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बंगाल में उस BJP वर्कर के परिजनों से मिले अमित शाह, जो फँदे से लटके मिले थे: कहा- होगी CBI जाँच

केंद्रीय गृह अमित शाह (MHA Amit Shah) पश्चिम बंगाल (West Bengal) के दो दिवसीय दौरे के बीच कोलकाता (Kolkata) पहुँचे, जहाँ वो शुक्रवार (6 मई 2022) को मृत पाए गए बीजेपी के कार्यकर्ता अर्जुन चौरसिया के काशीपुर स्थित घर गए और पीड़ित परिजनों से मिले। उन्होंने मामले में सीबीआई जाँच की बात कही है। इस मामले में गृह मंत्रालय ने पश्चिम बंगाल सरकार से रिपोर्ट तलब की है।

रिपोर्ट के मुताबिक, गृह मंत्री ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा, “कल उन्होंने (ममता बनर्जी) पहला साल पूरा किया, ऐसा लगता है कि वो एक तरह का मैसेज देना चाहती हैं कि वो रुकेंगी नहीं। मैंने परिवार के साथ विस्तृत बातचीत की है। वे अपने बेटे को खोने और जिस तरह से उसका शव उनसे छीन लिया गया था, उससे वे निराश हैं। हमारी पार्टी ने कोर्ट का रुख किया है। सीबीआई जाँच होनी चाहिए और दोषियों को सजा मिलनी चाहिए। ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि प्रशासन ने आरोपितों को गिरफ्तार करने की बजाय जबरदस्ती शव को कब्जा लिया है।”

बता दें कि मृतक अर्जुन चौरसिया (26) भारतीय जनता युवा मोर्चा के उपाध्यक्ष थे। वो घोष बागान इलाके में शुक्रवार की सुबह फाँसी के फंदे से लटके पाए गए थे। इस मामले में बीजेपी सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) पर हत्या का आरोप लगा रही है। हालाँकि, टीएमसी के सांसद शांतनु सेन ने इन आरोपों को निराधार बताया है।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, अर्जुन की माँ लक्ष्मी चौरसिया ने बताया कि अर्जुन अपने बड़े भाई के साथ एक अंडरवियर फैक्ट्री में काम करता था। उन्होंने कहा, “उसकी हत्या हुई है। मैं सीबीआई जाँच की माँग करती हूँ। मेरा बेटा एक खुशमिजाज इंसान था। वह कभी आत्महत्या नहीं कर सकता। उनके पास इसका कोई कारण नहीं था।”

इससे पहले बंगाल बीजेपी नेता दिलीप घोष ने ट्विटर पर लिखा है, “अभिजीत सरकार के बाद एक और युवा भाजपा कार्यकर्ता, 27 वर्षीय अर्जुन चौरसिया की TMC के राजनीतिक आतंकियों ने हत्या कर दी और कोलकाता में फाँसी पर लटका दिया। टीएमसी राजनीतिक हत्याओं की घिनौनी संस्कृति को आगे बढ़ाकर लोकतंत्र का गला घोंटने पर आमादा है।”

एकदम स्वस्थ थे अर्जुन

अर्जुन की मौत के मामले में उत्तर कोलकाता के भाजपा अध्यक्ष कल्याण चौबे का कहना था कि अर्जुन एकदम स्वस्थ्य थे। उन्होंने कल उनके नेतृत्व में 200 बाइक की रैली आयोजित करने की योजना भी बनाई थी, लेकिन आज सुबह उन्हें घोष बागान रेल यार्ड में मृत पाया गया। काफी हंगामे के बाद बीजेपी कार्यकर्ताओं ने डेड बॉडी को ले जाने दिया। पूरे इलाके को चितपुर थाने की पुलिस ने सील कर दिया है। लाल बाजार इलाके की खुफ़िया विभाग की साइंटिफिक टीम घटनास्थल पर मौजूद है।

आज हैदराबाद में नागराजू की हत्या, कभी गोविंदपुर में हरेंद्र की माँ का रेप: आम्बेडकर ने भी बताया था ‘मुस्लिम’ हो महिला तो नहीं होता ‘प्रेम’ कबूल

स्वतंत्रता के इतने वर्षों बाद भी मुस्लिम लड़कियों से प्रेम के बदले हिन्दू युवकों की हत्याओं, धर्म परिवर्तनों एवं उनके परिवार जनों पर अत्याचारों का सिलसिला लगातार जारी है। यहाँ पिक्चर बहुत साफ़ होते हुए भी ‘लव हेस नो रिलिजन’ जैसी कलात्मक सुर्खियाँ देने वालों की कमी नहीं!

दो दिन पहले (4 मई, 2022) हैदराबाद में एक मुस्लिम लड़की से शादी करने पर हिन्दू युवक की पीट-पीट कर हत्या कर दी गई। नागराजू और अशरीन सुल्ताना ने 3 महीने पहले मनमर्जी से शादी की थी। घटना की उस रात पति-पत्नी दोनों टू-व्हीलर से कहीं जा रहे थे तभी मोबिन और मसूद ने अपने साथियों के साथ सरेआम रॉड और चाकू मार-मार कर नागराजू की हत्या कर दी।

यदि लड़की हिन्दू हो तो मुसलमान ‘प्रेम के मसीहा’ बन जाते हैं, लेकिन लड़की यदि उनके कौम की निकले तो समूची मुस्लिम-आबादी उस हिन्दू लड़के को अपना दुश्मन मान लेती है और अपमान का बदला लेने के लिए जिहाद का रास्ता इख़्तियार कर लेती है। इस विषय में डॉ. बी.आर. आम्बेडकर द्वारा अपनी पुस्तक ‘Pakistan or Partition of India’ में उल्लेखित 27 जून, 1936 को बंगाल के गोविंदपुर गाँव में हुई एक घटना शिक्षाप्रद है।

