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टॉयलेट सीट को बता दिया शिवलिंग… भगवान शिव पर ओछी टिप्पणी करने वाला नसीम और अरमान धराया, मुस्लिम भीड़ का थाने पर हमला

ज्ञानवापी विवादित ढाँचे पर सुनवाई शुरू होने के बाद से अचानक सोशल मीडिया पर हिन्दू देवी-देवताओं के खिलाफ बयानबाजी और उनके अपमान किए जाने की घटनाएँ बढ़ गई हैं। इसी क्रम में हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में स्थित पावंटा साहिब की हैं, जहाँ शिवलिंग को लेकर कट्टरपंथी मुस्लिमों ने सोशल मीडिया पर अपमानजनक टिप्पणियाँ कीं, जिससे इलाके में तनाव की स्थिति पैदा हो गई।

रिपोर्ट के मुताबिक, ये घटना पावंटा साहिब थाने के अंतर्गत माजरा में शिवलिंग को लेकर विवादित बयान देने के मामले में 2 आरोपितों पावंटा अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष नसीम राज और सैलून की दुकान चलाने वाले अरमान मलिक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। इससे भड़के मुस्लिम कट्टरपंथियों पुलिस स्टेशन पर ही हमला कर दिया। मुस्लिमों ने लाठी-डंडों और तलवारें लेकर थाने को घेर लिया। इस बीच जैसे ही इसकी खबर हिन्दू समुदाय को लगी तो वे हिन्दू समुदाय के सैकड़ों लोग भी थाने पहुँच गए। दोनों तरफ से नारेबाजी की गई।

हालात बेकाबू होते देख जिले के डीसी और एसपी समेत सभी सीनियर अधिकारी मौके पर पहुँचे और लोगों को समझाने की कोशिशें की। बाद में किसी तरह मामले को शांत कराया जा सका। बहरहाल इलाके में बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स को डिप्लॉय किया गया है।

ज्ञानवापी के कारण भगवान शिव का किया गया अपमान

इस बीच हिमाचल प्रदेश के कैबिनेट मंत्री और स्थानीय विधायक सुखराम चौधरी ने इसे ज्ञानवापी विवादित ढाँचे से जोड़कर देखा और दावा किया कि ज्ञानवापी विवाद के कारण कुछ लोगों ने पावंटा में भगवान शिव पर अभद्र टिप्पणी की है। ये हिन्दू-मुस्लिम तनाव को बढ़ाने की साजिश है। वहीं बीजेपी की पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ राजीव बिंदल ने कहा है कि हिन्दू देवी-देवताओं के अपमान को सहन नहीं करेंगे।

क्या है पूरा मामला

फेसबुक का स्क्रीनशॉट

गौरतलब है कि फेसबुक पर अरमान मलिक नाम के मुस्लिम युवक ने हिंदुओं की भावनाओं को आहत करने वाली पोस्ट को फेसबुक पर डाला था। बताया जाता है कि वो माजरा का रहने वाला है। वहीं दूसरी आरोपित है नसीम नाज है। इसने इस पोस्ट को शेयर किया था। दावा किया डा रहा है कि नसीम नाज बीजेपी के अल्पसंख्यक मार्चा का अध्यक्ष है।

Himachal Pradesh Sirmaur Arman malik posted Derogatory post about Shivling Hindu-Muslim tension emerged

मौलाना तौकीर रजा को कोर्ट पर विश्वास नहीं, कहा- इस्लाम अपनाने वाले हिन्दुओं ने खुद मंदिरों को बना दिए मस्जिद, बाबरी पर सब्र किया पर अब नहीं

उत्तर प्रदेश के वाराणसी (Varanasi, Uttar Pradesh) में विवादित ज्ञानवापी ढाँचे (Gyanvapi Controversial Structure) में सर्वे के दौरान शिवलिंग एवं अन्य हिंदू प्रतीकों के मिलने के बाद मुस्लिम नेता तरह-तरह की दलील देकर स्वयं को सही ठहराने की कोशिश कर रहे हैं। अपने विवादित बयानों के कारण अक्सर आलोचना का सामना करने वाले बरेली के मौलाना और कॉन्ग्रेस नेता (Congress Leader) तौकीर रजा खान (Tauqeer Raza Khan) ने एक बार फिर बेढब बयान दिया है। इसके साथ ही उन्होंने हिंदुओं धमकी भी दी है।

इत्तेहाद मिल्लत काउंसिल (Ittehad Millat Council) के प्रमुख तौकीर रजा ने कहा कि देश में किसी भी मंदिरों को तोड़ा नहीं गया था, बल्कि बड़ी संख्या में इस्लाम में धर्मांतरण करने वाले लोगों ने अपने धार्मिक स्थलों को मस्जिद में बदल दिया था। उन्होंने कहा कि ऐसे मस्जिदों को ना छुआ जाए और किसी ने ऐसा किया तो इसके गंभीर नतीजे होंगे। उन्होंने हा कि देश के अदालतों पर उन्हें विश्वास नहीं है।

तौकीर रजा ने कहा कि ज्ञानवापी का सर्वे बंद कमरों के लिए हुए था खुले हौज के लिए नहीं। हौज के फव्वारे को शिवलिंग बताकर हिंदुत्व का मजाक उड़ाया जा रहा है। सरकार को फौव्वारा और शिवलिंग में अंतर समझ नहीं आता है। उन्होंने कहा कि अगर ज्ञानवापी ढाँचे में शिवलिंग है तो तो हिंदू हर जिले और हर सूबे के मस्जिदों के फव्वारे को शिवलिंग कहेंगे।

