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तीन दशक बाद कश्मीरी पंडितों को उनकी जमीन का मिला मालिकाना हक: हरियाणा के CM खट्टर ने वचनपूर्ति मिशन के तहत सौंपे कागजात

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर की सरकार (Haryana CM Manohar Lal Khattar) ने कश्मीर में नरसंहार और पलायन पीड़ित पंडितों (Kashmiri Pandit) को भूमि आवंटन के कागजात दिए। सीएम खट्टर ने सरकार की ‘वचनपूर्ति मिशन’ के तहत उन परिवारों को जमीन आवंटित के कागजात सौंपे हैं, जिन्होंने तीन दशक पहले झज्जर जिले में जमीन खरीदी थी। पीड़ित समुदाय के परिवारों ने जिले के बहादुरगढ़ के सेक्टर-2 में जमीन खरीदी थी, लेकिन इसका मालिकाना हक उन्हें अभी तक नहीं मिला था।

गुरुवार (7 मार्च) को इस मिशन की घोषणा के दौरान सीएम खट्टर ने कश्मीरी पंडित परिवारों को उनकी जमीनों के मालिकाना हक से संंबंधित कागजात भी सौंपे। इस दौरान सीएम खट्टर ने कहा कि कुछ परिवारों को भूखंड पहले ही मिल चुकी है और आज 182 परिवारों को इससे संबंधित पत्र वितरित किए गए। इस पूरी प्रक्रिया के माध्यम से सभी 209 परिवारों से किए गए वादों को पूरा किया गया है।

सीएम खट्टर ने कहा कि 6 अप्रैल 2022 को उस समय दर्ज किए जा रहे इन भूखंडों के सत्यापन और आवश्यक माप के बाद ड्रॉ के माध्यम से जमीनों के मालिकाना हक दी गई। इस दौरान उन्होंने कॉन्ग्रेस पर भी निशाना साधा। सीएम खट्टर ने कहा कि यह मिशन उन लोगों के लिए भी करारा जवाब है, जो कहते थे कि हरियाणा सरकार ने कश्मीरी पंडित परिवारों को दी जाने वाली 5,000 रुपए की वित्तीय सहायता को रोक दी है।

साल 1991-93 के बीच कश्मीर से पलायन कर आए 203 परिवारों ने कुल 10 एकड़ जमीन खरीदी थी। इस बीच हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HUDA) ने सेक्टर-2 को विकसित करने के लिए भूमि का अधिग्रहण कर लिया। इस अधिग्रहण में कश्मीरी पंडितों द्वारा खरीदी गई जमीन भी चली गई। इस पर पंडितों ने माँग की कि उनकी जमीन को अधिग्रहण से मुक्त रखा जाए।

साल 1997 में अधिकारियों ने कहा कि सभी 209 परिवारों के लिए 10 एकड़ भूमि पर्याप्त नहीं है, इसलिए उनके लिए 12 एकड़ भूमि देने पर सहमति बनी। अधिकारियों ने पीड़ितों को HUDA के पक्ष में जमीन का म्यूटेशन कराने को कहा। हालाँकि, राजस्व मुद्दों के कारण इन जमीनों का हस्तांतरण नहीं हो सका। इसके बाद साल 2016 में 27 परिवारों को जमीनें आवंटित कर दी गईं, लेकिन 182 परिवार इससे वंचित रहे।

मदरसे का पढ़ा, मस्जिद में इमाम: गोरखनाथ मंदिर पर हमले में आ रहा सहारनपुर के अब्दुल रहमान का भी नाम, सीरिया तक संपर्क

गोरखपुर के गोरखनाथ मंदिर पर हुए हमले में सहारनपुर के अब्दुल रहमान का नाम सामने आ रहा है। उसकी गिरफ्तारी को लेकर मीडिया रिपोर्टों में अलग-अलग तरह की बात कही जा रही है। रिपोर्टों के अनुसार 3 अप्रैल 2022 को हमला करने से पहले मुर्तजा अब्बास ने उससे फोन पर बात की थी।

अब्दुल रहमान सहारनपुर के बड़कला गाँव का रहने वाला है। इस गाँव के प्रधान मोतीलाल ने ऑपइंडिया को बताया कि रहमान ज्यादातर छुटमलपुर बाजार में रहता है। छुटमलपुर एक कस्बा है जो सहारनपुर जिले से उत्तराखंड जाने वाली सड़क पर पड़ता है। प्रधान के मुताबिक मंदिर पर हमले के बाद से उनके गाँव में पुलिस का लगातार आना-जाना बना हुआ है।