गोविंदपुर में राधावल्लभ नामक हिंदू का हरेंद्र नाम का एक बेटा था। इसी गाँव में दूध बेचने वाली एक मुस्लिम महिला भी रहती थी। गाँव में स्थानीय मुसलमानों को हरेंद्र का दूध बेचने वाली मुस्लिम औरत से संबंध का शक था। उन्हें इस बात का गुस्सा था कि एक मुस्लिम महिला एक हिंदू की रखैल बनकर कैसे रह सकती है। इसलिए उन्होंने फैसला किया कि अपमान का बदला राधावल्लभ के परिवार से लिया जाएगा। गोविंदपुर के मुसलमानों ने एक बैठक में हरेंद्र को बुलाया और बुरी तरह से उसे मारा-पीटा। जिस मैदान में बैठक हुई थी बाद में हरेंद्र वहीं बेहोश पड़ा मिला।

इस हमले के बाद भी मुसलमान संतुष्ट नहीं हुए। उन्होंने राधावल्लभ से कहा कि जब तक उसका परिवार और बच्चे इस्लाम धर्म ग्रहण नहीं कर लेते तब तक वे उसके बेटे द्वारा किए गए गलत काम को माफ नहीं करेंगे। तब राधावल्लभ ने अपनी पत्नी और बच्चों को अन्यत्र भेजने की योजना बनाई। लेकिन मुसलमानों को इस योजना का पता चल गया। अगले दिन जब राधावल्लभ की पत्नी कुसुम अपना आँगन धो रही थी, तभी कुछ मुसलमान आए और उसे उठाकर ले गए। कुछ दूर ले जाने के बाद दो मुसलमानों ने उसके साथ बलात्कार किया और उसके जेवर उतार लिए। बाद में जब वह होश में आई तो जैसे-तैसे अपने घर पहुँची। घर पहुँच कर उसने अपने आप को एक कमरे में बंद कर लिया। लेकिन मुसलमानों ने फिर से उसका पीछा किया और उसके कमरे का दरवाजा तोड़कर उसे पकड़ लिया। हमलावर कुसुम को सड़क पर ले आए और उसे धमकी दी कि अब उसके साथ सड़क पर ही बलात्कार किया जाएगा।

साभार: Pakistan or Partition of India

इसी बीच गोविंदपुर के मुसलमानों ने कुसुम के पति राधावल्लभ को बहुत ही अपमानजनक स्थिति में (शायद नंगा कर के) गोविंदपुर की सड़कों पर घुमाया। अगले दिन मुसलमानों ने गोविंदपुर से पुलिस थाने जाने वाली सड़कों को ब्लॉक कर दिया ताकि राधावल्लभ और उसकी पत्नी में से कोई भी रिपोर्ट लिखवाने ना जा सके।

गोविंदपुर की घटना से लेकर आज हैदराबाद की घटना तक, प्रेम के संबंध में मुस्लिम-कौम की सोच में तनिक भी फर्क नहीं आया है। प्रेम के बदले में बिना किसी पश्चाताप, बिना किसी डर और बिना किसी शर्म के मुसलमान इस तरह के कृत्य करते रहते हैं। सबसे बड़ी बात, उनके भाई-बिरदारी वालों ने ना कल इसे बुरा कहा ना आज कह रहे हैं। इतने वर्षों से यही पैटर्न फॉलो होता आया है, फिर भी हिन्दू समाज इस जिहादी मानसिकता को समझने में असफल रहा है। हिन्दू समाज आज भी हिन्दू-मुस्लिम एकता और इस्लामी-भाईचारे के भ्रम में जी रहा है।

‘उसे कभी मत बताना, मैं ही उसकी माँ हूँ’: बच्ची के जैविक माता-पिता निकले भाई-बहन, कस्टडी को लेकर महिला ने रखी शर्त

गुजरात में कलोल (Kalol, Gujarat) की एक मजिस्ट्रेट अदालत ने सात साल तक अनाथालय में रहने वाली सात वर्षीय बच्ची की कस्टडी अब उसके पिता को दे दी है। माँ ने बच्ची को पिता को सौंपने से पहले एक शर्त रखी है कि वह जिंदगी में उसे कभी नहीं बताएगा कि वह उसकी माँ है और कभी भी उसे उसके पास नहीं लाएगा।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट ने माँ के व्यवहार पर हैरानी और दुख जताया है, जो बच्ची को अपने पास रखने के लिए तैयार नहीं है। बच्ची के जैविक माता-पिता चचेरे भाई-बहन हैं, जो मेहसाणा के राणासन गाँव के रहने वाले हैं। उनकी शादी नहीं हुई है। दोनों के बीच अवैध संबंधों के बाद इस बच्ची का जन्म हुआ था। वे इसका गर्भपात भी नहीं करा सके, इसलिए दोनों ने इसे गुपचुप तरीके से जन्म देने की योजना बनाई।

बच्ची के जन्म के दूसरे दिन यानी (5 अक्टूबर 2015) को दोनों अर्जुनपुरा गाँव में एक बस स्टॉप के पास पहुँचे। यहाँ दोनों बच्ची को छोड़ने वाले थे, तभी कुछ स्थानीय लोगों ने उन्हें ऐसा करते हुए देख लिया और पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस ने खिलाफ बच्ची को अज्ञात जगह पर छोड़कर भागने के मामले में एफआईआर दर्ज की और बच्ची को गाँधी नगर सिविल अस्पताल ले जाया गया। अब उसे कालूपुर के एक अनाथालय में रखा गया है।

बताया जा रहा है कि मजिस्ट्रेट अदालत ने सबूतों के अभाव में बच्ची के जैविक माता-पिता को बरी कर दिया था। हालाँकि, पिता अपनी बच्ची से बेहद प्यार करता था, उसने उसे पाने के लिए कोर्ट में आवेदन किया कि वह बच्ची की कस्टडी चाहता है। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट दीपा ठाकर ने पिता के अनुरोध पर गौर किया।

अदालत ने निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि माँ को बच्ची के प्रति कोई स्नेह नहीं था, जबकि पिता ने उसकी कस्टडी पर जोर दिया, क्योंकि वह नहीं चाहता था कि उसकी बच्ची को सब अनाथ कहें। अदालत ने अपने आदेश में जैविक माँ के बयानों को भी विस्तृत रूप से दर्ज किया है। उसने कहा था, “अगर बच्चा किसी को दिया जाता है तो मुझे कोई समस्या नहीं है, लेकिन उसका मेरे साथ कोई संबंध नहीं होना चाहिए।”