तौकीर रजा ने दी धमकी, कहा- कोर्ट पर विश्वास नहीं

उन्होंने कहा, ”मुस्लिम कानूनी लड़ाई नहीं चाहते, क्योंकि वे बाबरी मस्जिद का फैसला देख चुके हैं। इस बार हम किसी कोर्ट में अपील नहीं करेंगे। नफरत बेचने वालों देश के हर मस्जिद में फव्वारे के साथ शिवलिंग मिलेगा। जामा मस्जिद के हौज का फोटो ले लीजिए, नौमहला मस्जिद में भी पत्थर मौजूद हैं। यदि उनका बस चले तो वे सब पर अतिक्रमण करेंगे। देश में शांति रखने के लिए मुस्लिम अब तक चुप रहे हैं।” 

मौलाना तौकीर रजा ने धमकी भरे अंदाज में कहा, “बाबरी मस्जिद पर मुस्लिमों ने सब्र कर लिया, लेकिन अब वे नहीं करेंगे। ज्ञानवापी मामले में अगर जबर्दस्ती की गई तो सरकार को मुस्लिमों का भारी विरोध झेलना पड़ेगा। हुकूमत हर मस्जिद को मंदिर बनाना चाहती है। इसके नतीजे गंभीर हो सकते हैं। हमारी मजबूरी को कमजोरी न समझें।”

संघ ने जिन्ना के जरिए कराया हिंदुस्तान का बंटवारा

उन्होंने कहा कि ऐसे विवाद पैदा कर हिन्दू-मुस्लिम को उलझाया जा रहा है, ताकि हिन्दुस्तान में एक और बँटवारा करवाया जाए। रजा ने कहा कि हिंदुस्तान और पाकिस्तान का बँटवारा किसी मुस्लिम ने नहीं कराया था। वह संघ (RSS) की साजिश थी हिंदू राष्ट्र बनाने की और एक हिंदू गुंजालाल ठक्कर के बेटे जिन्ना का सहारा लिया।

तौकीर रजा ने नई थ्योरी पेश करते हुए कहा कि जिन्ना ने अपने घर में विवाद होने के बाद इस्लाम धर्म अपना लिया था। वह कभी इस्लामी परंपराओं को नहीं माने। उन्होंने नाथूराम गोडसे को लेकर कहा कि गोडसे ने महात्मा गाँधी की हत्या के लिए खतना करा लिया, ताकि हत्या के बाद मर जाए उसकी पहचान मुसलमान के रूप में हो और देश में दंगे भड़क जाएँ। यह भी संघ की एक चाल थी।

… तो हिंदुओं को भागने की जगह नहीं मिलेगी: तौकीर रजा

इस साल जनवरी में तौकीर रजा ने एक महजबी आयोजन कर हिंदुओं के खिलाफ खूब जहर उगला था और उन्हें धमकी दी थी। इस दौरान भड़काऊ भाषण देते हुए रजा ने कहा कि जिस दिन मुस्लिम कानून हाथ में ले लेंगे, उस दिन हिंदुओं को पूरे देश में कहीं पनाह नहीं मिलेगा।

रजा ने कहा था, “अगर ये गुस्सा फुट पड़ा, जिस दिन मेरा नौजवान मेरे कंट्रोल से बाहर आ गया उस दिन….. । लोग मुझे कहते हैं कि तुम तो बुजदिल हो गए हो, तो मैं कहता हूँ कि पहले मैं मरूँगा, उसके बाद तुम्हारा नंबर आएगा। मैं अपने हिंदू भाइयों से खासतौर पर कहता हूँ कि मुझे उस वक्त से डर लगता है, जिस दिन मेरा ये नौजवान कानून अपने हाथ में ले लेगा उस दिन हिंदुस्तान में तुम्हें रहने की कहीं जगह नहीं मिलेगी।”

तौकीर रजा ने हिंदुओं को चुनौती देते हुए कहा था, “लड़ने का तुम्हें बहुत शौक है, लेकिन तुम लड़ने की बात कर सकते हो, लड़ नहीं सकते हो। लड़ाई तो हमारे खून में है, हम पैदाइशी लड़ाकू हैं।” मौलाना ने कहा कि उनकी बहू-बेटियों को बरगलाने और जाल में फँसाने की बात कही जाती है, और मुस्लिम खून का घूँट पीकर रह जाते हैं।

गुजरात चुनाव से पहले कॉन्ग्रेस से इस्तीफा दे ‘अंडरग्राउंड’ हुए हार्दिक पटेल: लिखा- शीर्ष नेतृत्व मोबाइल में बिजी, नेताओं का ध्यान चिकन सैंडविच पर

गुजरात विधानसभा चुनाव से पहले कॉन्ग्रेस को बड़ा झटका देते हुए हार्दिक पटेल ने पार्टी का साथ छोड़ दिया है। अपने इस्तीफे की जानकारी हार्दिक ने ट्वीट के जरिए दी। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कॉन्ग्रेस से अलग होकर वह गुजरात के लिए सच में सकारात्मक काम कर पाएँगे। सूत्रों के अनुसार, इस इस्तीफे के बाद से वह ‘अंडरग्राउंड’ हो गए हैं।