ऑपइंडिया से बातचीत में छुटमल बाजार के ही निवासी रोहित सैनी से बताया, “रहमान मूल रूप से बड़कला गाँव का निवासी है। उसकी दुकान गाँव के बगल में स्थित छुटमलपुर बाजार में पड़ती है। किराना स्टोर के साथ वो लड़कियों के श्रृंगार के सामान की दुकान भी चलाता है। उसकी दुकान जहाँ है, उस क्षेत्र में अधिकतर मुस्लिम ही रहते हैं। उसका गाँव दुकान से लगभग 3 किलोमीटर दूर है। यह गाँव फतेहपुर थाना क्षेत्र में आता है।”

आज तक और एनबीटी की रिपोर्ट के अनुसार रहमान की मोबाइल की दुकान है। वह एक मस्जिद में इमाम भी है। प्रधान मोतीलाल ने बताया, “अब्दुल रहमान के अब्बा का नाम अख्तर था। उनकी मौत लगभग 5 साल पहले ही हो गई थी। वो भगवानपुर (सहारनपुर) के मदरसे में पढ़ाते थे। रहमान का भाई सुलेमान है जो गाँव में ही रहता है। ये दोनों भाई भी अपने अब्बा के मदरसे में पढ़ते और पढ़ाते थे। रहमान की अम्मी की भी कुछ दिन पहले मृत्यु हो गई थी। रहमान ज्यादातर छुटमलपुर बाजर में ही रहता था।” रहमान की उम्र लगभग 30 साल है। प्रधान के अनुसार उसका निकाह मेरठ में हुआ है। उसकी बीवी गाँव में ही रहती है। उन्होंने बताया कि गाँव में किसी को भी उसकी इन हरकतों के बारे में नहीं पता था।

बताया जाता है कि अब्दुल रहमान का नाम मुर्तजा से पूछताछ में सामने आया था। लेकिन शुरुआती पूछताछ के बाद उसे छोड़ दिया गया। लेकिन कुछ रिपोर्टों के अनुसार मुर्तजा के कॉल डिटेल की पड़ताल के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। इससे यह बात सामने आई कि हमले वाले दिन भी वह मुर्तजा के संपर्क में था और दोनों की बात हुई थी। सहारनपुर के एसएसपी आकाश तोमर ने इस संबंध में पूछे जाने पर बताया कि एटीएस ने स्थानीय पुलिस से इसके बारे में फिलहाल जानकारी साझा नहीं की है।

यह भी कहा जा रहा है ​कि मुर्तजा के साथ वह नेपाल भी गया था। अब्दुल रहमान के भी सीरिया से संपर्क बताए जा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि मुर्तजा के लिंक भी आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट से मिले हैं। कुछ रिपोर्टों के अनुसार हमले के बाद उसकी योजना नेपाल के रास्ते सीरिया भागने की ही थी। 3 अप्रैल को आईआईटी से केमिकल इंजीनियर 30 वर्षीय अहमद मुर्तजा अब्बासी ने गोरखनाथ मंदिर परिसर में सुरक्षाकर्मियों हमला कर दिया था। इस हमले में पीएसी के दो कॉन्स्टेबल घायल हो गए थे। अन्य सुरक्षाकर्मियों ने उसे पकड़कर उसके हथियार को जब्त कर लिया था। अब तक जो तथ्य सामने आए हैं उससे पता चला है कि उसके आईएसआईएस से लिंक थे। उसने बीते डेढ़ साल में लगभग 8 लाख रुपए नेपाल के बैंकों के माध्यम से ISIS का गढ़ कहे जाने वाले सीरिया भेजे थे।

MP के थाने से ‘पत्रकार’ सहित 8 लोगों की अर्धनग्न तस्वीर वायरल: शिवराज सरकार ने दिए जाँच के आदेश, 2 पुलिसकर्मी सस्पेंड

मध्य प्रदेश के सीधी जिले में पुलिस स्टेशन के अंदर कुछ लोगों की अर्धनग्न हालत में फोटो वायरल हो रही है। बताया जा रहा है कि इस तस्वीर में एक पत्रकार भी हैं। इस घटना को ले कर पत्रकार समूहों द्वारा काफी नाराजगी जताई जा रही है। वहीं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस मामले में जाँच रिपोर्ट तलब की है। अब तक इस केस में 2 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया है। घटना 2 अप्रैल, 2022 (शनिवार) की बताई जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक स्थानीय भाजपा विधायक केदारनाथ शुक्ला ने 16 मार्च 2022 को सीधी जिले की कोतवाली थाने में केस दर्ज करवाया। इस केस में उन्होंने अनुराग मिश्रा नाम के एक फेसबुक एकाउंट पर अपने और अपने बेटे के खिलाफ दुष्प्रचार का आरोप लगाया। पुलिस ने इस मामले की IP एड्रेस निकाल कर जाँच की। पुलिस के मुताबिक इस जाँच में एक थिएटर कलाकार नीरज कुंदर का नाम सामने आया और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