महिला ने अदालत से कहा, “मैं बच्ची को नहीं रखना चाहती हूँ, क्योंकि मुझे समाज का डर है। अगर कोई मुझसे पूछेगा कि वह किसकी संतान है, तो मुझे इस सवाल का जवाब देने में शर्म महसूस होगी। अगर बेटी की कस्टडी उसके पिता को दी जाती है तो मेरी केवल यही शर्त होगी कि वह उसे मेरे पास कभी नहीं लाएगा और उसे कभी यह नहीं बताएगा कि मैं ही उसकी माँ हूँ।”

गुंडागर्दी पर उतरी पंजाब पुलिस, ये अपहरण नहीं तो क्या? : तेजिंदर बग्गा की गिरफ्तारी पर माँ ने केजरीवाल पर साधा निशाना, पिता ने दर्ज कराई शिकायत

बीजेपी नेता तेजिंदर पाल सिंह बग्गा (Tajinder Pal Singh Bagga) को हरियाणा के कुरुक्षेत्र से दिल्ली लाया जा रहा है। हरियाणा पुलिस ने बग्गा को दिल्ली पुलिस को सौंप दिया है और पंजाब पुलिस खाली हाथ रह गई है। इधर, आम आदमी पार्टी के दफ्तर के बाहर विरोध प्रदर्शन भी जारी है। वहीं पूरा मामला पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट पहुँच गया है। हाई कोर्ट ने सभी पक्षों को जवाब दाखिल करने के आदेश दिए हैं।

इस बीच बग्गा के माता-पिता ने पंजाब पुलिस पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। बग्गा के पिता प्रीतपाल सिंह ने इस संबंध में पुलिस के समक्ष शिकायत दर्ज करवाई है। उन्होंने ANI से बात करते हुए कहा, “मैंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है कि मुझे पंजाब पुलिस के जवानों ने पीटा। मैंने अभी तक तेजिंदर से बात नहीं की है। मैं दिल्ली पुलिस को उनके सहयोग के लिए धन्यवाद देता हूँ।”

इससे पहले इस घटनाक्रम पर तेजिंदर बग्गा के पिता ने ऑपइंडिया से बात करते हुए बताया था, “पहले मेरे घर में 2 पुलिसकर्मी घुसे। वो मुझ से सामान्य ढंग से बात कर रहे थे। उस समय घर पर तेजिंदर और उनके अलावा कोई नहीं था। उसी समय तेजिंदर कपड़े पहन कर बाहर आए। थोड़ी बातचीत के बाद कई पुलिसकर्मी मेरे घर में जबरन घुस गए। उनके इस काम की मैं वीडियो बनाने लगा। इसी दौरान एक पुलिसकर्मी मुझे खींच कर कमरे की तरफ ले गया और मुझ से हाथापाई की।”

तेजिंदर के पिता ने आगे बताया, “इसके बाद वो तेजिंदर को खींच कर बाहर ले गए और हिरासत में ले लिया। पुलिसकर्मियों ने बग्गा को उनकी पगड़ी तक नहीं पहनने दी, जबकि उसने इसे पहनने की गुजारिश की। पुलिस वाले बग्गा का फोन भी अपने साथ ले गए।”

वहीं भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के राष्ट्रीय सचिव, तजिंदर बग्गा की माँ कमलजीत कौर का कहना है पुलिसकर्मियों ने उन्हें जबरन खींच लिया। कौर ने कहा, “उन्होंने (बग्गा को) उनकी पगड़ी पहनने का समय भी नहीं दिया।” कमलजीत कौर ने यह भी आरोप लगाया कि पंजाब पुलिस ने न तो प्रोटोकॉल का पालन किया और न ही बग्गा की गिरफ्तारी से संबंधित कोई दस्तावेज पेश किया और न ही उन्होंने स्थानीय पुलिस इकाई को इसके बारे में सूचित किया। उन्हेंने सवाल करते हुए पूछा, “पंजाब पुलिस ने ‘गुंडों’ की तरह काम किया, आम आदमी के पोशाक में पहुँचे और उसे ले गए। यह अपहरण नहीं तो और क्या है?” 

उन्होंने ANI से बात करते हए कहा, “हमने कहा कि किसी की पीड़ा का मजाक उड़ाना और कश्मीर फाइल्स का मजाक उड़ाना सही नहीं है और उन्हें (AAP) माफी माँगनी चाहिए। उन्होंने माफी नहीं माँगी, उन्होंने (तेजिंदर बग्गा) कहा कि भाजयुमो उन्हें शांति से नहीं रहने देगा। उन्होंने (अरविंद केजरीवाल) उनके (तजिंदर बग्गा) खिलाफ FIR दर्ज की कि वह उन्हें जान से मारने की धमकी दे रहे हैं। पंजाब पुलिस उनके हाथ में है तो वह इस तरह की गुंडागर्दी करेंगे।”

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को संबोधित करते हुए बग्गा की माँ ने उन्हें ‘गुंडागर्दी’ नहीं करने की चेतावनी दी। उन्होंने कहा, “अगर आपको कोई समस्या है, तो दिल्ली पुलिस में उचित तरीके से FIR दर्ज करवाएँ। हम अदालत में सही से केस लड़ेंगे। सही और गलत का फैसला कानूनी रूप से किया जाएगा।”

मस्जिद कमिटी की धमकी के बावजूद ज्ञानवापी मस्जिद में वीडियोग्राफी शुरू: कड़ी सुरक्षा के बीच लगे अल्लाह-हू-अकबर के नारे

अदालत के आदेश के बाद उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में वाराणसी की काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी मस्जिद परिसर (Gyanvapi Masjid) की वीडियोग्राफी और सर्वे का काम (6 मई 2022) से शुरू हो गया। वाराणसी सिविल कोर्ट ने ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में श्रृंगार गौरी सहित अन्य मूर्तियों में दर्शन पूजा और सुरक्षा की माँग वाली याचिका पर सुनवाई करने के बाद यह आदेश दिया था। ऐतिहासिक आधार पर ज्ञानवापी मस्जिद को काशी विश्वनाथ मंदिर को तोड़कर बनाया गया है और दोनों आपस में सटे हुए हैं।

