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श्रीलंका में फिर लगा आपातकाल: चुनाव में FREE वाला कल्चर ले डूबा देश को, घट गए दो-तिहाई कर दाता

श्रीलंका के राष्ट्रपति गोतबाया राजपक्षे (Sri Lankan President Gotabaya Rajapaksa) ने शुक्रवार-शनिवार (6-7 मई 2022) की आधी रात को एक बार फिर आपातकाल (Emergency) लगा दिया। राष्ट्रपति के प्रवक्ता ने कहा कि बढ़ते आर्थिक संकट को लेकर राष्ट्रपति के इस्तीफे की माँग को लेकर लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। शुक्रवार को ट्रेड यूनियनों ने भी देशव्यापी हड़ताल की थी। ऐसे में कानून-व्यवस्था को बनाए रखना जरूरी है। उधर श्रीलंका के वित्त मंत्री ने बताया कि अपने चुनावी वादे को पूरा करने के लिए साल 2019 में राजपक्षे सरकार द्वारा की गई व्यापक कर कटौती के बाद देश में करदाताओं की संख्या लगभग 10 लाख कम हो गई है।

शुक्रवार को ट्रेड यूनियनों के हड़ताल के बाद छात्रों ने देश की संसद का घेराव करने की चेतावनी दी थी। श्रीलंका के लोगों का आरोप है कि राष्ट्रपति गोतबाया देश में जारी आर्थिक संकट से निपटने में पूरी तरह नाकाम साबित हो चुके हैं। इसके बावजूद वे अपना पद नहीं छोड़ रहे हैं।

विद्यार्थियों ने चेतावनी दी है कि राष्ट्रपति गोतबाया राजपक्षे ने पद नहीं छोड़ा तो वे संसद का घेराव करेंगे। वहीं, इंटर यूनिवर्सिटी स्टूडेंट फेडरेशन (IUSF) ने संसद तक जाने वाले रास्तों को बंद कर दिया है और वहाँ लगातार प्रदर्शन कर रही है। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए आँसू गैस के गोले और वाटर कैनन का इस्तेमाल कर रही है। व्यापार संघ, स्वास्थ्य, डाक, बंदरगाह सहित सरकारी सेवाओं से जुड़े ज्यादातर व्यापार एवं कर्मचारी संघ हड़ताल में शामिल हैं।

इमरजेेंसी लगाने के बाद सरकार सार्वजनिक सुरक्षा, कानून-व्यवस्था, विद्रोह व दंगा और नागरिक आपूर्ति आदि के लिए नियम कठोर नियम बना सकती है। इस दौरान राष्ट्रपति के आदेश के बाद किसी भी व्यक्ति की संपत्ति पर कब्जा किया जा सकता है और किसी भी परिसर की तलाशी ली जा सकती है। बिना कारण बताए किसी को गिरफ्तार भी किया जा सकता है। जरूरत पड़ने पर राष्ट्रपति किसी भी कानून को बदल या निलंबित भी कर सकते हैं।

बता दें कि चीन के कर्ज के जाल में फँसने के बाद श्रीलंका के हालात बेहद खराब हो चुके हैं। आर्थिक संकट के कारण वहाँ के लोगों को जरूरी चीजें तक नहीं मिल रही हैं और महँगाई अपने चरम पर पहुँच गई है। बिजली और परिवहन जैसी मूलभूत आवश्यकताओं की स्थिति जर्जर हो चुकी है। इसको लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन जारी है।

देश में करदाताओं की संख्या 10 लाख घटी

श्रीलंका के वित्त मंत्री अली साबरी ने बताया कि पिछले दो वर्षों में देश में लगभग 10 लाख करदाता कम हो गए हैं। सबरी ने बताया कि साल 2020 के शुरू में देश में 15,50,000 करदाता थे, जो साल 2021 के अंत तक 4,12,000 रह गए। दरअसल, नवंबर 2019 में राष्ट्रपति राजपक्षे सरकार ने अपने चुनावी वादों को पूरा करने के लिए देश में व्यापक कर कटौती की थी। सरकार ने मूल्य वर्धित कर (VAT) को 15 प्रतिशत से घटाकर 8 प्रतिशत कर दिया था और सात अन्य करों को भी समाप्त कर दिया था। सबरी ने इसे सरकार की ऐतिहासिक गलती बताया।

इन कर कटौती के कारण अगले वर्ष देश की क्रेडिट रेटिंग में गिरावट आई और श्रीलंका अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजार में अलग-थलग पड़ गया। जून 2019 में देश का विदेसी मुद्रा भंडार 8,864 मिलियन डॉलर के पर था, जो जनवरी 2022 में 2,361 मिलियन डॉलर पर आ पहुँचा। इसमें कोविड-19 की स्थिति ने और समस्या उत्पन्न की। साल 2018 में श्रीलंका के पर्यटन उद्योग में उछाल आया और $4.4 मिलियन राजस्व के रूप में प्राप्त हुआ, लेकिन कोविड के कारण साल 2021 में यह गिरकर $200 मिलियन तक रह गया।

इसके पहले भी लगा था इमरजेंसी

इसके पहले देश में 1 अप्रैल को आपातकाल लागू किया गया था। हालाँकि, कुछ दिन बाद ही 5 अप्रैल को इसे हटा लिया गया था। दरअसल, उस समय आपातकाल लगाने का निर्णय 31 मार्च 2022 को राष्ट्रपति आवास के बाहर जबरदस्त विरोध प्रदर्शन के बाद लिया गया था। प्रदर्शन के दौरान पुलिस को बल प्रयोग करते हुए 45 लोगों को गिरफ्तार भी किया था। इसके अलावा, अलग-अलग शहरों में कर्फ्यू लगा दी गई थी।

