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सलमान के भाई से शादी करने सीमा सचदेव भागी थीं घर से, सीमा खान बन किया था निकाह… अब 24 साल बाद सोहैल खान से तलाक

बॉलीवुड अभिनेता सोहैल खान और उनकी बीवी सीमा खान (निकाह के पहले नाम सीमा सचदेव, Seema Sachdev) के बीच अब तलाक होगा। 13 मई 2022 (शुक्रवार) को दोनों (Sohail Khan and Seema Sachdev / Seema Khan) ने कोर्ट में तलाक की अर्जी दाखिल की है।

सोहैल खान और सीमा सचदेव का निकाह साल 1998 में हुआ था। हालाँकि दोनों साल 2017 से ही अलग रह रहे थे। इन दोनों के 2 बच्चे निर्वाण और योहान हैं। इनका बड़ा बेटा निर्वाण 22 साल और छोटा योहान 11 साल का है। निकाह के बाद सीमा सचदेव ने अपना नाम सीमा खान लिखना शुरू किया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सोहैल खान और सीमा के प्यार की शुरुआत 24 वर्ष पहले 1998 में बनी ‘प्यार किया तो डरना क्या’ के सेट से हुई थी। सीमा सचदेव (Seema Sachdev) के घर वाले इस रिश्ते से खुश नहीं थे। इसलिए दोनों घर से भाग गए।

घर से भाग कर सोहैल खान और सीमा सचदेव ने आर्य समाज मंदिर में शादी की। जिस दिन हिंदू बन कर मंदिर में शादी की, उसी शाम निकाह (मुस्लिम बन कर, इस्लाम में निकाह सिर्फ दो मुस्लिमों के बीच ही हो सकता है) भी किया।

सीमा सचदेव मूल रूप से दिल्ली की रहने वाली हैं। वो मुंबई में बतौर फैशन डिजायनर अपना करियर बनाने गईं थीं। इंडिया टुडे के मुताबिक दोनों 2017 से अलग रह रहे थे और इन्होंने तलाक का फैसला अचानक ही बिना किसी को बताए लिया।

सोहैल खान और सीमा खान के तलाक (Sohail Khan and Seema Khan divorce) का केस मुंबई बांद्रा पूर्व की परिवार अदालत के चौथे फ्लोर पर जज मकदूम की अदालत में पेश हुआ था। इन दोनों की कोर्ट कैम्पस से कुछ तस्वीरें भी वायरल हुई हैं। वायरल तस्वीरों में सोहैल अपने बॉडीगार्ड के साथ दिखाई दे रहे हैं। वहीं सीमा खान अकेले ही कोर्ट गईं हैं।

इससे पहले सीमा खान उर्फ़ सीमा सचदेव ने कहा था, “जब आप की उम्र बढ़ने लगती है तब रिश्ते अलग मोड़ लेने लगते हैं। मुझे कोई पछतावा नहीं है। मैं खुश हूँ और मेरे बच्चे भी। मेरी और सोहैल की शादी कोई विवादित नहीं है। हम लोग एक दूसरे के पूरक हैं।”

ज्ञानवापी विवादित ढाँचे में फिर सर्वे शुरू: तहखाने से होगी वीडियोग्राफी, चाबी नहीं मिलने पर तोड़ा जाएगा ताला, शहर में CM योगी भी मौजूद

उत्तर प्रदेश के वाराणसी (Varanasi, Uttar Pradesh) स्थित ज्ञानवापी परिसर में बने विवादित मस्जिद (Gyanvapi Masjid) का आज शनिवार (14 मई 2022) को फिर से सर्वे और वीडियोग्राफी का काम शुरू हो गया है। पिछली बार के हालातों को देखते हुए और कोर्ट के सख्त रूख के कारण सुरक्षा के भारी इंतजाम किए गए हैं। सर्वे के लिए कमिश्नर अजय कुमार मिश्र (Ajay Kumar Mishra) के साथ विशेष कोर्ट कमिश्नर विशाल सिंह (Vishal Singh) और सहायक कोर्ट कमिश्नर अजय प्रताप सिंह (Ajay Pratap Singh) भी रहेंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की संभावित दौरे की तैयारियों को देखने के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) भी आज वाराणसी में हैं। इसका विशेष ध्यान रखा गया है। उधर, ज्ञानवापी विवाद मामले की याचिकाकार्ता राखी सिंह (Rakhi Singh) का प्रतिनिधित्व कर रहे अधिवक्ता शिवम गौर (Shivam Gaur) ने बताया, ”आज हम अंडरग्राउंड सेल में प्रवेश करेंगे और वीडियोग्राफी शुरू करेंगे।”

मस्जिद कमिटी और मुस्लिमों के विरोध को देखते हुए इस बार सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। चप्पे-चप्पे पर सुरक्षाबलों को तैनात किया गया है। विवादित क्षेत्र के 500 मीटर के दायरे में आने वाले सभी दुकानों को बंद करा दिया गया है। वहीं, मंदिर के दर्शनार्थियों को लेकर काशी जोन के DCP आरएस गौतम ने कहा कि लोगों को किसी भी तरह की असुविधा न हो, इसके लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं, दर्शन अच्छे से हो और सब कुछ ठीक रहे।