हार्दिक पटेल ने 18 मई को अपने ट्विटर पर हिंदी, अंग्रेजी और गुजराती में पत्र साझा करते हुए लिखा, “आज मैं हिम्मत करके कॉन्ग्रेस पार्टी के पद और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देता हूँ। मुझे विश्वास है कि मेरे इस निर्णय का स्वागत मेरा हर साथी और गुजरात की जनता करेगी। मैं मानता हूँ कि मेरे इस कदम के बाद मैं भविष्य में गुजरात के लिए सच में सकारात्मक रूप से कार्य कर पाऊँगा।”

अपने बयान में हार्दिक पटेल ने कहा कि कॉन्ग्रेस पार्टी देशहित व समाज हित के बिलकुल विपरीत कार्य कर रही है। उन्होंने कॉन्ग्रेस में एक सक्षम और मजबूत नेतृत्व न होने को लेकर अपनी शिकायत की। साथ ही कहा कि कॉन्ग्रेस पार्टी सिर्फ विरोध की राजनीति कर रही है जबकि देश के लोग विकल्प चाहते हैं जो उनके भविष्य के लिए सोचता हो।

हार्दिक ने शिकायत की कि कॉन्ग्रेस अयोध्या से लेकर अनु्च्छेद 370, जीएसटी से लेकर सीएए तक के मुद्दे पर केवल केंद्र का विरोध करती रही। वह कहते हैं कि कॉन्ग्रेस पार्टी को आज देश का हर राज्य रिजेक्ट कर चुका है, इसकी वजह यही है क्योंकि कॉन्ग्रेस पार्टी और पार्टी का नेतृत्व जनता के समक्ष एक रोडमैप प्रस्तुत नहीं करता। उनके शीर्ष नेतृत्व में ही गंभीरता की भारी कमी है।

हार्दिक बताते हैं कि जब वो शीर्ष नेतृत्व से मिले और गुजरात की समस्या पर बात करनी चाही तो साफ पता चला कि उनका ध्यान गुजरात की परेशानियों से ज्यादा मोबाइल व बाकी की चीजों पर है। इतना ही नहीं, वह कहते हैं कि जब भी देश संकट में था और कॉन्ग्रेस नेतृत्व की जरूत पड़ी तो वो विदेश में थे। ये व्यवहार बिलकुल ऐसा ही है जैसे कॉन्ग्रेस को गुजरात से नफरत हो।

उन्होंने पार्टी की स्थिति देख दुख जताया और कहा कि कार्यकर्ता 500-600 किलोमीटर अपने खर्चे पर यात्रा करके जनता के बीच जाते हैं। लेकिन पार्टी के बड़े नेताओं की चिंता होती है कि पार्टी नेतृत्व ने चिकन सैंडविच खाया या नहीं। वह कहते हैं कि उन्हें कई युवाओं ने पूछा था, ‘तुम ऐसी पार्टी में क्यों हो जो हर समय हर क्षेत्र में गुजरातियों का अपमान करती है।’ हार्दिक मानते हैं कि कॉन्ग्रेस ने बुरी तरह युवाओं का भरोसा तोड़ा है। यही वजह है कि कोई युवा कॉन्ग्रेस के साथ दिखना भी नहीं चाहता।

गुजरात में कॉन्ग्रेस के बड़े नेताओं पर हार्दिक ने आरोप लगाया कि उन लोगों ने जानबूझकर गुजरातियों के मुद्दे को कमजोर किया है और इसके बदले आर्थिक फायदा उठाया है। वह कहते हैं कि कॉन्ग्रेस गुजरात के लिए कुछ भी अच्छा नहीं करना चाहती। इसलिए जब उन्होंने गुजरात हित में कदम उठाए तो उनका भी तिरस्कार किया गया। हार्दिक पटेल ने कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कॉन्ग्रेस का नेतृत्व प्रदेश, समाज और युवाओं के लिए द्वेष भाव रखता है।

हार्दिक पटेल की कॉन्ग्रेस से नाराजगी

बता दें कि गुजरात के पाटीदार नेता हार्दिक पटेल ने साल 2017 में गुजरात विधानसभा चुनावों में कॉन्ग्रेस को समर्थन दिया था। इसके बाद साल 2019 में 12 मार्च को वो आधिकारिक तौर पर पार्टी से जुड़े थे। कुछ दिन से उनकी पार्टी से अनबन मीडिया में थी। उन्होंने पीछे दिनों कहा था कि पार्टी में उनकी जगह ऐसी है जैसे नए दूल्हे की नसबंदी करवा दी जाए।

ज्ञानवापी मामले में कूदा AIMPLB, मुस्लिम पक्ष को देगा ‘हर तरह की’ कानूनी सहायता: किताबें-पैम्पलेट छपवा कर बनाएगा नैरेटिव

वाराणसी के ज्ञानवापी विवादित ढाँचे का मुद्दा अभी सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है। ज्ञानवापी ढाँचे (Gyanvapi Mosque) के वजूखाना में शिवलिंग मिलने के बाद से जहाँ हिंदू अपने पक्ष में आवाज बुलंद कर रहे हैं, वहीं मुस्लिम पक्ष भी इस मुद्दे पर कानूनी लड़ाई के तरीके तलाश रहा है। हिंदुओं ने ज्ञानवापी के नीचे की दीवार को तोड़ने की माँग ​की है। उधर मुस्लिमों के सबसे बड़े संगठन ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने ऐलान किया है कि वह इस मामले में मुस्लिम पक्ष को हर तरह से कानूनी सहायता देगा।

