Home Blog Page 2781

हाथ में कमंडल, जेब में एक भी पैसा नहीं… सवारी डिब्बे में स्वामी विवेकानंद के साथ बाल गंगाधर तिलक की ऐसे हुई थी मुलाकात

उन्नीसवीं शताब्दी के गहरे अंधकार में अगर कोई मात्र भारत ही नहीं बल्कि पश्चिम को भी भारतीय दर्शन और परम्पराओं की ज्योति से प्रकाशमान करने का दम रखते थे, तो वह हैं स्वामी विवेकानंद। परिस्थितयों ने भले उनको बनाया हो लेकिन वो कभी उनके दास नहीं बने। वह एक सन्देश लेकर आए थे, जो पृथ्वी पर उपस्तिथ हर मनुष्य के लिए विद्यमान है। वह था – “अभय बनो।”

बीसवीं शताब्दी में स्वाधीनता का आंदोलन जब चरम पर था, उस समय विवेकानंद ज्वाला-समान एक नाम थे। ऐसा नाम जो भारत माता को एकमात्र अपना आराध्य मानकर जीवन उनके चरणों में समर्पित करने की प्रेरणा देते थे। भगिनी निवेदिता अपनी पुस्तक “दी मास्टर एज आई सॉ हिम”में लिखती हैं कि उनके लिए भारत के लिए चिंतन करना श्वास लेने जैसा था।

इस लेख में स्वामी विवेकानंद और बाल गंगाधर तिलक के राष्ट्रीय चिंतन पर प्रकाश डालने का मैं प्रयास करूँगा।

12 जनवरी 1863 को बंगाल के कलकत्ता में माता भुवनेश्वरी देवी और पिता विश्वनाथ दत्त के घर जन्में नरेंद्रनाथ दत्त जो बाद में स्वामी विवेकानंद के नाम से जाने गए, मात्र 39 वर्ष 5 महीने और 24 दिन के जीवन में अगर उन्हीं के शब्दों में कहूँ तो 1500 वर्ष का कार्य कर गए। स्वामी विवेकानंद 25 साल की उम्र में ही परिव्राजक संन्यासी के रूप में भारत भ्रमण पर निकल गए थे।

भारत उस समय पराधीन था। हम पर अंग्रेज़ों का शासन था। अपने लगभग साढ़े चार वर्ष के भ्रमण के दौरान उन्होंने देखा कि वर्षों की गुलामी के कारण हर एक भारतीय के अंदर आत्मविश्वास, आत्म-सम्मान, आत्म-गौरव और स्वावलम्बन पूर्णतः समाप्त हो गया है। उन्हें अपना कार्य स्पष्ट हो गया था, वो राजनीति से दूर रह कर हर भारतवासी में आत्मविश्वास जगाने का कार्य करने वाले थे।

स्वामी विवेकानंद ने यह आत्मविश्वास जगाने का, चरित्र-निर्माण का और मनुष्य-निर्माण का कार्य पूरे जीवन भर अनेकों कष्ट, कठिनाइयों को सहते हुए भी किया क्योंकि इसके बिना आत्मविश्वास जागृत नहीं होता और बिना आत्मविश्वास के आत्मनिर्भर बनना संभव नहीं है, जो स्वाधीनता के लिए अत्यावश्यक है।

स्वामी विवेकानंद और बाल गंगाधर तिलक का संपर्क

भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम के पहले लोकप्रिय नेता बाल गंगाधर तिलक जो ”लोकमान्य तिलक” के नाम से भी प्रसिद्ध हैं, वह स्वामी विवेकानंद से प्रभावित थे। इनकी स्वामी विवेकानंद से मुलाकात भी हुई और व्यक्तिगत तौर पर उनसे राष्ट्रीय चिंतन के विषयों पर मार्गदर्शन लेने का सौभाग्य भी प्राप्त हुआ था।

बाल गंगाधर तिलक के अनुसार स्वामी विवेकानंद से उनकी पहली भेट बम्बई से पुणे जाते समय यात्री डिब्बे में हुई थी। स्वामी विवेकानंद के पास बिलकुल भी पैसे नहीं थे और उनके हाथ में बस एक कमंडल था। विश्व धर्म महासभा की सफलता के बाद जब उनके चित्र बाल गंगाधर तिलक ने समाचार पत्रों में देखे तो उनको याद आया कि यह वही संन्यासी हैं, जिन्होंने उनके घर पर कुछ दिन तक निवास किया था। इसके बाद दोनों के बीच पत्र व्यवहार भी हुआ था।

