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दुनिया के सामने अमेरिका ने चीन से ताइवान को बचाने का किया ऐलान, लोगों ने याद दिलाया- US ने समय आने पर यूक्रेन के साथ क्या किया

जापान में आयोजित होने जा रहे क्वाड समिट से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति जो बॉयडेन ने चीन को धमकी दी है। उन्होंने स्पष्ट तौर पर ड्रैगन को चेताते हुए कहा कि यदि चीन ने ताइवान पर हमला किया तो अमेरिका ताइवान की सैन्य मदद करेगा। हालाँकि, यहाँ अमेरिकी राष्ट्रपति दुनिया के सामने ताइवान को बचाने का ऐलान करते नजर आ रहे हैं। यह वैसा ही कुछ मामला है जैसा बयान अमेरिका ने रूस द्वारा यूक्रेन पर हमले के समय दिया था। सोशल मीडिया पर लोग याद दिला रहे हैं कि ऐसे ही समय आने पर अमेरिका ने यूक्रेन के साथ क्या किया था।

जहाँ अमेरिकी राष्ट्रपति ने चीन को धमकी देते हुए कहा कि चीन खतरे से खेलने का प्रयास कर रहा है। मीडिया को सम्बोधित करते हुए जो बाइडेन ने कहा कि यह हमारा कमिटमेंट है कि ताइवान की रक्षा करेंगे। उन्होंने कहा, “वन चाइना पॉलिसी को लेकर सहमत हैं, लेकिन किसी भी क्षेत्र पर यदि चीन की ओर से जबरन कब्जा किया जाता है तो फिर उसका जवाब दिया जाएगा।”

अमेरिकी राष्ट्रपति के इस चेतावनी के बाद सोशल मीडिया पर लोग पूछते नजर आ रहे हैं। समवर नाम के एक ट्विटर यूजर ने लिखा, “यूक्रेन को बुरी तरह तबाह करने के बाद अब ताइवान की बारी है। क्या अब वह एक नया युद्ध शुरू करने की तैयारी है। क्या अगला निशाना ताइवान है?”

किसी ने अमेरिकी राष्ट्रपति पर तंज कस्ते हुए लिखा है, “बायडेन ऐसा कर सकते हैं हमने अफगानिस्तान और यूक्रेन में देखा ही है।”

वहीं सोशल मीडिया पर किसी ने इसे वॉर मोंगरिंग कहते हुए ऐसे युद्दों की पूरी लिस्ट ही जारी कर दी।

बाबो नाम के किसी अंडरग्राउंड पत्रकार ने ट्विटर पर लिखा, “यदि ताइवान सैन्य रूप से अमेरिका पर निर्भर है, तो इसका भी अंत वियतनाम की तरह होगा। हम बीजिंग-वाशिंगटन समझौते में बस बलि का बकरा थे।”

बायडेन ने कहा, “हम वन चाइना पॉलिसी से सहमत हैं। हमने उस पर हस्ताक्षर किए हैं, लेकिन बलपूर्वक कुछ भी हथियाने का काम चीन करता है तो वह अच्छा नहीं होगा। इससे पूरे क्षेत्र में अशांति होगी और यहाँ भी वैसा ही ऐक्शन होगा, जैसा यूक्रेन में लिया जा रहा है।”

इस तरह से देखा जाए तो अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह साफ कर दिया कि कैसे पश्चिमी देशों ने यूक्रेन को मदद की है और इसके चलते रूस को बड़ा झटका लगा है। वहीं अब इस उथल-पुथल के बीच यदि चीन की ओर से ताइवान को लेकर हमले जैसी स्थिति पैदा की जाती है तो फिर उसके खिलाफ भी ऐसा ही ऐक्शन लिया जाएगा।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति ने रूस को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा, “यह महत्वपूर्ण है कि यूक्रेन में बर्बरता की कीमत व्लादिमीर पुतिन को चुकानी होगी। रूस को लंबे वक्त तक इसकी कीमत अदा करनी होगी।”

जो बायडेन ने यह भी कहा, “यह बात सिर्फ यूक्रेन को लेकर ही नहीं है। चीन भी यह देख रहा है कि कैसे पश्चिमी देशों के दखल के चलते रूस को पीछे हटना पड़ा है। चीन को इससे ज्यादा क्या संकेत दिया जा सकता है कि यदि उसने ताइवान पर हमला किया तो फिर क्या कीमत चुकानी पड़ सकती है। उन्होंने कहा कि चीन के पास यह अधिकार नहीं है कि वह ताइवान पर जबरन कब्जा कर ले।

ET ने छापा शिवलिंग का मजाक बनाने वाला कार्टून: लगातार उड़ाया जा रहा हिन्दू आस्थाओं का मजाक, उन्हें पता है FIR से ज्यादा कुछ नहीं होगा

