Home Blog Page 2831

‘हिंदुओं ने रैली निकाली, आपत्तिजनक गाने बजाए… इसलिए हुआ पथराव’: करौली हिंसा पर राजस्थान पुलिस ने पीड़ित हिन्दुओं को ही ठहरा दिया जिम्मेदार

राजस्थान के करौली में हिंदू विरोधी हिंसा के मामले में शुक्रवार ( 8 अप्रैल 2022) को राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार ने प्रशासनिक जाँच के आदेश दे दिए। इसके साथ ही सरकार ने मामले में 15 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट माँगी। राजस्थान पुलिस ने मामले में ‘निष्पक्ष’ जाँच शुरू करने और 2 अप्रैल को हिंसा भड़काने के आरोप में 105 आरोपितों को गिरफ्तार करने के बाद ऐसा किया है। लेकिन अब राजस्थान पुलिस हिंसा के लिए हिंदुओं को ही जिम्मेदार ठहरा रही है।

शनिवार (2 अप्रैल, 2022) को हिन्दू नव वर्ष (नव संवत्सर) के उपलक्ष्य में मुस्लिम बहुल इलाके से गुजर रही एक बाइक रैली पर पथराव के बाद इलाके में तनाव पैदा हो गया था। इलाके में स्थानीय मुस्लिमों द्वारा हिंदुओं की रैली में पथराव के बाद भड़के साम्प्रदायिक दंगों में पुलिसवालों समेत 42 लोग घायल हुए थे।

मामले की जाँच के दौरान शुरुआत में पुलिस ने इस मामले में 30 लोगों को हिरासत में लिया था और हिंसा भड़काने के आरोप में 37 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। हालाँकि, 8 अप्रैल 2022 को पुलिस ने हिंसा के लिए हिंदुओं की रैली को ही जिम्मेदार ठहराने की कोशिश की। पुलिस ने मामले को जस्टिफाई करते हुए यह बताने की कोशिश की कि रैली के दौरान ‘आपत्तिजनक’ गाने बजाए गए, जिसके कारण पथराव हुआ। करौली हिंसा पर राजस्थान के डीजीपी मोहन लाल लाठेर ने कहा कि नव संवत्सर को जिस तरह से शोभा यात्रा निकाला गया वो संदिग्ध था औऱ उसमें आपत्तिजनक गाने बजाए गए, इसलिए पथराव हुआ।

लाठेर के मुताबिक, करौली के हटवाड़ा बाजार के अलावा प्रदेश में सभी जगह शांति बनी रही और लोगों ने सौहार्द के साथ इस त्योहार को मनाया। प्रदेश पुलिस के मुखिया ने कहा, “ऐसी घटना करौली में हुई क्योंकि 2015 के बाद से इस क्षेत्र में कोई जुलूस नहीं निकाला गया था। पुलिस ने स्थिति की निगरानी के बाद आयोजकों को अनुमति दी थी, लेकिन डीजे के लिए कोई अनुमति नहीं दी गई थी।”

करौली में हिंदुओं पर हमले के बाद से कॉन्ग्रेस का पार्षद मतलूब अहमद फरार है। वह मुस्लिम बहुल इलाके में हिंदू नववर्ष पर हुई हिंसा का मुख्य साजिशकर्ता बताया जा रहा है। आरोप है कि इसी ने भाजपा नेता और जयपुर की मेयर सौम्या गुर्जर के पति राजाराम गुर्जर पर हिंसा में उनकी कथित संलिप्तता के लिए मामला दर्ज करवाया था। वहीं अधिकारियों ने रैली की अनुमति के लिए आवेदन करने वाले संयोजक नीरज शर्मा, हिंदू सेना के प्रदेश अध्यक्ष साहब सिंह गुर्जर और नगर परिषद, करौली के पूर्व अध्यक्ष राजाराम गुर्जर के खिलाफ भी मामला दर्ज किया है।

किसी भी तरह की अनहोनी से बचने के लिए शहर में 50 पुलिस उपाधीक्षकों सहित 600 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। कर्फ्यू लगा दिया गया है, इंटरनेट भी बंद कर दिया गया है।

झारखंड सरकार पर दोहरी मार: CM हेमंत सोरेन ने खुद के नाम पर लिया माइंस, हाई कोर्ट ने माँगा जवाब; कॉन्ग्रेस MLA की विधायकी गई

खनन मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने शुक्रवार (8 अप्रैल 2022) को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को नोटिस जारी कर खनन का पट्टा लेने के मामले में विस्तृत एवं बिंदुवार जानकारी देने का निर्देश दिया है। वहीं, आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में सीबीआई कोर्ट द्वारा सजा सुनाने के बाद कॉन्ग्रेस विधायक बंधु तिर्की की विधानसभा की सदस्यता खत्म कर दी गई है।

दरअसल, शिवशंकर शर्मा नाम के एक व्यक्ति ने खनन पट्टा अपने नाम करने को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। उस याचिका पर हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डॉ. रवि रंजन और न्यायाधीश सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने सुनवाई की। अदालत ने कहा कि संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को अपनी शक्तियों का दुरुपयोग नहीं करना चाहिए।

कुछ दिन पहले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नाम पर पत्थर खदान का पट्टा आवंटित होने का मामला सामने आया था। इसके बाद सोरेन के खिलाफ 11 फरवरी को हाईकोर्ट में शिव शंकर शर्मा की ओर से अधिवक्ता राजीव कुमार ने जनहित याचिका (PIL) दायर की थी।