उधर समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, अधिवक्ता विष्णु जैन ने कहा, “कोर्ट ने एडवाइजर अजय मिश्रा को हटाने का आदेश दिया है। इसके अलावा, हमने अदालत में एक अर्जी दी है कि वुजू खाने (ज्ञानवापी विवादित ढाँचे की) के नीचे की दीवार को गिरा दिया जाए और हमें वहाँ जाने दिया जाए। उसी पर आज कोर्ट फैसला सुनाएगी।”

आपको बता दें कि AIMPLB ने मंगलवार (16 मई, 2022) शाम को इस मुद्दे पर अपनी कार्यकारिणी की वर्चुअल बैठक भी बुलाई थी। बैठक में फैसला लिया गया कि यह मामला अभी अदालतों में है, इसलिए बोर्ड की लीगल कमेटी केस को लड़ने में मुस्लिम पक्ष की हर संभव मदद करेगी। इसके साथ ही मीडिया पर सटिक और पूर्ण जानकारी नहीं देने का आरोप लगाते हुए AIMPLB ने लोगों को मुस्लिम पक्ष के बिंदुओं से जागरूक करवाने के लिए पैम्पलेट और किताबें छपवाने का भी ऐलान किया, ताकि वह सभी तथ्यों के साथ लोगों को पूरे विवाद के बारे में बता सकें।

AIMPLB क्या है

ज्ञानवापी विवादित ढाँचे के मुद्दे पर मुस्लिमों की मदद का ऐलान करने वाला ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) अक्सर अपने बयानों के कारण विवादों में रहता है। इसने देश में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) कानून पर भी आपत्ति जताते हुए इसका विरोध किया था। All India Muslim Persona Law Board खुद को मुस्लिमों का रहनुमा बताता है। इससे पहले भी यह स्कूलों में सूर्य नमस्कार, राम जन्मभूमि, CAA-NRC, तीन तलाक कानून का खात्मा, हिजाब बैन, लाउडस्पीकर बैन सहित तमाम मामलों को मुस्लिमों से जोड़कर इसका विरोध करता रहा है। यहाँ तक आतंकी गतिविधियों में शामिल मुस्लिमों के बचाव में भी कई बार यह संगठन सामने आ चुका है।

कश्मीर से नागपुर लाया गया जैश आतंकी रईस अहमद, RSS मुख्यालय की रेकी कर Video पाकिस्तान भेजा था

महाराष्ट्र के नागपुर स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के मुख्यालय की रेकी के मामले में कश्मीर से जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के एक आतंकी को गिरफ्तार किया गया है। रेकी कर इस आतंकी ने वीडियो पाकिस्तान स्थित अपने हैंडलर को भेजा था। इसके अलावा उसने डॉ. हेडगेवार स्मारक स्मृति मंदिर की भी रेकी की थी।

नागपुर एटीएस के एक अधिकारी ने बताया कि आतंकी रईस अहमद शेख असदुल्ला शेख को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले के अवंतीपोरा से पकड़ा गया था। उसे जम्मू-कश्मीर से प्रोडक्शन वारंट पर हिरासत में लेकर नागपुर लाया गया है। पिछले दो दिनों में उससे गहन पूछताछ की गई है। शेख ने पूछताछ में बताया कि उसका हैंडलर पाकिस्तान के नवाबपुर में स्थित जैश का ऑपरेशनल कमांडर उमर है। उमर आतंकियों के लॉन्च पैड पर मौजूद है। उसके कहने पर ही रईस ने नागपुर में आरएसएस दफ्तर की रेकी की थी।

जानकारी के मुताबिक रईस अहमद असदुल्लाह शेख पिछले साल जुलाई में नागपुर आया था और उसने कुछ महत्वपूर्ण स्थानों की रेकी की थी। वह 13 जुलाई 2021 को नागपुर फ्लाइट से आया था और सीताबुल्दी इलाके के एक होटल में चेक इन किया। हैंडलर ने शेख को आश्वासन दिया था कि एक स्थानीय व्यक्ति उससे संपर्क करेगा और नागपुर में ऑपरेशन में उसकी मदद करेगा। हालाँकि शेख खुद ही ऑपरेशन में लग गया, क्योंकि नागपुर में किसी ने उससे संपर्क नहीं किया।

हैंडलर से लोकेशन मिलने के बाद उसने 14 जुलाई को ऑटो रिक्शा लिया। गूगल मैप की मदद से रेशमबाग इलाके में पहुँचा। उसका टारगेट स्मृति भवन की रेकी करना था। वह दोपहर में रेशमबाग मैदान के पास गया। इसके बाद शेख ने अपने मोबाइल फोन के कैमरे को चालू किया और उसे इस तरह से रखा, जैसे कि वह किसी से फोन पर बात कर रहा हो। अधिकारी ने बताया कि वीडियो बनाते समय वह रेशमबाग मैदान में टहल रहा था।

इसके बाद शेख ने व्हाट्सएप पर अपने हैंडलर को वीडियो भेजा, लेकिन वीडियो सही से रिकॉर्ड न होने की वजह से उसने उसे फिर से वीडियो रिकॉर्ड करने के लिए कहा। लेकिन इस बार वह सुरक्षा-व्यवस्था देख घबरा गया और वीडियो शूट करने से इनकार कर दिया। इसके बाद उसने अपना मोबाइल फोन भी बंद कर लिया।

