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हिमाचल विधानसभा भवन के गेट पर लहराए गए खालिस्तान के झंडे, CM जयराम ठाकुर बोले- जहाँ भी होंगे, खोज निकालेंगे

खालिस्तान समर्थकों (Khalistan) को हौसले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। अब हिमाचल प्रदेश की शीतकालीन राजधानी धर्मशाला के विधानसभा परिसर के गेट पर खालिस्तानियों ने झंडे लगा दिए। रविवार (8 मई 2022) की सुबह जब विधानसभा की मेन गेट पर खालिस्तानी झंडे लगे और दीवारों पर खालिस्तान लिखा मिला तो लोगों के कान खड़े हो गए। सूचना मिलते ही पुलिस ने झंडे उतरवा दिए और लिखा हुआ खालिस्तान को पेंट करा दिया।

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर (Himachal Pradesh CM Jairam Thakur) ने इस घटना पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि रात के अंधेरे में आने वालों में हिम्मत है तो वे दिन में आकर दिखाएँ। इस घटना में शामिल लोगों की पहचान के लिए पुलिस इलाके की CCTV फुटेज खंगाल रही है।

उन्होंने कहा, “यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। इस प्रकार के घटना को अंजाम देने वाले लोग नाकाम होंगे। मामले में FIR करने के बाद हमने जाँच के आदेश दे दिए हैं। धर्मशाला में हुई घटना के दोषी जहाँ भी होंगे उन्हें शीघ्र पकड़ा जाएगा। उन लोगों का यह कायरतापूर्ण दौर अब अधिक नहीं चलेगा। निश्चित तौर पर इस घटना को अंजाम देने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।”

बता दें कि खालिस्तान समर्थकों ने शिमला के विधानसभा परिसर पर खालिस्तान का झंडा फहराने की धमकी दी थी। हालाँकि, इसमें वे सफल नहीं हो पाए थे, लेकिन धर्मशाला के तपोवन स्थित विधानसभा परिसर में उन्होंने झंडे फहरा दिए।

बता दें कि मार्च 2022 में जयराम ठाकुर सरकार ने खालिस्तानी आतंकी भिंडरावाले की पोस्टर वाली गाड़ियों को राज्य में घुसने से रोकने का आदेश जारी किया था। सीएम जयराम ठाकुर ने स्पष्ट कहा थाकि हम ‘निशान साहिब’ (सिख ध्वज) का पूरा सम्मान करते हैं, लेकिन भिंडरावाले को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

दरअसल, पंजाब से आने वाली कई गाड़ियों पर भिंडरावाले की तस्वीरों वाले बैनर लगे हुए थे, जिस पर ज्वालामुखी और मंडी जिलों के लोगों ने आपत्ति जताई थी। ऐसे कई सारे वीडियो सामने आए, जिनमें स्थानीय लोग इन झंडों को हटाने की माँग करते दिखे। इसके बाद सरकार ने ये एक्शन ले लिया।

ट्विटर यूजर अमन बाली ने भिंडरावाले का झंडा लिए एक सिख व्यक्ति का वीडियो शेयर किया, जिसमें कुछ भिंडरावाले के पोस्टर के इस्तेमाल पर आपत्ति जता रहे थे। अमन बाली ने इसे गुंडागर्दी करार देते हुए खालिस्तानी आतंकी को ‘संत जी’ कहा।

इसके पहले अगस्त 2021 में SFJ आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू (Gurpatwant Singh Pannu) ने हिमाचल प्रदेश के सीएम जयराम ठाकुर को धमकी दी थी कि वह उन्हें 15 अगस्त को तिरंगा नहीं फहराने देगा। आडियो संदेश में ये भी कहा गया था कि पंजाब के बाद वे हिमाचल में भी कब्जा करेंगे, क्योंकि हिमाचल का कुछ क्षेत्र पहले पंजाब का हिस्सा था।

ज्ञानवापी विवादित ढाँचे में मिले स्वस्तिक के 2 निशान, वीडियो सर्वे फिर से शुरू… फिर हिन्दू पक्ष ने क्यों किया मुकदमा वापस लेने का ऐलान?

वाराणसी के ज्ञानवापी विवादित ढाँचे में अदालती सर्वे के दौरान बड़ा खुलासा हुआ है। वीडियोग्राफ़ी के दौरान दो स्वस्तिक के निशान मिले हैं। दोनों स्वस्तिक के निशान काफी प्राचीन हैं, लेकिन उन्हें आसानी से समझा जा सकता है। जिस विवादित ढाँचे को ‘मस्जिद’ कहा जाता है, उसके बाहर ही उन्हें पाया गया। रविवार (8 मई, 2022) को सर्वे का काम पुनः शुरू कर दिया गया। इससे पिछले दिन मुस्लिम भीड़ के विरोध के कारण इसे रोकना पड़ा था।

दिल्ली की रहने वाली राखी सिंह, लक्ष्मी देवी, सीता साहू एवं अन्य श्रद्धालुओं की याचिका के बाद ये सर्वेक्षण का कार्य किया जा रहा है। ज्ञानवापी विवादित ढाँचे की दीवार पर ही हिन्दू देवी-देवताओं की प्रतिमाएँ स्थित हैं, जिनकी पूजा के लिए न्यायालय से अनुमति माँगी गई है। सर्वेक्षण के लिए आई टीम को मुस्लिम समुदाय के 100 लोगों की भीड़ ने रोक लिया था। लेकिन, आज पुलिस-प्रशासन की मौजूदगी में ये कार्य फिर से शुरू हो गया है।

बता दें कि 1991 में ही कोर्ट में याचिका डाल कर माँग की गई थी कि विवादित ढाँचे की जमीन हिन्दुओं को वापस की जाए। याचिका में कहा गया था कि ज्ञानवापी मामले में ‘प्रार्थना स्थल कानून 1991’ लागू नहीं होता, जो ऐसे धार्मिक स्थलों पर यथास्थिति की बात करता है। कारण बताया गया कि मस्जिद अवशेषों के ऊपर बनाया गया है, जो हिन्दू मंदिरों के हैं।मुस्लिम पक्ष इसके खिलाफ हाईकोर्ट गया। उधर अब ‘वैदिक सनातन संघ’ ने मुकदमा वापस लेने की बात कर दी है।

