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क्या सच में कोई नहीं रोक पाएगा पुतिन को? कई भविष्यवाणियाँ कर चुकीं ‘बाबा वेंगा’ ने दशकों पहले बता दिया था – रूस करेगा दुनिया पर राज

रूस और यूक्रेन में जारी जंग के बीच सोशल मीडिया पर बाबा वेंगा (Baba Vanga)  की खूब चर्चा हो रही है। कहा जाता है कि इन्होंने दशकों पहले इस युद्ध की भविष्यवाणी कर दी थी। इस भविष्यवाणी को मानें तो रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अब यूक्रेन (Ukraine) से युद्ध के बाद दुनिया के सबसे ताकतवर इंसान बनने वाले हैं और रूस दुनिया पर राज करेगा। ऐसा माना जाता है कि उनकी 85 फीसदी भविष्यवाणियाँ सही पाई गई हैं।

कोई नहीं रोक पाएगा रूस को- बाबा वेंगा

बाबा वेंगा ने कहा था कि रूस भविष्य में दुनिया का बादशाह बनेगा और यूरोप ‘बंजर भूमि’ (Wasteland) के रूप में बदल जाएगी। बाबा वेंगा ने कहा था, “सभी बर्फ जैसे पिघल जाएँगे, केवल एक ही अछूता रहेगा- व्लादिमीर की शान, रूस की शान। कोई रूस को नहीं रोक पाएगा। रूस सबको अपने रास्ते से हटा देगा और दुनिया पर राज करेगा।”

1996 में हुआ था निधन

बाबा वेंगा का असली नाम वेंगेलिया पांडेवा गुश्‍तेरोवा (Vangeliya Pandeva Gushterova) था। उनका जन्म 1911 में बुल्गारिया में हुआ था। जब वे 12 साल की थी तो एक भयंकर तूफ़ान की वजह से उनकी आँखों की रोशनी चली गई थी। इसके बाद उन्होंने दावा किया कि ईश्वर ने उन्हें भविष्य में देखने के एक बहुत ही दुर्लभ उपहार दिया था। 85 साल की उम्र में वर्ष 1996 में बाबा वेंगा की मौत हो गई थी।  

उन्होंने 9/11 के आतंकी हमलों, ब्रेक्सिट, सोवियत संघ आदि को लेकर जो भविष्यवाणयाँ की थीं, वो सब सच हुईं। बाबा वेंगा ने अपने जीवन में 5079 तक की कई भविष्यवाणियाँ की हैं। जिनमें काफी भविष्यवाणी सही साबित हुई। उन्होंने चेरनोबिल आपदा और राजकुमारी डायना की मृत्यु की भी भविष्यवाणी की थी। इसके अलावा बाबा वेंगा ने इस्लामिक स्टेट के उदय की भी बात कही थी।

‘शराब नीति बचाव में हर सुनवाई पर ₹30 लाख खर्च कर रहे हैं केजरीवाल, कॉन्ग्रेस के अभिषेक मनु सिंघवी हैं वकील’: बीजेपी ने घेरा

दिल्ली सरकार की शराब नीति के खिलाफ भाजपा सांसद ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। उनका आरोप है कि मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल की सरकार ने इस याचिका के खिलाफ वकील के तौर पर अभिषेक मनु सिंघवी को खड़ा किया है। भाजपा सांसद ने अभिषेक मनु सिंधवी को काफी महँगा वकील बताते हुए दिल्ली सरकार की आलोचना की है। यह जानकारी उन्होंने आज 28 फरवरी (सोमवार) को दी है। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस का नाम उन्होंने ‘जनमत प्रेस कॉन्फ़्रेंस’ दिया था।

पत्रकारों को सम्बोधित करते हुए प्रवेश साहिब सिंह ने कहा, “जहाँ पर ये नीति आ रही है वहाँ पर हमारे संविधान का उल्लंघन है। मैंने व्यक्तिगत तौर पर हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल की है। इस याचिका की अब तक 4 सुनवाई हो चुकी है। इसकी अगली तारीख़ 14 मार्च को है। इस याचिका में मैंने नई शराब नीति को चैलेन्ज किया है। जब मैं अदालत की सुनवाई को देखता हूँ तो मुझे काफी ताज्जुब होता है।”

