त्रिपुरा में अब सार्वजनिक जगहों पर पशु वध नहीं किया जा सकेगा। साथ ही हाई कोर्ट ने सार्वजनिक स्थानों या सड़कों के किनारे माँस उत्पादों की बिक्री पर भी रोक लगा दी है। नए निर्देशों के अनुसार बूचड़खाने शुरू होने से पहले वैकल्पिक जगह उपलब्ध कराने के निर्देश भी राज्य सरकार को दिए गए है।
हाई कोर्ट ने पिछले सप्ताह ये निर्देश वकील अंकन तिलक पॉल की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में राजधानी अगरतला सहित पूरे राज्य में सार्वजनिक स्थलों पर माँस की बिक्री और पशु वध पर रोक लगाने की अपील की गई थी। लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार चीफ जस्टिस इंद्रजीत महंती और जस्टिस एसजी चट्टोपाध्याय की खंडपीठ ने राज्य सरकार को इस बाबत एक दीर्घकालीन योजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। निर्देशों को लागू करने के लिए अगरतला नगर निगम और राज्य सरकार को छह महीने का समय दिया गया है। इसके तहत केवल बूचड़खाने ही स्थापित नहीं किए जाएँगे, बल्कि कचरे के वैज्ञानिक तरीके से निपटान की व्यवस्था भी करनी होगी।
इससे पहले नवंबर 2021 में दो अन्य याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए त्रिपुरा हाई कोर्ट ने अगरतला में चल रही अवैध दुकानों को बंद करने के निर्देश नगर निगम और पशुपालन विभाग को दिए थे। इनमें से एक याचिका में कहा गया था कि राजधानी की सड़कों और फुटपाथों पर कई जानवरों मछलियों को बिना लाइसेंस के मारकर बेचा जा रहा है।
जब बलि प्रथा बैन करने को दिए अजीब तर्क
त्रिपुरा हाईकोर्ट ने सितंबर 2019 में एक फैसला बलि प्रथा पर पूरी तरह से प्रतिबन्ध लगाने को लेकर भी दिया था। इसके खिलाफ राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का फैसला किया था। हाई कोर्ट ने इस फैसले के पीछे अजीब तर्क दिए थे जिससे फैसला देने वालों की सोच में हिन्दू रीति-रिवाजों को न समझ पाने की असमर्थता साफ झलकती थी। पूर्वाग्रह से ग्रसित अपने इस जजमेंट में कोर्ट ने पूछा था- कौन सा धर्म या संप्रदाय जानवर पर बेवजह दर्द और पीड़ा डालने की बात करता है? किस धर्म में कहा गया है कि वध से पहले जानवर को मानसिक या शारीरिक कष्ट मुक्त नहीं करना चाहिए? कौन सा ऐसा धर्म है जो अपने अनुयायियों को जानवरों पर इंसानियत के नाते दया दृष्टि न रखने के लिए कहता होगा?
यूके में ईरान के एम्बेस्डर मोहसिन बहरवंद को इस्लामी मुल्क ने वापस बुला लिया है। हिजाब विवाद को लेकर उन्हें उनके पद से भी हटा दिया गया है। दरअसल, ईरानी एम्बेसी का एक वीडियो वायरल हुआ था। उसमें कुछ महिलाओं को बिना हिजाब के घूमते हुए देखा गया था। यूके स्थित ईरानी एम्बेसी में हुई पार्टी के इस वीडियो के बाद एम्बेस्डर को वापस बुला लिया गया है। सोशल मीडिया पर इसके कई वीडियो वायरल हुए थे। ईरान की सरकार ने इस पर आपत्ति जताई कि महिलाओं से सिर क्यों नहीं ढक रखा था।
उक्त कार्यक्रम ईरानी क्रांति की 43वीं वर्षगाँठ के अवसर पर आयोजित किया गया था। इसमें एक महिला को एक वायलॉनिस्ट के साथ पियानो बजाते हुए देखा गया था। उक्त महिला ने अपने सिर को नहीं ढक रखा था और हिजाब नहीं पहन रखा था। एक अन्य वीडियो में भी लोगों को परंपरागत रूप से जमा हुए देखा गया, जहाँ कुछ लोग भाषण भी दे रहे थे। इसमें अधिकतर राजनयिक ही शामिल थे। एक ईरानी व्यक्ति ने इसका वीडियो शेयर करते हुए पूछा कि क्या इससे हमारे नागरिकों का कोई फायदा है?