पुलिस के मुताबिक इस गिरफ्तारी के बाद लगभग 40 लोगों का समूह थाने के बाहर नारेबाजी करने लगा। इसमें एक यूट्यूबर पत्रकार कनिष्क तिवारी भी शामिल थे। पुलिस ने इनमें से कुछ लोगों को धारा 151 में हिरासत में ले लिया। बाद में इनमें से 8 लोगों की अर्धनग्न तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं। सीधी जिले के पुलिस अधीक्षक ने इस केस में कपड़े उतारने की घटना पर जाँच के आदेश दिए थे। जबकि पत्रकार कनिष्क तिवारी का कहना है कि वो नीरज कुंदर के पिता के बुलावे पर थाने में मामले को समझने गए थे। जहाँ उन्हें पुलिस ने पकड़ कर लॉकअप में डाल दिया और उनके साथ अभद्रता की गई।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लिया एक्शन

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस मामले में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सीधी प्रशासन से रिपोर्ट तलब की। इसके बाद धारा 151 में टाउन इंस्पेक्टर मनोज सोनी और SHO अभिषेक सिंह को सस्पेंड कर के लाइन अटैच कर दिया गया। दोनों के खिलाफ जाँच भी करवाई जा रही है। SP के मुताबिक दोषी पाए जाने पर कठोर कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। वही थानेदार का कहना है कि उन्होंने हिरासत में लिए गए लोगों के कपड़े सुरक्षा के दृष्टिकोण से उतरवाए जिस से कोई हवालात में फाँसी आदि न लगा ले।

कई लोगों को परेशान कर चुका है नीरज कुंदेर

दैनिक भास्कर के मुताबिक नीरज कुंदेर लगभग 100 से ज्यादा लोगों को परेशान कर चुका है। वह पकड़ा नहीं जा रहा था। उनकी गिरफ्तारी की खबर पा कर थाने के आगे कई लोग विरोध में जमा हो गए थे। उसके थाने से निकाले जाते ही उसके खिलाफ ‘चोर है’ जैसे नारे लग रहे थे। नीरज को तहसील स्तर पर जमानत नहीं मिल पाई। और उसे जेल भेज दिया गया।

Pakistan: सुप्रीम कोर्ट से मिले झटके के बाद इमरान खान ने बुलाई कैबिनेट बैठक, ट्वीट कर कहा- आखिरी गेंद तक खेलेंगे

पाकिस्तान (Pakistan) में राजनीतिक संकट के बीच वहाँ के सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने वहाँ की संसद के डिप्टी स्पीकर के फैसला को असंवैधानिक बताया है। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (7 अप्रैल 2022) को कहा कि तीन अप्रैल को पाकिस्तान संसद में अविश्वास प्रस्ताव रद्द करना संविधान के खिलाफ था। शीर्ष अदालत ने प्रधानमंत्री इमरान खान (PM Imran Khan) को तगड़ा झटका देते हुए आदेश दिया कि पाक संसद फिर से बहाल होगी और संसद में अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग होगी।

कोर्ट के इस फैसले के बाद अब इमरान खान को नेशनल असेंबली में अविश्वास प्रस्ताव का सामना करना पड़ेगा। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक, 9 अप्रैल को संसद में अविश्वास प्रस्ताव पर फिर से वोटिंग होगी। अब अगर इमरान खान अविश्वास प्रस्ताव हार जाते हैं तो नए सरकार का गठन कराया जाए।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद पाकिस्तान के विपक्षी दल जश्न मना रहे हैं। विपक्षी दलों को भरोसा है कि इमरान खान की सरकार गिर जाएगी और वे सरकार बनाने में सफल होंगे। वहीं, पाकिस्तान मुस्लिम लीग– एन (PML-N) के अध्यक्ष और पीएम पद के उम्मीदवार शाहबाज शरीफ (Shahbaz Sharif) का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से पाकिस्तान बच गया और पाकिस्तान के लोगों की दुआ कबूल हो गई। उन्होंने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग के दौरान वह सरप्राइज देंगे। शरीफ ने ये भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद नेशनल असेंबली और मजबूत होगी।

इधर प्रधानमंत्री इमरान खान ने शुक्रवार (8 अप्रैल, 2022) को कैबिनेट मीटिंग बुलाई है। इसके साथ ही वे शाम को देश को भी संबोधित करेंगे। इमरान खान ने गुरुवार (7 अप्रैल) की रात को ट्वीट करके यह जानकारी दी। इमरान खान ने लिखा, “मैंने कल कैबिनेट की बैठक बुलाई है। इसके साथ ही, संसदीय दल की बैठक भी बुलाई है। मैं कल देश को संबोधित भी करूँगा। देश के लिए मेरा संदेश ये है कि मैं हमेशा से पाकिस्तान के लिए संघर्ष करता रहा हूँ और आखिरी बॉल तक संघर्ष करूँगा।”

