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सूख गई यमुना, दिल्ली पानी को तरसी: जल संकट के लिए हरियाणा को दोषी बता रहे केजरीवाल, CM खट्टर ने बताया- कितना दे रहे पानी

दिल्ली में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Delhi CM Arvind Kejriwal) के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी की सरकार (Aam Aadami Party Government) जब भी संकट की स्थिति आती है, वह अपनी जिम्मेदारियों से भागने लगती है। प्राय: वह इसका दोष दूसरों पर मढ़ने की कोशिश की करती रहती है। दिल्ली में गहराए जल संकट को लेकर अरविंज केजरीवाल की सरकार ने इसके लिए हरियाणा (Haryana) को दोषी ठहराया है।

दिल्ली में सूख रही यमुना नदी को लेकर अरविंद केजरीवाल सरकार ने भाजपा शासित राज्य हरियाणा को आपात संदेश भेजते हुए दिल्ली के लिए अतिरिक्त पानी की माँग की थी। हालाँकि, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर (Manohar Lal Khattar) ने कहा कि अरविंद केजरीवाल झूठ बोल रहे हैं और आंकड़े भी झूठे पेश कर रहे हैं।

सीएम खट्टर ने कहा कि दिल्ली को उसके हिस्से का पानी 1,050 क्यूसेक पानी दिया जा रहा है। वहीं, सीएम खट्टर ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री भगवंत मान (CM Bhagwant Mann) की नेतृत्व वाली पंजाब की आम आदमी पार्टी की सरकार हरियाणा का पानी रोक रही है।

अरविंद केजरीवाल की सरकार का कहना है कि हरियाणा द्वारा दिल्ली को कम पानी देने के कारण यमुना का जलस्तर नीचे आ गया है। वहीं, वजीराबाद जलाशय का जलस्तर 674.5 फुट से घटकर 671.8 फुट आ गया है। इसके कारण दिल्ली के कई इलाकों में पानी की संकट का सामना करना पड़ रहा है।

इस जल संकट के कारण दिल्ली के कम से कम 25 इलाकों पर इसका सीधा प्रभाव पड़ेगा। इन इलाकों में लोगों को पानी की किल्लत झेलनी पड़ेगी। नदी के सूखने के कारण चंद्रावल, वज़ीराबाद और ओखला में पानी का उत्पादन लगभग 25-30 प्रतिशत तक तक गिर गया है। यमुना के सूखने से दिल्ली के दिल्ली कैंट, पटेल नगर, करोलबाग, सिविल लाइंस, पहाड़गंज, तुगलकाबाद, मॉडल टाउन, पंजाबी बाग, बुराड़ी, कमला नगर, शक्ति नगर, प्रह्लादपुर, जहाँगीरपुर, मूलचंद, ग्रेटर कैलाश आदि इलाकों में इसका सीधा प्रभाव पड़ेगा।

ये पहली बार नहीं है जब केजरीवाल सरकार ने कुप्रबंधन के कारण दिल्ली की बिगड़ी हालत के लिए दूसरे पर आरोप लगाया हो। पंजाब में जब कॉन्ग्रेस और हरियाणा में भाजपा की सरकार रही तब दिल्ली में प्रदूषण के लिए इन दोनों राज्यों में पराली जलाना दिल्ली के लिए प्रदूषण का कारण बता चुके हैं। कोरोना काल में मजदूरों के पलायन के लिए वह केंद्र को दोषी ठहरा चुकी है। वहीं, दिल्ली में निगमकर्मियों की हड़ताल पर राजधानी की सड़कों पर फैले कचड़े के लिए भाजपा शासित MCD को दोषी ठहराया था। वहीं, भाजपा का कहना है कि निगमकर्मियों का वेतन देने के लिए दिल्ली सरकार फंड जारी नहीं कर रही है।

काशी विश्वनाथ पर की थी विवादित टिप्पणी, अब वायरल हुआ LU प्रोफेसर का वीडियो: खेला जाति वाला कार्ड, कहा – मेरी पिटाई हुई, गाली दी

काशी विश्वनाथ मंदिर और हिन्दू धर्म को लेकर विवादित बयान देने के मामले में चर्चा में चल रहे लखनऊ विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर रविकांत चंदन के साथ मारपीट किए जाने के आरोप लगे हैं। प्रोफेसर का आरोप है कि वो बुधवार (18 मई, 2022) को सिक्योरिटी गार्ड के साथ क्लास लेने जा रहे थे, तो उसी दौरान उन्हें किसी ने थप्पड़ जड़ दिया।

रिपोर्ट के मुताबिक, शिक्षक का आरोप है कि प्रॉक्टर ऑफिस के सामने ‘समाजवादी छात्र सभा’ के इकाई अध्यक्ष कार्तिक पांडेय ने उनके साथ मारपीट की और उन्हें जातिगत गालियाँ दी। इसका वीडियो वायरल हो रहा है, जिसके कुछ लोग आपस में धक्का-मुक्की करते हुए देखे जा सकते हैं। हालाँकि, इस बीच वहाँ पर तैनात सिक्योरिटी गार्ड ने कार्तिक को पकड़ लिया। बाद में यूनिवर्सिटी चौकी के पुलिस कर्मी कार्तिक को अपने साथ ले गए।