ज्ञानवापी परिसर का सर्वे सुबह आठ बजे से 12 बजे तक होगा। इस संबंध में शुक्रवार (13 मई 2022) को प्रशासन ने प्रतिवादी अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद कमेटी के पदाधिकारियों के साथ बैठक कर उनसे तहखाने की चाभी माँगी। कमिटी के प्रतिनिधियों ने कहा कि वे तहखाना खोलकर सर्वे में कमीशन को मदद करेंगे। अधिकारियों ने कहा कि सर्वे के दौरान तहखाना खुला रहना चाहिए।

वहीं, प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों ने कहा कि यदि चाभी नहीं दी जाती है तो कोर्ट के आदेश का पालन करने के लिए ताला तोड़ा जाएगा। अंजुमन के पदाधिकारियों ने तहखाने की चाभी अपने पास होना कबूल किया। तब पदाधिकारियों ने ताला खोलकर सर्वे कराने का भरोसा दिया।

अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद कमेटी के सचिव यासीन सईद ने मुस्लिमों से शांति-व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि कोर्ट के आदेश के बारे में कोई टिप्पणी नहीं की जा सकती है और कमेटी कानूनी कार्यवाही कर रही है। उन्होंने कहा कि आवाम सब्र से काम ले और शांति व्यवस्था बनाए रखें, क्योंकि विरोध करने वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाएगा।

बता दें कि काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी परिसर में बनी मस्जिद का विवाद 1931 से जारी है। इस प्रकरण में प्रतिवादी सुप्रीम कोर्ट भी पहुँचा था और यथास्थिति बनाए रखने की अपील की थी, लेकिन कोर्ट ने इससे इनकार कर दिया। हालाँकि, मामले की सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट तैयार हो गया है।

वाराणसी में सीएम योगी

प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने दो दिवसीय दौरे पर वाराणसी में हैं। आज वे पार्टी के कार्यकर्ताओं और अधिकारियों से बैठक कर कामकाज का ब्यौरा लेंगे। इसके पहले सीएम योगी ने शुक्रवार की देर रात शहर के निमार्णाधीन और पूरी हो चुकी परियोजनाओं का निरीक्षण किया। इसके साथ ही उन्होंने काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन भी की।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले महीने जून में वाराणसी का दौरा करेंगे। वे जनवरी से अब तक पूरी हो चुकी परियोजनाओं को वाराणसी के लोगों को समर्पित करेंगे। इसके साथ ही वे कई अन्य बड़ी परियोजनाओं का शिलान्यास भी करेंगे, जिसमें रिवर फ्रंट योजना, शहर की यातायात व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए रोपवे परियेाजना आदि भी शामिल हैं।

‘एक दशक भाई-भतीजावाद और घोटालों में खो गया’: PM मोदी ने MP स्टार्टअप नीति के उद्घाटन में कहा- आठ साल पहले 400 स्टार्टअप थे, आज 70 हजार हैं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने शुक्रवार (13 मई 2022) को मध्य प्रदेश इंदौर में जारी स्टार्टअप कॉन्क्लेव (MP Start Up Conclave) का में मध्य प्रदेश की स्टार्ट नीति का वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि देश में स्टार्टअप की दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ईकोसिस्टम बनकर एक बड़ी ताकत के रूप में उभर रहा है।

मोदी ने कहा, “आपको याद होगा कि 2014 में जब हमारी सरकार आई थी तो देश में 300-400 के करीब स्टार्टअप थे। ये शब्द सुनाई भी नहीं देता था, न चर्चा होती थी, लेकिन आज आठ वर्ष के छोटे से कालखंड में आज देश में 70,000 मान्यता प्राप्त स्टार्टअप हैं। भारत में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप ईको सिस्टम है। ये स्टार्टअप सिर्फ मेट्रो शहरों तक ही सीमित नहीं हैं। लगभग 50% स्टार्टअप टियर 2-3 शहरों के अंतर्गत आते हैं।”

इस दौरान उन्होंने कॉन्ग्रेस और अन्य विपक्षी दलों पर तंज कसते हुए कहा, “दुर्भाग्य से लगभग एक दशक भाई-भतीजावाद, नीतिगत पक्षाघात और घोटालों में खो गया। 2014 के बाद हमने भारत के युवाओं में नवाचार की भावना को पुनर्जीवित किया। हमने विभिन्न मोर्चों पर काम किया और हैकाथॉन का आयोजन किया। इससे जिम्मेदारी की भावना बढ़ी।”

भारत के स्टार्टअप्स की सराहना करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि आज कृषि और रिटेल बिजनेस आदि के क्षेत्र में नए स्टार्टअप सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि आठ साल पहले तक स्टार्टअप शब्द कुछ गलियारों में ही चर्चा का हिस्सा था, लेकिन आज सामान्य भारतीय युवा के सपने सच करने का माध्यम बन गया है। यह एक सोची समझी रणनीति, स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित दिशा का परिणाम है।

इस दौरान पीएम मोदी ने इंदौर के शॉप किराना के संस्थापक तनुतेजस सारस्वत से बता की। उन्होंने बताया कि 3.5 साल पहले तीन दोस्तों ने स्टार्टअप की शुरुआत की थी। उनके साथ दीपक धनोतिया और सुमित घोरावत एक ऐसा बिजनेस टु बिजनेस मॉडल लाना चाहते थे, जिसमें सीधे कंपनियों से माल लेकर दुकानों को 24 घंटे में डिलीवर किया जा सके। इन्होंने यह कर दिखाया।

