता क्यों इस बात का इतना बड़ा विवाद बना दिया गया है। मैं नहीं जानती किस सेंस में महेश बाबू ने ये बयान दिया, लेकिन मैं और कई लोग अक्सर मजाक करते हैं कि हॉलीवुड हमें अफॉर्ड नहीं कर सकता।”