फिर उसने ऑटो-रिक्शा ड्राइवर को बुलाया और उसे एक मस्जिद में ले जाने के लिए कहा। ऑटो चालक ने उसे संतरा मार्केट गेट के पास एक मस्जिद में छोड़ दिया, जहाँ वह दिन भर रहा और शाम को होटल लौट आया। अधिकारी ने बताया कि 15 जुलाई को शेख विमान से श्रीनगर चला गया। जनवरी में उसे कश्मीर पुलिस ने गिरफ्तार किया था। पूछताछ में उसने नागपुर में रेकी की बात कबूल की थी। इसके बाद उसके खिलाफ गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया। इस साल की शुरुआत में महाराष्ट्र के तत्कालीन पुलिस महानिदेशक संजय पांडे ने मामले की जाँच राज्य एटीएस को ट्रांसफर कर दी थी।

सीता, लक्ष्मी, राखी, मंजू… ज्ञानवापी में श्रृंगार-गौरी माता के नियमित दर्शन के लिए लड़ने वाली महिलाओं के बारे में जानिए सब कुछ

वाराणसी में ज्ञानवापी विवादित ढाँचे के सर्वे का तीन दिन का काम पूरा होने के बाद 19 मई तक रिपोर्ट पेश की जाएगी। इसके साथ ही वाराणसी कोर्ट ने सर्वे करने गई टीम के कोर्ट कमिश्नर को हटा दिया है। अब मस्जिद का सर्वे विशाल सिंह और अजय सिंह करेंगे। ज्ञानवापी विवादित ढाँचे को कोर्ट में ले जाने वाली पाँच महिलाएँ हैं। इन महिलाओं ने मस्जिद परिसर में श्रृंगार-गौरी स्थल पर प्रार्थना की अनुमति माँगी है। 

इनमें कोई ब्यूटी पार्लर चलाती है, कोई जनरल स्टोर चलाती है तो कोई गृहिणी है। कोर्ट में याचिका लगाने वाली महिलाओं में लक्ष्मी देवी, सीता साहू, मंजू व्यास और रेखा पाठक वाराणसी में रहती हैं, जबकि पाँचवी और मुख्य याचिकाकर्ता राखी सिंह दिल्ली में रहती हैं।

राखी सिंह

राखी सिंह सामाजिक कार्यकर्ता हैं। वह विश्व वैदिक सनातन संघ की संस्थापक सदस्य हैं। इसके अध्यक्ष उनके चाचा जितेंद्र सिंह हैं। वह कई बार वाराणसी आ चुकी हैं और देवी माँ श्रृंगार गौरी की उपासक हैं। सनातन संघ के कार्यक्रम के दौरान राखी सिंह की मुलाकात लक्ष्मी, सीता साहू, मंजू और रेखा पाठक से हुई थी। विश्व वैदिक सनातन संघ के यूपी संयोजक संतोष सिंह का कहना है कि संगठन ने वाराणसी की चार महिलाओं के साथ समन्वय किया और अगस्त 2021 में याचिका दायर करने के लिए उन्हें एक साथ लाया गया।

लक्ष्मी देवी

लक्ष्मी देवी के पति विहिप नेता सोहन लाल आर्य का कहना है कि उनकी पत्नी मुश्किल से ही घर से निकलती हैं। घरेलू महिला होने के बाद भी लक्ष्मी देवी अदालत की सुनवाई के दौरान उपस्थित रहती हैं। दंपति वाराणसी के महमूरगंज इलाके में रहता है। 

लक्ष्मी देवी के पति और वाराणसी में विहिप के एक वरिष्ठ पदाधिकारी सोहन लाल आर्य का दावा है कि उन्होंने ही पाँचों महिलाओं को प्रेरित किया और एक साथ लाए। बचपन से आरएसएस से जुड़े रहने वाले सोहन लाल ने द इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में बताया था कि उन्होंने 1985 में वाराणसी की एक अदालत में काशी विश्वनाथ-ज्ञानवापी मामले के बारे में अपनी पहली याचिका दायर की थी। इस बार उन्होंने महिलाओं को सामने रखने का फैसला लिया। ये महिलाएँ परिसर में देवी माँ के श्रृंगार स्थल पर प्रार्थना करना चाहती हैं। उन्होंने कहा, “मैंने चार महिलाओं को चुना क्योंकि मुझे याचिका दायर करने के लिए उनकी आवश्यकता थी। मेरे पास और कोई नाम नहीं था, इसलिए मैंने उन्हें चुना।”

मंजू व्यास

मंजू व्यास ज्ञानवापी परिसर से 1.5 किमी दूर अपने घर पर ही ब्यूटी पार्लर चलाती हैं। वे किसी भी संगठन से जुड़ी हुई नहीं हैं। श्रृंगार गौरी स्थल पर प्रार्थना करने में उनकी रूचि है।

राखी पाठक

काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर के समीप ही स्थित हनुमान पाठक क्षेत्र की निवासी रेखा पाठक भी गृहिणी हैं। वह कहती हैं कि वह अपनी देवी के लिए याचिका का हिस्सा बनीं। उन्हें इस बात का बुरा लगा कि मंदिर में पूजा के लिए जाने वाली महिलाओं को बैरिकेडिंग के पार जाने की अनुमति नहीं है, इसलिए वो याचिका का हिस्सा बनी। याचिका दायर करने का निर्णय उन्होंने मंदिर के एक सत्संग के दौरान लिया क्योंकि वह सभी देवी माँ की पूजा करना चाहती हैं।

