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वाह रे TOI! रूस-यूक्रेन युद्ध से दुनिया वर्ल्ड वार की आशंका में सहमी, इनको सता रही चिंता अब बॉलीवुड फिल्मों की शूटिंग कैसे

यूक्रेन-रूस युद्ध के कारण जहाँ तीसरे विश्व युद्ध का खतरा पूरी दुनिया पर मंडरा रहा है वहीं टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI) को इस समय ये पड़ी है कि इस जंग के चलते भारतीय फिल्म इंडस्ट्री से उनकी शूटिंग की जगह छिन जाएँगी। टाइम्स ऑफ इंडिया के इंटरनेंटमेंट टाइम्स ने 28 फरवरी 2022 को इस संबंध में एक रिपोर्ट पब्लिश की और उसमें बताया कि कैसे भारतीय फिल्म इंडस्ट्री अपने मशहूर शूटिंग डेस्टिनेशन को खोने की कगार पर है।

रिपोर्ट कहती है कि भारतीय फिल्म मेकर्स को यूक्रेन में शानदार जगह मिलती थीं वो भी कम दामों पर। इस रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के लोगों में यूक्रेन एक प्रसिद्ध जगह बन चुकी थी। वहाँ RRR, 99 Songs, विनर, और स्पेशल ऑप्स की शूटिंग हो चुकी है। रिपोर्ट ने बताया है कि कैसे यूक्रेन अन्य यूरोपीय देशों से 20-30 फीसद सस्ते दाम पर बढ़िया जगह देता था।

रिपोर्ट की अजीब बात ये है कि इसमें बस ये बताया गया कि फिल्म इंडस्ट्री को यूक्रेन में लोकेशन नहीं मिलेगी। लेकिन इस बारे में कोई बात नहीं है कि यूक्रेन में इस समय क्या हालात हैं। वहाँ कैसे जंग का माहौल है। खबर में फील्ड से जुड़े, लोकेशन मैनेजर नटराजन रामजी की बाइट है जो कि तमिल, तेलगु और हिंदी फिल्मों के लिए विदेशों में जगह अरेंज करते हैं।

उन्होंने कहा, “भारतीय फिल्म मेकरों के लिए यूक्रेन आर्थिक दृष्टि से यूरोप की सबसे सही जगह थी। वहाँ की लोकेशन पेरिस, लंदन, यूएस और कुछ-कुछ भारतीय जगहों से मेल खाती हैं।” हाल की बात करें तो यूक्रेन में दिसंबर माह में तमिल फिल्म शूट हुई थी। रामजी कुछ समय पहले भी कीव में थे जहाँ उन्हें आगामी फिल्मों के शूट के लिए परमिशन लेनी थी। उनके अलावा सतीश शर्मा, जो इंडो-सोवियत फिल्मों के डायरेक्टर हैं और यूक्रेन को भारतीय निर्देशकों के बीच सबसे पॉपुलर जगह बताते हैं।

बता दें कि इस समय जब हर जगह यूक्रेन-रूस युद्ध के कारण सामान्य जन को होती परेशानियों की वीडियो सोशल मीडिया पर हैं, उस समय बिन मामले की गंभीरता को समझे ई-टाइम्स पर ये ‘मास्टरपीस’ सामने आया है। ई-टाइम्स के अलावा भी कई ऐसी साइट्स हैं जिन्होंने बताया है कि कैसे यूक्रेन में शूट होने वाली फिल्मों की लिस्ट लंबी है- जैसे रावण 2.0 और टाइगर-3।

5 चरणों में 225+, अंतिम नतीजे 300+: CM योगी ने बताया यूपी में BJP को मिल रही कितनी सीटें, कहा- चुनाव जीत चुके, ​अब रिकॉर्ड बेहतर कर रहे

उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों (Uttar Pradesh Election 2022) के लिए सात चरणों में मतदान होना है। पाँच चरणों का मतदान पूरा हो चुका है। आखिरी के दो चरणों में 3 और 7 मार्च को वोट पड़ेंगे। नतीजे अन्य चुनावी राज्यों के साथ 10 मार्च को आएँगे। पाँच चरणों का मतदान पूरा होने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का एक इंटरव्यू आया है। इसमें उन्होंने दावा किया है कि बीजेपी दोबारा 300 से ज्यादा सीटें जीतने में कामयाब होने जा रही है। उनका कहना है कि 5 चरणों में जिन 283 सीटों पर वोट पड़े हैं उनमें से 225+ सीटें बीजेपी जीत रही है।

न्यूज 18 को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा, “चुनाव तो भारतीय जनता पार्टी वैसे भी जीत चुकी है। फिर भी हमारे लिए हर दिन एक नई परीक्षा के साथ होता है। हम पुराने रिकॉर्ड से बेहतर करना चाहते हैं। 5 चरणों के अब तक के चुनावों में 283 में से 225+ सीटें भाजपा जीत रही है। फिर भी हमारे लिए एक-एक सीट जरूरी है।”

सत्य और समाजवादी पार्टी को नदी के 2 किनारे बताते हुए उन्होंने कहा कि सपा वाले न सत्य बोल सकते हैं और न ही उसे स्वीकार कर सकते हैं। 2014 में ही प्रदेश की जनता ने सपा को ठुकरा दिया है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल द्वारा उनके वस्त्र के रंग (भगवा) पर टिप्पणी का जवाब देते हुए सीएम योगी ने कहा, “मैं भगवाधारी हूँ। मुझे भगवा से गौरव की अनुभूति होती है। यह अनुभूति हर भारतवासी को होती है। भगवा वस्त्र नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति का प्रतीक है। तिरंगा हमारी आन, बान और शान का प्रतीक है। इसमें सबसे ऊपर की पट्टी भगवा ही है। सूर्योदय के समय भगवान सूर्य की लालिमा भी भगवा ही होती है। ऊर्जा के प्रतीक अग्नि का रंग भी भगवा ही है। मैं भगवा हूँ। हर व्यक्ति बोलेगा कि मै भगवा हूँ। क्या समाजवादी पार्टी इस सत्य को स्वीकार करेगी कि वो आतंकियों की समर्थक है? भगवा के रंग में उन्हें दृष्टिदोष दिख रहा है ये उनकी संगति का असर है।”

उन्होंने कहा, “चुनाव हमारे लिए मात्र सत्ता पाने की लड़ाई नहीं है। हमारे विकास कार्य रुक न पाए इसलिए भाजपा UP में जरूरी है। मेरी 5 साल की सरकार में एक भी दंगा नहीं हुआ। सपा सरकार में 5 साल के अंदर 700 से ज्यादा दंगे हुए थे। UP का कोई शहर और गाँव नहीं बचा था जहाँ दंगे न हुए हों। महीनों तक कर्फ्यू लगता था। इसलिए वो दंगावादी तो हैं ही।”

परिवारवाद पर CM योगी ने कहा, “मैंने भारत की श्रेष्ठ गुरु-शिष्य परम्परा का पालन किया हूँ। यह जैविक परम्परा नहीं है। वो (अखिलेश) इसे समझ नहीं पाएँगे। इसे समझने के लिए उन्हें टाइम से सोकर उठना होगा। भगवान की पूजा करनी होगी। वो 12 बजे सोकर उठते हैं। पूजा और नमाज में अंतर् भी नहीं जानते। गोरखपुर से मुझे प्रदेश की सेवा का मौका मिला है, जिसकी माध्यम भाजपा बनी है। जब हम राष्ट्रवाद की बात करते हैं, तब विपक्षी जातिवादी की बात करते हैं। जब हम गरीबों की बात करते हैं तब ये आतंकवाद पर चर्चा करते हैं। जब हम विकास की बात करते हैं तब ये पाकिस्तान को ले आते हैं।”