भाजपा सांसद ने आगे कहा, “आम आदमी पार्टी ने इसमें अभिषेक मनु सिंधवी को वकील किया है। अभिषेक मनु सिंधवी एक वरिष्ठ वकील हैं। उनकी फीस 30 लाख रुपए है। इस शराब नीति को बचाने के लिए दिल्ली सरकार हर सुनवाई पर वकीलों पर 30 लाख रुपए खर्च करती है। वो अपनी इस गलती पर पर्दा डाल रही है कि दिल्ली को कैसे बर्बाद करना है।”

प्रवेश साहिब सिंह

भाजपा संसद ने आगे कहा, “अरविंद केजरीवाल सरकार की जनविरोधी शराब नीति के खिलाफ दिल्ली भाजपा एक बड़ा अभियान पूरी दिल्ली में आगामी 4 मार्च से शुरू कर रही है। इस अभियान में दिल्ली की 1000 जगहों पर इस जनमत पत्र के द्वारा 10 लाख लोगों की राय / मत लेंगे।”

‘रूसी सैनिक को पीटती यूक्रेन की बच्ची’: NDTV और कॉन्ग्रेस ने 10 साल पुरानी वीडियो दिखा फैलाई फेक न्यूज

NDTV ने एक बार फिर से एक छोटी लड़की के 10 साल पुराने वीडियो के जरिए उसे यूक्रेनी बताते हुए और वह रूसी आक्रमण का विरोध करने के लिए खड़ी है, ऐसा कहकर फेक न्यूज़ फैलाया है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि एक सिपाही हथियार लेकर खड़ा है और एक छोटी सी बच्ची उसे पीटने लगती है। वह छोटी बच्ची बिना किसी डर के रूसी सैनिक पर चिल्लाती रहती है। NDTV ने बिना जाँच किए इस पर प्रकाशित अपने रिपोर्ट में लोगों को गुमराह किया है।

वीडियो को कॉन्ग्रेस पार्टी के कुछ नेताओं द्वारा भी ट्विटर पर शेयर किया गया। यह मोहम्मद ज़ोहा खान द्वारा भी पोस्ट किया गया था, जिनके ट्विटर प्रोफाइल में कहा गया है कि वह एक कॉन्ग्रेसी नेता हैं। उन्होंने वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “इस नन्ही बच्ची की हिम्मत को सलाम देश के लिए हर किसी का खून खौलता है। @LambaAlka”

इसे कॉन्ग्रेस नेता और पूर्व सांसद उदित राज द्वारा संचालित संगठन अखिल भारतीय परिसंघ के ट्विटर हैंडल से भी साझा किया गया। अखिल भारतीय परिसंघ का ट्विटर पर एक सत्यापित हैंडल है। इसने भी NDTV की तरह ही फेक न्यूज़ फैलाने इरादे से ही वीडियो अपलोड किया, जिसमें कहा गया था कि वह एक यूक्रेनी है और रूसी आक्रमण का विरोध करने के लिए खड़ी है।

हालाँकि, ट्विटर ने अखिल भारतीय परिसंघ द्वारा पोस्ट किए गए वीडियो को “स्टे इन्फॉर्मड! इस मीडिया को संदर्भ से बाहर बताया गया है।” इस फ्लैग का मतलब है कि सोशल मीडिया पर प्रसारित विभिन्न वीडियो और चित्र पिछले वर्षों में लिए गए थे और यूक्रेन में वर्तमान स्थिति से जुड़े नहीं हैं।

क्या है सच्चाई

बता दें कि यह वीडियो 10 साल पुराना है और एक फ़िलिस्तीनी लड़की का है।

एनडीटीवी द्वारा रिपोर्ट किया गया और कॉन्ग्रेस पार्टी के नेताओं द्वारा साझा किया गया वीडियो 10 साल पुराना है। यह एक वीडियो है जिसे 2012 में फिलिस्तीन में शूट किया गया था। वीडियो में दिख रही लड़की अहद तमीमी है जिसने इस्राइल के वेस्ट बैंक में एक इजराइली सैनिक के सामने खड़ी है।

वह इजरायली सेना द्वारा अपने भाई की गिरफ्तारी के खिलाफ खड़ी हुई है। तमीमी को 2017 के अंत में नेबी सालेह के वेस्ट बैंक गाँव में अपने घर के बाहर इजरायली सैनिकों को मारते और हमला करते हुए कैमरे में कैद होने के बाद आठ महीने जेल की सजा सुनाई गई थी। उसे 2018 में रिहा किया गया था।