याचिका में कहा गया है कि सोरेन राज्य के मुख्यमंत्री और वन एवं पर्यावरण विभाग के विभागीय मंत्री हैं। ऐसे में उन्होंने खुद ही पर्यावरण क्लीयरेंस के आवेदन दिया और क्लीयरेंस लेकर खुद ही खनन पट्टा हासिल कर लिया। ऐसा करना पद का दुरुपयोग और जनप्रतिनिधि कानून का उल्लंघन है।

याचिकाकर्ता ने मामले की सीबीआई जाँच कराने और हेमंत सोरेन की सदस्यता रद्द करने की माँग की है। याचिका में कहा गया है कि इस मामलों को ध्यान में रखकर अदालत राज्यपाल को निर्देश दे कि वह मख्यमंत्री सोरेन के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की अनुमति दें।

क्या है मामला

मुख्यमंत्री सोरेन पर आरोप है कि उन्होंने पद का दुरुपयोग करते हुए अपने नाम पर पत्थर खदान का पट्टा लिया। यह खदान राँची जिले के अनगड़ा मौजा, थाना नं-26, खाता नं- 187, प्लॉट नं- 482 में स्थित है। भाजपा ने आरोप लगाया था कि इस पट्टे की स्वीकृति के लिए सोरेन 2008 से ही प्रयास कर रहे थे।

मुख्यमंत्री बनने के बाद पत्रांक संख्या 615/M, दिनांक 16-06-2021 के जरिए पट्टा की स्वीकृति का आशय का पत्र (LOI) विभाग द्वारा जारी कर दिया है। यह विभाग मुख्यमंत्री के पास ही है। स्टेट लेबल इंवायरमेंट इंपेक्ट असेसमेंट अथॉरिटी (SEIAA) ने 14-18 सितम्बर 2021 को अपनी 90वीं बैठक में पर्यावरण स्वीकृति की अनुशंसा भी कर दी।

कॉन्ग्रेस विधायक तिर्की की गई विधायकी

आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में दोषी पाए कॉन्ग्रेस विधायक बंधु तिर्की की विधानसभा की सदस्यता खत्म कर दी गई है। इस संबंध में 28 मार्च 2022 के प्रभाव से बंधु तिर्की की विधानसभा सदस्यता समाप्त कर दी गई है। इस मामले में CBI कोर्ट ने तिर्की को 3 साल की सजा सुनाने के साथ 3 लाख रुपए का जुर्माना लगाया था।

झारखंड विधानसभा के प्रभारी सचिव सैयद जावेद हैदर की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया कि CBI की स्पेशल कोर्ट ने बंधु तिर्की को दोषी करार दिया है। इसलिए जन प्रतिनिधित्व नियम 1951 की धारा-8 तथा संविधान के अनुच्छेद 191 (1)(e) के तहत 28 मार्च 2022 से झारखंड विधानसभा की सदस्यता खत्म की जाती है।

बंधु तिर्की मांडर विधानसभा सीट से झारखंड विकास मोर्चा (JVM) की टिकट पर चुनाव जीते थे, लेकिन बाद में कॉन्ग्रेस में शामिल हो गए। तिर्की पर आय से 7.20 लाख रुपए अधिक की संपत्ति अर्जित करने का आरोप था।

अब ATM से पैसा निकालने के लिए डेबिट कार्ड का झंझट खत्म: RBI ने कहा- सभी बैंकों के ATM नेटवर्क पर बिना कार्ड के नकदी निकालने की मिलेगी सुविधा

देश में बैंकिंग व्यवस्था तेजी से डिजिटल हो रही है। पहले आप बैंक जाकर पैसे निकालते थे, फिर एटीएम कार्ड ने आपको लाइन में लगने से निजात दी। लेकिन अब देश के सभी बैंकों में नई व्यवस्था लागू होने जा रही है। अब आप चाहें किसी भी बैंक के ग्राहक हों, आप यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) का इस्तेमाल कर देश के किसी भी ATM से डेबिट कार्ड के बिना भी पैसे निकाल सकते हैं।

मौद्रिक नीति की समीक्षा के दौरान रिजर्व बैंक के गवर्नर ने बताया कि UPI का इस्तेमाल कर ATM से बिना कार्ड के निकासी की सुविधा का विस्तार सभी बैंकों के लिए किया जाने वाला है। यानी कि आप चाहें निजी बैंक के ग्राहक हों या सरकारी बैंक के, सभी ग्राहक इस सुविधा का इस्तमाल कर सकते हैं।

रिजर्व बैंक के गवर्नर के शक्तिकांत दास ने कहा, ‘‘अब यूपीआई का उपयोग करते हुए सभी बैंकों और एटीएम नेटवर्क में कार्ड-रहित (बिना कार्ड के) नकद निकासी सुविधा उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है। इसके उपयोग से लेनदेन करने में आसानी होगी। इसके साथ ही बिना कार्ड के नकदी निकासी की सुविधा से कार्ड स्किमिंग, कार्ड क्लोनिंग जैसी धोखाधड़ी को भी रोकने में मदद मिलेगी।’’ उन्होंने कहा कि इस बारे में एनपीसीआई, एटीएम नेटवर्क और बैंकों को जल्द ही अलग-अलग निर्देश जारी किए जाएँगे।

हालाँकि रिजर्व बैंक के गवर्नर ने यह साफ कर दिया कि क्रेडिट/डेबिट कार्ड की सुविधा खत्म नहीं होने जा रही। वो सुविधा लोगों को मिलती ही रहेगी। शक्तिकांत दास ने कहा, “हम क्रेडिट/डेबिट कार्ड जारी करना बंद नहीं करेंगे, क्योंकि उनके पास कई अन्य सुविधाएँ हैं। इसका उपयोग न केवल नकद पैसे निकालने के लिए किया जाता है, बल्कि रेस्तरां, दुकान या विदेश में भुगतान के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। इसलिए क्रेडिट और डेबिट कार्ड जारी रहेंगे।”

