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‘अल जजीरा’ के पत्रकार की हत्या पर इस्लामी स्कॉलर ने कहा – ‘काफिर नर्क में जाते हैं, गैर-मुस्लिम के लिए दुआ पढ़ना मना’

इजरायली डिफेंस फोर्स और फिलिस्तीन के लड़ाकों के बीच वेस्ट बैंक में हुई गोलीबारी में मीडिया संस्थान ‘अल जजीरा’ की पत्रकार शिरीन अबू अकलेह (51) की गोली मारकर हत्या करने के दो दिन बाद एक इस्लामी विद्वान ने विवादित बयान दिया है। कामरान नाम के इस्लामी विद्वान ने मुस्लिमों से मारी गई पत्रकार के लिए किसी भी तरह की प्रार्थना नहीं करने के लिए कहने के बाद मामला गर्मा गया है।

‘योर मदरसा‘ नाम के संगठन के संस्थापक कामरान ने शुक्रवार (13 मई) को ट्वीट किया, “मैंने देखा है कि कई सारे मुस्लिम फ़िलिस्तीन में गलत तरीके से मारी गई पत्रकार शिरीन अबू अकलेह के लिए दुआ कर रहे हैं। वह एक ईसाई थी।” मुस्लिम विद्वान ने जोर देकर कहा, “ये केवल एक रिमाइंडर है कि विद्वानों के बीच किसी भी तरह का मतभेद नहीं है कि कोई गैर-मुस्लिमों की मृत्यु के बाद क्षमा और दया के लिए प्रार्थना नहीं कर सकता है।”

कामरान के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

इस्लामिक किताब का हवाला देते हुए कामरान ने दावा किया कि जो मुस्लिम एक काफिर (मुशरिकून) के लिए पश्चाताप करते हैं, वे नरक की आग में जलकर बर्बाद हो जाते हैं।

कामरान ने आगे कहा, “यह पैगंबर और उन लोगों के लिए सही नहीं है जो कि अल्लाह से ‘मुशरिकून’ के लिए माफी माँगते हैं। वे चाहे रिश्तेदार ही हों, उनके लिए ये स्पष्ट है कि वे नर्क में रहने वाले हैं। क्षमा माँगते हैं, भले ही वे रिश्तेदार हों, उनके लिए यह स्पष्ट हो गया है कि वे आग के निवासी हैं। [9: 113 ]।” मुस्लिम विद्वान का कहना था कि लोगों को अपनी जागरूकता को बढ़ाकर अन्याय के खिलाफ खड़े हों? हाँ। उसके लिए दुआ करें? नहीं।”

कामरान के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

फिर क्या था, इस ट्वीट के बाद इस्लामिक विद्वान के फॉलोवर्स ने ‘अल जजीरा’ की पत्रकार के धर्म पर चर्चा करना शुरू कर दिया। इसी क्रम में एक और इस्लामिस्ट ने पूछा, “जब पैगम्बर को अपनी अम्मी के लिए दुआ माँगने का अधिकार नहीं था, तो कोई कैसे किसी मरी हुई काफिर के लिए दुआ करने का दुस्साहस कैसे कर सकता है। आपके लिए ज्यादा अहम कौन है? उनकी अम्मी या फिर एक ईसाई पत्रकार जो जज़ीरा के लिए काम करती हैं? जाहिर है उनकी अम्मी।”

ट्वीट का स्क्रीनशॉट

इसी तरह से एक अन्य ट्विटर यूजर ने इस बात पर आश्चर्य जताया कि शिरीन अबू अकलेह सही में ‘काफिर’ थीं। इस शब्द का इस्तेमाल दुनियाभर के इस्लामिस्ट गैर-मुस्लिमों को प्रताड़ित करने के लिए व्यापक रूप से करते है।

ट्वीट का स्क्रीनशॉट

इसी क्रम में कई और इस्मावादियों ने ये जानने के लिए ट्वीट किया कि क्या सही में अल जज़ीरा की मृत पत्रकार गैर-मुस्लिम थीं।

ट्वीट का स्क्रीनशॉट

शिरीन अबू अकलेह की हत्या

वेस्ट बैंक में इजरायल की डिफेंस फोर्स और फिलिस्तीन के लड़ाकों के बीच इसी साल 11 मई 2022 को गोलीबारी हो रही थी और जेनिन शहर में अल जजीरा की पत्रकार शिरीन अबू अकलेह रिपोर्टिंग कर रही थीं। उसी दौरान उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस घटना की आलोचना करते हुए अल जजीरा ने एक बयान जारी कर कहा था कि पत्रकार की हत्या अंतरराष्ट्रीय कानूनों उल्लंघन है।

अबू अकलेह की हत्या को जघन्य अपराध करार देते हुए अल जजीरा ने कहा, “हम दिवंगत साथी शिरीन की हत्या के लिए इजरायली सरकार और कब्जा कर रही फौजों को जिम्मेदार ठहराते हैं।” इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अबू अकलेह की टारगेटेड किलिंग के लिए इजरायली डिफेंस फोर्स को जिम्मदार ठहराया है। इस घटना के बाद न्यूयॉर्क टाइम्स को भी अपनी हेडलाइन को भी बदलना पड़ा था।

अलीगढ़ के जामा मस्जिद को तोड़ कर हटाने की माँग, RTI से खुलासा – ‘सार्वजनिक स्थान पर बनी है’, भड़की सपा ने कहा – ‘पागल, गंदी सोच’

UP के अलीगढ़ जिले में जामा मस्जिद के पब्लिक प्लेस पर बने होने का दावा किया गया है। यह दावा RTI से मिले एक जवाब के बाद किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि केशव दत्त शर्मा द्वारा सूचना के अधिकारी के तहत माँगे गए जवाब में नगर निगम ने स्वीकार किया है कि जामा मस्जिद सार्वजनिक स्थान पर बनी हुई है। अब इस मस्जिद को तोड़ने के लिए DM (जिलाधिकारी) को पत्र लिखा गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मस्जिद अलीगढ़ के ऊपरकोट इलाके में है। यह 300 साल पुरानी बताई जा रही है। भाजपा नेताओं ने भी अब इस मस्जिद के खिलाफ आवाज उठानी शुरू कर दी है। उन्होंने मस्जिद को अवैध बताया और तोड़ने की माँग की जबकि समाजवादी पार्टी ने इसे जनहित मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश करार दिया है।