ताजा जानकारी के मुताबिक, ज्ञानवापी मस्‍जिद पर‍िसर में कोर्ट कमिश्नर सहित हिंदू और मुस्लिम पक्ष के वादी और वकीलों ने अंदर प्रवेश किया। इस दौरान सर्वे का विरोध कर रहे मुस्लिम पक्ष के लोग काशी विश्वनाथ मंदिर के गेट नंबर 4 पर जमकर अल्लाह-हू-अकबर के नारे लगाए। वहीं, दूसरे पक्ष ने भी नारेबाजी के विरोध में हर-हर महादेव के नारे लगाए। इलाके में भारी भीड़ और माहौल के देखते हुए पुलिस भीड़ को हटाने में लगी है। यह वीडियोग्राफी तीन-चार दिन तक चलेगी।

बता दें कि ज्ञानवापी मस्जिद समिति ने कोर्ट के आदेश के बावजूद कहा था कि वह मस्जिद के अंदर वीडियोग्राफी की अनुमति नहीं देगी। इसे देखते हुए वाराणसी में सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम किए गए हैं। अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद प्रबंध समिति के संयुक्त सचिव एसएम यासीन ने कहा था कि किसी को भी मस्जिद में प्रवेश की इजाजत नहीं होगी। मुस्लिम पक्ष ने कहा है कि सर्वेक्षण और वीडियोग्राफी काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर तक ही सीमित होनी चाहिए और किसी भी ‘गैर-मुस्लिम’ को मस्जिद में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

इस मामले में हिंदू याचिकाकर्ताओं का प्रतिनिधित्व कोर्ट कमिश्नर की टीम में 15 लोग कर रहे हैं। इसके अलावा कोर्ट कमिश्नर के 2 सहयोगी और 3 फोटोग्राफर व वीडियोग्राफर भी सर्वे व वीडियोग्राफी के समय मौजूद हैं। वहीं, पाँच वकीलों के साथ अंजुमन इंतेजामिया कमेटी के प्रतिवादी भी मौजूद हैं। मंदिर के अंदर दर्शन के लिए जाने वाले श्रद्धालुओं या किसी को भी सघन चेकिंग के बाद ही अंदर जाने दिया जा रहा है। मस्जिद की सुरक्षा व्यवस्था पहले से ही अर्धसैनिक बलों के हाथ में है।

बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद विवाद 1991 से वाराणसी की स्थानीय अदालत में लंबित है। उच्च न्यायालय के आदेश के बाद यह मुकदमा इलाहाबाद उच्च न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया गया है। हालाँकि, श्रृंगार गौरी मामला महज सात महीने पुराना है।

18 अगस्त 2021 को वाराणसी की पाँच महिलाओं ने श्रृंगार गौरी मंदिर में प्रतिदिन दर्शन करने की माँग समेत अन्य माँगों को लेकर वाराणसी के सिविल जज (सीनियर डिवीजन) की अदालत में मुकदमा दायर किया था। अदालत ने याचिका को स्वीकार करते हुए न केवल मौके पर स्थिति जानने के लिए वकीलों का एक आयोग गठित करने का आदेश दिया था, बल्कि वकीलों का एक कमीशन भी नियुक्त किया था। इतना ही नहीं विपक्ष को नोटिस जारी किया गया, लेकिन विवादित स्थल का निरीक्षण नहीं हो सका था।

वाराणसी सिविल जज (सीनियर डिवीजन फास्ट ट्रैक) जस्टिस रवि कुमार दिवाकर ने 18 अगस्त 2021 के अपने पहले के आदेश को दोहराते हुए 8 अप्रैल 2022 को कोर्ट कमिश्नर अजय कुमार मिश्रा को नियुक्त कर सर्वेक्षण और वीडियोग्राफी की कार्यवाही फिर से शुरू करने की अनुमति दी थी। इस बीच वाराणसी जिला प्रशासन और पुलिस ने आपत्ति जताई। कार्रवाई को रोकने के लिए उन्होंने तर्क दिया कि बेहतर सुरक्षा व्यवस्था की आवश्यकता है और केवल मुस्लिम और सुरक्षाकर्मी ही मस्जिद के अंदर जा सकते हैं। अदालत ने सुनवाई के बाद याचिका को खारिज करते हुए अपने पहले के आदेश को जारी रखा और 10 मई से पहले ईद के बाद सर्वेक्षण और वीडियोग्राफी की कार्रवाई पर रिपोर्ट माँगी और सुनवाई की तारीख 10 मई भी तय की।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ज्ञानवापी मस्जिद की बाहरी दीवार के भीतर देवी श्रृंगार गौरी की मूर्ति स्थापित है। राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान बाबरी मस्जिद के विध्वंस के बाद भक्तों के नियमित प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया था और चैत्र नवरात्रि के चौथे दिन ही इस देवी की पूजा करने की अनुमति थी।

द कन्वर्जन: छल, निकाह, हलाला… पर्दे पर लव जिहाद की घृणित क्रूरता जो डराती भी है, बाँधती भी है

सीमा की नजर बार-बार अपने मोबाइल की डिजिटल घड़ी पर जा रही थी। नौ बजने को आए थे पर फिल्म अभी तक शुरू नहीं हुई थी। उसे चिंता थी कि फिल्म लम्बी चली तो खाना मिल पाएगा कि नहीं। पिछली बार हम जब द कश्मीर फाइल्स (The Kashmir Files) का पहले दिन का शो देखने गए थे, तब भी देर रात होने से सारे रेस्टोरेंट बंद हो चुके थे। खाना उसदिन भी नहीं मिला था। कल यानी गुरुवार (5 मई 2022) की रात तो हम दिल्ली के चाणक्य सिनेमा में द कन्वर्जन (The Conversion) का ग्रेंड प्रीमियर देखने के लिए आए थे।

प्रीमियर का घोषित समय था शाम सात बजे का। मैंने मुझे बड़े आदर भाव से निमंत्रित करने वाले मित्र कपिल मिश्रा से पूछा भी था तो उन्होंने कहा था कि आप 7.25 तक आएँगे तो चलेगा। इसलिए मेरा अनुमान था कि कुल मिलाकर 7.45 तक तो पिक्चर शुरू हो ही जाएगी। ढाई घंटे की लम्बी फिल्म हुई तो भी साढ़े दस तक तो हम फारिग हो जाएँगे। लेकिन यहाँ तो नौ बज चुके थे और फिल्म शुरू होने का नाम ही नहीं ले रही थी। एक-दो बार बीच में कभी वीडियो तो कभी आवाज आती थी पर फिर गायब हो जाती थी।