UPI का हो रहा है सबसे ज्यादा इस्तेमाल

उल्लेखनीय है कि देश में डिजिटल पेमेंट में काफी तेजी से उछाल आया है। अब अधिकतर लोग पैसों का लेनदेन UPI के जरिए ही करते हैं। 28 फरवरी को खत्म हुए फाइनेंशियल ईयर 2021-22 में 7,422 करोड़ डिजिटल पेमेंट ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड हुआ है, जो पिछले फाइनेंशियल ईयर 2020-21 के 5,554 करोड़ ट्रांजैक्शन के मुकाबले ज्यादा है। Nationl Payment Corporation of India (NCPI) का यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI) को डिजिटल पेमेंट (digital payment) ट्रांजैक्शन के लिए सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है।

UPI पेमेंटिंग ऐप Phone Pay का इस्तेमाल सबसे ज्यादा हुआ है। इस प्लेटफॉर्म के जरिए कुल 8.27 लाख करोड़ रुपए का लेन-देन हुआ है। पिछले वित्त वर्ष 2020-21 के मुकाबले यह लगभग दोगुना है। फाइनेंशियल ईयर 2020-21 के दौरान UPI के जरिए 292.2 करोड़ UPI ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड हुआ था। इसके जरिए 4.25 लाख करोड़ रुपए की राशि का लेन-देन दर्ज हुआ था।

‘भगवंत मान भी पैसे लेते हैं.. मैं भी लेता हूँ’: केजरीवाल का वीडियो शेयर करने पर बीजेपी नेता नवीन जिंदल के खिलाफ पंजाब पुलिस ने दर्ज किया FIR

तेजिंदर पाल सिंह बग्गा के बाद अब एक बार फिर से पंजाब पुलिस ने बीजेपी नेताओं के टार्गेट किया है। इस बार गुरुवार (7 अप्रैल 2022) को अरविंद केजरीवाल का एक वीडियो शेयर करने के आरोप में पंजाब पुलिस ने देर रात भाजपा के दिल्ली प्रवक्ता नवीन कुमार जिंदल के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। सात अप्रैल को देर रात करीब ढाई बजे ये शिकायत दर्ज की गई। आईपीसी 1860 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम-2000 की धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है।

दरअसल, 6 अप्रैल को नवीन जिंदल ने कथित तौर पर अरविंद केजरीवाल के इंटरव्यू का एक वीडियो शेयर किया था, जिसमें वो ये कहते हुए नजर आ रहे हैं कि पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान, मैं और मंत्री और विधानसभा सदस्य रिश्वत लेते हैं और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देते हैं। जिंदल ने वीडियो के साथ ट्वीट किया, “आखिरकार सच्चाई सामने आ गई है।”

वहीं जिंदल द्वारा शेयर किए गए वीडियो में केजरीवाल कहते हैं, “पहले, पैसा मुख्यमंत्री तक पहुँचता था। तो पूरे सिस्टम को कुछ इस तरह से बनाया जाता था कि अगर किसी को नीचे से कुछ सुविधा देने की जरूरत है, तो उन्हें पैसा लेने दो। तो सारा पैसा – अलग-अलग विभागों से, पुलिस से, तहसीलदार से इकट्ठा करके सारा पैसा ऊपर तक जाता था। अब हमारे भगवंत मान भी पैसे लेते हैं, मैं भी पैसा लेता हूँ, मंत्री भी पैसे लेते हैं, विधायक भी पैसे लेते हैं। पंजाब में तहसीलदारों की एक मीटिंग हुई है। उन्होंने कहा है कि नीचे से पैसा लेना और इसे ऊपर भी पहुँचाना।”

इस बीच पुलिस द्वारा दर्ज किए गए केस का जबाव देते हुए जिंदल दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल को भाजपा नेताओं के खिलाफ फर्जी मामले दर्ज करने और उन्हें निशाना बनाने के लिए खरी-खोटी सुनाई। उन्होंने ट्वीट किया, “महाठग अरविंद केजरीवाल के पास और कोई काम नहीं बचा है, क्या मिला पंजाब पुलिस को अपने बाप की बापौती समझ बैठा, फर्जी मुक़दमे करो 1000 करो। तुम्हारे मुकदमों से मैं डरने वाला नहीं हूँ, रोज तुम्हारी ऐसे ही पोल खोलता हूँ ओर आगे भी डंके की चोट पर खोलता रहूँगा।”

गौरतलब है कि तेजिंदर पाल सिंह बग्गा ने भी पंजाब पुलिस पर निशाना साधते हुए कहा कि जिंदल वही शख्स हैं, जिन्होंने पहले भी अरविंद केजरीवाल की 11 करोड़ स्विमिंग पूल योजना का पर्दाफाश किया था। बग्गा के साथ ही कपिल मिश्रा ने भी केजरीवाल पर निशाना साधते हुए कहा कि AAP भाजपा कार्यकर्ताओं को निशाना बनाने के लिए पंजाब पुलिस का इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने ट्वीट किया, “अरविंद केजरीवाल कभी भी राजनीति में आ पाते अगर उनके खिलाफ इस तरह के राजनीतिक बयानों पर प्राथमिकी दर्ज की जाती। यह साजिश लंबे समय तक नहीं चलेगी।”

इससे पहले 2 अप्रैल 2022 को पंजाब पुलिस ने आम आदमी पार्टी के लोकसभा प्रभारी और प्रवक्ता डॉ सनी सिंह अहलूवालिया की शिकायत पर भाजपा नेता तजिंदर सिंह बग्गा के खिलाफ शिकायत दर्ज की थी।