बाद में यूके में रह रहे ईरान के उक्त व्यक्ति ने इस पर ख़ुशी जताई कि उसकी बात को ईरान में सुना गया। उसने लंदन में एक ऐसे एम्बेस्डर को भेजने की बात कही, जो ईरानी जनता के लिए आवाज़ उठाए। जून 2021 में आई इब्राहिम रईसी की सरकार को कट्टर इस्लामी माना जाता है, इसीलिए कुछ सरकारी मीडिया संस्थानों में इस खबर के छपने के बाद कार्रवाई का दबाव था। मोहम्मद जावेद जरीफ के विदेश मंत्रित्व काल में मोहसिन ईरान के लीगल डिपार्टमेंट के हेड हुआ करते थे।
Reportedly Iran’s Ambassador to the UK is fired by Tehran. Mohsen Baharvand was just appointed last July. This video below, circulated in social media shows a recent party in the embassy without Islamic restrictions such as compulsory hijab. pic.twitter.com/cfKRZu7xPX
ब्रिटिश-ईरान संबंधों के लिए ये एक संवेदनशील समय है। अमेरिका ने ईरान के सामने कई शर्तें रखी हैं, ताकि न्यूक्लियर डील में उसकी वापसी हो सके और इस्लामी मुल्क पर से प्रतिबंध हटाए जा सकें। ईरान की संसद इस सम्बन्ध में विचार-विमर्श कर रही है। बता दें कि भारत में भी बुर्का और हिजाब एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है। कट्टर इस्लामी छात्राएँ स्कूल-कॉलेजों में यूनिफॉर्म की जगह बुर्का पहनना चाहती हैं और इसीलिए इस मामले में उच्च-न्यायालय में भी सुनवाई चल रही है।
सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले कोचिंग सेंटर Vision IAS के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। इससे पहले इस्लामी प्रोपेगेंडा फैलाने का एक वीडियो वायरल था जिसे लेकर कल से ही हंगामा जारी है। इसमें महिला टीचर छात्रों को ‘भक्ति आंदोलन’ पढ़ा रही हैं और समझा रही हैं कि कैसे ये आंदोलन इस्लामिक लिबर्टी के कारण शुरू हुआ। वहीं अब हिन्दू धर्म की कई दूसरी मान्यताओं पर भी कटाक्ष करते हुए इस्लाम को बेहतर बताया गया है। ज़्यादातर वीडियो में भक्ति आंदोलन के नाम पर या समाज और परिवार समझाते हुए द्रौपदी आदि के बहाने हिन्दू धर्म को ही निशाना बनाया गया है।
दूसरे वीडियो में नींबू-मिर्ची और नारियल फोड़ने पर व्यंग्य है। वहीं संयुक्त परिवार पढ़ाते हुए संयुक्त परिवार की अवधारणा को कॉमन प्रॉपर्टी, सेक्सुअल ग्रैटिफिकेशन, रिप्रोडक्शन तक केंद्रित कर दिया गया है।
Joint Family satisfies our sexual gratification. Marriage serves the purpose. And finally Reproduction.
वहीं हरियाणा-पंजाब के बहाने पॉलीएंड्री पर बात की गई है कि पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में संपत्ति को बचाए रखने के लिए कई बेटों के लिए एक पत्नी खरीदी जाती है। इस वीडियो में द्रौपदी का भी उदाहरण दिया गया है।
वहीं एक और वीडियो में फासिज्म पर बात करते हुए ओवैसी को विद्वान बताते हुए शशि थरूर, ओवैसी के भाषणों को सुनने की अपील की गई है।
इन सभी वीडियो में सबसे अधिक विवाद इस्लाम को लिबरल बताने और उसे सबसे अच्छा मजहब घोषित करने पर है। वीडियो में महिला टीचर पूछती हैं कि बताओ भक्ति आंदोलन का उद्देश्य क्या था। बच्चे जब जवाब में समानता बोलते हैं तो टीचर कहती हैं। सातवीं-आठवीं शताब्दी में कुछ नहीं था, इस्लाम आ गया था। इसलिए ये शुरू हुआ।
वह कहती हैं, “इस्लाम था बहुत लिबरल। वह समानता के बारे में बात करता था। कोई जाति व्यवस्था भी नहीं थी। अगर इस्लाम पढ़ा होगा तो एक चेरामन जुमा मस्जिद है जिसका मिनिएचर आपके पीएम ने सऊदी किंग को दिया । ये भारत का पहला मस्जिद है जो 7वीं-8वीं शताब्दी में बना। तब इस्लाम आया नहीं था। लेकिन इस्लाम आना शुरू हो गया था। उस समय वह उदारवाद, समानता के बारे में बात कर रहे थे। वह किसी भी तरह की कठोरता और जातिवाद से मुक्त थे। इस्लाम की एक खासियत थी जिसमें वह ईश्वर (अल्लाह) के प्रति पूरे समर्पण को लेकर बात करते थे। वे एक ईश्वर के कॉन्सेप्ट पर बात कर रहे थे।”
महिला टीचर कहती हैं, “इस्लाम का कहना था कि अगर एक ही अल्लाह है। उसी ने सबको बनाया है। इसका मतलब है कि सब एक ही हैं। वह सार्वभौमिक भाईचारे के बारे में बात कर रहा था। यही वजह है कि इस्लाम की ओर लोग आकर्षित होने लगे। जो लोग निम्न वर्ग के थे वो भी अपना स्तर बढ़ाने के लिए इस्लाम में आने लगे। उस समय था जब हिंदू सभ्यता के अस्तित्व पर खतरा आ गया। जब लोगों को कछ समझ नहीं आया तो उन्होंने भक्ति आंदोलन की शुरुआत की। वह बताना चाहते थे कि इस्लाम जैसा ही हिंदू धर्म है। ज्यादा फर्क नहीं है। थोड़ा 1 भक्ति आंदोलन में भी पूर्ण समर्पण और पूर्ण आस्था की बात हुई।”