इकोनॉमिक्स टाइम्स (ET) के प्रिंट वर्जन में रविवार (22 मई, 2022) को एक कार्टून के माध्यम से ज्ञानवापी मुद्दे पर हिन्दुओं का मजाक उड़ाया गया। इस कार्टून में भाभा एटॉमिक रिसर्च केंद्र को शिवलिंग के तौर पर दिखाया गया। कार्टून का शीर्षक ‘बम भोलेनाथ’ दिया गया था। यह कार्टून अख़बार के ‘दुनिया’ वाले कॉलम में छपा था।

कार्टून स्क्रीनशॉट

इसी अख़बार में एक अन्य कार्टून में ताज महल के बेसमेंट में लगे दरवाजों को खोलने पर एक कार्टून छापा गया है।

ET कार्टून स्क्रीनशॉट

ज्ञानवापी सर्वे के दौरान शिवलिंग मिलने के बाद कई लोगों ने हिन्दू आस्थाओं पर प्रहार करने वाले कमेंट्स किए। उनमे से कुछ के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की गई है। हाल ही में TMC सांसद महुआ मोइत्रा, पत्रकार सबा नक़वी, रिटायर्ड IAS सूर्य प्रताप सिंह, पीस पार्टी के शादाब चौहान और RJD पार्टी के नेता कुमार दिवाशंकर के खिलाफ हिन्दू आस्थाओं को चोट पहुँचाने की शिकायत दर्ज करवाई गई है। इसी क्रम में दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर रतन लाल को गिरफ्तार भी किया गया, जिन्हें बाद में जमानत मिल गई थी।

इस कार्टून को प्रकाशित करते हुए इकोनॉमिक टाइम्स ने हिन्दू आस्थाओं का जरा सा भी ध्यान नहीं रखा। अगर यही कार्टून किसी और मज़हब की आस्था से जुड़ा होता तो कोई मेन स्ट्रीम मीडिया इसको छूना भी पसंद नहीं करता। लेकिन, बात हिन्दुओं की हो तो उनकी आस्थाओं का मजाक एक सामान्य बात जैसी हो जाती है।

असल में हिन्दू समाज की आस्था का मजाक उड़ाना आज कल मीडिया संस्थानों की एक आदत ही हो गई है। ऐसा करना सच्चा लिबरल होने की निशानी माना जाने लगा है। इसी के साथ इसका विरोध नहीं किसी के द्वारा न करने पर उन्हें ये सब करना और आसान लगने लगता है। इस बार ज्ञानवापी मामले में भी यह हर कोई जानता है कि काशी विश्वनाथ हिन्दुओं के सबसे अधिक पवित्र धर्मस्थलों में से एक है। लेकिन इसके बाद भी एक राष्ट्रीय दैनिक अख़बार द्वारा उस पर इतना आपत्तिजनक कार्टून बनाया गया।

हिन्दू आस्थाओं का मजाक सिर्फ इकोनॉमिक्स टाइम्स ही नहीं बल्कि कई अन्य मेन स्ट्रीम मीडिया बना रहे हैं। उनके मुताबिक हिन्दू का कुछ भी RSS/BJP है। इसी की आड़ में वो समूचे हिन्दू धर्म का मजाक बनाना शुरू कर देते हैं। कुल मिला कर वो संघ की विचारधारा से सहमत न होने के चलते संघियों की मौत की इच्छा रखना शुरू कर देते हैं। उन सभी को ये भी नहीं पता कि हिन्दुओं की अपनी खुद की भी पहचान है। हिन्दू सिर्फ राजनैतिक पार्टी या संस्थान का प्रतीक नहीं है।

ऐसी हरकतें इसलिए भी की जा रही हैं क्योकि मीडिया संस्थानों के साथ आम लोगों को भी पता है कि इसमें कोई रिस्क नहीं है। उन्हें पता है कि ज्यादा से ज्यादा इस केस में FIR होगी। सबने देखा कि दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर रतनलाल को अगले ही दिन जमानत मिल गई। रतनलाल ने कोर्ट में खुद को हिन्दू बताया। इस तरह कोई भी हिन्दुओं के आराध्य, उनके त्योहारों और उनके धर्मस्थलों पर आपत्तिजनक टिप्पणी कर सकता है और बाद में खुद को भी हिन्दू बताते हुए अभिव्यक्ति की आज़ादी की दुहाई दे सकता है। ऐसे में कई लोग ये सोच कर रिस्क ले लेते हैं कि अदालत से उन्हें कड़ी सजा नहीं मिलेगी।

हर कोई चार्ली हेब्दो की घटना से वाकिफ है। अगर इकोनॉमिक्स टाइम ने यही सब पैगंबर या कुरान से जोड़ कर किया होता तो शायद उन पर सोशल मीडिया और यहाँ तक कि ऑफिस तक में हमले हो रहे होते। मीम बनाने वाले को भी शायद मार दिया गया होता। हिन्दुओं के मामले में ऐसा कुछ नहीं होता जो हिन्दू समाज की सहिष्णुता को दर्शाता है।