अगस्त 2021 में पाँच महिलाओं की ओर के दाखिल याचिका के सम्बन्ध में संगठन के अध्यक्ष जितेंद्र सिंह बिसेन के हवाले से ‘दैनिक भास्कर’ ने लिखा है कि सोमवार को याचिका वापस ले ली जाएगी। उन्होंने कहा कि कुछ निर्णय अचानक से लेने पड़ जाते हैं, जो समझ से परे होते हैं। उन्होंने इस पर अधिक कुछ कहने से इनकार कर दिया। संगठन पहले ही अपनी विधि सलाहकार समिति को भंग कर चुका है। वहीं याचिकाकर्ताओं में से एक मंजू सिंह ने कहा कि राखी के अलावा बाकी महिलाएँ वाराणसी से हैं, ऐसे में चर्चा चल रही है कि मुकदमा वापस लिया जाएगा या नहीं।

वीडियोग्राफ़ी के काम में बाधा डालने पर संत समाज भी नाराज़ है। ‘अखिल भारतीय संत समिति’ के महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि वाराणसी में जिन आक्रांताओं ने मंदिर तोड़े थे, उनके वंशजों को आज संविधान और देश के कानून पर भरोसा नहीं है। उन्होंने इस अराजकता को इसका उदाहरण बताया। उन्होंने पूछा कि आखिर कब तक सर्वे रोकोगे? उन्होंने कहा कि मस्जिद कमिटी अलग-अलग तरह की बातें कर रही है। उन्होंने मुस्लिम भीड़ के जुटान को एक सुनियोजित षड्यंत्र करार दिया।

दिल्ली पुलिस (कुछ दिन पहले) – हिन्दू युवा वाहिनी सम्मेलन में सब कुछ सही, दिल्ली पुलिस (अब) – FIR दर्ज, हिन्दू राष्ट्र की शपथ का मामला

सुदर्शन न्यूज़ के CMD सुरेश चव्हाणके पर दिल्ली पुलिस ने FIR दर्ज की है। हिन्दू युवा वाहिनी ने 19 दिसंबर 2021 को दिल्ली के गोविंदपुरी में एक सम्मेलन का आयोजन किया था। इस सम्मेलन में सुरेश चव्हाणके ने जो कुछ बोला था, इसी को दिल्ली पुलिस ने आधार बनाया है। 2 धर्मों के बीच नफरत फैलाने और धार्मिक भावनाओं को आहत करने की धाराओं में FIR दर्ज किया गया है।

दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट को यह जानकारी शनिवार (7 मई 2022) को दी है। इस से पहले 22 अप्रैल 2022 को दिल्ली पुलिस ने इस मामले में कुछ भी गलत नहीं होने की रिपोर्ट दाखिल की थी। उस रिपोर्ट पर जस्टिस एएम खानविलकर ने पुलिस को फिर से विचार करने के लिए कहा था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक इस केस की अगली सुनवाई 9 मई 2022 (सोमवार) को होगी। दिल्ली पुलिस ने यह FIR 153-A (2 समुदायों के बीच द्वेष फैलाना), 295-A (किसी की धार्मिक भावनाओं को आहत करना), 298 (शब्दों से किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचाना) और 34 (अपराध की मंशा रखना) IPC के तहत केस दर्ज किया है। पुलिस के मुताबिक मामले की नियमानुसार जाँच करवाई जा रही है।

दिल्ली पुलिस की DCP ईशा पांडेय ने 22 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट में हलफ़नामा दाखिल कर के विवेचक के हवाले से बताया था कि उस केस में कोई भी गलतबयानी नहीं हुई थी। कहा गया था कि हिन्दू युवा वाहिनी सम्मेलन के आयोजकों ने अपने धर्म को मजबूत करने पर बल दिया था। इस रिपोर्ट पर लेकिन सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश ने आपत्ति जताई थी।

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज से सवाल किया था – “क्या पुलिस का जवाब स्वीकार करने योग्य है?” इस सवाल के बाद ही नटराज ने फिर से जाँच करवाए जाने का जवाब दिया था।

हिन्दू युवा वाहिनी सम्मेलन दिल्ली के गोविंदपुरी स्थित बनारसीदास ऑडिटोरियम में आयोजित हुई थी। यहीं पर जो बोला गया था, उस पर हेट स्पीच के आरोप लगे थे। बताया गया था कि उस आयोजन में हिन्दू राष्ट्र की शपथ ली गई थी। आयोजन में मुख्य अतिथि सुदर्शन न्यूज़ के CMD सुरेश चव्हाणके थे। यद्दपि सुरेश चव्हाणके ने अपने बयान में कुछ भी गलत न होने और हिन्दू राष्ट्र की शपथ को छत्रपति शिवाजी महाराज की परम्परा बताया था।

सुप्रीम कोर्ट इस मामले में पत्रकार कुरबान अली और वरिष्ठ अधिवक्ता अंजना प्रकाश (पटना हाईकोर्ट की पूर्व न्यायाधीश) द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है। इस संबंध में पुलिस में शिकायत इलियास और फैसल अहमद ने की थी। उन्होंने बताया था कि गोविंदपुरी मेट्रो स्टेशन के पास बनारसीदास चांदीवाला सभागार में हिंदू युवा वाहिनी द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम से इलाके में दहशत फैल गई थी।

ओडिशा में मुस्लिम आरोपित ने ढाई साल के बेटे के सामने हिंदू महिला का 79 दिनों तक किया रेप: मीडिया ने ‘आलिम/फकीर’ के बजाय ‘तांत्रिक’ लिख किया गुमराह

