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ट्विटर ने दो वरिष्ठ अधिकारियों को कंपनी से निकाला, नई नियुक्तियों पर भी लगाई रोक: CEO पराग अग्रवाल ने कहा- टारगेट नहीं पूरा किया

सोशल मीडिया साइट ट्विटर (Twitter) को खरीदने के बाद दुनिया के सबसे अमीर कारोबारी एवं टेस्ला (Tesla) के CEO एलन मस्क (Elon Musk) ने बदलाव करने शुरू कर दिए हैं। उन्होंने कंपनी के दो बड़े अधिकारियों को दिया है। इसके साथ ही उन्होंने घोषणा की है कि कंपनियाँ में फिलहाल नई भर्तियाँ नहीं होंगी।

रिसर्च, डिजाइन और इंजीनियरिंग टीम को लीड करने वाले जनरल मैनेजर कायवन बेकपोर (Kayvon Beykpour) और रेवेन्यू टीम के हेड ब्रूस फाल्क ने कंपनी छोड़ दिया है। दोनों ने ही ट्विटर पर इसकी जानकारी दी है। बता दें कि मस्क द्वारा ट्विटर खरीदने के बाद कंपनी के कर्मचारियों ने कहा था कि उनकी नौकरी सिर्फ 6 महीने ही सुरक्षित है।

कंपनी में पिछले 7 सालों से काम करने वाले बेकपोर ने कहा कि उन्हें सैन फ्रांसिस्को स्थित कंपनी के CEO पराग अग्रवाल ने ट्विटर छोड़ने के लिए कहा। अग्रवाल ने उनसे कहा कि वे टीम को एक अलग दिशा में ले जाना चाहते हैं। उन्होंने ट्विटर के को-फाउंडर जैक डोर्सी को उनके समर्थन के लिए धन्यवाद कहा।

वहीं, पिछले 5 सालों तक ट्विटर के साथ रहे फाल्क ने भी एक ट्वीट के जरिए कंपनी छोड़ने की घोषणा की। उन्होंने कहा, “मैं उन सभी टीमों और भागीदारों को धन्यवाद देता हूँ, जिनके साथ पिछले 5 वर्षों के दौरान काम करने का मुझे सौभाग्य मिला। इन व्यवसायों को बनाना और चलाना एक टीम स्पोर्ट है।” जानकारी के अनुसार, दोनों के जाने के बाद जे सुलिवन प्रोडक्ट हेड और रेवेन्यू के अंतरिम हेड के रूप में काम देखेंगे।

रिपोर्ट के अनुसार, CEO पराग अग्रवाल ने अपने आधिकारिक ईमेल में दोनों अधिकारियों को कंपनी छोड़ने के लिए कहा था। उन्होंने दोनों को हटाने के पीछे कंपनी का टारगेट को पूरा करने में असफल रहना बताया है। इसके साथ ही उन्होंने फिलहाल कंपनी में किसी भी नियुक्ति पर रोक की घोषणा की है।

गौरतलब है कि एलन मस्क द्वारा ट्विटर खरीदे जाने के बाद कंपनी के कई कर्मचारियों में इस डील को लेकर गुस्सा जताया था। सामान्य जन भी ये सोच रहे हैं कि आखिर दुनिया का सबसे अमीर आदमी इतनी बड़ी कीमत में ये प्लेटफॉर्म लेकर करेगा क्या? या वो इसमें क्या बदलाव करेगा? कहीं पुराने कर्मचारियों की नौकरी तो नहीं जाएगी।

बता दें कि मस्क ने हाल ही में ट्विटर को 44 अरब डॉलर, यानी लगभग 3,400 अरब रुपए में खरीदा है। उनका लक्ष्य है 2028 तक कंपनी का रेवेन्यू बढ़ाकर 26.4 अरब डॉलर करना। पिछले साल कंपनी का रेवेन्यू सिर्फ 5 अरब डॉलर था। कंपनी का रेवेन्यू बढ़ाने के लिए उन्होंने सब्सक्रिप्शन मॉडल लागू करने की बात भी कही है।

जिला बदर आदेश का उल्लंघन, अपने ही घर में छिपकर रह रहा था पेशेवर अपराधी तौकीर अहमद खान: छत्तीसगढ़ में मंत्री के करीबी के खिलाफ लगा रासुका

छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के कोरबा (Korba) जिले से एक वर्ष के लिए जिला बदर किया गया आरोपित आदेश का उल्लंघन करते हुए पहचान बदलकर अपने ही घर में छिपकर रह रहा था। यही नहीं आरोपित ने इस दाैरान 11 मई को धनंजय साहू नाम के व्यक्ति से गाली-गलौज कर उसे जान से मारने की धमकी भी दी। पुलिस ने उसके खिलाफ इस मामले में एफआईआर दर्ज कार्रवाई की है। बताया जा रहा है कि आरोपित के खिलाफ पहले मामले में छत्तीसगढ़ रासुका के अंतर्गत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिला बदर के आदेश का उल्लंघन करने के मामले को एसपी भोजराम पटेल ने गंभीरता से लेते हुए आरोपित तौकीर अहमद खान के खिलाफ छत्तीसगढ़ राज्य सुरक्षा अधिनियम की धारा-15 रासुका के तहत एफआईआर दर्ज की है। पुलिस के अनुसार, जिला दंडाधिकारी कोरबा ने रिस्दी चौक निवासी अहमद खान के खिलाफ 1 सितंबर 2021 को कोरबा सहित सीमावर्ती अन्य जिलों से 1 वर्ष के लिए जिला बदर का आदेश जारी किया था। इसके बावजूद वह छिपकर कोरबा में ही रह रहा था।

मालूम हो कि धनंजय साहू की शिकायत पर कोरबा निवासी खान के खिलाफ आईपीसी की धारा 294 और 506 के तहत दूसरा केस दर्ज दर्ज किया गया है। इसकी सूचना कलेक्टर को भी दी गई है, ताकि जिला बदर आरोपित के खिलाफ आगे की कार्रवाई भी की जा सके। आरोपित को राज्य के एक मंत्री का समर्थक बताया जा रहा है।

बता दें कि तौकीर के खिलाफ कोरबा के अलग-अलग थानों में मारपीट और अवैध उगाही के लिए धमकी सहित कई मामले दर्ज हैं। तौकीर के पेशेवर अपराधी होने का आभास होने पर प्रशासन ने दो साल पहले की फाइलें खोलीं, जिसमें उसके खिलाफ केस दर्ज किए गए थे। उसे जिला बदर करने के लिए कलेक्टर कोर्ट में केस पेश किया था। तौकीर पर एक ठेकेदार ने भी केस दर्ज कराया था। इसमें उस पर काम को हथियाने के लिए जबरन दबाव डालने, धमकाने और गाली गलौच का आरोप लगाया गया था। ठेकेदार कोरबा में स्थित एक कंपनी में ठेकेदारी करता है।

AAP विधायक अमानतुल्लाह खान पर पुलिस ने लगाया ‘Bad Character’ का ठप्पा: कब्जे-मारपीट के दर्ज हैं 18 मामले, फिलहाल तिहाड़ में बंद

दिल्ली के ओखला से आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक अमानतुल्लाह खान को गिरफ्तार करने के एक दिन बाद शुक्रवार (13 मई 2022) को दिल्ली पुलिस ने उनके खिलाफ कड़ा एक्शन लेते हुए उन्हें बैड केरेक्टर और आदतन अपराधी घोषित कर दिया है। जमीनों पर कब्जे और मारपीट के 18 केसों में आरोपित आप विधायक के खिलाफ 28 मार्च को ही जामिया नगर थाने के एसएचओ बंच-A का बैड कैरेक्टर घोषित करने को लेकर प्रस्ताव डीसीपी को भेजा था।

रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने इसे स्वीकार भी कर लिया है। इसी के साथ अब से अमानतुल्लाह खान हिस्ट्रीशीटर अपराधी हो गए हैं। इससे पहले उन्हें गुरुवार को ही सरकारी काम में रुकावट डालने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया था। फिलहाल वो तिहाड़ जेल में बंद हैं। पुलिस की इस कार्रवाई से पहले अमानतुल्लाह खान के ट्विटर हैंडल से एक ट्वीट किया गया था। इसमें लिखा गया था कि भाजपा के बुलडोजरतंत्र का विरोध कर रही जनता के खिलाफ दिल्ली पुलिस का एक्शन असंवैधानिक है।

अमानतुल्लाह खान को बैड कैरेक्टर घोषित करने के बाद भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने चुटकी लेते हुए कहा, “तो दिल्ली पुलिस के मुताबिक अमानतुल्लाह खान अब से एक आदतन अपराधी हैं।”

क्या है पूरा मामला

गौरतलब है कि दिल्ली नगर निगम की ओर से दिल्ली को अतिक्रमण से मुक्त करने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में मदनपुर खादर में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान वहाँ के स्थानीय लोगों ने इसका जमकर विरोध किया। इन्हीं प्रदर्शनकारियों में अमानतुल्लाह खान भी शामिल थे। इस दौरान आप विधायक और दिल्ली पुलिस के बीच तीखी नोंक-झोंक भी हुई। वो लगातार लोगों को उकसाने का काम कर रहे थे। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने आप विधायक समेत 6 को गिरफ्तार कर लिया।

उनके खिलाफ सरकारी काम में बाधा, दंगा करने समेत विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया गया। उनकी बीवी शाफिया ने अमानतुल्लाह खान की जान को खतरा होने का आऱोप लगाया है।

पाकिस्तानी सांसद का न्यूड Video हुआ वायरल, शरीर पर नहीं एक कपड़ा, बेड पर रखे हैं ड्रग्स: बीवी कहती है इन्हें- ‘शैतान से बद्तर’