RTI एक्टिविस्ट केशव ने’ जन सूचना अधिकार अधिनियम’ के तहत जून 2021 में ये सवाल किए थे। इस RTI में यह भी पूछा गया था कि जमीन किसकी है और इसका टैक्स कितना भरा जाता है? इन सवालों के जवाब में अलीगढ़ नगर निगम ने जवाब दिया कि जामा मस्जिद जिस स्थान पर बनी है, वहाँ का मालिकाना हक किसी के भी पास नहीं है और वो सार्वजनिक स्थान पर बनी हुई है। नगर निगम द्वारा जवाब मिलने के बाद RTI एक्टिविस्ट ने 8 मई 2022 को अलीगढ़ के DM के साथ आयुक्त, नगर निगम कमिश्नर, और विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष को लेटर जामा मस्जिद को सार्वजनिक भूमि पर कब्ज़ा बताया। इसी के साथ उन्होंने पत्र में लिखा है कि यदि 15 दिनों के अंदर स्थानीय प्रशासन ने मस्जिद के कब्ज़े से सार्वजनिक भूमि न मुक्त करवाई तो वो अदालत जाएँगे।

इस पूरे विवाद में भाजपा नेता और अलीगढ़ की पूर्व मेयर का शकुंतला भारती भी बयान आया है। उन्होंने कहा, “अगर नगर निगम इस बात को स्वीकार कर रहा है कि जामा मस्जिद सार्वजनिक भूमि पर बनी है तो उसको टूटना चाहिए। इसके लिए मैं सरकार को पत्र लिखूँगी। इसी के साथ मैं इस बात से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी अवगत करवाऊँगी।”

अलीगढ़ के नगर आयुक्त गौरांग राठी के मुताबिक, “किसी भी पार्टी का हमें कोई भी पत्र प्राप्त नहीं हुआ है। RTI में जो जवाब माँगा गया था हमने उसका सही जवाब दिया है। अभी किसी भी धर्मस्थल पर कोई भी कार्रवाई पर विचार नहीं हो रहा है। फिलहाल नगर निगम सिर्फ अतिक्रमण विरोधी अभियान पोखर की जमीन से अवैध कब्जे और सफाई व्यवस्था करने के लिए चला रहा है।” वहीं अलीगढ़ के ADM ने इस मुद्दे पर कहा, “हमारे पास कोई शिकायत नहीं आई है। न ही इस मामले की कोई जाँच पेंडिंग है। 300 साल पुरानी उस मस्जिद पर कोई विवाद नहीं है। RTI में जो सूचना माँगी गई थी वो दी गई। यदि कोई शिकायत मिलेगी तो उस पर नियमानुसार जाँच करवाई जाएगी।”

समाजवादी पार्टी के नेता और पूर्व विधायक जमीर उल्लाह ने इस मामले में भाजपा पर लोगों को आम मुद्दे से भटकने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा, “यह मस्जिद सन 1728 में बनाई गई थी। तब साबित खान राज्यपाल थे। तब नगर निगम और भाजपा कोई नहीं था। RTI डालने वाले की ही मंशा गलत है और वो माहौल खराब करना चाहता है। वो लोग पागल हैं जो इस मस्जिद को तोड़ने की बात करते हैं। उनकी सोच गंदी है। जामा मस्जिद को सरकार का संरक्षण है। यह और किला सरकार के गज़ट में है।”

फिर मुगलों के गुणगान पर उतरे जावेद अख्तर, अकबर को भारतीय बताते हुए तारिक फतह को कहा ‘Shut Up’: अमेरिका वाली बात से हुई बोलती बंद

पटकथा लेखक से गीतकार और फिर ट्विटर ट्रोल तक का सफर तय करने वाले जावेद अख्तर ने एक बार फिर से मुगलों का महिमामंडन किया है। इस बार उन्होंने अकबर को आक्रांता मानने से इनकार कर दिया। ये सब तब शुरू हुआ, जब इस्लामी इतिहास के जानकर तारिक फतह ने ‘गरुड़ प्रकाशन’ के संस्थापक संक्रांत सानु का एक उद्धरण शेयर किया। आक्रांताओं की आलोचना को जावेद अख्तर बर्दाश्त नहीं कर पाए और टपक पड़े।

तारिक फतह ने संक्रांत सानु का जो उद्धरण ट्वीट किया, वो है, “भारत एकमात्र ऐसी मुख्य सभ्यता है, जहाँ आपको व्यवस्थित तरीके से ये पढ़ाया जाता है कि आप अपनी ही विरासत से घृणा करें और इसे तबाह करने वाले आक्रांताओं का गुणगान करें। और इस (मूर्खता को) सेक्युलरिज्म कहा जाता है।” इस पर जावेद अख्तर ने पूछा कि क्या आप अमेरिका में हर एक श्वेत व्यक्ति को आक्रांता कहेंगे और उनके वंशजों को विदेशी बताएँगे?

उन्होंने आगे दावा किया कि अकबर एक भारतीय था, लेकिन आपके (तारिक फतह) माता-पिता भारतीय नहीं थे क्योंकि उन्होंने पाकिस्तान में जाकर बसने का निर्णय लिया। जावेद अख्तर ने लिखा कि तारिक फतह सऊदी अरब में 11 वर्षों तक सुविधापूर्वक जीवन व्यतीत करने के बाद सेक्युलरिज्म का पाठ पढ़ा रहे हैं। साथ ही उन्होंने अंत में ‘Just Shut Up (एकदम चुप रहो)’ भी लिखा। तारिक फतह ने इसके बाद तगड़ा जवाब दिया।

उन्होंने लिखा, “जावेद अख्तर इस्लामी आक्रमण और हिंदुस्तान की तबाही के मुद्दे पर बहस करते समय नाली में गिरना पसंद करते हैं। मैंने जो संक्रांत सानु का उद्धरण शेयर किया था, उस पर जवाब देने की बजाए वो मुझे चुप रहने के लिए कह रहे हैं। मुझे बताया गया है कि जावेद अख्तर के पूर्वक अरब के थे, जिनका वंश खलीफा तक जाता है।” इस पर जावेद अख्तर कहने लगे कि उन्होंने तीन दशकों से भी अधिक समय से तीन तलाक, पर्दा प्रथा और मस्जिदों में लाउडस्पीकर का विरोध किया है।