सारस्वत ने आगे बताया कि छह राज्यों के 30 शहरों की लगभग एक लाख खुदरा दुकानों और पाँच करोड़ उपभोक्ताओं तक उनके स्टार्टअप ने पहुँच बना ली है। उन्होंने 10 हजार लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार दिया है। उनके स्टार्टअप का कारोबार 800 करोड़ रुपये सालाना है। जापान और भारत के प्रमुख स्टार्टअप निवेशकों से करोड़ों रुपये की फंडिंग मिल चुकी है। मोदी ने भोपाल की स्‍टार्टअप शुरू करने वाले उमंग श्रीधर से भी बात भी।

गुजरात में धर्मान्तरण रैकेट नाकाम, ईसाई मिशनरियों का कार्यक्रम हुआ रद्द: VHP और बजरंग दल की कोशिशों से मिली सफलता

गुजरात में ईसाई मिशनरी लोगों को फँसाकर उनका धर्मान्तरण करा रहे हैं। पिछले सप्ताह एक ईसाई मिशनरी की ओर से आयोजित ‘मसीह में नया जीवन’ नाम के कथित धार्मिक सभा का पेम्फलेट छोटा उदयपुर जिले के नसवाड़ी तालुका के संकदिबारी गाँव, उसके आसपास और गुजरात के आसपास के गाँवों में बाँटा गया था। जैसे ही स्थानीय विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के लोगों को हिंदू आदिवासियों का धर्मान्तरण कराने की खबर मिली तो उन्होंने कार्यक्रम को रोकने के लिए नसवाड़ी के तहसीलदार के पास ज्ञापन दिया।

वायरल हुआ धर्मान्तरण का पैम्फलेट

पम्पलेट के मुताबिक, ईसाई मिशनरी द्वारा 9 मई और 10 मई को नसवाड़ी तालुका के संकदिबारी गाँव में ‘न्यू लाइफ इन क्राइस्ट’ टाइटल से एक शीर्षक से धर्मान्तरण का कार्यक्रम होना था। कार्यक्रम को मुख्य वक्ता रेव जी सैमुअल और भाई विनुभाई संबोधित करने वाले थे। वीएचपी नसवाड़ी के अध्यक्ष विशाल कुमार सुरेश चंद्र जायसवाल के नेतृत्व में करीब 20 कार्यकर्ताओं ने नसवाड़ी में तहसीलदार को ज्ञापन दिया और नसवाड़ी थाने को भी सूचित किया।

मामसे में जूनागढ़ जिले के हिंदू धर्मगुरुओं ने भी नसवाड़ी तहसीलदार पुलिस के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए कार्यक्रम बंद करवाने की माँग की।

ऑपइंडिया से एक्सक्लूसिव बातचीत में विशाल जायसवाल ने कहा, “हमें 6 मई को इलाके में फैले एक पैम्फलेट के जरिए इस घटना के बारे में पता चला। पहले भी इस सीमावर्ती इलाके में इसी तरह के कार्यक्रम होते रहे हैं, जिसमें अंत में भोले-भाले हिंदू आदिवासियों को बहला-फुसलाकर ईसाई बना लिया गया। इसलिए, हमने तुरंत 7 तारीख को ही कार्यक्रम को रोकने के लिए तहसीलदार को लिखित अनुरोध किया।”

विशाल जायसवाल ने कहा, “ईसाई मिशनरी पहले भी ऐसी सभाएँ करते रहे हैं, जिनमें चमत्कार के नाम पर भोले-भाले आदिवासियों का दिन में धर्म परिवर्तन किया जाता है और रात में एक ही स्थान पर शराब और माँस की गंध आती है।”

चमत्कार के नाम पर धर्मान्तरण का खेल

किस तरह से ये ईसाई मिशनरी धर्मान्तरण का खेल खेलते हैं। इसको लेकर विशाल जायसवाल कहते हैं, “जब भी ऐसी कोई सभा होती है, तो मिशनरियों के स्थानीय एजेंट आसपास के आदिवासी क्षेत्रों का सर्वे करते हैं। गाँवों में जाकर वे एक लिस्ट तैयार करते हैं जैसे खाँसी, सर्दी-बुखार सिरदर्द जैसी सामान्य बीमारियाँ किस घर में हैं और कौन तीन या अधिक दिनों से बीमार है। चमत्कार का दिलासा देकर इन लोगों को इसमें बुलाया जाता है। ये ऐसे रोग होते हैं, जो कि सामान्यतया 4-5 दिनों में ठीक हो जाते हैं। इस दौरान कुछ मिलावटी पाउडर देकर ये लोग ठीक होने का दावा करते हैं। इसी कथित चमत्कार का दावा कर भोले हिंदू आदिवासियों धर्म परिवर्तन कराया जाता है।”

वीएचपी कार्यकर्ताओं ने तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन (फोटो साभार: विशाल जायसवाल)

वीएचपी की सतर्कता से रद्द हुआ कार्यक्रम

विशाल जायसवाल के मुताबिक, जब वो इस कार्यक्रम की शिकायत लेकर तहसीलदार के पास पहुँचे, तो पता चला कि धर्मान्तरण कार्यक्रम के आयोजकों ने इसके लिए प्रशासन से इजाजत भी नहीं ली थी। हमने तहसीलदार और स्थानीय पुलिस अधिकारियों से आग्रह किया था कि अगर कार्यक्रम रद्द नहीं किया गया तो हम विहिप और बजरंग दल के 2,000 से अधिक कार्यकर्ताओं के साथ वहाँ जाकर हनुमान चालीसा और रामधुन बजाएँगे। बाद में खुद ही इस कार्यक्रम को रद्द कर दिया गया।

