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‘ऊँट कौन है, जो पहाड़ के नीचे आ गया’: उमर खालिद को हाईकोर्ट ने बताई ‘लक्ष्मण रेखा’, कहा- PM के लिए ‘जुमला’ का इस्तेमाल ठीक नहीं

दिल्ली दंगों का मास्टरमाइंड और UAPA के तहत जेल में बंद उमर खालिद (Umar khalid) की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने बुधवार (27 अप्रैल 2022) को कठोर शब्दों में कहा कि देश के प्रधानमंत्री (Prime Minister) के लिए ‘जुमला’ जैसे शब्द का इस्तेमाल करना ठीक नहीं है। इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए कि किन तरह के शब्दों के प्रयोग किया जा रहा है। कोर्ट ने कहा कि सरकार की आलोचना करते समय ‘लक्ष्मण रेखा’ का ख्याल रखना आवश्यक है।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल और न्यायमूर्ति रजनीश भटनागर की पीठ को उमर के वकील ने अमरावती में दी गई स्पीच सुनाई। इस पर कोर्ट ने कहा कि भाषण में प्रधानमंत्री के लिए ‘चंगा’ और ‘जुमला’ जैसे शब्दों का प्रयोग किया गया, क्या यह उचित है? इस पर दलील देते हुए खालिद के वकील त्रिदीप पेस ने कहा कि सरकार का विरोध करना अपराध नहीं है। उन्होंने कहा कि CAA के विरोध में सरकार की आलोचना के लिए इस्तेमाल किए गए इन शब्दों के लिए UAPA लगाना ठीक नहीं है।

उमर खालिद के स्पीच को सुनने के बाद जस्टिस भटनागर ने ने वकील से पूछा कि ये ऊँट किसे कह रहे हैं, जो पहाड़ के नीचे आ गया? कोर्ट ने अमरावती में खालिद ने खुद को क्रांतिकारी और इंकलाबी कहा। कोर्ट ने कहा कि फ्री स्पीच के अधिकार से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन इसकी आड़ में भड़काने की इजाजत नहीं दी जा सकती।

इससे पहले पीठ ने शुक्रवार (22 अप्रैल, 2022) को उमर खालिद की याचिका पर सुनवाई करते हुए उनके भाषण को आपत्तिजनक और भड़काऊ बताया था। खालिद का भाषण सुनने के बाद पीठ ने कहा था कि ये आपत्तिजनक और अप्रिय हैं। जिन भावों का इस्तेमाल किया जा रहा है, ये लोगों को उकसाते हैं।

अदालत ने कहा, “क्या ये कहना कि जब आपके पूर्वज अंग्रेजों की दलाली कर रहे थे, गलत नहीं है? अभिव्यक्ति की आजादी का हवाला देकर ऐसे भड़काऊ बयान नहीं दिए जा सकते। लोकतंत्र में इसकी इजाजत नहीं है।” पीठ ने पूछा, “क्या आपको नहीं लगता कि इस्तेमाल किए गए ये भाव लोगों भड़काने वाला है? यह पहली बार नहीं है जब आपने अपने भाषण में ऐसा कहा है। आपने यह कम से कम पाँच बार कहा। यह लगभग ऐसा है जैसे कि भारत की आजादी की लड़ाई केवल एक समुदाय ने लड़ी थी।” पीठ ने सवाल उठाया कि क्या गाँधी जी या शहीद भगत सिंह जी ने कभी इस भाषा का इस्तेमाल किया था?

पीठ ने जब पूछा था कि खालिद पर क्या आरोप हैं। इसके जवाब में त्रिदीप पेस ने दलील दी कि खालिद पर साजिश का आरोप लगाया गया है, लेकिन वह उस वक्त शहर में मौजूद नहीं था। हालाँकि, पीठ ने कहा कि प्रथम दृष्टया अदालत कह सकती है कि खालिद द्वारा दिया गया भाषण स्वीकार्य नहीं है। 

रशीदा बनी गीता, एहसान बना सचिन: मुजफ्फरनगर में दो मुस्लिम परिवारों के 8 सदस्यों की घर वापसी, हवन-पूजन कर बने हिंदू

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में मंगलवार (26 अप्रैल 2022) को दो मुस्लिम परिवारों के 8 सदस्यों ने हिंदू धर्म में वापसी की। बघरा स्थित स्वामी यशवीर आश्रम परिषद के महंत स्वामी यशवीर महाराज और स्वामी मृगेंद्र महाराज ने हवन-पूजन करवाकर इनकी घर वापसी कराई। सभी को गंगाजल से आचमन कराके मंत्रों के जरिए शुद्धिकरण किया गया। इसके बाद घर वापसी करने वाले लोगों को नए नाम भी मिले हैं। शाहिस्ता को राधा, रशीदा को गीता, हारुन को अरुण, बरखा को वर्षा, अकबर को कृष, इकरा को शीतल, एहसान को सचिन और गुल्लू को ऋतिक नाम मिला है।

स्वामी यशवीर महाराज के मुताबिक, लालच या दबाव में आकर धर्मान्तरण करने वाले हिंदुओं के बारे में पता चलने पर उन्होंने ऐसे लोगों की घर वापसी करवाने का फैसला किया। उनका कहना है कि अब तक वे सैकड़ों लोगों की घर वापसी करवा चुके हैं। ये वे लोग हैं जिनके माता-पिता या फिर उससे पहले की पीढ़ी ने किसी कारण से इस्लाम अपना लिया था। जिन दो परिवारों की घर वापसी करवाई गई है वो मूल रूप से मेरठ जिले के रहने वाले हैं।