‘भारतीय छात्रों को एंट्री नहीं दे रहा पोलैंड’: रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच शिवसेना MP प्रियंका चतुर्वेदी का दावा, राजदूत ने कहा- फेक न्यूज न फैलाएँ

यूक्रेन-रूस के बीच चल रही जंग के कारण भारत सरकार अपने सभी नागरिकों को यूक्रेन से जल्द से जल्द निकालने में प्रयासरत है। इस बीच शिवसेना की महिला नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने 28 फरवरी को ट्वीट करके दावा किया कि उन्हें मालूम चला है कि भारतीयों को पोलैंड की सीमा में घुसने नहीं दिया जा रहा है। वहीं पोलैंड राजदूत ने कहा है कि प्रियंका द्वारा किया गया दावा फर्जी है। पोलैंड की सरकार ने किसी भारतीय को वहाँ आने से नहीं रोका।

बता दें कि 28 फरवरी 2022 को देर रात प्रियंका ने अपने ट्विटर हैंडल पर इंडियन पोलैंड के ट्विटर को टैग करते हुए लिखा, “कई भारतीय छात्रों को पोलैंड में आने से मना कर दिया गया। जिन्हें कल बुलाया गया था उन्हें भी वापस भेज दिया गया। उन बच्चों के माता-पिता घबराए हुए हैं। ऑपरेशन गंगा, विदेश मंत्रालय आपके हस्तक्षेप की जरूरत है।”

प्रियंका के इस ट्वीट के कुछ देर बाद भारत में पोलैंड के राजदूत एडम बुरोकोवस्की (Adam Burakowski) का रिप्लाई आया। एडम ने दावा किया कि प्रियंका की बातों में सच्चाई नहीं है। पोलैंड की सरकार ने किसी को भी अपनी सीमा में आने से नहीं रोका है। प्रियंका को नसीहत देते हुए पोलैंड के राजदूत ने उन्हें उनके सूत्र चेक करने को कहे और अपील की कि वो ऐसे समय में झूठ फैलाने का काम न करें।

पोलैंड राजदूत के ट्वीट के बाद प्रियंका ने भी इस पर जवाब दिया। उन्होंने दावा किया कि जैसा पोलैंड के राजदूत कह रहे हैं उन्हें वैसा नहीं पता चला है। दुर्भाग्यवश उनकी बातों को फेक न्यूज बताया जा रहा है। उन्होंने कहा, “मुझे उन बच्चों का नंबर और नाम साझा करते हए खुशी होगी जो वहाँ फँसे हुए हैं। और, मैं इस चीज को सराहूँगी अगर आप फेक न्यूज का रोना छोड़कर उन बच्चों तक पहुँचने का प्रयास करेंगे।”

प्रियंका चतुर्वेदी के दावे के बाद पोलैंड राजदूत ने फिर बताया कि वो इस बात को लेकर आश्वास्त हैं कि ऐसा नहीं हुआ है। लेकिन अगर वो कह रही हैं तो उन बच्चों की लिस्ट ट्विटर पर न देकर इंडियन पोलैंड को भेजें जो इस मामले में कॉर्डिनेट कर रहे हैं और इस मामले में मदद कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि वो लोग लगातार पोलैंड में भारतीयों से संपर्क में हैं।

बता दें कि यूक्रेन से भारतीयों को पोलैंड के जरिए निकालने के संबंध में प्रियंका ने तब ऐसे दावे किए हैं जब एक दिन पूर्व ही (27 फरवरी) भारतीय दूतावास से भी इसी मामले में नोटिस जारी किया गया था। नोटिस में साफ लिखा था कि शेहनी पर 10 बसें सीमा पर तैनात की गई हैं। ये बसें 28 फरवरी से ऑपरेट होंगीं और अन्य चेक प्वाइंट ktakowiec और Budomierz तक जाएँगी। इसके बाद रहने का इंतजाम पोलैंड की Rszeszow एबेंसी में किया जाएगा। इससे शेहनी में भीड़ कम होगी और भारतीयों को ठंड से थोड़ा ठीक माहौल मिलेगा। ये मालूम रहे कि ये बस केवल उनके लिए जो शेहनी सीमा पर हैं न कि उनके लिए जो Lviv और आसपास शहरों में हैं। वहाँ रहने वाले लोगों से अपील है कि वो वहीं रुके जब शेहनी सीमा की भीड़ कम नहीं होती। ये सुविधा भारतीय सरकार भारतीयों को मुफ्त में देगी।

एंबेसी द्वारा 27 फरवरी को जारी बयान में कुछ नंबर देते हुए भारतीयों को कहा गया है कि वो बसों में सीट पाने के लिए इन नंबरों पर कॉल करें। अगर किसी कारण से उन्हें सीट नहीं मिलती तो वो घबराए नहीं। ये पूरा ऑपरेशन तब तक चलेगा जब तक कि हर कोई सुरक्षित नहीं आ जाता। दूतावास की ओर से हर यूक्रेन में रहने वाली भारतीय से सहयोग की अपील की गई ताकि उन्हें बाहर निकाला जा सके।

इस बयान को नजरअंदाज करते हुए और पोलैंड राजदूत के रिप्लाई से आहत शिवसेना नेत्री प्रियंका अपने ही ट्वीट के थ्रेड में एडम पर भड़क गईं। उन्होंने ट्विटर यूजर्स के खुद के ऊपर से फेक न्यूज पेडलर का टैग हटाने के लिए सफाई दी और कहा कि उन्हें बेवजह फेकन्यूज फैलाने वाली कहा गया है जबकि हकीकत में उन्होंने इस बारे में एडम से पूछा भी नहीं। प्रियंका ने लिखा, “तुमने मुझे फेक न्यूज फैलाने वाला कहा जबकि मैंने तुम्हें टैग तक नहीं किया। मैंने इंडियन पोलैंड को ही मदद के लिए बोला था और इसे फेक न्यूज कहने लगे। तुम्हारे आरोपों का आधार क्या है।”

‘अभी तक तो सिर्फ बात हुई…’: CM हेमंत सोरेन से मिले रुपेश पांडेय के माता-पिता, क्या CBI जाँच को तैयार होगी झारखंड सरकार

रुपेश पांडेय के परिजनों ने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात की है। सोमवार (28 फरवरी 2022) को राँची में हुई मुलाकात के दौरान परिजनों ने रुपेश की निर्मम हत्या की सीबीआई जाँच की माँग की। सीएम सोरेन ने ट्वीट कर बताया है कि उन्होंने रुपेश की माँ उर्मिला पांडे और पिता सिकंदर पांडे को CBI जाँच की माँग पर विचार का भरोसा दिलाया है। आशवस्त किया है कि इस मामले की फास्ट ट्रैक सुनवाई होगी। साथ ही रुपेश की माँ की स्थायी आजीविका के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मुख्यमंत्री ने हजारीबाग़ के DC को रुपेश की माँ उर्मिला देवी के जीवन यापन के लिए उचित व्यवस्था करवाने का आदेश दिया। रुपेश के परिजनों के साथ बरही विधायक उमाशंकर अकेला और गिरिडीह विधायक सुदिव्य कुमार भी मौजूद थे। मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद रुपेश के चाचा अनिल पांडेय ने ऑपइंडिया को, “अभी तक तो सिर्फ बात हुई है। हम संतुष्ट तब होंगे जब किए गए वादे पूरे हो जाएँगे। मुख्यमंत्री ने 25 तारीख (25 मार्च 2022) तक सब पूरा हो जाने को कहा है। उन्होंने परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने के लिए भी कहा है। नौकरी ब्लॉक में देने के लिए कहा है।” अनिल पांडेय इस केस की FIR में आवेदक भी हैं।

