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‘मुझे मजबूर किया गया’: BharatPe के विवादित फाउंडर अशनीर ग्रोवर ने अपनी ही कंपनी से दिया इस्तीफा, पत्नी भी हो चुकी हैं बर्खास्त

फिनटेक यूनिकॉर्न भारतपे (BharatPe) के सह-संस्थापक और प्रबंध निदेशक (MD) अशनीर ग्रोवर ने कंपनी के बोर्ड में अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। अशनीर का इस्तीफा ऐसे समय में आया है, जब अभी हाल ही में उनकी पत्नी माधुरी जैन ग्रोवर को भी आर्थिक गड़बड़ियों के आरोप में भारतपे ने कंपनी से बर्खास्त कर दिया था। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, माधुरी जैन ग्रोवर पर आरोप थे कि उन्होंने अपने पर्सनल ब्यूटी ट्रीटमेंट और विदेश यात्राओं का खर्चा फर्जी इनवॉइस के जरिए, कंपनी के खर्चे में जोड़ा था।

बिजिनेस स्टैण्डर्ड के अनुसार, अशनीर ने कंपनी से त्यागपत्र देते हुए अपने रिजाइन लेटर में लिखा है, “मैं इस बात से बेहद दुखी हूँ, जिस कंपनी का मैं संस्थापक हूँ आज मुझे उस कंपनी को अलविदा कहने के लिए मजबूर किया जा रहा है। मैं सिर ऊँचा करके कहता हूँ कि आज यह कंपनी फिनटेक की दुनिया में सर्वश्रेष्ठ कंपनी में से एक है। 2022 की शुरुआत से ही कुछ लोगों द्वारा मुझे और मेरे परिवार पर निराधार आरोप लगाए जा रहे हैं। जो न केवल मुझे और मेरी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाने के लिए तैयार हैं, बल्कि कंपनी की प्रतिष्ठा को भी नुकसान पहुँचाते हैं।”

ग्रोवर ने यह भी कहा है, “भारत में आंत्रप्रेन्योरिशप का चेहरा बनने के बाद वो अब अकेली लंबी लड़ाई लड़ रहे हैं, जिसमें उनके खिलाफ उनके ही निवेशक और मैनेजमेंट खड़ा है। ‘दुर्भाग्य से, इस लड़ाई में मैनेजमेंट ने वो खो दिया है, जो दाँव पर लगा हुआ है- भारतपे।”

SIAC ने समीक्षा रोकने से किया इंकार

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अशनीर ग्रोवर को हाल ही में बड़ा झटका लगा था। ग्रोवर को सिंगापुर अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता केंद्र (एसआईएसी) से कोई राहत नहीं मिली है। इस याचिका पर पहली सुनवाई 20 फरवरी, 2022 को हुई थी। इस मामले में मध्यस्थता केंद्र ने कहा है कि भारतपे में शीर्ष प्रबंधन की अनुशंसा पर की जा रही कामकाजी समीक्षा को रोकने का कोई आधार नहीं है। ग्रोवर ने एसआईएसी (SIAC) में दायर अपनी अर्जी में कंपनी के कामकाज के लिए जारी समीक्षा रोकने की माँग करते हुए कहा था कि उनके खिलाफ की जा रही यह जाँच गैरकानूनी है। ऐसे में माना जा रहा है कि अशनीर इस मामले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दे सकते हैं। बता दें कि कंपनी के सीईओ सुहैल समीर के नेतृत्व में बोर्ड ने फोरेंसिक ऑडिट के लिए अल्वारेज एवं मार्सल और पीडब्ल्यूसी को नियुक्त किया है।

कंपनी छोड़ने के बदले 4 हजार करोड़ रुपए की माँग

अशनीर ग्रोवर के बारे में मालूम हो कि वह बहुचर्चित शो शार्क टैंक के जजों में से एक थे। वहीं उनके ऊपर पिछले दिनों धोखा, दुर्व्यवहार और कॉरपोरेट गवर्नेंस का आरोप लगा था। कंपनी छोड़ने की बात पर उन्होंने मीडिया को बताया था कि कंपनी में उनकी हिस्सेदारी 9.5 प्रतिशत है और अगर कोई निवेशक 4,000 करोड़ रुपए देकर उनकी हिस्सेदारी खरीदता है तो वह कंपनी छोड़ने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि यह उनका उचित बाजार मूल्य है। उन्होंने खुद पर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था। ग्रोवर ने कहा था, मैंने क्या किया है कि इस्तीफा दूँ? यह सुनवाई से पहले सजा देने की तरह है।”

वहीं इस्तीफा देने के बाद भी फिनटेक स्टार्टअप में शीर्ष निवेशक अपनी हिस्सेदारी बेचने और कंपनी छोड़ने के लिए उनकी तरफ से माँगे गए 4,000 करोड़ रुपए देने के लिए कोई संकेत नहीं दिया है। हालाँकि, मीडिया रिपोर्ट में अब यह भी दावा किया जा रहा है कि अशनीर ग्रोवर ने फिनटेक स्टार्टअप में अपनी हिस्सेदारी बेचने के लिए दूसरे इनवेस्टर्स से बातचीत शुरू कर दी है। कंपनी में ग्रोवर की 9.5 फीसदी हिस्सेदारी यानी 1,915 करोड़ रुपए थी। जब अगस्त 2021 में फंडिंग दौरान इसका वैल्यूएशन 2.85 अरब डॉलर किया गया था।

पत्नी माधुरी की कंपनी से छुट्टी

जानकारी के मुताबिक माधुरी को कंपनी में 2018 से वित्तीय मामलों का इंचार्ज बना गया था। ऐसे में जब कंपनी ऑडिट हुआ तो वित्तीय हेरफेर में उनका नाम आया। रिस्क एडवाइजरी फर्म Alvarez and Marsal की जाँच में भी उनका उल्लेख था। इसी फर्म ने जनवरी में कंपनी का ऑडिट किया था। इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, भारत पे ने माधुरी जैन पर त्वरित कार्रवाई करते हुए उन्हें कंपनी से निकाल दिया था।