‘समाजवादी’ छात्र कार्तिक पर मारपीट का आरोप लगाने वाली प्रोफेसर रविकांत चंदन के मुताबिक, उनके साथ यह वारदात दोपहर के करीब 1 बजे के आसपास हुई। उस दौरान वो चीफ प्रॉक्टर के कार्यालय के सामने थे और घटना के बाद से वो वहीं पर मौजूद हैं।

इस बीच विवादित प्रोफेसर के समर्थन में शिक्षक संघ समेत कई छात्र संगठन उतर आए हैं। मंगलवार को ऑल स्टूडेंट एसोसिएशन (AISA) और कॉन्ग्रेस की स्टूडेंट विंग एनएसयूआई ने रविकांत चंदन का बचाव किया है। इसके साथ ही उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को खारिज करने की माँग की गई है।

क्या है पूरा मामला

गौरतलब है कि हाल ही में रविकांत चंदन ने एक टीवी डिबेट के दौरान काशी विश्वनाथ और हिन्दू संतों के खिलाफ बयान दिया था। इसके खिलाफ हसनगंज थाने में धार्मिक भावनाओं को आहत करने का केस दर्ज किया था। लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्र अमन दुबे ने इस मामले में केस दर्ज कराया था। विश्वविद्यालय ने भी प्रोफेसर रविकांत से स्पष्टीकरण माँगा था।

ज्ञानवापी शिवलिंग ‘काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद’ को सौंपने की माँग, बोले परिषद के अध्यक्ष – अब ये वजूखाना कैसे हो सकता है?

ज्ञानवापी विवाद के बीच ‘काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद’ के अध्यक्ष नागेंद्र पांडे ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने बुधवार (18 मई, 2022) को कहा, “बाबा विश्वेश्वर की मूर्ति मिल गई है तो ये वजूखाना कैसे हो सकता है, अब ऐसा नहीं हो सकता। हमारी माँग है कि जब तक फैसला नहीं आ जाता, तब तक शिवलिंग काशी विश्वनाथ न्यास को सौंप दिया जाए।”

ज्ञानवापी विवादित ढाँचे के अंदर वजूखाना (नमाज से पहले पैर हाथ धोने की जगह) को प्रशासन ने सील कर दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रशासन ने यहाँ लोहे की चादरें और जाली लगाकर वजू खाने को बंद कर दिया है। अब किसी को भी इस जगह पर जाने की इजाजत नहीं है। रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है वजूखाने की सुरक्षा की जिम्मेदारी सीआरपीएफ को सौंपी गई है। सीआरपीएफ के दो जवान सील की गई इस जगह पर दिन-रात तैनात रहेंगे।

बीते दिनों वाराणसी में विवादित ज्ञानवापी ढाँचे का सर्वे पूरा होने के बाद हिन्दू पक्ष ने यहाँ शिवलिंग मिलने का दावा किया था। यह शिवलिंग कुएँ में मिला था। इस दौरान 16 मई 2022 (सोमवार) दीवारों पर हिन्दू मंदिर के अवशेष दिखाई देने का भी दावा किया गया था। इसके बाद से इस जगह को सील कर दिया गया है। अगले दिन यानी मंगलवार (17 मई, 2022) को सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत में सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों (हिंदू और मुस्लिम) के बीच जोरदार बहस ​हुई।

इसमें सबसे पहले वादी (हिंदू) पक्ष के अधिवक्ताओं ने अपनी बात रखते हुए कहा था, “जहाँ शिवलिंग मिला है, वहाँ भीषण बदबू है और वजू किया गंदा जल बह रहा है। उसके नीचे का हिस्सा दीवारों में चुना गया है। इस स्थल पर बांस-बल्ली व मलबा-पत्थर है।” उन्होंने उसे हटाकर तहखाने की दीवार तोड़कर उस स्थान की भी कमीशन कार्यवाही कराने पर बल दिया। वादी पक्ष का तर्क था कि इससे हकीकत का पता चल जाएगा कि शिवलिंग की गहराई कितनी है। यह स्थान नंदी जी के मुख के ठीक सामने है और वही गर्भगृह बताया गया।

दूसरी ओर प्रतिवादी अंजुमन इंतजामिया मस्जिद कमेटी की ओर से सर्वे रिपोर्ट आने से पहले ही शिवलिंग पाए जाने की बात पर बिना आपत्ति जताए उसे सील किए जाने पर हैरानी जताई है। प्रतिवादी पक्ष ने कहा कि पहले रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत हो और उससे सभी अवगत हों। इसके बाद हम अपना पक्ष मजबूती से रखेंगे। साथ ही प्रतिवादी पक्ष ने मीडिया में बयानबाजी पर सवाल उठाते हुए कहा कि जो न पक्षकारों का वकील है, न सर्वे टीम का सदस्य है। वह भी इस मामले में अनापशनाप बयान दे रहा है।