पांडेय ने बताया, “हमें लोकल प्रशासन ज्यादा शोर-शराबा न करने के लिए कहता है। हमने इस केस में कुल 27 लोगों को नामजद किया है। लेकिन पुलिस ने सिर्फ 5 लोगों को गिरफ्तार किया है। घटना में मुख्य आरोपित इफ्तिकार आलम है। हमने उसका नाम भी पुलिस को नोट करवाया है। लेकिन उसके खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया गया है। खुद ही प्रशासन वाले ट्वीट कर के 4-5 लोगों को ही आरोपित बताते हैं। वो इसे मॉब लिंचिंग नहीं मान रहे हैं।”

उल्लेखनीय है कि झारखंड के हजारीबाग जिले के बरही थाना के दुलमाहा गाँव में मुस्लिम भीड़ ने 6 फरवरी 2022 को रुपेश की हत्या कर दी थी। हालाँकि झारखंड पुलिस इसे मॉब लिंचिंग मानने से इनकार कर रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से यह बात सामने आई थी कि चोट की वजह से रुपेश के इंटरनल ऑर्गन फेल हो गए थे। आँख, कान, छाती, पेट, पैर सहित पूरे शरीर पर चोट के निशान थे। मजबूत और भारी सामान से हमला किया गया था। धारदार हथियार से हमला हुआ। गला दबाने की कोशिश की गई। कान, गले और छाती के निचले हिस्से में घाव थे।

BJP प्रदेश अध्यक्ष से मिला पीड़ित परिवार

पीड़ित परिवार ने 27 फरवरी को झारखंड भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश से भी मुलाकात की थी। इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी भी मौजूद थे। सांसद दीपक प्रकाश ने DGP से फोन पर बात कर आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई करने को कहा था।

क्या है FIR में?

ये घटना झारखंड के हजारीबाग के बरही थाना क्षेत्र की है। मृतक के चाचा अनिल कुमार पांडेय ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कराई है। उन्होंने बताया है कि रूपेश शाम के 5 बजे दुकान पर बैठा था, तभी उसके कुछ दोस्तों ने उसे सरस्वती पूजा विसर्जन में शामिल होने के लिए बुलाया। ये घटना 5 फरवरी, 2022 (रविवार) की है। चाचा ने बताया है कि कैसे असलम अंसारी उर्फ़ पप्पू मियाँ के नेतृत्व में मौजूद मुस्लिम भीड़ ने उनके भतीजे को पकड़ कर पीटा।

इस मामले में आरोपित हैं– असलम अंसारी, मोहम्मद नौशाद, मोहम्मद कैफ, मोहम्मद गुफरान, मोहम्मद चाँद, मोहम्मद ओसामा, मोहम्मद एहताम, मोहम्मद जाहिद, मोहम्मद सोनू, मोहम्मद फैसल, मोहम्मद शाहबाज, रब्बानी मियाँ, मोहम्मद आशिक, मोहम्मद जाशिद, मोहम्मद आशिक, मोहम्मद रिजवान, मोहम्मद सलमान, मोहम्मद इरफ़ान, मोहम्मद सलमान उर्फ़ भाले, मोहम्मद छोटे, मोहम्मद इस्तेखार, मोहम्मद इकबाल, मोहम्मद हसन, मोहम्मद अनीस और मोहम्मद नौशाद।

आध्यात्मिक जागरण का सनातन स्वर है महाशिवरात्रि: शून्यता के उस शिखर को छू लेने की परमरात्रि जहाँ से उद्घाटित होता है शिव तत्व

नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय, भस्माङ्गरागाय महेश्वराय।
नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय, तस्मै नकाराय नमः शिवाय।

वे जिनके पास सर्पों के राजा उनकी माला के रूप में है, और जिनकी तीन आँखें हैं, जिनके शरीर पर भस्म रमी हुई है और जो ईश्वरों में सर्वश्रेष्ठ हैं। वे जो शाश्वत हैं, जो पूर्ण पवित्र हैं और जो दिगंबर हैं अर्थात चारों दिशाओं को अपने वस्त्रों के रूप में धारण करने वाले हैं, उस शिव को नमस्कार, जिन्हें शब्दांश ‘न’ द्वारा दर्शाया गया है। स्वयं आदियोगी शिव के मुख से उत्पन्न ‘ओम नमः शिवाय’ का यह पंचाक्षर मन्त्र, उनकी विशेष कृपा का पात्र होने का मन्त्र है। और यदि यह अवसर महाशिवरात्रि का हो अर्थात देवाधिदेव महादेव की विशेष कृपा की रात हो तो यह मन्त्र आध्यात्मिक जागरण का माध्यम बन जाता है।

तिथिवार बात की जाए तो महाशिवरात्रि फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। इस वर्ष यह शुभ अवसर आज 1 मार्च, 2022 को है। ऐसे में आज हम बात करेंगे महाशिवरात्रि की, उसके महात्म्य की और आज की रात्रि को कैसे खुद के लिए साधना और सिद्धि की रात बनाते हुए कोई भी साधक महादेव की अनुकम्पा का विशेष पात्र हो सकता है।

शिवरात्रि और महाशिवरात्रि

शास्त्रों के अनुसार, हर चंद्र मास का चौदहवाँ दिन अथवा अमावस्या से पूर्व का दिन शिवरात्रि होती है। एक वर्ष में आने वाली सभी शिवरात्रियों में से, महाशिवरात्रि, को सर्वाधिक महत्वपूर्ण माना जाता है, जो फाल्गुन मास की चतुर्दशी को पड़ता है। इस रात, पृथ्वी का उत्तरी गोलार्द्ध इस प्रकार की स्थिति में होता है कि मनुष्य के भीतर ऊर्जा प्राकृतिक रूप से ऊपर की ओर उठकर एक दिव्य आध्यात्मिक अनुभव का माध्यम बनती है। आगे इस पर और भी विस्तार से बात होगी। उससे पहले भारतीय सनातन परंपरा के उत्सवधर्मिता की बात कर लेते हैं।

आदियोगी शिव

उत्सवधर्मिता सनातन धर्म की विशेष पहचान

जब भी भारतीय सनातन संस्कृति और धर्म की बात होगी तो वह बात उत्सवों के बिना अधूरी होगी। कहा जाता है कि किसी समय, भारतीय संस्कृति में, एक वर्ष में 365 त्यौहार हुआ करते थे। अर्थात वे साल के प्रतिदिन, प्रतिपल को पूरी सजगता से जीने के उल्लास में ही उत्सव खोज लेते थे। उनके लिए जीवन अपने आप में एक उत्सव था। आज भी है बस कुछ दूसरी गैरजरुरी बातों में उलझकर हम उस बोध को खोते जा रहे हैं।

आप भली-भाँति इससे परिचित होंगे कि हिमालय से हिन्द महासागर के बीच अवस्थित इस देश की संस्कृति में हर कार्य के गीत हुआ करते थे। प्रकृति के कण-कण में व्याप्त संगीत से जीवों का गहन परिचय था। ऐसे में जो भी उत्सव थे वो भी कर्म बोध से भी जुड़े थे, 365 त्योहार के पीछे कोई न कोई कारण जीवन के विविध उद्देश्यों से जुड़े ढूँढ लिए गए थे। इन्हें विविध ऐतिहासिक घटनाओं, विजय तथा जीवन की कुछ अवस्थाओं या जीवनोपयोगी कार्यों जैसे फसल की बुआई, रोपाई और कटाई आदि कार्यों के प्रतिफल के रूप में दर्शाया गया था।

सनातन धर्म को उसकी पूरी व्यापकता में देखें तो जीवन की हर अवस्था और हर परिस्थिति के लिए हमारे पास एक त्यौहार था। यहाँ तक कि मृत्यु को भी अंतिम उत्सव के रूप में मनाते हुए उसके प्रस्थान को भी उत्सवधर्मिता का स्वरुप प्रदान किया गया था। कालांतर में लोग धर्म से भटककर जीवन की दूसरी आपाधापी में उलझते गए और ख़ुद से ही दूर होते गए। जीवन अपनी सहज-स्फूर्त गति खोकर, हमारे अपने ही जाल में उलझकर घुटने लगी। ऐसे में महाशिवरात्रि वापस अपने उसी बोध को जागृत करने का अवसर मनुष्य को उसके जीवन काल में हर वर्ष देती है। पर कितने उस जागरण को उपलब्ध हो पाते हैं यह आज भी एक गंभीर प्रश्न है।

