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चर्च में मौजूद थे 30-40 लोग, बाहर से चलने लगीं ताबड़तोड़ गोलियाँ: 1 की मौत, 5 घायल, दहशतगर्द हिरासत में

अमेरिका में आए दिन गोलीबारी की घटनाएँ सामने आ रही हैं। ताजा मामला अमेरिका के कैलिफोर्निया शहर का है, जहाँ एक चर्च में फायरिंग हुई है। घटना रविवार (15 मई 2022) की है। गोलीबारी में एक शख्स की मौत हो गई जबकि 5 लोग घायल हुए हैं। पुलिस ने संदिग्ध हमलावर को हिरासत में ले लिया है। उसके पास से हथियार भी बरामद हुआ है। संदिग्ध हमलावर के पास से दो हथगोले बरामद हुए हैं। पुलिस इस शख्स के साथ पूछताछ कर रही है। फिलहाल गोलीबारी के कारणों का पता नहीं चल पाया है। घटना साउथ कैलिफोर्निया के प्रेबिस्टेरियन चर्च की है।

स्थानीय पुलिस के मुताबिक ऑरेंज काउंटी शेरिफ विभाग ने बताया है कि लगुना वुड्स शहर जिनेवा प्रेबिस्टेरियन चर्च में ताबड़तोड़ फायरिंग की आवाज सुनी गई। मामला दोपहर में करीब 1:26 बजे के आसपास का है। फायरिंग की आवाज सुनकर वहाँ भगदड़ मच गई और लोग जान बचाने के लिए वहाँ से भागने लगे। 

चर्च में मौजूद थे 30 से 40 लोग

पुलिस का कहना है कि फायरिंग कर दहशत का माहौल बनाने वाले व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया गया है। इसके पास से एक हथियार बरामद हुआ है। घटना के बारे में जानकारी देते हुए शेरिफ के प्रवक्ता ने बताया है कि जिस समय फायरिंग की घटना को अंजाम दिया गया उस वक्त चर्च में 30 से 40 लोग मौजूद थे। चर्च में ज्यादातर लोग ताइवान मूल के थे। इस मामले की व्यापक पैमाने पर जाँच की जा रही है। पुलिस को शक है कि फायरिंग करने वाले शख्स ने घृणा के चलते वारदात को अंजाम दिया है।

शनिवार को हुई फायरिंग में 10 लोगों की मौत हो गई

जानकारी के लिए बता दें कि अमेरिका में इससे पहले भी इस तरह की फायरिंग की घटनाएँ सामने आ चुकी है। शनिवार (14 मई 2022) को न्यूयॉर्क के बफेलो में भी एक सुपर मार्केट में सिरफिरे ने ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी थी जिसमें 10 लोगों की मौत हो गई थी और 3 लोग घायल हो गए थे।

भोजपुरी, हिंदी, मराठी – सब में गरजे फडणवीस, कहा – ‘अरे ओवैसी सुन ले, कुत्ता भी ना पेशाब करेगा, औरंगजेब की पहचान पर’, CM उद्धव पर भी निशाना

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान नेपा प्रतिपक्ष देवेंद्र फडणवीस ने राजधानी मुंबई के गोरेगाँव स्थित नेस्को मैदान में आयोजित ‘हिंदी भाषी महासंकल्प सभा’ में जम कर दहाड़ लगाई। हनुमान चालीसा के साथ अपनी रैली की शुरुआत करने के बाद भाजपा नेता ने कहा, “असदुद्दीन ओवैसी औरंगजेब की कब्र पर जाता है और माथा टेकता है, और तुम (राज्य सरकार) देखते रह जाते हो, अरे डूब मरो! चुल्लू भर पानी में डूब मरो।”

देवेंद्र फडणवीस ने आगे कहा, “अरे ओवैसी सुन ले, कुत्ता भी ना पेशाब करेगा, औरंगजेब की पहचान पर। अब तो भगवा लहराएगा पूरे हिंदुस्तान पर।” उन्होंने ऐलान किया कि ‘हनुमान चालीसा’ की तो शुरुआत हो ही चुकी है, अब लंका दहन भी होगा। उन्होंने शिवसेना सुप्रीमो और राज्य के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की हालिया रैली के बारे में कहा कि अध्यक्ष सोनिया गाँधी को समर्पित थी। उन्होंने कहा कि RSS के लिए जिस भाषा का इस्तेमाल कॉन्ग्रेस करती थी, उद्धव ठाकरे भी उसी भाषा का प्रयोग कर रहे हैं।

आगामी BMC चुनावों को लेकर भी देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि वहाँ भी भाजपा का भगवा ही लहराएगा। उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत भोजपुरी में की और लोगों को ‘हमार भाई-बहिन’ कह कर सम्बोधित किया। उन्होंने कहा, “शिवसेना की मास्टर सभा नहीं, लाफ्टर सभा थी। कल कौरवों की सभा थी, आज पांडवों की सभा है। ‘लाठी-गोली खाएँगे, मंदिर वहीं बनाएँगे’ बोलते हुए गए थे, ‘पिकनिक चलो’ कहते हुए नहीं।

