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कर्नाटक में एक और हिंदू पर हमला: तौसीफ ने दोस्तों संग मिल मधु को चाकू मारा, खुलेआम गाँजा पीने से किया था मना

कर्नाटक के शिवमोगा (Shivamogga, Karnataka) में अल्पसंख्यक समुदाय के के छह हमलावरों ने गुरुवार (7 अप्रैल 2022) को एक फूल विक्रेता पर हमला कर उसे चाकू मार दिया। 6 लोगों की भीड़ का मुखिया तौसीफ बताया जा रहा है। इस मामले में पुलिस ने चार आरोपितों को गिरफ्तार किया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला शिवमोगा के न्यू मंडली मोहल्ले की है। मोहल्ले का रहने वाला 22 वर्षीय मधु फूल मंडी में एक व्यापारी को फूल देकर अपने घर लौट रहा था। इसी दौरान हमलावरों ने उसे रोका और बुरी तरह से मारा। मारपीट के दौरान ही उसे चाकू मार दी गई।

बताया जाता है कि कुछ महीने पहले मधु ने तौसीफ और उसके गिरोह के साथियों द्वारा सार्वजनिक जगह पर ‘गांजा’ पीने को लेकर आपत्ति जताई थी। मधु ने इसके खिलाफ शिकायत भी दर्ज कराई थी। एसपी लक्ष्मी प्रसाद ने बताया कि इससे नाराज तौसीफ और गिरोह ने गुरुवार को शिवमोग्गा की सड़कों पर दिनदहाड़े मधु पर धारदार हथियार से वार किया।

मधु किडनी की बीमारी से पीड़ित हैं और कुछ सप्ताह पहले ही उनका ऑपरेशन हुआ था। तौसीफ और उसके साथियों ने ऑपरेशन वाली जगह पर ही चाकू मारा है। हमले के दौरान मधु किसी तरह बच करके अपनी बाइक स्थानीय अस्पताल पहुँचे। बाद में उन्हें मैकगैन अस्पताल में भर्ती कराया गया।

इस मामले को लेकर पत्रकार चिरू भट का कहना है कि हमलावरों के पास तलवार जैसे लंबे हथियार थे और उन्होंने भाग रहे मधु का कुछ दूर तक पीछा भी किया था।

घटना की जानकारी मिलने के बाद कई हिंदू संगठन और कार्यकर्ता मधु से मिलने के लिए अस्पताल पहुँचे। उन्होंने आरोप लगाया कि मधु पर उनके धर्म के कारण हमला किया गया। इन लोगों ने तौसीफ और उसके गिरोह पर कड़ी कार्रवाई की माँग की। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने मामला दर्ज कर चार आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है।

मधु पर हमले के लगभग डेढ़ महीने पहले मुस्लिमों की भीड़ ने इलाके में सांप्रदायिक तनाव फैलाने के लिए हिंदू कार्यकर्ता हर्षा को चाकू मार दिया था। कर्नाटक के शिवमोगा जिले के कामत पेट्रोल पंप पर 20 फरवरी की रात को मुस्लिम युवकों की भीड़ ने हर्षा की चाकू मारकर हत्या कर दी थी। हर्षा सीगेहट्टी के रहने वाले थे और दर्जी का काम करते थे।

हर्षा हिंदू संगठन बजरंग दल से जुड़े थे और स्कूल-कॉलेज के यूनिफॉर्म के समर्थन में प्रदर्शन के दौरान भगवा शॉल ओढ़े देखा गया था। उनके एक दोस्त ने बताया था कि हर्षा कुछ हफ्तों से इन लोगों के टारगेट पर थे और उनकी हत्या एक ‘सुनियोजित साजिश’ थी। सोशल मीडिया कथित कथित तौर पर ‘ईशनिंदा’ के पोस्ट को लेकर इस्लामवादियों ने उन्हें 2015 में धमकी भी दी थी।

बजरंग दल के कार्यकर्ता हर्ष की निर्मम हत्या के बाद जिले में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुआ था। इसके कारण सरकार ने जिला में कर्फ्यू लगा दिया था और सभी शैक्षणिक संस्थानों को बंद करा दिया था।

खटमल मतलब पुलिस, बख्शीश मतलब फंडिंग… गोरखनाथ मंदिर पर हमला करने वाले मुर्तजा अब्बासी के कोडवर्ड हुए डिकोड, जिहादी एप भी बना रहा था

गोरखपुर के गोरखनाथ मंदिर पर हमला करने वाले मुर्तजा अब्बासी की गिरफ्तारी के पास से जिहादी दस्तावेज भी बरामद हुए थे। इनमें से एक किताब अरबी में भी थी, जिसमें कुछ शब्द हाईलाइट किए गए थे। इन शब्दों की पड़ताल से पता चला है कि इनका इस्तेमाल मुर्तजा आतंकी आकाओं से बातचीत के लिए कोडवर्ड के तौर पर करता था।

दैनिक भास्कर ने ऐसे 7 कोडवर्ड को लेकर एक रिपोर्ट प्रकाशित की है। इसमें बताया गया है कि एटीएस को इनके मायने पता करने में कामयाबी मिल गई है। ये कोडवर्ड ऐसे अरबी शब्द हैं जिनका हिंदी में अर्थ उड़ान, अब्दुल्ला, संघर्ष, आकाश, खटमल और बख्शीश से है।