हिंदू संत का कहना है कि आजादी के बाद 1947 से लेकर जब तक देश में भाजपा की सरकार नहीं आ गई तब सभी सरकारों ने बड़े ही शातिर तरीके से धर्मान्तरण को बढ़ावा देने का काम किया है। महंत के मुताबिक, मौलवी अक्सर गरीब हिंदुओं के घरों में जाते हैं और उन्हें तमाम तरीके के लालच देकर इस्लाम कबूलने को कहते हैं। जब वे नहीं मानते तो उन्हें धमकियाँ भी दी जाती है। महंत यशवीर महाराज कहते हैं कि उत्तर प्रदेश में पहले की सरकारों में हिंदुओं का उत्पीड़न हुआ। उनका इस्लामिक धर्मान्तरण कराया गया। लेकिन योगी सरकार में माहौल बदला है। अब अपना धर्म छोड़ने वाले घर वापसी कर रहे हैं। लोगों का स्वाभिमान जागा है।

‘लगातार बदतमीजी से खुद को बदनाम कर रहे केजरीवाल’: PM मोदी के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में अपनी ‘हरकतों’ से ट्रोल हुए दिल्ली के CM, देखें वीडियो

देश में कोरोना के बढ़ते मामलों से फैली चिंता के बीच प्रधानमंत्री मोदी ने बुधवार (27 अप्रैल, 2022) को राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ समीक्षा बैठक की। वहीं इसी समीक्षा बैठक में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने अपने बैठने के अंदाज और बेअदबी से इंटरनेट में सुर्खियाँ बटोरी हैं। लोगों द्वारा उनकी बड़े पैमाने पर आलोचना की जा रही है।

बीजेपी प्रवक्ता शहजाद जयहिंद ने केजरीवाल का वीडियो शेयर करते हुए पूछा, “क्या अरविंद केजरीवाल बोर हो रहे हैं, मैनरलेस या दोनों? क्या ऐसे कोई मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री के साथ मीटिंग में व्यवहार करता है?”

वहीं अमित मालवीय ने अपने ट्वीट में लिखा, “लगातार बदतमीजी से खुद को बदनाम कर रहे हैं अरविंद केजरीवाल…”

वहीं अखिलेशकांत झा नामक एक ट्वीटर यूजर ने लिखा, “यकीन मानिए केजरीवाल एक IITian हैं। जस्ट नोटिस हिज बॉडी लैंग्वेज।”

द एनालाइजर ने लिखा, “पीएम मोदी से मुलाकात के दौरान अरविंद केजरीवाल कितनी बेशर्मी से पेश आ रहे हैं।”

वहीं जॉन विक नामके एक यूजर ने लिखा, “क्लासरूम में कुछ महत्वपूर्ण चल रहा है और मैं अंतिम बेंच पर…”

किसी ज़फर नाम के यूजर लिखा, “पिछली बार केजरीवाल तरह बैठे हुए मैंने बूम फिल्म जैकी श्रॉफ को देखा था।”

कुनाल परघी नाम के एक यूजर ने लिखा, “इस पढ़े-लिखे राजनेता को देखिए। प्रधानमंत्री के साथ इतनी गंभीर चर्चा में अरविंद केजरीवाल ने इतना गैरजिम्मेदाराना व्यवहार किया। शर्म कीजिए अरविंद केजरीवाल। पिछली बार उन्होंने बिना अनुमति के लाइव वीडियो शुरू किया था।”

जहाँ एक तरफ केजरीवाल की हरकतों के कारण उनकी सख्त आलोचना हो रही है। लोग हर तरह से उन्हें लताड़ रहे हैं।

वहीं बता दें कि कोरोना के संभावित खतरे को देखते हुए मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक के दौरान पीएम मोदी ने कहा, “हमने बाकी देशों के मुकाबले कोरोना पर बेहतर नियंत्रण रखा है, लेकिन कोरोना की चुनौती अभी पूरी तरह टली नहीं है। ओमिक्रोन और उसके सब वैरिएंट्स किस तरह की गम्भीर परिस्थिति पैदा कर सकते हैं, ये यूरोप के देशों में हम देख सकते हैं। पिछले कुछ महीने में इन वैरिएंट्स से मामले बढ़े हैं। ऐसे में हमें अलर्ट रहना होगा।

गौरतलब है कि पीएम मोदी ने मुख्यमंत्रियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में कहा, “पिछले 2 हफ्तों से मामले जो बढ़ रहे हैं, उससे हमें अलर्ट रहना है। 2 साल के भीतर देश ने हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर से लेकर ऑक्सीजन सप्लाई तक, कोरोना से जुड़े हर मोर्चे पर जो आवश्यक है, वो काम किया है। यही कारण है कि तीसरी लहर में स्थितियाँ अनियंत्रित होने की खबर नहीं आई। तीसरी लहर के दौरान हमने हर दिन 3 लाख से अधिक केस देखे। हमारे सभी राज्यों ने इन्हें हैंडल भी किया।”

माजिद ने गाय के साथ किया अप्राकृतिक सेक्स, CCTV फुटेज से खुला राज: यूपी पुलिस ने दबोचा

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) की राजधानी लखनऊ (Lucknow) से एक गाय (Cow) के साथ दुष्कर्म (Rape) करने का मामला सामने आया है। लखनऊ पुलिस ने गाय के साथ अप्राकृतिक यौन संबंध बनाने के आरोप में माजिद नाम के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। वह प्रदेश के सरोजनी नगर का रहने वाला है। जानकारी के मुताबिक, यह घटना 23 अप्रैल की है, लेकिन मंगलवार (26 अप्रैल, 2022) को सीसीटीवी फुटेज देखने के बाद सामने आई। सीसीटीवी फुटेज में आरोपित माजिद को गाय के साथ आपत्तिजनक अवस्था में देख सभी के होश उड़ गए।