उन्होंने कहा कि कार सेवकों का मजाक उड़ाने वालों को जवाब है कि जब भी जरूरत होगी जाएँगे। साथ ही उन्होंने चेताया कि अब आपकी सत्ता का ढाँचा गिराएँगे, वजनदार लोगों से संभल कर रहो। इस दौरान उन्होंने संभाजी का उद्धरण याद दिलाया, जिसमें उन्होंने कहा था कि जान भी चली जाए पर धर्म से समझौता नहीं करूँगा। उन्होंने शिवसेना सरकार में भ्रष्टाचार का भी विरोध किया। उन्होंने याद दिलाया कि राम मंदिर आंदोलन के दौरान वो बदायूँ की जेल में थे और कश्मीर में भी मनोबल बढ़ाने गए थे।

महाराष्ट्र के पूर्व सीएम आगे बोले, “बाला साहब बाघ थे, लेकिन इस समय एक बाघ है, उसका नाम है नरेंद्र मोदी। आतंकियों के घर में घुसकर मारने का काम नरेंद्र मोदी ने किया। तुमने हमें लात मारी, लात कौन मारता है। जवान तो ठोकर मारता है। तुम्हारे यहां शरजील आया भाषण दिया, लेकिन आपने कुछ नहीं किया। शरजील को पकड़ कर नहीं ला सके।मोदी ने राहुल भट्ट के हत्यारों को 24 घंटों में मौत के घाट उतारा। मैं कोरोना के दौरान मैदान में था, उद्धव फेसबुक लाइव थे।

शरद पवार पर फेसबुक पोस्ट लिखने वाली अभिनेत्री के खिलाफ 3 और FIR, गिरफ्तार कर पुलिस कस्टडी में भेजी गई

महाराष्ट्र में एनसीपी नेता शरद पवार पर टिप्पणी करने के बाद गिरफ्तार की गई मराठी अभिनेत्री केतकी चितले की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। रविवार (15 मई, 2022) को केतकी के खिलाफ दो और केस दर्ज कराए गए। दो केस मुंबई में और एक केस अकोला में दर्ज किया गया है। फिलहाल केतकी को 18 मई तक के लिए पुलिस की कस्टडी में भेज दिया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि शनिवार को ही अभिनेत्री के खिलाफ गोरेगाँव और भोईवाड़ा में केस दर्ज किया है। ये केस मुंबई में एनसीपी की स्टूडेंट विंग के अध्यक्ष प्रशांत शंकर दुबे की शिकायत पर दर्ज किया गया है। जबकि अकोला के खादन पुलिस स्टेशन में एनसीपी के स्थानीय पदाधिकारी कल्पना गवरगुरू की शिकायत पर केस दर्ज किया गया है।

इन पुलिस थानों में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 500 (मानहानि), 501 (मानहानि के लिए जाने जाने वाले मामले को छापना), 505 (2) (किसी भी बयान, अफवाह या रिपोर्ट को बढ़ावा देना) 153 ए (लोगों के बीच अशांति फैलाना) के तहत केस दर्ज किया गया है।

गौरतलब है कि इससे पहले केतकी (29) के खिलाफ ठाणे, पुणे और धुले जिलों में ऑनलाइन एफआईआर रजिस्टर कराई गई थी। एक्ट्रेस को ठाणे की पुलिस ने ही गिरफ्तार किया था। हालाँकि, पवार पर कमेंट के मामले में गिरफ्तार होने वाली केतकी दूसरी शख्स हैं। हाल ही में आरएसएस के पूर्व कार्यकर्ता और नासिक के 21 साल के छात्र निखिल भामरे ने पवार का नाम लिए बिना ही एक ट्वीट किया था, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें उठा लिया था। कथित तौर पर उसने लिखा था, “बारामती के गाँधी के लिए बारामती के नाथूराम गोडसे को बनाने का समय आ गया है।”

सुप्रिया सुले बोलीं -विकृत मानसिकता

इस बीच पवार पर कमेंट के मामले में एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले ने इसे विकृत मानसिकता करार दिया। उन्होंने कहा कि इस तरह की मानसिकता समाज के लिए ठीक नहीं है। सुले ने इस मुद्दे पर कहा कि वो केतकी को नहीं जानती हैं, लेकिन ये संस्कृति का मामला है। इसके साथ ही उन्होंने केतकी के बयान के विरोध करने के लिए पूर्व सीएम देवेंद्र फडणवीस औऱ राज ठाकरे की तारीफ की है।

क्या कहा था केतकी ने

उल्लेखनीय है कि केतकी चितले ने अपने फेसबुक पोस्ट पर एक मराठी में लिखी कविता शेयर की थी। इसमें शरद पवार के लिए ‘नरक इंतजार कर रहा है’, ‘तुम ब्राम्हणों से नफरत करते हो’, ‘तुम्हारा मुँह टेढ़ा’ जैशे शब्दों का इस्तेमाल किया था।

NCP के गुंडों ने भाजपा प्रदेश प्रवक्ता को दफ्तर में घुस कर पीटा, कोई गिरफ़्तारी नहीं: फेसबुक पर डाली थी कविता