गौरतलब है कि जी न्यूज़ के एक शो में बोलते हुए एडवोकेट विष्णु जैन ने कहा था, “मैंने कोई गोपनीयता भंग नहीं की है। मैं वही सब बता रहा हूँ जो प्रकाशित हो चुका है। तथाकथित ज्ञानवापी मस्जिद की जो भी पश्चिमी दीवार को देख लेगा वो इसे हिन्दू मंदिर ही कहेगा। उसमें देवी-देवताओं की मूर्तियाँ रखने के लिए स्थान बना हुआ है। इसी के साथ घंटियाँ बनी हुई हैं। इस मामले में कुल 7 केस दाखिल हुए हैं। उन केसों में भक्त, भगवान, स्थान और मालिकाना हक सब शामिल है। आने वाले समय में सभी दावे एक साथ जोड़ दिए जाएँगे।”

एडवोकेट विष्णु जैन ने आगे कहा था, “1996 में भी सर्वे हुआ था ज्ञानवापी का। अब दोबारा हुआ है। अगर दोनों स्थितियों में कोई फर्क मिला तो प्लेसेस ऑफ़ वर्शिप एक्ट विपक्षी पर लागू होगा। प्लेसेस ऑफ़ वर्शिप एक्ट हमारे अदालत जाने का अधिकार छीन लेता है। यह एक्ट सुप्रीम कोर्ट द्वारा वर्णित हर किसी के अदालत जाने के अधिकारों का उललंघन है।”

शिवलिंग पर अश्लील टिप्पणी करने वाले AIMIM नेता दानिश कुरैशी को गुजरात पुलिस पुलिस ने किया गिरफ्तार, लिखा था…

गुजरात AIMIM के नेता दानिश कुरैशी को बुधवार (18 मई, 2022) को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। दानिश पर आरोप है कि उन्होंने ज्ञानवापी विवादित ढाँचे में शिवलिंग पाए जाने और स्थानीय अदालत द्वारा इसकी सुरक्षा का आदेश दिए जाने के बाद अभद्र टिप्पणी की थी। हिंदू संगठनों ने इस पर आक्रोश जताया था और उनकी गिरफ्तारी की माँग की। मंगलवार (17 मई, 2022) को अहमदाबाद के वासणा में उसके खिलाफ याचिका दायर की गई थी।

AIMIM नेता दानिश कुरैशी ने ज्ञानवापी में मिले शिवलिंग को लेकर सोशल मीडिया पर अश्लील और अभद्र टिप्पणी की। इसके बाद अहमदाबाद के वासणा इलाके के रहने वाले जयदीप सिंह वाघेला ने दानिश के खिलाफ वासणा थाने में शिकायत दर्ज कराई। जयदीप सिंह वाघेला ने मामला दर्ज कर कार्रवाई की माँग की थी। पुलिस ने आज दानिश को गिरफ्तार कर लिया है।

ऑपइंडिया के साथ एक बात करते हुुए याचिकाकर्ता जयदीप सिंह वाघेला ने बताया कि जब कुरैशी की टिप्पणी उनके संज्ञान में आई, तो किसी भी हिंदू की तरह उनकी भी धार्मिक भावनाएँ आहत हुईं। इसलिए सभी हिंदुओं की तरफ से उन्होंने कुरैशी के खिलाफ वासणा थाने में अर्जी दी। वाघेला ने आगे कहा कि दानिश की गिरफ्तारी भर से बात खत्म नहीं हो जाती है, बल्कि कड़ी से कड़ी सजा भी मिलनी चाहिए।

उल्लेखनीय है कि ज्ञानवापी विवादित ढाँचे में शिवलिंग पाए जाने, उसकी सुरक्षा को बरकरार रखने और सर्वेक्षण को अवैध नहीं मानने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले से अधिकतर इस्लामवादियों की तरह गुजरात एआईएमआईएम के नेता भी निराश थे। उन्होंने अपने हर सोशल मीडिया अकाउंट पर हिंदू आस्था के प्रतीक शिवलिंग पर अपमानजनक और अश्लील टिप्पणी की।

दानिश की टिप्पणी के बाद, हिंदू संगठनों ने उग्र विरोध प्रदर्शन किया और अधिकारियों से कुरैशी को हिरासत में लेने का आह्वान किया। हिंदू युवा वाहिनी के प्रभारी योगी देवनाथ ने भी गुजरात के मुख्यमंत्री से दानिश कुरैशी की गिरफ्तारी की माँग की।

दानिश ही नहीं, बल्कि कई सोशल मीडिया यूजर्स ने शिवलिंग और भगवान शंकर का मजाक उड़ाते हुए पोस्ट किया। खुद को कॉन्ग्रेस का प्रदेश समन्वयक बताने वाले अफजल लखानी ने भी शिवलिंग की तुलना थाली और प्याले की तस्वीर से तुलना करते हुए फेसबुक पर पोस्ट कर हिंदुओं की भावनाओं को आहत किया है।

DC ऑफिस के सामने महिला ने की आत्मदाह की कोशिश, ईसाई में धर्मांतरण के लिए प्रताड़ना का आरोप: कहा- तमिलनाडु पुलिस नहीं कर रही कार्रवाई