फोटो साभार: दिव्य भास्कर

ऑपइंडिया को जायसवाल ने बताया कि इस मामले में पुलिस और प्रशासन से मिले सहयोग के कारण इसे रोका गया। इस आदिवासी क्षेत्र में आए दिन ऐसे कार्यक्रम होते हैं। जब भी इनका पता चलता है तो इसका विरोध किया जाता है। उल्लेखनीय है कि दक्षिण गुजरात के सीमावर्ती इलाकों में पहले भी कई बार इस तरह की घटनाएँ सामने आ चुकी हैं। एक महीने पहले तापी जिले में इसी तरह के धर्मांतरण के मामले में एक ही ईसाई परिवार के पाँच सदस्यों को गिरफ्तार किया गया था।

कश्मीरी हिंदू राहुल भट की हत्या का सुरक्षाबलों ने लिया बदला, 24 घंटे में मार गिराए 3 आतंकी: मृतक की पत्नी को सरकारी नौकरी, हत्या की SIT जाँच

जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) में आतंकियों के टारगेट किलिंग (Target Killing) का सुरक्षाबलों ने जवाब देते हुए 24 घंटे के भीतर शुक्रवार (13 मई 2022) को तीन आतंकियों को मार गिराया है। मारे गए आतंकियों में कश्मीरी हिंदू राहुल भट की हत्या करने वाले दो इस्लामिक आतंकी भी शामिल हैं। तीसरे आतंकी की पहचान गुलजार अहमद के रूप में हुई है। वहीं, दूसरे आतंकी की तलाश जारी है। बता दें कि भट की हत्या की जाँच के लिए सरकार ने SIT गठित की है।

SP (ऑपरेशन) इफ्तखार तालिब ने बताया कि पिछले कई सप्ताह से इन आतंकियों को ट्रैक कर रहे थे। बाद में इन्हें मार गिराया गया। वहीं, अन्य आतंकियों की भी तलाश जारी है।

जम्मू-कश्मीर सरकार ने राहुल भट की हत्या की जाँच के लिए SIT का गठन किया है। इसके साथ ही सरकार ने उनकी पत्नी को सरकारी नौकरी देने और बेटी की पढ़ाई का खर्च वहन करने का ऐलान किया है। बता दें कि भट की हत्या को उनके परिजनों साजिश करार देते हुए जाँच की माँग की थी।

जम्मू-कश्मीर के उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा (LG Manoj Sinha) ने शुक्रवार ट्वीट कर राहुल भट्ट के परिजनों से मुलाकात की जानकारी दी। उन्होंने ट्वीट किया, “मैंने राहुल भट के परिजनों से मुलाकात की और परिवार को न्याय दिलाने का आश्वासन दिया। दुख की इस घड़ी में सरकार राहुल के परिवार के साथ मजबूती से खड़ी है। आतंकवादियों और उनके समर्थकों को उनके इस जघन्य कृत्य की बहुत भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।”

बता दें कि कश्मीर के बडगाम (Badgam, Kashmir) जिले में गुरुवार (12 मई 2022) को लश्कर-ए-तैयबा के दो आतंकियों ने एक सरकारी कार्यालय में घुसकर 35 वर्षीय राहुल भट की गोली मारकर हत्या कर दी थी। भट चादूरा के तहसील ऑफिस में राजस्व विभाग में तैनात थे और वे प्रवासी कश्मीरी हिंदुओं के रोजगार के लिए दिए गए विशेष पैकेज के लिए काम कर रहे थे।

जिस समय दोनों आतंकियों ने कार्यालय में घुसकर भट की हत्या की थी, उस समय शाम के लगभग साढ़े चार बज रहे थे और तहसील कार्यालय कर्मचारियों से भरा हुआ था। आतंकी दुस्साहस दिखाते हुए भरी ऑफिस में घुस गए और राहुल भट को सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी।

राहुल भट की हत्या के बाद 350 सरकारी कर्मचारियों ने दिया सामूहिक इस्तीफा, उपराज्यपाल और गृह मंत्रालय को पत्र भेज कहा- नहीं कर रहे महसूस सुरक्षित

जम्मू-कश्मीर में बडगाम के चदूरा में इस्लामिक आतंकियों द्वारा कश्मीरी हिंदू राहुल भट की टार्गेटेड किलिंग के बाद घाटी के लोगों में आक्रोश फैल गया है। इस निर्मम हत्या के खिलाफ सैकड़ों की संख्या में कश्मीरी हिंदू सड़कों पर उतर आए और विरोध किया। इस बीच पता चला है कि प्रधानमंत्री के रोजगार पैकेज के तहत काम करने वाले करीब 350 सरकारी कर्मचारियों ने सामूहिक इस्तीफा दे दिया है।

इन सरकारी कर्मियों ने कथित तौर पर अपना इस्तीफा राज्य के उप राज्यपाल मनोज सिन्हा को भेज दिया है। इसके साथ ही इसकी एक कॉपी गृह मंत्रालय (MHA) को भी भेज दी गई है। इस्तीफे में इन कर्मचारियों का कहना है कि जिस तरीके से राहुल भट की हत्या इस्लामिक आतंकियों ने की है, उससे केपी सरकार के ये कर्मी सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं।

फोटो साभार: ट्विटर यूजर सावधान जम्मू

पत्र में लिखा गया कि बीते 12 सालों से जो कश्मीरी पंडित घाटी में अपनी सेवाएँ दे रहे हैं, उन अल्पसंख्यकों से प्रशासन ने घाटी में उनकी सम्मानजनक वापसी का वादा किया था, लेकिन जान के खतरे के कारण उनमें निराशा है। इसके हलावा संरक्षकों में भी हताशा का भाव है। जबकि जीवन प्रत्येक इंसान का मौलिक अधिकार है।