सीता साहू

सीता साहू ज्ञानवापी परिसर से महज 2 किमी दूर वाराणसी के चेतगंज इलाके में अपने घर से एक छोटा सा जनरल स्टोर चलाती हैं। वह भी कभी किसी संगठन या संगठन से नहीं जुड़ी हैं। उनका कहना है कि उन्हें मंदिर में अपनी देवी की ठीक से पूजा करने की अनुमति नहीं है। इसी कारण से उन्होंने याचिका दायर कर रखी है। सीता साहू ने दैनिक भास्कर से बात करते हुए बताया कि जब वह दर्शन करने जाती थी, तब उनके साथ अभद्रता की जाती थी। वह बताती हैं कि सभी महिलाएँ विवादित ढाँचे के पास वाली माता का नियमित दर्शन करना चाहती हैं, इसलिए उन्होंने कानून का सहारा लेने का फैसला लिया। वह बताती हैं, “हम लोग इस मामले को लेकर हरिशंकर जैन से मिले। हमें दर्शन न करने का दुख था। इसलिए उन्हें बताया। फिर हरिशंकर जैन और विष्णु शंकर जैन की मदद से हमने याचिका दायर की।” याचिका में शामिल सभी महिलाओं का कहना है कि उनकी मुलाकात दर्शन पूजन के दौरान हुई थी। फिर दोस्ती हो गई और उसके बाद याचिका दायर किया।

बीच सड़क पर मजारें हैं, कैसे रहेगा सभ्य समाज: दिल्ली HC ने केजरीवाल सरकार को फटकारा, कब्जा हटाने के लिए नोटिस

दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार (17 मई, 2022) को एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए भजनपुरा इलाके में मजार के तौर पर किए गए अवैध अतिक्रमण पर अपनी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने याचिका पर सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार और अन्य को नोटिस जारी किया। साथ ही पूछा कि अगर बीच सड़क में ऐसे ही अवैध मजहबी ढाँचे बने तो एक सभ्य समाज कैसे रहेगा।

बता दें कि इस मामले में एक्टिंग चीफ जस्टिस विपिन संघी और जस्टिस नवीन चावला ने मामले की सुनवाई की और दिल्ली सरकार को अतिक्रमण करने वालों पर कोई कार्रवाई न करने पर फटकार लगाई। पीठ ने कहा, “आखिर सभ्य समाज कैसे रहेगा अगर इसी तरह रोड की बीच में ऐसे ढाँचे बने तो? आपको समाज में और अतिक्रमणकारियों के खिलाफ एक संदेश देना होगा कि ये सब किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आपको मजबूरी से सड़कों पर उतरना चाहिए और अतिक्रमण करने वालों को वहाँ से हटा चाहिए।”

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार कोर्ट ने दो मजारों के निर्माण के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली सरकार पर नाराजगी व्यक्त की। इनमें एक मजार वजीराबाद रोड के भजनपुरा पर बनी है। दूसरी हसनपुर डिपो पर बनी है। दावा है कि ये दोनों मजारें अवैध हैं। 

अतिक्रमण करके बनाई गई दोनों मजारों के खिलाफ याचिका डालने वाले याचिकाकर्ता एसडी विंडलेश हैं। उन्होंने दलील दी है कि इन मजारों के कारण ट्रैफिक पर असर पड़ता है और इससे नागरिकों को दिक्कत आती है। उन्होंने माँग की है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार इन मजारों को जल्द से जल्द हटाने के निर्देश दिए जाएँ। वहीं दिल्ली सरकार की ओर से पेश वकील गौतम नारायण ने पीठ को सूचित किया कि अवैध संरचनाओं को ध्वस्त करने का मुद्दा पहले ही सुप्रीम कोर्ट के समक्ष विचाराधीन है।

इस सुनवाई के दौरान याचिका में संलग्न तस्वीरों को देख पीठ ने माना कि ये चौंकाने वाली स्थिति है। पीठ ने नोटिस जारी करते हुए कहा, “हम ये नहीं समझ पा रहे हैं कि राज्य मूक दर्शक कैसे हो सकता है और कैसे इस तरह की अवैध चीजों को होने दे सकता है। हमारे विचार में राज्य को ऐसे मामलों में एक स्पष्ट, निश्चित और दृढ़ स्टैंड लेना चाहिए। अतिक्रमणकारियों को संदेश दें कि इस प्रकार का अतिक्रण आप लोगों द्वारा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और जल्द ही अतिक्रमण हटाया जाएगा। इस प्रकार के ढाँचे बनाने वालों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई भी की जाएगी।”

कार्ति चिदंबरम के करीबी को CBI ने किया गिरफ्तार, घूस लेकर 250 चीनी नागरिकों को भारत में घुसाने का मामला

केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) ने बुधवार (18 मई 2022) को वीजा भ्रष्टाचार मामले में कॉन्ग्रेस नेता पी. चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम (Karti Chidambaram) के करीबी एम भास्कर रमन को गिरफ्तार किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सीबीआई टीम ने देर रात पूछताछ के बाद एस भास्कर रमन (S Bhaskar Raman) को गिरफ्तार किया है। इससे पहले सीबीआई ने मंगलवार (17 मई 2022) को कार्ति चिदंबरम से जुड़े 10 ठिकानों पर छापेमारी की थी। सीबीआई के मुताबिक, यह मामला 50 लाख रुपए की घूस लेकर 250 चीनी नागरिकों का वीजा बनवाने से जुड़ा हुआ है।