तमिलनाडु (Tamil Nadu) में कलेक्टर ऑफिस के बाहर एक महिला ने धर्मांतरण के लिए परेशान किए जाने का आरोप लगाते हुए आत्मदाह करने की कोशिश की। हालाँकि, घटनास्थल पर मौजूद लोगों ने उसे बचा लिया। महिला का आरोप है कि ईसाई धर्म अपनाने के लिए उस पर लगातार दबाव डाला जा रहा है।

राज्य के रामनाथपुरम (Ramanathapuram) जिले की पचेरी गाँव की रहने वाली वलारमती ने आरोप लगाया कि उसके गाँव का ही रहने वाला देवदास उसको उसके परिवार को ईसाई धर्म अपनाने के लिए मजबूर कर रहा है। महिला ने आरोप लगाया कि धर्मांतरण से इनकार करने पर देवदास उसके परिवार को प्रताड़ित कर रहा है।

अपनी व्यथा के लेकर कलेक्टर के ऑफिस में पहुँची वलारमती का कहना है कि इसकी शिकायत उसने पुलिस से की थी, लेकिन पुलिस मामले में कोई कार्रवाई नहीं रही है। इसलिए उसने आत्मदाह करने करने का प्रयास किया। महिला ने आरोप लगाया कि उसके गाँव में धर्म परिवर्तन का काम किया जा रहा है और जब उसके परिवार ने इनकार कर दिया तो उसे 2019 से ही परेशान किया जा रहा है।

दरअसल, वलारमती पुलिस की बेरुखी से परेशान होकर कलेक्टर ऑफिस पहुँची थी, जहाँ अधिकारी आम लोगों की शिकायतें सुन रहे थे। इसी दौरान उसने यह कदम उठाया। हालाँकि, वहाँ मौजूद पत्रकारों एवं पुलिसकर्मियों ने उसकी कोशिश की विफल करते हुए उसे बचा लिया।

वालारमती का कहना है कि देवदास ने 8 लोगों के साथ मिलकर ईस्ट कोस्ट रोड पर उसके बेटे घेर लिया, लेकिन वहाँ मौजूद लोगों ने उसे बचा लिया। महिला का आरोप है कि देवदास और उसके परिवार ने घर का रास्ता भी रोक दिया है और झूठे मामले में फँसा दिया है। वलारमती ने कहा, “इसके बाद हम कोर्ट गए और हमारे पक्ष में फैसला आया। इसके बाद उन लोगों ने मुझे जान से मारने की कोशिश की।”

इंडिया टुडे के अनुसार, महिला का कहना है कि जब उन लोगों ने उस पर हमला किया तो वह पुलिस के पास गई, लेकिन पुलिस ने कार्रवाई करने का वादा करने के बाद भी कुछ नहीं किया। महिला का आरोप है कि देवदास और उसका परिवार उसे और उसके परिवार को नुकसान पहुँचाने की कोशिश कर रहा है।

वहीं, पुलिस कहना है कि राजस्व प्रभाग अधिकारी और पुलिस उपाधीक्षक द्वारा एक जाँच में पता चला है कि मुद्दा भूमि विवाद का है। गाँव में अभी भी कई हिंदू परिवार हैं। पुलिस सूत्रों कहना है कि वलारमती और देवदास के परिवार के बीच जमीन के एक हिस्से को लेकर 10 साल से भी अधिक समय से विवाद चल रहा है।

वहीं, एक अन्य मामले में ईसाइयों ने हिंदुओं पर हमला किया है, जिसमें एक महिला की सिर में चोट आई है। ऑर्गेनाइजर के अनुसार, घटना तिरुनेलवेली जिले के अदैमथिप्पनकुलम की है। यहाँ ईसाइयों और हिंदुओं के बीच गाँव के एक सार्वजनिक स्थान के उपयोग को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। यह मामला कोर्ट में विचाराधीन है। कोर्ट ने आदेश अंतरिम आदेश में विवादित जगह पर दोनों पक्षों को जाने से बचने के लिए कहा है।

कोट पर 6 भाषा में ‘भारत’ लिख कान्स फेस्टिवल पहुँचे अनुराग ठाकुर: इंडिया को ‘कंट्री ऑफ ऑनर’ का सम्मान, 6 फिल्में चलेंगी पर्दे पर

फ्रांस में मंगलवार (17 मई 2022) से शुरू हुए 75वें कान्स फिल्म फेस्टिवल में भारत का प्रतिनिधित्व इस बार सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने अपनी टीम के साथ किया। कार्यक्रम में अनुराग ठाकुर एक खास कोट पहने दिखे जिसकी बटन पर 6 भाषाओं में भारत लिखा था। इस बार ‘मार्चे डू सिनेमा’ में भारत को पहले ‘कंट्री ऑफ ऑनर’ के रूप में चुना गया है। ये भारत के लिए बड़े सम्मान की बात है।