‘हिंदुत्व मतलब नाजीवाद और फासीवाद’ – शारदा यूनिवर्सिटी ने किया उसे सस्पेंड, जिसने बनाया था यह सवाल… माफी भी माँगी

नोएडा स्थित शारदा यूनिवर्सिटी के प्रश्न पत्र में हिंदूवादियों की तुलना फासीवादी और नाजीवादी से करने पर उठे विरोध के बाद बड़ा एक्शन हुआ है। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने प्रश्नपत्र बनाने वाली फैकल्टी को सस्पेंड कर दिया है।

शारदा यूनिवर्सिटी ने यह एक्शन 6 मई 2022 (शुक्रवार) को लिया। साथ ही विश्वविद्यालय के मैनेजमेंट ने उस प्रश्नपत्र के लिए लोगों से माफ़ी भी माँगी है। हालाँकि प्रश्नपत्र बनाने वाले का नाम अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है।

अपने ट्वीट में यूनिवर्सिटी ने आगे कहा, “विश्वविद्यालय प्रशासन हर उस लाइन से कोई इत्तेफाक नहीं रखती जो किसी भी राष्ट्रीय पहचान या संस्कृति के विरोध में हो। हम भारत के सच्चे और स्वर्णिम रूप को दिखाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

इस विवादित पेपर के पाँचवें नंबर पर सवाल किया गया था कि धर्मान्तरण के मूल कारण क्या हैं? वहीं, छठे नंबर पर पूछा गया था – ”क्या आपको नाजीवादी, फासीवादी और हिंदुत्व में कोई समानता दिखती है?” प्रश्न पत्र में दोनों सवालों को विस्तार से बताने के लिए कहा गया था।

यह पूरा विवाद तब उठा था, जब भाजपा नेता विकास प्रीतम सिन्हा ने इसकी फोटो कॉपी ट्वीट करते हुए उसमें पूछे गए एक सवाल को आपत्तिजनक बताया। यह प्रश्न पत्र BA के राजनीति विज्ञान के साल 2021-2022 सत्र का था। विकास प्रीतम के मुताबिक पेपर को कथित रूप से एक मुस्लिम शिक्षक ने बनाया है।

भाजपा नेता ने अपने ट्वीट में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, धर्मेंद्र प्रधान और शलभमणि त्रिपाठी को टैग किया था। इस पेपर के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर शारदा यूनिवर्सिटी के खिलाफ कई नेटीजेंस ट्वीट कर रहे थे।

अपने हिंदू जीजा को मारने वाला मोबिन गिरफ्तार: बहन बोली- मुझे भी फाँसी देने की कोशिश, ओवैसी कह रहे- दिया जा रहा घटना को अलग रंग

हैदराबाद (Hyderabad) में 4 मई 2022 को 25 साल के दलित युवक नागराजू (Nagaraju) की हत्या कर दी गई। वजह उसने 23 साल की मुस्लिम युवती सैयद अशरीन सुल्ताना (Syed Ashreen Sultana) से हिंदू रीति-रिवाज से शादी की थी। शादी के बाद अशरीन ने अपना नाम पल्लवी रख लिया था। इस शादी से गुस्साए अशरीन के भाई ने नागराजू की सरेआम रॉड से पीट-पीटकर और फिर चाकू मारकर हत्या कर दी थी। पुलिस ने आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा इस घटना को अलग रंग देने की कोशिश की जा रही है।

मृतक नागराजू की पत्नी सैयद अशरीन सुल्ताना ने बताया कि दोनों पिछले 10 वर्षों से एक दूसरे को जानते थे और शादी करने का फैसला लिया था। वे दोनों शादी के पहले से ही इसके परिणामों को लेकर चिंतित थे। अशरीन ने बताया कि जब इस बात की जानकारी उसके भाई हुई तो उसने दो बार जान से मारने की कोशिश की थी।

एक न्यूज चैनल को अशरीन ने बताया कि उसकी अम्मी ने उसे चेतावनी दी थी कि अगर उसने दलित हिंदू नागराजू से शादी किया तो उसका भाई दोनों को मार देगा। आशरीन ने बताया कि उसके भाई ने शादी से पहले भी उसे रॉड से मारा था। अशरीन ने आगे कहा, “मेरी शादी से पहले मेरे भाई ने मेरी हत्या करने की कोशिश की थी। उसने मुझे दो बार फाँसी देने की कोशिश की।”

उसने बताया कि शादी के बाद दोनों ने अपने मोबाइल के नंबर भी बदल दिए, ताकि उसका पता ना चले। इसके साथ ही जिले के SP से भी सुरक्षा की गुहार लगाई थी। हालाँकि, शादी के बाद से ही अशरीन का भाई सैयद मोबिन उनकी खोज में लगा था। एक महीना पहले मोबिन ने दोनों पहचानने की कोशिश की थी, लेकिन पहचान नहीं पाया, लेकिन 6 मई को नागराजू और अशरीन को स्कूटी पर साथ जाने के दौरान वह सामने आ गया और रोक कर हत्या कर दी।

अशरीन ने बताया कि जिस दिन यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई, उस दिन नागराजू सुबह ऑफिस के लिए निकल गया और उसे अपनी बहन के पास छोड़ गया, क्योंकि उनकी तबीयत ठीक नहीं थी। रात करीब 8:30 बजे नागराजू पत्नी अशरीन को लेकर घर जाने लगा। इसी दौरान रास्ते में दो हमलावरों ने रोक कर नागराजू को पिटने लगे।