जब से यह वीडियो वायरल हुए हैं तभी से सोशल मीडिया पर लोग दो चीजों पर सवाल कर रहे हैं। एक बात तो ये कि आखिर हिंदुत्व को इतना नीचा दिखाने का प्रयास बुद्धिजीवियों द्वारा क्यों किया जा रहा है? और दूसरा सवाल ये कि इस्लाम का महिमामंडन करके छात्रों का ब्रेनवॉश इस स्तर तक कैसे किया सकता है। लोग तंज कस रहे हैं कि गजनवी और बाबर न केवल सेकुलर लोग थे बल्कि लिबरल भी थे। उन्होंने भातीयों को सेकुलरिज्म का पाठ पढ़ाया और भारत में चल रहे भक्ति आंदोलन से निजात दिलाई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, वीडियो में नजर आने वाली महिला टीचर का नाम स्मृति शाह है। जो पूर्व में आईएस परीक्षाओं की तैयारी करती थीं, लेकिन उनका एग्जाम नहीं क्लियर हुआ। ट्विटर पर इन्हें लेकर कहा जा रहा है कि स्मृति भारतीय समाज के बारे में बारे में विजिन आईएएस में पढ़ाती हैं। वह वामपंथी हैं और मोदी/भाजपा से नफरत करने वाली हैं।
वहीं इस महिला वामपंथी टीचर के कई वीडियो को देखने के बाद सोशल मीडिया पर कोचिंग सेंटर से जब खूब सवाल किए गए और एक ही दिन में उनकी ओर से जवाब भी आ गया। बयान में Vision IAS ने अपनी फैकल्टी की बात जस्टिफाई करते हुए लोगों को बताया है कि जो वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है वो वीडियो अब उनके किसी आधिकारिक प्लेटफॉर्म पर मौजूद नहीं है।
अपने बयान में विजन आईएएस ने दावा किया है कि उनका मकसद किसी की भावनाएँ आहत करना नहीं था। हालाँकि अब भी कुछ लोग इस माफी से संतुष्ट नहीं है। कोचिंग सेंटर के लिए कहा जा रहा है कि वो बच्चों को फर्जी इतिहास पढ़ा ही क्यों रहे हैं। जब चौथी सदी में बौद्ध धर्म आया, छठी सदी में जैन, तो फिर भक्ति आंदोलन के पीछे इस्लाम को कारण कैसे बताया जा सकता है।
उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के कुंडा में समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी गुलशन यादव पर FIR दर्ज कर ली गई है। गुलशन यादव पर विजय प्रताप सिंह नाम के व्यक्ति को मारने – पीटने का आरोप है। गुलशन के साथ उनके 35 साथियों को भी आरोपित किया गया है। इन सभी पर विजय प्रताप सिंह को तब पीटने का आरोप है जब वो पूजा कर रहे थे। इसी के साथ आरोपितों द्वारा धार्मिक पुस्तकों और चिह्नों को अपमानित करने का आरोप लगा है। घटना 27 फरवरी (रविवार) की है।
यूपी के कुंडा विधानसभा के बनोहि गांव निवासी विजय प्रताप सिंह ने आरोप लगाया कि सपा उम्मीदवार गुलशन यादव कई गाड़ियों के साथ आए और घर में घुसकर मारपीट की, बोले सपा के पक्ष में वोट नहीं दोगे घर में घुस गए और मैं योगी जी का समर्थक हूं और उनकी पूजा करता हूं, रामचरित मानस फेंक दी.. pic.twitter.com/G5XQPFudrx
— आदित्य तिवारी / Aditya Tiwari (@aditytiwarilive) February 27, 2022
रो – रो कर दैनिक भास्कर को दिए बयान में विजय प्रताप ने कहा, “मैं अपने बरामदे में बैठा था। तभी गाड़ी से 25-30 आदमियों के साथ गुलशन यादव आए। हम सुबह वोट दे कर रामायण पढ़ रहे थे। हम योगी भक्त हैं। हम उनकी पूजा करते हैं। हम भाजपा समर्थक हैं। हमको जनसत्ता या साइकिल से कोई मतलब नहीं। जब से योगी जी मुख्यमंत्री हुए तब से मैं दीपक जलाता हूँ। मुझे माँ की गाली देते हुए वो बोले कि तू मुझे वोट नहीं दिला रहा। तू योगी को वोट दिला रहा। हमें वोट दिलाओ। वो हमारी फोटो और पीतल का दीपक भी उठा ले गए। रोका तो तमाचा मारा। योगी की फोटो जूते से कुचला। फिर उनके साथ वाले कार्यकर्ता उस फोटो को अपने साथ ले गए। हमारे साथ मारपीट की गई। फिर वो पुष्पेंद्र सिंह के घर में घुस गए।”
गुलशन यादव पर दर्ज FIR
इस शिकायत पर थाना कुंडा पर गुलशन यादव और उनके 30 – 35 साथियों पर धारा 452, 380, 427, 506 IPC के तहत केस दर्ज कर लिया गया है।
राजा भैया पर भी दर्ज हुई FIR
वही मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कुंडा से जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के प्रत्याशी रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया पर भी FIR दर्ज हुई है। उन पर समाजवादी पार्टी के पोलिंग एजेंट राकेश पासी को पीटने का आरोप है। इस FIR में राजा भैया के साथ भाष सिंह और गोपाल केसरवानी के साथ कुल 17 लोग आरोपित हैं। इन सभी पर SC / ST और अन्य धाराओं के तहत केस दर्ज हुआ है। एक दिन पहले प्रतापगढ़ के एडिशनल SP ने इस मामले में कार्रवाई की बात कही थी।
आज दिनाकं 27.02.2022 को थाना क्षेत्र कुण्डा के ग्राम रैयापुर में एक पोलिंग एजेन्ट से हुई मारपीट की घटना के संबंध में अपर पुलिस अधीक्षक, पश्चिमी, प्रतापगढ़ की बाइट।@Uppolice@ECISVEEPpic.twitter.com/pnJsNrtIGP