यहीं नहीं नियमों को धता बताते हुए पंजाब पुलिस बग्गा को गिरफ्तार करने के लिए दिल्ली में उनके घर तक पहुँच गई थी। हालाँकि, बग्गा उसे नहीं मिले। इसके बाद बग्गा ने केजरीवाल को फटकार लगाते हुए कहा था, “मुझे बताओ, अरविंद केजरीवाल। क्या आप एफआईआर दर्ज करने के बाद अब खुश हैं? अब मैं आपको बता रहा हूँ। एक पर मत रुको, मेरे खिलाफ 100 एफआईआर दर्ज करो। आपको हाल ही में शक्तियाँ मिली हैं। जितना हो सके उनका दुरुपयोग कर लो। लेकिन मैं आपको बताना चाहता हूँ कि रावण का अहंकार भी टूटा था और आपके अहंकार का भी यही हाल होगा।”

उल्लेखनीय है कि जिंदल ने पिछले साल 2021 में दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल पर ये आरोप लगाया था कि उन्होंने अपने घर के रेनोवेशन के लिए दिल्ली के टैक्सपेयर्स के 9 करोड़ रुपए खर्च कर दिए। केजरीवाल के घर के बाहर शूट किए गए एक वीडियो में जिंदल ने दावा किया था कि महामारी के दौरान जब लोग बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझ रहे थे, तब सीएम ने अपने घर पर करोड़ों रुपए खर्च किए।

बहरहाल मौजूदा मामले में पंजाब पुलिस ने जिंदल के खिलाफ आईपीसी की धारा 465, 469, 471, 500, 504, 505 (1) (बी) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 66 के तहत मामला दर्ज किया है।

मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड हाफिज सईद को टेरर फंडिंग मामले में 31 साल की जेल, अमेरिका ने भी रखा है ₹75 करोड़ का ईनाम

हाफिज सईद (Hafiz Saeed) दुनिया का वो खतरनाक आतंकवादी है, जिसका जिक्र होते ही मुंबई हमले (Mumbai Terror Attack) के जख्म ताजा हो जाते हैं। जमात-उद-दावा (JUD) चीफ हाफिज सईद के संगठन लश्कर-ए-तैयबा ने ही मुंबई पर आतंकी हमला किया था। इसी क्रम में अब आतंकवाद के दो मामलों में उसे 31 साल की सजा सुनाई गई है। साथ ही 3 लाख 40 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, हाफिज सईद को ये सजा टेरर फंडिंग के मामले में कोर्ट ने सुनाई है। हाफिज काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट जुलाई 2019 में लाहौर से गुजरांवाला जाते वक्त गिरफ्तार किया गया था। हालाँकि, ये कोई नई बात नहीं है कि सईद को सजा सुनाई गई है, इससे पहले भी उसे आतंकवादियों के वित्त पोषण के मामले में 36 वर्षों की सजा सुनाई गई थी। फिलहाल वो लखपत जेल में सजा काट रहा है।

दो साल पहले भी हो चुकी है सजा

लश्कर ए तैयबा और जमात उद दावा चीफ हाफिज सईद को 2020 में ही आतंकी फंडिंग के मामले में पंजाब की एक कोर्ट ने 10 साल की सजा सुनाई थी। साथ ही उस पर 1.1 लाख रुपए के जुर्माने के साथ ही सईद की संपत्तियों को जब्त करने का भी आदेश दिया गया था। इसी मामले में सईद को दो अन्य साथियों जफर इकबाल और याहया मुजाहिद को भी साढ़े 10 साल कैद की सजा सुनाई गई थी। इसके अलावा अब्दुल रहमान मक्की को 6 महीने की कैद हुई थी।

UN घोषित कर चुका है वैश्विक आतंकी

गौरतलब है कि हाफिज सईद को संयुक्त राष्ट्र वैश्विक आतंकी घोषित कर चुका है। उस पर अमेरिका ने भी 1 करोड़ डॉलर (75,91,23,500 रुपए) का ईनाम रखा है। उल्लेखनीय है कि साल 2008 में मुंबई में बर्बर आतंकी हमला हुआ था, जिसमें 6 अमेरिकियों समेत 166 लोगों की मौत हो गई थी। इसका मास्टरमाइंड हाफिज ही था।

तिरंगे से साइकिल साफ कर रहा था रफीक, वीडियो वायरल होने के बाद लोगों ने दर्ज कराई शिकायत: उत्तराखंड पुलिस ने किया गिरफ्तार

उत्तराखंड के हल्द्वानी में एक साइकिल स्टोर मालिक के राष्ट्रीय ध्वज से साइकिल साफ करने का वीडियो वायरल होने के बाद हंगामा हो गया। काफी संख्या में स्थानीय लोग कोतवाली पहुँच पुलिस से शिकायत की। मामला संज्ञान में आने पर पुलिस ने दुकानदार के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है।

आरोपित का नाम रफीक बताया जा रहा है। बनभूलपुरा के लाइन नंबर 16 निवासी रफीक की मंगलपड़ाव स्थित बाजार में ‘रफीक साइकिल वर्क्स’ नाम की दुकान है। रफीक का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में रफीक तिरंगा से साइकिल साफ करते हुए दिखाई दे रहा है। वीडियो में साफ नज़र आता है कि यह शख्स पहले साइकिल साफ करता है और फिर ध्वज उसके हाथ से गिर जाता है। लोगों ने सोशल मीडिया पर इसे तिरंगे का अपमान करार दिया।