मसलन, मुर्तजा ने ‘रिहलत तयारान’ शब्द को हाईलाइट कर रखा था। इसका अर्थ ‘उड़ान’ होता है। इसको फ्लाइट से जोड़ कर देखा जा रहा है। ऐसे ‘अल जिहाद’ भी है। इसे देश में इस्लामी हुकूमत लाने की लड़ाई से जोड़कर देखा जा रहा। एक अन्य शब्द ‘समाउन’ है जिसका मतलब आकाश से है। इसे जन्नत से जोड़कर देखा जा रहा है। मुर्तजा को आतंकी आका बातचीत में ‘अब्दुल्ला’ के नाम से बुलाते थे। इसका मतलब अल्लाह का बंदा होता है।

कुछ अन्य शब्दों में ‘दइफुन’ है जिसका मतलब ‘मेहमान’ से है। यह कोडवर्ड तब प्रयोग होता था जब मुर्तजा से मिलने के लिए किसी को आना होता था। फंडिंग के लिए ‘बख्शीश’ का इस्तेमाल होता था तो पुलिस के लिए ‘खटमल’ का, जिसे अरबी में ‘बक अलफिराशी’ कहते हैं। इन कोडवर्ड के बारे में अधिक जानकारी जुटाने के लिए ATS मुर्तजा अब्बासी को लखनऊ जेल में बंद गजवा-उल-हिंद संगठन के आतंकियों से मिलवाएगी। इस आतंकी संगठन के सदस्य के रूप में प्रमुख चेहरा जेल काट रहा मिन्हाज है। ATS को मुर्तजा के भी अल कायदा समर्थित गजवा-उल-हिंद से जुड़े होने का शक है।

लड़की की मेल से शुरू हुआ खेल

एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक शुरुआत में मुर्तजा को एक लड़की का ई-मेल आया था। उसने खुद को ISIS कैम्प से बताया था। लड़की ने अपनी फोटो भेज कर मुर्तजा से मिलने का वादा किया। इस बीच मुर्तजा ने उस लड़की को 40 हजार रुपए भी ट्रांसफर किए। अपनी पढ़ाई के दौरान मुर्तजा ने एप डेवलपमेंट का भी कोर्स किया था। वह ‘जरिमा’ नाम से एक जेहादी एप भी बनाने में लगा था। जरिमा का मतलब ‘जुल्म’ होता। इस एप के जरिए वह अपनी सोच के लोगों को एक प्लेटफॉर्म पर लाना चाहता था। अपने साथ मिलाना चाह रहा था। फिलहाल वह पीर2पीर एप का इस्तेमाल करता था।

गौरतलब है कि 3 अप्रैल को आईआईटी से केमिकल इंजीनियर 30 वर्षीय अहमद मुर्तजा अब्बासी ने गोरखनाथ मंदिर परिसर में सुरक्षाकर्मियों हमला कर दिया था। इस हमले में पीएसी के दो कॉन्स्टेबल घायल हो गए थे। अन्य सुरक्षाकर्मियों ने उसे पकड़कर उसके हथियार को जब्त कर लिया था। अब तक जो तथ्य सामने आए हैं उससे पता चला है कि उसके आईएसआईएस से लिंक थे। उसने बीते डेढ़ साल में लगभग 8 लाख रुपए नेपाल के बैंकों के माध्यम से ISIS का गढ़ कहे जाने वाले सीरिया भेजे थे।

सिक्किम में कामचोर कर्मचारियों पर गिरेगी गाज, सरकार बना रही नॉन परफॉर्मिंग विभाग; छिनेगी सुविधाएँ और भत्ते

सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह गोले काम करने वाले सरकारी कर्मचारियों (Non-Performing Employees) से निपटने के लिए एक नया तरीका लेकर आए हैं। जानकारी के मुताबिक सरकार इनके लिए नया विभाग बनाएगा। इनमें उन कर्मचारियों को शिफ्ट किया जाएगा, जो काम करने में दिलचस्पी नहीं दिखाते हैं। इनमें डॉक्टर से लेकर इंजीनियर, लेखाकार और सामान्य कर्मचारी होंगे। यहाँ उनके पास करने के लिए काफी कम होगा और उन्हें सामान्य भत्तों से भी वंचित रखा जाएगा।

सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह गोले इससे पहले भी काम के लिए देर से रिपोर्ट करने वाले या काम से परहेज करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कड़े कदम उठाने की वकालत करते रहे हैं। मुख्यमंत्री ने सोमवार (4 अप्रैल 2022) को गंगटोक के सम्मान भवन में आयोजित एक कार्यक्रम में इस योजना के बारे में विस्तार से बात करते हुए कहा, “हमारी योजना एक नया विभाग बनाने की है, जहाँ इंजीनियरों, लेखा अधिकारियों से लेकर अतिरिक्त मुख्य सचिव जैसे अधिकारियों का ट्रांसफर किया जाएगा, जो काम नहीं करते हैं और सार्वजनिक कार्यों में बाधा बनते हैं। उनके लिए कोई आधिकारिक वाहन नहीं होगा, केवल वेतन दिए जाएँगे। ऐसे कर्मचारी बाधाएँ पैदा करते हैं। उन्हें अलग रखने की आवश्यकता है ताकि अन्य कुशल कर्मचारी प्रोडक्टिव बन सकें।”