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के पाँचवें चरण में समाजवादी पार्टी ने चुनाव आयोग से प्रतापगढ़ में चुनाव में अव्यवस्था को ले कर कई ट्वीट किए थे। साथ ही सपा कैंडिडेट गुलशन यादव की पत्नी और भाई ने अपने एजेंटों और समर्थकों के साथ मारपीट का आरोप लगाया था।
सुप्रीम कोर्ट में इन दिनों प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) में जोड़े गए प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई हो रही है। इस बीच केंद्र ने इस एक्ट की तारीफ करके इसे मीडिया चर्चा में ला दिया है। केंद्र का कहना है कि इसी कानून और इसके प्रावधानों के कारण विजय माल्या, नीरव मोदी और मेहुल चोकसी जैसे भगोड़े लोगों से ₹18 हजार करोड़ लेकर बैंकों को लौटाए गए और अब भी करीब 67000 करोड़ रुपए के सैंकड़ों केस सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं।
PMLA की जरूरत
मौजूदा जानकारी के अनुसार, ईडी इस कानून के अंतर्गत 4, 700 केसों की जाँच कर रही है। मात्र पाँच सालों में इस कानून के अंतर्गत 2, 086 केस दर्ज हुए हैं। इस कानून का उद्देश्य काले धन को सफेद में बदलने वाली प्रक्रिया जिसे मनी लॉन्ड्रिंग कहते हैं, उससे लड़ना है। हमने भले ही मोदी सरकार के आने के बाद इस कानून को लेकर मीडिया में ज्यादा खबरें पढ़ीं। कभी मेहूल चोकसी, नीरव मोदी, विजय माल्या केस में तो कभी महाराष्ट्र के 100 करोड़ वसूली केस में। लेकिन हकीकत ये है कि ये कानून हाल फिलहाल में भारत में अस्तित्व में नहीं आया है। इसकी नींव भारत में 20 साल पहले अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के दौरान पड़ी थी, जिसके बाद इसके तहत अब तक इस मामले में 313 गिरफ्तारियाँ हो चुकी हैं।
ये आँकड़ा अन्य देशों में रजिस्टर होने वाले प्रति वर्ष केसों से बहुत कम है। लेकिन इसकी जरूरत और इसमें हुए संशोधनों की आवश्यता भारत में कम नहीं है। सबसे पहले भारत में मनी लॉन्ड्रिंग कानून, 2002 में अधिनियमित किया गया था, लेकिन इसके बाद इसमें 3 बार संशोधन (2005, 2009 और 2012) हुए। आखिरी संशोधन साल 2012 में हुआ था। जिसमें अपराधों की लिस्ट में धन को छुपाना, अधिग्रहण, कब्ज़ा और धन का आपराधिक कामों में उपयोग करना शामिल था।
PMLA के तहत चर्चित मामलों में कार्रवाई
गौरतलब है कि पिछले कुछ सालों में PMLA एक्ट के तहत कई बड़े घोटालों में कार्रवाई हुई है। इनमें एक घोटाला पोंजी एक्ट से जुड़ा है। जिसकी कार्रवाई में ईडी ने IMA समूह और इसके प्रबंध निदेशक, मोहम्मद मंसूर ख़ान के ख़िलाफ़ एक्शन लेते हुए 20 अचल सम्पत्तियों और मनी लॉन्ड्रिंग निरोधक अधिनियम (PMLA) के तहत 209 करोड़ रुपए ज़ब्त किए थे।
इसके अलावा पिछले साल बसपा नेता हाजी इकबाल पर इस मामले में कार्रवाई हुई थी। ईडी ने बसपा के पूर्व एमएलसी और सहारनपुर के खनन माफिया हाजी मोहम्मद इकबाल की 1097 करोड़ रुपए की संपत्तियों को अटैच किया था। ऐसे ही केंद्र सरकार ने कुछ दिन पहले ही जानकारी दी थी कि कोर्ट के द्वारा पीएमएलए के अंतर्गत जारी किए ऑर्डर के तहत ईडी ने विजय माल्या, नीरव मोदी और चोकसी के मामलों में अब तक 18 हजार करोड़ रुपए की संपत्ति को जब्त किया है। इनमें विजय माल्या पर देश से 9 हजार करोड़ और नीरव मोदी पर 14 हजार करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप है। अभी हाल में पीएमएलए के तहत एबीजी शिपयार्ड कंपनी पर भी कार्रवाई हुई है। शिपयार्ड पर आरोप हैं कि 23 हजार करोड़ का घोटाला कंपनी ने बैंकों से किया।
PMLA में दोषी पाए जाने पर दंड
धन शोधन कानून के तहत अगर कोई अपराधी पाया जाता है तो उसे कम से कम 3 साल की जेल जिसे 7 साल भी बढ़ाया जा सकता है। इसके अलावा अपराध की प्रवृत्ति देखते हुए इसमें जुर्माना लगाने का भी प्रावधान है। इस कानून का उद्देश्य यही है कि केंद्रीय एजेंसी मनी लॉन्ड्रिंग करने वाले लोगों पर सख्त से सख्त कार्रवाई कर सकें और मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल या उससे प्राप्त संपत्ति को जब्त कर सकें।
बॉम्बे हाई कोर्ट ने पुणे के पास हिल स्टेशन लवासा के निर्माण से संबंधित परियोजना के लिए दी गई अनुमति पर कोई आदेश पारित करने से इनकार कर दिया। इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि सरकारी तंत्र पर राष्ट्रीय कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP) प्रमुख शरद पवार और उनके परिवार के ‘प्रभाव एवं दबदबे’ के कारण ही इसका विकास हुआ।