बता दें कि 17 मई को केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर के साथ-साथ कान्स फेस्टिवल में रेड कॉर्पेट पर संगीतकार ए आर रहमान, संगीतकार रिकी केज, गीतकार एवं कवि प्रसून जोशी, अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी, आर माधवन, अनुभवी निर्देशक शेखर कपूर, वाणी टी टीकू, रिकी केज, कमल हसन और लोक गायक मामे खान शामिल थे। इसके अलावा कान्स कार्यक्रम में तेलुगु अभिनेत्रिया तमन्ना भाटिया और पूजा हेगड़े भी नजर आईं। सूचना एवं प्रसारण मंत्री ने अपने प्रतिनिधिमंडल को लेकर कहा कि कान्स रेड कार्पेट पर चलने वाला यह अब तक का सबसे बड़ा भारतीय दल है।

बता दें कि आज अनुराग ठाकुर कान्स फिल्म फेस्टिवल के अलावा एक बिजनेस इवेंट में भारतीय पवेलियन का उद्घाटन किया। इसके बाद वह मैजेस्टिक बीच पर मार्चे डू फिल्म के उद्घाटन समारोह का हिस्सा बनेंगे। मंगलवार को वह रेड कार्पेट पर सफेद कोट में नजर आए जिसमें हिंदी, अंग्रेजी, गुजराती, असम, मलयाली और पंजाबी में भारत लिखा हुआ है।

कंटेंट हब बन सकता है भारत: PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस फेस्टिवल के शुरू होने से पहले टीम इंडिया को पत्र लिखा। अपने पत्र में उन्होंने कहा, ये संयोग ही है कि भारत-फ्रांस संबंधों के 75 साल, आजादी के 75 साल और कान्स फिल्म फेस्टिवल साथ-साथ मनाया जा रहा है। पीएम मोदी ने बताया कि भारत की काफी कुछ कहानियाँ बताई जानी शेष हैं और भारत में वो क्षमता है कि वो दुनिया का कंटेट हब बनेगी। फिल्मी दुनिया में अपनी ताकत दिखाने गए टीम इंडिया के नेतृत्व की बागडोर केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने संभाली तो उन्होंने तय कर लिया था कि कुछ अलग कर के दिखाना है ताकि दुनिया के सामने देश की फिल्मों का ही नहीं बल्कि बाकी दमखम भी दिखे।

कौन-कौन सी फिल्में कान्स फेस्टिवल में दिखाई

उल्लेखनीय है कि भारतीय सिनेमा के महान फिल्ममेकर सत्यजीत रे की दुर्लभ फिल्म प्रतिद्वंदी को इस बार कान्स फिल्म फेस्टिवल में प्रदर्शित करने का निर्णय लिया गया है। इसके अलावा 75वें कान्स फेस्टिवल में भारत की 6 और फिल्में दिखाई जानी हैं। इनमें जुलाई में रिलीज होने वाली आर माधवन की रॉकेट्री: द नाम्बी इफेक्ट है। वहीं अन्य पाँच फिल्में निखिल महाजन की मराठी फिल्म गोदावरी है, शंकर श्रीकुमार की ‘अल्फा बीटा गामा’, बिस्वजीत बोरा की ‘बूम्बा राइड’, अचल मिश्रा की ‘धुइन’ और जयराज की ‘ट्री फुल ऑफ पैरट्स’ शामिल है। ये फेस्टिवल  17 मई से 28 मई कर चलने वाला है। अनुराग ठाकुर के साथ भारतीय प्रतिनिधिमंडल में अक्षय कुमार को भी शामिल होना था लेकिन कोरोना पॉजिटिव होने के कारण वह इसका हिस्सा नहीं बन पाए

सपा नेता मोहसिन अंसारी ने लीची के बीज को बताया शिवलिंग, यूपी पुलिस ने दबोचा: फेसबुक के जरिए माहौल बिगाड़ने की कोशिश

ज्ञानवापी विवादित ढाँचे पर कोर्ट की सुनवाई और वहाँ पर शिवलिंग होने की खबरों के बीच कट्टरपंथी इस्लामवादी लगातार हिन्दू धर्म को ठेस पहुँचाने वाले पोस्ट कर रहे हैं। ऐसा ही एक पोस्ट उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर से समाजवादी पार्टी के नेता मोहसिन अंसारी ने किया है। सपा नेता ने लीची के कटे हुए फल की तस्वीर शेयर करते हुए उसके बीज की तुलना शिवलिंग से की। इसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, समाजवादी पार्टी के नेता मोहसीन अंसारी के खिलाफ कोतवाली पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। इस मामले में सीओ सिटी कुलदीप कुमार के मुताबिक, मोहसिन नाम के व्यक्ति ने विवादित पोस्ट की थी, जिसके जरिए धार्मिक कमेंट किए गए थे। इससे सामाजिक सौहार्द बिगड़ने का खतरा बढ़ गया था। पुलिस अधिकारी के मुताबिक, आरोपित सपा नेता के खिलाफ इंडियन पीनल कोड की धारा धारा 153A और आईटी एक्ट-2000 की धारा 67 के तहत केस दर्ज किया गया है।

उल्लेखनीय है कि धारा धारा 153A के तहत दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति को 3 साल की कैद या जुर्माना अथवा दोनों ही हो सकते हैं।