महाशिवरात्रि का महात्म्य

महाशिवरात्रि जीव को आत्मबोध तक पहुँचाने की रात्रि है। योग परम्परा के अनुसार बात की जाए तो ख़ुद को अस्तित्व से एकाकार करने की रात। योगी और ऋषियों के अनुसार, यह एक ऐसा नैसर्गिक अवसर है, जब प्रकृति स्वयं मनुष्य को उसके आध्यात्मिक शिखर तक ले जाने में मदद करती है।

इस समय का उपयोग करने के लिए, सनातन परंपरा में, पहले पूरी रात उत्सव मनाते थे और आज भी यह परम्परा कहीं-कहीं अपने मूल रूप में विद्यमान है। ख़ासतौर से दक्षिण भारत और काशी में, महाशिवरात्रि का उत्सव पूरी रात चलती है। पूरी रात मनाए जाने वाले इस उत्सव में इस बात का विशेष ध्यान रखा जाता है कि ऊर्जाओं के प्राकृतिक प्रवाह को उमड़ने और ऊपर उठने का पूरा अवसर मिले। आप अगर ध्यान और योग की परंपरा से नहीं भी जुड़े हैं तो भी बस अपनी रीढ़ की हड्डी को सीधा रखते हुए, रात्रि पर्यन्त खुद को जगाए रखने से भी आपके जीवन अनुभव में अध्यात्म का प्रवेश हो सकता है।

महाशिवरात्रि आध्यात्मिक पथ पर चलने वाले साधकों के लिए बहुत महत्व तो रखती ही है। यह उनके लिए भी अति महत्वपूर्ण है जो पारिवारिक हैं और संसार की महत्वाकांक्षाओं में मग्न हैं। पारिवारिक परिस्थितियों में मग्न लोग महाशिवरात्रि को शिव के विवाह के उत्सव की तरह मनाते हैं। सांसारिक महत्वाकांक्षाओं में मग्न लोग महाशिवरात्रि को, शिव के द्वारा अपने शत्रुओं पर विजय पाने के दिवस के रूप में मनाते हैं।

शिव विवाह (साभार-मेकिंग इंडिया)

परंतु, साधकों के लिए, सद्गुरु का कहना है कि महाशिवरात्रि वह रात्रि है, जब महादेव शिव कैलाश पर्वत के साथ एकात्म हो गए थे। वे एक पर्वत की भाँति स्थिर व निश्चल हो गए थे। यहाँ यह जानना ज़रूरी है, यौगिक परंपरा में, शिव को किसी देवता की तरह नहीं पूजा जाता। उन्हें आदि गुरु माना जाता है, पहले गुरु, जिनसे ज्ञान उपजा। ध्यान की अनेक सहस्राब्दियों के पश्चात्, एक दिन वे पूर्ण रूप से स्थिर हो गए। वह दिन महाशिवरात्रि का था। उनके भीतर की सारी गतिविधियाँ शांत हुईं और वे पूरी तरह से स्थिर हो गए, इसलिए साधक महाशिवरात्रि को स्थिरता की रात्रि के रूप में मनाते हैं।

वैज्ञानिक प्रमाणों के साए में ऊर्जाओं का खेल

आधुनिक विज्ञान भी अनेक चरणों से गुजरते हुए, आज उस बिंदु पर पहुँच चुका है, जहाँ वैज्ञानिकों ने यह प्रमाणित कर दिया है कि हम जिसे जीवन के रूप में जानते हैं, पदार्थ और अस्तित्व के रूप में जानते हैं, जिसे हम ब्रह्माण्ड और तारामंडल के रूप में जानते हैं; वह सब केवल एक ऊर्जा है, जो स्वयं को लाखों-करोड़ों रूपों में अभिव्यक्त करती है।

कहते हैं कि यौगिक विज्ञान में, सनातन परम्परा में, यह वैज्ञानिक तथ्य प्रत्येक योगी के लिए एक अनुभव से उपजा सत्य है। यहाँ ‘योगी’ शब्द से तात्पर्य उस व्यक्ति से है, जिसने अस्तित्व की एकात्मकता को जान लिया है। जब ‘योग’ की बात होती है तो इसका तात्पर्य कोई विशेष अभ्यास या तंत्र नहीं। ब्रह्माण्ड के इस असीम विस्तार को तथा अस्तित्व में एकात्म भाव को जानने की सारी चाह, योग है। महाशिवारात्रि की रात, इसी अनुभव को पाने का परम अवसर है।

महादेव शिव

पहले के सभी सद्गुरुओं ने कहा है कि शिवरात्रि माह का सबसे अंधकारपूर्ण रात्रि होती है। प्रत्येक माह शिवरात्रि का उत्सव तथा महाशिवरात्रि का उत्सव मनाना ऐसा लगता है मानो हम अंधकार का उत्सव मना रहे हों। ऐसे में कोई तर्कशील मन अंधकार को नकारते हुए, प्रकाश को सहज भाव से चुनना चाहेगा। परंतु शिव का शाब्दिक अर्थ ही यही है, ‘जो नहीं है’। ‘जो है’, वह अस्तित्व और सृजन है। ‘जो नहीं है’- वह शिव है। ‘जो नहीं है’- उसका अर्थ है- अगर आप अपनी आँखें खोल कर आसपास देखें और आपके पास सूक्ष्म दृष्टि है तो आप प्रकृति को अपनी सम्पूर्णता में महसूस कर सकेंगे। अगर आपकी दृष्टि केवल विशाल वस्तुओं पर जाती है, तो आप देखेंगे कि विशालतम शून्य ही, अस्तित्व की सबसे बड़ी उपस्थिति है।

आदियोगी शिव ने महाशिवरात्रि पर खुद को कैलाश में आत्मसात कर लिया

सद्गुरु जग्गी वासुदेव इसी बात को विस्तार देते हुए कहते हैं कि कुछ ऐसे बिंदु, जिन्हें हम आकाशगंगा कहते हैं, वे तो दिखाई देते हैं, परंतु उन्हें थामे रहने वाली विशाल शून्यता सभी लोगों को दिखाई नहीं देती। इस विस्तार, इस असीम रिक्तता को ही ऋषियों और योगियों द्वारा शिव कहा गया है। वर्तमान में, आधुनिक विज्ञान ने भी साबित कर दिया है कि सब कुछ शून्य से ही उपजा है और शून्य में ही विलीन हो जाता है। इसी संदर्भ में शिव यानी विशाल रिक्तता या शून्यता को ही महादेव शिव के रूप में मान्यता दी गई है।

सनातन धर्म व संस्कृति

इस ग्रह के प्रत्येक धर्म व संस्कृति में, सदा दिव्यता की सर्वव्यापी प्रकृति की बात होती रही है। यदि हम इसे ध्यान से देखें, तो ऐसी एकमात्र चीज़ जो सही मायनों में सर्वव्यापी हो सकती है, ऐसी वस्तु जो हर स्थान पर उपस्थित हो सकती है, वह केवल अंधकार, शून्यता या रिक्तता ही है। सामान्यतः, जब लोग अपना कल्याण चाहते हैं, तो हम उस दिव्य को प्रकाश के रूप में दर्शाते हैं। जब लोग अपने कल्याण से ऊपर उठ कर, अपने जीवन से परे जाने पर, विलीन होने पर ध्यान देते हैं और उनकी उपासना और साधना का उद्देश्य विलयन ही हो, तो हम सदा उनके लिए दिव्यता को अंधकार के रूप में परिभाषित करते हैं।