बताया जा रहा है कि जब लोगों ने उसके गाय के साथ घिनौने कृत्य को देखा तो आक्रोशित हो उठे। शिकायतकर्ता जितेंद्र यादव ने आरोप लगाया कि 23 अप्रैल को व्यक्ति को सीसीटीवी फुटेज में उनकी गाय के साथ यौन संबंध बनाते हुए देखा गया था। लखनऊ के सरोजनी नगर के एसएचओ संतोष कुमार आर्य ने बुधवार (27 अप्रैल, 2022) को कहा कि आरोपित का पड़ोसी अपने सीसीटीवी फुटेज को देख रहा था, इसी दौरान उसे इस घटना का पता चला। फिर उसने गाय के मालिक को घटना के बारे में सूचित किया।

घटना से नाराज स्थानीय लोगों ने आरोपित की तलाश शुरू कर दी और उसे लखनऊ के सरोजनी नगर के दरोगा खेरा से पकड़ लिया। पुलिस ने आरोपित के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने बताया कि मामले में आगे की जाँच की जा रही है।

गौरतलब है कि मार्च 2022 में उत्तराखंड के चमोली जिले में आलम अंसारी नाम का व्यक्ति गाय के साथ रेप करते हुए पकड़ा गया था। लोगों ने उसको पुलिस के हवाले कर दिया। आलम अंसारी मूल रूप से झारखंड के हजारीबाग का रहने वाला था और जो चमोली में JCB मशीन चलाने का काम करता था। गाय के साथ उसको दुष्कर्म करते हुए सबसे पहले उसके साथ काम करने वाले ललित मोहन ने देखा। बाद में ललित मोहन की ही शिकायत पर उसको पुलिस ने IPC की धारा 377, 511 के साथ पशु क्रूरता एक्ट 1960 की के सेक्शन 11 (3) में गिरफ्तार कर लिया।

इससे पहले फरवरी 2022 में राजस्थान के भिवाड़ी में कुछ लोगों ने एक गाय/बछिया के साथ दुष्कर्म किया और उसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। मामला सामने आने के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए जुबेर और मोहम्मद चुन्ना को गिरफ्तार कर लिया।

4 बीवी नहीं रख पाएँगे मुस्लिम, प्रॉपर्टी में बेटियों का भी होगा बराबर का अधिकार: समान नागरिक संहिता लागू होने पर ऐसे खत्म होगा ‘शरिया का शासन’

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह (MHA Amit Shah) ने मध्य प्रदेश के भोपाल में कहा था कि भाजपा के घोषणा-पत्र में किए गए वादों के अनुसार राम मंदिर निर्माण, अनुच्छेद 370, तीन तलाक का काम पूरा हो गया और अब समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) की बारी है। उन्होंने यह भी कहा कि इसे सभी भाजपा शासित राज्यों में लागू किया जाएगा और फिलहाल उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Uttarakhand CM Pushkar Singh Dhami) के नेतृत्व में इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया जा रहा था।

समान नागरिक संहिता की जरूरत देश को क्यों है, सबसे पहले इसे समझना आवश्यक है। देश में हिंदू और मुस्लिमों के अलग-अलग सिविल लॉ होने की वजह से न्यायालयों में भी कई बार असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। ऐसे में कई हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक ने देश में समान नागरिक संहिता की वकालत की है। संविधान का अनुच्छेद 44 भी देश में समान नागरिक संहिता लागू करने की बात कहता है। 

क्या है समान नागरिक संहिता

समान नागरिक संहिता एक ऐसा कानून है, जो देश के हर समुदाय पर समान रूप लागू होता है। व्यक्ति चाहे किसी भी धर्म का हो, जाति का हो या पंथ का हो, सबके लिए एक ही कानून होगा। अंग्रेजों ने आपराधिक और राजस्व से जुड़े कानूनों को भारतीय दंड संहिता (IPC) 1860, भारतीय साक्ष्य अधिनियम (IEA) 1872, भारतीय अनुबंध अधिनियम (ICA) 1872, विशिष्ट राहत अधिनियम 1877 आदि के माध्यम से सारे समुदायों पर लागू किया, लेकिन शादी-विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, संपत्ति, गोद लेने आदि से जुड़े मसलों को धार्मिक समूहों के लिए उनकी मान्यताओं के आधार पर छोड़ दिया।

आजादी के बाद देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने हिंदुओं के पर्सनल लॉ को खत्म कर दिया, लेकिन मुस्लिमों के कानून को ज्यों का त्यों बनाए रखा। हिंदुओं की धार्मिक प्रथाओं के तहत जारी कानूनों को निरस्त कर हिंदू कोड बिल के जरिए हिंदू विवाह अधिनियम 1955, हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 1956, हिंदू नाबालिग एवं अभिभावक अधिनियम 1956, हिंदू दत्तक ग्रहण और रखरखाव अधिनियम 1956 लागू कर दिया गया। ये कानून हिंदू, बौद्ध, जैन, सिख आदि पर समान रूप से लागू होते हैं।

मुस्लिमों का कानून पर्सनल कानून (शरिया), 1937 के तहत संचालित होता है। इसमें मुस्लिमों के निकाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, संपत्ति का अधिकार, बच्चा गोद लेना आदि आता है, जो इस्लामी शरिया कानून के तहत संचालित होते हैं। अगर समान नागरिक संहिता लागू होता है तो मुस्लिमों के निम्नलिखित कानून बदल जाएँगे।