बैंक कर्मी से बदसलूकी

बता दें कि अशनीर ग्रोवर इस साल की शुरुआत से ही चर्चा में बने हुए हैं। 5 जनवरी, 2022 को एक अनजान व्यक्ति ने एक ऑडियो क्लिप साउंड क्लाउड प्लेटफॉर्म पर डाला था। इसमें बैंक के स्टाफ और 2 ग्राहकों के बीच की बातचीत थी। जिसमें ग्राहक की तरफ से बैंक स्टाफ को गालियों के साथ धमकी भी दी जा रही थी। इसे लेकर दावे किए गए कि ये आवाज अशनीर और उनकी पत्नी माधुरी की है। जबकि बैंक का स्टाफ कोटक महिंद्रा का है। अशनीर की ओर से इस ऑडियो को फर्जी कहा गया मगर 9 जनवरी को कोटक महिंद्रा ने अपने स्टाफ से गाली-गलौज करने वाले ग्राहकों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की घोषणा की थी।

इसके अलावा अशनीर शार्क टैंक इंडिया में जज के तौर पर दिखे थे। इस शो में उन्हें दर्शकों ने एक घमंडी जज के तौर पर देखा। नतीजा ये हुआ कि शो खत्म हो गया लेकिन शार्क टैंक के कारण उन्हें गाली पड़नी बंद नहीं हुई। उन्होंने हाल में बताया कि अब भी उन्हें यूजर्स भला बुरा बोलते हैं और उन्हें वो कमेंट देर रात भी डिलीट करने पड़ जाते हैं।

तिरंगा उठा भारत माता की जय बोल रहे पाकिस्तानी, यूक्रेन में ऐसे बचा रहे अपनी जान – वायरल वीडियो में दावा

यूक्रेन में जो पाकिस्तानी छात्र-छात्राएँ पढ़ रहे हैं, उनको वापस अपने देश आने के लिए भारत के झंडे और ‘भारत माता की जय’ का सहारा लेना पड़ रहा है। चौंकिए मत। इस्लाम में बुत-परस्ती हराम है लेकिन जान बचाने के लिए कर पड़ रहा होगा शायद! वो इसलिए क्योंकि रूस की सेना ने आश्वासन दिया है कि भारतीयों को नुकसान नहीं पहुँचाया जाएगा। इसलिए जो भी छात्र-छात्राओं का झुंड तिरंगे झंडे को इस्तेमाल करेगा, वो बच जाएगा। एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें ये सब दावा किया गया है।

वायरल वीडियो में पाकिस्तानी समाचार एंकर को एक व्यक्ति कह रहा है कि उनके मुल्क के छात्रों को यूक्रेन से जिंदा बच कर आने के लिए भारतीय झंडे का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। यह व्यक्ति आरोप लगा रहा है कि इमरान खान की सरकार अपने छात्रों की सलामती के लिए कोई कदम ही नहीं उठा रही।

हिंदुस्तान स्पेशल नाम का एक यूट्यूब चैनल है। इस पर भी 27 फरवरी को एक वीडियो शेयर किया गया था। इसमें भी एक व्यक्ति ने खुलासा किया कि कैसे यूक्रेन में पाकिस्तानी छात्रों ने भारतीय झंडा उठाया और सुरक्षित दूसरे देश में घुसने के लिए ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाए।

आरोप लगाते व्यक्ति को कहते सुना जा सकता है कि पाकिस्तानी सरकार ने अपने छात्रों को अल्लाह के भरोसे छोड़ दिया है। जबकि भारतीय पीएम नरेंद्र मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बात की है, जिन्होंने आश्वासन दिया कि भारतीयों को सुरक्षित रूप से यूक्रेन से बाहर निकलने की हरसंभव मदद करेंगे। इसके अलावा, पीएम मोदी ने यूक्रेन की सीमा से लगे देशों के प्रमुखों से भी बात की। सभी से आश्वासन लिया कि भारतीयों को बिना किसी समस्या के प्रवेश की अनुमति दी जाएगी। इसी के बाद भारत सरकार ने यूक्रेन में फँसे भारतीय छात्रों को सुरक्षा के लिए अपने वाहनों पर राष्ट्रीय ध्वज लगाने की सलाह दी।

इन सब के बीच, पाकिस्तानी सरकार यूक्रेन में फँसे अपने छात्रों की सुरक्षा के लिए कुछ नहीं कर रही है। यूट्यूब चैनल हिंदुस्तान स्पेशल के अनुसार, इन पाकिस्तानी छात्रों के पास वाहनों को किराए पर लेने, भारतीय झंडे को वाहनों पर चिपकाने और भारतीय होने का नाटक करते हुए ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाने के अलावा और कोई विकल्प नहीं बचा था।

“हमारी एकमात्र गलती यह है कि हम पाकिस्तानी हैं।”

यूक्रेन में फँसे एक पाकिस्तानी छात्र ने यह कहा। यूट्यूब चैनल हिंदुस्तान स्पेशल ने यूक्रेन में फँसे पाकिस्तानी छात्रों को भी दिखाया। इन छात्रों को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि वे बिना भोजन-पानी के वहाँ फँस गए हैं और पाकिस्तानी दूतावास से कोई भी उनके बचाव में नहीं आ रहा। एक छात्र पाकिस्तानी सरकार की आलोचना करते हुए कहता है, “दूतावास झूठ बोल रहा है कि उन्होंने सभी छात्रों को निकाल लिया है। सभी देश अपने लोगों को निकाल रहे हैं, लेकिन पाकिस्तान को इसकी परवाह नहीं है।”

“भारतीय ध्वज को देखकर वहाँ के सैनिकों ने जो सम्मान दिया, वह हमारे लिए गर्व की बात है। हमें बिना किसी जाँच के जाने दिया जा रहा था। यह इशारा करता है कि भारत ने दुनिया भर में एक नाम बनाया है। मुझे भारतीय होने पर गर्व है।”

ए टू जेड नाम का एक और यूट्यूब चैनल है। 27 फरवरी को ही इस चैनल पर एक दूसरा वीडियो शेयर किया गया। इसमें एक भारतीय छात्र को यह कहते सुना जा सकता है कि कैसे उन्हें तीन देशों के माध्यम से सुरक्षित मार्ग प्रदान किया गया। वो भी सिर्फ इसलिए क्योंकि उन्होंने भारतीय ध्वज चिपका रखा था। भारतीय छात्र के विपरीत एक पाकिस्तानी छात्रा ने क्या कहा, ये भी सुनिए उसी वीडियो में – “भारतीय हम से बेहतर हैं, हम पाकिस्तानी होने की कीमत चुका रहे हैं।”