टाइम्स ग्रुप के साथ कई अन्य मीडिया संस्थानों ने चार्ली हेब्दो पर हुए हमले की निंदा की थी। लेकिन जब बात हिंदुत्व की आई तब उनका दोहरा चरित्र सामने आ गया। इकोनॉमिक्स टाइम्स के लिए हिन्दुओं के खिलाफ ऐसी हरकत लगातार करना अभिव्यक्ति की आज़ादी है। लेकिन जब बात इस्लाम की आ जाती है तब वो ऐसा साहस नहीं कर पाते। उन्हें इसका अंजाम पता है।

यहाँ हिन्दुओं को भी मीडिया से जुड़े फैक्ट्स जानने होंगे। उन्हें अपनी आस्थाओं पर प्रहार करने वाले कंटेंट को भी समझना होगा। लव जिहाद, धर्म परिवर्तन और कई अन्य मुद्दों में में भी हिन्दुओं को ही निंदा का सामना करना पड़ा है जबकि उन केसों में वही पीड़ित भी होते हैं। हिन्दुओ से ही मिल रहे उत्साह और प्रोत्साहन से ऐसे मामले और अधिक बढ़ रहे हैं।

‘हिजाब के बिना रेप हो जाएगा’ कहने वाले कॉन्ग्रेस MLA जमीर खान ने दलित के मुँह से निकलवाकर चबाया खाना: Video देख लोगों को आई घिन

अपने विवादित बयानों की वजह से सुर्खियों में रहने वाले कर्नाटक के कॉन्ग्रेस विधायक जमीर अहमद का एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में वह दलित स्वामी जी के साथ भोजन करते हुए नजर आ रहे हैं। घटना रविवार (22 मई 2022) को चामराजपेट में एक कार्यक्रम के दौरान हुई।

बता दें कि वायरल वीडियो में जिस शख्स को कॉन्ग्रेस विधायक जमीर अहमद खान खाना खिला रहे हैं, उनका नाम स्वामी नारायण हैं। वे दलित समुदाय से आते हैं। वीडियो में देखा जा सकता है कि पहले जमीर अहमद खान स्वामी जी को खाना खिलाते हैं और फिर नारायण को बोलते हैं वह उनको अपना जूठा खाना खिलाएँ। इसके बाद स्वामी नारायण अपने मुँह से खाना निकालते हैं और विधायक जमीर खान के मुँह में खाना डाल देते हैं। ये नजारा देख जहाँ सभा में बैठे लोग ताली पीटते हैं। वहीं सोशल मीडिया पर इसकी वीडियो वायरल होने के बाद लोग इसे घटिया ढंग बताकर घिन खा रहे हैं।

कॉन्ग्रेस विधायक ने दिया था विवादित बयान

जमीर अमहद वही विधायक हैं जिन्होंने इसी साल फरवरी में रेप को लेकर एक विवादित बयान दिया था। तब जमीर अहमद ने कहा था, “हिजाब का अर्थ इस्लाम में पर्दा होता है। जब लड़की/बच्ची बड़ी होती है तो उसे हिजाब में रखते हैं यानी उसकी जो खूबसूरती होती उसे न दिखाने के लिए, छिपाए रखने के लिए, उसे पहनाया जाता है। आज आप देखिए हिंदुस्तान में रेप तेजी हो रहे हैं। ये सब इसलिए है क्योंकि औरतें पर्दे में नहीं रहतीं। ये आज से नहीं है और अनिवार्य भी नहीं है। लेकिन जो अपनी खूबसूरती छिपाना चाहते हैं, उसकी हिफाजत चाहते हैं वो लोग हिजाब पहनते हैं। ये आज से नहीं है वर्षों से है।”

गौरतलब है कि कर्नाटक में 2023 में मई महीने में या उससे पहले विधानसभा चुने हैं। कॉन्ग्रेस की कोशिश सत्ता पर काबिज होने की है। इसके लिए उसने अभी से रणनीति बनानी शुरू कर दी है। कॉन्ग्रेस विधायक के वायरल वीडियो को इसी से जोड़कर देखा जा रहा है। हाल ही में संपन्न हुए पाँच राज्यों के चुनाव में कॉन्ग्रेस को करारी शिकस्त झेलनी पड़ी थी। पंजाब में उसे सत्ता से बेदखल होना पड़ा था। जबकि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मणिपुर और गोवा में उसे हार का सामना करना पड़ा।

अमीना खातून की जीत के बाद ‘पाकिस्तान ज़िंदाबाद’ के नारे, 62 पर FIR: झारखंड के पंचायत चुनाव की घटना, वायरल हुआ वीडियो

झारखंड के हजारीबाग में पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाने का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि हजारीबाग में शनिवार (22 मई, 2022) को त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की मतगणना के बाद बरकट्ठा प्रखंड के शिलाडीह पंचायत में पंचायत समिति सदस्य के पद पर अमीना खातून के निर्वाचित होने की खुशी में उसके विजय जुलूस में ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाए गए थे। इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था। पुलिस ने इस मामले में निर्वाचित प्रतिनिधि समेत 62 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है, जिसमें 12 नामजद हैं।