मुस्लिमों में चार शादियों पर रोक

मुस्लिम पर्सनल लॉ, जिसे शरिया कानून भी कहा जाता है, इस्लामिक किताब कुरान और हदीसों पर आधार है। कुरान में मुस्लिमों को चार शादियाँ करने को वैध माना गया है। इसके आधार पर मुस्लिम चार निकाह को वैध मानते हैं। वहीं, सामान्य भारतीय कानून के तहत कोई भी व्यक्ति सिर्फ एक शादी कर सकता है। विशेष परिस्थितियों में दूसरी शादी की इजाजत दी जा सकती है। समान नागरिक संहिता लागू होने पर इसका सीधा असर मुस्लिमों की वैवाहिक स्थिति पर पड़ेगा।

गुजारा भत्ता एवं तलाक के बाद एकमुश्त राशि

केंद्र की मोदी सरकार ने साल 2019 में मुस्लिम महिलाओं के लिए अभिशप्त बने तीन तलाक को खत्म कर दिया था। वहीं, घरेलू हिंसा सहित कई मामलों में न्यायालय ने मुस्लिमों को भत्ता देने का निर्णय इस आधार पर दिया है कि ये सिविल दायरे में नहीं, बल्कि आपराधिक मामले के तहत आते हैं। हालाँकि, मुस्लिमों में तलाक के बाद जो एकमुश्त राशि दी जाती है, यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू होने के बाद उसमें भी बदलाव आएगा।

मुस्लिमों में निकाह के दौरान मेहर की रकम देने का रिवाज है। ये मेहर बेहद ही मामूली होते हैं। कई मामले में तो ये 2-3 हजार तक सीमित होते हैं। ऐसे में जब मुस्लिमों को शरीयत के तहत तलाक दी जाती है तो एकमुश्त गुजारा भत्ता (Alimony) के रूप में उसी मेहर की रकम को लौटा दिया जाता है, जो एक या दो महीने के खर्च के बराबर भी नहीं होता है। ऐसे में एक समान नागरिक संहिता लागू होता है तो एकमुश्त राशि या उचित मासिक गुजारा भत्ता देना होगा।

इस मामले में 1985 का शाह बानो केस अहम है। 60 साल की शाह बानो को उसके पति ने तीन तलाक कहकर घर से निकाल दिया। इसके बाद वह कोर्ट पहुँची। सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया कि शाह बानो तलाक के बाद अपने पति से गुजारा भत्ता पाने की हकदार है, लेकिन मुस्लिम पर्सनल बोर्ड के कड़े विरोध के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गाँधी ने संसद के जरिए इस फैसले को पलट दिया था।

बाद में एक अन्य फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने इद्दत की अवधि के बाद मुस्लिम महिलाओं को गुजारा भत्ता दिए जाने का फैसला सुनाया है। इद्दत तलाक के बाद की वो अवधि होती है, जिसमें मुस्लिम महिला दूसरी शादी नहीं कर सकती। हालाँकि, शरिया कानून के तहत इद्दत के बाद गुजारा भत्ता देना हराम है।

संपत्ति में बेटियों को देना होगा बराबर का अधिकार

भारतीय संविधान एवं कानून के तहत पैतृक संपत्ति पर जितना अधिकार पुरुषों का है, उतना ही महिलाओं का भी है। यदि कोई महिला अपने पैतृक संपत्ति में दावा करती है तो उसे बराबर का हिस्सा देना होगा। वहीं, शरिया कानून में इसके उलट है। शरिया कानून के तहत, पैतृक संपत्ति में पुरुष के अधिकार का आधा महिलाओं का हिस्सा होता है। यानि महिलाओं को बराबर का हिस्सेदार नहीं नहीं माना जाता।

वहीं, ससुराल पक्ष में मुस्लिम महिला का संपत्ति पर कोई अधिकार नहीं होता। उसे निकाह के दौरान मिली मेहर की राशि, मिले उपहार, पिता की तरफ से मिले धन पर ही उसका अधिकार होता है। अगर वह तलाक लेती है तो सिर्फ इन्हीं संपत्तियों को वह शरिया कानून के तहत पाने की अधिकारी है। अगर शौहर चाहे तो अपनी इच्छा के आधार पर उसे कुछ दे सकता है।

मुस्लिमों द्वारा गोद लिए बच्चे भी होंगे संपत्ति के वारिस

हिंदू दत्तक ग्रहण और रखरखाव अधिनियम 1956, के तहत दत्तक पुत्र को गोद लेने वाले माता-पिता की संपत्ति में एक सामान्य पुत्र की तरह अधिकार होता है। वहीं, मुस्लिम शरिया कानून के तहत ऐसा नहीं है। इस्लाम में गोद लिए गए बच्चों को संपत्ति में अधिकार नहीं होता।

दारुल उलूम देवबंद ने भी इस संबंध में फतवा जारी किया था। शरिया कानून के आधार पर देवबंद ने कहा था कि गोद लिए गए बच्चे का अधिकार असली बच्चे के समान नहीं होगा। उसे संपत्ति में कोई अधिकार नहीं मिलेगा और ना ही उसे किसी मामले में वारिस बनाया जा सकता है। इसमें आगे कहा गया है कि सिर्फ गोद ले लेने से वास्तविक बच्चे का अधिकार उस पर लागू नहीं हो जाते। परिपक्व होने के बाद उसे शरिया का पालन करना होगा।

शरिया कानून के अनुसार, दत्तक बच्चे को हिबा (उपहार) दिया जा सकता है, लेकिन वारिस नहीं बनाया जा सकता। इस्लाम के अनुसार, गोद लिया जाने वाले बच्चे को लेकर ‘महरम’ का सवाल खड़ा हो जाता है। इस्लाम में महरम उसे कहते हैं, जिससे शादी नहीं की जा सकती है। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने भी कोर्ट में कहा था कि इस्लामी कानून गोद लिए बच्चे को जन्म दिए गए बच्चे के समान नहीं मानता।

