Homeदेश-समाजअब मथुरा शाही ईदगाह विवादित ढाँचे में सर्वे और वीडियोग्राफ़ी के लिए अदालत में...

अब मथुरा शाही ईदगाह विवादित ढाँचे में सर्वे और वीडियोग्राफ़ी के लिए अदालत में प्रार्थना-पत्र, पूछा – ज्ञानवापी में हो सकता है तो यहाँ क्यों नहीं?

मथुरा मामले में 19 मई को स्थानीय अदालत का बड़ा फैसला भी आ सकता है। वकील रंजना अग्निहोत्री ने औरंगजेब द्वारा बनवाए गए शाही ईदगाह मस्जिद को हटाने की माँग की थी।

काशी के ज्ञानवापी विवादित ढाँचे के बाद अब मथुरा स्थित शाही ईदगाह विवादित ढाँचे में वीडियोग्राफ़ी और सर्वे के लिए प्रार्थना-पत्र दायर किया गया है। इस प्रार्थना पत्र के साथ-साथ काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में स्थिर ज्ञानवापी विवादित ढाँचे में कोर्ट द्वारा नियुक्त एडवोकेट जनरल की निगरानी में चल रहे सर्वे और वीडियोग्राफ़ी के विवरण भी सौंपे गए हैं। कहा गया है कि इसी तर्ज पर यहाँ भी एडवोकेट जनरल नियुक्त कर के प्रक्रिया पूरी की जाए।

ये प्रार्थना-पत्र अधिवक्ता महेंद्र प्रताप ने दायर किया है। उन्होंने कहा है कि शाही ईदगाह मस्जिद परिसर का अवलोकन कर के कमल, शंख, गदा, ॐ और स्वास्तिक जैसे हिन्दू प्रतीक-चिह्नों के सबूत अदालत के समक्ष पेश किए जाएँ। इस मामले की सुनवाई मंगलवार (10 मई, 2022) को होगी। इससे पहले भी अधिवक्ता महेंद्र प्रताप अदालत के समक्ष इस तरह की माँग रख चुके हैं। दिसंबर 2021 में मथुरा में एक याचिका दायर की गई थी।

इस याचिका में माँग की गई थी कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि परिसर में स्थित शाही ईदगाह मस्जिद में नमाज पढ़ने पर रोक लगाई जाए। ‘श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन समिति’ ने ये याचिका दायर की थी। अधिवक्ता महेंद्र प्रताप इस संगठन के अध्यक्ष हैं, जिनका कहना है कि ईदगाह में नमाज नहीं पढ़ी जाती थी, लेकिन यहाँ जानबूझ कर पाँच वक्त की नमाज अदायगी शुरू कर दी गई है। उन्होंने इसे हिन्दुओं की संपत्ति करार दिया था।

जबकि ‘शाही ईदगाह मस्जिद इंतजामियाँ कमिटी’ का कहना है कि जिस 13.37 एकड़ जमीन पर हिन्दू पक्ष दावा कर रहा है, उससे जुड़े कोई भी दस्तावेज अदालत में पेश नहीं किए गए हैं। उसने दावा किया कि ये वाद सुने जाने योग्य नहीं है। अब सभी की निगाहें कल होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं। मथुरा मामले में 19 मई को स्थानीय अदालत का बड़ा फैसला भी आ सकता है। वकील रंजना अग्निहोत्री ने औरंगजेब द्वारा बनवाए गए शाही ईदगाह मस्जिद को हटाने की माँग की थी।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

12 वर्ष पहले गोरखनाथ पीठ के पीठाधीश्वर, फिर देश के सबसे बड़े सूबे के CM: जनता तक पहुँच और समस्याओं पर तत्काल प्रतिक्रिया –...

योगी आदित्यनाथ की गोरखनाथ पीठाधीश्वर से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री तक की यात्रा, विरासत को आगे बढ़ाने से लेकर विकसित होते UP की पूरी कहानी।

अखिलेश सरकार में हुए 62+ हत्याओं को याद करा रहा ‘न भूले थे, न भूले हैं, न भूलेंगे’ पोस्टर: मुजफ्फरनगर दंगों की बरसी पर...

मुजफ्फरनगर दंगों की बरसी पर उत्तर प्रदेश के कई शहरों में ‘न भूले थे, न भूले हैं, न भूलेंगे’ लिखे पोस्टर लगा गए हैं। इन पोस्टर्स ने 2013 की उस भयावह हिंसा की याद फिर ताजा कर दी है।
- विज्ञापन -