कुछ ही देर में वीडियो शहर भर में फैल गया। विष्णुपुरी गली नंबर 10 रामपुर रोड निवासी कनिष्क ढींगरा ने जब वीडियो देखा तो वह कार्यकर्ताओं के साथ कोतवाली पहुँचे और आरोपित के खिलाफ कार्रवाई की माँग को लेकर हंगामा करने लगे। पुलिस की जाँच में सामने आया कि तिरंगे का अपमान का मामला सही था। इसके बाद कोतवाल हरेंद्र चौधरी ने वीडियो के आधार पर आरोपित को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया। राष्ट्रीय ध्वज के अपमान के आरोप में पुलिस ने रफीक पर राष्ट्रीय गौरव निवारण अधिनियम की धारा 2 के तहत मुकदमा दर्ज किया है।

‘हिजाब पहनने पर मुस्लिमों को देना होगा जुर्माना’: जानें कौन है वह महिला नेता जो फ्रांस के राष्ट्रपति चुनाव में मैक्रों को दे रहीं हैं कड़ी टक्कर, इस्लाम के प्रति है सख्त रवैया

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की नींद उड़ा देने वाली फ्रांस में राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार मरीन ले पेन (Marine Le Pen) इन दिनों दुनिया भर में चर्चा में हैं। सत्ता पर काबिज होने से पहले ले पेन जनता की नब्ज पकड़ने की कोशिश कर रही हैं, उन्होंने गुरुवार (7 अप्रैल 2022) को कहा, ”सार्वजनिक स्थानों पर हिजाब पहनने वाली मुस्लिम महिलाओं को जुर्माना देना होगा।” आरटीएल रेडियो (RTL Radio) से बात करते हुए ले पेन ने कहा, “जैसे कारों में सीटबेल्ट पहनना अनिवार्य होता है। उसी तरह मुस्लिम सार्वजनिक स्थानों पर हिजाब न पहनें।” उन्होंने कहा कि जैसे सीटबेल्ट नहीं पहनने पर लोगों को जुर्माना देना पड़ता है, ठीक उसी तरह हिजाब पहनने पर जुर्माना देना होगा। पुलिस इस नियम को लागू करने में सक्षम है।

सबसे अधिक अप्रवासियों का मुद्दा उठाने वाली पेन इस साल घरेलू मुद्दों पर फोकस कर रही है। चुनावी मैदान में मैक्रों को कड़ी टक्कर देने वाली पेन ने यह भी कहा है कि उनके कानूनों को भेदभावपूर्ण और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का उल्लंघन बताकर संवैधानिक चुनौती दी जा सकती है, लेकिन इस तरह की चुनौतियों से बचने के लिए वो जनमत संग्रह का रास्ता निकालेंगी।

दरअसल, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों (President Emmanuel Macron) का 5 साल का कार्यकाल पूरा होने वाला है। अब फ्रांस के लोग अपना नया राष्ट्रपति चुनने वाले हैं। राष्ट्रपति चुनाव के पहले राउंड की वोटिंग रविवार (10 अप्रैल 2022) को होनी है। इस बीच, पक्ष-विपक्ष के नेता कैंपेन कर रहे हैं। इमैनुएल मैक्रों जो फ्रांस में काफी पॉपुलर हैं, वह एक महिला प्रतिद्वंदी से चुनावी चुनौती का सामना कर रहे हैं। ओपिनियन पोल्स में मैक्रों को उनसे कड़ी टक्कर मिल रही है। इसमें मैक्रों मामूली बढ़त बनाए हुए हैं। दिनों-दिन यह फासला कम होकर महिला उम्मीदवार के पक्ष में जा रहा है।

कौन ​हैं मरीन पेन

मरीन पेन का जन्म 1968 में हुआ था। 53 साल की मरीन पेन फ्रांस की विपक्षी और दक्षिणपंथी पार्टी ‘नेशनल फ्रंट’ की सबसे बड़ी नेता हैं। वह राष्ट्रपति मैक्रों की नीतियों की मुखर विरोधी हैं। फ्रांस में पेन की पहचान एक कट्टर राष्ट्रवादी और प्रवासी विरोधी की है। उन्होंने अपने भाषणों से युवाओं के बीच खासा लोकप्रियता हासिल की है। यही नहीं पेन फ्रांस में फैले ‘इस्लामिक कट्टरता’ पर नरम रुख के लिए हमेशा से राष्ट्रपति मैक्रों की आलोचना करती रही हैं।

पेन फिलहाल नेशनल असेंबली की मेंबर हैं। इन दिनों वह जमीनी मुद्दों को भांपते हुए कई ऐसे फैसले लेने की घोषणा कर रही है, जिससे लोगों में उनके प्रति विश्वास और बढ़ सके। उनके पास 24 अप्रैल को रन-ऑफ जीतने का एक बेहतरीन मौका है। बताया जाता है कि उनके पिता जिन मैरी ले पेन भी फ्रांस के बड़े दक्षिण-पंथी नेता थे। कई साल तक बतौर वकील काम करने के बाद 2011 में पेन अपने पिता की बनाई राइट विंग विपक्षी पार्टी ‘नेशनल फ्रंट’ में आ गईं।

फ्रांस ने इस्लामी कट्टरपंथ के खिलाफ ये कदम उठाए

गौरतलब है कि फ्रांस लंबे समय से इस्लामी कट्टरपंथियों से लड़ने की कोशिशों में लगा हुआ है। पिछले महीने फ्रांस सरकार ने ‘कट्टरपंथी इस्लाम’ को पनाह देने और ‘आतंकवादी हमलों को वैध ठहराने’ के लिए ले मैंस के पास एलोनेस में एक मस्जिद को बंद करने का आदेश दिया था। गृह मंत्री डारमैनिन ने तब मस्जिद बंद का समर्थन करते हुए ट्विटर पर लिखा था, “इस मस्जिद में फ़्रांस के प्रति घृणा पैदा करने वाले संदेशों के भड़काया गया।” 