‘ऑपरेशन गंगा’ – यूक्रेन से ऐसे लाए जा रहे भारतीय छात्र-छात्राएँ

यूक्रेन में फँसे भारतीयों को मिशन गंगा कार्यक्रम के तहत भारत सरकार द्वारा निकाला जा रहा है। यूक्रेन में फँसे भारतीयों की संख्या 16,000 से 20,000 के बीच बताई गई है। अब तक 907 भारतीयों को निकाला जा चुका है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, ज्योतिरादित्य सिंधिया, किरण रिजिजू और जनरल (रिटायर्ड) वीके सिंह को भारतीयों की मदद के लिए यूक्रेन के पड़ोसी देश भेजने का निर्णय लिया है। यह कदम इसलिए उठाया गया ताकि यूक्रेन के पड़ोसी देशों तक पहुँचने और वहाँ के बॉर्डर क्रॉस करने में भारतीयों को कोई परेशानी का सामना न करना पड़े।

‘प्राइवेट पार्ट सहलाते हुए कहा – मुझे किस करो’: गुरुद्वारा के पूर्व ग्रंथी ने किया नाबालिग लड़कियों का यौन शोषण: पकड़ाने पर कहा – ‘हॉर्नी था’

ऑस्ट्रेलिया के ग्रेटर सिडनी स्थिति एक गुरुद्वारा के पूर्व ग्रंथी पर दो नाबालिग लड़कियों से यौन शोषण का आरोप है। इनमें से एक लड़की की उम्र 10 से 16 वर्ष की उम्र के बीच है। इसके अलावा एक अन्य लड़की का पीछा करने और उसे डराने का मामला उस पर दर्ज किया गया है। वो उसे नुकसान पहुँचाने के लिए जानबूझ कर ऐसा कर रहा था। आरोपित राजिंदर सिंह को दिसंबर 2021 में गिरफ्तार किया गया था। वो नाबालिग लड़कियों से खुद को किस करवाने की कोशिश कर रहा था।

राजिंदर सिंह पर एक 11 वर्षीय नाबालिग लड़की के बाथरूम में घुस कर उसे गलत तरीके से छूने के आरोप भी हैं। पेनरिथ की स्थानीय अदालत में उसने खुद का दोष कबूल किया है। 26 वर्षीय राजिंदर सिंह पर आरोप है कि उसने न सिर्फ 11 साल की लड़की को गलत तरीके से छुआ, बल्कि दो अन्य नाबालिग लड़कियों के सामने यौन हरकतें (सेक्स एक्ट) की। ये पश्चिमी सिडनी की घटना है। 13 और 14 साल की दो लड़कियों ने बताया कि घटना के समय वो टेंश रिजर्व नामक स्थान में थीं।

तभी जेमिसनटाउन में स्थित उस जगह पर राजिंदर सिंह आ धमका और उसने उन दोनों का यौन शोषण किया। अदालत के दस्तावेजों के अनुसार, राजिंदर सिंह ने अपने होठों की तरफ इशारा करते हुए ‘किस-किस’ कहा। उसने कई बार ऐसा किया। साथ ही वो पेट और जाँघों के बीच स्थित अपने प्राइवेट पार्ट्स को बार-बार रगड़ रहा था। जहाँ लड़कियाँ बैठी हुई थीं, वहाँ उसने अपने पाँव भी रख दिए थे। पुलिस थाने में पूछताछ के दौरान उसने ये जुर्म स्वीकार कर लिए।

राजिंदर सिंह ने पुलिस की पूछताछ में बताया कि उस समय वो ‘हॉर्नी’ था और उन लड़कियों की तरफ आकर्षित हो गया था। उसका कहना है कि वो बस किस के लिए उन लड़कियों की सहमति ले रहा था। सिख गुरुद्वारा पहले ही उसे नौकरी से निकाल चुका है। गुरुद्वारा ने आधिकारिक बयान जारी कर के कहा, “हम राजिंदर सिंह की करतूतों से निराश हैं और इसे माफ़ नहीं किया जा सकता। सिख धर्म में ऐसी हरकतों की कोई जगह नहीं है और सिख समुदाय इसके लिए माफ़ी भी नहीं देता।”

गुरुद्वारा प्रबंधन ने कहा कि वो इस हरकत की कड़ी निंदा करता है और ये काफी शर्मनाक है। साथ ही आश्वासन दिया कि इस तरह की हरकतों को कभी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, चाहे वो समुदाय का कोई भी व्यक्ति हो। अब इस मामले में अप्रैल 2022 में अगली सुनवाई होगी।

कर्नाटक के जिस कॉलेज से उठी थी बुर्के की आग, वहाँ हिजाब वाली छात्राओं को परीक्षा देने की इजाजत नहीं

कर्नाटक के उडुपी स्थित प्री यूनिवर्सिटी कॉलेज ने हिजाब वाली तीन मुस्लिम छात्राओं को सोमवार (28 फरवरी 2022) को प्रैक्टिल परीक्षा में बैठने की इजाजत नहीं दी। हाई कोर्ट के अंतरिम निर्देशों को मानने से इनकार करते हुए ये छात्राएँ हिजाब पहनकर लिखित परीक्षा में बैठने की माँग पर अड़ी हुईं थी। उडुपी के इसी कॉलेज से बुर्के का विवाद (Karnataka Hijab Row) शुरू हुआ था।

रिपोर्टों के अनुसार तीनों छात्राओं ने कॉलेज प्रिंसिपल रुद्र गौड़ से परीक्षा स्थगित करने को भी कहा था। उन्होंने आरोप लगाया है कि गौड़ा ने उन्हें पुलिस में शिकायत करने की धमकी दी। छात्रा और हिजाब मामले की याचिकाकर्ताओं में से एक अल्मास एएच ने कहा, “हमने आज (28 फरवरी) प्रिंसिपल से एक बार फिर परीक्षा में बैठने की अनुमति देने का अनुरोध किया।” उसने दावा किया कि दो महीने से उनकी कक्षा नहीं चल रही थी। बावजूद उन्होंने यूट्यूब वीडियो देख तैयारी की थी और उन्हें उम्मीद थी परीक्षा में बैठने की इजाजत मिलेगी। लेकिन छात्रा के अनुसार प्रिंसिपल ने इससे इनकार करते हुए कहा कि यदि वह वहाँ पाँच मिनट और रुकीं तो वे पुलिस से शिकायत करेंगे। उसने 28 फरवरी को किए एक ट्वीट में कहा कि उम्मीदों के विपरीत उसे प्रयोगशाला से बाहर जाने को मजबूर किया। हिजाब के खिलाफ नफरत की वजह से कॉलेज ने उसके सपनों को बिखेर दिया है।