आशरीन ने बताया कि पहले तो वह हमलावरों को नहीं पहचान पाई और पूछा कि उसके पति को क्यों मार रहे हो? पति को बचाने के लिए जब एक हमलावर को उसने धक्का दिया, तब उसने अपने भाई को पहचान लिया। अशरीन ने कहा कि इस घटना में उसके रिश्तेदार शामिल नहीं है। इस हत्या को उसके भाई और भाई के दोस्त मोहम्मद मसूद अहमद ने अंजाम दिया है।

अशरीन के मुताबिक, “घटना के समय वहाँ कई लोग मौजूद थे। मैं उनसे चीख-चीख कर अपने पति को बचाने की मदद माँगती रही लेकिन कोई भी आगे नहीं आया। अंत में मैंने हमलावरों के पैर पकड़ कर कहा कि अगर इसे मारा तो मैं खुद भी मर जाऊँगी। पर इस बात का भी उन पर कोई असर नहीं पड़ा।”

अशरीन ने कहा कि उसका भाई और दोस्त नागराजू को 20 मिनट तक मारते रहे और लोग तमाशा देखते रहे। किसी ने भी बचाने की कोशिश नहीं की। उन्होंने कहा, “अगर तमाशा देखने वालों ने मदद की होती तो मेरे पति आज जिंदा होते. यह केवल हमारे बारे में नहीं है, दुनिया में कहीं भी ऐसा अपराध होने पर लोगों को पीड़ित की मदद के लिए आगे आना चाहिए।” 

अशरीन उर्फ ​​पल्लवी ने कहा, “हमारी शादी के महीनों पहले से मैंने उसे किसी और से शादी करने के लिए मनाने की बहुत कोशिश की थी। मैं नहीं चाहती थी कि मेरी वजह से उसकी जान को कोई खतरा हो, लेकिन वह नहीं माना। उसने कहा था कि जिएँगे तो साथ और मरेंगे तो साथ। लेकिन, मेरे भाई ने उसे मार दिया और मुझे छोड़ दिया।” 

घटना को अलग रंग दिया जा रहा है- ओवैसी

इस घटना पर AIMIM के चीफ और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने घटना की निंदा तो की, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि यह घटना आपराधिक वारदात है और उसे अलग रंग देने की कोशिश की जा रही है।

औवैसी ने कहा, “इस घटना को एक अलग रंग दिया जा रहा है। हम हत्यारों के साथ खड़े नहीं हैं। हम सरूरनगर में हुई (ऑनर किलिंग) घटना की मज्जम्मत करते हैं। महिला ने स्वेच्छा से शादी करने का फैसला किया। उसके भाई को उसके पति को मारने का कोई अधिकार नहीं है। यह संविधान के अनुसार एक आपराधिक कृत्य है और इस्लाम के अनुसार सबसे खराब अपराध है।”

झारखंड के CM सोरेन की करीबी IAS पूजा और उनके करीबियों के ठिकानों पर ED की छापेमारी: 25 करोड़ रुपए बरामद, ससुर अरेस्ट

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (Jharkhand CM Hemant Soren) की खास और खान एवं भूविज्ञान विभाग की सचिव तथा झारखंड राज्य खनिज विकास निगम लिमिटेड (JSMDC) की प्रबंध निदेशक (MD) IAS पूजा सिंघल झा (Pooja Singhal Jha) और उनके करीबियों के करीब 20 ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने छापेमारी की।

इस छापेमारी में एजेंसी को लगभग 25 करोड़ मिले हैं। पैसों को गिनने के लिए मशीन मँगवाना पड़ा। खबर यह भी है कि पूजा के आवास से करीब 25 करोड़ रुपए नकद बरामद हुए हैं। वहीं, कई मीडिया रिपोर्टंस में इसे पूजा के CA के यहाँ से 17 करोड़ जब्त होने की बात कही जा रही है। इसके साथ ही सोरेन के करीबी कारोबारी अमित अग्रवाल के ठिकानों पर भी छापेमारी हुई।

ससुर कामेश्वर झा गिरफ्तार

इसके अलावा, पूजा के पति अभिषेक झा के कई ठिकानों और ससुर के बिहार स्थित मुजफ्फरपुर और मधुबनी के ठिकानों पर भी छापेमारी की गई। बताया जा रहा कि झारखंड कैडर के इस IAS अधिकारी के ससुर कामेश्वर झा को उनके मधुबनी स्थित आवास से गिरफ्तार कर लिया गया है। झा पहले दरभंगा के जनसंपर्क विभाग के अधिकारी रह चुके हैं और पूजा के दूसरे पति अभिषेक झा के पिता हैं।

पति अभिषेक झा के ठिकानों पर भी छापेमारी

प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम ने एक साथ झारखंड के राँची, धनबाद, खूँटी, जयपुर, फरीदाबाद, गुरुग्राम, कोलकाता, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, मधुबनी और दिल्ली-NCR में छापे मारे हैं।पूजा सिंघल ने IAS पति राहुल पुरवार से तलाक लेने के बाद व्यवसायी अभिषेक झा से शादी की है। ED ने अभिषेक झा के राँची में काँके रोड के चाँदनी चौक स्थित पंचवटी रेजिडेंसी, लालपुर के हरिओम टावर स्थित नई बिल्डिंग और बरियातू के पल्स अस्पताल में भी छापेमारी की।