प्रकाश आपके मन की एक छोटी सी घटना है। प्रकाश शाश्वत नहीं है, यह सदा से एक सीमित संभावना है क्योंकि यह घट कर समाप्त हो जाती है। हम जानते हैं कि इस ग्रह पर सूर्य प्रकाश का सबसे बड़ा स्रोत है। यहाँ तक कि आप हाथ से इसके प्रकाश को रोक कर भी, अंधेरे की परछाईं बना सकते हैं। परंतु अंधकार सर्वव्यापी है, यह हर जगह उपस्थित है।

महादेव शिव के स्वरुप काल भैरव

सद्गुरु कहते हैं कि संसार के अपरिपक्व मस्तिष्कों ने सदा अंधकार को एक शैतान के रूप में चित्रित किया है। पर जब आप दिव्य शक्ति को सर्वव्यापी कहते हैं, तो आप स्पष्ट रूप से इसे अंधकार कह रहे होते हैं, क्योंकि सिर्फ अंधकार सर्वव्यापी है। यह हर ओर है। इसे किसी के भी सहारे की आवश्यकता नहीं है। प्रकाश सदा किसी ऐसे स्त्रोत से आता है, जो स्वयं को जला रहा हो। इसका एक आरंभ व अंत है। यह सदा सीमित स्रोत से आता है।

जबकि, अंधकार का कोई स्रोत नहीं है। यह अपने-आप में एक स्रोत है। यह सर्वत्र उपस्थित है। तो जब हम शिव कहते हैं, तब हमारा संकेत अस्तित्व की उस असीम रिक्तता की ओर होता है। इसी रिक्तता की गोद में सारा सृजन घटता है। रिक्तता की इसी गोद को हम शिव कहते हैं।

महाशिवरात्रि अर्थात जागरण की उच्च अवस्था का सहज अनुभव

सद्गुरु कहते हैं कि सनातन संस्कृति में, सारी प्राचीन प्रार्थनाएँ केवल आपको बचाने या आपकी बेहतरी के संदर्भ में नहीं थीं। सारी प्राचीन प्रार्थनाएँ कहती हैं- “हे ईश्वर, मुझे नष्ट कर दो ताकि मैं आपके समान हो जाऊँ। तो जब हम शिवरात्रि कहते हैं जो कि माह का सबसे अंधकारपूर्ण रात्रि है, तो यह एक ऐसा अवसर है जब व्यक्ति अपनी सीमितता को विसर्जित कर, सृजन के उस असीम स्रोत का अनुभव करे, जो प्रत्येक मनुष्य में बीज रूप में उपस्थित है।”

अंततः, बस यही कहना है कि महाशिवरात्रि एक अवसर और संभावना है, जब आप स्वयं को, हर मनुष्य के भीतर बसी असीम रिक्तता के अनुभव से जोड़ सकते हैं, जो कि सृष्टि में व्याप्त सम्पूर्ण सृजन का स्रोत है। एक ओर शिव संहारक कहलाते हैं और दूसरी ओर वे सबसे अधिक करुणामयी कल्याणकारी भी हैं। वे बहुत ही उदार दाता हैं। यौगिक गाथाओं में वे, अनेक स्थानों पर महाकरुणामयी के रूप में सामने आते हैं। उनकी करुणा के रूप विलक्षण और अद्भुत रहे हैं। रावण और भष्मासुर से जुड़ी महादेव शिव की कहानी तो आपने सुनी होगी, नहीं सुनी तो सुनिएगा, आदिदेव शिव के कल्याण स्वरुप की कहानियाँ सृष्टि के कण-कण में हैं।

चलते-चलते एक और बात- महाशिवरात्रि शिव तत्व के अनुभव की एक विशेष रात्रि है। इस रात में बेशक थोड़े समय के लिए शांत मन से उस असीम विस्तार का अनुभव करें, जिसे हम आदियोगी महादेव शिव कहते हैं। आपके लिए यह वर्ष भी केवल गहन निद्रा, तन्द्रा या सिर्फ नींद से जागते रहने की रात भर न रह जाए बल्कि यह आपके लिए जागरण की रात्रि बन जाए, चेतना व जागरूकता से भरी एक रात यही कामना है।

अजीत ने 4 दिन में बटोरे ₹160 करोड़, पवन कल्याण ने 3 दिन में पार किया ₹109 Cr का आँकड़ा: ₹175 Cr बजट वाली ‘गंगूबाई’ का बुरा हाल

पिछले कुछ दिनों में तमिल, तेलुगु, मराठी और हिंदी में चार बड़ी फ़िल्में रिलीज हुईं। हम आपको बताते हैं कि इस वीकेंड पर इन फिल्मों का बॉक्स ऑफिस पर कैसा प्रदर्शन रहा। तमिल में ‘थाला’ अजीत कुमार (Thala Ajith Kumar) की ‘वलिमै’ (Valimai), तेलुगु में ‘पॉवर स्टार’ पवन कल्याण (Power Star Pawan Kalyan) की ‘भीमला नायक’ (Bheemla Nayak), मराठी में चिन्मय मांडलेकर की ‘पावनखिंड’ (Pawankhind) और हिंदी में आलिया भट्ट की ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ (Gangubai Kathiawadi) ने बॉक्स ऑफिस पर दस्तक दिया। आइए, आपको बताते हैं किस फिल्म ने कितने करोड़ रुपए का कलेक्शन किया।

सबसे पहले बात करते हैं अजीत कुमार की ‘वलिमै’ की। इस फिल्म ने पहले 4 दिनों में दुनिया भर में 160 करोड़ रुपए का कारोबार कर लिया है। चारों दिन फिल्म का कलेक्शन क्रमशः 60, 36, 28 और 36 करोड़ रुपए रहा। ये फिल्म का ग्रॉस बॉक्स ऑफिस कलेक्शन है। जबकि अकेले तमिलनाडु में इस फिल्म ने 4 दिनों में लगभग 109 करोड़ रुपए के आँकड़े को पार कर दिया। 36 करोड़ रुपए की ओपनिंग लेने वाली इस फिल्म ने रविवार (28 फरवरी, 2022) को अकेले तमिलनाडु में 28 करोड़ रुपए का कारोबार किया।

अब बात करते हैं भाजपा के गठबंधन स्थित पवन कल्याण की, जो ‘जन सेना’ पार्टी के मुखिया भी हैं। राजनीति में आने के बाद भी उनका फैन बेस कम नहीं हुआ है और इसका सबूत है ‘भीमला नायक’ का मात्र 3 दिनों में दुनिया भर में 128 करोड़ रुपए का कारोबार करना। 61.24 करोड़ रुपए की ओपनिंग लेने वाली इस फिल्म ने रविवार को 34.63 करोड़ रुपए बटोरे। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना की बात करें तो अकेले इन दो राज्यों में इस फिल्म ने 87 करोड़ रुपए का आँकड़ा पार कर दिया है।

अब बात करते हैं सन् 1660 के जुलाई में हुए ऐतिहासिक युद्ध पर बनी फिल्म ‘पवनखिंड’ की, जो छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन की घटनाओं पर आधारित है। बाजीप्रभु देशपांडे की वीरता को प्रदर्शित करती इस मराठी फिल्म ने अपने दूसरे वीकेंड के बाद कुल 16.71 करोड़ रुपए की कमाई की है। ये बात ध्यान रखने की ज़रूरत है कि महाराष्ट्र के सिनेमाघरों में अभी भी 50% ऑक्युपेंसी है, वरना फिल्म का प्रदर्शन और बेहतर हो सकता था। ये फिल्म भारत के इतिहास की सच्ची घटना पर आधारित है।