गौरतलब है कि इससे पहले 3 अप्रैल को इमरान खान सरकार के खिलाफ विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव को डिप्टी स्पीकर कासिम खान ने विदेशी साजिश करार देते हुए अविश्वास प्रस्ताव को संविधान के अनुच्छेद 5 के खिलाफ माना। उसके बाद इमरान खान की सलाह पर पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने संसद भंग कर दी थी। इस कार्यवाही का सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया था। अब 9 अप्रैल को पता चलेगा कि इमरान खान की कुर्सी बचती है या उन्हें प्रधानमंत्री का पद छोड़ना पड़ता है।

वो दारूबाज क्रिकेटर… युजवेंद्र चहल को 15वीं मंजिल की बालकनी से लटका दिया: भारतीय स्पिनर ने बताया- मुंबई इंडियंस में रहते कैसे बची थी जान

टीम इंडिया के लेग स्पिनर युजवेंद्र चहल (Yuzvendra Chahal) इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में कई वर्षों से खेल रहे हैं। 2014 में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर (आरसीबी) से जुड़ने से पहले चहल मुंबई इंडियंस (MI) का हिस्सा थे। आईपीएल के सीजन 15 में चहल राजस्थान रॉयल्स की ओर से खेल रहे हैं। राजस्थान रॉयल्स ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से गुरुवार (7 अप्रैल 2022) को एक वीडियो शेयर किया जिसमें करुण नायर (Karun Nair) चहल के साथ आर अश्विन (Ravichandran Ashwin) चर्चा करते दिख रहे हैं।

चहल ने इस वीडियो में एक हैरान करने वाली घटना का जिक्र किया है। उन्होंने बताया है कि 2013 में आईपीएल के छठे सीजन में उनकी जान जाते-जाते बची थी। उस समय वह मुंबई इंडियंस का हिस्सा थे। 6 मिनट 40 सेंकेंड के इस वीडियो में चहल 2 मिनट 50 सेकेंड से बोलना शुरू करते हैं।

वे कहते हैं, “मेरी यह स्टोरी कुछ लोगों को पता है। लेकिन आज से पहले मैंने यह बात कभी किसी को नहीं बताई। अब लोग इसके बारे में जानेंगे। यह 2013 की बात है, जब मैं मुंबई इंडियंस टीम का हिस्सा था। हमारा बैंगलोर में एक मैच था। मैच के बाद एक गेट-टुगेदर था। वहाँ एक खिलाड़ी था, जो शराब के नशे में धुत था, मैं उसका नाम नहीं लूँगा। वह काफी देर से मुझे घूर रहा था, फिर कुछ सोचकर उसने मुझे अपने पास बुलाया।”

चहल ने आगे कहा, “वह मुझे बाहर ले गया और मुझे बालकनी से लटका दिया। मेरे हाथ उसके गले से लिपटे हुए थे। अगर मेरा हाथ फिसल जाता तो… मैं 15वीं मंजिल से ही गिर गया होता। तभी वहाँ मौजूद लोगों ने पूरी स्थिति को सँभाला। मैं तो बेहोश हो गया था, मुझे लोगों ने पानी पिलाया। उस दिन मुझे समझ में आया कि हमें बाहर जाते हुए कितना सर्तक रहना चाहिए। यह एक ऐसी घटना थी, जिसमें मैं बाल-बाल बचा था। अगर थोड़ी सी भी चूक हो जाती तो मैं 15वीं मंजिल से नीचे गिर गया होता।”

महिला के साथ एलियन ने किया सेक्स, हो गई प्रेग्नेंट: अमेरिकी रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट में UFO को लेकर हैरान करने वाले दावे

एलियंस (Aliens) के अस्तित्व को लेकर काफी समय से बहस जारी है। कुछ इसे सिर्फ कल्पना मानते हैं और कुछ को पूरा विश्वास है कि एलियंस ना सिर्फ बाहरी दुनिया में मौजूद है, बल्कि हमारे साथ भी इंसानी रूप में रहते हैं। कई बार UFO (अज्ञात उड़न तश्‍तरी या वस्‍तु) या दूसरे ग्रह के प्राणी को देखने का दावा भी किया गया है। इन सब के बीच अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन (Pentagon) की एक रिपोर्ट आई है। इसके हवाले से मीडिया रिपोर्टों में यूएफओ को लेकर हैरान करने वाले दावे किए गए हैं।

पेंटागन की 1500 से अधिक पृष्ठों की इस रिपोर्ट ने एलियंस के सच में होने के दावे को और हवा दे दी है। इसके अनुसार एक महिला का दावा है कि एलियन ने उसके साथ सेक्स किया और इससे वह प्रेग्नेंट हो गई। रिपोर्ट में एलियंस द्वारा महिलाओं को प्रेग्नेंट करने से लेकर उन्हें अपने ग्रह पर घुमाने तक की घटनाओं का जिक्र किया गया है।