उल्लेखनीय है कि अल्मास और दो अन्य मुस्लिम छात्रा हिजाब में परीक्षा देने पर अड़ी थीं और कॉलेज प्रशासन ने उनकी इस मॉंग को मानने से इनकार कर दिया। दे टेलीग्राफ इंडिया को कॉलेज प्रिंसिपल गौड़ा ने कहा कि जब उन्होंने छात्राओं से अदालत के निर्देश का पालन करने को कहा तो उन्होंने उनकी बात सुनने तक से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, “मैंने उनसे काफी देर बात की। बिना हिजाब के परीक्षा देने के लिए उन्हें समझाने का प्रयास किया। मैंने उन्हें निर्देशों का पालन करने और सुबह 9:30 बजे के बाद भी परीक्षा देने को कहा। लेकिन उन्होंने मेरी कोई भी बात मानने से इनकार कर दिया।”

गौरतलब है कि 11 दिनों की सुनवाई के बाद बीते शुक्रवार को कर्नाटक हाई कोर्ट ने इस मामले में अपने फैसले को सुरक्षित रख लिया था। उससे पहले अदालत ने फैसला आने तक संस्थानों में ड्रेस कोड का पालन करने और मजहबी पोशाक पहनने पर जोर नहीं देने को कहा था।

नोट: भले ही इस विरोध-प्रदर्शन को ‘हिजाब’ के नाम पर किया जा रहा हो, लेकिन मुस्लिम छात्राओं को बुर्का में शैक्षणिक संस्थानों में घुसते हुए और प्रदर्शन करते हुए देखा जा सकता है। इससे साफ़ है कि ये सिर्फ गले और सिर को ढँकने वाले हिजाब नहीं, बल्कि पूरे शरीर में पहने जाने वाले बुर्का को लेकर है। हिजाब सिर ढँकने के लिए होता है, जबकि बुर्का सर से लेकर पाँव तक। कई इस्लामी मुल्कों में शरिया के हिसाब से बुर्का अनिवार्य है। कर्नाटक में चल रहे प्रदर्शन को मीडिया/एक्टिविस्ट्स भले इसे हिजाब से जोड़ें, लेकिन ये बुर्का के लिए हो रहा है।

‘औरंगजेब-अकबर महान, टीपू सुल्तान राष्ट्रवादी’: इस्लाम को लिबरल बताने वाले Vision IAS का ‘इस्लामी ज्ञान’, माता के जगराते से दिक्कत

इस्लामी प्रोपेगेंडा का प्रचार करने वाली Vision IAS की वीडियो क्लिप सामने आने के बाद कोचिंग सेंटर ने अपना खेद व्यक्त किया था और जस्टिफाई करने का प्रयास किया था कि उनकी फैकल्टी बच्चों को क्या पढ़ा रही थीं और उसका मतलब क्या था। अब इसी क्रम में धीरे-धीरे सोशल मीडिया पर इसी संस्थान के अन्य फैकल्टी सदस्यों की भी वीडियो वायरल है और लोग सवाल कर रहे हैं कि ये कोचिंग सेंटर चलाया जा रहा है या फिर मदरसा।

वायरल वीडियोज में कहीं अकबर औरंगजेब का महिमामंडन हैं तो कभी टीपू सुल्तान को असली राष्ट्रवादी हीरो बताया जा रहा है। हैरानी की बात ये है कि कोचिंग सेंटर में न सिर्फ इस्लाम का प्रचार हो रहा है बल्कि हिंदुत्व को बदनाम करने की कोशिश और काशी मंदिर पर हुए हमले को जस्टिफाई करने का काम भी धड़ल्ले से जारी है।

औरंगजेब और अकबर महाना शासक

कुछ उदाहरण देखिए- Vision IAS के एक ट्यूटर छात्रों को बता रहे हैं कि औरंगजेब को लेकर कहा जाता रहा कि उन्होंने काशी विश्वनाथ मंदिर पर हमला किया। लेकिन पढ़ने को ये भी मिलता है कि वो हमला इसलिए हुआ क्योंकि कुछ अच्छे पंडितों ने आकर औरंगजेब से शिकायत की थी कि उनके मंदिर में अवैध गतिविधियाँ चालू हैं। ट्यूटर के अनुसार, औरंगजेब सबसे ज्यादा नैतिकता वाला व्यक्ति था। इसी तरह एक वीडियो में ट्यूटर द्वारा बच्चों से स्पष्ट तौर पर कहा जा रहा है कि वो अपने एग्जाम में औरंगजेब की मजहबी नीतियों के बारे में न लिखें। यही ट्यूटर बच्चों को समझाता है कि मुगल शासन काल में अकबर महान शासक थे इसलिए मुगल काल मजबूत था।

राष्ट्रवादी बनाएँ टीपू सुल्तान को अपना हीरो

एक वीडियो में ट्यूटर को मैसूर टॉपिक पढ़ाते सुना जा सकता है। ट्यूटर के अनुसार अगर इस देश में कोई सबसे बड़ा राष्ट्रभक्त था तो वो टीपू सुल्तान था। उनके मुताबिक मैसूर ही पहले वो देश का वो भाग था जिसने ब्रिटिश सत्ता का विरोध किया। उनके मुताबिक अगर किसी राज्य का किसी को फैन होना है तो मैसूर ही है। मराठा नंबर 2 पर आते हैं और वो भी नहीं आने चाहिए क्योंकि उन्होंने ब्रिटिशों से हाथ मिलाया। ट्यूटर के अनुसार, टीपू सुल्तान की मौत एक जंग में अपनी राजधानी को बचाते समय हुई। इसलिए अगर कोई सच में राष्ट्रवादी है तो उसका हीरो टीपू सुल्तान होना चाहिए।