महाराष्ट्र में NCP (राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी) के गुंडों ने भाजपा के बुजुर्ग नेता विनायक आंबेकर की पिटाई की है। बताया जा रहा है कि पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद पवार के खिलाफ फेसबुक पोस्ट लिखने के लिए उन्होंने ऐसा किया। शरद पवार NCP के संस्थापक हैं और मौजूदा MVA (महा विकास अघाड़ी) सरकार का उन्हें सर्वेसर्वा माना जाता है। 81 वर्षीय शरद पवार तीन बार राज्य के मुख्यमंत्री रहे हैं। NCP कार्यकर्ताओं की गुंडागर्दी की भाजपा ने आलोचना की है।

इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिस पर टिप्पणी करते हुए केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने लिखा, “अभिव्यक्ति की आज़ादी के तथाकथित रक्षकों ने एक बुजुर्ग नागरिक की पिटाई की, एक महिला को सिर्फ इसीलिए गिरफ्तार कर लिया क्योंकि उसने अपने मन की बात कही थी। उनकी इन करतूतों पर उनके साथी पहले से तय चुप्पी साधे रहते हैं। वो अभिव्यक्ति की आज़ादी को कुचलते हैं।”

वीडियो में देखा जा सकता है कि विनायक आंबेकर के साथ NCP कार्यकर्ता बहस कर रहे होते हैं, तभी सफ़ेद शर्ट पहने एक NCP कार्यकर्ता उन्हें थप्पड़ मार देता है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने भी इस वीडियो को शेयर करते हुए लिखा कि वो भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता पर NCP के गुंडों द्वारा हमले की निंदा करते हैं और दोषियों को तुरंत सज़ा दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा किविचारों की लड़ाई विचारों से लड़ी जानी चाहिए, लेकिन ये घटना राज्य सरकार में माफिया की शक्ति को बताती है।

हालाँकि, अभी तक महाराष्ट्र पुलिस ने इस घटना को लेकर कोई कार्रवाई नहीं की है। हालाँकि, पुणे दफ्तर में उनके साथ हुई मारपीट के बाद उन्होंने खड़क पुलिस थाने में मामला दर्ज कराया है। उन्होंने बताया कि वरिष्ठ भाजपा नेताओं के फोन कॉल आने के बाद उन्होंने स्वेच्छा से ही अपनी फेसबुक पोस्ट की दो लाइनें हटा दी थीं, लेकिन एक योजना बना कर हमला हुआ और वीडियो वायरल किया गया। उन्होंने कहा कि वो एक कविता थी, जिसमें किसी का नाम नहीं लिखा गया था।

जिस अमजद के ऑटो से कॉलेज आती-जाती थी, उसी ने BA की हिन्दू छात्रा को फँसाया: उलटा उसे ही भिजवाया जेल, 2 बच्चों का है अब्बा

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के सहारनपुर जिले से लव जिहाद (Love Jihad) का चौंकाने वाला मामला प्रकाश में आया है। यहाँ अमजद नाम के शख्स ने पहले एक हिंदू युवती को नाम बदलकर अपने झूठे प्रेम जाल में फँसाया और उसे भगा ले गया। फिर उससे बच्चा चोरी करवाने लगा। इसके बाद पीड़िता को जेल भिजवा दिया।

रिपोर्ट के मुताबिक, यह घटना सहारनपुर थाना देहात कोतवाली की बताई जा रही है। पीड़िता बेटी बीए की छात्रा थी और अक्सर वो ऑटो से ही कॉलेज आती-जाती थी। इसी दौरान मौके का फायदा उठाते हुए ऑटो ड्रायवर अमजद ने नाम बदलकर अपने प्रेम के जाल में फँसा लिया। धीरे-धीरे दोनों दोनों में नजदीकियाँ बढ़ी और एक दिन अमजद उसे लेकर भाग गया। हालाँकि, वो उसे लेकर अपने घर जाने की बजाए जिला अस्पताल गया। उसने पीड़िता को बताया कि उसका कोई रिश्तेदार वहाँ भर्ती है।

आरोपित ने पीड़िता को दो दिन तक वहीं रखा और बाद में बच्चा चोरी की साजिश रचकर उसे जेल भिजवा दिया। जेल में करीब 8 महीने तक पीड़िता रही। इस बीच उसके परिजन जेल में उससे मिलते रहे, उसी दौरान उसने अपनी सारी आपबीती बयाँ की। पीड़िता की माँ के मुताबिक, आरोपित अमजद पहले से विवाहित है औऱ उसके 2 बच्चे भी हैं। बहरहाल 8 महीने की सजा काटने के बाद शुक्रवार 13 मई 2022 को जब जेल से बाहर आई तो वो काफी डरी हुई थी। प्रशासन ने उससे उसके घर भेजने की कोशिशें की, लेकिन उसने घर जाने से इनकार कर दिया। बाद में उसे नारी निकेतन भेज दिया गया।