हजारीबाग के पुलिस अधीक्षक (SP) मनोज रतन चौथे ने इसकी जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि अमीना खातून के विजय जुलूस में इस तरह की नारेबाजी के वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने कोर्रा थाने में एफआईआर दर्ज की है, जिसमें 12 लोगों को नामजद किया गया है। इसके अलावा 50 अज्ञात लोगों को भी मामले में आरोपित बनाया गया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, नारेबाजी का वीडियो वायरल होने के बाद आक्रोशित लोगों ने पुलिस-प्रशासन से इसकी शिकायत की थी। इस संबंध में कोर्रा थाना में मतगणना के दौरान नियुक्त मजिस्ट्रेट ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। वायरल वीडियो को प्राथमिकी का आधार बनाया गया है। प्राथमिकी में नवनिर्वाचित पंचायत समिति सदस्य समीरा बीवी, उनके बेटे शमीम अंसारी और अमीना के समर्थकों को आरोपित बनाया गया है।

एसपी ने कहा कि मतगणना के दौरान नियुक्त मजिस्ट्रेट विनोद कुमार ने मामले पर संज्ञान लेते हुए इस संबंध में कोर्रा थाने में मामला दर्ज कराया है। उन्होंने बताया कि इस मामले में जो भी व्यक्ति दोषी होगा उसके खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी। कोर्रा थाना प्रभारी एवं मतगणना स्थल पर तैनात दंडाधिकारी को जाँच के आदेश दिए गए हैं।

बता दें कि 21 अप्रैल को गिरिडीह पुलिस ने नामांकन पत्र दाखिल करने के बाद एक जुलूस के दौरान इसी तरह के नारे लगाने के बाद एक मुखिया उम्मीदवार और उसके दो समर्थकों को गिरफ्तार किया था।

‘अजान में चीखने का क्या काम?’: मोदी-योगी के कायल हुए भजन सम्राट अनूप जलोटा, कहा – हर भारतीय देखे कश्मीर फाइल्स

भजन सम्राट अनूप जलोटा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को राम-लक्ष्मण की जोड़ी बताया है। उनका कहना है कि वे दिन प्रतिदिन सभी वर्ग के लिए बेहतर कार्य कर रहे हैं। जिससे देश व प्रदेश का भी विकास हो रहा है। ताजा इंटरव्यू में जलोटा ने अपने आप को लेकर भी बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि वो भजन गायक हैं, संत नहीं, इसलिए शराब भी पीते हैं।

यह बातें उन्होंने दैनिक भास्कर के साथ बातचीत में कही। उनका मानना है कि अब भारतीय जनता पार्टी को किसी मुद्दे की जरूरत नहीं है। उन्होंने अच्छी योजनाएँ बनाकर अपने काम को दिखा दिया है। लोग अब आशा से उनकी तरफ देख रहे हैं। प्रधानमंत्री के हाथ में देश और योगी के हाथ में प्रदेश पूरी तरह सुरक्षित है।

इसके साथ ही उन्होंने लाउडस्पीकर पर अजान को लेकर हो रहे विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भजन हो या अजान…उसकी आवाज इतनी अधिक नहीं होनी चाहिए कि लोगों को परेशानी हो। उन्होंने कहा कि अजान में सुर है, तो हनुमान चालीसा में लय है। ये ईश्वर को याद करने, उनका आशीर्वाद पाने का तरीका है। यह तरीका मधुर ही होना चाहिए। इसमें चीखने का क्या काम। इसके अलावा जलोटा ने द कश्मीर फाइल्स को लेकर विवाद को सरकार से जोड़ने को गलत बताया। उन्होंने कहा कि सच्चाई दिखाने का आइडिया प्रोड्यूसर-डायरेक्टर का था न कि सरकार का।

वहीं मध्य प्रदेश में हुए सांप्रदायिक विवाद पर उनका कहना है कि इसके पीछे को ग्रुप है जो उसे उकसा रहा है। वह लोगों को लड़वाकर अपने हित पूरे करना उसका एजेंडा है। इसके लिए फंडिंग भी की जा रही है, वरना बिना किसी मतलब के कोई अपनी छत पर पत्थर जमा करके क्यों रखेगा। बिग बॉस में काम करने को लेकर उनका कहना था कि उन्होंने जो काम किया, वहाँ पर शुद्धिकरण ही किया है। वहीं जसलीन के साथ अपने रिश्ते को उन्होंने स्क्रिप्टेड बताया। 

इंटरव्यू के दौरान उन्होंने बताया कि वह भजन गायक हैं, लेकिन संत नहीं। वह भजन गाने के बाद शराब भी पीते हैं और वह सभी मजे करते हैं जो एक आम इंसान करता है। नका मानना है कि भजन गाने वाला भी एक इंसान ही होता है, इसलिए उसके प्रति ऐसी सोच नहीं रखनी चाहिए कि वह संत बन जाए और वैराग्य लेकर हिमालय पर चले जाए। 