1901 में जब इंडियन नेशनल कॉन्ग्रेस का 17वाँ अधिवेशन हुआ तो उसमें भाग लेने के लिए बाल गंगाधर तिलक कलकत्ता आए थे। इसी दौरान वह बेलुड़ मठ जाकर स्वामी विवेकानंद से मिले थे। तब विवेकानंद ने उन्हें संन्यास लेने और बंगाल आकर उनका कार्यभार सँभालने को भी कहा था। क्योंकि स्वामी विवेकानंद के अनुसार अपने क्षेत्र में कोई व्यक्ति इतना प्रभावशाली नहीं होता, जितना सुदूर क्षेत्रों में। इस मुलाकात के बाद बाल गंगाधर तिलक बेलुड़ मठ आए थे और विवेकानंद से मार्गदर्शन प्राप्त किया था। उनके द्वारा स्थापित समाचार पत्र “केसरी” के संपादक एनसी केलकर भी स्वामी विवेकानंद से मिलने आते थे।

बाल गंगाधर तिलक के साथ कंधे से कंधा मिलाकर भारतीय स्वाधीनता आंदोलन की रूपरेखा तैयार करने वाले प्रमुख भारतीय क्रांतिकारियों में से एक जो कुशल और निपुण पत्रकार, लेखक, शिक्षक व वक्ता भी थे और लाल-बाल-पाल की तिकड़ी के महत्वपूर्ण सदस्य भी, वह बिपिन चंद्र पाल कहते हैं, ”विवेकानंद का संदेश आधुनिक मानवता का संदेश था… मुझे कहना होगा कि विवेकानंद ने एक बड़े वर्ग की आँखें खोली हैं।”

ज्ञानवापी विवादित ढाँचे में सर्वे के खिलाफ कोर्ट में मुस्लिम पक्ष: ओवैसी ने कहा- खून-खराबे का रास्ता खोल रही अदालत

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के वाराणसी स्थित विवादित ढाँचे ‘ज्ञानवापी मस्जिद’ (Gyanvapi Mosque) में श्रृंगार गौरी की वीडियोग्राफी का आज (7 मई 2022) दूसरा दिन है। दोपहर तीन बजे कोर्ट कमिश्नर अजय कुमार मिश्रा वादियों और प्रतिवादियों के साथ ज्ञानवापी परिसर पहुँचेंगे। हालाँकि, उससे पहले मुस्लिम पक्ष ने अदालत में एक याचिका दायर कर कमिश्नर पर निष्पक्ष तरीके से काम नहीं करने का आरोप लगाया है। इसके साथ ही कमिश्नर को बदलने की माँग की गई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, मुस्लिम पक्ष के वकील अभय नाथ यादव का कहना है कि कोर्ट ने मस्जिद के अंदर वीडियोग्राफी कराने का आदेश नहीं दिया। वीडियोग्राफी केवल बाहर के चबूतरे की होनी है। बहरहाल मामले पर दोपहर 2 बजे सुनवाई होगी। इस बीच सर्वे के पहले दिन जिस तरीके से मुस्लमों ने नारेबाजी की थी, उसे देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को चाक चौबंद किया गया है। प्रशासन ने 1000 पुलिस और पीएसी के जवानों को एक किलोमीटर के दायरे में तैनात कर रखा है।

उल्लेखनीय है कि है कि मुस्लिम पक्ष के वकीलों ने आरोप लगाया था कि मस्जिद की दीवारों को अँगुली से कुरेदने की कोशिश की गई थी। अत: कोर्ट कमिश्नर को बदला जाए।

इस मामले पर AIMIM प्रमुख ओवैसी ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने विवादित ढाँचे के सर्वे पर कहा कि ये फैसला एंटी मुस्लिम हिंसा का रास्ता खोलने वाला है। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि अदालत द्वारा सुप्रीम कोर्ट की खुलेआम अवहेलना की जा रही है। इस आदेश से कोर्ट 1980-1990 के दशक की रथ यात्रा के दौरान हुए खून-खराबे और मुस्लिम विरोधी हिंसा का रास्ता खोल रही है।”

पहले दिन क्या हुआ

विवादित ढाँचे ‘ज्ञानवापी मस्जिद’ के सर्वे के पहले दिन काशी विश्वनाथ मंदिर के गेट नंबर-4 से सर्वे टीम के अंदर जाते वक्त जमकर अल्लाहु अकबर नारेबाजी की गई। वहीं दूसरी ओर हिंदू पक्ष ने भी हर-हर महादेव के नारे लगाए। बता दें कि ज्ञानवापी मस्जिद की देखरेख करने वाली अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी लगातार इस सर्वे का विरोध कर रही है। समिति के संयुक्त सचिव एसएम यासीन ने कहा था कि किसी को भी मस्जिद में प्रवेश की इजाजत नहीं होगी।