हिंदू संगठनों ने एसएसपी से लगाई मदद की गुहार

इस बीच शनिवार (14 मई 2022) को हिंदू संगठनों ने जिले के एसएसपी आकाश तोमर से मुलाकात की। उन्हें ज्ञापन देकर हिंदू संगठनों ने पीड़िता के साथ हुई वारदात के बारे में बताया और कार्रवाई की माँग की। उसको लेकर एसपी सिटी राजेश गुप्ता के मुताबिक, केस संज्ञान में आया है और प्रार्थना पत्र के आधार पर मामले की जाँच कराई जाएगी।

बंगाली अभिनेत्री की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत: सिगरेट लेने गया लिव-इन पार्टनर, लौटा तो लटका मिला शव

पश्चिम बंगाल के कोलकाता की बंगाली टीवी एक्ट्रेस पल्लबी डे की मौत हो गई है। रविवार (15 मई, 2022) को पल्लबी डे का शव उनके किराए के अपार्टमेंट में लटका मिला। 21 वर्षीय अभिनेत्री को अस्पताल ले जाया गया था, लेकिन वहाँ उन्हें मत घोषित कर दिया गया। वो यहाँ अपने लिव इन पार्टनर के साथ किराए पर रही थीं।

रिपोर्ट के मुताबिक, डे ने दक्षिण कोलकाता के गरफा इलाके में पिछले महीने अप्रैल 2022 में ही किराए का अपार्टमेंट लिया था। मामले का खुलासा उस वक्त हुआ जब उसके दोस्त शग्निक चक्रबर्ती ने अपार्टमेंट में पल्लबी के शव को लटकता पाया। घबराए शग्निक ने अपार्टमेंट के केयरटेकर को इसकी जानकारी दी। इसके बाद मौके पर पहुँचे बिल्डिंग के केयरटेकर ने शव को अन्य लोगों की मदद से नीचे उतारा और पुलिस को इसकी जानकारी दी। शग्निक शुरू से ही पल्लबी डे के साथ रह रहे थे।

बहरहाल घटनास्थल पर पहुँची पुलिस ने शव को कब्जे में ले लिया। पुलिस का कहना है कि शुरुआती तौर पर यह खुदकुशी का मामला लग रहा है, लेकिन असली वजह का खुलासा पोस्टमार्टम के बाद ही हो सकता है। बहरहाल, अस्वाभाविक मौत का केस दर्ज किया गया है। इस केस ही हर एंगल से जाँच की जा रही है। इसके साथ ही पल्लबी डे के दोस्त शग्निक चक्रबर्ती से भी पूछताछ की जा रही है।

शग्निक ने पुलिस को बताया है कि वो रविवार को सुबह वो सिगरेट लाने के लिए जब जा रहे थे, तब तो सबकुछ ठीक था, लेकिन जब वो सिगरेट लेकर वापस लौटे तो पल्लबी का शव पंखे से लटकता मिला।

गौरतलब है कि 21 वर्षीय अभिनेत्री पल्लबी डे ‘आम्ही सिराजेर बेगम’, ‘कुंजा छाया’, ‘रेशम झापी’ और हाल ही में ‘मोन माने ना’ जैसे कई बंगाली धारावाहिकों में मुख्य भूमिका निभाई है। इस कारण से वो काफी फेमस भी हो चुकी थीं।

प्राइवेट स्कूल में ईसाई धर्मांतरण का धंधा, ‘हनुमान चालीसा’ पर आपत्तिजनक टिप्पणी: गरीब महिलाओं-बच्चियों को जुटाया, हिन्दू विरोधी भाषण

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के एक प्राइवेट स्कूल में ईसाई धर्मांतरण का मामला सामने आया है। बैरागढ़ इलाके में इसकी सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुँची। ये मामला ‘क्राइस्ट मेमोरियल स्कूल’ का है, जिसका संचालन करने वाले लोग ईसाई समुदाय से ही आते हैं। सूचना मिली कि यहाँ कुछ लोगों के ईसाई धर्मांतरण के प्रथम चरण की प्रक्रिया कराई जा रही है। हिन्दू समाज के कई महिला-पुरुष भी वहाँ पर उपस्थित थे।

कुल मिला कर स्कूल में शैक्षणिक कार्यों के नाम पर संदिग्ध गतिविधियाँ चल रही थीं। स्कूल के संचालक को भी हिन्दू धर्म के विरोध में भाषण देते हुए पाया गया। साथ ही कई ऐसी पुस्तकें भी मिली हैं, जिनमें हिन्दू धर्म के बारे में अनाप-शनाप लिख कर घृणा फैलाने का कार्य किया जा रहा था। बैरागढ़ पुलिस ने तुरंत छापेमारी कर वहाँ के लोगों को हिरासत में लिया और थाने ले गई। हिन्दू संगठनों ने भी बताया कि धर्म-परिवर्तन का काम कराया जा रहा था।