उत्तराखंड में कुकुरमुत्ते की तरह पनप रहे अवैध मजार, संरक्षित वनों में जीव-जंतुओं को भी दिक्कत: बोले CM धामी – अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं, होगी कार्रवाई

उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार राज्य के अवैध मजारों पर कार्रवाई करने जा रही है। उन्होंने पहाड़ों पर बन गई कई अवैध मजारों को लेकर कहा कि उन पर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने ये भी बताया कि राज्य सरकार अवैध घुसपैठियों और रोहिंग्याओं के सत्यापन के लिए भी अभियान चला रही है। इसके तहत हजारों लोग चिह्नित किए गए हैं। साथ ही उन्होंने डेमोग्राफी में हो रहे बदलाव पर भी अपनी चिंता जाहिर की।

वो चाणक्यपुरी स्थित होटल अशोक में साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य-Organiser द्वारा आयोजित ‘मीडिया महामंथन’ कार्यक्रम को सम्बोधित कर रहे थे। पहाड़ों पर बनती अवैध मजारों पर उन्होंने कहा कि अवैध अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और इन पर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने जल्द ही राज्य में UCC (समान नागरिक संहिता) लागू करने की प्रतिबद्धता भी दोहराई। उन्होंने चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं को सलाह दी कि वो स्वास्थ्य चेक-अप करा कर और डॉक्टर की सलाह लेकर ही पहाड़ की यात्रा पर आएँ।

बता दें कि उत्तराखंड में मजारें बना कर पहाड़ों का अवैध अतिक्रमण धड़ल्ले से जारी है। वहाँ के पहाड़ी वन संरक्षित और आरक्षित हैं, लेकिन इसके बावजूद अचानक वहाँ कई मजार पैदा हो गए हैं। तराई एवं भाबर क्षेत्रों में बीते डेढ़ दशकों में तेजी से मजारों की संख्या में वृद्धि हुई है। इससे वन्यजीवों के प्रबंधन में भी दिक्कतें आ रही हैं। वन विभाग मुख्यालय भी इसकी जाँच कर रहा है। राजाजी से लेकर कार्बेट टाइगर रिजर्व में भी ऐसे अवैध अतिक्रमण हुए हैं।

स्थानीय लोगों ने इसका दोष वन्य विभाग को देते हुए कहा कि इससे जीव-जंतुओं को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई ऐसे आयोजन भी होते हैं, जिनसे वन्यजीव खतरा महसूस करते हैं। इससे जंगलों की शांति भंग होती है। राज्य के मुख्य वन संरक्षक ने कहा कि इस संबंध में सभी वन प्रभागों और सरंक्षित क्षेत्रों के निदेशकों से रिपोर्ट मिलने पर इसका अध्ययन करने के बाद निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि अवैध अतिक्रमणों को बर्दाश्त न करते हुए उन्हें हटाया जाएगा।

लखीमपुर खीरी: मस्तान मियाँ की मजार पर बिन इजाजत जमा हुई भीड़ ने रौंद डाली किसानों की लाखों की फसल, विरोध करने पर मारपीट और गाली-गलौच भी, FIR दर्ज

UP के लखीमपुर खीरी जिले में मस्तान मियाँ की मजार पर जमा भीड़ पर किसानों की लाखों रुपये मूल्य की फसल को रौंद डालने का आरोप लगा है। इस घटना की शिकायत स्थानीय किसान कमलचरणजीत सिंह ने पुलिस में की है। शिकायत में मजार कमेटी के सदस्यों, मौलानाओं के अलावा कई वाहनों के ड्राइवरों और मजार पर आई भीड़ को भी आरोपित किया गया है। घटना 20 मई 2022 (शुक्रवार) रात की बताई जा रही है।

किसान कमलचरणजीत सिंह की शिकायत के मुताबिक, “मैं कोतवाली क्षेत्र के गाँव सिसौना का निवासी हूँ। मैंने एक साल के लिए जायसवाल फॉर्म लीज पर खेती के लिए लिया है। मैंने यहाँ 16 एकड़ खेत में फसल उगा रखी है। 20 मई की रात मथना इलाके में मौजूद मस्तान मियाँ की मज़ार पर मजार कमेटी के लोगों और मौलानाओं ने बिना प्रशासन की इजाजत के बड़े मेले का आयोजन कर दिया। इस मेले की पहले कोई योजना भी नहीं थी। मेरे में लाखों की भीड़ हुई जिसमें हजारों लोग अराजक किस्म के भी शामिल थे।’