तलाक के बाद बच्चे की कस्टडी

हिंदू कानून के मुताबिक माता-पिता के तलाक की स्थिति में बच्चे की कस्टडी हिंदू माइनॉरिटी एंड गार्डियनशिप ऐक्ट 1956 के तहत निर्धारित होती है। तलाक के वक्त अगर बच्चे की उम्र 5 साल से कम है तो उसे उसके माँ के हवाले किया जाएगा। अगर बच्चा है 9 साल से ऊपर का हो गया है तो वह कोर्ट में बता सकता है कि वह अपनी माँ के साथ जाना चाहता है या अपने पिता के साथ। इसके आधार पर उसे माँ या पिता की कस्टडी में दी जाएगी।

वहीं, मुस्लिम शरिया कानून के तहत बच्चे की उम्र 7 साल होने तक उसकी कस्टडी माँ के पास होती है। अगर माँ उसे रखने या उसका पालन पोषण करने में असमर्थ है तो उस बच्चे की कस्टडी उसके अब्बू को दे सकती है। वहीं, ईसाइयों में कस्टडी को लेकर कोई नियम निर्धारित नहीं है।

दारुल कजा या शरिया कोर्ट का अंत

इस्लाम में शरिया कानून के आधार पर महिला, घरेलू एवं संपत्ति से संबंधित विवादों को दारूल कजा या शरिया अदालत के माध्यम से निपटाने का प्रचलन है। हाल के वर्षों में मुस्लिमों के सिविल मामलों से संबंधित विवादों का निपटारा करने के लिए शरिया कोर्ट देश के हर जिले में स्थापित करने की बात भी सामने आई थी। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने इसकी घोषणा की थी। हालाँकि, घोषणा की साथ ही देश भर में बवाल हो गया था।

अगर देश में समान नागरिक संहिता लागू होता है कि इन शरिया अदालतों की कोई वैल्यू नहीं रह जाएगी और इन पर पूरी तरह लगाम लग जाएगा। अन्य समुदायों के तरह ही मुस्लिमों के आपराधिक और सिविल मामलों का हर निर्णय अदालतों के तहत ही मान्य होंगे, जो कि अभी भी मान्य हैं।

न्यायपालिका पर से बोझ की कमी

समान नागरिक संहिता के लागू होने से जो सबसे महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ेगा, वह है न्यायालयों पर दबाव में कमी। अलग-अलग धर्मों से जुड़े मामलों के कारण न्यायालयों पर भारी दबाव पड़ता है और मामले का निपटान करने में समय भी अधिक लगता है। अगर यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू होने के बाद अदालतों में लंबित पड़े मामलों को निपटाने में आसानी होगी।

महाराष्ट्र, बंगाल, केरल, झारखंड… पेट्रोल-डीजल पर 7 राज्यों को PM मोदी की नसीहत, कोरोना पर मुख्यमंत्रियों के साथ 24वीं बैठक में दोहराया – Test, Track, Treat

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना वायरस की चौथी लहर की आशंकाओं के बीच सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक कर के स्थिति की समीक्षा की और उन्हें विभिन्न सुझाव दिए। उन्होंने अपनी बात तमिलनाडु के तंजावुर में हुए आग हादसे को लेकर शोक प्रकट करने के साथ की, जिसमें दो बच्चों समेत 11 की मौत हो गई है। उन्होंने कहा कि पीड़ितों की आर्थिक मदद की जा रही है। पीएम मोदी ने बताया कि पिछले दो वर्षों में कोरोना पर मुख्यमंत्रियों के साथ उनकी ये 24वीं बैठक है।

पीएम मोदी ने कहा कि कोरोना काल में जिस तरह केंद्र और राज्यों ने मिलकर काम किया, उसने कोरोना के खिलाफ देश की लड़ाई में अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि ये स्पष्ट है कि कोरोना की चुनौती अभी पूरी तरह टली नहीं है, क्योंकि ओमिक्रोन और उसके सब वैरिएंट्स किस तरह गंभीर परिस्थिति पैदा कर सकते हैं, ये यूरोप के देशों में हम देख सकते हैं। उन्होंने कहा कि हमारे देश में लंबे समय के बाद स्कूल खुले हैं, ऐसे में कोरोना केस के बढ़ने से परिजनों की चिंता बढ़ रही है।

पीएम मोदी ने ध्यान दिलाया कि कैसे कुछ स्कूलों से बच्चों के संक्रमित होने की खबरें आ रही हैं, लेकिन संतोष का विषय है कि ज्यादा से ज्यादा बच्चों को वैक्सीन का कवच मिल रहा है। उन्होंने याद दिलाया कि मार्च में सरकार ने 12-14 वर्ष के बच्चों के लिए टीकाकरण शुरू कर दिया था और अब 6-12 वर्ष के बच्चों के लिए भी को-वैक्सीन टीके की अनुमति मिल गई है। उन्होंने कहा कि सभी योग्य बच्चों का जल्द से जल्द टीकाकरण हमारी प्राथमिकता है और इसके लिए पहले की तरह स्कूलों में विशेष अभियान चलाने की जरूरत भी होगी।