बार-बार कुछ तकनीकी गड़बड़ी की घोषणओं के बीच खचाखच भरे ऑडी 3 में दर्शक धैर्य और उत्कंठा से फिल्म शुरू होने का इंतज़ार कर रहे थे। मेरा पत्रकारीय मन किसी गड़बड़ी या अनिष्ट की आशंका भी कर रहा था। मुझे ध्यान आ रहा था कि अभूतपूर्व सफलता पाने वाली कश्मीर फाइल्स को भी शुरू के दिनों में कुछ थियेटरों में दिक्क्तों का सामना करना पड़ा था। दूर क्यों जाया जाए, पिछले हफ्ते ही राजधानी के फॉरेन कॉरेस्पोंडेंट क्लब और फिर प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने कश्मीर फाइल्स के सफल निर्देशक विवेक अग्निहोत्री को प्रेस वार्ता करने की इजाजत नहीं दी थी। द कन्वर्जन तो सीधे-सीधे एक बेहद विवादित मगर ज्वलंत मुद्दे पर बनी फिल्म है। न जाने दिन-रात ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’ की वकालत करने वालों में से किसी को ‘सलेक्टिव सेकुलरवाद’ का कौन सा कीड़ा काट जाए और फिल्म का प्रदर्शन ही रोक दिया जाए।

ऐसे कई सवाल मन में उस भूख की तरह बिलबिला रहे थे जो हमारे पेट में भी हलचल मचा रही थी। इतनी भीड़ में उठकर कुछ खाने के लिए जाना भी अटपटा लग रहा था। मगर तकनीकी गड़बड़ से भूख थोड़े ही रुकती है सो कई लोग बड़े साइज की बाल्टी के आकार के कागज के डिब्बों में पॉपकॉर्न लेकर आना शुरू कर चुके थे। इससे उठती महक ने हमारी भूख की भड़कती अग्नि में मानो घी डाल दिया। वो तो भला हो साथ की सीट पर बैठे श्रीमान विनोद बंसल की बिटिया विदुषी का जो उठकर गई और तीन लार्ज पॉपकॉर्न के डिब्बे ले आई। एक सादा नमकीन, एक चीज वाले और एक कैरामल के स्वाद वाले। मालूम नहीं कि ये विदुषी के उठ के जाकर पॉपकॉर्न लाने का कमाल था या देरी के लिए किए जाने वाली बंसल साहब की ट्वीट का कि ऐसा होने के कुछ समय बाद फिल्म चालू हो गई।

यकीन मानिए, फिल्म देखने के बाद न मुझे और न ही सीमा को उस देरी पर कोई गिला-शिकवा रहा जो अबतक हुई थी। सबसे पहली बात तो ये कि ये एक बेहद साहसपूर्ण विषय पर बनाई फिल्म है। फिल्म देखने जाते हुए मन में था कि कहीं ये महज एक नजरियाती प्रोपेगेंडा फिल्म ही न हो। सोचा था कि यदि ऐसा हुआ तो हम बीच में उठकर चले आएँगे। इससे हमें बुलाने वाले कपिल मिश्रा के आग्रह की इज्जत भी रह जाएगी और हमारा समय भी जाया नहीं होगा। पर ऐसी नौबत नहीं आई और अगर एक-दो दृश्यों को छोड़ दिया जाए तो फिल्म ने हमें लगातार बाँधे रखा। सीमा को अगली सुबह जल्दी ऑफिस जाना था तो भी उन्होने कहा कि अब तो पूरी फिल्म देखनी ही है।

फिल्म की कहानी को देखा जाए तो मध्यांतर तक फिल्म थोड़ी हलकी-फुल्की रहती है। अच्छा संगीत, दृश्यानुसार गीत और सुरुचिपूर्ण लोकेशन फिल्म को गति देते हैं। गीत कर्णप्रिय हैं। वाराणसी के घाट, कैम्पस की बिंदास ज़िन्दगी और एक संस्कारवादी हिन्दू माता-पिता तथा उनकी ‘मॉर्डन’ बेटी के बीच के टकराव का अच्छा चित्रण निर्देशक विनोद तिवारी ने किया है। कहानी लिखी है वंदना तिवारी ने। फिल्म ये बताने में सफल है कि ‘लव जिहाद’ अब हिंदूवादियों की एक राजनीतिक फेंटेसी मात्र नहीं, बल्कि ऐसी सच्चाई है जिससे समाज को लगातार दो-चार होना पड़ रहा है। यों तो प्यार और जिहाद दो कभी न मिलने वाले अलग-अलग किनारे जैसे लगते हैं, मगर मजहबी कट्टरता कई बार आदमी को इंसान बने नहीं रहने देती। धर्मान्धता में अपने मजहब के विस्तार के लिए कैसे प्रेम जैसी पवित्र भावना का दुरुपयोग हो सकता है, फिल्म इसे गहनता के साथ उकेरती है।

फिल्म के डायलॉग और बेहतर हो सकते थे। मगर कहानी के अलावा द कन्वर्जन का सबसे सशक्त पक्ष है, हीरोइन का पात्र निभाने वाली अभिनेत्री का अभिनय। मुझे नहीं मालूम कि अभिनेत्री विंध्य तिवारी ने इससे पहले कौन से फिल्म की है। मगर बाप रे बाप क्या अभिनय क्षमता है इस अभिनेत्री में। एक ही किरदार में अनेक कठिन भाव बड़ी कुशलता के साथ उसने निभाए हैं। एक बिंदास भरी उत्श्रंखलता से लेकर असहनीय अत्याचार और दर्द सहने वाली नायिका का सशक्त अभिनय विंध्य तिवारी ने किया है। सच मानिए तो हीरोइन की शुरुआती एंट्री इतनी अधिक प्रभावित नहीं करती पर जैसे फिल्म आगे बढ़ती है वैसे ही शृंगार, करुणा, भय, छल, क्रोध और रौद्र आदि कई जटिल भावों को वे बड़ी सहजता से निभाती नज़र आतीं हैं।