इसमें आगे कहा गया है, “हम पीएम पैकेज के कर्मचारियों और गैर-पीएम पैकेज कर्मचारियों के पास सामूहिक इस्तीफा देने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है, हम जानते हैं कि हमारी जान बचाने का यही एकमात्र उपाय है।”

न्याय की माँग कर रहे कश्मीरी हिंदू प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज

गौरतलब है कि इससे पहले ऑपइंडिया ने रिपोर्ट किया था कि कैसे राहुल भट की हत्या करने के मामले में कश्मीरी हिंदू प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया गया और आँसू गैस के गोले दागे गए। इन प्रदर्शनों में सरकारी कर्मचारियों और बडगाम में रहने वाले कश्मीरी हिंदुओं के भट की हत्या पर प्रशासन के खिलाफ विरोध किया।

राहुल भट्ट की हत्या

इससे पहले गुरुवार को जम्मू-कश्मीर में बडगाम जिले के चदूरा में आतंकवादियों ने टार्गेटेड अटैक कर राहुल भट नाम के युवा कश्मीरी पंडित की हत्या कर दी थी। इस घटना में तहसीलदार कार्यालय में क्लर्क राहुल भट पर दो इस्लामिक आतंकियों ने गोलियाँ चलाईं थी। कथित तौर पर वो चदूरा स्थित अपने ऑफिस में काम कर रहे थे, तभी आतंकवादियों ने घुसकर उस पर पॉइंट-ब्लैंक रेंज से गोलियाँ चला दीं। गंभीर हालत में भट को श्रीनगर के एक अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उनकी मौत हो गई।

हिरोइन सहाना की लाश खिड़की से लटकी हुई, शौहर सज्जाद पुलिस हिरासत में: डेढ़ साल पहले किया था निकाह

12 मई 2022 की रात करीब 1 बजे होंगे कि केरल के कासरगोड जिले के चेरुवथुर में रहने वाले सहाना के मायके की घंटी घनघना उठती है। काफी देर के बाद उधर से फोन उठता है और सामने से उन्हें बताया जाता है कि सहाना अब इस दुनिया में नहीं रहीं। वो अपने कमरे में मृत पाई गईं।

मॉडल और एक्ट्रेस सहाना का शव उनके फ्लैट में खिड़की के ग्रिल से लटका मिला। ये वही दिन था, जब सहाना ने अपना 21वाँ जन्मदिन मनाया। लेकिन किसे पता था कि उनका 21वाँ साल उनकी जिंदगी का अंतिम साल होगा।

पेशे से मॉडल और एक्ट्रेस सहाना अपने शौहर के सज्जाद के साथ कोझिकोड के परंबिल बाजार में किराए के फ्लैट में रहती थीं। गुरुवार को रात के करीब 11 बजे उनके शव को उनके फ्लैट से बरामद किया गया। इस मामले में उनके परिवार ने सहाना के शौहर सज्जाद पर हत्या का आरोप लगाया है। दोनों का निकाह करीब डेढ़ साल पहले हुआ था। बहरहाल इस आरोप के बाद पुलिस ने शुक्रवार (13 मई 2022) को शहाना के शौहर को हिरासत में ले लिया है।

सहाना की अम्मी रोते हुए कहती हैं कि उनकी बेटी आत्महत्या नहीं कर सकती, उसकी हत्या की गई है। वो हमेशा (सहाना) रोते हुए कहा करती थी कि वो (सज्जाद) शराब पीकर आता है औऱ नशे में धुत होकर प्रताड़ित किया करता था। उसकी अम्मी बताती हैं कि सहाना के शौहर के परिवार के लोग भी उसे प्रताड़ित करते थे, जिसके बाद मैंने उसे अलग रहने का सुझाव दिया था। हालाँकि, ये प्रताड़ना कम नहीं हुई। सहाना ने अपनी अम्मी को बताया था कि वो उससे पैसे माँगता था। जो सोने के गहने हमने दी थीं, वो खत्म हो चुकी है। वह अपने जन्मदिन पर हमसे मिलना चाहती थी। सहाना की अम्मी ने ये आरोप लगाया कि सज्जाद सहाना को अपने परिवार को देखने या उन्हें घर में आमंत्रित नहीं करने देगा।

ऐसे घटना का हुआ खुलासा

सहाना जिस फ्लैट में रहती थीं, उसके मकान मालिक उसके पड़ोसी भी थे। उन्हें ही सबसे पहले कुछ गलत होने का आभास उस वक्त हुआ जब उन्होंने सज्जाद को ये कहकर चिल्लाते हुए सुना कि सहाना कोई जबाव नहीं दे रही है। सहाना के मकान मालिक ने ही मीडिया वन को बताया कि उन्होंने देखा था कि सहाना उसकी गोद में लेटी हुई है। उन्होंने ने ही पुलिस को इसकी जानकारी दी। इसके बाद मौके पर पहुँची पुलिस सहाना को मेडिकल कॉलेज लेकर गई।