पाकिस्तान की पीटीआई पार्टी के सांसद आमिर लियाकत (49) का अपनी तीसरी बीवी दानिया शाह (19) के साथ तलाक का मामला चल रहा है। इस बीच सांसद का न्यूड वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। आमिर लियाकत ने इसके लिए दानिया को जिम्मेदार ठहराते हुए आरोप लगाया कि उसने निकाह की निजता और विश्वास को तोड़ दिया है। उसने अल्लाह की बनाई सभी सीमाओं को धराशाई कर दिया है।

कुरान की एक आयत का जिक्र करते हुए आमिर लियाकत कहते हैं कि बीवी और शौहर एक-दूसरे के कपड़े की तरह होते हैं, लेकिन दानिया ने इसे तोड़ दिया है। ऐसा आरोप लगाया जा रहा है कि इस न्यूड वीडियो को दानिया ने ही लीक किया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो में आमिर लिया पूरी तरह से नंगे दिखते हैं और उनके बेड पर ड्रग्स भी रखी दिखती है।

इसको लेकर ट्विटर के जरिए आमिर लियाकत का कहना है कि जो लोग इस न्यूड वीडियो पर उनके रुख को जानना चाहते हैं, इसका जबाव ये है कि इसे लीक करने वाले का क्या रुख है? अपनी बेबसी को व्यक्त करते हुए आमिर पूछते हैं कि आखिर कोर्ट कहाँ है। हर नागरिक के सम्मान की रक्षा करना उसका कर्तव्य है औऱ उसने कोई एक्शन क्यों नहीं लिया। अभी तक संघीय जाँच एजेंसी का साइबर क्राइम विंग ने भी कोई एक्शन नहीं लिया।

दानिया का नाम लिए बिना लियाकत ने कहा कि जो लोग एडल्ट्री में लिप्त हैं और जिसने निकाह को चुना वो बुरा हो गया। दानिया ने निकाह जैसे संबंधों को तार-तार कर दिया है। उनका यह भी कहना है कि जो लोग इस वीडियो के लीक होने पर उनका मजाक उड़ा रहे हैं, अगर उनकी जगह कोई महिला होती तो भी क्या लिबरल्स ऐसा ही करते।

दानिया ने लगाए थे गंभीर आरोप

गौरतलब है कि इससे पहले दानिया शाह ने आमिर लियाकत को ‘शैतान से भी बुरा’ बताया था। दोनों का निकाह 3 महीने पहले 9 फरवरी 2022 को हुआ था। दनिया ने कहा था, “उसका बर्ताव शैतान से भी बुरा है। आमिर आए दिन शराब के नशे में मुझे पीटता था। साथ ही वो मुझे और मेरे परिवार को लगातार धमकियाँ भी देता था। मैंने अदालत से माँग की है कि वो आमिर को हमें घर, 15 करोड़ रुपए और ज्वैलरी देने का आदेश दें।”

दनिया ने आरोप लगाया था, “वो (आमिर) कहता है कि मैं दुनिया छोड़ सकता हूँ पर नशा नहीं। न जाने कौन सा नशा है वो और कहाँ से उसे लाता है। वो सफेद रंग का होता है और काले रंग की प्लेट में बनाता है उसको। बाद में उसे वो नाक से लेता था। इसके अलावा वो वोडका भी पीता था।”

एक तरफ ज्ञानवापी मस्जिद के सर्वे की तैयारी, वहीं औरंगजेब की कब्र पर अकबरुद्दीन ओवैसी ने पढ़ा फातिहा: भड़की शिवसेना, मनसे ने भी की कार्रवाई की माँग

एआईएमआईएम (AIMIM) के विधायक और सांसद असदुद्दीन ओवैसी के भाई अकबरुद्दीन ओवैसी गुरुवार (12 मई, 2022) को महाराष्ट्र के औरंगाबाद के दौरे पर थे। इस दौरान उन्होंने जहाँ एक स्कूल का उद्घाटन किया, वहीं एमएनएस प्रमुख राज ठाकरे के खिलाफ काफी आग उगला। लेकिन असली विवाद तब सामने आया जब वह मुगल बादशाह औरंगजेब की कब्र पर चादर चढ़ाने गए। बता दें कि उनके साथ औरंगाबाद के सांसद इम्तियाज जलील भी थे।

जिसे लेकर न्यूज़ 18 के पत्रकार अमन चोपड़ा ने ट्वीट करते हुए लिखा, “एक तरफ ज्ञानवापी मस्जिद के सर्वे की तैयारी हो रही है, तो दूसरी तरफ अकबरउद्दीन ओवैसी ने महाराष्ट्र के औरंगाबाद में विदेशी आक्रांता औरंगजेब की कब्र पर फातिहा पढ़ा।”