अदालत ने अपने आदेश में लवासा हिल स्टेशन परियोजना को शरद पवार के दिमाग की उपज बताया। हाई कोर्ट ने परियोजना पर उठाए गए सवालों को योग्य बताते हुए कहा कि लवासा सिटी को लेकर राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस अध्यक्ष शरद पवार और सांसद सुप्रिया सुले की रुचि स्पष्ट रुप से दिखाई दे रहा है। इससे यह साबित होता है कि आरोप सही हैं।
जज ने कहा कि इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि शरद पवार और सुप्रिया सुले द्वारा प्रभाव और दबदबा का इस्तेमाल करना अनुचित निष्कर्ष है। इस तथ्य को दरकिनार नहीं किया जा सकता है। बता दें कि 2001 में महाराष्ट्र सरकार ने हिल स्टेशन के विकास की अनुमति दी थी। तत्कालीन उपमुख्यमंत्री अजित पवार जल संशाधन मंत्री थे, उनके आदेश से इस परियोजना को अनुमति मिली थी। जिसका याचिकाकर्ता ने विरोध किया था।
याचिकाकर्ता अधिवक्ता नानासाहेब जाधव ने यह कहते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया था कि पवार परिवार राजनीतिक स्थिति की वजह से बहुत शक्तिशाली और प्रभावशाली है। उन्होंने कहा कि इस राजनीतिक दबदबे की वजह से लवासा हिल स्टेशन परियोजना का विकास हुआ।
जनहित याचिका में राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी प्रमुख शरद पवार, उनकी बेटी और लोकसभा सांसद सुप्रिया सुले और शरद के भतीजे और उपमुख्यमंत्री अजीत पवार को प्रतिवादी के रूप में नामजद किया गया था। हालाँकि, जवाब में केवल अजीत पवार ने हलफनामा दाखिल किया।
इस याचिका में आगे कहा गया था कि तमाम विरोधों और चुनौतियों को दरकिनार करते हुए शरद पवार और उनके परिवार ने मिलकर अपने करीबी उद्योगपति को यह प्रोजेक्ट दिलवाया और प्रोजेक्ट को बचाने के लिए साल 2005 के कानून में फेरबदल करवाया। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि प्रोजेक्ट के लिए पर्यावरण के नियमों की धज्जियाँ उड़ाई गईं और राज्य सरकार के अलग-अलग विभागों से गलत तरीके से परमिशन लेकर प्रोजेक्ट को पूरा किया गया। याचिकाकर्ता ने अपनी शिकायत में यह भी आरोप लगाया कि लवासा हिल स्टेशन के प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए किसानों से कौड़ियों के मोल जमीन खरीदी गई। यानी एक तरह से कब्जाई गई।
आगे याचिका में लवासा के विकास के लिए विकास आयुक्त (उद्योग) की ओर से दी गई विशेष अनुमति को अमान्य, मनमानी, अनुचित और राजनीतिक पक्षपात पर आधारित घोषित करने की अपील की गई थी।
क्यों उठे लवासा प्रोजेक्ट पर सवाल?
हिल स्टेशन लवासा प्रोजेक्ट पर पर्यावरण मंत्रालय ने ‘पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन’ की अधिसूचना का उल्लंघन करने का आरोप लगाया था और कहा था कि निर्माण अनाधिकृत है और इससे पर्यावरण को नुकसान हुआ है। मंत्रालय ने कहा था कि लवासा जैसे बड़े हिल स्टेशन के प्रोजेक्ट को शुरू करने के लिए पर्यावरण अनुमति सबसे अहम होती है। प्रोजेक्ट के लिए यह अनुमति देने का अधिकार सिर्फ केंद्र सरकार के पास है।
वहीं प्रोजेक्ट पर जारी CAG की रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि लवासा प्रोजेक्ट में नियमों का पालन नहीं हुआ है। लवासा प्रोजेक्ट के तहत निजी कंपनियों को फायदा पहुँचाने की कोशिश की गई। तत्कालीन कृषि मंत्री शरद पवार के लवासा प्रोजेक्ट का समर्थन करने की बात भी सीएजी रिपोर्ट में सामने आई। सीएजी रिपोर्ट के मुताबिक अगर एकसमान पॉलिसी होती तो कई और हिल स्टेशन बन सकते थे।
झारखंड के जमशेदपुर में धर्मांतरण के आरोप में विवाद की खबर है। आरोप है कि गोलमुरी नामदा बस्ती के नानक नगर में एक घर में प्रार्थना सभा के नाम पर लोगों को धर्म-परिवर्तन के लिए बुलाया गया था। हिन्दू संगठनों ने मौके पर पहुँच कर विरोध किया। मौके पर पुलिस पहुँची और मामले को शांत करवाया। घटना रविवार (27 फरवरी, 2022) की है।
धर्मांतरण का आरोप लगा कर विरोध प्रदर्शन करने वालों में महिलाएँ भी शामिल रहीं। उन्होंने कथित प्रार्थना सभा में लगे बैनरों को उखाड़ फेंका। मौके पर कई पुरुष भी जमा थे। वो ‘धर्मांतरण के खिलाफ होश में आओ’ के नारे लगा रहे थे। पुलिस के साथ अन्य तमाम प्रशासनिक अधिकारी आक्रोशित लोगों को समझते हुए दिखाई दे रहे थे। आक्रोशित लोग जिला प्रशासन पर भी शिकायत के बाद भी कार्रवाई न करने का आरोप लगा थे।
हिंदू संगठनों का आरोप है कि रवि सिंह नाम का व्यक्ति लगभग 3 साल से जमशेदपुर में धर्मांतरण का रैकेट चला रहा है। वो हर रविवार को ‘चंगाई सभा’ के नाम पर भीड़ जुटाता है। साथ ही लोगों को ईसाई बनने के लिए प्रेरित करता है। ऑपइंडिया ने इस घटना की पूरी पड़ताल की। इस पड़ताल में हमने हिन्दू संगठनों, गुरुद्वारा कमेटी, पुलिस और आरोपित पक्ष से जानकारी जुटाई।