अंत में बात करते हैं 175 करोड़ रुपए बजट वाली फिल्म ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ की, जिसे संजय लीला भंसाली ने बनाया है। आलिया भट्ट की फिल्म ने पहले तीन दिनों में दुनिया भर में 57 करोड़ रुपए का कारोबार किया है। फिल्म का नेट बॉक्स ऑफिस कलेक्शन 39.12 करोड़ रुपए रहा है। कंगना रनौत ने इस बात से आपत्ति जताई है कि उनकी ‘मणिकर्णिका’ (2019) को फ्लॉप बताने वाले इस हाई बजट फिल्म के कलेक्शंस को शानदार बता रहे हैं।

‘मंदिर नहीं, चिलम में हवन’: सीएम योगी पर ओपी राजभर का निशाना, लोगों ने कहा- ‘खोखा देख लो पंचर लगाने के लिए क्योंकि टोटी भइया तो चले’

यूपी विधानसभा चुनाव में पाँचवें चरण की वोटिंग हो चुकी है। वहीं अब अंतिम दो चरणों से पहले सपा नेताओं ने बेलगाम बयानबाजी तेज कर दी है। आज (28 फरवरी, 2022) आजमगढ़ में चुनावी हमले के बाद अब सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने सीएम योगी के खिलाफ ट्वीट कर विवादित टिप्पणी की है। सपा के सहयोगी ओमप्रकाश राजभर ने एक ट्वीट में कहा है कि योगी गम भुलाने के लिए मंदिर मर हवन के बजाय चिलम में हवन करने की सोच रहे हैं।

ओमप्रकाश राजभर ने CM योगी पर हमला करते हुए ट्वीट किया, ”5 चरणों के चुनाव के बाद बाबा अपने गम को भुलाने के लिए मंदिर में हवन करने की बजाय चिलम में हवन करने की सोच रहे हैं।”

लोगों ने राजभर के ट्वीट पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। एक यूजर ने उनके ट्वीट पर जवाब देते हुए लिखा, “बाबा चिलम भरेंगे या दस मार्च को साइकिल पंचर होगी ये तो वक्त बताएगा लेकिन साइकिल में पंचर जात की राजनीति करने वाले से ही लगवाया जाएगा। इसलिए नेता जी एक खोखा देख लो किराए पे पंचर लगाने के लिए क्योंकि टोटी भइया तो चले।”

वहीं मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, आज आजमगढ़ में चुनाव प्रचार करते हुए राजभर ने केन्द्र व प्रदेश सरकार पर जमकर निशाना साधा। जिले के जहानागंज में सपा प्रत्याशी अखिलेश यादव के पक्ष में चुनावी जनसभा को सम्बोधित करते हुए राजभर ने कहा, “प्रदेश में यदि सपा गठबंधन की सरकार बनी तो बगैर लिखित परीक्षा के बिना ही पुलिस व पीएसी में नौजवानों की भर्ती की जाएगी।” साथ ही भाजपा पर कटाक्ष करते हुए कहा कि साड़ से जहाँ किसान परेशान हैं, वहीं योगी-माेदी की राज में मँहगाई से आम जनता त्रस्त है।

बता दें कि इससे पहले ओमप्रकाश राजभर ने रविवार (27 फरवरी, 2022) को बलिया के रसड़ा इलाके में एक सभा को संबोधित किया था। राजभर ने यहाँ पर भी बीजेपी पर निशाना साधते हुए दावा किया था कि पूर्वांचल में भारतीय जनता पार्टी का खाता भी नहीं खुलेगा। राजभर ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी रसड़ा सीट पर जीत हासिल करेगी। राजभर ने इसी रैली में कहा कि अगर योगी के पास बुलडोजर है, तो मेरे पास पोकलैंड है और हम उसमें बुलडोजर को लाद लेंगे।

गौरतलब है कि 2017 में बीजेपी के साथ चुनाव लड़कर योगी सरकार में मंत्री बने राजभर इस चुनाव में समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ रहे हैं। बीजेपी से अलग होने के बाद से ही वह सीएम योगी को लगातार निशाने पर रखते आए हैं।

झारखंड के जिस जिले में BJP कार्यकर्ता की पुलिस हिरासत में मौत, वहाँ अब दुर्गा मंदिर में ‘गोमांस’ फेंकने की घटना: मुस्लिम बहुल है गाँव

झारखंड का साहिबगंज जिला कई कारणों से विवाद में बना हुआ है। इसी जिले की बरहेट क्षेत्र से हेमंत सोरेन विधायक हैं, जो राज्य के मुख्यमंत्री भी हैं। हाल ही में पुलिस हिरासत में भाजपा कार्यकर्ता देबू तुरी की मौत का मामला गरमाया हुआ है। वहीं अब राजमहल थाना क्षेत्र के फुलबड़िया गाँव स्थित कालीबाड़ी दुर्गा मंदिर में गोमांस का टुकड़ा फेंके जाने की खबर आई है। इस सम्बन्ध में ‘विश्व हिन्दू परिषद (VHP)’ ने थाने में शिकायत भी दर्ज कराई है।

ये घटना सोमवार (28 फरवरी, 2022) की है। फुलबड़िया गाँव लखीपुर पंचायत के अंतर्गत आता है। विहिप के विभाग मंत्री कालीचरण मंडल ने इस सम्बन्ध में ऑपइंडिया से बात करते हुए बताया कि यहाँ हिन्दू अल्पसंख्यक हैं और मुस्लिम समुदाय की जनसंख्या बहुलता में है। उन्होंने बताया कि कालीबाड़ी दुर्गा मंदिर के भीतर सुबह में गोमांस का टुकड़ा फेंका गया है। उन्होंने जानकारी दी कि सुबह फूल तोड़ने पहुँची एक महिला ने जब गोमांस का टुकड़ा फेंका हुआ देखा तो वो चिल्लाने लगीं।

इसके बाद अरशद अली नाम के एक व्यक्ति ने आकर उस मांस के टुकड़े को फेंक दिया। हालाँकि, पुलिस इस बात की पुष्टि नहीं कर रही है कि वो गोमांस था। राजमहल के थाना प्रभारी प्रणीत पटेल ने कहा कि चूँकि पुलिस के पहुँचने तक वहाँ कुछ नहीं मिला था, इसीलिए वो इस बात की पुष्टि नहीं कर सकते कि वो गोमांस ही था। उन्होंने बताया कि पुलिस ने त्वरित फुर्ती दिखाते 10 मिनट के भीतर घटनास्थल पर पहुँचने का काम किया। उन्होंने आश्वासन दिया है कि इस मामले में FIR दर्ज की जाएगी।

थाना प्रभारी ने इस मामले में गिरफ़्तारी का आश्वासन भी दिया। वहीं ग्रामीणों का पूछना है कि आखिर अरशद अली ने उस गोमांस के टुकड़े को वहाँ से उठा कर क्यों फेंका? गाँव वालों का सवाल है कि क्या इसे सबूत मिटाना नहीं माना जाएगा? स्थानीय हिन्दू कार्यकर्ताओं का कहना है कि झारखंड पुलिस ने कुछ संदिग्ध लोगों की पहचान की बात कही है, लेकिन अभी खुलासा नहीं किया गया है। कालीचरण मंडल ने बताया कि उन्होंने DSP अरविंद सिंह को तुरंत इसकी सूचना दी।

हालाँकि, विहिप के विभाग मंत्री ने ये भी बताया कि मौजूदा DSP ऐसे मामलों को लेकर सख्त रहे हैं और त्वरित कार्रवाई करते हैं। उन्होंने कहा कि एक बार एक विहिप कार्यकर्ता की गला रेत कर हत्या कर दी गई थी, तब उन्होंने तुरंत गिरफ्तारियाँ की थीं। सुबह इस मामले के सामने आने के बाद स्थानीय थाना पभारी और SDO भी मौके पर मौजूद थे। किसी दंगे-फसाद की स्थिति को रोकने के लिए अगल-बगल के थानों की पुलिस भी लगाई गई थी। ग्रामीणों में अब भी तनाव का माहौल है।