इस मामले में कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता व पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम पर मंगलवार को FIR दर्ज करने के बाद सीबीआई की टीम ने दिल्ली और चेन्नई समेत देश के कई शहरों में 10 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की थी। सीबीआई का दावा है कि 50 लाख रुपए की घूस लेकर कार्ति ने 250 चीनी नागिरकों को भारत का वीजा दिलाने में मदद की थी। ये सारे चीनी पंजाब में चल रहे एक प्रोजेक्ट के लिए भारत आए थे।

मालूम हो कि प्रोजेक्ट के लिए घूस देकर चीनी मजदूरों का भारत में वीजा लगवाने का मामला गृह मंत्रालय के तहत आता है। ऐसे में आने वाले समय में गृह मंत्रालय के तत्कालीन अधिकारी भी जाँच के दायरे में आ सकते हैं। इस बीच कार्ति ने कल ट्वीट किया था, “यह (सीबीआई की कार्रवाई) कितनी बार हुई है, मैं गिनती भी भूल गया हूँ। इसका एक रिकॉर्ड होना चाहिए।”

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सीबीआई ने यह भी आरोप लगाया है कि बिजली कंपनी के प्रतिनिधि मखारिया ने कार्ति से अपने करीबी सहयोगी भास्कर रमन के जरिए संपर्क किया था। अधिकारियों ने कहा कि मखारिया ने कथित तौर पर गृह मंत्रालय को एक पत्र सौंपा था, जिसमें इस कंपनी को आवंटित परियोजना वीजा के दोबारा उपयोग करने के लिए मंजूरी माँगी गई थी, जिसे एक महीने के भीतर मंजूरी भी दे दी गई थी। बताया जा रहा है कि भास्कर रमन के माध्यम से कथित तौर पर 50 लाख रुपए की रिश्वत माँगी गई थी, जिसका भुगतान मनसा स्थित उक्त निजी कंपनी (तलवंडी साबो) ने किया था।

गौरतलब है कि कार्ति चिदंबरम और उनके पिता पी चिदंबरम के खिलाफ आईएनएक्स मीडिया केस में पहले ही जाँच एजेंसी सीबीआई और ईडी अपने चार्जशीट दाखिल कर चुकी हैं। एजेंसियों का दावा है कि जब पी चिदंबरम वित्त मंत्री थे तब INX मीडिया को विदेशी निवेश हासिल करने की मंजूरी मिली थी। इसके अलावा एयरसेल मैक्सिस डील में भी बेटे और पिता पर चार्जशीट फाइल हुई है। इस मामले में भी उनके ऊपर घूस लेकर विदेशी निवेश की मंजूरी देने का आरोप है। साल 2019 में इन्हीं आरोपों के चलते पूर्व वित्त मंत्री 21 अगस्त 2019 को अरेस्ट भी किया गया था, जिसके बाद उन्हें 106 दिन जेल में गुजारने पड़े थे और 4 दिसंबर को जाकर उन्हें जमानत मिली। इस बीच उनके दिन तिहाड़ में बीते थे।  

हमको पढ़ने के लिए हिम्मत दीजिए… नीतीश हैरान, लालू के बेटे की बोलती बंद: कौन है 11 साल का सोनू, जिससे मिलने गाँव पहुँच गए सुशील मोदी

बिहार का 11 साल का सोनू इन दिनों सोशल मीडिया में चर्चा में है। वह नालंदा जिले के नीमा कौल गाँव का रहने वाला है। वह पढ़-लिखकर आईएएस अधिकारी बनना चाहता है। उसकी बेबाकी ने राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को हैरान कर दिया। उसने अपने जवाब से पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव की बोलती ऐसे बंद की कि उन्हें फोट काटना पड़ा। उसके हौसले ने पूर्व उप मुख्यमंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार मोदी को गाँव तक आने को मजबूर कर दिया।

वायरल वीडियो में सोनू बेबाक अंदाज में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) से बेहतर शिक्षा के लिए गुहार लगाते हुए नजर आ रहा है। हाल ही में एक कार्यक्रम में पहुँचे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जब लोगों से मिल रहे थे, इसी दौरान सोनू भीड़ से निकलकर मुख्यमंत्री से कहता है, सुनिए न सर। नीतीश कुमार से हाथ जोड़कर सोनू आगे कहता है, “प्रणाम सर। सर हमको पढ़ने के लिए हिम्मत दीजिए। हमारे अभिभावक हमें पढ़ाना नहीं चाहते हैं। मेरे पिता सारा पैसा शराब पर उड़ा देते हैं।”