लेकिन, साथ ही जावेद अख्तर ने ये भी कहा कि वो ‘कट्टरपंथी हिन्दू समूह’ का भी विरोध करते हैं और यही धर्मनिरपेक्षता है। उन्होंने तारिक फतह को एक ‘रीढ़विहीन मौकापरस्त’ करार देते हुए कहा कि वो ‘सत्ता के जूते चाटने वाले’ के अलावा और कुछ भी नहीं हैं। संक्रांत सानु ने भी जावेद अख्तर को याद दिलाया कि उत्तरी अमेरिका में किसी बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम से पहले वहाँ के मूल निवासियों के सम्मान में ‘लैंड एक्नॉलेजमेंट’ होता है, सोचिए ये भारत में भी हमारी जमीन पर बने मस्जिदों में नमाज से पहले हो?

ज्ञानवापी विवादित ढाँचे के गुंबद पर चढ़ वीडियोग्राफी, नमाज वाली जगह का भी सर्वे: तहखाने में मिली सुरंग, एक और कमरा भी सामने आया

उत्तर प्रदेश के वाराणसी (Varanasi, Uttar Pradesh) के विवादित ज्ञानवापी ढाँचे (Gyanvapi) में आज रविवार (15 मई 2022) को सर्वे और वीडियोग्राफी का काम दूसरे दिन भी पूरा हो गया। तहखाने के नीचे एक सुंरग और एक अन्य कमरा मिला है, जिसमें मलबा भरा हुआ है। वहीं, ढाँचे के गुंबद, पश्चिमी दीवार और नमाज की जगह का सर्वे किया गया। हालाँकि, ढाँचा परिसर में मौजूद वजूखाने के पास तालाब को लेकर हिंदू और मुस्लिम पक्ष में विवाद भी हुआ। हिंदू पक्ष का कहना था कि तालाब का पानी निकालकर इसकी वीडियोग्राफी की जाए, जबकि पानी निकालने का मुस्लिम पक्ष ने विरोध किया। 

दूसरे दिन के सर्वे में मस्जिद के गुंबदों और नमाज वाली जगह की वीडियोग्राफी की गई। इस दौरान टीम ने ढाँचे की छत पर चढ़कर दीवारों को देखा। गुंबद पर जाने के लिए ढाँचे के पश्चिमी दीवार की तरफ बने एक दरवाजे का ताला खोला गया। यह दरवाजा 3.5 फीट का है। जिसके जरिए कमीशन की टीम गुंबद तक पहुँची।

इसके अलावा, जिस मिट्टी का जिक्र ASI को सर्वे करने के आदेश में किया गया था, उसकी भी वीडियोग्राफी करवाई गई है। सबसे बड़ी बात है कि आज दूसरे दिन के सर्वे में तहखाने के अंदर एक सुरंग मिली है। टीम ने इसकी भी वीडियोग्राफी की है। माना जा रहा है कि सर्वे का पूरा काम आज ही पूरा हो जाएगा। हालाँकि, इसको लेकर किसी तरह का बयान अभी सामने नहीं आया है।

बता दें कि ढाँचे के तहखानों के बंद तालों की चाबी 16 साल बाद समाने आई है। इसके पहले जनवरी 1993 में विवाद के बाद तहखानों में ताले बंद करके चाबी को राजकीय कोषागार में जमा करा दिया गया था। हालाँकि, साल 2006 में किसी कारणवश इसे निकालकर पुलिस को दी गई थी। यही कारण है कि चाबी नहीं मिलने पर न्यायालय ने ताला तोड़ने के लिए कहा था।

अमर उजाला के अनुसार, न्यायालय द्वारा अधिकृत कमीशन की कार्रवाई खत्म होने के बाद इस चाबी को अंजुमन इंतजामिया मस्जिद कमिटी के हवाले कर दिया जाएगा और ये उन्हीं के पास रहेंगी। दरअसल, जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा था कि अगर किसी के पास चाबी है तो लाकर दे, नहीं ताला तोड़कर काम पूरा किया जाएगा और फिर ताला लगाकर कोषागार में जमा कर दिया जाएगा। इसके बाद मस्जिद कमिटी ने चाबी सौंप दिया था। इसके बाद मुस्लिम पक्ष ने कमीशन को चाबी सौंपा। इसके पहले मुस्लिम पक्ष ने चाबी होने से इनकार कर दिया था।

वहीं, खाता संख्या 9130 को मापने के लिए तहसील की ओर से टीम का गठन किया गया है। तहसील में दर्ज रिकॉर्ड को कमीशन की कार्यवाही में शामिल किया गया है। बता दें कि इस कार्यवाही की रिपोर्ट 17 मई तक अदालत में प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया है।

‘विश्व वैदिक सनातन संघ’ के अध्यक्ष जितेंद्र सिंह बिसेन ने कहा था कि ज्ञानवापी विवादित ढाँचे में सर्वे और वीडियोग्राफ़ी के दौरान ऐसी-ऐसी चीजें मिलीं, जो सभी लोगों की कल्पना से परे और उम्मीद से बहुत ज्यादा मिला है। उन्होंने जानकारी दी कि जहाँ कुछ तालों को खोलना पड़ा, वहीं कुछ को तोड़ना पड़ा। उन्होंने बताया कि सर्वे के लिए भी बहुत कुछ है। उन्होंने बताया कि सर्वे की रिपोर्ट भी सबके सामने आएगी। शनिवार को हुए सर्वे में दीवारों पर दिखे स्वास्तिक और त्रिशूल के चिन्ह मिलने के दावे किए गए हैं।

बंदूक चलाने वाला आतंकी बना प्रोफेसर, बुरहान वानी की मौत पर जमा की थी भीड़: अब हुआ बर्खास्त, कश्मीरी छात्र कह रहे – वापस लाओ