पिछले दिनों ओडिशा के बालासोर में पारिवारिक कलह दूर करने लिए एक हिंदू परिवार झाड़-फूँक करने वाले एक शख्स के पास पहुँचा। उसने परिवार की बहू को अपने पास रखकर 79 दिनों तक रेप किया। महिला के साथ उसका 2.5 साल का बच्चा भी था। इस मामले में पुलिस ने आरोपित एसके शोरफ को गिरफ्तार कर लिया है। लेकिन, देश की मीडिया इस खबर में आरोपित को ‘तांत्रिक’ बताकर आरोपित की पहचान को छिपाने का प्रयास कर रही है।

मीडिया में शब्दों के खेल से नैरेटिव गढ़ने का काम होता है। किसी व्यक्ति के नाम से सरनेम हटाकर, नाम छुपाकर या गलत विशेषण जोड़कर आदि कई तरह से अक्सर लोगों को गुमराह किया जाता है। दरअसल, इस खबर में आरोपित एक मुस्लिम है, लेकिन उसके लिए ‘मौलवी या फकीर’ का इस्तेमाल ना करके ‘तांत्रिक’ शब्द का इस्तेमाल किया गया है। एक पाठक इस खबर को आमतौर पर ‘तंत्र साधना’ करने वाले किसी किया गया कुकर्म समझेगा।

तांत्रिक से मतलब तंत्र विद्या अभ्यास करने से जुड़ा है। ये मुख्य रूप से हिन्दू धर्म से जुड़ा हुआ है। मीडिया द्वारा की गई रिपोर्ट से ये संदेश जा रहा है कि अपराध हिन्दू व्यक्ति द्वारा किया गया था। जबकि ये अपराध मुस्लिम आलिम द्वारा किया गया था। 

ओडिशा के स्थानीय अखबार ने अपने प्रिंट और डिजिटल, दोनों माध्यमों में स्पष्ट लिखा है कि आरोपित मुस्लिम है और उसी ने परिवार को झाँसे में लेकर महिला को अपने साथ जबरन रखा और उसके बच्चे के सामने लगातार दुष्कर्म करता रहा।

ओडिशा पोस्ट ने अपने डिजिटल माध्यम में स्पष्ट रूप से आरोपित को मुस्लिम बताया है।

इस खबर को मीडिया संस्थानों ने ‘तांत्रिक’ लिखकर हिंदू स्पिन देने की कोशिश की है। NDTV, India TV, AAJTAK, ZEE NEWS आदि अधिकांश मीडिया संस्थानों ने आरोपित के लिए ‘तांत्रिक’ शब्द का इस्तेमाल किया है। एनडीटीवी ने अपनी खबर में उस फकीर का नाम ही गायब कर दिया है। इसके साथ ही उसने आरोपित के लिए तांत्रिक शब्द का इस्तेमाल किया है।

टाइम्स नाऊ हिंदी ने भी खबर का हेडलाइन दिया है, ‘Trantic Raped Woman: ओडिशा में तांत्रिक ने महिला से उसके बेटे के सामने 79 दिन तक किया रेप।’

इंडिया टीवी ने अपनी खबर में तांत्रिका शब्द का प्रयोग किया है।

हिंदी के अखबार अमर उजाला ने भी अपने डिजिटल अंक में तांत्रिक का इस्तेमाल किया है।

ये पहली बार नहीं है कि मीडिया संस्थानों ने इस तरह का काम किया हो। इस तरह की खबरों पर वे अक्सर इस तरह के कारनामे करते रहते हैं। साल 2019 में पश्चिम बंगाल के नदिया जिले में मुस्लिम आलिम द्वारा काले जादू का उपयोग करके किए गए इलाज में 10 साल के बच्चे की मौत हो गई थी। मगर मीडिया गिरोह ने इस अपराध को हिन्दू द्वारा किए गए अपराध के रूप में फैलाया और तांत्रिक शब्द का इस्तेमाल किया था।

इससे पहले भी इस तरह के आलिमों को बचाने की काफी कोशिश की जा चुकी है। द हिन्दू की एक रिपोर्ट के अनुसार एक महिला ने अजमेर में एक “तांत्रिक” पर दरगाह में नमाज़ अदा करने के बहाने ले जाने के बाद उसके साथ बलात्कार करने का आरोप लगाया था। उसी महीने, टाइम्स ऑफ इंडिया ने एक लेख प्रकाशित किया था, जिसका शीर्षक था, “तांत्रिक को बलात्कार और जबरन वसूली के लिए 10 साल की जेल” इसमें आरोपित का नाम वारसी था।

दैनिक जागरण ने किसी कारण से एक उत्पीड़न मामले में आरोपित को हेडलाइन में  “तांत्रिक सूफी बाबा” के रूप में प्रदर्शित किया। हालाँकि, उसके कंटेंट में आरोपित का नाम आफताब बताया गया था। इसी तरह Hindi News18 ने अपने लेख में लिखा, “भूत भगाने के बहाने नाबालिग के साथ दुष्कर्म करने के आरोप में तांत्रिक गिरफ्तार।” बाद में तांत्रिक की पहचान हाफिज साजिद के रूप में हुई थी।

विवादित ज्ञानवापी मस्जिद कमिटी ने एडवोकेट कमिश्नर बदलने के लिए कोर्ट में दी याचिका, मुस्लिम पक्ष के विरोध के बाद सर्वेक्षण 9 मई तक रूका

उत्तर प्रदेश के वाराणसी (Varanasi, Uttar Pradesh) में स्थित विवादित ज्ञानवापी मस्जिद (Gyanvapi Masjid) परिसर में माँ श्रृंगार गौरी स्थल की वीडियोग्राफी एवं सर्वेक्षण का काम शनिवार (7 मई 2022) को विरोध के बाद नहीं हो सका। विवादित ढाँचे से संबंधित अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद समिति ने शनिवार को स्थानीय अदालत में याचिका देकर एडवोकेट कमिश्नर अजय कुमार मिश्रा पर ‘पक्षपातपूर्ण’ होने का आरोप लगाते हुए उन्हें बदलने की माँग की।