फिल्म के कई दृश्य बहुत भावपूर्ण है। मुझे सबसे सबसे अधिक मार्मिक दृश्य लगता है कि जब फिल्म में साक्षी बनी अभिनेत्री निकाह के समय अपना नाम बदलने को मज़बूर होती है। जिस गहराई के साथ सिर्फ अपनी आँखों के ज़रिए अपने साथ हुए अनजाने छल को विंध्य अभिनीत करती हैं, वह उनकी अभिनय क्षमता का नमूना है। हलाला की घृणित क्रूरता विचलित कर देने वाली है। निर्देशक की दाद देनी पड़ेगी कि वे इस दौरान आम मुम्बईया फिल्मों की तरह सेक्स दिखाने के लालच से बचे रहे। आप अपनी जवान होती बेटी के साथ फिल्म को देखने में असहज नहीं होते। बबलू शेख की भूमिका में प्रतीक शुक्ला ने भी जोरदार अभिनय किया है।

कुल मिलाकर एक नाज़ुक विषय पर बनी एक सशक्त फिल्म है- द कन्वर्जन। मुद्दा विवादास्पद होने के साथ-साथ समीचीन भी है। फिल्म पर राजनीति होना भी अवश्यम्भावी है। निर्देशक विनोद तिवारी ने शुरू में बताया ही था कि उनकी फिल्म महीनों सेंसर बोर्ड में लटकी रही थी। देखा जाए तो मजहब, राजनीति, विवाद और स्त्री विमर्श- ये सब मिलकर बॉक्स ऑफिस पर इसकी सफलता की कहानी अभी से कह रहे हैं।

इंस्टाग्राम पर भगवान राम सहित देवी-देवताओं को गंदी गालियाँ, सोहेल सहित 4 के वीडियो वायरल, लोगों ने उठाई कार्रवाई की माँग

सोशल साइट इंस्टाग्राम पर हिन्दू देवी-देवताओं को गालियाँ देते हुए एक वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो में 4 लोगों की बातचीत के दौरान सोहेल नाम के व्यक्ति द्वारा भगवान राम के प्रति भद्दे और अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया गया है। वीडियो में एक महिला भी दिखाई दे रही है जिसका नाम अनु खान बताया जा रहा है। नेटीजेंस पुलिस को टैग करते हुए आरोपितों पर कार्रवाई की माँग कर रहे हैं।

वीडियो में सोहेल न सिर्फ भगवान राम बल्कि उनकी माँ को भी गालियाँ दे रहा है। साथ ही वो सभी भगवानों को भद्दे-भद्दे शब्द बोल रहा। अपनी गालियों को सोहेल धर्म पर अपना बयान बता रहा है। बीच में उसको एक अन्य व्यक्ति द्वारा रोका गया लेकिन वो नहीं माना। अपनी बात पर पछतावा करने के बजाय सोहेल हिन्दू धर्म और देवताओं को गालियाँ देता रहा।

@engineer_inside नाम के ट्विटर हैंडल ने इस वीडियो को शेयर करते हुए UP पुलिस और साइबर पुलिस को टैग किया है। शिकायत के वीडियो को पब्लिक लाइव बताते हुए आरोपित पर एक्शन लेने की माँग की गई है। हैंडल द्वारा आरोपित का प्रोफाइल लिंक शेयर करते हुए उसकी हिस्ट्री निकालने का निवेदन भी किया गया है। साथ ही बताया गया है कि आरोपित ऐसा आए दिन करता रहता है। ट्वीट हुए इसी वीडियो के कमेंट बॉक्स में कई अन्य यूजर्स भी पुलिस को टैग करके कार्रवाई की माँग कर रहे हैं।

बता दें कि सोहेल की प्रोफ़ाइल संस्कारी सोहेल के नाम से बनी हुई है। उसने अपनी प्रोफइल पर अकबरुद्दीन ओवैसी की फोटो लगा रखी है। सोहेल ने रुबिका लियाकत और पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ के वीडियो भी शेयर कर रखे हैं। 78 लोगों को फॉलो करने वाले सोहैल के फ़िलहाल 975 फॉलोवर हैं।

गौरतलब है कि इससे पहले इंस्टाग्राम पर अपनी महिला मित्र के साथ हिन्दुओं को गालियाँ देने और उनको मारने तक की बात करने वाले नदीम को असम पुलिस ने राजस्थान से गिरफ्तार किया था। नदीम पर राजस्थान में भी केस दर्ज हुआ था।

काशी विश्वनाथ मंदिर के सामने नमाज पढ़ने लगी मुस्लिम महिला, पुलिस ने जबरन हटाया, बोले लोग- नमाजियों की ऐसी भीड़ यहाँ पहले नहीं देखी

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के वाराणसी स्थित काशी विश्वनाथ और ज्ञानवापी मस्जिद परिसर का आज शुक्रवार (6 मई 2022) को अदालती आदेश के बाद वीडियोग्राफी का काम शुरू हो गया है। इस दौरान दोनों पक्षों की ओर से जमकर नारेबाजी भी हुई। इससे पहले वहाँ का माहौल तब गरमा गया जब काशी विश्वनाथ मंदिर के गेट नंबर 4 के सामने एक मुस्लिम महिला नमाज पढ़ने लगी। वहाँ पर तैनात सुरक्षाबलों ने पहले तो उसे डिस्टर्ब नहीं किया, लेकिन काफी देर तक इंतजार करने के बाद उसे जबरन वहाँ से हटाना पड़ा।

रिपोर्ट के मुताबिक, वाराणसी के जैतपुरा थाना क्षेत्र की रहने वाली मुस्लिम महिला का नाम आयशा बताया जा रहा है। थाना चौक पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया है। पुलिस का कहना है कि आरोपित महिला मानसिक रूप से बीमार है। फिलहाल उसे पुलिस की हिरासत में रखा गया है।