हालाँकि, गोले ने स्पष्ट किया कि सभी सरकारी कर्मचारी अपने काम में आलसी नहीं होते हैं। उन्होंने कहा कि 10 कर्मचारियों के समूह में से दो आलसी हो सकते हैं, जिनकी वजह से काम के विकास में रुकावट पैदा होती है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि यदि किसी काम को एक दिन में पूरा करना हो तो उसे एक दिन में पूरा करना चाहिए। लेकिन वही काम महीनों तक खिंच जाता है, जिससे सिक्किम की ईमानदार जनता प्रभावित होती है। नौकरशाही का काम जनता के काम को आसान बनाना है न कि खुद बाधा बनना है।

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब सीएम ने सरकारी कर्मचारियों के प्रदर्शन न करने के रवैये पर नाराजगी व्यक्त की है। 2021 में, सरकारी कार्यालयों में देर से आने वाले कर्मचारियों के खिलाफ एक व्यापक अभियान चलाया गया था। इनको ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी किया गया था। इसके बाद एक महीने तक सब कुछ ठीक रहा, अधिकारी समय पर ऑफिस आते रहे, लेकिन एक महीने के बाद इसका असर खत्म हो गया। जिसके बाद अब सिक्किम सरकार ने यह कदम उठाया है।

कॉन्ग्रेस ने कर दिया क्लियर, उसकी लड़ाई हिंदू और हिंदुत्ववादियों से: राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष ने सबको बताया राहुल गाँधी का ‘आदेश’

भाजपा को कोसने के चक्कर में कॉन्ग्रेस क्या-क्या बोल जाती है, इसका अंदाजा उसे भी नहीं रहता। राजस्थान कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा (Govind Singh Dotasara) ने शुक्रवार (8 अप्रैल) को कहा कि पार्टी की लड़ाई हिंदू और हिंदुत्ववादियों से है। ऐसा पार्टी के वरिष्ठ नेता राहुल गाँधी (rahul Gandhi) ने कहा है। उन्होंने कहा कि पार्टी सबको साथ लेकर चलती है, भाजपा की तरह बैर नहीं बढ़ाती।

राहुल गाँधी के बयान को उल्टा पेश करते हुए डोटासरा ने कहा कि कॉन्ग्रेस सभी धर्मों को मानने वाली पार्टी है और यह हमेशा 36 कौमों को साथ लेकर चलती है। हर व्यक्ति की जो भी आस्था है, उस पर काम करे। राहुल गाँधी बयान को उल्टा पेश करते हुए उन्होंने कहा, “राहुल जी कह रहे हैं कि हमारा झगड़ा हिंदू और हिंदुत्ववादियों से है।”

भाजपा को घसीटते हुए उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस सब धर्मों को मानने वाली पार्टी है। पार्टी झूठ और नफरत फैलाने के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) झूठ और नफरत फैलाकर एक धर्म को दूसरे धर्म के खिलाफ खड़ा कर रही और अपनी राजनीतिक रोटियाँ सेंक रही है। कॉन्ग्रेस ऐसा कभी नहीं करती।

दरअसल, डोटासरा एक करौली हिंसा को लेकर राजस्थान की कॉन्ग्रेस सरकार पर सवाल खड़े हो रहे हैं। इतना ही नहीं, रामनवमी और हनुमान जयंती जैसे त्योहारों से पहले कुछ जिलों में धार्मिक झंडे लगाने पर रोक की भी सरकार की आलोचना हो रही है। ऐसे में सरकार और पार्टी ने अपनी छवि सुधारने के लिए प्रदेश सरकार के देवस्थान विभाग की ओर से सभी मंदिरों में रामनवमी में रामायण और हनुमान जयंती पर हनुमान चालीसा का पाठ कराने का निर्णय लिया गया है। डोटासरा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान यह बात कही।

क्या कहा था राहुल गाँधी ने?

राहुल गाँधी ने जयपुर की रैली में कहा था कि हिंदू और हिंदुत्व में अंतर में है। उनकी लड़ाई हिंदुत्ववादियों से है। उन्होंने कहा था कि हिंदू और हिंदुत्व एक नहीं हो सकते। जैसे दो जीवों की एक आत्मा नहीं हो सकती, उसकी तरह दो शब्दों का एक मतलब नहीं हो सकता। एक हिंदू सत्य की खोज में कभी झुकता नहीं है, लेकिन एक हिंदुत्ववादी नफरत से भरा होता है, क्योंकि उसके मन में खौफ होता है।

उन्होंने कहा था, “किसानों की जो आत्मा है… उनका जो दिल है… छाती में चाकू मारा…। और भाईयों और बहनों… आगे से नहीं… यूँ नहीं (चाकू मारने का प्रक्रिया बताते हुए)… यूँ (एक सुरक्षाकर्मी के पीछे जाकर चाकू मारने का संकेत हुए)। आगे से नहीं, पीछे से। क्यों? क्योंकि वो हिंदुत्ववादी है। हिंदू अगर मारता तो आगे से मारता। हिंदुत्ववादी है तो पीछे से मारेगा।”