इससे पहले फ्रांसीसी सरकार ने कट्टरपंथ से लड़ने के लिए इस्लाम को लेकर बड़ा फैसला किया। इस साल 5 फरवरी वहाँ की सरकार ने इस्लाम को अपने मुताबिक ढालने के लिए एक निकाय को पेश किया जिसमें इमाम, कुछ सामान्य जन और महिलाएँ होंगी। इस नए निकाय का नाम ‘फोरम ऑफ इस्लाम इन फ्रांस’ है।

जानकारी के मुताबिक, मुस्लिमों और मस्जिदों क खिलाफ चल रहे अभियान के बीच, फ्रांस ने नवंबर 2020 से 89 निरीक्षण की गई मस्जिदों में से एक-तिहाई को बंद कर दिया है। इससे पहले खबर आई थी कि फ्रांसीसी सरकार ने एक साल से भी कम समय में लगभग 30 मस्जिदों को बंद कर दिया था। सार्थे गवर्नरेट ने 25 अक्टूबर को एक बयान जारी कर कहा कि एलोन्स में 300 लोगों की क्षमता वाली मस्जिद को इस आधार पर छह महीने के लिए बंद कर दिया था कि यह ‘कट्टरपंथी इस्लाम का बचाव करती है।’ यह एक अभियान का हिस्सा था, जिसकी अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों के साथ-साथ वैश्विक नेताओं, विशेष रूप से मुस्लिम-बहुल देशों में दुनिया भर में आलोचना की गई थी।

किसी गरीब की झोपड़ी-दुकान पर नहीं चलेगा बुलडोजर, अपराधी और माफियाओं के कब्जे पर ही हो कार्रवाई: CM योगी का सख्त निर्देश

उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सत्ता में वापसी के साथ ही बुलडोजर फिर से सक्रिय हो गया है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने कथित तौर पर शुक्रवार (8 अप्रैल 2022) को अफसरों को सख्त निर्देश दिए हैं कि किसी गरीब की झोपड़ी और दुकान पर बुलडोजर न चलाएँ। बुलडोजर सिर्फ पेशेवर माफिया, दुर्दांत अपराधी और माफियाओं की अवैध संपत्ति पर ही चलाएँ। उन्होंने कहा कि ऐसे माफिया जिन्होंने कमजोरों और व्यापारियों की संपत्ति पर अवैध कब्जा कर लिया हो सिर्फ उनके खिलाफ ही कार्रवाई की जाए। किसी को परेशान न किया जाए।

आज तक की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सीएम योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों से साफ तौर पर कहा कि अपराध और अपराधियों के प्रति जीरो टॉलरेंस और गरीबों के प्रति संवेदनशीलता बनी रहनी चाहिए। सीएम योगी आदित्यनाथ ने सख्त आदेश देते हुए कहा कि अवैध संपत्तियों को बुलडोजर से गिराने की कार्रवाई अपराधियों के खिलाफ ही की जाए, गरीबों को परेशान न किया जाए। उन्होंने यह भी कहा है कि गरीबों की संपत्ति पर कब्जा करने वालों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई की जाए। इस आदेश से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि ऐसी कार्रवाई पर कोई शिकायत न आए।

ADG (लॉ एंड ऑर्डर) प्रशांत कुमार ने कहा, “निर्देश आए हैं कि बुलडोजर का गलत इस्तेमाल न किया जाए। अवैध निर्माण के खिलाफ बुलडोजर का प्रयोग किया गया है। इसमें सरकारी संपत्तियों और जमीन पर अवैध निर्माण शामिल है। विध्वंस से पहले सभी न्यायिक प्रक्रियाएँ पूरी की जाती हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “नगर निगम जहाँ भी तोड़फोड़ का काम करता है, वहाँ शांति-व्यवस्था सुनिश्चित करने का प्रावधान है और इसके लिए पुलिस बल तैनात है। इसका गलत इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। जहाँ न्यायिक प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है, वहाँ बुलडोजर के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।”

अपराध और अपराधियों के प्रति जीरो टॉलरेंस तथा गरीबों के प्रति संवेदनशीलता योगी सरकार का पिछले पाँच साल का मूलमंत्र रहा है। दूसरी पारी में भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसी सिद्धांत को प्रशासन में आगे बढ़ाया है। मार्च 2022 में, सीएम योगी की सरकार मजबूत कानून व्यवस्था और भ्रष्टाचार मुक्त शासन के वादे पर बड़े जनादेश के साथ सत्ता में लौटी।

हाल ही में, बरेली विकास प्राधिकरण ने 7 अप्रैल 2022 को समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायक शहजील इस्लाम के अवैध रूप से निर्मित पेट्रोल पंप पर बुलडोजर चला दिया। ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहाँ अपराधियों ने बुलडोजर कार्रवाई के डर से स्वेच्छा से पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है।

‘काफिर, इस्लाम से धोखा’: BJP का सपोर्ट करने वाले मुस्लिम परिवार पर बिरादरों ने किया हमला, उत्तराखंड का मामला

उत्तराखंड में हाल ही संपन्न हुए विधानसभा चुनावों के दौरान भाजपा का समर्थन करना एक मुस्लिम परिवार को महँगा पड़ गया। कट्टरपंथी मानसिकता से ग्रसित मुस्लिम समुदाय के ही लोगों ने उसे बेरहमी से पीट-पीट कर घायल कर दिया। इस हमले में एक लड़की समेत 4 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। यहीं नहीं बीजेपी का समर्थन करने पर पड़ोसियों ने पीड़ित परिवार को ‘काफिर’ और ‘इस्लाम को धोखा’ देने वाला करार दिया।