मस्जिद कमिटी के अधिवक्ताओं ने यह कहते हुए अंदर जाने से रोक दिया, कोर्ट के आदेश में मस्जिद के अंदर वीडियग्राफी का आदेश नहीं है। विरोध के बाद सर्वे का काम अगली सुनवाई 9 मई तक के लिए टाल दी गई है।

हिंदू याचिकाकर्ताओं का प्रतिनिधित्व करने वाले अधिवक्ता हरि शंकर जैन ने बताया कि वाराणसी के सिविल जज (सीनियर डिवीजन) रवि कुमार दिवाकर की अदालत में एक आवेदन दायर किया गया है, जिसमें मस्जिद का प्रतिनिधित्व करने वाले वकीलों द्वारा एडवोकेट कमिश्नर को बदलने का अनुरोध किया गया है। जैन ने कहा, “सोमवार को मामले की सुनवाई अदालत द्वारा की जाएगी और हम मुस्लिम पक्ष द्वारा उत्पन्न की रही बाधाओं पर अपनी आपत्ति उठाएँगे”

वहीँ अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद कमेटी के एक अधिकारी ने कहा, “जब हमारी आपत्ति कोर्ट में एडवोकेट कमिश्नर को बदलने की माँग है तो वही व्यक्ति उस आयोग का नेतृत्व कैसे कर सकता है। अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद कमेटी का प्रतिनिधित्व कर रहे एडवोकेट अभय नाथ यादव ने कहा, “हमने एडवोकेट कमिश्नर को बदलने के लिए एक आवेदन दायर किया है।”

बता दें कि विवादित ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में सर्वे का काम 6 मई से हो रहा है। बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स को भी सुरक्षा व्यवस्था के लिए लगाया गया था। जब 7 मई को जब सर्वे करने वाली टीम वहाँ पहुँची, तब मुस्लिम समुदाय के लोगों ने दरवाजे पर खड़े होकर जाम लगा दिया, जिससे एडवोकेट कमिश्नर अंदर जा ही नहीं पाए। माहौल बिगाड़ने की साजिश हुई और शाम के 5 बजे बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग वहाँ पर पहुँचने लगे।

नारेबाजी और उपद्रव कर रहे लोगों को पुलिस ने वहाँ से खदेड़ा। वहीं अब्दुल कलाम नाम के एक उपद्रवी को यूपी पुलिस ने हिरासत में भी लिया है। उसने बहाना बनाया कि उसे लगा कि नमाज के लिए भीड़ इकट्ठी हुई थी। साथ ही उसने माफ़ी भी माँगी। मुस्लिम पक्ष के लोग बैरिकेडिंग के भीतर घुस गए।

ज्ञानवापी-शृंगार गौरी का विवाद पिछले साल शुरू हुआ था। पाँच हिंदू महिलाओं ने कोर्ट में याचिका देकर मस्जिद के अंदर स्थित माता श्रृंगार गौरी तथा अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमा की पूजा करने की इजाजत माँगी थी। हिंदुओं का दावा है कि विवादित मस्जिद प्लॉट संख्या 9130 पर स्थित है और इसके अंदर कई देवी-देवताओं के विग्रह हैं। उनका यह भी दावा है कि तहखाने में शिवलिंग भी है, जिसकी साल 1990 तक पूजा की जाती थी।

Lock Upp का विजेता बना मुनव्वर फारूकी: खुद का यौन शोषण, छोड़ चुके बीवी-बच्चे और अम्मी के तेजाब पीने की कहानी… जानें पूरा सफर

विवादित कॉमेडियन मुनव्वर फारुकी ने रियलिटी शो लॉक अप (Lock Upp) का पहला भाग जीत लिया है। इस जीत के बाद उन्हें 20 लाख रुपए कैश के साथ एक मारूति अर्टिगा कार इनाम में मिली। साथ ही उन्हें विदेश में इटली की यात्रा का भी मौका दिया गया। फाइनल में उन्होंने बॉलीवुड अभिनेत्री पायल रोहतगी को हराया। यह घोषणा 7 मई 2022 (शनिवार) को देर रात हुई।

जीत के बाद मुनव्वर फारुकी (Munawar Faruqui) ने बाहर निकल कर शेर सुनाया। उन्होंने कहा, “उठा तूफ़ान जो दस्तक दे कर आया, अकेला था लगा लश्कर ले कर आया। पूछेंगे कि किस की है ये लोहे जैसी लेगसी, कहना वो डोंगरी वाला आग ले कर आया।”

मीडिया से बात करते हुए फारुकी ने कहा, “बहुत ख़ुशी हो रही है जीत के बाद। बहुत मेहनत की थी मैंने। लोगों की दुआएँ मेरे साथ थीं। लॉक अप में हर पल हसीन था। यहाँ हम रोए, हँसे और नाचे-गाए। ये जगह छोड़ने में बुरा लगा रहा। पायल मजबूत प्रतिद्वंद्वी थीं। लेकिन मैं सोचंता था कि मेरा समाज के लिए किया गया काम और लोगों को दिया गया मज़ा जीतने के लिए पायल रोहतगी से बेहतर है। हालाँकि मैं नर्वस था।”

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक लॉकअप OTT प्लेटफॉर्म का सबसे विवादित रियलिटी शो माना जाता है। इस शो में मुनव्वर फारुकी ने अपनी पर्नसल जिंदगी से जुड़े कई खुलासे किए थे। माना जा रहा है कि मुनव्वर ने इन खुलासों के साथ अपनी कथित हिन्दू विरोधी छवि को सुधारने की कोशिश की। इस दौरान उन्होंने बचपन में अपने साथ यौन शोषण होने और अपनी माँ के तेजाब पीने जैसे खुलासे किए।