प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि टीचर्स और माता-पिता इसे लेकर जागरूक रहें, हमें ये भी सुनिश्चित करना होगा। उन्होंने आँकड़े बताए कि तीसरी लहर के दौरान हमने हर दिन 3 लाख से अधिक केस देखे, जिसे हमारे सभी राज्यों ने इन्हें हैंडल भी किया और बाकी सभी सामाजिक, आर्थिक गतिविधियों को भी गति दी। उन्होंने जानकारी दी कि हमारे वैज्ञानिक और विशेषज्ञ नेशनल और ग्लोबल स्थिति को लगातार मॉनिटर कर रहे हैं और उनके सुझावों पर हमें pre-emptive, pro-active और collective approach के साथ हमें काम करना होगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “संक्रमण को शुरुआत में ही रोकना हमारी प्राथमिकता पहले भी थी, आज भी यही रहना चाहिए। Test, Track और Treat की हमारी स्ट्रैटेजी को भी हमें उतने ही प्रभावी तौर पर लागू करना है। आज कोरोना की जो स्थिति है उसमें ये जरूरी है कि अस्पतालों में भर्ती मरीजों में जो हमारे गम्भीर इन्फ्लूएंजा के केस हैं, उनका शत प्रतिशत RT-PCR टेस्ट हो। इंफ्रास्ट्रक्चर के अपग्रेड का काम तेजी से चलता रहे, ये सुनिश्चित करना चाहिए। बिस्तर, वेंटिलेटर और पीएसए ऑक्सीजन प्लांट जैसी सुविधाओं के लिए हम काफी बेहतर स्थिति में हैं लेकिन ये सुविधाएँ कार्यांवित रहे, हमें ये भी सुनिश्चित करना होगा।”

उन्होंने आगे कहा कि आज की वैश्विक परिस्थितियों में भारत की अर्थव्यवस्था की मजबूती के लिए आर्थिक निर्णयों में केंद्र और राज्य सरकारों का तालमेल, सामंजस्य पहले से अधिक आवश्यक है। बकौल पीएम मोदी, जो युद्ध की परिस्थिति पैदा हुई है, जिससे सप्लाई चैन प्रभावित हुई है, ऐसे माहौल में दिनों-दिन चुनौतियाँ बढ़ती जा रही हैं और ये वैश्विक संकट अनेक चुनौतियाँ लेकर आ रहा है। ऐसे में केंद्र और राज्य के बीच तालमेल को और बढ़ाने को उन्होंने अनिवार्य करार दिया।

साथ ही प्रधानमंत्री ने कहा कि पेट्रोल डीजल की बढ़ती कीमत का बोझ कम करने के लिए केंद्र सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में पिछले नवंबर में कमी की थी और राज्यों से भी आग्रह किया गया था कि वो अपने यहाँ टैक्स कम करें। बकौल पीएम, कुछ राज्यों ने तो अपने यहां टैक्स कम कर दिया, लेकिन कुछ राज्यों ने अपने लोगों को इसका लाभ नहीं दिया गया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, केरल, झारखंड, तमिलनाडु ने किसी न किसी कारण से केंद्र सरकार की बातों को नहीं माना और उन राज्य के नागरिकों पर बोझ पड़ता रहा।

प्रधानमंत्री ने कहा, “मेरी प्रार्थना है कि नंवबर में जो करना था, अब वैट कम करके आप नागरिकों को इसका लाभ पहुँचाएँ। ढ़ती गर्मी के समय में हम अलग-अलग स्थानों पर हम आग की बढ़ती हुई घटनाएँ देख रहे हैं। पिछले साल कई अस्पतालोँ में आग लगी, वो बड़ी दर्दनाक स्थिति थी। मेरा सभी राज्यों से आग्रह है कि हम अभी से अस्पतालों का सेफ्टी ऑडित कराएँ, सुरक्षा के इंतजाम पुख्ता करें।” वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से हुई बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया भी उपस्थित रहे।

कंपनी मीटिंग में फूट-फूट कर रोई ट्रंप का हैंडल हटवाने वाली ट्विटर अधिकारी, बोले एलन मस्क – फ्री स्पीच से डरने वाले ये सब करते हैं

एलन मस्क के हाथों ट्विटर के बिकने के बाद सोशल मीडिया पर इस संबंध में मिश्रित प्रतिक्रिया आ रही हैं। चर्चा है कि आखिर कंपनी के कर्मचारियों का इस तरह कंपनी बिकने पर क्या कहना है। इसी क्रम में ट्विटर की चीफ लीगल ऑफिसर विजया गड्डे का रिएक्शन भी सोशल मीडिया पर शेयर हो रहा है। विजया गड्डे ट्विटर की वहीं अधिकारी हैं जिन्होंने डोनाल्ड ट्रंप का अकॉउंट सस्पेंड करने में और हंटर बाइडेन के लैपटॉप पर बनी स्टोरी को दबाने का काम किया था।

खबरों के अनुसार, एलन मस्क द्वारा ट्विटर खरीदे जाने के बाद विजया गड्डे ने अपने टीम सदस्यों की मीटिंग बुला कर इस मामले पर चर्चा की। अपनी टीम की तारीफ, कंपनी से जुड़े अनुभवों के अलावा उन्होंने इस टीम चर्चा में इस बात पर चिंता जताई कि कंपनी का भविष्य एलन मस्क के हाथों में जाने के बाद क्या होगा। इस मीटिंग के दौरान विजया रोईं भीं।

मालूम हो कि विजया गड्डे 2011 से ट्विटर के साथ जुड़ी हुई हैं। वह कंपनी में ट्रस्ट, सेफ्टी, लीगल और पब्लिक पॉलिसी फंक्शन देखती आई हैं। इसके अलावा उनका काम मंच पर अभिव्यक्ति और उत्पीड़न जैसे संवेदनशील मुद्दों को संभालने का भी होता था। कथिततौर पर उन्होंने ट्विटर और मस्क के सौदे को अंतिम रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी भूमिका को ट्विटर में सबसे विवादित माना जाता है। इस चीज का निर्णय उन्हीं की टीम लेती थी कि प्लेटफॉर्म पर कंटेंट को कैसे मॉडरेट करें। डोनाल्ड ट्रंप का अकॉउंट सस्पेंड और हंटन बाइडन के लैपटॉप स्टोरी सेंसर होना, दो ऐसे मामले है जिसकी वजह से उनकी काफी आलोचना हुई।