अनुपमा चोपड़ा को अब कश्मीर की बहू ने लगाई लताड़, विवेक अग्निहोत्री ने भी बताई थी ‘शूर्पणखा’ की कारस्तानी

बॉलीवुड अभिनेत्री यामी गौतम धर और अभिषेक बच्चन ने ‘दसवीं’ फिल्म की बेहुदा समीक्षा करने के लिए फिल्म कंपेनियन (Film Companion) की एडिटर अनुपमा चोपड़ा को करारा जवाब दिया है। गुरुवार (7 अप्रैल, 2020) को ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई ‘दसवीं’ की समीक्षा को कंपेनियन ने ट्विटर पर शेयर किया था। इसमें उन्होंने ‘दसवीं’ की आलोचना करते हुए ​अभिनेत्री के लिए लिखा, “यामी गौतम अब हिंदी फिल्मों के लिए डेड गर्लफ्रेंड नहीं हैं। उन्हें भी दिखाया जाने लगा है।” यामी गौतम ने अनुपमा (Anupama Chopra) की टिप्पणी पर आपत्ति जताते हुए ट्वीट किया, “इससे पहले कि मैं कुछ और कहूँ, मैं यह कहना चाहती हूँ कि मैं आमतौर पर सकारात्मक आलोचना करना पसंद करती हूँ, लेकिन जब कोई मंच आपको लगातार नीचे गिराने की कोशिश करें, आप पर सवाल खड़े करे, तो मुझे लगा कि इसके बारे में बोलना जरूरी है।”

यामी ने अपने अगले ट्वीट में ​बेहद कमजोर और घिसी पिटी समीक्षा करने के लिए फिल्म कंपेनियन को लताड़ लगाते हुए कहा कि मैंने बाला, उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक जैसी सुपरहिट फिल्में दी हैं। फिर भी मेरी अभिनय क्षमता पर सवाल उठाए गए। आपकी समीक्षा बेहद अपमानजनक है।

कश्मीरी पंडित और उरी: द सर्जिकल के डायरेक्टर ​आदित्य धर की पत्नी यही नहीं रुकी उन्होंने आगे कहा, “किसी को भी और खासतौर पर मेरे जैसे कलाकार को जिसने अपनी मेहनत से एक मुकाम हासिल किया है। उसे कुछ प्रतिष्ठित पोर्टलों की वजह से हर बार अपनी योग्यता साबित करनी पड़ती है।”

उन्होंने अपने ट्वीट थ्रैड में कंपेनियन द्वारा अपने अभिनय कौशल का मजाक उड़ाने पर तंज कसते हुए कहा, “यह बेहद शर्मनाक है, क्योंकि इंडस्ट्री के कई लोगों की तरह वह भी फिल्म कंपेनियन को देखती थीं, लेकिन लंबे समय से उन्होंने ऐसा नहीं किया है। मैं आपसे अनुरोध करती हूँ कि अब आगे से मेरे अभिनय और मेरी फिल्म की ‘समीक्षा’ न करें।” वहीं, इसको लेकर फिल्म में मुख्य किरदार निभाने वाले अभिषेक बच्चन ने फिल्म कंपेनियन के आर्टिकल का एक हिस्सा शेयर कर यामी के अभिनय कौशल पर सवाल उठाने वाली निर्माता, निर्देशक विधु विनोद चोपड़ा की पत्नी को फटकार लगाई है।

अभिषेक बच्चन और यामी गौतम स्टारर फिल्म ‘दसवीं’ की समीक्षा करने वाले फिल्म कंपेनियन द्वारा प्रकाशित लेख का अंश

यामी और अभिषेक से पहले राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्म निर्देशक विवेक रंजन अग्निहोत्री ने ‘द कश्मीर फाइल्स’ पर बेहूदा समीक्षा करने के लिए अनुपमा चोपड़ा को जमकर धोया था। उन्होंने 23 फरवरी को Film Companion की प्रमुख अनुपमा चोपड़ा के खिलाफ ट्वीट करते हुए आरोप लगाया था कि वह उनकी फिल्म को टारगेट करने के लिए पीछे से ‘गंदी चाल’ चल रही हैं। विवेक अग्निहोत्री ने अनुपमा को ‘शूर्पणखा’ कहते हुए पूछा था, “अगर आप में हिम्मत है तो ‘द कश्मीर फाइल्स’ को खुलेआम नुकसान पहुँचाओ। कृपया पीछे से गंदी हरकतें करना बंद कर दो। आपकी एकमात्र योग्यता यह है कि आपकी शादी एक ऐसे निर्माता से हुई है, जिसने केपी (कश्मीरी पंडित) होने के बावजूद कश्मीरी पंडितों की पीठ में छुरा घोंपा है।”