कोर्ट कमिश्नर की अगुआई में वीडियोग्राफी

दोपहर 3 बजे से कोर्ट कमिश्नर की अगुआई में वीडियोग्राफी सुनिश्चित है। इस दौरान हिंदू पक्ष और मुस्लिम पक्ष की ओर पहुँचे। इसमें अंजुमन इंतजामिया कमेटी के लोग भी शामिल रहेंगे। इसके अलावा, दोनों समुदाय के लोग भारी संख्या में वहाँ पहुँचे हैं। इस बीच मस्जिद को हरे पर्दे से ढंक दिया गया है। दरअसल काशी विश्वनाथ मंदिर धाम के गेट नंबर 4 के बगल से मस्जिद की ओर जाने का करीब 8 फीट चौड़ा रास्ता है। इस रास्ते से मस्जिद का पूरा हिस्सा दिखता है। इस हिस्से को हरे पर्दे और होर्डिंग लगा कर ढंक दिया गया।

इससे पहले नहीं दिखी ऐसी भीड़

जुमे की नमाज के कारण सामान्यतया यहाँ भीड़ होती है, लेकिन लोगों का कहना है कि इससे पहले इतनी भीड़ यहाँ पहले कभी नहीं देखी गई थी। माना जा रहा है कि मस्जिद के सर्वे को लेकर इतनी भीड़ इकट्ठा हुई थी। बता दें कि कोर्ट ने 30 अप्रैल 2022 को ज्ञानवापी मस्जिद परिसर स्थित माता श्रृंगार गौरी एवं अन्य विग्रहों की स्थिति का पता लगाने के लिए वीडियोग्राफी कराने का आदेश दिया था।

सड़क पर उतरे पुलिस कमिश्नर

कोर्ट द्वारा वीडियोग्राफी के आदेश के बाद वाराणसी में चप्पे-चप्पे पर पुलिस का सख्त पहरा लगा दिया गया है। खुद वाराणसी के पुलिस कमिश्नर ए सतीश गणेश सुरक्षा व्यवस्था को संभालने के लिए सड़क पर उतर आए हैं। इसके साथ ही एलआईयू की टीमों समेत इंटेलीजेंस ब्यूरो की टीमें भी सिविल ड्रेस में इलाके पर नजर रख रही हैं।

बौना, दुर्योधन, तानाशाह: पंजाब पुलिस की करनी पर कुमार विश्वास ने खूब सुनाया, कपिल मिश्रा ने बग्गा को बताया ‘सच्चा सरदार’

बीजेपी नेता तजिंदर पाल सिंह बग्गा (Tajinder Pal Singh Bagga) की गिरफ्तारी के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इसको लेकर बीजेपी नेता कपिल मिश्रा (Kapil Mishra) ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Delhi CM Arvind Kejriwal) पर तंज कसा है। वहीं, आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व नेता कुमार विश्वास (Kumar Vishwas) ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान (Punjab CM Bhagwant Mann) को कठघरे में खड़ा किया है। 

कुमार विश्वास ने ट्वीट करते हुए लिखा, “प्रिय छोटे भाई भगवंत मान, ख़ुद्दार पंजाब ने 300 साल में दिल्ली के किसी असुरक्षित तानाशाह को अपनी ताकत से कभी नहीं खेलने दिया। पंजाब ने तुम्हारी पगड़ी को ताज सौंपा है, किसी बौने दुर्योधन को नहीं। पंजाब के लोगों के टैक्स के पैसों व उनकी पुलिस का अपमान मत करो। पगड़ी सम्भाल जट्टा।”

वहीं, कपिल मिश्रा ने ट्वीट में लिखा, “तजिंदर बग्गा को पंजाब पुलिस के 50 जवान घर से गिरफ्तार करके ले गए। तजिंदर पाल सिंह बग्गा एक सच्चा सरदार है, उसे ऐसी हरकतों से ना डराया जा सकता है, ना कमजोर किया जा सकता। एक सच्चे सरदार से इतना डर क्यों?”

इसके अलावा उन्होंने एक वीडियो शेयर करते हुए कहा, “आज सुबह लगभग 6 बजे 50 से ज्यादा पंजाब पुलिस के सिपाहियों ने तजिंदर बग्गा को उनके घर से गिरफ्तार किया। ऐसा लग रहा है कि अरविंद केजरीवाल ने पंजाब पुलिस की पूरी ताकत बग्गा को चुप कराने के लिए लगा दी है। 50-50 पुलिस वाले उनके घर के अंदर आ रहे हैं, वो भी तब जब पंजाब पुलिस ने स्पष्ट तौर पर कहा था कि इस तरह का कोई कदम न उठाया जाए। अभी तो जाँच शुरू ही हुई थी। ट्वीट करने के मामले में, सोशल मीडिया पर सवाल उठाने के मामले में पुलिस का इस प्रकार से इस्तेमाल भारत के इतिहास में कभी नहीं हुआ है।”

उन्होंने आगे कहा, “ऐसा लगता है कि पंजाब की पुलिस पंजाब का कानून-व्यवस्था छोड़ कर दिल्ली में लोगों को गिरफ्तार करने के लिए लगा दी गई है। दिल्ली में जगह-जगह पंजाब पुलिस के लोग घूम रहे हैं। मैं ये कहना चाहता हूँ कि तेजिंदर बग्गा एक सच्चा सरदार है। एक बहादुर और साहसी सरदार है और अरविंद केजरीवाल एक सच्चे सरदार से डर गए हैं। इस प्रकार पुलिस का दुरुपयोग भारत के इतिहास में कभी नहीं किया गया। अभी तो एक महीना हुआ है पंजाब पुलिस का ताकत अरविंद केजरीवाल के पास आए हुए और इस प्रकार से पुलिस को एक्टिविस्टों को उठाने के लिए, सोशल मीडिया पर आवाज उठाने वालों को गिरफ्तार करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। अगर यही पुलिस पटियाला में लॉ एंड ऑर्डर ठीक करने में लगे तो शायद जो पटियाला में हो रहा है, वह नहीं होता। आज सारा देश बग्गा के साथ है और अरविंद केजरीवाल का डिक्टेटर वाला चेहरा, जिसके बारे में सभी लोग बात करते थे, पुलिस का गैरकानूनी इस्तेमाल…वो आज हम सबके सामने है।”