हंटर बाइडेन की स्टोरी करने पर अकॉउंट सस्पेंड किया

ट्विटर के इस तरह बिकने के बाद विजय का जो रिएक्शन आया, उस पर कई पोर्टल्स ने खबर छापी, जिसे देख ब्रेकिंग प्वाइंट के होस्ट ने सागर ने याद दिलाया कि कैसे वही विजय ट्विटर का मस्क के बनने पर चिंतित हैं जिन्होंने कभी हंटर बाइडेन की स्टोरी दबाने में भूमिका निभाई थी। उनके इस ट्वीट पर एलन मस्क को भी टैग किया गया था जिसके बाद मस्क ने अपनी प्रतिक्रिया भी दी। उन्होंने हंटन बाइडेन के लैपटॉप वाली स्टोरी पर न्यूयॉर्क पोस्ट के ट्विटर अकॉउंट सस्पेंड होने का मुद्दा उठाया और कहा, “एक वास्तविक कहानी प्रकाशित करने के लिए प्रमुख समाचार संगठन के ट्विटर अकॉउंट को निलंबित करना अविश्वसनीय और अनुचित था।”

एलन मस्क का विरोध करने वालों को जवाब

इसके अलावा मस्क ने उन लोगों पर भी निशाना साधा जो ट्विटर और उनके बीच हुई डील की निंदा कर रहे हैं। एलन ने कहा, “जिन्हें स्वतंत्र अभिव्यक्ति का डर है उन्हीं का ये रिएक्शन होता है।” उन्होंने बताया कि जब वो स्वतंत्र अभिव्यक्ति की बातें करते हैं तो कानून के मद्देनजर करते हैं। अपने ट्वीट में उन्होंने लिखा, “मैं सेंसरशिप के खिलाफ हूँ जो कानून से बहुत आगे चली जाती है…अगर लोग चाहते हैं कि कम बोलने को मिले तो वो सरकार को ऐसा कानून लाने को कह दें। लोगों की इच्छा से विपरीत जाना तो लोगों की इच्छा के विपरीत है।”

‘300 साल पुराना मंदिर ध्वस्त किया, बिखड़ी पड़ी थी प्रतिमाएँ’: राजस्थान में हिन्दुओं का बड़ा विरोध प्रदर्शन, CM गहलोत के इस्तीफे की माँग

राजस्थान (Rajasthan) में हिंदू नववर्ष के मौके पर करौली में कट्टरपंथी ]मुस्लिम भीड़ द्वारा हिंदुओं की रैली पर हमले के घाव अभी भरे भी नहीं थे कि अलवर में 2 हिंदू मंदिरों को तोड़े जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इसके खिलाफ बुधवार (27 अप्रैल, 2022) को बीजेपी और विश्व हिंदू परिषद की ओर से ‘आक्रोश रैली’ निकाली गई।

इस दौरान इसमें अलवर से भाजपा के सांसद बालकनाथ समेत कई साधु-संत शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने ‘जय श्रीराम’ की नारेबाजी करते हुए कलेक्ट्रेट की तरफ मार्च किया। इस बीच पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए बैरिकेड्स लगा दिए। स्थानीय लोगों का आरोप है कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के नाम पर अधिकारियों ने मंदिर में लगी मूर्तियों को हटाने तक का मौका नहीं दिया। ‘इंडिया टुडे’ के मुताबिक, घटनास्थल पर मूर्तियों के टुकड़े चारों ओर मूर्तियों के टुकड़े पड़े हुए थे।

सांसद बालकनाथ ने गहलोत सरकार पर तुष्टिकरण का आरोप लगाते हुए कहा कि हम राजस्थान सरकार को तुष्टीकरण की राजनीति करने से रोकने के लिए यह मार्च निकाल रहे हैं। हमारे ज्ञापन में हमने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, ध्वस्त किए गए मंदिर निर्माण की माँग की है। इसके साथ ही बीजेपी नेता ने सीएम गहलोत से भी इस्तीफे की माँग की है।

गौरतलब है कि पिछले दिनों राजगढ़ में अलवर जिला प्रशासन की ओर से अतिक्रमण हटाने की मुहिम शुरू की गई थी, जिसमें प्रशासन ने 300 साल पुराने शिव मंदिर को अवैध करार देते हुए उसे ढहा दिया था। इस केस में राजगढ़ अनुमंडल दंडाधिकारी (SDM) केशव कुमार मीणा, राजगढ़ नगर पालिका बोर्ड के अध्यक्ष सतीश दुहरिया और स्थानीय नगरपालिका के अधिशासी अधिकारी (EO) बनवारी लाल मीणा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था।

करौली हिंसा पर सरकार की कार्रवाई

इस बीच करौली हिंसा पर कार्रवाई करते हुए फरार चार आरोपितों की संपत्तियों की कुर्की की कार्रवाई शुरू कर दी है। इन चारों की पहचान नगर परिषद के पूर्व अध्यक्ष राजाराम गुर्जर, हिंदू सेना के प्रदेश अध्यक्ष साहब सिंह गुर्जर, अंची और मतलूब अहमद के रूप में हुई है। करौली हिंसा के मामले में अब तक कुल 41 एफआईआर दर्ज की गई है, जिसमें से एक पुलिस ने और बाकी 40 केस दोनों पक्षों द्वारा दर्ज कराई गई है।

उल्लेखनीय है कि करौली जिले के फूटा कोट इलाके में शनिवार (2 अप्रैल, 2022) को हिन्दू नव वर्ष (नव संवत्सर) के उपलक्ष्य में मुस्लिम बहुल इलाके से गुजर रही एक बाइक रैली पर इस्लामिक कट्टरपंथियों ने पथराव के बाद एक दुकान और एक बाइक को आग के हवाले कर दिया था। इसके अलावा हिंदुओं पर हमले किए गए थे। इस घटना को राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र ने सुनियोजित साजिश करार दिया था।