क्या है पूरा मामला

गौरतलब है कि समाजवादी पार्टी के नेता मोहसिन अंसारी पर ये आरोप है उन्होंने फेसबुक पर लीची को बीच से कटी हुई इमेज को शेयर किया था। इसे उसने शिवलिंग करार देते हुए कहा कि इस लीची की जाँच होनी चाहिए। इसके साथ बाद कई सारी विवादित टिप्पणियाँ की गईं। इसके जरिए हिन्दुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने की कोशिश की गई।

फोटो साभार: फेसबुक

इससे पहले इसी तरह के पोस्ट हिमाचल प्रदेश के सिरमौर स्थित पावंटा में अरमान मलिक नाम के मुस्लिम व्यक्ति ने किया था। उसने अपनी टॉयलेट सीट की तुलना शिवलिंग से की थी। उसके साथ नसीम राज ने इसे शेयर किया था। जब पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया तो सैकड़ों की संख्या में कट्टरपंथी इस्लामियों ने थाने पर हमला कर दिया। पुलिस का गाड़ियों पर पथराव किया गया।

जिसे आप कहते हैं कुतुब मीनार, वो है सूर्य स्तंभ: ये रहे 20 साक्ष्य, ASI के पूर्व क्षेत्रीय निदेशक ने बताया- होती थी नक्षत्रों की गणना

दिल्ली के महरौली स्थित कुतुब मीनार को लेकर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के पूर्व क्षेत्रीय निदेशक धर्मवीर शर्मा ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा है कि यह मीनार नहीं, बल्कि एक सूर्य स्तंभ है। उन्होंने कहा कि यह मीनार एक वेधशाला है, जिसमें नक्षत्रों की गणना की जाती थी। इस वेधशाला के जरिए सूर्य, तारों और नक्षत्रों का अध्ययन किया जाता था। इस मीनार के तीसरी मंजिल पर देवनागरी में सूर्य स्तंभ के बारे में जिक्र भी है। 27 नक्षत्रों की गणना के लिए इस स्तंभ में दूरबीन वाले 27 स्थान भी हैं।

उन्होंने दावा किया कि इसका निर्माण कुतुबुद्दीन ऐबक ने नहीं, बल्कि सम्राट चंद्रगुप्त विक्रमादित्य ने करवाया था। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने अपने दावे की पुष्टि के लिए 20 तर्क दिए हैं। इसमें कर्क रेखा के ऊपर बनाए जाने से लेकर वेधशाला और मुख्य द्वार के ध्रुव तारे की दिशा की ओर खुलने का उल्लेख किया गया है। धर्मवीर शर्मा ने वेधशाला के पक्ष में निम्न साक्ष्य दिए हैं;

  1. कुतुबमीनार 25 इंच दक्षिण की तरह झुकी हुई है।
  2. इसे कर्क रेखा के ऊपर बनाया गया है। 
  3. यह कर्क रेखा से 5 डिग्री उत्तर में स्थित है।
  4. 21 जून को दोपहर 12 बजे कुतुबमीनार की छाया जमीन पर नहीं पड़ती है।
  5. उत्तरायण से दक्षिणायन में सूर्य ठीक 12 बजे आता है।
  6. स्तंभ में 27 आले हैं, जिनमें आँख लगाकर बाहर देखा जा सकता है। इन्हें आप दूरबीन वाले स्थान भी कह सकते हैं। इसमें तीन लोग बैठ सकते हैं।
  7. यह केवल नक्षत्रों के अध्ययन करने के लिए था और बीच में सूर्य स्तंभ था।
  8. कुतुबमीनार के मुख्य गेट से अगर आप 25 इंच अपनी पीठ झुकाकर ऊपर देखेंगे तो आपको ध्रुव तारा नजर आएगा।
  9. इसकी तीसरी मंजिल पर देवनागरी में सूर्य स्तंभ के बारे में जिक्र भी है। 
  10. यह वेधशाला विष्णु पद पहाड़ी पर थी। इसका निर्माण वराहमिहिर की अध्यक्षता में परमार वंश के राजा विक्रमादित्य ने करवाया था।
  11. वेधशाला के ऊपर कोई छत नहीं है।
  12. इस वेधशाला का मुख्य द्वार ध्रुव तारे की दिशा की ओर खुलता है।
  13. इस मीनार के ऊपर बेल बूटे घंटियाँ आदि बनी हैं, जो हिंदुओं की सभ्यता का प्रतीक है।
  14. इसके भीतर देवनागरी में लिखे हुए कई अभिलेख हैं जो सातवीं और आठवीं शताब्दी के हैं।
  15. इसे बनाने वालों के इसके ऊपर जो नाम लिखे हैं उनमें एक भी मुस्लिम नहीं था। इसे बनाने वाले सभी हिंदू थे।
  16. इसका इस्तेमाल अजान देने के लिए नहीं किया जा सकता, क्योंकि इससे अंदर की आवाज बाहर की ओर नहीं जाती है।
  17. निर्माण कई चरणों में होने की बात भी गलत है। इसका निर्माण एक ही बार में किया गया था। 
  18. मीनार में बाहर की ओर फारसी में लिखा गया है।
  19. इस मीनार के चारों ओर 27 नक्षत्रों के सहायक मंदिर थे, जिन्हें तोड़ दिया गयाहै।
  20. आले के ऊपर पल और घटी जैसे शब्द देवनागरी में लिखे हुए हैं। इसका मुख्य द्वार छोड़कर सभी द्वार पूर्व की ओर खुलते हैं।