ED ने मनरेगा घोटाले के एक मामले के संबंध में की है। ED ने झारखंड उच्च न्यायालय को बताया था कि झारखंड के खूंटी जिले में मनरेगा में 18.06 करोड़ रुपए के घोटाले के वक्त वहां की उपायुक्त पूजा सिंघल थीं। इस मामले में वहाँ के जूनियर इंजीनियर राम विनोद प्रसाद सिन्हा को पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। उन्होंने ED को बताया था कि कमीशन की राशि उपायुक्त कार्यालय तक पहुँचती थी। 

बता दें कि झारखंड उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव कुमार ने पूजा सिंघल के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति को लेकर ED को शिकायत भी सौंपी थी। फरवरी 2022 को भेजे गए अपनी शिकायत में राजीव ने आरोप लगाया था कि पूजा अपनी मर्जी से रेत खनन के ठेके अपने पसंद के ठेकेदारों को ही दे रही हैं। 

जब पूजा के सामने ही एक फरियादी ने CM को बताया था रिश्वत लेने में उनका नाम

पूजा सिंघल पर रिश्वतखोरी के आरोप लगते रहे हैं। एक बार उनके सामने ही एक व्यक्ति ने उनका नाम ले लिया था। सोरेन से पहले राज्य में रघुवर दास के नेतृत्व में भाजपा की सरकार थी। उस समय रघुवर दास सूचना भवन में जनसंवाद का आयोजन कर आम लोगों से मिलते थे। इसी दौरान धनबाद का एक व्यक्ति उनसे मिलने आया।

धनबाद से आए उस व्यक्ति ने रघुवर दास को बताया कि धनबाद मार्केटिंग बोर्ड में उसकी दुकान है और अधिकारी उससे पैसे माँगता है। वह अधिकारी कहता है कि पैसा ऊपर तक जाता है। राँची में कोई मैडम हैं पूजा सिंघल, उनके पास भी पैसा पहुँचाना पड़ता है। फरियादी जब यह बात कह रहा था, उस वक्त पूजा सिंघल रघुवर दास के साथ ही मौजूद थीं। इस वाकए को सुनकर वह सकपका गईं और शर्म से गड़ गईं। उस समय पूजा सिंघल कृषि सचिव थीं।

पूजा सिंघल पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप

पूजा सिंघल पर भ्रष्टाचार के कई आरोप हैं। उन पर राज्य के चतरा, खूंटी और पलामू जिले में उपायुक्त रहने के दौरान कई वित्तीय अनियमितताओं को अंजाम देने के आरोप हैं। खूंटी में मनरेगा योजना में 18.06 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ, उस वक्त पूजा सिंघल वहाँ उपायुक्त थी। वहीं, चतरा में अगस्त 2007 से 2008 तक पूजा सिंघल उपायुक्त थीं और वहाँ भी उन पर अनियमितता करने के आरोप हैं।

पलामू में उपायुक्त रहने के दौरान उन्होंने करीब 83 एकड़ भूमि एक निजी कंपनी को खनन के लिए ट्रांसफर कर दी। पूजा सिंघल पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, उनके भाई और करीबियों को कौड़ियों के भाव में खान आवंटित करने का आरोप हैं।

तेजिंदर बग्गा को मेडिकल जाँच के लिए दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल ले गई दिल्ली पुलिस, जज के घर में हुई पेशी: जानिए आज का पूरा घटनाक्रम

पंजाब पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद हरियाणा से तेजिंदर पाल सिंह बग्गा को छुड़ाकर दिल्ली पुलिस उन्हें वापस दिल्ली लाई है। उन्हें शुक्रवार (6 मई, 2022) की रात 9 बजे गुरुग्राम में जज के घर पर पेश किया गया। उससे पहले उन्हें दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल मेडिकल जाँच के लिए ले जाया गया। इधर द्वारका कोर्ट पहुँचते ही पंजाब पुलिस के डीएसपी के एस संधू का बीजेपी के कार्यकर्ताओं ने जमकर विरोध किया। हालाँकि, उनका कहना है कि बग्गा के मामले में उन्होंने नियमों के अनुसार कार्रवाई की है।

इधर पंजाब पुलिस के एडीजीपी शरद चौहान भी कुरुक्षेत्र के थानेसर थाने पहुँचे। यहीं पर पंजाब पुलिस के अधिकारियों को रोक कर रखा गया है। वहीं इस मामले में पंजाब पुलिस ने पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट का रुख किया है।

क्या है आज का पूरा घटनाक्रम

गौरतलब है कि शुक्रवार की अल सुबह दिल्ली स्थित घर से पंजाब पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया। इस घटना के बाद बग्गा कि पिता ने दिल्ली के जनकपुरी थाने में बग्गा के अपहरण की शिकायत दर्ज कराई और इसका आरोप पंजाब पुलिस पर लगाया। इसके बाद हरकत में आई दिल्ली पुलिस ने हरियाणा पुलिस से मदद माँगी औऱ हरियाणा पुलिस ने कुरुक्षेत्र में पंजाब पुलिस के काफिले को रोक दिया।

इधर दिल्ली पुलिस की टीम बग्गा को पंजाब पुलिस के चंगुल से छुड़ाने के लिए कुरुक्षेत्र के लिए रवाना हुई औऱ उन्हें वापस दिल्ली लेकर आई।