आगरा कैंट रेलवे स्टेशन पर बने बाबा भूरे शाह मजार को अतिक्रमण हटाने के लिए नोटिस, वरना होगी कार्रवाई, नूरी मस्जिद के इमाम को भी अल्टीमेटम

उत्तर प्रदेश में आगरा कैंट रेलवे स्टेशन पर बाबा भूरे शाह मजार को अतिक्रमण पर कार्रवाई अभियान तहत साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए प्रशासन ने नोटिस जारी किया है। सम्पदा अधिकारी द्वारा 25 अप्रैल, 2022 को भेजे गए नोटिस में 13 मई,2022 को जमीन के मालिकाना हक़ से सम्बंधित कागजातों साथ मजार पक्ष को शाम 4 बजे तक उपस्थित होना है। ऐसा न करने पर सम्पदा अधिकारी के न्यायालय द्वारा एक पक्षीय सुनवाई के पश्चात भी निर्णय भी सुनाया जा सकता है।

सम्पदा अधिकारी द्वारा जारी किया गया नोटिस

बता दें कि मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय के सम्पदा अधिकारी द्वारा आगरा कैंट रेलवे स्टेशन के सिंक लाइन स्थित बाबा भूरे शाह मजार के केयर टेकर सज्जादा नाशिन को भेजा गया है। मजार की व्यवस्था देखने वालों से निर्धारित समय के पहले ही जमीन से जुड़े कागजातों की छायाप्रति उपलब्ध कराने को कहा गया है।

वहीं उत्तर मध्य रेलवे द्वारा दूसरा नोटिस आगरा छावनी रेलवे भूमि में स्थित नूरी मस्जिद को भेजा गया है। मस्जिद के इमाम को भेजे गए नोटिस में कहा गया है, “आगरा छावनी रेलवे एरिया में अतिक्रमण को हटाने के लिए विशेष अभियान के अंतर्गत जॉइंट सर्वे कार्य प्रगति पर है। जिसमें यह पाया गया है कि आगरा छावनी में रेलवे भूमि पर मस्जिद बना हुआ है। जिसे उपर्युक्त आदेश के अनुपालना में हटाए जाने की आवश्यकता है।”

नूरी मस्जिद को जारी नोटिस

नोटिस में साफ कहा गया है कि मस्जिद को हटाकर कहीं अन्य स्थान पर शिफ्ट किया जाए। यह कार्य 8 दिन के अंदर किया जाना आवश्यक है। अन्यथा रेलवे नियमानुसार उचित कार्रवाई कर सकती है। बता दें कि यह नोटिस 28 दिसंबर, 2022 को ही जारी की गई थी।

एप्पल चार्ट पर सबसे ऊपर पहुँचा डोनाल्ड ट्रम्प का एप ‘ट्रुथ सोशल’, ट्विटर-TikTok को भी छोड़ा पीछे: पूर्व राष्ट्रपति ने एलन मस्क को बताया अच्छा आदमी

डोनाल्ड ट्रंप का ट्रुथ सोशल ऐप (Truth Social Application) फिलहाल एप्पल स्टोर पर चार्ट में सबसे आगे है। हाल ही में माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म ट्विटर (Twitter) को खरीदने वाले एलन मस्क ने इस संबंध में एक तस्वीर शेयर की है, जिसमें देखा जा सकता है कि टॉप पर ‘ट्रुथ सोशल’ ऐप है, जिसके बाद ट्विटर और टिकटॉक है। बता दें कि पिछले साल अमेरिकी संसद भवन (कैपिटल हिल) में भड़की हिंसा के बाद डोनाल्ड ट्रंप को ट्विटर समेत कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बैन कर दिया गया था। जिसके बाद उन्होंने इस ऐप को लॉन्च किया था।

रिपोर्टों के अनुसार, डील से पहले, ट्रुथ सोशल चार्ट पर 52वें स्थान पर था जबकि ट्विटर 39वें स्थान पर था। 18 से 25 अप्रैल के बीच, ट्रंप के ट्रुथ सोशल के डाउनलोड सप्ताह में 75,000 तक पहुँच गए, इसमें 150% की वृद्धि दर्ज की गई। इस साल फरवरी में लॉन्च होने के बाद से ट्रंप के ट्रुथ सोशल को लगभग 1.4 मिलियन बार डाउनलोड किया जा चुका है। ऐप अभी तक भारतीय बाजार में एप्पल स्टोर पर उपलब्ध नहीं है। हालाँकि, यह Android फ़ोन के लिए Google Play Store पर उपलब्ध है।

हालाँकि, ट्रंप ने साफ कर दिया है कि वे ट्विटर पर वापस नहीं आएँगे। उन्होंने कहा कि भले ही एलन मस्क के कंपनी सँभालने के बाद उनका अकाउंट बहाल हो जाए, लेकिन ट्रुथ ऐप पर ही रहेंगे।

फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में ट्रम्प ने कहा था, “मैं अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर ही रहूँगा।” टेस्ला के CEO की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा, “एलन मस्क अच्छे आदमी हैं, मुझे उम्मीद है कि वे ट्विटर में सुधार करेंगे। हालाँकि, मैं Truth पर ही रहूँगा।”

मस्क ने कुछ दिन पहले ऐलान किया था कि वे ट्विटर को अनलॉक कर देंगे। ऐसे में मस्क के ट्विटर खरीदने के बाद ट्रंप की वापसी का अनुमान लगाया जा रहा था, लेकिन पूर्व राष्ट्रपति ने इन सभी अटकलों पर विराम लगा दिया है।