लाउडस्पीकर और हनुमान चालीसा को लेकर महाराष्ट्र में जारी राजनीति के बीच अकबरुद्दीन ओवैसी के इस व्यवहार को लेकर पूरे महाराष्ट्र में ज़बरदस्त आक्रोश है। जहाँ ओवैसी के भाई ने बिना नाम लिए राज ठाकरे पर हमला किया वहीं कई पार्टी के नेताओं ने भी ओवैसी के भाई अकबरुद्दीन पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। वहीं शिवसेना नेता संजय राउत ने भी इस मुद्दे पर आज (13 मई, 2022) पत्रकारों से बात करते हुए ओवैसी भाइयों पर करारा प्रहार किया है।

संजय राउत ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, “वे बार-बार आते हैं महाराष्ट्र को चिढ़ाने के लिए वे बार-बार औरंगजेब के सामने सर झुकाते हैं। महाराष्ट्र में अशांति पैदा करने की कोशिश करते हैं। औरंगजेब एक आक्रामक था, कोई सूफी-संत नहीं था। उसने महाराष्ट्र के मंदिरों को ध्वस्त किया था। छत्रपति शिवाजी महाराज ने उनके साथ संघर्ष किया। आप उसी महाराष्ट्र में आकर औरंगजेब की कब्र में चादर चढ़ाएँगे,, महाराष्ट्र के लोगों को चिढ़ाएँगे तो याद रखिए औरंगजेब की कब्र महाराष्ट्र ने ही खोदी थी। आप उस कब्र पर सर झुका रहे हैं। आपका भी वही हाल होना है, आपको भी एक दिन उसी कब्र में जाना है।”

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अकबरुद्दीन ओवैसी ने औरंगाबाद में अपने भाषण में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। अकबरुद्दीन ने औरंगाबाद में आयोजित के सभा में राज ठाकरे का नाम लिए बिना कहा, “मैं यहाँ किसी को जवाब देने नहीं आया हूँ, ना ही किसी को बुरा कहने। तुम्हारी औकात नहीं है कि मैं जवाब दूँ , मेरा तो एक सांसद है और तुम तो बेघर हो, तुम लापता हो, तुम्हे घर से बेदखल किया गया है। मैं तो यह कहूँगा कि जो भी कुत्ता भौंकता है उसे भौंकने दो।”

अकबरुद्दीन ओवैसी ने आगे मनसे को भड़काते हुए कहा, “मैं जवाब जरूर देने आऊँगा एक दिन, आम और खास के मैदान पर अकबरुद्दीन ओवैसी लड़ेगा, अपने पसंदीदा जगह और पसंदीदा समय, तुम्हारी पसंदीदा जगह पर नहीं, जगह और समय मैं तय करूँगा।”

ओवैसी के भाई अकबरुद्दीन यहीं नहीं रुके, उन्होंने आगे कहा, “मुल्क में नफरत की बातें की जा रही हैं, लेकिन वह नफरत से नहीं बल्कि मोहब्बत से जवाब देंगे। देश में अजान की बात हो रही है, लिंचिंग और हिजाब की बात हो रही है, तो डरना नहीं चाहिए बस मुसलमानों को एक साथ इकट्ठा खड़े होने की जरूरत है।”

गौरतलब है कि मनसे नेता गजानन काले ने ओवैसी के मकबरे की यात्रा पर आपत्ति जताते हुए कहा, “निजाम की औलाद आकर शिवाराया के महाराष्ट्र में औरंगजेब की कब्र का दर्शन करके चली जाती है। किसके आशीर्वाद से यह सब चल रहा है? राज ठाकरे पर पाबंदी लगाया जा रहा है और ओवैसी बंधुओं को खुली छूट दी जा रही है। महाराष्ट्र सरकार को औरंगजेब की कब्र पर जाने के लिए अकबरुद्दीन ओवैसी के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। कार्रवाई नहीं हुई तो मनसे कार्रवाई करेगी।”

बता दें कि बीजेपी की ओर से विधानपरिषद में विपक्षी नेता प्रवीण दरेकर ने भी ओवैसी को जवाब देते हुए कहा कि वे औरंगजेब की औलाद हैं, यह उन्होंने दिखा दिया। वहीं मनसे नेता और औरंगाबाद में जिलाध्यक्ष सुमित खांबेकर ने कहा कि हैदराबाद से कुछ लोग औरंगाबाद में भौंकने आए थे। उन्हें औरंगजेब की कब्र दिखाई दी, 17 लाख लोगों की पानी की समस्या नहीं दिखाई दी।

शरद पवार ने ‘कविता’ की आड़ में हिंदू देवताओं को दी गाली, मंच से बोले- ‘हम तुम्हारे भगवान के भी बाप हैं’

राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP) के अध्यक्ष शरद पवार (Sharad Pawar) एक बार फिर से विवादों में हैं। इस बार हिंदू देवी-देवताओं के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल करने के लिए उनकी चौतरफा आलोचना हो रही है। महाराष्ट्र के सतारा में 9 मई को भारतीय जनजातीय अनुसंधान और विकास संस्थान (Indian Tribal Research and Development Institute) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में शरद पवार को बतौर अतिथि आमंत्रित किया गया था।