अक्षय कुमार की ‘पृथ्वीराज’ का नहीं बदलेगा नाम: दिल्ली हाई कोर्ट ने खारिज की याचिका, जुर्माने की भी चेतावनी

अक्षय कुमार की आने वाली फिल्म ‘पृथ्वीराज’ का टाइटल बदलने की माँग करने वाली जनहित याचिका को दिल्ली हाईकोर्ट में आज खारिज कर दिया गया। जस्टिस डीएन पटेल और जस्टिस नीना बंसल कृष्णा की पीठ ने न केवल इस याचिका पर सुनवाई करने से मना किया बल्कि वकील को जुर्माना लगाने की चेतावनी भी दी। अब याचिकाकर्ता के वकील द्वारा इस याचिका को वापस ले लिया गया है।

बता दें कि ये याचिका राष्ट्रीय प्रवासी परिषद द्वारा दायर की गई था। याचिका में कहा गया था कि फिल्म का टाइटल सिर्फ पृथ्वीराज कर दिया गया जो कि महान राजा का अपमान है। फिल्म का नाम ‘महान सम्राट पृथ्वीराज चौहान’ होना चाहिए। याचिका में माँग थी कि मूवी का नाम उस राजा के सम्मान में रखा जाए जिन्होंने 26 साल राज किया। अब इसी याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने कोई सुनवाई करने से मना कर दिया। अक्षय कुमार की ये फिल्म ‘पृथ्वीराज’ 1 अप्रैल को रिलीज होनी है। इसमें अक्षय के अलावा मानुषी चिल्लर, संजय दत्त, आशुतोष राणा, अली फजल व अन्य लोग हैं।

उल्लेखनीय है कि अप्रैल में रिलीज होने वाली ‘पृथ्वीराज’ इस साल के शुरूआत में ही विवादों में आई थी। फिल्म को लेकर राजपूत और गुर्जर समाज में ठनी थी। राजस्थान के अजमेर में फिल्म के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुआ था। तब, राजपूत और गुर्जर समाज, दोनों के संगठन उन्हें अपना बता रहे थे। गुर्जर संगठनों का आरोप था कि फिल्म में सम्राट पृथ्वीराज चौहान को राजपूत समाज से बताया गया है, जो सही नहीं है। यही कारण है कि अजमेर के वैशाली में स्थित भगवान देवनारायण मंदिर में प्रदर्शन हुआ। वहीं राजपूत संगठनों का कहना था कि ये साबित करने की कोई ज़रूरत नहीं है कि पृथ्वीराज चौहान राजपूत थे, क्योंकि यही वास्तविकता है। राजपूत नेता भँवर सिंह ने कहा कि असलियत को बदला नहीं जा सकता है। वहीं गुर्जर समाज ने अजमेर जिला प्रशासन के समक्ष याचिका दायर कर फिल्म की रिलीज को रोकने की माँग की।

खेल क्रिकेट का, स्कोर हिंदू घृणा का: स्टेडियम के बाहर लिबरल खूब कर रहे हिंदूफोबिया की कमेंट्री

सेकुलर-लिबरल जमात अक्सर उन पिचों की तलाश में रहता है, जहाँ से वे हिंदू घृणा फैला सके। क्रि​केट इनकी नई पिच है। उन्हें भारत में क्रिकेट की दीवानगी का भरपूर एहसास है। इसलिए क्रिकेट के कई कथित अंतरराष्ट्रीय जानकार और पत्रकार खेल के नाम पर जमकर हिंदूफोबिया की कमेंट्री कर रहे हैं।