बता दें कि पिछले दिनों पुरातत्वविद धर्मवीर शर्मा ने कुतुब मीनार परिसर में कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद के एक खंभे में लगी मूर्ति की पहचान नरसिंह भगवान और भक्त प्रह्लाद की मूर्ति के रूप में की थी। धर्मवीर शर्मा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण में क्षेत्रीय निदेशक रहे हैं। उनका दावा है कि यह मूर्ति आठवीं-नौवीं सदी में प्रतिहार राजाओं के काल की है। इसे वर्षों से पहचानने की कोशिश की जा रही थी, काफी दिनों के प्रयास के बाद अब पुरातत्वविद ने इस मूर्ति की पहचान की है।

उनका दावा है कि मूर्ति आठवीं या नौवीं शताब्दी की है। उस समय प्रतिहार राजाओं व राजा अनंगपाल प्रथम का समय था। प्रतिहार राजाओं में मिहिर भोज सबसे प्रतापी राजा हुए। इस मूर्ति के चित्र देश के मूर्धन्य पुरातत्वविदों को विशेष अध्ययन के लिए भेजे गए हैं। उनका कहना है कि यह नरसिंह भगवान की दुर्लभतम प्रतिमा है और अन्य कहीं इस तरह की मूर्ति नहीं मिलती है।

बता दें कि दिल्ली के साकेत कोर्ट ने मंगलवार (17 मई 2022) को कुतुबमीनार परिसर में 27 हिंदू और जैन मंदिरों की बहाली के संबंध में एक अपील पर सुनवाई 24 मई के लिए स्थगित कर दी। अपील में कहा गया है कि कुतुब मीनार परिसर के भीतर स्थित कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद को मंदिर परिसर के स्थान पर बनाया गया है। पिछले दिनों कुतुबमीनार परिसर के बाहर हिन्दू संगठनों ने हनुमान चालीसा पाठ कर स्मारक का नाम बदलकर ‘विष्णु स्तंभ’ किए जाने की माँग करते हुए प्रदर्शन किया था। 

गौरतलब है कि इससे पहले इतिहासकार और पुरातत्वविद (आर्कियोलॉजिस्ट) केके मोहम्मद ने कहा था कि दिल्ली के कुतुब मीनार परिसर में स्थित कुव्वत उल इस्लाम मस्जिद का निर्माण 27 हिन्दू-जैन मंदिरों को तोड़कर किया गया है। उन्होंने कहा था कि मंदिरों को तोड़कर निकाले गए पत्थरों से ही कुव्वत उल इस्लाम मस्जिद बनाई गई है। उस जगह पर अरबी में पाए गए अभिलेखों में इस बात का उल्लेख भी किया गया है। उन्होंने कहा था कि कुतुबमीनार के पास जिन मंदिरों के अवशेष मिले हैं उनमें गणेश की एक नहीं कई मूर्तियाँ हैं। इससे सिद्ध होता है कि वहाँ गणेश मंदिर थे। उन्होंने बताया कि बताया कि ताजूर मासिर नामक किताब में भी इसका जिक्र है।

बुर्का पहन कर आए आतंकियों ने ग्रेनेड से किया हमला, कर्मचारी की मौत: CRPF पर भी बुर्कानशीं महिला ने किया था हमला

जम्मू-कश्मीर के बारामूला जिले में मंगलवार (17 मई 2022) को बुर्का पहने एक आतंकवादी ने एक नई खुली शराब की दुकान पर ग्रेनेड से हमला कर दिया, जिससे एक कर्मचारी की मौत हो गई और तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। यह जानकारी पुलिस ने दी है। पुलिस ने बताया कि रात करीब 8 बजे बाइक सवार दो आतंकवादी बारामूला के दीवान बाग इलाके में स्थित नई शराब की दुकान के पास रुके। इसके बाद बाइक पर पीछे बुर्का पहनकर बैठा एक आतंकवादी उतरा और उसने दुकान पर ग्रेनेड से ​हमला कर दिया।

पुलिस ने आगे बताया कि हमले को अंजाम देने के बाद दोनों बाइक पर बैठकर फरार हो गए। वहीं, हमले में दुकान में काम करने वाले चार कर्मचारी घायल हो गए हैं, जिन्हें उपचार के लिए पास के एक अस्पताल भर्ती कराया गया है। जहाँ इनमें से एक की मौत हो गई है। वहीं अन्य तीन घायलों की हालत नाजुक बताई जा रही है।

पुलिस ने यह भी बताया कि मृतक की पहचान रंजीत सिंह (52) के रूप में हुई जो कि राजौरी जिले का निवासी था। घायलों की पहचान गोवर्धन सिंह और रवि सिंह निवासी कठुआ और गोविंद सिंह निवासी राजौरी के रूप में हुई है। उन्होंने बताया कि गोविंद सिंह को उपचार के लिए श्रीनगर के अस्पताल को रेफर किया गया है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी तत्काल घटनास्थल पर पहुँचे और इलाके की घेराबंदी कर हमलावरों की तलाश शुरू कर दी गई है।