साहिबगंज, पाकुड़ और गोड्डा जिलों में विहिप के प्रमुख कालीचरण मंडल ने बड़ा खुलासा करते हुए बताया, “गाँव में मुस्लिमों की जनसंख्या अधिक होने के कारण मंदिर में शंख बजाना भी मना था। यहाँ तक कि मस्जिदों के सामने शवयात्रा गुजरने के दौरान हिन्दू ‘राम नाम सत्य है’ भी नहीं बोल सकते। गाँव में कई मस्जिदें हैं। झारखंड में भाजपा की सरकार नहीं है, जो हिन्दू हितों का ख्याल रखती है। प्रशासन का कहना है कि आरोपित घर पर नहीं मिले। अगर 48 घंटों के भीतर गिरफ़्तारी यहीं होती है तो हमलोग चरणबद्ध तरीके से आंदोलन करेंगे।”

विश्व हिन्दू परिषद ने चेताया है कि मंगलवार (1 मार्च, 2022) को महाशिवरात्रि का त्योहार है, ऐसे में पुलिस-प्रशासन कार्रवाई नहीं की तो संगठन अपने स्तर से इस मामले में विरोध प्रदर्शन करेगा। विहिप नेता ने बताया कि प्रशासन ने उन्हें हिन्दुओं को समझाने का निवेदन किया, ताकि कोई दंगा-फसाद न हो। उन्होंने बताया कि फ़िलहाल हिन्दुओं को समझा दिया गया है, लेकिन पुलिस को असामाजिक तत्वों को खोज कर निकालना होगा। उन्होंने बताया कि गाँव वाले डरे हुए हैं और इसीलिए कुछ बोलने से बच रहे हैं।

अनुमंडलाधिकारी को विहिप नेता ने सौंपा ज्ञापन

वहीं इस सम्बन्ध में ऑपइंडिया से बात करते हुए स्थानीय SDO रौशन कुमार साह ने कहा कि पुलिस ने बरामदगी नहीं की है, इसीलिए वो नहीं बता पाएँगे कि मंदिर में फेंकी गई चीज गोमांस ही थी या नहीं। उन्होंने नियमानुसार कार्रवाई की बात कही। वहीं हमसे बात करते हुए थाना प्रभारी ने कहा कि पुलिस ने अब तक कोई FIR दर्ज नहीं की है, लेकिन जल्द ही इसे दर्ज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि स्थिति नियंत्रण में है और दोनों समुदायों को समझाया-बुझाया गया है।

मौके पर इन दोनों के अलावा पुलिस इंस्पेक्टर राजीव रंजन, तीनपहाड़ थाना प्रभारी अनुपम प्रकाश, बरहड़वा पुलिस इंस्पेक्टर कुलदीप कुमार, कोटालपोखर थाना प्रभारी शिवकुमार सिंह और राधानगर के थाना प्रभारी कुंदन कांत मौजूद थे। पुलिस-प्रशासन ने ग्रामीणों और विहिप कार्यकर्ताओं के साथ बैठक भी की। मंदिर की साफ़-सफाई करवाई गई। VHP ने अनुमंडल अधिकारी को दिए गए ज्ञापन में कहा है कि हिन्दू-मुस्लिम सौहार्द बिगाड़ने और दंगा करवा कर भय का माहौल बनाने के लिए ये निंदनीय कृत्य को अंजाम दिया गया है।

स्थानीय थाना प्रभारी को सौंपी गई शिकायत

विहिप ने आशंका जताई है कि हिन्दू समुदाय को यहाँ से भगाने के लिए ये किया गया है। संगठन के नेताओं ने कहा कि पहले से ही यहाँ से हिन्दुओं को पलायन के लिए मजबूर करने के प्रयास किए जा रहे हैं। कार्रवाई न होने की सूरत में आंदोलन की चेतावनी दी गई है। वहीं थाना प्रभारी को सौंपी गई शिकायत में कहा गया है कि निर्दोष लोगों के कत्लेआम की साजिश के तहत प्राचीन दुर्गा मंदिर में मूर्ति के सामने गोमांस फेंका गया। विहिप ने आरोप लगाया कि इस घटना को संगठित तरीके से अंजाम दिया गया है और इसमें कई लोग शामिल हैं।

Vision IAS की शिक्षिका ने कश्मीरी हिंदुओं के ‘सामूहिक नरसंहार’ को ठहराया जायज, कहा- ‘हिजाब कल्चरल प्राइड, शेख अब्दुल्ला सेक्युलर’

सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले कोचिंग सेंटर Vision IAS के तथाकथित वामपंथी टीचर स्मृति शाह के कुछ और वीडियो सामने आए हैं जहाँ किसी में वह शेख अब्दुल्ला को सबसे ज़्यादा लिबरल और सोशलिस्ट बताते नहीं थक रहीं हैं वहीं वह दूसरे तरह से कश्मीरी पंडितों के पलायन और उन पर शोषण को भी जायज ठहरा रही हैं। एक वीडियो में तो वह खुलकर हिजाब और बुर्का के समर्थन में ज्ञान देते हुए इसे सोशल प्राइड बता डाला है। इस वीडियो में वह भगवा शाल या जय श्री राम कहने वालों को ही परोक्ष रूप से घेरतीं नजर आईं।

बीजेपी नेता कपिल मिश्रा ने एक वीडियो शेयर करते हुए कमेंट किया है, “यह हिंदुओं के खिलाफ पूरी तरह से नफरत फैलाना है और कश्मीरी हिंदुओं के सामूहिक नरसंहार को बेशर्मी से जायज ठहराना है। UPSC की तैयारी के नाम पर ये जिहाद की ट्रेनिंग है। यह आपराधिक कृत्य है और इसे कानून द्वारा दंडित करने की आवश्यकता है।” उन्होंने शिक्षा और स्किल डेवलॅपमेन्ट मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को भी टैग किया है।

हिजाब और बुर्का को कल्चरल प्राइड बताते हुए उसका जमकर बचाव किया गया है जिसने नए विवाद को जन्म दे दिया है।

वहीं कश्मीर पर बात करते हुए एक वीडियो में आजादी के बाद कश्मीर में लैंड रिफॉर्म की बात की गई है। बात की शुरुआत ही वीडियो में शेख अब्दुल्लाह को सेक्युलर और सोशलिस्ट बताते हुए किया गया है। जहाँ हिन्दुओं को जमींदार और मुस्लिमों को किसान बताते हुए उनके कृत्यों को वाइटवाश करने की कोशिश की गई है। यहाँ तक कि क्लास डिस्टिंक्शन के नाम पर मुस्लिमों के अत्याचार को भी जायज ठहराया गया है।

साथ ही एक वीडियो में धार्मिक सहिष्णुणता की बात करते हुए औरंगजेब को भी महान बताया गया है। यहाँ तक यह भी कहा गया है कि लोग आपसी भाईचारे के साथ रहते थे।

यहाँ तक की एक वीडियो में अंग्रेजों के शासन को भी नौकरी, शिक्षा जैसे पैमानों पर बेहतर साबित किया गया है। यहाँ भी समस्याओं के लिए धार्मिक भेदभाव को असहिष्णुणता और साम्प्रदायिकता का कारण बताया गया है। सबसे मजेदार बात है कि कहीं भी इस्लाम के खिलाफ कुछ भी नहीं है।