आक्रोशित हिन्दू संगठनों ने मौके पर पहुँच कर स्कूल का घेराव भी किया। उन्होंने वहाँ सब कुछ देखा और सबूत के रूप में वीडियो भी बना लिया। स्थानीय भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा भी इसकी सूचना मिलते ही हरकत में आए और कमिश्नर से बात कर के FIR की माँग की। पुलिस ने भी FIR दर्ज कर लिया है। स्कूल में ग्रामीण इलाकों से गरीब परिवार की महिलाओं-बच्चियों को भी बुलाया गया था। जहां-फूँक और ‘चमत्कार’ दिखाए जा रहे थे।

FIR में 5 लोगों को आरोपित बनाया गया है, जिसमें स्कूल के संचालक भी शामिल हैं। हिन्दू देवी-देवताओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी का आरोप भी है। साथ ही स्कूल में गरीबों को जुटा कर हनुमान चालीसा के खिलाफ भी गलत बातें की जा रही थीं। साथ ही अन्य सनातन धार्मिक ग्रंथों को भी निशाना बनाया जा रहा था। स्कूल के संचालकों के नाम मैनिस मैथ्यूज और पाल पोलूस हैं। हिन्दू विरोधी भाषण देने में ये दोनों सबसे आगे थे।

स्वामी विवेकानंद से मिलने जब पैदल ही चल पड़े थे महात्मा गाँधी… देशभक्ति में हजार गुणा वृद्धि का दिया था श्रेय

स्वामी विवेकानंद को अनेकों लोग एक आध्यात्मिक नेता के तौर पर देखते हैं। लेकिन उनका भारतीय स्वाधीनता आंदोलन में योगदान अभी भी आम जनमानस से अनभिज्ञ है। 12 जनवरी 1863 को बंगाल के कलकत्ता में माता भुवनेश्वरी देवी और पिता विश्वनाथ दत्त के घर जन्में नरेंद्रनाथ दत्त जो बाद में स्वामी विवेकानंद के नाम से जाने गए, मात्र 39 वर्ष 5 महीने और 24 दिन के जीवन में अगर उन्हीं के शब्दों में कहूँ तो 1500 वर्ष का कार्य कर गए।

स्वामी विवेकानंद 25 साल की उम्र में ही परिव्राजक संन्यासी के रूप में भारत भ्रमण पर निकल गए थे। भारत उस समय पराधीन था। हम पर अंग्रेज़ों का शासन था। अपने लगभग साढ़े चार वर्ष के भ्रमण के दौरान उन्होंने देखा कि वर्षों की गुलामी के कारण हर एक भारतीय के अंदर आत्मविश्वास, आत्म-सम्मान, आत्म-गौरव और स्वावलम्बन पूर्णतः समाप्त हो गया है।

स्वामी विवेकानंद को अपना कार्य स्पष्ट हो गया था। वो राजनीती से दूर रह कर हर भारतवासी में आत्मविश्वास जगाने का कार्य करने वाले थे। उन्होंने यह आत्मविश्वास जगाने का, चरित्र-निर्माण का और मनुष्य-निर्माण का कार्य पूरे जीवन भर अनेकों कष्ट, कठिनाइयों को सहते हुए भी किया… क्योंकि इसके बिना आत्मविश्वास जागृत नहीं होता और बिना आत्मविश्वास के आत्मनिर्भर बनना संभव नहीं है, जो स्वाधीनता के लिए अत्यावश्यक है।

असहयोग, अहिंसा तथा शांतिपूर्ण प्रतिकार को अपने शस्त्र के रूप में अंग्रेजों के खिलाफ़ उपयोग करने वाले और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के एक प्रमुख राजनेता हुए मोहनदास करमचन्द गाँधी। वो महात्मा गाँधी के नाम से मात्र भारत में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व भर में प्रसिद्ध हैं। गाँधी भी स्वामी विवेकानंद के साहित्य से प्रेरणा लेते हैं। महात्मा गाँधी स्वामी विवेकानंद के बारे में लिखते हैं:

”स्वामी विवेकानंद के कार्यों को पढ़ने के बाद, देश के लिए मेरी देशभक्ति में हजार गुणा वृद्धि हुई।”

कलेक्टेड वर्क्स ऑफ़ महात्मा गाँधी में वह अनेकों बार स्वामी विवेकानंद की चर्चा करते हैं। महात्मा खुद स्वामी विवेकानंद से मिलना चाहते थे लेकिन वो मनोकामना ही रह गई, पूरी नहीं हुई।

महात्मा गाँधी अपनी आत्मकथा ‘सत्य के साथ मेरे प्रयोग’ में लिखते हैं कि अपने कलकत्ता प्रवास के दौरान वो एक दिन स्वामी विवेकानंद से मिलने के लिए बहुत उत्साह के साथ पैदल ही बेलुड़ मठ की ओर चल पड़े थे, लेकिन उनको यह जानकर बहुत निराशा हुई कि वो अस्वस्थ हैं और उनकी मुलाकत उनसे नहीं हो पाई। हालाँकि स्वामी विवेकानंद की शिष्या भगिनी निवेदिता से महात्मा गाँधी 2 बार मिले थे और विभिन्न मुद्दों पर चर्चा भी की थी जो अधिक सफल नहीं रही थी, लेकिन उन्होंने भगिनी निवेदिता के हिन्दू धर्म के प्रति अत्यंत स्नेह की प्रसंशा की थी और उनके द्वारा रचित पुस्तकों का अध्ययन भी किया था।