मुनव्वर फारुकी के मुताबिक उनके रिश्तेदारों ने ही उनका 6 साल की उम्र से 11 साल का होने तक यौन शोषण किया था। इसी के साथ बचपन में उनकी अम्मी ने तेजाब पी लिया था और वे उसके कुछ दिन पहले से कुछ खा नहीं रही थीं। फारूकी ने बताया था कि उनकी माँ अपनी शादी में कभी खुश नहीं थीं। उन्हें पीटा जाता था, लड़ाई होती थी।

गौरतलब है कि मुनव्वर फारुकी अपनी असल जिंदगी में अपनी बीवी और बच्चों से अलग रहते हैं। उनका केस कोर्ट में चल रहा है। लेकिन ‘लॉक अप’ में अंजली और सायशा से मिले धोखे से मुनव्वर का दिल इस कदर टूट गया था कि वह शो में प्रिंस के सामने रोने लगा था। जिस तरह से लॉकअप से मुनव्वर फारूकी की खबरों को मीडिया में प्रसारित किया गया, उससे शो निर्माताओं की नीयत पर सवाल उठे थे।

फारुकी के कॉमेडी पंच, खेल स्ट्रैटेजी, सादगी को बाकियों से हटकर दिखाया गया। जितना प्रमोशन फारूकी का सोशल मीडिया पर हुआ, उतना शायद ही 1 मिलियन फॉलोवर वाली अंजलि अरोड़ा या टीवी इंडस्ट्री के मशहूर करणवीर बोहरा जैसे अन्य प्रतिभागियों का हुआ।

PoJK मतलब आजादी के बाद भारत की बलिदान भूमि: परिसीमन आयोग की सिफारिश सराहनीय, अब हो ‘घर वापसी’ का प्रयास

आज़ादी का अमृत महोत्सव मनाते हुए जम्मू-कश्मीर के अपने उन भाइयों और बहनों को याद करना आवश्यक है जोकि पाकिस्तान के जुल्मोसितम के शिकार हुए। उनके वंशज आज तक भी शोषण-उत्पीड़न सहने और दर-दर की ठोकरें खाने को अभिशप्त हैं। पाक अधिक्रांत जम्मू-कश्मीर (PoJK: Pakistan-occupied Jammu and Kashmir, पीओजेके) के विस्थापितों और वहाँ के वासियों के साथ न्याय सुनिश्चित करना राष्ट्रीय कर्तव्य है।

पीओजेके स्वातंत्र्योत्तर भारत की बलिदान भूमि है। जम्मू में 8 मई, 2022 को जम्मू-कश्मीर पीपुल्स फोरम द्वारा आयोजित ‘श्रद्धांजलि व पुण्यभूमि स्मरण सभा’ ऐसी ही एक कोशिश है। इस सभा में शामिल होकर पाक अधिक्रांत जम्मू-कश्मीर के हजारों विस्थापित अपने पूर्वजों के त्याग और बलिदान का स्मरण करेंगे। यह अपने जीवन-मूल्यों, धर्म-संस्कृति और राष्ट्रभाव का परित्याग न करने वाले भारत माँ के उन असंख्य सपूतों के प्रति श्रद्धांजलि और उनके वंशजों के साथ खड़े होने का अवसर है। साथ ही, अपनी ‘घर वापसी’ और अपने अधिकारों की आवाज़ भी मुखर करेंगे।

इस सभा का उद्देश्य पाकिस्तान, चीन और दुनिया को यह सन्देश देना है कि प्रत्येक भारतीय अपने पीओजेके के उत्पीड़ित और विस्थापित भाइयों-बहनों के बलिदान और दुःख-दर्द से अनजान नहीं है। उनके कष्ट निवारण और राष्ट्रीय एकता-अखंडता की रक्षा के लिए सम्पूर्ण राष्ट्र एकजुट और संकल्पबद्ध है।

पाक अधिक्रांत जम्मू-कश्मीर के प्रमुख क्षेत्र नीलम, हटियन बाला, मीरपुर, देवा बटाला, भिम्बर, कोटली, बाग़ पुलंदरी, सदनोती, रावलकोट, मुजफ्फराबाद, पुंछ, गिलगित और बाल्टिस्तान आदि हैं। बाद की दो लड़ाइयों (1965 और 1971) में पाकिस्तान ने कूटनीतिक चालाकी से छम्ब सेक्टर को भी हथिया लिया। माँ शारदा पीठ, माँ मंगला देवी मंदिर और गुरू हरगोविंद सिंह गुरुद्वारा जैसे अनेक पवित्र स्थल पाकिस्तान के अवैध कब्जे में हैं।

पीओजेके वासियों की भाषा, खान-पान, वेशभूषा और संस्कृति-प्रकृति पाकिस्तानी से अधिक भारतीय है। यहाँ कश्मीरी, गोजरी, पहाड़ी, हिंदको आदि भाषाएँ बोली जाती हैं। यह क्षेत्र न सिर्फ भू-रणनीतिक दृष्टि से, बल्कि अपने प्राकृतिक संसाधनों और सांस्कृतिक समृद्धि के कारण भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

आज यहाँ शिया मुसलमान बसते हैं। आज़ादी के समय हिन्दू और सिख भी काफी संख्या में रहते थे। जितने जुल्मोसितम गैर-मुस्लिमों अर्थात हिन्दू और सिखों पर हुए, लगभग उतने ही जुल्मोसितम आज शिया मुसलमानों पर हो रहे हैं। उन्हें आज तक भी दोयम दर्जे का मुसलमान और दोयम दर्जे का नागरिक माना जाता है।

अमजद अयूब और डॉ. शब्बीर चौधरी (लन्दन), जमील मकसूद (ब्रुसेल्स), मंसूर अहमद पश्तीन (वजीरिस्तान), आरिफ आजक़िया, हाजी सैय्यद सलमान चिश्ती, जफ़र चौधरी और जावेद राही जैसे हिम्मतवर लोग अलग-अलग मंचों से लगातार पीओजेके के पीड़ितों की आवाज़ मुखर कर रहे हैं।