बता दें कि इससे पहले वाले वीडियो में भी इस्लामी प्रोपेगेंडा को ही आगे बढ़ाया गया था जिसे लेकर कल से ही हंगामा जारी है। इसमें महिला टीचर छात्रों को ‘भक्ति आंदोलन’ पढ़ा रही हैं और समझा रही हैं कि कैसे ये आंदोलन इस्लामिक लिबर्टी के कारण शुरू हुआ। वहीं अब हिन्दू धर्म की कई दूसरी मान्यताओं पर भी कटाक्ष करते हुए इस्लाम को बेहतर बताया गया है। ज़्यादातर वीडियो में भक्ति आंदोलन के नाम पर या समाज और परिवार समझाते हुए द्रौपदी आदि के बहाने हिन्दू धर्म को ही निशाना बनाया गया है।

आज सुबह ही सामने आए कुछ वीडियो में नींबू-मिर्ची और नारियल फोड़ने पर भी व्यंग्य है। वहीं संयुक्त परिवार पढ़ाते हुए संयुक्त परिवार की अवधारणा को कॉमन प्रॉपर्टी, सेक्सुअल ग्रैटिफिकेशन, रिप्रोडक्शन तक केंद्रित कर दिया गया है। वहीं हरियाणा-पंजाब के बहाने पॉलीएंड्री पर बात की गई है कि पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में संपत्ति को बचाए रखने के लिए कई बेटों के लिए एक पत्नी खरीदी जाती है। इस वीडियो में द्रौपदी का भी उदाहरण दिया गया है।

गौरतलब है कि इन सभी वीडियो में सबसे अधिक विवाद इस्लाम को लिबरल बताने और उसे सबसे अच्छा मजहब घोषित करने पर है। वीडियो में महिला टीचर पूछती हैं कि बताओ भक्ति आंदोलन का उद्देश्य क्या था। बच्चे जब जवाब में समानता बोलते हैं तो टीचर कहती हैं। सातवीं-आठवीं शताब्दी में कुछ नहीं था, इस्लाम आ गया था। इसलिए ये शुरू हुआ।

वह कहती हैं, “इस्लाम था बहुत लिबरल। वह समानता के बारे में बात करता था। कोई जाति व्यवस्था भी नहीं थी। अगर इस्लाम पढ़ा होगा तो एक चेरामन जुमा मस्जिद है जिसका मिनिएचर आपके पीएम ने सऊदी किंग को दिया । ये भारत का पहला मस्जिद है जो 7वीं-8वीं शताब्दी में बना। तब इस्लाम आया नहीं था। लेकिन इस्लाम आना शुरू हो गया था। उस समय वह उदारवाद, समानता के बारे में बात कर रहे थे। वह किसी भी तरह की कठोरता और जातिवाद से मुक्त थे। इस्लाम की एक खासियत थी जिसमें वह ईश्वर (अल्लाह) के प्रति पूरे समर्पण को लेकर बात करते थे। वे एक ईश्वर के कॉन्सेप्ट पर बात कर रहे थे।”

प्राप्त जानकारी के अनुसार, वीडियो में नजर आने वाली महिला टीचर का नाम स्मृति शाह है। जो पूर्व में आईएस परीक्षाओं की तैयारी करती थीं, लेकिन उनका एग्जाम नहीं क्लियर हुआ। ट्विटर पर इन्हें लेकर कहा जा रहा है कि स्मृति भारतीय समाज के बारे में बारे में विजिन आईएएस में पढ़ाती हैं। वह वामपंथी हैं और मोदी/भाजपा से नफरत करने वाली हैं।

वहीं इस महिला वामपंथी टीचर के कई वीडियो को देखने के बाद सोशल मीडिया पर कोचिंग सेंटर से जब खूब सवाल किए गए और एक ही दिन में उनकी ओर से जवाब भी आ गया। बयान में Vision IAS ने अपनी फैकल्टी की बात जस्टिफाई करते हुए लोगों को बताया है कि जो वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है वो वीडियो अब उनके किसी आधिकारिक प्लेटफॉर्म पर मौजूद नहीं है।

बांग्लादेश के मेडिकल कॉलेज में अब गैर-मुस्लिम छात्राओं को भी पहनना पड़ेगा हिजाब, हिन्दू संगठनों ने जताई आपत्ति

बांग्लादेश के जेस्सोर में स्थित ‘अद-दीन सकीना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल’ ने अब यहाँ पढ़ने वाली छात्राओं के लिए हिजाब पहनना अनिवार्य कर दिया है। यहाँ तक कि जो गैर-मुस्लिम छात्राएँ यहाँ पढ़ने आती हैं, उन्हें भी बिना हिजाब के कॉलेज कैम्पस में एंट्री नहीं मिलेगी। ये सब इसके बावजूद हो रहा है, जब बांग्लादेश के सुप्रीम कोर्ट ने 4 अक्टूबर, 2010 को ही कह दिया था कि किसी को भी उसकी इच्छा के विरुद्ध मजहबी कपड़े पहनने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता है।

हिन्दू संगठन ‘बांग्लादेश जातीय हिन्दू महाजोट’ ने कहा कि ‘अद-दीन सकीना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल’ के संस्थापकों में से एक शेख अफिलुद्दीन भी अल्पसंख्यक छात्र-छात्राओं को प्रताड़ित करने में शामिल है। इससे पहले ‘Newstrack’ ने अपनी एक खबर में बताया था कि कॉलेज की प्रशासनिक अधिकारी सुब्रता बासक ने दावा किया है कि ये नियम 2011 से ही चला आ रहा है। इस कॉलेज की स्थापना भी उसी साल हुई थी। शुक्रवार (25 फरवरी, 2022) को हिन्दू संगठन ने इस फैसले के विरुद्ध आपत्ति दर्ज कराई।

हालाँकि, सुब्रता बासक ने इस सवाल का कोई जवाब नहीं दिया कि क्या उनके कॉलेज का आदेश बांग्लादेश की सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरुद्ध नहीं है? एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में हिन्दू अधिकार संगठन ‘बांग्लादेश जातीय हिन्दू महाजोट’ ने कहा कि मुल्क के किसी भी शैक्षणिक संस्थान को गैर-मुस्लिमों को इस्लामी कपड़े पहनने के लिए मजबूर नहीं करना चाहिए। ‘बांग्लादेश हिन्दू नेशनल ग्रैंड अलायन्स’ के प्रवक्ता पलाश कांति डे ने कहा कि ये बांग्लादेश की न्यायपालिका के फैसले के विरुद्ध है।

उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थान छात्र-छात्राओं को इस्लामी टोपी, बुर्का या हिजाब पहनने के लिए मजबूर नहीं कर सकते। आरोप है कि इस मामले में कॉलेज एडमिशन के पहले ही छात्र-छात्राओं की लिखित सहमति ले रहा है। जो सहमति नहीं दे रहे हैं, उन्हें एडमिशन नहीं दिया जा रहा है। वहीं एक अन्य खबर में बताया गया है कि ‘अकीज ग्रुप्स लिमिटेड’ द्वारा संचालित सभी कॉलेजों में हिजाब को अनिवार्य कर दिया गया है। हिन्दू संगठनों ने बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना से इस मामले में हस्तक्षेप की माँग की।

हिन्दू अलायंस ने कहा, “डॉक्टर शेख अकीजुद्दीन ASMC के संस्थापक शेख मोहिउद्दीन का अब्बा था। वो 1971 में बांग्लादेश की आज़ादी के खिलाफ भी था। वो ‘जमात-ए-इस्लामी’ के छात्र संघ ‘छात्र शिबिर’ का का सदस्य था। तब वो बरिसाल मसिकल कॉलेज में पढ़ता था। उसके परिवार पर हिन्दू शरणार्थियों से लूटपाट के आरोप हैं।” बता दें कि बांग्लादेश के कट्टरपंथी वहाँ के हिन्दुओं को पहले ही धमका चुके हैं कि भारत में मुस्लिम छात्राओं को शैक्षिक संस्थानों में हिजाब में अनुमति नहीं मिली तो इसके गंभीर परिणाम होंगे।