स्वामी विवेकानंद के निधन के काफी बाद एक बार पुनः 30 जनवरी 1921 को उनकी जयंती कार्यक्रम में भाग लेते हुए महात्मा गाँधी ने बेलुड़मठ में भाषण देते हुए कहा था,

“मेरे हृदय में दिवंगत स्वामी विवेकानंद के लिए बहुत सम्मान है। मैंने उनकी कई पुस्तकें पढ़ी हैं। कई मामलों में मेरे आदर्श इस महान विभूति के आदर्शों के समान ही हैं। यदि विवेकानंद आज जीवित होते तो राष्ट्र जागरण में बहुत सहायता मिलती। किंतु उनकी आत्मा हमारे बीच है और उन्हें स्वराज स्थापना के लिए हरसंभव प्रयास करना चाहिए।”

इन शब्दों से हमें स्पष्ट होता है की महात्मा गाँधी स्वामी विवेकानंद से कितने प्रभावित थे। उनके द्वारा गरीब, वंचित, शोषितों के लिए किए गए काम और उनके प्रति आत्मीय विचारों को महात्मा गाँधी अपने केरल प्रान्त के शहर कोल्लम (Kollam), जिसे पहले क्विलोन (Quilon) कहा जाता था, में 12 मार्च 1925 को दिए अपने एक भाषण में याद करते हैं। भाषण में वह कहते हैं कि जैसी सहानुभूति स्वामी विवेकानंद को अपने ही समृद्ध भाइयों के हाथों “दबाए गए” दरिद्रों के साथ थी, उन्हें भी वैसी ही सहानुभूति है।

स्वामी विवेकांनद का प्रभाव अनेकों ऐसे नेताओं पर रहा, जिनकी स्वाधीनता आंदोलन में सक्रिय सहभागिता रही… भले वह उनके जीवन काल के दौरान हो या बाद में।

भारतीय टीम ने जीता बैडमिंटन का ‘विश्व कप’, खिलाड़ियों ने लगाए ‘भारत माता की जय’ के नारे: ₹1 Cr देगा खेल मंत्रालय, PM मोदी ने की बात

भारतीय शटल बैडमिंटन टीम ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए थॉमस कप 2022 (Thomas Cup-2022) जीत लिया है। रविवार (15 मई 2022) को भारतीय शटलर्स ने शक्तिशाली इंडोनेशियाई टीम को 3-0 के बड़े अंतर से अजेय बढ़त हासिल करते हुए कप अपने नाम किया।

ऐसा पहली बार हो रहा है जब भारत ने थॉमस कप जीता है। इस टूर्नामेंट को शटल बैडमिंटन का विश्व कप माना जाता है। रविवार को हुए फाइनल में भारत ने 14 बार के चैंपियन इंडोनेशिया को हराकर कप को देश के नाम किया। पाँच मुकाबलों की इस खिताबी मुकाबले में भारत ने लगातार तीन बार जीत हासिल की। इसमें दो सिंगल्स और एक डबल्स शामिल है।

बैडमिंटन का विश्व कप माने जाने वाले थॉमस कप 2022 में किदांबी श्रीकांत ने इंडोनेशिया के खिलाड़ी को 21-15, 23-21 से हराया। इससे पहले लक्ष्य सेन ने एंथनी गिंटिंग को 8-21, 21-17, 21-16 से हराकर भारत को 1-0 की बढ़त दिलाई थी।

दूसरे मैच में सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी ने थाईलैंड के बैंकॉक में इम्पैक्ट एरिना में फाइनल में मोहम्मद अहसान और केविन संजय सुकामुल्जो के खिलाफ 18-21, 23-21, 21-19 से जीत दर्ज की थी।

इसके बाद टूर्नामेंट के सेमीफाइनल में डेनमार्क को 3-2 से हराकर भारतीय पुरुष बैडमिंटन टीम थॉमस कप के फाइनल में पहुँच गई थी। गौरतलब है कि थॉमस कप के इस सफर में भारतीय टीम को केवल एक बार हार का सामना करना पड़ा था। ग्रुप स्टेज मैच के दौरान भारत को चीनी ताइपे ने हराया था। इसके अलावा भारत अजेय रहा है।

रविवार को फाइनल का मुकाबला जीतने के बाद भारतीय टीम ने बैडमिंटन कोर्ट में अपनी खुशी जाहिर करते हुए जमकर ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाए।

इस जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी खिलाड़ियों से बात की और उन्हें इस ऐतिहासिक जीत पर बधाइयाँ दी। इस बीच खिलाड़ियों के सम्मान के लिए केंद्रीय खेल मंत्रालय आगे आया है। मंत्रालय ने भारतीय शटलर टीम के लिए एक करोड़ रुपए की इनामी राशि का ऐलान किया।

चारमीनार के पास भाग्यलक्ष्मी मंदिर नहीं… काशी विश्वनाथ को औरंगजेब ने तोड़ा-लूटा भी नहीं: कॉन्ग्रेस ने लिखा, दिखाई हिंदू-घृणा की राजनीति