आतंकियों से साठ-गाँठ रखने वाले कश्मीर यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अल्ताफ हुसैन पंडित को बर्खास्त कर दिया गया है। उस पर न सिर्फ सक्रिय आतंकी गतिविधियों में शामिल रहने बल्कि बुरहान वानी के मारे जाने के बाद सरकार विरोधी प्रदर्शनों में शामिल रहने का भी आरोप है।

बताया जा रहा है कि कश्मीर यूनिवर्सिटी में अल्ताफ हुसैन पंडित ने अपनी नियुक्ति के दौरान कैरेक्टर वेरिफिकेशन के सभी प्रक्रियाओं का पालन भी ठीक से नहीं किया था। यह बर्खास्तगी शुक्रवार (14 मई 2022) को की गई है।

टाइम्स ऑफ़ इंडिया के मुताबिक प्रोफेसर अल्ताफ हुसैन साल 1990 से 1993 तक आतंकी समूह JKLF (जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट) का सक्रिय सदस्य था। इसके बाद वो 2015 से 2017 तक कश्मीर यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन (KUTA) का मेंबर बना। अल्ताफ इसी KUTA का उपाध्यक्ष 2017 से 2018 तक रहा था। वो सरकार के खिलाफ होने वाले कई प्रदर्शनों में प्रमुखता से शामिल रहता था।

प्रोफेसर अल्ताफ हुसैन पंडित ने हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकी बुरहान वानी की मौत के बाद साल 2016 में होने वाले प्रदर्शन के लिए कॉलेज के छात्रों की भीड़ जमा की थी। खुद भी इसमें शामिल रहा था। इसके अलावा वो कश्मीर यूनिवर्सिटी का कैलेंडर भी इस तरह बनाने के प्रयास में रहता था ताकि गिलानी के द्वारा किए जाने वाले विरोध-प्रदर्शनों के समय कॉलेज-यूनिवर्सिटी बंद रहें, वहाँ के लड़के ज्यादा से ज्यादा इनमें शामिल हो सकें।

अल्ताफ के खिलाफ जाँच कर रही कमेटी ने यह भी पाया कि उसने प्रोफेसर के तौर पर नियुक्ति के लिए जरूरी कैरेक्टर वेरिफिकेशन भी नहीं करवाया था। यह वेरिफिकेशन हर सरकारी सेवा में भर्ती होने से पहले जरूरी होता है। जम्मू-कश्मीर सरकार के एक सीनियर अधिकारी के मुताबिक, “एक जाँच से पता चला है कि अल्ताफ उन सैकड़ों लोगों में से एक था, जो सरकारी विरोधी कार्यों को करने के बाद भी सरकारी नौकरी में शामिल हो गया। ऐसा इसलिए हो पाया क्योकि सिस्टम ही दूषित हो चुका था।”

अल्ताफ को उसकी हरकतों के चलते कश्मीर यूनिवर्सिटी का गिलानी कहा जाता था। वो न सिर्फ कश्मीर के प्रशासन में बल्कि वहाँ के छात्रों में हुर्रियत की विचारधारा को फैला रहा था। वह छात्रों को कभी डर और कभी सपोर्ट के बहाने पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित भारत विरोधी प्रदर्शनों के लिए तैयार करता था। जाँच एजेंसियों का दावा है कि अल्ताफ हुसैन इस बात से दुखी था कि साल 2016 के बाद कश्मीर यूनिवर्सिटी का कोई भी छात्र प्रदर्शन के दौरान मरा क्यों नहीं।

प्रोफेसर अल्ताफ हुसैन पंडित ने MSC तक पढ़ाई की है। उसने रसायन विज्ञान में पीएचडी के लिए एप्लाई कर रखा है। वह साल 2004 में कश्मीर यूनिवर्सिटी में बतौर असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती हुआ था। अल्ताफ मूल रूप से सोपोर के वदूरा का रहने वाला है। बचपन से वह अलगाववादी सैयद अली शाह गिलानी और गुलाम मोहम्मद भट की सोच से प्रभावित था। वह सन 1990 में सीमा पर से हथियार चलाने की ट्रेनिंग भी ले कर आया था और बाद में JKLF का सक्रिय आतंकी बन गया था। बाद में वह अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के लिए गया। इस दौरान वो जमात ए इस्लामी से जुड़ा रहा।

अल्ताफ कश्मीर यूनिवर्सिटी का सिस्टम पाकिस्तान के हिसाब से चलाना चाहता था। साल 2016 से कश्मीर यूनिवर्सिटी के 3 छात्र और एक असिस्टेंट प्रोफेसर आतंकी संगठन ज्वाइन कर चुके हैं। छात्रों के नाम इमरान नबी, शौकत अहमद भट और मोहम्मद आमिर मलिक हैं जबकि असिटेंट प्रोफेसर का नाम रफीक भट है। बताया जा रहा है कि एजेंसियों ने पहले ही अल्ताफ के बारे में चेतावनी दी थी कि वो अपनी भारत विरोधी विचारधारा कई लोगों के दिमाग में डाल रहा है।

कश्मीर यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अल्ताफ हुसैन पंडित को बर्खास्त किए जाने से इस यूनिवर्सिटी के कुछ छात्र नाराज हैं। वो धरने पर बैठे हैं। उनका कहना है कि बर्खास्त किए प्रोफेसर को वापस नौकरी पर लाओ।

20 साल की औरत 36 साल तक मर्द बन कर रही, पहनती थी शर्ट और लुंगी: शादी के 15 दिन बाद ही पति की हो गई थी मौत

मछली और मोतियों के उत्पादन के लिए प्रसिद्ध तमिलनाडु के तूतूकूड़ी (Thoothukudi, Tamil Nadu) में एक महिला ने दावा किया है कि उसने 36 साल एक पुरुष के वेश में जीवन जिया है। महिला का कहना है कि अपनी इकलौती बेटी को सुरक्षित रूप से पालने के लिए उसने ऐसा किया, ताकि बुरे लोगों से बचा जा सके।

तूतूकूड़ी शहर से 30 किलोमीटर दूर स्थित कट्टनायकनपट्टी गाँव की रहने वाली एस पेटीअम्मल ने अपने पति की आकस्मिक मौत के बाद इकलौती बेटी को पालने के लिए कई तरह के संघर्ष किए। इस दौरान उन्हें कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, जिनमें यौन ताने सुनना भी शामिल है। इस सब स्थितियों को देखते हुए उन्होंने एक निर्णय लिया और समाज के सामने ‘मुथु’ नाम की एक पुरुष बन गईं।