इस दौरान वहाँ मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए शरद पवार ने जवाहर राठौड़ की कविता का जिक्र किया। राठौड़ की कविता का हवाला देते हुए राकांपा प्रमुख ने कहा कि कैसे उन्होंने इसमें अपने पिछड़ी जाति से आने और लोगों द्वारा उनके साथ किए गए व्यवहार का वर्णन किया है। शरद पवार ने कहा, “हमने तो मूर्तियों को तराशा और लेकिन आपने केवल उन्हें मंदिरों के अंदर ही रखा और तुम साले हरामी हमें मंदिरों में प्रवेश भी नहीं करने देते?”

कार्यक्रम में शरद पवार कथित तौर पर निम्न जातियों के लोगों को मंदिरों में प्रवेश नहीं करने देने के लिए पुजारियों की आलोचना करने के लिए कवि जवाहर राठौड़ का हवाला दे रहे थे। पवार ने आगे कहा, “ब्रह्मा-विष्णु-महेश, इन हिंदू देवताओं को हमने छन्नी से और अन्य अपने औजारों का उपयोग करके बनाया है। हम तुम्हारे भगवान के भी बाप हैं, क्योंकि हम ने इन्हें तुम्हारा परमेश्वर बनाया है। इसलिए जवाहर राठौड़ ने एक कविता लिखी है, जिसमें कहा गया है कि हम अपने साथ हुए अन्याय को बर्दाश्त नहीं करेंगे।”

आज के दौर में सदियों पुरानी छूआछूत और भेदभाव वाली प्रथाओं का जिक्र करके शरद पवार ने एक बार फिर अप्रत्यक्ष रूप से हिंदू धर्म की उच्च जातियों को निशाना बनाया है। हालाँकि, ऐसा पहली बार नहीं है, जब शरद पवार ने इस तरह का काम किया हो। दरअसल, वह महाराष्ट्र में विशेष रूप से ब्राह्मणों को निशाना बनाने के लिए जाने जाते हैं। कभी-कभी वह स्पष्ट रूप से ब्राह्मणों का नाम लेकर उनके लिए अपशब्दों का प्रयोग भी करते हैं। शरद पवार ने यह भी कहा, “मुझे बस इतना कहना है कि दुर्व्यवहार, लोगों के साथ भेदभाव की प्रवृत्ति अभी भी हमारे समाज में है। आज भी हम सबके बीच एक ऐसा वर्ग है, जो रीति-रिवाजों, परंपराओं की आड़ में जाति और धर्म को लेकर नफरत के बीज बो रहा है।”

इस भाषण के लिए शरद पवार की आलोचना करते हुए, भाजपा नेता सुनील देवधर ने ट्वीट किया, “राकांपा प्रमुख शरद पवार ने अपना मानसिक संतुलन खो दिया है और हिंदू देवताओं को ‘साला’ कहकर उनके भक्तों को नीचा दिखाया है। इस हताश नेता ने यह कहकर केवल अपनी घृणा दिखाई है कि मैं तुम्हारे देवताओं का ‘बाप’ हूँ। इससे पहले कि लोग उनसे दूरी बना लें उन्हें राजनीति से संन्यास ले लेना चाहिए।”

बता दें कि सोशल मीडिया पर कई अन्य लोग इस बयान के लिए शरद पवार की आलोचना कर रहे हैं।

वाराणसी के ज्ञानवापी मस्जिद में सर्वे पर रोक से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, मथुरा के ईदगाह मस्जिद में सर्वे वाली माँग कोर्ट ने स्वीकारी

उत्तर प्रदेश के वाराणसी (Varanasi, Uttar Pradesh) स्थित विवादित ज्ञानवापी मस्जिद (Gyanvapi Masjid) के सर्वे और वीडियोग्राफी का मामला देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुँच गया है। सुप्रीम कोर्ट में दी गई याचिका में वाराणसी कोर्ट द्वारा मस्जिद में सर्वे और वीडियोग्राफी कराने के निर्णय को चुनौती दी गई है। सर्वोच्च न्यायालय ने इस पर तत्काल रोक लगाने से इनकार कर दिया है। CJI एनवी रमन्ना (NV Ramana) ने कहा है कि वे पहले फाइलें देखेंगे, फिर फैसला लेंगे। हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट काशी विश्वनाथ मंदिर-ज्ञानवापी मस्जिद परिसर मामले की सुनवाई के लिए तैयार हो गया है और मामले को जल्द ही सूचीबद्ध किया जाएगा। वहीं, ज्ञानवापी मस्जिद के सर्वे की तरह ही मथुरा में श्रीकृष्‍ण जन्‍मभूमि-ईदगाह मस्जिद में सर्वे की माँग को लेकर दायर की गई याचिकाओं को वहाँ की स्थानीय कोर्ट ने स्‍वीकार कर लिया है।

सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका सीनियर एडवोकेट हुजेफा अहमदी ने दायर की है। बताया जा रहा है कि हुजेफा अहमदी ज्ञानवापी केस से नहीं जुड़े हैं। वहीं, अंजुमन इंतजामिया मस्जिद कमेटी ने भी अहमदी के इस मामले से जुड़े होने से इनकार किया है। कमिटी का कहना है कि उनके आधिकारिक वकील का नाम फुजैल अहमद अयूबी है। बता दें कि अहमदी पहले भी धारा-370, गौरी लंकेश, वन रैंक-वन पेंशन और कश्मीर घाटी को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर चुके हैं।

अहमदी ने अपनी याचिका में CJI की कोर्ट से अपील की कि शनिवार (14 मई 2022) से सर्वे की कार्रवाई शुरू हो जाएगी, इसलिए इस पर तत्काल सुनवाई की जाए और कम-से-कम यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया जाए। इसके बाद CJI रमन्ना ने कहा, “अभी हमने इस मामले से जुड़े पेपर नहीं देखे हैं। बिना पेपर देखे कोई आदेश जारी नहीं किया जा सकता।”

उधर, काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद विवाद को लेकर मस्जिद परिसर में सर्वे के बाद मथुरा में भी ईदगाह मस्जिद में सर्वे की जा सकती है। स्थानीय कोर्ट ने ज्ञानवापी मस्जिद के सर्वे की तरह मथुरा में श्रीकृष्‍ण जन्‍मभूमि से सटे ईदगाह मस्जिद में सर्वे की माँग वाली याचिकाओं को स्वीकार कर लिया है। इस मामले की सुनवाई अब एक जुलाई को की जाएगी।

मथुरा के ईदगाह मस्जिद को लेकर प्रार्थना-पत्र अधिवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह (Mahendra Pratap Singh) ने दायर किया है। उन्होंने कहा है कि शाही ईदगाह मस्जिद परिसर का अवलोकन कर के कमल, शंख, गदा, ॐ और स्वास्तिक जैसे हिन्दू प्रतीक-चिह्नों के सबूत अदालत के समक्ष पेश किए जाएँ। इस मामले की सुनवाई मंगलवार (10 मई, 2022) को होगी। इससे पहले भी अधिवक्ता महेंद्र प्रताप अदालत के समक्ष इस तरह की माँग रख चुके हैं। दिसंबर 2021 में मथुरा में एक याचिका दायर की गई थी।

इस याचिका में माँग की गई थी कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि परिसर में स्थित शाही ईदगाह मस्जिद में नमाज पढ़ने पर रोक लगाई जाए। ‘श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन समिति’ ने ये याचिका दायर की थी। अधिवक्ता महेंद्र प्रताप इस संगठन के अध्यक्ष हैं, जिनका कहना है कि ईदगाह में नमाज नहीं पढ़ी जाती थी, लेकिन यहाँ जानबूझ कर पाँच वक्त की नमाज अदायगी शुरू कर दी गई है। उन्होंने इसे हिन्दुओं की संपत्ति करार दिया था।

बता दें कि जिस तरह वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर को तोड़कर ज्ञानवापी मस्जिद बनाई गई है, उसी तरह मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर को तोड़कर ईदगाह मस्जिद बनाई गई है।

पहले लाठी-पत्थरों से मारा, फिर शरीर में लगा दी आग: ‘अल्लाहु अकबर’ चिल्लाती भीड़ ने की ईसाई छात्रा की निर्मम हत्या, वायरल Video में कट्टरपंथी नाचते दिखे

अफ्रीकी देश नाइजीरिया से इस्लामिक हिंसा का नया मामला प्रकाश में आया है, जहाँ सोकोटो के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में कॉलेज में ईशनिंदा के आरोप में इस्लामिक भीड़ ने डेबोरा सैमुअल नाम की एक ईसाई छात्रा को पीट-पीट कर मार डाला। रिपोर्ट के मुताबिक, व्हाट्सएप ग्रुप पर डेबोरा के कुछ मित्रों ने कमेंट किए थे, जिसे इस्लामिक कट्टरपंथियों ने ईशनिंदा मान लिया और इस वारदात को अंजाम दिया।

पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। इसमें देखा जा सकता है कि इस्लामिक भीड़ ने अल्लाहु अकबर जैसे मजहबी नारे लगाते हुए डेबोरा की मॉब लिचिंग की और उसे जला दिया। आरोपितों को वीडियो में माचिस की तीली दिखाते हुए खुशी मनाते हुए देखा जा सकता है।