बता दें कि पंजाब पुलिस पर ये आरोप है कि उसने अवैध तरीके से न सिर्फ बग्गा को गिरफ्तार किया, बल्कि उनके पिता के साथ मारपीट भी की। तेजिंदर बग्गा के पिता ने ऑपइंडिया से बात की। उन्होंने बताया, “पहले मेरे घर में 2 पुलिसकर्मी घुसे। वो मुझ से सामान्य ढंग से बात कर रहे थे। उस समय घर पर तेजिंदर और उनके अलावा कोई नहीं था। उसी समय तेजिंदर कपड़े पहन कर बाहर आए। थोड़ी बातचीत के बाद कई पुलिसकर्मी मेरे घर में जबरन घुस गए। उनके इस काम की मैं वीडियो बनाने लगा। इसी दौरान एक पुलिसकर्मी मुझे खींच कर कमरे की तरफ ले गया और मुझ से हाथापाई की।”

तेजिंदर बग्गा के पिता ने आगे बताया, “इसके बाद वो तेजिंदर को खींच कर बाहर ले गए और हिरासत में ले लिया। पुलिसकर्मियों ने बग्गा को उनकी पगड़ी तक नहीं पहनने दी, जबकि उसने इसे पहनने की गुजारिश की। पुलिसवाले बग्गा का फोन भी अपने साथ ले गए।”

इस मामले में दिल्ली पुलिस ने पंजाब पुलिस पर प्रक्रिया का पालन नहीं करने का आरोप लगाया है। दिल्ली पुलिस का दावा है कि उसे गिरफ्तारी को लेकर पूर्व सूचना नहीं दी गई थी।

नागराजू की हत्या में भी मुस्लिम परिवार के बचाव में कूदा NDTV, हैदराबाद की घटना पर एडिटर ने सांप्रदायिक एंगल से किया इनकार

मुस्लिम महिला से शादी करने के मामले में हैदराबाद की सड़कों पर महिला के परिवार द्वारा हैदराबाद की सड़कों पर हिंदू व्यक्ति नागराजू की बेरहमी से हत्या किए जाने के एक दिन बाद कथित लिबरल मीडिया हाउस ने इस हत्या में धार्मिक एंगल को झुठलाने की कोशिश की है। जबकि पहले से ये स्पष्ट है कि मुस्लिम युवती से शादी करने के कारण हिंदू व्यक्ति की हत्या की गई थी।

इसी इसी क्रम में गुरुवार (5 मई 2022) को विवादित न्यूज नेटवर्क एनडीटीवी की कार्यकारी संपादक उमा सुधीर ने 25 वर्षीय नागराजू की हत्या के मामले में मजहबी एंगल को दबाने की कोशिश की, जिसे दो मुस्लिम पुरुषों ने चाकू मार दिया था। आरोपित की पहचान महिला के भाई के रूप में हुई है।

एक ट्वीट करते हुए उमा सुधीर ने दावा किया कि मृतक नागराजू और उनकी मुस्लिम पत्नी सुल्ताना एक-दूसरे को दस साल से जानते थे और एक-दूसरे से प्यार करते थे, इसलिए शादी की थी। लड़का एससी समुदाय से था और लड़की मुस्लिम समुदाय से है, जो कि एक्सीडेंटल है। किसी को भी इस घटना को सांप्रदायिक या जाति का रंग नहीं देना चाहिए।

फोटो साभार: ट्विटर

नागराजू की नृशंस हत्या पर भारी आक्रोश के बीच उमा सुधीर जैसे लोग अपराध को ‘धर्मनिरपेक्ष’ साबित करने के लिए इसलिए इतना उछलकूद कर रहे हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि लड़की मुस्लिम है। उमा सुधीर जैसे कथित ‘धर्मनिरपेक्ष-लिबरल’ लोग न केवल ये चाहते हैं कि लोग इस हत्या के धार्मिक एँगल की उपेक्षा करें। बल्कि, मुस्लिम समुदाय द्वारा किए गए अपराधों को व्हाइट वॉश करने की कोशिश करें।

नागराजू की हत्या केवल उसकी धार्मिक पहचान अलग होने के कारण उनकी हत्या की गई। बावजूद इसके उमा सुधीर चाहती हैं कि लोग इस कम्युनल एँगल को छोड़ दें और मुस्लिमों का नाम न लें, जिस पर अपने ही जीजा की हत्या का आरोप है। इस तरह के कार्य कुछ और नहीं, बल्कि देश में हिंदुओं के प्रति सांप्रदायिक घृणा, अपराध को तुच्छ बनाने की कोशिश है।

मुस्लिम लड़की से शादी करने के कारण नागराजू की हत्या उसके ही मुस्लिम साले ने कर दी थी। इसका कारण केवल इतना सा था कि उसने हिंदू होकर मुस्लिम महिला से शादी की थी। मुस्लिम हिंदुओं से इस कदर नफरत करते हैं कि आरोपित इस्लाम की धार्मिक पवित्रता की रक्षा के लिए अपनी ही बहन की हत्या करने के लिए उतारू था। लेकिन, फिर भी उमा सुधीर चाहती हैं कि लोग विश्वास करें कि इस घटना में कोई धार्मिक एंगल नहीं है।

हिंदू नहीं होते तो जिंदा होते नागराजू

नागराजू अगर हिंदू नहीं होते और किसी गैर मुस्लिम से शादी नहीं करते तो शायद वो जीवित होते। नागराजू की पत्नी सुल्ताना ने खुलासा किया था कि 25 वर्षीय मार्केटिंग मैनेजर पत्नी के लिए धर्मान्तरण कर इस्लाम अपनाने को तैयार था। लेकिन फिर भी उसकी हत्या कर दी गई।