न्यू इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए पेटीअम्मल ने कहा, “शादी के 15 दिन बाद ही मैंने अपने पति शिव को खो दिया। तब मैं सिर्फ 20 साल की थी। इसी दौरान मैंने अपनी बेटी षडमुंगसुंदरी को जन्म दिया। मैंने फिर से शादी नहीं करने का फैसला किया, लेकिन अकेले बच्चे की परवरिश करना मुश्किल हो गया। मैंने निर्माण स्थलों, होटलों और चाय की दुकानों में काम किया, लेकिन मुझे इन सभी जगहों पर प्रताड़ना झेलनी पड़ी।”

एक युवा अकेली महिला के रूप में समाज के नजरिए और जीवन की कठिनाइयों को देखते हुए पेटीअम्मल तिरुचेंदूर मुरुगन मंदिर गई और वहाँ उन्होंने अपनी पूरी वेश-भूषा बदल ली। उन्होंने साड़ी को छोड़कर शर्ट और लुंगी पहन लिया और खुद का नाम मुथु देकर समाज के सामने एक पुरुष के रूप में सामने आई।

अपनी असली पहचान को छिपाए रखने की बात को लेकर पेटीअम्मल ने बताया, “हम 20 साल पहले कट्टुनायक्कनपट्टी में बस गए थे। केवल मेरे घर आने वाले करीबी रिश्तेदार और मेरी बेटी को पता था कि मैं एक महिला हूँ।”

पेटीअम्मल की बेटी षडमुंगसुंदरी की शादी हो गई, लेकिन पेटीअम्मल अब भी अपनी पहचान बदलना नहीं चाहती हैं। उनका कहना है कि इस पहचान ने उनकी बेटी को सुरक्षित जीवन दिया। इसलिए वह मरते दम तक वह मुथु ही रहेंगी। वहीं, उनका आधार कार्ड, राशन कार्ड और वोटर आईडी पुरुष के रूप में हैं। हालाँकि, अब उन्होंने मनरेगा जॉब में उन्होंने महिला पहचान दिया है, क्योंकि उनसे अब कड़ी मेहनत वाला काम नहीं हो पाता।

उन्होंने कहा कि उनके पास न घर है और ही बचत की कोई रकम। उन्होंने सरकार से सहायता की माँग की है। वहीं, कलेक्टर ने मामले की जाँच करने के बाद उन्हें किसी सामाजिक कल्याण योजना से जोड़ने की बात कही है।

जिस गड्ढे में अपना दूध छलका रही थी गाय, वहीं से निकले गोरक्षनाथ: भभूत और गोबर से जुड़ी है गुरु गोरखनाथ के जन्म की रहस्यगाथा

गुरु गोरखनाथ या गोरक्षनाथ का जन्म वैशाख माह की पूर्णिमा के दिन हुआ था। अंग्रेजी माह के अनुसार इस बार 16 मई, 2022 को उनका जन्मदिन या प्रकटोत्सव मनाया जा रहा है। हालाँकि, जितना उनके जन्म के समय पर मतभेद है उतना ही उनके जन्म की कहानी पर भी। पुराणों के अनुसार जहाँ गोरखनाथ को भगवान शिव का अवतार बताया जाता है, वहीं उन्हें नाथ संप्रदाय को ऊँचाई पर पहुँचाने के साथ ही योग, प्राणायाम आदि का जनक भी बताया जाता है। बता दें कि शैव संप्रदाय के अंतर्गत ही शाक्त, नाथ और संत संप्रदाय आते हैं। उन्हीं में दसनामी और 12 गोरखपंथी व नाथ संप्रदाय भी शामिल हैं।

बाबा गोरखनाथ और उनके गुरु मत्स्येंद्रनाथ के समय के बारे में भारत में अनेक विद्वानों ने अनेक प्रकार की बातें कही हैं। समय का मतभेद तो विद्वानों में है ही यदि जन्म की प्रक्रिया पर आएँ तो वह कहानी भी कम रोचक नहीं है। आइए गुरु मत्स्येन्द्रनाथ के मानस पुत्र सिद्ध योगी गुरु गोरखनाथ के जन्म की कहानी पर बात कर लेते हैं।

गुरु गोरखनाथ का जन्म

मान्यता के अनुसार, कहा जाता है कि एक बार गुरु मत्स्येन्द्रनाथ भिक्षा माँगने एक गाँव गए। एक घर में भिक्षा देते हुए उन्हें एक उदास स्त्री दिखाई दी तो गुरु ने पूछा क्या समस्या है? स्त्री ने जवाब दिया कि मेरी कोई संतान नहीं है। उस स्त्री को परेशान देख गुरु मत्स्येन्द्रनाथ ने उसे अभिमंत्रित कर एक चुटकी भभूत दी और पुत्र प्राप्ति का आशीर्वाद देकर चले गए।

कहते हैं कि लगभग 12 साल बाद गुरु मत्स्येन्द्रनाथ जब पुनः उसी गाँव में उस स्त्री के घर भिक्षा माँगने पहुँचे, तो दरवाजे के बाहर से ही आवाज लगाकर स्त्री को बुलाया कि अब तो तेरा बालक 12 साल का हो गया होगा।

पर वास्तिकता से अनजान वह स्त्री गुरु मत्स्येन्द्रनाथ की सिद्धियों से भी अनजान थी। इसलिए कहा जाता है कि उस महिला ने उस भभूत को खाने के बजाय गोबर में फेंक दिया था। लेकिन कहते हैं कि गुरु मत्स्येन्द्रनाथ की सिद्धि इतनी प्रबल थी भभूत बेकार नहीं जाती। वहीं स्त्री उनका तेज देखकर घबरा गई और डरते हुए सारी बात बता दी कि कहाँ गोबर में फेंक दिया है।