ऐसा भी नहीं कि क्रिकेट के बहाने प्रोपेगेंडा का ये खेल अचानक शुरू हुआ है। कई लोग अरसे से इससे जुड़े हैं। मसलन, सीएनबीसी ने नवंबर 2021 में एक लेख प्रकाशित किया था। टी20 वर्ल्ड कप में भारत-पाकिस्तान के बीच हुए मुकाबले को लेकर लिखी गई अनंत अग्रवाल की इस लेख के जरिए यह प्रोपेगेंडा फैलाया गया है कि भारत में असहिष्णुता बढ़ रही है। उल्लेखनीय है कि अक्टूबर 2021 के इस मुकाबले में पाकिस्तान को जीत मिली थी। लेख में उन कश्मीरी छात्रों पर कार्रवाई का ह​वाला दिया गया है, ​जो सोशल मीडिया पर पाकिस्तान की जीत का जश्न मना रहे थे। इसके आधार पर दावा किया गया है कि देश में धार्मिक तनाव चरम पर है। इस लेख को पढ़ने पर आप पाएँगे कि क्रिकेट की आड़ लेकर वे तमाम बातें की गई है जिनसे भारतीय संस्कृति, हिंदू धर्म, राष्ट्रवाद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि को नुकसान पहुँचाया जा सके।

सीएनबीसी का लेख

उससे भी पहले 2014 में ईएसपीएन की एक रिपोर्ट में राजद्रोह कानून को राष्ट्रीयता के खिलाफ बताया गया था। राष्ट्रीयता के भाव को लेकर प्रतिकूल टिप्पणियाँ की गईं थी। इसी तरह क्रिकेट की दुनिया का एक जाना-माना नाम ‘विजडन’ है। विजडन इंडिया में कई ऐसे पत्रकार हैं जो हिंदू विरोधी विचारों को अभिव्यक्त करने से संकोच नहीं करते हैं। सोशल मीडिया पर जो पत्रकार हिंदुओं को खुलेआम गाली देते हैं, उनमें से एक नाम सारा वारिस का भी है।

ईएसपीएन में प्रकाशित लेख

द क्विंट और एनडीटीवी जैसे संस्थानों में छप चुकीं सारा ने 2013 के एक ट्वीट में हिंदुओं को बलात्कारी बताया था। हालाँकि अब यह ट्वीट डिलीट हो चुका है। ट्वीट से हिंदुओं के प्रति उनकी नफरत स्पष्ट दिखती है। वे हिंदुओं को ही नीचा नहीं दिखाती, बल्कि भारतीय क्रिकेटर को कमतर बता विदेशी खिलाड़ियों की प्रशंसा में भी संकोच नहीं करती।

सारा वारिस के ट्वीट

गोरे इंग्लिश क्रिकेटरों का पक्ष लेने पर विजडन की पिछले साल पूर्व भारतीय क्रिकेटर सुनील गावस्कर ने भी आलोचना की थी। वैसे भी विजडन का भारतीयों के प्रति भद्दी टिप्पणी करने का इतिहास रहा है। 1983 के विश्व कप से पहले विजडन के एक संपादक डेविड फ्रिथ ने भारत की भागीदारी पर आपत्ति जताते हुए एक लेख तक लिख डाला था।

‘द ऑस्ट्रेलियन’ में 19 फरवरी 2021 को गिडन हाई का लेख प्रकाशित हुआ था। आप हैरत में रह जाएँगे कि क्रिकेट पर केंद्रित इस लेख में किसानों के प्रदर्शन तक पर चर्चा थी। भारत में लोकतंत्र कमजोर पड़ने का दावा करते हुए कहा गया था कि बीजेपी का तौर तरीका अल्पसंख्यकों, संस्थानों और मीडिया को डराने धमकाने वाला है।

जैकोबिन में प्रकाशित लेख

इसी तरह ‘जैकोबिन’ नामक एक वामपंथी पत्रिका ने 4 अगस्त 2019 को एक लेख ‘क्रिकेट इन द सर्विस ऑफ हिंदू नेशनलिज्म’ के नाम से प्रकाशित किया था। इसमें भारतीय क्रिकेट टीम के अमेरिका दौरे को हिंदू राष्ट्रवाद के प्रभाव के विस्तार का प्रयास बताया गया था। मोदी के दुबारा चुने जाने पर उनके समर्थन में भारतीय क्रिकेट दिग्गजों के ट्वीट को लेकर भी लेख में सवाल उठाए गए थे।

नकुल एम पांडे का ट्वीट

इस लेख के सह लेखकों में नकुल एम पांडे भी थे। ब्रिटेन में रहने वाले नकुल क्रिकेट के जानकार माने जाते हैं। लेकिन उनके ट्विटर प्रोफाइल को देखकर हिंदुओं और मोदी सरकार से उनकी घृणा का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।