द सन  के मुताबिक रिपोर्ट में UFO द्वारा प्रेग्नेंसी के कुल पाँच मामलों का जिक्र किया गया है। हालाँकि, इन महिलाओं की पहचान छिपाई गई है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि एलियंस या यूएफओ के संपर्क में आना इंसानों के लिए बेहद खतरनाक है। ऐसे जितने भी मामले सामने आए हैं, उनमें इंसानों को नुकसान पहुँचा है। कुछ यूएफओ (UFO) से निकलते रेडिएशन की वजह से जल गए हैं, जबकि कुछ का ब्रेन डैमेज और नर्वस सिस्टम खराब हो गया। 

इसके अलावा इसमें अपहरण, प्रेग्नेंसी, यौन शोषण और टेलीपैथी जैसी विचित्र घटनाएँ भी शामिल हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि UFO के संपर्क में आने से कई लोग घायल हुए हैं। ऐसे 42 मामले मेडिकल फाइलों में दर्ज हैं जबकि करीब 300 मामले अप्रकाशित हैं।

‘वे हमें यहाँ नहीं रहने देंगे, हमें कभी भी मार सकते हैं’: करौली की जली हुई दुकानों में ‘यह प्रॉपर्टी बिकाऊ’ है का पोस्टर लिए हिंदुओं को सुनिए

राजस्थान में करौली में हिंसा (Rajasthan Karauli Violence) के बाद स्थानीय हिंदू पलायन करने को मजबूर हो गए हैं। वे इतने डरे-सहमे हैं कि दूसरी जगहों पर अपना ठिकाना तलाश रहे। जली हुई दुकानों के बाहर हाथों में ‘यह प्रॉपर्टी बिकाऊ है’ के पोस्टर लेकर खड़े हैं।

रिपब्लिक भारत के अनुसार, स्थानीय हिंदू परिवारों में डर का माहौल है। प्रॉपर्टी बेचने के ​अलावा उनके पास कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है। ऐसे ही एक हिंदू दुकानदार ने बताया, “​हमारे पास पलायन करने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है। हमें बहुत नुकसान पहुँचा है। हमें बाजारों का पैसा भी देना है। मजबूरी में अपनी प्रॉपर्टी बेचनी पड़ रही है। इस दशहत के माहौल में हम नहीं जी सकते हैं। इसलिए हमने पलायन करने का फैसला किया है, क्योंकि ये लोग आगे भी हमारे साथ बहुत कुछ कर सकते हैं।”

एक बुजुर्ग ने कहा कि यहाँ फिर से कभी भी हिंसा हो सकती है। हमें यहाँ पर नहीं रहना है। एक और हिंदू दुकानदार जो काफी डरा हुआ था उसने कहा, “मैं भी यहाँ नहीं रहूँगा। मेरे अंदर इन लोगों का डर बैठ चुका है। ये हमें कभी भी मार सकते हैं। हमारी जान को खतरा है।”

हेमंत अग्रवाल नाम के एक दुकानदार ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए इंडिया टीवी को बताया, “हमारी दुकानों को करौली में जला दिया गया। सारा सामान लूट लिया गया। इससे हमें बहुत नुकसान हुआ है। अब हम वहाँ नहीं रहेंगे, वहाँ से चले जाएँगे। वे लोग हमें यहाँ नहीं रहने देंगे।”

चंद्रशेखर गर्ग नाम के एक अन्य दुकानदार ने बताया, “उस दिन (2 अप्रैल) करीब 3 से 4 बजे के बीच मुस्लिम दुकानदारों ने अपनी दुकानों को बंद करना शुरू कर दिया था। साढ़े 6 बजे के करीब जब बाजार में भीड़ जमा होने लगी तो हमने अपनी दुकाना लगाना शुरू कर दिया। तभी उन लोगों (मुस्लिम) ने इसका विरोध किया। जब हमने उनका विरोध किया तो उन्होंने हमें वहाँ से भगा दिया। हमें जान से मारने की धमकी भी दी गई। हमारे घर जाने के बाद उन लोगों ने हमारी दुकानों को लूटा फिर उसमें आग लगा दी। हमें काफी आर्थिक नुकसान हुआ है। हम यहाँ से पलायन करेंगे और कोई दूसरा काम तलाशेंगे। हमारी 60 साल पुरानी दुकान है, लेकिन हमें इसे छोड़ने के लिए मजबूर किया जा रहा है। हमने हमेशा भाईचारा बनाए रखा, लेकिन हमें क्या पता था कि यही लोग हमारे साथ धोखा करेंगे और हमारी पैतृक दुकानों को आग के हवाले कर देंगे।”