गौरतलब है कि बुधवार को नागराजू पर सुल्ताना के भाई सैयद मोबिन अहमद और मोहम्मद मसूद अहमद ने लोहे की रॉड से हमला किया। उसे चाकू मार दिया गया। इसमें वो गंभीर रूप से घायल हो गया था, इसके कारण उसकी मौके पर ही मौत हो गई। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इसका वीडियो भी वायरल हुआ था।

हिंदुओं को सबक सिखाने की थी पूरी तैयारी: अदालत ने दिल्ली हिन्दू विरोधी दंगों के आरोपित ताहिर हुसैन समेत 6 पर तय किए आरोप

दिल्ली की एक अदालत ने शुक्रवार (6 मई) को 2020 के दिल्ली हिंदू विरोधी दंगों के संबंध में AAP के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन के खिलाफ आरोप तय कर दिए। कोर्ट ने कहा कि ताहिर हुसैन दंगों में सक्रिय भागीदार था न कि मूकदर्शक। दरअसल, कोर्ट करण नाम के एक व्यक्ति द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा था। करण का दिल्ली के खजूरी खास इलाके के चांद बाग में एक गोदाम था, जिसे ताहिर हुसैन के नेतृत्व में उन्मादी भीड़ ने नष्ट कर दिया गया था।

सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश वीरेंद्र भट ने कहा, “वहाँ ताहिर हुसैन के घर से पत्थर और बम आदि फेंके जा रहे थे… वह मूकदर्शक नहीं, बल्कि दंगों में सक्रिय भाग ले रहा था और गैरकानूनी रूप से लोगों को जुटाए गए अन्य लोगों को दूसरे समुदाय से संबंधित व्यक्तियों को सबक सिखाने के लिए उकसा रहा था।”

कोर्ट ने कहा कि हुसैन और 5 अन्य अर्थात् शोएब, गुलफाम, जावेद, फिरोज और अनस के बीच हिंदू समुदाय से संबंधित संपत्तियों की आगजनी और तोड़फोड़ करने का समझौता था। आप के पूर्व पार्षद ने यह सुनिश्चित करने के लिए ‘विस्तृत तैयारी’ की थी कि उनकी योजना वास्तविकता बन जाए।

न्यायाधीश ने आगे कहा, “उपरोक्त परिस्थितियाँ कहीं भी यह संकेत नहीं देती हैं कि यह एक अचानक हुआ कृत्य था, बल्कि यह स्पष्ट रूप से प्रकट करता है कि आरोपी ताहिर हुसैन की इमारत ई-17 से हिंदू समुदाय की संपत्तियों में तोड़फोड़ और आगजनी करने के लिए प्रयोग किया गया था। इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए विस्तृत तैयारी की गई थी।”

अदालत ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 120बी (आपराधिक साजिश), 147 (दंगा), 148 (सशस्त्र दंगा), 149 (गैरकानूनी सभा), 395 (डकैती) और 427, 435 और 436 के तहत 6 लोगों के खिलाफ आरोप तय किए। ताहिर हुसैन पर IPC की अन्य धाराओं के अलावा धारा 109 और 114 का भी आरोप लगाया गया।

दिल्ली दंगों में ताहिर हुसैन की भूमिका

ऑपइंडिया ने पहले बताया था कि कैसे ताहिर हुसैन ने एक बयान में कबूल किया था कि उन्होंने दंगों के लिए अपने घर को लॉन्चपैड के रूप में चुना था। यह देखते हुए कि उसका घर एक ऊँची इमारत थी और उस समय निर्माणाधीन थी, बिना किसी दिक्कत के ईंट और पत्थरों को इकट्ठा किया जा सकता था।

ताहिर हुसैन ने कबूल किया कि उसने और उसके अन्य साथी साजिशकर्ताओं ने पहले से ही पत्थर-ईंट और अन्य गोला-बारूद इकट्ठा करना शुरू कर दिया था, ताकि वे उन लोगों को सिखा सकें, जो CAA के समर्थन में थे। दंगा भड़कने के 2-3 दिन पहले उसने थाने से अपनी लाइसेंसी पिस्टल भी छुड़ा ली थी।

हिंदुओं को सबक सिखाने के लिए गोला-बारूद इकट्ठा करते हुए ताहिर हुसैन ने कहा कि उसने अपने समर्थकों को ‘किसी भी चीज़ के लिए और हर तरह से तैयार’ रहने के लिए कहा था। उसने यह भी सुनिश्चित किया था कि इलाके के सभी सीसीटीवी कैमरे को तोड़ दिया जाए, ताकि दंगों के सबूत ना मिल सकें। दंगों के दौरान वह अपने भाइयों के साथ घर में मौजूद था।

अकेले नेपाल नहीं गए थे राहुल गाँधी, 2 और गाँधी भी थे साथ: पार्टी Video में दिखी महिला को लेकर भी नया दावा

कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गाँधी (Congress Leader Rahul Gandhi) हाल ही में एक शादी में शिरकत करने के बाद नेपाल (Nepal) से लौटे हैं। उनके साथ दो अन्य लोग भी उस समारोह में गए थे। इनका नाम है- सुब्रमण्यम गाँधी और कलावती गाँधी। राहुल गाँधी का नेपाल यात्रा का एक वीडियो वायरल काफी वायरल हुआ था, जिसमें वह एक महिला के साथ पार्टी करते हुए नजर आ रहे हैं। ताजा रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि वह भारतीय मूल की एक पुर्तगाली महिला थी और कहा जाता है कि वह अमेरिका में पढ़ाई कर रही है। नेपाल के सबसे बड़े समाचार पत्र, कांतिपुर नेशनल डेली के हवाले से यह दावा किया जा रहा है। 