नकुल एम पांडे का ट्वीट

जाहिर है लिबरलों ने हिंदुओं को नीचा दिखाने के लिए क्रिकेट को हथियार बनाना शुरू कर दिया है। इस खेल को लेकर भारतीयों की दीवानगी के कारण उन्हें लगता है कि नफरत का प्रचार करने में आसानी होगी। भले ही इनकी कारस्तानी से भारत की अंतरराष्ट्रीय साख को बट्टा न लगे, लेकिन खेल की आड़ में चल रहे इस प्रोपेगेंडा को हर कदम पर बेनकाब करना जरूरी है।

(मूल रूप से यह लेख अंग्रेजी में पल्लव ने लिखा है। इस लिंक पर क्लिक कर आप विस्तार से पढ़ सकते हैं)

कॉन्ग्रेस विधायक के भाई पर एम्बुलेंस कंपनी के अधिकारी से मारपीट का आरोप, चिट्ठी भेज कर अपने लोगों को नौकरी देने कहा था

राजस्थान के नवलगढ़ से कॉन्ग्रेस विधायक राजकुमार शर्मा के भाई पर मारपीट का केस दर्ज हुआ है। यह आरोप GVK कम्पनी के HR ने लगाया है। शिकायत के मुताबिक मारपीट करने में विधायक के भाई के साथ उनके लगभग 25 समर्थक भी शामिल थे। पीड़ित का आरोप है कि विधायक ने चिट्ठी लिख कर कुछ लोगों को नौकरी देने के लिए कहा था, जो न पूरा कर पाने के कारण उनके साथ मारपीट की गई है। इस मामले में पुलिस जाँच की बात कह रही है।

अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक कॉन्ग्रेस विधायक राजकुमार शर्मा ने 24 नवम्बर 2021 को ही GVK कम्पनी के HR प्रवीण कुमार शिंदे को पत्र लिख कर 12 लोगों को नौकरी देने के लिए कहा था। यह माँग पूरी न कर पाने पर शिंदे को फोन पर गालियाँ और धमकियाँ आनी शुरू हो गई। प्रवीण इसे नज़रअन्दाज़ करते रहे। घटना के दिन अचानक ही विधायक के भाई अपने 25 साथियों के साथ आ धमके। उन्होंने HR को पीट दिया।

पीड़ित शिंदे ने घटना के 2 दिन बाद गाँधी नगर थाने में तहरीर दी है। GVK कम्पनी कई राज्यों में 108 एम्बुलेंस सेवा को संचालित करती है। ड्राइवरों की नियुक्ति आदि का जिम्मा GVK कम्पनी पर ही होता है। विधायक राजकुमार शर्मा इस से पहले भी विवादित छवि के नेता रहे हैं। उन पर साल 2018 में एक महिला ने दुष्कर्म का आरोप लगाया था। बाद में जॉंच करते हुए CBCID ने आरोपों को झूठा बताते हुए केस बंद कर दिया था।

‘यूपी में दिख रहा परिवर्तन, अपराध पर लगा अंकुश’: ब्रिटेन तक CM योगी की धूम, कार रैली में गूँजा – ‘जो राम को लाए हैं, हम उनको लाएँगे’

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं। ऐसे में सभी राजनीतिक दल इस चुनाव में पूरा जोर लगा रही है। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार बीजेपी के लिए प्रचार कर रहे हैं। इस बीच यूपी में बीजेपी और योगी की यूपी में जीत के लिए ब्रिटेन में रह रहे भारतीयों ने भी एक नई पहल की शुरुआत की है। यूके में रह रहे भारतीय प्रवासियों ने योगी आदित्यनाथ के समर्थन के लिए यूके में कार रैली का आयोजन किया। 

इस रैली में लोगों को गाते हुए सुना जा सकता है, “यूपी में फिर से हम भगवा फहराएँगे। अयोध्या भी सजा दी है, काशी भी सजा दी है। मेरे राम कृपा करना, मेरे श्याम कृपा करना, मथुरा भी सजाएँगे। जो राम को लाए हैं, हम उनको लाएँगे। दुनिया में फिर से हम भगवा फहराएँगे…..” आगे प्रवासियों को ‘जय श्री राम’, ‘वंदे मातरम’ और ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाए।