करौली हिंसा

गौरतलब है कि करौली में हिंदू नव वर्ष के जुलूस पर 2 अप्रैल को हिंसा हुई थी। दुकानों में आगजनी की गई। इसमें पुष्पेंद्र नाम का एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया था। उसके शरीर पर चाकू से हमले के निशान थे। उपद्रवियों को काबू करते हुए पुलिस के 4 जवान भी घायल हुए थे। कुल 43 लोगों के घायल होने की खबर मीडिया में आई थी। इसके बाद मामले में जाँच शुरू हुई और पीएफआई का एक पत्र सामने आया, जिसने इस हिंसा के सुनियोजित होने की ओर इशारा किया। बाद में कॉन्ग्रेसी नेता मतबूल अहमद की भूमिका भी हिंसा में पाई गई।

राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र ने भी इस हिंसा को सुनियोजित बताया था। उन्होंने कहा था कि करौली हिंसा के दौरान जिस तरह से पथराव किया गया, उससे साबित होता है कि इसे सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया और इसे रोका जा सकता था।

मारो और भागो: नेपाल के रास्ते सीरिया भागने का था प्लान, गोरखनाथ मंदिर पर हमला करने वाले मुर्तजा अब्बासी का अब्बा भी तलब

गोरखपुर के गोरखनाथ मंदिर पर 3 अप्रैल 2022 को हमला करने वाले मुर्तजा अब्बासी के अब्बा मुशीर अहमद अब्बासी को ATS ने तलब किया है। मुशीर से एजेंसी बेटे के मानसिक हालत को लेकर किए गए उसके दावे को लेकर भी सवाल जवाब करेगी। ATS ने इस मामले में सहारनपुर से मुर्तजा के साथी अब्दुल रहमान को भी गुरुवार (7 अप्रैल 2022) को गिरफ्तार किया। यह बात भी सामने आई है कि मुर्तजा सीरिया भागने की फिराक में था।

रिपोर्ट के अनुसार मुर्तजा शूट ऐंड स्कूट यानी मारो और भागो की नीति पर काम कर रहा था। गोरखनाथ मंदिर पर हमले के बाद उसकी योजना नेपाल होते हुए सीरिया या अफगानिस्तान जाने की थी। वह आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट के लिए केमिकल हथियारों की खेप तैयार करना चाहता था। रिपोर्ट में बताया गया है कि इस्लामिक स्टेट ने 25 मार्च को एक वीडियो जारी किया था। इसमें नजर आ रहे आतंकी के हाथ में भी उसी तरह के हथियार थे जैसा मंदिर पर हमले के दौरान मुर्तजा ने ले रखा था।

इस बिच मुर्तजा अब्बासी का एक वीडियो भी वायरल हो रहा है। इसमें वह कह रहा है, “मेरे बड़े पापा ने कहा कि थोड़ा सीरियस लग रहा है। ये पुलिस वाले हैं और ये समन दे रहे हैं। कोई केस किए हो क्या? यहाँ रहोगे कि कहीं जाओगे? फिर हम दिमाग लगाए और निकल गए घर से। हम वहाँ से नेपाल चले गए।”

मुर्तजा अब्बासी ने पुलिस को बताया कि वह NRC और CAA से नाराज था। पुलिस पूछताछ के वायरल हो रहे वीडियो में उसने बताया, “CAA, NRC और कर्नाटक की घटनाओं को सुन कर काफी नाराजगी थी मुझ में। मैं बहुत एंगल से कह रहा था। मैं जस्टिफिकेशन दे रहा था कि मुसलमानों के साथ गलत हो रहा है। मैं थक गया था सोच कर। मेरी आँखें सूज गई थीं। मैं नेपाल में सो नहीं पाया था। मुझे लगा कि यहाँ कोई भविष्य ही नहीं।”

गौरतलब है कि रविवार (3 अप्रैल) को आईआईटी से केमिकल इंजीनियर 30 वर्षीय अहमद मुर्तजा अब्बासी ने गोरखनाथ मंदिर परिसर में सुरक्षाकर्मियों हमला कर दिया था। इस हमले में पीएसी के दो कॉन्स्टेबल घायल हो गए थे। अन्य सुरक्षाकर्मियों ने उसे पकड़कर उसके हथियार को जब्त कर लिया था। अब तक जो तथ्य सामने आए हैं उससे पता चला है कि उसके आईएसआईएस से लिंक थे। उसने बीते डेढ़ साल में लगभग 8 लाख रुपए नेपाल के बैंकों के माध्यम से ISIS का गढ़ कहे जाने वाले सीरिया भेजे थे।

प्रशिक्षुओं की लिस्ट में ‘केवल मुस्लिम’ कैंडिडेट होने से विवादों में घिरी विमानन कंपनी ‘पवन हंस’, सोशल मीडिया पर भड़के लोग: जानिए असली वजह