हालाँकि, इससे पहले सोशल मीडिया यूजर्स ने दावा किया था कि वीडियो में दिख रही महिला चीन की राजदूत होउ यांकी (Hou Yanqi) हैं। जो वीडियो वायरल हो हुआ है, उसमें राहुल गाँधी तेज संगीत के बीच पार्टी करते दिख रहे हैं। राहुल गाँधी बीच-बीच में उस महिला के कान में कुछ कहते हुए भी दिखाई दिए। इस वीडियो के सामने आने के बाद राहुल गाँधी कई तरह के सवालों के घेरे में आ गए। नेटिजन्स ने सवाल उठाए कि कहीं ये राहुल की चीनी कनेक्शन तो नहीं है।

इसके बाद तेलंगाना कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष और सांसद रेवंत रेड्डी (Telangana Congress president Revanth Reddy) ने काठमांडू नाइट क्लब में राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) के साथ देखी गई महिला को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही खबरों को सही ठहराया था। उन्होंने स्वीकार किया था कि क्लब में राहुल गाँधी के साथ देखी गई महिला कोई और नहीं, बल्कि चीन की राजदूत होउ यांकी (Hou Yanqi) ही हैं। स्थानीय मीडिया से बात करते हुए रेवंत रेड्डी ने कहा था कि राहुल गाँधी ने नेपाल की राजधानी काठमांडू के एक नाइट क्लब में चीनी राजदूत (Chinese Ambassador) से मुलाकात की थी।

पार्टी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद कॉन्ग्रेस राहुल गाँधी के बचाव में हाथ-पैर मारने लगी। लगातार ट्वीट कर उनकी तारीफ की जाने लगी। कुछ मीडिया हाउस भी थे, जो कॉन्ग्रेस नेता के बचाव में हाथ-पैर मार रहे थे। महिला की पहचान उजागर करने के लिए इन संस्थानों ने फैक्ट चेक भी कर दिया। इसी में से एक था- इंडिया टुडे।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट ने वीडियो में दिख रही महिला को लेकर किए जाने वाले दावे को निराधार बताया। संस्थान ने कहा कि राहुल गाँधी जिस महिला से बात कर रहे हैं, वह चीन की राजदूत नहीं हैं। वह महिला नेपाल की है और दुल्हन की फ्रेंड है। काठमांडू के जिस लॉर्ड ऑफ ड्रिंक्स पब में कॉन्ग्रेस नेता पार्टी के लिए गए थे, उसके सीईओ राबिन श्रेष्ठ के हवाले से इंडिया टुडे ने बताया कि उनके साथ दिख रही ​महिला चीनी राजदूत नहीं है। उन्होंने कहा, “वह दुल्हन की फ्रेंड है, जिसे शादी में आमंत्रित किया गया था।”

यही नहीं इंडिया टुडे ने नेपाल के जाने-माने अखबार काठमांडू पोस्ट (The Kathmandu Post) के पत्रकार अनिल गिरि से भी संपर्क करने का दावा किया। उन्होंने पुष्टि की कि वायरल वीडियो में दिखाई दे रही महिला नेपाल की रहने वाली है। उन्होंने कहा, “वह महिला चीनी राजदूत नहीं है, बल्कि दुल्हन पक्ष की ओर से आमंत्रित एक नेपाली महिला है।” हालाँकि इंडिया टुडे ने इस महिला का नाम नहीं बताया। 

बता दें कि चीनी राजदूत होउ यांकी वही हैं, जिन पर हनीट्रैप का सहारा लेकर अपने देश का हित साधने के आरोप लगते रहे हैं। राहुल गाँधी जिस कार्यक्रम में दिख रहे हैं, वो सुमनिमा उदास का आयोजन था। सुमनिमा उदास उनकी दोस्त हैं, जिनके निमंत्रण पर राहुल गाँधी नेपाल पहुँचे थे।

1140 मस्जिदों में से 950 को मिली लाउडस्पीकर बजाने की अनुमति वहीं 2400 मंदिरों में से इजाजत केवल 24 को: मुंबई पुलिस

महाराष्ट्र में लाउडस्पीकर पर हनुमान चालीसा और अजान को लेकर जारी विवाद के बीच बुधवार (4 मई 2022) को कहा कि मुंबई में 2400 मंदिर हैं, जिनमें से केवल 24 ने ही लाउडस्पीकर का इस्तेमाल करने की इजाजत प्राप्त की है। जबकि, 1,140 मस्जिदों में से 950 को अधिकारियों से लाउडस्पीकर का उपयोग करने की मंजूरी मिली है।

एक अधिकारी के मुताबिक मुंबई पुलिस के पास जो आँकड़े उपलब्ध हैं, उसके अनुसार मुंबई में केवल 1% मंदिरों ने ही अपने परिसरों में लाउडस्पीकर बजाने के लिए इजाजत माँगी है। इसके अलावा चर्च, गुरुद्वारों, बुद्ध विहारों और प्रार्थनाघरों जैसे दूसरे पवित्र स्थलों द्वारा इस लाउडस्पीकर के इस्तेमाल के आँकड़ों को पुलिस द्वारा अभी एकत्र किया जा रहा है। अधिकारी के मुताबिक, इन पूजा स्थलों के प्रबंधन को लाउडस्पीकर लगाने के लिए अनुमति लेने के लिए कहा जाएगा।