कार रैली का आयोजन उत्तर प्रदेश की जनता को एक मैसेज देने के लिए किया गया था कि वह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए मतदान करें। आयोजकों का मानना है कि योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश में बहुत विकास किया है। यूके में रह रहे भारतीय मतदान तो नहीं कर सकते, लेकिन इस एक पहल से वह योगी और मोदी का समर्थन जरूर कर रहे हैं। उन्होंने लोगों से घर से बाहर निकल कर वोट करने की अपील की।

प्रवासी ने कहा कि आदित्यनाथ ने पिछले पाँच वर्षों में राज्य को बदल दिया है और उन्हें देश के सबसे अधिक आबादी वाले राज्य के लोगों की सेवा के लिए एक और कार्यकाल दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “सीएम योगी आदित्यनाथ के तहत, यूपी के लोगों ने परिवर्तन देखा है। भ्रष्टाचार के उन्मूलन के साथ-साथ महिलाओं की सुरक्षा प्राथमिकता बन गई है और हम यूके में भारतीय प्रवासी बेहद खुश हैं और मौजूदा सीएम योगी आदित्यनाथ पर अपना विश्वास रखते हैं।”

आयोजकों ने कहा, “हम लोग उत्तर प्रदेश में रह रहे परिवार को सीधा मैसेज देना चाहते हैं कि यूपी के विकास के लिए योगी आदित्यनाथ का मुख्यमंत्री बनना बहुत जरूरी है। नई कानून-व्यवस्था स्थापित करके सीएम योगी ने 2017 से क्राइम को पूरी तरह रोक दिया है। उन्होंने इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार करके राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को काफी प्रभावित किया है। इससे रोजगार के भी कई अवसर उत्पन्न हुए हैं और इसका सीधा असर उत्तर प्रदेश के आम नागरिकों पर भी पड़ा है।”

एक ही परिवार करता था भारत पर राज

प्रवासियों ने उल्लेख किया कि 1947 में आजादी के बाद से भारत की राजनीति एक परिवार के इर्द-गिर्द ही घूम रही थी। गाँधी परिवार का ही सदस्य इस देश पर राज करता आया है। किसी ने भी इस पर सवाल नहीं उठाए, लेकिन 2014 के बाद से ऐसा नहीं हो रहा है। 2014 में ही एक ऐसी लहर खड़ी हुई जिसने भारत की राजनीति से परिवार की सत्ता को उखाड़ फेंका। आयोजकों ने कहा कि पीएम मोदी के अथक प्रयास से ही एक नए भारत का जन्म हुआ है। भ्रष्टाचार में डूबी भारत की राजनीति अब एक नई उम्मीद बन गई है, जहाँ अब भ्रष्टाचार के लिए कोई जगह नहीं है। साथ ही पीएम ने अपनी पौराणिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपराओं को फिर से स्थापित करने के लिए प्रेरित किया है।

गौरतलब है कि उउत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव (UP Assembly Election) के पाँच चरण पूरे हो गए हैं। दो तिहाई से अधिक सीटों पर मतदान की प्रक्रिया को पूरा करा लिया गया है। आखिरी दो चरण का चुनाव होना है और फिर 10 मार्च को मतगणना होगी।

रूस-यूक्रेन युद्ध में तीसरे देश की एंट्री: पुतिन के समर्थन में ये देश भेजेगा अपनी सेना, परमाणु हथियार भी करेगा तैनात

यूक्रेन-रूस युद्ध के बीच बेलारूस का एक बड़ा कदम सामने आया है। अमेरिकी खुफिया एजेंसी के अधिकरियों ने जहाँ दावा किया है कि हो सकता है रूस की कार्रवाई को समर्थन देते हुए बेलारूस यूक्रेन के विरुद्ध अपने सैनिक भी सीमा पर भेजे। वहीं खुद बेलारूस ने यह जानकारी दे दी है कि उन्होंने रविवार को संवैधानिक जनमत संग्रह करके अपने गैर परमाणु स्टेटस को खत्म कर दिया है। 

मालूम हो कि बेलारूस का इतना बड़ा फैसला उस समय सामने आया है जब रूस ने अपनी परमाणु डेटरेंट फोर्स को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए। घटनाक्रमों से साफ हो रहा है कि बेलारूस इस पूरे विवाद में रूस के साथ है वो भी तब जब देश के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको को खुद फ्रांस के राष्ट्रपति ने फोन करके कहा था कि वो किसी कीमत पर रूस की मदद न करें।