माता के जगराते से चिढ़ करने वाले ट्यूटर

एक वीडियो में एक अन्य ट्यूटर ‘माता के जगराते’ के प्रति चिढ़ और घृणा व्यक्त करते देखा जा सकता है। इस वीडियो में पहले ट्यूटर हिंदू धर्म और उसके रिवाजों पर तंज कसते हैंं। फिर आर्ट ऑफ लिविंग को यमुना प्रदूषित करने का जिम्मेदार बताते हैं, लेकिन जैसे ही बात अजान और नमाज पर आती है वो फौरन सोनू निगम द्वारा की गई शिकायत पर नसीहत देते हैं कि अगर उन्हें इतनी दिक्कत है तो फिर वो अपने घर की दीवारों पर साउंड प्रूफिंग करवा लें।

हिजाब के समर्थन में वामपंथी टीचर

बता दें कि इससे पहले सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले कोचिंग सेंटर Vision IAS की तथाकथित वामपंथी टीचर स्मृति शाह के कुछ अन्य वीडियो सामने आए थे जहाँ किसी में वह शेख अब्दुल्ला को सबसे ज़्यादा लिबरल और सोशलिस्ट बताते नहीं थक रहीं हैं। वहीं वह दूसरे तरह से कश्मीरी पंडितों के पलायन और उन पर शोषण को भी जायज ठहरा रही थी। एक वीडियो में तो वह खुलकर हिजाब और बुर्का के समर्थन में ज्ञान देते हुए इसे सोशल प्राइड बता डाला। इस वीडियो में वह भगवा शाल या जय श्री राम कहने वालों को ही परोक्ष रूप से घेरतीं नजर आईं थी।

9, 10 और 13 साल की 3 बेटियाँ… बाप ने ही गोली मारकर हत्या कर दी, वह भी चर्च में

अमेरिका के कैलिफोर्निया स्थित सैक्रेमेंटो चर्च में गोलीबारी में 5 लोगों की मौत हो गई। इनमें तीन बच्चे हैं। इनकी उम्र 9, 10 और 13 साल बताई गई है। रिपोर्टों के अनुसार मारे गए तीनों बच्चे गोलीबारी करने वाले शख्स की ही बेटियाँ थी। फायरिंग के बाद इस व्यक्ति ने खुद को भी गोली मार ली। साथ ही इस घटना में एक अन्य व्यक्ति की भी मौत हो गई।

मृतकों और हमलावर की पहचान अभी सार्वजानिक नहीं की गई है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि उसने इस घटना को क्यों अंजाम दिया। रिपोर्टों के अनुसार सोमवार शाम (28 फरवरी 2022) सामान्य दिनों की तरह ही चर्च में लोग प्रार्थना के लिए जुटे थे। इसी दौरान गोलियों की आवाज सुनी गई और चीख-पुकार मच गई। सैक्रेमेंटो काउंटी शेरिफ कार्यालय के प्रवक्ता सार्जेंट रोड ग्रैसमैन ने बताया कि सभी पाँचों लोगों की मौत मौके पर ही हो गई थी। सीढ़ियाँ चढ़ते वक्त चर्च के एक कर्मचारी ने गोलियों की आवाज सुनने के बाद इसकी सूचना पुलिस को दी थी। ग्रेसमैन ने इसे ‘घरेलू हिंसा की घटना’ बताया है। अधिकारियों के अनुसार बंदूकधारी अपनी पत्नी और बच्चों से अलग रह रहा था।

उल्लेखनीय है कि हाल के वर्षों में अमेरिका में गोलीबारी की कई बड़ी घटनाएँ हो चुकी हैं। इसके कारण वहाँ का गन कल्चर विवादों में भी है। करीब 33 करोड़ की आबादी वाले अमेरिका में आम लोगों के पास 39 करोड़ हथियार हैं। बीते साल कैपिटल हिल की हिंसा के बाद हथियारों की खरीद में नब्बे फीसदी तक का उछाल देखा गया था।

स्थापना के 99 सालों बाद हाईटेक हुआ गोरखपुर का गीताप्रेस: जर्मनी-जापान की मशीनें, रोज छप रहीं 50000 पुस्तकें

हिन्दुओं के धर्मग्रंथों को छापने वाली गीता प्रेस का 99 साल बाद कायाकल्प होने वाला है। अब गोरखपुर में गीताप्रेस में पुस्तकों का प्रकाशन हाईटेक तकनीक से होगा। इसके लिए अब जापान और जर्मनी की मशीनों को प्रयोग में लाया जा रहा है। इन मशीनों से 16 भाषाओं 1800 से भी अधिक पुस्तकों की 50,000 कॉपियों को प्रतिदिन प्रकाशित किया जा रहा है। ANI ने इसकी विस्तार से रिपोर्ट 1 मार्च (मंगलवार) प्रकाशित की है।

गीता प्रेस की पुस्तकें अधिकतर धार्मिक स्वभाव के हिन्दुओं के पूजा घरों में पाई जाती हैं। इन पुस्तकों में भगवत गीता, पुराण, चालीसा, रामायण और महाभारत जैसे ग्रंथ प्रमुखहैं। आज़ादी के संघर्ष के दौरान गीता प्रेस की स्थापना साल 1923 में हुई थी। इसको जय दयाल गोयनका ने स्थापित किया था। ANI को इन तमाम तथ्यों और नए बदलाव की जानकारी गीता प्रेस ट्रस्ट में ट्रस्टी देवी दयाल अग्रवाल ने दी है।

देवी दयाल के अनुसार, “अभी हम 15 भाषाओं में लगभग 1800 पुस्तकें रोज छाप रहे है। किताबों की माँग इस उत्पादन से काफी अधिक है। हम लोगों की डिमांड पूरी करने के सभी कदम उठा रहे हैं। हमारा ध्यान लोगों को कम दामों में अच्छी किताब दिलाने पर है। ऐसा करने का हमारा पहले का इतिहास रहा है। हमने कभी फायदे के लिए काम नहीं किया। लोग इस बात से आश्चर्य भी करते हैं कि हम कम दाम में ऐसा कैसे कर पाते हैं।”