गौरतलब है कि सहाना ने कई सारे ज्वैलरी के विज्ञापन किए थे। करीब डेढ़ साल पहले सज्जाद से उसका निकाह हुआ था। निकाह के पहले सज्जाद कतर में काम करता था, लेकिन बाद में वो वहाँ काम छोड़कर चला आया और घर में रहने लगा। एसीपी के सुदर्शन के मुताबिक, “उसने एक फिल्म में काम किया था, जिसके लिए उसे हाल ही में कुछ पैसे भी मिले थे। इसी को लेकर दोनों में अक्सर लड़ाईयाँ होती थी। कल उसका जन्मदिन था, लेकिन वह देर से आया। सहाना के शौहर का एक औऱ तर्क था कि उसने उसे बाथरूम के अंदर मृत पाया।” पुलिस अधिकारी ने कहा कि मामले की जाँच की जा रही है।

NDTV का दावा- कॉन्ग्रेस के ‘एक परिवार, एक टिकट’ नियम से गाँधी परिवार को छूट, फेक न्यूज़ बताते हुए टूट पड़े कॉन्ग्रेसी, जानिए क्या है सच

कॉन्ग्रेस खुद में जान फूँकने के लिए बैठकें कर रही है। इस बीच NDTV ने शुक्रवार (13 मई 2022) को ट्वीट कर दावा किया है कि 2024 में होने वाले लोकसभा चुनावों से पहले पार्टी खुद को री-लॉन्च करने की कोशिश में ‘एक परिवार, एक टिकट’ के स्टैंडर्ड पर सहमत हो गई है। हालाँकि, इस नियम से गाँधी परिवार को बाहर रखा गया है।

एनडीटीवी की 13 मई को प्रकाशित रिपोर्ट में कहा गया है ‘कॉन्ग्रेस क्लियर्स की रिफॉर्म विद लूपहोल फॉर गाँधीज़: 10 पॉइंट्स’ शीर्षक वाली खबर में इस बात का जिक्र किया गया है कि शुक्रवार से राजस्थान के उदयपुर में शुरू हो रहे तीन दिवसीय ‘चिंतन शिविर’ में कॉन्ग्रेस ने इस बात पर सहमति व्यक्त की है कि पार्टी अब ‘एक परिवार, एक टिकट’ नियम को लागू करेगी, जिससे गाँधी परिवार को छूट मिलेगी।

फोटो साभार: एनडीटीवी

एनडीटीवी की रिपोर्ट कहती है कि ये वो नियम है, जिसके लागू होने से एक परिवार के एक से अधिक लोगों के चुनाव लड़ने पर बैन लग जाएगा। लेकिन, इसको लेकर कॉन्ग्रेस ये संकेत दे चुकी है कि इस नियम से गाँधी परिवार- सोनिया गाँधी और उनके बच्चे राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी वाड्रा बचे रहेंगे।

रिपोर्ट में कॉन्ग्रेस नेता अजय माकन के कोट का हवाला देते हुए कहा गया है कि क्या गाँधी को इससे छूट दी गई है। इसमें कहा गया, “इस नियम पर सभी एकमत हैं। अगर परिवार का कोई सदस्य अभी चुनाव लड़ना चाहता है तो उसे अगले पाँच साल तक एक्टिव रहना चाहिए। वे बीते पाँच साल से सक्रिय हैं। प्रियंका गाँधी ने 2018 में पार्टी के लिए औपचारिक रूप से काम करना शुरू किया था।”

फोटो साभार: एनडीटीवी

मीडिया आउटलेट आखिरकार इस निष्कर्ष पर पहुँचता है कि जो नियम तीनों गाँधियों को चुनाव लड़ने की इजाजत देता है, इससे एक लूप होल का पता चलता है। इससे आलोचकों को भी एक मौका मिलेगा कि जब पार्टी में बड़े सुधार की जरूरत है, उस वक्त में भी कॉन्ग्रेस एक प्रकार का कॉस्मेटिक बदलाव कर रही है।

बस फिर क्या था, NDTV के ट्वीट करते ही कॉन्ग्रेस और उसके वफादारों ने एनडीटीवी के खिलाफ ट्विटर फ्रंट खोलते हुए उस पर फेक न्यूज फैलाने का आरोप लगाया। कॉन्ग्रेस की यूथ विंग के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीनिवास बीवी ने सफाई पेश की कि पार्टी में ये नियम सभी के लिए एप्लीकेबल हैं, न कि केवल गाँधी फैमिली के लिए। कॉन्ग्रेस नेता ने ट्वीट किया, “फेक न्यूज अलर्ट। एक ही परिवार का दूसरा सदस्य पार्टी टिकट के लिए तभी योग्य माना जाएगा, जब उसने उसने पार्टी और संगठन के लिए लगातार पाँच साल तक काम किया हो। यह नियम पार्टी में सभी पर लागू होता है।”

इसी क्रम में खुद को कॉन्ग्रेसी फैन बताने वाले ट्विटर हैंडल @bole_bharatने NDTV को ‘प्रोपेगैंडा फैक्ट्री’ करार दे दिया। उसने ट्वीट किया, “एनडीटीवी – द प्रोपेगैंडा फैक्ट्री। कॉन्ग्रेस नेता @ajaymaken ने ‘एक परिवार एक टिकट’ नियम के बारे में गाँधी परिवार के बारे में कुछ भी नहीं बताया। नियम सभी पर लागू होता है।”

कॉन्ग्रेस के कई अन्य वफादारों ने भी इसी को फॉलो किया और फेक न्यूज फैलाने के लिए ट्विटर पर आ गए।