FIR Copy

कमलचरणजीत ने आगे लिखा, “भीड़ में शामिल अराजक तत्वों ने मेरे खेतों के चारों तरफ लगी बाड़ को तोड़ डाला। इसके खेतों में खड़ी फसल को रौंदते हुए बाइकों और अन्य वाहन निकाले गए। इस दौरान मेरी 3 एकड़ में लगी गन्ने की फसल बर्बाद हो गई। इस से मेरा लगभग ढाई लाख रुपए का नुकसान हुआ है। मैंने अपने नौकर के साथ मिल कर फसलों को रौंदने का विरोध किया तब हमारे साथ मारपीट और गाली-गलौज की गई। मेरे साथ मेरे पड़ोसियों की फसलों को भी मज़ार पर जमा भीड़ द्वारा रौंदा गया है। हमारे फसल लगी खेतों में ही कई लोगों ने अपनी गाड़ियों को पार्किंग के रूप में खड़ा कर दिया गया।”

अपनी शिकायत के साथ किसान कमलचरणजीत सिंह ने लगभग 19 वाहनों के नंबर प्लेट की फोटों खींची है। वो वाहन भी FIR में दर्ज हुए हैं। पीड़ित किसान ने न सिर्फ मस्तान मजार के कमेटी सदस्यों और मौलानाओं पर कार्रवाई की माँग की है बल्कि अपने नुकसान के लिए खुद और पड़ोसी किसानों के लिए मुआवजे की भी माँग की है।

आरोपितों पर लगी धाराएँ

पीड़ित किसान की शिकायत पर पुलिस ने मजार कमेटी के सदस्यों के साथ वहाँ जुटी अज्ञात भीड़ और वाहनों पर भी केस दर्ज कर लिया है। कोतवाली सदर पुलिस ने इस FIR में IPC की धारा 147, 323, 427 और 504 के तहत कार्रवाई की है। केस की जाँच सब इंस्पेक्टर यशवीर सिंह को सौंपी गई गई। ऑपइंडिया से बात करते हुए पीड़ित किसान ने बताया, “हमारा काफी नुकसान हुआ। हमने सालाना ठेके पर वो खेत लिए थे। हम कल भी कोतवाली गए थे। अभी तक इस केस में किसी की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है।” मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इंस्पेक्टर क्राइम संजय कुमार ने बताया कि मेले की इजाजत प्रशासन से नहीं ली गई है। किसान की फसल के नुकसान और अन्य मामलों की जाँच जारी है।

लखीमपुर खीरी पुलिस ने इस खबर पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी मजार पर मेले का आयोजन किया गया था। इस वर्ष मजार पर जो श्रद्धालु आए थे उनके कारण आस-पास की कुछ फसल नष्ट हो गई। जिस संबंध में कोo सदर पर सुसंगत धाराओं में अभियोग पंजीकृत करके आवश्यक विधिक कार्यवाही की जा रही है।”

पाकिस्तान: गुटका बेचने वाले अली कुरैशी ने Express News के एंकर पर करवाया देशद्रोह का केस दर्ज, रिकॉर्ड चेक हुए तो खुद निकला 10 मामलों में आरोपित

पाकिस्तान के पत्रकार इमरान रियाज खान के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने रविवार (22 मई 2022) को एक्सप्रेस न्यूज के एंकर इमरान रियाज खान के खिलाफ देश के संस्थानों की आलोचना करने और विद्रोह को बढ़ावा देने सहित कई अपराधों को लेकर मामला दर्ज किया।

पत्रकार के खिलाफ पाकिस्तान दंड संहिता (PPC) की धारा 131 (विद्रोह के लिए उकसाना), 153 (दंगा भड़काना), 452 (अतिचार) और 505 के तहत थट्टा के धाबेजी पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया।

द एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने FIR के हवाले से बताया कि इस मामले में शिकायतकर्ता का आरोप है कि इमरान रियाज को कथित तौर पर सेना और संस्थानों के खिलाफ सोशल मीडिया पर अपमानजनक और भड़काऊ भाषा में बात करते हुए पाया था।

शिकायतकर्ता ने FIR में कहा, “मैं एक देशभक्त नागरिक हूँ और जिस तरह से एंकर इमरान रियाज खान ने सोशल मीडिया पर पाकिस्तानी सेना और राज्य संस्थानों के खिलाफ बात की है, उससे मैं स्तब्ध और आहत हूँ।”

शिकायतकर्ता का आपराधिक रिकॉर्ड

शिकायतकर्ता की पहचान आशिक अली कुरैशी के रूप में हुई है। वह गुटखा बेचने का काम करता है। दिलचस्प बात यह है कि थट्टा की पुलिस के रिकॉर्ड के अनुसार उसके खिलाफ पिछले सात वर्षों में कम से कम 10 बार संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

द एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने उस रिकॉर्ड को देखा जिसमें दिखाया गया था कि 2015 से 2022 तक गुटखा बेचने के लिए जिले के कई पुलिस स्टेशनों में उस व्यक्ति के खिलाफ दस मामले दर्ज किए गए हैं। वह पाकिस्तान दंड संहिता की धारा 270, धारा 269 के तहत मामलों का सामना कर चुका है। रिकॉर्ड के मुताबिक उसके खिलाफ धारा 353 के तहत भी मामला दर्ज किया गया था। इसके अलावा, यह भी देखा गया कि आवेदन अधूरा और ‘संदिग्ध’ था क्योंकि उस व्यक्ति ने न तो अपना पूरा पता और न ही अपना फोन नंबर शेयर किया था।

इस बीच, पीटीआई के अध्यक्ष इमरान खान ने पत्रकारों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की निंदा की और इसे ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ‘फर्जी FIR’ के पीछे पड़ी है और कहा कि यह ‘बिल्कुल अस्वीकार्य’ है।

गौरतलब है कि इससे एक दिन पहले, पत्रकारों – अरशद शरीफ, साबिर शाकिर और सामी इब्राहिम – के खिलाफ शनिवार (21 मई 2022) को देशद्रोह और ‘राज्य विरोधी’ नैरेटिव को आगे बढ़ाने के आरोप में FIR दर्ज किया गया था।

पुर्तगालियों ने 450 साल नष्ट की थी भारतीय संस्कृति, अब गोवा की BJP सरकार उन ध्वस्त मंदिरों को फिर बनवाएगी: CM प्रमोद सावंत

ज्ञानवापी सर्वे रिपोर्ट के बाद अब गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने भी गोवा के उन मंदिरों के पुनर्निर्माण पर जोर दिया है जिन्हे पुर्तग़ालियों ने क्षतिग्रस्त कर दिया था। इसके लिए उन्होंने सरकार द्वारा बजट जारी करने की जानकारी दी। इसी के साथ उन्होंने गोवा आने वाले यात्रियों को मंदिरों की तरफ आकर्षित करना सरकार का कर्तव्य बताया। मुख्यमंत्री सावंत ने यह बातें शनिवार (21 मई 2022) को दिल्ली में आयोजित पाञ्चजन्य के सेमिनार में कहीं।

CM प्रमोद सावंत ने कहा, “जल्द ही गोवा देश के सबसे अच्छे राज्यों में से एक होगा। मझे गर्व है कि गोवा में आज़ाद के समय से ही समान नागरिक संहिता लागू है। यही कानून पूरे देश में भी लागू होना चाहिए। गोवा की आजादी में देरी कॉन्ग्रेस की वजह से हुई थी। इसी पार्टी की नीतियों की वजह से 1947 में स्वतंत्र हुए देश में गोवा 20 साल बाद 1967 में स्वतंत्र हो पाया। भाजपा की 2012 में सरकार आने के बाद जो काम 60 साल में नहीं हो पाया वो हमनें 10 वर्षों में 2022 तक कर के दिखाया है।”

मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने आगे कहा, “पुर्तगालियों ने 450 सालों तक गोवा की मूल हिन्दू संस्कृति को नष्ट किया। हम उसी संस्कृति को फिर से स्थांपित करना चाह रहे। आखिर इसमें बुराई क्या है? अभी जहाँ-जहाँ भी टूटे मंदिर बने हुए हैं वो मंदिर बनने ही चाहिए। इसी के लिए इस बार सरकार ने अपने बजट में 20 करोड़ रुपए स्वीकृत किए हैं।”

CM सावंत ने आगे कहा, “प्रधानमंत्री मोदी द्वारा चलाए गए ‘आत्मनिर्भर भारत’ की संकल्पना ने हमें भी गोवा में ‘स्वयं पूर्ण गोवा’ अभियान चलाने के लिए प्रेरित किया। गोवा के लोग बहुत समझदार हैं। अगर कोई बंगाल से आ कर यहाँ राज्य करने की बात करेगा तो वो सफल नहीं होगा क्योंकि हम अपना काम करते रहे। TMC और ममता बनर्जी केवल मीडिया और पोस्टरों में ही रह गए। गोवा के लोगों को गोवा के लोग पहचानते हैं।”

अरविन्द केजरीवाल से जुड़े एक सवाल पर मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने कहा, “हमारा मीडिया का बजट काफी कम है। बाकी लोगों का मीडिया का बजट थोड़ा ज्यादा है। हमने हर क्षेत्र में काम किया है। शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में मैं किसी से भी कह सकता हूँ कि हम बेस्ट हैं। नरेंद्र मोदी जी को भी धन्यवाद जिन्होंने आयुर्वेद और योग को दुनिया के कोने-कोने में पहुँचा दिया है जो हमारी पारम्परिक विरासत रही है।’

CM सावंत के मुताबिक, “हम सूर्य, बालू और समुद्र के अलावा सांस्कृतिक पर्यटन को भी बढ़ावा दे रहे हैं। गोवा के आंतरिक हिस्सों में भी कई पर्यटन है जो अभी लोगों के सामने नहीं आया है। इसके अलावा गोवा में आध्यात्मिक टूरिज्म भी है। इन सभी को बढ़ावा देने के लिए हमने प्रयास शुरू कर दिए हैं।”