मृतक डेबोरा सैमुअल सोकोटो राज्य के शेहू शगरी कॉलेज ऑफ एजुकेशन की छात्रा थीं। दावा है कि एक व्हाट्सएप ग्रुप को डेबोरा अपने दोस्तों के संग मिलकर चला रही थीं। उसी ग्रुप में इस्लामिक पोस्ट शेयर हुए थे, जिस पर डेबोरा ने भी कमेंट किया था, जिसे इस्लामियों ने ‘ईशनिंदा’ मान लिया। कुछ रिपोर्टों के मुताबिक, डेबोरा ने केवल एक कॉलेज व्हाट्सएप ग्रुप में रिलीजियस कंटेंट पोस्ट करने पर आपत्ति जाहिर की थी।

इसके बाद कट्टरपंथियों की भीड़ ने डेबोरा पर हमला कर दिया, उसकी हत्या कर दी गई। कॉलेज के अधिकारी और पुलिस उसे असहाय होकर देखते रहे। कहा जा रहा है कि हमलावरों की संख्या इतनी अधिक हो गई थी कि डेबोरा को बचा पाना मुश्किल हो गया था। कॉलेज के पुरुष मुस्लिम छात्रों की भीड़ ने उसे बेरहमी से पीटा, दबोरा को पत्थर मारकर मार डाला और फिर उसे जला दिया।

इस वारदात की चश्मदीद एक कॉलेज छात्रा ने द गार्जियन को बताया, “छात्रों द्वारा पत्थरबाजी करने औऱ लाठी डंडों से हमला करने के बाद पुलिस ने महिला को मरने दिया। उसे मारने के बाद उसे आग लगा दी गई।” कॉलेज प्रशासन ने संस्थान को अनिश्चित काल के लिए बंद कर दिया है। वहीं कथित तौर पर पुलिस ने 2 आरोपितों को गिरफ्तार भी किया है, बाकी के फरार चल रहे हैं।

सोकोटो में लागू है शरिया कानून

नाइजीरिया दो भागों में बंटा है-उत्तरी और दक्षिणी। इसमें से उत्तरी हिस्से में मुस्लिम अधिक हैं तो दक्षिणी हिस्से में ईसाई समुदाय निवास करता है। यहाँ इस्लामिक शरिया कानून चलता है। इसलिए नाइजीरिया के अन्य राज्यों की तरह ही सोकोटा को न्याय मिलेगा, ये सोचना भी गलत है। ऐसा इसलिए क्योंकि इस्लाम में ईशनिंदा की सजा सिर्फ मौत है।

इसी तरह से साल 2016 में कानो में 74 साल की ईसाई महिला को मुस्लिम भीड़ ने पीट-पीट कर मार डाला था। उस पर भी ईशनिंदा का ही आरोप था। ब्रिजेट अब्गाहिम अपनी दुकान में थीं, तभी मुस्लिम भीड़ ने उनकी हत्या कर दी। वोन्यूज़ की रिपोर्ट में कहा गया है कि 2021 में बाउची राज्य के दाराज़ो जिले में भी इसी तरह का आरोप लगाते हुए भीड़ ने एक व्यक्ति की हत्या कर दी गई थी। इसी तरह से 2007 में नाइजीरिया में माध्यमिक विद्यालय के छात्रों ने कुरान के कथित अपमान का आऱोप लगाकर एक शिक्षक की हत्या कर दी थी।

मुलायम सिंह यादव ने रुकवाई थी ज्ञानवापी परिसर में बने श्रृंगार गौरी मंदिर में पूजा, पहले 365 दिन होता था अभिषेक: BJP नेता का दावा

उत्तर प्रदेश के वाराणसी (Varanasi, Uttar Pradesh) में स्थित विवादित ज्ञानवापी मस्जिद (Gyanvapi Masjid) को लेकर एक सनसनीखेज तथ्य सामने आया है। भाजपा नेता प्रेम शुक्ला (BJP Leader Prem Shukla) ने दावा किया है कि प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav) ने माता श्रृंगार गौरी (Mata Shringar Gauri) में हिंदुओं को पूजा करने से रोका था।

बता दें कि ज्ञानवापी मस्जिद में सर्वे और वीडियोग्राफी को लेकर चल रहा विवाद भी माता श्रृंगार गौरी के पूजा-पाठ से ही संबंधित है। याचिकाकर्ता राखी सिंह (Rakhi Singh) सहित पाँच हिन्दू महिलाओं ने अदालत से अनुमति माँगी है कि उन्हें पुराने मंदिर परिसर में प्रतिमाएँ रख कर पूजा की अनुमति दी जाए।

ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में स्थित माता श्रृंगार गौरी को लेकर एक टीवी डिबेट में प्रेम शुक्ला ने दावा किया, “साल 1996 में महाशिवरात्री के दिन मैंने खुद श्रृंगार गौरी मंदिर में अभिषेक किया था। उस दौरान वहाँ साल के 365 दिन अभिषेक होता था।” शुक्ला ने कहा कि उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की सरकार ने Worship Act 1991 का उल्लंघन करते हुए उन्होंने मंदिर में नियमित पूजा-पाठ को रोक दी।