उल्लेखनीय है कि कॉन्ग्रेस नेता अजय माकन ने मीडिया को संबोधित किया, लेकिन इस दौरान उन्होंने एक भी बार गाँधी परिवार का नाम नहीं लिया और यह नियम पार्टी में सभी पर लागू होता है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान वीडियो में करीब 11.30 मिनट पर AICC के महासचिव अजय माकन को ये कहते देखा गया कि चिंतन शिविर ‘एक परिवार एक टिकट’ के मानदंड को लागू करना चाहता है। एक परिवार का दूसरा सदस्य पार्टी के टिकट के लिए तभी योग्य माना जाएगा जब उसने पार्टी के लिए पाँच साल तक काम किया हो।

हालाँकि, ये सत्य है कि माकन ने एक बार भी गाँधी परिवार का नाम नहीं लिया, लेकिन यह नियम तकनीकी रूप से तीनों गाँधी वंशजों को इस रेस में शामिल करता है। इसके अलावा ये नियम पार्टी के सभी लोगों पर भी लागू होता है। ऐसे में ये स्पष्ट है कि एनडीटीवी की जानकारी जरुरी तथ्यों पर फोकस करती है।

गौरतलब है कि शुक्रवार को उदयपुर में कॉन्ग्रेस का तीन दिन का चिंतन शिविर शुरू हुआ। पार्टी ने घोषणा की कि संगठन में ‘बड़े बदलाव’ आ रहे हैं, जिसमें सभी स्तरों पर 50 से कम उम्र के व्यक्तियों के लिए 50% प्रतिनिधित्व शामिल है, जिसकी शुरुआत कॉन्ग्रेस कार्य समिति से हुई है। माकन के मुताबिक, इस बदलाव का उद्देश्य पार्टी के काम करने की तरीकों में बदलाव करना है।

अवैध मजार-दरगाहों पर प्रशासन से बुलडोजर चलाने की माँग: अलीगढ़ में हिंदूवादी संगठनों ने बनाई लिस्ट, कानून बनाने की अपील

अवैध मजारों को रातों-रात बनाकर अतिक्रमण करने और संदिग्ध गतिविधियाँ संचालित करने की देश से आ रही खबरों को लेकर लोग सचेत होने लगे हैं। उत्तर प्रदेश में अब अवैध मजारों और दरगाहों के खिलाफ आवाज उठने लगी है। अलीगढ़ में हिंदूवादी संगठनों ने ऐसे अवैध निर्माणों को तुरंत हटाने की प्रशासन से अपील की है। इसके साथ ही कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।

ओमवीर सिंह ने हिंदूवादी संगठन के लोगों के साथ इस मामले को लेकर प्रशासन सहित मंत्रियों को ज्ञापन दिया है। प्रशासन को दिए गए ज्ञापन में ओमवीर सिंह ने कहा है, “आजकल सड़कों के किनारे और सार्वजनिक भूमि पर अवैध मजार एवं दरगाहों का निर्माण दिनों-दिन बढ़ता जा रहा है, जो कि एक सुनियोजित षडयंत्र प्रतीत होता है।” उन्होंने कहा कि जहाँ साल भर पहले तक कुछ नहीं होता वहाँ कब्र दिखाई देने लगता है। उसके बाद उसका विस्तार करके मजार बना दिया जाता है।

ओमवीर सिंह ने सरकार से इस पर कानून बनाने की माँग की, ताकि बिना अनुमति के इस तरह के निर्माण को रोका जा सके। इस संबंध में उन्होने राज्यपाल के नाम पर जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह को ज्ञापन सौंपा। उस दौरान राजस्व मंत्री अनूप प्रधान और सांसद सतीश गौतम की मौजूद थे। इस मामले में अलीगढ़ से भाजपा सांसद सतीश गौतम (Satish Gautam) ने कहा कि सरकारी जमीन पर किसी भी अवैध निर्माण पर बुलडोजर चलेगा, किसी को बख्शा नहीं जाएगा।

खबर इंडिया टीवी डॉट इन के अनुसार, सांसद गौतम ने कहा, “प्रशासन की मदद से ऐसे स्थानों को चिन्हित कराया जाएगा और PWD के अधिकारियों से जाँच कराई जाएगी। ऐसी सभी जगहों पर बुलडोजर चलवाया जाएगा, जो अवैध हैं चाहे वह इमारत किसी बिल्डर की हो या फिर वह मजार या दरगाह ही क्यों न हो। योगी आदित्यनाथ (Yogi Aditynath) के प्रदेश में हर काम संविधान के तहत होगा।”

दरअसल, अलीगढ़ के टप्पल के हेतलपुर गाँव के निवासी ओमवीर सिंह ने ऐसे कई मजार और दरगाहों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कस्बा टप्पल में अलीगढ़-पलवल रोड किनारे आदमपुर मार्ग के सामने बनी मजार, अलीगढ़-पलवल मार्ग पर अटारी रोड के पास बनी मजार, अलीगढ़-पलवल रोड पर खैर कस्बा के कोल्डस्टोर के समीप बनी मजार, नूरपुर रोड पर बनी मजार, गढ़ी सूरजमल रोड पर यमुना एक्सप्रेसवे पर बनी मजार आदि ऐसे कई निर्माण हैं, जो पूरी तरह अवैध हैं। उन्होंने कहा कि रोड किनारे बने अवैध मजारों के कारण आए दिन सड़क दुर्घटनाएँ होती हैं।