गुरु मत्स्येन्द्र नाथ ने कहा, दिखाओ जहाँ फेका है। गुरु जब वहाँ जाते हैं तो देखते हैं कि एक गाय गोबर से भरे गड्ढे के ऊपर खड़ी है और अपना दूध उस गड्ढे में छलका रही है। तब गुरु ने उस स्थान पर बालक को आवाज लगाई। कहा जाता है कि गुरु मत्स्येन्द्रनाथ की आवाज सुनते ही उस गोबर वाले गड्ढे से एक 12 साल का सुन्दर बालक बाहर आ जाता है। और हाथ जोड़कर गुरु के सामने खड़ा हो जाता है।

इस प्रकार कहा जाता है कि बाबा गोरखनाथ का जन्म स्त्री के गर्भ से नहीं बल्कि कुछ दूसरी प्रक्रिया से ही हुआ था। इसलिए उनका नाम गोरक्षनाथ पड़ा। साथ ही उनके जन्म की प्रक्रिया को अवतारों से भी जोड़ा जाता है। उन्हें भगवान शिव का अवतार माना जाता है। आगे कथा के अनुसार, इस 12 साल के बालक को गुरु मत्स्येन्द्रनाथ अपने साथ लेकर चले गए। और यही बालक आगे जाकर हठयोगी गुरु गोरखनाथ बना।

गोरख वाणी

बता दें कि गुरु गोरखनाथ ने ही नाथ योग, आसान, प्राणायाम, षट्कर्म, मुद्रा, नादानुसंधान, कुण्डलिनी आदि योग और प्राणायाम की परम्पपराएँ शुरू की थी। ये योग साधनाएँ गुरु गोरखनाथ की ही देन हैं। जहाँ गुरु गोरखनाथ ने नाथ सम्प्प्रदाय शुरू की थी, वहीं गोरखनाथ के हठयोग की परम्परा को आगे बढ़ाने वाले सिद्ध योगियों में प्रमुख हैं- चौरंगीनाथ, गोपीनाथ, चुणकरनाथ, भर्तृहरि, जालन्ध्रीपाव आदि। 13वीं सदी में इन्होंने गोरख वाणी का प्रचार-प्रसार किया था। यह एकेश्वरवाद पर बल देते थे, ब्रह्मवादी थे तथा ईश्वर के साकार रूप शिव के अलावा कुछ भी सत्य नहीं मानते थे।

1.लूहिपा, 2.लोल्लप, 3.विरूपा, 4.डोम्भीपा, 5.शबरीपा, 6.सरहपा, 7.कंकालीपा, 8.मीनपा, 9.गोरक्षपा, 10.चोरंगीपा, 11.वीणापा, 12.शांतिपा, 13.तंतिपा, 14.चमरिपा, 15.खंड्‍पा, 16.नागार्जुन, 17.कराहपा, 18.कर्णरिया, 19.थगनपा, 20.नारोपा, 21.शलिपा, 22.तिलोपा, 23.छत्रपा, 24.भद्रपा, 25.दोखंधिपा, 26.अजोगिपा, 27.कालपा, 28.घोम्भिपा, 29.कंकणपा, 30.कमरिपा, 31.डेंगिपा, 32.भदेपा, 33.तंघेपा, 34.कुकरिपा, 35.कुसूलिपा, 36.धर्मपा, 37.महीपा, 38.अचिंतिपा, 39.भलहपा, 40.नलिनपा, 41.भुसुकपा, 42.इंद्रभूति, 43.मेकोपा, 44.कुड़ालिया, 45.कमरिपा, 46.जालंधरपा, 47.राहुलपा, 48.धर्मरिया, 49.धोकरिया, 50.मेदिनीपा, 51.पंकजपा, 52.घटापा, 53.जोगीपा, 54.चेलुकपा, 55.गुंडरिया, 56.लुचिकपा, 57.निर्गुणपा, 58.जयानंत, 59.चर्पटीपा, 60.चंपकपा, 61.भिखनपा, 62.भलिपा, 63.कुमरिया, 64.जबरिया, 65.मणिभद्रा, 66.मेखला, 67.कनखलपा, 68.कलकलपा, 69.कंतलिया, 70.धहुलिपा, 71.उधलिपा, 72.कपालपा, 73.किलपा, 74.सागरपा, 75.सर्वभक्षपा, 76.नागोबोधिपा, 77.दारिकपा, 78.पुतलिपा, 79.पनहपा, 80.कोकालिपा, 81.अनंगपा, 82.लक्ष्मीकरा, 83.समुदपा और 84.भलिपा।

इन नामों के अंत में जो ‘पा’ प्रत्यय लगा है, वह संस्कृत शब्द ‘पाद’ का लघुरूप है। नवनाथ की परंपरा के इन सिद्धों की परंपरा के कारण ही मध्यकाल में हिन्दू, बौद्ध और जैन धर्म के अस्तित्व की रक्षा होती रही। इन सिद्धों के कारण ही अन्य धर्म के संतों की परंपरा भी शुरू हुई थी। इसलिए आज भी इन सिद्धों के इतिहास को संरक्षित किए जाने पर जोर दिया जाता है।

नाथ संप्रदाय

नाथ सम्प्रदाय गुरु गोरखनाथ से भी पुराना है। इसके प्रमाण स्वरुप में यह कहा जाता है कि भगवान शंकर को ‘भोलेनाथ’ और ‘आदिनाथ’ भी कहा जाता है। आदिनाथ होने के कारण उनका एक नाम आदिश भी है। इस आदिश शब्द से ही आदेश शब्द बना है। जहाँ भगवान शंकर की परंपरा को उनके शिष्यों बृहस्पति, विशालाक्ष (शिव), शुक्र, सहस्राक्ष, महेन्द्र, प्राचेतस मनु, भरद्वाज, अगस्त्य मुनि, गौरशिरस मुनि, नंदी, कार्तिकेय, भैरवनाथ आदि ने आगे बढ़ाया। वहीं भगवान शंकर के बाद इस परंपरा में सबसे बड़ा नाम भगवान दत्तात्रेय का आता है। दत्तात्रेय को आदिगुरु भी माना जाता है।