इस घटना का विरोध करने वालों में प्रमुख रहे जमशेदपुर के अरुण सिंह से ऑपइंडिया ने की बात
जमशेदपुर के निवासी और हिन्दू पीठ के अध्यक्ष अरुण सिंह ने ऑपइंडिया को बताया, “रवि सिंह और विश्वजीत सिंह नाम के 2 लोग अपने साथियों के साथ मिल कर जमशेदपुर में धर्म परिवर्तन का रैकेट चला रहे हैं। ये ऐसा लगभग 3 साल से कर रहे हैं। ये दोनों पहले सरदार (सिख) थे। बाद में ईसाई हो कर इन्होंने जमशेदपुर में ठिकाना बना लिया। ये लोगों को हाथ से छू कर इलाज करने का दावा करता है। कोरोना काल में भी इसने सैकड़ों लोगों के साथ ऐसा किया। हम पिछले काफी समय से इसके खिलाफ प्रशासन में शिकायत कर रहे हैं। लेकिन, प्रशासन ने कोई भी ठोस एक्शन नहीं लिया। लोगों में अन्धविश्वास के साथ लालच भी इन आरोपितों द्वारा फैलाया जाता है। सभा में सबको ईसाई धर्म की किताब दे दी जाती है।”
घटना के दिन की जानकारी देते हुए अरुण सिंह ने बताया, “रविवार को लगभग 400 से 500 लोग रवि सिंह के छोटे से घर में जमा थे। वहाँ कोविड के नियमों का पालन भी नहीं किया जा रहा था। एक महिला को लालच दिया गया था कि आए लोगों को धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित करो। हर धर्मांतरण के बदले 5000 रुपए देने का वादा किया गया था। महिला ने ऐसा करने से मना कर दिया। साथ ही हम सभी को सूचना दे दी। हम एक साथ जमा हुए और विरोध किया। तब तक पुलिस भी आ गई। पुलिस ने रवि को हिरासत में लिया। हमें पता नहीं कि उसे जेल भेजा गया या नहीं।”
बाँटे गए पर्चे
अरुण सिंह ने आगे बताया, “ये सभी हिन्दू के नाम से ही अपने तमाम सभा और जमावड़े करते हैं। रविवार की भी सभा इन्होंने महाभिषेक की प्रार्थना सभा नाम से जुटाई थी। हमारे साथ सिख समाज के लोग भी थी विरोध प्रदर्शन करने में। सिख समाज पहले ही इन लोगों को अपने समाज से बहिष्कृत कर चुका है। इस इस केस में एक महिला ने आरोपितों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दी है। यहाँ धर्मांतरण बड़े पैमाने पर हो रहा है।”
हिन्दू संगठनों द्वारा विरोध प्रदर्शन
एम साई कुमारी ने दी है आरोपित रवि सिंह के खिलाफ पुलिस में शिकायत
इस घटना में आरोपित रवि सिंह के खिलाफ पुलिस में शिकायत एम साईं कुमारी नाम की एक महिला ने दी है। अपने शिकायत में उन्होंने लिखा, “मैं कुछ महिलाओं के साथ रवि सिंह और विश्वजीत सिंह की महाभिषेक सभा में 10 बजे सुबह गई। इस सभा में गरीब तबके और सिख समुदाय के लोग भी मौजूद थे। मुझे लोगों को ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित करने को कहा गया। इसके बदले मुझे 5 हजार रुपए प्रति व्यक्ति देने का वादा किया गया। जब मैंने मना किया तब मुझ पर झूठे केस लगाने की धमकी दी। साथ ही मेरे साथ गई महिलाओं को धक्के मार कर निकाल दिया गया। यहाँ हिन्दुओं का धर्म परिवर्तन करवाने का कुचक्र चल रहा है।”
आरोपित रवि सिंह के खिलाफ थाने में दी गई शिकायत
जमशेदपुर के सरदार शैलेन्द्र सिंह ने आरोपितों को बताया देशद्रोही
ऑपइंडिया ने इस घटना के बारे में झारखंड के गुरुद्वारा प्रबंध कमेटी के प्रमुख सरदार शैलेन्द्र सिंह से बात की। उन्होंने बताया, “धर्मांतरण की ऐसी करतें जमशेदपुर ही नहीं बल्कि पंजाब तक हो रही हैं। रवि सिंह जैसे ये लोग विदेशों से पैसा पा कर हमारे देश में हर धर्म के लोगों को निशाना बनाते हैं। ये देशद्रोह जैसी हरकत है। रवि सिंह ने हमारे सरदारों में से भी कइयों को अपने साथ मिला लिया था। बाद में उन्होंने गुरुद्वारे में आ कर माफ़ी माँगी और अपनी वापसी करवाई। हम सिखों ने भी कुछ समय पहले इनकी शिकायत प्रशासन से की। लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। रविवार को अचानक ही बम फट गया। इनकी जाँच होनी चाहिए। हम सिख समाज के लोगों का इन लोगों से कोई मतलब नहीं।”
पुलिस ने अभी तक नहीं की है कोई भी गिरफ्तारी
ऑपइंडिया ने इस घटना की जानकारी जमशेदपुर के एस पी सिटी से ली। उन्होंने बताया, “पूरे मामले की जाँच पुलिस कर रही है। दोनों पक्षों ने पुलिस में शिकायत की है। अभी तक इस मामले में किसी की भी गिरफ्तारी नहीं की गई है। आगे की जानकारी जाँच की प्रगति के आधार पर दी जाएगी।”
पुलिस कस्टडी में आरोपित पास्टर रवि
आरोपित की रवि सिंह की बहन ने अपने भाई को बताया निर्दोष