नई तकनिकी की मशीनें, चित्र साभार – ANI

देवी दयाल ने आगे कहा, “हम पुस्तकों के दाम काबू में इसलिए रख पाए क्योकि हम कच्चा माल इंडस्ट्री से नहीं खरीदते थे। गीता प्रेस को कोई डोनेशन नहीं मिलता। हम इसे अपने दम पर चला रहे हैं। हम किताबों को सरल भाषा में इसलिए अनुवाद करते हैं जिस से वो लोगों को आसानी से समझ में आ जाए। साथ ही हम प्रिंट की क्वालिटी भी अच्छी रखते हैं जिस से लोगों को पढ़ने में आसानी हो। आज गीता प्रेस की पहुँच हर घर तक है। तब तक हम 71.77 करोड़ कॉपियाँ बेच चुके हैं। इसमें 1 लाख श्रीमद भगवत गीता, 1139 लाख रामचरित मानस, 261 लाख पुराण उपनिषद, महिलाओं और बच्चों के लिए उपयोगी पुस्तकें 261 लाख, 1740 भक्ति चैत्र और भजन माला और अन्य पुस्तकें 1373 लाख शामिल हैं।”

गीता प्रेस वर्तमान में 1830 किताबें प्रकाशित किया है। इनमें 765 किताबें संस्कृत और हिंदी में हैं। साथ ही अन्य पुस्तकें मलयालम, तेलगु, गुजरती, तमिल, उड़िया, मराठी, उर्दू, असमिया, बंगाली, पंजाबी और अंग्रजी में हैं। गीता प्रेस ने 16 वीं सदी में अवधी भाषा में लिखी गई रामचरित मानस को नेपाली अनुवाद के साथ भी प्रकाशित किया है। 29 अप्रैल 1923 में जय दलाय गोयनका द्वारा स्थापित इस संस्थान का उद्देश्य सनातन धर्म का प्रचार करना था।

गीता प्रेस उस समय स्थापित हुआ था जब भारत में धर्म परिवर्तन अपने चरम पर था। इसकी स्थापना के बाद इसके विस्तार में प्रसाद पोद्दार का बड़ा योगदान रहा। स्थापना के पहले 4 वर्षों तक गीता प्रेस ने प्राचीन धर्मग्रंथ ही छापे थे। इसके प्रकाशन का दायरा साल 1927 में तब बढ़ा जब पोद्दार ने कल्याण नाम की एक मैगज़ीन प्रकाशित की। इस कदम ने गीता प्रेस को एक नई पहचान दी। साल 2023 में गीता प्रेस की स्थापना के 100 साल पूरे होने जा रहे हैं। अभी गीताप्रेस में लगभग 400 कर्मचारी का कर रहे हैं। इनके काम करने के तरीके से हर कोई प्रभावित हैं। वो बिना शोर मचाये शांति से अपना काम करते हैं।

गीता प्रेस की अति प्रसिद्ध पुस्तक कल्याण के हिंदी वर्जन को लगभग 245000 लोगों ने सब्स्क्राइब कर रखा है। इसी के इंग्लिश वर्जन कल्याण – कल्पतरु को लगभ्याग 100000 लोगों ने सब्स्क्राइब किया है। गीता प्रेस के कार्यालय को भी धार्मिक रूप से बनाया गया है। यहाँ प्रवेश द्वारा पर एलोरा की गुफाओं के चित्रों के साथ श्रीकृष्ण और अर्जुन की तस्वीर दिखाई देती है। यहाँ दरवाजों पर चारों धाम के चित्र बने हुए हैं। गीता प्रेस का कार्यालय कुल 32 एकड़ में फैला हुआ है। इसके कार्यालय का उद्घाटन 29 अप्रैल 1955 को भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद ने किया था। गीता प्रेस में कुल 4 विभाग हैं। इसमें प्री प्रेस, प्रिंटिंग, बाइंडिंग और डिस्ट्रीब्यूशन शामिल हैं। दरवाजे पर ‘सत्य बोलो और धर्म का पालन करो’ लिखा हुआ है।

‘हर हाल में यूक्रेन की राजधानी तत्काल छोड़ दें’: भारतीय छात्रों को एम्बेसी की सलाह, भारतीयों को निकालने में वायुसेना करेगी मदद

भारत ने आज (1 मार्च, 2022) अपने सभी नागरिकों से यूक्रेन की राजधानी कीव को तत्काल छोड़ने की सलाह दी है। यूक्रेन के भारतीय दूतावास ने एडवाइजरी जारी कर कहा है, “छात्रों सहित सभी भारतीय नागरिकों को आज तत्काल कीव छोड़ने की सलाह दी जाती है। सभी भारतीय आज ही यूक्रेन की राजधानी कीव को हर हाल में छोड़ दें। वे कीव से निकलने के लिए ट्रेन, बस या किसी भी चीज का सहारा लें।”

वहीं यूक्रेन में फँसे भारतीय छात्रों को निकालने के लिए मोदी सरकार ने अब भारतीय वायुसेना को भी मिशन ‘गंगा’ (Mission Ganga) में शामिल होने को कहा है। यह खबर ANI ने सूत्रों के हवाले से दी है। ANI को सूत्रों ने बताया कि वायु सेना के हवाई जहाजों के जुड़ने से भारतीयों के लौटने की प्रक्रिया गति पकड़ेगी, और उनकी संख्या में भी वृद्धि होगी। साथ ही, भारत से भेजी जा रही राहत सामग्री भी और तेजी से पहुँचेगी। इस अभियान के तहत भारतीय वायु सेना के कई C-17 विमान आज ऑपरेशन गंगा के तहत उड़ान शुरू कर सकते हैं।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, रूस ने यूक्रेन पर बड़ा हमला शुरू कर दिया है और उसके कई शहरों में बमबारी तेज कर दी है। इसी खतरे को देखते हुए आज ही यूक्रेन से भारतीय छात्रों को निकालने के लिए मोदी सरकार के ऑपरेशन गंगा के तहत भारतीय वायुसेना भी एक्टिव हो चुकी है। इससे पहले भारत ने सोमवार (28 फरवरी, 2022) को चार केंद्रीय मंत्रियों को यूक्रेन के पड़ोसी देशों में भेजने का फैसला किया था ताकि छात्रों की मदद की जा सके और उन्हें यूक्रेन से सुरक्षित निकाला जा सके। इसके तहत ही केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी जल्द ही हंगरी के बुडापेस्ट पहुँचने वाले हैं।