जम्मू-कश्मीर पीपुल्स फोरम द्वारा आयोजित जनसभा का प्रतीकात्मक ही नहीं, बल्कि रणनीतिक महत्व भी है। इस सभा में अपनी भूमि को वापस पाने और घर वापसी के संकल्प को फलीभूत करने के ठोस उपायों पर चर्चा होनी चाहिए। इन विस्थापितों की कुर्बानियों और कष्टों की ओर अंतरराष्ट्रीय समाज का ध्यान भी आकृष्ट करना चाहिए।

मानवाधिकारों का उल्लंघन, लोकतन्त्र का पददलन, माँ-बहनों का शील-हरण, पाकिस्तानी सेना की पिट्ठू सरकार और शासन-तंत्र द्वारा दमन, पाकिस्तानी सेना की देखरेख में फल-फूल रहे आतंकी संगठन और नशीले पदार्थों की खेती और तस्करी, पाकिस्तान के सिन्धी-पंजाबी मुस्लिम समुदाय को बसा कर किए जा रहे जनसांख्यिकीय परिवर्तन, मंदिरों और गुरुद्वारों को ढहाने, मूर्तियों को क्षतिग्रस्त करने आदि के किस्से पाक अधिक्रांत कश्मीर का रोजनामचा है।

यह सब सह रहे लोगों का अपराध यह है कि वे महाराजा हरिसिंह द्वारा हस्ताक्षरित 26 अक्टूबर, 1947 के अधिमिलन-पत्र के अनुसार भारतीय गणराज्य का हिस्सा होना चाहते हैं। भारत की प्रगति और खुशहाली में शामिल होना चाहते हैं। अमन-चैन और सुख-शांति चाहते हैं, जो ‘एक असफल राष्ट्र’ बन चुके पाकिस्तान में कभी मयस्सर नहीं होगी।

यह ऐतिहासिक अवसर है कि हम भूल-सुधार करते हुए अपने देश के भूले-बिसरे हिस्सों और देशवासियों का ध्यान करें। उनके मान-सम्मान और अधिकारों के लिए कुछ ठोस योजनाएँ बनाएँ। वर्तमान केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर समस्या के समाधान की दिशा में दृढ़ इच्छाशक्ति का परिचय दिया है। उसने पीओजेके विस्थापितों के प्रति पूरी संवेदनशीलता, सहानुभूति और सदाशयता दिखाते हुए 2000 करोड़ रुपए के राहत पैकेज, अन्यान्य सुविधाओं और योजनाओं की शुरुआत की है। लेकिन इस राहत पैकेज में जम्मू-कश्मीर के बाहर बसे विस्थापितों को शामिल न करना अनुचित है।

तत्कालीन जम्मू-कश्मीर सरकार की सांप्रदायिक नीति और उपेक्षापूर्ण रवैये के कारण बहुत से विस्थापितों को अलग-अलग राज्यों में शरण लेनी पड़ी। पीओजेके विस्थापित समिति ने गृहमंत्री अमित शाह को एक ज्ञापन देकर अलग-अलग जगहों पर बसे सभी शरणार्थियों को इन राहत योजनाओं का लाभ देने की माँग भारत सरकार से की है। कश्मीर घाटी के विस्थापितों के लिए भी ऐसे पैकेज और परियोजनाएँ लागू की जा रही हैं। लेकिन इन राहत योजनाओं का दायरा और स्तर बढ़ाए जाने की आवश्यकता है।

नागरिकता (संशोधन) अधिनियम-2019 ऐसी ही एक उल्लेखनीय राहत योजना है। कश्मीर घाटी के विस्थापितों के लिए देश के शिक्षण संस्थानों और सरकारी सेवाओं में प्रवेश हेतु विशेष प्रावधान किए गए हैं। इसके दायरे में पीओजेके विस्थापितों को भी शामिल करने की आवश्यकता है। जिस भारत का नागरिक होने की वजह से उनके पूर्वजों को असहनीय क्रूरता और प्रताड़ना सहनी पड़ी और वे स्वयं आज तक भी मुश्किल हालात में जीने को मजबूर हैं; उस भारत की सरकार और नागरिक समाज को एकजुट होकर उनके साथ खड़े होने और उनके आँसू पोंछने और आश्वस्त करने की जरूरत है।

भारत को कश्मीर घाटी में और पीओजेके के सीमान्त क्षेत्रों में सेना और अर्धसैनिकों बलों की कॉलोनियाँ बसाने की पहल करनी चाहिए। यहाँ बसने और काम-धंधा शुरू करने वाले देशवासियों को बसाने के लिए भूमि अधिगृहीत और विकसित की जानी चाहिए। प्रवासी श्रमिकों और उद्यमियों के लिए सस्ते दाम पर आवासीय और व्यावसायिक भूखंड, आसान ऋण, ब्याज दर में सब्सिडी, शस्त्र लाइसेंस और शस्त्र आदि की उपलब्धता सुनिश्चित करनी चाहिए। ये लोग आतंकवाद से निपटने और खोई हुई भूमि को पाने में सेना और स्थानीय समाज के साथ प्रभावी भूमिका निभा सकेंगे।

दहशतगर्दों के वर्चस्व को समाप्त करने की दिशा में ये उपाय प्रभावी साबित होंगे। आतंकवाद के शिकार निर्दोष नागरिकों को बलिदानी का दर्जा और उनके परिजनों को आर्थिक, सामाजिक और शारीरिक सुरक्षा देकर आतंकवाद से निडरतापूर्वक लड़ने वाला नागरिक समाज तैयार किया जा सकता है। सामाजिक संकल्प और संगठन के सामने मुट्ठीभर भाड़े के आतंकी भला कब तक ठहर पाएँगे!