गौरतलब है कि दो महीने पहले (29 मार्च 2022) बारामुला जिले के सोपोर में शाम के वक्त बुर्का पहने एक संदिग्ध ने सीआरपीएफ के बंकर पर पेट्रोल बम फेंका था। ये घटना सीसीटीवी में भी कैद हो गई, लेकिन सीसीटीवी फुटेज से यह स्पष्ट नहीं हो रहा था कि बुर्के में हमला करने वाला पुरुष था या महिला। हालाँकि आईजीपी कश्मीर विजय कुमार ने इसको लेकर बताया था कि बारामुला जिले के सोपोर कस्बे में सीआरपीएफ बंकर पर बुर्का पहन हमला करने वाली एक महिला थी। वह महिला लश्कर-ए-तैयबा की ओवर ग्राउंड वर्कर है और पहले भी कुछ आपराधिक मामलों में शामिल पाई गई है।

उसकी धरपकड़ के लिए पुलिस और सुरक्षाबल ने संयुक्त अभियान चलाया था। इसी तरह 2020 में श्रीनगर के शोपियां पुलिस स्टेशन पर आतंकियों ने ग्रेनेड फेंक कर हमला किया था। मगर वह ब्लास्ट नहीं हुआ और आतंकी वहाँ से भाग गए। जिसके बाद मौके पर मौजूद पुलिस बल तुरंत आतंकियों के तलाश में जुट गई थी।

अब तक 23 लाख नई कंपनियों का रजिस्ट्रेशन, अकेले अप्रैल में 16000 नई कंपनियाँ: रंग ला रही है मोदी सरकार की स्टार्टअप योजना

अप्रैल, 2022 में देश में 15,905 कंपनियाँ पंजीकृत हुईं और पिछले महीने के अंत तक कुल 14,51,401 कंपनियाँ सक्रिय थीं। यह जानकारी सरकार के आधिकारिक आँकड़ो के अनुसार सामने आईं हैं। वहीं कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के नवीनतम आँकड़ो से पता चला है कि 30 अप्रैल, 2022 तक कुल 23,33,958 कंपनियाँ कंपनी कानून के तहत रजिस्टर थीं।

इनमें से 8,29,269 कंपनियाँ बंद हो गईं और 7,021 लिक्विडेशन प्रक्रिया में थी। इनके अलावा 43,851 कंपनियाँ आधिकारिक रिकॉर्ड से अलग होने की प्रक्रिया में थीं तो 2,416 कंपनियाँ ‘निष्क्रिय स्थिति’ में पहुँच गई थीं। मंत्रालय द्वारा मासिक समाचार पत्र में उपलब्ध कराए गए नवीनतम आँकड़ों के अनुसार, अप्रैल के अंत में 14,51,401 सक्रिय कंपनियाँ थीं, जिनमें पिछले 18 महीनों के भीतर 2,53,131 कंपनियाँ शामिल थीं।

मंत्रालय ने कहा, “अप्रैल 2022 के दौरान कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत 851 वन परसन कंपनियों (OPCs) सहित कुल 15,905 कंपनियों को 2,316.52 करोड़ रुपए की अधिकृत पूँजी के साथ पंजीकृत किया गया था।”

बता दें कि कॉरपोरेट मामलों का मंत्रालय कंपनी कानून लागू कर रहा है। जिसके तहत कॉर्पोरेट मामलों के सचिव राजेश वर्मा ने इन्सॉल्वेंसी और बैंकरप्सी कोड (आईबीसी) के विभिन्न पहलुओं पर की जानकारी दी है।

उन्होंने कहा, “वर्तमान में विश्व बैंक डूइंग बिजनेस रिपोर्ट के अलावा इन्सॉल्वेंसी और बैंकरप्सी व्यवस्था के परिणामों को ट्रैक करने के लिए कोई मानक ढाँचा नहीं है और यह भी हाल ही में बंद कर दिया गया था। इसलिए, IBC द्वारा बनाए गए इन्सॉल्वेंसी ढाँचे के प्रभाव का अध्ययन करना और एक SWOT विश्लेषण करना यानी नियमित आधार पर इसकी ताकत, कमजोरियों, अवसरों और खतरों की जाँच करना महत्वपूर्ण है।”

गौरतलब है कि मोदी सरकार का स्टार्टअप पर काफी फोकस है। इसमें भी सरकार टियर-2 और टियर-3 शहरों पर ध्यान केंद्रित कर रही है। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल मंगलवार (17 मई, 2022) को राष्ट्रीय स्टार्टअप सलाहकार परिषद की बैठक में शामिल हुए और परिषद से वेंचर कैपिटल फंडिंग, क्षमता निर्माण और स्टार्टअप को बढ़ावा देने वाली सरकारी योजनाओं के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए टियर-2 और टियर-3 शहरों पर ध्यान केंद्रित करने को कहा है।