बता दें कि केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी, ज्योतिरादित्य सिंधिया, किरेन रिजिजू और वीके सिंह इस अभियान में समन्वय करने और छात्रों की मदद के लिए यूक्रेन के पड़ोसी पहुँच गए हैं। सिंधिया भारतीयों को यूक्रेन के निकालने के अभियान के लिए समन्वय का काम रोमानिया और मोल्दोवा से संभालेंगे, जबकि रिजिजू स्लोवाकिया गए हैं। पुरी हंगरी गए हैं और जनरल (रि) वीके सिंह भारतीयों को निकालने का प्रबंध करने के लिए पोलैंड पहुँचे हैं।

वहीं संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि टीएस तिरुमूर्ति ने भी सोमवार (28 फरवरी, 2022) को यूक्रेन पर संयुक्त राष्ट्र महासभा के विशेष इमरजेंसी सत्र में बयान दिया था कि भारत सरकार यूक्रेन में फँसे भारतीय नागरिकों को तत्काल निकालने के प्रयास करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।

उन्होंने कहा है कि भारत यूक्रेन में बिगड़ती स्थिति पर काफी चिंतित है। भारत ने हिंसा की तत्काल समाप्ति और लड़ाई को समाप्त करने के अपने आह्वान को दोहराया और कहा कि सभी मतभेदों को केवल ईमानदारीपूर्वक और निरंतर बातचीत के माध्यम से ही सुलझाया जा सकता है। तिरुमूर्ति ने कहा, यह देखते हुए कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूसी संघ और यूक्रेन के नेतृत्व के साथ अपनी हालिया बातचीत में इसकी जोरदार वकालत की है।

तिरुमूर्ति ने कहा, “भारत इस बात से बहुत चिंतित है कि यूक्रेन में स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। हम हिंसा को तत्काल समाप्त करने और लड़ाई समाप्त करने के अपने आह्वान को दोहराते हैं। मेरी सरकार का दृढ़ विश्वास है कि कूटनीति के रास्ते पर लौटने के अलावा और कोई चारा नहीं है।”

उन्होंने कहा, “यूक्रेन में तत्काल और दबाव वाली मानवीय स्थिति विकसित हो रही है। भारत उन भारतीय नागरिकों के तत्काल निकालने के प्रयास करने के लिए जो कुछ भी कर सकता है वह कर रहा है जो अभी भी यूक्रेन में फँसे हुए हैं। बड़ी संख्या में छात्रों सहित भारतीय नागरिकों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।”

तिरुमूर्ति ने अपने बयान में भारत की चिंता व्यक्त करते हुए यह भी कहा कि सीमा पार की जटिल और अनिश्चित स्थिति लोगों की निर्बाध और अनुमानित आवाजाही पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही है। इस महत्वपूर्ण मानवीय आवश्यकता के लिए तुरंत कदम उठाए जाने चाहिए। वहीं भारत ने यूक्रेन के सभी पड़ोसी देशों को धन्यवाद दिया जिन्होंने भारतीय नागरिकों के लिए अपनी सीमाएँ खोल दी हैं। साथ ही भारतीय नागरिकों को निकालने में जो सुविधाएँ दी हैं उनके लिए भारत ने धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा, हम अपने पड़ोसियों और विकासशील देशों के उन लोगों की मदद के लिए तैयार हैं जो यूक्रेन में फँसे हुए हैं और मदद माँग सकते हैं।

गौरतलब है कि रूस और यूक्रेन के बीच जारी जंग के बीच अभी भी वहाँ हजारो भारतीय छात्र यूक्रेन में फँसे हुए हैं। जिन्हें स्वदेश लाने के लिए ऑपेरशन गंगा जारी है। इसके तहत अब तक हजार से ज्यादा छात्र-छात्राओं समेत भारतीय नागरिकों को भारत लाया जा चुका है। वहीं बाकी बचे लोगों को लाने के लिए भी मोदी सरकार ने प्रयास तेज कर दिए हैं। ऑपरेशन गंगा के तहत भारत वापस लाए जाने से पहले भारतीय छात्रों को हंगरी, पोलैंड, रोमानिया, स्लोवाक गणराज्य – यूक्रेन के साथ सीमा साझा करने वाले सभी देशों में ले जाया जा रहा है।

‘हिन्दू चिह्न स्वस्तिक और नाजी निशान हकेनक्रेज (Hooked Cross) के अंतर को समझें’: कनाडा के सांसद ने प्रोपेगंडा की खोली पोल

कनाडा के सांसद चंद्र आर्य ने वहाँ के पार्लियामेंट में आवाज़ उठाते हुए अपील की है कि नाजियों के निशान ‘हकेनक्रेज’ की तुलना हिन्दू ‘स्वस्तिक’ से नहीं किया जाए। सोमवार (28 फरवरी, 2022) को उन्होंने संसद में स्पीकर को सम्बोधित करते हुए कहा कि कई धर्मों/मजहबों को मानने वाले 10 लाख कनाडा के नागरिकों, खासकर हिन्दू-कनाडियन समुदाय की तरफ से वो ये बात रख रहे हैं। उन्होंने खुद को भी एक हिन्दू-कनाडियन बताया। उन्होंने समझाया कि स्वस्तिक होता क्या है।

कनाडाई सांसद ने कहा, “मैं संसद के सभी सदस्यों से आग्रह करता हूँ कि वो हिन्दुओं के धार्मिक और पवित्र चिह्न स्वस्तिक और नाजियों के घृणा भरे निशान, जिसे जर्मनी में ‘Hakenkreuz (हकेनक्रेज)’ और अंग्रेजी में ‘Hooked Cross’ कहा जाता है – इन दोनों के बीच के अंतर को समझें। प्राचीन भारतीय भाषा संस्कृत में स्वस्तिक का अर्थ होता है – जो अच्छा सौभाग्य लेकर आए और कल्याण करे। ये एक प्राचीन और काफी पवित्र प्रतीक चिह्न है।”

उन्होंने संसद में कहा कि आज भी हिन्दू इसका प्रयोग करते हैं और हमारे हिन्दू मंदिरों, शुभ कार्यक्रमों (धार्मिक एवं सांस्कृतिक), घर में घुसने वाले दरवाजों एवं हमारे दैनिक जीवन में भी ‘स्वस्तिक’ चिह्न का उपयोग किया जाता है। उन्होंने कहा, “कृपया नाजियों के निशान को ‘स्वस्तिक’ कहना बंद कीजिए।” चंद्र आर्य ने स्पष्ट किया कि हम नाजी प्रतीक ‘हकेनक्रेज’/हुक्ड क्रॉस पर प्रतिबंध का स्वागत करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसे ‘स्वस्तिक’ बताने का अर्थ है हिन्दुओं के धार्मिक अधिकारों को छीनना।