मुलायम सिंह यादव पर मुस्लिम तुष्टीकरण का आरोप लगाते हुए शुक्ला ने कहा कि उनकी सरकार ने माता श्रृंगार गौरी में सिर्फ मुस्लिम तुष्टीकरण के कारण साल 2004 में पूजा रोक दी। उन्होंने कहा कि साल 1992 में बाबरी ढाँचे को गिराए जाने के दौरान भी इस मंदिर में पूजा को नहीं रोका गया।

उन्होंने आगे कहा, “आप मुझे विश्व की किसी एक मस्जिद का नाम बता दीजिए भारत के अलावा, जहाँ पर बूत (मूर्ति) हो, शंख हो, चक्र हो, जहाँ पर मंदिर हो। आपका मजहब इस्लाम बार-बार कहता है कि किसी अन्य धर्म के विवादित स्थल पर मस्जिद नहीं कायम की जा सकती। यहाँ तो मंदिर को तोड़ा गया, यह इतिहास है।”

बता दें कि ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में सर्वे और वीडियोग्राफी के दौरान मुस्लिम पक्ष द्वारा हंगामा करने के बाद वाराणसी की सिविल कोर्ट ने पूरी मस्जिद के क्षेत्र का वीडियोग्राफी और सर्वे कराने का आदेश दिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी आदेश दिया है कि अगर इसमें कोई बाधा पहुँचाता है तो जिलाधिकारी उसके खिलाफ FIR दर्ज कराएँ।

औरंगजेब ‘महान’… टोपी बुनकर-कुरान लिखकर खाता था रोटी, मंदिर भी बनवाता था: इस्लामी स्कॉलर ने ऑन कैमरे दिया इतिहास का ज्ञान, BJP प्रवक्ता की छूटी हँसी

12 मई 2022 (गुरुवार) को समाचार चैनल ‘आज तक’ के शो ‘हल्ला बोल’ में वाराणसी ज्ञानवापी मुद्दे पर एक बहस हुई। इस बहस में मुस्लिम पक्ष की तरफ से बोलते हुए इस्लामिक स्कॉलर हाजिक खान ने औरंगजेब को महान बताते हुए उसकी शान में कसीदे गढ़े। जवाब में भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया ने उनकी चुटकी ली।

पत्रकार अंजना ओम कश्यप ने सवाल किया, “मुगल आक्रांताओं की पहरेदारी क्यों की जा रही है ?” इस पर हाजिक खान ने कहा, “किसी के कहने से इस मुल्क पर 53 साल हुकूमत करने वाला आक्रांता नहीं हो जाता। इतना शासन कोई भाजपा नेता भी नहीं कर सकता। मैं इतिहास का छात्र हूँ इसलिए ये जानकारी रखता हूँ। औरंगजेब ने इतिहास में कोई भी बिल्डिंग भारत में नहीं बनाई। उसके बाप, दादा और परदादा सभी बादशाह थे लेकिन उसने टोपी बुन के और कुरान लिख कर रोटी खाई है।”

हाजिक खान ने आगे कहा, “बाबरी शहीद होने के बाद आपके आज तक चैनल पर ही रिपोर्ट दिखाई गई थी कि औरंगजेब ने 18 -19 मंदिर छोड़े और 20-22 बनवाए। साथ ही उसने इस देश के हिन्दुओं को 126 जमीनें दी थीं। मोदी और योगी जिस मठ में बैठे हुए हैं वो नवाब वाजिद अली शाह की दी गई है। हम कोर्ट का आदेश मानने को तैयार हैं। हमने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया। ये (भाजपा वाले) संविधान की अवहेलना कर रहे हैं। ये संसद में पारित प्लेसेस ऑफ़ वर्शिप एक्ट को भी मानने के लिए तैयार नहीं हैं।”

इन आरोपों के जवाब में भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया ने कहा, “आज इनका मुगल प्यार जग गया है। औरंगज़ेब ने तो अपने पिता को ही जेल भेज दिया था। आप (हाजिक खान) बच कर रहिएगा कि कहीं आपके साथ ऐसा न हो जाए। आपकी नियति काली है। आज ये हम पर प्लेसेस ऑफ़ वर्शिप एक्ट न मानने का आरोप लगा रहे हैं। हमने इस एक्ट को गैर संवैधानिक मानते हुए सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। लेकिन जिस CAA को संसद ने ही पास किया था उसे आपने नहीं माना। क्या वो पाकिस्तान से आया था या तुर्की से ? आज इनके जैसा एक वर्ग मंदिर-मस्जिद से हट कर शिक्षा की दुहाई देता है लेकिन उसी वर्ग को रोहिंग्या और पर्दा चाहिए। इन्हे बाकी सब कुछ वो चाहिए हो संविधान में नहीं है। क्योंकि जीत हिन्दू पक्ष की हुई है इसलिए ये झटके में हैं।”