गौरतलब है कि मनसे के अध्यक्ष राज ठाकरे द्वारा मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने की माँग के बीच बुधवार की शाम को मुंबई पुलिस के कमिश्नर संजय पांडे के कार्यालय में बैठक की गई थी। इस दौरान लाउड स्पीकर के उपयोग को लेकर चर्चा की गई थी। अधिकारी के मुताबिक, मंदिरों, मस्जिदों आदि पवित्र जगहों पर सुबह 6 बजे से रात 10 बजे के दौरान सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों को तहत बजाने को कहा गया है।

बैठक में शामिल उपनगरीय मुंबई के खरदंडा मंदिर के ट्रस्टी चिंतामणि नेवते ने कहा कि राजनेताओं को लोगों की धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा, “राजनेताओं को चुनाव के लिए ऐसे मुद्दों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।” दादर में एक जैन मंदिर के सचिव ने कहा कि धार्मिक स्थलों पर डेसिबल की सीमा 50 निर्धारित की गई है। उन्होंने दावा किया कि घरों में इस्तेमाल होने वाले मिक्सर और ग्राइंडर का शोर इससे अधिक था।”

इस मसले पर मनसे चीफ राज ठाकरे ने कहा, “जहाँ तक ​​मुझे पता है, मुंबई में 1,140 से अधिक मस्जिदें हैं। इनमें से 135 मस्जिदों ने दिशानिर्देशों का उल्लंघन करते हुए सुबह 5 बजे अज़ान की। हम राज्य में शांति चाहते हैं। मैं पुलिस से पूछना चाहता हूँ कि आप केवल हमारे कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं। मेरा कहना है कि मस्जिदों से सभी अवैध लाउडस्पीकरों को हटा दिया जाना चाहिए, जब तक उन्हें हटा नहीं दिया जाता है, हम अपना आंदोलन जारी रखेंगे।”

जाने कौन है वो जिसने 700 साल पुराने पवित्र पेड़ पर नग्न फोटोशूट कराकर हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुँचाई, हो सकती है 6 साल की जेल

इंडोनेशिया की राजधानी बाली में स्थित 700 साल पुराने एक पवित्र पेड़ पर नग्न फोटोशूट कराने वाली मॉडल चर्चा में है। यह पेड़ बाली के बाबाकन मंदिर में है। स्थानीय लोग कई वर्षों से इस विशालकाय पेड़ को पवित्र मानते हैं और उसकी पूजा करते हैं। इसलिए नेकेड फोटोशूट की वजह से हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुँची है। इसकी वजह से लोग काफी गुस्से में हैं।

रूस की योग इंफ्लूएंसर और इंस्टाग्राम स्टार अलीना फजलीवा (yoga influencer Alina Fazleeva) के नग्न फोटोशूट को लेकर सोशल मीडिया पर काफी बवाल होने के बाद उनके खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई गई ​है। बताया जा रहा है कि बाली के रहने वाले आंत्रप्रेन्योर नीलुह जेलांटिको की नजर जब इस फोटो पर पड़ी, तो उन्होंने इसकी सूचना लोकल पुलिस को दी। नीलुह ने कहा कि रूसी लड़की 700 साल पुराने (Weeping Paperbark Tree) (वहाँ के लोग इसे kayu putih कहते हैं) के नीचे नग्न होकर फोटोशूट करा रही थी। नीलुह ने यह भी बताया कि इमिग्रेशन अधिकारी उस रूसी योग इंफ्लूएंसर को ट्रैक कर रहे हैं।

अगर इंस्टाग्राम पर 17,000 से अधिक फॉलोअर्स वाली मशहूर योग इंफ्लूएंसर अलीना इस मामले में लोकल पोर्न लॉ के तहत दोषी पाई जाती हैं, तो उन्हें 6 साल तक की जेल या फिर करीब 52 लाख रुपए के जुर्माने की सजा हो सकती है। हालाँकि, मामले के तूल पकड़ने के बाद अलीना ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट से इस फोटो को डिलीट कर दिया है। इसके बाद वह पवित्र पेड़ के पास दोबारा गई और वहाँ प्रार्थना की। साथ ही सोशल मीडिया पर 4 मई को अपने कृत्य के लिए माफी माँगते हुए एक वीडियो भी पोस्ट किया।

उन्होंने लिखा, “मैं बाली और इंडोनेशिया के सभी लोगों से माफी माँगती हूँ। मैं अपने किए पर शर्मिंदा हूँ। मैं आप लोगों की भावनाओं को आहत नहीं करना चाहती थी, लेकिन मुझे इस जगह के बारे में कोई जानकारी नहीं थी।”

अलीना आगे लिखती हैं, “मैंने बस पेड़ के नीचे प्रार्थना की और फिर सीधे पुलिस स्टेशन गई। मैंने उन्हें इस मामले के बारे में बताया और माफी माँग ली है।” पुलिस प्रवक्ता रानेफली डियान कैंड्रा ने बताया कि एलीना खुद अधिकारियों के पास पहुँची थी। केस में आगे की कार्रवाई की जा रही है।

हालाँकि, उन्होंने यह उल्लेख नहीं किया कि उन्हें किस सजा का सामना करना पड़ सकता है। रिपोर्टों के अनुसार, अगर एलीना प्रोनोग्राफी फैलाने की दोषी पाई जाती हैं, तो उनके खिलाफ सख्त इंफॉर्मेशन और इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजैक्शन्स एक्ट के तहत कार्रवाई हो सकती है।