जानें क्या कहा था अनुपमा चोपड़ा ने ‘द कश्मीर फाइल्स’ के लिए

अनुपमा चोपड़ा द्वारा की गई द कश्मीर फाइल्स की समीक्षा को 6 पैराग्राफ में प्रकाशित किया गया था, लेकिन उन्होंने इसमें इस बात को नकार दिया था कि कश्मीर में कभी हिंदुओं का नरसंहार हुआ भी था। हिंदुओ के नरसंहार को सिरे से खारिज करते हुए अनुपमा फिल्म को प्रोपेगेंडा या इससे भी बदतर ‘संशोधित ड्रामा’ करार दिया था। इसमें कहा गया था, “फिल्म में बड़े पैमाने पर नरसंहार और पलायन को दिखाया गया है, जहाँ हर हिंदू एक दुःखी यहूदी है और हर मुस्लिम एक हत्यारा नाजी है।” इसमें कहा गया था कि उत्पीड़न और प्रताड़ना की कहानी का नाटकीकरण करना कोई बड़ी समस्या नहीं है। इसे उकसाने और आज की असुरक्षा को देखते हुए डिजाइन करना बड़ी समस्या है। इसमें शिक्षा कम है और एक डिफेंसिव राजनीतिक बयान व फिल्म के तौर पर कमरे के अंदर की जाने वाली बहस अधिक है।”

करौली में हिंदुओं पर हुए हमले में कॉन्ग्रेस पार्षद मतलूब अहमद के रिश्तेदार भी थे शामिल: रिपोर्ट में दावा- भीड़ हिंसा करती रही, पुलिस देखती रही

राजस्थान के करौली में हिंदुओं पर हमले के बाद से कॉन्ग्रेस का पार्षद मतलूब अहमद फरार है। वह मुस्लिम बहुल इलाके में हिंदू नववर्ष पर हुई हिंसा का मुख्य साजिशकर्ता बताया जा रहा है। अब एक रिपोर्ट से यह बात सामने आई है कि हिंसा करने वाली भीड़ में उसके कुछ रिश्तेदार भी शामिल थे। इतना ही नहीं मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी भी हिंसा के बावजूद तमाशबीन बने हुए थे।

टाइम्स नाउ ने जो वीडियो शेयर किए हैं उसमें भीड़ के आगे कुछ पुलिसकर्मी मौजूद हैं। कुछ लोगों के हाथों में डंडे दिखाई दे रहे हैं। कुछ ने मुँह को कपड़े से ढक रखा है। रिपोर्ट के मुताबिक, “हिंसक भीड़ को पुलिस की तरफ से खुली छूट थी और पुलिस के सीनियर अधिकारी हालात को काबू करने में नाकाम रहे। हमले के बाद सभी आरोपित एक गली से निकल गए। मौके पर मतलूब के परिवार से कम से कम 3 लोग दिखाई रहे हैं।” रिपोर्ट में कहा गया है कि मतलूब अहमद ने हिंसक हालात बनाए और उसके रिश्तेदारों ने इसे भड़काया। वाहनों के साथ तोड़फोड़ करने वाली भीड़ में शामिल उसके रिश्तेदार सक्रिय भूमिका निभा रहे थे।

वीडियो के आधार पर टाइम्स नाउ ने दावा करते हुए बताया है, “पुलिसकर्मियों के आगे ही चहलकदमी करता भीड़ में सफेद टीशर्ट पहना व्यक्ति मतलूब का रिश्तेदार है। हरे रंग की फुल टीशर्ट में उसी भीड़ में हाथों में लाठी लिए दिख रहा दूसरा व्यक्ति भी मतलूब का रिश्तेदार है। उसके आगे सिविल ड्रेस में एक पुलिसकर्मी भी खड़ा है। उस समय पुलिस बल के साथ डिप्टी SP मनराज मीणा इलाके के SHO रामेश्वर मीणा के साथ मौजूद थे। उनके आगे ही हंगामा करने वालों में से किसी का भी नाम पुलिस द्वारा दर्ज FIR में नहीं है। DJ में भजन बजा रही गाड़ी को इन्ही अधिकारियों के आगे तोड़ा गया। कुछ करने के बजाय वे सिर्फ खड़े हो कर देखते रहे।”

इससे पहले यह बात सामने आई थी कि हिंसा से पहले ही घरों में हथियार जुटा लिए गए थे। मतलूब के घर से भी हथियार मिलने की बात कही गई थी। उसके घर से मिले हथियार उसी तरह के थे, जिस तरह के हथियारों से हिंदुओं के जुलूस को निशाना बनाया गया था। साथ ही पुलिस के भी तमाशबीन बने रहने की बात सामने आई थी। इस संबंध में करौली के SP ने कहा था, “हम फुटेज की जाँच करेंगे और अगर कोई पुलिसकर्मी कर्तव्यों में लापरवाही बरतता पाया गया तो उस पर कार्रवाई की जाएगी।”

गौरतलब है कि करौली में हिंदू नव वर्ष के जुलूस पर 2 अप्रैल को हिंसा हुई थी। दुकानों में आगजनी की गई। इसमें पुष्पेंद्र नाम का एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया था। उसके शरीर पर चाकू से हमले के निशान थे। उपद्रवियों को काबू करते हुए पुलिस के 4 जवान भी घायल हुए थे। कुल 43 लोगों के घायल होने की खबर मीडिया में आई थी। इसके बाद मामले में जाँच शुरू हुई और पीएफआई का एक पत्र सामने आया, जिसने इस हिंसा के सुनियोजित होने की ओर इशारा किया। बाद में कॉन्ग्रेसी नेता मतबूल अहमद की भूमिका भी हिंसा में पाई गई।

राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र ने भी इस हिंसा को सुनियोजित बताया था। उन्होंने कहा था कि करौली हिंसा के दौरान जिस तरह से पथराव किया गया, उससे साबित होता है कि इसे सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया और इसे रोका जा सकता था।

दिल्ली दंगे में शाहरुख खान को पिस्टल देने वाला बाबू वसीम गिरफ्तार, 10 साल से NCR और पश्चिमी यूपी में हथियारगोला-बारूद की कर रहा था सप्लाई

देश की राजधानी दिल्ली में 2020 में हुए दंगों के दौरान पुलिस के जवान पर बंदूक तानने वाले आरोपित शाहरुख खान उर्फ पठान को हथियार देने वाले शख्स को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार किए गए शख्स की पहचान बाबू वसीम (34) के रूप में हुई है। उसी ने 2020 में जाफराबाद में उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान पठान को पिस्टल दी थी। इस दंगे में 53 लोगों की मौत हुई थी और 581 घायल हुए थे।

दिल्ली पुलिस की स्पेशल टीम के एसीपी अत्तर सिंह के निर्देश पर इंस्पेक्टर शिव कुमार और जितेंद्र मावी के नेतृत्व में पुलिस की टीम ने बाबू वसीम को गुरुवार 7 अप्रैल को दिल्ली के ताहिरपुर स्थित राजीव गाँधी अस्पताल से सटे एक पार्क के पास से गिरफ्तार किया। जिस वक्त पुलिस टीम ने उसे गिरफ्तार किया था तो उस दौरान उसके पास से 5 जिंदा कारतूसों के साथ .32 की एक सेमी-ऑटोमैटिक पिस्टल बरामद की गई थी।

मेरठ का रहने वाला है वसीम

शाहरुख खान को पिस्टल देने वाला बाबू वसीम उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के विकासपुरी कालोनी का रहने वाला है। बताया जा रहा है कि वसीम ने इस बात को स्वीकार कर लिया है कि उसी ने दिल्ली के दंगों से पहले पिस्टल सप्लाई की थी। वो गिरफ्तारी से बचने के लिए फरार था। 16 मार्च 2021 को उसे एक निचली अदालत ने उन्हें ‘भगोड़ा अपराधी’ घोषित किया था।

बाबू वसीम बीते 10 साल से पश्चिमी उत्तर प्रदेश औऱ दिल्ली के अपराधियों को असलहा और गोला-बारूद की सप्लाई कर रहा था। इस बात को उसने कबूल भी कर लिया है। इसके साथ ही पुलिस की पूछताछ में वसीम ने माना कि ट्रांस यमुना इलाके में इरफान उर्फ छैनू पहलवान गिरोह के लोगों को गोला-बारूद के साथ असलहे दिए थे।

लंबे समय से उसकी तलाश कर रही दिल्ली पुलिस को इनपुट्स मिले थे कि आरोपित बाबू वसीम दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी यूपी के अन्य आसपास के इलाकों में यमुना पार क्षेत्र में बार-बार आ रहा है। जिसके बाद जाल बिछाकर उसे दबोच लिया गया। वसीन ने ये कबूला है कि बीते ढाई साल में उसने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के अपराधियों को 250 से अधिक हथियार मुहैया कराए हैं। गौरतलब है कि बाबू वसीम पर दिल्ली औऱ यूपी में कॉन्ट्रैक्ट किलिंग, शूटआउट, हत्या, हत्या की कोशिश, पुलिस पर हमला, हथियारों की तस्करी समेत कम से कम सात मामले दर्ज हैं।

इससे पहले कोर्ट ने दिसंबर 2021 में शाहरुख खान पर लगे आर्म्स एक्ट के चार्जेस को हटा लिया था।

‘आपके स्कूल में शक्तिशाली बम है, सैकड़ों की जान जाएगी’: बेंगलुरु के कई स्कूलों को मेल से धमकी, बम निरोधक दस्ता ले रहा है तलाशी

हिजाब-बुर्का विवाद (Hijab-Burqa Controversy) के बाद कर्नाटक (Karnataka) आतंकियों के निशाने पर है। कभी अल-कायदा इसमें दखल देता है तो PFI जैसे संगठनों की इसमें भूमिका सामने आती है। अब राज्य के स्कूल भी आतंकियों के निशाने पर आ गए हैं। शुक्रवार (8 अप्रैल) को कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु के कई स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी दी गई।

अज्ञात व्यक्ति द्वारा स्कूलों को ईमेल भेजकर उन्हें उड़ाने की धमकी दी गई है। बताया जा रहा है कि बेंगलुरु के 6 से 7 स्कूलों को इस तरह के ईमेल भेजे गए हैं। ईमेल मिलने के बाद स्कूल प्रशासन ने पुलिस को इसकी सूचना दी। सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन सतर्क हो गया है और इन स्कूलों में तलाशी अभियान शुरू कर दिया। खबर लिखे जाने तक तलाशी अभियान जारी है। हालाँकि, अभी तक किसी भी तरह के बम मिलने की सूचना नहीं मिली है। 