जस्टिस रंजना देसाई की अध्यक्षता वाले परिसीमन आयोग ने अपनी अंतिम रिपोर्ट दे दी है। इसमें अनुसूचित जनजातियों के लिए 9 सीटें आरक्षित की गई हैं। आयोग ने एक महिला सहित कश्मीर घाटी के दो विस्थापितों के मनोनयन की सिफारिश की है।

इसी प्रकार पाक-अधिक्रांत जम्मू-कश्मीर के विस्थापितों के मनोनयन (संख्या स्पष्ट नहीं है) की सिफारिश भी की गई है। यह पहली बार किया गया है। इसलिए सराहनीय और स्वागतयोग्य है। हालाँकि, मनोनयन की जगह चुनाव द्वारा और अधिक संख्या में प्रतिनिधित्व दिया जाना चाहिए था। इन समुदायों और भारत के राष्ट्रवादी बुद्धिजीवियों की ओर से इस आशय की माँग की जा रही थी।

उल्लेखनीय है कि जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पाक अधिक्रांत क्षेत्र के लिए 24 सीटों को खाली छोड़ा जाता रहा है। यह उचित अवसर था कि उस क्षेत्र से खदेड़े गए भारतवासियों और उनके वंशजों के लिए 24 में से कम-से-कम 4 सीटें आवंटित कर दी जातीं। गुलाम कश्मीर और कश्मीर घाटी के विस्थापितों के लिए सीटें आरक्षित करना इसलिए जरूरी था, ताकि उनके उनका दुःख-दर्द, समस्याओं और मुद्दों की ओर देश-दुनिया का ध्यान आकर्षित हो।

वर्तमान केंद्र सरकार ने 22 फरवरी, 1994 के भारतीय संसद के संकल्प की पृष्ठभूमि में अनुच्छेद 370 और 35 ए को निष्प्रभावी करते हुए जम्मू-कश्मीर के पूर्ण विलय की दिशा में बड़ी पहल की थी। अब उस संकल्प की सिद्धि की दिशा में सक्रिय होने का अवसर है।

हाईकोर्ट ने बग्गा की गिरफ्तारी पर लगाई रोक: पिता बोले- केजरीवाल ने दिया था AAP में शामिल होने का ऑफर, अब परेशान कर रहे हैं

दिल्ली भाजपा (Delhi BJP) के प्रवक्ता तजिंदर पाल सिंह बग्गा (Tajinder Pal Singh Bagga) को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट (Punjab & Haryana High Court) से शनिवार (7 मई 2022) की देर रात राहत मिल गई। कोर्ट ने अगले आदेश आदेश तक बग्गा के खिलाफ पंजाब पुलिस को किसी भी कार्रवाई पर रोक लगा दी है। दरअसल, मोहाली कोर्ट ने बग्गा के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट के खिलाफ दायर अर्जी पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने यह बात कही।

इससे पहले पंजाब पुलिस (Punjab Police) ने भाजपा नेता को दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन हरियाणा पुलिस ने उसे रोक लिया था। इसके बाद दिल्ली पुलिस उन्हें हरियाणा से छुड़ा लाई थी। इसके साथ ही दिल्ली पुलिस ने पंजाब पुलिस पर बग्गा का अपहरण करने का मामला भी दर्ज किया था।

इसके बाद मोहाली कोर्ट ने एक नए मामले में तजिंदर पाल सिंह बग्गा के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दी और पंजाब पुलिस की साइबर क्राइम ब्रांच से उन्हें कोर्ट के सामने प्रस्तुत करने के लिए कहा। बग्गा के खिलाफ धारा 153 A, 505, 505 (2) और 506 के तहत केस दर्ज किया था। इसके बाद बग्गा के वकील ने हाईकोर्ट में अर्जी देकर आवश्यक सुनवाई के लिए अनुरोध किया।

पंजाब एवं हरियाणा कोर्ट ने शनिवार की आधी रात को जस्टिस अनूप चितकारा के आवास पर मामले की अर्जेंट सुनवाई की और इस मामले में बग्गा को राहत देते हुए पंजाब पुलिस को किसी भ कार्रवाई से रोक दिया। इस मामले में अगली सुनवाई 10 मई को होगी।

कोर्ट से बग्गा को राहत मिलने के बाद उनके पिता प्रीतपाल सिंह बग्गा ने कहा, “मुझे खुशी है कि तजिंदर को पंजाब हाईकोर्ट से राहत मिली है। पंजाब की आम आदमी पार्टी की सरकार उन्हें किसी ना किसी मामले में फँसाना चाहती है। वे FIR करते रहेंगे, लेकिन हम रुकने वाले नहीं हैं। यह लड़ाई लंबी चलेगी।” वहीं, बग्गा को राहत मिलने पर तेजस्वी सूर्या ने ट्वीट किया- “न्याय की एक और जीत.. कानून के शासन की एक और जीत हुई है।”

उन्होंने कहा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल (Delhi CM arvind Kejriwal) बग्गा से डरते हैं, क्योंकि वह उनके गलत कामों को उजागर कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि केजरीवाल ने तजिंदर को AAP में शामिल होने के लिए मनाने की भी कोशिश की, लेकिन वह शामिल नहीं हुए। इसके बाद उन्हें परेशान किया जाने लगा।

उधर, बग्गा को गिरफ्तार करने के दौरान पंजाब पुलिस के जवानों ने उन्हें पगड़ी नहीं पहनने दी। इस पर राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने स्वत: संज्ञान लिया है। आयोग ने पंजाब के चीफ सेक्रेटरी को पत्र लिखकर इस मामले में 7 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने को कहा है। 

नेपाल पार्टी के बाद तेलंगाना की जनसभा में पहुँचे राहुल गाँधी, थीम का कुछ अता-पता नहीं: वीडियो में पूछ रहे- बोलना क्या है

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) नेपाल के दौरे से भारत वापस आ गए हैं। आते ही वो तेलंगाना के दो दिवसीय दौरे पर चले गए हैं। इस बीच उनका एक वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वो कॉन्ग्रेस नेताओं से पूछते दिख रहे हैं कि ‘क्या बोलना है’। ये वीडियो तेलंगाना कॉन्ग्रेस नेताओं के साथ बैठक का है।