भगवान दत्तात्रेय के बाद सिद्ध संत गुरु मत्स्येन्द्रनाथ ने ‘नाथ’ परंपरा को फिर से संगठित करके पुन: उसकी धारा को अबाध गति से आगे बढ़ाने का कार्य किया। वहीं गुरु मत्स्येन्द्रनाथ के बाद उनके शिष्य गुरु गोरखनाथ ने ‘नाथ’ परंपरा को एक नई बुलंदियों पपर पहुँचाया। कहा जाता है कि उनके लाखों शिष्यों में हजारों उनके जैसे ही उच्च कोटि के सिद्ध होते थे।

गोरखपंथ

गुरु गोरखनाथ के संप्रदाय की मुख्य 12 शाखाएँ हैं- 1. भुज के कंठरनाथ, 2. पागलनाथ, 3. रावल, 4. पंख या पंक, 5. वन, 6. गोपाल या राम, 7. चांदनाथ कपिलानी, 8. हेठनाथ, 9. आई पंथ, 10. वेराग पंथ, 11. जैपुर के पावनाथ और 12. घजनाथ।

गौरतलब है कि गुरु गोरखनाथ जी के नाम से ही नेपाल के गोरखाओं को गोरखा नाम मिला। नेपाल में एक जिला है गोरखा, उस जिले का नाम गोरखा भी गुरु गोरखनाथ के नाम पर ही पड़ा। ऐसी मान्यता है कि गुरु गोरखनाथ सबसे पहले यहीं दिखे थे। नेपाल के गोरखा जिला में एक गुफा है, जहाँ गोरखनाथ का पग चिन्ह है और उनकी एक मूर्ति भी है। यहाँ हर साल वैशाख पूर्णिमा को एक उत्सव मनाया जाता है जिसे ‘रोट महोत्सव’ कहते हैं और यहाँ मेला भी लगता है। गुरू गोरक्ष नाथ जी का एक स्थान उच्चे टीले गोगा मेड़ी, राजस्थान हनुमानगढ़ जिले में भी है। वहीं गोरखपुर में विशाल मठ और मंदिर तो है ही।

स्टिकी बम से वैष्णो देवी जाने वाले बस में आतंकियों ने लगाई आग, J&K फ्रीडम फाइटर्स आतंकी समूह ने ली जिम्मेदारी: रिपोर्ट

जम्मू कश्मीर में माँ वैष्णो देवी के श्रद्धालुओं से भरी एक बस में 13 मई 2022 (शुक्रवार) को आग लग गई थी। इस यह बस कटरा से जम्मू की तरफ जा रही थी। इस अग्निकांड में 4 लोगों की मौत हो गई थी। 20 अन्य लोग झुलस गए थे। इस घटना को लेकर सुरक्षा विशेषज्ञ रिटायर्ड ब्रिगेडियर हेमंत महाजन ने आतंकी एंगल होने का दावा किया है। इस बीच NIA की टीम ने घटनास्थल पर जा कर जाँच की है।

14 मई 2022 (शनिवार) को रिपब्लिक न्यूज़ पर उन्होंने कहा, “अगर आप अमरनाथ यात्रा या अन्य धर्मिक यात्राओं का इतिहास देखें तो पाएँगे कि आतंकियों ने अलग-अलग मौकों पर हमले के कई तरीके अपनाए हैं। आज के समय में आतंकी सीधे सेना से मुकाबला करने की स्थिति में नहीं हैं। इसलिए उन्होंने सॉफ्ट टारगेट तलाशने शुरू कर दिए हैं। इसी कड़ी में उन्होंने पहले राहुल भट को मारा। इसके बाद नए ज्वाइन किए पुलिस कॉन्स्टेबल को मारा।”

ब्रिगेडियर हेमंत (रिटायर्ड) ने आगे कहा, “शत-प्रतिशत सुरक्षा देना आसान काम नहीं है। बस में बारूद भरना आतंकियों के लिए कोई मुश्किल काम नहीं है। ये तो तय है कि आतंकी हमले के हर तरीके आजमाएँगे। लेकिन बड़ा सवाल ये है कि इससे बचाव के लिए हमने कदम क्या उठाए हैं? ऐसे मामले में समय रहते ख़ुफ़िया जानकारियाँ जुटाना पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। इसी के साथ देश भर के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले तीर्थयात्रियों को यह सिखाना होगा कि किसी आपात स्थिति में आपको क्या करना है।”

ब्रिगेडियर (रिटायर्ड) महाजन ने आगे कहा, “लोगों को पता होना चहिए कि बस में आग लगने, किसी अन्य के द्वारा गोली चलाने, किसी का ब्लड प्रेशर बिगड़ने या किसी अन्य प्रकार की अनहोनी होने पर उनको क्या करना है। हर वो यात्री जो जम्मू रेलवे स्टेशन, जम्मू एयरपोर्ट या जम्मू बस अड्डे से बाहर निकल कर कहीं के लिए आगे बढ़ रहा है तो वो इन हालातों से निबटने के लिए अपनी तैयारी रखे। वो ध्यान रखे कि आगे किस प्रकार के खतरे मिल सकते हैं और उनका उपाय क्या है। सुरक्षाकर्मियों को भी चाहिए कि हर संदिग्ध पर नजर रखें और हर बस को अच्छे से चेक करें।”

NIA की टीम ने घटनास्थल का दौरा किया है। इस दौरान टीम ने सैम्पल जुटाए हैं। मीडिया रिपोर्ट की मानें तो बस में आग लगाने के लिए आतंकियों ने स्टिकी बम (ऐसा बम जिसे आसानी से चिपकाया जा सकता है) का प्रयोग किया। कई सारे मीडिया ने अपने सूत्र के हवाले से यह जानकारी दी है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार “जे एंड के फ्रीडम फाइटर्स” नाम के आतंकी समूह ने इस घटना को अंजाम देने की जिम्मेदारी ली है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जम्मू कश्मीर पुलिस के ADG मुकेश सिंह के मुताबिक प्रारम्भिक जाँच में विस्फोटक जैसा कुछ नहीं मिला है लेकिन घटना में जीवित बचे व घटनास्थल के आस-पास रहने वाले लोगों ने बस में विस्फोट की आवाज सुनने की बात कही है।