जिन स्कूलों को धमकी भरे ईमेल भेजे गए हैं उनमें महादेवपुर थाना क्षेत्र का गोपालन इंटरनेशनल स्कूल, वर्थुर थाना क्षेत्र का दिल्ली पब्लिक स्कूल, मार्थाहल्ली थाना क्षेत्र का न्यू एकेडमी स्कूल, सेंट विंसेंट पॉल स्कूल, हेनूर थाना क्षेत्र का इंडियन पब्लिक स्कूल और गोविंदपुरा थाना क्षेत्र का एबेनेजर इंटरनेशनल स्कूल शामिल हैं। 

स्कूलों को भेजा गया ईमेल (साभार: india.com)

ईमेल में कहा गया है, ‘आपके स्कूल में बहुत शक्तिशाली बम लगाया गया है। ये मजाक नहीं है। सैकड़ों लोगों की जान जा सकती है। तुरंत पुलिस को इस बारे में खबर दीजिए। देर ना करें। सब कुछ आपके हाथ में है।’ ईमेल मिलने के बाद स्कूलों ने छात्र-छात्राओं को स्कूल से बाहर निकाल दिया।

जिन स्कूलों को ऐसे ईमेल मिले हैं, वहाँ बम निरोधक दस्ते को तैनात किया गया है। इसके साथ ही वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने भी स्कूलों का दौरा किया। इंडिया डॉट कॉम को बेंगलुरु शहर के पुलिस आयुक्त कमल पंत ने कहा कि बेंगलुरु के बाहरी इलाके में चार स्कूलों को ईमेल के माध्यम से बम की धमकी मिली है और स्थानीय पुलिस इसकी जाँच कर रही है।

हालाँकि, जाँच के बाद ही पता चलेगा कि धमकी भरा ईमेल भेजकर किसी ने शरारत की है या फिर राज्य में जारी हिजाब-बुर्का, लाउडस्पीकर और हलाल विवाद को लेकर किसी आतंकी संगठन ने साजिश रची है।

‘जिसको पाकिस्तान से दिक्कत नहीं, वही भारतीय मुस्लिमों के काम कर सकता है’: इफ्तारी के बाद बोले बाबुल सुप्रियो- अब 100% लोगों तक मेरी पहुँच

पश्चिम बंगाल (West Bengal) में हुए विधानसभा चुनाव के बाद राज्य में बड़े पैमाने पर हुई राजनीतिक हिंसा के बीच बीजेपी छोड़कर टीएमसी में शामिल होने वाले बाबुल सुप्रियो (Babul Supriyo) ने मुस्लिम समुदाय के साथ मिलकर इफ्तार पार्टी की। इसके बाद उन्होंने अपने ऊपर लगाए जा रहे इल्जामों को नकारते हुए इसे ‘कम्युनल स्टाम्प’ बता दिया। उन्होंने कहा कि वो पहले 70 प्रतिशत लोगों तक सीमित थे, लेकिन टीएमसी में शामिल होने के बाद उनकी पहुँच 100 प्रतिशत लोगों तक हो गई है।

बाबुल सुप्रियो कोलकाता के मेयर और टीएमसी मंत्री फिरहाद हकीम के साथ इफ्तार पार्टी कर रहे थे। वो टीएमसी के बालीगंज से उम्मीदवार हैं और सीएम ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी के साथ प्रचार के लिए निकले थे। प्रचार के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान सुप्रियो ने भारत और पाकिस्तान के मुस्लिमों के साथ समानता की बात कही।

इस्लामिक टोपी धारण किए हुए सुप्रियो ने कहा, “मेरे इमेज पर नकली साम्प्रदायिक स्टाम्प लगाया गया था। लेकिन ये गलत है। पहले मेरी पहुँच केवल 70% आबादी तक ही थी, लेकिन अब मैं 100% आबादी से मिलने के लिए आजाद हूँ। मैं उन गिने-चुने गायकों में से एक हूँ, जिन्होंने पाकिस्तान में शो किए।”

ये कहने के बाद सुप्रियो ने मीडिया से कहा कि अगर कोई उनके इस बयान पर बवाल करना चाहता है तो वो ऐसा कर सकता है। क्योंकि उन्हें इस मामले में कुछ भी नहीं कहना पड़ेगा। दरअसल, 12 अप्रैल को राज्य में उपचुनाव होने हैं और बीजेपी के कीया घोष उनके खिलाफ चुनाव मैदान में हैं, जो कि सिंगर होने के साथ ही राजनेता भी हैं।