क्या है मामला

18 अगस्त 2021 को वाराणसी की पाँच महिलाओं ने श्रृंगार गौरी मंदिर में प्रतिदिन दर्शन करने की माँग समेत अन्य माँगों को लेकर वाराणसी के सिविल जज (सीनियर डिवीजन) की अदालत में मुकदमा दायर किया था। अदालत ने याचिका को स्वीकार करते हुए मौके पर स्थिति जानने के लिए वकीलों का एक आयोग गठित करने का आदेश दिया था। लेकिन विवादित स्थल का निरीक्षण नहीं हो सका था।

वाराणसी सिविल जज (सीनियर डिवीजन फास्ट ट्रैक) जस्टिस रवि कुमार दिवाकर ने 18 अगस्त 2021 के अपने पहले के आदेश को दोहराते हुए 8 अप्रैल 2022 को कोर्ट कमिश्नर अजय कुमार मिश्रा को नियुक्त कर सर्वेक्षण और वीडियोग्राफी की कार्यवाही फिर से शुरू करने की अनुमति दी थी। अदालत ने सुनवाई के बाद याचिका को खारिज करते हुए अपने पहले के आदेश को जारी रखा और 10 मई से पहले ईद के बाद सर्वेक्षण और वीडियोग्राफी की कार्रवाई पर रिपोर्ट माँगी और सुनवाई की तारीख 10 मई भी तय की।

analf*ck69 – अमेरिकी राष्ट्रपति बायडेन के बेटे के लैपटॉप का पासवर्ड… पोर्न इतने गंदे कि मैकेनिक को धोना पड़ा था हाथ

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन के बेटे हंटर बायडेन अक्सर अपनी अय्याशी और रंगीनमिजाजी को लेकर विवादों में रहते हैं। विलमिंगटन स्थित एक लैपटॉप दुकान के मालिक जॉन पॉल मैक आइजैक ने एक किताब लिखी है, जिसमें उन्होंने अप्रैल 2019 की एक रात को हंटर बायडेन से मुलाकात का जिक्र किया है। ‘American Injustice: My Battle to Expose the Truth’ (अमेरिकी अन्याय: सच्चाई को सामने लाने के लिए मेरी लड़ाई) नामक किताब में उन्होंने उस मुलाकात के बारे में बताया है।

उस दिन वो दुकान बंद करने जा रहे थे, तभी उनके दरवाजे पर दस्तक पड़ी। वहाँ नशे में एक व्यक्ति पहुँचा, जिसने तीन मैकबुक लैपटॉप वहाँ रख दिए और फिर बैठ गया। उस व्यक्ति ने कहा कि वो सिगार बार से सीधे जल्दी में यहाँ आ रहा है, क्योंकि उसने सुना है कि 7 बजे दुकान बंद हो जाती है। उसने बताया कि लिक्विड डैमेज के कारण लैपटॉप्स ऑन नहीं हो रहे, लेकिन उन्हें इसका डेटा चाहिए। दुकान के मालिक ने जब उस व्यक्ति का पूरा नाम पूछा, तब जाकर उसे अंदाज़ा हुआ कि सामने कौन है।

आइजैक लिखते हैं कि पहले तो उन्हें लगा कि हंटर बायडेन के भाई बीयू बायडेन का निधन 3-4 वर्षों में हुआ होगा, ऐसे में इन लैपटॉप्स में उनकी यादें होंगी जिन्हें वो सहेज कर रखना चाहते होंगे। आइजैक ने मैक को खोल कर उसे बनाना शुरू किया, लेकिन वो ऑन ही नहीं हो रहा था और डेटा रिकवरी मुश्किल थी। 2015 मॉडल का एक 13 इंच का मैकबुक बूट हो रहा रहा, ऐसे में दुकानदार ने उसे लॉगिन करने की अनुमति माँगी।

हंटर बायडेन ने हँसते हुए कहा, “My Password is Fucked Up” और फिर कहा कि वो बुरा न माने। असल में हंटर बायडेन ने अपने लैपटॉप का पासवर्ड ‘analf–k69’ रखा था। हंटर बायडेन ने इसके बाद लैपटॉप दुकानदार को दे दिया और कहा कि वो इसे बनाने के बाद उन्हें वापस कर दें। उनके मैकबुक में बड़ी संख्या में पोर्नोग्राफी मैटेरियल्स थे। इसमें हंटर बायडेन की एक तस्वीर थी, जिसमें वो एक स्कार्फ और अंडरवियर में दिख रहे थे।