ऑपइंडिया ने आरोपित रवि सिंह से सम्पर्क किया। फोन रवि सिंह की बहन ने सीता कौर ने उठाया। उन्होंने बताया, “हमारे ऊपर लग रहे आरोप झूठे हैं। हम किसी को धर्म परिवर्तन का दबाव नहीं देते। हम मूल रूप से पंजाब के जालंधर से हैं। किसी से आरोप लगा देने से कुछ नहीं होता। उसे सिद्ध करना होता है। इस केस में भी हमारे खिलाफ अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है क्योंकि हमने कुछ किया ही नहीं है।” अब ऑपइंडिया ने उनसे सवाल किया कि क्या आप सिख थीं और अब ईसाई बन चुकी हैं तो इस पर उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया और बात को टाल दिया।
सोशल मीडिया पर ईसाइयत की पोस्ट शेयर किया करता है रवि सिंह
ऑपइंडिया ने आरोपित रवि सिंह के सोशल मीडिया हैंडल को खंगाला। रवि सिंह के फेसबुक पर चंगाई सभाओं के तमाम फोटो और वीडियो शेयर हुए हैं।
रवि सिंह खुद को पास्टर कहता है। उसके सोशल हैंडलों पर यहोवा अदि के संदेश अक्सर प्रकाशित होते रहते हैं। कथित प्रार्थना सभा के दौरान आने वाले मरीजों के फोटो भी उसने शेयर कर रखे हैं।
पास्टर रवि
पास्टर रवि ने रविवार की घटना को भी अपने फेसबुक पर LIVE किया था।
दुनिया में दो तरह के लोग होते हैं। कुछ खतरे मोल लेते हैं तो कुछ की किस्मत ही ऐसी होती है कि खतरा उनके पीछे-पीछे चलता है। 21 साल के ब्रिटिश छात्र माइल्स रूटलेज (Miles Routledge) दूसरे टाइप में आते हैं। यानी, जहाँ भी जाते हैं हिंसा शुरू हो जाती है।
माइल्स रूटलेज इस वक्त यूक्रेन (Russia Ukraine War) की राजधानी कीव (Keiv) में फँसे हुए हैं। इससे पहले ये ऐन लड़ाई के वक्त ही अफगानिस्तान पहुँच गए थे। तब काबुल में कई दिनों तक फँसे रहने के बाद इन्हें बाहर निकाला गया था। अब कीव में भयानक लड़ाई के बीच फिर माइल्स फँस गए हैं। खीझ में उन्होंने खुद को सबसे ‘पनौती टूरिस्ट’ (The Most Disaster Tourist) बता डाला है। बर्मिंघम का रहने यह वाला यह ब्रिटिश छात्र अपनी छुट्टियाँ मनाने के लिए 25 फरवरी को यूक्रेन की राजधानी कीव पहुँचा था। पोलैंड से कीव पहुँचने के लिए ट्रेन ली और इसका स्टेटस भी ट्विटर पर अपडेट किया था।
युद्ध जारी होने के बावजूद, माइल्स को यूक्रेन में एंट्री मिल गई। उसने दावा किया कि इस दौरान उनके दस्तावेजों की जाँच किए बिना तुरंत अनुमति मिल गई। एक होटल के शेल्टर से उन्होंने डेली स्टार को बताया, “मैं कैथोलिक हूँ। अगर मैं मर गया तो उम्मीद है कि मैं स्वर्ग जाऊँगा। अगर ऐसा नहीं होता है और मैं जीवित रहता हूँ, तो यह अच्छी बात है। यदि मैं एक या दो अंग खो देता हूँ तो मुझे लगता है कि मैं लाभ का दावा कर सकता हूँ।” माइल्स ने कहा कि उसे खतरनाक जगहों का पता लगाना और फिर इस तरह के खतरनाक जगहों पर जाने में मजा आता है।
जब रूस कीव पर गोले-बारूद बरसा रहा था, तो माइल्स ने अपने एक ट्वीट में लिखा, “लंदन और बर्मिंघम से कीव अब भी ज्यादा सुरक्षित है, चूँकि मैं बर्मिंघम से हूँ, इसलिए ये कह सकता हूँ।” माइल्स ने अपने एक ट्वीट में बताया था कि डोनेस्क पहुँचने पर यूक्रेन के सैनिकों ने उसे सेना की वर्दी दी और पुतिन का मास्क भी दिया, जिसे पहनकर वो रूस पर चिल्लाए भी। उन्होंने यूनिफॉर्म और पुतिन का मास्क पहने अपनी तस्वीर भी शेयर की थी।
Refresher: Last week when I was in Donetsk, Ukraine, I befriended some soldiers, got a free uniform, wore a Putin mask yelling at the Russians and went to an abandoned old airforce base pic.twitter.com/QSca5nPueS
गौरतलब है कि इससे पहले माइल्स अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में तब फँस गए थे जब तालिबान वहाँ कब्जा कर रहा था। माइल्स दुनिया की सबसे खतरनाक जगहों के बारे में पता लगाना चाहते थे इसलिए वे अफगानिस्तान गए थे। हालाँकि, तालिबान के कब्जे ने उन्हें छिपने के लिए मजबूर कर दिया था। ऐसे माहौल में इस खतरनाक यात्रा के लिए माइल्स की सोशल मीडिया पर खूब आलोचना भी हुई थी।
I’ll probably go back to Afghanistan within the year
अब माइल्स ने अपने हालिया ट्वीट में एक बार फिर दावा किया है कि वह इस साल के अंत तक अफगानिस्तान जाएगा। वह दक्षिणी सूडान में भी थोड़ा वक्त बिता चुका है, जब वहाँ गृहयुद्ध चल रहा था।
यूक्रेन के हालातों के मद्देनगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक हाई लेवेल मीटिंग करके कुछ केंद्रीय मंत्रियों को यूक्रेन के पड़ोसी देशों में भेजकर वहाँ से नागरिकों को सकुशल वापस लाने का जिम्मा सौंपा है। सरकारी सूत्रों से ये जानकारी उस समय आई है जब यूक्रेन में फँसे छात्र शिकायत कर रहे हैं कि उनके साथ वहाँ यूक्रेनी सेना बदसलूकी कर रही है और उन्हें बॉर्डर से ये कहकर वापस भेज रही है कि ‘जब तुम यूएन में हमारे साथ नहीं दे रहे हो तो यहाँ आते क्यों हो’।