न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक, यह घटना रूद्रपुर जिले के उधम सिंह नगर का है। पुलिस ने हमला करने के मामले में 6 आरोपितों के खिलाफ केस दर्ज कर पाँच की पहचान कर ली है और छठे अपराधी की तलाश की जा रही है। वार्ड नंबर 20 के अंतर्गत आने वाले भूरबंगला निवासी पीड़ित मुस्लिम अनीस मियाँ गुड्डू बीजेपी के पदाधिकारी हैं। विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने बीजेपी के लिए प्रचार कर मुस्लिमों के वोट माँगे थे, जिसके बाद से उनका ही समुदाय उनके खिलाफ खड़ा हो गया।

अनीस की बीवी परवीन जहान ने पुलिस को बताया कि 5 अप्रैल को उनके शौहर अनीस अपनी दुकान में बैठे थे तो उसी दौरान स्थानीय लोगों की भीड़ ने उनके शौहर को घेर लिया। जहान ने बताया, हमलावरों की भीड़ में शामिल एक शख्स यूनुस भी था, जो उन्हीं के घर के पास रहता था। यूनुस के साथ उसकी बीवी रेशमा, उसका भाई इरफान, शकील और उसकी बीवी बेबी अनीस की दुकान पर गए और उसे गालियाँ देने लगे। उन सभी के हाथ में चाकू और लाठियाँ थीं। उन लोगों ने अनीस को ‘काफिर’ करार देते हुए उस पर इस्लाम को धोखा देने का आऱोप लगाया। जहान के मुताबिक, सबसे पहले उनके शौहर पर यूनुस ने चाकू से हमला किया और इसके बाद सभी उन्हें पीटने लगे। उन लोगों ने जहान की कान की बालियाँ भी छीन ली औऱ वहाँ से फरार हो गए।

हमले में घायल जहान अपने शौहर के साथ अस्पताल में इलाज के लिए गई थी। उस दौरान उसके बच्चे (बेटा-बेटी) घर पर ही थे। आरोपित फिर से वापस लौटे और उनके घर में घुस आए और बच्चों से कहा कि ‘तेरे अम्मी-अब्बू को सबक सिखा दिया’ अब ‘तेरी बारी’ है। आरोपितों ने बच्चों को भी जमकर पीटा। इसमें बच्ची बुरी तरह से घायल हो गई। परवीन का आरोप है कि जब वो इस मामले में शिकायत करने के लिए पुलिस स्टेशन जा रही थीं, तो भी पड़ोसियों ने उन्हें रोकने की कोशिश की थी।

हालाँकि, किसी तरह से थाने जाकर परवीन ने शिकायत दर्ज कराई। एसएसआई सतीश कापड़ी के मुताबिक, यूनुस, उसकी बीवी रेशमा, इरफान, शकील और उसकी बीवी बेबी समेत एक अज्ञात के खिलाफ दंगा और मारपीट का केस दर्ज किया गया है।

इससे पहले भी हुई हैं ऐसी घटनाएँ

ये कोई पहली बार नहीं है जब बीजेपी का समर्थन करने पर किसी मुस्लिम को टार्गेट किया गया हो। इससे पहले यूपी विधानसभा चुनाव के दौरान मार्च 2022 में उजमा नाम की एक मुस्लिम महिला ने बीजेपी को वोट कर दिया था, जिसके बाद उसके ससुरालियों ने उसे घर से बाहर निकाल दिया था। उसका निकाह जनवरी 2021 में ही तस्लीम अंसारी के साथ हुआ था। उजमा एजाज नगर घोटिया कॉलोनी निवासी ताहिर अंसारी की बेटी है। पीड़िता का कहना था कि बीजेपी को वोट देने से उसके चाचा तैयब काफी नाराज थे। अब उसका शौहर उसे तीन तलाक की धमकी दे रहा है।

इसी तरह से हाल ही में बीजेपी का समर्थन करने पर कुशीनगर में बाबर अली की उसके ही पड़ोसियों ने बेरहमी से हत्या कर दी थी।

‘हमले से ठीक पहले मुस्लिमों ने बंद कर दी थी दुकानें’: करौली में जिन हिंदुओं का सब कुछ जलकर राख, वे बोले- हिंसा सोची-समझी साजिश

राजस्थान के करौली में हिंसा (Rajasthan Karauli Violence) के बाद से स्थानीय हिंदू दहशत में हैं। वे अब मुस्लिम बहुल इलाके में नहीं रहना चाहते हैं, क्योंकि उन्हें अपनी जान का डर सता रहा है। हिंसा में अपनी तीन दुकान खोने वाले चंद्रशेखर गर्ग का कहना है कि फायर ब्रिगेड ने उनकी कॉल का जवाब तक नहीं दिया, जबकि मुस्लिमों की मदद के लिए तीन से चार टीमें तैनात की थी।

रिपब्लिक भारत से बातचीत में उन्होंने बताया कि मुस्लिमों की सभी दुकानें सुरक्षित हैं। भीड़ ने जानबूझकर हिंदुओं की दुकानों को निशाना बनाया और आग लगा दी। गर्ग ने आरोप लगाया है कि मुस्लिम भीड़ काफी पहले से हिंदुओं पर हमले की योजना बना रही थी, जिसकी हम लोगों को भनक भी नहीं लगी। हम सबकी दुकानें साथ में थीं। हम उनके साथ प्यार मोहब्बत से रहते थे।