17 सेकंड की क्लिप में देखा जा सकता है कि राहुल गाँधी कुर्सी पर बैठे हुए बाकी के कॉन्ग्रेस नेताओं से पूछते हैं, “आज का मुख्य विषय क्या है … क्या बोलना है?” उल्लेखनीय है कि शुक्रवार (6 मई 2022) को तेलंगाना के दौरे पर पहुँचे राहुल गाँधी किसानों के मुद्दे पर वारंगल में एक जनसभा को संबोधित करने वाले हैं।

राहुल गांधी दो दिवसीय दौरे पर शुक्रवार को तेलंगाना पहुँचे जहाँ उनका वारंगल में किसानों के मुद्दों पर एक जनसभा को संबोधित करना था। बहरहाल इस पर तंज कसते हुए बीजेपी की आईटी सेल के अध्यक्ष अमित मालवीय ने कहा, “ऐसा तब होता है जब आप निजी विदेश यात्राओं और नाइटक्लबिंग के बीच राजनीति करते हैं।”

इस बीच एआईएमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने भी राहुल गाँधी के इस वीडियो पर कमेंट किया है। ओवैसी ने कहा, “जब आपको ये नहीं पता कि आप तेलंगाना की जनता को क्या संदेश देना चाहते हैं, तो वे आपका समर्थन क्यों करेंगे। ओवैसी ने राहुल गाँधी पर तंज किया कि आपका दिमाग खाली है। आप टीआरएस से कैसे लड़ेंगे। ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम में कॉन्ग्रेस साफ हो गई है।”

नेपाल में नाइटक्लब विवाद चर्चा में

गौरतलब है कि इससे पहले राहुल गाँधी नेपाल में एक नाइट क्लब में देखे गए थे। उनके साथ एक महिला भी थी, जिसको लेकर दावे किए गए कि वो चीनी राजदूत होउ यांकी हैं। काफी राजनीति के बाद राहुल के ही करीबी रेवंत रेड्डी ने भी कन्फर्म किया कि वो महिला चीनी राजदूत ही थी। दावा किया जाता है कि वो वहाँ अपनी एक दोस्त की शादी अटेंड करने के लिए गए थे। हालाँकि, उक्त महिला को लेकर एक नई जानकारी सामने आई कि वो भारतीय मूल की पुर्तगाली महिला थी।

‘सेक्सी दुर्गा’ के डायरेक्टर पर अभिनेत्री ने लगाया उत्पीड़न और पीछा करने का आरोप, गिरफ़्तारी के एक दिन बाद ही बेल: केरल का मामला

मलयालम फिल्म निर्देशक सनल कुमार शशिधरन को अभिनेत्री मंजू वारियर का पीछा करने और प्रताड़ना के मामले में गिरफ्तार किया गया। हालाँकि, शुक्रवार (6 मई, 2022) को केरल के अलुवा स्थित JFCM अदालत ने उसे जमानत भी दे दी। उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा-354D (किसी महिला का पीछा करना या फिर उसकी रुचि न होने के बावजूद उससे जबरन संपर्क एवं बातचीत करने की कोशिश करना) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

अभिनेत्री ने निर्देशक द्वारा किए जा रहे आपत्तिजनक मैसेज्स और करतूतों को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी। दोनों ‘कयाट्टम (Kayattam)’ फिल्म में साथ काम कर चुके हैं, जो अक्टूबर 2020 में रिलीज हुई थी। जहाँ सनल कुमार शशिधरन इस फिल्म के निर्देशक थे, मंजू वारियर ने अभिनय के साथ-साथ फिल्म का निर्माण भी किया था। शशिधरन ने जमानत मिलने के बाद कहा कि वो किसी को बाधा नहीं पहुँचा रहे हैं और कई दिनों से अभिनेत्री मंजू से उनकी बात भी नहीं हुई है।

सनल कुमार जनवरी 2017 में रिलीज हुई फिल्म ‘सेक्सी दुर्गा’ को लेकर विवादों में रहे थे। जैसा कि फिल्म के नाम से ही स्पष्ट है, इसे हिन्दुओं की भावनाओं को ठेस पहुँचाने के लिए बनाया गया था। इसमें एक मुस्लिम पुरुष और हिन्दू महिला की कथित प्रेम कहानी दिखाई गई थी। विरोध के बाद इस इंडी हॉरर फिल्म का नाम ‘एस दुर्गा’ कर दिया गया था। फिल्म के लिए उसे देश-विदेश में कई अवॉर्ड्स भी मिले थे। हालाँकि, वास्तविकता में हिन्दू लड़कियाँ ‘लव जिहाद’ की शिकार होती रहती हैं।

अब सनल कुमार शशिधरन ये कह रहे हैं कि मंजू वारियर का जीवन खतरे में है और वो कुछ लोगों के प्रभाव में आकर कदम उठा रही हैं। पुलिस का कहना है कि निर्देशक पुलिस थाने से भी जमानत ले सकते थे, लेकिन उन्होंने अदालत में पेश किए जाने की जिद पकड़ ली। उन्होंने पुलिस पर उनका मोबाइल फोन न लौटाने के आरोप लगाए, जबकि एलमक्कारा थाने का कहना है कि मोबाइल फोन को कोर्ट में जमा कराया गया है और तय कानूनी प्रक्रिया के तहत वो इसे वापस ले सकते हैं।

सनल कुमार शशिधरन ने उन्हें गिरफ्तार करने आए पुलिसकर्मियों पर सवाल उठाते हुए फेसबुक लाइव भी किया था। इसके बाद उन्हें थाने लाया गया और पूछताछ हुई। इससे पहले सनल कुमार शशिधरन कह चुके हैं कि ‘कयाट्टम’ फिल्म मंजू वारियर के प्रति उनके प्यार और श्रद्धा के लिए याद रखा जाएगा। उन्होंने कहा था कि मंजू वारियर के साथ काम करने के बावजूद वो प्राइवेट में उनकी सराहना नहीं कर सकते। उन्होंने आरोप लगाया था कि अभिनेत्री अपने ‘सहयोगियों’ के कब्जे में हैं।