उल्लेखनीय है कि दिल्ली बीजेपी के फायर ब्रांड नेता तजिंदर पाल सिंह बग्गा को शुक्रवार (6 मई 2022) की सुबह सुबह पंजाब पुलिस उनके घर पहुँची और उन्हें गिरफ्तार किया। बग्गा के पिता ने बदसलूकी का आरोप भी लगाया है। इन सबके बीच पंजाब पुलिस को हरियाणा पुलिस ने कुरुक्षेत्र में रोक लिया है और इसके साथ ही दिल्ली पुलिस ने पंजाब पुलिस की टीम पर अपहरण का केस दर्ज किया है। 

तेजिंदर पाल बग्गा की गिरफ्तारी पर पंजाब पुलिस के खिलाफ अपहरण का केस, कुरुक्षेत्र से बीजेपी नेता को वापस ला रही दिल्ली पुलिस

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को कथित तौर पर धमकी देने के मामले में पंजाब पुलिस द्वारा भाजपा नेता तजिंदर पाल सिंह बग्गा को गिरफ्तार किए जाने के मामले में दिल्ली पुलिस ने अपहरण का केस दर्ज किया है। इस मामले में राजधानी के जनकपुरी थाने केस दर्ज किया गया है, जिसमें पंजाब पुलिस पर बग्गा के अपहरण का आरोप है।

इस मामले में दिल्ली पुलिस ने पंजाब पुलिस के खिलाफ आईपीसी की धारा 452, 365, 342, 392, 295/34 के तहत मामला दर्ज किया है।

पंजाब पुलिस ने बग्गा को किया है गिरफ्तार

दिल्ली बीजेपी के नेता तेजिंदर पाल सिंह बग्गा को शुक्रवार (6 मई, 2022) को पंजाब पुलिस ने गिरफ्तार किया। बताया जाता है कि करीब एक दर्जन गाड़ियों में पंजाब पुलिस के करीब 50 पुलिसकर्मियों ने इस काम को अंजाम दिया। बग्गा की कथित अवैध गिरफ्तारी की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में भाजपा नेता और समर्थक जनकपुरी थाने पहुँच गए।

टाइम्स नाउ द्वारा शेयर किए गए एक वीडियो में जनकपुरी थाने के बाहर बड़ी संख्या में बीजेपी नेता नजर आए। बता दें कि जब भी किसी एक राज्य की पुलिस दूसरे राज्य में कोई ऑपरेशन करती है तो प्रोटोकॉल के तहत ये जरूरी होता है कि स्थानीय पुलिस को पहले इसके बारे में बताया जाय। हालाँकि, अभी तक ये स्पष्ट नहीं हो सका है कि स्थानीय पुलिस को सूचित किया था या नहीं।

बीजेपी समर्थकों का कहना था कि क्या इसीलिए केजरीवाल पुलिस की कमान अपने हाथ में चाहते थे। बीजेपी नेताओं ने कहा कि बग्गा एक नेता हैं, एक उम्मीदवार हैं और भाजपा में राजनीतिक पदों पर हैं, वह आतंकवादी नहीं हैं। पंजाब पुलिस ने उनके साथ इस तरह का व्यवहार करते हुए उन्हें केवल इसलिए गिरफ्तार किया, क्योंकि उन्होंने अरविंद केजरीवाल के खिलाफ बयान जारी किया था।

इस मामले में दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने बग्गा कि गिरफ्तारी को अवैध करार दिया। उन्होंने कहा कि पंजाब पुलिस ने बग्गा के पिता के साथ मारपीट की। गुप्ता ने आगे कहा, “तेजिंदर बग्गा को पंजाब पुलिस ने अवैध रूप गिरफ्तार किया है। उन्होंने उन्हें पगड़ी तक नहीं पहनने दिया। उनके पिता द्वारा तजिंदर बग्गा के साथ मारपीट की शिकायत दर्ज कराई गई थी। केजरीवाल की हिटलर जैसी हरकत की कीमत उन्हें चुकानी पड़ेगी। पंजाब पुलिस केजरीवाल के निर्देश पर काम कर रही है।”

बग्गा को पगड़ी पहनने की भी इजाजत नहीं थी: पिता का आरोप

तेजिंदर बग्गा के पिता ने ऑपइंडिया से बात करते हुए बताया था, “पहले मेरे घर में 2 पुलिसकर्मी घुसे। वो मुझ से सामान्य ढंग से बात कर रहे थे। उस समय घर पर तेजिंदर और उनके अलावा कोई नहीं था। उसी समय तेजिंदर कपड़े पहन कर बाहर आए। थोड़ी बातचीत के बाद कई पुलिसकर्मी मेरे घर में जबरन घुस गए। उनके इस काम की मैं वीडियो बनाने लगा। इसी दौरान एक पुलिसकर्मी मुझे खींच कर कमरे की तरफ ले गया और मुझ से हाथापाई की।”

बग्गा के पिता ने आगे बताया, “इसके बाद वो तेजिंदर को खींच कर बाहर ले गए और हिरासत में ले लिया। पुलिसकर्मियों ने बग्गा को उनकी पगड़ी तक नहीं पहनने दी, जबकि उसने इसे पहनने की गुजारिश की। पुलिसवाले बग्गा का फोन भी अपने साथ ले गए।”

बग्गा को वापस लाने कुरुक्षेत्र रवाना हुई दिल्ली पुलिस

हालाँकि, पंजाब पुलिस को हरियाणा पुलिस ने रोक लिया है। हरियाणा की पुलिस बग्गा समेत पंजाब पुलिस को पूछताछ के लिए सदर थाना पिपली ले गई है। वहीं दिल्ली पुलिस भी बग्गा को वापस लाने के लिए कुरुक्षेत्र के लिए रवाना हो चुकी है। इस बीच हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज ने दो टूक कहा है कि तेजिंदर पाल सिंह बग्गा को दिल्ली पुलिस को ही सौंपा जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर किसी का अपहरण हुआ है तो उसे रोकना हमारी जिम्मेदारी है। वहीं बताया जा रहा है कि पंजाब पुलिस भी कोर्ट जाने की तैयारी कर रही है।

वहीं अभी यह खबर आ रही है कि बग्गा को लेकर दिल्ली पुलिस वापस आ रही है।