Union Ministers Hardeep Singh Puri, Jyotiraditya Scindia, Kiren Rijiju and Gen (Retd) VK Singh to travel to neighbouring countries of Ukraine to coordinate the evacuation mission and help students: Govt sources#RussiaUkraineCrisispic.twitter.com/DbaQ6U47KQ
समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, सरकारी सूत्रों ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, ज्योतिरादित्य सिंधिया, किरण रिजिजू और जनरल (रिटायर्ड) वीके सिंह को भारतीयों की मदद के लिए यूक्रेन के पड़ोसी देश भेजने का निर्णय लिया है। वहाँ जाकर ये टीम भारतीयों को रेस्क्यू करने और छात्रों की मदद करने का काम करेगी। इससे पहले पीएम मोदी ने साल 2015 में भी जनरल वीके सिंह को युद्धग्रस्त यमन से भारतीयों को वापस लाने का जिम्मा सौंपा था।
बता दें कि मोदी सरकार द्वारा पहले ही ‘ऑपरेशन गंगा’ के जरिए यूक्रेन से 20 हजार भारतीयों को वहाँ से निकालने का प्रयास चल रहा है। मगर, कल सोशल मीडिया पर कुछ वीडियोज आईं जिनमें दावा हुआ कि यूक्रेनी सेना उन्हें वापस लौटने को बोल रही है। ऐसी स्थिति में पीएम मोदी ने बिन देरी दिखाए ये फैसला लिया है।
यूक्रेन से भारतीयों को वापस लाने के क्रम में आज एयर इंडिया की एक फ्लाइट नई दिल्ली आई। इस फ्लाइट में 249 नागरिक सवार थे। दिल्ली एयरपोर्ट पर लैंड करने के बाद छात्रों ने बताया कि आपदा के इस वक्त में उन्हें सरकार से काफी मदद मिली।
मालूम हो कि पीएम मोदी पहले ही एक उच्च स्तरीय बैठक में छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चिच करने और उन्हें यूक्रेन से निकालने को अपनी प्राथमिकता बता चुके हैं। वहीं खबरों में ये बात सामने आई है कि सरकार ‘ऑपरेशन गंगा’ के तहत 2 मार्च तक 7 और चार्टर फ्लाइट की व्यवस्था कर रही है ताकि जल्द से जल्द सारे भारतीयों को वापस लाया जा सके।
यूक्रेन पर रूसी हमले के बीच भारतीयों की स्वदेश वापसी का क्रम भी जारी है। ‘ऑपरेशन गंगा’ के तहत यूक्रेन से फँसे भारतीय नागरिकों को लेकर सोमवार (28 फरवरी 2022) की सुबह एक और फ्लाइट नई दिल्ली पहुँची। एयर इंडिया की इस फ्लाइट में 249 भारतीय नागरिक सवार थे। रोमानिया की राजधानी बुखारेस्ट से यह दिल्ली के लिए पाँचवीं ऐसी उड़ान थी। नई दिल्ली एयरपोर्ट पर लैंड करने के बाद छात्रों ने बताया कि आपदा के इस वक्त में उन्हें सरकार से काफी मदद मिली।
दिल्ली एयरपोर्ट पर पहुँचे छात्रों ने कहा, “सरकार ने हमारी बहुत मदद की है। भारतीय दूतावास से हरसंभव सहायता प्रदान की गई। सबसे बड़ी समस्या बॉर्डर पार करना है। हमें उम्मीद है कि सभी भारतीयों को वापस लाया जाएगा। कई और भारतीय अभी भी यूक्रेन में फँसे हुए हैं।”
“Government has helped us a lot. All possible support was provided by the Indian Embassy. The main problem is crossing the border. I hope all Indians are brought back. There are several more Indians still stranded in Ukraine,” said the students who arrived to Delhi from Ukraine pic.twitter.com/UU5zRseUcx
इससे पहले विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने रविवार (27 फरवरी, 2022) को बताया था कि युद्धग्रस्त यूक्रेन से भारत अपने करीब 2,000 नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकाल चुका है। वहाँ फँसे अन्य नागरिकों को पड़ोसी देशों की सीमाओं पर स्थित विभिन्न ट्रांजिट प्वाइंट के माध्यम से बाहर निकालने का प्रयास जारी है। इनमें से 1,000 लोगों को हंगरी और रोमानिया के रास्ते चार्टर्ड विमानों से घर लाया जा चुका है। पत्रकारों से बातचीत में श्रृंगला ने बताया कि उन्होंने यूक्रेन और रूस के राजदूतों से अलग-अलग बैठकें की हैं और यूक्रेन में रह रहे भारतीय नागरिकों का लोकेशन साझा किया है ताकि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। बताया जा रहा है कि यूक्रेन में अभी भी करीब 16 हजार भारतीय फँसे हैं।
इस मसले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी एक उच्च स्तरीय बैठक की। बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर, विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। बैठक में पीएम ने कहा कि छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और उन्हें यूक्रेन से निकालना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। बताया जा रहा है कि सरकार ‘ऑपरेशन गंगा’ के तहत 2 मार्च तक 7 और चार्टर फ्लाइट की व्यवस्था कर रही है।