इसके अलावा हंटर बायडेन की एक नंगी सेल्फी भी उस मैकबुक में थी। कई महिलाओं के साथ उसमें उनकी तस्वीरें थीं। इसमें एक फाइल में उनकी आय भी थी, जिसके हिसाब से उन्होंने 2013 में 8.33 लाख डॉलर (6.41) करोड़ रवै, 2014 में 12.47 लाख डॉलर (9.59 करोड़ रुपए) और 2015 में 24.78 लाख डॉलर (19.06 करोड़ रुपए) कमाए थे, जिस पर उन्होंने टैक्स दिए। आइजैक लिखते हैं कि उन्होंने लैपटॉप को बनाने के बाद सोने से पहले अच्छे से हाथ भी धोए।

हिंदू छात्रा का अपहरण करने वाले आरिफ को UP पुलिस ने दबोचा, पुलिस से बोला- धर्मांतरण करवा कर लड़की से किया हूँ निकाह

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के फिरोजाबाद (Firozabad) से एक बार फिर एक लड़की को अगवा कर धर्मांतरण करने के बाद निकाह करने की खबर सामने आई है। बताया जा रहा है कि लड़की बी.कॉम की छात्रा है और आरोपित आरिफ ने छात्रा को अपनी जाल में फँसाकर अगवा कर लिया और फिर धर्म परिवर्तन कराकर मुस्लिम बना दिया। लव जेहाद (Love Jehad) के इस मामले में पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लड़की को बरामद कर लिया है।

मामला जिले के रसूलपुर थाना क्षेत्र का है। इस इलाके की रहने वाली एक हिंदू लड़की कॉलेज में बी.कॉम की पढ़ाई कर रही है। बताया जा रहा है कि 25 अप्रैल 2022 को युवती अपने भाई को लेकर किसी काम से उसके स्कूल गई थी। उसी दौरान आरिफ आया और छात्रा को बहला-फुसलाकर अपने साथ भगा ले गया। आरिफ रामगढ़ थाना क्षेत्र के आकाशवाणी रोड का रहने वाला है।

बहन को दूसरे युवक के साथ जाने के बाद भाई ने इसकी सूचना अपने परिजनों को दी। इसके बाद लड़की के परिजन उसे तलाश करने लगे, लेकिन उसका कहीं पता नहीं चला। अंत में छात्रा के पिता ने थाने में जाकर पुलिस को तहरीर दी और आरिफ को नामजद किया। आरोपित के खिलाफ उत्तर प्रदेश विधि धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम 2021 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।

प्राथमिकी के आधार पर पुलिस आरिफ को गिरफ्तार करने के लिए लगातार दबिश देने लगी, लेकिन वह कहीं हाथ नहीं आया। इसी दौरान गुरुवार (5 मई 2022) को पुलिस को मुखबिर से आरिफ के बारे में जानकारी मिली। सूचना के आधार पर पुलिस ने आरिफ को दखल की पुलिया के पास से गिरफ्तार कर लिया और उसकी निशानदेही पर छात्रा को भी बरामद कर लिया।

गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आरिफ से पूछताछ की। पूछताछ में आरिफ ने पुलिस को बताया कि वह छात्रा का धर्मांतरण कराने के बाद उससे निकाह कर चुका है। हालाँकि, धर्म परिवर्तन से संबंंधित उसने किसी तरह का कागजात नहीं दिया।

सीओ (सिटी) हरि मोहन सिंह ने बताया कि डिग्री कॉलेज की छात्रा के गायब होने से छात्रा के परिजन बेहद परेशान थे और उन्होंने एक युवक पर शक जाहिर किया था। इसके आधार पर छात्रा के पिता ने मुकदमा लिखवाया। उसके बाद आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया है। छात्रा का मेडिकल कराकर अदालत के सामने पेश किया जा रहा है।

डॉली को ईद की सेवईयाँ खिलाने गाँव ले गया पप्पू खान, सोते में कुल्हाड़ी से गर्दन काट दी

उत्तर प्रदेश के मथुरा में शुक्रवार (मई 6, 2022) को पप्पू खान नामक शख्स ने अपनी प्रेमिका डॉली को कुल्हाड़ी से मार कर मौत के घाट उतार दिया। बताया जा रहा है कि डॉली और पप्पू खान दोनों शादीशुदा थे और अपने घर से अलग शिवनगर कॉलोनी में पिछले डेढ़ साल से लिव-इन में रहते थे। शुक्रवार को डॉली से अनबन के बाद आरोपित ने निर्मम घटना को अंजाम दिया। उसके बाद वह घर से फरार हो गया। लोगों को हत्या की जानकारी अगली सुबह मिली। अब मामला गोविंदपुरी थाने में दर्ज है।

अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, 32 साल की डॉली का विवाह 11 साल पहले आगरा के हरीपर्वत के खटीक पाड़ा निवासी शंकर लाल से हुआ था। लेकिन पिछले डेढ़ साल से उसके पति ने उससे हर संबंध तोड़ दिए थे और वह पप्पू खां के साथ शिवनगर में रहती थी। ईद के मौके पर खान उसे अपने साथ अपने गाँव जलालपुर ले गया था, जहाँ पप्पू खान की बीवी ने इसका विरोध किया और काफी तमाशा हुआ। बीवी लगातार पप्पू से इस बात पर लड़ाई करती थी। वहीं डॉली लगातार उस पर शादी का दबाव बनाती थी। ऐसे में शुक्रवार को ड्राइवरी करने वाले पप्पू खान ने देर रात घर पर जाकर डॉली की निर्मम हत्या को अंजाम दिया।

अगली सुबह डॉली की लाश को उसकी बहन गीता ने देखा। खून से लथपथ शरीर को देख गीता डर से चिल्ला पड़ी। उसकी चीखें सुन आसपास के लोग जुटे। फिर पुलिस को सूचना दी गई। मामले में पड़ताल के बाद पुलिस को पता चला कि पप्पू खां ने शादी के दबाव के चलते डॉली को मौत के घाट उतारा। अब पुलिस ने हत्यारोपित को ढूँढने के लिए तीन टीमें लगाई हैं। आरोपित चार बच्चों का अब्बा है और मृतिका भी दो बच्चों की माँ है। पिछले डेढ़ साल से दोनों अपने घर को छोड़ शिवनगर में साथ रहते थे।

कुछ समय पहले डॉली की बहन गीता भी अपने पति देवीराम और बच्चों के साथ आकर इनके साथ रहने लगी थी। देवीराम ई-रिक्शा चलाते हैं। मृतिका के जीजा ने बताया कि गुरुवार रात 12 बजे तक ऐसी कोई बात नहीं थी। मगर, इसके बाद क्या हुआ, किसी को नहीं पता। सुबह उठकर शव देखा तो दंग रह गए। वहीं गीता ने बताया कि गुरुवार की देर रात तक पप्पू उन्हीं के साथ था फिर कहाँ गायब हुआ पता नहीं चला। गीता के अनुसार, इस घटना को पप्पू ने ही अंजाम दिया है। पड़ताल में पता चला कि आरोपित पप्पू चौक बाजार निवासी अनिल शर्मा के गाड़ी का ड्राइवर है। जिनका प्लॉट बिड़ला मंदिर के सामने है। उन्होंने अपने घर की देख रेख के लिए पप्पू खान को वहाँ छोड़ा हुआ था। पहले पप्पू यहाँ अकेले रहता था मगर बाद में डॉली को अपनी बीवी बताकर उसके साथ रहने लगा।

खरगोन पहुँचे कॉन्ग्रेस नेताओं को लोगों ने खदेड़ा, ‘दिग्विजय सिंह मुर्दाबाद’ के नारे: दंगे के बाद 25 दिन से मुस्लिम तुष्टिकरण में लगी थी पार्टी

मध्य प्रदेश के खरगोन में रामनवमी के जुलूस के दौरान हुई हिंसा के 25 दिनों के बाद कॉन्ग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल 5 मई 2022 को दंगा प्रभावित इलाके में लोगों का हाल जानने के लिए पहुँचा। लेकिन, उन्हें बिल्कुल भी इस बात का अंदाजा नहीं रहा होगा कि वहाँ के नाराज लोग इनके खिलाफ ही नारेबाजी करते हुए इनका विरोध करेंगे। गुस्साए लोगों ने कॉन्ग्रेस के 5 विधायकों समेत दूसरे नेताओं को वहाँ से खदेड़ दिया।

कॉन्ग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने घटना का राजनीतिकरण करने और खरगोन को बदनाम करने का आरोप लगाया था। रिपोर्टों के अनुसार, खरगोन के लोकल लोगों ने दंगे के 20 से भी अधिक दिन बीतने के बाद हिंसा प्रभावित इलाके में पहुँचने पर कॉन्ग्रेसियों के खिलाफ नाराजगी व्यक्त की। लोगों ने खरगोन हिंसा पर कॉन्ग्रेस के रुख पर नाराजगी व्यक्त की। इनका कहना था कि कॉन्ग्रेस के प्रतिनिधिमंडल का ये दौरा किसी और मकसद को साधने के लिए हुए है।