अमेरिका के बफेलो में 10 की मौत, 3 घायल: 18 साल के लड़के ने की अंधाधुन फायरिंग

अमेरिका के न्यूयॉर्क (New York, America) स्थित बफेलो के एक सुपरमार्केट (Buffo Shooting) में शनिवार (14 मई 2022) को दोपहर एक श्वेत बंदूकधारी ने अंधाधुन फायरिंग कर 10 लोगों की हत्या कर दी। पुलिस ने हिंसा का कारण नस्लीय घृणा (Racial Hate Crime) बताया है।

बंदूकधारी 18 वर्षीय श्वेत लड़के पेटन गेंड्रोन ने मिलिट्री-स्‍टाइल में कपड़े पहन कर राइफल के साथ सुपर मार्केट में घुसा और गोलियाँ चलानी शुरू कर दी। अचानक हुए इस हमले में सिक्युरिटी गार्ड सहित 13 लोगों को गोली लगी, जिसमें से 10 लोगों की मौत हो गई है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इलाका अश्वेत बहुल है और इस सुपर मार्केट में काम करने वाले लोग भी अश्वेत हैं।

लोगों की हत्या करने के बाद गेंड्रोन ने सुपर मार्केट से बाहर आकर पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया। पुलिस ने गिरफ्तार करते हुए उस पर फर्स्ट डिग्री हत्या का आरोप लगाते हुए गैर-जमानती धाराओं में मामले दर्ज किए हैं। आरोपित ने खुद को निर्दोष बताया है।

वॉशिंगटन पोस्ट के अनुसार, FBI के बफेलो फील्ड कार्यालय के प्रभारी स्पेशल एजेंट स्टीफन बेलोंगिया ने कहा कि कानून प्रवर्तन अधिकारी इस हत्याकांड को नस्लीय हेट क्राइम से प्रेरित हिंसा को आधार मानकर जाँच रहे थे। बफ़ेलो के पुलिस आयुक्त जोसेफ ग्रैमाग्लिया ने कहा कि जिन 13 लोगों को गोली मारी गई, उनमें से 11 अश्वेत हैं। मारे गए लोगों में चार स्टोर कर्मचारी थे और छह ग्राहक थे।

ग्रैमाग्लिया ने कहा कि भारी हथियारों से लैस आरोपित टैक्टिकल गियर पहने हुए था। उसने हमले को लाइव-स्ट्रीम करने के लिए एक कैमरे का इस्तेमाल किया और दुकान में घुसने से पहले पार्किंग में कई लोगों को गोली मार दी। उस दौरान स्टोर के सुरक्षा गार्ड ने उस पर जवाबी गोली चलाई, लेकिन बंदूकधारी बच गया। इसके बाद बंदूकधारी ने उसे गोली मार दी।

पुलिस के अनुसार, गेंड्रोन बिंगहैमटन शहर के पास स्थिति बफ़ेलो से 200 मील से दूर न्यूयॉर्क के कोंकलिन में बड़ा हुआ है। बफेलो में पुलिस के पास उसका रिकॉर्ड नहीं है। वह खुद को श्वेत वर्चस्ववादी पोस्ट लगातार करता रहा है।

ऑस्ट्रेलिया के पूर्व दिग्गज क्रिकेटर एंड्रयू साइमंड्स की सड़क हादसे में मौत: तेज रफ्तार कार सड़क पर पलटी, क्रिकेट जगत में शोक

ऑस्ट्रेलिया (Australia) के पूर्व दिग्गज क्रिकेट खिलाड़ी 46 वर्षीय एंड्रयू साइमंड्स (Andrew Symonds) का शनिवार (15 मई 2022) की रात एक कार दुर्घटना में मौत हो गई। घटना टाउन्सविले शहर की है, जहाँ तेज रफ्तार के कारण साइमंड्स की कार पलट गई और उन्हें गंभीर चोटें आईं। हालाँकि, उन्हें बचाया नहीं जा सका।

साइमंड्स के निधन पर क्रिकेट जगत में शोक की लहर है। उनके प्रशंसक भी इस खबर से दुखी हैं। क्वींसलैंड पुलिस के मुताबिक, शनिवार की रात को करीब 10.30 बजे हर्वे रेंज में एलिस नदी पर बने पुल पर यह हादसा हुआ। प्राथमिक जाँच में यह बात सामने आई है कि उनकी कार बहुत तेज रफ्तार से चल रही थी और इस कारण वह सड़क पर ही पलट गई।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस घटनास्थल पर पहुँची और कार में सवार साइमंड्स को एंबुलेंस के अस्पताल ले जाया गया। गंभीर चोट लगने के कारण उनकी हालत नाजुक थी। अस्पताल डॉक्टरों ने उन्हें बचाने का काफी प्रयास किए, लेकिन वे असफल रहे। बता दें कि हाल ही में ऑस्ट्रेलिया के क्रिकेटर रॉड मार्श और शेन वॉर्न का निधन हुआ था।

साइमंड्स ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की शुरुआत साल 1998 में की थी। तब उन्हें पाकिस्तान के खिलाफ वनडे सीरीज के लिए ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम में शामिल किया गया था। वहीं, मार्च 2004 में श्रीलंका के खिलाफ उन्होंने टेस्ट डेब्यू किया था। साइमंड्स ने टी-20 अंतरराष्ट्रीय का पहला मैच फरवरी 2005 में न्यूजीलैंड के खिलाफ खेला था। उन्होंने साल 2009 में क्रिकेट से संन्यास ले लिया था।

अपने 11 साल के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट करियर में साइमंड्स ने कई मौकों पर ऑस्ट्रेलिया को मैच जिताने में मदद की। उन्हें एक आक्रामक बल्लेबाज के साथ-साथ शानदार गेंदबाज माना जाता था। उन्होंने 2003 और 2007 में ऑस्ट्रेलिया को विश्व कप दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी। 

साइमंड्स ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में ऑस्ट्रेलिया के लिए 198 वनडे, 26 टेस्ट और 14 टी-20 मैच खेले। वनडे में उन्होंने 39.44 की औसत से 5088 रन बनाए, जबकि टेस्ट में 40.61 की औसत से 1462 रन और टी-20 में 48.14 की औसत से 337 रन बनाए हैं। साइमंड्स ने टेस्ट क्रिकेट में 24 विकेट लिए हैं। उन्होंने वनडे में 133 विकेट और टी-20 में 8 विकेट लिए।