भारत सरकार की मिनी रत्न कंपनी पवन हंस (Pawan Hans) अपनी प्रशिक्षु भर्ती प्रक्रिया को लेकर विवादों में घिर गई है। गुरुवार (7 अप्रैल 2022) को इसको लेकर सोशल मीडिया पर एक लिस्ट वायरल हुई, जिसके बाद चर्चा छिड़ गई। वायरल पोस्ट के मुताबिक, पवन हंस में शामिल होने वाले सभी नए प्रशिक्षु मुस्लिम हैं, इसके अलावा इसमें किसी भी दूसरे धर्म के कैंडिडेट के नाम को शामिल नहीं किया गया है।

इस विवाद की शुरुआत पवन हंस लिमिटेड की ओर से संगठन में शामिल होने वाले नए ग्रेजुएट ट्रेनी की लिस्ट से हुई। दरअसल, सोशल मीडिया पर वायरल हुए लिस्ट में जितने भी लोग थे वो सभी मुस्लिम समुदाय से ही थे।

पवन हंस के ट्रेनी की लिस्ट

देखते ही देखते यह पोस्ट तेजी से वायरल होने के साथ ही लोगों के लिए आश्चर्य का विषय हो गई और तरह-तरह के कमेंट सोशल मीडिया पर किए जाने लगे। वहीं कई नेटिज़न्स ने इस प्रशिक्षु कार्यक्रम के लिए केवल एक मजहब के लोगों को भर्ती करने के लिए भारत सरकार की भी आलोचना की।

पवन हंस लिमिटेड भारत सरकार के नागरिक उड्डयन मंत्रालय के तहत एक सरकारी स्वामित्व वाली संस्था है, जिसे इंडियन ऑयल कंपनियों के लिए अपतटीय स्थानों पर और केदारनाथ और वैष्णो देवी मंदिर जैसे पवित्र तीर्थ स्थलों पर विशेष हेलीकॉप्टर सेवाएँ प्रदान करने का काम सौंपा गया है। माओवादी उग्रवाद से निपटने के लिए राज्य सरकारों द्वारा भी इनका उपयोग किया जाता है।

विवाद ने लोगों को वर्ष 2020 में पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा चुने गए सभी मुस्लिम उम्मीदवारों की एक ऐसी ही सूची की याद दिला दी। हालाँकि, यह आरक्षण का मामला निकला क्योंकि पश्चिम बंगाल राज्य में कई मुस्लिम जातियाँ भी ओबीसी के तहत सूचीबद्ध हैं। किसी ने सोचा कि क्या पवन हंस लिमिटेड की इस सूची में भी ऐसा ही कुछ कारण था।

हालाँकि, ऐसा लगता है कि यह किसी ओबीसी सूची के कारण मुस्लिम उम्मीदवारों के लिए आरक्षण का मामला नहीं है, बल्कि नई दिल्ली स्थित ‘अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान’ जामिया मिल्लिया इस्लामिया के साथ पवन हंस लिमिटेड (पीएचएल) के एक विशेष समझौते के कारण है।

इस विवाद के पीछे की असली वजह

पवन हंस की वेबसाइट पर जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक पवन हंस जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के साथ मिलकर ढाई साल का कंम्प्लीट बेसिक विमान रखरखाव प्रशिक्षण पाठ्यक्रम संचालित कर रहा है। ऐसे में उसके सभी ट्रेनी जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के हैं और केवल मुस्लिम हैं।

पवन हंस हेलीकॉप्टर कंपनी और जामिया मिलिया विश्वविद्यालय के बीच 2017 में एक समझौता किया गया था, जिसमें दोनों के बीच शुरू में बीएससी (एयरोनॉटिक्स) पाठ्यक्रम के लिए विमानन उद्योग के लिए प्रशिक्षण क्षेत्र में सहयोग करने पर सहमति व्यक्त की गई थी। इसके साथ ही विमानन क्षेत्र में बीएससी कोर्स के लिए संभावना तलाशने पर भी सहमति जताई गई थी।

हालाँकि, ये कोई पहली बार नहीं है जब भारत में भर्तियों के मामले में धार्मिक पूर्वाग्रह के आरोप लगे हैं। इससे पहले पश्चिम बंगाल सरकार पर सिर्फ मुस्लिमों को भर्ती करने का आरोप लगा था। हालाँकि, ऑपइंडिया फैक्ट-चेक ने पाया था कि ऐसा नहीं है।

खास बात ये है कि केंद्र सरकार के संगठन के लिए भर्ती के दौरान ऐसा करना दूसरे धर्मों और विश्वविद्यालयों के प्रति स्पष्ट व्यवस्थित भेदभाव की तरह लगता है। सबसे बुरी बात यह है कि ये स्पष्ट साम्प्रदायिकता प्रतीत होती है।