लगे ‘दिग्विजय सिंह मुर्दाबाद’ के नारे

वायरल हो रहे वीडियो के मुताबिक, खरगोन के लोगों ने ‘दिग्विजय सिंह मुर्दाबाद’ के नारे भी लगाए। दरअसल, खरगौन हिंसा पर मुस्लिम तुष्टिकरण करते हुए दिग्विजय सिंह आरोप लगाया था कि बीजेपी ने ही गरीब मुस्लिम लड़कों को पैसे देकर काम पर रखा था और उसी ने उससे रामनवमी जुलूस पर पत्थर भी फिकवाए। उनके इसी कथित बयान से लोगों में नाराजगी है। दिग्विजय ने दावा किया था कि उन्हें ऐसी शिकायतें मिली हैं, जिनसे इस हिंदू जुलूसों पर हमले भाजपा द्वारा करवाए गए थे।

नीमच में दिग्विजय सिंह ने कहा था, “मुझे कुछ शिकायतें मिली हैं, जिनका मैंने अभी तक सत्यापन नहीं किया है, लेकिन इन शिकायतों के अनुसार, भाजपा के कुछ लोग खुद गरीब मुस्लिम लड़कों को पत्थर फेंकने के लिए भुगतान करते हैं। मैं तथ्यों की जाँच करूँगा और फिर इस मुद्दे को उठाऊंगा।”

खरगोन हिंसा

रामनवमी के अवसर पर 10 अप्रैल 2022 को खरगोन में हिंदुओं की ओर से जुलूस निकाले गए थे। इस दौरान जुलूस पर मुस्लिमों ने पत्थरबाजी की। इसके साथ ही जम कर आगजनी भी की गई। वहाँ भारी मात्रा में पुलिस बल को तैनात किया गया है। आगजनी और तोड़फोड़ के दौरान हुई हिंसा में कई पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। खरगोन के तालाब चौक और तवड़ी इलाके में ये घटना हुई, जहाँ से गुजर रहे रामनवमी के जुलूस पर भीड़ ने पत्थरबाजी शुरू कर दी। इस घटना में 6 पुलिसकर्मियों समेत 24 लोग घायल हुए थे।

इस दंगे के बाद खरगोन प्रशासन ने दंगाइयों के खिलाफ कड़ा कदम उठाते हुए उनकी अवैध रूप से निर्मित संपत्तियों पर बुलडोजर चलाया। इस अभियान में 5 जेसीबी मशीनें लगा दीं। इसके साथ ही करीब 77 आरोपितों को गिरफ्तार भी कर लिया है।

KGF Chapter 2 के प्रसिद्ध अभिनेता का निधन: लंबे समय तक बीमारी से जुझने के बाद अस्पताल में तोड़ा दम, 100 से ज्यादा कर चुके हैं फिल्म

बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचाने वाली साउथ की फिल्म केजीएफ चैप्टर 2 (KGF Chapter 2) के ऐक्टर मोहन जुनेजा (Mohan Juneja) का लंबी बीमारी के बाद शनिवार (7 मई 2022) की सुबह निधन हो गया। बेंगलुरु के एक प्राइवेट अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था और वहीं उन्होंने अंतिम सांस ली। मोहन अपनी कॉमेडी के जरिए दर्शकों के दिलों में एक अलग जगह बनाई थी।

मोहन जुनेजा ने कॉमेडियन के रूप में अपने करियर की शुरुआत की थी। फिल्म ‘चेतला’ से उन्हें बड़ा ब्रेक मिला था। मोहन जुनेजा ने तमिल, तेलुगु, मलयालम और हिंदी की कई फिल्मों में काम किया है। उन्होंने अपने करियर में 100 से अधिक फिल्मों के जरिए दर्शकों का मनोरंजन किया। फिल्म KGF Chapter 1 और KGF Chapter 2 में भी उन्होंने भूमिका निभाई थी। उन्होंने फिल्म केजीएफ में पत्रकार आनंद के इन्फॉर्मर की भूमिका निभाई थी।

उनके जानने वालों का कहना है कि मोहन जुनेजा बचपन से ही ऐक्टर बनना चाहते थे। उन्होंने कॉलेज में पढ़ाई के दौरान नाटकों में काम लिया था। साल 2008 में आई रोमांटिक कन्नड़ फिल्म ‘संगमा’ से करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने कन्नड़ तमिल फिल्म ‘टैक्सी नंबर’ में अभिनय किया। 2010 में मोहन ने कन्नड़ भाषा के नाटक ‘नारद विजया’ और फिर 2018 में उन्होंने तो हॉरर फिल्म ‘निगूडा’ में अपने अभिनय का लोहा मनवाया।