इसके बाद बच्चे ने वहाँ मौजूद मीडियाकर्मियों से कहा, “हमें अच्छी शिक्षा चाहिए। मेरे पापा शराब पीते हैं, वो घर का सारा पैसा इसमें उड़ा देते हैं। मैं बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर जो भी पैसा लाता हूँ, वो सब भी वही ले लेते हैं।” सोनू की पढ़ाई के प्रति दिलचस्पी को इससे भी समझा जा सकता है कि वह गाँव में ही अपने हमउम्र बच्चे को पढ़ाता है। वीडियो वायरल होने के बाद बच्चे के साहस और पढ़ाई के लिए उसकी लगन की तारीफ हो रही है। हर कोई इस बच्चे के बारे में जानना चाहता है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सोनू के वीडियो को देखने के बाद कई लोग उसकी मदद के लिए सामने आ रहे हैं। ग्रामीण बताते हैं कि बचपन से ही सोनू तेज तर्रार है। उसके पिता दूध बेचने का काम करते हैं। माता लीला देवी निरक्षर हैं। बीजेपी नेता सुशील मोदी ने गाँव नीमा कौल जाकर सोनू से मुलाकात की। बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री ने सोनू को हर संभव मदद देने का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा, “सोनू का नवोदय विद्यालय में नामांकन होगा और मैं मैट्रिक तक प्रति माह 2 हजार रुपए उसके खाते में जमा कराऊँगा।”

कौन है ये बच्चा

सोनू क्लास 6 में पढ़ता है। पढ़-लिखकर IAS बनना चाहता है। हमउम्र बच्चों को ट्यूशन भी पढ़ाता है। ट्यूशन से मिले पैसे से उसने एंड्रायड फोन खरीद लिया है, जिससे वह यूट्यूब पर जानकारी हासिल कर सके। उनका कहना है कि सरकारी स्कूल के शिक्षकों में योग्यता की कमी है। उन्हें जानकारी कम है। इसलिए सरकारी स्कूल के बच्चों को पढ़ाता हूँ। सोनू यह भी बताता है कि उसके पास 30 बच्चे ट्यूशन के लिए आते हैं, जिनसे वह प्रति माह के हिसाब से 100 रुपए लेता है। इससे उन बच्चों की पढ़ाई हो जा रही है और मुझे भी आर्थिक मदद मिल जाती है। वीडियो वायरल होने के बाद तेजप्रताप यादव ने वीडियो कॉल पर सोनू से बात की। उन्होंने सोनू से कहा कि IAS बनना तो मेरे अंडर काम करना। इस पर सोनू ने उनसे कहा, “IAS बनूँगा, पर किसी के अंडर नहीं रहूँगा।” यह सुनते ही तेज प्रताप ने फोन काट दिया।

UP में नए मदरसों को अब नहीं मिलेगा अनुदान: योगी सरकार का बड़ा फैसला, अखिलेश यादव के जमाने में खोल दिया गया था खजाना

उत्तर प्रदेश में अब नए मदरसों को किसी तरह का अनुदान नहीं दिया जाएगा। ये फैसला योगी सरकार की कैबिनेट में हुआ है। योगी सरकार ने इस संबंध में प्रस्ताव पारित करते हुए अखिलेश सरकार की पुरानी नीति को खत्म कर दिया। नए प्रस्ताव के बाद कोर्ट का दरवाजा खटखटाकर भी मदरसों को कोई राहत नहीं मिलेगी।

बता दें कि उत्तर प्रदेश में कुल 16461 मदरसे हैं। इनमें से 559 मदरसों को इस समय सरकारी अनुदान दिया जा रहा है। इसी अनुदान से इन मदरसों के शिक्षकों, गैर शिक्षण कर्मचारियों को वेतन मिलता है। मंगलवार (17 मई 2022) को हुई कैबिनेट बैठक में अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने इस प्रस्ताव को पास किया कि आगे से किसी भी नए मदरसे को अनुदान नहीं मिलेगा। पिछले वर्ष भी योगी सरकार की ओर से किसी नए मदरसे को अनुदान नहीं दिया गया था।

जानकारी के अनुसार, अखिलेश सरकार द्वारा साल 2016 में मदरसों को अनुदान देने के लिए नीति लागू की गई थी, जिसे योगी सरकार ने खत्म किया है। इस नीति के तहत साल 2003 तक मान्यता पाने वाले 146 मदरसों को सपा सरकार ने अनुदान देने का निर्णय लिया था। हालाँकि योगी सरकार के पहले कार्यकाल में किसी मदरसे को ये अनुदान नहीं मिला। इसके बाद सपा सरकार की नीति का हवाला देते हुए मदरसा प्रबंधक हाई कोर्ट गए और बात रखी कि वे हर मानक को पूरा कर रहे हैं तो उन्हें अनुदान क्यों नहीं मिल रहा।

हाईकोर्ट ने मामले में सुनवाई करते हुए मऊ के एक मदरसे मामले में सरकार को अनुदान देने पर विचार करने को कहा। सरकार ने जब इस मदरसे के मानकों को जाँचा तो पता चला कि उसकी तो मान्यता ही फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मिली थी। अब अन्य मदरसे को अनुदान देने वाले मामलों में सरकार मऊ वाले केस से सीख ले रही है और जो दावा कर रहे हैं कि वो अनुदान के लिए हर मानक पूरा करते हैं उसकी पहले जाँच करने को कह रही है।

उल्लेखनीय है कि अभी हाल में उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने राज्य के मदरसों को लेकर एक और बड़ा फैसला लिया था। इसमें कहा गया था कि राज्य के सभी अनुदानित और गैर अनुदानित मदरसों में कक्षा से पहले राष्ट्रगान अनिवार्य होगा। ये फैसला सरकार ने मदरसा छात्रों में देशभक्ति बढ़ाने के लिहाज से लिया था।