इसके अलावा ये निर्णय मॉस्को और कीव के प्रतिनिधि मंडल की बेलारूस में होने वाली मुलाकात से ठीक पहले आया है। समाचार एजेंसी आईएएनएस ने भी यूक्रेन के खुफिया सूत्रों के हवाले से कहा कि बेलारूस रूस के आक्रमण में रूसियों को अपने क्षेत्र का उपयोग करने की अनुमति देने के साथ-साथ उन्हें यूक्रेन में सीमा पार करने की अनुमति देने के अलावा ‘शायद सीधे भाग’ लेने के लिए तैयार है।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले खबर आई थी कि बेलारूस के राष्ट्रपति के प्रयासों के चलते रूस और यूक्रेन के प्रतिनिधि के दूसरे से मिलकर बात करने को तैयार हुए। लेकिन यूक्रेन राष्ट्रपति जेलेंसकी की ओर से ये कहा गया था कि वो उस जमीन पर कोई बात नहीं करेंगे जहाँ से उनके ऊपर मिसाइलें दागी जा रही हैं। इसके बाद मुलाकात की जगह बेलारूस तय हुई।

बता दें कि रूस-यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध का आज 5वाँ दिन हैं। रूसी सेना लगातार यूक्रेन में अपना नियंत्रण बनाने की कोशिश कर रही हैं। इस बीच यूक्रेन की ओर से दावा सामने आया है कि बेलारूस के पेराट्रूपर्स को यूक्रेन के खिलाफ तैनात किया गया है। कहा जा रहा है कि उन पेराट्रूपर्स को Ilyushin Il-76 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट से भेजा जा रहा है। ये दावा न्यूज वेबसाइट Kyiv Independent से किया गया है।

TRS नेता साजिद खान ने नाबालिग लड़की का किया बलात्कार, POCSO के तहत दर्ज हुआ मामला: प्रोग्राम के बहाने ले गया था होटल में

तेलंगाना में TRS नेता साजिद खान पर एक नाबालिग लड़की से रेप का आरोप लगा है। पुलिस ने साजिद खान के खिलाफ पॉक्सो (POCSO) एक्ट में केस दर्ज कर लिया है। पीड़िता की उम्र 15 साल है। आरोपित फरार है। इस घटना में साजिद खान के 2 सहयोगी पुलिस हिरासत में हैं। दुष्कर्म में 1 महिला को भी सहयोगी बताया जा रहा है। इस घटना का खुलासा शनिवार (27 फरवरी, 2022) को हुआ है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आरोपित साजिद खान निर्मल जिले में एक नगरपालिका परिषद का उपाध्यक्ष है। इस घटना में शामिल आरोपित महिला नाबालिग पीड़िता को ले कर हैदराबाद गई थी। वहाँ ले जाने के पीछे एक प्रोग्राम का बहाना बनाया गया था। इस दौरान पीड़िता को हैदराबाद के एक होटल में रखा गया था। यहाँ पर इस अपराध को अंजाम दिया गया। पीड़िता कक्षा 8 की छात्रा बताई जा रही है।

इस घटना की पुलिस को जानकारी बाल कल्याण समिति ने दी है। मामले का खुलासा तब हुआ जब पीड़िता की तबियत खराब हुई। इस घटना में पुलिस ने पॉक्सो एक्ट के अलावा धारा 376 में भी केस दर्ज किया है। आरोपितों में एक कार ड्राइवर भी शामिल है। निर्मल जिले के SP प्रवीण कुमार के मुताबिक आरोपितों को जल्द गिरफ्तार करने के लिए पुलिस की 4 टीमों का गठन किया गया है।

मुस्लिम लड़ाकों के खिलाफ सूअर की चर्बी वाली गोलियाँ, यूक्रेन की सेना ने शेयर किया वीडियो: बोला ट्विटर- नियम का उल्लंघन, पर हटाएँगे नहीं

यूक्रेन के नेशनल गार्ड ने अपने ट्विटर अकाउंट पर एक वीडियो पोस्ट किया जिसमें दावा किया गया है कि नेशनल गार्ड के अज़ोव लड़ाकों ने रूसी पक्ष से लड़ने वाले चेचन बलों के खिलाफ इस्तेमाल होने वाली अपनी गोलियों को सुअर की चर्बी में डुबोया है। जो ट्वीट किया गया है उसमें लिखा है, “नेशनल गार्ड के आज़ोव सेनानियों ने कादिरोव orcs? के खिलाफ गोलियों को चर्बी से ग्रीस किया।”

यह ट्वीट रविवार (27 फरवरी) की शाम 06:50 बजे किया गया।

रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध के बीच, कई समाचार आउटलेट्स ने बताया है कि चेचन लड़ाकों को भी तैनात किया गया है।

चेचन लड़ाके कौन हैं?