मोहन जुनेजा की आखिरी फिल्म KGF Chapter 2 है। उन्होंने कन्नड़ और तेलुगु फिल्मों में सबसे अधिक काम किया। उनके पास कुल संपत्ति 73 लाख रुपए से अधिक की है। उनकी मौत पर फिल्म इंडस्ट्री के लोगों ने दुख जाहिर किया है।

HT ने भाजपा को बताया गुंडों की पार्टी, विरोध होने पर ‘टेक्निकल’ बहाना: तजिंदर बग्गा की गिरफ़्तारी पर किया था घटिया पोस्ट

पंजाब पुलिस ने शुक्रवार (6 मई, 2022) को भाजपा नेता तजिंदर पाल सिंह बग्गा को उनके दिल्ली स्थित आवास से गिरफ्तार कर लिया और उनके बुजुर्ग पिता के साथ मारपीट की। दिल्ली में पंजाब पुलिस पर अपहरण का मामला दर्ज किया गया। हरियाणा में पंजाब पुलिस की गाड़ी को रोका गया और तजिंदर बग्गा को वापस दिल्ली पुलिस को सौंप दिया गया। लेकिन, इन सबके बीच मीडिया ने भी खूब प्रोपेगंडा फैलाया। हिंदुस्तान टाइम्स (HT) ने तो भाजपा को गुंडों की पार्टी तक बता दिया।

हिंदुस्तान टाइम्स ने ट्विटर पर शेयर की गई अपनी खबर में लिखा, “शुक्रवार को घटनाओं के नाटकीय क्रम में ‘भाजपा – गुंडों की पार्टी’ के नेता तजिंदर बग्गा को पंजाब पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया, फिर उन्हें कुछ ही घंटों बाद वापस दिल्ली ले आया गया।” JNU के प्रोफेसर आनंद रंगनाथन ने HT से पूछा कि भाजपा के बारे में वो ऐसे शब्दों का इस्तेमाल कर रहा है तो ‘आम आदमी पार्टी (AAP)’ को लेकर उसकी शब्दावली क्या होगी?

वहीं अब HT ने इस मामले पर सफाई दी है। मीडिया संस्थान ने कहा, “ट्वीटडेक के एक ऑटोपोल फीचर ने भाजपा के लिए एक शरारतपूर्ण हैशटैग का इस्तेमाल किया और इससे पहले कि इस चीज की जाँच की जाती और इसे सही किया जाता, ट्वीट प्रकाशित हो गया। हमें इस गलती के लिए गंभीर रूप से पछतावा है। हम अपनी सोशल मीडिया प्रकाशन प्रक्रिया की समीक्षा कर रहे हैं और ऐसे कदम उठा रहे हैं, जिससे भविष्य में ऐसा न हो।”

हालाँकि, HT को इस दौरान लोगों की तीखी प्रतिक्रियाओं का सामना करना पड़ा। एक व्यक्ति ने याद दिलाया कि इसी तरह HT ने ‘नीति आयोग’ के CEO अमिताभ कान्त के बयान को लेकर भी झूठ फैलाया था, जिसके बाद उन्हें स्पष्ट करना पड़ा था कि उन्होंने ऐसा कोई बयान नहीं दिया है। उनके हवाले से गलत खबर छाप दी गई थी कि उन्होंने भारत में ‘ज़रूरत से ज्यादा लोकतंत्र’ होने की बात कही है, जबकि वो मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के बारे में बात कर रहे थे।

राजनीतिक विश्लेषक ऋषि बागरी ने हिंदुस्तान टाइम्स से पूछा कि क्या आपका ऑटोपोल फीचर सिर्फ एक ही पार्टी के विरुद्ध काम करता है? उन्होंने आश्चर्य जताया कि इतने सटीक तरीके से किसी वाक्य के बीच इस तरह के हैशटैग का आना मशीनी गलती नहीं हो सकती। सोशल मीडिया में ये भी कहा जा रहा है कि AAP से कई मीडिया संस्थानों को भारी विज्ञापन मिलता है, इसीलिए वो तजिंदर बग्गा मामले में टिप्पणी करने से बच रहे हैं और उल्टा भाजपा को ही दोषी ठहरा रहे हैं।

ईद पर पत्नी अशरीन को शॉपिंग कराने के लिए नागराजू ने बेच दी थी अपनी सोने की चेन: दोनों के बीच बेपनाह मुहब्बत के बावजूद साले मुबीन ने कर दी हत्या

हैदराबाद (Hyderabad) में 4 मई 2022 को 23 साल की मुस्लिम युवती सैयद अशरीन सुल्ताना (Sayed Ashrin Sultana) से शादी करने के कारण उसके 25 साल के दलित युवक नागराजू (Nagaraju) की हत्या कर दी गई। हत्या अशरीन के भाई सैयद मुबीन ने अपने दोस्त मोहम्मद मसूद अहमद के साथ मिलकर की थी। नागराजू से शादी के बाद सैयद अशरीन सुल्ताना ने अपना नाम पल्लवी रख लिया था।