उनका कहना है कि वह मुस्लिम बहुल इलाके में कब तक खौफजदा होकर रह सकते हैं। यहाँ हर पल जान का खतरा रहता है। आगे भी इसी तरह की हिंसा होने का डर सता रहा है। इसलिए उन्होंने परिवार के साथ हटवाड़ा बाजार क्षेत्र से पलायन करने का फैसला किया है। गर्ग ने कहा, “हिंदू करौली ​हिंसा के बाद से यह जगह छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं। हमें जबरन इस तरह की हिंसा करके पलायन के लिए विवश किया जा रहा है। हम बेहद डरे हुए और खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।”

‘हम पर और हमले होंगे’

60 वर्षीय बुजुर्ग रमेश भी अपने पड़ोसी गर्ग की बातों पर सहमति जताते हुए बताते हैं कि उनकी दो दुकानें हैं। एक प्रोविजन स्टोर और एक दूध वेंडिंग बूथ। मुस्लिम भीड़ ने इन्हें निशाना बनाया था। उन्होंने कहा, “मेरी दुकानें और घर सभी को भीड़ ने जला दिया। मैं पिछले 35 साल से इन दुकानों के जरिए अपना और अपने परिवार का पेट पाल रहा था। हमारा सब कुछ जलकर खाक हो गया।” वह 2 अप्रैल के बाद से सदमे में हैं। हटवाड़ा बाजार निवासी रमेश ने यह भी कहा कि मुस्लिम भीड़ ने शनिवार दोपहर को रैली भी निकाली थी। इसके बाद शाम को वे सभी एक जगह पर इकट्ठे हुए, हिंदुओं की दुकानों को लूटा और फिर उसमें आग लगा दी।

60 साल के बुजुर्ग ने रिपब्लिक भारत से बात करते हुए कहा, “उन्होंने हमें पीटा, हमें हमारी ही दुकान से बाहर निकाल दिया। मेरी डेयरी की दुकान को लूट लिया। हमारे स्कूटर और बाइक को तोड़ दिया। यह सोची-समझी साजिश के तहत पूर्व नियोजित हमला था। हमारे लोगों को अपनी जान बचाने के लिए भागना पड़ा। घरों के अंदर छिपकर हमने अपनी जान बचाई। यही नहीं आधे घंटे बाद फिर मुस्लिम भीड़ ने हम पर हमला किया। एकाएक किए गए हमले से हम दहशत में हैं।”

उन्होंने बताया, “अब इस इलाके में कोई भी दुकान नहीं खोलना चाहता है। यह हमारे लिए मुश्किल घड़ी है।” दिलचस्प बात यह है कि वहाँ मौजूद हिंदुओं और अन्य लोगों ने भी इसकी पुष्टि की है कि वे हमलावरों को अच्छी तरह से जानते थे, क्योंकि वो लोग कई सालों से उनके पड़ोसी थे। रमेश ने कहा, “हम भाइयों की तरह रहते थे, लेकिन उन्होंने हम पर हमला किया। मुस्लिमों ने हमलों से ठीक पहले अपनी दुकानें बंद कर दी थी।”

‘राजस्थान सरकार हमारी मदद नहीं करेगी’

हेमंत अग्रवाल की दुकान पर भी इसी तरह के हमले किए गए। अग्रवाल के अनुसार, “हमने हमेशा की तरह अपनी दुकानें खोली थीं, लेकिन उस दिन मुस्लिम भीड़ ने मेरे 20 लाख रुपए लूट लिए। हमने बहुत कुछ सहा है।” उन्होंने बताया, “मेरी इस इलाके एक बड़ी सी दुकान है। 2 अप्रैल को शाम के करीब 5 बजे भीड़ ने हम पर हमला किया। हमने दुकानें बंद करनी शुरू कर दी थीं, लेकिन भीड़ ने हम पर हमला कर दुकानों को लूट लिया। मुस्लिम भीड़ के सामने हम रोए, गिड़गिड़ाए और रहम की भीख माँगी, लेकिन उन्हें हमारे ऊपर जरा भी दया नहीं आई।”

हेमंत कहते हैं, “हम अब बहुत असहाय हैं। अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली सरकार किसी भी तरह से हमारी मदद नहीं कर रही है। हमें लूटने वाले लोग हमारे पड़ोसी थे, अगर सरकार कार्रवाई करना चाहती तो कब का कर लेती। लेकिन वे उनके खिलाफ ऐसा नहीं करना चाहते हैं।” वे बताते हैं, “हमारे पास खाने के लिए कुछ नहीं है, हम नहीं जानते कि अब क्या करना है। हम यहाँ नहीं रहना चाहते, क्योंकि हमें कभी भी जान से मार दिया जाएगा। इसलिए हमारे परिवार ने इस जगह को छोड़ने का फैसला किया है।”

करौली हिंसा

गौरतलब है कि करौली में हिंदू नव वर्ष के जुलूस पर 2 अप्रैल को हिंसा हुई थी। दुकानों में आगजनी की गई। इसमें पुष्पेंद्र नाम का एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया था। उसके शरीर पर चाकू से हमले के निशान थे। उपद्रवियों को काबू करते हुए पुलिस के 4 जवान भी घायल हुए थे। कुल 43 लोगों के घायल होने की खबर मीडिया में आई थी। इसके बाद मामले में जाँच शुरू हुई और पीएफआई का एक पत्र सामने आया, जिसने इस हिंसा के सुनियोजित होने की ओर इशारा किया। बाद में कॉन्ग्रेसी नेता मतबूल अहमद की भूमिका भी हिंसा में पाई गई।

राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र ने भी इस हिंसा को सुनियोजित बताया था। उन्होंने कहा था कि करौली हिंसा के दौरान जिस तरह से पथराव किया गया, उससे साबित होता है कि इसे सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया और इसे रोका जा सकता था।