चेचन्या जॉर्जिया के उत्तर में स्थित एक रूसी गणराज्य है। चेचन सेना चेचेन्या की रक्षा के लिए तैनात सैन्य बल हैं। चेचन्या एक स्वतंत्र रिपब्लिक नहीं है बल्कि रूसी कानूनों और विनियमों के अधीन है। इनमें अधिकतर मुस्लिम हैं।

रमजान कादिरोव चेचन गणराज्य के प्रमुख हैं। कादिरोव खुद को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के पैदल सैनिक के रूप में बताते हैं, और कहा जाता है कि उन्होंने रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे संघर्ष में अपने लड़ाकों को भेजा है।

चेचन बलों को दुनिया में सबसे हिंसक और क्रूर सैनिकों में से एक माना जाता है, जिसमें कई रिपोर्टों का दावा है कि उनमें से कई आईएसआईएस के सदस्य थे। कई स्रोतों ने यह भी संकेत दिया है कि वे यूक्रेन में अपनी तैनाती के बाद कीव की ओर बढ़ रहे हैं।

कई रिपोर्टों के अनुसार, उन्हें यूक्रेनी सेनाओं के भयंकर विरोध का सामना करना पड़ा है, और उनमें से कई मारे गए, जिनमें उनके जनरल मैगोमेद तुशायेव भी शामिल थे। हालाँकि, दोनों पक्षों की परस्पर विरोधी खबरों के बीच अभी इस बात की पुष्टि नहीं हो पाई है।

ट्विटर ने वीडियो पर लगाया लेवल लेकिन हटाया नहीं

यूक्रेन के नेशनल गार्ड्स ने गोलियों पर सुअर की चर्बी लगाते हुए एक वीडियो अपलोड किया क्योंकि चेचन सैनिक मुसलमान हैं और सुअर को इस्लाम में हराम माना जाता है।

हालाँकि, ट्विटर के नियमों को खंगालने पर यह पता चलता है कि ऐसे मामले में ट्विटर का नियम क्या कहता है? पर इसे जनहित का मुद्दा बताते हुए, एक टैग के साथ वीडियो को डिलीट नहीं किया गया है। इसके अपवाद क्या हैं। इस विषय में नियम बताते हैं। “हम कंटेंट को सार्वजनिक हित में मानते हैं यदि यह सीधे सार्वजनिक चिंता के मामले को समझने या चर्चा करने में योगदान देता है।”

“वर्तमान में, हम एक महत्वपूर्ण प्रकार की सार्वजनिक-हित सामग्री के अपवादों को एक सीमा तक ही लिमिट करते हैं। यदि वे निर्वाचित और सरकारी अधिकारियों के ट्वीट्स हों- जो उनके कार्यों और बयानों को जानने और चर्चा करने में सक्षम होने में महत्वपूर्ण के कारण पब्लिक इंटरेस्ट को देखते हुए यह जोड़ा गया है।

ऐसे में, ट्विटर, कई दुर्लभ मामलों में, किसी निर्वाचित या राज्य के व्यक्ति के ट्वीट को बनाए रखने का विकल्प चुन सकता है जिसे सामान्य रूप से हटा दिया जाना चाहिए। इसके बजाय, वे इसे एक सूचना देकर बचाव करते हैं। जो नियमों के उल्लंघन के बारे में विवरण प्रदान करती है और पाठकों को ऐसे ट्वीट के बारे में सूचित करती है।

इस मुद्दे पर ट्विटर के परस्पर विरोधी रुख को कई लोगों ने सवाल खड़े किए हैं।

नेशनल गार्ड की अज़ोव इकाई नाज़ी समर्थक है?

यहाँ यह उल्लेखनीय है कि यूक्रेनी नेशनल गार्ड की अज़ोव बटालियन एक नव-नाज़ी इकाई है और वे अक्सर अपने नाज़ी झुकाव को खुले तौर पर दिखाते भी हैं।