मदरसों का अस्तित्व ही खत्म हो जाना चाहिए: असम CM ने मुस्लिमों की अच्छी शिक्षा का क्रेडिट हिंदू इतिहास को दिया, राहुल गाँधी के लिए बोला- वो JNU से लेते हैं ट्यूशन

भारत को ‘यूनियन ऑफ़ स्टेट’ कहने पर असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने राहुल गाँधी को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने राहुल गाँधी को JNU वालों से ट्यूशन पढ़ने वाला बताया है। मुख्यमंत्री हिमंता ने मदरसा शब्द ही खत्म करने की वकालत करते हुए कहा कि मदरसे में बच्चों को दाखिला दिलवाना ही मानवाधिकारी का उललंघन है। यह बातें उन्होंने पाञ्चजन्य के दिल्ली स्थित एक सेमिनार में शनिवार (21 मई 2022) को कही हैं।

सीएम सरमा ने मदरसों को मानवता का दुश्मन बताते हुए कहा, “ये मदरसा शब्द ही विलुप्त हो जाना चाहिए। जब तक मदरसा दिमाग में घूमेगा तब तक बच्चा कभी डॉक्टर या इंजीनियर नहीं बन पाएगा। यदि ये बातें बच्चों को सिखाई जाएँ तो बच्चे खुद ही मदरसे में न जाएँ। मदरसे में बच्चों का दाखिला ही मानवाधिकार के उललंघन के लिए करवाया जाता है। आप खूब कुरान पढ़ाइए लेकिन सबसे ज्यादा गणित और विज्ञान पढ़ाएँ। बच्चों को आप घर में मजहबी बातें पढ़ाएँ।”

CM हिमंता ने आगे कहा, “स्कूलों में वही पढ़ाया जाना चाहिए जो छात्रों को डॉक्टर, वैज्ञानिक और प्रोफेसर बनाए। आज जो मुस्लिम कुरान को रट चुके हैं ये सब के सब कभी हिन्दू थे। अगर किसी मुस्लिम बच्चे की पढ़ाई में बहुत अच्छी मेरिट है तो उसका क्रेडिट भी मैं उसके हिन्दू इतिहास को दूँगा।”

इसके अलावा यूनियन ऑफ़ स्टेट शब्द पर राहुल गाँधी की आलोचना करते हुए हिमंता ने कहा, “अगर भारत एक यूनियन ऑफ़ स्टेट है तो हमारी 5 हजार की संस्कृति कहाँ गई? यदि भारत यूनियन ऑफ़ स्टेट है तो इसका मतलब आप भारत की हर विरासत को विवादित बना रहे हैं। भारत हमारी आत्मा है। असम के लोगों ने भारत में ही रहने और पाकिस्तान न जाने के लिए लड़ाई लड़ी थी। राहुल गाँधी लोगों को ऐसे समझा रहे हैं जैसे 2 लोगों के बीच कोई एग्रीमेंट हुआ हो। स्वतंत्रता से पहले देशवासियों ने गाँधी जी को अपना नेता माना था तब क्या कोई लिखित एग्रीमेंट हुआ था जनता और गाँधी जी में “?

CM हिमंता ने आगे कहा, “जब इंडियन नेशनल कॉन्ग्रेस नाम पड़ा और जगह-जगह कॉन्फ्रेन्स करवाई गई थी, तब क्या कोई यूनियन ऑफ़ स्टेट का लिखित एग्रीमेंट किया गया था? पता नहीं राहुल गाँधी का वर्तमान सलाहकार कौन है? यूनियन ऑफ़ स्टेट शब्द देश को तोड़ने वाली बात है। परोक्ष रूप से वो (राहुल गाँधी) देश के अलगाववादी तत्वों को प्रेरित कर रहे हैं। रामायण, महाभारत, चाणक्य, चन्द्रगुप्त, लाचित वोडफुकन, छत्रपति शिवाजी आदि कहाँ गए ? मैं राहुल गाँधी को दोष नहीं दे रहा। शायद JNU का कोई ट्यूशन लगाया गया होगा जिसने ये सब उन्हें सिखा दिया होगा।”

मुख्यमंत्री सरमा के मुताबिक, “अमेरिका और भारत के फेडरलिज्म में फर्क है। भारत पहले ही दिन से सांस्कृतिक रूप से एक देश रहा है। किसी समय में असम का कामरूप राज्य अयोध्या तक फैला था। दक्षिण और असम तक के लोगों का नाम कृष्ण होता है। राम हर कहीं हैं। कोई ऐसे ही आ कर भारत को एग्रीमेंट कर के ‘यूनियन ऑफ़ स्टेट’ बना दे ये नहीं हो सकता। राहुल गाँधी जो बोल रहे हैं वही उनको सिखाया गया है। ये उनकी मजबूरी भी है।”