भारत-पाकिस्तान के मुस्लिमों की तुलना

टीएमसी नेता बाबुल सुप्रियों ने कोलकाता में जिस इफ्तार पार्टी में हिस्सा लिया, वहाँ पर संभवत: भारतीय मुस्लिम ही थे। इस दौरान उन्होंने दावा किया कि वो पाकिस्तान में भी प्रदर्शन कर चुके हैं। टीएमसी नेता ने दावा किया भारत के मुस्लिमों के लिए वही व्यक्ति काम कर सकता है, जिसे इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ पाकिस्तान और वहाँ के मुस्लिमों से कोई समस्या न हो, जो कि हर दिन भारत में घुसपैठ कर आतंकी हमले करते हैं और नागरिकों, सुरक्षाकर्मियों की हत्या करते हैं।

दरअसल, बीजेपी से टीएमसी में शामिल होने के बाद से उनकी आलोचना हो रही थी, लेकिन ऐसा करके उन्होंने अपने एक्शन को जायज ठहराने की कोशिश की है। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद साल 2021 में बाबुल सुप्रियो बीजेपी छोड़कर टीएमसी का दामन थाम लिया था। टीएमसी के गुंडों द्वारा भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या, बलात्कार और घर जलाए जाने की घटना को लेकर सुप्रियो ने यह कहते हुए अपने कैडर को छोड़ दिया था कि वह उन क्षेत्रों में जाने से डरते हैं जहाँ हिंसा हो रही है क्योंकि उन पर हमला होगा।

टीएमसी के गुंडों के हमले का शिकार बीजेपी के कार्यकर्ताओं को बीच मंझधार में छोड़कर सुप्रियो टीएमसी में शामिल हो गए थे, जिसको लेकर उनकी कड़ी आलोचना की गई। उन पर ये आरोप लगे कि अपनी जान बचाने के लिए वे अपने आदर्शों से समझौता कर लिए।

हालाँकि, अब वो अपनी ही पुरानी पार्टी की आलोचना शुरू कर दी है। 70 प्रतिशत आबादी का जिक्र कर उन्होंने भाजपा को साम्प्रदायिक बताने की कोशिश की है। बहरहाल, अब वो टीएमसी का हिस्सा हैं और अब मुस्लिमों से मेलजोल के लिए आजाद हैं।

झोंटा कबाड़ कर महताब आलम पर UP पुलिस ने बरसाए ताबड़तोड़ थप्पड़, जगमोहन बन लड़की से कर रहा था छेड़छाड़: वीडियो वायरल

गैंगस्टर, गुंडों और भू माफियाओं के बाद अब उत्तर प्रदेश पुलिस मनचले युवकों पर भी नकेल कसने में लगी हुई है और छेड़खानी करने वाले युवकों को ऑन द स्पॉट सबक सिखा रही है। ऐसा ही एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है, जिसमें कानपुर ACP ने युवती से छेड़छाड़ करने वाले युवक को घटनास्थल पर ही बाल खींच कर पाँच सेकेंड में ताबड़तोड़ 5 थप्पड़ जड़ दिए। इससे वह गाड़ी से नीचे गिर पड़ा। बगल में खड़ी पीड़ित युवती यह सब देखती रही।

बड़ी बात यह है कि जिस आरोपित युवक की सरेआम पिटाई हुई, शुरुआती पूछताछ में वह अपना नाम जगमोहन बता रहा था। हालाँकि, जब पुलिस ने जाँच की तो पता चला कि उसका नाम महताब आलम है। वह पुराना कानपुर का रहने वाला है।

सोशल मीडिया पर जिस घटना का वीडियो वायरल हो रहा है, वह कानपुर के कर्नलगंज इलाके की है। ACP त्रिपुरारी पांडेय गुरुवार की दोपहर में क्षेत्र भ्रमण कर अपने दफ्तर लौट रहे थे। यहाँ दयानंद गर्ल्स पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज (सिविल लाइंस) के सामने VIP रोड पर एक छात्रा का दुपट्‌टा बाइक सवार मनचले ने खींच लिया और उसका रास्ता रोककर छेड़खानी करने लगा। यह पूरी घटना ACP ने देखी तो वह गाड़ी से उतरकर आए और आरोपित को पकड़ लिया। उसके बाद मौके पर ही 5 सेकंड में 5 थप्पड़ जड़ दिए।

पुलिस ने जब इस बारे में पीड़िता के परिजनों से बात की उन्होंने बताया कि वह इससे काफी परेशान हो चुके थे लेकिन लोक-लाज की वजह से पुलिस में शिकायत दर्ज नहीं करवाई थी। उन्होंने यह भी बताया कि इसकी वजह से वह अपनी बेटी की पढ़ाई छुड़वाकर शादी करने की तैयारी कर रहे थे। हालाँकि, अब पुलिस के एक्शन से उन्हें काफी राहत मिली है। वहीं पुलिस ने परिजनों को मामले में शिकायत दर्ज कराने के लिए कहा है, ताकि FIR दर्ज किया जा सके।  

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार ने बेटियों की सुरक्षा के लिए एंटी रोमियो स्क्वायड को तैनात किया है और इन दिनों इसका असर भी दिखाई दे रहा है। पुलिस की टीम लगातार मनचले व आवारा युवकों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। वहीं कानपुर के ग्वालटोली थाना क्षेत्र के ACP कर्नलगंज त्रिपुरारी पांडेय छेड़छाड़ की घटना पर घटनास्थल पर आरोपित युवक को सबक सिखाकर चर्चा में आ गए हैं।