उन्होंने कहा कि कनाडा में हिंदुओं कोअपने दैनिक जीवन में इसका उपयोग करने से बाध्य किया जाना गलत है। बता दें कि 59 वर्षीय द्रकांत ‘चंद्र’ आर्य ओंटारियो के नेपियन से सांसद (‘हाउस ऑफ़ कॉमन्स’ के मेंबर) हैं। उन्होंने 2015 और 2019 में वहाँ से चुनाव जीता। वो सत्ताधारी ‘लिबरल पार्टी ऑफ कनाडा’ के नेता हैं। प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो भी इसी पार्टी के हैं। चंद्र आर्य ‘स्टैंडिंग कमिटी ऑन इंटरनेशनल ट्रेड (CIIT)’ के सदस्य भी हैं। ओटावा के बेरहवन में उनका निवास स्थान है।

बता दें कि कनाडा में चल रहे ट्रकर्स प्रदर्शन के दौरान वहाँ के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो और ‘न्यू डेमोक्रेक पार्टी’ के नेता जगमीत सिंह ने प्रदर्शनकारियों पर ‘स्वस्तिक लहरा कर घृणा फैलाने’ के आरोप लगाए थे। ‘हिंदुपैक्ट’ नाम के संगठन ने इसका विरोध करते हुए कहा था कि हिन्दू, सिख और बौद्ध सहित कई समुदाय इसका उपयोग करते हैं और ये नाजी चिह्न से अलग है। कनाडा में हाल के दिनों में कई मंदिरों में भी तोड़फोड़ हुई है। ट्रकर्स प्रदर्शन को रोकने के लिए कनाडा सरकार ने कई कड़े कदम उठाए, जबकि भारत में ‘किसान आंदोलन’ का वहाँ के सत्ताधारी नेताओं ने समर्थन किया था।

जनवरी 2022 में YouTube चैनल ‘आज की तजा खबर (AKTK)’ ने एक डॉक्यूमेंट्री के जरिए ‘स्वस्तिक’ चिह्न को लेकर चले आ रहे प्रोपेगंडा की पोल खोली थी। बताया गया है कि हिटलर ने कैसे हिन्दुओं को एक ‘नीची नस्ल’ बताते हुए इसके स्वाधीनता आंदोलन का विरोध किया था। ऐसे में सवाल पूछा गया था कि क्या एक ‘नीची नस्ल’ के प्रतीक चिह्न को हिटलर जैसा दंभी कैसे अपना सकता है? ‘हकेनक्रेज’ एक ‘क्रॉस’ का ही एक प्रकार है, जो पूर्व से ही चर्चों में मिलता रहा है।

‘हमें ऐसा समाज नहीं चाहिए…’: बेंगलुरु दंगों में मोहम्मद कलीम को बेल देने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने 2020 के बेंगलुरु दंगों के आरोपित मोहम्मद कलीम की जमानत याचिका 28 फरवरी 2022 को खारिज कर दी। हाई कोर्ट द्वारा स्पेशल कोर्ट का फैसला बरकरार रखे जाने के बाद उसने शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था। सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय खंडपीठ ने उसकी याचिका पर सुनवाई की। आरोपित कलीम की तरफ से सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ लूथरा ने बहस की। उन्होंने जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस दिनेश माहेश्वरी की बेंच को बताया कि मोहम्मद कलीम का नाम मूल FIR में दर्ज नहीं था। NIA की जाँच के दौरान उसका नाम जोड़ा गया।

एडवोकेट लूथरा ने आगे कहा, “कलीम 68 साल का है। वह जेल में 14 महीने बिता चुका है। आरोपित के खिलाफ अभी तक चार्जशीट भी नहीं लगी है।” इस सुनवाई में एडवोकेट गौरव अग्रवाल दंगों के 5 आरोपितों की तरफ से पेश हुए। इन आरोपितों के नाम आसिफ, बिलाल, आतिफ, इकरामुद्दीन और पाशा हैं। एडवोकेट गौरव अग्रवाल ने कोर्ट से कहा, “इस केस की जाँच पूरी हो चुकी है। साथ ही आरोपित 16 महीने से कस्टडी में हैं।” दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “हम ऐसे समाज की कल्पना नहीं कर सकते। यहाँ UAPA का आरोप है और सार्वजानिक सम्पत्ति का नुकसान हुआ है।”

इससे पहले कर्नाटक हाई कोर्ट ने स्पेशल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा था कि मोबाइल लोकेशन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सबूत साबित करते हैं कि आरोपित घटनास्थल पर थे। उन्होंने सरकारी और निजी सम्पत्तियो को नुकसान पहुँचाया और धारा 144 का उल्लंघन किया। हाई कोर्ट ने यह भी कहा था कि ऑन ड्यूटी पुलिसकर्मियों पर हमला जनता के बीच भय पैदा करने के इरादे से किया गया।

2020 का बेंगलुरु दंगा

11 अगस्त 2020 में दंगाइयों की एक भीड़ ने एक फेसबुक पोस्ट को लेकर बवाल किया था। कथित तौर पर इस पोस्ट में पैगम्बर मोहम्मद का अपमान किया गया था। इस पोस्ट को कॉन्ग्रेस विधायक अखंड श्रीनिवासा मूर्ति के भतीजे ने शेयर किया था। इस दौरान लगभग 200 से 300 दंगाइयों की भीड़ ने कॉन्ग्रेस विधायक के घर में तोड़फोड़ की थी। साथ ही पुलिस वाहनों को भी आग लगा दी थी। 2 थानों पर पथराव भी किया गया।

इस घटना की जाँच कर रही फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने सितम्बर 2020 में घटना में बच गए कुछ हिन्दुओं के मामले प्रकाशित किए थे। इसके निष्कर्ष के मुताबिक हिन्दुओं को चुन-चुनकर निशाना बनाया गया। उनके घरों और वाहनों को निशाना बनाया गया। दंगे के दौरान 80 पुलिसकर्मी घायल हुए थे। बेंगलुरु पुलिस ने 300 से ज्यादा आरोपितों को गिरफ्तार किया था। इस मामले में कुल 64 आपराधिक केस दर्ज हुए थे।