गौरतलब है कि जामिया मिल्लिया इस्लामिया पवन हंस लिमिटेड के साथ समझौते के तहत चलाए जा रहे अपने पाठ्यक्रमों में केवल मुस्लिम छात्रों को ही प्रवेश दे सकता है। हमने पवन हंस लिमिटेड के संयुक्त महाप्रबंधक (विमानन अकादमी) मोहम्मद अमीर को फोन करके इसकी पुष्टि करने की कोशिश की लेकिन हमें कोई जवाब नहीं मिला। ऑपइंडिया की यह रिपोर्ट एक डेवलपिंग स्टोरी है, आगे जैसे ही हमें और सूचनाएँ मिलेंगी हम इस लेख को अपडेट करेंगे।

रामनवमी, हनुमान जयंती से पहले राजस्थान के कोटा, बीकानेर, जोधपुर और अब अजमेर में धारा 144: भाजपा नेता ने बताया CM गहलोत का ‘नादिरशाही’ फरमान

राजस्थान (Rajasthan) के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (CM Ashok Gehlot) की अगुवाई वाली कॉन्ग्रेस सरकार (Congress Government) में राज्य के अजमेर जिले में हिंदू त्योहारों से पहले धारा 144 लागू करने का फरमान जारी किया गया है। फरमान में आयोजनों के दौरान धार्मिक चिन्ह वाले झंडों को नहीं लगाने की हिदायत दी गई है।

भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और अजमेर नगर निगम के डिप्टी मेयर नीरज जैन हिंदुस्तानी ने इस संबंध में अजमेर के जिला प्रशासन द्वारा जारी किए गए सर्कुलर को ट्विटर पर शेयर किया है। उन्होंने कॉन्ग्रेस शासन की तुलना मुगलराज से की है।

नीरज जैन ने ट्वीट कर लिखा, “कोटा, बीकानेर, जोधपुर और अब अजमेर सहित अन्य शहर में गहलोत साब का नादिरशाही फ़रमान। किसी धार्मिक चिन्ह के झण्डे लगाना, DJ बजाना अपराध है! गौरतलब है कि एक और महावीर जयंती, दुर्गा अष्टमी, अम्बेडकर जयंती, राम नवमी और हनुमान जयंती के जुलूस और शोभा यात्रा पर ये आदेश #गहलोतराज_मुग़लराज

बता दें कि 10 अप्रैल को रामनवमी, 14 अप्रैल को महावीर जयंती और 16 अप्रैल को हनुमान जयंती है। इन अवसरों पर हिंदू समुदाय धूमधाम से झाँकी एवं जुलूस निकालते हैं और पर्व को मनाते हैं। सरकार के फरमान में आयोजनों के दौरान धार्मिक झंडे पर रोक लगाने की निर्देश के बाद हर तरफ सरकार की आलोचना हो रही है।

अजमेर प्रशासन द्वारा जारी किए सर्कुलर में कहा गया है, “अजमेर के पुलिस अधीक्षक द्वारा यह अवगत कराया है कि अजमेर जिले में आयोजित होने वाले धार्मिक प्रायोजनों के दौरान धार्मिक प्रतीक चिन्ह युक्त झंडियाँ सार्वजनिक संपत्ति, जैसे कि सामुदायिक भवन/ विश्राम गृह, सार्वजनिक पार्क, चौराहे/तिराहे, बिजली/टेलीफोन के खंभे आदि अथवा किसी अन्य व्यक्ति की संपत्ति पर बना सक्षम स्वीकृति के लगाकर, व्यक्ति या व्यक्तियों के समूह द्वारा कानून व्यवस्था की स्थिति को प्रभावित कर सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ने का प्रयास किया जाता है। जिससे लोक शांति भंग होने और कानून-व्यवस्था तथा सामाजिक सद्भाव प्रतिकूल रूप से बाधित होने की आशंका उत्पन्न हो सकती है।”

अजमेर के जिलाधिकारी दीप अंश के नाम से जारी इस सर्कुलर में कहा गया है कि इस प्रतिबंध गुरुवार (7 अप्रैल 2022) से अगले एक माह तक जारी रहेगी। इस दौरान अगर कोई व्यक्ति या समूह इस आदेश का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

इसके पहले 30 मार्च को बीकानेर सहित कई जिलों में धारा 144 लगाई गई थी और किसी भी यात्रा, रैली और जुलूस के लिए संबंधित थानाधिकारी से अनुमति आवश्यक कर दी गई थी। बीकानेर में 2 अप्रैल को हिंदू धर्म यात्रा और महाआरती का आयोजन होना था। इसके पहले सरकार ने धारा 144 लगा दिया था। इसको लेकर बाकी बवाल हुआ था।

इस तरह प्रतिबंधों के कारण करौली में हिंदू नव वर्ष पर निकाली गई जुलूस यात्रा में मुस्लिमों की भीड़ ने हिंदुओं पर हमला कर दिया था। इस हमले में 33 लोग और चार पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। वहीं, कई वाहनों और दुकानों में आग लगा दी गई थी।