उत्तर प्रदेश में वाराणसी (Varanasi, Uttar Pradesh)के ज्ञानवापी विवादित ढाँचे (Gyanvapi Controversial Structure) की सर्वे एवं वीडियोग्राफी के बीच कॉन्ग्रेस (Congress) ने शनिवार (14 मई 2022) को काशी विश्वनाथ मंदिर (Kashi Vishwanath Temple) के विध्वंस के लिए मुगल आक्रांता औरंगजेब (Mughal Invader Aurangzeb) को क्लीनचिट देने की कोशिश के बीच विवाद खड़ा कर दिया।

ज्ञानवापी विवादित ढाँचे की वीडियोग्राफी और सर्वेक्षण के बीच लोकप्रिय ट्विटर हैंडल (@IndiaHistorypic) ने 12 मई को ट्विटर पर काशी विश्वनाथ मंदिर की क्षतिग्रस्त दीवार की एक पुरानी तस्वीर अपलोड की थी। तस्वीर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के अभिलेखागार से ली गई थी।

इस तस्वीर का श्रेय ASI को देते हुए हैंडल ने लिखा था, “1890: काशी विश्वनाथ मंदिर की दीवार (मंदिर को मुगल सम्राट औरंगजेब द्वारा नष्ट कर दिया गया था) अब ज्ञानवापी मस्जिद, वाराणसी का हिस्सा है।”

तस्वीर देखने और उसके कैप्शन में औरंगजेब को अत्याचारी बताने पर कॉन्ग्रेस मुगल आक्रांता के बचाव में आ गई। महाराष्ट्र प्रदेश कॉन्ग्रेस सेवा दल के आधिकारिक हैंडल ने दावा किया कि प्राचीन हिंदू मंदिर को मुगल सम्राट ने नष्ट नहीं किया था। कॉन्ग्रेस के ट्विटर हैंडल ने दावा किया कि 1890 में ली गई तस्वीर यह कैसे साबित कर सकती है कि औरंगजेब ने ही मंदिर को तबाह किया था, जबकि उसकी मृत्यु लगभग दो शताब्दी पहले ही हुई थी।

महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस सेवा दल ने कहा, “”औरंगजेब की मृत्यु 3 मार्च 1707 को हुई थी। 1890 में क्लिक की गई एक तस्वीर उस दीवार को कैसे दिखा सकती है जिसे 1707 में मरने वाले व्यक्ति द्वारा कथित रूप से तोड़ा गया था?”

महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस सेवा दल का ट्वीट

कॉन्ग्रेस सेवा दल के बयान में कई खामियाँ

ट्विटर उपयोगकर्ता ‘IndiaHistorypics’ ने इस दावे का खंडन करते हुए कहा कि उसी नष्ट की गई दीवार को 1834 में ब्रिटिश विद्वान जेम्स प्रिंसेप द्वारा बनाए गए एक लिथोग्राफ में भी देखा गया है, जिसमें उल्लेख किया गया था कि मंदिर को औरंगजेब ने नष्ट कर दिया था। इस हैंडल ने कॉन्ग्रेस सेवा दल से कहा, “आगे आप ASI और ब्रिटिश लाइब्रेरी के साथ इस मामले को उठा सकते हैं, क्योंकि स्रोत उनका है।”

अपने अगले ट्वीट में ‘IndiaHistorypics’ ने कहा, “जेम्स प्रिंसेप द्वारा 1834 में निर्मित इस लिथोग्राफ में नष्ट काशी विश्वनाथ मंदिर की वही दीवार दिखाई गई है। इन्होंने भी कहा है कि मंदिर को औरंगजेब ने तोड़ा था।”

जेम्स प्रिंसेप (1799-1840) एक यूरोपीय वास्तुकार और विद्वान थे, जिन्हें प्राचीन भारतीय सम्राट अशोक के शिलालेखों को समझने का गौरव प्राप्त है। उन्हें वजन और माप की भारतीय प्रणाली में सुधार और एक समान सिक्का प्रणाली शुरू करने का श्रेय दिया जाता है।

कॉन्ग्रेस सेवा दल ने इस तथ्य को खारिज करने की कोशिश की कि औरंगजेब को मंदिर का विध्वंसकर्ता इसलिए कहा जा सकता, क्योंकि आंशिक रूप से नष्ट की गई दीवार की एक तस्वीर दशकों बाद ली गई थीं। हालाँकि, यह निर्विवाद तथ्य है कि मूल काशी विश्वनाथ मंदिर को औरंगजेब के शासन में नष्ट कर दिया गया था और मस्जिद को उसके खंडहरों पर बनाया गया था। मुसलमान भी इस तथ्य से इनकार नहीं करते हैं, वे केवल यह कहकर इसे सही ठहराते हैं कि औरंगजेब ने मंदिर में पुजारियों के कुछ अपराधों को देखकर मंदिर को ध्वस्त करने का आदेश दिया था।