अशरीन और नागराजू दोनों साथ पढ़ते थे और दोनों पिछले 10 वर्षों से एक दूसरे को जानते थे। दोनों के बीच गहरा प्यार था। ईद के दिन अशरीन को तोहफा देने के लिए नागराजू ने अपनी सोने की चेन बेच दी थी। नागराजू पत्नी को खरीददारी के लिए चारमीनार लेकर गए थे।

नागराजू एक कार शोरूम में सेल्स एक्जीक्यूटिव का काम करते थे। वहाँ के HR मैनेजर के सतीश ने बताया कि उन्हें हाल ही में पता चला था कि नागराजू ने शादी की है। उन्होंने कहा कि नागराजू ने उन्हें सोने की चेन बेचने के बारे में उन्हें बताया था और कहा था कि उन्होंने अपनी सोने की चेन 25,000 रुपए में बेच दी है। सतीश ने बताया कि नागराजू अपनी पत्नी को ईद पर खरीददारी के लिए चारमीनार ले जाना चाहते थे। इसलिए उन्होंने पैसे की व्यवस्था चेन बेच कर की थी।  

सतीश ने बताया कि नागराजू बहुत ही ईमानदार, मेहनती और मासूम इंसान थे। वह घर जाने से पहले आमतौर पर कपड़े बदल लेते थे, लेकिन घटना वाली शाम को वह अपनी वर्दी में ही घर चले गए। उन्होंने बताया था कि उन्हें देर हो रही है और अपनी बहन के घर से पत्नी को लेना है।

पत्नी को लेकर जाने के दौरान अशरीन के भाई सैयद मुबीन अहमद ने अपने दोस्त मोहम्मद मसूद अहमद से साथ नागराजू को घेर लिया और पहले रॉड से पीट-पीटकर, फिर चाकू मारकर सरेआम हत्या कर दी। इस दौरान अशरीन उन्हें बचाने की कोशिश करती रही और वहाँ खड़े लगे से भी बचाने की गुहार लगाई, लेकिन किसी ने मदद नहीं की।

नागराजू के दोस्त तलारी दनिया ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि मुबीन ने दोनों की शादी के बाद नागराजू की हत्या करने की कसम खाई थी। वह अशरीन का बड़ा भाई है और फल बेचने का काम करता है। वहीं, उसका दोस्त और रिश्तेदार मसूद अहमद कार मैकेनिक का काम करता है।

ईद मनाने घर आई थी, भाई ने गोली मार दी… क्योंकि नाचती थी, मॉडलिंग में करियर बनाना चाहती थी

पाकिस्तान में एक भाई ने अपनी बहन की हत्या कर दी है। मीडिया रिपोर्ट में हत्या की वजह ऑनर किलिंग (हालाँकि यह शब्द ही गलत है) बताई जा रही है। भाई अपनी बहन के मॉडलिंग और डांसिंग क्षेत्र में करियर बनाने से नाराज था। पुलिस ने आरोपित भाई हमजा को गिरफ्तार कर लिया है। घटना पंजाब क्षेत्र में गुरुवार (5 मई 2022) को घटी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मृतका का नाम सिदरा है। वो लाहौर से 130 किलोमीटर दूर रेनाला खुर्द ओकरा की रहने वाली थी। सिदरा एक स्थानीय कपड़े के ब्रांड के लिए मॉडलिंग करती थी। इसी के साथ वो फैसलाबाद के थिएटर में डांस भी किया करती थी। इस बात से सिदरा का परिवार, खास कर भाई हमजा नाराज रहता था। मृतका के परिजनों ने उसके काम को इस्लाम के खिलाफ बता कर कई बार बंद करने के लिए कहा था।

पाकिस्तान की पुलिस के मुताबिक पिछले सप्ताह सिदरा अपने परिवार के साथ ईद मनाने के लिए आई थी। घटना के दिन उसकी अपने भाई से बहस हुई। इसी बहस के दौरान हमजा ने अपनी बहन को पीटा। बाद में उसने अपनी बहन को गोली मार दी। सिदरा की मौत मौके पर ही हो गई थी। मृतका की उम्र 22 साल बताई जा रही है।

पुलिस ने आरोपित भाई हमजा को गिरफ्तार कर लिया है। हमजा ने पुलिस के सामने अपनी बहन की हत्या करना भी स्वीकार कर लिया है। पुलिस ने इस केस में धारा 302, 311 और 34 PPC में कार्रवाई की है।