बता दें कि अवैध मजारों एवं दरगाहों का निर्माण सिर्फ अलीगढ़ की नहीं, बल्कि पूरे देश की समस्या है। दिल्ली से सांसद प्रवेश वर्मा ने राजधानी क्षेत्र में 54 ऐसी सरकारी जमीनों की लिस्ट उपराज्यपाल को सौंपी है, जिन पर अवैध रूप से मस्जिद और कब्रिस्तान बनाए गए।

उत्तराखंड के देहरादून के पॉश इलाके में बनी एक मजार है। वहाँ के लोगों का दावा है कि यह मजार अवैध है। मजार पर खादिम का काम करने वाला शख्स नशा करने का आदी बताया जा रहा है। वहीं, उसने वहीं, अंडे बेचने का काम भी शुरू किया था।

पिछले साल लॉकडाउन के दौरान पृथ्वीराज चौहान के ‘किला राय पिथौरा’ के पास भी मुस्लिमों द्वारा अवैध मजार बनवाने का मामला सामने आया था। इसका वीडियो सामने आने के बाद लोग आक्रोशित हो गए थे और मजार को तुरंत ध्वस्त करने की माँग की थी। इसी तरह छत्रपति शिवाजी के लोहागढ़ किले पर मजार का मामला भी सामने आया था।

इसी तरह फरीदाबाद के बल्लभगढ़ में पंचायत भवन की जमीन पर बने एक अवैध मजार से सेक्स और स्त्रियों को वश में करने सहित कई तरह की दवाएँ बरामद हुई थीं। स्थानीय लोगों के पास शिकायत थी कि मजार के टॉयलेट में हिन्दू-देवी देवताओं की तस्वीरें लगी हैं। जब लोग वहाँ पहुँचे तो उन्हें नशीली सेक्सवर्धक दवाओं के साथ, इस्लामी किताबें और कई आपत्तिजनक वस्तुएँ बरामद हुई थीं।

इसी तरह, गुजरात में सूरत (Gujarat, Surat) के सिविल अस्पताल में एक अवैध मजार बनाकर अतिक्रमण करने की कोशिश की गई है। अस्पताल प्रशासन ने पुलिस को पत्र लिखकर परिसर में स्थित इस अवैध मजार को हटाने का अनुरोध किया है। मजार का एक वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहा है।

पंजाब के मोहाली ब्लास्ट में ISI का हाथ: मास्टरमाइंड ‘लांडा’ बैठा है कनाडा में, पुलिस की नजर अब बिहार के नसीफ-सरफराज पर

पंजाब के मोहाली में इंटेलिजेंस हेडक्वार्टर की बिल्डिंग में किए गए ब्लास्ट मामले में मास्टरमाइंड का पता चल गया है। पंजाब पुलिस के अनुसार, इस पूरे हमले की साजिश रचने वाला लखबीर सिंह लांडा है। इससे पहले इस केस में पाकिस्तान में रहने वाले हरविंदर सिंह रिंडा को मुख्य साजिशकर्ता के तौर पर देखा जा रहा था। हालाँकि अब पुलिस ने बताया है कि मास्टरमाइंड लखबीर सिंह है जो कि हरविंदर सिंह रिंडा का करीबी है। पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए अब तक 6 आरोपितों को गिरफ्तार किया है।

पंजाब डीजीपी ने गिरफ्तारी संबंधी जानकारी के साथ बताया, “मुख्य साजिशकर्ता लखबीर सिंह लांडा है। वह तरनतारन का रहने वाला है। वह गैंगस्टर है और कनाडा में 2017 से रह रहा है। वह आईएसआई के नजदीकी हरविंदर सिंह रिंडा का करीबी है।… हम देख सकते हैं कि ये सब बब्बर खालसा इंटरनेशनल व गैंगस्टर ने आईएसआई के साथ मिल कर किया है। लांडा का मुख्य साथी निशान सिंह है जो तरनतारन का निवासी है। उसे फरीदकोट पुलिस ने कुछ दिन पहले गिरफ्तार कर लिया है।”

डीजीपी ने बताया, “निशान सिंह ने दो आरोपितों को अपने घर में और अपने जानने वालों के घर में जगह दी हुई थी।” पुलिस ने जानकारी दी कि निशान सिंह के दो साथी भी इन सबमें शामिल थे। वह भी तरनतारन के हैं। इनके पास से पुलिस को एके-47 मिली है। इसके अलावा पुलिस को आरपीजी भी हैंडओवर किया गया है।”

मोहाली ब्लास्ट केस में 6 गिरफ्तार, 1 महिला भी

गौरतलब है कि इस मामले में अब तक 6 गिरफ्तारियाँ हुई हैं। इनके नाम कंवर बाथ, बलजीत कौर, बलजीत रैंबो, आनंददीप सोनू, जगदीप कांग, निशांत सिंह हैं। इनके अलावा दो और संदिग्धों पर पुलिस ने लगातार नजर बनाई हुई है। ये बिहार के मोहम्मद नसीम आलम और सरफराज हैं।

मोहाली ब्लास्ट

बता दें कि पिछले हफ्ते मोहाली के सेक्टर 77 में पंजाब पुलिस की इंटेलीजेंस विंग की हाई सिक्योरिटी वाली बिल्डिंग में आरपीजी (रॉकेट प्रोपेल्ड ग्रेनेड) से हमला किया गया था। हालाँकि, अच्छी बात ये थी कि इसमें धमाका ही नहीं हुआ, जिससे किसी भी तरह का नुकसान नहीं हुआ। ग्रेनेड इमारत की तीसरी मंजिल पर गिरा। इससे काँच के दरवाजे जरूर टूट गए थे।