इंडियाहिस्ट्रीपिक्स द्वारा पोस्ट की गई तस्वीर में आंशिक रूप से नष्ट हुई दीवार दिखाई दे रही है। साथ ही ट्वीट में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि यह मूल काशी विश्वनाथ मंदिर की दीवार है, जो अब ज्ञानवापी मस्जिद का हिस्सा है। मंदिर की दीवारें आज भी मस्जिद पर देखी जा सकती हैं, फिर भी कॉन्ग्रेस ने इस तथ्य पर सवाल उठाने की कोशिश की।

फिर भी औरंगजेब का बचाव करता रहा कॉन्ग्रेस सेवा दल

लोकप्रिय ट्विटर हैंडल ने बार-बार बताने की कोशिश की कि पोस्ट की गई तस्वीर ASI और ब्रिटिश संग्रहालय से ली गई हैं और नष्ट हुए मंदिर की दीवार अब मस्जिद का हिस्सा है। इसके बाद भी महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस सेवा दल ने इस तथ्य पर सवाल उठाना जारी रखा। इस तथ्य को माने के बजाय सेवा दल ने हैदराबाद में चारमीनार के बगल में स्थित भाग्यलक्ष्मी मंदिर का मामला उठाया।

सेवा दल ने कहा कि यह साबित करने के लिए कि ज्ञानवापी मस्जिद काशी विश्वनाथ मंदिर को तोड़कर बनाई गई थी, उन्हें पहले और बाद की तस्वीरों को देखने की जरूरत है, जो अलग-अलग समय में अलग-अलग जगह को दर्शाती हैं। उदाहरण के तौर पर, उन्होंने हैदराबाद में चारमीनार की दो तस्वीरें अलग-अलग पोस्ट कीं। दूसरी रंगीन तस्वीर में चारमीनार के बगल में स्थित भाग्यलक्ष्मी मंदिर दिखाई दे रहा है, जबकि पहली ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीर में मंदिर नहीं है। मंदिर का निर्माण 1960 के दशक में किया गया था और यह एक विवादित संरचना है, जिसके विस्तार को तेलंगाना उच्च न्यायालय ने रोक दिया है।

औरंगजेब के बचाव के लिए कॉन्ग्रेस पूरी तरह से असंगत विषय लेकर आई। भाग्यलक्ष्मी मंदिर एक अलग राज्य में पूरी तरह से अलग मुद्दा है। यह मंदिर कुछ दशक पहले ही बनाया गया था, इसलिए बिना मंदिर वाली तस्वीरें उपलब्ध हैं, लेकिन मूल काशी विश्वनाथ मंदिर के अस्तित्व का फोटोग्राफिक प्रमाण माँगना विचित्र है, क्योंकि इसे फोटोग्राफी के आविष्कार के सदियों पहले ध्वस्त कर दिया गया था। इसके अलावा, मस्जिद में दीवारों और अन्य खंडहरों के रूप में मंदिर के भौतिक प्रमाण हैं। इसके साथ ही इसके कई ऐतिहासिक और साहित्यिक साक्ष्य उपलब्ध हैं।

अपने खास उद्देश्य को लेकर सेवा दल ने दोनों तस्वीरों में चारमीनार के पास चार कमान को भी इंगित किया है। चारमीनार के पूरा होने के बाद 16वीं शताब्दी में कमानों का निर्माण किया गया था। इससे पता चलता है कि कॉन्ग्रेस पार्टी दोनों तस्वीरों में इसे दिखाकर क्या साबित करना चाहती है।

ज्ञानवापी विवादित ढाँचा और सर्वे

ज्ञानवापी मस्जिद परिसर एक विवादित ढाँचा है, जिसे मुगल आक्रांता औरंगजेब द्वारा पुराने काशी विश्वनाथ मंदिर को तोड़ कर उसके खंडहरों पर बनाया गया है। कुतुब अल-दीन ऐबक और औरंगजेब जैसे इस्लामी आक्रांताओं द्वारा कई बार इन्हें तोड़ा गया था।

आज तक इस प्राचीन मंदिर के कुछ हिस्से मस्जिद की बाहरी दीवारों पर स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं। खासकर पश्चिमी दीवार के दूर बैठा नंदी बैल और माँ श्रृंगार गौरी की मूर्तियाँ देखी जा सकती हैं। इसके अलावा, मंदिर के विध्वंस, मस्जिद के निर्माण और वर्तमान आसन्न स्थल पर मंदिर के पुनर्निर्माण के पर्याप्त ऐतिहासिक प्रमाण हैं। विवादित ढाँचे से सटे हुए काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में, जहाँ भक्त पूजा-अर्चना करते हैं, उसका निर्माण इंदौर की महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने 1780 ईस्वी में कराया था।

वाराणसी की एक अदालत ने 12 मई को विवादित ढाँचे के वीडियोग्राफिक सर्वेक्षण की अनुमति दी थी। वाराणसी के सिविल जज (सीनियर डिवीजन) रवि कुमार दिवाकर ने इसके लिए दिशा-निर्देश जारी किए थे। इस सर्वेक्षण की रिपोर्ट 17 मई को अदालत में प्रस्तुत की जाएगी।